Male infertility

मां बनना हर औरत का सपना होता है, लेकिन आजकल कई महिलाएं मां नहीं बन पा रही हैं. महिलाओं के मां न बन पाने के कारण जानने के लिए हमने बात की इंटीग्रेटिव न्यूट्रीशनिस्ट एंड हेल्थ कोच नेहा रंगलानी से, उन्होंने हमें इसकी वजहें और उपाय कुछ इस तरह बताए:

सबसे पहले अपने शरीर को समझें
इंटीग्रेटिव न्यूट्रीशनिस्ट एंड हेल्थ कोच नेहा रंगलानी के अनुसार, मां बनने की प्लानिंग करने से पहले महिलाओं को अपने शरीर को समझना चाहिए. हमारी बॉडी बहुत स्मार्ट है, वो जानती है कि शरीर के लिए कब और क्या ज़रूरी है. जब कोई महिला मानसिक या शारीरिक स्ट्रेस में होती है, तो उसका शरीर उसे मां नहीं बनने देता, क्योंकि शरीर जानता है कि अभी वो महिला मां बनने के लिए तैयार नहीं है. ये स्ट्रेस शारीरिक, मानसिक या भावनात्मक, किसी भी तरह का हो सकता है. इस स्ट्रेस के कारण महिला के शरीर में हार्मोनल बदलाव होने लगते हैं, जिसके कारण वो मां नहीं बन पाती.

लाइफस्टाइल है ज़िम्मेदार
महिलाओं के मां न बन पाने के लिए काफ़ी हद तक उनकी लाइफस्टाइल ज़िम्मेदार है. जंक फूड का अधिक सेवन, ओवर ईटिंग, मोटापा, ज़रूरत से ज़्यादा डायटिंग, अचानक वज़न बढ़ना या बहुत ज़्यादा वज़न घटना, एक्सरसाइज़ बिल्कुल न करना या ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करना भी मां बनने में बाधक होते हैं. कई महिलाएं अपने खानपान पर बिल्कुल ध्यान नहीं देतीं, फिर अनाप-शनाप खाकर जब मोटापा बढ़ जाता है, तो क्रैश डायटिंग करना शुरू कर देती हैं. इसी तरह कई महिलाएं या तो बिल्कुल भी एक्सरसाइज़ नहीं करतीं या फिर ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करती हैं. इन सबके चलते शरीर में इतनी तेज़ी हार्मोनल बदलाव होता है कि शरीर का हार्मोनल बैलेंस ही बिगड़ जाता है, इसीलिए मां बनने का मन बनाने से पहले महिलाओं को अपनी लाइफस्टाइल पर भी ध्यान देना चाहिए.

बढ़ रही है पीसीओएस/पीसीओडी की समस्या
आजकल लड़कियों में बहुत कम उम्र में ही पीसीओएस की समस्या देखी जा रही है. इसका कारण उनका ग़लत खानपान और स्ट्रेस है. पीसीओएस/पीसीओडी के कारण महिलाओं में ओवेल्यूशन नहीं होता, उनके शरीर में एग नहीं बन पाते, उनके पीरियड्स रेग्युलर नहीं होते, जिसके कारण वो मां नहीं बन पाती. पीसीओएस/पीसीओडी की समस्या से बचने के लिए महिलाओं को अपने खानपान और लाइफस्टाइल पर ख़ास ध्यान देना चाहिए.

स्ट्रेस से बचना है ज़रूरी
यदि कोई महिला बहुत ज़्यादा स्ट्रेस में है, तो इससे उसके मां बनने में दिक्कत आ सकती है. ये स्ट्रेस किसी भी तरह का हो सकता है, जैसे- यदि आपका जॉब बहुत स्ट्रेसफुल है, तो आपको मां बनने में तकलीफ़ हो सकती है. यदि पति-पत्नी के रिश्ते में तनाव चल रहा है, घर में तनाव चल रहा है, तो इससे भी आपकी फर्टिलिटी प्रभावित हो सकती है. कोई बड़ी बीमारी, दवाइयों का अधिक सेवन, भावनात्मक आघात, फाइनांशियल लॉस जैसे कई कारण, जिनसे आपका स्ट्रेस लेवल और हार्मोनल बैलेंस बिगड़ जाता है, उनके कारण भी फर्टिलिटी में कमी आती है.

