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लव बाइट से जुड़ी से 5 दिलचस्प बातें नहीं जानते होंगे आप (5 Surprising Facts About Love Bites You Didn’t Know)

लव बाइट (Love Bite) या हिक्की (Hickey) आपके पैशनेट लव (Passionate Love) की पहचान है. यह आपके और आपके पार्टनर के रोमानी पलों का गवाह है. यह दुनिया को आपकी केमिस्ट्री से रू-ब-रू कराता है. हालांकि ऐसे बहुत से लोग हैं, जो अपनी प्राइवेट लाइफ को पब्लिक करना पसंद नहीं करते, इसलिए लव बाइट को हमेशा छिपाते हैं. जबकि लव बाइट के लिए आपको इतना बुरा महसूस करने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि यह आपके और आपके पार्टनर के प्यार और रोमांच की निशानी है. लव बाइट से जुड़ी कुछ ऐसी ही दिलचस्प बातें हम यहां साझा कर रहे हैं, जो आपने पहले कभी नहीं सुनी हों.

Facts About Love Bites

कैसे बनती है लव बाइट या हिक्की?

हमारी गर्दन, छाती, कंधे और जांघ के भीतरी हिस्से बहुत संवेदनशील होते हैं. इन जगहों पर अगर ज़रूरत से ज़्यादा दबाव डाला गया, तो वहां निशान बन जाता है. कारण वहां मौजूद रक्त कोशिकाओं का प्रभावित होना. तो अब आप समझ गए होंगे कि लव बाइट या हिक्की बनने का कारण है उस स्थान की रक्त कोशिकाओं का प्रभावित होना. हालांकि इसमें डरनेवाली कोई बात नहीं, फिर भी लव बाइट देते समय आपको ध्यान रखना चाहिए, वरना निशाद ज़्यादा गहरा होने से पार्टनर को प्रॉब्लम भी हो सकती है.

कैसे दें परफेक्ट लव बाइट?

परफेक्ट लव बाइट देने के लिए आपको थोड़ा एफर्ट लेना होना. सबसे पहले फोरप्ले से अपने पार्टनर को उत्तेजित करें. इस बीच यह डिसाइड कर लें कि लव बाइट कहां देनी है. अगर आप दोनों इसे छुपाना चाहते हैं, तो छाती और कंधे पर ट्राई करें, लेकिन अगर आपको इसमें कोई हिचकिचाहट नहीं, तो गर्दन बेस्ट ऑप्शन है. जब आपको लगे कि पार्टनर परफेक्ट मूड में है, तभी होंठों को ‘ओ’ की तरह बना लें और त्वचा को धीरे-धीरे सक करें. ज़्यादातर मामलों में 30 सेकंड्स के भीतर लव बाइट दिखने लगती है, पर कुछ लोगों को दो मिनट भी लग सकता है.

लव बाइट से जुड़ी दिलचस्प बातें

1. दो हफ़्ते तक रह सकता है लव बाइट

आपको जानकर हैरानी होगी कि आपका लव बाइट दो हफ़्ते तक आपके प्यार का इज़हार कर सकता है. लव बाइट पर हुए रिसर्च में यह बात सामने आई है कि कितनी इंटेन्सिटी के साथ लव बाइट लिया गया है और पार्टनर की हेल्थ कैसी है, इन दो बातों पर यह निर्भर करता है कि कितने दिन तक लव बाइट दिखेगा.

2. आयरन की कमीवालों को जल्दी मिलता है लव बाइट

अगर हल्का सा दबाव या खरोंच लगने पर ही आपकी नीली या काली पड़ जाती है, तो आपके शरीर में रेड ब्लड सेल्स, व्हाइट ब्लड सेल्स और प्लैटलेट की कमी हो सकती है. यही कारण है कि बाकी लोगों के मुकाबले आयरन की कमीवालों को लव बाइट जल्दी मिल सकता है.

3. कामसूत्र में विशेष वर्णन

अगर आपको लगता है कि लव बाइट आज के ज़माने की बात है, तो आपको बता दें कि इसका ज़िक्र वात्स्यायनजी ने कामसूत्र में भी किया है. इतना ही नहीं उन्होंने आठ तरह के लव बाइट्स के बारे में विस्तार से बताया है.

4. इसका इंस्टेट इलाज नहीं

लव बाइट को छिपाने के लिए ज़्यादातर लोग तुरंत ब़र्फ का इस्तेमाल करते हैं, पर इसका असर होने में भी समय लगता है. इसका तुरंत कोई इलाज नहीं है, क्योंकि यह त्वचा के ऊपरी हिस्से की बजाय भीतर मौजूद होता है, इसलिए इसे सामान्य होने में उतना ही समय लगता है कि जितना किसी और चोट या घाव को.

5. इसके सपने देखना बिगड़े रिश्ते की निशानी है

अगर आपको भी लव बाइट के सपने आते हैं या फिर आप हर व़क्त इसी के बारे में सोचते रहते हैं, तो इसमें कुछ भी रोमांटिक नहीं, बल्कि यह आपकी मानसिक दशा को दर्शाता है, जिसका कारण है आपकी ख़राब रिलेशनशिप है. या फिर यह आपके दिल और दिमाग़ की लड़ाई भी हो सकती है. अब सपनों पर भला किसका ज़ोर है, पर रिश्तों पर तो है. अगर आपको भी ऐसे सपने आते हैं, तो एक बार फिर अपने रिश्ते पर ग़ौर करें कि कहीं आपसे तो कोई चूक नहीं हो रही.

– अनीता सिंह

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पहला अफेयर: यादों के रंग… (Pahla Affair: Yaadon Ke Rang)

Love Stories
पहला अफेयर: यादों के रंग… (Pahla Affair: Yaadon Ke Rang)

वो उम्र ही लड़कपन की थी, जिनमें कुछ मधुर यादें, सुखद एहसास के क्षण समाये हुए थे, जिसकी याद आज भी मेरे होंठों पर मुस्कुराहट ले आती है. बात उन दिनों की है, जब मेरा कॉलेज ख़त्म हुआ था. छुट्टियां चल रही थीं. पापा ने घर में पेंट करवाने का विचार किया. मेरी होम डेकोरेशन में अच्छी नॉलेज होने के कारण घर को रेनोवेट कराने की ज़िम्मेदारी मुझे दी गई. कलर, पेंट के डिब्बों व ब्रश के साथ मज़दूरों ने घर में काम करना शुरू किया.

सहसा एक आवाज़ सुनाई दी, “एक ग्लास पानी मिलेगा.” एक मधुर-सी आवाज़ कानों में घुल गई. मैं उसे एकटक देखती रह गई. वह शख़्स मेरी ही उम्र का था. बड़ा ही आकर्षक व्यक्तित्व, नीली आंखें. उसका चलना, बैठना, उसकी हर बात मुझे लुभाती. उसकी बड़ी पलकें विशेषकर उसकी नीली आंखें मुझे उसकी ओर खींच ले गईं. फिर तो न जाने चाय-पानी के बहाने मैं उस कमरे में कितनी बार ही चक्कर लगा आती, जहां वह अपना काम कर रहा था. जब वह ब्रश चला रहा होता, मैं ख़ामोश-सी उसे देखती रहती.

धीरे-धीरे मेरी दीवानगी एक तरफ़ा प्यार में कब बदली, मैं जान भी न सकी. कई बार मैंने अपने आपको मन ही मन डांटा भी था कि एक पेंट करनेवाले मज़दूर के प्रति इतना आकर्षण क्यों? पर न जाने क्या था, मैं चाहकर भी रुक नहीं पाती. उसकी उन नीली आंखों में न जाने कैसी कशिश थी कि मैं डूबती ही चली गई. पहले-पहले तो वो सकुचाया-सा रहता, फिर धीरे-धीरे बात करने लगा था. उसकी बोलती आंखें दिल में नए ख़्वाब जगातीं. जब भी वह दिखाई नहीं देता, मैं बेचैन हो उठती. उस दिन वो काम पर नहीं आया था. वह प्रतियोगी परीक्षा देने गया है, इसकी जानकारी पेंट करनेवाले मज़दूरों के हेड ने दी.

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तो जनाब पढ़ते भी हैं. “क्या लाल-पीले रंगों के बीच काले अक्षर समझ में आते हैं?” अगले दिन जब मैंने पूछा, तो तुरंत जवाब मिला, “क्यों नहीं.’ काले अक्षर ही नहीं, मैं बहुत-सी बातें भी समझता हूं.” तो क्या वह मेरे अंदर उमड़ती भावनाओं को भी समझता है? घर की पेंटिंग का काम लगभग पूरा हो चुका था. मेरा दिल ज़ोरों से धड़कने लगा कि अब मैं तो उसे नहीं देख पाऊंगी. जाते व़क्त उसने मुझे एक काग़ज़ की पर्ची दी, जिस पर लिखा था…‘ प्यार अपने आप में एक अनोखा एहसास है. ये वो अफ़साना है जो ख़ुद-ब-ख़ुद बयां होता है. यह जीवन का सबसे प्यारा समय है.

आप बहुत अच्छी हैं. कोई व्यक्ति आप से प्रभावित हुए बगैर नहीं रह सकता, पर आज की हक़ीक़त यही है कि हमारे बीच बहुत-से फासले हैं… परिवार के, जाति के, अमीरी-ग़रीबी के, जिनसे पार पाना नामुमकिन है. ज़िम्मेदारियों से लदा मेरा व्यक्तित्व है. मैं चाहकर भी तुम्हारी मंज़िल नहीं बन सकता.’ मेरा पहला प्यार, जिसकी क़िस्मत में अधूरा रहना लिखा था, अधूरा ही रह गया.

