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शादीशुदा ज़िंदगी में कैसा हो पैरेंट्स का रोल? (What Role Do Parents Play In Their Childrens Married Life?)

कहते हैं, घर की ख़ुशहाली व आपसी रिश्तों की मज़बूती में पैरेंट्स का आशीर्वाद, सहयोग व प्यार काफ़ी मायने रखता है. लेकिन जब बच्चों की शादीशुदा ज़िंदगी में पैरेंट्स का सहयोगपूर्ण रवैया दख़लअंदाज़ी-सा लगने लगे, तो उनकी भूमिका सोचनीय हो जाती है. ऐसे में क्या करें पैरेंट्स? आइए, जानते हैं.

Childrens Married

आज के बदले माहौल में पति-पत्नी की विचारधारा काफ़ी बदल गई है. शादी के बाद पति-पत्नी अलग घर बसाना चाहते हैं. स्वतंत्रता व आत्मनिर्भरता दोनों ही उनके लिए अहम् हैं. सब कुछ वो ख़ुद ही करना चाहते हैं. लेकिन ऐसे एकल परिवारों में भी समय-असमय पैरेंट्स या बुज़ुर्गों की ज़रूरत आन ही पड़ती है और पैरेंट्स को भी उनकी मदद  करनी पड़ती है, फिर चाहे वो ख़ुशी से हो या कर्त्तव्यबोध के कारण. ऐसी स्थिति आज के पैरेंट्स को दुविधा में डाल रही है. वे समझ नहीं पाते हैं कि आत्मनिर्भर बच्चों की ज़िंदगी में उनका क्या स्थान है? उनकी क्या भूमिका
होनी चाहिए?

अधिकतर पैरेंट्स के लिए बच्चे हमेशा बच्चे ही रहते हैं. उनकी हर संभव मदद करना वे अपना कर्त्तव्य समझते हैं, जबकि अन्य लोगों का मानना है कि जब बच्चे बड़े हो जाते हैं और उनकी शादी हो जाती है, तब पैरेंट्स की ज़िम्मेदारियां ख़त्म हो जाती हैं. बच्चों को अपनी ज़िंदगी ख़ुद संभालनी चाहिए. पैरेंट्स से कोई उम्मीद नहीं रखनी चाहिए.

देखा गया है कि पैरेंट्स को जब विवाहित बच्चों की ज़िंदगी में परेशानियां व असुविधाएं दिखाई देती हैं, तब कभी तो वे तुरंत मदद के लिए हाथ बढ़ा देते हैं और कभी-कभी उन्हें समय व हालात के भरोसे छोड़ अपना हाथ खींच लेते हैं. ख़ासकर तब, जब ज़रूरत आर्थिक मदद की होती है.

काफ़ी समय पहले कोलकाता की एक एज्युकेशन रिसर्च संस्था अल्फा बीटा ओमनी ट्रस्ट द्वारा एक सर्वे किया गया था, जिसमें लगभग 200 पैरेंट्स से बातचीत की गई थी. 150 से भी ज़्यादा पैरेंट्स का कहना था- यदि संभव हो और सहूलियत हो, तो हर प्रकार की मदद की जानी चाहिए, क्योंकि बच्चे तो हमेशा ही हमारे लिए बच्चे रहेंगे. साथ ही उनका मानना था कि शादीशुदा ज़िंदगी का शुरुआती दौर कई बार मुश्किलों व असंतुलन से भरा होता है. कई प्रकार के पारिवारिक व भावनात्मक एडजस्टमेंट करने पड़ते हैं. कभी-कभी अनचाहे आर्थिक संकट भी ज़िंदगी को कठिन बना देते हैं. ऐसे में आर्थिक सहायता से ज़िंदगी आसान व ख़ुशहाल हो सकती है. दूसरे मत के अनुसार, शादी तभी की जानी चाहिए, जब व्यक्ति शादी के बाद आनेवाली हर परिस्थिति का मुक़ाबला करने के लिए तैयार हो, आर्थिक रूप से सुरक्षित व ठोस हो. बच्चों को पढ़ाना-लिखाना, ज़िम्मेदारियों के लिए तैयार करना पैरेंट्स की ज़िम्मेदारी है. उसके बाद पैरेंट्स की ज़िम्मेदारी ख़त्म. फिर तो बच्चों की ज़िम्मेदारी बनती है कि वो पैरेंट्स की देखभाल करें.

समाजशास्त्री डॉ. कामेश्‍वर भागवत का मानना है कि पैरेंट्स हमेशा ही पैरेंट्स रहते हैं. अपने बच्चों की ज़िंदगी में हमेशा ही उनकी भूमिका बनी रहती है. कभी मुख्य, तो कभी सहयोगी के तौर पर. इसलिए न तो पूरी तरह इनसे अलग हों और न ही रोज़मर्रा की हर बात में अपनी राय दें. यानी रास्ता बीच का होना चाहिए. वैसे भी भारतीय परिवार एक कड़ी की तरह जुड़े रहते हैं, एक तरफ़ हम अपने बच्चों की ज़िम्मेदारियां पूरी करते हैं, तो दूसरी तरफ़ पैरेंट्स के साथ जुड़े रहकर उनके प्रति दायित्व निभाते हैं. दरअसल शेयरिंग व केयरिंग की भावना ही परिवार है. पैरेंट्स का रोल कभी ख़त्म नहीं होता है, बस उनका स्वरूप बदल जाता है. आर्थिक योगदान के अलावा भी विवाहित बच्चों के जीवन में पैरेंट्स की एक सुखद भूमिका हो सकती है.

–    पति-पत्नी यदि अकेले व समर्थ हैं, तो भी उन्हें अपने पैरेंट्स के भावनात्मक सहयोग, उनके प्यार व आशीर्वाद की ज़रूरत होती है.

–    पति-पत्नी दोनों वर्किंग हैं, तो बच्चे की सुरक्षा व देखभाल की ज़िम्मेदारी लेकर आप उन्हें चिंतामुक्त कर सकते हैं. पैरेंट्स की मदद से वे लोग अपना काम बेहतर तरी़के से कर सकेंगे.

–   तकलीफ़ या बीमारी के दौरान आपका समय व अनुभव उनके लिए किसी वरदान से कम न होगा.

–   तनाव व संघर्ष के दौरान आपका भावनात्मक सहयोग व ज़िंदगी के अनुभव उन्हें संबल व हौसला प्रदान कर सकते हैं.

–   बच्चों को स्कूल से लाना व छोड़ना प्रायः ग्रैंड पैरेंट्स को भी अच्छा लगता है और ग्रैंड चिल्ड्रेन भी दादा-दादी का साथ एंजॉय करते हैं.

–   बच्चों में आध्यात्मिक व नैतिक गुणों तथा शिक्षा की शुरुआत भी ग्रैंड पैरेंट्स द्वारा बेहतर रूप से होती है.

–   आज अकेला बच्चा हर समय टीवी, कंप्यूटर, प्ले स्टेशन जैसे गैजेट्स से चिपका रहता है, ऐसे में आपका साथ व मार्गदर्शन  उसे समय का बेहतर उपयोग करना सिखा सकता है.

–    बच्चे जिज्ञासु होते हैं, उनकी जिज्ञासा ग्रैंड पैरेंट्स बहुत अच्छी तरह से शांत कर सकते हैं.

–    इन बातों के अलावा आपके विवाहित बच्चों की और भी अनेक व्यक्तिगत समस्याएं व ज़रूरतें हो सकती हैं, जिनका समाधान आपकी सहयोगी भूमिका से हो सकता है और बच्चों की विवाहित ज़िंदगी ख़ुशहाल हो सकती है.

–    आर्थिक सहायता निश्‍चय ही जटिल व निजी मामला है. इससे हालात सुधर भी सकते हैं और पैरेंट्स बुढ़ापे में स्वयं को सुरक्षित भी कर सकते हैं.

याद रखें, बच्चे आपके ही हैं, फिर भी पराए हो चुके हैं. एक नए बंधन में बंध चुके हैं. एक नई दुनिया बसा रहे हैं. तो बस, पास रहकर भी दूर रहें और दूर रहकर भी अपने स्पर्श का एहसास उन्हें कराते रहें.

आपकी सहयोगी भूमिका आपके शादीशुदा बच्चों को कैसी लग रही है, यह जानने के लिए इन बातों पर ध्यान दें-

–    क्या बच्चे आपकी मदद से ख़ुश हैं? आपकी भूमिका को सराहते हैं? आपके प्रति आभार व्यक्त करते हैं? यदि नहीं, तो आप मदद नहीं दख़ल दे रहे हैं.

–     अब आपके बच्चे अकेले नहीं हैं, उनकी ज़िंदगी उनके जीवनसाथी के साथ जुड़ी है. क्या उनके साथी को भी आपका रोल पसंद है? यदि नहीं, तो एक दूरी बनाना बेहतर होगा.

–     मदद के दौरान क्या आपको ऐसा महसूस होता है कि आपका फ़ायदा उठाया जा रहा है या आपको इस्तेमाल किया जा रहा है? ऐसी स्थिति कुंठा को जन्म देती है.

–     मदद के दौरान होनेवाला आपका ख़र्च आपको परेशानी में तो नहीं डाल रहा है? यदि ऐसा है तो हाथ रोक लें, वरना पछतावा होगा.

–     उनकी व्यस्तता को कम करने के लिए, उनकी ज़िंदगी को ख़ुशहाल बनाने के लिए अपनी ज़िंदगी को जीना न छोड़ें. अपनी दिनचर्या, अपनी हॉबीज़ पर भी ध्यान दें.

–     बिना मांगे, आगे बढ़कर ख़ुद को ऑफ़र न करें, न ही उनकी ज़िंदगी में दख़लअंदाज़ी करें, वरना रिश्ते बिगड़ सकते हैं, आपके साथ भी और आपस में उनके भी.

–     हर व़क़्त उनकी ज़िंदगी में झांकने की कोशिश न करें. जब वो शेयर करना चाहें, तो खुले मन से आत्मीयता बरतें.

–     अपनी चिंताओं व कुंठाओं का रोना भी हर व़क़्त उनके सामने न रोएं. चाहे वो स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हों या पारिवारिक रिश्तों की कड़वाहट.

–     बदलते समय के साथ अपने व्यवहार व सोच में परिवर्तन लाएं, ताकि बच्चे आपसे खुलकर बात कर सकें.

 

– प्रसून भार्गव

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सुहागरात में काम आएंगे ये सुपर सेक्स टिप्स (Super Sex Tips For Your First Night)

शादी के बंधन में बंधनेवाले हर कपल के मन में सुहागरात को लेकर कई हसीन ख़्वाब पलते रहते हैं. नई ज़िंदगी की पहली रात को लेकर वैसे तो ज़्यादातर लोग एक्साइटेड रहते हैं, पर कुछ ऐसे भी हैं, जिनके मन में संकोच और आशंकाएं भी होती हैं. इसमें कोई ग़लत बात नहीं है. यह बिल्कुल सामान्य है. सुहागरात को लेकर दिमाग़ में स़िर्फ सेक्स का ख़्याल आता है, लेकिन अगर कोई कपल सही तरी़के से सेक्सुअल रिलेशन नहीं बना पाता, तो उन्हें लगता है कि उनमें ही कोई कमी है, जबकि ऐसा बहुत-से कपल्स के साथ होता है. सेक्स एक कला है, जो तर्जुबे से सीखी जाती है, इसलिए सुहागरात के नाम पर स्ट्रेस न लें. हम यहां इसी से जुड़े कुछ सुपर सेक्स टिप्स दे रहे हैं, ताकि आपकी सेक्स लाइफ सुपर रोमांंटिक बनी रहे.

