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माला में क्यों होते हैं 108 दाने- जानें इसके हेल्थ बेनीफिट्स (The Importance Of Number 108)

क्या आपने कभी ग़ौर किया है कि जाप की सभी मालाओं में 108 दाने ही क्यों होते हैं? संख्या 108 ही क्यों है, 107 या 109 क्यों नहीं? आख़िर हिंदू धर्म में 108 का इतना ज़्यादा महत्व क्यों है? तो आइए जानते हैं संख्या 108 क्यों है, कहां से आई है, इसकी महत्ता क्या है और क्या हैं इसके हेल्थ बेनीफिट्स?

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संख्या 108 से जुड़ी मान्यताएं
संख्या 108 के उद्भव, महत्व व उपयोगिता से जुड़ी चार मान्यताएं प्रचलित हैं-

1. सूर्य से गहरा रिश्ता
पहली मान्यता के अनुसार मालाओं का सूर्य से बहुत गहरा रिश्ता होता है, इसीलिए उनमें 108 दाने होते हैं. इस मान्यता के अनुसार, सूर्य सालभर में कुल 2,16,000 कलाएं बदलता है. इस दौरान सूर्य दो बार अपनी स्थिति भी बदलता है यानी छह महीने उत्तरायण और बाकी छह महीने दक्षिणायन. इस तरह कह सकते हैं कि सूरज छह महीने में कुल एक लाख आठ हज़ार (1,08,000) बार कलाएं बदलता है. संख्या 1,08,000 से अंतिम तीन शून्य को हटा दें, तो अंक 108 बनता है. यह भी कहा जाता है कि सृष्टि में सूर्य ही एकमात्र साक्षात दिखनेवाले देवता हैं, इसलिए उनकी कलाओं के आधार पर संख्या 108 तय की गई है. किसी माला का हर दाना सूर्य की एक हज़ार
कलाओं का प्रतीक है यानी एक बार जाप करने पर
एक हज़ार गुना फल मिलता है. सूर्य ब्रह्मांड में ऊर्जा
का स्रोत है, इसीलिए यह व्यक्ति को ऊर्जा देकर उसे सेहतमंद बनाता है.

2. सांसों की संख्या दर्शाता है
दूसरी मान्यता के अनुसार माला के दानों की संख्या का निर्धारण एक पूर्ण तंदुरुस्त आदमी के दिनभर में सांस लेने की संख्या के मुताबिक़ हुआ है. अमूमन, एक व्यक्ति 24 घंटे में 21600 बार सांस लेता है यानी 12 घंटे में वह कुल 10800 बार सांस लेता है. शास्त्रों में कहा गया है कि 10800 बार मंत्रोच्चारण करते समय प्रभु को याद करना बहुत ज़रूरी है. चूंकि यह मुश्किल काम है, इसीलिए 10800 बार सांस लेने की संख्या से अंतिम दो शून्य हटाकर जाप के लिए 108 संख्या तय कर दी गई. इसी आधार पर माला में 108 दाने होते हैं. जैसा कि हम जानते हैं, सांस का संबंध सीधे हमारी सेहत से होता है. अगर आदमी की श्‍वसन प्रणाली दुरुस्त है, तो इसका मतलब है कि शरीर के लिए
आवश्यक ऑक्सीजन की पूर्ति हो रही है.

3. ग्रहों व राशियों की चाल का प्रभाव  
तीसरी मान्यता ज्योतिष के सिद्धांत पर आधारित है. ज्योतिष शास्त्र ब्रह्मांड को 12 राशियों में विभाजित करता है. इन 12 राशियों के नाम मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्‍चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन हैं. इन राशियों में नौ ग्रह सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु विचरण करते हैं. अत: 9 ग्रहों को 12 राशियों से गुणा करने पर संख्या 108 प्राप्त होती है और इसीलिए माला में 108 दाने होते हैं. ग्रहों व राशियों की चाल का सीधा प्रभाव हमारी सेहत पर पड़ता है, जिसे संतुलित रखने के लिए हमें 108 बार जाप करना पड़ता है.

4. नक्षत्रों  के चरणों पर आधारित
चौथी मान्यता भी ज्योतिष से ही संबंधित है. इसके अनुसार ज्योतिष शास्त्र में कुल 27 नक्षत्र बताए गए हैं. हर नक्षत्र के 4 चरण होते हैं और 27 नक्षत्रों के कुल चरण 108 ही होते हैं. माला का एक-एक दाना, नक्षत्र के एक-एक चरण का प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए लोग मंत्र जाप के लिए 108 दानोंवाली माला का इस्तेमाल करते हैं.

