Love

कुछ कपल ऐसे होते हैं, जिन्हें बस देखते रहने को ही जी करता है, जैसे नेहा कक्कड़ और उनके पति रोहनप्रीत सिंह. दोनों का जुड़ाव, प्यार और बॉन्डिंग ज़बर्दस्त है. और यह अक्सर ही उनकी सोशल मीडिया पोस्ट से देखने को मिलती भी है. उनकी पंजाबी सॉन्ग खढ़ तैनू मैं दस्सा… आनेवाली है. इसके प्रमोशन को लेकर दोनों ही तरह-तरह के मज़ेदार पिक्चर्स और वीडियो शेयर करते रहते हैं.
अब ख़ास बात यह है कि नेहा और रोहन दोनों ही फोटोग्राफर भी बन गए हैं. जी हां, दोनों ने एक-दूसरे की बेहद ख़ूबसूरत तस्वीरें खींची और उसे सोशल मीडिया के अपने अकाउंट पर शेयर भी कीं. नेहा ने कहा कि खढ़ तैनू मैं दस्सा… को दो दिन रह गए हैं.. एक्साइटेड हूं .. इंतज़ार नहीं कर सकती.. बहुत कुछ करना है…

Neha Kakkar


वाकई में जहां रोहनप्रीत द्वारा पत्नी नेहा की क्लिक की फोटोज़ पर उनके साले साहब टोनी कक्कड़ ने जमकर तारीफ़ की और नेहा ने भी लव इमोजी के साथ अपनी भावनाएं व्यक्त की. ठीक उसी तरह नेहा ने भी रोहनप्रीत की लाजवाब तस्वीरें क्लिक की, जिसमें रोहन का स्टाइल देखने क़ाबिल है. तस्वीरों में वे कभी योग मुद्रा में आ जाते हैं, तो कभी माॅडल एक्टर की तरह स्टाइल देते हुए दिखाई देते हैं. तो कभी उनका मासूम मुस्कुराता चेहरा लोगों के दिल जीत लेता है.

Neha Kakkar


आप भी देखें नेहुप्रीत मेड फॉर ईच अदर इस प्यारे जोड़े की मस्तीभरी ख़ूबसूरत तस्वीरों को. कह सकते हैं मानो दोनों एक-दूजे के लिए ही बने हों. इस लव बर्ड पावर कपल के आकर्षक फोटोज़ को देखकर इस पर उनके फैंस ने भी जमकर कमेंट्स किए. कुछ ने तो बड़ी लाजवाब बातें भी कहीं, जैसे- लवली जोड़ी… एक दूजे के लिए… आप दोनों का प्यार यूं ही बना रहे… हमें भी 18 मई का बेसब्री से इंतज़ार है, जब यह गाना रिलीज़ होनेवाला है… अब इंतज़ार नहीं होता… आप लोग यूं ही प्यारी तस्वीरें शेयर करते रहें… नेहा-रोहन के प्रशंसकों की ये प्यारभरी बातें उन्हें भी रोमांचित करती हैं. आइए देखते हैं उन दो उभरते हुए फोटोग्राफर को जो सिंगर हैं, एक्टर हैं और सबसे बढ़कर प्यारे इंसान हैं…

Neha Kakkar
Rohanpreet Singh
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अंकिता लोखंडे और सुशांत सिंह राजपूत एक आदर्श कपल माने जाते थे लेकिन उनके सात साल का पवित्र रिश्ता यूं अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गया तो सभी हैरान रह गए थे. ख़ासतौर से उनके फैंस को बड़ा धक्का लगा था. उस वक़्त भी इनके ब्रेकअप को लेकर, रिश्ता टूटने की वजह को लेकर काफ़ी अटकलें लोग लगाते रहे लेकिन साफ़ तौर पर कुछ भी पता नहीं चल पाया. कोई लगता अंकिता घमंडी और बेहद पज़ेसिव हैं इसलिए तंग आकर सुशांत ने ब्रेकअप किया तो कोई कहता सुशांत अब स्टार बन गया तो उसने अंकिता को डम्प कर दिया.

बहरहाल इन सबके बीच अब सुशांत की मौत के नौ महीने बाद खुद अंकिता ने बॉलीवुड बबल को दिए इंटरव्यू में अपने दिल का पूरा दर्द खोलकर रख दिया. अंकिता ने बताया कि सुशांत के दिमाग़ में एक बात साफ़ हो गई थिंक उसको क्या चाहिए और करियर में कैसे आगे बढ़ना है तो उसने अपने करियर को चुना. मैं किसी पर आरोप या किसी को दोषी नहीं ठहरा रही और ख़ासतौर से अब जब सुशांत नहीं हैं हमारे बीच, लेकिन लोग मुझे ही दोषी ठहराते रहे और आज भी मुझे कहा जाता है कि मैं अगर उसे नहीं छोड़ती तो वो ज़िंदा होते, कोई लगता है कि मैं पब्लिसिटी के लिए ये सब कर रही हूं, जबकि उसके परिवार के मैं क़रीब हूं और उनका ख़्याल रखना अपना फ़र्ज़ समझती हूं. लेकिन सुशांत ने अपने करियर को चुना, वो आगे बढ़ गए पर मेरे लिए वो दौर बेहद मुश्किलों भरा था.

Ankita Lokhande
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मैं रोज़ खुद को तैयार करती थी कि हां, मुझे इससे बाहर आना है, मैंने सुशांत की तस्वीरों को दीवारों पर लगा रखा था तब मुझसे सब कहते थे कि इनको हटा दे, लेकिन मुझे उन्हें देखकर हौसला मिलता था, मेरे लिए आसान नहीं था, मैं खुद को मज़बूत कर रही थी कि अगर सुशांत से मेरा सामना हो जाए तो मैं मज़बूती से खड़ी रह सकूं, मुझे आत्महत्या तक के ख़्याल आते थे, सोचती थी क्या खुद को ख़त्म कर लूं, क्योंकि मुझे समझ ही नहीं आता था कि क्या करूं. मैं उस तरह के लोगों में से नहीं हूं जो बस रिश्ता ख़त्म तो आगे बढ़ जाए, लेकिन मैं इतनी कमज़ोर भी नहीं थी, मेरे परिवार ने उस वक़्त मुझे काफ़ी सपोर्ट किया ल और फिर एक दिन ऐसा आया कि वो तस्वीरें मैंने हटा दीं दिवारों से. उन ख़ाली दिवारों को देख सोचती थी कि कोई गया है तो क्या, कोई ना कोई तो आएगा. विक्की मेरी ज़िंदगी में आए और मैं भी आगे बढ़ी. लेकिन मुझे खुश देखकर लोग ट्रोल करते हैं कि मैं धोखेबाज़ हूं.

Ankita Lokhande
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ये लोग उस वक़्त कहां थे जब मेरा ब्रेकअप हुआ था. मैं तब दिन भर अपने बिस्तर पर पड़ी रहती थी, किसी से बात नहीं करती थी. मैं तब ख़ामोश रही क्योंकि रिश्ते के ख़त्म होने पर भी शालीनता और रिश्ते की गरिमा बनी रहनी चाहिए. लेकिन मेरी कहानी कोई नहीं जानता. मैंने रिश्ता टूटने के कारण कई बड़ी फ़िल्में खो दीं, क्योंकि मैं उस वक़्त काम करने की कंडीशन में नहीं थी, मैंने बाजीराव मस्तानी और रामलीला को रिजेक्ट किया, फ़राह खान के ऑफ़र को भी ना कहा. मुझे संजय लीला भंसाली की रामलीला में रणवीर के साथ काम करने का मौका मिल रहा था पर मैं नहीं कर पाई. मेरे करियर पर असर हुआ.
बता दें कि रामलीला में बाद में दीपिका को कास्ट किया गया जो दोनों के करियर कि चेंजिंग पॉइंट साबित हुआ.

Ankita Lokhande and Sushant
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यह भी सभी जानते हैं कि सुशांत के निधन के बाद अंकिता ने काफ़ी हद तक उनको और उनके परिवार को सपोर्ट किया लेकिन बावजूद इसके अंकिता को आज भी ट्रोल करके गंदी-गंदी बातें कही जाती हैं.

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आपसी प्यार, देखभाल और सम्मान किसी भी स्वस्थ रिश्ते की मुख्य नींव है. यही वह चीज़ है, जो ज़्यादातर शादीशुदा जोड़ों के जीवन को मज़बूत बनाने में मदद करता है. वास्तु शास्त्र, स्थानिक ऊर्जा का प्राचीन विज्ञान है, जो प्यारभरे रिश्ते में रोमांस को बढ़ाने में भी मदद करता है. इसी के बारे में वास्तु विशेषज्ञ डॉ. रविराज अहिरराव ने बेहतरीन उपाय बताएं, जिन्हें आज़माकर जोड़े अपने वैवाहिक जीवन में रोमांस लाने के साथ उसे आनंदमय और ख़ुशहाल बना सकते हैं.

  • सुखी वैवाहिक जीवन के लिए पार्टनर के बीच विचारों की स्पष्टता सबसे महत्वपूर्ण है. घर के उत्तर-पूर्व क्षेत्र में नीले या बैंगनी रंग के साथ अधिकतम खुले स्थान रखने से कपल्स के बीच विचारों का मेल बना रहता है.
  • अग्नि तत्व के लिए जगह मानी जानेवाली रसोईघर दक्षिण-पूर्व दिशा में होनी चाहिए. यह क्षेत्र महिला साथी की जगह को भी चिह्नित करता है और उसकी शारीरिक और मानसिक स्थिरता को बढ़ावा देता है. इस अंतरिक्ष में नारंगी रंग का जोड़ इस केंद्र की शक्ति को और बढ़ाता है. साथ ही ख़ुशहाल और रोमांटिक जीवन को बढ़ावा देता है.
  • मास्टर बेडरूम में बिस्तर का सही स्थान या तो दक्षिण क्षेत्र या दक्षिण-पश्चिम में होनी चाहिए.
    वास्तु के अनुसार, घर के दक्षिण-पश्चिम दिशा में मास्टर बेडरूम की उपस्थिति पुरुष शक्ति केंद्र को संतुलित करने में मदद करती है. साथ ही दोनों पार्टनर के बीच सकारात्मक खिंचाव और केमिस्ट्री को बनाए रखता है. पुरुष ऊर्जा का स्थान होने के कारण यह रिश्ते में स्थिरता को बढ़ावा देने में भी मदद करता है.
  • एक सिंगल गद्दे के साथ एक सिंगल या क्वीन साइज़ बेड होना चाहिए.
  • बेडरूम की दीवारों पर इस्तेमाल किया गया रंग हल्का और स्मूदी होना चाहिए.
  • दक्षिण-पश्चिम बेडरूम में गुलाबी या पिच के रंग पसंद किए जाते हैं. वैसे बेडरूम में गुलाबी या लाल रंग, जैसे- लाल बत्ती, लाल रजाई, ड्रैप आदि का उपयोग क्षणिक अवधि के लिए किया जा सकता है.