Sex Tips For First Night

– दिनभर शादी की रस्मों के कारण ज़्यादातर कपल्स थक जाते हैं और रात को इन्वॉल्व नहीं हो पाते. हो सकता है आपके साथ भी ऐसा हुआ हो, इसलिए रात को ही संबंध बनाना है, इसके लिए जल्दबाज़ी न करें. थकान मिटाने के लिए भरपूर नींद लें और सुबह उठकर अपने प्यार से अपने पार्टनर को सराबोर कर दें.

– सुहागरात रोमांटिक हो, इसके लिए आपको शादी के दिन ही थोड़ी फ्लर्टिंग करनी होगी. एक-दूसरे को छेड़ें, इशारों में बातें करें और देखिए कैसे आपका मूड सेट होता है.

– सुहागरात है, इसलिए स़िर्फ आपकी चलेगी, ऐसा न सोचें. अपने पार्टनर की पसंद-नापसंद के बारे में जानें और उसे तवज्जो दें. याद रखें, ख़ुशहाल शादीशुदा ज़िंदगी की नींव सुहागरात को ही पड़ती है, इसलिए अपने पार्टनर को बिल्कुल भी ऐसा महसूस न होने दें कि आप अपनी भावनाएं उन पर थोप रहे हैं.

– सुहागरात से पहले अगर कुछ सेक्स बुक्स पढ़ेंगे, तो आपको अपने पार्टनर को ख़ुश करने के कई बेहतरीन आइडियाज़ भी मिल जाएंगे. पर कोई भी सेक्स बुक न पढ़ें. बुक स्टोर से अच्छी किताब ख़रीदें और उसे समझें.

– बेड पर आते ही एक्शन की उम्मीद किए बिना एक-दूसरे से बातें करें. पहली रात को लेकर एक-दूसरे ने क्या सोच रखा था, इस बारे में बात करें.

– पार्टनर को इंप्रेस करने के लिए आप सेक्सी लिंगरी ट्राई कर सकती हैं. आजकल मार्केट में बहुत सेक्सी लिंगरीज़ मिलती हैं. इनका इस्तेमाल करके आप अपने पार्टनर को सरप्राइज़ दे सकते हो.

– ख़ासतौर से महिलाओं को रिलैक्स रहने की ज़रूरत है. नई जगह और नए लोगों के बीच उनके मन में कई भावनाएं आती रहती हैं, ऐसे में सेक्सुअल रिलेशन के बारे में वो सोच भी नहीं पातीं, लेकिन अगर आप रिलैक्स रहेंगी, तो बेहतर महसूस करेंगी और अपने पार्टनर के साथ अच्छी तरह रेस्पॉन्ड करेंगी.

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Sex Tips For Wedding Night

– बॉलीवुड फिल्मों जैसी सुहागरात की कल्पना करेंगे, तो अपने साथ-साथ अपने पार्टनर को भी निराश करेंगे. ख़ुद पर परफेक्ट सेक्सुअल रिलेशन का दबाव न बनाएं. बस, पार्टनर को प्यार से छू लें, वो ख़ुद निहाल हो जाएगा.

– पहली बार सेक्सुअल रिलेशन बनाने में असहजता होती ही है, इसलिए लुब्रिकेंट अपने पास ज़रूर रखें. यह आपको रिलेशन बनाने में मदद करेगा.

– अगर आप पहली ही बार में ऑर्गैज़्म की उम्मीद कर रही हैं, तो शायद ऐसा न हो. लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि आपने सेक्स एंजॉय नहीं किया. अपने पार्टनर को पा लेने की ख़ुशी कपल्स के चेहरे पर साफ़ दिखाई देती है. इसलिए ऑर्गैज़्म को दिमाग़ से निकाल दें और स़िर्फ पार्टनर पर ध्यान लगाएं.

– भले ही सुहागरात में संबंध बने या ना बने, फिर भी यह रात आप दोनों पूरी जिंदगी नहीं भूलेंगे. इसलिए हंसे, मुस्कुराएं, खिलखिलाएं और एक-दूसरे को जीवनभर के लिए अपना बना लें.

– अनीता सिंह

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शादी से पहले दिमाग़ में आनेवाले 10 क्रेज़ी सवाल (10 Crazy Things Which May Bother You Before Marriage)

सगाई से शादी (Marriage) तक का समय लड़के-लड़की दोनों के लिए ही बहुत महत्वपूर्ण होता है. भावी जीवन को लेकर जहां मन में कई रूमानी ख़्वाब व ख़्वाहिशें होती हैं, तो कुछ अनकही आशंकाएं और ऊटपटांग सवाल भी दिलोदिमाग़ में गूंजते रहते हैं. कौन-से हैं वे ऊटपटांग या क्रेज़ी सवाल, आइए जानते हैं.

Marriage Problems

लड़कियों के दिमाग़ में आनेवाले सवाल

शादी से पहले हर लड़की के मन में अपने भावी जीवन को लेकर एक तस्वीर बसी होती है, जहां सब कुछ बहुत रोमांटिक और परफेक्ट होता है, पर शादी से पहले मन में कुछ के्रज़ी सवाल भी कुलबुलाते हैं. कभी उसकी आदतों को लेकर, तो कभी अपनी. हो सकता है, आपके दिमाग़ में भी ये सवाल आए हों.

  1. क्या ये मेरे नखरे उठा पाएगा?

–    आमतौर पर लड़कियां नखरीली ही होती हैं, पर वो सभी से नखरे नहीं करतीं. उन्हें अच्छी तरह पता होता है कि कौन उनके नखरे बर्दाश्त कर सकता है और कौन नहीं.

–     बात जब शादी की होती है, तो उनके दिमाग़ में यह सवाल ज़रूर आता है कि क्या ये (भावी पति) मेरे नखरे उठा पाएगा? इसका जवाब जानने के लिए वो कभी-कभी अटपटी हरकतें भी करती हैं, जैसे- अपनी सहूलियत की जगह और समय के मुताबिक़ लड़के को मिलने बुलाना, ज़िद करके कुछ ख़रीदवाना, खाने-पीने में ज़िद करना आदि.

– यक़ीनन आपने भी शादी से पहले अपने मंगेतर के साथ ऐसी कोई ज़िद ज़रूर की होगी. इसमें कुछ ग़लत भी नहीं है. हर लड़की शादी से पहले श्योर होना चाहती है कि उसने जिस लड़के से शादी का निर्णय लिया है, वो पूरी तरह सही है या नहीं.

  1. नाराज़ हो गया, तो कैसे मनाऊंगी?

– शादी के रिश्ते में हंसी-मज़ाक, नोंक-झोंक और ताने-उलाहने तो आम बात हैं, पर कभी-कभी हंसी-मज़ाक या शरारत भारी भी पड़ जाती है, ऐसे में आपको उन्हें मनाने के लिए भी अभी से तैयार रहना होगा.

–  ‘रूठे-रूठे पिया मनाऊं कैसे…’  अच्छाजी मैं हारी चलो मान जाओ ना…’ ‘देखो रूठा ना करो, बात नज़रों की सुनो…’ जैसे कुछ एवरग्रीन बॉलीवुड गाने यहां आपकी मदद करेंगे. उन्हें गाकर सुनाएं या फिर गाना उन्हें व्हाट्सऐप कर दें. आपकी इस अदा पर वो ज़्यादा देर नाराज़ नहीं रह पाएंगे.

– थोड़ा रोमांटिक हो जाएं, तो गुलाब का फूल या चॉकलेट या फिर एक प्यारा-सा लव लेटर आपका काम बख़ूबी कर देंगे.

  1. क्या मुझे अपना ब्लैंकेट शेयर करना पड़ेगा?

रिंकू बचपन से अपने ब्लैंकेट को लेकर बहुत पज़ेसिव थी. कोई और अगर उसे इस्तेमाल कर ले, तो वो हंगामा कर देती थी, लेकिन जब उसकी शादी तय हुई, तो सबसे पहले उसके दिमाग़ में जो क्रेज़ी सवाल आया, वो ब्लैंकेट का ही था. हालांकि उसने इसका तोड़ निकाला. पति को इतने प्यार से अपनी बात समझाई कि उन्होंने कभी उसके और उसके ब्लैंकेट के बीच आने की कोशिश नहीं की.

–     रिंकू की तरह ही बहुत-सी लड़कियां अपनी चीज़ों को लेकर पज़ेसिव रहती हैं, लेकिन ज़रूरी नहीं कि शादी के बाद आपको हर जगह एडजस्टमेंट्स करने पड़ें. इस बारे में अपने पार्टनर से खुलकर बातें करें.

–     किसी भी चीज़ को लेकर मन में कोई शंका न रखें. जो भी क्रेज़ी सवाल मन में आएं, पार्टनर से डिस्कस कर लें.

  1. कहीं मम्मी से मेरी शिकायत कर दी तो?

–     लड़कियों को अपनी रेप्युटेशन सबसे ज़्यादा प्यारी होती है. ख़ासकर शादी के बाद ससुराल में वो चाहती हैं कि हर कोई उनकी तारी़फ़ करे.

–     ऐसे में मम्मी से अपनी शिकायत को लेकर वो सबसे ज़्यादा डरती हैं और यह बात सब लड़कों को पता होती है, तभी तो शादी के बाद ज़्यादातर पति यही धमकी देते हैं कि मम्मीजी को बता दूं…

–     ग़लतियां तो सभी से होती हैं, आपसे भी होंगी ही, इसलिए इसे हौवा न बनाएं. बस, अपनी सासूमां को पटाकर रखें. ऐसे में वो ही आपकी ढाल बनेंगी.

  1. कहीं मेरी पहचान खो न जाए?

–     सबसे पहले तो इस बात को अपने दिमाग़ से निकाल दें कि शादी आपकी पहचान आपसे छीन लेगी, बल्कि शादी के बाद तो आपको कई नए रिश्ते, नाम और पहचान मिलती है.

–     अगर मायके के निक नेम से ससुराल में कोई नहीं बुलाता, तो उदास न हों. पतिदेव ने आपको कोई लव नेम और ननद-देवर ने कुछ नए निक नेम दिए होंगे, तो उन्हें एंजॉय करें.

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Marriage Tips

लड़कों के दिमाग़ में आनेवाले सवाल

शादी के नाम से जितना डर लड़कियों को लगता है, उससे कम लड़कों को नहीं लगता. उनके मन में भी शादी को लेकर कई टेढ़े-मेढ़े सवाल आते रहते हैं.

  1. क्या मैं भी जोरू का ग़ुलाम बन जाऊंगा?

–     लड़कों में जोरू के ग़ुलाम का ऐसा हौवा है कि कोई भी अपनी पहचान इस रूप में नहीं चाहता.

–     होनेवाली पत्नी की देखभाल और  इच्छाओं का ख़्याल रखना आपकी ज़िम्मेदारी है, पर उसे तवज्जो देने में दूसरों को अनदेखा न करें.

–     एक अच्छा बेटा होने के साथ-साथ आपको एक अच्छा दामाद भी बनना चाहिए, पर इस चक्कर में बेटे की ज़िम्मेदारियों को न भूल जाएं.

  1. नाराज़ होकर मायके चली गई तो?

–    यह सवाल अक्सर उनके दिमाग़ में आता है, जिनकी ससुराल उसी शहर में होती है. कहीं कुछ गड़बड़ हो गई और यह बोरिया-बिस्तर लेकर मायके चली गई, तो मैं क्या करूंगा?

–    जाने का सवाल तो तब पैदा होगा, जब कोई गड़बड़ होगी. रिश्ते में प्यार और अपनापन बनाए रखें, यक़ीनन आपका वैवाहिक जीवन सुखमय होगा.

–     शादी के पहले से ही उनके विचारों और पसंद-नापसंद को जानने की कोशिश करें.

–     अगर कभी ग़लती हो भी गई, तो ‘सॉरी’ कहने में झिझकें नहीं.

  1. कहीं मुझे ममाज़ बॉय न समझे?

