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जानें हिंदू मैरिज एक्ट… समय के साथ क्या-क्या बदला? (Hindu Marriage Act: Recent Changes You Must Know)

Hindu Marriage Act Changes

साल 1955 में हमारे देश के जो हालात थे, आज स्थिति उससे बिल्कुल अलग है. आज लड़कियां भी उच्च शिक्षा प्राप्त करके सफलता के नित नए आयाम छू रही हैं, ऐसे में हमारा क़ानून भला बदलाव से अछूता कैसे रह सकता है. जब-जब महिलाओं ने अपने हक़ के लिए आवाज़ उठाई, तब-तब क़ानून में महत्वपूर्ण बदलाव हुए. पिछले 63 सालों में कितना बदला हमारा हिंदू विवाह क़ानून? आइए जानते हैं.

Hindu Marriage Act Changes

कितना जानते हैं आप हिंदू मैरिज एक्ट के बारे में?

हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 में बनाया गया था. इस क़ानून के तहत सभी हिंदुओं, सिख, जैन और बौद्धों के शादी, तलाक़ और मेंटेनेंस के मामले सुलझाए जाते हैं.

–     सबसे पहले तो शादी के समय लड़की की उम्र 18 और लड़के की 21 साल होनी चाहिए. कुछ समय पहले जनहित याचिका के तहत एक वकील ने लड़के की उम्र भी 18 साल करने की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने सिरे से ख़ारिज कर दिया.

–     हिंदू मैरिज एक्ट के तहत कोई शादीशुदा व्यक्ति पहली पत्नी के जीवित रहते, उससे तलाक़ लिए बिना दूसरी शादी नहीं कर सकता. अगर ऐसा होता है, तो उसे सात साल की जेल और जुर्माना दोनों हो सकता है. कुछ लोगों ने इसका तोड़ निकालने के लिए धर्म बदलकर शादी करनी शुरू की, जिसके ख़िलाफ़ 1995 में सुप्रीम कोर्ट ने ़फैसला सुनाया कि यह क़ानूनन जुर्म है, जिसके लिए उस व्यक्ति को सज़ा हो सकती है.

–     गोवा के फैमिली लॉ के कोड ऑफ यूसेजेस एंड कस्टम्स में गैर-ईसाई हिंदू व्यक्ति को एक से ज़्यादा शादियां करने की छूट है, बशर्ते 25 साल की उम्र तक उसकी पत्नी मां न बनी हो और 30 साल की उम्र तक उन्हें कोई बेटा न हो.

–     इसके तहत शादी के लिए किसी ख़ास रस्म का ज़िक्र नहीं किया गया है. लड़के या लड़की किसी के भी रीति-रिवाज़ों के आधार पर शादी की जा सकती है.

–     शादी के बाद पति-पत्नी दोनों को ही वैवाहिक अधिकार (सेक्सुअल रिलेशन के अधिकार) मिलते हैं. क़ानूनन शादी तभी संपन्न मानी जाती है, जब उनके बीच शारीरिक संबंध बनते हैं. अगर कोई पार्टनर दूसरे को इस अधिकार से महरूम रखता है, तो दूसरा पार्टनर कोर्ट का दरवाज़ा खटखटा सकता है. कोर्ट ऐसी शादी को अमान्य या निरस्त कर सकता है.

–     इसके तहत शादी का रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है, ताकि शादी के बाद होनेवाली लीगल डॉक्यूमेंटेशन में कोई अड़चन न आए, लेकिन आज भी बहुत से लोग मैरिज सर्टिफिकेट नहीं बनवाते, जिसके कारण कुछ लोग उसका ग़लत फ़ायदा भी उठाते हैं.

–     हिंदू मैरिज एक्ट में शादी को पवित्र बंधन माना गया है, लेकिन अगर दोनों की शादी में समस्या आ रही है, तो वो तलाक़ ले सकते हैं. तलाक़ के आधार- व्यभिचार, धर्मांतरण, मानसिक विकार, कुष्ठ रोग, नपुंसकता, सांसारिक कर्त्तव्यों को त्याग देना, सात सालों से लापता, जुडीशियल सेपरेशन (कोर्ट द्वारा अलग रहने की इजाज़त), किसी भी तरह के शारीरिक संबंध नहीं बनाना और निष्ठुरता या क्रूरता हैं. पिछले कुछ सालों में मानसिक क्रूरता (मेंटल क्रुएल्टी) के आधार पर तलाक़ के मामलों में बढ़ोतरी हुई है.

–   क़ानून ने महिलाओं को परमानेंट एलीमनी और मेंटेनेंस का अधिकार दिया है, लेकिन वो ऐसी महिलाएं हैं, जो ख़ुद अपना भरण-पोषण नहीं कर सकतीं. कामकाजी महिलाओं को मेंटेनेंस का अधिकार नहीं था, लेकिन 2011 में दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम् ़फैसला दिया कि पति से अलग रहनेवाली कामकाजी महिलाएं भी मेंटेनेंस की हक़दार होंगी.

–     बच्चों की कस्टडी को लेकर भी नियम बनाए गए हैं. तलाक़ के बाद अगर बच्चा छोटा है, तो मां को ही उसकी कस्टडी मिलती है. बड़े बच्चों के लिए कोर्ट मामले को दोनों की आर्थिक स्थिति व परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ़फैसला करता है.

किन स्थितियों में शादी हो सकती है अमान्य?

हिंदू मैरिज एक्ट में ऐसा भी प्रावधान है कि कुछ स्थितियों में आप अपनी शादी को कोर्ट से अमान्य घोषित करा सकते हैं. ऐसे में आप तलाक़शुदा नहीं कहे जाएंगे, बल्कि ऐसा माना जाएगा कि आपकी शादी हुई ही नहीं थी.

–   अगर शादी के व़क्त लड़की किसी और पुरुष से प्रेग्नेंट हो, तो ऐसी सूरत में शादी अमान्य हो सकती है. कुछ साल पहले ऐसा एक मामला सुर्ख़ियों में आया था. उस केस में लड़की शादी के व़क्त प्रेग्नेंट थी. शादी के बाद जब उसके पति को इसका शक हुआ, तो उन्होंने सोनोग्राफी करवाई, तो पता चला कि लड़की प्रेग्नेंट है. उसके पति ने तुरंत फैमिली कोर्ट में शादी को अमान्य करने की याचिका दाख़िल की. इस मामले में आपको यह ध्यान रखना होगा कि शादी के एक साल के भीतर मामला दाख़िल करना होगा.

–     अगर नपुंसकता के कारण पति-पत्नी का रिश्ता नहीं बन पाया, तो शादी क़ानूनन पूरी नहीं मानी जाएगी और ऐसे में व्यक्ति को हक़ है कि वो शादी को अमान्य करा सके. ऐसे में आपको तलाक़ लेने की ज़रूरत नहीं, बल्कि शादी को अमान्य करा सकते हैं.

–    अगर शादी के बाद आपको पता चले कि शादी के व़क्त ही आपके पार्टनर की मानसिक स्थिति सही नहीं थी और यह बात आपसे छुपाई गई, तो आप ऐसी स्थिति में अपनी शादी को अमान्य करा सकते हैं.

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Hindu Marriage Act Changes
विवाह विधेयक क़ानून, 2010

हिंदू मैरिज एक्ट और स्पेशल मैरिज एक्ट में कुछ बदलाव करने के उद्देश्य से साल 2010 में यह विधेयक लाया गया था. इस विधेयक में महिलाओं के ह़क़ में कई बदलाव किए गए हैं. 2013 में यह विधेयक राज्यसभा में पारित हुआ, पर लोकसभा में पारित न हो सका. इसमें प्रस्तावित कुछ बदलावों के बारे में आइए आपको बताते हैं.