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  • वास्तु के अनुसार, प्यारभरा और मज़बूत रिश्ता बने रहने के लिए पत्नी को अपने पति के बाईं तरफ़ सोना चाहिए.
  • यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कमरे का नॉर्थ-ईस्ट कॉर्नर बिखरा ना हो.
  • इंडोर प्लांट्स, नॉर्थ कॉर्नर में सफ़ेद फूल और साउथ-वेस्ट कॉर्नर में पर्पल या लाल गुलाब रिश्ते को बेहतर बनाने में मदद करते हैं.
  • प्यार भरा रिश्ता और सकारात्मकता के प्रवाह के लिए बेडरूम साफ़ और व्यवस्थित होना चाहिए.
  • सुखमय प्रेम जीवन के लिए सुनिश्चित करें कि कमरे में सिंगल आइडेंटिटी सजावटी सामान न हो, जैसे- एक खरगोश या एक अकेला बतख. इसकी बजाय एक कबूतर का जोड़ा, लव बर्ड्स या लक्ष्मी-नारायण जैसे आदर्श जोड़े हो, तो बेहतर है.
  • दक्षिण-पश्चिम में पारिवारिक फोटो और पश्चिम दिशा में कपल्स की फोटो लगाएं.

यह ना करें…

  • ध्यान रहे बेडरूम एक नियमित आकार में होना चाहिए और कोई भी तेज नुकीला कोना नहीं होना चाहिए.
  • धातु के बिस्तरों से बचना चाहिए, क्योंकि यह नींद में खलल डालता है और जीवनसाथी के बीच तनाव पैदा करता है.
  • एक साथ जुड़नेवाले दो बिस्तरों या सख़्त गद्दों से बचना चाहिए, क्योंकि इससे कपल्स के बीच अनबन हो सकती है.
  • इसके अलावा बिस्तर को दो दरवाज़े या दरवाज़े के सामने नहीं रखा जाना चाहिए.
  • बिस्तर के सामने दर्पण ना रखे. यह वैवाहिक कलह की ओर ले जाता है.
  • दर्पण जितना बड़ा होगा, वैवाहिक संबंध में तनाव की संभावना उतनी ही अधिक होगी. इससे स्वास्थ्य समस्या, ऊर्जा की कमी या उनींदापन भी हो सकता है. बेडरूम में दर्पण से बचना चाहिए या कम से कम कवर किया जाना चाहिए.
  • बेडरूम में दिव्य मूर्तियों के साथ-साथ दिवंगत आत्माओं की तस्वीरों को ना लगाएं.

ऊषा गुप्ता

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शादी के कुछ सालों बाद अधिकतर कपल्स की ये शिकायत होती है कि उनका रिश्ता अब पहले जैसा रोमांटिक नहीं है. क्या आपको भी ऐसा ही लगता है? हम आपके लिए लेकर आए हैं एक ख़ास क्विज़, इसे सुलझाइए और जानिए कितने रोमांटिक कपल हैं आप.

Romantic Couple

1) एक शाम पति बड़े मूड में घर लौटते हैं और आपके साथ समय बिताने की इच्छा ज़ाहिर करते हैं, तो आपः

ए. बच्चों को तैयार कर के मेड के साथ खेलने घर से बाहर भेज देती हैं.
बी. उनसे कहती हैं कि बच्चों के सो जाने तक वे इंतज़ार करें.
सी. आप घर के काम निपटाने के बाद ही उनकी बात सुनती हैं.

2) आप अंतरंग पलों में नया तरीक़ा अपनाते हैं:

ए. हर सप्ताह.
बी. महीने में एक बार.
सी. महीने में दो बार.

3) कल उनका मूड नहीं था, क्योंकिः

ए. वो काम में व्यस्त थे.
बी. पिछली रात के निजी पलों की थकान और ख़ुमारी ही नहीं उतरी थी.
सी. आप दोनों को सोने में काफ़ी देर हो गई थी.

4) आप दोनों ने साथ-साथ एडल्ट मूवी देखी थीः

ए. पिछले माह.
बी. साल भर पहले.
सी. ठीक से याद नहीं.

5) आपका मन नहीं है, लेकिन वो आपको मूड में लाने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में आपः

ए. ख़ुद को मूड में लाने की कोशिश करेंगी, ताकि उन्हें ख़ुश कर सकें.
बी. उनका मन रखने के लिए जैसे-तैसे साथ दे देंगी.
सी. मूड नहीं है, कह कर साफ़ मना कर देंगी.

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Romantic Couple

6) आपकी मैरिड लाइफ़ में सेक्स महत्वपूर्ण हैः

ए. बहुत ज़्यादा.
बी. काफ़ी.
सी. ठीक-ठाक.

7) पति टूर से लौटने वाले हैं तो आपनेः

ए. घर सजाया है, उनकी पसंद का खाना बनाया है, उनका पसंदीदा आउटफिट पहना है और बेडरूम को ख़ासतौर पर तैयार किया है.
बी. घर सजाया है, उनकी पसंद का खाना बनाया है और उनका पसंदीदा आउटफिट पहना है.
सी. घर सजाया है, उनकी पसंद का खाना बनाया है.

8) आप दोनों रोज़ानाः

ए. कम-से-कम आधे घंटे एक-दूसरे से बात किए बिना आप सो ही नहीं पाते.
बी. रोज़ तो नहीं, लेकिन सप्ताह में एक बार दो-तीन घंटे हम सिर्फ एक-दूसरे के साथ बिताते हैं.
सी. व्यस्तता इतनी होती है कि बात करने के लिए समय ही नहीं मिल पाता.

9) शादी के शुरुआती दिनों के प्यार भरे अनुभवों को आप याद करते हैं:

ए. अक्सर.
बी. कभी-कभी.
सी. बहुत कम.

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Romantic Couple

जानें अपने रोमांस का स्कोर
क्विज़ को सुलझाने के बाद अब बारी है स्कोर जानने की. यहां पर स्कोर के साथ-साथ हमने ये भी बताने की कोशिश की है कि आपका रिलेशनशिप स्टाइल कैसा है. ये स्कोर देखकर आप जान सकते हैं कि कितने रोमांटिक कपल हैं आप.

यदि आपके अधिकतर जवाब ‘ए’ हैं
आपके अधिकतर जवाब यदि ‘ए’ हैं, तो आपका रिलेशनशिप स्टाइल है एडवेंचरस. आप दोनों को एक-दूसरे का साथ बहुत पसंद है और सेक्स को एंजॉय करने के लिए आप हर संभव कोशिश करते हैं.

यदि आपके अधिकतर जवाब ‘बी’ हैं
आपके अधिकतर जवाब यदि ‘बी’ हैं, तो आपका रिलेशनशिप स्टाइल है बैलेंस्ड. आप दोनों घर-ऑफिस की तमाम ज़िम्मेदारियां निभाने के बावजूद एक-दूसरे के साथ समय बिताने का प्रयास करते हैं. सेक्स को आप कभी नज़रअंदाज़ नहीं करते और कभी-कभार इसके लिए एक्स्ट्रा एफर्ट लेना आपको पसंद है.

यदि आपके अधिकतर जवाब ‘सी’ हैं
आपके अधिकतर जवाब यदि ‘सी’ हैं, तो आपका रिलेशनशिप स्टाइल कूल है. आप दोनों सेक्स को एंजॉय करते हैं, लेकिन इसके लिए अतिरिक्त प्रयास करना पसंद नहीं करते यानी आपके लिए ये एक कूल एक्टिविटी है.

