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हर किसी के पास होने चाहिए ये 6 होम मैनेजमेंट ऐप्स (6 Must Have Home Management Apps)

Home Management Apps
घर को मैनेज करना आसान काम नहीं है, लेकिन अब इस काम को आसान और तनावरहित बना दिया है, आपके स्मार्टफोन ने. बस ज़रूरत है तो ऐसे ऐप्स को डाउनलोड करने की, जिनकी सहायता से आप अपने घर की क्लीनिंग, मेंटेनेंस, गार्डनिंग सर्विस से लेकर बजट बनाने और ग्रॉसरी शॉपिंग तक के सारे काम आसानी से कर सकते हैं.

Home Management Apps

आर ग्रॉसरीज़ (Our Groceries)

अब आपको न तो किराने के सामान को याद रखने की ज़रूरत है और न ही किराने के सामान की लिस्ट बनाने के लिए पेन व डायरी ढूंढ़ने की, क्योंकि आपके ग्रॉसरी शॉपिंग के काम को आसान बना दिया है आपके स्मार्टफोन ने. आप अपने स्मार्टफोन में ‘आर ग्रॉसरीज़’ मोबाइल ऐप को डाउनलोड करके अपनी ग्रॉसरी शॉपिंग के काम को आसान कर सकते हैं. इस फ्री ऐप को डाउनलोड करने के बाद आपको किराने का सामान याद रखने की आवश्यकता नहीं है. ग्रॉसरी शॉपिंग के लिए यह बेस्ट ऐप है. इस ऐप को डाउनलोड करने के बाद आपको किरानेे के जिस सामान की आवश्यकता है, उसकी सूची बनाकर सामान ऑर्डर कर सकते हैं. फिर अगले महीने इस सूची में बदलाव करके आप दोबारा सामान ऑर्डर कर सकते हैं.

कुछ अन्य ग्रॉसरी ऐप्स इस प्रकार से हैं

1. ज़ोपनॉउ (ZopNow)

2. आरामशॉप (AaramShop)

3. गोदरेज नेचर्स बास्केट

(Godrej Nature’s Basket)

4. पेपरटैप (PepperTap)

5. बिगबास्केट (BigBasket)

6. लोकल बनिया (LocalBanya)

मनी मैनेजर ऐप- वॉलनट (Walnut)

यह बेस्ट मनी मैनेजर ऐप है, जो आपके मासिक ख़र्चों को स्वचालित (ऑटोमैटिकली) और सुरक्षित रूप से ट्रैक करता है. इस ऐप को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि आपके ख़र्चे बजट के अंदर हों, बिलों का भुगतान समय पर हो और बचत अधिक से अधिक हो. इस ऐप के ज़रिए आप अपने बैंक अकाउंट से डेबिट हुई रक़म, कैब का भुगतान, हर महीने राशन,

बिजलीपानी, शॉपिंग आदि बिलों के भुगतान के बारे में जान सकते हैं. इस ऐप में जाकर आप कैटेगरी के अनुसार ख़र्चों को बांट सकते हैं, जैसेएंटरटेनमेंट, ग्रॉसरी, हेल्थ, इंवेस्टमेंट आदि. यह ऐप आपको पेंडिंग बिल्स की याद दिलाता है. किसी को ट्रांसफर की गई रक़म और किसी से रिसीव की हुई राशि के बारे में भी जानकारी देता है. दूसरे शब्दों में कहें तो वॉलनट ऐप का उद्देश्य ये बताना है कि आपने अपना पैसा किस तरह से ख़र्च किया है और कितनी अच्छी तरह से आप बचत कर सकते हैं. दिलचस्प बात यह है कि अगर आप फ़िज़ूलख़र्च क़िस्म के हैं, तो यह ऐप आपके लिए बहुत फ़ायदेमंद है.

इसके अलावा और भी मनी मैनेजर ऐप्स हैं:

– मनी व्यू मनी मैनेजर (Money View Money Manager)

क्विकली डेली एक्सपेन्स मैनेजर (Qykly Daily Expense Manager

ईटी मनी (ET Money)

एम ट्रैकर (mTrakr)

टुडूस्टि (Todoist)

अगर आपको काम भूलने की आदत है, तो यह ऐप आपके लिए बहुत ही फ़ायदेमंद है. इस ऐप की ख़ास बात यह है कि अनगिनत लोग प्रोफेशनल कामों के लिए इस ऐप का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अब घर के ज़रूरी कामों के लिए भी यह बहुत उपयोगी साबित हो रहा है. इस ऐप में आप अपने सभी महत्वपूर्ण कामों, जैसेग्रॉसरी शॉपिंग, मूवी के टिकट बुकिंग, डॉक्टर के अपॉइंटमेंट्स, बच्चों को एक्टिविटी क्लास में ले जाना जैसे कामों को जोड़ सकते हैं और उनको सिनक्रोनाइज़ भी कर सकते हैं. यह आपकी टुडूलिस्ट को अच्छी तरह से ऑर्गनाइज़ करता है. इस ऐप के द्वारा आप अगले 7 दिन की टुडूलिस्ट एडवांस में बना सकते हैं. यूज़र्स इस ऐप में

अलगअलग प्रोजेक्ट/टास्क के तहत पर्सनल, शॉपिंग, वर्क और अन्य टास्क दर्ज़ कर सकते हैं. आप इस ऐप को अपने फैमिली के हर सदस्य के फोन पर डाउनलोड कर सकते हैं.