वो चला गया हमेशा के लिए. मैं उसे भीगी आंखों से देखती रह गई थी. न रोक सकती थी, न ही किसी से कुछ कह सकती थी. जिस सच्चाई से वह रू-ब-रू कराकर गया था, उसे तो मैं भी नहीं बदल सकती थी. मैं जिस आसमान में उड़ रही थी, वहां से उतरकर ज़मीन पर आ गई. व़क्त रुकता नहीं, ज़िंदगी थमती नहीं. ये वो मुक़ाम नहीं था, जहां मैं ठहर जाती. पर उसकी नीली आंखें जब-जब मेरे ज़ेहन में याद बनकर उमड़तीं, तो मेरी आंखें सजल हो जातीं. बड़ी बेनूर थी ये रूह मेरी, तुम्हारे आने से पहले, तुम्हारी यादों की कशिश ने रंग भर दिए इसमें ज़िंदगी के. अब तक ख़ामोश पड़ा था दिल का आंगन, तुम्हारी आहटों की ख़ुशबू ने इसमें मुहब्बत के फूल खिला दिए. लफ़्ज़ों को जैसे वजह मिल गई बोलने की. यही मेरा जहां है, यही मेरी कहानी.

– शोभा रानी गोयल

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पहला अफेयर: ख़ूबसूरत बहाना..(Pahla Affair: Khoobsurat Bahana)

Pahla Affair

पहला अफेयर: ख़ूबसूरत बहाना… (Pahla Affair: Khoobsurat Bahana)

बैंक में मेरी छवि एक शर्मीले स्वभाव वाले अफसर की थी. अपने केबिन में एकांत में अकाउंट के आंकड़ों में उलझे रहना ही मुझे भाता था. घर पर भी मैं कम ही बोलता था. मेरी अंतर्मुखी प्रवृत्ति देख भाभी अक्सर कहतीं, “देवरजी ऐसे अकेले-अकेले मौनी बाबा बनकर रहोगे, तो कौन तुम्हें अपनी लड़की देगा? संन्यासी बनने का इरादा है क्या?”

मैं भी हर बार की तरह हंसकर यही कहता, “क्या करूं भाभी लड़कियों के सामने बड़ा ही संकोच होता है.”

कुछ दिनों बाद दिवाली थी. भइया-भाभी ने मुझे दीदी को लाने उनकी ससुराल भेज दिया. दीदी की ससुराल में काफ़ी आवभगत हुई. खाना खाने के दौरान ही एक मधुर आवाज़ कानों में पड़ी, “आप तो कुछ खा ही नहीं रहे, एक रोटी और लीजिए ना.” मैंने देखा तो दीदी की ननद मानिंदी हौले-हौले मुस्कुरा रही थी. उसकी सौम्य मुस्कुराहट में न जाने क्या बात थी, मैं उसे देखता ही रह गया. आंखें मिलीं और मेरे दिल में पहली बार अजीब-सी हलचल हुई. अब मैं मानिंदी की एक झलक पाने को ही बेताब रहता. उसकी खिलखिलाती हंसी और उसकी मासूमियत में अजीब-सी कशिश थी.

मैं कुछ-कुछ समझने लगा था कि शायद इसी को प्यार कहते हैं और अब मैं भी इसकी गिरफ़्त में आ चुका हूं. एक दिन मैं पानी पीने के बहाने डायनिंग रूम में आया. मानिंदी फिल्मी पत्रिका पढ़ते-पढ़ते कुछ गुनगुना रही थी, “होशवालों को ख़बर क्या, बेख़ुदी क्या चीज़ है…” दीदी ने उसे छेड़ा, “मेरा भाई है ही इतना प्यारा कि उसे देखकर लड़कियां अपने होश खो बढ़ती हैं… बस थोड़ा शर्माता है, उसे इश्क़ करना सिखाना पड़ेगा.”

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“धत् भाभी…” कहते हुए शर्माकर वह भागी और सीधे आकर मुझसे ही टकरा गई. फिर आंखें चार हुईं और उसके गालों पर हया की सुर्ख़ी उतर आई. वो फिर भागी, मैं हिरणी-सी भागती मानिंदी को देखता ही रह गया. उसकी चंचलता, चपलता और अल्हड़पन पर मैं मर मिटा.

इतने में ही दीदी ने बताया कि कल मुंबई की टिकट कंफर्म हो गई. यह सुनकर तो मैं जिसे आसमान से सीधे ज़मीन पर गिर पड़ा. मेरे होश ठिकाने आ गए थे. मानिंदी ने उदास होकर दीदी से पूछा, “भाभी आप कल चली जाएंगी?” पर न जाने क्यों मुझे ऐसा लगा जैसे उसे मेरा विरह सता रहा है. मुझे रातभर नींद नहीं आई. करवट बदलते-बदलते न जाने कब सुबह हो गई. जीजाजी और उनके परिवारवाले हमें विदा कर रहे थे. मानिंदी दूर खड़ी जुदाई की पीड़ा झेल रही थी. उसकी आंखों में साफ़ नज़र आ रहा था.

रास्ते में दीदी ने न जाने क्यों अचानक पूछा, “मानिंदी के बारे में क्या ख़्याल है?” मैं चुप ही रहा, शायद दीदी को हमारे मौन प्रेम की भनक लग चुकी थी. घर पहुंचकर भइया ने दीदी से पूछा, “सफ़र कैसा रहा?” दीदी ने मुस्कुराकर कहा, “प्रदीप से ही पूछ लो.” भाभी भी किचन से आकर बोलीं, “क्या बात है देवरजी, बदले-बदले से सरकार नज़र आ रहे हैं.” मुझे तो कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था कि यह सब क्या चल रहा है. कुछ समझ पाता इससे पहले ही दीदी ने तपाक से जवाब दिया, “बात ही कुछ ऐसी है. प्रोजेक्ट मानिंदी सफल रहा, “भइया भी फ़ौरन बोले, “तो बात चलाई जाए?”

अब मैं सब समझ चुका था कि ये सब भइया-भाभी की ही मिलीभगत थी. दीदी के ससुराल भेजना तो स़िर्फ एक बहाना था. लेकिन मुझे कोई गिला नहीं, यह बहाना इतना हसीं थी कि मुझे मेरी ज़िंदगी का सबसे ख़ूबसूरत मक़सद मिल गया था. मेरा पहला प्यार, मेरी प्यारी मानिंदी, जो कुछ ही दिनों में मेरी जीवन संगिनी भी बननेवाली थी!

– प्रदीप मेहता

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१० रोमांटिक तरीक़ों से पार्टनर को कहें आई लव यू (10 Romantic Ways To Say I Love You)

प्यार (Love)… किसी के लिए महबूब के साथ ज़िंदगी बिताने का ख़याल है, तो किसी के लिए उसके ख़याल में सारी ज़िंदगी गुज़ार देना. कोई प्यार में जीना चाहता है तो कोई जान तक निसार कर देता है. जनाब प्यार का एहसास ही कुछ ऐसा होता है. एक पल में दुनिया बदल जाती है… बदली हुई फ़िज़ां..बदली हुई रुत… बदला हुआ समा…और तो और चेहरे की रंगत भी… एक गुलाबी निखार… जो बता देता है कि आख़िर आपको प्यार हो ही गया है. लेकिन स़िर्फ प्यार होने से कुछ नहीं होता, माना कि उनसे नज़रें मिलते ही आपका दिल तेज़ी से ध़़ड़कने लगता है, पलकें झुक जाती हैं और चेहरे पर गुलाबी सुर्खी छा जाती है, लेकनि जिससे प्यार हुआ है उससे इसका इज़हार करना भी तो ज़रूरी है, क्योंकि आई लव यू (I Love You) कहना कोई आसान काम नहीं. चलिए, हम आपको बता देते हैं कि प्यार का इज़हार कैसे किया जाए.

Ways To Say I Love You

‘मैं तुम्हें प्यार करता हूं’ मात्र एक वाक्य भी बनकर रह सकता है, अगर उसे सही ढंग से कहना न आए तो! प्यार का इज़हार करने के अनगिनत तरी़के हो सकते हैं. अपने प्रिय से अपनी भावनाओं का इज़हार करते समय कभी भी शब्दों को लेकर न तो कोई कंजूसी करें, न ही स्वयं को सीमित रखें. आपके लिए आपका साथी, आपकी प्रेमिका कितनी ख़ास है, यह जतलाना न स़िर्फ रिश्तों में एक जुड़ाव पैदा करेगा, वरन् इससे जीवन में रोमांस भी बढ़ेगा और त्वचा की रंगत भी… जी हां क्योंकि ये प्यार ही तो है जो चेहरे को सुर्ख गुलाबी निखार देता है.

कुछ यूं कहें दिल की बात-

1. अपने साथी के लिए एक रोमांटिक कविता लिखें. इस बात की चिंता न करें कि उसमें शब्दों और रिद्म का मेल है या नहीं. उसमें ख़ास बात यह है कि उसे आपने लिखा है और वह आपके प्यार की सच्ची अभिव्यक्ति है.

2. आजकल मोबाइल पर एसएमएस के चलन ने प्यार के इज़हार को और भी आसान बना दिया है. अपने साथी को रोमांटिक मैसेज भेजें. हो सकता है यह आपको प्रैक्टिकल न लगे, लेकिन रिश्तों में ख़ुशबू तभी बिखरती है जब फूल खिलाएं जाएं.

