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न्यूली मैरिड के लिए शादी से जुड़ी आवश्यक क़ानूनी सलाहें (Legal Things To Do For Newly Married Couples)

शादी के बाद लड़की की ज़िंदगी ही नहीं बदलती, ज़्यादातर मामलों में उसका सरनेम भी बदल जाता है. अगर शादी के पहले ही शादी के बाद होनेवाली ज़रूरी क़ानूनी बदलावों के बारे में जान-समझ लें, तो हर तरह की काग़ज़ी कार्यवाही आसान हो जाती है. बहुत-से लोग इसे अहमियत नहीं देते और जब ज़रूरत आ पड़ती है, तब भागदौड़ शुरू कर देते हैं. ऐसी स्थिति आपके सामने न आए, इसलिए शादी से जुड़ी ज़रूरी क़ानूनी सलाह को समझें.

Newly Married Couples

लड़कियां अपनी शादी को परफेक्ट बनाने के लिए सारी तैयारियां करती हैं, पर शादी के बाद विवाह को क़ानूनी मान्यता देने जैसे महत्वपूर्ण काम को अनदेखा कर देती हैं. मैरिज सर्टिफिकेट आपकी शादी का महज़ क़ानूनी गवाह नहीं, बल्कि भविष्य में होनेवाली किसी भी अनहोनी परिस्थिति में आपके लिए कवच की तरह काम करता है. वैसे भी वर्ष 2006 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे अनिवार्य घोषित कर दिया है. इसलिए इसकी पूरी जानकारी रखना बहुत ज़रूरी है.

शादी का रजिस्ट्रेशन/मैरिज सर्टिफिकेट

हमारे देश में शादी का रजिस्ट्रेशन द हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 या फिर द स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 के तहत किया जाता है. जहां हिंदू मैरिज एक्ट में पहले से हुई शादी का रजिस्ट्रेशन कर मैरिज सर्टिफिकेट प्राप्त किया जाता है, तो वहीं स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी व उसका रजिस्ट्रेशन दोनों एक साथ किया जाता है.

स्पेशल मैरिज एक्ट- शादी/रजिस्ट्रेशन

इसे आमतौर पर कोर्ट मैरिज कहते हैं. इसमें विवाह के इच्छुक लोगों को अपने इलाके के मैरिज ऑफिसर या सब रजिस्ट्रार को नोटिस देनी पड़ती है. याद रहे, दोनों में से कोई एक उस स्थान पर 30 दिनों से रह रहा हो. इसके बाद मैरिज ऑफिसर से उन्हें एक महीने का नोटिस पीरियड मिलता है, जिसके ख़त्म होने पर तय दिन व समय पर शादी व उसका रजिस्ट्रेशन दोनों एक साथ किया जाता है.

रजिस्ट्रेशन के लिए डॉक्यूमेंट्स

– शादी के 1 महीने के भीतर ही रजिस्ट्रेशन करवाना चाहिए. अपने माता-पिता/गार्जियन और गवाहों के साथ आपको रजिस्ट्रार के ऑफिस में जाना पड़ता है.

– इस दौरान जो रजिस्ट्रेशन नहीं करा पाते हैं, उन्हें क्षमादान के साथ 5 साल के भीतर रजिस्ट्रार के पास यह प्रक्रिया पूरी करवानी पड़ती है.

– इसके लिए आप दोनों को बर्थ प्रूफ, रेसिडेंस प्रूफ, शादी की पूरी जानकारी वाला एफिडेविट, पति-पत्नी के पासपोर्ट साइज़ फोटोग्राफ्स, शादी की एक फोटो, शादी का निमंत्रण कार्ड आदि डॉक्यूमेंट्स की ज़रूरत पड़ेगी.

– रजिस्ट्रेशन के 7-90 दिनों के भीतर आपका मैरिज सर्टिफिकेट मिल जाता है.

सरनेम बदलना

हर महिला को यह अधिकार है कि वो शादी के पहलेवाला अपना सरनेम बनाए रख सकती है, पर ज़्यादातर महिलाएं क़ानूनी झंझटों से बचने के लिए सरनेम बदलवा ही लेती है. अगर आप भी अपना सरनेम बदलना चाहती हैं, तो आपको ये टिप्स.

– मैरिज सर्टिफिकेट मिलने के बाद सरनेम बदलने के लिए आपको राज्य सरकार के गैज़ेट ऑफिस में जाकर सरनेम बदलने के लिए आवेदन देना पड़ता है.

– सरनेम बदलने के बाद आपके बदले हुए नाम को ऑफिशियल बनाने के लिए किसी स्थानीय समाचार पत्र में प्रकाशित किया जाता है.

– उस समाचार पत्र की कॉपी आपको हमेशा संभलाकर रखनी चाहिए. भविष्य में उसे आप लीगल डॉक्यूमेंट के तौर पर इस्तेमाल कर

सकते हैं.

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Documents Change

ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स में बदलाव

एक बार सरनेम में बदलाव हो जाए, तो आपको अपने सभी ज़रूरी काग़ज़ातों पर इसे बदलना पड़ता है. याद रहे, जब भी डॉक्यूमेंट्स में सरनेम बदलवाएं, आधे-अधूरे नहीं, बल्कि सभी में बदलवाएं.

पैन कार्ड: आजकल ज़्यादातर फाइनेंशियल  ट्रांज़ैक्शन्स के लिए आपको पैनकार्ड की ज़रूरत पड़ती है. ऐसे में मैरिज सर्टिफिकेट मिलते ही अपना पैनकार्ड अपडेट करवाएं.

– पैनकार्ड पर सरनेम बदलने की प्रक्रिया नया पैनकार्ड लेने जैसे ही है.