एवरनोट (Evernote)

एवरनोट ऐप के ज़रिए आप अपने पर्सनल और प्रोफेशनल प्रोजेक्ट्स को अच्छी तरह से ऑर्गनाइज़ कर सकते हैं. यह एक ऑर्गनाइज़र और प्लानर नोटबुक ऐप है, जिसमें आप अपनी टुडूलिस्ट बना सकते हैं, इमेजेस ऐड कर सकते हैं, कैमरे से डॉक्युमेंट्स को स्कैन करके सेव कर सकते हैं. इस ऐप में आप अपने नोट के कंटेंट को एडिट और शेयर भी कर सकते हैं. इस ऐप के ज़रिए ऐसी रेसिपी, जो आप बनाना चाहते हैं और ऐसे फर्नीचर जो भविष्य में ख़रीदना चाहते हैं, उन्हें आप सेव कर सकते हैं. इनके अलावा आप ऑडियो रिकॉर्डिग्स को भी सेव कर सकते हैं.

कोज़ी फैमिली ऑर्गनाइज़र (Cozi Family Organizer)

अगर आपने स्मार्टफोन पर इस ऐप को डाउनलोड किया है, तो फिर आपको कैलेंडर देखने की ज़रूरत नहीं है. आपको अपने फैमिली मेम्बर्स को भी यह बताने की ज़रूरत नहीं है कि वे किसी विशेष दिन, जैसेबर्थडे, एनीवर्सरी पर क्या करनेवाले हैं. बस ज़रूरत है, तो इस ऐप को डाउनलोड करने की. और फिर घर के सभी सदस्यों को इसमें ऐड कर दें. उसके बाद प्रत्येक सदस्य को अपना शेड्यूल देखने के लिए अपडेट करें. इसी तरह से जब वे अपना शेड्यूल अपडेट करेंगे, तो आप भी देख सकते हैं. इस तरह से यह ऐप फैमिली के बीच कॉर्डिनेशन को आसान बनाता है. इस ऐप को आप गूगल, ऐप्पल आईकेल और आउटलुक कैलेंडर को ‘कोज़ी’ करके डाउनलोड कर सकते हैं.

चीप होम सर्विस ऐप (CHEEP)

ऑफिस के साथ घर की दोहरी ज़िम्मेदारी एक साथ निभाना महिलाओं के लिए बेहद मुश्किल काम हैउनके इस मुश्किल काम को आसान बनाने में मदद की है चीप होम सर्विस ऐप ने. होम सर्विस ऐप के ज़रिए आप 24*7 अपने घर की क्लीनिंग, पेस्ट कंट्रोल, रेफ्रिजेरेटर रिपेयर, लॉन्डरी सर्विस, एसी इंस्टॉलेशन, हाउसमेड सर्विस, गार्डनिंग सर्विस, ड्राइवर, कारपेंटर, प्लबिंग, इलेक्ट्रिशियन, होम ट्यूटर, मेकअप आर्टिस्ट, पार्टी प्लानर, वास्तु कंसल्टेंट और अन्य बहुत सारी सेवाओं के लिए मदद ले सकते हैं. ये सभी सेवाएं विश्‍वसनीय प्रोफेशनल्स द्वारा दी जाती हैं. इन सेवाओं के लिए आप कॉल और चैट भी कर सकते हैं. यहां तक कि प्रोफेशनल को हायर करने के लिए नेगोशिएट भी कर सकते हैं. प्रोफेशनल्स द्वारा काम पूरा न किए जाने की स्थिति में रिफंड भी मिलता है.

देवांश शर्मा

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कैसे बने इवेंट मैनेजर? (Career In Event Management)

Career In Event Management

Career In Event Management

इवेंट चाहे जो हो, लेकिन ग्लैमर, आकर्षण और स्टाइल आज हर इवेंट की पहली मांग है. घर का कोई फंक्शन हो या ऑफिस की पार्टी, शादी का मौसम हो या गेट-टुगेदर, हर इवेंट को सही तरह से ऑर्गेनाइज़ करने का काम करता है इवेंट मैनेजर. आपको भी अगर इस तरह के प्रोग्राम को हैंडल करना अच्छा लगता है, तो आप भी बनाइए अपने इस शौक़ को अपना करियर और बनिए इवेंट मैनेजर. कैसे? आइए जानते हैं.

क्या करते हैं इवेंट मैनेजर?
इवेंट मैनेजर प्रोफेशनल, पर्सनल और फोकस्ड इवेंट्स ओर्गेनाइज़ करते हैं. जिसमें मैरिज सेलिब्रेशन, थीम पार्टीज़, कॉरपोरेट मिटिंग्स, सेमिनार, एग्ज़ीबिशन, फैशन और सेलिब्रिटी शो, म्यूजिकल कॉन्सर्ट, प्रॉडक्ट् लॉन्चिंग, फिल्म अवार्ड फंक्शन आदि शामिल हैं.

