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Wow! इस सुपरस्टार के साथ डेब्यू करेंगी मिस वर्ल्ड मानुषी छिल्लर (Miss World Manushi Chhillar to make Bollywood debut with Akshay Kumar)

मानुषी छिल्लर (Manushi Chhillar) ने साल 2017 में मिस वर्ल्ड (Miss World) का ख़िताब जीत कर इंडिया का नाम रोशन किया था. बॉलीवुड में प्रियंका चोपड़ा से लेकर रणवीर सिंह तक हर किसी ने इस अभिनेत्री को मिस वर्ल्ड बनने पर बधाई दी थी. इस क्राउन को जीतने के बाद से ही मानुषी छिल्लर के बॉलीवुड में आने की खबर बनी हुई हैं. कई मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो मानुषी रणवीर सिंह के साथ अपना बॉलीवुड में डेब्यू करने वाली थीं, लेकिन अब खबरों के अनुसार मानुषी रणवीर नही, बल्कि बॉलीवुड के खिलाड़ी अक्षय कुमार (Akshay Kumar) के साथ बॉलीवुड में कदम रख सकती हैं.

Miss World Manushi Chhillar

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अक्षय कुमार को पृथ्वीराज चौहान के लिए कास्ट किया गया हैं, जिसमें खिलाड़ी कुमार के अपोज़िट मानुषी छिल्लर को अप्रोच किया गया है. यह फिल्म यशराज बैनर तले बनेगी. खबरों के अनुसार, मानुषी छिल्लर को फिल्म ‘पृथ्वीराज चौहान’ पर बन रही बायोपिक के लिए साइन कर लिया गया है.  यह फिल्म एक ऐतिहासिक ड्रामा होगी जो कुछ महीनों बाद फ्लोर पर जाएगी.  रिपोर्ट्स के अनुसार, इस फिल्म में मानुषी संयुक्ता का किरदार निभाते हुए नज़र आएंगी, फिल्म में अक्की मिस वर्ल्ड के साथ रोमांस करते हुए नजर आएंगे. निर्देशक-निर्माता आदित्य चोपड़ा का मानना है कि मानुषी का स्क्रीन प्रेजेंस बहुत अच्छा हैं. इन-दिनों मानुषी भी एक्टिंग की वर्कशॉप भी कर रही हैं और अपनी एक्टिंग स्किल्स पर फोकस कर रही हैं.

Akshay Kumar

Manushi Chhillar

Manushi Chhillar

इससे पहले मानुषी के डेब्यू की खबर रणवीर सिंह के अलावा शाहरुख़ खान के साथ भी आई थी. खबर तो ये भी थी कि दीपिका पादुकोण की तरह ही मानुषी को भी फराह खान अपनी फिल्म से एक बड़ा ब्रेक देंगी. रिपोर्ट्स की मानें तो मानुषी को और एक बड़ा प्रोजेक्ट मिल चुका है, हालांकि अब तक किसी स्टार का नाम इस फिल्म के लिए सामने नही आया है. मानुषी ने रणवीर सिंह के साथ फिल्म तो नही की लेकिन उन्होंने इस अभिनेता के साथ एक ब्रांड शूट ज़रूर किया. ‘पृथ्वीराज चौहान’ पर बन रही बायोपिक का निर्देशन चंद्रप्रकाश द्विवेदी कर रहे हैं.

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Women’s Day Special: हमें नाज़ है इन पर! (Inspiring Women Achievers You Must Know About)

निगाहों से छलके वो क़तरे अब नहीं हैं उसकी पहचान… ख़ामोशी को छोड़ उसने छू लिया है आसमान… पथरीली राहों पर चलना अब लगता है उसे आसान, हौसला और हिम्मत ही है अब उसकी असली पहचान… लोगों ने कहा छोड़ दे यह रास्ता, इससे तेरा क्या वास्ता… उसने कहा, साहस ही मेरा दूसरा नाम, तुमने अब तक पहचाना नहीं मुझे, लेकिन फूलों का आंगन छोड़, मैंने कांटों का लिया है दामन थाम… मुश्किलों से मुझे डर नहीं लगता, अड़चनें मुझे लुभाती हैं… हां औरत हूं मैं और अब हर चुनौती मुझे भाती है…