प्यार तो होना ही था… काजोल और अजय देवगन की यह फिल्म और इसका टाइटल उनके जीवन पर भी बख़ूबी लागू होता है, वरना दोनों ने ही नहीं सोचा था कि एक दिन उन्हें प्यार हो जाएगा और दोनों रिश्ते में बंध जाएंगे. अजय देवगन और काजोल आज अपनी शादी की 22 वीं सालगिरह मना रहे हैं. दोनों का प्यार और बॉन्डिंग ज़बर्दस्त रही है. सेलिब्रिटीज़ कपल की बात करें, तो ये दोनों आज तक किसी विवाद में नहीं घिरे. इनका आपसी रिश्ता इतना मज़बूत रहा कि कभी किसी ग़लतफ़हमी की गुंजाइश ही नहीं रही.
अजय देवगन ने आज सोशल मीडिया पर वाइन की बोतल के अंदर काजोल के साथ अपनी एक पोट्रेट तस्वीर शेयर की, जिसमें लिखा था Battled in 1999, Only Edition… एक तरह से मज़ेदार ढंग से उन्होंने यह कहने की कोशिश की कि वे अपनी शादीशुदा ज़िंदगी की लड़ाई साल 1999 में लड़ी थी.
अजय कहीं अंदाज उनके फैन तो लोगों को खूब पसंद आ रहा है और लोग इस पर मजेदार प्रतिक्रियाएं भी दे रहे हैं और बधाई भी.
मैं वही पीता हूं जो मैं ख़रीद सकूं…
एक फैंस ने तो अजय की फिल्म का यह डायलॉग मार कुछ इस तरह से चुटकी ली.
एक फैन्स ने तो बड़ी मज़ेदार बात कही कि अजय भाई कुछ रिफरेंस दे दो क्या यह आपको 1999 में तोहफ़े में मिला था.. या आप कोई वाइन कंपनी खोलने जा रहे हैं या यह कोको कोला है…
एक ने तो हद ही कर दी यह कहते हुए की पहले विमल का लत लगा दिए, अब यह नया सीसी (बॉटल) का लगाना चाह रहे हैं.. बड़ी मुश्किल से तो विमल का ख़र्चा निकाल पाते हैं, हम बेरोज़गार है…
इस तरह उनके तमाम प्रशंसकों ने उन्हें सुपर कपल, आइडियल कपल, बधाई हो, मुबारक हो… कहते हुए ढेर सारा प्यार दिया.
अजय को जवाब देते हुए काजोल ने भी दिलचस्प ढंग से सालगिरह की बधाई दी. उन्होंने दोनों की यू एंड मी फिल्म की एक तस्वीर शेयर की व निहारते हुए लाजवाब बात कही.
काजोल के बारे में कहा जाता है कि वह थोड़ी मुंहफट और हाजिरजवाब हैं. जो भी है सामने कहती हैं. उनकी यही बात अजय देवगन को कई बार नागवार गुज़रती है. वे चाहते हैं कि काजोल थोड़ा सोच-समझ के संभलकर बोले. लेकिन काजोल ने अपने रिश्तों को बड़ी ख़ूबसूरती से संजोया है. अभी पिछले दिनों उन्होंने अपनी सास वीनाजी के जन्मदिन पर उनके साथ अपनी प्यारी-सी तस्वीर शेयर करते हुए बड़े ही ख़ूबसूरत बातें कहकर उन्हें जन्मदिन की बधाई दी.
काजोल और अजय देवगन के शादी कुछ कम फिल्मी नहीं रही. इन दोनों की मुलाकात हलचल फिल्म की शूटिंग के दौरान हुई थी. मुलाकात दोस्ती में बदली और दोस्ती प्यार में.
काजोल के पिता उनकी शादी के ख़िलाफ़ थे, क्योंकि जिस समय उन्होंने शादी करने की ठानी तो केवल 24 साल की थीं. उनके पिता नहीं चाहते थे कि करियर के टॉप पर रहते हुए काजोल ऐसा कुछ करें. वे चाहते थे कि काजोल अपने करियर पर ध्यान दें और थोड़ा रुककर शादी करें. पर काजोल और अजय ने फ़ैसला कर लिया था कि उन्हें शादी करनी है. काजल ने अपने पिता भले ख़िलाफ़ थे, पर उनकी मां तनुजा का काजोल को पूरा सपोर्ट रहा.
अजय देवगन और काजोल ने अपनी शादी मीडिया और लोगों से छुपा कर भी रखी. मज़ेदार बात यह भी रही कि प्रेस को उन्होंने शादी की जगह का ग़लत पता दे दिया था. और अजय देवगन के घर की छत पर सादगी से शादी कर ली थी, जिसमें दोनों के परिवार और कुछ दोस्त शामिल हुए थे. अपने इंटरव्यू में अजय ने बड़े दिलचस्प तरीक़े से यह भी बताया था कि वह घर पर अपने बेडरूम से निकलते हुए छत पर गए शादी और सब रस्में की और फिर बाद में अपने बेडरूम में आ गए. वैसे भी काजोल और अजय दोनों ही थोड़े पर्सनल लाइफ जीने में यक़ीन रखते हैं. उन्हें आम शादी की तरह धूमधड़ाका नहीं चाहिए था. उनके दो बच्चे हैं न्यासा और युग और एक छोटा सा सुखी परिवार है अजय-काजोल का.
अजय देवगन ने ख़ूबसूरत बात भी कही की दोनों की सुखी वैवाहिक जीवन का राज़ एक-दूसरे को स्पेस देना रहा है. जब अजय को अकेले में रहने और कुछ करने की ज़रूरत पड़ती है, तब काजोल उन्हें डिस्टर्ब नहीं करती. और जब काजोल कुछ अपने लिए करती हैं, कुछ स्पेस चाहती हैं, तो अजय उसमें रुकावट नहीं डालते. कई बार ऐसा भी होता है कि एक ही रूम में दोनों अलग-अलग बैठे हैं, मगर अपने काम में तल्लीन है. और ना ही एक-दूसरे को डिस्टर्ब कर रहे हैं. दोनों की बॉन्डिंग इतनी ख़ूबसूरत रही है कि दोनों अच्छी तरह से समझते है कि कब-कहां उन्हें एक-दूसरे को स्पेस देना है और कहां उन्हें आजादी देनी है. यही उनके कामयाब शादीशुदा ज़िंदगी का सीक्रेट रहा है.
क्या आप जानते हैं कि काजोल अजय देवगन से अपने बॉयफ्रेंड के बारे में डिस्कस किया करती थीं. उन्होंने बताया कि जब पहली बार वो अजय देवगन से मिली थीं, तो वह एक कोने में बैठे हुए थे और थोड़े रिजर्व नेचर के थे. पर बाद धीरे-धीरे उनसे बातचीत होती गई. दोनों क़रीब आ गए. Ajay शांत और चुपचाप रहने वाले थे, तो काजोल उतनी ही बातूनी और हंसी-मज़ाक और ठहाका लगाने वाली. जब दोनों की अच्छी दोस्ती हो गई, तो वे अक्सर अजय से अपने बॉयफ्रेंड को लेकर चल रही समस्याओं के बारे में बातचीत करती. बकौल काजोल तब अजय बाबाजी की तरह उनकी राम कहानी सुनते और अपनी राय देते कि ऐसा करो वैसा करो. राय रखते हुए शायद अजय देवगन ने भी कभी सपने में नहीं सोचा होगा कि यही शख़्स से उनकी जीवनसाथी बनेगी.
काजोल की फिल्मों की बात करें तो हाल ही में आई त्रिभंगा में उनके अभिनय की ख़ूब तारीफ़ हुई. इसे रेणुका शहाणे ने निर्देशित किया था. अजय देवगन की भी इस साल कई फिल्में रिलीज़ होनेवाली है, जिसमें मेडे, रेड २, गोलमाल ५ आदि हैं. काजोल-अजय ने साथ में तानाजी- द अनसंग वॉरियर में काम किया था. जो एक सुपर-डुपर हिट फिल्म साबित हुई थी. लोगों ने इसे ख़ूब पसंद किया था. काफ़ी सालों बाद काजोल-अजय को साथ देखकर उनके फैंस को बेहद ख़ुशी हुई थी.
दोनों को सालगिरह की ढेर सारी बधाई! अजय देवगन और काजोल की शादी की और साथ कुछ प्यारी तस्वीरें आज उनकी सालगिरह पर देखते हैं!..

Ajay-Kajol
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Photo Courtesy: Instagram

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जिऊंगा जब तलक तेरे फ़साने याद आएंगे
कसक बनकर मुहब्बत के तराने याद आएंगे…

सच! प्यार की दीवानगी तो कुछ ऐसी ही होती है. ताउम्र यह एहसास जहां दिलों को रोमानी करता है, तो कभी ग़मगीन भी कर देता है. फिर भी प्यार तो प्यार ही होता है. प्यार जीने का सबब होता है.. प्यार रिश्तों को ख़ूबसूरत बनाता है.. प्यार दिलों को जोड़ता है.. प्यार जो हर किसी को कभी न कभी होता है… प्यार पर न जाने कितनी सारी बातें कही, लिखी और महसूस की गई हैं. फिर भी इसकी व्याख्या कभी पूरी नहीं हो पाती. ये ऐसे होते है, जिन्हें हम चाहते हैं, पर उसे कोई नाम नहीं दे पाते हैं. जिनमें केवल एहसास होता है, एक-दूसरे के साथ और प्यार का वजूद रहता है, बस नाम नहीं रहता. लेकिन यह किसी इबादत और किसी दुआ से भी कम नहीं होता. एक ख़ूबसूरत एहसास होता है. एक ऐसा एहसास, जो ज़िंदगी को ख़ुशनुमा बना देता है. जो उनके ख़्याल से दिल को कभी हंसा देता है, तो कभी रुला भी देता है. एक अजीब-सी ख़ुशी, सिहरन, रोमांच होता है इस प्यार में.. इस प्यार में कोई अपेक्षा नहीं होती है और ना ही उपेक्षा ही होती है. बस प्यार होता है.. अपने प्यार को ख़ुश देखने की चाहत रहती है..

Romantic Quotes

कह सकते हैं, ज़माने में कई रिश्ते ऐसे होते हैं, जहां पर लोग एक-दूसरे को बस शिद्दत से चाहते हैं, पर उसे रिश्ते के दायरे में बांधते नहीं. उसे कोई नाम नहीं देते. जहां तक हमारा समाज और दुनिया है, वहां पर हमेशा एक दौड़ या जंग सी ज़रूर लगी रहती है अपने प्यार को पाने और बंधन में बांधने की.
माना आपको हर रिश्ते का एक नाम देना ही होगा, लेकिन प्यार, मोहब्बत, इश्क़, चाहत, लव ये ऐसे एहसास हैं जिसे महसूस कर दीवानगी की हद तक जिया जा सकता है, पर बांधा नहीं जा सकता. यहां पर सरहद नहीं होती, यहां पर कोई पहरेदारी नहीं होती और ख़ासकर जब अपने ख़्वाबों की दुनिया में आपने उस प्यार की दुनिया बसा ली हो, एक घर बसा लिया हो, तब तो रिश्तों की भी कहां कोई ज़रूरत होती है.
वह शख़्स अपने प्यार की दुनिया में ही ख़ुश रहता है. हर पल जब भी ज़रूरत होती है, उस प्यार की दुनिया में अपनी ख़ुशियों को सजा लेता है. यह कहना कि प्यार को कोई रिश्ते में जोड़ा जाए या फिर आप शादी के बंधन में बंध गए हो, तभी आपका प्यार सार्थक होगा, सही नहीं है. कुछ तो रहे तेरे-मेरे दरमियां, जो अनकहा रहे, अनसुलझा रहे… यही तो कुछ ख़्यालात होते हैं दो प्यार करनेवालों के जो प्यार को प्यार ही रहने देते हैं, कोई नाम नहीं देते…

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प्यार कोई सबूत नहीं मांगता.. प्यार कोई रिश्तो की लेनदेन नहीं चाहता.. प्यार तो बस प्यार ही चाहता है..
एक आम ज़िंदगी में प्यार के काफ़ी मायने होते हैं. प्यार संघर्ष करने का हौसला देता है. ये दिल के रिश्ते बेहद महफ़ूज़ होते हैं. कुछ शख़्स ऐसे होते हैं, जिनका आपकी ज़िंदगी में वजूद होने के बावजूद दुनिया की नज़र में कुछ नहीं रहता, क्योंकि आपने उसे नाम जो नहीं दिया. वे तो बस उसके एहसास से ही ख़ुश रहते हैं. वह एहसास, जो पूरी ज़िंदगी जीने की एक वजह दे देता है. वह एहसास जो बताता है, जो समझाता है कि प्यार के लिए रिश्तों का कोई होना ज़रूरी नहीं. प्यार तो बस प्यार है, वो एहसास अंतर्मन में गुनगुनाती कविता सा है, जो इंसान को बहुत ख़ूबसूरत बना देता है. मोहब्बत से इस कदर भर देता कि वहां नफ़रत के लिए कहीं कोई जगह नहीं होती. इंसान हर पल एक रोमांच का अनुभव करता है. ज़िंदगी जीने के लिए कोई आपको शिद्दत से चाहता है, ख़्याल रखता है, कोई आपकी ख़ुशी-गम में हमेशा शरीक रहता है, तब यह नहीं लगता कि वो क़रीब है या दूर है.

