Love

रिश्ते जीने का संबल, जीने का सबब, एक सहारा या यूं कहें कि एक साथ… रिश्तों को शब्दों के दायरे में परिभाषित नहींकिया जा सकता, उन्हें तो सिर्फ़ भावनाओं में महसूस किया जा सकता है. लेकिन बात आजकल के रिश्तों की करें तो उनमेंना भावनायें होती हैं और ना ही ताउम्र साथ निभाने का माद्दा, क्योंकि आज रिश्ते ज़रूरतों और स्वार्थ पर निर्भर हो चुके हैं. यही वजह है कि रिश्तों में बेहिसाब बोझ बढ़ते जा रहे हैं और हर रिश्ता बोझिल होता जा रहा है. ऐसे में इनके करणों को जानना बेहद ज़रूरी है.

सबसे पहले जानते हैं रिश्तों में आख़िर बोझ क्यों है? 

  • रिश्तों में बोझ होने की सबसे बड़ी वजह है कि रिश्ते अब दिल से नहीं जुड़े हुए हैं.
  • रिश्ते मजबूरी बन चुके हैं. 
  • रिश्तों में स्वार्थ सबसे ऊपर हो चुका है.
  • रिश्ते भावनाविहीन हो रहे हैं.
  • मशीनी हो रहे हैं एहसास.
  • संवेदना ग़ायब हो रही है.
  • हम से ज़्यादा मैं की सोच हावी हो रही है.
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किस तरह के बोझ हैं और क्यों बोझिल हो गए हैं रिश्ते? 

  • ज़िम्मेदारी का बोझ: लोग ज़िम्मेदारियों से डरने लगे हैं और इन्हें निभाने से कतराते हैं. इन्हें लेने से बचते हैं. हर किसीको लगता है कि वो अपनी ज़िम्मेदारी किसी और को दे दे और खुद सिर्फ़ अपने लिए जिए. जहां इस तरह की सोचपनपने लगती है वहां रिश्ते बोझिल ही लगते हैं.
  • कमिटमेंट का बोझ: लोग कमिटमेंट से बचना चाहते हैं क्योंकि वो खुद नहीं जानते कि इन रिश्तों को वो कब तकनिभा सकेंगे और ना जाने कब वो रस्ता बदल दें. लोगों का स्वार्थ इस हद तक बढ़ चुका है कि वो वही रिश्ते निभानाचाहते हैं जिन रिश्तों से उन्हें किसी तरह का कोई फायदा हो. अगर पार्टनर से कोई फायदा होता नज़र नहीं आता तोवो उसको छोड़ दूसरे का दामन थामने से भी नहीं कतराते. इसी तरह अगर माता-पिता, भाई-बहन से भी लगाव नहीं हैतो वो भी उन्हें बोझ लगने लगते हैं और वो उनसे भी दूरी बनाने लगते हैं.
  • पैसों का बोझ: आर्थिक तंगी भी रिश्तों में बोझ बढ़ाती है और इस वजह से रिश्ते और बोझिल लगने लगते हैं. पैसासबकी ज़रूरत है और पैसों की तंगी से रिश्तों में भी मनमुटाव होने लगते हैं. तनाव बढ़ता है और सारे रिश्ते बोझिल हीलगने लगते हैं.
  • करियर का बोझ: कॉम्पटीशन के इस दौर में करियर को ऊपर ले जाना, वर्क और होम लाइफ को बैलेंस करनाआसान नहीं. जो लोग ऐसा नहीं कर पाते उनके रिश्तों में बोझ बढ़ता जाता है.
  • समाजिक दबाव का बोझ: हम जिस समाज में रहते हैं वहां समाज और आस पास के लोगों के बारे में कुछ ज़्यादा हीसोचा जाता है. ऐसे में हम चाहकर भी अपने मन का नहीं कर पाते क्योंकि हर बात और हर निर्णय पर हमको यहीसमझाया जाता है कि हमारे समाज में ऐसा नहीं चलता या फिर लोग क्या कहेंगे. इस तरह के माहौल में ज़ाहिर हैदम घुटता है और हर बात बोझिल ही लगती है.
  • स्टेटस का बोझ: आज की तारीख़ में कुछ हो ना हो स्टेटस होना बहुत ज़रूरी है. और जबसे सोशल मीडिया कीहमारी लाइफ़ में एंट्री हुई है तबसे तो यह बोझ बढ़ता ही जा रहा है. हर कोई इसी होड़ में रहता है कि हमारी लाइफ़कितनी कूल है, दूसरों को दिखाने के लिए अब हर चीज़ होती है. ब्रांडेड मोबाइल से लेकर हर बात का सेलिब्रेशनजैसे बस दिखावे की चीज़ ही बनकर रह गई. हर वक़्त खुश और हैपनिंग लाइफ़ का टैग लेकर घूमना आज कीसबसे बड़ी ज़रूरत बन गई. ये तमाम चीज़ें रियल लाइफ़ रिश्तों को खोखला बनाती हैं और आप उन्हें भूलकरडिजिटल रिश्तों की नक़ली दुनिया में खोते चले जाते हैं.
  • खुश दिखने का बोझ: आप खुश हों या ना हों लेकिन आज की तारीख़ में आपका खुश दिखना ज़रूरी है, क्योंकिकिसी को फ़ुर्सत भी नहीं आपके दुखों को जानने और समझने की. ऐसे में मन ही मन में घुटने के बाद भी आपको ढोंगकरना पड़ता है कि आप की ज़िंदगी बेहद हसीन है.
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रिश्तों में बोझ को बढ़ाते हैं यह पहलू

  • पार्टनर या अन्य सदस्य जब साथ ना दें और सारी ज़िम्मेदारी किसी एक पर आ जाए.
  • ज़िम्मेदारी निभाने के बावजूद तारीफ़ या सहयोग ना मिले.
  • अपना दांव कुछ भूलकर भी अपने रिश्तों को सब कुछ देने के बाद भी किसी का सहयोग ना मिले.
  • अर्थिक रूप से आत्मनिर्भर ना होने पर भी बहुत कुछ बर्दाश्त करना पड़ता है जिससे रिश्तों में बोझ बढ़ता है.
  • अपनों से ही सम्मान ना मिलने पर भी बहुत कुछ बदल जाता है.
  • आपको निर्णय लेने की आज़ादी ना हो या आपकी राय को अहमियत ही ना दी जाए तब भी बोझिल लगता है हररिश्ता.
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क्या किया जाए कि रिश्ते बोझिल ना लगें

  • बात करें: कम्यूनिकेट करना किसी भी रिश्ते के लिए सबसे ज़रूरी और सबसे अहम् है. बात ना करना किसी भीसमस्या का समाधान नहीं. इससे परेशानी और बढ़ेगी. बेहतर होगा कि आपसी बात चीत से मन का बोझ हल्का करें, अपनी परेशानियों को अपनो से साझा करें. उनकी परेशानियों को जाने. 
  • स्वार्थी ना बनें: रिश्तों में सिर्फ़ अपने बारे में नहीं सोचा जाता, रिश्तों का मतलब ही है एकजुट होकर सबके लिएसोचना. स्वार्थ की भावना भले ही आपको कुछ समय के लिए ख़ुशी दे देगी लेकिन आगे चलकर आप एकदम अकेलेपड़ जायेंगे. स्वार्थ छोड़कर देखें, आपको अपने रिश्ते ही इतने प्यारे लगेंगे कि बोझ अपने आप हल्का लगने लगेगा.
  • शेयर करें: शेयरिंग की भावना से रिश्ते गहरे और मज़बूत बनते हैं. सुख-दुःख हो, कामयाबी या असफलता सब कुछशेयर करें. इससे आपकी ख़ुशियाँ और हौसला दोनों बढ़ेंगे और रिश्ते बोझ कम संबल अधिक लगेंगे.
  • जिम्मेदारियाँ साझा करें: ज़िम्मेदारियों से भागने की बजाए उन्हें साझा करें. रिश्तों में सबकी जिम्मेदारियाँ बनती हैंऔर जो कुछ भी निभाना होता है मिलकर ही बेहतर तरीक़े से निभाया जा सकता है. सामने से खुद आगे बढ़कर कहेंकि यह काम मुझ पर छोड़ दें, फिर देखिए रिश्तों से बोझ अपने आप कम होगा और रिश्ते बोझिल नहीं प्यारे लगेंगे.
  • काम बांट लें: घर या बाहर दोनों जगह का काम बांट लें. सब मिलकर करेंगे तो ज़िंदगी और रिश्ते दोनों आसान लगनेलगेंगे. जो काम आप बेहतर कर पायें वो आप लें और दूसरों को भी उनकी क्षमता के अनुसार काम दें.
  • आर्थिक ज़िम्मेदारी भी बांटे: रिश्तों में ज़रूरी है कि आर्थिक ज़िम्मेदारियों का भी बंटवारा हो. आप अगर यह सोचरखेंगे कि मैं अपने पैसे बचा लूं और सामने वाला ही अकेला खर्च करे तो यह सही नहीं. आपको कुछ ख़र्चों कीज़िम्मेदारी खुद ब खुद ख़ुशी ख़ुशी लेनी चाहिए. इससे अपनापन बढ़ेगा और रिश्ते बोझ नहीं लगेंगे.
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  • दिल को खोल लें: दिल को खुला रखें ताकि ज़िंदगी जी खोल के जी सकें. अगर आपको किसी चीज़ की कमी भीहोगी तो अपनों के साथ वो कमी महसूस नहीं होगी. चाहे पैसों की कमी हो या सुविधाओं की अगर अपने साथ हैं तोज़िंदगी की राह आसान हो जाती है. अगर आप अपने रिश्तों का ख़याल रखेंगे तो बुरे समय में रिश्ते आपका ख़यालरखेंगे.
  • अपनी सोच बदलें, फ़ायदे-नुक़सान के तराज़ू में रिश्तों को ना तोलें: रिश्तों में कभी भी फ़ायदा या नुक़सान की सोचके साथ आगे नहीं बढ़ा जा सकता. रिश्तों को सिर्फ़ प्यार से ही सींचा जा सकता है वर्ना हर रिश्ता बोझ ही लगेगा. किसने क्या किया इस सोच से ऊपर उठकर यह सोचें कि अपनों को कैसे और क़रीब लाया जाए.
  • चीट ना करें, सबको सम्मान दें: सम्मान देंगे तो सम्मान मिलेगा. चीटिंग की रिश्तों में कोई जगह नहीं होती. पार्टनर कोधोखा ना दें. घर में भी सबकी राय को महत्व दें. सबसे राय लें. किसी को कम ना आंके. कई बार एक बच्चा भी बड़ीसे बड़ी समस्या का आसान रास्ता सुझा देता है.
  • ईगो ना रखें: अहंकार हर रिश्ते को मिटा देता है. अपनों से भला कैसा ईगो? खुद को सर्वश्रेष्ठ और दूसरों को मूर्खसमझने की गलती ना करें. आप अकेले रहेंगे तो बोझ बढ़ेगा, बेहतर है सबको साथ लेकर चलें. नकारात्मक सोचऔर भावनाओं को त्याग दें.