 

Inspiring Women Achievers

आज के दौर में महिलाएं हर क्षेत्र में अपने अस्तित्व की पहचान बना चुकी हैं, ऐसे में वुमन्स डे यानी महिला दिवस के अवसर पर हम भी उनके जश्‍न में शामिल हैं और उन्हें सलाम करते हैं. हमारे देश में भी महिला एचीवर्स की कमी नहीं है, उन्हीं में से कुछ का ज़िक्र हम अपने पन्नों पर कर रहे हैं, लेकिन हमारे दिलों में सभी के लिए प्यार और सम्मान है.

अंशु जमसेंपा

हौसले बुलंद हों, तो नामुमकिन कुछ भी नहीं. अंशु इसकी जीती-जागती मिसाल हैं. अंशु दुनिया की पहली ऐसी महिला हैं, जिन्होंने एक ही सीज़न में दो बार एवरेस्ट के शिखर पर चढ़ाई की. अंशु ने मात्र 5 दिनों के अंतराल पर ही यह कारनामा कर दिखाया. अरुणाचल प्रदेश की रहनेवाली अंशु दो बच्चों की मां हैं. अंशु के इस वर्ल्ड रिकॉर्ड पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी दंग हैं और उन्होंने भी ट्वीट करके उन्हें बधाई दी थी. अंशु कुल मिलाकर 4 बार माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहरा चुकी हैं. उम्मीद है, अंशु इसी तरह देश का तिरंगा सबसे ऊंचाई पर फहराती रहेंगी और हमें गौरवान्वित करती रहेंगी.

अनीता कुंडू

बात जब महिला पर्वतारोहियों की ही चल रही है, तो हम अनीता कुंडू को कैसे भूल सकते हैं. अनीता कुंडू पहली भारतीय महिला बनीं, जिन्होंने चाइना साइड से माउंट एवरेस्ट फतेह किया और देश का सीना गर्व से चौड़ा किया. हरियाणा के हिसार में 29 वर्षीया अनीता सब इंस्पेक्टर हैं और उनकी उपलब्धि पर हरियाणा के मुख्यमंत्री ने भी ट्वीट करके बधाई दी. इसके अलावा अनीता कुंडू चीन और नेपाल दोनों तरफ़ से माउंट एवरेस्ट पर चढ़नेवाली पहली भारतीय महिला भी बनीं. अनीता ने दो वर्ष पहले भी यह कोशिश की थी, लेकिन भूकंप के कारण मिशन अधूरा छोड़ना पड़ा. वर्ष 2017 की 11 अप्रैल को अनीता ने फिर यह मिशन शुरू किया. इसी बीच यह ख़बर भी आई कि अनीता से पूरी तरह संपर्क टूट चुका है, लेकिन 20 अप्रैल को ख़बर मिली कि वो अपनी मंज़िल के क़रीब हैं और अगले ही दिन उन्होंने सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराया.

साहिथी पिंगली

बैंगलुरू की इस टीनएजर और 12वीं की छात्रा ने एक अनोखी उपलब्धि हासिल की है. मिल्की वे के एक ग्रह का नाम साहिथी के नाम पर रखा जाएगा. साहिथी ने इंटेल इंटरनेशनल साइंस एंड इंजीनियरिंग फेयर (आईएसईएफ) में गोल्ड मेडल जीतकर यह उपलब्धि हासिल की है. इस छोटी उम्र में इतना बड़ा मुक़ाम हासिल कर साहिथी ने देश का सीना गर्व से ऊंचा कर दिया. साहिथी ने बैंगलुरू की झीलों के प्रदूषण पर शोध कार्य किया था. साहिथी ने अपने पेपर्स आईएसईएफ कॉम्पटीशन में रखे. यह फेयर दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे सम्मानित प्री कॉलेज स्तर का साइंस कॉम्पटीशन माना जाता है. साहिथी ने अपने पेपर्स- ‘एन इनोवेटिव क्राउडसोर्सिंग अप्रोच टु मोनिटरिंग फ्रेश वॉटर बॉडीज़’ फेयर में प्रेज़ेंट किए और उसे गोल्ड मेडल मिला. साहिथी ने एक ऐप डेवलेप किया है और इस रिसर्च में उन तत्वों के बारे में बताया गया है, जो झीलों के प्रदूषण में बड़ी भूमिका निभाते हैं. पर्यावरण संरक्षण के हिसाब से यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है और इसी के मद्देनज़र एमआईटी यानी मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की लिंकन लैबोरेटरीज़ ने साहिथी के नाम पर एक छोटे ग्रह का नाम रखने का निर्णय लिया.