–    आमतौर पर जो लड़के अपनी हर छोटी-बड़ी ज़रूरतों के लिए मां पर पूरी तरह आश्रित होते हैं, उनके मन में यह सवाल ज़रूर आता है.

–     अगर आप यह टैग नहीं चाहते, तो थोड़ा इंडिपेंडेंट बन जाएं और शादी से पहले ही अपने कुछ काम ख़ुद करना शुरू कर दें.

–     खाने के बाद थाली उठाकर बेसिन में रखना, कपड़े वॉशिंग मशीन में डालना, अपनी आलमारी को व्यवस्थित रखना, जो चीज़ जहां से उठाई, उसे वहीं वापस रखना जैसी आदतें सभी लड़कों में होनी चाहिए.

  1. मेरी चीज़ों पर कब्ज़ा न कर ले?

–     पति-पत्नी पार्टनर्स होते हैं यानी आपकी सभी चीज़ों पर पत्नी का पूरा हक़ होता है. शादी से पहले ही इसके लिए मानसिक रूप से तैयार हो जाएं.

–     एकाधिकार की भावना को छोड़कर शेयरिंग करना सीखें.

–     अब अगर आप यह सोच रहे हैं कि शादी के बाद भी आपका कमरा बैचलर जैसा रहेगा, तो यह ज़्यादती ही होगी.

–     शादी से पहले ही कमरे की सजावट और डेकोर के बारे में अगर होनेवाली पत्नी से बात करें, तो उसे अच्छा फील होगा.

  1. अपने दोस्तों से मिलाना चाहिए या नहीं?

–   अपने दोस्तों के बारे में लड़कों को अच्छे से पता होता है, स़िर्फ उनकी ख़ूबियां ही नहीं कमियां भी वो बख़ूबी जानते हैं, इसीलिए बात जब होनेवाली पत्नी को दोस्तों से मिलाने की होती है, तो वो सोच में पड़ जाते हैं, मिलाऊं या नहीं?

–     दोस्तों से मिलाया और उन्होंने शेखी बघारने के चक्कर में कोई पोल खोल दी, तो ज़िंदगीभर ताने सुनने पड़ सकते हैं.

–     आप बेहिचक पूरी टोली को होनेवाली पत्नी से मिलाएं. अगर कुछ दोस्त शादीशुदा हैं, तो यक़ीनन आपकी रेप्यूटेशन का पूरा ख़्याल रखेंगे और जमकर तारीफ़ भी करेंगे.

– संतारा सिंह 

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जल्द ही शादी के बंधन में बंधेंगी मोना सिंहः एमएमएस लीक की वजह से टूटा था रिश्ता (Mona Singh Will Tie The Knot Soon: Previous Relationship Was Broken Due To MMS Leak)

टीवी सीरियल जस्सी जैसी कोई नहीं से पॉप्युलर हुई टीवी एक्ट्रेस मोना सिंह (Mona Singh) इन दिनों अपने अफेयर और शादी की खबरों को लेकर चर्चा में हैं. खबरें हैं कि मोना को एक बार फिर प्यार हो गया है और वो जल्द ही शादी के बंधन में बंधनेवाली हैं. खबरों के अनुसार मोना सिंह पिछले एक साल से किसी साउथ इंडियन को डेट कर रही हैं. दोनों एक-दूसरे को लेकर काफी सीरियस हैं और उनका जल्द ही शादी का प्लान है. मोना का यह बॉयफ्रेंड फिल्मी बैकग्राउंड से नहीं है और अभी तक उनके नाम का खुलासा भी नहीं हुआ है.

Mona Singh

 

बता दें कि मोना सिंह पहले टीवी एक्टर करण ओबेरॉय और विद्युत जामवाल के साथ रिलेशनशिप में रह चुकी हैं. बॉलीवुड एक्टर विद्युत जामवाल के साथ तो उनका अफेयर लंबे टाइम तक रहा था और खबरें तो यहां तक थीं कि दोनों शादी करनेवाले थे, लेकिन तब मोना के एक तथाकथित एमएमएस के कारण ये रिश्ता टूट गया था.

दरअसल कुछ साल पहले एक एमएमएस लीक होने के कारण मोना सिंह का नाम खूब चर्चा में रहा था. इस एमएमएस में मोना सिंह की तरह दिखनेवाली लड़की आपत्तिजनक हालत में थी और वो एमएमएस खूब वायरल हुआ था. हालांकि जांच-पड़ताल के बाद इस एमएमएस की सच्चाई का खुलासा नहीं हो सका था और मोना ने इसे फर्जी बताया था, लेकिन इससे मोना सिंह की पर्सनल लाइफ बुरी तरह से प्रभावित हुई थी और बॉयफ्रेंड विद्युत से उनकी शादी टूटने की वजह भी इसी एमएमएस को बताया गया था।

वर्क फ्रंट की बात करें तो मोना जल्द ही ऑल्ट बालाजी की वेब सीरीज मॉम: मिशन ओवर मार्स में नज़र आएंगी. इस वेब सीरीज में साक्षी तंवर, निधि सिंह और पालोमी घोष भी अहम किरदार में नजर आनेवाली हैं.

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क्या आपका बॉयफ्रेंड मैरिज मटेरियल है? (Is Your Boyfriend Marriage Material?)

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नवीन व सीमा एक ही कॉलेज में थे. नवीन का आकर्षक व्यक्तित्व, सहायक स्वभाव, एक ही मुलाक़ात में दूसरों को अपना बना लेने का अंदाज़ क़ाबिले-तारीफ़ था, इसीलिए हर लड़की उसका साथ पसंद करती थी. दोस्तों के बीच भी वह काफ़ी लोकप्रिय था. जब नवीन की रुचि सीमा के प्रति बढ़ी तो उनकी दोस्ती जल्दी ही प्यार में बदल गई और झटपट शादी तय हो गई, किन्तु विवाह के बाद यही क़ाबिले तारीफ़ अंदाज़ और समाज सेवा का रवैया दोनों की तक़रार का कारण बना. सीमा नवीन से घरेलू ज़िम्मेदारियों की अपेक्षा करती थी, लेकिन नवीन से जग भलाई छूटती नहीं थी.

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राखी और निरंजन अच्छे दोस्त थे. ऑफ़िस के बाद दोनों रोज़ ही कभी कॉफ़ी हाउस, तो कभी रेस्टॉरेन्ट में बैठते. निरंजन अकेला रहता था. राखी भी माता-पिता की स्वतन्त्र विचारों वाली इकलौती बेटी थी. उनके लिए घर से ज़्यादा कैरियर महत्वपूर्ण था. दोस्ती गहरी होती गई. एक-दूसरे का साथ बहुत प्रिय था, इतना कि लगा एक-दूसरे के बिना रह ही नहीं सकेंगे. परिवारों को भी कोई ऐतराज नहीं हुआ तो सहर्ष शादी के बंधन में बंध गए. कहा-सुनी तब शुरू हुई जब निरंजन रेस्टॉरेन्ट के बजाए घर के खाने को ज़्यादा पसंद करने लगा. वह चाहता था कि राखी गृहस्थी में भी थोड़ी रुचि ले, किन्तु राखी ने तो अपने घर में पहले कभी घरेलू कामों में रुचि ली ही नहीं थी. फिर तो छोटी-छोटी बातों पर भी तू-तू मैं-मैं होने लगी और इस रिश्ते का अंत हुआ तलाक़ के साथ.

जब इस तरह की बातें सामने आती हैं तब पछतावा होता है अपने चुनाव पर. तब लगता है जल्दबाज़ी तो नहीं कर दी निर्णय लेने में. दरअसल, प्यार का नशा ऐसा होता है कि साथी में कुछ ग़लत या कमी दिखाई नहीं देती है और यदि कुछ महसूस भी होता है तो साथी का साथ पाने की प्रबल चाह के आगे सब कुछ बौना हो जाता है. पहले विवाह हमेशा माता-पिता द्वारा तय किए जाते थे. लड़के से अधिक घर-परिवार को महत्व दिया जाता था. मुश्किलें तब भी आती थीं, लेकिन उस समय समझौता करना और आजीवन इस बंधन को निभाने की भावना सर्वोपरि होती थी. बेमेल विवाह भी निभाए जाते थे और समझौतों के साथ निभाते-निभाते समय के साथ अनुकूलता और परिपक्वता भी आ जाती थी. निभाना स्त्री का प्रथम गुण था भले ही वह उसकी मजबूरी थी, क्योंकि उस समय वह आर्थिक रूप से स्वतन्त्र नहीं थी. उनके पास इतना कोई विकल्प नहीं होता था. किन्तु अब ऐसा नहीं है, बल्कि लड़कियां ख़ुद अपने लिए जीवनसाथी का चुनाव कर रही हैं. वे शारीरिक रूप-रंग से ़ज़्यादा मानसिक स्तर पर मेल चाहती हैं. प्रेम-विवाह न भी हो तो आज शादी से पहले मिलना-जुलना, एक-दूसरे के विचारों को जानना, साथ समय गुज़ारना दोनों परिवारों को भी मान्य होने लगा है. इसके बावजूद कई बार विवाह के बाद बहुत कुछ ऐसी बातें सामने आती हैं, जिनके बारे में पहले ज़रा भी ख़याल नहीं आया होता. विचार, व्यवहार और दृष्टिकोण विवाहित जीवन का अहम हिस्सा हैं, क्योंकि आप अकेली नहीं हैं. परस्पर अनुकूलता, परिपक्वता और विश्‍वास ज़रूरी है इस बंधन में, अतः ज़रूरी हो जाता है यह आंकना कि जिस व्यक्ति के साथ आप ज़िंदगी गुज़ारने का फैसला ले रही हैं, वह शादी जैसे पवित्र बंधन के योग्य है या नहीं?

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– लेकिन यह भी ज़रूरी है कि प्रेमी के बारे में अपनी राय बनाने से पहले आप अपना आत्मावलोकन भी करें, जैसे- अपने आपको जानना, अपने स्वभाव, अपनी क्रियाओं-प्रतिक्रियाओं को पहचानना, अपनी अपेक्षाओं को समझना, शादी की मैच्योरिटी को गम्भीरता से समझना और उससे जुड़ी ज़िम्मेदारियों को स्वीकारना.

– शादी एक पवित्र बंधन ही नहीं है, बल्कि यहां अनेक समझौते और कभी-कभी त्याग व समर्पण भी करने पड़ते हैं. कई बार ऐसा लगता है कि विचारों में समानता या अनुकूलता के साथ ही निभाना बेहतर होता है, किन्तु ऐसा नहीं है. अनुकूल स्वभाव के बावजूद टकराव हो ही जाता है. अहम का टकराव हो ही जाता है और कभी-कभी प्रतिकूल विचारधाराएं भी परिपूरक बन ज़िंदगी आसान बना देती हैं. जैसे यदि आप किन्हीं स्थितियों में कमज़ोर हैं तो साथी वहां पूरक बन जाए. उसे आपसे प्रेम है, आप पर भरोसा है और आपको समझता है, तो शादी का यह रिश्ता ख़ूबसूरत बन जाता है.

– विवाह की पहली शर्त है प्यार व विश्‍वास के साथ उसके गुण-अवगुण सहित स्वीकारना, साथ ही उसके परिजन व प्रियजनों को भी स्वीकारना. जिसके साथ जीवन बिताना है, उसे शर्तों में न बांधें, न ही उसकी शर्तें स्वीकार करें. प्रेमी या बॉयफ्रेंड अकेला होता है, किन्तु विवाह के बाद घर-परिवार होता है, हर रिश्ते से जुड़ना होता है, हर किसी के प्रति ज़िम्मेदारियां निभानी होती हैं.

