Manoj Bajpayee

टीवी शो मन की आवाज़- प्रतिज्ञा में ठाकुर सज्जन सिंह की भूमिका निभानेवाले एक्टर अनुपम श्याम पिछले कई महीनों से किडनी की समस्या से जूझ रहे थे. सोमवार रात अचानक तबियत ज़्यादा ख़राब हो जाने के कारण उन्हें गोरेगांव के लाइफ लाइन अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां उन्हें आईसीयू में रखा गया है. आर्थिक बदहाली से गुज़र रहे उनके परिवार की मदद के लिए सिने एंड टीवी आर्टिस्ट असोसिएशन ने ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने सोनू सूद और आमिर खान को टैग किया था. जहां सोनू सूद ने तुरंत मदद का हाथ बढ़ाया, वहीं आमिर खान की तरफ़ से अभी तक कोई जवाब नहीं आया है. मनोज बाजपेयी भी उनकी मदद के लिए आये आगे.

Anupam Shyam

आपको बता दें कि अनुपम श्याम पिछले कई सालों से टीवी और फिल्मों में काफी एक्टिव हैं. अक्सर नकारात्मक भूमिका निभानेवाले अनुपम श्याम पिछले छह महीनों से किडनी की समस्या से जूझ रहे थे. दरअसल उनकी किडनी में इंफेक्शन हो गया था, जिसके लिए करीब डेढ़ महीने तक हिंदुजा अस्पताल में उनका इलाज कराया गया. तब उनकी तबीयत ठीक हो गयी थी, पर डॉक्टर ने उन्हें नियमित समय पर डायलिसिस की सलाह दी थी. पर क्योंकि डायलिसिस का ख़र्च ज़्यादा होता है, तो उन्होंने आयुर्वेदिक इलाज लेना शुरू किया. पर डायलिसिस न करवाने के कारण उनकी छाती में पानी भर गया था, जिससे उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगी और सोमवार रात को वो अचानक बेहोश होकर गिर पड़े. हिंदुजा की बजाय उन्हें नज़दीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका डायलिसिस फिर से शुरू किया गया है. उनके भाई ने बताया कि डॉक्टर ने उन्हें किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह दी है.

मसीहा के रूप में उभरे सोनू सूद ने तुरंत ट्वीट क् जवाब दिया और उनकी मदद के हाथ आगे बढ़ाया. वहीं इस ट्वीट के बाद एक्टर मनोज बाजपेयी भी अनुपम श्याम की मदद के लिए आगे आये और उन्होंने उनके इलाज के लिए 1 लाख रुपये की मदद दी. अनुपम श्याम के भाई अनुराग ने समाचारपत्र से हुई बातचीत अनुपम श्याम की तबियत के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि इलाज के कारण अब उनकी तबीयत पहले से बेहतर है. उन्होंने सोनू सूद और मनोज बाजपेयी के तुरंत मदद की सराहना की और उन्हें धन्यवाद कहा. साथ ही अनुपम श्याम के कई और दोस्त भी मदद के लिए आगे आये हैं.

अनुपम श्याम के भाई अनुराग ने बताया कि अनुपम श्याम पिछले 40 सालों से डायबिटीज से जूझ रहे हैं और साथ ही उन्हें हाई बीपी की समस्या भी है. बीच में उन्हें हार्ट प्रॉब्लम भी होने लगी तो, डॉक्टर ने बताया कि हार्ट में ब्लॉकेज है. जिसके लिए उन्हें काफ़ी हैवी दवा शुरू की गई, जिसका उनकी किडनी पर असर पड़ा.

मन की आवाज़ प्रतिज्ञा से पहचान बनानेवाले अनुपम श्याम ने सत्या, प्यार तो होना ही था, कच्चे धागे, नायक-द रियल हीरो और मुन्ना माइकल जैसी फिल्मों में नज़र आए. इसके अलावा वो टीवी शोज़ हमने ली है शपथ, डोली अरमानों की और हाल ही में कृष्णा चली लंदन में नज़र आये थे.

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ऐसी कई फिल्‍में होती हैं, जो अच्‍छे कॉन्‍टेंट के बावजूद फ्लॉप हो जाती हैं और कई ऐसी फिल्में भी होती है, जिसकी स्‍क्रिप्‍ट में दम नहीं होता, लेकिन उस फिल्‍म में बड़ा स्‍टार हो तो वह 100 करोड़, 200 करोड़ और 300 करोड़ के क्‍लब में पहुंच जाती हैं.
हम अक्‍सर फिल्‍मों में अच्‍छी कहानियां ढूंढते हैं, उनकी बात करते हैं लेकिन जब ऐसी फिल्‍में रिलीज होती हैं तो पब्लिक उसे नकार देती है. यहां हम आपको ऐसी ही 8 बॉलिवुड फिल्‍मों के बारे में बता रहे हैं जिनकी कहानी, कॉन्टेंट, एक्टिंग, डायरेक्शन सब ज़बरदस्त थे, जो भारत की तरफ से ऑस्‍कर्स में भेजी जा सकती थीं, लेकिन हमारे ऑडियंस ने ही इन्‍हें रिजेक्‍ट कर दिया और कई बेहतरीन फिल्में सक्सेस से वंचित रह गईं.