झूलन गोस्वामी

झूलन का नाम आज बच्चे-बच्चे की ज़ुबान पर है. चंद साल पहले तक महिला क्रिकेटर्स को कोई भी गंभीरता से नहीं लेता था, लेकिन वर्ल्ड कप के फाइनल में अपनी जगह बनाने के बाद और जीत का जज़्बा दिखाने के बाद हर महिला क्रिकेटर सबकी फेवरेट बन चुकी हैं. इन्हीं में से एक नाम झूलन का भी है. झूलन की उपलब्धि बहुत बड़ी है. आज की तारीख़ में वो विश्‍व में सर्वश्रेष्ठ महिला गेंदबाज़ का ख़िताब हासिल कर चुकी हैं. झूलन वनडे में 200 विकेट्स हासिल करनेवाली पहली महिला गेंदबाज़ भी बन गईं. देश को इन पर नाज़ है.

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मिताली राज

झूलन की ही तरह मिताली भी सबकी आंख का तारा बन चुकी हैं. मिताली न स़िर्फ भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हैं, बल्कि एकदिवसीय क्रिकेट में विश्‍व में सर्वाधिक रन बनानेवाली खिलाड़ी भी हैं. 6000 से अधिक रन बनानेवाली वो एकमात्र महिला क्रिकेटर हैं. वो एकमात्र ऐसी खिलाड़ी भी हैं, जिन्होंने एकदिवसीय खेल में लगातार 7 बार हाफ सेंचुरी बनाई. मिताली ही एकमात्र ऐसी क्रिकेटर हैं (पुरुष व महिला दोनों में) जिन्होंने आईसीसी वर्ल्ड कप फाइनल में दो बार भारत का प्रतिनिधित्व किया. वर्ष 2005 के बाद वर्ष 2017 में भी मिताली के प्रतिनिधित्व में भारतीय महिला टीम वर्ल्ड कप फाइनल में पहुंची. 10 वर्ष की उम्र से ही क्रिकेट खेल रहीं मिताली का जन्म तमिल परिवार में हुआ था और आज पूरे भारत को उन पर नाज़ है.

महिला बाइकर्स ने दिखाए ख़तरनाक स्टंट

इस साल गणतंत्र दिवस यानी 26 जनवरी 2018 की परेड में पुरुषों की बजाय सीमा सुरक्षा बल की महिला बाइकर्स ने अपने जौहर दिखाए. यह पहली बार हुआ और सभी इनके दमखम के आगे नतमस्तक हो गए. बीएसएफ की 113 महिला बाइकर्स ने 350 सीसी की रॉयल एनफील्ड बाइक्स पर एरोबेटिक्स व अन्य कलाबाज़ियां दिखाकर सबका दिल भी जीत लिया और इस गणतंत्र दिवस को और भी ख़ास बना दिया. उनके हुनर, कौशल और साहस को हम भी सलाम करते हैं.

आईएनएस तारिणी की महिला स्क्वैड

महिला सशक्तिकरण और समुद्र में महिलाओं की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए भारतीय नौसेना ने दुनिया भ्रमण के लिए ऑल वुमन टीम भेजने का निर्णय लिया था, जिसमें उनका साथी बना आईएनएस तारिणी. यह नौकायन पोत लेटेस्ट सैटलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम से लैस है. इस प्रोजेक्ट के लिए छह महिला ऑफिसर्स की टीम चुनी गई है, जिसका नेतृत्व कर रही हैं लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी. उनका यह समुद्री विश्‍व भ्रमण इसी वर्ष यानी 2018 मार्च के अंत तक पूरा होने का अनुमान है.