3. ये ज़रूरी नहीं कि एक बार प्यार का इज़हार होने के बाद जब रिश्ता जुड़ जाए, पति-पत्नी बन जाएं तो तो फिर आई लव यू कहने की ज़रूरत ही नहीं होती. माना कि आप दोनों के बीच प्यार है, लेकिन समय-समय पर इसे जतलाना भी ज़रूरी है. माना कि हम मुहब्बत का इज़हार नहीं करते. इसका मतलब ये तो नहीं कि हम प्यार नहीं करते. यह बात प्रैक्टिकली लागू नहीं होती.

4. बेशक आप दिन-रात एक ही छत के नीचे गुज़ारते हों, लेकिन कुछ शामें घर से बाहर यह जानने के लिए गुज़ारें कि आपके प्यार की पसंद और आदतें क्या हैं. हर तरह की उलझनों और ज़िम्मेदारियों को कुछ समय के लिए झटक कर उनके साथ एक गुलाबी शाम गुज़ारें यानी उन्हें किसी रेस्तरां या क्लब में जाएं. उसकी आंखों में झांकें और उसके मनपसंद खाने का ऑर्डर देते हुए उसके नखरे उठाएं.

5. आते-जाते यों ही उसे छू लें, बालों पर हाथ फेर दें, आंखों से इशारे करें. शर्म के मारे उनका चेहरा गुलाबी न हो जाए तो कहना.

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Romantic Ways To Say I Love You

6. आप एक दिन के लिए किसी होटल में भी अपने साथी के लिए कमरा बुक करा उसे स्पा या मसाज का मज़ा लूटने का मौक़ा दे सकते हैं. कुछ घंटे टब में स्नान करते हुए बिताएं.

7. रोमांटिक फ़िल्म देखने जाएं. उन लम्हों को साथ जीएं. साथ में घर में बैठकर रोमांटिक गाने सुनें. अगर आप दोनों पढ़ने के शौक़ीन हैं, तो एक दोपहर कोई कविता की क़िताब पढ़ते हुए गुज़ारें. ह़फ़्ते में एक दिन तो कम-से-कम उनकी पसंद के फूलों जैसे- रजनीगंधा या गुलाब का बुके अवश्य लाएं, फिर देखिए उनके चेहरे पर कैसे गुलाबों-सा निखार आ जाता है.

8. अक्सर सुनने में आता है कि शादी के कुछ सालों बाद प्यार ख़त्म हो जाता है, पर सच तो यह है कि पति-पत्नी टेक इट फॉर द ग्रांटेड की तर्ज़ पर जीने के आदी हो जाते हैं. बस थोड़ा-सा नयापन, थोड़ा-सा चुलबुलापन उनकी ज़िंदगी में फिर शुरुआती दिनों का प्यार वापस ला सकता है. जगह-जगह जैसे तकिए के नीचे, ऑफ़िस बैग में, लंच बॉक्स, शर्ट की पॉकेट में ‘आई लव यू’ की स्लिप रख दें. यह बचकानापन नहीं है. इन्हें पढ़ तो नाराज़ साथी भी खिल उठेगा.

9. उसे कहें कि ‘तुम जैसे हो मैं तुम्हें उसी रूप में चाहता हूं.’,  ‘तुम्हारा साथ मुझे ख़ुशी देता है.’,  ‘तुम्हारा मेरी ज़िंदगी में आना, मेरी ख़ुशक़िस्मती है.’

ये शब्द प्यार की डोर को और मज़बूत करते हैं. कॉम्पिलमेंट देना प्यार के बंधन को मज़बूत करता है. वह चाहे रोज़ अच्छा दिखता हो, लेकिन फिर भी रोज़ उसकी प्रशंसा करना न भूलें. अगर आलोचना भी करनी हो, तो यह जताएं कि आप ऐसा इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि आपको और संवारना-निखारना चाहते हैं. क्या इससे बेहतर कोई और तरीक़ा हो सकता है प्यार करने का?

10. प्यार का इज़हार करने में स्पर्श भी एक अहम् भूमिका निभाता है. अपने साथी के साथ बैठकर उसका हाथ पकड़ें, उसे अपने सीने से लगाएं या साथ चलते हुए हाथ थाम लेना प्यार को व्यक्त करने का सबसे सहज तरीक़ा है. स्पर्श बिना कहे भी बहुत कुछ कहने की ताक़त रखता है. आपकी छुअन प्यार ही तो है और अपने प्यार का एहसास आपको उनकी हसीं गुाबी रंगत से साफ़ झलकता नज़र आएगा. – आप जिसे प्यार करते हैं, उसके साथ अधिक-से-अधिक समय बिताने की कोशिश करें. जैसे- उसके साथ कभी-कभार डेटिंग पर जाएं, लॉन्ग ड्राइव पर निकल जाएं या फिर शॉपिंग करें. अपने साथी को कुछ ऐसी चीज़ें दें, जो उसे अपने ख़ास होने का एहसास कराए और आपके रोमांटिक होने का भी. प्यार स़िर्फ ख़ूबसूरत एहसास ही नहीं, बल्कि जीने की ज़रूरत भी है. यह मन को स्वस्थ रखता है तभी तो चेहरे पर गुलाबी निखार आता है और आप रहती हैं हमेशा
जवां-जवां…

– संजीव

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पहला अफेयर: कैसा तेरा प्यार…? (Pahla Affair: Kaisa Tera Pyar)

Pyar Ki Kahani

पहला अफेयर: कैसा तेरा प्यार…? (Pahla Affair: Kaisa Tera Pyar)

वो नज़रों से प्यार करना तेरा, पर प्यार के साथ-साथ हर बात पर तक़रार करना तेरा… तेरी शरारतों से ही नहीं, तेरी बदतमीज़ियों से भी इश्क़-सा हो गया था मुझे. हसीन था मुहब्बत का वो मंज़र. चाहत से लबरेज़ वो दिन-रात… सब बेहद ख़ुशगवार था. लेकिन कहीं न कहीं कुछ तो कमी थी… मैं भी जानती थी, तुम भी जानते थे कि हम चाहते हुए भी अभी दो से एक नहीं हो सकते… हमें इंतज़ार करना होगा. वजह! न तुम्हारे पास कोई जॉब था, न ऐसा बैकग्राउंड कि हमारे परिवारवाले तैयार हो सकें. तुमने अपनी एजुकेशन भी तो पूरी नहीं की थी… उस पर तुम्हारा ज़िंदगी को जीने का अलग ही अंदाज़. बेपरवाह-सा रवैया…

“मैं न बीते कल में विश्‍वास करता हूं, न आनेवाले कल की कल्पना… मैं आज में, यथार्थ में जीता हूं और आज का सच यही है कि हम साथ हैं. फ्यूचर किसने देखा है… क्या पता कल क्या हो? उसके लिए हम आज को नहीं खो सकते…”

रौशन ये तुम्हारा नज़रिया हो सकता है, पर मेरा नहीं. मुझे फिक्र होती है आनेवाले कल की. हमारे रिश्ते के भविष्य की…

“स्मिता, तुम प्यार करती हो न मुझसे, तो कुछ न कुछ हो ही जाएगा. बस तुम साथ मत छोड़ना, वरना टूट जाऊंगा मैं… ”

पर कहीं न कहीं तो मैं टूटती जा रही थी… तुम स़िर्फ बातें ही करते हो… न कुछ करने की कोशिश है, न किसी बात को गंभीरता से लेते हो. अपने तरी़के से हर चीज़ करनी है, अपनी मर्ज़ी से ही बात करनी है… अजीब रवैया था यह.

शायद जो बदतमीज़ियां पहले मुझे तुम्हारी ओर आकर्षित करती थीं, वही अब मुझे तुमसे दूर करती जा रही थीं… हर रोज़, हर पल मन में सवाल, दुविधाएं बढ़ रही थीं… क्या तुम्हारी ज़िंदगी में और भी है कोई? क्या तुम मुझे लेकर गंभीर ही नहीं… क्या तुम स़िर्फ अपना व़क्त गुज़ार रहे हो… पता नहीं क्या-क्या और किस-किस तरह के ख़्याल!

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उस पर गौरव ने इस दुविधा को और बढ़ा दिया… “स्मिता मैं तुम्हारा अच्छा दोस्त हूं, तुम्हारा बुरा तो नहीं चाहूंगा, तुमने आख़िर उस रौशन में क्या देखा? वो किसी भी तरह से तुम्हारे लायक नहीं, वो स़िर्फ टाइमपास कर रहा है. क्यों अपना व़क्त, अपनी ज़िंदगी उसके पीछे बर्बाद कर रही हो. तुम जैसी न जाने कितनी होंगी उसकी लाइफ में. वैसे भी तुम कहती हो न कि दिनभर ऑनलाइन रहता है… क्या कभी तुमने पूछा है कि किससे बात करता है? क्या बात करता है? क्यों बात करता है? होश में आओ… ”

गौरव की बातों पर गंभीरता से ग़ौर किया, तो लगा सच तो कह रहा है. रौशन की तरफ़ से मुझे कभी यह महसूस नहीं हुआ कि उसे बहुत ज़्यादा मेरी ज़रूरत है अपनी ज़िंदगी में, शायद मैं अकेले ही, अपनी तरफ़ से इस रिश्ते को निभाए जा रही थी.

ज़रूरी नहीं कि हर समय भावनाओं में बहकर ही निर्णय लिए जाएं, कभी-कभी बहुत ज़रूरी होता है अपने स्वाभिमान के लिए कठोर निर्णय लेकर आगे बढ़ा जाए. वरना ज़िंदगी वहीं उलझकर रह जाएगी.