Romantic Quotes

क्या यही प्यार है…
प्यार को लेकर मज़ेदार धारणाएं भी रही हैं, कुछ ऐसे-

  • कुछ का मानना है कि सारी समस्याएं प्यार से शुरू होती है..
  • लोग कहते हैं, मोहब्बत में अपना सब कुछ हारना पड़ता है..
  • किसी से चाहत के कारण आपकी अन्य सभी लोगों में दिलचस्पी ख़त्म हो जाती है..
  • ग़म का एहसास पहली बार प्रेम में ही समझ आता है..
  • कुछ को पहली नज़र में तो कुछ को पलक झपकते ही प्यार हो जाता है..
  • प्यार ज़िंदगी की बहुत-सी समस्याओं का हल है..
  • यह वो राह है, जिस पर ख़ुशी हासिल होती है..
  • इश्क़ में लोग पागल हो जाते हैं..
  • प्यार सबको जीत लेता है..
  • एक ही समय में दो लोगों को प्यार भी हो सकता है…

यह भी पढ़ें: एकतरफ़ा प्यार के साइड इफेक्ट्स… (How One Sided Love Can Affect Your Mental Health?..)

मोहब्बत पर शायर-लेखकों ने बहुत कुछ कहा है. इसकी बहुत व्याख्या अपने-अपने तरीक़े से की है-
हमने देखी है उन आंखों की महकती ख़ुशबू
हाथ से छू के इसे रिश्तों का इल्ज़ाम न दो
सिर्फ़ एहसास है ये रूह से महसूस करो
प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम न दो…
गुलज़ार साहब के लिखे इस गीत में इन शब्दों ने बहुत कुछ कह दिया है. यूं लग रहा है जैसे प्यार पर एक पूरी दुनिया इन शब्दों में सिमट आई हो. कितनी ख़ूबसूरती से उन्होंने कहा कि इसे रिश्तों का इल्ज़ाम ना दो यानी प्यार वह ख़ूबसूरत एहसास है, जिसे बंधन मुक्त रहकर हम कई मायने में जी सकते है. अपने एहसास में, अपनी सोच में, अपने ख़्वाबों की दुनिया में… प्यार हमेशा हमें मदहोशी की दुनिया में ले जाता है, जहां पर बस प्यार ही होता है और कुछ नहीं. ना किसी चीज़ की लेनदेन, ना उम्मीद बस प्यार ही प्यार…

Romantic Quotes

लेकिन इसे हम आज के दृष्टिकोण से देखें, तो थोड़ी-सी मुश्किलें ज़रूर आती हैं. आज की युवापीढ़ी और कपल्स के लिए प्यार की परिभाषा अलग है. प्यार को वे अपेक्षाओं से भर देते हैं. कहीं अपनी इच्छाओं की पूर्ति का ज़रिया बना देते हैं. और जब यह सब होता है, तब ही कई शिकायतें और नाकामियां जन्म लेती हैं. तब प्यार अपने ख़ूबसूरत वजूद से हटकर स्वार्थ बन जाता है. वह कुछ ऐसा हो जाता है जैसे कोई सौदागिरी. प्यार के अस्तित्व को डांवाडोल कर देता है. फिर भी प्यार तो होता ही है यह और बात है इसके एहसास जुदा होते हैं.
तमाम ऐसे शेरो-शायरियां प्यार पर लिखी गई हैं, जो हमें एक अजीब-सी ख़ुशी से सराबोर कर देती हैं. हम उस एहसास को जीने से लगते हैं. तब लगता है कि यही वह ख़ुशी है, जो हम ताउम्र ढूंढ़ते हैं, पर किसी को मिल जाती है और कोई यूं ही खाली रह जाता है. कुछ ऐसे ही चुनिंदा शेरो-शायरी को भी देखते हैं और उन शब्दों को, उन एहसास को जीते हैं…

कुछ तबीयत ही मिली थी ऐसी
चैन से जीने की सूरत ना हुई
जिसको चाहा उसे अपना ना सके
जो मिला उससे मुहब्बत ना हुई

आख़री हिचकी तेरे ज़ानूं पे आए
मौत भी मैं शायराना चाहता हूं

जब भी आता है मेरा नाम तेरे नाम के साथ
जाने क्यूं लोग मेरे नाम से जल जाते हैं..

थक गया मैं करते-करते याद तुझको
अब तुझे मैं याद आना चाहता हूं

कुछ दिलजलों के एहसास ऐसे भी हैं…

रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ

अपनी तबाहियों का मुझे कोई ग़म नहीं
तुम ने किसी के साथ मोहब्बत निभा तो दी

Romantic Quotes

ज़माने ने तो अक्सर प्यार की खिलाफ़त की है. इसकी गहराई और सच्चाई को बहुत कम लोगों ने समझा है. प्यार अगर कामयाब बनाता है, तो प्यार कभी-कभी ग़मगीन ज़िंदगी जीने पर मजबूर. भी कर देता है. इसलिए कहते हैं ना कि प्यार को समझना बहुत मुश्किल भी है. किसी के लिए प्यार ज़िंदगीभर की ज़रूरत है, तो किसी के लिए प्यार बस एक इच्छापूर्ति का माध्यम. क्यों ना एक नई शुरुआत करें. प्यार को एक नए नज़रिए से देखें. इसमें प्यार को लेकर कोई भ्रम, धारणा या कोई पूर्वानुमान ना हो, बस एक ऐसी अनुभूति हो कि जिसे हम ईमानदारी से स्वीकार करें. उसमें कोई बनावट ना हो. उसमें कोई दिखावा ना हो. बस दिल से हो और जब दिल से कोई बात होती है, तो दिलों तक पहुंचती भी है.

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प्यार में हार्मोंस का कॉकटेल…
लेखिका हेलन फिशर का मानना है कि हमारे शरीर के हार्मोंस के कारण प्रेम अलग-अलग रूपों में हमसे जुड़ता है और यह काफ़ी मज़ेदार है, जैसे-
सेक्स के लिए टेस्टोस्टेरॉन और एस्ट्रोजन की अहम भूमिका रहती है, तो मन की चाहत, जहां हर पल अपने प्यार के बारे में सोचते रहने में न्यूरोट्रांसमीटर और मोनोअमीनस की. उनके अलावा डोपामाइन, नाॅरइपीनेफ्रिन, सेरोटोनिन, ऑक्सीटोसिन, वैसोप्रैसिनस जैसे हार्मोंस भी प्यार को लेकर शरीर में होनेवाले हलचलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं. इनसे शरीर के अंदर हार्मोंस का अजीबोगरीब कॉकटेल बनता रहता है यानी प्यार के कारण भूख-प्यास ना लगना, आकर्षण, दीवानगी आदि.

Romantic Quotes

इस बार वैलेंटाइन डे पर हर प्यार करनेवाले यह कोशिश करें कि अपने प्यार को प्यार के एहसास से ही देखे-समझे, ना उसे हैसियत-ख़ूबसूरती से. तब जीने का फ़लसफ़ा भी ख़ूबसूरत हो जाता है और यही बोल दिल से निकलते हैं-
उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए…

ऊषा गुप्ता

Love Quotes

कहते हैं प्यार में सब कुछ जायज़ है लेकिन सुमित की सोच कुछ अलग ही थी…  आज सुमित को एक अरसे बाद देखा वोभी अपने पति की ऑफ़िस पार्टी में. बालों में हल्की सफ़ेदी झलक रही थी पर व्यक्तित्व उतना ही आकर्षक और शालीन… दिल पुरानी यादों में डूब गया. मुझे याद है एक-एक लम्हा जो सुमित की बाहों में बीता था, कितना हसीन हुआ करता थातब सब कुछ. सुमित और मैं साथ ही पढ़ते थे और उसका घर हमारे घर से कुछ ही दूरी पर था. वो बस कुछ ही वक़्त पहलेयहां शिफ़्ट हुआ था. कॉलेज का आख़िरी साल था और सुमित ने भी मेरे ही कॉलेज में एडमिशन ले किया था. आते-जातेपहले आंखें मिलीं और फिर साथ पढ़ते-पढ़ते दोस्ती हो गई. 

Pahla Affair

सुमित काफ़ी समझदार था और मैं उसकी इसी समझदारी की क़ायल थी. मैंने उसे अपने दिल की बात कहने में देर नहींलगाई और उसने भी अपनी भावनाओं का इज़हार कर दिया. पढ़ाई पूरी हुई और घर में मेरी शादी की बातें भी होने लगीं. एक रोज़ पापा ने ऐलान कर दिया कि लड़केवाले आ रहे हैं देखने. मैं घबरा गई और भागकर सुमित के पास गई. उसेबताया तो उसने कहा कि मैं घरवालों को बता दूं और कल वो भी आकर पापा से बात करेगा. 

Pahla Affair

मैंने हिम्मत जुटाकर मम्मी-पापा को अपने प्यार का सच बता दिया. पापा ने भी कहा ठीक है सुमित को आने दो कल, तभीबात करेंगे पर फ़िलहाल जो लोग देखने आ रहे हैं उस पर ध्यान दो.

लड़केवाले तो आकर चले गए पर मुझे कल का इंतज़ार था. सुमित आया और पापा ने मुझे भी बुलाया. पापा बोले- मुझेलव मैरिज से कोई प्रॉब्लम नहीं है, ये सुन मैं एक पल को खुश हो गई, पर पापा की आगे की बातें सुन मैंने उम्मीद छोड़ दी. 

Pahla Affair

“सुमित अगर तुम हमारे समाज के होते तो मुझे कोई आपत्ति नहीं होती क्योंकि तुम होनहार हो, समझदार हो लेकिन मैंअपने समाज के विरुद्ध जाकर रचना की शादी नहीं कर सकता. मुझे भी नाते-रिश्तेदारों को जवाब देना है. मैं तुम दोनों कोभ्रम में नहीं रखना चाहता इसलिए साफ़-साफ़ कह दिया.”

मेरे सारे सपने बिखरते नज़र आए मुझे… रात के एक बज रहे थे… “अरे रचना, इतनी रात तुम मेरे यहां? सब ठीक तो है?” 

“सुमित चलो भाग चलते हैं, हम अपने प्यार को ऐसे हारते देख नहीं सकते. शादी कर लेंगे तो पापा ज़रूर माफ़ कर देंगे.”

Pahla Affair

“रचना, मैं अपने प्यार को ऐसे कलंकित नहीं कर सकता, यूं चोरी-छिपे शादी करना ठीक नहीं, तुम्हारे घरवालों की औरतुम्हारी भी बदनामी होगी. मैं तुम्हें बदनाम कैसे कर सकता हूं, सिर्फ़ अपने स्वार्थ के लिए? प्यार का अर्थ पाना ही नहीं होताबल्कि खोना भी होता है. मुझे उम्मीद है तुम हमारे प्यार की लाज रखोगी और अपनी शादी को दिल से निभाओगी! मेरीख़ातिर… चलो तुम्हें घर छोड़ दूं.”

Pahla Affair

मैं आंसुओं के सैलाब में डूब गई और चुपचाप शादी भी कर ली. पापा ने विदाई के समय कहा था, “मुझे माफ़ कर देनाबेटा, मैं कायर निकला!”

मेरे पति अरुण काफ़ी अच्छे और नेकदिल थे, लेकिन सुमित की कमी हमेशा ही खली! 