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नज़रें मुस्कुराने लगती हैं.. धड़कनें गुनगुनाने लगती हैं.. एकतरफ़ा ही सही मुहब्बत की महफ़िल होती है उस तन्हा दिल में…
यक़ीनन एकतरफ़ा प्यार में एक तरफ़ ही सही, प्यार होता है बेशुमार. प्यार, मीठा एहसास.. जीने का सबब.. इंसान को बहुत ख़ूबसूरत बना देता है प्यार. लेकिन जब एकतरफ़ा प्यार की बात होती है, तो स्थितियां बदल जाती हैं. यहां पर दोनों तरफ़ प्यार में बराबरी की बात नहीं रहती है. यह एकतरफ़ा रहता है मतलब एक ही शख़्स जो शिद्दत से चाह रहा है. कई मामलों में इस ज़ज्बात का पता होता है, तो कई बार अगला इससे अनजान भी रहता है. बड़े ही बेदर्दी से टूटते हैं वो दिल, जो एकतरफ़ा प्यार से जुड़ते हैं.

इस तरह के प्यार-एहसास के कई साइड इफेक्ट्स भी देखने को मिलते हैं. इस पर एक नज़र डालते हैं-

  • दिल ये मानने को तैयार ही नहीं होता कि वह मुझे नहीं चाहता/चाहती है. हर पल एक उम्मीद बनी रहती है, जो बाद में नाउम्मीद हो जाती है और निराशा घेरने लगती है.
  • तनाव और अवसाद धीरे-धीरे पैर पसारने लगते हैं. कई बार डिप्रेशन इस कदर बढ़ जाता है कि प्रेम में हारा हुआ इंसान जाने-अनजाने में ग़लत कदम उठाने की तरफ़ भी बढ़ जाता है. ख़ुद का अहित करने से भी नहीं हिचकते.
  • अक्सर टूटे दिलवाले लोग नशे में ग़म को भूलाने की कोशिश करने लगते हैं. शराब, सिगरेट, ड्रग्स आदि लेना शुरू कर देते हैं. ताकि ख़ुद को भुलाए रखें.. उसका ख़्याल ना आए..

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  • एकतरफ़ा प्यार आपके आत्मविश्‍वास पर चोट करता है और उसे बुरी तरह से प्रभावित करता है. जब आप अपने प्यार को नहीं पाते हैं या वह आपको नहीं प्यार करता है.. इस सोच के कारण कहीं-न-कहीं आपका कॉन्फिडेंस लेवल गिरने लगता है.
  • अक्सर ऐसा भी होता है कि उसे पाने की कोशिश में अपने आत्मसम्मान को भी ताक पर रख देते हैं, जिससे आपका स्वाभिमान भी प्रभावित होने लगता है.
  • उपेक्षाओं और अपेक्षाओं के बीच दिल और मन झूलने लगता है. अपने प्यार की उपेक्षा से कहीं-न-कहीं हीनभावना भी पनपने लगती है.
  • प्यार को पाने की कोशिशें असफल होने के कारण कई बार ख़ुद को कम आंकने, नाक़ाबिल समझने की सोच जन्म लेने लगती है.
  • ख़ुदा ना खास्ता जिसे आप चाह रहे और वो किसी और को प्रेम कर रहा या रही है, तब कई बार स्तिथि हिंसक भी हो जाती है. अपने प्यार को पाने का जुनून अक्सर ग़लत भी करवा देता है.
  • अपनों में रहकर भी बेगाने जैसी स्थिति होती है. कुछ भी अच्छा नहीं लगता. अकेले रहने का मन करने लगता है.
  • ज़िंदगी के प्रति बेरुखी-सी हो जाती है. सब कुछ सुना और अधूरा-सा लगने लगता है.
  • किसी काम में मन नहीं लगता. इच्छाएं और ख़ुशी जैसे गुम-सी हो जाती है.
  • बार-बार उस शख़्स का ख़्याल दिलोंदिमाग़ पर हावी रहता है, जिससे कोई भी काम ठीक से नहीं हो पाता. * चाहे ऑफिस हो या बिज़नेस उसे लेकर उतनी गंभीरता नहीं रहती, क्योंकि मन तो अपने प्यार को पाने के जोड़-तोड़ में लगा रहता है.
  • हर घड़ी प्यार के एहसास की लहरें उठती रहती हैं, जिससे किसी भी काम में एकाग्र भी नहीं हो पाते.
  • वैसे इन मामलों में अपवाद भी देखने को मिले हैं यानी कोई टूटकर भी निखर जाता है, तो कोई टूटकर बिखर जाता है.
  • कई बार अपने इस एकतरफ़ा प्यार को प्रेरणा या आदर्श मानते हुए कुछ कामयाबी की बुलंदियों तक पहुंच जाते हैं, तो कुछ असफल होकर दुखी और ग़मगीन ही बने रहते हैं.

सिनेमा में एकतरफ़ा प्यार का दर्द
फिल्मों में भी एकतरफ़ा प्यार को काफ़ी दिखाया गया है. इस फ़ेहरिस्त में देवदास फिल्म को हमेशा याद किया जाता है. देवदास फिल्म में पारो और चंद्रमुखी के बीच देवदास के प्यार को लेकर भले ही खींचतान हो, लेकिन चंद्रमुखी का एकतरफ़ा प्यार इतिहास बन जाता है. लोगों को हमेशा उसके प्रति सहानुभूति से भर देता है. फिल्म ऐ दिल है मुश्किल तो एकतरफ़ा प्यार पर ही आधारित थी. रणबीर कपूर, अनुष्का शर्मा और ऐश्वर्या राय बच्चन की उम्दा अदाकारी फिल्म की जान थी. इसमें एकतरफ़ा प्यार के दर्द, तड़प, अनकहे एहसास, सोच को बख़ूबी दर्शाया गया था. इसके अलावा मुकद्दर का सिकंदर, प्यार तूने क्या किया, मस्ती जैसी फिल्मों में भी एकतरफ़ा प्यार के एहसास को दिखाने की बेहतरीन कोशिश की गई है.

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वैसे देखा जाए तो प्यार में प्रभाव, अभाव, नफ़ा-नुक़सान नहीं होता है. प्यार तो बस प्यार होता है. अब इस एहसास को आप कैसे जीते हैं, कैसे अपनाते हैं, सब कुछ आप पर निर्भर करता है. चाहे तो अपने एकतरफ़ा प्यार को अपना जुनून बनाकर आगे बढ़ जाए या फिर निराशा के गर्त में चले जाएं. ये सब कुछ व्यक्ति विशेष पर निर्भर करता है. तो क्यों ना इसके साइड इफेक्ट्स को पाॅजिटिवनेस में बदलकर मिसाल कायम कर बेमिसाल बना जाए.

– ऊषा गुप्ता

कोरोना वायरस के चलते हुए लॉकडाउन ने सभी को संयुक्त परिवार के महत्व को अच्छी तरह से समझा दिया है. साथ ही यह एहसास कराया कि ऐसी घड़ी में परिवार में रहना कितना मायने रखता है. आइए विभिन्न लोगों की इस बारे में तर्कपूर्ण विचारों को जानते हैं. साथ ही संयुक्त परिवार के महत्व को जानते-समझते हैं.

नौकरी, व्यापार और भविष्य के सुनहरे सपने लिए युवा बाहर जाने लगे और परिवार एकल होता चला गया. परिवार के नाम पर पति-पत्नी और एक या दो बच्चे रह गए. दादा-दादी, नाना-नानी का सुख होता क्या है बच्चे जान ही नहीं पाते हैं. दशकों पहले शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसा नहीं था. पहले लोग संयुक्त परिवार की तरह रहते थे. लेकिन धीरे-धीरे यह घटकर एकल परिवार में तब्दील होता चला गया.
पिछले काफ़ी महीनों से कोरोना महामारी के चलते संक्रमण का डर एकल परिवारों को अपनों के पास खींचने लगा है. अब लोग एक ही छत के नीचे पूरे परिवारसहित हंसी-ख़ुशी रह रहे हैं और एक-दूसरे के काम में हाथ बंटा रहे हैं. चाहे बच्चों की देखभाल हो या फिर रसोई का काम सब मिलकर कर रहे हैं. पुरुष बाहर के काम में एक-दूसरे का सहयोग कर रहे हैं.
सहयोग के अटूट बंधन में बंधे रिश्तों की मज़बूत डोर को ही तो परिवार कहते हैं…
कहा भी गया है परिवार से बड़ा कोई घन नहीं होता. पिता से बड़ा कोई सलाहकार नहीं होता. मां के आंचल से बड़ी कोई दुनिया नहीं होती. भाई से अच्छा कोई दोस्त नहीं होता और बहन से बड़ा कोई शुभचिंतक नहीं होता. इसलिए परिवार के बिना जीवन की कल्पना ही कठिन है.
कोरोना वायरस के संक्रमण के बचाव के लिए हुए लॉकडाउन ने संयुक्त परिवारों की अवधारणा को तो मज़बूती दी ही है, परिवार के सदस्यों के बीच की दूरियों को भी कम कर दिया है. कई परिवार इस लॉकडाउन का इस्तेमाल क्वालिटी टाइम बिताने और आपसी रिश्ते मज़बूत करने में कर रहे हैं.