सीखें स्ट्रेस से बचने के ट्रिक्स
आजकल लोग बात-बात पर तनावग्रस्त तो हो जाते हैं, लेकिन स्ट्रेस को रिलीज़ करने के लिए कोई प्रयास नहीं करते, ऐसे में तनाव उनके स्वास्थ्य को प्रभावित करने लगता है. यदि आप मां नहीं बन पा रही हैं, तो आपको सबसे पहले अपनी लाइफस्टाइल में सुधार लाना होगा. तनाव से बचने, फिट और हेल्दी रहने के लिए नियमित रूप से योग, मेडिटेशन, एक्सरसाइज़ करना होगा, हेल्दी डायट लेनी होगी, पूरी नींद लेनी होगी. फिर जब आपके शरीर को इस बात की तसल्ली हो जाएगी कि अब आप मां बनने के लिए तैयार हैं, तो आप आसानी से कंसीव कर लेंगी.

सीखें ख़ुद से प्यार करना
कई महिलाओं में कॉन्फिडेंस की इतनी कमी होती है कि वो हर किसी से अपनी तुलना करने लगती हैं और ख़ुद को उससे कमतर समझने लगती हैं. ऐसी महिलाएं ख़ुद को स्वीकार नहीं कर पातीं और आगे चलकर अकेलेपन की शिकार हो जाती हैं. ऐसी महिलाओं को भी मां बनने में दिक्कत होती है इसलिए सबसे पहले ख़ुद से प्यार करना सीखें. इससे आपका शरीर भी पॉज़िटिव रिस्पॉन्ड करेगा और आप मां बन सकेंगी.

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महिलाओं के मां न बन पाने की आम वजहें
महिलाओं के मां न बन पाने की वैसे तो कई वजहें हैं, लेकिन आमतौर पर महिलाओं में बढ़ती इंफर्टिलिटी की ये वजहें हैं-

  • मोटापा सौ रोगों का कारण होता है और इंफर्टिलिटी इनमें से एक है. यदि किसी महिला का वज़न ज़रूरत से ज़्यादा है, तो उसे मां बनने में दिक्कत आ सकती है. ऐसे में वज़न घटाकर गर्भधारण किया जा सकता है.
  • अनियमित पीरियड्स के कारण महिलाएं मां नहीं बन पातीं. अनियमित पीरियड्स की कई वजहें हो सकती हैं, जैसे- पीसीओएस/पीसीओडी, ग़लत खानपान, अनियमित लाइफस्टाइल आदि.
  • पेल्विक ट्यूबरक्लोरसिस के कारण कई महिलाएं मां नहीं बन पातीं. पेल्विक ट्यूबरक्लोरसिस होने पर सबसे पहले इसका इलाज करवाना ज़रूरी है.
  • गर्भाशय में गांठ यानी फाइब्रॉयड होने के कारण कई महिलाएं गर्भधारण नहीं कर पातीं. ऐसी स्थिति में कई बार सर्जरी करवाने की भी ज़रूरत पड़ती है.
  • गर्भाशय संबंधी समस्याएं जैसे- गर्भाशय में गांठ, कैंसर, टीबी, छोटा गर्भाशय आदि के कारण भी महिलाएं मां नहीं बन पातीं.
  • फैलोपियन ट्यूब का बंद होना भी गर्भ न ठहरने की एक वजह हो सकता है, इसलिए इसकी जांच भी ज़रूरी है.
  • ल्यूकोरिया, डायबीटीज, अनीमिया आदि के कारण भी महिलाओं में इंफर्टिलिटी की समस्या होती है.
  • कई महिलाओं को यौन संबंध बनाते समय दर्द होता है. इस दर्द की कई वजहें हो सकती हैं, जैसे- सेक्स को लेकर डर, पति-पत्नी में बॉन्डिंग कम होना, फोरप्ले की कमी आदि. इन सबके चलते महिलाएं सेक्स लाइफ को एंजॉय नहीं कर पातीं और उनके मां बनने में दिक्कत आती है.
  • डिप्रेशन, अनिद्रा, अकेलेपन की शिकार महिलाओं को इंफर्टिलिटी की समस्या हो सकती है. ऐसी स्थिति में साइकोलॉजिस्ट से संपर्क किया जा सकता है. उचित काउंसलिंग से कई बार समस्या सुलझ जाती है और कई बार ट्रीटमेंट की भी ज़रूरत पड़ती है.