शैक्षणिक योग्यताएं
इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए बारहवीं पास होना बहुत ज़रूरी है. बारहवीं के बाद आप इस क्षेत्र में आगे की पढ़ाई कर सकते हैं.

क्या हैं कोर्सेस?
– डिप्लोमा इन इवेंट मैनेजमेंट,
– पोस्ट ग्रेज्युएट डिप्लोमा इन इवेंट मैनेजमेंट,
– पोस्ट ग्रेज्युएट डिप्लोमा इन इवेंट मैनेजमेंट एंड पब्लिक रिलेशन्स.

व्यक्तिगत विशेषताएं
अच्छी कल्पना शक्ति, बेहतर बजटिंग, नॉलेज, ़ज़्यादा समय तक काम करने की क्षमता, परफेक्ट प्लानिंग, गुड कम्युनिकेशन स्किल, प्रेजेंटेशन स्किल, लीडरशीप क्वलिटी, गुड पब्लिक रिलेशनशीप, मार्केटिंग और बिजनेस क्षेत्र की कुशल जानकारी होना बहुत ज़रूरी है.

प्रमुख संस्थान
* अमेठी इंस्टिट्यूट ऑफ़ इवेंट मैनेजमेंट, न्यू
दिल्ली.
* इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ इवेंट मैनेजमेंट, मुंबई.
* इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट, न्यू दिल्ली.
* इंटरनेशनल सेंटर फ़ॉर इंवेट मैनेजमेंट, न्यू
दिल्ली.
* नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ इवेंट मैनेजमेंट, मुंबई.
* एकैडमी ऑफ एनिमेशन आर्ट एंड
टेक्नोलॉजी, कोलकाता.
* इंस्टिट्यूट ऑफ़ एज्युकेशनल लीडरशीप,
उत्तरांचल, देहरादून.
* अजमेर इंस्टिट्यूट ऑफ़ मीडिया स्टडीज़,
बरेली.
* एकैडमी ऑफ़ ब्रॉडकास्टिंग, चंडीगढ़.

जॉब प्रॉसपेक्ट्स
इस प्रोफेशन में परफेक्शन की डिमांड होती है.
* इवेंट मैनेजमेंट कंपनी में आप एक इवेंट मैनेजर या कंसल्टेंट के तौर पर काम कर सकते हैं.
* टेलीविजन शोज़ और एड जगत से जुड़कर उनके प्रॉडक्ट के लिए काम कर सकते हैं.
* अपने अनुभव के मुताबिक आप अपनी ख़ुद की इवेंट मैनेजमेंट कंपनी भी शुरू कर सकते हैं. जिसके लिए जरूरी है.
– सेलिंग स्किल यानी नए क्लाइंट्स को हैंडल करने की क्षमता.
– इवेंट डिज़ाइनिंग की क्रिएटिव स्किल.
– एकाउंटिंग नॉलेज.
– लॉजिस्टिक कंट्रोल करने की कला.
– रिस्क मैनेजमेंट स्किल.

इस क्षेत्र का भविष्य
दिन-ब-दिन हर क्षेत्र और इवेंट से जुड़ता ग्लैमर भविष्य में इवेंट मैनेजमेंट कंपनी की मांग को बड़ाएंगे.

सैलरी
इस क्षेत्र में रेग्युलर मंथली सैलरी के अलावा प्रति इवेंट के हिसाब से भी सैलरी दी जाती है. मैनेजमेंट कोर्स कंपलीट करने के बाद फ्रेशर्स की इंकम 500 से 1,000 रुपए प्रतिदिन होती है. अपने अनुभव और क्रिएटिविटी से आप 8,000 से 10,000 रुपए प्रति इवेंट कमा सकते हैं. इस क्षेत्र में ़ज़्यादा अनुभव से 50,000 से 1 लाख रुपए प्रति इवेंट की इंकम भी होती है.

बुढ़ापे में कैसे करें मनी मैनेजमेंट? (how to do money management in old days?)

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रिटायरमेंट के बाद अपनी देखभाल के लिए बच्चों पर आश्रित रहने से बेहतर है कि आप पहले से ही रियाटरमेंट की प्लानिंग कर लें यानी कुछ इन्वेस्टमेंट कर लें, लेकिन पैसे बचाना ही काफ़ी नहीं है. रिटायरमेंट के बाद ख़ुशहाल ज़िदंगी के लिए उसे सही तरह से मैनेज करना भी ज़रूरी है. बढ़ती उम्र में कैसे करें मनी मैनेजमेंट?

सीमित हों ज़रूरतें
युवावस्था में व्यक्ति की ज़रूरतें व इच्छाएं बहुत अधिक होती हैं और उन्हें पूरा करने के लिए वो दिन-रात बहुत मेहनत भी करता है, लेकिन वृद्धावस्था में बहुत मेहनत करना संभव नहीं होता, इसलिए बेहतर होगा कि आप अपनी ज़रूरतों को सीमित कर लें. ऐसा करने से आपको मेहनत भी कम करनी पड़ेगी और पैसे भी कम ख़र्च होंगे, जैसे- आपके पास यदि एक बड़ा घर है, तो उसे मेंटेन करने के लिए समय, पैसा व मेहनत तीनों ही ख़र्च होते हैं. ऐसे में बेहतर होगा कि आप उसे बेचकर ज़रूरत के मुताबिक़ एक छोटा घर ख़रीद लें और बचे हुए पैसों को किसी सुरक्षित जगह इन्वेस्ट कर दें. इससे बुढ़ापे में भी आपको किसी के सामने हाथ फैलाने की ज़रूरत   नहीं पड़ेगी.