–    इसमें पत्नी को यह अधिकार दिया गया है कि वो इस आधार पर अपने पति से तलाक़ ले सकती है कि अब उनकी शादी इस मुक़ाम पर पहुंच गई है कि उसे बरक़रार रखना नामुमकिन है, इसलिए वो तलाक़ चाहती है.

–     अगर पति ‘शादी पूरी तरह से टूट गई है और बरक़रार नहीं रह सकती,’ इस आधार पर तलाक़ लेना चाहता है, तो पत्नी इसका विरोध कर सकती है, पर पति के पास यह अधिकार नहीं है.

–     पत्नी को पति की चल-अचल संपत्ति में समान अधिकार मिलेगा. साथ ही उसे पति की रिहायशी संपत्ति यानी घर आदि में हिस्सा मिलेगा.

–     पति-पत्नी द्वारा गोद लिए बच्चों को सगे बच्चों के समान प्रॉपर्टी में अधिकार मिलेगा.

–     आपसी सहमति से तलाक़ के लिए याचिका दायर करने के बाद कोई पक्ष क़ानूनी कार्यवाही से पीछे नहीं हट सकता.

छह महीने का इंतज़ार ख़त्म

इस बीच सितंबर, 2017 में हिंदू मैरिज एक्ट में एक और अहम् बदलाव आया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपसी सहमति से तलाक़ लेने के लिए लोगों को 6 महीने का इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा. कोर्ट के मुताबिक़ अगर दोनों के बीच समझौते की कोई गुंजाइश नहीं बची है और बच्चों की कस्टडी का ़फैसला भी हो गया है, तो उन्हें छह महीने के कूलिंग ऑफ पीरियड को पूरा करने की मजबूरी नहीं है. इससे दोबारा वो जल्दी अपना घर बसा सकते हैं.

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Hindu Marriage Act Changes  
 स्पेशल मैरिज एक्ट से जुड़ी 10 ज़रूरी बातें

यह क़ानून ख़ासतौर से अंतर्जातीय विवाह कर रहे लोगों की रक्षा के लिए बनाया गया है. इसके तहत अपनी शादी रजिस्टर कराने के लिए आपको कोई धार्मिक रीति-रिवाज़ निभाने नहीं पड़ते.

  1. इस एक्ट के तहत अंतर्जातीय और अलग-अलग धर्म के लोग विवाह कर सकते हैं.
  2. इसके तहत हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन या बौद्ध धर्म के लोग विवाह कर सकते हैं.
  3. शादी के लिए आपको 30 दिन पहले नोटिस देना पड़ता है. दूल्हा या दुल्हन दोनों में से कोई एक अपने इलाके के रजिस्ट्रार ऑफिस में नोटिस जमा कर सकता है.
  4. इसके तहत स़िर्फ भारतीय ही नहीं, बल्कि विदेशों में रह रहे प्रवासी भारतीय भी विवाह रजिस्टर करा सकते हैं.
  5. हिंदू मैरिज एक्ट की तरह इसमें भी कुछ नियम व शर्तें हैं, जैसे-

–     लड़के की उम्र कम से कम 21 साल और लड़की 18 साल होनी चाहिए.

–     दोनों कुंआरे हों या फिर शादीशुदा न हों यानी कोई पति-पत्नी न हों.

–     शादी के व़क्त मानसिक स्थिति अच्छी होनी चाहिए.

–     दोनों ही पक्ष प्रोहिबिटेड रिलेशनशिप की कैटेगरी में न आते हों. प्रोहिबिटेड रिलेशनशिप यानी भाई-बहन न हों, न ही सौतेले भाई-बहन हों. आपको बता दें कि सपिंडवाले भी इसके तहत शादी नहीं कर सकते. सपिंड यानी मां की तरफ़ से तीन पीढ़ी और पिता की तरफ़ से पांच पीढ़ी तक में शादी निषिद्ध मानी जाती है.

  1. 30 दिनों के लिए शादी का नोटिस रजिस्ट्रार ऑफिस के नोटिस बोर्ड पर लगाया जाता है. अगर किसी को इस शादी से आपत्ति हो, तो वो अपनी आपत्ति ज़ाहिर कर सकता है.
  2. अगर कोई आपत्ति आती है, तो रजिस्ट्रार को उसे 30 दिनों के भीतर सुलझाना होता है, लेकिन अगर कोई आपत्ति नहीं आती, तो नियत तारीख़ को तीन गवाहों की उपस्थिति में शादी संपन्न कराई जाती है.
  3. हर किसी के लिए यह जानना ज़रूरी है कि इसके तहत शादी करनेवालों के प्रॉपर्टी सक्सेशन के मामले इंडियन सक्सेशन एक्ट के तहत सुलझाए जाते हैं.
  1. यहां यह जानना भी बेहद ज़रूरी है कि आप शादी के एक साल के भीतर तलाक़ के लिए अप्लाई नहीं कर सकते. लेकिन अगर आप साबित कर सकें कि शादी बहुत बुरे हालात से गुज़र रही है, तो कोर्ट आवेदन पर अमल कर सकता है.
  2. इस एक्ट में दोबारा शादी का प्रावधान भी शामिल किया गया है, लेकिन शर्त यही है कि पहली शादी टूट चुकी हो और मामले में दोबारा अपील की गुंजाइश न बची हो.

– अनीता सिंह

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शादी है जन्मों का साथ, क्यों आउटडेटेड लगने लगी है ये बात? (Why Concept Of Timeless Marriage Is Getting Outdated?)

प्यार (Love) का रिश्ता (Relationship) है इसके दायरे तय मत करो, मुहब्बत का सिलसिला है इसे महबूब के दिल में पनाह लेने दो… न एक पल, न एक घड़ी, न एक जनम… सदियों की दास्तान है ये, हर जनम का साथ है ये… कभी न भूलनेवाला फसाना है, जन्मों तक चलनेवाला अफ़साना है… ज़माना याद रखेगा यह बात, कभी न छूटेगा अपना ये हाथ.

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प्यार, मुहब्बत, चाहत से कहीं आगे बढ़कर सबसे पाक रिश्ता माना जाता है शादी का. शादी को हमारे समाज में काफ़ी महत्व दिया जाता है, क्योंकि यह हमारी ज़िंदगी बदल देता है. शादी को लेकर यही सोच आज भी है कि यह जन्म-जन्मांतर का रिश्ता है, इसीलिए लोग शादी में सारे अरमान पूरे कर लेना चाहते हैं, क्योंकि सभी यही कहते हैं कि शादी कोई रोज़-रोज़ थोड़ी होती है. लेकिन बदलते समय ने शादी को लेकर सोच भी बदली है. शादी को जन्मों का साथ न मानकर थोड़ा प्रैक्टिकली लेने लगे हैं. यही वजह है कि अब भारत में भी तलाक़ के मामलों में तेज़ी से इज़ाफ़ा होने लगा है.

एक नज़र इन आंकड़ों पर…

–     वर्ष 2003 से 2011 के बीच कोलकाता के फैमिली कोर्ट में तलाक़ के मामलों में 350 फ़ीसदी इज़ाफ़ा हुआ है.

–     वहीं मुंबई में साल 2010 से लेकर 2014 के बीच तलाक़ के मामले दोगुना हो गए.

–     भारत में 1.36 मिलियन लोग तलाक़शुदा हैं और सेपरेशन यानी अलग होनेवाले इससे तीन गुना अधिक हैं.

–     पुरुषों के मुक़ाबले महिलाओं की तादाद अधिक है- तलाक़शुदा में भी और सेपरेशन के मामलों में भी.