मैंने रौशन से बात की… “हम कब शादी करेंगे?”

“अरे स्मिता, बस थोड़ा इंतज़ार करो. जिस दिन तुम्हारे लायक हो जाऊंगा, बारात लेकर सीधे तुम्हारे घर आऊंगा…”

“…लेकिन तुम कोशिश करोगे, तभी तो किसी लायक बनोगे. तुम तो इसी ज़िंदगी में ख़ुश हो. तुमको लग रहा है, जो जैसा चल रहा है, चलने दिया जाए.”

“हां, तो इस ज़िंदगी में भी क्या बुरा है…”

तुम जिस तरह से हल्के अंदाज़ में जवाब दे रहे थे, मैं समझ गई थी कि गौरव कहीं न कहीं सही था अपनी जगह… ज़रूरी नहीं कि असल ज़िंदगी में आपको फिल्मी हीरो की तरह परफेक्ट पार्टनर ही मिले, हम अक्सर धोखा खा जाते हैं. लोगों को पहचानने में. अगर ग़लती हो गई, तो बेहतर है समय रहते उसे सुधार लिया जाए. शायद मुझसे भी ग़लती हुई थी रौशन को पहचानने में. इस ग़लती को सुधारना ज़रूरी थी.

मैंने उसे मैसेज किया- तुम मेरी ज़िंदगी का अहम् हिस्सा हो, पर मुझे कभी यह महसूस क्यों नहीं हुआ कि मैं भी तुम्हारी ज़िंदगी में उतनी ही अहमियत रखती हूं?

मेरे दोस्त, यहां तक कि मेरे घरवाले भी जानते हैं हमारे रिश्ते के बारे में, लेकिन मुझे आजतक न तुम्हारे दोस्तों के बारे में पता है, न घरवालों के बारे में… और तुम बड़ी-बड़ी बातें करते हो… मुझे नहीं लगता हमारा रिश्ता आगे बढ़ सकता है…
मुझे लगा, शायद इस बात से तो तुम्हें फ़र्क पड़ेगा… लेकिन नहीं, तुमने इसे भी बेहद हल्के अंदाज़ में लिया और तुम्हारी तरफ़ से कभी कोई कोशिश नहीं हुई मुझे रोकनी की…

जानती हूं, तुम आगे बढ़ चुके हो, पर मैंने तो सच्चे दिल से तुमसे प्यार किया था, मैं कैसे आगे बढ़ सकती थी… वहीं खड़ी हूं, उसी मोड़ पर… संभाल रही हूं ख़ुद को… पता नहीं किस उम्मीद में जी रही हूं… हम भले ही बड़ी-बड़ी बातें करते हैं कि प्रैक्टिकल होकर सोचना चाहिए, पर मैं नहीं हूं प्रैक्टिकल… प्यार और रिश्तों में कैसे कोई प्रैक्टिकल हो सकता है… पता है, लोग खेल जाते हैं दिलों से, लेकिन अपना बस नहीं इन भावनाओं पर… हां, अब इतना समझ चुकी कि तुम्हारे इंतज़ार से कुछे हासिल नहीं होगा, बस आगे बढ़ना ही एकमात्र रास्ता है… उसी रास्ते पर चलने की कोशिश में हूं, भले ही अभी लड़खड़ा रही हूं, पर धीरे-धीरे सीख जाऊंगी… संभल जाऊंगी… तुम्हारे बिना जीना सीख जाऊंगी…!

– गीता शर्मा

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20 सेक्स फैक्ट्स, जो हर कपल जानना चाहता है (20 Sex Facts Every Couple Must Know)

सेक्स, रोमांस, प्यार, चाहत, मोहब्बत हर किसी के लिए प्यार के अपने मायने होते हैं. भले ही इसके अनगिनत नाम हों, पर एहसास तो एक ही है, एक-दूसरे को दुनिया जहां की ख़ुशियां देने का जुनून, एक-दूसरे पर मर-मिटने को तैयार, एक-दूसरे की ख़ातिर सब कुछ कुर्बान कर देने का जज़्बा… हर कपल (Couple) के लिए सेक्स (Sex) एक ऐसा विषय है, जिसके बारे में वो जानना तो बहुत कुछ चाहता है, पर बहुत बार आधी-अधूरी जानकारी ही उसके पास होती है. सेक्स से जुड़े ऐसे ही कई पहलुओं के बारे में हर कपल को हम रूबरू करा रहे हैं..

Sex Facts

  1. अक्सर ऐसा सोचा और कहा जाता है कि बच्चे के जन्म के बाद पत्नी को सेक्स में रुचि नहीं रह जाती, जो कि सरासर ग़लत है. रिसर्च बताते हैं कि बच्चे के जन्म के बाद क्लाइमेक्स (चरमोत्कर्ष) की तीव्रता बढ़ जाती है. इसका कारण है नर्व एंडिग का ज़्यादा सेंसिटिव होना.
  2. कम्युनिकेशन (संवाद) बनाए रखें. यह आपसी प्यार और रिश्ते की मज़बूती के लिए बहुत ज़रूरी है. इससे सेक्स लाइफ़ में भी सुधार होता है, क्योंकि बातचीत आपको क़रीब लाती है. इनके अभाव में रिश्ता पनप नहीं पाता.
  3. कभी-कभार आप भी सेक्स के लिए पहल करें. अक्सर महिलाएं ऐसा करने से हिचकिचाती हैं, पर ध्यान रहे, आपका पहल करना उन्हें सुखद एहसास में डुबा देता है. यदि बच्चे छोटे हैं तो सेक्स लाइफ़ में मुश्किलें भी आती हैं और महिलाएं इतनी खुली व रिलैक्स भी नहीं रह पातीं, ऐसे में बच्चों के सोने का इंतज़ार करने से अच्छा है जब भी मौक़ा लगे, प्यार में खो जाएं.
  4. कई बार महिलाएं समझ ही नहीं पातीं कि कौन-सी चीज़ उन्हें उत्तेजित करती है. पहले ख़ुद ही पता लगाएं. कई बार वे जानकर भी बताने से शरमाती हैं. अतः ख़ुद ही कल्पना करें व एन्जॉय करें. जब सहज लगे, तब पति को बताएं. इससे फोरप्ले मेंं आसानी होती है.
  5. शरीर का बेडौल होना या शेप में न होना कई बार महिलाओं में हीनता की भावना भर देता है. इसका एक कारण टीवी तथा फ़िल्मों में ङ्गजीरो फ़िगरफ को महत्व दिया जाना है. याद रखें, वास्तविक जीवन फिल्मों से बहुत अलग होता है. आत्मविश्‍वास बनाए रखें, तभी आप पति से जुड़ पाएंगी. हां, बैलेंस्ड डायट व व्यायाम के ज़रिए सुडौल शरीर पाने की कोशिश अवश्य करें.
  6. बच्चे होने के बाद उनकी देखभाल व घर के कामकाज महिलाओं को बहुत थका देते हैं. उन्हें सेक्स की इच्छा ही नहीं रह जाती. अपने आराम के लिए अवश्य समय निकालें, तभी आपका सेक्स जीवन संतुष्टिपूर्ण होगा. चिड़चिड़ाहट नहीं होगी और आप ख़ुश रहेंगी.
  7. सेक्स में आप क्या चाहती हैं? आपको क्या अच्छा लगता है? ये पति को बताएं, परंतु सेक्स के दौरान नहीं, जब आप दोनों रिलैक्स हों, सही समय हो और मूड भी हो, क्योंकि इन बातों के लिए सही समय होना बहुत ज़रूरी है.
  8. एक-दूसरे की कंपनी एन्जॉय करें. धीरे-धीरे प्यार की ओर बढ़ें. सेक्स से पूर्व काफ़ी देर तक किया गया फोरप्ले दोनों को चरम संतुष्टि देता है.
  9. आजकल अलग-अलग रंगों व ख़ुशबुओं में कंडोम मिलते हैं. ये कई प्रकार के होते हैं, जैसे- लुब्रिकेटेड, रिंड व डॉटेड. इससे फोरप्ले के दौरान उत्तेजना और आनंद बढ़ता है. अतः इसका उपयोग करें.
  10. सेक्स संबंधी क़िताबों, फ़िल्मों, कहानियों में सेक्स को बढ़ा-चढ़ाकर बताया जाता है. सत्य यह है कि सामान्य कपल्स ह़फ़्ते में 1 या 2 या इससे भी कम बार सेक्स करते हैं. अतिशयोक्ति पर विश्‍वास न करें. ध्यान रखें, क्वांटिटी की अपेक्षा क्वालिटी महत्वपूर्ण होती है.

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Sex Facts

11. क्लाइमेक्स, चरमोत्कर्ष या ऑर्गेज़्म एक आनंददायी संतुष्टिपूर्ण अनुभव है. कई जोड़े इस बात से नाराज़ रहते हैं कि दोनों एक साथ चरमोत्कर्ष पर नहीं पहुंचते. ऐसा हो सकता है, परंतु इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता. महिलाएं एक से अधिक बार ऑर्गेज़्म का अनुभव करती हैं.

12. अच्छी सेक्स लाइफ़ के लिए आपका शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ रहना बहुत आवश्यक है. इसके लिए महत्वपूर्ण है बैलेंस्ड डाइट, थोड़ी-बहुत एक्सरसाइज़, भरपूर नींद औैर ज़्यादा चाय, कॉफी, सिगरेट या शराब का सेवन न करना.