आंचल ठाकुर

स्कीइंग जैसे स्पोर्ट्स में भारत में शायद ही किसी को दिलचस्पी हो, लेकिन आंचल ठाकुर ने इंटरनेशनल स्तर पर स्कीइंग प्रतियोगिता में ब्रॉन्ज़ मेडल जीतकर न स़िर्फ इतिहास रच दिया, बल्कि सरकार व लोगों का ध्यान भी अपनी ओर खींचा. आंचल यह मुकाम हासिल करनेवाली पहली भारतीय हैं. आंचल ने एल्पाइन एज्डेर 3200 कप में ब्रॉन्ज़ जीता, जिसका आयोजन स्की इंटरनेशनल फेडरेशन करता है. आंचल ने जीत के बाद ट्वीट किया था कि ‘आख़िर ऐसा कुछ हो गया, जिसकी उम्मीद नहीं थी. मेरा पहला इंटरनेशनल मेडल. हाल ही में तुर्की में ख़त्म हुए फेडरेशन इंटरनेशनल स्की रेस (ऋखड) में मैंने शानदार परफॉर्म किया.’ ज़ाहिर है आंचल की यह उपलब्धि बेहद ख़ास है, क्योंकि विंटर स्पोर्ट्स को हमारे देश में ख़ास तवज्जो नहीं दी जाती. न तो उसका कोई कल्चर है, न ही इतनी सुविधाएं, लेकिन आंचल की जीत ने इस दिशा में भी उम्मीद जगाई है और उम्मीद है आगे और भी ऐसे मेडल्स हमारे देश की बेटियां लाएंगी.

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मानुषी छिल्लर

भारत की मानुषी छिल्लर ने मिस वर्ल्ड 2017 का ख़िताब जीता और एक बार फिर दुनिया ने माना कि भारत है टैलेंट और खूबसूरती के संगम का सबसे बेहतरीन स्रोत. चीन में आयोजित मिस वर्ल्ड पेजेंट में भारत की सुंदरी मानुषी ने ये टाइटल जीतकर देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया. मिस वर्ल्ड 2017 ब्यूटी पेजेंट में कुल 118 हसीनाओं ने हिस्सा लिया था, जिसमें मानुषी ने बाज़ी मार ली. हरियाणा के सोनीपत की रहनेवाली मानुषी मेडिकल की स्टूडेंट हैं और फाइनल राउंड में मानुषी से जूरी ने ट्रिकी सवाल पूछा था कि किस प्रोफेशन में सबसे ज़्यादा वेतन मिलना चाहिए, जिसका जवाब मानुषी ने बड़ी ही समझदारी से दिया कि मां को सबसे अधिक सम्मान मिलना चाहिए. मां को सैलरी या कैश की ज़रूरत नहीं, उन्हें सम्मान और प्यार मिलना चाहिए. उनके इस जवाब ने सबका दिल जीत लिया और मिस वर्ल्ड का ख़िताब भारत के नाम हो गया.

भवानी देवी

तलवारबाज़ी एक प्राचीन कला है और उसे मॉडर्नाइज़ करके फेंसिंग खेल के रूप में अब खेला जाता है. भारत की भवानी देवी वाक़ई अपने नाम को सार्थक सिद्ध करके तलवारबाज़ी यानी फेंसिंग में गोल्ड मेडल जीतनेवाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनीं. भवानी चेन्नई की रहनेवाली हैं और स्कूल के दिनों से ही वो इस खेल में अपना भविष्य तलाश रही थीं. 2017 में आइसलैंड में हुई तलवारबाज़ी की प्रतियोगिता में भवानी ने सीधे गोल्ड पर निशाना साधा और देश को सिर ऊंचा करने का एक और मौक़ा दिया. भवानी नेे तीसरी बार इस चैंपियनशिप में भाग लिया था, लेकिन इस साल उनकी मेहनत रंग लाई. इससे पहले भवानी एशियाई और राष्ट्रमंडल खेलों में भी पदक जीत चुकी हैं, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शिखर पर पहुंचने का सुकून ही अलग होता है.