मदारी

Madari

सोशल-थ्रि‍लर ड्रामा पर बेस्ड फिल्म ‘मदारी’ में इरफान खान ने एक ऐसे आम इंसान का किरदार निभाया था, जिसकी जिंदगी का हादसा, उसे देश के सिस्टम को सबक सिखाने के लिए मजबूर कर देता है. ये फ़िल्म आपको सच्चाई के रास्तों का आभास दिलाती हुई एक ऐसी दुनिया में ले जाती है, जहां एक आम आदमी पुल गिरने से दब कर मर गए अपने बेटे का बदला लेने के लिए देश के गृहमंत्री के ‘राजकुमार’ का अपहरण कर लेता है. वह सत्ता से न्याय चाहता है कि पुल बनाने में जो लोग भी शामिल थे, उन्हें तुरंत सजा मिले. इरफान खान की इस फिल्‍म में एक खूबसूरत कहानी के जरिए सरकार के कामकाज की खामियों को उजागर किया गया था. इसमें दिखाया गया था कि एक पिता अपने बेटे से कितना प्‍यार करता है. कहना न होगा कि ये एक बेहतरीन फ़िल्म थी, जिसे क्रिटिक्‍स ने पसंद किया, लेकिन ऑडियंस का अच्छा रिस्पांस नहीं मिला.

गली गुलियां

Gali Guleiyan

मनोज बाजपेयी स्‍टारर इस फिल्‍म को बेस्‍ट साइकॉलॉजिकल थ्रिलर ड्रामा में से एक माना गया. फ़िल्म में गजब का सस्‍पेंस था. लीक से हटकर एक बहुत अच्छा सब्जेक्ट, बेहतरीन डायरेक्शन और मनोज बाजपेयी की बेस्ट एक्टिंग वाली यह फिल्‍म मास्‍टरपीस थी, इस बात में कोई दो राय नहीं, लेकिन इस फ़िल्म को दर्शक ही नसीब नहीं हुए और एक अच्छी फिल्म को बुरा हश्र देखना पड़ा. ये बात अलग है कि इस फिल्‍म के लिए मनोज को मेलबर्न के इंडियन फिल्‍म फेस्टिवल में बेस्‍ट ऐक्‍टर का अवॉर्ड भी मिला था.

डिटेक्टिव ब्‍योमकेश बख्‍शी

Detective Byomkesh Bakshi

ब्योमकेश बक्शी नाम के उपन्यास पर आधारित दिबाकर बनर्जी की इस फिल्‍म में सुशांत सिंह राजपूत की बेहतरीन परफॉर्मेंस देखने को मिली. इस फ़िल्म के लिए सुशांत ने बहुत मेहनत भी की थी. फिल्म के किरदार को समझने के लिए उन्होंने चार महीने तक किसीसे बात नहीं की थी, सिर्फ किरदार के साथ ही रहे थे. 
इसकी कहानी काफी अच्‍छी थी जो कि कोलकाता की गलियों में ले जाती है और ड्रग स्‍मगलर्स से भरी है. फिल्म की तारीफ तो हुई थी, लेकिन इसे दर्शकों का कुछ खास प्यार नहीं मिल सका था. सुशांत के अभिनय को भी काफी सराहा गया था, लेकिन इस फिल्‍म का भी वही हाल हुआ कि लोग सिनेमाघरों तक नहीं पहुंचे.

सोनचिड़िया

Sonchiriya

डकैत ड्रामा पर आधारित इस फ़िल्म की शूटिंग मध्‍य प्रदेश के चंबल में की गई. रिस्‍क लिया गया, अपने कैरक्‍टर के लिए सुशांत और बाकी ऐक्‍टर्स ने काफी मेहनत की. डकैत, पुलिस, लड़ाई, हमला जैसी चीजों से भरी होने के बाद भी फिल्म अपराध पर बेस्ड नहीं थी, बल्कि अपराध करने के बाद अपराधियों के हालात की कहानी थी.
फिल्म में जाति प्रथा, पितृसत्ता, लिंग भेद और अंधविश्वास को दिखाया गया था. फिल्म में ये भी दिखाया गया कि क्यों बदला लेने और न्याय में अंतर है. कहानी, निर्देशन, अभिनय, तकनीकी हर लिहाज से सोनचिड़िया काफी मजबूत फ़िल्म थी, क्रिटिक्स ने भी इसे जमकर सराहा. इसमें सुशांत सिंह के एक्टिंग की खूब तारीफ हुई. लेकिन उनकी इस फिल्‍म का हाल भी वैसा ही हुआ, जैसा ब्‍योमकेश बख्‍शी के साथ हुआ. इस फिल्‍म में भी ऑडियंस ने अपना इंट्रेस्‍ट नहीं दिखाया.

शौर्य

Shaurya

बेहतरीन फिल्‍मों की बात होगी तो ‘शौर्य’ का ज़िक्र ज़रूर होगा. आर्मी बैकग्राउंड वाली फिल्म ‘शौर्य’ एक गंभीर और विचारोत्तेजक फिल्म है. इस फिल्म के जरिये डायरेक्टर ने कई गंभीर मुद्दे दर्शकों के सामने रखे थे. फ़िल्म में सेना और मनुष्य स्वभाव के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं को दिखाया था. सेना की पृष्ठभूमि होने के बावजूद इस फिल्म में वॉर या खून-खराबा नहीं था. फ़िल्म में के के मेनन और राहुल बोस जैसे एक्टर्स ने जबरदस्‍त परफॉर्मेंस दी थी इसके बाद भी दर्शकों ने फिल्‍म को नकार दिया.