13. सस्ती सेक्स क़िताबों, पोर्नोग्राफ़िक फ़िल्मों और समाचार-पत्रों में आए दिन कई विज्ञापनों में पेनिस (लिंग) के आकार या लंबाई को बढ़ा-चढ़ाकर एवं कम लंबाई को एक समस्या के रूप में दिखाया जाता है, जिससे युवावर्ग भ्रमित हो जाता है और तनावग्रस्त रहकर उल्टे-सीधे उपाय करने लगता है. ये सब ग़लत है. छोटे आकार से ऑर्गेज़्म में कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता, क्योंकि योनि का केवल एक तिहाई भाग ही सेंसिटिव होता है. अतः सही सेक्स पोज़ीशन में छोटा लिंग भी पूरी तरह चरमोत्कर्ष दे सकता है.

14. सेक्स करते समय किसी और पुरुष की कल्पना उत्तेजित करती है और सेक्स का आनंद बढ़ाती है. अतः कल्पना करें. इसके लिए मन में किसी तरह का अपराधबोध न आने दें. इसमें कोई बुराई नहीं है.

15. यदि पति-पत्नी दोनों वर्किंग हैं, व्यस्त हैं, रात को देर से आते हैं, तो उनकी सेक्स लाइफ़ न के बराबर होती है. ऐसे में बेहतर होता है कि सुबह उठकर फ्रेश मूड में सेक्स का
आनंद उठाएं.

16. कुछ सालों के बाद सेक्स लाइफ़ बोरिंग हो जाती है. इसलिए एक्सपेरिमेंट करते रहें. अलग-अलग पोज़ीशन ट्राई करें. कुछ ऐसा, जो ज़िंदगी में रंग भर दे.

17. सेक्स दोनों को शारीरिक ही नहीं, मानसिक रूप से भी क़रीब लाता है. यही जुड़ाव दांपत्य जीवन की नींव है. ख़ुद का ध्यान रखना, संवरना, ख़ूबसूरत दिखना ज़रूरी है.

18. बढ़ती उम्र के साथ-साथ सेक्स लाइफ़ को जीवंत रखना एक चुनौती है. इसके लिए फोरप्ले का समय बढ़ाएं. नए तरी़के आज़माएं. अपने पुराने दिनों को याद करें. परंतु सेक्स करना बंद ना करें.

19. यदि सेक्स की इच्छा है, परंतु आप बहुत थके हुए व तनावग्रस्त महसूस कर रहे हैं, तो डरावनी फ़िल्म या हॉरर शो देखें या 1 कप कॉफी पीएं. आपका दिल ज़ोरों से धड़कने लगेगा. इससे शरीर में एड्रीनलीन की मात्रा बढ़ जाएगी. यही वह केमिकल है, जो सेक्सुअल एक्साइटमेंट (उत्तेजना) पैदा करता है.

20. रिसर्च बताते हैं कि सिगरेट व शराब सेक्स की क्रिया को प्रभावित करते हैं, क्योंकि इनका सीधा संबंध आपके ब्लड सर्कुलेशन और नर्वस सिस्टम पर प़ड़ता है. इससे उत्तेजना, योनि की चिकनाहट और सेंसेशन कम होता है. शराब व सिगरेट पुरुषों व महिलाओं दोनों पर समान असर डालती है.

 

– डॉ. सुषमा श्रीराव

 

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पहला अफेयर: धुंध के पार (Pahla Affair: Dhundh Ke Paar)

Pyar Ki Kahani

पहला अफेयर: धुंध के पार (Pahla Affair: Dhundh Ke Paar)

किशोरवय की सुनहरी धूप से भरे वे प्रिय दिन कितने सुहाने थे. मेरे चारों ओर बुद्धि प्रदीप्त सौंदर्य का एहसास पसरा हुआ था. इसी आत्मविश्‍वास के कारण मैं तनिक एकाकी हो गई थी. घर से दूर हॉस्टल में रहते हुए भी मैंने कभी भी स्वछंदता का लाभ नहीं उठाया था.
गीत-संगीत का शौक ही मेरे अकेलेपन का साथी था. मेरा शुरू से ही यह मानना था कि संगीत में जो कशिश है, वो न स़िर्फ तन्हाई को, बल्कि हर मुश्किल को दूर कर सकती है. संगीत से यह गहरा लगाव ही मुझे बेहद ख़ुश रखता था.

उन्हीं दिनों हमारी कक्षा पिकनिक पर गई. हरी-भरी पहाड़ियां, कल-कल बहता स्वच्छ झरना व पास ही दरी बिछा हम छात्र-छात्राएं संकोच से बतिया रहे थे. साथ में लाए टेप-रिकॉर्डर पर मधुर, पुराने फिल्मी गीत बज रहे थे. तभी किसी ने प्लेयर बंद कर दिया. एक सहपाठी के विषय में कहा गया कि वह बहुत अच्छा गाता है एवं क्यों न उससे ही कुछ सुना जाए.

“तेरी आंख के आंसू पी जाऊं…” यह गीत गाते हुए वह गौरवर्ण, सुदर्शन सहपाठी मेरी ओर ही क्यों देखे जा रहा था, यह मैं तब समझ नहीं पाई.

उस दिन के बाद हमारी मित्रता हुई, जो धीरे-धीरे असीम सुकोमल भावनाओं की डोर से हमें बांध गई. पहले प्यार ने हम दोनों को कुछ ऐसा छुआ कि कब साथ जीने-मरने का इरादा कर लिया, पता ही नहीं चला.

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मुहब्बत की इन भावनाओं के बीच हमारी पढ़ाई भी चल रही थी. एमबीबीएस के बाद मेरे उस सुख-दुख के सखा को सुदूर नगर स्नातकोत्तर शिक्षा के लिए जाना पड़ा.

वियोग के पल कितने निर्मम थे और कितने कठिन भी. तीन वर्ष पत्रों का आदान-प्रदान रहा. फिर समय की धुंध हमारे रिश्ते के बीच छा गई. धीरे-धीरे पत्रों का सिलसिला कम हुआ और फिर बंद ही हो गया. शायद माता-पिता की आज्ञानुसार वह विदेश चला गया.

बचपन से ही शरतचंद, टैगोर पढ़-पढ़कर पली-बढ़ी मैं उस प्रसंग को विस्मृत न कर सकी. सुगंधित पत्रों व जीवंत स्मृतियों का पिटारा अब भी पास था. शायद एक आस थी कि मेरे पहले प्यार की उन सुखद अनुभूतियों का एहसास उसे भी होगा और कहीं न कहीं उसके मन में भी वो तड़प, वो कशिश तो ज़िंदा होगी ही. नहीं जानती थी कि ये मेरा भ्रम था या हक़ीक़त… पर मैं बस उसकी यादों से बाहर नहीं निकलना चाह रही थी.

और आज… उस धुंध के आर-पार, समय की निष्ठुरता को ठुकराती, एक स्नेहिल आवाज़, टेलीफोन के माध्यम से फिर खनक उठी है,
“मैं सदैव के लिए तुम्हारे पास आ रहा हूं. मेरे मार्ग को अपने ख़ुशी के आंसुओं से सींचे रखना. मुझे पता है कि तुम ख़ुशी में भी ज़ार-ज़ार रोती हो.”

मुझसे पूछे बिना ही उसने जान लिया था कि मेरे नैनों में आज भी उसकी प्रतीक्षा के दीये जल रहे हैं. मेरा इंतज़ार, मेरा प्यार जीत गया था.
मेरी आस ग़लत नहीं थी… मेरी आंखों से सच में आंसू बहे जा रहे थे… पर ये ख़ुशी के आंसू थे, जिनमें ग़मों के सारे पल, जुदाई की सारी रातें और हिज्र के दिनों की सारी शिकायतें धुल गई थीं. अब हमारे दरमियान स़िर्फ प्यार था… बस प्यार ही प्यार…
ख़त्म हो गया था वो इंतज़ार!

– डॉ. महिमा श्रीवास्तव

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पहला अफेयर: हां, यही प्यार है! (Pahla Affair: Haan Yehi Pyar Hai)

Pyar Ki Kahani
पहला अफेयर: हां, यही प्यार है! (Pahla Affair: Haan Yehi Pyar Hai)

प्यार, इश्क़, मुहब्बत, लव, अफेयर… एक ही एहसास के न जाने कितने नाम हैं ये, लेकिन मुझे इस एहसास में डूबने की इजाज़त नहीं थी और न ही चाहत थी, क्योंकि मेरी शादी हो चुकी थी. यह बात अलग है कि मैं उस व़क्त शादी के लिए कतई तैयार नहीं थी. दरअसल, शादी की बातचीत के बीच ही जब मुझे यह पता चला कि लड़केवाले दहेज की मांग करने लगे हैं, तो एक नफरत-सी पाल ली थी मैंने उनके प्रति.

जब अपने होनेवाले पति को देखा, तो मन और भी खिन्न हो गया. सांवला-सा रंग, दुबला-पतला शरीर और उस पर दहेज की मांग. ख़ैर, जैसे-तैसे शादी हो गई. मैं इंकार भी नहीं कर पाई, क्योंकि जिस परिवार में पली-बढ़ी थी, वहां लड़कियों की इच्छा-अनिच्छा को महत्व नहीं दिया जाता था. उस पर पिताजी की आर्थिक स्थिति भी बहुत ज़्यादा अच्छी नहीं थी. पिताजी की इच्छा की ख़ातिर शादी तो मैंने कर ली थी, पर पहले ही दिन अपने पति को सब कुछ साफ़-साफ़ बता दिया कि मुझसे किसी भी तरह के प्यार या अपनेपन की उम्मीद न रखें. उन्होंने हंसकर जवाब दिया कि उम्मीद पर ही तो दुनिया कायम है और अपना बिस्तर अलग लगाकर वो सो गए.