यह सच है कि भारत में भी अब दिन-ब-दिन तलाक़ के मामले तेज़ी से बढ़ते जा रहे हैं. यहां हम उन मामलों को चर्चा से अलग रखेंगे, जहां तलाक़ ही एकमात्र ऑप्शन रह जाता है रिश्ते में, क्योंकि कभी दहेज, कभी शोषण, तो कभी पति के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के चलते भी लड़कियां तलाक़ का रास्ता अपनाती हैं. लेकिन जहां हर छोटी-छोटी बात ही तलाक़ की वजह बनने लगे, वहां स्थिति सोचनीय हो जाती है. इन दिनों हर छोटी-छोटी बात पर रिश्ता तोड़ने का जो ट्रेंड बन गया है, उसके परिणाम बेहद गंभीर व घातक होते हैं. कम उम्र में ही डिप्रेशन, स्ट्रेस, अकेलापन, सायकोलॉजिकल प्रॉब्लम्स व अनहेल्दी लाइफस्टाइल के कारण अपनी ज़िंदगी को बेहद ग़मगीन व कठिन बना लेते हैं.

ऐसे में यह सवाल उठना लाज़िमी है कि अगर शादी जन्मों का साथ है, तो आख़िर क्यों आउटडेटेड लगने लगी है अब ये बात? महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो रही हैं. एक समय था जब न महिलाएं अधिक शिक्षित होती थीं और न ही आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर. लेकिन समय के साथ-साथ सब कुछ बदल रहा है. अब वो शिक्षित व आत्मनिर्भर ही नहीं, बल्कि अपने अधिकारों के प्रति सजग भी हैं. यही वजह है कि वो अब शोषण व अत्याचार सहने की बजाय ठोस क़दम उठाना बेहतर समझती हैं.

पैरेंट्स का मिलता है सपोर्ट

पहले के समय में महिलाओं के लिए शादी के बाद पैरेंट्स के घर लौट जाना भी लगभग नामुमकिन था, पर अब पैरेंट्स भी सपोर्ट करते हैं और सही-ग़लत का निर्णय लेने में बेटियों को सहयोग देते हैं.

मर्ज़ी के ख़िलाफ़ शादी होना

कई बार घरवालों के दबाव में आकर भी लड़के-लड़कियां शादी कर लेते हैं, लेकिन इस तरह की शादियों में स्वीकृति कम और तक़रार अधिक होती है. इस तरह की शादियों का अंत भी तलाक़ के रूप में अधिक होता है.

ससुराल में न निभ पाना

आपसी अनबन, सास-ससुर व बहू के बीच या फिर ननद के साथ सामंजस्य न बैठना भी एक बड़ी वजह है शादियां टूटने की. रोज़ ताने सुनना, लड़ाई-झगड़े, शिकवे-शिकायत… इन सबसे हर कोई परेशान होता है और फिर यही बेहतर समझा जाता है कि ख़राब रिश्ते में रहने व सब कुछ सहने से बेहतर है कि अलग हो जाया जाए.

नई जनरेशन की बदलती सोच

आजकल हर चीज़ से अधिक महत्व फन और एंजॉयमेंट को देने लगे हैं लोग. उन्हें लगता है एक ही तो लाइफ है, क्यों इसे बेकार के झगड़ों या कमिटमेंट में बांधकर ज़ाया किया जाए. अगर नहीं निभ पा रही, तो अलग हो जाओ.

शादी के असली अर्थ व रिश्ते की गंभीरता को न समझना

शादी एक ज़िम्मेदारी है, साथ ही यह एक ख़ूबसूरत बंधन भी है, पर आजकल कोई बंधना नहीं चाहता. रिश्ते में रहकर भी सबको आज़ादी चाहिए अपनी मर्ज़ी से जीने की, जो संभव नहीं.  जबकि शादी में त्याग-समर्पण करना ही पड़ता है. लेकिन इस तरह की भावनाएं आजकल आउटडेटेड लगती हैं. यही वजह है कि छोटी-छोटी बातें भी आजकल तलाक़ की वजहें बन जाती हैं.

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एडजेस्टमेंट्स न करना

आज सभी यह सोच रखते हैं कि हम आत्मनिर्भर हैं, तो हम अपने हिसाब से ज़िंदगी जीएंगे. किसी को किसी की सुनना या बात मानना ग़लत लगता है. सबके ईगो बड़े हो गए हैं. लोगों को लगता है कि हम क्यों किसी और के अनुसार अपनी ज़िंदगी जीएं और हम ही क्यों एडजेस्ट करें? ऐसे में एडजेस्टमेंट करने से कहीं आसान हमें अलग हो जाना लगता है.

ईगो भी एक बड़ी वजह है

कई बार लड़कों का ईगो, तो कई बार लड़कियों का भी ईगो रिश्ते को तोड़ देता है. पत्नी ज़्यादा कामयाब हो जाए या ज़्यादा कमाए, तो पति के साथ-साथ उसके घरवालों को भी समस्या होती है. कई बार लड़कियां ख़ुद यह सोचने लगती हैं कि मैं ज़्यादा कमाती हूं, तो भला मैं क्यों झुकूं. इन तमाम बातों का नतीजा तलाक़ के रूप में आगे आता है.

लाइफस्टाइल नहीं बदलना चाहते

अब यह बात आम हो गई है कि लोग शादी तो करते हैं, लेकिन अपनी शर्तों पर. शादी के बाद भी वो शादी से पहलेवाली ज़िंदगी ही जीना चाहते हैं. वही आज़ादी, वही बेपरवाही, वही अंदाज़… और जहां उन्हें लगता है कि उनकी आज़ादी या लाइफस्टाइल में उनकी शादी बेड़ी या बंधन बन रही है, वहीं उसे तोड़ने का निर्णय आसानी से ले लेते हैं.

सहनशीलता नहीं रह गई है

पहले हम छोटी-छोटी तक़रारों को इतना तवज्जो नहीं देते थे, पर अब वही बातें हमें बड़ी लगती हैं. हर बात पर हम हर्ट हो जाते हैं और हर बात हमारे स्वाभिमान का विषय बन जाती है. सहनशीलता बेहद कम हो गई है. कुछ बातों को नज़रअंदाज़ करके हम अपना रिश्ता बचाए रख सकते हैं, पर वो कोई करना ही नहीं चाहता.

रिश्ता बचाने की उम्मीद व ज़िम्मेदारी आज भी लड़कियों पर ही है

भले ही समय व समाज बदल रहा है, पर आज भी रिश्ता बनाए रखने व उसमें बने रहने के लिए समझौते करने की अपेक्षा महिलाओं से ही की जाती है. पुरुष आज भी इस दायरे से बाहर हैं. आज भी महिलाएं ही प्रयास करती हैं कि पार्टनर या ससुरालवालों की कुछ बातों को इग्नोर करके रिश्ता बच जाए, तो कोई हर्ज़ नहीं, पर इस तरह के प्रयास ससुरालपक्ष या पति की तरफ़ से आज भी कम ही होते हैं. यह भी बड़ी वजह है कि लड़कियों को कठोर निर्णय लेने पड़ते हैं.

पुरुषों पर आज भी दबाव कम है

महिलाएं घर-बाहर दोनों संभालती हैं, तो उनसे यह कहा जाता है कि तुम्हारी चॉइस है. ऐसे में पुरुष आज भी ऑफिस के बाद घर आकर पैर पसारकर थककर आई पत्नी से चाय-नाश्ता मांगना अपना अधिकार ही समझते हैं. वहीं ससुराल में भी लोग यही सोचते हैं कि घर की बहू है, तो सारी ज़िम्मेदारी इसी की बनती है. घर के काम व अन्य ज़िम्मेदारियों का बंटवारा आज भी नहीं हुआ है. न पति या ससुरालवाले घर के कामों में लड़की की मदद करते हैं और न ही यह चाहते हैं कि वो जॉब छोड़कर स़िर्फ घर ही संभाले. ऐसे में लड़कियां भी अब अपने अनुसार ़फैसले लेने से हिचकिचाती नहीं हैं.