कड़वी हवा

Kadvi Hawa

संजय मिश्रा बॉलीवुड के टैलेंटेड ऐक्टर्स में से एक हैं. हालांकि, उन्‍हें पहचान काफी देर से मिली. फिल्‍म ‘कड़वी हवा’ में जमीन से जुड़े मुद्दों पर बात की गई कि कैसे किसान को जलवायु परिवर्तन के कारण मुश्‍किलों का सामना करना पड़ता है. फिल्‍म को दूसरी कन्ट्रीज में पसंद किया गया लेकिन जब यह भारत में रिलीज हुई, तो ऑडियंस ने इसे पूरी तरह से साइडलाइन कर दिया.

सिटीलाइट्स

City Lights

छोटे शहरों की सच्चाई और बड़े शहरों के जीवन की बारीकियां दिखाती मानव विस्थापन पर आधारित फिल्म सिटीलाइट्स एक बेहतरीन फ़िल्म थी. फ़िल्म में दिखाया गया था कि छोटे शहरों से पलायन करके लोग उम्मीदें और सपने लिए बडे शहरों में आते हैं,
यहां आकर वो दो जून की रोटी के लिए संघर्ष करते हैं, लेकिन उनके साथ किस तरह बुरा बर्ताव किया जाता है. यहां तक कि किसी पास उनके जीवन में झांकने की फुर्सत तक नहीं होती.
यह एक ऐसे परिवार की कहानी है जो राजस्‍थान से मुंबई पहुंचती है और फिर उनका संघर्ष शुरू होता है. राजकुमार राव और पत्रलेखा दिल से अपने कैरक्‍टर में घुस गए थे ताकि सब सच लगे और ज्‍यादा से ज्‍यादा लोग कनेक्‍ट करें लेकिन ऐसा नहीं हो सका. बॉक्‍स ऑफिस पर फिल्‍म कोई कमाल नहीं दिखा सकी.

ओए लकी लकी ओए

Oye Lucky Lucky Oye

बिल्कुल अलग कंटेंट और कॉन्सेप्ट पर आधारित इस ब्लैक कॉमेडी फिल्म ने मुश्‍किल से बॉक्‍स ऑफिस पर सिर्फ 6 करोड़ की कमाई की जबकि अभय देओल ने इस फिल्‍म में जबरदस्त एक्टिंग की थी. इसका ह्यूमर हल्‍का नहीं था, जैसा कई फिल्‍मों का होता है, लेकिन यहां भी दर्शकों ने अच्‍छे कॉन्‍टेंट को स्‍वीकार नहीं किया और फिर बॉक्‍स ऑफिस पर फेल हो गई.

सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जहां एक ओर बॉलीवुड को बहुत बड़ा नुकसान हुआ है, वहीं उनके फैन्स में बेहद ग़ुस्सा है. सुशांत सिंह राजपूत के फैन्स ने बायकॉट बॉलीवुड और बायकॉट स्टार किड्स जैसे कैंपेन चला रखे हैं. इस तरह उनके अचानक चले जाने का दुख उनके फैन्स बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं और इसीलिए सभी सीबीआई जांच की मांग भी कर रहे हैं. सुशांत सिंह राजपूत के साथ फ़िल्म सोनचिड़िया में काम करनेवाले वर्सेटाइल एक्टर मनोज बाजपेयी ने उनकी मौत पर बात करते हुए बताया कि क्यों पब्लिक का ग़ुस्सा होना जायज़ है और बॉलीवुड को इसे सीरियसली लेने की ज़रूरत है.

Manoj Bajpayee and Sushant Singh Rajput

सत्या से लेकर गैंग्स ऑफ वासेपुर, स्पेशल छब्बीस जैसी फिल्मों में बेहतरीन कलाकारी की झलक दिखानेवाले डाउन टू अर्थ एक्टर मनोज बाजपेयी ने हाल ही में सुशांत सिंह राजपूत पर फूटे पब्लिक के ग़ुस्से पर एक समाचार पत्र से बात की. मनोज बाजपेयी से जब बॉलीवुड में होनेवाले पक्षपात के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि देखिए अगर सेलिब्रिटीज़ लोगों की तारीफ़ों को सच्चा मानते हैं, तो उन्हें उनके आलोचनाओं को भी सुनना चाहिए.

Manoj Bajpayee

अगर लोगों का ग़ुस्सा आप पर है, तो मुझे आपसे सवाल पूछना ही पड़ेगा. जब यही लोग मेरी फिल्म को हिट कर देते हैं, तो मैं कहता हूं कि पब्लिक सही है और जब यही लोग मुझसे कोई सवाल पूछ रहे हैं, तो मेरे लिए यह बहुत ज़रूरी है कि मैं उनके सवालों का जवाब दूं. सरकार भी ऐसा ही करती है. बॉलीवुड को इसे सीरियसली लेने की ज़रूरत है.

Manoj Bajpayee and Sushant Singh Rajput

सुशांत सिंह राजपूत की मौत ने बॉलीवुड में बाहर से आनेवालों के साथ होनेवाले भेदभाव और स्टार किड्स के लिए किए जानेवाले पक्षपात का पर एक नई जंग छेड़ दी है. उनके फैन्स ने ऑनलाइन एक मुहिम चला रखी है, जिसका ग़ुस्सा बॉलीवुड में चल रहे भी भतीजावाद पर फुट रहा है. वो स्टार किड्स और उनके सपोर्टर्स की फिल्म्स को बायकॉट करने की मांग कर रहे हैं.