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मां बनने की प्लानिंग करने से पहले इन बातों पर ध्यान दें-

  • अपनी लाइफस्टाइल पर ख़ास ध्यान दें. स्ट्रेस से बचने की कोशिश करें. जंक फूड से परहेज करें.
  • बहुत जल्दी मोटे या पतले होने की कोशिश न करें, इससे मां बनने में परेशानी हो सकती है.
  • सिगरेट-शराब से दूर रहें.
  • देर रात तक जागना, पूरी नींद न लेना मां बनने में बाधक हो सकता है, इसलिए जल्दी सोने और पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करें.
  • मिलावट वाले खाद्य पदार्थों के सेवन से मां बनने में दिक्कत आ सकती है इसलिए अपने भोजन पर ख़ास ध्यान दें.
  • हरी सब्ज़ियां, ताज़े फल, फ्रूट जूस, ड्राइफ्रूट्स, स्प्राउट्स, सलाद आदि का सेवन फर्टिलिटी के फ़ायदेमंद है, इनका सेवन नियमित रूप से करें.
  • यदि आपको कारण समझ नहीं आ रहा है, तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें, ज़रूरत हो तो काउंसलर की मदद लें.
    – कमला बडोनी

शारीरिक रूप से स्वस्थ होने के बावजूद कई महिलाएं कंसीव नहीं कर पातीं,  क्योंकि उनके पार्टनर इंफर्टिलिटी (Infertility) के शिकार होते हैं. आख़िर क्यों होती है इंफर्टिलिटी की समस्या (Infertility Problems)? आइए, जानते है इसके कारण, लक्षण और उपाय.शारीरिक रूप से स्वस्थ होने के बावजूद कई महिलाएं कंसीव नहीं कर पातीं,  क्योंकि उनके पार्टनर इंफर्टिलिटी के शिकार होते हैं. आख़िर क्यों होती है इंफर्टिलिटी की समस्या? आइए, जानते है इसके कारण, लक्षण और उपाय.

Male Infertility Causes
पहले के जमाने में बच्चा न होने का पूरा दोष महिला के सिर पर थोप दिया जाता था. धीरे-धीरे इस बारे में लोगों की जागरूकता बढ़ी. इस क्षेत्र में हुए शोधों से सिद्ध हुआ है कि इंफर्टिलिटी की समस्या से जूझ रहे तीन में से एक कपल में समस्या पुरुष पार्टनर के कारण होती है.

इंफर्टिलिटी के प्रकार
Male Infertility

1. वीर्य की जांच करके स्पर्म्स (शुक्राणुओं) की संख्या देखी जाती है. इसकी नॉर्मल रेंज 20 से 45 होती है. यदि काउंट 15 से नीचे जाता है तो नैसर्गिक विधि से गर्भ नहीं ठहर सकता. ऐसी स्थिति में इंट्रा यूटेराइन इनसेमिनेशन कराना पड़ता है.
2. कई बार वीर्य की जांच में शुक्राणुओं की संख्या तो ठीक होती है, पर उनमें गतिशीलता नहीं होती. यह समस्या दवाइयों से सुलझाई जाती है.
3. कई बार वीर्य की जांच में शुक्राणुओं की संख्या और गतिशीलता दोनों कम होते हैं. यह समस्या दवाइयों से ठीक हो जाती है.
4. रिपोर्ट में शुक्राणुओं की अनुपस्थिति मरीज को निराशा की गर्त में पहुंचा देती है. हां, आधुनिक टेक्नॉलाजी से शुक्राणुओं के न होने के कारणों का पता लगाकर इसका इलाज किया जा सकता है.
5. कई बार शुक्राणु बनते तो हैं, परंतु अंदरूनी अवरोध से बाहर नहीं आ पाते. ऐसे में एक छोटे-से ऑपरेशन से यह समस्या दूर हो जाती है.

इंफर्टिलिटी के कारण
लाइफस्टाइलः इंफर्टिलिटी का प्रमुख कारण आजकल की बदलती लाइफस्टाइल है. स्पर्म बनने के लिए विशिष्ट तापमान और वातावरण की ज़रूरत होती है. आजकल काम के घंटे लंबे होने के साथ शिफ्ट ड्यूटी होती है. नींद का समय, खाना खाने का समय सब कुछ डिस्टर्ब हो जाता है. तनाव और थकान इतनी हो जाती है कि सेक्स की इच्छा ही नहीं रह जाती. इन सारी बातों का स्पर्म काउंट पर असर पड़ता है.