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वैज्ञानिक आधार भी हैं
संख्या 108 की महत्ता धार्मिक और ज्योतिष संबंधी मान्यताओं पर ही आधारित नहीं है, बल्कि इसके वैज्ञानिक आधार भी हैं. हर मान्यता के अनुसार मंत्र जाप के लिए 108 दानेवाली माला का ही प्रयोग करना चाहिए. इसकी महत्ता शास्त्रों में इस श्‍लोक के ज़रिए बताई गई-
षट्शतानि दिवारात्रौ सहस्राण्येकं विशांति।
एतत् संख्यान्तितं मंत्रं जीवो जपति सर्वदा॥
यानी किसी माला के दानों की संख्या 108 संपूर्ण ब्रह्मांड का प्रतिनिधित्व करती है और चूंकि हमारा शरीर इस ब्रह्मांड का ही हिस्सा है, इसलिए हम जितने ही ब्रह्मांड से जुड़े कॉस्मोलॉजी-फ्रेंडली होंगे, उतने ही तंदुरुस्त भी रहेंगे.

108 के हेल्थ बेनीफिट्स
–   जो व्यक्ति 108 दानों की माला से मंत्र का जप करता है, उसे अन्य के मुक़ाबले अधिक लाभ होता है.
–    मंत्र जप की माला रुद्राक्ष, तुलसी, स्फटिक, मोती या नगों जैसी मूल्यवान चीज़ों से बनी होती है, जिनका हमारी सेहत पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है.
–    रुद्राक्ष से बनी माला मंत्र जप के लिए सर्वश्रेष्ठ होती है, क्योंकि इसे महादेव का प्रतीक माना गया है. रुद्राक्ष में सूक्ष्म कीटाणुओं का नाश करने की शक्ति भी होती है. साथ ही, रुद्राक्ष वातावरण में मौजूद सकारात्मक ऊर्जा को ग्रहण करके साधक के शरीर में पहुंचा देता है.
–   दरअसल, जब माला लेकर किसी मंत्र का 108 बार जाप करते हैं, तो शरीर का ब्रह्मांड से साक्षात्कार होता है, जिसे कुछ लोग समझ जाते हैं, जबकि ज़्यादातर लोगों को मालूम ही नहीं पड़ता. जो जान जाते हैं, उन्हें इसका सबसे ज़्यादा हेल्थ बेनीफिट मिलता है. जो नहीं जान पाते, उन्हें थोड़ा कम, लेकिन सेहत संबंधी लाभ हर हाल में होता ही है.
–    चूंकि 108 की कनेक्टिविटी सीधे सूरज से है, इसलिए इससे जुड़ी हर चीज़ से हेल्थ लाभ होता है.
–    माला का जाप 108 बार करने के लिए सही तरीक़ा अपनाना चाहिए. हर माला में सबसे ऊपर सुमेरू होता है. जाप उसी से शुरू होता है और वहीं ख़त्म होता है. इस माला से जाप का मतलब है कि हम ब्रह्मांड के नियमों का पालन करते हैं यानी ब्रह्मांड-फ्रेंडली काम करते हैं, इसीलिए संख्याहीन मंत्रों के जप से फल नहीं मिलता, क्योंकि वह ब्रह्मांड से जुड़ा नहीं होता.
–    अब इसे भी संयोग ही कहेंगे न कि स्वास्थ्य सेवा के लिए देशभर में हर जगह ऐंबुलेंस का नंबर भी 108 ही है.

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पावर ऑफ हनुमान चालीसा (The Power Of Hanuman Chalisa)

नासे रोग हरे सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमंत बलबीरा॥hanuman
हनुमानजी और हनुमान चालीसा का हेल्थ कनेक्शन भी है. हनुमान चालीसा की चौपाई- नासै रोग हरै सब पीरा, जो सुमिरै हनमत बलबीरा- तंदुरुस्ती को समर्पित है. कहा जाता है कि जो लोग रोज़ाना कम से कम एक बार हनुमान चालीसा का जाप करते हैं, वे तंदुरुस्त जीवन व्यतीत करते हैं.