– किसी भी रिश्ते या संबंध के निर्वाह में कम्यूनिकेशन यानी बातचीत अहम भूमिका रखती है, अतः बॉयफ्रेंड के साथ हर एक विषय पर स्पष्ट बात करें. उसके विचारों को जानें, अपनी भावनाओं को व्यक्त करें, उसकी प्रतिक्रिया महसूस करें. यदि स्वयं निर्णय ले पाने में दुविधा है तो किसी मैच्योर व्यक्ति या काउंसलर की सलाह भी ली जा सकती है. यदि व्यक्ति प्यार का वास्ता देकर अपनी बात मनवाने की कोशिश करता है या आपके प्यार में पागल हो अपने परिवार को छोड़ देने की बात करता है तो याद रहे, ये स्थिति न तो सामान्य है, न व्यावहारिक. आगे निश्‍चय ही परेशानियां आ सकती हैं. जो अब आपके लिए माता-पिता को छोड़ने की बात करता है, वह कल आपको भी छोड़ सकता है. कोई पति-पत्नी परिवार-समाज से दूर दुनिया बसा कर ख़ुश नहीं रह सकते हैं, बल्कि इससे तनाव व कुंठा महसूस होने लगती है, फिर शुरू होने लगता है एक-दूसरे पर आरोपों व प्रत्यारोपों का सिलसिला.

– विवाह का सच्चा सुख है केयरिंग व शेयरिंग में. साथी के साथ हर व्यवहार में सहजता महसूस होनी चाहिए. चाहे अपनी समस्या शेयर करनी हो या अपनों को केयरिंग की ज़रूरत हो. एक-दूसरे के अलावा आपकी ज़िंदगी में अपनों के लिए भी जगह होनी चाहिए. मेरा-तुम्हारा न होकर हर स्थिति मे ङ्गहमाराफ भाव होना चाहिए. एक-दूसरे को बदलने के बजाय एक-दूसरे का पूरक होना चाहिए.

– विचारों में समानता, ज़िंदगी के प्रति नज़रिया, घर-परिवार या भविष्य के प्रति दृष्टिकोण के साथ-साथ आर्थिक दृष्टिकोण के प्रति भी अपने बॉयफ्रेंड की प्लानिंग को जानने की कोशिश करें. प्यार में आसमान से तारे तोड़े जा सकते हैं, किन्तु शादीशुदा ज़िंदगी के लिए ठोस धरातल चाहिए. पैसों के बिना ज़िंदगी नहीं चलती. पैसों से ख़ुशियां नहीं पाई जा सकतीं, लेकिन पैसों से ही सुख के साधन जुटाए जा सकते हैं और सुख के माध्यम से आनंद की अनुभूति होती है.

– साथी का चरित्र जानना भी बहुत ज़रूरी है. चरित्र उसकी संगत, उसके व्यवहार, उसके अंदाज़ आदि से आसानी से पता लग सकता है, बस आपको अपनी सोच पर, प्यार के एहसास पर भरोसा होना चाहिए. शादी का ़फैसला लेना है, जीवनभर किसी का प्यार पाना है, उसे बनाए रखना है, फिर जल्दबाज़ी क्यों? सोच-समझकर निर्णय लें कि क्या वाकई आपका बॉयफ्रेंड ऐसा है कि उसके साथ आप ज़िंदगीभर निभा पाएंगी.

– वैसे भी विवाह नामक संस्था से आज की पीढ़ी का विश्‍वास उठता-सा जा रहा है. काफ़ी लोगों के लिए शादी ज़िंदगीभर का सामाजिक बंधन नहीं रह जाता है, बल्कि अब विवाह व्यक्तिगत परिपूर्णता के साधन के रूप में देखा जाता है. साथी यदि अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पाता है, तो बंधन को निभाते जाना मूर्खता समझी जाती है, अतः ज़रूरी है कि इस बात को पहले ही समझ लिया जाए कि गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड परस्पर एक-दूसरे की कसौटी पर खरे उतर पाएंगे या नहीं.

– प्रसून भार्गव

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Tv News: एक और टीवी कपल की शादी टूटने के कगार पर, जानिए डीटेल (Siddhant Karnick Marriage is in Trouble?)

ग्लैमर वर्ल्ड में जिस तेज़ी से शादियां हो रही हैं, उसी तेज़ी से शादियों के टूटने का सिलसिला भी जारी है. जी हां, खबर है कि जी टीवी के शो एक था राजा और एक थी रानी के अभिनेता सिद्धांत कार्निक (Siddhant Karnick) और उनकी एक्ट्रेस वाइफ मेघा गुप्ता (Megha Gupta) की शादी (Marriage) में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है और वे अलग रह रहे हैं. आपको बता दें कि सिद्धांत कार्निक और  मेघा गुप्ता की मुलाक़ात साल 2015 में विवियन डिसेना की पार्टी में हुई थी, जल्द ही दोनों को एक-दूसरे से प्यार हो गया था. 1 साल तक एक-दूसरे को डेट करने के बाद साल 2016 में यह दोनों शादी के बंधन में बंध गए. इन्होंने कोर्ट मैरिज की और बाद में नासिक में प्राइवेट सेरेमनी की.

Siddharth Karnick And Megha Gupta

Siddharth Karnick And Megha Gupta

Siddharth Karnick And Megha Gupta

Siddharth Karnick And Megha Gupta

लेकिन हाल ही में आई खबरों की मानें तो सिद्धांत अपनी पत्नी मेघा से अलग हो गए हैं. यह खबर तब से आई जबसे इन-दोनों ने सोशल मीडिया पर एक-दूसरे को अनफ़ॉलो कर दिया है. मेघा और सिद्धांत कभी सोशल मीडिया पर अपनी प्यार भरी तस्वीरों को पोस्ट करते नही थकते थे. लेकिन दिसंबर 2018 के बाद से इन-दोनों ने सोशल मीडिया पर साथ वाली एक भी तस्वीर शेयर नही की जिसके बाद से ही यह खबर आने लगी कि इनके रिश्ते में सब कुछ ठीक नहीं है.

एक वेबसाइट ने जब मेघा से इस बारे में जानने की कोशिश की तो उन्होंने इशारों ही इशारों में साफ बता दिया, “मेरे पास कुछ कहने के लिए नहीं है. लेकिन मुझे समझने के लिए आपका शुक्रिया.” मेघा के यह कहने से यह साफ-तौर पर पता लगता है कि मेघा और सिद्धांत की शादी-शुदा जिंदगी में सबकुछ सही नही चल रहा है. खबरों के अनुसार, सिद्धांत कार्निक और मेघा गुप्ता अब साथ में नहीं रहते हैं. एक अखबार ने जब सिद्धांत से इस बारे में पूछा तो उन्होंने बात को टालते हुए कहा कि ऐसा कुछ नहीं है. कपल के करीबी मित्रों की मानें तो इनके बीच मे कोई भी समानता नहीं है इसलिए ये अलग हो गए.

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इस तारीख को शादी करेंगे अर्जुन-मलाइका, दीपवीर को भेजा न्यौता (Arjun Kapoor and Malaika Arora to reportedly get married on this date; Deepika-Ranveer on guest list)

मलाइका अरोड़ा (Malaika Arora) और अर्जुन कपूर (Arjun Kapoor) पिछले काफी समय से एक दूसरे को डेट (Date) कर रहे हैं. साथ ही इनकी शादी (Marriage) की खबरें भी आए दिन सुर्खियों में रहती हैं. मलाइका और अर्जुन की शादी को लेकर एक और बड़ी खबर सामने आई है. खबर के अनुसार, ये दोनों अगले महीने शादी के बंधन में बंधने वाले हैं.  हालांकि  इस खबर को लेकर मलाइका अरोड़ा और अर्जुन कपूर की तरफ से किसी तरह की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.

Arjun Kapoor and Malaika Arora

एक वेबसाइट पर छपी रिपोर्ट के अनुसार, अर्जुन और मलाइका अपने रिश्ते को नाम देते हुए शादी रचाने जा रहे हैं. मिली जानकरी के मुताबिक, 19 अप्रैल को अर्जुन और मलाइका एक दूसरे को पति-पत्नी के रूप में स्वीकार करेंगे. इसकी ये शादी क्रिश्चन रीति रिवाज से होगी.

Arjun Kapoor and Malaika Arora

मिली जानकरी के मुताबिक, इस शादी में मलाइका और अर्जुन की ओर से कम लोगों को न्योता भेजा गया है. इस शादी में इनके कुछ करीबी दोस्त की शामिल होंगे. शादी के लिए करीना कपूर खान और करिश्मा कपूर के अलावा रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण को भी शादी का न्योता भेजा गया है. वैसे आपको बता दें, ये पहली बार नहीं है जब मीडिया में मलाइका-अर्जुन की शादी की खबर आग की तरह फैल रही हैं. इससे पहले भी इनकी शादी को लेकर कई खबरें सामने आ चुकी है.

 

आपको याद दिला दें कि मलाइका अरोड़ा की अर्जुन कपूर के साथ ये दूसरी शादी होगी. मलाइका की पहली शादी सलमान खान के भाई अरबाज खान के साथ हुई थी. लेकिन आपसी सहमती से ये दोनों अलग हो गए. अरबाज और मलाइका का एक बेटा भी है. उनके बेटे का नाम अरहान है. आपको बता दें, मलाइका अरोड़ा की तरह अरबाज खान ने भी अपने लिए नया जीवन साथ तलाश लिया है. मलाइका की तरह अरबाज भी अपनी गर्लफ्रेंड मॉडल जियॉर्जिया एंड्रियानी के साथ शादी को लेकर चर्चा में है.

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बॉलीवुड की 9 स्वीट लव स्टोरीज़… जिन्हें मिली उनकी मंज़िल! (9 Bollywood Love Stories With Happy Endings)

Bollywood Love Stories

बॉलीवुड की 9 स्वीट लव स्टोरीज़… जिन्हें मिली उनकी मंज़िल! (9 Bollywood Love Stories With Happy Endings)

एक लफ़्ज़, एक एहसास… एक चाहत-सी कुछ ख़ास… न दरमियान कोई, न फासले, पर इम्तिहान कई हैं इस राह पर… ़कैद होते हैं आंखों में कई हसीन सपने, लबों पर गुलाब-से खिले रहते हैं… कोई ये माने या न माने, पर दिलों में अंजाने से कुछ सिलसिले रहते हैं… कभी डगमगाती राहों में, कभी धूप में, तो कभी छांव में… हर व़क्त निगाहें ढूंढ़ती हैं महबूब को अपने इश्क़ की पनाहों में…
प्यार, इश्क़, मुहब्बत, लव… कुछ भी कह लो, पर एहसास एक ही है… इस एहसास ने जिसे भी छू लिया, उसने ख़ुद को खोकर भी जैसे सारा जहां पा लिया… यहां हम इसी अनोखे एहसास का ज़िक्र करेंगे, जिनसे अछूते हमारे फिल्मी सितारे भी नहीं रहे… उन्होंने कैसे अपनी मुहब्बत को ताउम्र के लिए पाया और किस शिद्दत से अपने प्यार को निभाया, आइए जानें…