Manoj Bajpayee

सुशांत सिंह राजपूत के बारे में बात करते हुए एक इंटरव्यू में मनोज बाजपेयी ने कहा था कि 34 साल की छोटी सी उम्र में उन्होंने जो सफलता हासिल कर ली थी, वो इस उम्र में शायद कभी नहीं कर पाते. हम सबकी ज़िंदगी में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं और उससे हमारी भावनाएं भी जुड़ी रहती हैं. सुशांत भी इनसे अलग नहीं थे. मुझे नहीं लगता कि मैं उनके जितना टैलेंटेड हूं. मुझे नहीं लगता कि मैं कभी उतना बुद्धिमान और प्रतिभावान हो सकता हूं, जितना वो थे. मुझे नहीं लगता कि 34 साल की उम्र तक मैंने कुछ भी ऐसा अचीव किया हो, जितना उन्होंने किया था. उनके आगे मेरे अचीवमेंट्स बहुत बहुत कम हैं और इसी तरह मैं उन्हें याद करता हूं. वो एक बहुत नेक इंसान भी थे.

Manoj Bajpayee

नेपोटिज़्म पर बोलते हुए मनोज बाजपेयी ने कहा कि मैं इसे इस तरह से कहना चाहता हूं कि दुनिया में ईमानदारी नहीं है. मैं पिछले 20 सालों से कह रहा हूं कि हमारी इंडस्ट्री में औसत दर्जे का ही बोलबाला है. इंडस्ट्री को छोड़ दें, देश की अगर बात करें, तो वहां भी वही हाल है. कहीं तो किसी चीज़ की कमी है. हमारी सोच में या सिद्धान्तों में ही शायद कहीं कोई कमी है. जब भी हम टैलेंट देखते हैं, तो तुरंत हम उसे पीछे धकेलते हैं या फिर दबाने की कोशिश करते हैं. यह बहुत खेदजनक है, पर यही हमारे मूल सिद्धान्तों का हिस्सा बन गया है.

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Satyameva Jayate
Movie Review: ज़बर्दस्त एक्शन, दमदार डायलॉग्स और सस्पेंस  से भरपूर है सत्यमेव जयते (Movie Review Satyameva Jayate)
भ्रष्टाचार और सिस्टम के ख़िलाफ़ लड़ाई कोई नहीं बात नहीं है, बल्कि इस विषय पर पहले भी कई फ़िल्में बन चुकी हैं, पर जॉन अब्राहम की सत्यमेव जयते कुछ अलग है. जॉन की दमदार पर्सनालिटी ने इस फिल्म के किरदार को बेहद रोमांचक बना दिया है. एक आम इंसान की भ्रष्टाचारी पुलिस वालों के ख़िलाफ़ यह दिलचस्प और सस्पेंस से भरपूर कहानी आपको ज़रूर पसंद आएगी. तो चलिए देखते हैं क्या है सत्यमेव जयते की कहानी.
मूवी- सत्यमेव जयते
डायरेक्टर- मिलाप मिलन ज़वेरी
स्टार कास्ट- जॉन अब्राहम, मनोज बाजपेयी, आयशा शर्मा, मनीष चौधरी, अमृता खानविलकर
अवधि- 2 घंटा 21 मिनट
रेटिंग- 3.5
कहानी-
फिल्म की शुरुआत ही धमाकेदार एक्शन के साथ होती है, जहां वीर राठौड़ (जॉन अब्राहम) एक करप्ट पुलिस ऑफिसर को मौत की सज़ा देता है. भ्रष्टाचारी पुलिस ऑफिसर्स को एक-एक करके ख़त्म करने लगता है, जिससे वो आम जनता के लिए मसीहा बन जाता है. वीर राठौड़ भ्रष्टाचारियों के ख़ात्मे में लगा ही रहता है कि उसका सामना एक ईमानदार पुलिस ऑफिसर शिवांश राठौड़ से होता है. फिर शुरू होती है पुलिस और वीर की धर पकड़ की कहानी. इसी बीच कहानी में एंट्री होती है ख़ूबसूरत शिखा (आयशा शर्मा) की, जिसके बाद वीर और शिखा में नज़दीकियां बढ़ने लगती हैं. वीर अपने मकसद में आगे बढ़ता है, तो शिवांश के साथ उसकी भिड़ंत शुरू हो जाती है. इसके बाद एक एक कर कहानी में कई ट्विस्ट और टर्न्स आते हैं और कहानी एक रोमांचक मोड़ पर पहुंचती है, जहां बताया जाता है कि वीर आख़िर क्यों भ्रष्टाचारी पुलिसवालों को ख़त्म करने में लगा रहता है.
Satyameva Jayate
क्या ख़ास है फिल्म में?
सत्यमेव जयते का ज़बर्दस्त एक्शन काबिले तारीफ़ है. दमदार डायलॉग्स दर्शकों को तालियां बजाने पर मजबूर कर देते हैं. फिल्म  में ऐसा कई बार होता है कि दर्शक वाह वाह कर उठते हैं. इसी के साथ सस्पेंस भी काफ़ी अच्छा है. अगर आप जॉन के फैन हैं तो फिल्म देखने ज़रूर जाएं.
एक्टिंग
एक्टिंग की बात करें तो जॉन अब्राहम और मनोज बाजपेयी दोनों ने ही दमदार परफॉर्मेंस दी है.जॉन की डायलॉग डिलीवरी और एक्शन काबिले तारीफ़ है. पिछली फिल्मों की तरह इसमें भी मनोज बाजपेयी को ईमानदार पुलिस वाले के किरदार में देखना अच्छा लगता है. यह कहना होगा कि यह रोल उनकी पर्सनालिटी को काफ़ी सूट करता है. आयशा शर्मा भी अपने रोल में प्रॉमिसिंग नज़र आती हैं.
संगीत की बात करें तो इसके ‘पानियों सा’ और ‘दिलबर’ गाने तो पहले ही सुपर हिट हो चुके हैं, ऐसे में उन्हें बड़े पर्दे पर देखना अच्छा लगता है. कुल मिलाकर अगर आप जानना चाहते हैं कि क्यों वीर राठौड़ भ्रष्टाचारी पुलिस अफसरों को ख़त्म कर रहे हैं? तो यह फिल्म देखने ज़रूर जाएं. इस स्वतंत्रता दिवस अगर आप भी भ्रष्टाचार की इस लड़ाई में वीर और शिवांश का साथ देना चाहते हैं, तो सत्यमेव जयते देखने ज़रूर जाएं.
                                                      – अनीता सिंह