प्लानिंग भी है ज़रूरी
पैसे को सही तरह से मैनेज करने के लिए प्लानिंग ज़रूरी है. मसलन, आप अपनी इनकम के मुताबिक़ पैसे को अलग-अलग हिस्सों में बांट दें, जैसे- एक हिस्सा रोज़मर्रा के ख़र्चं, एक हिस्सा सेविंग, एक हिस्सा मेडिकल एक्सपेंस और एक आकस्मिक ख़र्च के लिए. इस तरह अलग-अलग ख़र्च के लिए अमाउंट तय कर लेने पर बजट बिगड़ेगा नहीं. चूंकि बढ़ती उम्र में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों पर ज़्यादा पैसे ख़र्च होते हैं, इसलिए अच्छा होगा कि आप पहले ही कोई हेल्थ इंश्योरेंस आदि     ले लें.

ढूंढे इनकम के तरीक़े 
आमतौर पर वृद्धावस्था में लोग स़िर्फ पेंशन के सहारे ही अपना ख़र्च चलाने की कोशिश करते हैं, लेकिन बढ़ती महंगाई को देखते हुए ये बहुत मुश्किल हो गया है, इसलिए अपनी ज़रूरतें सीमित करने के साथ ही यदि संभव हो, तो इनकम का कोई और ज़रिया तलाशें. आपका तरीक़ा ऐसा होना चाहिए, जिसमें आपको बहुत अधिक शारीरिक श्रम न करना पड़े और न ही ज़्यादा परेशानी हो. बेहतर होगा कि आप अपनी हॉबी को रीक्रिएट करके उसे ही आमदनी का ज़रिया बनाएं, जैस- आपको यदि अच्छा खाना बनाना आता है, योगा या एक्सरसाइज़ में महारत हासिल है, कोई वाद्य यंत्र अच्छा बजाते हैं या फिर आपको कई भाषाओं का ज्ञान है, तो आप इसकी क्लासेस घर में ही खोल सकते हैं. इससे आपका समय भी अच्छा बीतेगा और अपनी हॉबी को बुढ़ापे में भी जारी रखने से आपको ख़ुशी व सुकून का एहसास होगा. साथ ही आय का एक अच्छा स्रोत मिल जाएगा.

समझदारी से करें ख़र्च
इस उम्र में बहुत ज़रूरी है कि आप सोच-समझकर ख़र्च करें. पैसे स़िर्फ ज़रूरत के लिए ख़र्च करें, दिखावे या लग्ज़री के लिए नहीं. यदि आपको लगता है कि आप बहुत ख़र्चीले हैं और माह के अंत तक कुछ बचत नहीं कर पाते, तो महीने के शुरू में कुछ रकम की बचत कर लें. इससे आप काफ़ी हद तक फिज़ूलख़र्च से बच जाएंगे. यदि आप टेक्नोसेवी हैं, तो कुछ ऐप्स की मदद से भी अपने ग़ैर ज़रूरी ख़र्च पर लगाम लगा सकते हैं. र्चींशश्रेशिी, ोपशू र्ींळशु, सेेव र्लीवसशीं आदि कुछ ऐसे यूजफुल ऐप्स हैं, जो आपकी इस काम में मदद कर सकते हैं.

करें छोटी-छोटी सेविंग
आपने वह कहावत तो सुनी ही होगी कि बूंद-बूंद से सागर बनता है. ख़ासतौर से वृद्ध लोगों से बेहतर सेविंग की क़ीमत कोई नहीं समझ सकता. आप भी उम्र के इस दौर में छोटी-छोटी सेविंग करने की कोशिश करें. मसलन, घर के काम ख़ुद करने से नौकर का ख़र्च कम हो जाएगा, साथ ही आपकी सेहत भी बरकरार रहेगी. इसके अतिरिक्त ग्रॉसरी का सामान इकट्ठा लाना या सेल में शॉपिंग करने से बहुत फ़ायदा होता है. इन सबके अलावा बहुत ज़रूरी है कि आप युवावस्था में ही कुछ सेविंग करनी शुरू कर दें. यदि आप अपनी आय का एक छोटा-सा हिस्सा सेविंग के रूप में रखेंगे, तो वृद्धावस्था में आपके पास अच्छी ख़ासी रकम होगी, जिससे आप आर्थिक परेशानी से बच सकते हैं.

मेंटेंन करें डायरी
भले ही आप कितनी भी समझदारी से ख़र्च करें, लेकिन फिर भी माह के अंत तक ख़र्च का हिसाब नहीं मिल पाता. ऐसे में बेहतर होगा कि आप एक डायरी मेंटेंन करें. इससे आपको अपने ख़र्च के बारे में तो पता चलेगा ही, साथ ही आप फिज़ूलख़र्च से भी बच जाएंगे.