amitabh bachchan and jaya bachchan

अमिताभ-जया… अनोखी मुहब्बत के सिलसिले
जिस व़क्त अमिताभ बॉलीवुड में स्ट्रगल कर रहे थे, उस समय जया एक स्थापित अभिनेत्री ही नहीं, बल्कि स्टार थीं. अमिताभ एक फ्लॉप एक्टर थे और उस समय उनके साथ कोई भी एक्ट्रेस काम नहीं करना चाहती थी. फिर आई फिल्म ज़ंजीर, जिसमें अमिताभ को जया के साथ पेयर किया गया. ज़ंजीर अमिताभ की पहली सोलो हिट साबित हुई. कहा जाता है कि ज़ंजीर से पहले अमिताभ ने अपनी नाकामयाबी से तंग आकर फिल्म इंडस्ट्री छोड़ने का मन बना लिया था, लेकिन तकदीर को कुछ और ही मंज़ूर था. जहां ज़ंजीर ने इंडस्ट्री को एंग्री यंग मैन के रूप में नया सुपरस्टार दिया था, वहीं अमिताभ को पर्सनल लाइफ में उनका सच्चा प्यार भी मिला जया के रूप में और दोनों शादी के बंधन में बंध गए.
हालांकि अमिताभ के रेखा के साथ लिंक अप की बातों के बाद इन दोनों की शादी में कुछ प्रॉब्लम्स ज़रूर आई थी. यश चोपड़ा ने अपने इंटरव्यू में कहा भी था कि फिल्म सिलसिला कीर शूटिंग के दौरान जया और रेखा के बीच माहौल काफ़ी तनावपूर्ण रहा करता था…
ख़ैर, वो पुरानी बातें हैं, जया ने अमिताभ की हर मुश्किल घड़ी में पूरी शिद्दत से साथ दिया. जिस व़क्त अमिताभ कुली के दौरान लगी चोट के कारण अस्पताल में थे, उस व़क्त जया ने उन्हें इस तरह संभाला कि अमिताभ को अपने प्यार के सामने झुकना ही पड़ा. आज ये बॉलीवुड के सबसे हैप्पी और आदर्श कपल के रूप में जाने जाते हैं, इसका ताज़ा उदाहरण है अपनी 45 एनीवर्सरी पर अमिताभ का जया के साथ क्यूट-सा पिक्चर सोशल मीडिया पर शेयर करना और ब्लॉग में अपने दिल की बात कहना. अमिताभ ने लिखा था कि वो यह स्पेशल दिन जया के साथ नहीं गुज़ार पाएंगे, क्योंकि जया ट्रैवल कर रही हैं, इसलिए वो आधी रात को जया को फोन कर रहे हैं, क्योंकि अगला दिन बहुतों के लिए सामान्य, पर कुछ के लिए ख़ास होगा. इस रोमांटिक मैसेज ने सबका दिल जीत लिया और अमिताभ के जया के प्रति प्यार को और गहराई से साबित भी कर दिया.

Bollywood Love Stories

ऋषि कपूर-नीतू सिंह… लवर बॉय ने यूं इंप्रेस किया अपनी लेडी क्वीन को
ऋषि कपूर बॉलीवुड के ओरिजनल लवर बॉय कहे जाते हैं. उनकी चॉकलेटी हीरोवाली इमेज ने लाखों दिलों को धड़काया, जिसमें नीतू का भी एक दिल शामिल था. ऋषि ने नीतू को इंप्रेस करने के लिए न जाने क्या-क्या किया. दोनों की ऑनस्क्रीन जोड़ी भी काफ़ी पसंद की जाती थी और ऑफ स्क्रीन भी उन्होंने ख़ुद को परफेक्ट हसबैंड-वाइफ साबित कर दिया. कहा जाता है कि फिल्म कभी-कभी की शूटिंग के दौरान ऋषि-नीतू पर एक गाना फिल्माया जा रहा था, तब ऋषि ने बिना नीपैड के ही जोश-जोश में भागकर ऊपर से जंप लगाया और घटने के बल नीतू के सामने बैठकर गाने की शूटिंग करने लगे, जबकि उस व़क्त ऋषि के घुटने बुरी तरह चोटिल हो गए थे, पर नीतू को इंप्रेस करने के चक्कर में अपना दर्द छुपा गए. नीतू ने महज़ 21 साल की उम्र में ही अपना बेहद सफल फिल्मी करियर छोड़कर शादी कर ली और इस शादी को वो अब तक पूरी शिद्दत से निभा भी रही हैं.

Saif ali khan and kareena

सैफ-करीना… नवाब का टशन बहुत भाया गॉर्जियस बेबो को
फिल्म टशन की शूटिंग के दौरान सैफ और करीना में प्यार हुआ और इसी दौरान करीना और शाहिद का रिश्ता भी टूटा. पांच साल तक सैफ और करीना ने एक-दूसरे को डेट किया. अपने रिश्ते को किसी से नहीं छुपाया और करीना हमेशा सैफ को अपना बेस्ट फ्रेंड भी मानती थीं, जो उनके रिश्ते को और मज़बूत बनाता था. अलग-अलग मज़हब से होने के बाद भी दोनों ने शादी की और आज करीना सैफ की बेगम हैं.

shahrukh khan and gauri khan

शाहरुख-गौरी… एक परीकथा-सी लव स्टोरी
जिस व़क्त शाहरुख गौरी के दीवाने हुए थे, उस समय वो स्टारडम से कोसों दूर थे. गौरी के परिवारवाले नहीं चाहते थे कि शाहरुख गौरी के क़रीब आएं. यहां तक कि शाहरुख के ओवरपज़ेसिवनेस से तंग आकर गौरी भी उन्हें बिना बताए मुंबई चली आई थीं. लेकिन सच्चा प्यार किसी के रोके नहीं रुकता. शाहरुख भी गौरी के पीछे-पीछे मुंबई आ गए और दोनों को ही यह एहसास हुआ कि उनकी मंज़िल एक ही है. हालांकि गौरी ने शाहरुख के सामने एक शर्त भी रखी कि शाहरुख शादी के बाद उन्हें शॉर्ट ड्रेसेज़ पहनने देंगे और इसी शर्त पर वो शाहरुख से शादी करेंगी, क्योंकि शाहरुख गौरी को छोटे कपड़े नहीं पहनने देते थे.
दोनों ने शादी का फैसला किया, लेकिन उनकी शादी में थोड़ी अड़चन आई, क्योंकि शाहरुख न स़िर्फ दूसरे धर्म के थे, बल्कि उनका करियर भी स्टेबल नहीं था, वो बॉलीवुड में स्ट्रगल कर रहे थे, लेकिन शाहरुख के सच्चे प्यार और दिल जीत लेनेवाले व्यवहार ने गौरी के पैरेंट्स को तैयार कर लिया और दोनों ने शादी कर ली.

akshay kumar and twinkle khanna

अक्षय कुमार-ट्विंकल खन्ना… मिस्टर खिलाड़ी को ऐसी मिली परफेक्ट मिस खिलाड़ी…
अक्षय कुमार की इमेज इंडस्ट्री के प्ले बॉय की थी. रवीना टंडन, पूजा बत्रा, शिल्पा शेट्टी के साथ लिंक अप्स की ख़बरों के बाद ट्विंकल से उनकी नज़दीकियां इतनी बढ़ीं कि ये रिश्ता शादी में बदल गया. शादी के बाद भी अक्षय की अपनी को-स्टार्स से नज़दीकियों के किस्से काफ़ी आते रहे, लेकिन ट्विंकल का भरोसा अपने रिश्ते पर बना रहा और अब ये कपल सभी का फेवरेट है.

Bollywood Love Stories

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दिलीप कुमार-सायरा बानो… आज भी हैं साहेब की मलिका सायरा
दोनों की उम्र में 22 साल का अंतर है. सायरा दिलीप साहब की फैन थी और उन्होंने यह कभी नहीं सोचा था कि वो उनकी बेगम भी बनेंगी, पर नियति को यही मंज़ूर था. सायरा की मां चाहती थीं कि सायरा और दिलीप कुमार की शादी हो. शादी के कुछ साल बाद सायरा ने एक्टिंग करियर छोड़ दिया. इसी बीच सायरा और दिलीप के बीच एक पाकिस्तानी लड़की भी आई, जिसके बारे में कहा जाता है कि दिलीप ने उसके साथ निकाह भी रचा लिया था. पर जल्द ही दिलीप कुमार को यह एहसास हुआ कि वो लड़की उन्हें चीट कर रही है. इस दौरान सायरा दिलीप कुमार का सहारा बनी रही और उन्होंने दिलीप साहब को पूरी तरह संभाला. आज भी उम्र व बीमारी के इस दौर में सायरा दिलीप कुमार का हाथ थामे रहती हैं. प्यार से वो उन्हें साहेब कहकर बुलाती हैं. कहते हैं कि जब दिलीप साहब स्वस्थ थे, तो सायरा को मलिका की तरह रखते थे. उनके सारे नाज़ उठाते और बेहद प्यार करते थे. इसे ही सच्चा प्यार कहते हैं. अब सायरा उन्हें बच्चों की तरह संभालती हैं.

priyanka and nick jonas

प्रियंका-निक … देसी गर्ल को मिला सात समंदर पार अपना सच्चा प्यार
एक देसी गर्ल, दूसरा हॉलीवुड का रॉक स्टार… लेकिन दोनों का मिलन हुआ. निक को प्रियंका के इंटेलिजेंस और कॉन्फिडेंस से इतना इंप्रेस किया कि वो प्रियंका के दीवाने हो गए. दोनों की उम्र में 10 साल का अंतर है, निका प्रियंका से 10 साल छोटे हैं और कुछ लोग इस बात को लेकर उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल भी करते रहते हैं, लेकिन इन लव-बर्ड्स को इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा और दोनों ही शादी के बंधन में बंध गए. निक भारत आए और भारतीय परंपरा के अनुसार सगाई व शादी भी की. यही सच्चे प्यार की निशानी होती है.

abhishek bachchan and aishwarya rai

अभिषेक-ऐश्‍वर्या… मिस वर्ल्ड पर इस कदर मर मिटे थे जूनियर बी
ऐश्‍वर्या जहां सलमान से अपने टूटे रिश्ते से उबरने की कोशिश में थीं, वहीं अभिषेक भी करिश्मा की यादों से ख़ुद को बाहर निकाल रहे थे. दोनों उस व़क्त साथ में तीन फिल्मों की शूटिंग कर रहे थे और फिल्म गुरू के प्रीमियर के दौरान अभिषेक ने दुनिया की सबसे ख़ूबसूरत लड़की ऐश्‍वर्या के सामने अपना हाले-दिल बयां किया. ऐश ने अभिषेक का प्रपोज़ल स्वीकार कर लिया. लेकिन ऐश का मांगलिक दोष, अभिषेक पर जाह्नवी नाम की एक लड़की का यह आरोप लगाकर अपने हाथ की नस काट लेना कि अभि ने उससे शादी का वादा किया था और धूम 2 की शूटिंग के दौरान ऐश का किसिंग सीन… ये तमाम बातें दोनों के बीच आईं, लेकिन उनके प्यार को और उन्हें एक होने से नहीं रोक पाईं. आज ऐश बच्चन परिवार की बहू हैं और अभि के साथ बेहद ख़ुश भी.

deepveer

रणवीर सिंह-दीपिका… फेवरेट कपल से लेकर बेस्ट जोड़ी तक…
दीपिका का दिल रणबीर कपूर ने कुछ ऐसा तोड़ा था कि दीपिका के लिए संभलना बेहद मुश्किल हो गया था. वो डिप्रेशन में चली गई थीं. उनके टूटे दिल को जब रणवीर ने संभाला, तो दीपिका को ज़िंदगी से बेहद प्यार हो गया. रामलीला के सेट से जो इनकी लव स्टोरी शुरू हुई, वो शादी की मंज़िल तक पहुंचकर ही पूरी हुई. रणवीर का केयरिंग और लविंग नेचर हर किसी को पसंद है और उनकी यही बात व ज़िंदादिली दीपिका को भी बेहद लुभाई. रणवीर एक पॉज़ीटिव इंसान हैं और उनके साथ भला कौन ख़ुश नहीं होगा. आज दीपिका मिसेज़ रणवीर बन चुकी हैं और अपनी लाइफ से बेहद ख़ुश हैं.

