Tag Archives: Love

पहला अफेयर: ख़्वाबों की डोर… (Pahla Affair: Khwabon Ki Dor)

Pahla Affair

पहला अफेयर: ख़्वाबों की डोर… (Pahla Affair: Khwabon Ki Dor)

पहले प्यार (First Love) का एहसास होता है बेहद ख़ास, अपने फर्स्ट अफेयर (Affair) की अनुभूति को जगाने के लिए पढ़ें रोमांस से भरपूर पहला अफेयर 

कई बार दिल के डूबने का अंदाज़ भी निराला होता है कि हम परेशानी की वजह ढूंढ़ने में लंबा अरसा लगा देते हैं. आदेश का ख़त हाथ में है और मैं माज़ी के समंदर में गोते लगा रही हूं. पूरे तीन साल तक जिसके नाम की अंगूठी पहने रही, आज हाथ की उंगली पर उसके निशां उसकी बेवफ़ाई की दास्तां कह रहे हैं.

अब तो हाथ की लकीरें भी मुझे मुंह चिढ़ा रही हैं. धीरे-धीरे रंगीन ख़्वाबों की डोर हाथों से छूटने लगी… अब तो आदेश के साथ बंधे रिश्तों में गांठें-सी पड़ गई हैं. ख़त क्या है, सफ़ाई का एक छोटा-सा मज़मून. मैं आवेश में आ ख़त को मुट्ठी में मरोड़ने लगती हूं. बेबस परिंदे से पन्ने, मेरे हाथों में फड़फड़ा रहे हैं. एक झटके में अपने से यूं रिहा करना, मेरे भीतर एक ज्वालामुखी धधक रहा है.

मन में एक युद्ध छिड़ा है. अरे! तेरे पापा इतने भी नासमझ न थे कि दो दिलों की धड़कन न सुन पाएं. बोलो, विजातीय होने से क्या प्यार की पौध नहीं पनपती. सवालों का बवंडर है, जो मेरा चैन छीन रहा है. अतीत से चाहे जितना भागो, लेकिन माज़ी का भूत पीछा कब छोड़ता है. परछाईं-सा संग-संग डोलता है. उसके हर ख़त का इंतज़ार, हर आहट पर चौंक जाना मेरी आदत-सी बन गई. कहीं और गुल सजाना था, तो इस अभागन की पलकों पर सपनों का फरेबी जाल क्यों बिछाया?

अब लग रहा है जैसे आदी शब्दों की भेड़चाल से सभ्यता का दायरा पार कर, मुझसे किनारे का कोई सिरा ढूंढ़ रहा हो. आज मेरे मन को छूकर निकले वो पल रेत से खिसक रहे हैं.

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: तुम्हारा मुजरिम! (Pahla Affair: Tumhara Mujrim)

मैंने फोन पर आदी से मिलने की आख़िरी इल्तिजा की. मैं उसके चेहरे के बदलते रंगों का जायज़ा लेना चाहती थी. साथ ही मन के किसी कोने में भय का भूत कुंडली मारे बैठा था. अगले दिन बाग में हम दोनों मिले. वह हाथ में भुट्टा लेकर मस्त चाल से मेरी ओर मुड़ा. मैं रुंधे गले से केवल इतना कह पाई, “आदेश! ज़रा सोचो, मुझे मझधार में छोड़ तुम किसी का हाथ थाम नई ज़िंदगी बसा लोगे… मेरा क्या…?”

मेरी आवाज़ भर्रा गई. उसके कांधे पर सिर रखकर मैं सिसक पड़ी. मेरी पीठ थपथपाते हुए उसने कहा, “कुछ करता हूं जूही, प्लीज़ रो मत.”
मैं उदास मन से घर लौटी. मां पूछती रह गई. मैं सोचती रही कि निराधार पुरातन संस्कारों तले दबे रहकर अपने प्यार की आहूति क्यों दी जाए?

मेरे घर उसका अक्सर आना-जाना था. मेरे घर में सब राज़ी थे. मेरे पिता तो थे नहीं, मां बेहद कोमल स्वभाव की थीं. मां अक्सर उसका मनपसंद खाना बनाकर उसे चाव से खिलाती थीं, पर सुना था उसके पिता ज़िद्दी स्वभाव के थे.

एक रोज़ चाचा की मौत की ख़बर सुनकर अचानक हमारा गांव जाना हुआ. वापस लौटे, तो ख़त मिला. उसका विवाह हो चुका था. उसके पिता की चाल थी या उसकी भी सहमति… पता नहीं! पर मेरा पहला प्यार अधूरा ही रह गया…

काश! उस पहले प्यार के नक्शे अपने मन की किताब से मिटा पाती… अब मैं हूं, तन्हाई है… वही परछाईं बन मेरे संग-संग डोलती है.

– मीरा हिंगोरानी

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: दरमियान (Pahla Affair: Darmiyaan)

पहला अफेयर: तुम्हारा मुजरिम! (Pahla Affair: Tumhara Mujrim)

Pahla Affair

Pahla Affair

पहला अफेयर: तुम्हारा मुजरिम! (Pahla Affair: Tumhara Mujrim)

पहले प्यार (FirstLove) का एहसास होता है बेहद ख़ास, अपने फर्स्ट अफेयर (Affair) की अनुभूति को जगाने के लिए पढ़ें रोमांस से भरपूर पहला अफेयर 

क्यों इस तरह अधूरा छोड़कर चले गए तुम मुझे… मुकम्मल होने को बेक़रार था इस बार मेरा तन-मन, तुम्हारे साथ, तुम्हारी उस छुअन की वो सिहरन… तुम्हारा यूं लगातार मुझे देखते रहना… अपने हाथों से मुझे खाना खिलाना… इतना सारा व़क्त हमने एक साथ गुज़ारा… फिर ये कैसी प्यास जगाकर मुझे तन्हा छोड़ दिया… जानती थी कि तुमको तो लौटना जाना है एक दिन अपने लोगों के बीच… अपनों में… पर मेरा क्या… मुझे अपना बनाकर क्यों बेगानों में यूं छोड़ गए?

तुमने तो कहा था कि इस बार जब मैं आऊंगा, तो तुमको अपने साथ ही लेकर जाऊंगा… फिर क्यों इस तरह बिना हमारी ज़िंदगी का फैसला किए तुम चले गए… कितने दिन बीत गए, न तुमने कोई फोन किया, न तुम्हारी कोई ख़बर आई…

मुझे लगने लगा है अब तो जैसे ये रिश्ता, ये प्यार बस एक फरेब था… तुम्हें जो चाहिए था, वो तुमने पा लिया… अब पीछे मुड़कर देखने के लिए क्या बचा था तुम्हारे लिए… अगर मेरी परवाह होती, तो ज़रूर हमारे प्यार का सिलसिला आगे बढ़ता…

मेरी ज़िंदगी तो रुकी हुई है अब भी उसी मोड़ पर, बस किसी तरह धक्का मारकर चला रही हूं… पर अब जो सच सबके सामने आएगा, उसका सामना मैं कैसे करूंगी… मैं प्रेग्नेंट हो गई हूं… और मेरे बच्चे को कौन अपनाएगा? यही सोच-सोचकर परेशान हूं… स़िर्फ रितिका को इस सच के बारे में पता है…

“हैलो, प्रिया… कैसी हो…?”

“रितिका, मैं कैसी हो सकती हूं तुम ही बताओ… मैं कुछ डिसाइड ही नहीं कर पा रही.”

“तुम इस बच्चे को जन्म देने के बारे में सोच भी कैसे सकती हो, जो इंसान तुमको मंझधार में छोड़कर चला गया, तुम उसके बच्चे को दुनिया में लाने के लिए सबसे दुश्मनी ले लोगी?”

“ये बच्चा स़िर्फ उसका ही नहीं, मेरा भी है… पर शायद तुम सच कह रही हो, बस, कल तक मैं कोई न कोई निर्णय ले लूंगी.”

आज ऑफिस में भी मन नहीं लग रहा… डॉक्टर से अपॉइंटमेंट ले लेती हूं, भला मैं उस धोखेबाज़ इंसान के लिए अपनी ज़िंदगी दांव पर क्यों लगाऊं…

“प्रिया… सुनो, हैलो… प्रिया शर्मा!”

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: तुम मेरे हो… (Pahla Affair: Tum Mere Ho)

अपना नाम सुनकर मैं चौंक गई, पीछे मुड़कर देखा, तो ये क्या… “विक्रम, तुम आज अचानक यूं? मैं तो समझी थी कि तुम अब तक भूल चुके होगे कि प्रिया नाम की भी कोई लड़की थी तुम्हारी ज़िंदगी में…”

“प्रिया, मुझे पता है, तुम मुझे फरेबी, धोखेबाज़ और न जाने क्या-क्या समझ रही होगी… पर मेरी मजबूरी थी…”

“ऐसी क्या मजबूरी थी विक्रम कि तुम एक फोन या एक मैसेज तक नहीं कर पाए?”

“प्रिया, हम किसी कॉफी शॉप में बैठकर बात करें?”

“बात करने के लिए अब बचा ही क्या है… मुझे डॉक्टर के पास जाना है, जो कहना है, यहीं कहो…”

“ठीक है प्रिया, दरअसल मैं जिस कंपनी में जॉब करता था, वहां बहुत बड़ा फ्रॉड हुआ था, जिन्होंने फ्रॉड किया था, उन्होंने मुझे बुरी तरह फंसा दिया था, क्योंकि मैंने कुछ दिन पहले ही उनकी शिकायत कंपनी के ओनर से की थी. मैं छुट्टी पर था, तो उन्होंने मौक़ा देखकर मुझे ही फंसा दिया और पुलिस में शिकायत तक दर्ज करवा दी.

मेरे घर वापस जाते ही पुलिस ने मुझे गिरफ़्तार कर लिया और मैं इन सबके बीच तुमसे कोई संपर्क न कर सका…
मेरे दोस्तों ने सच्चाई का पता लगाया और पुलिस की जांच के बाद सारा सच सामने आ गया. मैं अगर मुजरिम हूं, तो बस तुम्हारा… और अब तुम्हारा ये मुजरिम तुम्हारे सामने है, जो सज़ा दोगी, मैं सहने को तैयार हूं.”

मेरी आंखों से आंसू बह निकले… कभी-कभी छोटी-छोटी ग़लतफ़हमियां बड़े-बड़े रिश्ते तोड़ देती हैं…

“प्रिया, क्या सोच रही हो… और तुम डॉक्टर के पास क्यों जा रही हो? सब ठीक तो है न…?”

“विक्रम, आज तुम अगर नहीं आते, तो मुझसे बहुत बड़ा पाप हो जाता… क्या हम कॉफी शॉप पर चलकर बात करें…”

विक्रम और मैंने कॉफी शॉप में ढेर सारी बातें कीं…

“प्रिया, मैं पापा बननेवाला हूं, इससे बड़ी ख़ुशी की बात और क्या हो सकती है? चलो, आज ही घरवालों से चलकर बात करते हैं… मेरे घर में सभी तैयार हैं, मैं तुम्हारी लिए ही यहां आया था.”

“विक्रम, अगर तुम सही व़क्त पर न आते, तो मैं ख़ुद को कभी माफ़ नहीं कर पाती…”

“अब तो मैं आ गया न… तुम्हारा मुजरिम… तो जो हो सकता था वो मत सोचो, अब जो ख़ुशियां आनेवाली हैं हमारी ज़िंदगी में उनका स्वागत करो…”

– गीता शर्मा

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: मैसेजवाला लड़का… (Pahla Affair: Messagewala Ladka)

पहला अफेयर: तुम मेरे हो… (Pahla Affair: Tum Mere Ho)

Pahla Affair

पहला अफेयर: तुम मेरे हो… (Pahla Affair: Tum Mere Ho)

पहले प्यार (FirstLove) का एहसास होता है बेहद ख़ास, अपने फर्स्ट अफेयर (Affair) की अनुभूति को जगाने के लिए पढ़ें रोमांस से भरपूर पहला अफेयर 

उस चेहरे को देखने के बाद गौतम को कभी किसी और चेहरे को देखने की चाह नहीं हुई… उसे पहली बार देखते ही गौतम का मन उसकी ओर जाने लगा था. उसने कभी सोचा भी नहीं था कि कभी कोई पलभर में ही इस तरह अपना हो जाएगा… उसके जीवन की वो सबसे सुहानी और सबसे ख़ूबसूरत सुबह थी… जब वो लड़की अपने कमरे की खिड़की के पास हर बात से बेपरवाह होकर अपनी घनेरी ज़ुल्फ़ों को सुलझाने में व्यस्त थी. उस समय सुबह की शीतल हवा के चंचल झोंके उसके ख़ूबसूरत बालों की महकती ख़ुशबू चुराने की चाह में उन्हें और भी बेतरतीब किए जा रहे थे… उसके भीगे सौंदर्य की लावण्यता और भी निखार पर थी.