करियर की बलि आज भी महिलाओं को ही देनी पड़ती है

फैमिली संभालने की बात हो और जहां करियर में बलि देने की बात हो, तो भले ही लड़की बेहतर कमा रही हो, समझौता उसे ही करना पड़ता है. ऐसा कम ही देखा गया है कि बात जब दोनों में से किसी एक के जॉब छोड़ने की ज़रूरत पर आती है, तो निर्णय लेने का आधार अधिक तनख़्वाह व बेहतर करियर बना हो. वहां सीधे तौर पर यही मान लिया जाता है कि लड़की ही जॉब छोड़ेगी. लड़का एडजेस्टमेंट नहीं करेगा. ऐसे में मजबूरी कहें या आत्मसम्मान, महिलाएं अलगाव का रास्ता भी चुनने से पीछे नहीं हटतीं.

शादी को कैज़ुअली लेना

यह जनरेशन शादी को बहुत कैज़ुअली लेती है. इस रिश्ते के प्रति सम्मान व गंभीरता आजकल नहीं दिखाई देती. समय में बदलाव के साथ रिश्तों के मायने तो बदल रहे हैं, पर इन बदलावों के चलते लोग शादी जैसे रिश्ते को भी हल्के में ही लेने लगे हैं कि अगर चली, तो ठीक है, वरना अलग हो जाएंगे. उन्हें यह सब सिंपल और आसान लगता है.

कैसे बचाएं रिश्ते को?

–     शादी की गंभीरता को समझें और जब तक आप इसके लिए पूरी तरह तैयार न हों, तब तक शादी न करें.

–     रिश्तों को कैज़ुअली न लें और शादी के प्रति भी कैज़ुअल अप्रोच से बचें.

–     शादी ज़िम्मेदारी है, यह फन मेकिंग या ग्लैमरस चीज़ नहीं है. यथार्थ को समझें और रिश्ता निभाने के लिए ही रिश्ता बनाएं.

–     अपनी मानसिकता बदलें. रिश्तों और पार्टनर का सम्मान करें.

–     हर छोटी बात को ईगो का विषय न बनाएं. ग़लतियों को माफ़ करना और ग़लती होने पर माफ़ी मांगना भी सीखें.

–     छोटे-छोटे विवादों को झगड़े का रूप न दें.

–     सहन करना, एडजस्ट करना शादी की डिमांड होती है. इसे समझें.

–     अगर आपकी ग़लती नहीं भी है, तो भी पहल करने में हर्ज़ नहीं. रिश्ते को बचाने में अगर आपकी पहल काम आ सकती है, तो अपने ईगो की ख़ातिर पहल करने से पीछे न हटें.

–     अलग होने के बाद भी ज़िंदगी आसान नहीं होती, गंभीरता से हर पहलू पर विचार करें.

–     पार्टनर एक-दूसरे का सम्मान करें. आपस में एक-दूसरे के प्रति सम्मान हर रिश्ते में ज़रूरी होता है.

–     रिश्तों को बार-बार बदला नहीं जा सकता. यह इतना आसान नहीं होता. भले ही आप कितने भी प्रैक्टिकल क्यों न हों, रिश्ता टूटने पर दर्द सभी को होता है.

–     कम्यूनिकेट करें. कितनी भी गंभीर समस्या हो, बातचीत का रास्ता सबसे पहले होना चाहिए और वो बेहद ज़रूरी भी है. आपस में बातचीत करें और उसके बाद तय करें कि क्या करना है.

– गीता शर्मा

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शादी मुबारक साइना और पी कश्यप! (Congratulations To Saina Nehwal And P Kashyap On Their Marriage)

Saina Nehwal And P Kashyap
शादी मुबारक साइना और पी कश्यप! (Congratulations To Saina Nehwal And P Kashyap On Their Marriage)

बैडमिंटन सुपरस्टार्स साइना नेहवाल (Saina Nehwal) और पी कश्यप (P Kashyap) बंध चुके हैं शादी (Wedding) के बंधन में. साइना ने सोशल मीडिया पर तस्वीर (Pictures) शेयर करके यह ख़ुशख़बरी अपने फैंस को दी. हमारी तरफ़ से दोनों को शुभकामनाएं!

दोनों काफ़ी समय से रिलेशनशिप में थे और बैडमिंटन की दुनिया में दोनों ने ही अपना ख़ास मुकाम हासिल किया है. सोशल मीडिया पर भी दोनों की साथ-साथ की कई तस्वीरें देखी जाती थीं और फैंस इसी इंतज़ार में थे कि कब दोनों मिस्टर एंड मिसेज़ कश्यप बनें.

सिंपल से आउटफिट्स में दोनों ही बेहद प्यारे और शालीन लग रहे थे.

शादी से पहले ज़रूरी है इन 17 बातों पर सहमति (17 Things Every Couple Must Talk About Before Getting Marriage)

हमारे समाज में शादी (Wedding) को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है, लेकिन शादी को लेकर ज़रूरी बातें, सतर्कता व रिश्तों (Relationships) की मज़बूती के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लेने की सीख को ज़रा भी महत्व नहीं दिया जाता, क्योंकि हम शादी का अर्थ शायद अब तक समझ ही नहीं पाए. पैरेंट्स को लगता है कि बस ‘किसी तरह’ बच्चों की शादी हो जाए… ये जो ‘किसी तरह’ वाली सोच है, यही समस्या की जड़ है. किसी तरह… जैसे-तैसे… ये तमाम भाव निपटानेवाले हैं, इनमें गंभीरता कहां है?

Things Couple Must Talk Before Getting Married

पैरेंट्स को लगता है कि बात पक्की हो गई है, तो अब शादी होने तक बच्चों को भी ऐसी किसी भी बात से बचना चाहिए, जिससे शादी में अड़चन आए. लेकिन आजकल लोगों की सोच बदल रही है और यह ज़रूरी भी है कि शादी जैसे रिश्ते की गंभीरता को समझकर उससे जुड़े हर पहलू पर विचार किया जाए. यही वजह है कि शादी से पहले ही कुछ बातों पर सहमति अनिवार्य है, ताकि रिश्ते में आगे चलकर समस्या न हो.

1. करियर

दोनों अपने करियर को लेकर क्या सोचते हैं, एक-दूसरे से किस तरह का सहयोग चाहते हैं, किस तरह से शादी के बाद करियर को आगे बढ़ाना है… इन बातों पर आपसी सलाह-मशविरा ज़रूरी है.

2. कंट्रासेप्शन

किस तरह का कंट्रासेप्शन यूज़ करना है, किसे यूज़ करना है, कब तक यूज़ करना है आदि बातें कपल्स पहले ही डिसाइड कर लें, वरना अनचाही प्रेग्नेंसी बहुत से प्लान्स चेंज करवा सकती है.

3. फैमिली प्लानिंग

जैसा कि हमने कहा कि एक्सिडेंटल प्रेग्नेंसी या अनचाहा गर्भ बहुत से अहम् फैसले बदलने को मजबूर कर सकता है, जिसमें करियर से लेकर फाइनेंशियल प्लानिंग तक शामिल है. तो बेहतर होगा कि बच्चा शादी के कितने समय बाद प्लान करना है, इस पर सहमति बना लें.

4. फाइनेंशियल प्लानिंग

आपके जॉइंट अकाउंट्स, इंडिपेंडेंट अकाउंट्स, आपकी सैलरी, सेविंग्स, घर के ख़र्च व ज़िम्मेदारियां किस तरह से पूरी करनी हैं, किसके हिस्से कौन-सी ड्यूटी आएगी, किसको कितना ख़र्च करने के लिए तैयार रहना होगा आदि बातों पर चर्चा करना बेहतर होगा, क्योंकि आगे चलकर यही बातें विवाद का कारण बनती हैं.