लॉकडाउन ने बढ़ा दी परिवार की एकता
पारेख परिवार के सबसे बड़े सदस्य पारसमल और ज्योति पारेख का कहना है कि लॉकडाउन के ये दिन ज़िंदगी में हमेशा याद रहेंगे. स्कूल-कॉलेज बंद होने से बच्चे घर में ही हैं. घर में फ़रमाइश अब प्राइवेसी की नहीं, बल्कि नए-नए पकवानों की होती है. पोता-पोती घर की सफ़ाई से लेकर खाना बनाने तक में साथ रहते हैं. छोटे हों या बड़े, घर में सभी को एक साथ बैठकर गेम्स खेलना ही होता है. बेटी दूर रहती है, तो ऑनलाइन उसको भी जोड़ लेते हैं. दरअसल, इस लॉकडाउन ने हमारे परिवार की एकता बढ़ाई है.
वहीं घर के छोटे बच्चों का कहना है कि दादा-दादी से हमें परिवार की पुरानी परम्पराओं और कहानियों को जानने का मौक़ा मिल रहा है.
हनुमंत निवासी दीपिका रुणवाल का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान अपने घरों में रहने से हमें प्रतिबिंबित होने का समय मिला है. कोरोना जैसी महामारी ने परिवारों में जुड़ाव पैदा करके बचपन के उन दिनों को फिर से याद करना शुरू कर दिया. हमने अपने रिश्तों को फिर से जोड़ा और जो हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं. सही कहा जाए, तो कोरोना ने परिवारों को जोड़ने में अहम भूमिका अदा की है.
वहीं इन्दु व्यास का कहना है कि लॉकडाउन कई परिवारों के लिए प्रशिक्षण काल रहा. इस दौरान हमें परिवार के साथ रहने का मौक़ा मिला. परिवार के साथ सामंजस्य बढ़ाने का सुअवसर मिला. बेवजह के ख़र्चों पर भी रोक लगा. इस दौरान जाना कि कम पैसों में भी घर चलाया जा सकता है.
“मुझे हमेशा से किताबें पढ़ना बहुत पसंद है. लेकिन ऑफिस की व्यस्तता के कारण रीडिंग को इतना टाइम नहीं दे पाता था. लॉकडाउन ने मुझे एक बार फिर मेरी हॉबी से जोड़ दिया है. मैं हर दिन एक घंटे कुछ-न-कुछ नया पढ़ता हूं. मेरे बुक कलेक्शन में 100 से ज़्यादा किताबें हैं. हालांकि, किताबों के साथ समय बिताना अच्छा तो लग रहा है, लेकिन बहुत-सी ऐसी चीज़ें हैं, जिसे मिस भी कर रहा हूं.” यह कहना है उपासना ग्रुप के चेयरमैन ओम माहेश्वरी का.
पहले शाम की चाय का आनंद परिवार के साथ नहीं उठा पाता था, लेकिन लॉकडाउन की स्थिति में पूरा समय घर पर ही हूं, तो परिवार के साथ समय बिताने का मौक़ा मिल रहा है. बच्चों के साथ चेस और कैरम खेलता हूं. कभी-कभी बिलियर्ड्स भी खेलता हूं. यह ज़रूर कहूंगा कि कोरोना वायरस ने सभी की ज़िंदगी को बदल दिया है. अब लोग पहले से ज़्यादा साफ़-सफ़ाई और हेल्दी लाइफस्टाइल को अपनी आदत बनाएंगे.

संयुक्त परिवार में ख़ुशियां आपार, तो एकल परिवारों में उदासी का आलम…
कोरोना वायरस के चलते लागू लॉकडाउन में संयुक्त परिवारों की अवधारणा को मज़बूत किया है. इन लॉकडाउन में लोगों के अनुभव जानें, तो पता चलता है कि इस अवधि में जहां संयुक्त परिवारों में बिना किसी परेशानी के ख़ुशियों का माहौल रहा, वहीं एकल परिवारों में उदासी छाई रही. इन परिवारों में एक-एक दिन गुज़ारना मुश्किल रहा है.
भारतीय संस्कृति में संयुक्त परिवारों की महत्ता को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है. लेकिन आपाधापीभरी ज़िंदगी के चलते संयुक्त परिवार बिखरते चले गए. इस बात पर बात होती रही, पर किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया. आज जब लॉकडाउन के चलते घरों से निकलना बंद हो गया है, तो ऐसे समय में अब लोगों को परिवार का महत्व समझ में आने लगा हैं.
16 परिवारों का सदस्य सराफ़ परिवार का कहना है कि लॉकडाउन की अवधि में भी पूरे परिवार में ख़ुशियों का माहौल है. पुराने क़िस्से और खेलों से रोज़ महफ़िल रौशन होती है. वे कहते हैं संयुक्त परिवार का फ़ायदा यह है कि तालाबंदी में भी किसी चीज़ की कोई कमी नहीं हो रही.
लेकिन वहीं एकल परिवारों की मुश्किलें इन दिनों बढ़ी हैं. सिरोंज के रहनेवाले रधुवंशी के परिवार में क़रीब 29 लोग हैं, लेकिन वे दूसरे शहर में पत्नी और दो बच्चे के साथ रह रहे हैं. उनका कहना है कि लॉकडाउन के दौरान समय काटना मुश्किल हो गया है. शादी के 12 साल के दौरान उन्होंने कभी राशन और सब्ज़ी लाने का काम नहीं किया, लेकिन आज करना पड़ रहा है. बच्चे भी मोबाइल फोन एडिक्ट होते जा रहे हैं. यही हालत शिक्षक अनिल शर्मा की हो गई है. कहते हैं कि इस समय संयुक्त परिवार का महत्व समझ में आ रहा है.
हाल ही में फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप ने वीडियो कॉल कर दिए अपने इंटरव्यू में बताया कि कोई काम न होने के चलते एक दिन उन्होंने अपनी बेटी के साथ बैठकर क़रीब 6 घंटे तक गप्पें मारीं. उनके मुताबिक़ बीते 15 सालों में ऐसा पहली बार हुआ था. हालांकि कश्यप एक व्यस्त फिल्मकार हैं और उनकी बेटी भी भारत में नहीं रहती हैं, इसलिए उनके साथ ऐसा होना स्वाभाविक है. लेकिन जीवन की भागदौड़ में कई बार बेहद आम लोग भी अपने परिवार को पर्याप्त समय नहीं दे पाते हैं.
यह लॉकडाउन परिवार के साथ वक़्त बिताने का मौक़ा बन गया है. इसके अलावा, इस वक़्त पुराने दोस्तों और छूट चुके रिशतेदारों को याद करने और उनसे फोन पर बात या मैसेजिंग के ज़रिए संपर्क करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है.
एक ताजा सर्वे के मुताबिक़, 97 फ़ीसदी लोग लॉकडाउन में फैमिली के साथ रह रहे हैं. परिवार में 94 फ़ीसदी सदस्य एक साथ डिनर करते हैं, जिसमें सभी के बीच परिवार और दूसरे मामलों को लेकर खुलकर बातचीत होती है. 84 फ़ीसदी लॉकडाउन के दौरान ब्रेकफ़ास्ट और 90 फ़ीसदी परिवारों में लंच इकठ्ठा हो रहा है.
लोगों का मानना है कि इस समय क्वालिटी टाइम परिवारों को दिया जा रहा है. इस बीच परिवारों में आपसी मनमुटाव भी कम हुए हैं. घर में सभी लोग एक-दूसरे के काम में हाथ बंटा रहे हैं. कोरोना संक्रमण में सेनिटाइजर के प्रयोग को लेकर भी लोगों में अवेयरनेस है.

लॉकडाउन में दिखे ये शुभ संकेत
• आनेवाले दिनों में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे. इसके संकेत लॉकडाउन के शुरुआती दिनों में ही मिले थे.
• जब लोग घरों में बैठे थे, उन्हें पता चला कि शोर की जगह प्रकृति का संगीत बजता है. चिड़ियों की चहचहाहट सुबह ही नहीं, दिन भर सुनाई देती है.
• सबसे बड़ा असर हवा में दिखा. वाहनों ने न धुआं उगला, न फैक्ट्री की चिमनियों ने राख.
• उघोग नगरी सूरत, सिलवासा में यह 110 से घटकर 90 से भी कम रह गया है.
• दक्षिण गुजरात में समुद्री किनारे दूर तक नज़र आने लगी है.
यह सारे संकेत है कि हम चाहें तो अभी भी प्राकृतिक विरासत को बचा सकते हैं.

– मिनी सिंह

Joint Family

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“आई एम सॉरी” आप जितनी आसानी से ये शब्द अपने पार्टनर को कह देती हैं, क्या वो भी उतनी ही सजहता से आपसे माफ़ी मांग लेते हैं? शायद नहीं. कुछ अपवादों को छोड़ दें, तो आमतौर पर पुरुष अपनी ग़लती के लिए माफ़ी मांगना ख़ासकर पार्टनर से, अपनी तौहीन समझते हैं. उनके लिए ‘सॉरी’ शब्द बेहद मुश्किल होता है. आख़िर इसकी क्या वजह है? आइए, जानते हैं.