फिर अचानक ही गौतम को अपनी ओर देखता पाकर उसकी भृकुटि कुछ तन-सी गई और फिर न जाने क्या सोचकर एकाएक बड़ी मोहक अदा के साथ उसके मदभरे होंठों की लाली एक दिलकश मुस्कान बनकर उसके लबों कर खिल उठी… उस समय गौतम कुछ और भी संशय में पड़ गया था. उसकी आंखों में एक नकली रोष था और अपने एक ख़ास अंदाज़ में वह उसे निरंतर देखे जा रही थी, फिर पलक झपकते ही अचानक वह गायब हो गई.

अभी एक माह पहले ही हमारे घर के ठीक सामनेवाले मकान में एक परिवार रहने आया है. मां ने बताया था कि वे उनके मायके अंबिकापुर से आए हैं. इस परिवार में पांच सदस्य हैं और उनमें शालिनी नाम की बहुत सुंदर उनकी एक बेटी है, जो यहां के आई.आई.एम. कॉलेज में पढ़ रही है. शालिनी की मां के साथ उनका हमेशा एक बहन जैसा अपनापन रहा है और वे दोनों कॉलेज के ज़माने से एक-दूसरे की बहुत अच्छी दोस्त व सहपाठी रही हैं.

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: ये मौसम की बारिश… (Pahla Affair: Ye Mausam Ki Barish)

आज सुबह शालिनी का उसे इस तरह देखने का वो रहस्यमय अंदाज़ अब उसकी समझ में आने लगा था और आज सुबह ही अपने ऑफिस जाने के लिए जब वह घर से निकला, तो उसी समय शालिनी भी बड़े बेबाक अंदाज़ में चलते हुए उसके पास आकर रुकी और अपना दायां हाथ आगे बढ़ाकर उसे अपना परिचय देते हुए कहा, “मैं शालिनी…” तब गौतम ने भी उसके कोमल हाथ को थामकर तुरंत जवाब दिया, “और मैं गौतम…” तब उसका नाम सुनकर उसने शरारत से मुस्कुराते हुए कहा, “अरे, मैंने तो सोचा था आपका नाम अक्षय कुमार या रणबीर कपूर होगा…” तब गौतम ने भी जवाब में कहा, “ज़रूर होता, अगर आपका नाम दीपिका पादुकोण या प्रियंका चोपड़ा होता…” इसके पहले कि वो कुछ कहती, गौतम ने घर की ओर इशारा करते हुए कहा, “जाइए, मां घर पर हैं और आपका इंतज़ार कर रही हैं.” अब गौतम की बारी थी उसे हैरान करने की.

आज ही उसे पता चला था कि शालिनी का प्रतिदिन उसके घर में आना-जाना होता है. गौतम की मम्मी के साथ उसका बड़ा गहरा लगाव था. गौतम की मम्मी शालिनी को बेहद प्यार-दुलार करती हैं. गौतम ने जब अपनी भाभी से शालिनी की बात की, तो उन्होंने कहा, “मेरे प्यारे देवरजी, मम्मी तो उसे अब मेरी देवरानी बनाने जा रही हैं. वो हम सबकी पहली पसंद है.” बस, अब गौतम को कुछ कहने की ज़रूरत ही नहीं थी… इतने में ही शालिनी के खिलखिलाने की आवाज़ उसे अपनी मम्मी के कमरे से आई और वो हंसी सीधे उसके दिल में उतर गई… उसका पहला प्यार हमेशा के लिए उसका होने जा रहा था… गौतम सोचकर मन ही मन मुस्कुरा उठा!

– दिशा राजवानी

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: मेरी क्या ख़ता थी…? (Pahla Affair: Meri Kya Khata Thi?)

पहला अफेयर: ये मौसम की बारिश… (Pahla Affair: Ye Mausam Ki Barish)

Pahla Affair

पहले प्यार (FirstLove) का एहसास होता है बेहद ख़ास, अपने फर्स्ट अफेयर (Affair) की अनुभूति को जगाने के लिए पढ़ें रोमांस से भरपूर पहला अफेयर 

आज फिर वही बारिश है, फिर वही हवाएं, फिर वही मिट्टी की ख़ुशबू… पर एक फ़र्क़ है कि आज तुम नहीं हो… स़िर्फ मैं हूं, मेरी तन्हाई है… आज याद करती हूं तुम्हें, तो बार-बार यही सोचती हूं कि क्यों प्यार करने लगी थी तुमसे… और प्यार करते-करते इतनी गहराई में डूबती गई कि सच्चाई देख भी नहीं पाई… आज भी याद है, वो पहली मुलाक़ात… तुमने निगाहों से छुआ था और मैं सकुचाते हुए निकल गई थी क्लासरूम में. मैं इस कॉलेज में नई आई थी. पापा का ट्रांसफर हो गया था इस दिलवालों की दिल्ली कहे जानेवाले शहर में, जहां मैंने दिल हारा और उसके बाद सब कुछ हार दिया…

कुछ दिनों तक ये नज़रों से बात करने का सिलसिला चलता रहा. फिर एक दिन घर जाते समय मेरी स्कूटी ख़राब हो गई. तुम पीछे से आ रहे थे, मदद की कोशिश की और मैंने मना कर दिया… तुमने कहा, “तुम्हारी मर्ज़ी, वैसे ये रास्ता है रिस्की…” और तुम आगे बढ़ गए. तुम्हारी इस बात से थोड़ा डर गई थी और मैंने सोचा कहीं ग़लती तो नहीं कर दी तुमसे मदद न लेकर… इतने में ही एक और गाड़ी दिखाई दी, कुछ लड़के बैठे थे, जो मुझ पर फ़ब्तियां कसते हुए जा रहे थे… मैं बुरी तरह घबरा गई थी कि इतने में तुम्हारी बाइक उनकी गाड़ी के पीछे नज़र आई. तुमने गाड़ी रोकी और मैं चुपचाप पीछे बैठ गई.

उस रात मैं सो नहीं पाई. रास्ते में न तुमने कुछ कहा, न मैंने. बस घर जाते समय तुम्हारी उन्हीं गहरी निगाहों में एक बार झांका था, जिनमें मासूमियत, ईमानदारी और मेरी लिए फिक्र झलक रही थी. उसके बाद तो रोज़ का ही यह सिलसिला हो गया था, तुम मुझे घर छोड़ते और मैं रास्तेभर बाइक पर तुमसे लिपटी रहती. देर रात तक हम दोनों एक-दूसरे को मैसेज करते रहते… प्यार में जीने-मरने की क़समें खाते… मुझे अक्सर दूसरों को देखकर लगता था कि कितना बचकाना होता है यह सब, लेकिन जब ख़ुद प्यार के एहसास ने मुझे छुआ, तब जाना कि ये बचकानी बातें कितनी क्यूट लगती हैं.

उस शाम हम समंदर के किनारे बैठे थे. तुमने ढलते सूरज की मदमाती लालिमा में मेरे अधरों पर अपने अधर रख दिए थे. एक नया एहसास था वो… बेहद रूमानी, बेहद हसीन… रातभर उसी एहसास को अपने ख़्यालों में समेटे रही मैं… अब मन में एक और नया ख़्याल जन्म ले रहा था… कब हम ज़माने के सामने एक हो पाएंगे? कब तुम मेरा हाथ थामोगे और मैं तुम्हारी दुल्हन बन तुम्हारी ज़िंदगी में हमेशा के लिए आऊंगी. हमारी परीक्षाएं हुईं. लास्ट ईयर था, तुमने अपने पापा का बिज़नेस भी संभाल लिया था और मैं भी अपने करियर को आकार देने में लगी थी.

फिर एक दिन वो शाम आई, जो ना ही आती तो अच्छा होता. तुम्हारा जन्मदिन था और तुमने कहा कि तुम मेरे साथ अकेले यह ख़ास दिन सेलिब्रेट करना चाहते हो… तुम पर तो ख़ुद से भी ज़्यादा भरोसा था, सो मैं तैयार हो गई. तुम्हारा फार्म हाउस पर शहर से दूर मदमाती शाम को हम दोनों अकेले थे. ज़ाहिर है, प्यार था, तो प्यार से जुड़े सारे आकर्षण भी जवां थे… तुमने मुझे बांहों में लिया और फिर धीरे-धीरे… “ये क्या कर रहे हो राज? ये ग़लत है…”

“सुहानी, इसमें ग़लत क्या है. हम प्यार में हैं और जल्द ही शादी करेंगे.”

“शादी करेंगे, तो शादी तक का इंतज़ार भी तो करना चाहिए न…”

“ये कैसी पिछड़ी हुई बातें कर रही हो सुहानी, प्लीज़ मेरा मूड मत ऑफ करो, कम से कम आज के दिन तो तुम ना नहीं बोल सकती…”

तुम शराब के नशे में थे, उस पर प्यार की ख़ुमारी ने तुम्हारी गुस्ताख़ी बढ़ा दी थी. बहुत मुश्किल हो रहा था तुम्हें रोक पाना… मैंने तुम्हें होश में लाने के लिए एक थप्पड़ जड़ दिया और वहां से किसी तरह चली आई… रोती रही रातभर. फिर यह सोचकर ख़ुद को समझा लिया कि नशा उतरते ही तुम समझ पाओगे…

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: तुम्हारा प्यार मिला…

सुबह तुम्हें सॉरी का मैसेज किया, तुमने भी बुरा नहीं माना, यह जानकर तुम्हारे प्यार पर और गर्व होने लगा… व़क्त गुज़र रहा था और मैं कई बार तुम्हें कह भी चुकी थी कि घर आकर शादी की बात कर लो… पर न जाने क्यों आजकल मन अनहोनी की आशंका से घबराने लगा था. तुम्हारे मैसेजेस धीरे-धीरे कम होने लगे थे. कभी बिज़ी होने की बात, कभी काम का प्रेशर, कभी बिज़नेस की टेंशन कहकर तुम मुझे टालते रहे और मैं भी ख़ुद को समझाती रही. मुझे लगने लगा था कि तुम्हारी दिलचस्पी मुझमें कम होती जा रही है.

फिर एक दिन तुम्हारा फोन आया, “सॉरी लव, मैं इतना बिज़ी रहता हूं कि तुमसे बात भी नहीं कर पाता, पर बिलीव मी आई लव यूं…”

“मुझे पता है राज, कोई बात नहीं. तुम अपने काम पर ध्यान दो…”

“सुहानी, एक हेल्प चाहिए थी. मेरे दोस्त की गर्लफ्रेंड है, पर मेरा दोस्त उसको चीट कर रहा है. मैंने उसको लाख समझाया, पर वो मान ही नहीं रही.”

“इसमें मैं कैसे हेल्प कर सकती हूं?”

“तुम इतनी ब्यूटीफुल हो, तुम अगर उसके बॉयफ्रेंड से दोस्ती करके उसको अट्रैक्ट करोगी, तो शायद वो समझ जाए.”

“यार तुम कैसी बातें कर रहे हो, तुम अपनी गर्लफ्रेंड से ऐसा काम कैसे करवा सकते हो?”

“सुहानी, तुम भी न, यार सच में अट्रैक्ट

करने को थोड़ी कह रहा हूं, स़िर्फ उस लड़की राधा को समझाने के लिए, ताकि उसके साथ ग़लत न हो…”

“अच्छा ठीक है…” उसके बाद तुमने मुझे समझाया कि कैसे, कब, क्या बात करनी है तुम्हारे दोस्त से और उसका नंबर मुझे दिया. मैंने उससे दोस्ती बढ़ानी शुरू की और बहुत जल्द ही उसकी सच्चाई सबके सामने आ गई. राधा भी जान चुकी थी कि उसका बॉयफ्रेंड ग़लत था.