5. घर का काम

यदि आप दोनों वर्किंग हैं, तो घर का काम भी मिल-जुलकर करना ज़रूरी है. इससे एक ही व्यक्ति पर ज़्यादा बोझ नहीं पड़ता. इन पहलुओं पर भी चर्चा करें.

6. लड़की अपने मायके की ज़िम्मेदारियों पर बात करे

शादी के बाद भी अपने मायके को किस तरह से आप सपोर्ट करना चाहती हैं और यह कितना ज़रूरी है, यह बात पार्टनर को बताएं, ताकि बाद में कोई विवाद न हो. पार्टनर आपको कितना सहयोग देगा, इस पर भी बात करें.

7. लड़का भी घर की ज़िम्मेदारियों की बात साफ़-साफ़ करे

कोई लोन है या फ्यूचर में आपको लोन लेकर घर या कोई ऑफिस खोलना है, सगे-संबंधियों, भाई-बहनों, माता-पिता से जुड़ी तमाम ज़िम्मेदारियों के बारे में पार्टनर को पहले ही अवगत करा दें, ताकि वो मानसिक रूप से आपका साथ देने को तैयार रहे. ऐसा न हो कि वो फिल्मी सोच के साथ किसी अलग ही दुनिया का सपना संजोकर आए और यथार्थ के धरातल पर आकर उसकी आंखें खुलें.

8. मानसिक-शारीरिक समस्या या बीमारी

यदि आपको किसी तरह की कोई समस्या रही हो या इलाज चल रहा हो, तो इस बात को छिपाएं नहीं. किसी और से पता चलने से विश्‍वास टूट जाता है, बेहतर होगा आप ख़ुद खुलकर बता दें, ताकि आपका पार्टनर निर्णय ले सके कि उसको किस तरह आपका साथ देना है.

9. सेक्स

यह ज़रूरी नहीं कि शादी की पहली रात ही सेक्स किया जाए. आप दोनों कितने सहज हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है. अगर आपके मन में सेक्स को लेकर डर, शंका या संकोच जैसी बात है, तो आप दोनों काउंसलर के पास भी जा सकते हैं.

10. वर्जिनिटी

आपका पार्टनर इस पर क्या सोच रखता है. क्या वो भी इसी के इंतज़ार में है कि शादी की पहली रात सेक्स करने पर आपकी वर्जिनिटी का पता चल जाएगा… अगर उसकी सोच इस तरह की है, तो अलर्ट हो जाएं. आप बातों ही बातों में, किसी सहेली या किसी मूवी का उदाहरण देकर सामनेवाले की सोच को जांच-परख सकती हैं. यह बहुत ज़रूरी है, वरना ये बातें तलाक़ का कारण भी बन जाती हैं.

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 Perfect Partner
11. एक-दूसरे के विचार

यह ज़रूरी नहीं कि आप दोनों के विचार एक जैसे हों और यह संभव भी नहीं, क्योंकि हर इंसान की सोच अलग होती है, लेकिन क्या आप उसकी सोच के साथ निबाह सकते हैं? कहीं होनेवाला पार्टनर बहुत ज़्यादा ईगोइस्ट तो नहीं, कहीं बहुत ज़िद्दी तो नहीं, कहीं बहुत पिछड़े विचारों का तो नहीं, कहीं बहुत ख़र्चीला या बहुत कंजूस तो नहीं आदि बातों पर चर्चा ज़रूरी है.

12. आदतें

बेहतर होगा एक-दूसरे को इंप्रेस करने की बजाय अपनी रियल साइड दिखाएं, ताकि भ्रम की स्थिति न रहे. आप दोनों की आदतें, जैसे- ईटिंग हैबिट्स, हाइजीन से जुड़ी आदतें, पैसों से जुड़ी, सिगरेट-शराब, वर्किंग हैबिट्स कैसी हैं, यह भी ज़रूर पूछें.

13. शौक़

बाद में पता चला कि एक को मूवीज़ का बेहद शौक़ है, तो दूसरा किताबी कीड़ा निकला. एक को बाहर घूमने में मज़ा आता है, तो दूसरे को घर बैठकर टीवी देखने में… ये बातें पहले ही पता चल जाएं, तो एडजेस्ट करने में आसानी होती है. एक-दूसरे के लिए ख़ुद को बदलने का प्रयास भी किया जा सकता है, वरना ज़िंदगीभर ताने सुनते रहना पड़ेगा कि ये कहीं घुमाने नहीं लेकर जाते.

14. ज़िम्मेदार

होनेवाला पार्टनर कितना ज़िम्मेदार है, कितना गंभीर है किसी भी बात या रिश्ते को लेकर. इस पर भी बात करनी ज़रूरी है. लापरवाही भरा रवैया हर रिश्ते में समस्या खड़ी करता है, चाहे यह लापरवाही लड़के की तरफ़ से हो या लड़की की तरफ़ से.

15. दहेज

लड़का या उसके परिवारवाले कुछ ज़्यादा तो एक्सपेक्ट नहीं कर रहे आपके घरवालों से? यह आप बातों ही बातों में पता कर सकती हैं. शादी के बाद क्या फाइनेंशियल प्लानिंग है, कहीं सामनेवाला करियर छोड़कर बिज़नेस की प्लानिंग तो नहीं कर रहा, कहीं किसी बड़ी गाड़ी या बाइक का सपना तो नहीं पाल रहा… आदि.

16. रेस्पेक्ट

एक-दूसरे को ही नहीं, एक-दूसरे की फैमिली को भी आप दोनों कितना सम्मान देंगे, किस तरह एक-दूसरे के परिवारों में किसी समस्या के समय साथ खड़े रहेंगे, एक-दूसरे के बुरे व़क्त में कितना साथ निभाएंगे, शादी स़िर्फ हसीन सपना ही नहीं, बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी का नाम भी है. आप दोनों मानसिक व शारीरिक तौर पर कितने तैयार हैं इस ज़िम्मेदारी के लिए, इस पर ग़ौर करें.

17. बदलाव

शादी के बाद सब कुछ बदल जाता है. बैचलर लाइफ से मैरिड लाइफ में आना आसान नहीं है. आज़ादी कम हो जाती है, ज़िम्मेदारियां बदलती व बढ़ती हैं, लापरवाही छोड़कर गंभीर होना पड़ता है. ताने देने की बजाय त्याग करके साथ निभाना पड़ता है. अपने शौक़ हो सकता है बदलने पड़ जाएं, हो सकता है कई बार शौक़ पूरे भी न हो पाएं… तो क्या इन बदलावों को आप दोनों सहर्ष स्वीकार करेंगे? इन पहलुओं पर चर्चा व सलाह करना ज़रूरी है.

इन बातों पर चर्चा करते समय यह न सोचें कि कहीं सामनेवाले को बुरा न लग जाए या शादी टूट न जाए. ग़लत रिश्ते, ग़लत लोगों से रिश्ते या ग़लत जगह रिश्ते जुड़ने से बेहतर है थोड़ा और इंतज़ार कर लिया जाए.

– ब्रह्मानंद शर्मा

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प्रियंका-निक की संगीत सेरेमनी का फ़र्स्ट लुक… देखें पिक्चर्स (Priyanka-Nick Wedding: First Pics From Sangeet Ceremony Out)

Priyanka Nick Wedding

प्रियंका-निक की संगीत सेरेमनी का फ़र्स्ट लुक… देखें पिक्चर्स (Priyanka-Nick Wedding: First Pics From Sangeet Ceremony Out)

प्रियंका (Priyanka) और निक (Nick) की संगीत सेरेमनी (Sangeet Ceremony) की पहली तस्वीरें (Pictures) ख़ुद प्रियंका ने सोशल मीडिया पर शेयर की हैं, जिसमें दोनों ही मस्ती के मूड में नज़र आ रहे हैं. दोनों ही परिवारों ने इस मौक़े पर काफ़ी मस्ती और डान्स किया. डान्स कॉम्पटिशन का भी मज़ा लिया गया. प्रियंका-निक देसी लुक में लग रहे हैं बेहद प्यारे! 