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हनुमानजी को संकटमोचक कहा जाता है. भगवान राम जब-जब संकट में पड़े, तब-तब हनुमानजी संकटमोचक बनकर सामने आए. इसीलिए हिंदू धर्म में हनुमान चालीसा का बहुत अधिक महत्व है. जब भी हम अंधेरे या सुनसान इला़के से गुज़रते हैं, हनुमानजी को याद करना नहीं भूलते. ज़्यादातर लोग हनुमान चालीसा पढ़ना शुरू कर देते हैं. मज़ेदार बात यह है कि जैसे ही हनुमान चालीसा पढ़ना शुरू करते हैं हमारा डर दूर हो जाता है. हमें नई ऊर्जा मिलती है. हनुमानजी सर्वशक्तिमान और एकमात्र ऐसे देवता हैं, जिनका नाम जपने से ही संकट शरीर और मन से दूर हटने शुरू हो जाते हैं.

अगर आप मानसिक अशांति से गुज़र रहे रहे हैं. कार्य की अधिकता के चलते आपका मन अस्थिर है, आपके घर-परिवार या रिश्तेदारी की कोई समस्या है तो आपकी समस्या का हल हनुमान चालीसा है. इसके पाठ से चमत्कारिक लाभ प्राप्त होता है. हिंदुओं की यह मान्यता है कि हनुमान चालीसा का पाठ करने पर डर, भय, संकट या विपत्ति नहीं आती और अगर आती है तो फ़ौरन दूर हो जाती है. कहते हैं, अगर किसी व्यभक्ति पर शनि के संकट की छाया है तो हनुमान चालीसा का पाठ करने से शनि का संकट दूर हो जाता है और जीवन में शांति का वास होता है.

हनुमान चालीसा की रचना गोस्वामी तुलसीदास ने की है. इसमें तीन दोहे और 40 चौपाइयां है. हनुमान चालीसा में हनुमानजी के जीवन का सार छुपा है जिसे पढ़ने से जीवन में प्रेरणा और शक्ति मिलती है. हनुमान चालीसा को सिर्फ़ तुलसीदास का विचार नहीं कहा जा सकता, बल्कि यह उनकी श्रद्धा और अटूट विश्वाचस है. जब औरंगज़ेब ने तुलसीदास को बंदी बना लिया था. तब अपने इसी विश्वाास के चलते तुलसीदासजी ने बंदीगृह में ही हनुमान चालीसा की रचना की थी.

कहते हैं, जब हर जगह भटकने के बाद भी शांति और सुख न मिले और संकटों का समाधान न हो, तब हनुमान चालीसा पढ़ना चाहिए. संकट से हनुमानजी की भक्ति ही बचा सकती है. इसीलिए जो पहले से ही हनुमान जी की शरण में हैं यानी हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं, उनका किसी भी प्रकार के संकट से साक्षात्कार नहीं होता. शास्त्रों अनुसार कलयुग में हनुमानजी की भक्ति को सबसे ज़रूरी और उत्तम बताया गया है.

भगवान हनुमानजी की भक्ति सबसे सरल और जल्द ही फल प्रदान करने वाली मानी गई है. हनुमान की सबसे बड़ी भक्ति हनुमान चालीसा का पाठ है. यह भक्ति हमें न केवल भूत-प्रेत जैसी अदृश्य आपदाओं से बचाती है, बल्कि यह ग्रह-नक्षत्रों के बुरे प्रभाव से भी बचाती है. व्यक्ति रोज़ाना नियमित रूप से हनुमान चालीसा पढ़ता है वह कभी संकट में नहीं पड़ता. कहते हैं भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त हनुमानजी अपने भक्तों और धर्म के मार्ग पर चलने वालों की हर क़दम पर सहायता करते हैं. हनुमान चालीसा बहुत प्रभावकारी है. इसकी सभी चौपाइयां मंत्र ही हैं. जिनके निरंतर जप से ये सिद्ध हो जाती है और पवनपुत्र हनुमानजी की कृपा प्राप्त हो जाती है. हनुमानजी को मनाने के लिए सबसे सरल उपाय है हनुमान चालीसा का नित्य पाठ. हनुमानजी की यह स्तुति सबसे सरल और सुरीली है.