इस इंसिडेंट के बाद फिर तुम्हारे मैसेजेस कम आने लगे. एक दिन फिर तुम्हारा फोन आया कि राधा मुझसे बात करना चाहती है. मैंने जानना चाहा कि क्यों करना चाहती है, तो तुमने कहा, “तुम्हारी वजह से उसका ब्रेकअप हुआ, तो शायद वो भी बदला ले…” उसके बाद तुम हंसने लगे. राधा का फोन आया और उसने जो कुछ भी कहा, वो सुनकर मेरे होश उड़ गए. “हाय सुहानी, राज से तुम्हारा नंबर लिया, राज बहुत मानते हैं तुम्हें. कहते हैं, तुम उनकी सबसे अच्छी दोस्त हो. इसलिए मैंने सोचा कि तुमसे अपने दिल की बात शेयर करूं.”

“हां, बोलो, क्या कहना चाहती हो.”

“सुहानी, राज ने मुझे तब प्रपोज़ किया था, जब मैं उसके दोस्त को डेट कर रही थी. उसने मुझे लाख समझाया कि उसका दोस्त मुझे चीट कर रहा है, पर मुझे तो अपने प्यार पर विश्‍वास था. राज ने मेरा वो ग़ुरूर तोड़ दिया, पर एक तरह से अच्छा ही हुआ, क्योंकि मैं एक ग़लत इंसान पर भरोसा कर रही थी. सुहानी, तुम सुन रही हो न…”

“हां, तुम बोलती रहो, मैं सुन रही हूं… ज़्यादा बात नहीं करनी आती मुझे…”

“सुहानी, राज बहुत ही अच्छा लड़का है और पता ही नहीं चला कि इस बीच कब मैं भी उससे प्यार करने लगी, तुम उसकी दोस्त हो, तुम्हें क्या लगता है कि मुझे इस रिश्ते में आगे बढ़ना चाहिए?”

“राधा, ये तुम्हारा और राज का निजी मामला है, मैं कैसे सलाह दे सकती हूं. तुम जो ठीक समझो, करो.” यह कहकर फोन काट दिया मैंने, क्योंकि आगे बात सुनने और करने की मुझमें हिम्मत नहीं थी.

अब समझ में आया कि राज स़िर्फ मेरा इस्तेमाल कर रहा था, राधा को पाने के लिए. उसके बाद कई दिनों तक मैंने किसी से बात नहीं की… आज मौसम बदला है… पर मन बेहद उदास है. इतने में ही मेरा फोन बजा…

“हैलो, कौन बात कर रहा है?”

“सुहानी, फोन कट मत करना, मैं राज बोल रहा हूं. जानता था, मेरा फोन तुम नहीं उठाओगी, इसलिए किसी दूसरे नंबर से कॉल किया.”

“राज, मैं किसी की लाइफ में ज़बर्दस्ती नहीं रहना चाहती, तुम राधा के साथ अपनी ज़िंदगी जी सकते हो, मेरी तरफ़ से तुम्हें कोई प्रॉब्लम नहीं आएगी कभी…”

“सुहानी, तुम्हें राधा पर भरोसा है, मुझ पर नहीं, अपने प्यार पर नहीं. राधा मुझे पसंद करने लगी, तो इसमें मेरा क्या ़कुसूर है? उसने तुम्हें जो भी कहानी सुनाई, तुमने भरोसा कर लिया? हमारा प्यार इतना कमज़ोर है कि बस एक लड़की आकर उसे तोड़कर चली जाए… मुझे बिज़नेस की सिलसिले में बाहर जाना पड़ा. अब लौटा हूं लंबे टूर के बाद तो तुमसे कॉन्टैक्ट ही नहीं हो पाया.

राधा से बात की, तो पता चला उसने तुमसे बात की थी. मुझे लगा कि वो रिश्ता टूटने के दर्द से गुज़र रही है, तो तुमसे शेयर करना चाहती होगी अपने दिल की बात.

“पर राज, तुमने ही तो कहा था कि वो भी बदला लेना चाहती होगी और पता नहीं क्या-क्या…”

“अरे, वो मैंने मज़ाक में कहा था, मुझे क्या पता था कि सच में वो ऐसा ही कुछ करने जा रही है… वो सब छोड़ो, मेरे पापा आज आ रहे हैं तुम्हारे घर पर हमारी शादी की बात करने… अब प्लीज़ मेरे घर, मेरी ज़िंदगी में पूरी तरह से आ जाओ, ताकि फिर किसी को मौक़ा न मिले हमारे बीच आने का. अब फोन रख रहा हूं, बहुत काम है, लव यू.”

मुझे समझ में ही नहीं आ रहा था कि ये सब कुछ क्या और कैसे हुआ… बस, इतना समझ में आया कि मेरा प्यार सच्चा था और अब हम हमेशा के लिए एक होने जा रहे हैं… ये बारिश अब अचानक इतनी रूमानी लगने लगी और मैं प्यार व आंसुओं से सराबोर छत पर जाकर भीगने लगी…

– गीता शर्मा

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: मैसेजवाला लड़का…

 

पहला अफेयर: तुम्हारा प्यार मिला… (Pahla Affair: Tumhara Pyar Mila)

Pahla Affair

पहला अफेयर: तुम्हारा प्यार मिला… (Pahla Affair: Tumhara Pyar Mila)

पहले प्यार (FirstLove) का एहसास होता है बेहद ख़ास, अपने फर्स्ट अफेयर (Affair) की अनुभूति को जगाने के लिए पढ़ें रोमांस से भरपूर पहला अफेयर 

मेरी वफ़ा का सिला मुझको शानदार मिला… गीत की यह लाइन मेरी ज़िंदगी की हक़ीक़त है. आज हमारी प्रीत 45 बरस की हो गई. आज भी तुम्हारे होंठों पर वह क़ातिल मुस्कान है, जो मुझ पर जादू कर गई थी. आज तुम मौन हो, कितने दिनों से तुमने मुझे ‘मन्ना’ कहकर नहीं पुकारा. पहले जब तुम पुकारते मन्ना… तो मिठास घुल जाती वातावरण में. कहनेवाले सच ही कहते हैं कि हाथ में जिसका नाम होता है, उसे ऊपरवाला मिलवा ही देता है. हम भी कुछ यूं ही मिले थे.

सांची हमारे परिवार की पसंदीदा जगह थी. जब भी मन करता मम्मी-पापा और हम दोनों बहनें सांची चले जाते. उन दिनों लड़कियां कार तो चलाती थीं, पर मोटरसाइकिल चलानेवाली लड़कियां बस दीदी और मैं ही थीं. जब हम निकलते, तब उसकी निगाह हम पर होती. दीदी तो न केवल मोटरसाइकिल चलातीं, बल्कि उसको सुधारने में भी माहिर थीं.

बारिश की झड़ी लगी थी. कॉलेज में छुट्टी का माहौल था. मन उकता रहा था. दीदी ने कहा, “चल सांची तक घूमकर आते हैं.” मैंने भी हामी भर दी. पापा की कार पर सवार होकर हम दोनों बहनें चल पड़ीं. रास्ते में एक जगह भीड़ जमा थी. कोई दुर्घटना घटी थी. हम दोनों भी पहुंचे. एक महिला अचेत पड़ी थी और घायल लड़का मदद की गुहार लगा रहा था. फ़ौरन दीदी और मैंने उस अचेत महिला और युवक को गाड़ी में बैठाया और अस्पताल भागे.

महिला और युवक दोनों अचेत थे. हमने पापा को भी ख़बर करवा दी. पुलिस भी आई. उनकी शिनाख्त हो गई. अगले दिन जब हम लोग हालचाल जानने पहुंचे, तो युवक होश में आ चुका था. “हैलो, मैं मनोज शास्त्री, भोपाल में प्रोफेसर हूं.” दीदी और मैंने औपचारिक बातचीत की, फिर लौट आए. यूं मिलने-मिलाने के दौरान मनोज बड़े भले-भले से लगे. एकदम सहज, मुस्कान क़ातिलाना थी, मगर दीदी तो मनोज की फैन हो गईं. आख़िर दोनों ही साइंसवाले थे और मैं इतिहास की स्टूडेंट.

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: वो बेपरवाह से तुम…!

एक दिन मनोज की मम्मी घर आईं और उन्होंने रिश्ते की बात की. “अपने दोनों बेटों के लिए आपकी दोनों बेटियों का हाथ मांगती हूं.” झटपट सब तय हुआ और फिर जल्द शादी हो गई. बस, हम एक बार ही मिले थे और वो भी कुछ ही पलों के लिए. ससुराल में जब पहली बार हम मिले, तो इन्होंने कहा, “मैं तुम्हें मन्ना ही कहा करूंगा, मेरी मन्ना…” सच, उस दिन के बाद से हर दिन, हर पल तुमने अपनी मन्ना के मन को टूटने न दिया. प्यार का यह एहसास कितना अनमोल था. साल-दर-साल हमारी भूमिकाएं बदलीं, पर तुम्हारा प्यार कभी कम न हुआ. वो बढ़ा, बढ़ता चला गया, बच्चों को भी उनकी मुहब्बत की मंज़िल दिलवाने में तुमने कोई कसर बाकी न रखी.

हमारे बहू और दामाद दोनों अलग-अलग धर्मों के हैं, पर इस कदर वो हम में घुल-मिल गए हैं कि धर्म कहीं पीछे छूट गया है. आज जब मैं लड़खड़ा रही हूं, तो बच्चे मेरा संबल हैं और उनके भीतर छुपा तुम्हारा प्यार!

दो महीने बीत चुके हैं. मुझे अपने प्यार पर यक़ीन है और देखो, आज जब मैं तुम्हारे बाल बना रही थी, तो तुमने हौले से कहा, “मन्ना!” तुम्हारे होंठों को हिलते देखा मैंने. एक दिन तुम होश में आओगे… इस एक्सीडेंट ने तुम्हें भले ही कोमा तक पहुंचा दिया, पर मेरा प्यार तुम्हें मुझ तक वापस पहुंचाएगा… मेरे मन्ना.

– राजेश्‍वरी शुक्ला

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: कच्ची उम्र का प्यार

पहला अफेयर: वो बेपरवाह से तुम…! (Pahla Affair: Wo Beparwaah Se Tum)

Pahla Affair

पहला अफेयर: वो बेपरवाह से तुम…! (Pahla Affair: Wo Beparwaah Se Tum)

पहले प्यार (FirstLove) का एहसास होता है बेहद ख़ास, अपने फर्स्ट अफेयर (Affair) की अनुभूति को जगाने के लिए पढ़ें रोमांस से भरपूर पहला अफेयर 

आज मन अजीब-सी दुविधा से जूझ रहा है… समझ में नहीं आ रहा क्या कहूं तुम्हें और उसको क्या कहूं, जिसकी तरफ़ कुछ दिनों से मन अंजानी डोर-सा खिंचता चला जा रहा है… जानती हूं तुम मेरे बहुत अच्छे दोस्त हो, अच्छे इंसान हो और सबसे बड़ी बात तुम्हारे साथ मुझे वो सारी सुख-सुविधाएं मिलेंगी, वो सम्मान मिलेगा, जो हर लड़की चाहती है… फिर ये दुविधा कैसी?