Priyanka Nick Wedding

Priyanka Nick Wedding

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प्रियंका-निक की मेहंदी सेरेमनी की पिक्चर्स हुई वायरल (Priyanka-Nick Wedding: First Pics From Mehendi Ceremony Out)

 

Priyanka Nick Wedding Pics

प्रियंका-निक की मेहंदी सेरेमनी की पिक्चर्स हुई वायरल (Priyanka-Nick Wedding: First Pics From Mehendi Ceremony Out)

प्रियंका (Priyanka) और निक (Nick) की शादी (Wedding) का इंतज़ार ख़त्म हुआ और इसी बीच उनकी मेहंदी (Mehendi) की रस्म की पिक्चर्स (Pictures) प्रियंका ने सोशल मीडिया पर शेयर की जिसमें नज़र आ रहा है दोनों का देसी अन्दाज़… 

Priyanka Nick Wedding Pics

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शादीशुदा ज़िंदगी में बढ़ता अकेलापन…! (Why Do People Feel Lonely In Their Marriage?)

शादी (Marriage) का मतलब (Meaning) ही होता है कंपैनियनशिप यानी एक साथी, जो सुख-दुख में साथ दे, जिसके साथ शेयरिंग हो, जो केयरिंग हो, व़क्त आने पर न स़िर्फ रोने के लिए कंधा दे, बल्कि हमारे आंसू भी पोंछे… जो हमेशा यह कोशिश करे कि ज़िंदगी का सफ़र उसके साथ हसीन लगे, रास्ते आसान हो जाएं और मुश्किलों से लड़ने का हौसला मिले… लेकिन अगर इंसान अकेला ही है, तो वो अकेले लड़ना सीख जाता है, पर किसी के साथ रहकर अकेलापन जब हो, तो वहां मुश्किलें और सवाल उठने लाज़िमी हैं.

Relationship Problems

जी हां, एक शोध से यह बात सामने आई है कि कम से कम 20% शादीशुदा लोग अपनी शादी में भी अकेलापन महसूस करते हैं. यह बेहद गंभीर बात है, क्योंकि रिश्तों में पनपता अकेलापन आपको कई मानसिक व शारीरिक समस्याएं भी दे सकता है.

क्या हैं वजहें?

–  आजकल लाइफस्टाइल बदल गई है, कपल्स वर्किंग होते हैं और उनका अधिकांश समय ऑफिस में कलीग्स के साथ ही बीतता है. ऐसे में पार्टनर के लिए समय कम होता जाता है.

–   काम का तनाव इतना बढ़ गया है कि कम्यूनिकेशन कम हो गया है.

–   घर पर भी दोनों अपने-अपने कामों में ही व्यस्त रहते हैं.

–   सोशल नेटवर्किंग साइट्स ने इस बढ़ते अकेलेपन को और हवा दी है, क्योंकि वहां हमें नए दोस्त मिलते हैं, जो ज़्यादा आकर्षित करते हैं. ऐसे में कब हम पार्टनर को इग्नोर करने लगते हैं, पता ही नहीं चलता.

–   साथ में बैठकर बातें करना, एक-दूसरे की तकलीफ़ों को समझना तो जैसे अब समय की बर्बादी लगती है.

–   बात जब हद से ज़्यादा बढ़ जाती है, तब यह एहसास होता है कि हम कितने तन्हा हैं एक रिश्ते में होते हुए भी.

–   अब तो पार्टनर्स को यह भी नहीं पता होता कि हमारा साथी इन दिनों क्या महसूस कर रहा है या किन तकलीफ़ों से गुज़र रहा है.

–  इस बढ़ते अकेलेपन का असर सेक्स लाइफ पर भी पड़ता है, साथ ही कम होते सेक्सुअल रिलेशन भी अकेलेपन को बढ़ाते हैं यानी दोनों तरह से इसे देखा जा सकता है.

–   हर व़क्त पार्टनर्स अपने फोन या लैपटॉप में ही बिज़ी रहते हैं, चाहे डिनर का समय हो या बेड पर सोने का टाइम हो. यह वो समय होता है, जो पार्टनर्स एक-दूसरे के साथ प्यार और रोमांस में बिता सकते हैं, अपनी परेशानियां, अपने सुख-दुख शेयर कर सकते हैं, लेकिन वो आजकल ऐसा न करके अपनी-अपनी दुनिया में खोए रहते हैं. बाद में एहसास होता है कि एक-दूसरे से वो कितना दूर हो चुके हैं.

क्या आपके रिश्ते में भी पनप रहा है अकेलापन?

–   कुछ लक्षण हैं, जिन पर यदि आप ग़ौर करेंगे, तो जान पाएंगे कि आपके रिश्ते में भी यह अकेलापन तो घर नहीं कर गया.

–   आप दोनों आख़िरी बार कब क़रीब आए थे?

–  अपनी दिनचर्या साथ बैठकर कब शेयर की थी?

–  कब एक-दूसरे को आई लव यू या कोई प्यारभरी बात बोली थी?

–  कब कहीं साथ यूं ही हाथों में हाथ डाले बाहर घूमने निकले थे?

–  ख़ास दिन यानी बर्थडे, एनीवर्सरी याद रहती है या भूलने लगे?

–  एक-दूसरे से अपनी ज़रूरतों के बारे में बात करते हैं या नहीं?

इन तमाम सवालों पर ग़ौर करें, तो आप स्वयं समझ जाएंगे कि आप किस दौर से गुज़र रहे हैं.

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Relationship Fights

अकेलेपन से होता है स्वास्थ्य पर असर…

–   आप डिप्रेशन का शिकार होने लगते हैं.

–   ज़्यादा अकेलापन महसूस होने पर यह अवसाद आत्महत्या तक ले जाता है.

–   नशे की लत का शिकार हो सकते हैं.

–   याद्दाश्त पर बुरा असर पड़ता है.

–   हृदय रोग हो सकते हैं.

–   व्यवहार बदलने लगता है.

–   स्ट्रोक के शिकार हो सकते हैं.

–   ब्रेन फंक्शन्स पर बुरा असर होने लगता है.

–   निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होने लगती है.

–   चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है.

–   सोशल गैदरिंग में जाना बंद करने लग जाते हैं.

कैसे दूर करें इस अकेलेपन को?

–   कम्यूनिकेट करें. किसी भी समस्या का हल बातचीत से ही निकल सकता है. आप जो इन दिनों महसूस कर रहे हैं, उसके बारे में पार्टनर को बताएं.

–   अगर व्यस्तता के चलते यह सब हो रहा है, तो आप दोनों को ही हल निकालना होगा.

–   इनिशियेटिव लेकर कुछ सरप्राइज़ेस अरेंज करें और अपने रिश्ते को फिर से ताज़ा करने की कोशिश करें.

–   मैसेजेस करें, रोमांटिक बातें करनी शुरू करें.

–   एक-दूसरे को समय दें और एक रूल बनाएं कि डिनर के समय और बेड पर कोई भी फोन पर समय नहीं बिताएगा.

–   अपनी सेक्स लाइफ रिवाइव करें. कुछ नया ट्राई करें- बेडरूम के बाहर या कोई नई पोज़ीशन वगैरह.

–   ज़रूरत पड़ने पर काउंसलर की सलाह भी ले सकते हैं.