“अरे रचना, इनसे मिलो, ये सुमित हैं, कुछ ही दिन पहले इनका यहां ट्रांसफ़र हुआ है.”

मेरे पति ने सुमित से मिलवाया और मैं बीते वक्त से वर्तमान में लौट आई. 

मौक़ा पाते ही मैंने सुमित से उसका नंबर ले लिया. हिम्मत जुटाकर फ़ोन लगाया. हालचाल पूछा, पत्नी-परिवार के बारे मेंपूछा.

“रचना, मैंने शादी नहीं की. किसी और से शादी करके मैं उसके साथ अन्याय नहीं करना चाहता था. मेरा प्यार तो तुम होऔर हमेशा रहोगी.”

Pahla Affair

मैं समय निकालकर सुमित के घर जा पहुंची… “रचना तुम्हें इस तरह नहीं आना चाहिए था, किसी को पता चलेगा तोतुम्हारे लिए परेशानी हो जाएगी”

“मैं खुद को रोक नहीं पाई और अब जब हम एक ही शहर में हैं तो मिल तो सकते ही हैं ना…”

ख़ैर कुछ देर रुककर मैं घर लौट आई. ऐसा लगा ज़िंदगी फिर मुझे सुमित के क़रीब रहने का मौक़ा देना चाहती है… 

पर एक दिन अरुण ने आकर बताया कि कल उनके ऑफ़िस में सुमित की फेयरवेल पार्टी है, उसने दूसरे शहर में दूसरी कंपनी जॉइन कर ली है. 

मैंने सुमित को ग़ुस्से में फ़ोन करके पूछा, तो उसने कहा, “जो वक़्त बीत गया उसको लौटाने की कोशिश मत करो वरनासब बर्बाद हो जाएगा. तुम्हारा घर-परिवार-शादी! मैं पहले की ही तरह अपने प्यार को कलंकित नहीं कर सकता, मैंने अपनेप्यार को हर पल जिया, तुमको हमेशा अपने क़रीब महसूस किया, मेरे लिए तो यही काफ़ी है, मैंने तुमको खोकर अपनेप्यार को मुकम्मल किया, भले ही हम साथ ना रह पाए हों, पर खोना भी प्यार का हिस्सा होता है, तुम ख़ुश रहना और हमारेप्यार को कलंकित मत होने देना कभी भी.”

Pahla Affair

मैंने फिर एक बार सुमित को खो दिया था पर इस बार भी वो मुझे प्यार करना और प्यार की इज़्ज़त बनाए रखना सिखागया था. प्यार में सब कुछ जायज़ नहीं होता, प्यार की भी हदें और सरहदें होती हैं और उन हदों में रहकर अपने प्यार कोनिभाना भी बहुत बड़ी बात है. यह आसान नहीं, लेकिन सुमित ने वाक़ई मुझे प्यार करना और निभाना सिखाया, थैंक यूसुमित!

  • पिंकी शर्मा 

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बिग बॉस में अब जो ट्विस्ट आया है वो किसी ने सोचा भी नहीं था. फिनाले में पहुंचे चार फ़ायनलिस्ट को टक्कर देने बतौर वाइल्ड कार्ड एंट्री विकास गुप्ता, कश्मीरा शाह, अर्शी खान, राहुल महाजन, राखी सावंत और मनु पंजाबी घर में पहुंच चुके हैं. लेकिन ये यूं ही घर में नहीं आए हैं बल्कि ये घर के बाक़ी सदस्यों की मुश्किलें बढ़ाने भी आए हैं और अपने साथ कुछ टास्क और चैलेंजेस भी लाए हैं.
विकास गुप्ता को काफ़ी चैलेंज मिले हैं और उन्होंने कहा भी कि सबको पूरा करेंगे वो भी बड़ी आसानी से. इसी बीच अब एक ऐसी बात सामने आई है जिससे जैस्मिन और अली के रिश्ते का सच लोगों को पता चला है और वो भी जैस्मिन ने खुद क़ुबूला है.

Jasmin Bhasin and Aly Goni

दरअसल विकास ने जैस्मिन से पूछा कि तुम्हारे और अली के बीच क्या है तो जैस्मिन ने कहा दोस्ती लेकिन विकास ने कहा कि क्या तुमको लगता है लोग बेवक़ूफ़ हैं और सच देख नहीं सकते? विकास ने जैस्मिन से आगे पूछा क्या तुम सारी ज़िंदगी अली के साथ नहीं रहना चाहतीं? क्या तुम उससे प्यार नहीं करतीं… पहले तो जैस्मिन इसी कोशिश में लगी रही कि सच ना उगले लेकिन बाद में उन्होंने मान किया कि हां, वो अली से प्यार करती हैं और उनका अली के साथ रिश्ता है.

इसके बाद रही सही कसर कश्मीरा शाह ने भी पूरी कर दी. कश्मीरा ने जैस्मिन को कहा कि आप मास्टर माइंड हो क्योंकि आपने पहले तो रो-रो कर अली को घर में बुला लिया और उसके बाद जब बाहर जाने की बात आई तो उसी को बाहर भी भेज दिया, आप भी तो जा सकती थीं बाहर, इसलिए ये आपका मास्टर स्ट्रोक था। तब जैस्मिन ने कहा कि भावनाओं में कोई मास्टर स्ट्रोक नहीं मारता, आप कुछ जानती ही नहीं.

Jasmin Bhasin and Aly Goni

इसके बाद जैस्मिन ने कहा कि वो और अली तीन साल से रिश्ते में हैं और वो प्यार के लिए घर में आया था और प्यार के लिए ही बाहर भी गया क्योंकि उसके और अली के रिश्ते में वही होता है जो अली चाहता है, यही उनके रिश्ते का बेस है. मुझे ख़ुशी है कि मेरी ज़िंदगी में कोई ऐसा है जो मुझसे इतना प्यार करता है और उसकी हर बात मानने में मुझे भी ख़ुशी होती है.
ग़ौरतलब है कि पहले जैस्मिन हमेशा इस रिश्ते हो दोस्ती का नाम ही देती रहीं, लेकिन अब इस ख़ुलासे के बाद विकास भी कैमरे में कहने लगे कि जैस्मिन के पैरेंट्स देख लें कि लड़का अच्छा है!

Jasmin Bhasin and Aly Goni

जैस्मिन और अली के फैंस भी खुश हैं इस ख़ुलासे के बाद!

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रिश्ते जीने का संबल, जीने का सबब, एक सहारा या यूं कहें कि एक साथ… रिश्तों को शब्दों के दायरे में परिभाषित नहींकिया जा सकता, उन्हें तो सिर्फ़ भावनाओं में महसूस किया जा सकता है. लेकिन बात आजकल के रिश्तों की करें तो उनमेंना भावनायें होती हैं और ना ही ताउम्र साथ निभाने का माद्दा, क्योंकि आज रिश्ते ज़रूरतों और स्वार्थ पर निर्भर हो चुके हैं. यही वजह है कि रिश्तों में बेहिसाब बोझ बढ़ते जा रहे हैं और हर रिश्ता बोझिल होता जा रहा है. ऐसे में इनके करणों को जानना बेहद ज़रूरी है.

सबसे पहले जानते हैं रिश्तों में आख़िर बोझ क्यों है? 

  • रिश्तों में बोझ होने की सबसे बड़ी वजह है कि रिश्ते अब दिल से नहीं जुड़े हुए हैं.
  • रिश्ते मजबूरी बन चुके हैं. 
  • रिश्तों में स्वार्थ सबसे ऊपर हो चुका है.
  • रिश्ते भावनाविहीन हो रहे हैं.
  • मशीनी हो रहे हैं एहसास.
  • संवेदना ग़ायब हो रही है.
  • हम से ज़्यादा मैं की सोच हावी हो रही है.
Relationship Problems

किस तरह के बोझ हैं और क्यों बोझिल हो गए हैं रिश्ते? 

  • ज़िम्मेदारी का बोझ: लोग ज़िम्मेदारियों से डरने लगे हैं और इन्हें निभाने से कतराते हैं. इन्हें लेने से बचते हैं. हर किसीको लगता है कि वो अपनी ज़िम्मेदारी किसी और को दे दे और खुद सिर्फ़ अपने लिए जिए. जहां इस तरह की सोचपनपने लगती है वहां रिश्ते बोझिल ही लगते हैं.
  • कमिटमेंट का बोझ: लोग कमिटमेंट से बचना चाहते हैं क्योंकि वो खुद नहीं जानते कि इन रिश्तों को वो कब तकनिभा सकेंगे और ना जाने कब वो रस्ता बदल दें. लोगों का स्वार्थ इस हद तक बढ़ चुका है कि वो वही रिश्ते निभानाचाहते हैं जिन रिश्तों से उन्हें किसी तरह का कोई फायदा हो. अगर पार्टनर से कोई फायदा होता नज़र नहीं आता तोवो उसको छोड़ दूसरे का दामन थामने से भी नहीं कतराते. इसी तरह अगर माता-पिता, भाई-बहन से भी लगाव नहीं हैतो वो भी उन्हें बोझ लगने लगते हैं और वो उनसे भी दूरी बनाने लगते हैं.
  • पैसों का बोझ: आर्थिक तंगी भी रिश्तों में बोझ बढ़ाती है और इस वजह से रिश्ते और बोझिल लगने लगते हैं. पैसासबकी ज़रूरत है और पैसों की तंगी से रिश्तों में भी मनमुटाव होने लगते हैं. तनाव बढ़ता है और सारे रिश्ते बोझिल हीलगने लगते हैं.
  • करियर का बोझ: कॉम्पटीशन के इस दौर में करियर को ऊपर ले जाना, वर्क और होम लाइफ को बैलेंस करनाआसान नहीं. जो लोग ऐसा नहीं कर पाते उनके रिश्तों में बोझ बढ़ता जाता है.
  • समाजिक दबाव का बोझ: हम जिस समाज में रहते हैं वहां समाज और आस पास के लोगों के बारे में कुछ ज़्यादा हीसोचा जाता है. ऐसे में हम चाहकर भी अपने मन का नहीं कर पाते क्योंकि हर बात और हर निर्णय पर हमको यहीसमझाया जाता है कि हमारे समाज में ऐसा नहीं चलता या फिर लोग क्या कहेंगे. इस तरह के माहौल में ज़ाहिर हैदम घुटता है और हर बात बोझिल ही लगती है.
  • स्टेटस का बोझ: आज की तारीख़ में कुछ हो ना हो स्टेटस होना बहुत ज़रूरी है. और जबसे सोशल मीडिया कीहमारी लाइफ़ में एंट्री हुई है तबसे तो यह बोझ बढ़ता ही जा रहा है. हर कोई इसी होड़ में रहता है कि हमारी लाइफ़कितनी कूल है, दूसरों को दिखाने के लिए अब हर चीज़ होती है. ब्रांडेड मोबाइल से लेकर हर बात का सेलिब्रेशनजैसे बस दिखावे की चीज़ ही बनकर रह गई. हर वक़्त खुश और हैपनिंग लाइफ़ का टैग लेकर घूमना आज कीसबसे बड़ी ज़रूरत बन गई. ये तमाम चीज़ें रियल लाइफ़ रिश्तों को खोखला बनाती हैं और आप उन्हें भूलकरडिजिटल रिश्तों की नक़ली दुनिया में खोते चले जाते हैं.
  • खुश दिखने का बोझ: आप खुश हों या ना हों लेकिन आज की तारीख़ में आपका खुश दिखना ज़रूरी है, क्योंकिकिसी को फ़ुर्सत भी नहीं आपके दुखों को जानने और समझने की. ऐसे में मन ही मन में घुटने के बाद भी आपको ढोंगकरना पड़ता है कि आप की ज़िंदगी बेहद हसीन है.
Relationship Problems