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हनुमान चालीसा के लाभ
अगर किसी व्यक्ति को बुरी और अदृश्य शक्तियां परेशान करती हैं तो उसे नियमित रूप से रोज़ाना हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए. ऐसा करने से उसे पढ़ने से संकट से मुक्ति मिल जाती है.

  • अगर आपसे अनजाने में कोई अपराध हो गया. इसलिए ग्लानि महसूस करते हैं और क्षमा मांगना चाहते है तो चालीसा का पाठ करें. इसका पाठ आपको क्षमा करके आपको अपराध से मुक्त कर देगा.
  • भगवान गणेश की तरह हनुमानजी भी कष्ट हरते हैं. ऐसे में हनुमान चालीसा का पाठ करने से भी लाभ मिलता है. हनुमान चालीसा पढ़ने से मन शांत होता है तनाव मुक्त हो जाता है.
  • अगर आप कहीं यात्रा पर जा रहे हैं, तो ज़ाहिर तौर पर आप चाहेंगे कि यात्रा सुखद हो. ऐसे में हनुमान चालीसा पढ़ लेने से वाक़ई यात्रा सुरक्षित बीत जाती है और यात्रा के दौरान भय नहीं लगता.
  • कहते हैं, किसी भी तरह की अभिलाषा होने पर हनुमान चालीसा का पाठ करने से लाभ मिलता है. हनुमान चालीसा के पाठ से दैवीय शक्ति मिलती है. इससे सुकून मिलता है.
  • ऐसी मान्यता है कि कलियुग में एक मात्र हनुमानजी ही जीवित देवता हैं. यह अपने भक्तों और आराधकों पर सदैव कृपालु रहते हैं और उनकी हर इच्छा पूरी करते हैं.
  • हनुमानजी बुद्धि और बल के ईश्‍वर हैं. उनका पाठ करने से यह दोनों ही मिलते हैं. हनुमान चालीसा का पाठ करने से कुटिल से कुटिल व्यक्ति का मन भी अच्छा  हो जाता है.
  • हनुमान चालीसा का पाठ करने से एकता की भावना में विकास होता है. हनुमान चालीसा का पाठ करने से नकारात्मक भावनाएं दूर हो जाती हैं और मन में सकारात्मकता आती है.
  • हनुमानजी के बारे में यह भी कहा जाता है कि जहां कहीं भी रामकथा होती है हनुमान जी वहां किसी न किसी रूप में ज़रूर मौजूद रहते हैं.

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– हरिगोविंद विश्‍वकर्मा

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सफल होने के सक्सेस मंत्र (Success mantra)

मेरे पास गाड़ी है.. बंगला है.. बैंक बैलेंस है, तुम्हारे पास क्या है? अब अगर आप भी इस क्या का जवाब देना चाहते हैं और दूसरे लोगों की तरह जीवन में सफलता का परचम लहराना चाहते हैं, तो आइए हम आपको बताते हैं कुछ ऐसे मूल मंत्र, जिसे अपनाकर आप भी करियर में बुलंदियों को छू सकते हैं.(Success mantra)business-woman-clip-art-png-2PHDN0-clipart

जॉब बदलने से बचें
करियर काउंसलर मालिनी शाह के अनुसार, ङ्गङ्घआज की युवा पीढ़ी ज़्यादा सैलरी के चक्कर में एक साल भी किसी कंपनी में टिक नहीं पाती. ऐसे में कई बार वो अच्छे अवसर से चूक जाते हैं. सफलता पाने के लिए बहुत ज़रूरी है कि बिना सही समय आए जॉब न छोड़ें. बार-बार जॉब बदलने से आपकी सैलरी तो बढ़ जाएगी, लेकिन आप अपने आप पर फोकस नहीं कर पाएंगे. करियर में ठहराव बहुत ज़रूरी है. जब तक अच्छे विकल्प ना मिलें एक कंपनी से दूसरी कंपनी में जंप करना उचित नहीं है, स़िर्फ पैसों की ख़ातिर अच्छी कंपनी से जंप करना करियर के लिए नुक़सानदायक हो सकता है.फफ

काम में माहिर बनें
ङ्गजैक ऑफ ऑलफ बनने की बजाय ङ्गमास्टर ऑफ वनफ बनना आज की दुनिया में सफल होने का मूल मंत्र है. दो नाव की सवारी करने पर आप पानी में गिर सकते हैं. इसलिए जितना मुमक़िन हो अपने काम में महारत हासिल करें. आगे जिस क्षेत्र में आपको अपना करियर बनाना है, उसी पर पूरा ध्यान दें. दोस्तों या आसपास के लोगों के कहने में आकर हर क्षेत्र में क़िस्मत आज़माने की ग़लती न करें.