साधारण से चेहरे वाले मनोज बाजपयी ने ये साबित कर दिया है कि एक्टर बनने के लिए केवल अच्छी एक्टिंग आनी ज़रूरी है. मनोज 49 साल के हो गए हैं. 23 अप्रैल 1969 को बिहार के छोटे से गांव बेलवा में जन्मे मनोज बॉलीवुड का एक बड़ा नाम है. उनकी आवाज़ और डायलॉग बोलने का अंदाज़ काबिले तारीफ़ है. हाल ही में मनोज बाजपयी (Manoj Bajpayee) को सिद्धार्थ मल्होत्रा के साथ फिल्म ‘अय्यारी’ में देखा गया था तो वहीं टाइगर की फिल्म ‘बागी 2’ में मनोज का दमदार अभिनय दर्शकों को बेहद पसंद आया.

Happy Birthday, Manoj Bajpayee

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि उन्हें नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में तीन कोशिशों के बाद भी एडमिशन नहीं मिला था. कभी हिम्मत न हारने वाले मनोज ने इसके बाद ड्रामा स्कूल से बैरी जॉन के साथ थिएटर करना शुरु कर दिया. उनके ऐक्टिंग करियर की शुरूआत हुई सीरियल ‘स्वाभिमान’ से, लेकिन मनोज को कोई ख़ास पहचान इस सीरियल से नहीं मिली. शेखर कपूर की फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ से मनोज को फिल्मों में मौक़ा मिला. इस फिल्म में उनके किरदार को सराहा गया. इसके बाद भी मनोज ने कुछ फिल्में की, लेकिन ‘सत्या’ फिल्म में उनके किरदार भीखू म्हात्रे ने मनोज को एक सशक्त अभिनेता के रूप में सबके सामने ला खड़ा किया. यहां से शुरू हुआ सफलता का दौर जो अब भी जारी है. फिल्म ‘पिंजर’ और ‘सत्या’ के लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड भी मिल चुका है.

Happy Birthday, Manoj Bajpayee

मेरी सहेली की ओर से मनोज बाजपयी को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं.

देखें उनके 5 दमदार डायलॉग्स.

1-फिल्म- सरकार 3

2-फिल्म- राजनीति

3-फिल्म- तेवर

4-फिल्म- आरक्षण

https://www.youtube.com/watch?time_continue=1&v=CXZ4I6eO4wE

5-फिल्म- सत्या

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अभिनेता टाइगर श्रॉफ (Tiger Shroff) और दिशा पटानी (Disha Patani) की फिल्म ‘बागी 2’ देशभर के क़रीब 3.5 हज़ार स्क्रीन पर रिलीज़ की गई है. अहमद खान के निर्देशन में बनी यह फिल्म तेलुगु फिल्म ‘क्षणम’ की हिंदी रीमेक है. क्षणम ने साउथ में काफ़ी तगड़ा बिज़नेस किया था, जिसे देखते हुए इसका हिंदी रीमेक बनाने का फ़ैसला किया गया. हालांकि इससे पहले भी टाइगर की फिल्म ‘बागी’ ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा कारोबार किया था और यह फिल्म100 करोड़ के क्लब में शामिल होने में सफल भी रही.

Baaghi 2 movie review

क्या है ‘बागी 2’ की कहानी ?

‘बागी 2’ की कहानी रॉनी (टाइगर श्रॉफ) और नेहा (दिशा पटानी) की है. रॉनी और नेहा एक ही कॉलेज में पढ़ते हैं और दोनों एक-दूसरे से प्यार करते हैं, लेकिन नेहा के पिता रॉनी को पसंद नहीं करते और नेहा की शादी किसी और से करा देते हैं. वहीं रॉनी ऑर्मी ज्वॉइन कर लेता है और एक-दूसरे से अलग होने के क़रीब 4 साल बाद नेहा रॉनी से अपनी किडनैप हुई बेटी को ढूंढ़ने के लिए मदद मांगती है.