रिश्तों में बोझ को बढ़ाते हैं यह पहलू

  • पार्टनर या अन्य सदस्य जब साथ ना दें और सारी ज़िम्मेदारी किसी एक पर आ जाए.
  • ज़िम्मेदारी निभाने के बावजूद तारीफ़ या सहयोग ना मिले.
  • अपना दांव कुछ भूलकर भी अपने रिश्तों को सब कुछ देने के बाद भी किसी का सहयोग ना मिले.
  • अर्थिक रूप से आत्मनिर्भर ना होने पर भी बहुत कुछ बर्दाश्त करना पड़ता है जिससे रिश्तों में बोझ बढ़ता है.
  • अपनों से ही सम्मान ना मिलने पर भी बहुत कुछ बदल जाता है.
  • आपको निर्णय लेने की आज़ादी ना हो या आपकी राय को अहमियत ही ना दी जाए तब भी बोझिल लगता है हररिश्ता.
Relationship Problems

क्या किया जाए कि रिश्ते बोझिल ना लगें

  • बात करें: कम्यूनिकेट करना किसी भी रिश्ते के लिए सबसे ज़रूरी और सबसे अहम् है. बात ना करना किसी भीसमस्या का समाधान नहीं. इससे परेशानी और बढ़ेगी. बेहतर होगा कि आपसी बात चीत से मन का बोझ हल्का करें, अपनी परेशानियों को अपनो से साझा करें. उनकी परेशानियों को जाने. 
  • स्वार्थी ना बनें: रिश्तों में सिर्फ़ अपने बारे में नहीं सोचा जाता, रिश्तों का मतलब ही है एकजुट होकर सबके लिएसोचना. स्वार्थ की भावना भले ही आपको कुछ समय के लिए ख़ुशी दे देगी लेकिन आगे चलकर आप एकदम अकेलेपड़ जायेंगे. स्वार्थ छोड़कर देखें, आपको अपने रिश्ते ही इतने प्यारे लगेंगे कि बोझ अपने आप हल्का लगने लगेगा.
  • शेयर करें: शेयरिंग की भावना से रिश्ते गहरे और मज़बूत बनते हैं. सुख-दुःख हो, कामयाबी या असफलता सब कुछशेयर करें. इससे आपकी ख़ुशियाँ और हौसला दोनों बढ़ेंगे और रिश्ते बोझ कम संबल अधिक लगेंगे.
  • जिम्मेदारियाँ साझा करें: ज़िम्मेदारियों से भागने की बजाए उन्हें साझा करें. रिश्तों में सबकी जिम्मेदारियाँ बनती हैंऔर जो कुछ भी निभाना होता है मिलकर ही बेहतर तरीक़े से निभाया जा सकता है. सामने से खुद आगे बढ़कर कहेंकि यह काम मुझ पर छोड़ दें, फिर देखिए रिश्तों से बोझ अपने आप कम होगा और रिश्ते बोझिल नहीं प्यारे लगेंगे.
  • काम बांट लें: घर या बाहर दोनों जगह का काम बांट लें. सब मिलकर करेंगे तो ज़िंदगी और रिश्ते दोनों आसान लगनेलगेंगे. जो काम आप बेहतर कर पायें वो आप लें और दूसरों को भी उनकी क्षमता के अनुसार काम दें.
  • आर्थिक ज़िम्मेदारी भी बांटे: रिश्तों में ज़रूरी है कि आर्थिक ज़िम्मेदारियों का भी बंटवारा हो. आप अगर यह सोचरखेंगे कि मैं अपने पैसे बचा लूं और सामने वाला ही अकेला खर्च करे तो यह सही नहीं. आपको कुछ ख़र्चों कीज़िम्मेदारी खुद ब खुद ख़ुशी ख़ुशी लेनी चाहिए. इससे अपनापन बढ़ेगा और रिश्ते बोझ नहीं लगेंगे.
Relationship Tips
  • दिल को खोल लें: दिल को खुला रखें ताकि ज़िंदगी जी खोल के जी सकें. अगर आपको किसी चीज़ की कमी भीहोगी तो अपनों के साथ वो कमी महसूस नहीं होगी. चाहे पैसों की कमी हो या सुविधाओं की अगर अपने साथ हैं तोज़िंदगी की राह आसान हो जाती है. अगर आप अपने रिश्तों का ख़याल रखेंगे तो बुरे समय में रिश्ते आपका ख़यालरखेंगे.
  • अपनी सोच बदलें, फ़ायदे-नुक़सान के तराज़ू में रिश्तों को ना तोलें: रिश्तों में कभी भी फ़ायदा या नुक़सान की सोचके साथ आगे नहीं बढ़ा जा सकता. रिश्तों को सिर्फ़ प्यार से ही सींचा जा सकता है वर्ना हर रिश्ता बोझ ही लगेगा. किसने क्या किया इस सोच से ऊपर उठकर यह सोचें कि अपनों को कैसे और क़रीब लाया जाए.
  • चीट ना करें, सबको सम्मान दें: सम्मान देंगे तो सम्मान मिलेगा. चीटिंग की रिश्तों में कोई जगह नहीं होती. पार्टनर कोधोखा ना दें. घर में भी सबकी राय को महत्व दें. सबसे राय लें. किसी को कम ना आंके. कई बार एक बच्चा भी बड़ीसे बड़ी समस्या का आसान रास्ता सुझा देता है.
  • ईगो ना रखें: अहंकार हर रिश्ते को मिटा देता है. अपनों से भला कैसा ईगो? खुद को सर्वश्रेष्ठ और दूसरों को मूर्खसमझने की गलती ना करें. आप अकेले रहेंगे तो बोझ बढ़ेगा, बेहतर है सबको साथ लेकर चलें. नकारात्मक सोचऔर भावनाओं को त्याग दें.

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नज़रें मुस्कुराने लगती हैं.. धड़कनें गुनगुनाने लगती हैं.. एकतरफ़ा ही सही मुहब्बत की महफ़िल होती है उस तन्हा दिल में…
यक़ीनन एकतरफ़ा प्यार में एक तरफ़ ही सही, प्यार होता है बेशुमार. प्यार, मीठा एहसास.. जीने का सबब.. इंसान को बहुत ख़ूबसूरत बना देता है प्यार. लेकिन जब एकतरफ़ा प्यार की बात होती है, तो स्थितियां बदल जाती हैं. यहां पर दोनों तरफ़ प्यार में बराबरी की बात नहीं रहती है. यह एकतरफ़ा रहता है मतलब एक ही शख़्स जो शिद्दत से चाह रहा है. कई मामलों में इस ज़ज्बात का पता होता है, तो कई बार अगला इससे अनजान भी रहता है. बड़े ही बेदर्दी से टूटते हैं वो दिल, जो एकतरफ़ा प्यार से जुड़ते हैं.

इस तरह के प्यार-एहसास के कई साइड इफेक्ट्स भी देखने को मिलते हैं. इस पर एक नज़र डालते हैं-

  • दिल ये मानने को तैयार ही नहीं होता कि वह मुझे नहीं चाहता/चाहती है. हर पल एक उम्मीद बनी रहती है, जो बाद में नाउम्मीद हो जाती है और निराशा घेरने लगती है.
  • तनाव और अवसाद धीरे-धीरे पैर पसारने लगते हैं. कई बार डिप्रेशन इस कदर बढ़ जाता है कि प्रेम में हारा हुआ इंसान जाने-अनजाने में ग़लत कदम उठाने की तरफ़ भी बढ़ जाता है. ख़ुद का अहित करने से भी नहीं हिचकते.
  • अक्सर टूटे दिलवाले लोग नशे में ग़म को भूलाने की कोशिश करने लगते हैं. शराब, सिगरेट, ड्रग्स आदि लेना शुरू कर देते हैं. ताकि ख़ुद को भुलाए रखें.. उसका ख़्याल ना आए..

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  • एकतरफ़ा प्यार आपके आत्मविश्‍वास पर चोट करता है और उसे बुरी तरह से प्रभावित करता है. जब आप अपने प्यार को नहीं पाते हैं या वह आपको नहीं प्यार करता है.. इस सोच के कारण कहीं-न-कहीं आपका कॉन्फिडेंस लेवल गिरने लगता है.
  • अक्सर ऐसा भी होता है कि उसे पाने की कोशिश में अपने आत्मसम्मान को भी ताक पर रख देते हैं, जिससे आपका स्वाभिमान भी प्रभावित होने लगता है.
  • उपेक्षाओं और अपेक्षाओं के बीच दिल और मन झूलने लगता है. अपने प्यार की उपेक्षा से कहीं-न-कहीं हीनभावना भी पनपने लगती है.
  • प्यार को पाने की कोशिशें असफल होने के कारण कई बार ख़ुद को कम आंकने, नाक़ाबिल समझने की सोच जन्म लेने लगती है.
  • ख़ुदा ना खास्ता जिसे आप चाह रहे और वो किसी और को प्रेम कर रहा या रही है, तब कई बार स्तिथि हिंसक भी हो जाती है. अपने प्यार को पाने का जुनून अक्सर ग़लत भी करवा देता है.
  • अपनों में रहकर भी बेगाने जैसी स्थिति होती है. कुछ भी अच्छा नहीं लगता. अकेले रहने का मन करने लगता है.
  • ज़िंदगी के प्रति बेरुखी-सी हो जाती है. सब कुछ सुना और अधूरा-सा लगने लगता है.
  • किसी काम में मन नहीं लगता. इच्छाएं और ख़ुशी जैसे गुम-सी हो जाती है.
  • बार-बार उस शख़्स का ख़्याल दिलोंदिमाग़ पर हावी रहता है, जिससे कोई भी काम ठीक से नहीं हो पाता. * चाहे ऑफिस हो या बिज़नेस उसे लेकर उतनी गंभीरता नहीं रहती, क्योंकि मन तो अपने प्यार को पाने के जोड़-तोड़ में लगा रहता है.
  • हर घड़ी प्यार के एहसास की लहरें उठती रहती हैं, जिससे किसी भी काम में एकाग्र भी नहीं हो पाते.
  • वैसे इन मामलों में अपवाद भी देखने को मिले हैं यानी कोई टूटकर भी निखर जाता है, तो कोई टूटकर बिखर जाता है.
  • कई बार अपने इस एकतरफ़ा प्यार को प्रेरणा या आदर्श मानते हुए कुछ कामयाबी की बुलंदियों तक पहुंच जाते हैं, तो कुछ असफल होकर दुखी और ग़मगीन ही बने रहते हैं.