–  यदि आप दोनों के बीच कोई और आ गया है, तो मामला अलग होगा. तब आपको किसी ठोस नतीज़े पर पहुंचना होगा.

–   अगर रिश्ता फिर से जीवित होने की संभावना नहीं दे रहा है, तो अकेलेपन से डरें नहीं, उसे कुछ क्रिएटिव करने का एक अवसर समझें.

–   अपनी हॉबीज़ पर ध्यान दें.

–  दोस्तों के साथ सोशलाइज़ करें. उनके साथ पार्टी या गेट-टुगेदर प्लान करें और एंजॉय करना शुरू करें.

–   करियर पर फोकस करना शुरू कर दें.

–   अपनी सेहत पर ध्यान दें.

–   ख़ुद से प्यार करना सीखें.

– विजयलक्ष्मी

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पति-पत्नी और शक (How Suspicion Can Ruin Your Marriage?)

पति की कमीज़ पर किसी लड़की के बाल को देखकर परेशान होना… पत्नी को घर छोड़ने आए पुरुष सहकर्मी को लेकर शंका… पति के कमरे के बाहर जाते ही चोरी-छिपे उसका मोबाइल चेक करना या कभी-कभी अपने साथी के पीछे जासूस लगाना… क्या आप जानते हैं कि अगर इसमें से एक भी लक्षण आप में है, तो आप ‘शक’ नाम की गंभीर बीमारी के शिकंजे में फंसते जा रहे हैं.

Marriage

पति-पत्नी और शक यह एक ऐसा प्रेम त्रिकोण है, जिसकी कहानी का अंत अक्सर ही दुखद होता है. अगर पति-पत्नी की हंसती-खेलती ज़िंदगी में शक की दीवार खड़ी होती है, तो बंटवारा ज़मीन-जायदाद का नहीं, बल्कि परिवारों का होता है. शक नाम की यह बीमारी कोई नई नहीं है. हमारे समाज  में शक और उससे जुड़ी कई कहानियां प्रसिद्ध हैं, पर कभी किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया.

कैसे बढ़ती है शक की बीमारी?

रिसर्च बताते हैं कि किसी पर शक करना चाहे कोई बहुत बड़ी समस्या न हो, पर हां यह किसी समस्या की ओर पहली सीढ़ी ज़रूर है. शक का अगर व़क्त रहते इलाज नहीं हुआ, तो धीरे-धीरे उस शक पर बिना किसी वजह आप विश्‍वास करने लगते हैं और अपने साथी पर अविश्‍वास. यह अविश्‍वास फिर आपकी झुंझलाहट और चिड़चिड़ेपन का कारण बनता है. यह कभी-कभी शारीरिक तौर पर भी नज़र आता है. यह झुंझलाहट आप में असुरक्षा की भावना को जन्म देती है, जिसके कारण कई सारे डर दिमाग़ में घर कर जाते हैं. ऐसा होने पर जहां एक ओर आप मानसिक बीमारी के शिकार हो जाते हैं, वहीं दूसरी ओर आपका आपके साथी के साथ रिश्ता बिखर जाता है.

यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि शक कभी लिंग भेद नहीं करता, सामान्यतौर पर यह माना जाता है कि स्त्रियां ही शक्की होती हैं, पर ऐसा है नहीं. समय आने पर पुरुष भी शक करते हैं. अगर इसका और विश्‍लेषण किया जाए, तो सवाल यह उठता है कि आख़िर हम शक करते क्यों हैं?

ये होती हैं अक्सर शक की वजहें

जब रिश्ता नए माहौल में आगे बढ़ रहा हो

जब भी हम किसी नए जीवन में क़दम रखते हैं, तो मन में आकांक्षाओं के साथ आशंकाएं भी होती हैं. जैसे नई नौकरी हो या कॉलेज का पहला दिन, थोड़ा शक तो मन में रहता ही है. इसी तरह जब कोई रिश्ता आगे नए रास्ते पर बढ़ता है, तो मन में शक तो रहेगा ही.

अपने किसी भय को छिपाने के लिए

रिश्ते में अगर आपको किसी चीज़ से डर लगता है, उदाहरण के तौर पर अगर किसी को सेक्स से डर लगता है या उस रिश्ते के साथ अपने भविष्य का भय, तो उसे छिपाने के लिए शक का सहारा लेते हैं.

जब आप ख़ुद किसी हीनभावना का शिकार हों

हीनभावनाएं अक्सर ही असुरक्षा की भावना लाती हैं और यही असुरक्षा शक को जन्म देती है. असुरक्षा किसी प्रिय व्यक्ति को खो देने की, असुरक्षा अपनी महत्ता खो देने की. मान लीजिए कोई स्त्री या पुरुष हीनभावना से ग्रसित है, तो उसे हमेशा अपने साथी को लेकर शक रहेगा कि कहीं उसका किसी और के साथ अफेयर तो नहीं चल रहा, कहीं मेरा साथी मुझे छोड़कर तो नहीं चला जाएगा. बिना किसी वजह की चिंता शक और अविश्‍वास की जननी है और फिर इसी असुरक्षा के चलते आप साथी को और अधिक जकड़कर-पकड़कर रखने की कोशिश करते हैं, जो अंत में रिश्ते को समाप्त करता है.

अतीत के अनुभव

यह बहुत ही महत्वपूर्ण बिंदु है. अगर किसी के जीवन में पहले कभी धोखा हुआ हो या उसने ख़ुद किसी को धोखा दिया हो, तो शक उसके जीवन का अभिन्न अंग बन जाता है. यह मानव प्रवृत्ति है कि वह अनुभवों से ही सीखता है.

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Suspicion on Your Marriage

क्या हो सकते हैं शक के परिणाम?

शक को अगर समय रहते ना रोका गया, तो ये दो चीज़ों को बर्बाद करता है- पहला आपका अपना व्यक्तित्व और दूसरा आपका रिश्ता. यह तब और भी भयावह हो जाता है, जब स़िर्फ दो व्यक्ति नहीं, बल्कि दो परिवार टूटते हैं. शक्की व्यक्ति अपने जीवन में किसी भी रिश्ते से संतुष्ट नहीं रह सकता. शक होना वैसे तो काफ़ी सामान्य-सी बात है, पर इस शक को एक सीमा के परे बढ़ने ना देना बेहद आवश्यक है. तो कैसे किया जाए इस शक को नियंत्रित?

मुझे तुमसे प्यार है

सबसे पहले इस जुमले से बाहर आएं और यह कहना शुरू करें कि मुझे तुम पर विश्‍वास है. प्यार कभी अकेला नहीं रहता. यह हमेशा विश्‍वास के साथ रहता है. अगर विश्‍वास ख़त्म हो जाए, तो प्रेम की सुंदरता समाप्त हो जाती है.

सवालों का बोझ

कुछ सवालों के बोझ से ख़ुद को और अपने साथी को भी दूर रखें. सवाल जैसे कि फोन करके यह पूछना कि तुम अभी कहां हो, किसके साथ हो, तुम मुझसे प्यार तो करते/करती हो ना… कहीं तुम मुझसे कुछ छिपा तो नहीं रहे… ये सवाल आपके रिश्ते को कमज़ोर बनाएंगे.

सांस लेने की रखें गुंजाइश

रिश्ते में अपने साथी को और ख़ुद को सांस लेने की जगह दें. इसका अर्थ है कि थोड़ा समय अपने साथी को और ख़ुद को अपनी रुचि का काम करने के लिए दें. स्वतंत्रता का बंधन सबसे अच्छा बंधन होता है. अगर रिश्ते में स्वतंत्रता है, तो शक की कोई गुंजाइश नहीं होगी.