Guys Never Say Sorry

मेल ईगो
पुरुषों के माफ़ी मांगने से कतराने की सबसे बड़ी वजह है मेल ईगो यानी उनका अहंकार. इसी अहंकार की वजह से ये जानते हुए भी कि वो ग़लत हैं, पार्टनर से माफ़ी नहीं मांगतें. ऐसे लोगों के लिए उनका ग़ुरूर हमसफ़र की भावनाओं से ज़्यादा अहमियत रखता है. वो अपने पार्टनर का दिल तो दुखा सकते हैं लेकिन सॉरी बोलकर अपने मेल ईगो को हर्ट नहीं कर सकते. ज़्यादातर महिलाएं भी इस बात से सहमत हैं. एक मीडिया ग्रुप से जुड़ी मीनाक्षी कहती हैं “पुरुषों के माफ़ी न मांगने की एकमात्र वजह मेल ईगो ही है, उन्हें लगता है पत्नी से माफ़ी मांगने से उनका क़द छोटा हो जाएगा.” विशेषज्ञों की भी कुछ ऐसी ही राय है उनके मुताबिक “पुरुषों को लगता है माफ़ी मांगने से उनकी शान घट जाएगी.”

कमज़ोरी की निशानी
साइकोलॉजिस्ट डॉ. हरीश शेट्टी के मुताबिक “पुरुष माफ़ी मांगने को कमज़ोरी की निशानी समझते हैं. उन्हें लगता है कि अगर वो पत्नी से माफ़ी मांगेगे तो वो उन्हें कमज़ोर समझने लगेगी, उसे लगेगा कि पति परिवार की ज़िम्मेदारी उठाने के क़ाबिल नहीं है.” इसलिए माफ़ी मांगकर वो ख़ुद को पार्टनर की नज़रों में गिराना नहीं चाहतें.

मैं ग़लत नहीं हो सकता
पुरुषों का अपनी ग़लती न मानने वाला रवैया भी उन्हें माफ़ी मांगने से रोकता है. दरअसल, माफ़ी मांगने से उनकी ग़लती साबित हो जाएगी और पुरुष ख़ासतौर से किसी महिला के सामने कभी ग़लत साबित होना नहीं चाहतें. डॉ. शेट्टी भी इस बात से सहमत हैं, उनका कहना है “पुरुषों को लगता है कि वो जो कर रहे हैं वही सही है और उन्हें किसी को जवाब देने की ज़रूरत नहीं है.” एक प्रतिष्ठित मीडिया ग्रुप से जुड़ी शिवानी का कहना है कि “पढ़े-लिखे होने के बावजूद मेरे पति बहुत डॉमिनेटिंग हैं, अगर कभी उनसे कोई ग़लती हो जाए, तो सॉरी बोलना दो दूर की बात है, वो अपनी ग़लती मानते तक नहीं हैं.”

सॉरी बोलने की बजाय जताना
कुछ पुरुष सॉरी कहने की बजाय माफ़ी मांगने का दूसरा तरीक़ा अख़्तियार करते हैं, जैसे- पार्टनर को फूल, ज्वेलरी, चॉकलेट या कोई और गिफ़्ट देकर अपनी माफ़ी मांगने की भावना व्यक्त करते हैं. इतना ही नहीं, कई बार वो पार्टनर का ज़्यादा ख़्याल रखकर भी अपनी ये भावना ज़ाहिर करते हैं. दिलचस्प बात तो ये है कि महिलाओं को भी पुरुषों का बिना बोले माफ़ी मांगने का ये अंदाज़ पसंद आता है, बिना कहे ही वो उनकी भावनाओं को समझ जाती है.

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अस्वीकृति का डर
कुछ पुरुष पार्टनर द्वारा अस्वीकार किए जाने के डर से माफ़ी नहीं मांगते. उन्हें लगता है कि माफ़ी मांगने से कहीं कोई नकारात्मक स्थिति न उत्पन्न हो जाए, इसी डर से वो भावनाओं की उधेड़बुन में उलझे रहते हैं और तय नहीं कर पाते कि माफ़ी मांगू या नहीं? माफ़ी मांगने के बाद शायद हालात उनके पक्ष में न रहें. इसी डर से वो ये निश्चित नहीं कर पाते कि कब और कैसे पार्टनर को सॉरी कहें. डॉ. शेट्टी के मुताबिक “पुरुषों को इस बात का भी डर रहता है कि कहीं माफ़ी मांगने के बाद पत्नी उन्हें एक्सप्लॉइट न करे.”

सामना करने से बचना
कुछ पुरुषों के माफ़ी न मांगने की एक वजह उनकी पार्टनर भी होती है. कई बार महिलाएं पार्टनर के माफ़ी मांगने पर उन्हें माफ़ करने की बजाय सबक सिखाने के इरादे से बहस या लड़ाई-झगड़ा करने लगती है, ऐसे में पार्टनर अगली बार माफ़ी मांगने से पहले सौ बार सोचता है. उसे डर रहता है कि सॉरी बोलने पर फिर कहीं कोई बहस न शुरु हो जाए.

रूढ़ीवादी विचारधारा
साइकोलॉजिस्ट डॉ. हरीश शेट्टी के मुताबिक “पुरुष अपने जिस ईगो या अहंकार की वजह से महिलाओं से माफ़ी मांगने से झिझकते हैं, उसकी एक वजह पुरुष प्रधान समाज वाली विधारधारा है. जिस वजह से उन्हें लगता है कि माफ़ी मांगना उनकी मर्यादा के ख़िलाफ़ है.” हालांकि अब हालात बदलने लगे हैं, बावजूद इसके कहीं न कहीं मेल डोमिनेटिंग वाली सोच उभर ही आती है. अगर लड़के परेशान या दुखी होकर रोते हैं, तो माता-पिता तुरंत कह देते हैं ‘क्या लड़कियों की तरह रो रहे हो’, इस तरह कहने से उनके ज़ेहन में ये बात बैठ जाती है कि लड़कियां कमज़ोर होती हैं और किसी कमज़ोर से भला वो माफ़ी कैसे मांग सकते हैं.

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बदल रही है मानसिकता
वक़्त के साथ-साथ समाज और पुरुषों की मानसिकता में भी बदलाव आया है. आज के युवाओं को अपनी पार्टनर से माफ़ी मांगने में कोई शर्म या झिझक महसूस नहीं होती. एक रिक्रूटमेंट एजेंसी चलाने वाले धीरज सिंह का कहना है “मैं तो हर छोटी ग़लती के लिए अपनी पत्नी से सॉरी बोल देता हूं, कभी-कभी तो वो मेरे सॉरी से ही परेशान हो जाती है. मुझे लगता है अगर आप अपने पार्टनर से प्यार करते हो, तो सॉरी बोलने में भला कैसी शर्म.” धीरज की ही तरह एक न्यूज़ एजेंसी से जुड़े शैलेंद्र को भी लगता है कि पार्टनर से बेझिझक सॉरी बोल देना चाहिए. कुछ ऐसी ही राय एक प्रतिष्ठित कंपनी में बतौर बिज़नेस डेवलपमेंट मैनेजर काम कर रहे सुशील सिंह की भी है, लेकिन वो साथ ही ये भी मानते हैं कि सॉरी बोलने में कहीं न कहीं पुरुषों का मेल ईगो आड़े आता है.

वक़्त के साथ बहुत कुछ बदला है, प्यार करने अंदाज़ भी अब पहले जैसा नहीं रहा. पहले जहां मोहब्बत के नाम से ही एक सिहरन-सी होने लगती थी, अब वो सिहरन सीधे सेक्स तक पहुंच गई है. लव से लेकर लस्ट तक, प्यार से लेकर सेक्स तक… आज की पीढ़ी को सबकुछ फटाफट चाहिए. इनकी इंस्टेंट लव स्टोरी में सब्र जैसे शब्द के लिए कोई जगह नहीं. आज की युवा पीढ़ी के लिए सेक्स अब बंद कमरे में ढंके-छुपे तौर पर डिस्कस की जाने वाली चीज़ नहीं रही, अब लोग खुलकर अपनी सेक्स डिज़ायर को जाहिर करते हैं और इसे पाने के लिए उन्हें रिश्ते में बंधने का सब्र भी नहीं है. भूख-प्यास की तरह जब सेक्स की चाह होती है, तो लोग इसे फटाफट पा लेना चाहते हैं, इसके लिए उन्हें इंतज़ार करना मंज़ूर नहीं. सेक्स में नैतिकता जैसी बातें अब बहुत पुरानी हो गई हैं, आज की पीढ़ी इसे फिज़िकल हंगर से जोड़कर देखती है. बदलाव की ये लहर आख़िर हमें कहां ले जा रही है?

Meaning Of Love For Today's Youth

सेक्स चाहिए, पर बंधन नहीं
साइकोलॉजिस्ट डॉ. माधवी सेठ कहती हैं, आज के कई युवाओं को लगता है कि जब सेक्स आसानी से उपलब्ध है तो शादी के बंधन में में क्यों बंधें? आज की पाढ़ी की शहनशक्ति कम हो गई है, वो किसी भी मामले में एडजस्ट करने को तैयार नहीं, इसीलिए तलाक़ के केसेस बढ़ने लगे हैं. फिर पैरेंट्स भी बच्चों के तलाक़ पर बहुत ज़्यादा हो-हल्ला नहीं मचाते. पहले तलाक़ सोशल स्टिगमा समझा जाता था, लेकिन अब तलाक़ होना बड़ी बात नहीं समझी जाती. तलाक के प्रति लोगों की एक्सेप्टेबिलिटी बढ़ गई है. अब ये नहीं समझा जाता कि तलाक़ के बाद ज़िंदगी खराब हो गई. इसी तरह आज से 10 साल पहले शादी करना ज़रूरी समझा जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है. अब कोई शादी नहीं करना चाहता तो लोगों को इसमें कोई आश्चर्य नहीं होता.