हालांकि कुछ दिनों से मुझे अंदाज़ा हो रहा था कि तुम्हारे मन में कुछ चल रहा है… तुम्हारा वो मुझे चोरी-चोरी देखना और फिर मेरे देख लेने पर यह जताना कि तुम तो कुछ देख ही नहीं रहे थे… तुम्हारी बातों से भी एहसास हो रहा था कि शायद पहले प्यार की ख़ुशबू ने तुम्हें छू लिया है… मेरी तरफ़ वो अलग-सा आकर्षण तुम्हारा… समझ रही थी मैं… यहां मेरा भी हाल कुछ ऐसा ही था… मेरे मन में भी पहली मुहब्बत ने दस्तक दे दी थी शायद… वो अंजाना-सा लड़का अच्छा लगने लगा था… हां, तुम्हारी तरह न वो सुलझा हुआ था, न वो ज़िम्मेदार था, न उसमें सलीका था, न परिपक्वता, न वो सोफिस्टिकेशन, जो तुम में है… पर दिल की धड़कनें तो उसी को देखकर बेकाबू हो रही थीं…

उसका वो बेपरवाह अंदाज़, वो लापरवाह-सा रहना… न सली़के से वो बात करता था, न ज़िंदगी को लेकर इतना गंभीर… शायद उसकी यही बातें मुझे आकर्षित कर रही थीं… और एक दिन उससे मेरी नज़रें मिलीं… दिल वहीं खो गया… उसने भी मुहब्बत का इज़हार किया… और मैं भी ना नहीं कह सकी… कहती भी कैसे, मैं तो न जाने कब से इसी बात का इंतज़ार कर रही थी.

उसका नाम विक्रांत था. मैं अक्सर विक्रांत को कहती कि इतने बेपरवाह क्यों रहते हो, ज़िंदगी में तुम्हें कुछ बनना नहीं है क्या? और वो कहता नहीं, कुछ नहीं बनना, बस तुमसे प्यार करना है… मुझे हंसी आ जाती उसकी बातों पर…
“लेकिन प्यार से पेट नहीं भरता विक्रांत…”
“प्यार के बिना भी तो ज़िंदगी बेमानी है… अब तुमने मुझसे प्यार किया है, तो मुझे ऐसे ही अपनाओ… मैं तो यूं ही रहूंगा हमेशा…”

कभी-कभी तो लगता कि कितना अजीब है ये लड़का… फिर सोचती उसकी यही बातें तो मुझे अच्छी लगती थीं, पर रिलेशनशिप में आने के बाद मैं प्रैक्टिकली सोच रही थी.

यह भी पढ़ें पहला अफेयर: मुहब्बत उम्र की मोहताज नहीं 

तुम मेरे सबसे अच्छे दोस्त थे सागर… और आज तुमने भी जब अपने मन की बात मेरे सामने रखी, तो मन उलझ गया… किसे छोड़ूं, किसे अपनाऊं?… तुमसे लगाव था, पर प्यार नहीं… विक्रांत से प्यार था, पर उसका वो बेपरवाह जीवन…
ख़ैर, सोच रही हूं कि इस उलझन को जल्द ही ख़त्म करूं…

“विक्रांत, हम शादी कब करेंगे?”

“जब तुम कहो बेबी… मैं तो कब से कह रहा हूं…”

“कह रहे हो, पर तुम न कोई काम करते हो, न अपने करियर को लेकर सीरियस हो… शादी के बाद क्या करोगे? कैसे गुज़ारा करेंगे हम?”

“सब हो जाएगा दिव्या, तुम बस मुझ पर भरोसा तो करो…”

“यार तुम्हारी यही बातें मुझे बेचैन करती हैं, तुम सीरियस तो हो न मुझे लेकर?”

“तुम्हें क्या लगता है? आज़माकर देख लो… जान दे सकता हूं…”

“मुझे सागर ने कहा है कि वो भी मुझसे प्यार करता है… क्या करूं तुम ही बताओ?”

“मैं क्या बताऊं? तुम क्या सोचती हो उसके बारे में?”

“वो अच्छा लड़का है, उसे हर्ट नहीं करना चाहती…”

“हा, हा, हा… तो हां कह दो…” तुमने हंसते हुए लापरवाही से कहा…

“तुम सच में पागल हो… मुझे तुमसे शेयर ही नहीं करनी चाहिए बातें…”

“अरे यार, ग़लत समझ रही हो, वो तुम्हारा दोस्त है, तुम उसको हर्ट भी नहीं करना चाहती, तो तुम बेहतर जानती हो कि उसे कैसे टैकल करना है… कैसे ना कहना है… कल अगर मैं तुमसे कहूं कि मेरी फ्रेंड ने मुझे प्रपोज़ किया है, तो तुम्हारा क्या रिएक्शन होगा… तुम मेरी जगह ख़ुद को रखकर सोचो…

मैं जानता हूं, तुम मुझे बहुत लापरवाह समझती हो, तुम्हें लगता है कि मैं सीरियस नहीं हूं, पर मेरा विश्‍वास करो, जब तक सांस है, तुमसे प्यार करूंगा, तुम्हारा इंतज़ार करूंगा… जब तक तुम्हारा हाथ मांगने लायक नहीं हो जाता, तब तक तो तुम इंतज़ार करोगी न मेरा… इतना व़क्त दोगी न…?

मुझे पता है दुनिया बहुत प्रैक्टिकल है, मैं नहीं हूं वैसा, मैं बस ज़िंदगी को जीना चाहता हूं तुम्हारे साथ… ज़्यादा कुछ सोचता नहीं, पर इसका ये मतलब नहीं कि मुझे फ़िक्र नहीं या मैं अपने रिश्ते को लेकर गंभीर नहीं.”

आज तुम्हें पहली बार मैंने इतनी गंभीरता से बात करते देखा… तुम्हारी आंखें भर आईं थीं… तुम भले ही बेपरवाह नज़र आते हो, पर परिस्थितियों को मुझसे बेहतर तरी़के व परिवक्वता से समझने की क्षमता है तुम में… कितना भरोसा करते हो तुम मुझ पर, न कभी ओवर पज़ेसिव होते हो, न कभी मुझे बेवजह रोकते-टोकते हो…

अक्सर ऐसे मौ़के भी आए, जब मुझे किसी ने कुछ ग़लत कहा हो, तुमने ऐसी नौबत कभी नहीं आने दी कि मुझे किसी को जवाब देने की ज़रूरत पड़ी हो… हालांकि मैं एक इंडिपेंडेंट लड़की हूं, लेकिन जब-जब तुम मुझे प्रोटेक्ट करते हो, मुझे अच्छा लगता है… जब-जब तुम बच्चों की तरह ज़िद करके मुझे आईलवयू टु कहलवाने की ज़िद करते हो, मुझे अच्छा लगता है, जब कभी तुम इमोशनल होकर किसी छोटी-सी घटना पर भी यह कहते हो कि आज मन बहुत दुखी है, तुम्हारी ज़रूरत है… मुझे अच्छा लगता है… अच्छा लगता है तुम्हें सुनना, तुम्हारा मुझे हर व़क्त छेड़ना, मुझे ग़ुस्सा दिलाना और फिर कहना मज़ाक कर रहा हूं डफर…

मन की सारी दुविधाएं दूर हो गई थीं. तुमसे प्यार है, तो तुम्हारे साथ ही ज़िंदगी गुज़ारूंगी… फिर भले ही उसमें संघर्ष हो… इस संघर्ष का नाम ही तो ज़िंदगी है और ज़िंदगी का दूसरा नाम मेरे लिए तुम हो…

– गीता शर्मा

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: दरमियान

अब ब्रेकअप एक्सपर्ट्स करेंगेे आपके दर्द-ए-दिल का इलाज… (Break Up Experts For Broken Hearts)

अब ब्रेकअप एक्सपर्ट्स करेंगेे आपके दर्द-ए-दिल का इलाज… (Break Up Experts For Broken Hearts)

दिल टूटने पर आवाज़ नहीं होती, लेकिन बेहिसाब दर्द ज़रूर होता हैप्यार जैसी भावना में जब विश्‍वास टूटता और साथ छूटता है, तो उस तकलीफ़ को बर्दाश्त करने की शक्ति नहीं होती. यही वजह है कि प्यार में हारे लोग कभी गहरे अवसाद यानी डिप्रेशन में चले जाते हैं, तो कभी ज़िंदगी से पूरी तरह हारकर अपनी जान तक दे देते हैंलेकिन अब ऐसा नहीं होगा, क्योंकि आपके टूटे दिल का इलाज करने के लिए ब्रेकअप एक्सपर्ट्स जो आ गए हैं.

Broken Hearts

एक समय था, जब शायद यह कल्पना भी नहीं की जा सकती थी कि ब्रेकअप के दर्द से बाहर निकालने के लिए भी एक्सपर्ट्स होंगे, लेकिन समय बदल रहा है और उसके साथ हमारे रिश्ते भी.

अकेलेपन से जूझना होता है एक बड़ा चैलेंज

ब्रेकअप के बाद अचानक आपको महसूस होता है कि आप पूरी तरह से तन्हा हो गए हैं.

बारबार अपने रिश्ते के बारे में सोचते रहते हैं.

अपने पार्टनर की यादें आपके ज़ेहन से जाती नहीं हैं.

आप अपने पार्टनर के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर जाकर उसकी तस्वीर देखते हैं.

किसी तरह से उसके बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश में रहते हैं.

किसी काम में आपका मन नहीं लगता.

आपको लगता है आप अब भविष्य में कभी कोई रिश्ता नहीं बना पाएंगे.

नकारात्मक भावनाओं से आप चाहकर भी बाहर नहीं आ पाते.

कैसे करते हैं ब्रेकअप रिकवरी?

कई ऐसे मैरिज काउंसलर और सायकोलॉजिस्ट हैं, जो अब बतौर ब्रेकअप एक्सपर्ट्स काम करते हैं, क्योंकि वो रिश्तों की उलझनों में उलझे लोगों से अक्सर दोचार होते हैं, उनके दर्द को महसूस करते हैं. यही वजह है कि वो ब्रेकअप रिकवरी प्रोग्राम चलाते हैं, ताकि लोग टूटे रिश्ते की डोर से हमेशा के लिए न बंधे रहें, वो बाहर आ पाएं और ज़िंदगी में आगे बढ़ सकें.

ब्रेकअप चैलेंजेस

अपने पार्टनर के ख़्याल को दिल से निकालना बहुत बड़ी चुनौती होती है.

उसके साथ भविष्य में किस तरह के रिश्ते रखने हैं?

दोस्ती रखनी है या नहीं?

किस तरह से हेल्दी बाउंड्रीज़ क्रिएट करें?

दोस्तों व परिवारवालों का किस तरह से सामना करें?

ख़ुद को दोष देने से कैसे बचें?

अपने एक्स के प्रति ग़ुस्से को कैसे मैनेज करें?

ज़िंदगी में आगे तो बढ़ना चाहते हैं, लेकिन वे समझ नहीं पाते.

इस तरह की तमाम चुनौतियां ब्रेकअप से जूझ रहे लोगों के सामने होती हैं और इनसे बाहर निकलने का रास्ता उन्हें नहीं सूझता.

यह भी पढ़ें: क्या करें जब पति को हो जाए किसी से प्यार?

Broken Hearts

कैसे काम करते हैं एक्सपर्ट्स?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि आप इन सबसे बाहर आ सकते हैं और हम आपकी मदद करेंगे.

प्राइवेट काउंसलिंग और कोचिंग के ज़रिए आपकी मदद हो सकती है.

दरअसल इस दौर में आपको किसी ऐसे शख़्स की ज़रूरत होती है, जो आपको सुने और आपकी तकलीफ़ को समझे.

ब्रेकअप एक्सपर्ट्स इसी तरह का भावनात्मक सहारा देते हैं, जिससे अवसाद की भावना दूर हो और आप ज़िंदगी में आगे बढ़ सकें.

ब्रेकअप एक्सपर्ट्स यह भी कहते हैं कि वो हर रिश्ते को अलग तरह से ट्रीट करते हैं, क्योंकि उनके लिए यह जांचनापरखना भी ज़रूरी होता है कि क्या यह रिश्ता पूरी तरह ख़त्म हो चुका है या इसमें संभावनाएं बची हैं?

यदि संभावनाएं होती हैं, तो वो रिश्ता दोबारा जोड़ने में भी मदद करते हैं.

एक्सपर्ट्स का कहना है कि ब्रेकअप के बाद हीलिंग के भी अलगअलग स्तर होते हैं.

हमारे रिकवरी प्रोग्राम के लिए काम कर रहे एक्सपर्ट्स ब्रेकअप से जूझ रहे व्यक्ति को पूरे धैर्य से सुनते हैं, वो कहीं से भी जजमेंटल नहीं होते और पूरी तरह से भावनात्मक सपोर्ट भी देते हैं.