इन्वेस्टमेंट पर दें ध्यान
उम्र के इस पड़ाव पर आपका इन्वेस्टमेंट ऐसा होना चाहिए जिसमें रिस्क कम और रिटर्न ज़्यादा हो. आप अपनी सेविंग को शेयर मार्केट या म्युचुअल फंड में इन्वेस्ट करने की बजाय बैंक में पीएफ में डाल सकते हैं या पोस्ट ऑफिस में कोई सेविंग स्कीम ले सकते हैं. यहां इन्वेस्ट करने पर जोखिम नहीं रहता. साथ ही जीवन बीमा व हेल्थ इंश्योरेंस पर भी आप पैसे ख़र्च कर सकते हैं. कोशिश करें कि आपका इन्वेस्टमेंट ऐसा हो, जिससे आपके चले जाने के बाद भी आपके पार्टनर (पति/पत्नी) को पैसों की दिक्कत न हो. यदि आपको इन्वेस्टमेंट के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं है, तो किसी प्रोफेशनल से सलाह लेने के बाद ही निवेश करें.

बचें फ्रॉड से
आपने कई ऐसे विज्ञापन देखे होंगे या कई लोगों के मुंह से सुना होगा जहां कुछ स्कीम्स, लॉटरी आदि में बहुत जल्दी ढेर सारा पैसा कमाने का लालच दिया जाता है. भूलकर भी इन सब पर भरोसा करने की ग़लती न करें. कहीं भी पैसा इन्वेस्ट करने से पहले जानकार की सलाह अवश्य ले लें. चूंकि आपकी सेविंग आपकी सारी उम्र की जमा पूंजी होती है, इसलिए इस उम्र में किसी फ्रॉड का शिकार होने पर उबरना बहुत मुश्किल होता है.

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स्मार्ट होम मैनेजमेंट आइडियाज़ (Smart Home Management Ideas)

Home Management

घर के हर कोने को साफ़ और व्यवस्थित रखना चाहती हैं, तो अपनाएं ये स्मार्ट होम मैनेजमेंट ट्रिक्स और कहलाएं स्मार्ट होम मैनेजर. Home Management 

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लिविंग रूम
* सबसे पहले तो लिविंग रूम को फर्नीचर और एंटीक चीज़ों से भरने की ग़लती न करें. जितना ज़रूरी है, उतने ही फर्नीचर और डेकोरेटिव पीसेस रखें.  इससे मैनेज करना आसान हो जाता है.

* सोफा कवर या पर्दे थोड़े डार्क कलर के सिलेक्ट करें. ये जल्दी गंदे नहीं लगते.

* अगर लाइट कलर इस्तेमाल कर रही हैं, तो बेहतर होगा कि सोफा कवर, पर्दे, कुशन कवर्स आदि के एक से ज़्यादा पेयर रखें, ताकि इसकी क्लीनिंग  आसान हो जाए.

* कई सारे फोटोफ्रेम्स की बजाय सारे फोटो का कोलाज बनाकर एक-दो फ्रेम लगाएं. इससे लिविंग रूम को क्लीन लुक मिलेगा.

* सोफे के पीछे की जगह को स्मार्टली यूज़ करें. एक्स्ट्रा ब्लैंकेट, कुशन्स, डेकोरेटिव आइटम्स को बक्से में भरकर सोफे के पीछे रख दें. एक्स्ट्रा बुक्स  को भी आप ट्रंक में भरकर यहां रख सकती हैं.

* अपना एंटरटेनमेंट कॉर्नर एक बार चेक करें. डीवीडी या सीडी का कलेक्शन चेक करें. जो मूवी आप देख चुके हैं और जिसका कलेक्शन आपको नहीं  रखना है, उसे हटा दें. गैरज़रूरी चीज़ों को घर में न रखें. इससे घर मैनेज करना आसान हो जाएगा और समय की भी बचत होगी.

* हर डेकोरेटिव आइटम या पीस को ये सोचकर सहेजती न जाएं कि इतने पैसे ख़र्च किए थे या अब कहां मिलेंगी ऐसी चीज़ें. इससे आपका घर एंटीक चीज़ों का स्टोर बन जाएगा और आपके लिए उन्हें मैनेज करना भी मुश्किल हो जाएगा. अगर नई चीज़ें घर में लाती हैं, तो पुरानी चीज़ों को हटाना ही पड़ेगा.

* यदि आपने लिविंग रूम में लोटस पॉन्ड, वास आदि रखे हैं, तो उसकी क्लीनिंग का ख़ास ख़्याल रखें. उसका पानी रोज़ाना बदलती रहें, ताकि  बीमारियां न पनपने पाएं.

* क़िताबों को शीशे की आलमारी में रखें. इससे क़िताबों को ढूंढ़ना आसान हो जाएगा. हां समय-समय पर इनकी सफ़ाई करना न भूलें.

* यह सोचकर सफ़ाई को टालती न रहें कि इकट्ठे ही सफ़ाई करेंगी. हर 15 दिन में सफ़ाई करती रहें. इससे जहां आपका घर हेल्दी बना रहेगा, वहीं क्लीन  भी लगेगा.

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किचन मैनेजमेंट

* जो चीज़ें अक्सर इस्तेमाल में आती हैं, उन्हें एक ही जगह रखें, ताकि उन्हें ढूंढ़ने में समय बर्बाद न हो.