पार्टनर नहीं, पैकेज चाहिए
आजकल प्यार, शादी, बच्चे सबकुछ नाप-तौल कर होता है. लोगों को लाइफ पार्टनर नहीं, कंप्लीट पैकेज चाहिए, जो उनकी शारीरिक, मानसिक, आर्थिक, सामाजिक हर ज़रूरत पूरी करे. जब दिल का रिश्ता ही शर्तों पर हो, तो उसके टिकने की उम्मीद कितनी की जा सकती है. यही वजह है कि आजकल के रिश्ते टिकाऊ नहीं हैं. इन रिश्तों में प्यार के अलावा बाकी सबकुछ होता है इसीलिए प्यार की तलाश बाकी रह जाती है और एक्स्ट्रा मैरिटल रिश्ते बन जाते हैं.

बदल गई है शादी की परिभाषा
साइकोलॉजिस्ट डॉ. माधवी सेठ कहती हैं, पहले शादी के बाद एक-दो साल पति-पत्नी एक-दूसरे को समझने में गुजार देते थे. सेक्स का नया-नया अनुभव उनके रिश्ते में रोमांच बनाए रखता था. फिर बच्चे, उनकी परवरिश, नाते-रिश्तेदार… लंबा समय गुजर जाता था इन सब में. आज के कई युवा शादी के पहले ही सेक्स का अनुभव ले चुके होते हैं, उस पर करियर बनाने के चलते शादियां देर से हो रही हैं, ऐसे में शादी में उन्हें कोई रोमांच नज़र नहीं आता. उन्हें शादी स़िर्फ ज़िम्मेदारी लगती है इसलिए वो शादी से कतराने लगते हैं.

इसका एक बड़ा नुक़सान ये भी है कि युवा जब सेक्स पर जल्दी एक्सपेरिमेंट करते हैं तो इससे जल्दी ऊब भी जाते हैं और 40 की उम्र तक उनकी सेक्स लाइफ बोरिंग हो जाती है. उनका ज़िंदगी से लगाव कम हो जाता है. कोई थ्रिल नहीं रहता. अब शादी की परिभाषा बदल गई है. लेट मेरिज, लेट चिल्ड्रेन (कई कपल तो बच्चे भी नहीं चाहते), वर्किंग कपल, न्यूक्लियर फैमिलीज़… समय के साथ परिवार का ढांचा और उसकी ज़रूरतें बदल गई हैं. बदलाव की ये लहर बहुत कुछ बदल रही है. 10 साल पहले जहां लोग इंटर कास्ट मैरिज को पचा नहीं पाते थे, अब सहजता से लेने लगे हैं. इसी तरह अब एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर, लिव इन रिलेशन जैसी बातें भी लोगों को चौंकाती नहीं हैं.

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Meaning Of Love For Youth

बढ़ रहे हैं एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स
काम के बढ़ते घंटे, ऑफिस में महिला-पुरुष का घंटों साथ काम करना, पति-पत्नी की असंतुष्ट सेक्स लाइफ आदि के कारण एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स की तादाद बढ़ रही है. कई पति-पत्नी सेक्स का पूरा आनंद नहीं ले पाते (ख़ासकर महिलाएं), फिर भी पार्टनर को ख़ुश करने के लिए झूठ बोलते हैं. ऐसे में जब आप अपनी सेक्स लाइफ़ से संतुष्ट ही नहीं हैं, तो आपका ध्यान यहां-वहां भटकेगा ही. अंतरंग रिश्ते में भी हम मुखौटा ओढ़ लेते हैं, तो संतुष्टि मिलेगी कैसे? ऐसे असंतुष्ट कपल्स जहां भी भावनात्मक सहारा पाते हैं, वहीं शारीरिक रूप से भी जुड़ जाते हैं. पति, बच्चे, घर-परिवार, ऑफिस सभी जगह मैकेनिक लाइफ जी रही महिलाएं जाने-अनजाने घर के बाहर सुकून तलाशने की चाह में मन के साथ-साथ तक का रिश्ता भी जोड़ लेती हैं.

सेक्स का विकृत रूप सामने आया है
मीडिया प्रोफेशनल अरुण कुमार कहते हैं, हमारे देश में आज भी लोग सेक्स पर बात करने से तो कतराते हैं, लेकिन हर पहलू को घोलकर पी जाना चाहते हैं. पहले भी एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर होते थे, पति नपुंसक हो तो परिवार के किसी और सदस्य के साथ सेक्स करके बच्चा पैदा किया जाता था, लेकिन तब इन बातों पर इतना हो-हल्ला नहीं मचाया जाता था. अब सेक्स को एक प्रोडक्ट के रूप में देखा जाने लगा है. सेक्स टॉनिक, कंडोम आदि बेचने वाली कंपनियां अपने विज्ञापनों में स्त्री के शरीर को अश्लील रूप में पेश करके सेक्स को भुनाती हैं, ऐसे विज्ञापान युवाओं को सेक्स पर एक्सपेरिमेंट करने के लिए उकसाते हैं. बदलते परिवेश में सेक्स विकृत रूप में सामने आ रहा है, तभी तो बाप ने बेटी का रेप कर दिया, भाई-बहन के शारीरिक संबंध बन गए जैसी ख़बरें देखने-सुनने को मिलती हैं. हम लोग सेक्स पर खुलकर बात करने से जितना ज़्यादा कतराते हैं, इसका उतना ही विभत्स रूप हमारे सामने आता है. हर कोई जैसे इसी में उलझ कर रह जाता है, सेक्स पर हर तरह की रिसर्च कर लेना चाहता है.

सेक्स में संतुष्टि ज़रूरी है
बैंक कर्मचारी रोहित सिंह कहते हैं, सेक्स अब इतनी छोटी चीज़ हो गई है कि किसी को नीचा दिखाने, बदला लेने, अपना कोई काम निकालने, झूठी शान बघारने, प्रमोशन पाने तक के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है. सेक्स को साधना के रूप में किया जाए तो इसके आनंद को समझा जा सकता है. जो मिला उसी से शारीरिक संबंध बना लिया, नोच-खंसोटकर, बलात्कार करके शारीरिक भूख मिटा ली, ऐसा करके कभी तृप्ति नहीं मिलती, बल्कि लालसा बढ़ती जाती है और व्यक्ति इसी में उलझकर रह जाता है.

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Meaning Of Love

ये है सेक्स का सच
* 33 प्रतिशत महिलाएं मानती हैं कि शादी के कुछ सालों बाद उनकी सेक्स लाइफ बोरिंग हो गई है.
* 60% पुरुष चाहते हैं कि सेक्स के लिए महिला पहल करे.
* हर पुरुष हर सात मिनट में कम से कम एक बार सेक्स के बारे में ज़रूर सोचता है.
* पुरुष तथा महिलाएं दोनों ही एक दिन में कई बार ऑर्गेज़्म का अनुभव कर सकते हैं.
* जर्नल ऑफ सेक्सुअल मेडिसिन में छपी रिपोर्ट के अनुसार, बर्थ कंट्रोल पिल्स लेने से महिलाओं में सेक्स करने की इच्छा कम हो जाती है.
* एक रिसर्च के अनुसार, कॉलेज के दौरान जो लड़के सेक्स में लिप्त रहते हैं, वे अक्सर डिप्रेशन में चले जाते हैं. जबकि सेक्स न करने वाले विद्यार्थी नॉर्मल रहते हैं.
* ऐसे पुरुष जिनके अनेक स्त्रियों से संबंध होते हैं, वे सेक्स को बहुत महत्वपूर्ण तो समझते हैं, लेकिन अपने रिलेशनशिप से पूरी तरह संतुष्ट नहीं रहते.
* जो पुरुष ज़्यादातर सेक्सुअल फैंटेसी में रहते हैं, वे अपने रोमांटिक रिलेशनशिप से कम संतुष्ट रहते हैं.
– कमला बडोनी

आप पिछले कुछ दिनों से अपने पति के बर्ताव में बहुत बदलाव महसूस कर रही हैं. कहीं ऐसा तो नहीं कि वे किसी और से प्यार करने लगे हैं? जी हां, किसी के प्रति भरोसेमंद रहने के लिए बहुत प्रयासों की ज़रूरत होती है, लेकिन किसी को धोखा देने के लिए बस थोड़ा-सा बहक जाना ही काफ़ी है. यदि आपको यह डर सता रहा है तो अपने पति में आए बदलाव पर ग़ौर कीजिए और समय रहते ही संभाल लीजिए उन्हें. यदि आपको इस बात का अंदेशा सता रहा है कि आपके पति किसी और के प्यार में पड़ गए हैं, तो इन बातों पर ग़ौर फ़रमाइए. यदि ये बातें उन पर सही बैठती हैं, तो व़क़्त है आपके संभलने का, साथ ही, उन्हें भी संभालकर सही ट्रैक पर लाने का.

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1) क्या आपकी सेक्स लाइफ अब पहले जैसी नहीं है?
पहले आपकी सेक्स लाइफ़ बहुत रोमांटिक थी, लेकिन आजकल उन्हें सेक्स में कोई ख़ास दिलचस्पी नहीं है. पहले आपकी पहल पर वे रोमांटिक हो जाते थे, पर आजकल जब आप पहल करती हैं तो भी वे कहते हैं कि मैं थका हुआ हूं, तनाव महसूस कर रहा हूं, काम का बोझ बहुत है… या फिर ऐसा ही कोई और बहाना. कई बार  इसका कारण होता है वो गिल्ट जो दूसरे अ़फेयर की वजह से होता है. तो सतर्क हो जाइए और पता कीजिए कि उनके ये सेक्स से बचने के बहाने कितने सही हैं?