मैं बहुत हैरान हुई, लेकिन मेरे मन में इतनी शिकायतें थीं कि मुझे उनकी हर बात पर चिढ़ होती थी और एक ये थे कि मेरी हर चिढ़ और गुस्से पर बेहिसाब प्यार उमड़ आता था इन्हें. हर बात को प्यार से समझाते, हर व़क्त इनके होंठों पर मुस्कान बिखरी रहती. बहुत संयमित और संतुलित व्यक्ति थे ये. मुझे अक्सर कहते कि कभी न कभी तो तुम मेरे प्यार को समझोगी और तुम भी मुझसे प्यार करने लगोगी.

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एक दिन इनकी मम्मी से मेरी थोड़ी कहा-सुनी हो गई थी और इन्हें भी मैंने दहेज मांगने का ताना दे दिया था. उस पर इन्होंने बताया कि जो भी पैसे दहेज के रूप में मिले, वो मेरे ही अकाउंट में जमा करवा दिए हैं. अपने मम्मी-पापा को वो उस व़क्त नहीं समझा सके थे कि दहेज लेना अपराध है, पर शादी के बाद उन्हें मना लिया.

मैं समझ ही नहीं पा रही थी कि क्या कहूं और क्या न कहूं? इन्होंने मुझे इतना प्यार दिया, इस तरह संभाला कि न कभी ज़ोर-ज़बर्दस्ती की, न कभी पति होने का हक जताया. इनके प्यार में पवित्रता की महक थी, कभी वासना की की गंध नहीं आई. मैं भूखी रहती, तो बच्चों की तरह खाना खिलाते. घर में कोई टीका-टिप्पणी करता, तो उन्हें भी समझाते कि नए परिवेश में घुलने-मिलने में व़क्त लगता है.

इनकी इसी सादगी, समझदारी और सबसे बढ़कर पवित्र प्यार ने मुझे जैसे अपनी और खींच लिया था. मैं हर व़क्त सोचती कि दुनिया में कोई इतना अच्छा और सच्चा कैसे हो सकता है? मैं वाकई ख़ुशनसीब हूं, जो ऐसा जीवनसाथी मुझे मिला, एक अजीब-सा आकर्षण महसूस करने लगी थी मैं इनकी ओर. सोचा था कभी इश्क़ नामक रोग नहीं लगेगा मुझे, मगर इनके प्यार के एहसास ने मुझे भीतर तक भिगो दिया था.

मेरा जन्मदिन था, इनके आने का इंतज़ार कर रही थी और अपने तोह़फे का भी. ये आए और मैं बस इननकी बांहों में सिमट गई. आंखों ही आंखों में बातें हुईं और मुझे मेरी पहली मुहब्बत का एहसास हुआ. मैं समझ गई कि हां, यही प्यार है! उस रात मैं संपूर्ण स्त्री बन गई थी.

आज सात साल हो गए, हमारे दो प्यारे-प्यारे बच्चे हैं. मैं परिवार में पूरी तरह से घुल-मिल चुकी हूं, लेकिन हमारे प्यार में अब भी वही पहले प्यार की महक और कशिश बरकरार है. सचमुच यही मेरा पहला प्यार था. मैं इनसे यानी अपने पति राजेश से बेहद प्यार करती हूं और मुझे अपने प्यार पर नाज़ है.

– देवप्रिया सिंह

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पहला अफेयर: तुम्हारा इंतज़ार है… (Pahla Affair: Tumhara Intezar Hai)

Pahla Affair, Tumhara Intezar Hai

Pahla Affair, Tumhara Intezar Hai

पहला अफेयर: तुम्हारा इंतज़ार है… (Pahla Affair: Tumhara Intezar Hai)

नयन, तुम मेरे दूर के एक रिश्तेदार, इस तरह मेरे दिल के सबसे क़रीबी शख़्स बन जाओगे, वो भी जीवन के 40 वर्ष पूरे होने के बाद, मैंने कभी सोचा भी न था. शादी के बाद पति-बच्चों का भरपूर प्यार मिला, पर तुमने तो जीवन में ऐसे प्रवेश किया कि लगा प्यार का एहसास ही अब जाकर हुआ.

कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मेरे साथ ऐसा होगा… किसी को याद करते ही दिल की धड़कनों का बढ़ना, तेज़-तेज़ चहलक़दमी करना, झूले पर बैठकर आसमान निहारते रहना… इन सबके पीछे तुम थे नयन… इसका एहसास मुझे बहुत दिनों बाद हुआ कि क्यूं तुमसे फ़ोन पर बात करना इतना अच्छा लगने लगा था? क्यूं तुम्हारी पसंद के रंग के कपड़े पहनने की इच्छा होने लगी थी? क्यूं तुमसे बातों-बातों में तुम्हारी सारी पसंद-नापसंद को जान मैं उन्हें अपनाने लगी थी… शायद मुझे तुमसे प्यार हो गया था.

नयन, वो तुम्हारा फ़ोन पर ङ्गहेलोफ बोलना, ऐसी सिरहन पैदा कर देता था कि बस पूछो ही मत. तुम्हारा इतना केयर करना और हर वक़्त मेरी फ़िक्र करना मुझे अंदर तक छू जाता था. ऐसा क्यूं होता था कि मैं अपने दिल की हर बात तुमसे शेयर करती थी? क्यूं तुम मुझसे वही बात कहते, जो मेरे हित में हो? क्यूं मेरा मन अक्सर ये चाहता कि ख़ामोशी के हर पल में तुम्हारी मुहब्बत का ही एहसास हो? क्यों मेरा मन हर पल तुम्हारे ही साथ की ख़्वाहिश करता था और ये चाहता था कि कहीं दूर पहाड़ों की तलहटी में तुम्हारे साथ बैठकर आंखें बंदकर मौन रहकर सारी ज़िंदगी बिता दूं.

नयन, मैंने तुम्हारे अंदर भी ऐसे ही प्यार का उफान महसूस किया था, पर तुमने कभी कुछ नहीं कहा. मैंने लाख कोशिश की, पर तुम्हारी ज़ुबान तक वो बात ला न सकी.

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तुम बेशक मुझसे प्यार न करो, मैं कभी तुमसे इस बात के लिए ज़बरदस्ती नहीं करूंगी, पर नयन मेरा दिल ये मानने को तैयार नहीं, क्योंकि मैं जानती हूं कि तुम भी मुझसे प्यार करते हो. प्यार के इस पवित्र रूप से रू-ब-रू कराने के लिए मैं हमेशा तुम्हारी आभारी रहूंगी.
मुझे ख़ुशी है कि इस उम्र में ही सही, लेकिन इतना पवित्र प्यार मिला मुझे, जिसमें वासना के लिए कोई स्थान नहीं था, जिसमें स़िर्फ आत्मा का सुंदर मिलन था.

नयन, तुमने कभी मेरा किसी तरह से फ़ायदा नहीं उठाया, जबकि तुम मेरे सौंदर्य की हमेशा तारीफ़ करते थे. मेरी गृहस्थी की इतनी चिंता थी तुम्हें कि कहीं मैं जुनून में अपनी गृहस्थी बर्बाद न कर दूं, यही सोचकर तुमने मुझसे दूरी बना ली. मुझे आगे न बढ़ने को कहकर तुमने ये साबित कर दिया कि कितनी परवाह है तुम्हेें मेरी ज़िंदगी की.

तुम्हारी और मेरी मंज़िल एक नहीं, पर नयन, प्यार तो मैं तुमसे करती रहूंगी. मैं तुमसे पूछूंगी नहीं कि तुम्हें भी मुझसे प्यार है या नहीं, पर तुम्हारे उसी एक वाक्य ङ्गआई लव यू टूफ का मैं जीवनभर इंतज़ार करूंगी.

कौन कहता है कि प्यार की उम्र होती है? मैं कहती हूं कि नयन जैसा इंसान जिस किसी को भी मिलेगा, उसे उससे प्यार तो हो ही जाएगा. प्यार में उम्र का बंधन, छोटा-बड़ा होना, ये कहां मायने रखता है? प्यार तो बस हो जाता है. आज मैं एक ज़िम्मेदार गृहिणी हूं, पर नयन को प्यार तो हमेशा करती रहूंगी.

– ऊषा शर्मा

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जानें सेक्स के 7 हेल्दी कारण (7 Healthy Reasons You Should Have Sex)

अपनी रंगत में निखार लाना चाहते हैं या मूड ठीक करना चाहते हैं या फिर कैंसर और हार्ट अटैक के ख़तरे से ख़ुद को बचाना चाहते हैं, तो उसके लिए सबसे जादुई दवाई है सेक्स (Sex). जी हां, यह हम नहीं कहते, बल्कि स्टडी और रिसर्च ने इस बात पर मुहर लगा दी है कि सेक्स न स़िर्फ एक बेहतरीन एक्सरसाइज़ है, बल्कि यह आपको कई गंभीर बीमारियों से बचा भी सकता है. आइए जानें कौन-से हैं वो 7 कारण, जो हर कपल को जानने चाहिए.