हार्मोन्सः स्पर्म्स बनना एक न्यूरो हार्मोनल प्रोसेस है, जिसे दिमाग द्वारा कंट्रोल किया जाता है. स्ट्रेस और डिप्रेशन से दिमाग पर असर पड़ता है, जिससे स्पर्म बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है.
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डायबिटीज़ः डायबिटीज़ से अनेक समस्याएं हो सकती हैं, जैसे-सेक्स की इच्छा में कमी, इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (लिंग की उत्तेजना में कमी) आदि. डायबिटीज़ से स्पर्म की गतिशीलता (मोटेलिटी) पर भी असर पड़ता है. कई बार बीमारियों के लिए ली जाने वाली दवाइयां भी स्पर्म प्रोडक्शन को प्रभावित करती हैं.

शारीरिक संबंधों की तीव्रताः शारीरिक संबंधों की तीव्रता भी स्पर्म प्रोडक्शन पर असर डालती है. रोज बनने वाले शारीरिक संबंध स्पर्म के कॉन्सन्ट्रेशन को कम कर देते हैं. कई बार इरेक्टाइल फंक्शन और प्रीमिच्योर इजाकुलेशन की समस्याओं से भी स्पर्म काउंट प्रभावित होता है.

एक से ज़्यादा पार्टनर का होनाः संक्रमण (इन्फेक्शन) से भी स्पर्म काउंट और वीर्य स्खलन (इजाकुलेशन) के प्रोसेस पर असर पड़ता है. एक से ज्यादा पार्टनर होने पर एस. टी. डी. (सेक्सुअली ट्रांसमीटेड डिसीज़), टी.बी. और फर्टिलिटी प्रभावित होने का खतरा होता है.

न्यूट्रीएंट्स की कमीः विटामिन सी, सेलेनियम और ज़िंक या फोलेट की कमी भी फर्टिलिटी को प्रभावित करती है.
अन्य कारण
. बीड़ी-सिगरेट पीना, तंबाकू खाना और शराब का ज़्यादा सेवन धीरे-धीरे इंफर्टिलिटी की ओर अग्रसर करता है.
. गरम वातावरण जैसे फैक्ट्री या चिमनी के पास काम करनेवालों में यह समस्या ज़्यादा पाई जाती है.
. लिमिट से ज़्यादा साइकिल चलाना, कार, टैक्सी, ऑटोरिक्शा चलाना या अन्य ऐसे काम जिससे टेस्टीस का घर्षण होता है,  से इंफर्टिलिटी की प्रॉब्लम आती है.
लक्षण
1. सेक्सुअल फंक्शन, जैसे- सेक्स ड्राइव कम होना, इरेक्टाइल डिसफंक्शन जैसी समस्या का होना.
2. टेस्टिकल एरिया में सूजन, गांठ या दर्द होना.श्र चेहरे या शरीर पर बालों का कम होना आदि.
3. चेहरे या शरीर पर बालों का कम होना आदि.

इन बातों का रखें ध्यानइन बातों का रखें ध्यान
. टेस्टीस का तापमान हमेशा ज़्यादा होता है इसलिए ज़्यादा गर्मी या गर्म स्थान पर काम करने से तापमान और अधिक बढ़ जाता है, जो नुकसानदायक होता है. अतः अधिक तापमान से आने के थोड़ी देर बाद ठंडे पानी से नहाएं. अगर ज़्यादा गर्मी महसूस हो तो टेस्टीस का तापमान कम करने के लिए उस पर बर्फ लगाएं.

. नियमित रूप से एक्सरसाइज करें. अतिरिक्त मोटापा घटाएं अन्यथा टेस्टोस्टेरॉन हार्मोन की अनियमितताएं हो सकती हैं. ध्यान रहे, हैवी शारीरिक व्यायाम न हो.  इसका भी फर्टिलिटी पर नकारात्मक असर पड़ता है.
. हमेशा सूती अंडर गार्मेंट्स पहनें. इस बात का भी ध्यान रखें कि वो बहुत टाइट फिटिंग के न हों, ढीले व आरामदायक हों, जिससे हवा की आवाजाही हो सके.
. पौष्टिक खाना खाएं, जो फैट और ज़्यादा प्रोटीनयुक्त हो. हरी सब्जियां, साबूत अनाज और फल खाएं.
. वेजाइनल टेबलेट्स और लुब्रिकेंट्स का ज़्यादा इस्तेमाल न करें.
. लैपटॉप को ज़्यादा देर तक पैरों पर लेकर न बैठें और न ही सेलफोन को फैंट की जेब में रखें. टेस्टीकल्स को ज़्यादा गर्मी से बचाएं.
. तनाव से बचने के लिए नियमित रूप से योग व मेडिटेशन करें.
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