2) क्या आपके पति घर पर रेस्टलेस हो जाते हैं?
पहले तो वे घर पर आपके साथ व़क़्त बिताने में एंजॉय करते थे, लेकिन आजकल उनकी बॉडी लैंग्वेज और व्यवहार से आपको लगता है कि वे बहुत रेस्टलेस (व्यग्र) हो रहे हैं. आपके साथ बाहर जाना तो उन्होंने लगभग बंद ही कर दिया है, लेकिन जब घर पर भी रहते हैं तो बड़ा बोर फ़ील करते हैं और अकेले बाहर जाने के मौ़के चूकना ही नहीं चाहते.  उनकी आदतों में आए इस बदलाव को नज़रअंदाज़ न करें और इसकी वजह ढूंढ़ने में ज़रा भी देर न लगाएं.

3) क्या आपके पति इन दिनों हमेशा महकते रहते हैं?
वो फैशन कॉन्शियस तो कभी नहीं थे. दिन में एक बार डियो या पऱफ़्यूम लगाना ही उनकी आदत में था, लेकिन अब वे सुबह-शाम, यहां तक कि रात में भी महकते रहते हैं यानी मामला नाज़ुक है… आप को चौकन्ना होना होगा.

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4) क्या आपके पति इन दिनों नए ट्रेंड्स के बारे में जानने लगे हैं?
पहले तो उन्हें ब्रान्ड्स और फैशन का कोई ख़ास आइडिया ही नहीं होता था, पर इन दिनों अचानक ही वे अपने कपड़ों को ले कर ट्रेंडी हो चले हैं. बात यहीं तक सीमित नहीं है, बल्कि अब तो वे आपको भी लेटेस्ट ट्रेंड्स के बारे में मश्‍वरा देने लगे हैं. ये आप के लिए ख़तरे का साइन है और ज़रूरत है कि आप मामले की तह तक जाएं.

5) क्या आपके पति आजकल बनठन कर ऑफिस जाते हैं?
पहले सैटरडे को ऑफ़िस जाना हो तो मुंह बन जाता था, पर आजकल साहब सैटरडे को भी बहुत बनठन कर निकलते हैं. बाज़ार जा रहे हों या जिम… पहले तो कपड़े सलेक्ट करने में इतना टाइम नहीं लगता था जितना अब लगता है. घर से निकलने के पहले बनने-संवरने में इतना समय पहले तो नहीं लगाते थे. तो… अब ये तैयारी किस लिए? जी हां, आपके कान खड़े हो जाने चाहिए, क्योंकि दाल में कुछ तो काला ज़रूर है.

6) क्या आपके पति आजकल कुछ ज्यादा ही एक्सक्यूज़ेस देने लगे हैं?
अक्सर ही वो रात देर से घर आते हैं और आते ही ऑफ़िस कलीग्स, ऑफ़िस कल्चर को कोसना शुरू कर देते हैं. ऑफ़िस की लेट नाइट पार्टीज़ के सिर देर से आने का ठीकरा तो फोड़ देते हैं, लेकिन जब आप उनसे पार्टी के वेन्यू के बारे में पूछती हैं तो उनकी याददाश्त कुछ कमज़ोर-सी हो जाती है और वे अपनी थकान की आड़ लेते हुए आपको सोने की सलाह दे कर ख़ुद झट से गहरी नींद में सो जाते हैं. जितना लंबा एक्सक्यूज़ होगा, उनकी पोल खुलने का ख़तरा भी तो उतना ही ज़्यादा होगा यानी अब आपके डिटेक्टिव बनने का समय आ गया है.

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Heartbreak

7) क्या आपके पति आजकल बात-बात पर चौंक जाते हैं?
जैसे ही आप बेडरूम में एंटर होती हैं, जनाब चौंक कर अपने लैपटॉप की विंडोज़ को बंद कर देते हैं. उनका मोबाइल ऑपरेट करने के लिए लगने वाला पासवर्ड या पिन नंबर अचानक ही बदल गया है. एक तो उन्होंने आपको अपना पिन नंबर बताया नहीं है और यदि बता दिया है तो उसे दोबारा बदल दिया है… यदि अचानक ही उन्होंने एक और मोबाइल ले लिया है और उसके बारे में पूछने से पहले आपको बताया ही नहीं तो समझ जाइए कि आपका शक़ बेबुनियाद नहीं है. ये जो इन दिनों वो आपसे सीक्रेट्स रखने लगे हैं, आपके  सतर्क होनेे के लिए इतना बहुत है. अपने जासूसों का जाल फैलाइए और उनकी इन नई आदतों की वजह जानने की ईमानदार कोशिश कीजिए.

8) क्या आपके पति का डिफेंस दिनोंदिन मज़बूत हो रहा है?
उनके देर से आने को ले कर आप हमेशा ही शिक़ायत करती रही हैं और दस में से पांच बार वे आपको इसका कारण भी बताते रहे हैं, लेकिन इन दिनों एक तो वे अक्सर ही देर से आ रहे हैं और आपकी शिक़ायत पर उनका ड़िफेंस बहुत स्ट्रॉन्ग होता है. वे आपसे कहने लगे हैं कि एक तो वे इतना काम कर के, थक के आते हैं और आप से उन्हें हमेशा शिक़ायत ही मिलती है, प्रोत्साहन कभी नहीं. या फिर वे आप से ही प्रश्‍न करने लगते हैं कि तुम इतनी ओवर पज़ेसिव क्यों हो? या फिर तुम थोड़ा प्रैक्टिकल क्यों नहीं बन जातीं? ऐसे जवाब मिलने पर आपके सेंसर्स को मैसेज मिल जाना चाहिए कि मामला गड़बड़ है.

9) क्या आप दोनों के बीच अब टच थैरेपी अब नहीं रही?
पहले आप सप्ताह में एक बार साथ बैठ कर ढेर सारी बातें करते थे. एक-दूसरे के हाथों का वो स्पर्श किसी टच थैरेपी-सा काम करता था. अब उनके पास समय ही नहीं है कि वे आपके लिए समय निकाल सकें. तो ज़रूरी है कि आप इसकी वजह ढूंढ़ें और उन्हें खोने से पहले ही दोबारा पा लें.

बॉलीवुड में लव स्टोरी बनती-बिगड़ती रहती हैं, लेकिन आज हम एक ऐसे कपल की बात कर रहे हैं, जिनकी जोड़ी बॉलीवुड में बहुत मशहूर थी. जी हां, हम बात कर रहे हैं करीना कपूर और शाहिद कपूर की लव स्टोरी की. कभी ये कपल एक-दूसरे पर जान छिड़कता था, लेकिन फिर ऐसा क्या हुआ कि करीना कपूर और शाहिद कपूर हमेशा के लिए अलग हो गए. ‘जब वी मेट’ फिल्म करीना कपूर और शाहिद कपूर की सुपरहिट फिल्म थी और इस फिल्म के दौरान ही इनका ब्रेकअप हो गया. ‘जब वी मेट’ फिल्म में करीना कपूर और शाहिद कपूर परदे पर रोमांस कर रहे थे, लेकिन असल ज़िंदगी में उसी फिल्म की शूटिंग के दौरान उनका रिश्ता टूटने लगा था. ‘जब वी मेट’ फिल्म में ऐसा क्या हुआ कि करीना कपूर और शाहिद कपूर हमेशा के लिए अलग हो गए.

Kareena Kapoor And Shahid Kapoor

ऐसे शुरू हुई करीना कपूर और शाहिद कपूर की लव स्टोरी
करीना और शाहिद पहली बार फिल्म फिदा के सेट पर मिले थे, जहां करीना कपूर अपना दिल शाहिद को दे बैठी. करीना कपूर ने ही शाहिद को प्रपोज किया और इस तरह इस दोनों की लव स्टोरी शुरू हुई. करीना कपूर और शाहिद कपूर की लव स्टोरी मीडिया में अक्सर सुर्ख़ियों में रहती थी. करीना और शाहिद एक-दूसरे के प्यार में पागल थे. ख़बरों के अनुसार, करीना कपूर ने शाहिद कपूर के लिए नॉन वेजीटेरियन खाना भी छोड़ दिया था. उस दौरान शाहिद और करीना ने कई फिल्में साथ में की. ये अलग बात है कि जब तक ये जोड़ी साथ थी, तब तक इनकी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर कोई ख़ास कमाल नहीं दिखा पाई, लेकिन ‘जब वी मेट’ फिल्म में फिल्म में जब ये दोनों अलग हुए, तो वो फिल्म सुपरहिट हुई. करीना कपूर और शाहिद कपूर ने अपने ब्रेकअप के बारे में कभी कुछ नहीं कहा, लेकिन करीना कपूर का अचानक सैफ अली खान को डेट करना उनके फैन्स को चकित कर गया.

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Kareena Kapoor And Shahid Kapoor

क्या सैफ अली खान थे करीना कपूर और शाहिद कपूर के ब्रेकअप की वजह?
करीना कपूर की ज़िंदगी में सैफ अली का आना और करीना-शाहिद का ब्रेकअप, इसे करीना भाग्य का लिखा मानती हैं. शाहिद कपूर से ब्रेकअप के बारे में करीना कपूर ने एक इंटरव्यू में कहा, “भाग्य के अपने कुछ प्लान होते हैं और ज़िंदगी उसके हिसाब से चलती है.” करीना कपूर ने कहा कि ‘जब भी मेट’ फिल्म ने जहां उनके करियर को बदलकर रख दिया, वहीं फिल्म ‘टशन’ के सेट पर करीना की सैफ अली खान से मुलाकात हुई और उस मुलाकात ने करीना की पूरी ज़िंदगी बदल दी. करीना ने कहा, “फिल्म ‘टशन’ के वक्त मैं अपने रोल और फिगर को लेकर बहुत उत्साहित थी. टशन फिल्म ने मेरी ज़िंदगी बदल दी, क्योंकि इस फिल्म के जरिए मैं अपने लाइफ पार्टनर से मिली.” अपने इंटरव्यू में करीना कपूर ने कहा, “फिल्म ‘जब वी मेट’ की शूटिंग के दौरान से लेकर फिल्म ‘टशन’ के बीच में बहुत कुछ ऐसा हुआ, जिसके बाद हमने अपने-अपने रास्ते अलग कर लिए. मेरे लिए उस वक़्त पर्सनली और प्रोफेशनली सबकुछ हैंडल करना बहुत मुश्किल हो रहा था. फिल्म में जिस तरह गीत की ज़िंदगी सेकेंड हाफ के बाद बदल जाती है, ‘जब वी मेट’ फिल्म के बनते वक्त मेरी जिंदगी में भी वैसा ही हो रहा था.”