– गीता शर्मा

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लेट मैरेज को स्वीकारने लगा है समाज (Late Married Are Being Accepted By Society)

आज समाज में बड़ी उम‘ की कुंवारी लड़कियां जब मज़े से अपनी ज़िंदगी जीती नज़र आती हैं, तो बड़े-बुज़ुर्गों के चेहरे पर आश्‍चर्य की लकीरें खिंच आती हैं. भले ही वे मुंह से कुछ न कहें. वाकई यह एक बड़ा बदलाव है. समाज में आज 25-30 वर्ष की बिन ब्याही लड़कियां आत्मसम्मान के साथ जी रही हैं. अब न उनकी शादी चिंता का विषय बनती है, न ही उनकी मौज-मस्ती पर प्रश्‍न उठते हैं.

Married

हाल ही में हुए एक सर्वे के अनुसार, ज़्यादातर शहरी लड़कियों को अब शादी की जल्दी नहीं है. उन्हें करियर बनाना है. पैरेंट्स भले ही उनकी शादी की चिंता करें, लेकिन लड़कियां न तो इस बात से चिंतित हैं, न ही किसी प्रकार का अपराधबोध महसूस करती हैं, बल्कि अपने कुंवारेपन को ख़ूब एंजॉय करती हैं और शादी के मंडप में क़दम रखने से पहले विवाहित जीवन के हर पहलू पर भलीभांति विचार करना चाहती हैं. उनके लिए नारी जीवन का एकमात्र लक्ष्य शादी नहीं है. संभवतः पढ़ी-लिखी बेटियों की इस सोच से जाने-अनजाने पैरेंट्स भी सहमत होने लगे हैं और धीरे-धीरे समाज भी इसे स्वीकारने लगा है.

बदलाव कब और कैसे आया?

समाजशास्त्रियों के अनुसार, यदि लड़कियों के दृष्टिकोण पर ध्यान दिया जाए तो उनमें विवाह की जल्दी न होने के कई ठोस कारण हैं, जैसे- शिक्षा सबसे प्रमुख कारण है लड़कियों का शिक्षित होना. शिक्षा ने न स़िर्फ लड़कियों को, बल्कि समाज की सोच को भी परिवर्तनशील व व्यापक नज़रिया प्रदान किया है.

आत्मनिर्भरता

शिक्षा के कारण लड़कियों की विचारशक्ति व सोच में बदलाव आया है, उनमें आत्मविश्‍वास बढ़ा है. आत्मनिर्भर होने की आकांक्षा जागृत हुई है.

आर्थिक स्वतंत्रता

इसने लड़कियों को आर्थिक रूप से भी आत्मनिर्भर बना दिया है. उन्हें शादी से ़ज़्यादा अपने करियर पर फोकस करना महत्वपूर्ण लगता है. कई लड़कियां तो परिवार को आर्थिक सहयोग दे रही हैं. ऐसे में शादी का ख़्याल ही नहीं आता है.

बेमेल विवाह

समाज या परिवार में हुए बेमेल विवाहों ने भी लड़कियों की सोच बदली है. शादी भले ही देर से हो, लेकिन साथी ऐसा हो जिसके साथ ज़िंदगी की सार्थकता बनी रहे, सामंजस्य बना रहे, उचित तालमेल के साथ भावी जीवन ख़ुशहाल रहे.

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Married Goals
टूटते रिश्ते

‘चट मंगनी पट ब्याह’ की सोच में आज की पीढ़ी विश्‍वास नहीं रखती है. आए दिन होनेवाले तलाक़ की ख़बरों ने भी शादी के प्रति उनकी भावनाओं को बदल दिया है.

एकल परिवार

छोटे-छोटे परिवारों में (जहां स़िर्फ एक बेटी है) बेटियां पैरेंट्स की देखभाल की ज़िम्मेदारी को समझते हुए शादी का ़फैसलाजल्दी नहीं लेना चाहती हैं,  बल्कि उन्हें ऐसे साथी की तलाश होती है, जो पैरेंंट्स की ज़िम्मेदारी के प्रति उनकी भावनाओं को समझे.

कमिटमेंट का डर

यंग जनरेशन आज कमिटमेंट से डरती है, किसी भी बंधन से कतराती है. उनकी अपनी वैल्यूज़ हैं, अपनी पसंद है. इसलिए इस मामले में वे ज़रा भी जल्दबाज़ी नहीं करना चाहते.

बड़ी उम में भी नॉर्मल चाइल्ड बर्थ

पहले कहा जाता था कि 25-30 तक की उम‘ में गर्भधारण कर लिया जाए तो हेल्दी बच्चा पैदा होता है और बड़ी उम‘ में गर्भधारण करने से होनेवाले शिशु के असामान्य होने की संभावना बढ़ जाती है. इस कारण समय से शादी करना ज़रूरी माना जाता था, लेकिन मेडिकल साइंस की नई टेक्नोलॉजी के चलते अब यह कोई बड़ी समस्या नहीं रह गई है.

पाश्‍चात्य प्रभाव

टीवी और इंटरनेट की दुनिया ने पूरे विश्‍व की संस्कृति को एक कर दिया है. आज हम संस्कृति भी एक्सचेंज कर रहे हैं. शादी को अब उम‘ से नहीं जोड़ा जाता है. 35-40 की उम‘ में भी आज शादियां होती हैं.

लड़के-लड़कियों की दोस्ती

आज यंग एज से ही इमोशनल सपोर्ट मिलने लगता है. पहले जिन भावनाओं का पूरक जीवनसाथी हुआ करता था, उसके लिए आज गर्लफ‘ेंड व बॉयफ‘ेंड हैं.

आदर्श साथी की तलाश

लड़कियों में मैच्योरिटी बढ़ गई है, लेकिन सहनशक्ति, त्याग व बलिदान जैसी भावनाएं कम हो रही हैं. वो ऐसा साथी चाहती हैं, जो उन्हें समझे. पैसा, स्टेटस जैसी चीज़ों के बावजूद वे साथी से इमोशनल सपोर्ट चाहती हैं.

इन कारणों के अतिरिक्त कुछ व्यक्तिगत कारण भी हो सकते हैं, जिनकी वजह से शादियां देर से होने लगी हैं. दूसरी ओर पैरेंट्स की सोच में भी बदलाव आया है, जैसे- कोई मां यदि अपने जीवन में मनचाहा नहीं कर पाई है तो उसकी पूरी कोशिश होती है कि उसकी बेटी उसकी महत्वाकांक्षाओं को पूरा कर सके. इसके लिए वह उसे हर प्रकार से सहयोग देती है.

– आज पैरेंट्स को अपने बच्चों पर भरोसा है. उनकी तरफ़ से भी बच्चों पर कोई प्रेशर नहीं होता है. पैरेंट्स बच्चों को पढ़ाई व करियर के प्रति प्रेरित करते हैं. जब तक लड़के-लड़कियां अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर लेते, शादी की चर्चा नहीं की जाती.

– पारिवारिक समारोह के दौरान अब ऐसा नहीं पूछा जाता कि ‘शादी कब हो रही है’, बल्कि हर कोई जानना चाहता है कि ‘बेटी क्या कर रही है’. बेटी की एजुकेशन या सफलता का ज़िक‘ करते समय पैरेंट्स गर्व महसूस करते हैं तो बच्चों का हौसला भी बढ़ता है, उनका दृष्टिकोण बदलता है.

– आज के पैरेंट्स अपनी बेटी की ख़ुशी के लिए परिवार-समाज के सामने झुकना ठीक नहीं समझते. उनके लिए उनकी बेटी की ख़ुुशियां सर्वोपरि होती हैं. हां, उन्हें चिंता ज़रूर होती है और वे चाहते भी हैं कि उनके जीते जी ही बेटी को सही साथी मिल जाए, क्योंकि उनके बाद बेटी को कौन सपोर्ट करेगा? बुढ़ापे में अकेली कैसे रहेगी? लेकिन बच्चों की ख़ुशी के आगे ये चिंताएं धरी की धरी रह जाती हैं और आख़िरी निर्णय वे अपने बच्चों पर ही छोड़ देते हैं.

– प्रसून भार्गव

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जानें हिंदू मैरिज एक्ट… समय के साथ क्या-क्या बदला? (Hindu Marriage Act: Recent Changes You Must Know)

Hindu Marriage Act Changes

साल 1955 में हमारे देश के जो हालात थे, आज स्थिति उससे बिल्कुल अलग है. आज लड़कियां भी उच्च शिक्षा प्राप्त करके सफलता के नित नए आयाम छू रही हैं, ऐसे में हमारा क़ानून भला बदलाव से अछूता कैसे रह सकता है. जब-जब महिलाओं ने अपने हक़ के लिए आवाज़ उठाई, तब-तब क़ानून में महत्वपूर्ण बदलाव हुए. पिछले 63 सालों में कितना बदला हमारा हिंदू विवाह क़ानून? आइए जानते हैं.

Hindu Marriage Act Changes

कितना जानते हैं आप हिंदू मैरिज एक्ट के बारे में?

हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 में बनाया गया था. इस क़ानून के तहत सभी हिंदुओं, सिख, जैन और बौद्धों के शादी, तलाक़ और मेंटेनेंस के मामले सुलझाए जाते हैं.

–     सबसे पहले तो शादी के समय लड़की की उम्र 18 और लड़के की 21 साल होनी चाहिए. कुछ समय पहले जनहित याचिका के तहत एक वकील ने लड़के की उम्र भी 18 साल करने की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने सिरे से ख़ारिज कर दिया.

–     हिंदू मैरिज एक्ट के तहत कोई शादीशुदा व्यक्ति पहली पत्नी के जीवित रहते, उससे तलाक़ लिए बिना दूसरी शादी नहीं कर सकता. अगर ऐसा होता है, तो उसे सात साल की जेल और जुर्माना दोनों हो सकता है. कुछ लोगों ने इसका तोड़ निकालने के लिए धर्म बदलकर शादी करनी शुरू की, जिसके ख़िलाफ़ 1995 में सुप्रीम कोर्ट ने ़फैसला सुनाया कि यह क़ानूनन जुर्म है, जिसके लिए उस व्यक्ति को सज़ा हो सकती है.

–     गोवा के फैमिली लॉ के कोड ऑफ यूसेजेस एंड कस्टम्स में गैर-ईसाई हिंदू व्यक्ति को एक से ज़्यादा शादियां करने की छूट है, बशर्ते 25 साल की उम्र तक उसकी पत्नी मां न बनी हो और 30 साल की उम्र तक उन्हें कोई बेटा न हो.

–     इसके तहत शादी के लिए किसी ख़ास रस्म का ज़िक्र नहीं किया गया है. लड़के या लड़की किसी के भी रीति-रिवाज़ों के आधार पर शादी की जा सकती है.

–     शादी के बाद पति-पत्नी दोनों को ही वैवाहिक अधिकार (सेक्सुअल रिलेशन के अधिकार) मिलते हैं. क़ानूनन शादी तभी संपन्न मानी जाती है, जब उनके बीच शारीरिक संबंध बनते हैं. अगर कोई पार्टनर दूसरे को इस अधिकार से महरूम रखता है, तो दूसरा पार्टनर कोर्ट का दरवाज़ा खटखटा सकता है. कोर्ट ऐसी शादी को अमान्य या निरस्त कर सकता है.

–     इसके तहत शादी का रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है, ताकि शादी के बाद होनेवाली लीगल डॉक्यूमेंटेशन में कोई अड़चन न आए, लेकिन आज भी बहुत से लोग मैरिज सर्टिफिकेट नहीं बनवाते, जिसके कारण कुछ लोग उसका ग़लत फ़ायदा भी उठाते हैं.

–     हिंदू मैरिज एक्ट में शादी को पवित्र बंधन माना गया है, लेकिन अगर दोनों की शादी में समस्या आ रही है, तो वो तलाक़ ले सकते हैं. तलाक़ के आधार- व्यभिचार, धर्मांतरण, मानसिक विकार, कुष्ठ रोग, नपुंसकता, सांसारिक कर्त्तव्यों को त्याग देना, सात सालों से लापता, जुडीशियल सेपरेशन (कोर्ट द्वारा अलग रहने की इजाज़त), किसी भी तरह के शारीरिक संबंध नहीं बनाना और निष्ठुरता या क्रूरता हैं. पिछले कुछ सालों में मानसिक क्रूरता (मेंटल क्रुएल्टी) के आधार पर तलाक़ के मामलों में बढ़ोतरी हुई है.