ब्रेकअप एक्सपर्ट्स अपने ऑनलाइन रिकवरी प्रोग्राम भी चलाते हैं, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक आसानी से मदद पहुंच सके.

रिकवरी में सैडनेस यानी दुख की भावना से ध्यान हटाकर सेल्फ केयर की भावना पर ले जाया जाता है.

ब्रेकअप इतना बुरा भी नहीं होता, क्योंकि इसके बाद ही तो आप अपने प्रति सजग होते हो, अपने लिए सोचते हो, अपने स्वाभिमान के लिए लड़ते हो.

दरअसल, ब्रेकअप का प्रभाव अन्य चीज़ों पर भी निर्भर करता है, जैसेरिश्ता कितना गहरा और पुराना था, रिश्ता टूटने का कारण क्या था, फिज़िकल एब्यूज़ था या नहीं, इमोशनल सपोर्ट, फाइनेंशियल सपोर्ट आदि.

ब्रेकअप आपके मानसिक स्वास्थ्य के साथसाथ शारीरिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है.

बहुत से लोग ब्रेकअप के बाद अपने फिज़िकल अपीयरेंस के प्रति लापरवाह हो जाते हैं और मोटापे का शिकार हो जाते हैं.

रिकवरी प्रोग्राम के ज़रिए एक्सपर्ट्स सेल्फ केयर पर ही सबसे ज़्यादा ध्यान दिलाते हैं, ताकि आप पहले से कहीं अधिक फिट, सुंदर, स्वस्थ, कॉन्फिडेंट और पॉज़िटिव लगें.

थेरेपीज़ में सेल्फ एस्टीम, एंगर और सैडनेस को दूर करने पर फोकस किया जाता है.

कई बार व्यक्ति ख़ुद को ही दोषी मानने लगता है अपने ब्रेकअप के लिए, ऐसे में उसकी सोच को बदलना पड़ता है और उसका खोया विश्‍वास फिर लौटाने पर ज़ोर दिया जाता है.

नकारात्मक भावनाओं से कैसे बाहर निकला जाए, ताकि व्यक्ति आत्महत्या जैसा क़दम न उठा सके या फिर गहरे अवसाद में न चला जाए, इस पर सबसे ज़्यादा ज़ोर दिया जाता है.

बुख़ार होने पर या शरीर पर ज़ख़्म होने पर हम डॉक्टर के पास जाते हैं, तो जब दिल पर चोट लगती है, तो उसके ज़ख़्मों को छिपाना क्यों चाहते हैं? बेहतर होगा दिल के डॉक्टर यानी रिलेशनशिप एक्सपर्ट के पास जाएं और ज़िंदगी में फिर से मुस्कुराएं.

विजयलक्ष्मी

यह भी पढ़ें: आख़िर क्यों बनते हैं अमर्यादित रिश्ते?

यह भी पढ़ें: ज़िद्दी पार्टनर को कैसे हैंडल करेंः जानें ईज़ी टिप्स

पहला अफेयर: मुहब्बत उम्र की मोहताज नहीं (Pahla Affair: Mohabbat Umra Ki Mohtaj Nahi)

Pahla Affair, Mohabbat, love story

Pahla Affair, Mohabbat, love story

पहला अफेयर: मुहब्बत उम्र की मोहताज नहीं (Pahla Affair: Mohabbat Umra Ki Mohtaj Nahi)

पहले प्यार (FirstLove) का एहसास होता है बेहद ख़ास, अपने फर्स्ट अफेयर (Affair) की अनुभूति को जगाने के लिए पढ़ें रोमांस से भरपूर पहला अफेयर 

ईश्‍वर ने जब इस सृष्टि की रचना की, तो उन्होंने सृष्टि की प्रत्येक वस्तु को नियमों में बांध दिया. सूरज के उगने और डूबने का स्थान और समय पहले से निर्धारित कर दिया. जहां पंछियों को उड़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, वहीं इंसान आकाश में मुक्त होकर विचरण करने की कल्पना तक नहीं कर सकता. जहां दिन का आगमन रोशनी के साथ होता है, वहीं रात का स्वागत अंधकार करता है. लेकिन स़िर्फ एक ही चीज़ है इस सृष्टि में, जिसको ईश्‍वर ने सभी नियमों से मुक्त रखा है. वह चीज़ है- प्यार!

प्यार किसी को भी, कहीं भी, किसी से भी हो सकता है. यह इस सृष्टि की सबसे रहस्यमयी रचना है. प्रेम में उम्र और जन्म का बंधन कोई मायने नहीं रखता. यही वजह है कि मुझे जिस व्यक्ति से प्यार हुआ, वो मुझसे उम्र में 22 साल बड़े थे. जब इस ख़ूबसूरत एहसास को मैंने पहली बार महसूस किया, उस व़क्त मेरी उम्र मात्र 16 साल थी और वो 38 साल के थे. वो शादीशुदा थे.

मुझे आज भी वो दिन अच्छी तरह याद है, जब मेरे मोबाइल पर उनका संदेश आया था. मेरे मोबाइल पर किसी अज्ञात नंबर से कुछ रोमांटिक पंक्तियां आई थीं. मैंने सोचा कि कोई लड़का मेरे साथ बदमाशी कर रहा है. मैंने ग़ुस्से में आकर फोन लगाया और जमकर उनको बातें सुनाईं, पर उन्होंने मेरी गालियों का ज़रा भी बुरा नहीं माना, बल्कि नम्रतापूर्वक मुझसे आग्रह किया कि मैं उनकी दोस्ती स्वीकार कर लूं.

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: मैसेजवाला लड़का…

पता नहीं, उनकी आवाज़ में क्या जादू था कि मुझ जैसी लड़की, जो हमेशा लड़कों से दूर रहती थी, ने एक अंजान शख़्स के आग्रह को स्वीकार कर लिया. इस घटना के बाद लगभग 20 दिनों तक हम एक-दूसरे से फोन पर बातें करते रहे. इन 20 दिनों में मैं यह तो बहुत अच्छी तरह समझ चुकी थी कि ये वही हंसान हैं, जिसकी मुझे तलाश थी.

इन 20 दिनों के बाद हम कई बार एक-दूसरे से समंदर के किनारे मिले. समंदर के किनारे बैठकर हम दोनों ही आई पॉड पर बजते संगीत का आनंद लेते थे और बिना एक-दूसरे से एक शब्द भी बोले अंधेरा होने तक समंदर को निहारते रहते थे. उस पल मुझे ऐसा महसूस होता था कि काश! ऐसा होता कि मैं अपनी सारी ज़िंदगी इसी तरह उनके साथ समंदर के किनारे बैठकर गुज़ार देती.

ऐसी ही एक ख़ूबसूरत शाम थी, जब उन्होंने मुझे अपनी बांहों में लेकर चूमा था. वो मेरी ज़िंदगी के पहले और आख़िरी पुरुष थे, जिन्होंने मेरे शरीर के साथ-साथ मेरी आत्मा को भी छुआ था. हमें एक-दूसरे से मिले स़िर्फ एक साल ही हुआ था कि उनका तबादला दूसरे शहर में हो गया. उसके बाद हम कभी नहीं मिले.

मेरी तो दुनिया ही वीरान हो गई. इस बीच उनका पत्र मुझे मिला, जिसमें उन्होंने अपने प्रेम का इज़हार किया और इस असफल प्रेम कहानी पर दुख व्यक्त किया. वो मजबूर थे. एक तरफ़ उनकी पत्नी और बेटे की ज़िम्मेदारी थी, तो दूसरी तरफ़ हमारे प्रेम को समाज की स्वीकृति कभी प्राप्त नहीं होती.

आज इस बात को 20 साल हो गए, पर आज भी मैं उनको भूल नहीं पाई. मेरे जीवन का कोई ऐसा दिन नहीं गुज़रता जब मैं उनको याद नहीं करती. ईश्‍वर से यही दुआ करती हूं कि वो जहां भी रहें, हमेशा ख़ुश रहें.

हालांकि मेरी क़िस्मत में उनसे जुदाई ही लिखी है, जिसे मैंने अब स्वीकार कर लिया है, क्योंकि किसी ने सच ही कहा है- कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता…

– सोनी दुबे

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: तुम्हारा जाना… 

सीखें प्यार की 5 भाषाएं, देखें वीडियो:

पहला अफेयर: मैसेजवाला लड़का… (Pahla Affair: Messagewala Ladka)

Pahla Affair, Messagewala Ladka, love story

Pahla Affair, Messagewala Ladka, love story

पहला अफेयर: मैसेजवाला लड़का… (Pahla Affair: Messagewala Ladka)

पहले प्यार (FirstLove) का एहसास होता है बेहद ख़ास, अपने फर्स्ट अफेयर (Affair) की अनुभूति को जगाने के लिए पढ़ें रोमांस से भरपूर पहला अफेयर 

तुमने उस रोज़ जब नज़रों से छुआ था मुझे, आज भी उस नज़र का असर ये है कि पूरा बदन सिहर उठता है… वो पहली मुलाक़ात थी हमारी… और पहली ही मुलाक़ात में इतने क़रीब आ जाना… न मैंने कुछ सोचा था, न तुमने… हम तो बस सोशल मीडिया के ज़रिये मिले थे, तस्वीरों से ही जानते थे…

मुझे याद है आज भी, तुम्हारा पहला मैसेज… ‘हैलो जी, आप कैसी हो? ठीक-ठाक ही होंगी… ये मेरा नंबर है… आपसे दोस्ती करनी है…’
फिर इसके बाद लगातार न जाने कितनी बार तुम्हारे मैसेजेस आते गए और मैं इग्नोर करती गई… फिर एक रोज़ देश की राजनीतिक स्थिति को लेकर तुमने एक तस्वीर भेजी, मैं ख़ुद को रोक न सकी… जवाब देना ज़रूरी समझा. सो दिया. हमारी राजनीतिक सोच अलग थी. ख़ैर, मुझे कौन-सी तुमसे शादी करनी थी. अगली सुबह तुमने सॉरी लिखा… उसके बाद फिर वही सिलसिला… लगातार मेरी तस्वीरों पर कमेंट और मैसेजेस… पर अब तुम्हारी हिम्मत और बढ़ गई थी… अब तुम सीधे-सीधे आई लव यू… मिस यू… न जाने कितनी गुस्ताखियां करने लगे थे.

पर मुझे क्या हुआ था, मैंने तुम्हें ब्लॉक भी नहीं किया… यह तो मैं जानती थी कि तुम वो नहीं हो, जिसको मैं जीवनसाथी के रूप में देखना चाहूंगी, पर तुम्हारा मैसेज करना अब अच्छा लगने लगा था. हालांकि मैं स़िर्फ इग्नोर कर रही थी कि अचानक तुमने लिखा- ‘मैं तुम्हारे शहर आया हूं, तुमसे मिलने… यह मेरा नंबर है, प्लीज़ एक बार मिल लो. बस, एक बार बात कर लो.’

ख़ैर, मैंने तुम्हें पागल-दीवाना समझकर फिर इग्नोर कर दिया. तुम आहत थे मेरे इस बर्ताव से, लेकिन मैं भी कहां ग़लत थी. मैंने तुम्हें मैसेज भी किया था कि हम एक-दूसरे को जानते भी नहीं हैं, ऐसे कैसे प्यार कर सकते हो तुम मुझसे… तुमने सरलता से जवाब दिया था कि बात ही नहीं करोगी, तो ज़िंदगीभर अंजान बने रहेंगे.

मैंने फिर एक दिन लिखा- ‘आख़िर चाहते क्या हो?’

तुमने फिर सरलता से जवाब दिया- ‘तुम्हें. मुझे क्यों इतना इग्नोर कर रही हो. तकलीफ़ होती है. मुझे प्यार है तुमसे. ज़िंदगीभर साथ निभाऊंगा, बस एक बार भरोसा करके देखो.’

‘प्यार तुम्हें हुआ है, मुझे नहीं. ये तुम्हारी समस्या है. मैं जानबूझकर तुम्हें तकलीफ़ नहीं दे रही. स़िर्फ तस्वीरें देखकर कोई किसी से प्यार नहीं कर सकता.’