Kareena Kapoor And Shahid Kapoor

एक-दूसरे के लिए नहीं बनी थी करीना कपूर और शाहिद कपूर की जोड़ी
बता दें कि ‘जब वी मेट’ फिल्म की शूटिंग के दौरान ही करीना और शाहिद के रिश्ते खराब होने लगे थे और फिल्म ‘टशन’ की शूटिंग के दौरान सैफ अली खान और करीना कपूर एक-दूसरे के करीब आ गए थे. फिर सैफ और करीना ने साल 2012 में शादी कर ली. शाहिद कपूर ने भी 2015 में मीरा राजपूत से शादी कर ली. आज करीना कपूर और शाहिद कपूर दोनों अपनी-अपनी शादीशुदा ज़िंदगी में खुश हैं. करीना कपूर एक बेटे तैमूर की मां बन चुकी हैं और शाहिद कपूर भी दो बच्चों के पिता बन चुके हैं. बॉलीवुड की ये क्यूट जोड़ी शायद एक-दूसरे के लिए नहीं बनी थी. लेकिन आज भी जब इनके फैन्स ‘जब वी मेट’ फिल्म देखते हैं, तो उन्हें करीना कपूर और शाहिद कपूर की लव स्टोरी याद आ जाती है.

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Kareena Kapoor And Shahid Kapoor

लॉकडाउन में सेलिब्रिटी अपने पेट के साथ काफ़ी अच्छा समय बिता रहे हैं, ख़ासतौर पर डॉगी के साथ. उनके साथ इस क्वारंटाइन के समय बिताने को वे ना केवल ख़ुद एंजॉय कर रहे हैं, बल्कि उनका परिवार भी ख़ूब आनंद ले रहा है. उनके फैन्स भी इसे बेहद पसंद कर रहे हैं. फिल्म स्टार्स के पेट प्रेम के एक-से-एक तस्वीरें व वीडियो सोशल मीडिया अकाउंट पर देखने को मिलते रहते हैं. 

विराट कोहली से लेकर अर्जुन कपूर तक अनुष्का शर्मा से लेकर माधुरी दीक्षित तक कई सितारों के इन मनभावन लम्हों को हम देखते रहे हैं.
स्टार्स के डॉगी के साथ डांस करते हुए, एक्सरसाइज करते हुए और कई बढ़िया तालमेल देखने को मिलते हैं. गुरमीत चौधरी तो अपने पाब्लो के साथ काफ़ी ख़ुशियोंभरे व प्यारे लम्हे बिता रहे और उनकी एक से एक बेहतरीन वीडियो भी शेयर करते रहते हैं. अनुष्का शर्मा और विराट कोहली भी अपने प्यारे डॉगी के साथ कई ख़ास लम्हों को यादगार बनाते रहे हैं. इसी तरह कई सितारे हैं, जो अपने पशु प्रेम को उजागर करते रहे हैं. अर्जुन कपूर अपने डॉगी के साथ किचन में कुक करते हुए स्वीट मूवमेंट शेयर किया था. आइए देखते हैं सितारों के पशु प्रेम के लाजवाब पल को.

Film Stars Pets
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A humble appeal to all the pet parents 🙏🏻

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Bird watching with Carmelo

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Every dark cloud had a silver lining. And this time, while it may seem like the worst time and in so many ways it actually is, has also forcefully made us all stop and deal with things we might have been running away from because either we were ‘busy’ or it was convenient to say we were 'busy'. If this time is respected for what it is, it will enable more light to shine through. This time has also made us all realise what's truly important. For me just having food, water and a roof over my head and the good health of my family seems MOST important. Everything else is a bonus that I bow my head in gratitude for. But, that which we call 'basic' is not so basic for everyone after looking at all the people who struggle for just those few things. My prayers with them and their families. May everyone be safe and secure. This time has surely made me more reflective. This need to stay at home with your loved ones has been forced upon the entire world but there is a deep lesson for us all. There is a lesson to strive for work and life balance ( I've valued and strived for this dearly for many years now ), there is a lesson to devote more time in things that actually matter. Today, when I'm surrounded by all the blessings in my life, I just want to tell everyone how much compassion I feel for everyone who I see suffer. I want to help as many possible in the best of my abilities. I feel pride in our resilience to be better human beings. I can instinctively feel this in and around me. We will all have our individual and subjective lessons from this time and hopefully, such lessons will continuously stay with us all.

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My furry babies 🐶

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Pahla Affair

पहला अफेयर: तुम कभी तो मिलोगे (Pahla Affair: Tum Kabhi To Miloge)

आज फिर मेघों से रिमझिम वर्षा रूपी नेह बरस रहा है. दूर-दूर तक मेरी प्रिय तन्हाई पसरी हुई है. एकाएक रेडियो पर बज रहे गीत पर ध्यान चला गया-
छोटी-सी ये दुनिया पहचाने रास्ते, तुम कहीं तो मिलोगे, कभी तो मिलोगे..

मेरा दिल यूं ही भर आया. कितने साल गुज़र गए आपसे बिछड़े हुए, पर मेरा पागलपन आज भी आपके साथ गुज़ारे उन सुखद पलों की अनमोल स्मृतियां संजोए हुए है.

अल्हड़ उम्र के वो सुनहरे भावुक दिन… चांदनी रात में जागना, अपनी ही बनाई ख़यालों की दुनिया में खो जाना, यही सब कुछ अच्छा लगता था तब. शरत्चंद,विमल-मित्र, शिवानी आदि के उपन्यासों को प़ढ़ना तब ज़रूरी शौक़ों में शामिल थे. को-एज्युकेशन के बावजूद अपने अंतर्मुखी स्वभाव के कारण मैं क्लास में बहुत कम बोलती थी.

उन दिनों कॉलेज में सांस्कृतिक कार्यक्रम चल रहे थे. आप तब मेरे पास आए थे और एक फ़िल्मी गीत के दूसरे अन्तरे को पूरा करने का आग्रह किया था. उसी गीत को गाने पर आपको प्रथम पुरस्कार मिला था. मेरे बधाई देने पर आपने कितनी आसानी से कह दिया था कि यह गीत तो मैंने तुम्हारे लिए ही गाया था. उसके बाद तो मैं आपसे नज़रें चुराती ही फिरती थी. लेकिन अक्सर ऐसा लगता जैसे आपकी ख़ामोश निगाहें हमेशा मेरा पीछा करती रहती हैं.

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फिर परीक्षा के दिनों में जब मुझे एकाएक बुखार हो गया था, तो आपने बिना परीक्षा की चिंता किए मुझे अस्पताल में भर्ती करवाया था और मेरे माता-पिता के आने तक मेरी पूरी देखभाल की थी.

और जाड़ों में जब हमारी पिकनिक गई थी और मुझे आपके स्कूटर पर पीछे बैठना पड़ा था, उस दिन आपकी पीठ की ओर उन्मुख हो, मैंने जी भर कर बातें की थीं. हम पिकनिक स्पॉट पर सबसे देर से पहुंचे थे, आपका वाहन उस दिन चींटी की ऱफ़्तार से जो चल रहा था.

लेकिन तभी आपके चिकित्सक पिता की विदेश में नियुक्ति हुई और आपका परिवार विदेश चला गया. आपने अपनी मां से आपको यहीं छोड़ने के लिए बहुत अनुरोध भी किया, लेकिन आपका प्रयास असफल रहा. अपने मां-बाप के सामने अपनी पसंद ज़ाहिर करने की आपकी उस व़क़्त न उम्र थी न हालात. और आप अनेक सुनहरे सपने मेरी झोली में डाल सात समंदर पार के राजकुमार बन गए. कुछ वर्षों तक आपके स्नेहिल पत्र मुझे ढा़ंढस बंधाते रहे. फिर एकाएक इस छोटी-सी दुनिया की विशाल भीड़ में आप न जाने कहां खो गये. आपके परिवार की भी कोई खोज-ख़बर नहीं मिली. उन दिनों गल्फ वार (खाड़ी युद्ध) चल रहा था. अनेक प्रवासी-भारतीय गुमनामी के अंधेरे में खो
चुके थे.

मैं अपने प्यार की अजर-अमर सुधियों की शीतल छांव तले जीवन गुज़ारती रही. मुझे ऐसा रोग हो चुका है जिसको प्रवीण चिकित्सक भी समझ पाने में असमर्थ हैं. मुझे अटूट विश्‍वास है कि मेरे जीवन के मंदिर की लौ बुझने से पहले आप ज़रूर मिलेंगे और आपका उजला, हंसता- मुस्कुराता चेहरा ही मेरे जीवन के इंतज़ार को सार्थक बनाएगा. मेरे जीवन का सार बच्चन जी की इन पंक्तियों में है-

स्वागत के साथ ही विदा की होती देखी तैयारी
बंद लगी होने खुलते ही मेरी जीवन मधुशाला

– डॉ. महिमा श्रीवास्तव

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Pahla Affair

पहला अफेयर: काश, तुम समझे होते (Pahla Affair: Kash Tum Samjhe Hote)

कभी-कभी अचानक कहे शब्द ज़िंदगी के मायने बदल देते हैं. इसका एहसास पहली बार मुझे तब हुआ जब अचानक एक दिन आदित्य को अपने सामने मेरे जवाब के इंतज़ार में खड़े पाया. मेरी हालत देखकर बोला, ङ्गङ्घदया, ऑफ़िस से जाने के पूर्व सारी औपचारिकताएं होते-होते एक-दो दिन तो लग ही जाएंगे, जाने से पहले तुम्हारा जवाब सुनना चाहता हूं.फफ कहने के साथ वह मुड़ा और मेरे मन-मस्तिष्क में झंझावत पैदा कर गया.