–   क़ानून ने महिलाओं को परमानेंट एलीमनी और मेंटेनेंस का अधिकार दिया है, लेकिन वो ऐसी महिलाएं हैं, जो ख़ुद अपना भरण-पोषण नहीं कर सकतीं. कामकाजी महिलाओं को मेंटेनेंस का अधिकार नहीं था, लेकिन 2011 में दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम् ़फैसला दिया कि पति से अलग रहनेवाली कामकाजी महिलाएं भी मेंटेनेंस की हक़दार होंगी.

–     बच्चों की कस्टडी को लेकर भी नियम बनाए गए हैं. तलाक़ के बाद अगर बच्चा छोटा है, तो मां को ही उसकी कस्टडी मिलती है. बड़े बच्चों के लिए कोर्ट मामले को दोनों की आर्थिक स्थिति व परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ़फैसला करता है.

किन स्थितियों में शादी हो सकती है अमान्य?

हिंदू मैरिज एक्ट में ऐसा भी प्रावधान है कि कुछ स्थितियों में आप अपनी शादी को कोर्ट से अमान्य घोषित करा सकते हैं. ऐसे में आप तलाक़शुदा नहीं कहे जाएंगे, बल्कि ऐसा माना जाएगा कि आपकी शादी हुई ही नहीं थी.

–   अगर शादी के व़क्त लड़की किसी और पुरुष से प्रेग्नेंट हो, तो ऐसी सूरत में शादी अमान्य हो सकती है. कुछ साल पहले ऐसा एक मामला सुर्ख़ियों में आया था. उस केस में लड़की शादी के व़क्त प्रेग्नेंट थी. शादी के बाद जब उसके पति को इसका शक हुआ, तो उन्होंने सोनोग्राफी करवाई, तो पता चला कि लड़की प्रेग्नेंट है. उसके पति ने तुरंत फैमिली कोर्ट में शादी को अमान्य करने की याचिका दाख़िल की. इस मामले में आपको यह ध्यान रखना होगा कि शादी के एक साल के भीतर मामला दाख़िल करना होगा.

–     अगर नपुंसकता के कारण पति-पत्नी का रिश्ता नहीं बन पाया, तो शादी क़ानूनन पूरी नहीं मानी जाएगी और ऐसे में व्यक्ति को हक़ है कि वो शादी को अमान्य करा सके. ऐसे में आपको तलाक़ लेने की ज़रूरत नहीं, बल्कि शादी को अमान्य करा सकते हैं.

–    अगर शादी के बाद आपको पता चले कि शादी के व़क्त ही आपके पार्टनर की मानसिक स्थिति सही नहीं थी और यह बात आपसे छुपाई गई, तो आप ऐसी स्थिति में अपनी शादी को अमान्य करा सकते हैं.

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विवाह विधेयक क़ानून, 2010

हिंदू मैरिज एक्ट और स्पेशल मैरिज एक्ट में कुछ बदलाव करने के उद्देश्य से साल 2010 में यह विधेयक लाया गया था. इस विधेयक में महिलाओं के ह़क़ में कई बदलाव किए गए हैं. 2013 में यह विधेयक राज्यसभा में पारित हुआ, पर लोकसभा में पारित न हो सका. इसमें प्रस्तावित कुछ बदलावों के बारे में आइए आपको बताते हैं.

–    इसमें पत्नी को यह अधिकार दिया गया है कि वो इस आधार पर अपने पति से तलाक़ ले सकती है कि अब उनकी शादी इस मुक़ाम पर पहुंच गई है कि उसे बरक़रार रखना नामुमकिन है, इसलिए वो तलाक़ चाहती है.

–     अगर पति ‘शादी पूरी तरह से टूट गई है और बरक़रार नहीं रह सकती,’ इस आधार पर तलाक़ लेना चाहता है, तो पत्नी इसका विरोध कर सकती है, पर पति के पास यह अधिकार नहीं है.

–     पत्नी को पति की चल-अचल संपत्ति में समान अधिकार मिलेगा. साथ ही उसे पति की रिहायशी संपत्ति यानी घर आदि में हिस्सा मिलेगा.

–     पति-पत्नी द्वारा गोद लिए बच्चों को सगे बच्चों के समान प्रॉपर्टी में अधिकार मिलेगा.

–     आपसी सहमति से तलाक़ के लिए याचिका दायर करने के बाद कोई पक्ष क़ानूनी कार्यवाही से पीछे नहीं हट सकता.

छह महीने का इंतज़ार ख़त्म

इस बीच सितंबर, 2017 में हिंदू मैरिज एक्ट में एक और अहम् बदलाव आया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपसी सहमति से तलाक़ लेने के लिए लोगों को 6 महीने का इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा. कोर्ट के मुताबिक़ अगर दोनों के बीच समझौते की कोई गुंजाइश नहीं बची है और बच्चों की कस्टडी का ़फैसला भी हो गया है, तो उन्हें छह महीने के कूलिंग ऑफ पीरियड को पूरा करने की मजबूरी नहीं है. इससे दोबारा वो जल्दी अपना घर बसा सकते हैं.

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 स्पेशल मैरिज एक्ट से जुड़ी 10 ज़रूरी बातें

यह क़ानून ख़ासतौर से अंतर्जातीय विवाह कर रहे लोगों की रक्षा के लिए बनाया गया है. इसके तहत अपनी शादी रजिस्टर कराने के लिए आपको कोई धार्मिक रीति-रिवाज़ निभाने नहीं पड़ते.

  1. इस एक्ट के तहत अंतर्जातीय और अलग-अलग धर्म के लोग विवाह कर सकते हैं.
  2. इसके तहत हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन या बौद्ध धर्म के लोग विवाह कर सकते हैं.
  3. शादी के लिए आपको 30 दिन पहले नोटिस देना पड़ता है. दूल्हा या दुल्हन दोनों में से कोई एक अपने इलाके के रजिस्ट्रार ऑफिस में नोटिस जमा कर सकता है.
  4. इसके तहत स़िर्फ भारतीय ही नहीं, बल्कि विदेशों में रह रहे प्रवासी भारतीय भी विवाह रजिस्टर करा सकते हैं.
  5. हिंदू मैरिज एक्ट की तरह इसमें भी कुछ नियम व शर्तें हैं, जैसे-

–     लड़के की उम्र कम से कम 21 साल और लड़की 18 साल होनी चाहिए.

–     दोनों कुंआरे हों या फिर शादीशुदा न हों यानी कोई पति-पत्नी न हों.

–     शादी के व़क्त मानसिक स्थिति अच्छी होनी चाहिए.

–     दोनों ही पक्ष प्रोहिबिटेड रिलेशनशिप की कैटेगरी में न आते हों. प्रोहिबिटेड रिलेशनशिप यानी भाई-बहन न हों, न ही सौतेले भाई-बहन हों. आपको बता दें कि सपिंडवाले भी इसके तहत शादी नहीं कर सकते. सपिंड यानी मां की तरफ़ से तीन पीढ़ी और पिता की तरफ़ से पांच पीढ़ी तक में शादी निषिद्ध मानी जाती है.

  1. 30 दिनों के लिए शादी का नोटिस रजिस्ट्रार ऑफिस के नोटिस बोर्ड पर लगाया जाता है. अगर किसी को इस शादी से आपत्ति हो, तो वो अपनी आपत्ति ज़ाहिर कर सकता है.
  2. अगर कोई आपत्ति आती है, तो रजिस्ट्रार को उसे 30 दिनों के भीतर सुलझाना होता है, लेकिन अगर कोई आपत्ति नहीं आती, तो नियत तारीख़ को तीन गवाहों की उपस्थिति में शादी संपन्न कराई जाती है.
  3. हर किसी के लिए यह जानना ज़रूरी है कि इसके तहत शादी करनेवालों के प्रॉपर्टी सक्सेशन के मामले इंडियन सक्सेशन एक्ट के तहत सुलझाए जाते हैं.
  1. यहां यह जानना भी बेहद ज़रूरी है कि आप शादी के एक साल के भीतर तलाक़ के लिए अप्लाई नहीं कर सकते. लेकिन अगर आप साबित कर सकें कि शादी बहुत बुरे हालात से गुज़र रही है, तो कोर्ट आवेदन पर अमल कर सकता है.
  2. इस एक्ट में दोबारा शादी का प्रावधान भी शामिल किया गया है, लेकिन शर्त यही है कि पहली शादी टूट चुकी हो और मामले में दोबारा अपील की गुंजाइश न बची हो.

– अनीता सिंह

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शादी है जन्मों का साथ, क्यों आउटडेटेड लगने लगी है ये बात? (Why Concept Of Timeless Marriage Is Getting Outdated?)

प्यार (Love) का रिश्ता (Relationship) है इसके दायरे तय मत करो, मुहब्बत का सिलसिला है इसे महबूब के दिल में पनाह लेने दो… न एक पल, न एक घड़ी, न एक जनम… सदियों की दास्तान है ये, हर जनम का साथ है ये… कभी न भूलनेवाला फसाना है, जन्मों तक चलनेवाला अफ़साना है… ज़माना याद रखेगा यह बात, कभी न छूटेगा अपना ये हाथ.

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प्यार, मुहब्बत, चाहत से कहीं आगे बढ़कर सबसे पाक रिश्ता माना जाता है शादी का. शादी को हमारे समाज में काफ़ी महत्व दिया जाता है, क्योंकि यह हमारी ज़िंदगी बदल देता है. शादी को लेकर यही सोच आज भी है कि यह जन्म-जन्मांतर का रिश्ता है, इसीलिए लोग शादी में सारे अरमान पूरे कर लेना चाहते हैं, क्योंकि सभी यही कहते हैं कि शादी कोई रोज़-रोज़ थोड़ी होती है. लेकिन बदलते समय ने शादी को लेकर सोच भी बदली है. शादी को जन्मों का साथ न मानकर थोड़ा प्रैक्टिकली लेने लगे हैं. यही वजह है कि अब भारत में भी तलाक़ के मामलों में तेज़ी से इज़ाफ़ा होने लगा है.

एक नज़र इन आंकड़ों पर…

–     वर्ष 2003 से 2011 के बीच कोलकाता के फैमिली कोर्ट में तलाक़ के मामलों में 350 फ़ीसदी इज़ाफ़ा हुआ है.

–     वहीं मुंबई में साल 2010 से लेकर 2014 के बीच तलाक़ के मामले दोगुना हो गए.

–     भारत में 1.36 मिलियन लोग तलाक़शुदा हैं और सेपरेशन यानी अलग होनेवाले इससे तीन गुना अधिक हैं.

–     पुरुषों के मुक़ाबले महिलाओं की तादाद अधिक है- तलाक़शुदा में भी और सेपरेशन के मामलों में भी.

यह सच है कि भारत में भी अब दिन-ब-दिन तलाक़ के मामले तेज़ी से बढ़ते जा रहे हैं. यहां हम उन मामलों को चर्चा से अलग रखेंगे, जहां तलाक़ ही एकमात्र ऑप्शन रह जाता है रिश्ते में, क्योंकि कभी दहेज, कभी शोषण, तो कभी पति के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के चलते भी लड़कियां तलाक़ का रास्ता अपनाती हैं. लेकिन जहां हर छोटी-छोटी बात ही तलाक़ की वजह बनने लगे, वहां स्थिति सोचनीय हो जाती है. इन दिनों हर छोटी-छोटी बात पर रिश्ता तोड़ने का जो ट्रेंड बन गया है, उसके परिणाम बेहद गंभीर व घातक होते हैं. कम उम्र में ही डिप्रेशन, स्ट्रेस, अकेलापन, सायकोलॉजिकल प्रॉब्लम्स व अनहेल्दी लाइफस्टाइल के कारण अपनी ज़िंदगी को बेहद ग़मगीन व कठिन बना लेते हैं.