लक्ष्य से अवगत हों
करियर में सफल होने के लिए बहुत ज़रूरी है कि आप अपने लक्ष्य से भलीभांति अवगत हों. हवा में तीर मारने और बार-बार लक्ष्य बदलने की प्रक्रिया आपको सफलता से कोसों दूर कर देती है. ज़माना भले ही बदल गया हो, लेकिन आज भी सफलता पाने के लिए आपको अर्जुन की तरह लक्ष्यभेदी चिड़िया की आंख पर निशाना साधना होगा, तभी आप अपने जीवन में सफल हो पाएंगे.

डिक्शनरी से No शब्द मिटाएं
जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं. कभी जॉब से बहुत ज़्यादा उम्मीद तो कभी निराशा झलकती है और जॉब छोड़ने का मन करता है, लेकिन इन बातों से निराश नहीं होना चाहिए. आप कमज़ोर हैं या फिर उस काम को आप नहीं कर सकते. इस तरह की बेवजह व नकारात्मक बातों को अपने अंदर से निकाल दें. अपने मन के शब्दकोश से ङ्गनफ शब्द को हमेशा-हमेशा के लिए ख़त्म कर दें.

बी प्रैक्टिकल
व्यक्तिगत जीवन में इमोशनल होना अच्छी बात है, लेकिन कार्यक्षेत्र में प्रैक्टिकल होना बहुत ज़रूरी है. सफलता उसी को मिलती है जो कार्यस्थल पर प्रैक्टिकल रहता है. उदाहरण के लिए अगर आपकी पहली कंपनी सैलरी नहीं बढ़ा रही है और आपको किसी दूसरी कंपनी से अच्छा ऑफर मिल रहा है, तो तुरंत उस ऑफर की तरफ़ हाथ बढ़ाएं, न कि पहली कंपनी से जुड़ी अपनी यादों के घेरे में बंधे रहें.

अपनी क्षमता को ख़ुद पहचानें
राजू डॉक्टर बन गया… रमेश अमेरिका से मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रहा है या फिर पारुल बड़े फर्म में अच्छे पे स्केल पर नौकरी कर रही है. इस तरह की बातें सोचकर ख़ुद भी उसी राह पर चलने से पहले ज़रा सोचिए कि क्या आप भी अपने उन्हीं दोस्तों की ही तरह शैक्षणिक, मानसिक और आर्थिक रूप से सक्षम हैं? जीवन में सफल होने के लिए बहुत ज़रूरी है कि आप अपनी क्षमता को ख़ुद परखें और जानें कि आप कितने पानी में हैं? दूसरों के कहने पर बिना सोचे-समझे उठाया गया आपका हर क़दम आपको पीछे की ओर ले जाएगा.

अच्छा नहीं, सबसे अच्छा करने की ज़िद्द
बीत गए वो दिन जब लोग एक जॉब पाकर उसी से संतुष्ट हो जाते थे और सारी ज़िंदगी एक ही कंपनी में बिता देते थे. आज अगर आपको सफल होना है तो करियर का बेस्ट देने की सोचें. किसी भी कंपनी में काम करते हुए स़िर्फ अच्छा करके संतुष्ट होने की बजाय सबसे अच्छा करने की सोचें. जब तक आप अपने सहकर्मियों से अच्छा नहीं करेंगे आप भी उन्हीं की श्रेणी में रह जाएंगे.

प्रेरणादायक है असफलता
जिस तरह से ठोकर लगने पर आप चलना सीखते हैं, ठीक उसी तरह सफलता का असली आनंद तभी आता है, जब आप अपनी असफलता से सीख लेकर आगे बढ़ने की सोचते हैं और सफलता के क़रीब पहुंचते हैं. पहले की गई अपनी ग़लतियों से प्रेरणा लेकर भविष्य में अच्छा करने की कोशिश करें.