– इसके लिए आपको पैनकार्ड नेम करेक्शन का फॉर्म भरकर साथ में पुराने पैनकार्ड का नंबर और मैरिज सर्टिफिकेट या ऑफिशियल गर्वंमेंट गैज़ेट की कॉपी जमा करनी होगी.

– इसके अलावा आप जॉइंट नोटराइज़्ड एफिडेविट जमा करके भी पैनकार्ड अपडेट कर सकते हैं.

– पैनकार्ड अपडेट होने पर अपने इन्कम टैक्स पेपर्स अपडेट करना ना भूलें.

बैंक अकाउंट्स: आपका अगला क़दम बैक अकाउंट्स को अपडेट करना है. यहां

आपको अपने नाम के साथ-साथ नए पते को भी अपडेट कराना होगा.

– नाम बदलने के लिए आपको एक फॉर्म भरकर देना होगा और साथ ही में मैरिज सर्टिफिकेट की कॉपी और ऑफिशियल गर्वंमेंट गैज़ेट जमा करना होगा.

– एड्रेस बदलने के लिए आपको अपने पति के एड्रेस प्रूफ और पासपोर्ट की कॉपी जमा करनी होगी.

पासपोर्ट: चाहे बात आइडेंटिटी प्रूफ की हो या रेसिडेंशियल प्रूफ की, पासपोर्ट सबसे बेस्ट लीगल प्रूफ है. अपने पुराने पासपोर्ट को अपडेट करने के लिए-

– आपको पासपोर्ट री-इश्यू के लिए अप्लाई करना होगा.

– इसके साथ आपको आपका मैरिज सर्टिफिकेट और पुराना ओरिजनल पासपोर्ट, पासपोर्ट की सेल्फ अटेस्टेड कॉपी और पति के पासपोर्ट की कॉपी भी जमा करनी होगा.

फाइनेंशियल डॉक्यूमेंट्स: शादी के बाद आपको अपने फाइनेंशियल डॉक्यूमेंट्स, जैसे- इन्वेस्टमेंट्स, इंश्योरेंस, लोन आदि के डॉक्यूमेंट्स को भी अपडेट करना होगा.

– इन्वेस्टमेंट्स, जैसे- म्यूचल फंड, पोस्ट ऑफिस, स्टॉक्स बॉन्ड आदि को अपडेट करें. – पर्सनल या हाउसिंग लोन आदि से जुड़े सभी डॉक्यूमेंट्स पर सरनेम ज़रूर बदलवाएं.

– सभी के साथ लाइफ इंश्योरेंस, मेडीक्लेम आदि को भी अपडेट करें. अगर आप किसी और की इंश्योरेंस पॉलिसी में नॉमिनी हैं, तो उसे भी

अपडेट ज़रूर कराएं. इन सभी के लिए आपका मैरिज सर्टिफिकेट और पति का रेसिडेंशियल प्रूफ जमा करना है.

प्रॉपर्टी: आजकल लड़कियां आत्मनिर्भर होती हैं, इसलिए प्रॉपटीज़ आदि की पूरी जानकारी संभालकर रखती हैं. अगर आप भी किसी प्रॉपर्टी की मालकिन या वारिस हैं, तो शादी के बाद उन डॉक्यूमेंट्स को अपडेट करना न भूलें. प्रॉपर्टी से जुड़े पेपर्स के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने लीगल एडवाइज़र से मिलें.

वोटिंग कार्ड: यह भी एक बहुत ज़रूरी आइडेंटिटी और रेसिडेंशियल लीगल प्रूफ है. शादी के बाद नेम करेक्शन का फॉर्म भरकर आप अपना नाम चेंज करा सकती हैं. इसके अलावा अपने ससुराल के  इलेक्टोरल रोल में भी आपको अपना नाम दर्ज कराना होगा.

ये छोटी-छोटी बातें बहुत मायने रखती हैं, इसलिए शादी के बाद इन सभी ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स को अपडेट कराएं. हमेशा ध्यान रखें, आपके सभी डॉक्यूमेंट्स पर आपका एक जैसा नाम होना चाहिए.

एनआरआई दूल्हे के मामले में

पिछले कुछ सालों में एनआरआई शादियों में जिस तरह की धोखाधड़ी सामने आई है, बहुत-से पैरेंट्स अपनी बेटियों की सुरक्षा के लिए ऐसे रिश्तों को कम तवज्जों दे रहे हैं. पर इसका यह कतई मतलब नहीं कि सभी एनआरआई लड़कों को शक के घेरे में खड़ा कर दें, पर अपने सुरक्षित भविष्य के लिए थोड़ी सावधानी ज़रूर बरतें.

– शादी से पहले लड़के के बारे में पूरी छानबीन करें. उसका नाम, पता, सोसाइटी में इमेज आदि सोशल मीडिया के ज़रिए या फिर वहां स्थित इंडियन ऐम्बसी के ज़रिए पता करें.

– अगर आप किसी और धर्म के लड़के से शादी कर रही हैं और शादी के बाद धर्म बदलना आदि प्रक्रिया है, तो शादी से पहले अपने लीगल एडवाइज़र से यहां व वहां के क़ानूनों की पूरी जानकारी हासिल कर लें, ताकि शादी के बाद किसी भी अनहोनी स्थिति में आप ख़ुद को लाचार महसूस न करें.

– जहां तक हो सके, शादी अपने ही देश में करें. विदेशी धरती पर शादी करने पर आप कई ज़रूरी  क़ानूनी हक़ीक़तों से अनजान रहती हैं, जिसका ग़लत फ़ायदा आपके ससुराल वाले उठा सकते हैं.

– अनीता सिंह

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