* क्रॉकरी को भी उसके यूज़ के हिसाब से अरेंज करें. रोज़ाना या अक्सर यूज़ होनेवाली क्रॉकरी निचले शेल्फ में रखें और कभी-कभार होनेवाली क्रॉकरी  को ऊपर के शेल्फ में रखें.

* गैस के पास ही कुकिंग रेंज सेट करें जैसे कि मसालों, नमक, शक्कर के जार, कुकिंग पैन, कड़ाही आदि को गैस के पास के शेल्फ में ही रखें, ताकि  इस्तेमाल में आसानी हो.

* किचन में हर समय शॉपिंग लिस्ट लगाकर रखें. जैसे ही कोई चीज़ आउट ऑफ स्टॉक होती है, फ़ौरन उसे लिस्ट में शामिल कर लें. इससे आपको पता  रहेगा कि किचन में क्या चीज़ें नहीं हैं और अंतिम समय में होनेवाली भागदौड़ से आप बच जाएंगे.

* कई महिलाओं की आदत होती है कि कोई भी प्लास्टिक कंटेनर खाली होता है, तो उसे किचन में यूज़ करने लगती हैं. इससे किचन अन ऑर्गनाइज़्ड  तो लगता ही है, मेसी भी लगने लगता है. इसलिए बेहतर होगा कि प्लास्टिक कंटेनर्स का मोह छोड़ें और जितनी ज़रूरत हो, उतने ही कंटेनर्स रखें.

* फ्रिज को गैरज़रूरी चीज़ों का स्टोरेज युनिट न बनाएं. ख़राब हो चुकी सब्ज़ियों, बासी चीज़ों को रोज़ाना हटाती रहें. इससे फ्रिज आसानी से मेंटेन तो  होगा ही, आपके हेल्थ के लिए भी ये ज़रूरी है.

* किचन में साफ़-सफ़ाई का ख़ास ख़्याल रखें. एग्ज़ॉस्ट फैन ज़रूर लगवाएं. इससे किचन में धूल-मिट्टी कम जमती है और किचन क्लीन रहता है.

* किचन प्लेटफॉर्म के पास एक प्लास्टिक बैग टांगकर रखें और कुछ भी काटने के बाद कचरा उसमें ही डालें. ऐसा करने से किचन साफ़-सुथरा रहेगा.  साथ ही नैपकिन्स भी ज़रूर रखें. हाथ पोंछने के लिए सूखे तौलिए या हो सके तो डिस्पोज़ेबल पेपर नैपकिन का इस्तेमाल करें.

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बेडरूम

* बेडरूम के ड्रॉवर्स का इस्तेमाल अक्सर हम ग़ैरज़रूरी चीज़ों को स्टोर करने के लिए करते हैं और जब उन चीज़ों की ज़रूरत पड़ती है, तो उन्हें ढूंढ़ने में  पूरा बेडरूम ही तहस-नहस कर देते हैं. इसलिए ऐसा करने से बचें. हर चीज़ के लिए एक जगह निर्धारित करें और उसे इस्तेमाल के बाद वहीं रखें.  इससे  आपका बेडरूम तो ऑर्गनाइज़ रहेगा ही, आपके समय की भी बचत होगी.

* बेड स़िर्फ सोने के लिए नहीं होते. इसके नीचे-ऊपर और आसपास की जगह को आप स्टोरेज के लिए स्मार्ट्ली यूज़ कर सकते हैं. लेकिन इसका ये  मतलब नहीं कि आप कहीं भी कुछ भी रख दें.

* इसके लिए आप कलरफुल स्टोरेज ट्रे और प्लास्टिक बिन लेकर आएं और इसमें सामान रखें. इसे आप बेड के नीचे या साइड में अच्छी तरह अरेंज  कर सकती हैं. इन ट्रे और प्लास्टिक बिन्स को समय-समय पर क्लीन करती रहें.

* बेडरूम के हर फर्नीचर यहां तक कि नाइट टेबल का सिलेक्शन करते समय भी स्टोरेज को ध्यान में रखें.

* छोटे घरों में ड्रेसिंग टेबल भी अक्सर बेडरूम में ही रखा जाता है. कॉस्मेटिक्स के लिए कलरफुल ट्रे यूज़ करें. ज्वेलरी और
एक्सेसरीज़ के लिए हैंगिंग ऑर्गेनाइज़र का इस्तेमाल करें. इसमें कई पॉकेट्स बने होते हैं और इसमें आपके ईयरिंग्स, ज्वेलरी, वॉचेस आदि अच्छे से  अरेंज हो जाते हैं.

* हर सुबह उठने के बाद नियम बनाएं कि पांच मिनट बेडरूम ऑर्गनाइज़ करने के लिए देंगे. सारे बेडशीट, पिलो, रजाई वगैरह फोल्ड करके रखें. कोई  चीज़ ग़ैरज़रूरी लगे, तो उसे हटा दें. इससे आपका बेडरूम हमेशा मैनेज रहेगा.

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वॉर्डरोब मैनेजमेंट

* हर सीज़न के बाद अपना वॉर्डरोब चेक करें. उसमें से जो भी कपड़े अगले सीज़न में इस्तेमाल में न आनेवाले हों, उन्हें वॉर्डरोब से हटा दें.