‘तो रू-ब-रू मिल लो. मैं तो आया ही था. पर तुमने नज़रअंदाज़ कर दिया. वैसे भी सूरत से कहीं ज़्यादा सीरत मायने रखती है और देखने-दिखाने की ज़रूरत उन्हें होती है, जो डे-टुडे प्यार बदलते हैं…’

‘ये प्यार नहीं, आकर्षण है, लस्ट है… जिसे तुम प्यार समझ रहे हो… बस, मेरा पीछा छोड़ो, वरना ब्लॉक कर दूंगी.’ मैंने ग़ुस्से में जवाब दिया था.

‘मेरे प्यार को वासना का नाम मत दो, बात अगर स़िर्फ जिस्म की है, तो अंधेरी रातों में बाज़ार और मंडियां सजती हैं… अब तुम चाहो, तो मुझे बेझिझक ब्लॉक कर सकती है, पर मेरे प्यार को वासना बोलकर गाली मत दो.’ तुम्हारे इस जवाब ने मुझे शर्मिंदा कर दिया था.

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: दरमियान

‘सॉरी, मैंने ग़लत शब्द का इस्तेमाल किया. मैं स़िर्फ यह कहना चाह रही हूं कि आकर्षण को प्यार समझ रहे हो तुम.’

‘तुम मिलना चाहती हो न? चलो मिल लेते हैं एक बार, फिर तुम जो निर्णय लोगी, उसे अपनी तक़दीर मान लूंगा, प्यार न सही, इंतज़ार तो मिलेगा मुझे.’

‘ठीक है, अपना फोन नंबर दो. आज शाम को कॉल करूंगी. लेकिन एक बात याद रखना कि मैं फोन पर ज़्यादा बात नहीं करती और न ही यह पसंद करूंगी कि कोई मुझे बेवजह कॉल करके परेशान करे. ’ मैंने फिर तुम्हें टालने के लिए मैसेज कर दिया.

तुमने नंबर भेजा, मैंने भी सोचा फोन कर लूं एक बार और इस बंदे को निपटाऊं, वरना रोज़-रोज़ परेशान करेगा. तुमसे बात की. क्यूट लगे तुम मुझे. फिर ये बातों का सिलसिला थमा ही नहीं. बात होती रही. मैसेज बढ़ते गए.

मैं हर बार यही कहती कि आसान नहीं है लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप… और तुम यही कहते कि मुश्किल कुछ भी नहीं. आज के ज़माने में सब आसान है…

कुछ दिनों बाद ऑफिस के काम से मुझे दिल्ली जाना था. तुम्हें बताया, तो तुमने कहा कि तुम मिलने आओगे. बहुत डर लग रहा था मुझे. क्या पता सेफ होगा कि नहीं इस तरह किसी अंजान से मिलना, क्योंकि तुमने कहा था कि मॉल में मिलने तो तुम आ सकते हो, पर क्या हम दोनों वहां कंफर्टेबल होंगे? पहली मुलाक़ात की झिझक वैसे भी रहेगी, उस पर इतने लोगों के बीच.

एक तरफ़ तो मुझे लगा कि बात तुम सही कह रहे हो, पर कहीं किसी मुसीबत में न फंस जाऊं. फिर भी हिम्मत करके तुम्हें मैंने अपने होटल रूम में बुला लिया मिलने के लिए, पर एक शर्त भी रखी कि तुम्हारा हेयर स्टाइल मुझे पसंद नहीं, फिर तुम्हें कुछ तस्वीरें भेजीं कि ऐसा हेयर कट करवाओ, तब मिलने आओ.

तुमने कहा कि जानता था कुछ ऐसा ही होगा. तुम्हें तो बस बहाना चाहिए मुझे नापसंद करने का. सारी रात यही सोचती रही कि न जाने कैसा होगा यह लड़का, फोटो को देखकर किसी को जज नहीं किया जा सकता… फिर सोचा मीटिंग कैंसिल कर देती हूं, कोई बहाना बना देती हूं.

तुमको सुबह मैसेज किया कि हम मॉल में ही मिल लेते हैं, रूम में नहीं हो पाएगा. तुमने बुझे मन से कहा कि कोई बात नहीं, मैं आऊंगा मॉल में भी मिलने.

फिर मुझे लगा कि तुम पर भरोसा किया जा सकता है, फिर से मैंने प्लान चेंज किया और तुम्हें कहा कि रूम में ही आ जाना. पर ज़्यादा क्लोज़ होने की कोशिश मत करना.

“तुम अपने ऊपर कंट्रोल रखना, मैं ख़ुद को संभाल लूंगा.” यही जवाब दिया था तुमने. कहीं न कहीं मुझे लग रहा था कि ये मुलाक़ात पहली और शायद आख़िरी होगी.

ख़ैर, सुबह तुम आए, मैंने दरवाज़ा खोला, एक नर्वस-सा लड़का मेरे सामने खड़ा था. तुम अंदर आए और मैं बस तुम्हें देख रही थी और यही सोच रही थी कि इतना हैंडसम लड़का, इससे न मिलना तो बेव़कूफ़ी थी. तुम बहुत ज़्यादा नर्वस थे.

“हेयर कट सूट कर रहा है तुम पर…” मैंने हंसते हुए कहा.

“तुम्हें पसंद आया, बस और क्या चाहिए…” तुमने मुझे निहारते हुए कहा.

मैं कुछ असहज हो गई. फिर मैं इधर-उधर की बातें करने लगी और तुम बस लगातार मुझे निहार ही रहे थे.

टीवी ऑन थी, तो मैंने टॉपिक चेंज करने के लिए कहा, “मुझे ये हीरो बहुत पसंद है.”

“हां, बस मैं ही एक कमीना हूं, जो नापसंद हूं, बाकी तो तुमको सब पसंद हैं…” यह कहते हुए तुम मेरे क़रीब आए. मेरे हाथों को चूमा. मैंने नहीं रोका… फिर न जाने कितने चुंबनों की बरसात तुमने की और मैं प्यार की बारिश में भीगती चली गई. इतनी मदहोशी, इतना हसीन मंज़र ज़िंदगी में पहले कभी नहीं आया था.

मन नहीं था तुमसे अलग होने का, पर वापस तो आना था… वापसी में कई तरह के ख़्याल थे मन में… क्या पता, इसके बाद तुम बातचीत बंद कर दो, बदल जाओ, तुम्हें जानती ही कितना थी मैं… तुम ये भी तो सोच सकते हो कि पहली मुलाक़ात में इतनी कंफर्टेबल होनेवाली लड़की न जाने कैसी होगी… हो सकता है मेरा फ़ायदा उठाना ही तुम्हारा इरादा हो… सुबह से तुम्हारा कोई मैसेज भी तो नहीं आया… हे भगवान! ख़ुद को इतना समझदार समझनेवाली मैं इस तरह बेवक़ूफ़ कैसे बन गई. तुम्हारा फोन भी बंद था.

ख़ैर, घर पहुंचते ही देखा तुम्हारा मैसेज था- ‘विल यू मैरी मी!’

मेरी जान में जान आई… ये दिल भी कितना नादान है… एक पल में लाखों ख़्याल उमड़ने लगते हैं… तुम्हें न कहने का कोई कारण नहीं था… पर मैंने हां नहीं कही थी… तुमने फिर मैसेज किया- ‘जानता हूं अभी तुम्हें मुझे और परखना है… कौन हूं, कैसा हूं, क्या काम करता हूं, कितना कमाता हूं… तुम लड़कियां भी कितना सोचती हो… और हम लड़के बस प्यार और विश्‍वास करते हैं… ख़ैर, तुम्हारी हां के लिए मैं उम्रभर इंतज़ार करूंगा… शहर, दूरियां, धर्म, जाति, बिरादरी, पैसा… इन सबसे कहीं ऊंचा होता है प्यार… और सच स़िर्फ यही है कि मैं तुमसे और तुम मुझसे प्यार करती हो…!
आई लव यू माय लव!’

आज पूरे एक साल हो गए हैं हमें मिले और अब अगली मुलाक़ात में हम हमेशा के लिए एक-दूसरे के हो जाएंगे. हम लकी हैं कि हमारे घरवाले भी मान गए और हमारे प्यार को समझ पाए और मैं और भी लकी हूं कि तुम जैसा समझदार जीवनसाथी मुझे मिला. मेरा पहला प्यार… पहला एहसास… हमेशा के लिए अब मेरा होगा.

– गीता शर्मा

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: रॉन्ग नंबर

क्या वाकई रिश्ते स्वर्ग में तय होते हैं? देखें वीडियो:

मन का रिश्ता: दोस्ती से थोड़ा ज़्यादा-प्यार से थोड़ा कम (10 Practical Things You Need To Know About Emotional Affairs)

Emotional Affairs

रिश्तों का दायरों में कुछ रिश्ते मन के भी होते हैं, जिन्हें कोई नाम तो नहीं दिया जा सकता, लेकिन इनके अस्तित्व को नाकारा भी नहीं जा सकता. इन्हीं रिश्तों में से एक है शादीशुदा स्त्री और पुरुष का ऐसा रिश्ता, जो दोस्ती से एक क़दम आगे होता है, लेकिन इसे प्यार का नाम भी नहीं दिया जा सकता. क्योंकि ऐसे रिश्ते में बंधे लोग किसी बंधन की चाह नहीं करते, वो बस कुछ समय साथ गुजारना चाहते हैं. क्यों, कब और कैसे बनते हैं मन के रिश्ते? आइए, जानते हैं.

Emotional Affairs

इंसान की ये फितरत है कि उसे जो चीज़ नहीं मिलती, वो उसी को पाना चाहता है. प्यार के मामले में तो ये चाहत और भी बढ़ती चली जाती है. जब लाइफ पार्टनर से मनचाहा प्यार नहीं मिलता, तो वो अपनी इस चाहत को अपने रिश्ते के दायरे से बाहर तलाशने लगता है. और तब बनते हैं मन के भावनात्मक रिश्ते, जिन्हें कोई नाम तो नहीं दिया जा सकता, लेकिन उनके होने को नकारा भी नहीं जा सकता. मन के रिश्ते में बंधे ऐसे लोग घर-परिवार, करियर, रिश्तेदार, समाज… अपनी तमाम ज़िम्मेदारियां निभा लेने के बाद जो व़क्त बचता है, उसे अपने उस साथी के साथ बिताना चाहते हैं, जिससे कुछ पल बात करके इन्हें नई ऊर्जा मिलती है, ज़िंदगी ख़ूबसूरत नज़र आने लगती है. क्यों बनते हैं ऐसे मन के रिश्ते? समाज ऐसे रिश्तों को किस नज़र से देखता है? क्या हैं ऐसे रिश्तों के पॉज़िटिव और नेगेटिव इफेक्ट्स? आइए, जानते हैं.