ख़ुद का बिज़नेस
करियर काउंसलर मालिनी शाह के अनुसार, 8 से 9 घंटे किसी और के यहां काम करके महीने के अंत में सैलरी लेने की प्रक्रिया को जितनी जल्दी हो सके ख़त्म करें. जीवन की दौड़ में सबसे आगे निकलना है, तो जल्द ही अपना बिज़नेस शुरू करें. इससे न स़िर्फ आपका प्रॉफिट बढ़ेगा, बल्कि आपका स्किल और कॉन्फिडेंस भी

अपने मिशन में क़ामयाब होने के लिए आपको अपने लक्ष्य के प्रति एकचित निष्ठावान होना पड़ेगा- अब्दुल कलाम

जीतने वाले अलग चीज़ें नहीं करते, वो चीज़ों को अलग तरह से करते हैं- शिव खेड़ा

– श्वेता सिंह

फिल्म स्टार्स के फिटनेस मंत्र (Fitness Mantra of Bollywood Film Stars)

Bollywood Film Stars

दीपिका पदुकोण
मेरा तो फिटनेस का सिंपल फंडा है- हेल्दी खाओ, हेल्दी रहो. मेरे लिए फिटनेस का मतलब स्लिम होना नहीं है, बल्कि फिज़िकली मज़बूत होना है. मेरे लिए एक्सरसाइज़ और हेल्दी फूड अधिक मायने रखता है. स्लिम रहने के लिए मैं कम नहीं, बल्कि हेल्दी खाने में विश्‍वास रखती हूं. हां, मैं जिम ज़रूर जाती हूं और कार्डियो एक्सरसाइज़ करती हूं. साथ ही मसल्स को मज़बूत बनाने के लिए वेट ट्रेनिंग भी करती हूं. मैं साइज़ जीरो को महत्व नहीं देती, क्योंकि यदि आप ख़ुद को कंफर्टेबल महसूस करते हैं, तो किसी भी साइज़ में कोई बुराई नहीं है.

प्रियंका चोपड़ा
मैं फिट रहने के लिए नियमित रूप से बैलेंस्ड फूड और वर्कआउट करती हूं. बॉडी को शेप में रखने के लिए हफ़्ते में कम से कम 5 दिन वर्कआउट करती हूं व योग भी करती हूं. मैं फ्रूट्स व वेजीटेबल्स अधिक खाती हूं. साथ ही पानी भी ख़ूब पीती हूं. हफ़्ते में चार बार जिम भी जाती हूं, जिसमें 15 मिनट ट्रेडमिल पर चलती हूं व उसके बाद 25 क्रन्चेज़ व पुशअप्स करती हूं. वर्कआउट में जंपिंग, सही वज़न के साथ बाइसेप्स कर्ल्स, पावर रनिंग करती हूं.

 

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करीना कपूर
मैं रेग्युलर पावर योगा करती हूं. योग ने मेरी ज़िंदगी ही बदल दी है. मैं हर रोज़ सुबह योग करती हूं, जिससे दिनभर ख़ुद को हेल्दी महसूस करती हूं. इसके अलावा मैं एक्सरसाइज़ और डायट का परफेक्ट कॉम्बिनेशन भी रखती हूं. दिन में एक घंटा एक्सरसाइज़ भी करती हूं.

कैटरीना कैफ
मेरा फिटनेस मंत्र है राइट डायट. इसके अलावा मैं जिम जाती हूं. लेकिन फिर भी मेरे ख़्याल से सही डायट के साथ-साथ सही समय पर भोजन करना भी ज़रूरी है. यानी राइट डायट ऑन राइट टाइम, क्योंकि यदि आप समय पर भोजन नहीं करते, तो इसका असर आपके हेल्थ, फिटनेस और मूड सब पर पड़ता है. मैं योग को भी बहुत महत्व देती हूं. मैं रेग्युलर और डिसिप्लिन के साथ योग अभ्यास करती हूं. मेरे वर्कआउट में जिम, वेट ट्रेनिंग व योग शामिल है. मैं फूड से अधिक लिक्विड यानी जूस, सूप, शरबत आदि अधिक लेती हूं, जिससे रिफ्रेश व फिट महसूस करती हूं.

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कंगना राणावत
मैं कितनी भी बिज़ी रहूं, पर एक्सरसाइज़ कभी मिस नहीं करती, यही मेरा फिटनेस सीक्रेट है. इसके अलावा फिट रहने के लिए सुबह जल्दी उठकर पावर योगा, प्राणायाम व मेडिटेशन करती हूं. साथ ही किक बॉक्सिंग भी करती हूं, ताकि स्टेमिना बढ़ सके.