नेहा के कहने पर रॉनी गोवा वापस आता है और इस मामले की तफ्तीश के दौरान काफ़ी उतार चढ़ाव आते हैं. इस दौरान रॉनी की मुलाक़ात उस्मान भाई (दीपक डोबरियाल), डीआईजी शेरगिल (मनोज बाजपेयी), एसीपी रणदीप हुड्डा से सिलसिलेवार घटनाओं के बीच होती है. हालांकि रॉनी उस लड़की को ढूंढ़ने में कामयाब होता है या नहीं इसके लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी.

पसंद आई दिशा और टाइगर की केमेस्ट्री 

रियल लाइफ में दिशा और टाइगर के अफेयर की चर्चा तो होती ही रहती है, लेकिन इन दोनों की ऑनस्क्रीन केमेस्ट्री को काफ़ी पसंद किया जा रहा है. बता दें कि फिल्म में टाइगर ने अपने फैंस को हैरान कर देने वाले ढ़ेरों एक्शन सीन खुद ही किए हैं और वन मैन आर्मी के अंदाज़ में जंच भी रहे हैं, लेकिन दिशा अपने किरदार को और भी बेहतर तरीक़े से निभा सकती थीं.

अपने-अपने किरदार में फिट दिखे कलाकार

बता दें कि इस फिल्म से प्रतीक बब्बर ने विलन के रोल से बड़े पर्दे पर वापसी की है. फिल्म में डीआईजी के किरदार को मनोज वाजपेयी ने बेहतरीन ढंग से निभाया है. वहीं एसीपी के रोल में रणदीप हुड्डा ने सराहनीय एक्टिंग की है और दीपक डोबरियाल ने भी उस्मान लंगड़ा के किरदार को बखूबी निभाया है.

फिल्म में टाइगर का एक्शन और फिल्म के संवाद काबिले तारीफ़ है. फिल्म की शूटिंग मनाली, थाइलैंड, गोवा और लद्दाक के ख़ूबसूरत लोकेशन्स पर हुई है. फिल्म का संगीत भी ठीकठाक है. समय-समय पर आनेवाले आतिफ असलम के गाने कहानी को दिलचस्प बनाते हैं. फिल्म का फर्स्ट हाफ दर्शकों को बांधे रखता है इसमें कई ऐसे मौके आते हैं जब सीटियों और तालियों के साथ आपके चेहरे पर मुस्कान भी आती है, लेकिन सेकेंड हाफ में कहानी फिल्म की पटरी से उतरती दिखाई देती है.

बहरहाल, अगर आप एक्शन फिल्मों के शौकीन हैं और टाइगर के एक्शन सीन्स के दीवाने हैं तो इस मामले में टाइगर श्रॉफ आपको बिल्कुल भी निराश नहीं करेंगे.

स्टारकास्ट- टाइगर श्रॉफ, दिशा पाटनी, मनोज बाजपेयी, रणदीप हुड्डा, प्रतीक बब्बर और दीपक डोबरियाल.

अवधि- 2 घंटा 24 मिनट

रेटिंग- 3/5 

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डायरेक्टर नीरज पांडे लीक से हटकर फिल्में बनाने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने ए वेडनेसडे, स्पेशल छब्बीस और एम एस धोनी- द अनटोल्ड स्टोरी जैसी बेमिसाल फिल्में डायरेक्ट की हैं. लीक से हटकर फिल्में बनाने के इस सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने फिल्म ‘अय्यारी’ बनाई है, जो सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है. ऐसा पहली बार हो रहा है जब इस फिल्म में मनोज बाजपेयी और सिद्धार्थ मल्होत्रा की जोड़ी एक साथ पर्दे पर नज़र आ रही है.

सेना की पृष्ठभूमि पर बनी है फिल्म

भारतीय सेना की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म की कहानी की शुरूआत कर्नल अभय सिंह का किरदार निभा रहे मनोज बाजपेयी और मेजर जय बख्शी का किरदार निभा रहे सिद्धार्थ मल्होत्रा की नोकझोंक से होती है. इस फिल्म में मनोज और सिद्धार्थ को गुरू-शिष्य के रुप में दिखाया गया है.

इस फिल्म में दिखाया गया है कि सिद्धार्थ भारतीय सेना और देश के साथ गद्दारी करने लगते हैं. उनकी इस हरकत का खामियाजा पूरी टीम को भुगतना पड़ता है और मनोज बाजपेयी की पूरी टीम को गद्दार घोषित कर दिया जाता है. इसके बाद सिद्धार्थ देश छोड़कर भागने की कोशिश करने लगते हैं. फिल्म की कहानी में जय (सिद्धार्थ) का सोनिया (रकुल प्रीत) से लव इंटरेस्ट भी दिखाया गया है.

फिल्म में दिखी दमदार एक्टिंग

वास्तविक मुद्दे पर बनी इस फिल्म में मनोज बाजपेयी की एक्टिंग काबिले तारीफ है और सिद्धार्थ मल्होत्रा की एक्टिंग भी सराहनीय है. इस फिल्म में इन दोनों के अलावा रकुलप्रीत, अनुपम खेर, नसीरुद्दीन शाह, आदिल हुसैन और कुमुद मिश्रा की मौजूदगी इस फिल्म को और भी खास बना देती है. ये सभी कलाकार अपने-अपने किरदारों में बिल्कुल फिट दिखाई दे रहे हैं. उम्दा डायरेक्शन, लोकेशन, कैमरा वर्क और रियल लोकेशन्स ने इस फिल्म को और भी दिलचस्प बना दिया है. 