क्यों बनते हैं मन के रिश्ते?
काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट डॉ. माधवी सेठ के अनुसार, ज़्यादातर इमोशल या एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स चालीस की उम्र के बाद होते हैं. इसकी वजह यह है कि इसके पहले इंसान अपनी पढ़ाई, करियर, शादी, बच्चों की ज़िम्मेदारियों में उलझा रहता है. फिर जब उसकी ज़िंदगी में ठहराव आने लगता है, जिसे एमटी नेस्ट सिंड्रोम भी कहते हैं, तो उस खालीपन को भरने के लिए वो किसी ऐसे इंसान से जुड़ जाता है, जिसके साथ व़क्त गुज़ारना उसे अच्छा लगता है.
ऐसा रिश्ता दोस्ती से बढ़कर होता है, क्योंकि बार-बार मिलने, बात करने का मन करता है, लेकिन सेक्स की चाह नहीं होती. ऐसे रिश्ते को प्यार इसलिए नहीं कहा जा सकता, क्योंकि ऐसे लोग स़िर्फ कुछ समय साथ रहना चाहते हैं, उन्हें एक साथ दुनिया बसाने की कोई चाह नहीं होती. इमोशनल अफेयर कोई जानबूझकर नहीं करता, इसके होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे-
* शादीशुदा ज़िंदगी में अच्छे अनुभव भी होते हैं और बुरे भी. पार्टनर भले बुरा न हो, लेकिन उसके साथ गुज़रे बुरे अनुभवों के कारण कई बार रिश्ते में कड़ुवाहट आ जाती है और ऐसा दोनों पार्टनर के साथ होता है. इसके चलते रिश्ते से रोमांस ग़ायब हो जाता है. फिर जब किसी के साथ उनका जुड़ाव होने लगता है, तो वो उस रिश्ते में रोमांस तलाशने लगते हैं.
* शादी के बाद कई महिलाएं अपना ध्यान नहीं रखतीं, ख़ुद को ग्रूम नहीं करतीं, तो पति को उनमें रुचि कम होने लगती है, फिर जब उसे अपने जैसी कोई मिलती है, तो वो उसके प्रति आकर्षित हो जाता है.
* कई कपल ऐसे होते हैं, जो दुनिया के सामने तो ऐसा दिखाते हैं जैसे उनके बीच सबकुछ नॉर्मल है, लेकिन ऐसा होता नहीं. ऐसे में दोनों अपनी-अपनी अलग दुनिया बसा लेते हैं और दोनों अपनी दुनिया में ख़ुश रहते हैं.
* शादी के शुरुआती वर्षों को छोड़ दिया जाए, तो इंसान पूरी ज़िंदगी इस आस में गुज़ार देता है कि कभी तो उसकी ज़िंदगी में रोमांस के पल लौटकर आएंगे, लेकिन जब ऐसा नहीं हो पाता, तो जहां भी उसे अपने लिए प्यार महसूस होता है, वो उसी तरफ़ झुकता चला जाता है.
* चालीस की उम्र के बाद कई महिलाएं एमटी नेस्ट सिंड्रोम की शिकार हो जाती हैं, जब बच्चे अपनी दुनिया में बिज़ी हो जाते हैं और पति अपने काम में, ऐसे में महिलाएं अकेलापन महसूस करने लगती हैं. उन्हें लगने लगता है कि किसी को उनकी परवाह नहीं है. ऐसे में जब कोई उन्हें एहमियत देता है, तो वो उसकी तरफ खिंचती चली जाती हैं.
* जब शादीशुदा रिश्ते में कहीं कोई कमी रह जाती है, हम वैसी ज़िंदगी नहीं जी पाते जैसा हम जीना चाहते हैं, तो ज़िंदगी में एक अजीब-सा खालीपन आ जाता है. फिर जब किसी से मिलने पर वो खालीपन भरने लगता है, तो मन ऐसे रिश्ते से जुड़ता चला जाता है.
* घर-ऑफिस का स्ट्रेस, पारिवारिक कलह, विचारों का मतभेद कई बार पति-पत्नी के बीच इतनी दूरियां ला देता है कि एक छत के नीचे रहते हुए भी वो एक-दूसरे से बहुत दूर होते चले जाते हैं. ऐसे में वो घर में मिलने वाली ख़ुशियां बाहर तलाशने लगते हैं. फिर जब कोई थोड़ा भी सहारा देता है, तो वो उसकी तरफ़ खिंचते चले जाते हैं.
* कई बार ऐसा भी होता है कि कहने को तो रिश्ता तय हो जाता है, शादी भी हो जाती है, लेकिन कपल के विचार आपस में कभी नहीं मिलते. ऐसे में रिश्ता तोड़कर दो परिवारों को दुखी करने की बजाय वो ऐसे रिश्ता तलाश लेते हैं, जो उन्हें समझता हो, जिसका साथ उन्हें अच्छा लगता हो. ऐसे रिश्ते में वो अपनी ख़ुशियां तलाश लेते हैं. घर-परिवार की ज़िम्मेदारियों के साथ-साथ वो अपने इस रिश्ते को भी जीते हैं.
* काम के बढ़ते घंटे कलीग को एक-दूसरे के इतने करीब ले आते हैं कि वो एक-दूसरे से अपनी हर बात शेयर करने लगते हैं. रोज़ाना घंटों साथ रहते हुए उन्हें ये पता ही नहीं चलता कि वो कब एक-दूसरे के बहुत करीब आ गए हैं.
* आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में काम की आपाधापी के चलते पति-पत्नी के पास एक-दूसरे के लिए टाइम ही नहीं रहता, ऐसे में उनके बीच संवाद की कड़ियां ढीली पड़ने लगती हैं, शरीरिक ज़रूरत से ज़्यादा ऐसे समय में उन्हें इमोशनल सपोर्ट चाहिए होता है और जहां इसकी पूर्ति होती दिखाई देती है, वो उसी तरफ़ मुड़ जाते हैं.
* आजकल एक्सपोज़र इतना बढ़ गया है कि ज़िंदगी की ज़रूरतें भी जैसे बदलती जा रही हैं. अब लोग एक रिश्ते में घुट-घुटकर जीने की बजाय दूसरा रिश्ता तलाशकर अपना सुकून ढूंढ़ लेते हैं और ऐसा करते समय उन्हें कोई अपराधबोध भी नहीं होता.
* कई बार हमें एक ऐसे साथी की तलाश होती है, जिसके पास जाकर हम दुनिया की तमाम तकली़फें, शिकायतें भूल जाते हैं. उस व़क्त हमारे हैप्पी हार्मोन्स पीक पर होते हैं और हमें ज़िंदगी अच्छी लगने लगती है.

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: दरमियान

हां, मैं अपने रिश्ते से ख़ुश हूं!
सुरीली (परिवर्तित नाम) कहती हैं. “मैं अमन से चार साल पहले मिली थी जब मैंने अपना नया ऑफिस ज्वाइन किया था. अमन मेरे सीनियर थे इसलिए काम के सिलसिले में उनसे बातें होती रहती थीं. धीरे-धीरे हमें एक दूसरे का साथ इतना अच्छा लगने लगा कि हम घर पहुंचते ही अगले दिन ऑफिस जाने का इंतज़ार करते रहते थे. हमारे बीच एक अनकहा रिश्ता जन्म लेने लगा था. बिना कुछ कहे-सुने हमने एक-दूसरे को अपना सहारा बना लिया. सच कहूं, तो जब से अमन मेरी ज़िंदगी में आए हैं, तब से जैसे मेरी ज़िंदगी ही बदल गई है. अमन का साथ मुझे एक अजीब-सी ख़ुशी और संतुष्टि देता है, जो मैंने अपने पति के साथ कभी महसूस नहीं की. मैं जब कभी अपसेट रहती हूं तो मेरे पति को तो इसकी ख़बर भी नहीं रहती, लेकिन अमन जानते हैं कि आज रात मुझे नींद नहीं आएगी. वो मुझे 2-3 बजे रात में भी मैसेज करते हैं कि अब सो भी जाओ, कल ऑफिस में काम कैसे करोगी. अमन का इस कदर केयर करना मुझे बहुत तसल्ली देता है. अमन के साथ मैं ख़ुद को प्रोटेक्टेड महसूस करती हूं. हमने कभी एक-दूसरे को छुआ भी नहीं है, लेकिन हमारी रूह एक-दूसरे में बसती है. समझ नहीं आता इस रिश्ते को क्या नाम दूं- प्यार, दोस्ती, अफेयर, हमसफर… जो भी है, मेरे लिए हमारा रिश्ता बहुत ख़ास है.”

Emotional Affairs

इस रिश्ते को क्या नाम दें?
प्राइवेट लंच डेट्स, सीक्रेट मीटिंग्स, उत्तेजक वार्तालाप… पार्टनर के होते हुए जब ये बातें किसी और के साथ शेयर की जाती हैं, तो ऐसे रिश्ते को क्या नाम दिया जाए? कई लोग ख़ुद को समझाते हैं कि जब तक उनके बीच सेक्स नहीं होता, उसे अफेयर का नाम नहीं दिया जा सकता, लेकिन ये सच नहीं है. जिस रिश्ते को आप अपने पार्टनर और दुनिया से छुपाकर रखते हैं, जिसे आप अपना बिल्कुल निजी मामला समझते हैं, उसे अफेयर ही कहा जा सकता है. आप अपनी ढेर सारी इमोशनल एनर्जी अपने अफेयर पर ख़र्च करते हैं, जबकि इस पर आपके पार्टनर का अधिकार है. ऐसे रिश्तों का जब खुलासा होता है, तो सबसे पहले विश्‍वास की दीवार ढहती है और फिर आप गिल्ट में जीते हैं और आपका पार्टनर नफ़रत की आग में.

यह भी पढ़ें: लाइफस्टाइल ने कितने बदले रिश्ते?

 

इमोशनल अफेयर के साइड इफेक्ट्स
* आप हर समय इस गिल्ट में रहते हैं कि आप अपने पार्टनर को धोखा दे रहे हैं.
* जाने-अनजाने पार्टनर और परिवार की अनदेखी करने लगते हैं.
* एक अनरियलिस्टिक दुनिया में जीने लगते हैं, जिसके परिणाम घातक हो सकते हैं.
* अपने अफेयर से मिलने के लिए पार्टनर से झूठ बोलते हैं.
* पति और परिवार का समय उस शख़्स को देने लगते हैं यानी अपना बेस्ट टाइम उसके साथ गुज़ारते हैं.
* पार्टनर की बजाय अपनी हर बात उस शख़्स के साथ शेयर करने लगते हैं.
* स़िर्फ कुछ समय की मुलाक़ात में सबकुछ अच्छा तो लगता है, लेकिन जब अफेयर की बात खुलती है, तो असल रिश्ते दूर हो जाते हैं.

– कमला बडोनी

 

 

पहला अफेयर: दरमियान (Pahla Affair: Darmiyaan)

Pahla Affair, Darmiyaan
Pahla Affair, Darmiyaan
पहला अफेयर: दरमियान (Pahla Affair: Darmiyaan)

पहले प्यार (FirstLove) का एहसास होता है बेहद ख़ास, अपने फर्स्ट अफेयर (Affair) की अनुभूति को जगाने के लिए पढ़ें रोमांस से भरपूर पहला अफेयर 

किस तरह से कोई शख़्स अचानक ज़िंदगी में चला आता है और कब वो मुहब्बत बनकर आपकी रूह को छूकर निकल जाता है, शायद पता ही नहीं चलता. तुम भी तो इसी तरह से आए थे मेरे जीवन में. एक ताज़े, मदमस्त हवा के झोंके की तरह और मैं सूखे पत्ते की तरह बस उड़ती चली गई, किसी पागल नदी की तरह बस बहती चली गई… न धड़कनों पर काबू रहा था, न क़दमों पर… बहकती चली गई, मचलती चली गई… तुम मेरे लिए क्या थे, शायद तुम कभी समझ ही नहीं पाए… या मैं ही इतनी नासमझ थी कि तुमको समझ नहीं पाई…

वो पहली मुलाक़ात अब तक है याद… एक दोस्त की पार्टी में मिले थे हम. वो पूरी रात मैंने बस तुम्हें सोचते हुए काटी थी. कितनी कशिश थी तुम्हारे व्यक्तित्व में, कितना शालीन था तुम्हारा व्यवहार… पहली नज़र में ही मैंने ख़ुद को खो दिया था. पर तुम्हारे दिल में क्या था, मैं नहीं जानती थी.

एक दिन ऑफिस में काम कर रही थी कि अंजान नंबर से कॉल आया, “हाय, मैं विक्रम, विक्रम शर्मा बोल रहा हूं.”

“जी, मैंने आपको पहचाना नहीं, क्या काम है कहिए.” मैंने बेमन से जवाब दिया.

“आप रितु बोल रही हैं न, हम उस दिन पार्टी में मिले थे… इतनी जल्दी भूल जाएंगी आप मुझे, मैंने सोचा नहीं था.”

“ओ माय गॉड! आपका नाम तक भी नहीं जानती थी मैं, इसलिए नहीं पहचान पाई, मेरा नंबर कहां से मिला आपको?”

“ढूंढ़ने पर तो भगवान भी मिल जाता है… मैं सोच रहा था, अगर आप आज शाम मेरे साथ कॉफी पी सकें, तो मेरी लाइफ बन जाएगी.”