ख़ास बातचीत…

श्रावणी मिश्रा और सुनीती बाला ने सेलिंग करियर में दिखाया ग़ज़ब का हौसला: जी हां, हम श्रावणी मिश्रा और सुनीती बाला जैसी मरीन इंजीनियर्स की बात कर रहे हैं, जिन्होंने पुरुषों के दख़लवाले क्षेत्र में ख़ुद को साबित किया और एक अलग मुक़ाम हासिल किया. सुनीती ने हमें बताया कि उनके बैच में कुल दो ही महिला स्टूडेंट्स थीं. ऐसे में यह किसी चुनौती से कम नहीं था, क्योंकि हर किसी की नज़र हम पर ही रहती थी, यहां तक कि हमारे प्रोफेसर्स की भी कि हम कैसा परफॉर्म कर रही हैं, कितनी गंभीर हैं अपने करियर को लेकर आदि.
धीरे-धीरे सबको भरोसा हो गया. फिर बारी आई अगली चुनौती की. शिप पर बोर्ड करते समय भी मुझे हर पल यह साबित करना पड़ता था कि हां, मैं पुरुषों के समान ही परफॉर्म कर सकती हूं, बल्कि उनसे बेहतर हूं. चूंकि मेरे परिवार का बहुत सपोर्ट था, तो मैं हर चुनौती पार कर गई.

इंटरनेशनल वुमन सीफेयरर्स फाउंडेशन… एक बेहतरीन पहल 

सुनीती कहती हैं शिपिंग करियर बेहद अलग और सम्मोहक है. वो आपको फाइटर बनाता है और विपरीत परिस्थितियों में सरवाइव करना सिखाता है. मैं ख़ुद एक ट्रेंड फायर फाइटर भी हूं, जिससे मुझे काफ़ी मदद मिलती है.आप दुनिया की सैर कर सकती हैं, पॉल्यूशन फ्री माहौल में काम कर सकती हैं, तो लड़कियों को इस क्षेत्र में भी करियर ज़रूर आज़माना चाहिए. यही वजह है कि हमने इंटरनेशनल वुमेन सीफेयरर्स फाउंडेशन की स्थापना की, ताकि लिंग से संबंधित डर, भेदभाव जैसी चीज़ें कम हो सकें. मैं हर बार जब भी नया शिप जॉइन करती हूं, तो हर बार मुझे ख़ुद को साबित करना पड़ता है, क्योंकि मेरे पुरुष साथी मेरी परफॉर्मेंस को लेकर इतने आश्‍वस्त नहीं होते, उनके मन में स़िर्फ इसलिए शंका होती है, क्योंकि मैं लड़की हूं, पर मेरा काम देखकर उनकी शंकाएं स्वत: ही दूर हो जाती हैं. इसलिए ऐसी कोई चुनौती नहीं, जिनका सामना करके जीता न जा सके.

श्रावणी भी यही कहती हैं कि परिवार की तरफ़ से पूरा सपोर्ट था. 120 के बैच में मात्र दो ही लड़कियों का होना यही बताता है कि अभी भी लड़कियां इस क्षेत्र में करियर को लेकर बहुत उत्साहित नहीं हैं, क्योंकि ज़ाहिर है चुनौतियां हैं इसमें, लेकिन अगर आपको चुनौतियां पसंद हैं, तो आपको कोई रोक नहीं सकता. हमारे साथ जो लड़के पढ़ते थे, वो भी पारंपरिक भारतीय सोच में पले-बढ़े थे, लेकिन एक समय के बाद सभी ने यह माना कि लड़के-लड़की का भेदभाव किसी भी क्षेत्र में नहीं होना चाहिए. पर हां, भारत में आज भी इतनी खुली सोच नहीं है कुछ क्षेत्रों को लेकर, क्योंकि हमें बहुत-सी कंपनियां नौकरी देने में हिचक रही थीं, क्योंकि उन्हें लगता है कि लड़कियां शिपिंग के माहौल में काम नहीं कर पाएंगी. वहां की चुनौतियों को हैंडल नहीं कर पाएंगी. साथ ही अब तक सही पॉलिसीज़ भी नहीं बन पाई हैं, जिससे लड़कियों को इसमें अधिक बढ़ावा नहीं मिला. कॉलेज में एडमिशन को लेकर कोई भेदभाव नहीं है, यहां तक कि सरकार लड़कियों को डिस्काउंट भी देती है, फिर भी हमारा समाज अब तक कुछ चीज़ों को लेकर आज भी हिचकिचाता है. लिंग के आधार पर समानता अब भी उनकी सोच से मेल नहीं खाती. यही वजह है कि हमने इंटरनेशनल वुमेन सीफेयरर्स फाउंडेशन की स्थापना की, ताकि लिंग आधारित डर व भेदभाव कम हो सके.