Healthy Reasons To Have Sex

1. हेल्दी हार्ट के लिए बेस्ट एक्सरसाइज़

अमेरिकन जरनल ऑफ कार्डियोलॉजी में छपी स्टडी के मुताबिक जो लोग हफ़्ते में दो बार सेक्स करते हैं, वो स्ट्रोक और हार्ट अटैक क ख़तरों से उन लोगों से ज़्यादा सुरक्षित रहते हैं, जो महीने में स़िर्फ एक बार सेक्सुअली इंवॉल्व होते हैं. दरअसल, सेक्स के दौरान औरतन पुरुष एक मिनट में 4 जहां चार कैलोरीज़ बर्न करते हैं, वही महिलाएं तीन कैलोरीज़ यानी आधे घंटे की आपकी सेक्सुअल एक्टिविटी में आप एक ट्रेडमिल पर दौड़ने से ज़्यादा कैलोरीज़ बर्न कर लेते हैं, वो भी फन के साथ. यह बात तो कई रिसर्च में साबित हो चुकी है कि सेक्स एक बेहतरीन एक्सरसाइज़ है, तभी तो हेल्दी हार्ट के लिए इससे बेहतर कुछ हो ही नहीं सकता.

2. बेहतरीन पेनकिलर का काम करता है

कैलीफोर्निया में हुई यह एक स्टडी में यह साबित हुआ कि दर्द के दौरान अगर पार्टनर की रोमांटिक फोटो दिखाई जाए या किसी हैंडसम अजनबी को देखें, तो दर्द से काफ़ी राहत मिलती है. वहीं दूसरी ओर पीरियड्स के दौरान होनेवाले दर्द से राहत पाने के लिए अगर उस दौरान आप सेक्सुअली इंवॉल्व होती हैं, तो दर्द में काफ़ी राहत मिलती है. दरअसल, सेक्स ऑर्गैज़्म एक पेनकिलर की तरह काम करता है, तभी तो सिरदर्द के दौरान अगर सेक्स किया जाए, तो सिरदर्द को छूमंतर होने में व़क्त नहीं लगता.

3. ब्लड प्रेशर को कम करके स्ट्रेस से दूर रखता है

सेक्स के दौरान शरीर में एंडॉर्फिन हार्मोन का स्राव होता है, जो मूड को बूस्ट करने में मदद करता है. स्कॉटलैंड की बायोलॉजिकल सायकोलॉजी में छपी रिपोर्ट के मुताबिक सेक्स के कारण स्ट्रेस के दौरान बढ़नेवाले ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में किया जा सकता है. स्टडी में इस बात पर भी फोकस किया कि ज़रूरी नहीं कि आप सेक्सुअली इंवॉल्व हों, अगर आप मास्टबेशन भी करते हैं, तो भी आपको तनावरहित रखता है, जिससे आपका ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है.

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Healthy Reasons To Have Sex
4. प्रोस्टेट कैंसर के ख़तरे से बचाता है

यूरोपियन यूरोलॉजी में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, जो पुरुष महीने में 21 बार इजैक्यूलेट करते हैं, वो प्रोस्टेट कैंसर के ख़तरे से उन लोगों से 20% ज़्यादा सुरक्षित रहते हैं, जो महीने में चार-से-सात बार इजैक्युलेट करते हैं. पुरुषों के लिए इजैक्यूलेशन के मायने कितने हैं यह तो इसी बात से पता चलता है कि यह उन्हें प्रोस्टेट कैंसर के ख़तरे से बचा सकता है.

5. मिलती है सुकूनभरी नींद

नेशनल स्लीप फाउंडेशन में छपी रिपोर्ट के मुताबिक ऑर्गैज़्म के बाद हमारे शरीर में प्रोलैक्टिन हार्मोन का स्राव होता है, जिससे हमें बहुत अच्छी नींद आती है. आपने भी ग़ौर किया होगा कि सेक्सअल एक्टिविटी के बाद आप और आपके पार्टनर कैसे सुकूनभरी नींद के आगोश में समा जाते हैं और अगली सुबह रिफ्रेश व खिले-खिले नज़र आते हैं. इसका दूसरा पहलू यह भी है कि आप जितनी अच्छी नींद लेते हैं, आपकी सेक्सुअल डिज़ायर उतनी ही अच्छी होती है.

6. पाएं ग्लोइंग-यंग स्किन

अगर अब आप सोचते थे कि कपल्स के चेहरे की चमक का कारण स़िर्फ हेल्दी फूड और एक्सरसाइज़ है, तो आपको बता दें कि इसमें बहुत बड़ा योगदान सेक्स का भी है. सेक्स के दौरान ऑर्गैज़्म शरीर में ब्लड फ्लो की मात्रा बढ़ा देता है, जिससे चेहरे में निखार साफ़ नज़र आता है. यह आपके तनाव को दूर करके आपके मूड को बेहतर बनाता है.

7. हैप्पी मूड से बनता है मज़बूत रिलेशन

हेल्दी सेक्स के कारण शरीर में न्यूरोट्रांसमीटर्स रिलीज़ होते हैं, जिससे आपका मूड बेहतरीन होता है. केमिकल्स और हार्मोंस को छोड़ दें, तो हेल्दी सेक्स आपके रिश्ते को और मज़बूत बनाता है. अपनी मैरिड लाइफ को और ख़ुशहाल और रोमांचक बनाने के लिए हेल्दी सेक्स लाइफ एंजॉय करें.

– अनीता सिंह   

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रिश्तों की बीमारियां, रिश्तों के टॉनिक (Relationship Toxins And Tonics We Must Know)

रिश्ते (Relationships) जीने के आधार हैं… मुहब्बत की शीतल बयार हैं, पर जब इन्हीं रिश्तों में शक, ईर्ष्या, अविश्‍वास की बीमारियां फैलने लगती हैं, तब जीना दूभर हो जाता है. तो क्यों न प्यार, विश्‍वास, समझदारी जैसे टॉनिक से इन बीमारियों को दूर किया जाए और रिश्तों में मुहब्बत की मिठास घोली जाए.

Relationship Toxins And Tonics

आज जहां एक ओर दुनिया सिमट रही है, वहीं दूसरी ओर रिश्ते और परिवार टूट रहे हैं. एक-दूसरे के प्रति हमारी संवेदनाएं कम होती जा रही हैं. हमारी व्यस्तताएं, हमारे अवसादों की छाया हमारे रिश्तों पर दिखने लगी है. नतीज़तन रिश्ते अपना औचित्य, अपनी गरिमा खोते जा रहे हैं. इन सबके बीच हम यह भूल जाते हैं कि स्वस्थ रिश्ते एक परिपक्व समाज की दरक़ार हैं. इसलिए सबसे ज़रूरी यह है कि हम यह जानें कि हमारे रिश्ते किन बीमारियों से जूझ रहे हैं यानी वे कौन-सी भावनात्मक बीमारियां हैं, जो रिश्तों को खोखला कर रही हैं. साथ ही रिश्तों से जुड़े उन पहलुओं के बारे में भी जानें, जो रिश्तों की इन बीमारियों को दूर करने में टॉनिक का काम करती हैं.

रिश्तों की बीमारियां

शक और अविश्‍वास

जी हां, रिश्ते की सबसे बड़ी व भयंकर बीमारी है शक. किसी भी रिश्ते में ख़ासकर पति-पत्नी के रिश्ते में अगर शक पनपने लगे, तो समझ लीजिए कि आपके रिश्ते को आई.सी.यू. की ज़रूरत है. शक या संशय के साथ किसी भी रिश्ते को ़ज़्यादा दिनों तक नहीं निभाया जा सकता. आप जिस व्यक्ति या रिश्ते पर शक कर रहे हैं, उससे आप कभी प्रेम या जुड़ाव नहीं कर पाएंगे. यदि आप किसी रिश्ते से बंधे हैं, तो आपको चाहिए कि उसे पूरे दिल से स्वीकार करें. यदि आपको किसी पर अविश्‍वास है, तो इसका मतलब है कि आपके रिश्ते में खटास है और उस रिश्ते को आपने पूरी तरह से स्वीकार नहीं किया है. अविश्‍वास किसी भी रिश्ते के लिए घातक है. फिर चाहे बात मां-बेटी की होे, सास-बहू की या फिर ननद-भाभी की.

द्वेष या जलन

किसी से द्वेष या जलन की भावना जहां एक ओर आपको आपके प्रियजनों से दूर करती है, वहीं दूसरी ओर आपके व्यक्तित्व को भी ख़राब करती है. किसी से द्वेष या जलन की भावना बीमारी होने से ज़्यादा बुरी है. यह आदत आपके किसी एक रिश्ते को नहीं, बल्कि सारे रिश्तों को बीमार कर सकती है. आप किसी एक से जलना शुरू करेंगे और फिर धीरे-धीरे आप हर किसी से जलने लगेंगे.

बेवफ़ाई

किसी भी रिश्ते में बेवफ़ाई या बेईमानी उस रिश्ते की ज़ड़ों को ही खोखला कर देती है. किसी के विश्‍वास और प्रेम को ठेस पहुंचाकर कोई रिश्ता नहीं निभाया जा सकता.

क्रोध

क्रोध रिश्तों की उम‘ को कम करता है. क्रोध से रिश्तों में दूरियां आती हैं. क्रोधित व्यक्ति अक्सर ग़ुस्से में रिश्तों की मान-मर्यादाओं को भूल जाता है.

अभिमान या ईगो

हमेशा याद रखें कि आत्मसम्मान और ईगो दो अलग-अलग चीज़ें हैं, इसलिए रिश्ते निभाने में किसी भी ज़िम्मेदारी को ईगो या झूठी प्रतिष्ठा से न जोड़ें, जैसे- “हमेशा मैं ही क्यों फ़ोन करूं, वह क्यों नहीं फ़ोन करता या करती.” “हमेशा मैं ही क्यों माफ़ी मांगू.” आदि.