* जिन कपड़ों के बारे में तय नहीं कर पा रहे हैं कि पहनेंगे या  नहीं, उन्हें भी वॉर्डरोब से बाहर निकाल दें.
* इसी तरह जब भी नए कपड़े, खिलौने, बुक्स आदि ख़रीदें,  तो पुरानी और अनुपयोगी चीज़ों को निकाल दें. इससे  ग़ैरज़रूरी चीज़ों से घर भरा नहीं रहेगा और मैनेज करना भी  आसान हो जाएगा.

* हर सीज़न के कपड़े अलग-अलग रखें और एक सीज़न के  ख़त्म होते ही वो कपड़े अच्छी तरह से क्लीन करके पैक  करके रख दें, ताकि अगले सीज़न में आसानी से यूज़ कर  सकें. इससे आपका वॉर्डरोब क्लीन और मैनेजेबल हो  जाएगा.

* एक जैसे कपड़े, जैसे- शर्ट, सूट, वेस्टर्न वेयर, इंडियन वेयर, पार्टी वेयर आदि को वॉर्डरोब के एक हिस्से में रखें. इससे ज़रूरत पड़ने पर आपको पूरा वॉर्डरोब ढूंढ़ने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी.

* हैवी सूट्स, साड़ियां, बच्चों के हैवी कपड़े, जेंट्स सूट, जो कभी-कभार ही पहने जाते हैं, उन्हें सूटकेस में रख दें.

* कई पॉकेट वाले हैंगिंग प्लास्टिक बैग्स को भी वॉर्डरोब में लटका कर रख दें. इसमें आप ज्वेलरी, कॉस्मेटिक्स, एक्सेसरीज़ आदि रख सकती हैं.

* स्टोरेज स्पेस बढ़ाने के लिए ड्रॉवर्स बनवाएं. इनमें कपड़े मैनेज करना भी आसान होता है.

* कपड़ों को हमेशा आयरन करके ही वॉर्डरोब में रखें. इससे जहां वॉर्डरोब आर्गनाइज़्ड रहेगा, वहीं कपड़े भी अच्छी कंडीशन में रहेंगे.

* अच्छी क्वालिटी के हैंगर्स ख़रीदें और इन पर ही कपड़े रखें. इससे कपड़ों पर सिलवटें नहीं पड़ेंगी और उनमें जंग लगने की संभावना भी नहीं रहेगी.

 
कुछ काम की बातें

* ऐसी कोई चीज़, जो अच्छी कंडीशन में हो, पर आपके काम न आती हो, उसे फेंकने से अच्छा है किसी को दान कर दें.

* बिज़नेस या विज़िटिंग कार्ड्स को मैनेज करना मुश्किल होता है, इसलिए बेहतर होगा कि उसे फोन में सेव कर लें या डिजिटल कॉन्टैक्ट लिस्ट
बना लें.

* ज़रूरी पेपर्स और बिल्स को यहां-वहां रखने की बजाय उसे फाइल करने की आदत डालें. इससे उनके खोने का डर नहीं रहेगा और ज़रूरत पड़ने पर वो  आसानी से मिल भी जाएंगे.

घर को क्लीन लुक देने के लिए टूटी-फूटी, ख़राब हो चुकी और ग़ैरज़रूरी चीज़ों को तुरंत हटा दें, जैसे-

* एक्सपायर हो चुके फूड आइटम्स

* शॉपिंग, रेस्टोरेंट के बिल्स, जो ज़रूरी न हों

* टूटे हुए बेकार के इलेक्ट्रॉनिक या किचन अप्लायंसेस, गेम्स आदि

* पुराने कॉस्मेटिक्स, ज्वेलरी

* बच्चों के पुराने खिलौने

* ग़ैरज़रूरी कपड़े या अन्य सामान

फैमिली मैनेजमेंट की कला कितना जानती हैं आप ? (Art of family management)

Art of family management
परिवार चलाना जितना आसान नज़र आता है, उतना होता नहीं है और आज के दौर में, जब महिलाएं बाहर भी काम करती हैं, तो यह किसी चुनौती से कम नहीं. दरअसल, फैमिली मैनेजमेंट (Art of family management) भी एक कला है, जिसे आप जितना जल्दी समझ लेंगी, उतना ही आपके लिए आसान होगा.

Art of family management

फैमिली मैनेजमेंट के अंतर्गत क्या आता है: (Art of family management)

– फैमिली मेंबर्स को क़रीब लाना.
– आपसी सामंजस्य बैठाना.
– काम की सही प्लानिंग और स्ट्रेस कम करना.
– टाइम मैनेजमेंट.
– बजट प्लानिंग.
– बच्चों की सही परवरिश व उनके विकास की बेहतर संभावनाएं पैदा करना.
– अपनी व अन्य सदस्यों की सेहत पर नज़र रखना.