“जी, बात अगर आपकी लाइफ की है, तो मैं मना कैसे कर सकती हूं…” न जाने उसकी बातों में क्या जादू था, मैं बस खिंचती चली गई. उसके बाद न जाने ऐसी कितनी ही मदभरी शामें हमने साथ गुज़ारीं. मैंने तो कल्पना भी नहीं की थी कि मेरी पहली नज़र का पहला प्यार मेरे लिए इतना बेक़रार होगा…

लेकिन पता नहीं मन में कहीं न कहीं मुझे यह महसूस होता था कि कहीं कुछ न कुछ सही नहीं है. तुम्हारा अचानक कहीं खो जाना, कुछ कहते-कहते ख़ुद को रोक लेना… फिर मैंने ही एक दिन सोचा कि अपने दिल की बात कह दूं तुमसे कि हां, मुझे प्यार है और तुम ही वो, जिसके साथ मुझे सारी ज़िंदगी बितानी है… इतने में तुम्हारा भी फोन आ गया कि शाम को कुछ ज़रूरी बात करनी है, मैंने सोचा तुम भी मुझे प्रपोज़ करनेवाले हो…

मेरी ज़िंदगी का सबसे हसीन दिन था वो. सोचा था दोपहर को शॉपिंग के बाद तुमसे कॉफी हाउस में मिलूंगी. पर मेरे लिए यह किसी सरप्राइज़ से कम नहीं था कि तुम मुझे शॉपिंग मॉल में ही नज़र आ गए थे.

“हाय विक्रम, देखो हम शाम को मिलनेवाले थे, पर शायद भगवान भी नहीं चाहता कि अब हम और इंतज़ार करें… विक्रम, क्या हुआ? तुम इतने झिझक क्यों रहे हो?” मैं बस विक्रम से बात ही कर रही थी कि एक 7-8 साल का बच्चा वहां आकर विक्रम से लिपटते हुए बोला, “पापा, मुझे प्लीज़ गेम ज़ोन में ले चलो न, मैं यहां बोर हो रहा हूं…” मुझे अपने कानों पर विश्‍वास नहीं हो रहा था. विक्रम शादीशुदा थे. उनका बेटा भी है. ऐसा कैसे हो सकता है. इतना बड़ा धोखा? मेरी ज़िंदगी का सबसे हसीन दिन तो जैसे मेरे लिए जानलेवा साबित हो गया था. किसी तरह ख़ुद को संभाला मैंने और विक्रम को बाय बोलकर चली आई.

एक महीने से ज़्यादा का समय हो गया, तुमने कई बार फोन किया, मैसेज किए, पर मैंने न मैसेज पढ़े, न ही फोन का जवाब दिया. एक धोखेबाज़ शख़्स से मैं कोई रिश्ता नहीं रखना चाहती थी. मेरी भावनाओं से खेलकर आख़िर क्या मिला… या यह तुम्हारा शौक़ होगा, लड़कियों को अपने आकर्षण में फंसाकर उनका इस्तेमाल करना.

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: आईनेवाली अलमारी

काश! मैं समझ पाती पहले, तो वो सब कुछ भी न हुआ होता, जो एक शाम हमारे बीच हुआ था… इतने में ही डोरबेल बजी, दरवाज़ा खोला, तो हैरानी भी थी और ग़ुस्सा भी…

“विक्रम, तुम अब क्या लेने आए हो? तुम्हें जो चाहिए था, वो तो मिल ही चुका न, मेरा शरीर, मेरा जिस्म… बस यही तो चाहते हो तुम मर्द.”

“रितु, मेरे प्यार को वासना का नाम देकर उसे गाली मत दो. तुम्हें मुझसे बात नहीं करनी, मत करना, रिश्ता नहीं रखना, मत रखना… पर एक बार सफ़ाई देने का मौक़ा तो दे ही सकती हो…”

“सफ़ाई, किस बात की, यही कहोगे न कि तुम्हारी शादी कम उम्र में ही गांव की किसी लड़की से हो गई थी, तुम्हारी बीवी से तुम्हें प्यार नहीं, वो तुम्हें समझ नहीं पाती… अक्सर मर्द अपनी कमज़ोरियों को इसी तरह छिपाते हैं. अपनी बीवी को बदनाम करके नाजायज़ रिश्ते बनाते हैं… मैं किसी की रखैल बनकर नहीं जीना चाहती…”

बस करो रितु, यह कहकर विक्रम ने मुझे बांहों में भरकर मेरे लबों को अपने लबों से बंद कर दिया… मैं छूटने की कोशिश करती रही, पर नाकामयाब रही…

“रितु, तुम इतनी ग़ुस्से में हो कि अपने प्यार से ही तुम्हारा मुंह बंद कर सकता था. अब प्लीज़ सुनो मेरी बात… रोहित मेरा बेटा है यह सच है, मैं शादीशुदा हूं यह भी सच है, हां मेरी शादी मेरी अपनी मर्ज़ी से हुई थी और मेरी पत्नी मेरे जीवन का सबसे अनमोल तोहफ़ा थी. बहुत प्यार करता था उससे मैं. लेकिन राहुल के जन्म के व़क्त ही वो हमें छोड़कर दूसरी दुनिया में चली गई. राहुल को उसके नाना-नानी अपने साथ ले गए, क्योंकि मेरे परिवार में कोई बुज़ुर्ग नहीं था और न ही राहुल को संभालनेवाला कोई था. वो छुट्टियों में आता है मेरे पास. उस रोज़ शाम को मैं तुम्हें यही सब बतानेवाला था, ताकि तुम अपना निर्णय ले सको.

सच कहता हूं रितु, तुम्हें जब पहली बार देखा, तो बेहद अपनापन लगा. मुझे लगा मेरी पत्नी नीलू के बाद अगर किसी लड़की ने मेरे दिल को छुआ है, तो वो स़िर्फ तुम हो… जब तुमसे शादी के बारे में सोचता, तो बस राहुल का ख़्याल आ जाता और तुम्हारी प्रतिक्रिया को लेकर थोड़ा डर जाता. लेकिन जिस रोज़ हम और क़रीब आए, उसके बाद मुझे एक अपराधबोध महसूस होने लगा. मुझे लगा तुम्हें अब तक अंधेरे में रखा और तुम्हारे साथ इतना क़रीब आ गया… बस, यही ग़लती है मेरी. अब तुम जो निर्णय लो, मैं तुम पर ज़ोर नहीं डालूंगा… ”

“तुमने मुझे इस काबिल ही कहां छोड़ा कि अब किसी और की हो सकूं…” यह कहते हुए अपने अधरों को मैंने विक्रम के लबों पर रख दिया… उसके बाद स़िर्फ प्यार ही प्यार था हमारे दरमियान… न कोई दीवार, न कोई ग़लतफ़हमी, न कोई शिकवा, न शिकायत…

आज मैं ख़ुश हूं कि जिसको चाहा उसे ही हमसफ़र बना दिया भगवान ने, राहुल जैसा बेटा और रिनी जैसी बेटी के साथ हम एक हैप्पी फैमिली हैं. मेरा पहला प्यार मेरी ज़िंदगी बन गया… आप भी किसी से प्यार करो, तो उस पर पूरा विश्‍वास करो…

– योगिनी भारद्वाज

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: धूप का टुकड़ा

पहला अफेयर: आईनेवाली अलमारी (Pahla Affair: Aainewali Almaari)

Pahla Affair, Aainewali Almaari

Pahla Affair, Aainewali Almaari

पहला अफेयर: आईनेवाली अलमारी (Pahla Affair: Aainewali Almaari)

पहले प्यार का एहसास होता है बेहद ख़ास, अपने फर्स्ट अफेयर की अनुभूति को जगाने के लिए पढ़ें रोमांस से भरपूर पहला अफेयर

आज फिर दोपहर में फुर्सत होते ही ड्रेसिंग रूम में जाकर अलमारी के सामने खड़ी हो गई. कितने घर बदल गए, घर का पूरा फर्नीचर बदल गया, नहीं बदला कुछ, तो यह अलमारी और इससे मेरा प्यार… अपने पहले प्यार की तरंगित मधुर स्मृतियों को क्या कोई अपने आप से दूर कर पाया है? इसके धुंधला चुके आईने में अब भी तुम्हारा प्रतिबिंब झलकता है. इसके भीतर आज भी दो कुंआरे दिलों के प्रेम की प्रथम अनछुई अनुभूति धड़कती है.

सोलह-सत्रह बरस की, ख़्वाबों में खोई रहनेवाली उम्र थी वो. जब एक दिन ढलती सांझ के रंगों में अपने मन की तूलिका से कुछ अनगढ़ से चित्र गढ़ती मैं छत पर खड़ी थी कि तभी पड़ोसवाली छत पर किसी के आने की आहट सुनकर उत्सुकता से उधर देखा. बगलवाला मकान कई दिनों से खाली था, दो-तीन दिन हुए कोई आया था, लेकिन पहचान नहीं हुई थी. देखा, 20-22 बरस का एक लड़का खड़ा था.

पता नहीं उम्र का तकाज़ा था या प्रकृति ने ही कोई संकेत किया था कि आंखें बरबस ही उस ख़ूबसूरत चेहरे पर अटक गईं. ढलती शाम की लालिमा उसके सुंदर, गोरे चेहरे पर छाई थी और तभी उसका ध्यान मेरी तरफ़ गया. मैंने फ़ौरन अपनी आंखें झुका लीं. दिल ज़ोर से धड़क उठा. देर तक मैं छत पर ही खड़ी रही, मन हवा में किसी के साथ को महसूस कर रोमांचित हो रहा था.

स्कूल आते-जाते अक्सर वो दिखाई देता. मेरी आंखें झुक जातीं, हाथ-पैर कांप जाते, चाल लड़खड़ा जाती और वो हौले से मुस्कुरा देता. मेरी शामें अब छत पर ही गुज़रने लगीं और वो तो मुझसे पहले ही छत पर मिलता, दरवाज़े पर नज़रें गड़ाए हुए. दिल से दिल तक प्रेम शायद कुछ तार जोड़ने लग गया था. जल्द ही दोनों घरों के बीच घनिष्ठता हो गई और हमारे बीच भी. हां, दिल की बातें अब भी बस आंखों तक ही सीमित रहती थीं. साल कब बीत गया पता ही नहीं चला.

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: मेरा प्यार ही मेरी प्रेरणा बन गया…

एक दिन घर के सभी लोग किसी रिश्तेदार के यहां गए हुए थे कि तभी वो आ गया. यूं एकांत में पहली बार उसके साथ… तभी उसने एक किताब मांगी और मैं कमरे में चली आई. वो भी आकर मेरे पीछे ही खड़ा हो गया. हम दोनों के दिल इतनी ज़ोरों से धड़क रहे थे कि हमें एक-दूसरे की धड़कनें सुनाई दे रही थीं. तभी उसने मेरा दुपट्टा उठाया और मेरे सिर पर ओढ़ा दिया. मैंने सामने आईने में देखा, वो मुस्कुरा रहा था, उसकी आंखों में जैसे सारी क़ायनात का प्यार उमड़ आया था. कितना पवित्र, पावन प्रणय निवेदन था. बिना बोले भी सब कुछ तो कह दिया था. जैसे संपूर्ण अधिकारों के साथ मुझे अपने जीवन में शामिल कर लिया था. मौन घोषणा कर दी थी ईश्‍वर के सामने कि मैं स़िर्फ उसकी हूं. मैं देर तक आईने में हम दोनों की छवि निहारती प्रार्थना करती रही कि यह बंधन सात जन्मों तक अटूट रहे. आईना हम दोनों के प्रणय और युगल छवि का मौन साक्षी बन गया.

किंतु 35 बरस पहले की रूढ़ियों ने हमारे प्यार को विवाह में परिणत नहीं होने दिया और टूटा मन लेकर वह शहर छोड़कर ऐसा गया कि फिर कभी नहीं मिला.

जब विवाह हुआ, तो पिताजी से बस यह अलमारी ही मांग ली थी. आज भी पहले प्यार की वह मधुर छवि इस आईने में ज्यों की त्यों मुस्कुराती हुई दिखाई देती है.

– डॉ. विनीता राहुरीकर

यह भी पढ़ें: पहला अफेयर: अब लौट आओ…