सिनेमा में एकतरफ़ा प्यार का दर्द
फिल्मों में भी एकतरफ़ा प्यार को काफ़ी दिखाया गया है. इस फ़ेहरिस्त में देवदास फिल्म को हमेशा याद किया जाता है. देवदास फिल्म में पारो और चंद्रमुखी के बीच देवदास के प्यार को लेकर भले ही खींचतान हो, लेकिन चंद्रमुखी का एकतरफ़ा प्यार इतिहास बन जाता है. लोगों को हमेशा उसके प्रति सहानुभूति से भर देता है. फिल्म ऐ दिल है मुश्किल तो एकतरफ़ा प्यार पर ही आधारित थी. रणबीर कपूर, अनुष्का शर्मा और ऐश्वर्या राय बच्चन की उम्दा अदाकारी फिल्म की जान थी. इसमें एकतरफ़ा प्यार के दर्द, तड़प, अनकहे एहसास, सोच को बख़ूबी दर्शाया गया था. इसके अलावा मुकद्दर का सिकंदर, प्यार तूने क्या किया, मस्ती जैसी फिल्मों में भी एकतरफ़ा प्यार के एहसास को दिखाने की बेहतरीन कोशिश की गई है.

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वैसे देखा जाए तो प्यार में प्रभाव, अभाव, नफ़ा-नुक़सान नहीं होता है. प्यार तो बस प्यार होता है. अब इस एहसास को आप कैसे जीते हैं, कैसे अपनाते हैं, सब कुछ आप पर निर्भर करता है. चाहे तो अपने एकतरफ़ा प्यार को अपना जुनून बनाकर आगे बढ़ जाए या फिर निराशा के गर्त में चले जाएं. ये सब कुछ व्यक्ति विशेष पर निर्भर करता है. तो क्यों ना इसके साइड इफेक्ट्स को पाॅजिटिवनेस में बदलकर मिसाल कायम कर बेमिसाल बना जाए.

– ऊषा गुप्ता

कोरोना वायरस के चलते हुए लॉकडाउन ने सभी को संयुक्त परिवार के महत्व को अच्छी तरह से समझा दिया है. साथ ही यह एहसास कराया कि ऐसी घड़ी में परिवार में रहना कितना मायने रखता है. आइए विभिन्न लोगों की इस बारे में तर्कपूर्ण विचारों को जानते हैं. साथ ही संयुक्त परिवार के महत्व को जानते-समझते हैं.

नौकरी, व्यापार और भविष्य के सुनहरे सपने लिए युवा बाहर जाने लगे और परिवार एकल होता चला गया. परिवार के नाम पर पति-पत्नी और एक या दो बच्चे रह गए. दादा-दादी, नाना-नानी का सुख होता क्या है बच्चे जान ही नहीं पाते हैं. दशकों पहले शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसा नहीं था. पहले लोग संयुक्त परिवार की तरह रहते थे. लेकिन धीरे-धीरे यह घटकर एकल परिवार में तब्दील होता चला गया.
पिछले काफ़ी महीनों से कोरोना महामारी के चलते संक्रमण का डर एकल परिवारों को अपनों के पास खींचने लगा है. अब लोग एक ही छत के नीचे पूरे परिवारसहित हंसी-ख़ुशी रह रहे हैं और एक-दूसरे के काम में हाथ बंटा रहे हैं. चाहे बच्चों की देखभाल हो या फिर रसोई का काम सब मिलकर कर रहे हैं. पुरुष बाहर के काम में एक-दूसरे का सहयोग कर रहे हैं.
सहयोग के अटूट बंधन में बंधे रिश्तों की मज़बूत डोर को ही तो परिवार कहते हैं…
कहा भी गया है परिवार से बड़ा कोई घन नहीं होता. पिता से बड़ा कोई सलाहकार नहीं होता. मां के आंचल से बड़ी कोई दुनिया नहीं होती. भाई से अच्छा कोई दोस्त नहीं होता और बहन से बड़ा कोई शुभचिंतक नहीं होता. इसलिए परिवार के बिना जीवन की कल्पना ही कठिन है.
कोरोना वायरस के संक्रमण के बचाव के लिए हुए लॉकडाउन ने संयुक्त परिवारों की अवधारणा को तो मज़बूती दी ही है, परिवार के सदस्यों के बीच की दूरियों को भी कम कर दिया है. कई परिवार इस लॉकडाउन का इस्तेमाल क्वालिटी टाइम बिताने और आपसी रिश्ते मज़बूत करने में कर रहे हैं.

लॉकडाउन ने बढ़ा दी परिवार की एकता
पारेख परिवार के सबसे बड़े सदस्य पारसमल और ज्योति पारेख का कहना है कि लॉकडाउन के ये दिन ज़िंदगी में हमेशा याद रहेंगे. स्कूल-कॉलेज बंद होने से बच्चे घर में ही हैं. घर में फ़रमाइश अब प्राइवेसी की नहीं, बल्कि नए-नए पकवानों की होती है. पोता-पोती घर की सफ़ाई से लेकर खाना बनाने तक में साथ रहते हैं. छोटे हों या बड़े, घर में सभी को एक साथ बैठकर गेम्स खेलना ही होता है. बेटी दूर रहती है, तो ऑनलाइन उसको भी जोड़ लेते हैं. दरअसल, इस लॉकडाउन ने हमारे परिवार की एकता बढ़ाई है.
वहीं घर के छोटे बच्चों का कहना है कि दादा-दादी से हमें परिवार की पुरानी परम्पराओं और कहानियों को जानने का मौक़ा मिल रहा है.
हनुमंत निवासी दीपिका रुणवाल का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान अपने घरों में रहने से हमें प्रतिबिंबित होने का समय मिला है. कोरोना जैसी महामारी ने परिवारों में जुड़ाव पैदा करके बचपन के उन दिनों को फिर से याद करना शुरू कर दिया. हमने अपने रिश्तों को फिर से जोड़ा और जो हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं. सही कहा जाए, तो कोरोना ने परिवारों को जोड़ने में अहम भूमिका अदा की है.
वहीं इन्दु व्यास का कहना है कि लॉकडाउन कई परिवारों के लिए प्रशिक्षण काल रहा. इस दौरान हमें परिवार के साथ रहने का मौक़ा मिला. परिवार के साथ सामंजस्य बढ़ाने का सुअवसर मिला. बेवजह के ख़र्चों पर भी रोक लगा. इस दौरान जाना कि कम पैसों में भी घर चलाया जा सकता है.
“मुझे हमेशा से किताबें पढ़ना बहुत पसंद है. लेकिन ऑफिस की व्यस्तता के कारण रीडिंग को इतना टाइम नहीं दे पाता था. लॉकडाउन ने मुझे एक बार फिर मेरी हॉबी से जोड़ दिया है. मैं हर दिन एक घंटे कुछ-न-कुछ नया पढ़ता हूं. मेरे बुक कलेक्शन में 100 से ज़्यादा किताबें हैं. हालांकि, किताबों के साथ समय बिताना अच्छा तो लग रहा है, लेकिन बहुत-सी ऐसी चीज़ें हैं, जिसे मिस भी कर रहा हूं.” यह कहना है उपासना ग्रुप के चेयरमैन ओम माहेश्वरी का.
पहले शाम की चाय का आनंद परिवार के साथ नहीं उठा पाता था, लेकिन लॉकडाउन की स्थिति में पूरा समय घर पर ही हूं, तो परिवार के साथ समय बिताने का मौक़ा मिल रहा है. बच्चों के साथ चेस और कैरम खेलता हूं. कभी-कभी बिलियर्ड्स भी खेलता हूं. यह ज़रूर कहूंगा कि कोरोना वायरस ने सभी की ज़िंदगी को बदल दिया है. अब लोग पहले से ज़्यादा साफ़-सफ़ाई और हेल्दी लाइफस्टाइल को अपनी आदत बनाएंगे.

संयुक्त परिवार में ख़ुशियां आपार, तो एकल परिवारों में उदासी का आलम…
कोरोना वायरस के चलते लागू लॉकडाउन में संयुक्त परिवारों की अवधारणा को मज़बूत किया है. इन लॉकडाउन में लोगों के अनुभव जानें, तो पता चलता है कि इस अवधि में जहां संयुक्त परिवारों में बिना किसी परेशानी के ख़ुशियों का माहौल रहा, वहीं एकल परिवारों में उदासी छाई रही. इन परिवारों में एक-एक दिन गुज़ारना मुश्किल रहा है.
भारतीय संस्कृति में संयुक्त परिवारों की महत्ता को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है. लेकिन आपाधापीभरी ज़िंदगी के चलते संयुक्त परिवार बिखरते चले गए. इस बात पर बात होती रही, पर किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया. आज जब लॉकडाउन के चलते घरों से निकलना बंद हो गया है, तो ऐसे समय में अब लोगों को परिवार का महत्व समझ में आने लगा हैं.
16 परिवारों का सदस्य सराफ़ परिवार का कहना है कि लॉकडाउन की अवधि में भी पूरे परिवार में ख़ुशियों का माहौल है. पुराने क़िस्से और खेलों से रोज़ महफ़िल रौशन होती है. वे कहते हैं संयुक्त परिवार का फ़ायदा यह है कि तालाबंदी में भी किसी चीज़ की कोई कमी नहीं हो रही.
लेकिन वहीं एकल परिवारों की मुश्किलें इन दिनों बढ़ी हैं. सिरोंज के रहनेवाले रधुवंशी के परिवार में क़रीब 29 लोग हैं, लेकिन वे दूसरे शहर में पत्नी और दो बच्चे के साथ रह रहे हैं. उनका कहना है कि लॉकडाउन के दौरान समय काटना मुश्किल हो गया है. शादी के 12 साल के दौरान उन्होंने कभी राशन और सब्ज़ी लाने का काम नहीं किया, लेकिन आज करना पड़ रहा है. बच्चे भी मोबाइल फोन एडिक्ट होते जा रहे हैं. यही हालत शिक्षक अनिल शर्मा की हो गई है. कहते हैं कि इस समय संयुक्त परिवार का महत्व समझ में आ रहा है.
हाल ही में फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप ने वीडियो कॉल कर दिए अपने इंटरव्यू में बताया कि कोई काम न होने के चलते एक दिन उन्होंने अपनी बेटी के साथ बैठकर क़रीब 6 घंटे तक गप्पें मारीं. उनके मुताबिक़ बीते 15 सालों में ऐसा पहली बार हुआ था. हालांकि कश्यप एक व्यस्त फिल्मकार हैं और उनकी बेटी भी भारत में नहीं रहती हैं, इसलिए उनके साथ ऐसा होना स्वाभाविक है. लेकिन जीवन की भागदौड़ में कई बार बेहद आम लोग भी अपने परिवार को पर्याप्त समय नहीं दे पाते हैं.
यह लॉकडाउन परिवार के साथ वक़्त बिताने का मौक़ा बन गया है. इसके अलावा, इस वक़्त पुराने दोस्तों और छूट चुके रिशतेदारों को याद करने और उनसे फोन पर बात या मैसेजिंग के ज़रिए संपर्क करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है.
एक ताजा सर्वे के मुताबिक़, 97 फ़ीसदी लोग लॉकडाउन में फैमिली के साथ रह रहे हैं. परिवार में 94 फ़ीसदी सदस्य एक साथ डिनर करते हैं, जिसमें सभी के बीच परिवार और दूसरे मामलों को लेकर खुलकर बातचीत होती है. 84 फ़ीसदी लॉकडाउन के दौरान ब्रेकफ़ास्ट और 90 फ़ीसदी परिवारों में लंच इकठ्ठा हो रहा है.
लोगों का मानना है कि इस समय क्वालिटी टाइम परिवारों को दिया जा रहा है. इस बीच परिवारों में आपसी मनमुटाव भी कम हुए हैं. घर में सभी लोग एक-दूसरे के काम में हाथ बंटा रहे हैं. कोरोना संक्रमण में सेनिटाइजर के प्रयोग को लेकर भी लोगों में अवेयरनेस है.