फैमिली मैनेजमेंट के बेसिक आइडियाज़ (Art of family management)

कम्यूनिकेशन: परिवार से संबंधित हर विषय पर हर सदस्य से बात ज़रूर करें, यहां तक कि बच्चों से भी. इससे आपको उनकी परेशानियों व उम्मीदों के बारे में ठीक से पता चल सकेगा और आप अपनी बात भी उनको बेहतर तरी़के से समझा सकेंगी.
अटेंशन और टाइम: परिवार को समय और अटेंशन देना सबसे ज़रूरी है. इससे उन्हें यह महसूस होगा कि वो आपकी ज़िंदगी का अहम् हिस्सा हैं. उन्हें प्रोत्साहित करना, बात करना और उनकी बात सुनना बेहद ज़रूरी है.

रूटीन और टाइमटेबल: टाइमटेबल बनाकर एक रूटीन सेट करने से काम आसान हो जाता है. न स़िर्फ आपके लिए, बल्कि घर के अन्य सदस्यों के लिए भी. उन्हें पता होता है कि किस समय पर क्या करना है और किस काम को कितना समय देना है. बच्चों से लेकर सभी सदस्यों के सोने, उठने, खाना खाने आदि का समय फिक्स कर दें, इससे सभी का स्ट्रेस कम होगा और काम आसान होगा.

काम व ज़िम्मेदारियों का बंटवारा: काम का बंटवारा करने से आपका भी काम हल्का हो जाएगा और सभी को अपनी ज़िम्मेदारियों का एहसास भी होगा. यहां तक कि बच्चों को भी इसमें शामिल करें. यह ज़रूर ध्यान रहे कि सभी को उनकी क्षमता व पसंद-नापसंद के अनुसार ही काम दें.

सोशल गैदरिंग, गेट-टुगेदर: भले ही आप सब साथ में रहते हों, लेकिन रूटीन लाइफ में बहुत कुछ खो जाता है. कभी-कभार पार्टी या कोई फंक्शन या फिर यूं ही गेट-टुगेदर करें, जिससे आप सब एक साथ एंजॉय कर सकें और हल्के-फुल्के लम्हों को जी सकें.

प्रॉब्लम एरिया को समझें: किस चीज़ को लेकर आजकल आप अधिक परेशान हैं, उस पर विचार करें- चाहे फाइनेंस हो या कोई घर की ज़िम्मेदारी. आपस में बात करें और मिलकर समाधान निकालें. सभी की राय लें, इससे हर चीज़ अच्छे से मैनेज होगी और स्ट्रेस भी कम होगा.

Art of family management

स्मार्ट टिप्स
  • बजट प्लान करें. अपने परिवार की फाइनेंशियल ज़रूरतों पर चर्चा करके सेविंग्स और ख़र्च का बजट तैयार करें.
  • किचन मैनेज करें. हेल्दी स्नैक्स स्टोर करें और हफ़्ते भर का मील भी संडे को ही प्लान कर लें.
  • घर की क्लीनिंग के लिए भी दिन व ड्यूटी तय करें.
  • अगर आप वर्किंग हैं, तो फैमिली और वर्क लाइफ में बैलेंस रखना ज़रूरी है.
  • अपनी क्षमताओं और अपेक्षाओं के प्रति सतर्क रहें. ऐसी अपेक्षाएं न पालें, जिन्हें पूरा करना आपके बस में नहीं या फिर जिसके लिए आपको बहुत कुछ दांव पर लगाना हो.
  • परिवार की भी इतनी उम्मीदें न बढ़ा दें, जिन्हें आप हमेशा पूरा न कर सकें, वरना बाद में आप पर ही बोझ बढ़ेगा.
  • फैमिली मैनेज करना स़िर्फ आपकी अकेली की ज़िम्मेदारी नहीं है, यह बात बाकी के सदस्यों तक सही तरी़के से पहुंचानी ज़रूरी है.
  • सभी अपनी ज़िम्मेदारी निभाएंगे, तो फैमिली मैनेज करना भी आसान होगा.
  • लिस्ट, डायरी या एक कैलेंडर तैयार करें, जिसमें सभी काम का बंटवारा, प्राथमिकताएं, इमर्जेंसी फंड, बजट, शॉपिंग, फ्री टाइम, हॉलीडे प्लान आदि लिखें. इससे आपका काम बहुत आसान होगा और आप कुछ भूलेंगी भी नहीं.
  • सबकी एनीवर्सरी, डेट ऑफ बर्थ और स्पेशल ओकेज़न डायरी में नोट करके रखें, फोन पर रिमाइंडर भी लगा सकती हैं, इससे आप उनके लिए सरप्राइज़ प्लान कर सकती हैं.
  • आपका थोड़ा-सा एक्स्ट्रा एफर्ट और थोड़ी-सी एक्स्ट्रा केयर घरवालों को न स़िर्फ ख़ुशी देगी, बल्कि आप सबको और क़रीब लाएगी.
  • घर में अगर कोई बीमार है या कोई अन्य रिश्तेदार बीमार है, तो उनका हालचाल जानने के लिए भी व़क्त ज़रूर निकालें.
  • दूर रहनेवाले रिश्तेदारों से हफ़्ते या पंद्रह दिन में एक बार बात करने के लिए टाइम व दिन फिक्स कर लें.
  • हो सके तो उनके भी बर्थ डे और एनीवर्सरीज़ लिख कर रखें और समय पर विश करें. ये छोटी-छोटी बातें ब़ड़ी मायने रखती हैं.
–  मनजीत

 

 

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