ट्विस्ट एंड टर्न से भरपूर है फिल्म

इस फिल्म में दर्शकों को काफी सारे ट्विस़्ट एंड टर्न्स देखने को मिलेंगे, जो उनके रोमांच को बढ़ाने के लिए काफी है. लेकिन इस फिल्म की कमज़ोर कड़ी की बात की जाए तो फिल्म का पहला भाग दर्शकों को थोड़ा कंफ्यूज कर सकता है लेकिन इसका दूसरा भाग काफी दिलचस्प है. इसके साथ ही यह फिल्म की लेंथ थोड़ी बड़ी है जिसे छोटी की जा सकती थी. लेकिन यहां गौर करनेवाली बात तो यह है कि इस फिल्म की कड़ी टक्कर अक्षय की पैडमैन से है क्योंकि पैडमैन का क्रेज अभी भी लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है.

फिल्म- अय्यारी

डायरेक्टर- नीरज पांडे

स्टार कास्ट- मनोज बाजपेयी, सिद्धार्थ मल्होत्रा, अनुपम खेर, नसीरुद्दीन शाह, रकुलप्रीत, कुमुद मिश्रा

रेटिंग- 3 स्टार

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फिल्मः रूख
स्टारः मनोज वाजपेयी, स्मिता तांबे, कुमुद मिश्र, आदर्श ग्रोवर
निर्देशकः अतानु मुखर्जी
रेटिंगः 2.5

यह फिल्म उस ख़ास दर्शक वर्ग के लिए है, जो लीक से हटकर कुछ अलग और अर्थपूर्ण फिल्में देखना पसंद करते हैं.

Film Review Movie Rukh

 

कहानीः यह फिल्म पिता-पु्त्र की कहानी है. दिवाकर माथुर (मनोज वाजपेयी) का लेदर का कारोबार है. दिवाकर का एक बेटा ध्रुव (आदर्श गौरव) होता है. ध्रुव को हमेशा यही लगता है कि उसके पापा दिवाकर के पास उसके लिए समय नहीं है. इसी वजह से ध्रुव कुछ ज्यादा ही गुस्सैल बन जाता है. स्कूल में एक स्टूडेंट के साथ मारपीट के बाद उसे जब सीनियर सेकंडरी स्कूल से निकाल दिया जाता है तो दिवाकर उसे एक बोर्डिंग स्कूल में भेज देता है. बोर्डिंग में पढ़ रहे ध्रुव को एक दिन खबर मिलती है कि दिवाकर की एक रोड ऐक्सिडेंट में मौत हो गई है. ध्रुव बोर्डिंग छोड़ अपने घर लौट आता है, लेकिन ध्रुव को हर बार यही लग रहा है कि उसके पिता की मौत एक ऐक्सिडेंट में नहीं हुई बल्कि उनका एक सोची समझी प्लानिंग के साथ मर्डर किया गया है.

निर्देशनः अतानु की कहानी और किरदारों पर तो अच्छी पकड़ है, लेकिन स्क्रिप्ट पर उन्होंने ज्यादा काम नहीं किया. यही वजह है कि फिल्म की गति बेहद धीमी है. फिल्म की स्पीड अंत तक इस कदर धीमी है कि कई बार हॉल में बैठे दर्शकों का सब्र खत्म होने लगता है. फिल्म का मिजाज काफी डार्क है. ऐसे में ये फिल्म एक खास तबके के लिए है इसे मास शायद ही देखना पसंद करेगी.

अभिनयः मनोज वाजपेयी ने एक बार फिर अपनी अभिनय का लोहा मनवा दिया है. वहीं स्मिता तांबे की खामोशी के बीच उनका फेस एक्सप्रेशन जबर्दस्त है. ध्रुव के किरदार में आदर्श गौरव डायरेक्टर की राइट चॉइस रही तो कुमुद मिश्रा ने रॉबिन के किरदार को दमदार ढंग से निभाया है.

म्यूजिकः फिल्म में बैकग्राउंड में  दो गाने हैं, लेकिन ये गाने फिल्म की पहले से स्लो स्पीड को और स्लो ही करते हैं.

देखें या नहींः अगर आपको लीक से हटकर फिल्में देखना पसंद हैं और आप मनोज वाजपेयी के फैन हैं तो फिल्म अवश्य देखें. मसाला फिल्म के शौक़ीनों के लिए  इसमें कुछ नहीं है.

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साधारण से चेहरे वाले मनोज बाजपयी ने ये साबित कर दिया है कि ऐक्टर बनने के लिए केवल अच्छी ऐक्टिंग आनी ज़रूरी है. मनोज 48 साल के हो गए हैं. 23 अप्रैल 1969 को बिहार के छोटे से गांव बेलवा में जन्मे मनोज बॉलीवुड का एक बड़ा नाम है. उनकी आवाज़ और डायलॉग बोलने का अंदाज़ काबिले तारीफ़ है. आपको जानकर आश्चर्य होगा कि उन्हें नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में तीन कोशिशों के बाद भी एडमिशन नहीं मिला था. कभी हिम्मत न हारने वाले मनोज ने इसके बाद ड्रामा स्कूल से बैरी जॉन के साथ थिएटर करना शुरु कर दिया. उनके ऐक्टिंग करियर की शुरूआत हुई सीरियल स्वाभिमान से, लेकिन मनोज को कोई ख़ास पहचान इस सीरियल से नहीं मिली. शेखर कपूर की फिल्म बैंडिट क्वीन से मनोज को फिल्मों में मौक़ा मिला. इस फिल्म में उनके किरदार को सराहा गया. इसके बाद भी मनोज ने कुछ फिल्में की, लेकिन सत्या फिल्म में उनके किरदार भीखू म्हात्रे ने मनोज को एक सशक्त अभिनेता के रूप में सबके सामने ला खड़ा किया. यहां से शुरू हुआ सफलता का दौर जो अब भी जारी है. फिल्म पिंजर और सत्या के लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड भी मिल चुका है.