इनका ज़िक्र भी है ज़रूरी…
  • महिला क्रिकेटर्स में पूनम राउत, दीप्ति शर्मा, हरमनप्रीत कौर व अन्य सभी ने अपने-अपने स्तर पर सराहनीय काम किया है.
  • बॉक्सिंग में मेरी कॉम, बैडमिंटन में पीवी सिंधु और साइना नेहवाल, टेनिस में सानिया मिर्ज़ा… ये तमाम ऐसे नाम हैं, जिनकी उपलब्धियों को मात्र किसी एक वर्ष में बांधकर या सीमित करके नहीं देखा जा सकता, ये उससे भी ऊपर उठ चुकी हैं और लगातार उम्दा प्रदर्शन करके देश का नाम रोशन कर रही हैं.
  • महिला आईस हॉकी टीम ने भी अपनी पहली अंतर्राष्ट्रीय जीत दर्ज की.
  • डॉक्टर नीरू चड्ढा पहली भारतीय महिला हैं, जो इंटरनेशनल ट्रीब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ सी की न स़िर्फ सदस्य बनीं, बल्कि वो जज चुनी गईं.
  • आईसीआईसीआई बैंक की एमडी और सीईओ चंदा कोचर पहली ऐसी भारतीय महिला बनीं, जिन्हें ग्लोबल कॉर्पोरेट सिटिज़नशिप के लिए अमेरिका के टॉप अवॉर्ड (वुड्रो विल्सन अवॉर्ड) से नवाज़ा गया.
  • पेप्सीको की चेयरपर्सन और सीईओ इंदिरा नुई भी पहली ऐसी महिला बनीं, जिन्हें आईसीसी ने इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के तौर पर नियुक्त किया.

– गीता शर्मा

भारत की मानुषी छिल्लर बनीं मिस वर्ल्ड 2017 (India’s Manushi Chhillar Wins Miss World 2017)

India, Manushi Chhillar, Wins Miss World 2017

India, Manushi Chhillar, Wins Miss World 2017

  • भारत की मानुषी छिल्लर (Manushi Chhillar) ने जीत लिया है मिस वर्ल्ड 2017 (Miss World 2017) का ख़िताब और एक बार फिर दुनिया ने मान लिया कि भारत है टैलेंट और खूबसूरती के संगम का सबसे बेहतरीन स्रोत…
  • चीन में आयोजित मिस वर्ल्ड पेजेंट में भारत की सुंदरी मानुषी ने ये टाइटल जीतकर देश का सर गर्व से ऊंचा कर दिया.
  • मिस वर्ल्ड 2017 ब्यूटी पेजेंट में कुल 118 हसीनाओं ने हिस्सा लिया था, जिसमें मानुषी ने बाज़ी मार ली.
  • उन्हें ढेरों शुभकामनाएं.

India, Manushi Chhillar, Wins Miss World 2017

 

  • मानुषी मेडिकल की स्टूडेंट हैं और हरियाणा के सोनीपत की रहनेवाली हैं.
  • फाइनल राउंड में मानुषी से जूरी ने ट्रिकी सवाल पूछा था कि किस प्रोफेशन में सबसे ज़्यादा वेतन मिलना चाहिए , जसका जवाब मानुषी ने बड़ी ही समझदारी से दिया कि मां को सबसे अधिक सम्मान मिलना चाहिए… मां को सैलरी या कैश की ज़रुरत नहीं, उन्हें सम्मान और प्यार मिलना चाहिए.
  • कांटेस्ट में दूसरे और तीसरे स्थान पर रही क्रमशः मिस मैक्सिको और मिस इंग्लैंड.

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