लॉकडाउन में दिखे ये शुभ संकेत
• आनेवाले दिनों में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे. इसके संकेत लॉकडाउन के शुरुआती दिनों में ही मिले थे.
• जब लोग घरों में बैठे थे, उन्हें पता चला कि शोर की जगह प्रकृति का संगीत बजता है. चिड़ियों की चहचहाहट सुबह ही नहीं, दिन भर सुनाई देती है.
• सबसे बड़ा असर हवा में दिखा. वाहनों ने न धुआं उगला, न फैक्ट्री की चिमनियों ने राख.
• उघोग नगरी सूरत, सिलवासा में यह 110 से घटकर 90 से भी कम रह गया है.
• दक्षिण गुजरात में समुद्री किनारे दूर तक नज़र आने लगी है.
यह सारे संकेत है कि हम चाहें तो अभी भी प्राकृतिक विरासत को बचा सकते हैं.

– मिनी सिंह

Joint Family

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“आई एम सॉरी” आप जितनी आसानी से ये शब्द अपने पार्टनर को कह देती हैं, क्या वो भी उतनी ही सजहता से आपसे माफ़ी मांग लेते हैं? शायद नहीं. कुछ अपवादों को छोड़ दें, तो आमतौर पर पुरुष अपनी ग़लती के लिए माफ़ी मांगना ख़ासकर पार्टनर से, अपनी तौहीन समझते हैं. उनके लिए ‘सॉरी’ शब्द बेहद मुश्किल होता है. आख़िर इसकी क्या वजह है? आइए, जानते हैं.

Guys Never Say Sorry

मेल ईगो
पुरुषों के माफ़ी मांगने से कतराने की सबसे बड़ी वजह है मेल ईगो यानी उनका अहंकार. इसी अहंकार की वजह से ये जानते हुए भी कि वो ग़लत हैं, पार्टनर से माफ़ी नहीं मांगतें. ऐसे लोगों के लिए उनका ग़ुरूर हमसफ़र की भावनाओं से ज़्यादा अहमियत रखता है. वो अपने पार्टनर का दिल तो दुखा सकते हैं लेकिन सॉरी बोलकर अपने मेल ईगो को हर्ट नहीं कर सकते. ज़्यादातर महिलाएं भी इस बात से सहमत हैं. एक मीडिया ग्रुप से जुड़ी मीनाक्षी कहती हैं “पुरुषों के माफ़ी न मांगने की एकमात्र वजह मेल ईगो ही है, उन्हें लगता है पत्नी से माफ़ी मांगने से उनका क़द छोटा हो जाएगा.” विशेषज्ञों की भी कुछ ऐसी ही राय है उनके मुताबिक “पुरुषों को लगता है माफ़ी मांगने से उनकी शान घट जाएगी.”

कमज़ोरी की निशानी
साइकोलॉजिस्ट डॉ. हरीश शेट्टी के मुताबिक “पुरुष माफ़ी मांगने को कमज़ोरी की निशानी समझते हैं. उन्हें लगता है कि अगर वो पत्नी से माफ़ी मांगेगे तो वो उन्हें कमज़ोर समझने लगेगी, उसे लगेगा कि पति परिवार की ज़िम्मेदारी उठाने के क़ाबिल नहीं है.” इसलिए माफ़ी मांगकर वो ख़ुद को पार्टनर की नज़रों में गिराना नहीं चाहतें.

मैं ग़लत नहीं हो सकता
पुरुषों का अपनी ग़लती न मानने वाला रवैया भी उन्हें माफ़ी मांगने से रोकता है. दरअसल, माफ़ी मांगने से उनकी ग़लती साबित हो जाएगी और पुरुष ख़ासतौर से किसी महिला के सामने कभी ग़लत साबित होना नहीं चाहतें. डॉ. शेट्टी भी इस बात से सहमत हैं, उनका कहना है “पुरुषों को लगता है कि वो जो कर रहे हैं वही सही है और उन्हें किसी को जवाब देने की ज़रूरत नहीं है.” एक प्रतिष्ठित मीडिया ग्रुप से जुड़ी शिवानी का कहना है कि “पढ़े-लिखे होने के बावजूद मेरे पति बहुत डॉमिनेटिंग हैं, अगर कभी उनसे कोई ग़लती हो जाए, तो सॉरी बोलना दो दूर की बात है, वो अपनी ग़लती मानते तक नहीं हैं.”

सॉरी बोलने की बजाय जताना
कुछ पुरुष सॉरी कहने की बजाय माफ़ी मांगने का दूसरा तरीक़ा अख़्तियार करते हैं, जैसे- पार्टनर को फूल, ज्वेलरी, चॉकलेट या कोई और गिफ़्ट देकर अपनी माफ़ी मांगने की भावना व्यक्त करते हैं. इतना ही नहीं, कई बार वो पार्टनर का ज़्यादा ख़्याल रखकर भी अपनी ये भावना ज़ाहिर करते हैं. दिलचस्प बात तो ये है कि महिलाओं को भी पुरुषों का बिना बोले माफ़ी मांगने का ये अंदाज़ पसंद आता है, बिना कहे ही वो उनकी भावनाओं को समझ जाती है.

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Guys Never Say Sorry

अस्वीकृति का डर
कुछ पुरुष पार्टनर द्वारा अस्वीकार किए जाने के डर से माफ़ी नहीं मांगते. उन्हें लगता है कि माफ़ी मांगने से कहीं कोई नकारात्मक स्थिति न उत्पन्न हो जाए, इसी डर से वो भावनाओं की उधेड़बुन में उलझे रहते हैं और तय नहीं कर पाते कि माफ़ी मांगू या नहीं? माफ़ी मांगने के बाद शायद हालात उनके पक्ष में न रहें. इसी डर से वो ये निश्चित नहीं कर पाते कि कब और कैसे पार्टनर को सॉरी कहें. डॉ. शेट्टी के मुताबिक “पुरुषों को इस बात का भी डर रहता है कि कहीं माफ़ी मांगने के बाद पत्नी उन्हें एक्सप्लॉइट न करे.”

सामना करने से बचना
कुछ पुरुषों के माफ़ी न मांगने की एक वजह उनकी पार्टनर भी होती है. कई बार महिलाएं पार्टनर के माफ़ी मांगने पर उन्हें माफ़ करने की बजाय सबक सिखाने के इरादे से बहस या लड़ाई-झगड़ा करने लगती है, ऐसे में पार्टनर अगली बार माफ़ी मांगने से पहले सौ बार सोचता है. उसे डर रहता है कि सॉरी बोलने पर फिर कहीं कोई बहस न शुरु हो जाए.

रूढ़ीवादी विचारधारा
साइकोलॉजिस्ट डॉ. हरीश शेट्टी के मुताबिक “पुरुष अपने जिस ईगो या अहंकार की वजह से महिलाओं से माफ़ी मांगने से झिझकते हैं, उसकी एक वजह पुरुष प्रधान समाज वाली विधारधारा है. जिस वजह से उन्हें लगता है कि माफ़ी मांगना उनकी मर्यादा के ख़िलाफ़ है.” हालांकि अब हालात बदलने लगे हैं, बावजूद इसके कहीं न कहीं मेल डोमिनेटिंग वाली सोच उभर ही आती है. अगर लड़के परेशान या दुखी होकर रोते हैं, तो माता-पिता तुरंत कह देते हैं ‘क्या लड़कियों की तरह रो रहे हो’, इस तरह कहने से उनके ज़ेहन में ये बात बैठ जाती है कि लड़कियां कमज़ोर होती हैं और किसी कमज़ोर से भला वो माफ़ी कैसे मांग सकते हैं.

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Guys Say Sorry

बदल रही है मानसिकता
वक़्त के साथ-साथ समाज और पुरुषों की मानसिकता में भी बदलाव आया है. आज के युवाओं को अपनी पार्टनर से माफ़ी मांगने में कोई शर्म या झिझक महसूस नहीं होती. एक रिक्रूटमेंट एजेंसी चलाने वाले धीरज सिंह का कहना है “मैं तो हर छोटी ग़लती के लिए अपनी पत्नी से सॉरी बोल देता हूं, कभी-कभी तो वो मेरे सॉरी से ही परेशान हो जाती है. मुझे लगता है अगर आप अपने पार्टनर से प्यार करते हो, तो सॉरी बोलने में भला कैसी शर्म.” धीरज की ही तरह एक न्यूज़ एजेंसी से जुड़े शैलेंद्र को भी लगता है कि पार्टनर से बेझिझक सॉरी बोल देना चाहिए. कुछ ऐसी ही राय एक प्रतिष्ठित कंपनी में बतौर बिज़नेस डेवलपमेंट मैनेजर काम कर रहे सुशील सिंह की भी है, लेकिन वो साथ ही ये भी मानते हैं कि सॉरी बोलने में कहीं न कहीं पुरुषों का मेल ईगो आड़े आता है.