मेरी सहेली की ओर से मनोज बाजपयी को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं.

देखें उनके 5 दमदार डायलॉग्स.

फिल्म- राजनीति

फिल्म- तेवर

फिल्म- सत्या

फिल्म- शूल

फिल्म- आरक्षण

https://www.youtube.com/watch?v=CXZ4I6eO4wE

फिल्म- नाम शबाना

स्टारकास्ट- अक्षय कुमार, ताप्सी पन्नू, मनोज बाजपयी, अनुपम खेर

निर्देशक- शिवम नायर

रेटिंग- 3.5 स्टार

naam shabana review

अक्सर फिल्मों का सिक्वल बनाया जाता है, लेकिन इस बार प्रीक्वल बनाया गया है फिल्म बेबी का. नाम शबाना की कहानी बेबी के कहानी से जुड़ी हुई है, लेकिन उसके आगे की कहानी है. कैसी है नाम शबाना फिल्म आइए जानते हैं.

कहानी

फिल्म की कहानी ताप्सी के आसपास ही रची गई है. बेबी फिल्म की एजेंट शबाना खान की पहली की ज़िंदगी को दिखाया गया है, जो बेहद तकलीफ़ों से भरी थी. शबाना (ताप्सी पन्नू) का बचपन बेहद ही बुरा बीतता है. वो रोज़ अपनी मां को पिता के हाथों पिटते हुए देखती है. एक दिन तंग आकर अपने पिता पर ऐसा वार करती है कि उसके पिता दम तोड़ देते हैं. इसके बाद शबाना को जूवेनाइल कोर्ट दो साल की सज़ा दे देता है. जीवन के बुरे अनुभव शबाना को सख़्त बना देते हैं. कॉलेज में वो जूडो-कराटे सीखती है. टास्क फोर्स के चीफ रणवीर सिंह (मनोज बाजपयी) की नज़र शबाना पर तब से होती है, जब उसे सज़ा दी गई थी. शबाना के सामने जब एक दिन उसके प्रेमी की हत्या कर दी जाती है, तब रणवीर शबाना की मदद करता है. इसके बाद शबाना टास्क फोर्स का हिस्सा बन जाती है और उसे एक खास मिशन के लिए मलेशिया भेजा जाता है, जहां उसका सामना टोनी उर्फ मिखाइल (पृथ्वीराज सुकुमारन) से होता है, जो हथियारों की सप्लाई करता है. शबाना की मदद के लिए मलेशिया में ऑफिसर अजय (अक्षय कुमार) को भेजा जाता है. क्या शबाना मिशन को पूरा कर पाती है? कैसे वो लड़ती हैं इन सबसे? इसके लिए आपको देखनी होगी ये फिल्म.

फिल्म की यूएसपी

फिल्म की यूएसपी है ताप्सी पन्नू की ऐक्टिंग. पिंक फिल्म के बाद एक बार बार फिर ताप्सी ने ख़ुद को साबित किया है कि वो एक टैलेंट ऐक्ट्रेस हैं. पूरी फिल्म ताप्सी पर आधारित है और उन्होंने ऐक्शन सीन्स भी कमाल के किए हैं.

अक्षय कुमार का रोल भले ही फिल्म में छोटा हो, लेकिन अहम् हैं. मनोज बाजपयी टास्क फोर्स के चीफ की भूमिका में अपनी छाप छोड़ते हैं.

देखने जाएं या नहीं?

अगर आप इस वीकेंड पर एक अच्छी फिल्म देखना चाहते हैं, तो ये फिल्म आपको ज़रूर एंटरटेन करेगी. पैसा वसूल फिल्म है नाम शबाना. 

Naam Shabanaफिल्म पिंक के बाद एक बार फिर ताप्सी पन्नु बेहद ही दमदार रोल में नज़र आ रही हैं. नीरज पांडे की फिल्म नाम शबाना अक्षय कुमार स्टारर फिल्म बेबी की बैकस्टोरी होगी, जो एजेंट शाबाना, जिसे ताप्सी पन्नू प्ले कर रही हैं, उस पर बेस्ड होगी. बेबी फिल्म में भी ताप्सी ने अंडरकवर एजेंट का किरदार निभाया था.

बेबी की स्पिन-ऑफ नाम शबाना बॉलीवुड में पहली फिल्म होगी. स्पिन-ऑफ का मतलब है किसी फिल्म के छूटे हुए पहलुओं को जोड़कर एक नई फिल्म बना दी जाए. बेबी में ताप्सी का छोटा-सा रोल था, जबकि इस फिल्म में ताप्सी पर पूरी फिल्म आधारित होगी. मनोज बाजपयी भी फिल्म में काफ़ी अलग अंदाज़ में नज़र आ रहे हैं. देखें वीडियो.