ऐसे में यह सवाल उठना लाज़िमी है कि अगर शादी जन्मों का साथ है, तो आख़िर क्यों आउटडेटेड लगने लगी है अब ये बात? महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो रही हैं. एक समय था जब न महिलाएं अधिक शिक्षित होती थीं और न ही आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर. लेकिन समय के साथ-साथ सब कुछ बदल रहा है. अब वो शिक्षित व आत्मनिर्भर ही नहीं, बल्कि अपने अधिकारों के प्रति सजग भी हैं. यही वजह है कि वो अब शोषण व अत्याचार सहने की बजाय ठोस क़दम उठाना बेहतर समझती हैं.

पैरेंट्स का मिलता है सपोर्ट

पहले के समय में महिलाओं के लिए शादी के बाद पैरेंट्स के घर लौट जाना भी लगभग नामुमकिन था, पर अब पैरेंट्स भी सपोर्ट करते हैं और सही-ग़लत का निर्णय लेने में बेटियों को सहयोग देते हैं.

मर्ज़ी के ख़िलाफ़ शादी होना

कई बार घरवालों के दबाव में आकर भी लड़के-लड़कियां शादी कर लेते हैं, लेकिन इस तरह की शादियों में स्वीकृति कम और तक़रार अधिक होती है. इस तरह की शादियों का अंत भी तलाक़ के रूप में अधिक होता है.

ससुराल में न निभ पाना

आपसी अनबन, सास-ससुर व बहू के बीच या फिर ननद के साथ सामंजस्य न बैठना भी एक बड़ी वजह है शादियां टूटने की. रोज़ ताने सुनना, लड़ाई-झगड़े, शिकवे-शिकायत… इन सबसे हर कोई परेशान होता है और फिर यही बेहतर समझा जाता है कि ख़राब रिश्ते में रहने व सब कुछ सहने से बेहतर है कि अलग हो जाया जाए.

नई जनरेशन की बदलती सोच

आजकल हर चीज़ से अधिक महत्व फन और एंजॉयमेंट को देने लगे हैं लोग. उन्हें लगता है एक ही तो लाइफ है, क्यों इसे बेकार के झगड़ों या कमिटमेंट में बांधकर ज़ाया किया जाए. अगर नहीं निभ पा रही, तो अलग हो जाओ.

शादी के असली अर्थ व रिश्ते की गंभीरता को न समझना

शादी एक ज़िम्मेदारी है, साथ ही यह एक ख़ूबसूरत बंधन भी है, पर आजकल कोई बंधना नहीं चाहता. रिश्ते में रहकर भी सबको आज़ादी चाहिए अपनी मर्ज़ी से जीने की, जो संभव नहीं.  जबकि शादी में त्याग-समर्पण करना ही पड़ता है. लेकिन इस तरह की भावनाएं आजकल आउटडेटेड लगती हैं. यही वजह है कि छोटी-छोटी बातें भी आजकल तलाक़ की वजहें बन जाती हैं.

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एडजेस्टमेंट्स न करना

आज सभी यह सोच रखते हैं कि हम आत्मनिर्भर हैं, तो हम अपने हिसाब से ज़िंदगी जीएंगे. किसी को किसी की सुनना या बात मानना ग़लत लगता है. सबके ईगो बड़े हो गए हैं. लोगों को लगता है कि हम क्यों किसी और के अनुसार अपनी ज़िंदगी जीएं और हम ही क्यों एडजेस्ट करें? ऐसे में एडजेस्टमेंट करने से कहीं आसान हमें अलग हो जाना लगता है.

ईगो भी एक बड़ी वजह है

कई बार लड़कों का ईगो, तो कई बार लड़कियों का भी ईगो रिश्ते को तोड़ देता है. पत्नी ज़्यादा कामयाब हो जाए या ज़्यादा कमाए, तो पति के साथ-साथ उसके घरवालों को भी समस्या होती है. कई बार लड़कियां ख़ुद यह सोचने लगती हैं कि मैं ज़्यादा कमाती हूं, तो भला मैं क्यों झुकूं. इन तमाम बातों का नतीजा तलाक़ के रूप में आगे आता है.

लाइफस्टाइल नहीं बदलना चाहते

अब यह बात आम हो गई है कि लोग शादी तो करते हैं, लेकिन अपनी शर्तों पर. शादी के बाद भी वो शादी से पहलेवाली ज़िंदगी ही जीना चाहते हैं. वही आज़ादी, वही बेपरवाही, वही अंदाज़… और जहां उन्हें लगता है कि उनकी आज़ादी या लाइफस्टाइल में उनकी शादी बेड़ी या बंधन बन रही है, वहीं उसे तोड़ने का निर्णय आसानी से ले लेते हैं.

सहनशीलता नहीं रह गई है

पहले हम छोटी-छोटी तक़रारों को इतना तवज्जो नहीं देते थे, पर अब वही बातें हमें बड़ी लगती हैं. हर बात पर हम हर्ट हो जाते हैं और हर बात हमारे स्वाभिमान का विषय बन जाती है. सहनशीलता बेहद कम हो गई है. कुछ बातों को नज़रअंदाज़ करके हम अपना रिश्ता बचाए रख सकते हैं, पर वो कोई करना ही नहीं चाहता.

रिश्ता बचाने की उम्मीद व ज़िम्मेदारी आज भी लड़कियों पर ही है

भले ही समय व समाज बदल रहा है, पर आज भी रिश्ता बनाए रखने व उसमें बने रहने के लिए समझौते करने की अपेक्षा महिलाओं से ही की जाती है. पुरुष आज भी इस दायरे से बाहर हैं. आज भी महिलाएं ही प्रयास करती हैं कि पार्टनर या ससुरालवालों की कुछ बातों को इग्नोर करके रिश्ता बच जाए, तो कोई हर्ज़ नहीं, पर इस तरह के प्रयास ससुरालपक्ष या पति की तरफ़ से आज भी कम ही होते हैं. यह भी बड़ी वजह है कि लड़कियों को कठोर निर्णय लेने पड़ते हैं.

पुरुषों पर आज भी दबाव कम है

महिलाएं घर-बाहर दोनों संभालती हैं, तो उनसे यह कहा जाता है कि तुम्हारी चॉइस है. ऐसे में पुरुष आज भी ऑफिस के बाद घर आकर पैर पसारकर थककर आई पत्नी से चाय-नाश्ता मांगना अपना अधिकार ही समझते हैं. वहीं ससुराल में भी लोग यही सोचते हैं कि घर की बहू है, तो सारी ज़िम्मेदारी इसी की बनती है. घर के काम व अन्य ज़िम्मेदारियों का बंटवारा आज भी नहीं हुआ है. न पति या ससुरालवाले घर के कामों में लड़की की मदद करते हैं और न ही यह चाहते हैं कि वो जॉब छोड़कर स़िर्फ घर ही संभाले. ऐसे में लड़कियां भी अब अपने अनुसार ़फैसले लेने से हिचकिचाती नहीं हैं.

करियर की बलि आज भी महिलाओं को ही देनी पड़ती है

फैमिली संभालने की बात हो और जहां करियर में बलि देने की बात हो, तो भले ही लड़की बेहतर कमा रही हो, समझौता उसे ही करना पड़ता है. ऐसा कम ही देखा गया है कि बात जब दोनों में से किसी एक के जॉब छोड़ने की ज़रूरत पर आती है, तो निर्णय लेने का आधार अधिक तनख़्वाह व बेहतर करियर बना हो. वहां सीधे तौर पर यही मान लिया जाता है कि लड़की ही जॉब छोड़ेगी. लड़का एडजेस्टमेंट नहीं करेगा. ऐसे में मजबूरी कहें या आत्मसम्मान, महिलाएं अलगाव का रास्ता भी चुनने से पीछे नहीं हटतीं.

शादी को कैज़ुअली लेना

यह जनरेशन शादी को बहुत कैज़ुअली लेती है. इस रिश्ते के प्रति सम्मान व गंभीरता आजकल नहीं दिखाई देती. समय में बदलाव के साथ रिश्तों के मायने तो बदल रहे हैं, पर इन बदलावों के चलते लोग शादी जैसे रिश्ते को भी हल्के में ही लेने लगे हैं कि अगर चली, तो ठीक है, वरना अलग हो जाएंगे. उन्हें यह सब सिंपल और आसान लगता है.

कैसे बचाएं रिश्ते को?

–     शादी की गंभीरता को समझें और जब तक आप इसके लिए पूरी तरह तैयार न हों, तब तक शादी न करें.

–     रिश्तों को कैज़ुअली न लें और शादी के प्रति भी कैज़ुअल अप्रोच से बचें.

–     शादी ज़िम्मेदारी है, यह फन मेकिंग या ग्लैमरस चीज़ नहीं है. यथार्थ को समझें और रिश्ता निभाने के लिए ही रिश्ता बनाएं.

–     अपनी मानसिकता बदलें. रिश्तों और पार्टनर का सम्मान करें.

–     हर छोटी बात को ईगो का विषय न बनाएं. ग़लतियों को माफ़ करना और ग़लती होने पर माफ़ी मांगना भी सीखें.

–     छोटे-छोटे विवादों को झगड़े का रूप न दें.

–     सहन करना, एडजस्ट करना शादी की डिमांड होती है. इसे समझें.

–     अगर आपकी ग़लती नहीं भी है, तो भी पहल करने में हर्ज़ नहीं. रिश्ते को बचाने में अगर आपकी पहल काम आ सकती है, तो अपने ईगो की ख़ातिर पहल करने से पीछे न हटें.

–     अलग होने के बाद भी ज़िंदगी आसान नहीं होती, गंभीरता से हर पहलू पर विचार करें.

–     पार्टनर एक-दूसरे का सम्मान करें. आपस में एक-दूसरे के प्रति सम्मान हर रिश्ते में ज़रूरी होता है.

–     रिश्तों को बार-बार बदला नहीं जा सकता. यह इतना आसान नहीं होता. भले ही आप कितने भी प्रैक्टिकल क्यों न हों, रिश्ता टूटने पर दर्द सभी को होता है.

–     कम्यूनिकेट करें. कितनी भी गंभीर समस्या हो, बातचीत का रास्ता सबसे पहले होना चाहिए और वो बेहद ज़रूरी भी है. आपस में बातचीत करें और उसके बाद तय करें कि क्या करना है.

– गीता शर्मा

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शादी मुबारक साइना और पी कश्यप! (Congratulations To Saina Nehwal And P Kashyap On Their Marriage)

Saina Nehwal And P Kashyap
शादी मुबारक साइना और पी कश्यप! (Congratulations To Saina Nehwal And P Kashyap On Their Marriage)

बैडमिंटन सुपरस्टार्स साइना नेहवाल (Saina Nehwal) और पी कश्यप (P Kashyap) बंध चुके हैं शादी (Wedding) के बंधन में. साइना ने सोशल मीडिया पर तस्वीर (Pictures) शेयर करके यह ख़ुशख़बरी अपने फैंस को दी. हमारी तरफ़ से दोनों को शुभकामनाएं!

दोनों काफ़ी समय से रिलेशनशिप में थे और बैडमिंटन की दुनिया में दोनों ने ही अपना ख़ास मुकाम हासिल किया है. सोशल मीडिया पर भी दोनों की साथ-साथ की कई तस्वीरें देखी जाती थीं और फैंस इसी इंतज़ार में थे कि कब दोनों मिस्टर एंड मिसेज़ कश्यप बनें.

सिंपल से आउटफिट्स में दोनों ही बेहद प्यारे और शालीन लग रहे थे.