अपेक्षाएं

रिश्तों में अपेक्षाओं का होना स्वाभाविक है और रिश्ते को ज़िंदा रखने के लिए कुछ हद तक ये ज़रूरी भी है. लेकिन अपेक्षाएं जब हद से ़ज़्यादा बढ़ जाएं तो यह किसी बीमारी से कम नहीं. अपेक्षाओं का बोझ बढ़ने से रिश्ते दम तोड़ देते हैं.

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Relationship Tonics

रिश्तों के टॉनिक

प्रेम

जिस रिश्ते में निःस्वार्थ व निश्छल प्रेम है, उस रिश्ते को किसी और टॉनिक की ज़रूरत ही नहीं. जिस रिश्ते में प्रेम है, उस रिश्ते की उम‘ अपने आप बढ़ जाती है. प्रेम हर रिश्ते को ख़ुशनुमा व तरोताज़ा बनाए रखता है.

समय

रिश्तों को समय देना बहुत ज़रूरी है. आप अपने रिश्तों को कितना समय देते हैं, उससे यह तय होता है कि वह रिश्ता आपके लिए कितना मायने रखता है. एक-दूसरे के साथ, परिवार के साथ समय बिताने से रिश्तों में प्रेम व विश्‍वास बढ़ता है.

विश्‍वास

एक समृद्ध रिश्ते के लिए आपसी विश्‍वास होना बेहद ज़रूरी है. विश्‍वास दोनों तरफ़ से होना चाहिए. रिश्तों में विश्‍वास होने का मतलब है कि आपका कोई भी रिश्ता फल-फूल
रहा है.

संयम

रिश्तों को कभी-कभी विषम परिस्थितियों से भी गुज़रना पड़ता है, ऐसे में संयम बरतें. यदि कोई एक अपना विवेक खोता भी है, तो दूसरा अपना संयम बनाए रखे, ताकि आपके रिश्ते में दरार न प़ड़े.

समझदारी

किसी भी रिश्ते को निभाने के लिए परिपक्व विचारों की आवश्यकता होती है. एक-दूसरे की भावनाओं और परिस्थितियों को समझने की कोशिश करें. हर साझेदारी को पूरी समझदारी से निभाएं. इस तरह रिश्ते की हर छोटी-मोटी समस्या को आप समझदारी से सुलझा सकते हैं.

स्पेस

कुछ समय पहले तक शायद इस टॉनिक की ज़रूरत रिश्तों को नहीं थी, पर आज के बदलते परिवेश में इसकी ज़रूरत हर रिश्ते में है. हर रिश्ते में एक-दूसरे के स्पेस का हमें आदर करना चाहिए. एक-दूसरे के मामलों में ज़्यादा हस्तक्षेप न करें. आज हर किसी को ख़ुद के लिए कुछ स्पेस की ज़रूरत है और इसमें कुछ ग़लत नहीं है. आप अपने रिश्ते को जितनी स्पेस देंगे, उतनी ही उनमें घुटन कम होगी.

इन सबसे ़ज़्यादा ज़रूरी है कि आप में किसी रिश्ते को निभाने की दृढ़ इच्छाशक्ति होनी चाहिए, ताकि आप उन रिश्तों को पूरी ईमानदारी से निभाने का प्रयत्न कर सकें. आप जिनके साथ रिश्ता बांट रहे हैं, उनका आदर, उनकी भावनाओं का आदर, उनके व्यक्तित्व का आदर करें. किसी भी रिश्ते को  टूटने न दें, क्योंकि हर रिश्ता अनमोल है.

– विजया कठाले निंबधे

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पहला अफेयर: गुज़ारिश (Pahla Affair: Guzarish)

Pahla Affair, Guzarish

Pahla Affair, Guzarish

पहला अफेयर: गुज़ारिश (Pahla Affair: Guzarish)

नहीं जानती कि मैं क्यों तुम्हारे बारे में सोचती हूं. मेरे ख़्यालों में हर वक़्त तुम्हीं रहते हो. मुझे आज भी याद है, वो पहला एहसास जब मैंने पहली बार तुम्हें देखा था. मेरा आईडी कार्ड कहीं गिर गया था. मैं उसे हर जगह ढूंढ़ चुकी थी और परेशान हो रही थी, तभी तुम आए और मेरा आईडी कार्ड मुझे देकर चले गए. तुम्हारी स्मार्टनेस मेरे मन पर गहरी छाप छोड़ चुकी थी. एक सहेली से पता चला कि तुम मुझसे सीनियर यानी एमएससी सेकंड ईयर के छात्र थे.

उस दिन के बाद से मेरी नज़रें कॉलेज में अक्सर तुम्हें तलाश करने लगी थीं. तुम अक्सर दिख ही जाते थे. तुम्हारी पर्सनैलिटी मुझे अपनी तरफ़ आकर्षित करने लगी थी. जब कभी तुम मेरे सामने होते थे, मेरी नज़रें अनायास ही तुम्हारी तरफ़ उठ जाती थीं. पर अगले ही पल दिमाग़ यह एहसास कराता कि एक लड़की का किसी को इस तरह देखना ठीक नहीं. लोग क्या कहेंगे? और मेरी नज़रें झुक जातीं. पर दिल को कहां परवाह थी किसी की? नज़रें फिर तुम्हारी तरफ़ उठतीं और झुक जातीं. जब तक तुम सामने होते दिल और दिमाग़ का ये द्वंद्व चलता ही रहता.

एक दिन बस का इंतज़ार करते वक़्त एक छोटा बच्चा आकर भीख मांगने लगा. तुमने उसे दुकान पर ले जाकर भरपेट खाना खिलाया. उस दिन मैंने तुम्हारे अंदर की ख़ूबसूरती भी देखी थी. मैं अपनी सहेली निशा से अक्सर तुम्हारी बातें करती थी. एक दिन वह मुझे छेड़ते हुए बोली, लगता है, वह तुझे कुछ ज़्यादा ही पसंद है. मैंने कहा, नहीं, वह तो चांद है जिसे स़िर्फ दूर से देखा जा सकता है, हाथों में नहीं लिया जा सकता. वह बोली, लोग चांद पर घर बनाने की सोच रहे हैं और तू पुराने ख़्यालों में अटकी पड़ी है. मैं उसके बारे में पता करूंगी और फिर तुम दोनों प्रो़फेसर बन इसी कॉलेज में साथ-साथ पढ़ाना. ये बातें उसने मज़ाक में ही कही थीं, पर अनजाने में ही उसने हमारे अनजाने रिश्ते की नींव रख दी थी.

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अब न जाने क्यों मैं तुम्हें ख़ुद से जोड़ने लगी थी. फिर निशा ने ही मुझे बताया कि तुम उसी कॉलेज के किसी प्रो़फेसर के बेटे होे. अब निशा मुझसे बार-बार कहने लगी कि अपने मन की बात उससे कह दे, पर न जाने क्यों मैं रुक जाती थी. शायद तुम्हारा स्टेटस मुझे रोक देता था. तुम एक अमीर प्रो़फेसर के बेटे और मैं एक लोअर मिडल क्लास की लड़की. मुझे डर था कि तुम मुझे ठुकरा न दो.

और फिर वो वक़्त भी आ गया, जिसके बारे में सोचकर डर लगता था. तुम्हारी विदाई का वक़्त. हम फ़र्स्ट ईयर वालों ने सेकंड ईयर के स्टूडेंट्स के लिए फेयरवेल पार्टी रखी थी, जिसमें मुझे एंकरिंग करनी थी. सुबह तैयार होते वक़्त भी तुम मेरे ख़्यालों में थे. आज मेरे पास आख़िरी मौक़ा था तुमसे अपने मन की बात कहने का, पर मैंने इसे गवां दिया, क्योंकि मेरे स्वाभिमान ने मुझे रोक दिया. मुझे आज भी याद है, वो बेचैनी, वो बेक़रारी तुम्हें न देख पाने की, जो उस शाम घर लौटते वक़्त मेरे दिलो-दिमाग़ पर छाई हुई थी. एक अनजाने से दर्द ने मुझे सारी रात सोने नहीं दिया. एक्ज़ाम्स के बाद प्रैक्टिकल के दिन जब मैं कॉलेज पहुंची तो तुम्हें बरामदे में खड़े देखकर आंखों पर यक़ीन नहीं हुआ, क्योंकि मैं तो तुमसे दोबारा मिलने की आस भी छोड़ चुकी थी. तुमने भी मेरी तरफ़ देखा और इस बीच मेरी आंखों ने बहुत कुछ बयां कर दिया था तुमसे.

अब मैं अपने शहर वापस आ गई हूं, तुम्हारी यादों को अपने दिल में संजोए हुए. अब शायद कुछ सालों तक मैं तुम्हें न देख पाऊं. जानते हो मेरा रिज़ल्ट आ चुका है. मैं क्लास में सेकंड हूं और वह प्रैक्टिकल, जिसमें तुम मेरे सामने थे, उसमें मेरे सबसे अधिक मार्क्स हैं. शायद तुम मेरी प्रेरणा भी हो. मैं इतने दिनों तक तुमसे कुछ न कह पाई, पर एक दिन अपने मन की बात तुमसे ज़रूर कहूंगी. उस दिन मिट जाएंगी हमारे बीच की सारी दूरियां और गिर जाएंगी सारी दीवारें. ये यक़ीन है मुझे ख़ुद पर और अपनी क़िस्मत पर भी. तब तक तुम मेरा इंतज़ार करना, यही गुज़ारिश है तुमसे.

– सारिका सोनी

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