वो तो चला गया, लेकिन मेरी आंखों के सामने वह दृश्य दौड़ गया, जब एक दिन ऑफ़िस में अंतर्जातीय विवाह को लेकर हो रही चर्चा के दौरान मैंने भी घोषणा कर दी थी कि यूं तो मेरे घर में अंतर्जातीय विवाह के लिए सख़्त मनाही है, लेकिन मैं घरवालों के विरुद्ध जा सकती हूं, बशर्ते लड़का क्लास वन ऑफ़िसर हो.

मुझे सपने में भी इस बात का गुमान न था कि आदित्य मेरे कहे को इतनी संजीदगी से ले लेगा. यूं तो मुझे इस बात का मन-ही-मन एहसास था कि आदित्य के मन में मेरे लिए एक ख़ास जगह है और सच कहूं तो मैं भी उसके सौम्य, सरल व परिपक्व व्यक्तित्व के चुंबकीय आकर्षण में बंधने लगी थी. लेकिन जैसे ही घरवालों के दृष्टिकोण की याद आती, मैं अपने मन को समझा देती कि हमेशा मनचाही मुराद पूरी नहीं होती. इसीलिए आदित्य की लाख कोशिश के बावजूद मैं उससे एक निश्‍चित दूरी बनाए रखती और बातों के दौरान उसे घरवालों के विरोध से सचेत करती रहती.

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लेकिन होनी को भला कौन टाल सकता था. जब मुझे पता लगा कि उसने ज़ोर-शोर से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी है तो एक अनजाने भय से मैं कांप उठी. उसकी मेहनत रंग लाई और पी. सी. एस. की परीक्षा को अंतिम रूप से पास कर, जब उसने हाथ मांगा तो मैं एक अजीब-सी उलझन में फंस गई. बड़ी कशमकश में थी मैं- मेरे सामने भावी जीवन का निर्णय पत्र था, उसमें हां या ना की मुहर लगानी थी.

ऑफ़िस वालों से विदा लेने से पूर्व वो मेरे पास आया, लेकिन मेरी आंखों से छलकते आंसुओं ने उसके प्रश्‍न का जवाब स्वयं दे दिया. मैं बहुत कुछ कहना चाह रही थी, पर ज़ुबां साथ नहीं दे रही थी. मेरी ख़ामोशी वो बर्दाश्त न कर सका. आख़िरकार वह छटपटा कर कह उठा, दया, मुझे कमज़ोर मत बनाओ, तुम तो मेरी शक्ति हो. आज मैं जो कुछ भी हूं, स़िर्फ तुम्हारी वजह से हूं. हमेशा ख़ुश रहना. ईश्‍वर करे, कोई दुख तुम्हारे क़रीब भी न फटके. इतना कह कर वह थके क़दमों से बाहर निकल गया. उसे जाते हुए देखती रही मैं. चाहती थी उससे कहना कि जीवन पर सबसे पहले जीवन देनेवाले का अधिकार होता है, इस फलसफे को कैसे झुठला सकती थी. लेकिन कहते हैं ना- कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता कहीं ज़मीं तो कहीं आसमां नहीं मिलता.

आज माता-पिता की इच्छा के फलस्वरूप अपने आशियाने में ख़ुश भी हूं, पर सीने में दबी पहले प्यार की चोट आज भी ये एहसास कराती है कि पहले तोलो, फिर बोलो. आज भी लगता है जैसे पहले प्यार की दस्तक अब भी मन- मस्तिष्क में अपनी गूंज दे रही हो.

– दया हीत

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Valentine's Day

मुहब्बत बरसा देना तू… सेलिब्रेट सेल्फ लव! इस वैलेंटाइन लेसी लुक के साथ करें अपना डे स्टार्ट! (Valentine’s Day: Celebrate Self Love)

गुलाबों की महक, चॉकलेट्स का टेस्ट और वादियों में गूंजता मुहब्बत का एहसास… जी हां, वैलेंटाइन्स डे होता ही है ख़ास! तो आप इस दिन के लिए क्या ख़ास कर रही हैं? प्यार का मतलब स़िर्फ किसी और को गिफ्ट या ट्रीट देना ही नहीं होता, बल्कि ख़ुद को ख़ास महसूस कराना, ख़ुद को ट्रीट देना और अपने लिए कोई गिफ्ट लेना भी होता है. इस मुहब्बत के सीज़न में क्यों न लेसी लुक अपनाया जाए, क्योंकि लेस डेलीकेट भी होते हैं और ब्यूटीफुल भी.

Valentine's Day

– डेनिम के साथ लेसी टॉप पहनें. चाहें तो जींस के साथ या फिर डेनिम स्कर्ट के साथ. यह आपको ग्लैमरस लुक देगा.

– स्ट्रेट पैंट के साथ लेस टॉप पहनें.

– आप ऐसा ड्रेस या टॉप भी सिलेक्ट कर सकती हैं, जो कंप्लीट लेसी न होकर स़िर्फ स्लीव्स लेसी हों.

– डेनिम टॉप और शॉर्ट लेसी स्कर्ट के साथ लेगिंग्स पहनें.

– आप आउटरवेयर यानी लेयरिंग में भी लेस ट्राई कर सकती हैं, जैसे- फिटेड स्कर्ट या ड्रेस के साथ लेस कोट या जैकेट.

 

– पूरे लेसी लुक चाहिए तो लेसी बॉडी कॉन फिटेड शॉर्ट ड्रेस लें या आपकी एलबीडी भी लेसी हो सकती है.

– चाहें तो लेस आउटफिट को प्लेन नॉन लेसी जैकेट के साथ पेयर कर सकती हैं.

– डेनिम जैकेट के साथ भी लेस ड्रेस पहन सकती हैं या फिर फ्रंट ओपन लॉन्ग लेस ड्रेस को जींस के साथ पेयर कर सकती हैं.

Valentine's Day Self Love

लेसी इनरवेयर

– कुछ कैज़ुअल लुक कैरी करना चाहती हैं, तो लेसी इनर वेयर के साथ एक्सपेरिमेंट कर सकती हैं.

– लेसी ब्रा को शीयर शर्ट या टॉप के साथ पहन सकती हैं.

– लेसी ब्रा ब्लाउज़ के साथ कोट या जैकेट पहनकर ग्लैमरस लुक ट्राई कर सकती हैं.

– डेनिम स्कर्ट या शॉर्ट लेसी स्कर्ट के साथ लेसी ब्रा ट्राई करें.

Valentine's Day

– जींस के साथ लेसी ब्रा और ऊपर से सैटिन जैकेट या ब्लेज़र आपको देगा हॉट लुक.

– ज़िवामे ने भी वैलेंटाइन स्पेशल यानी आपके वी डे को ख़ास बनाने के लिए अपने न्यू कलेक्शन में कई ऑप्शन्स शामिल किए हैं, जिसमें उनका व्हिमसिकल एब्स्ट्रक्ट कलेक्शन और मोरोक्कन लेस कलेक्शन रेडी है आपको ख़ास व न्यू लुक देने के लिए.

– लेस न स़िर्फ ब्यूटीफुल लगता है, बल्कि यह आपको सेक्सी और बोल्ड लुक भी देता है.

– आप भी ट्राई करें लेसी आउटफिट्स और इनरवेयर और अपने वॉर्डरोब को चेंज करके इस वैलेंटाइन को ख़ास बनाएं.

– हो सकता है आपके पार्टनर को भी आपका यह नया अंदाज़ पसंद आए और आप दोनों और भी करीब आएं.

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परछाई बनकर ज़िंदगीभर

तेरे साथ चलने का इरादा है

तोड़कर दुनिया की सारी रस्में-कसमें

तेरे साथ जीने का वादा है…

Happy Pomise Day

आज हर दिल यही जज़्बे का साथ धड़कता है, क्योंकि आज प्रॉमिस डे जो है. मोहब्बत की राह में साथ चलने का वादा और ताउम्र साथ निभाने का इरादा सरगोशियां करने लगता है इश्क़वालों के दिलों में. प्रेम में कसम देना व लेना तो ख़ूब चलता है, लेकिन इससे जुड़े गानों ने भी इसे ख़ूब हवा दी है.

आशिकी में कसम की ख़ास जगह सदा से रही है. चाहनेवालों के लिए प्यार की कसम इबादत होती है. यही झलकियां हिंदी फिल्मों के गानों में भी देखने को मिलती है. प्रॉमिस, कसम, वादा, खुदा की कसम, तेरी कसम, सनम तेरी कसम… जाने कितने ख़ूबसूरत व कर्णप्रिय गीत सुनते रहे हैं हम. अमर अकबर एंथोनी का अमिताभ बच्चन व परवीन बॉबी पर फिल्माया सॉन्ग- देख के तुमको दिल डोला है गॉड प्रॉमिस… हो या फिर राजेश खन्पना और मुमताज पर फिल्माया गया आपकी कसम का गाना- करवटे बदलते रहे सारी रात हम आपकी कसम… ने हर दिल की धड़कन को ख़ूब धड़काया था. खिलाड़ी फिल्म का अक्षय कुमार और आयशा जुल्का के साथ का गीत- वादा रहा सनम होंगे ना जुदा हम… ने भी गाने के कई रिकॉर्ड तोड़े थे. आइए वेलेंटाइन वीक के इस हफ़्ते में आज के दिन यानी प्रॉमिस डे को इन कसमे-वादे से जुड़े बेहतरीन गानों के साथ सेलिब्रेट करें…

https://youtu.be/txJWp_zQwCQ

 

 

 

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