बार-बार करें विश्‍वास

आपको जितनी बार अपने साथी पर बेवजह शक होता है, उतनी बार उस पर फिर से विश्‍वास करें. यह काम है तो मुश्किल, पर करना तो पड़ेगा. इसके लिए आप दोनों एक-दूसरे के साथ क्वालिटी समय बिताएं. चाहें तो खाली समय में एक-दूसरे को एंटरटेन करने के लिए ट्रस्ट गेम्स खेलें. ट्रस्ट गेम्स आपके रिश्ते को मज़बूत बनाते हैं. इंटरनेट पर आपको बहुत से ऐसे ट्रस्ट गेम्स मिल जाएंगे.

अतिविचारी प्रवृत्ति से बचें

ये वे लोग हैं, जो अपने विचारों में ही तिल का ताड़ बना लेते हैं. किसी ऐसी बात को अपने विचारों में रखना जो कभी हुई ही नहीं, आपके रिश्ते के लिए हानिकारक है. ऐसा होगा या वैसा होगा… इन बातों का कोई अंत नहीं है. तो बिना किसी सबूत के होनेवाले शक पर लगाम तो आपको ही कसनी होगी.

खाली दिमाग़ शैतान का घर

अपने आपको कभी इतना खाली मत रखिए कि दिमाग़ में शक का फ़ितूर नाचने लगे. अपने दिमाग़ और ऊर्जा को किसी सकारात्मक कार्य में लगाएं.

शक आपके अपने दिमाग़ की उपज है, इसलिए उसे ख़त्म करने की ज़िम्मेदारी भी आपकी अपनी ही है. हां, आप चाहें, तो किसी दोस्त या एक्सपर्ट की मदद भी ले सकते हैं

          – विजया कठाले निबंधे

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शादी के दिन दूल्हा-दुल्हन न करें ये 18 ग़लतियां (18 Common Mistakes Brides And Grooms Must Avoid)

शादी (Wedding) का दिन हर किसी के लिए ख़ास होता है. उस दिन के लिए न जाने कितने सपने, कितनी उम्मीदें और न जानें कितनी आकांक्षाएं जोड़ रखी होती है सबने, ऐसे में छोटी-छोटी ग़लतियां (Mistakes) शादी के सारे उत्साह-उमंग को फीका कर सकती हैं. अगर आपकी भी शादी होनेवाली है, तो ज़रूरी बातों के साथ-साथ इन बातों का भी ध्यान रखें, ताकि शादी के दिन की ख़ुशियां ताउम्र आपके चेहरे पर मुस्कुराहट लाने का कारण बन सकें.

Brides And Grooms Mistakes

दुल्हन बचे इन ग़लतियों से

रितु की बारात आनेवाली थी. शादी के हॉल में घरवाले तैयारियों में लगे थे, पर रितु को कभी डेकोरेशन में कमी नज़र आ रही थी, तो कभी ब्यूटीशियन की तैयारी में कमी दिख रही थी, जिसके कारण उसे बहुत ग़ुस्सा आ रहा. ग़ुस्से में वो अपने मेकअप पर भी ध्यान नहीं दे रही थी. ब्यूटीशियन ने तो उसे तैयार कर दिया, पर लहंगे की मैचिंग चूड़ियां घर पर ही छूट गई थीं, जिससे उसका पारा और चढ़ गया. भाई ने आनन-फानन में चूड़ियां लाकर दीं, पर तब तक रितु ने सबका मूड ख़राब कर दिया था. जिसकी ख़ुशी के लिए सबने इतनी मेहनत की, अगर वही नाख़ुश रहे, तो सोचें कि घरवालों का क्या हाल होगा. शादी के दिन दुल्हन ऐसी कुछ ग़लतियों से बचे, तो वह ख़ूबसूरत दिन उसके साथ-साथ सभी के लिए ख़ास बन जाए.

1. लास्ट मोमेंट के लिए तैयारियां छोड़कर रखना

अक्सर कुछ दुल्हन कपड़े, ज्वेलरी, एक्सेसरीज़, अंडर गार्मेंट्स और स्पेशल ओकेज़न की स्पेशल ड्रेसेज़ या साड़ियां आदि लास्ट मोमेंट यानी शादीवाले दिन की पैकिंग के लिए छोड़कर रखती हैं, जिसके कारण जल्दबाज़ी में कुछ न कुछ छूट जाता है. आप अपनी पैकिंग शादी के 2-3 दिन पहले ही करके रख लें. शादी वाले दिन के लिए ये तैयारियां कभी भी न रखें, क्योंकि उस दिन व़क्त कैसे निकल जाएगा आपको पता भी नहीं चलेगा.

2. मन मुताबिक काम न होने पर ग़ुस्सा करना

माना कि आपने डेकोरेशन या म्यूज़िक अरेंजमेंट के लिए पहले से बात कर ली थी, पर अगर आख़िरी व़क्त पर किसी कारण उसमें कुछ बदलाव हो गए हैं, तो तिल का ताड़ न बनाएं. ग़ुस्सा करके अपना व घरवालों का मूड ख़राब न करें. ख़ुशी के इस मौ़के को ख़ुशगवार बनाए रखें.

3. रिश्तेदारों से ससुरालवालों की बुराई

अक्सर शादी के दिन दुल्हन के क़रीबी रिश्तेदार ससुरालवालों के बारे में जानने-समझने को आतुर रहते हैं, ऐसे में आपको ध्यान रखना चाहिए कि ससुरालवालों के बारे में आपको सकारात्मक ही बोलना है, क्योंकि किसी भी तरह की नकारात्मक सोच के साथ नए घर जाना सही नहीं. किसी भी तरह की नकारात्मक टिप्पणी मामले को बिगाड़ सकती है. क्या पता उन्हीं रिश्तेदारों में कोई ऐसा हो, जिसका कनेक्शन ससुराल पक्ष से हो.

4. सब कुछ ख़ुद करने की कोशिश करना

शादी के दिन रीति-रिवाज़ों की तैयारी, ख़ुद को तैयार रखना, नाते-रिश्तेदारों से मिलना-जुलना, घरवालों के छोटे-मोटे कई काम होते हैं, ये सब आप ख़ुद करने के चक्कर में न पड़ें. सभी को काम की ज़िम्मेदारियां पहले ही बांट दें. शादी के दिन दुल्हन को मेंटली और फिज़िकली रिलैक्स रहना बहुत ज़रूरी है, ऐसे में किसी भी तरह का फिज़िकल या मेंटल स्ट्रेस आपके ब्राइडल लुक के लिए सही नहीं होगा.

5. कुछ ज़्यादा ही हुकुम चलाना

शादी की गहमागहमी में अक्सर कुछ चीज़ें लोग भूल जाते हैं, ऐसे में सब की क्लास न लेती फिरें. हर कोई आपकी शादी को यादगार बनाने की कोशिश में लगा है, इसका ख़्याल रखें. उन्हें कुछ ऐसा न कह दें, जिससे उन्हें बुरा लगे.

6. दूल्हे से बहस करना

शादी की रस्मों के दौरान अगर दूल्हे राजा ने आपके मनमुताबिक कुछ नहीं किया, तो उनसे बहस करने न बैठ जाएं. ध्यान रखें कि शादी की रस्मों में आपके साथ-साथ उनके रिश्तेदार भी मौजूद हैं, अपने बेटे के साथ होनेवाली बहू का ऐसा व्यवहार उनपर आपका ग़लत इंप्रेशन डाल सकता है.

7 हर बात की शिकायत करना

किसी रिश्तेदार ने साड़ी या लहंगे के लिए कुछ कहा, किसी ने वेन्यू के लिए कुछ कहा या फिर किसी ने मेन्यू के बारे में कुछ कंपैरिज़न करके ताना मारा हो, तो उसे अवॉइड करें. शादियों में रिश्तेदार ऐसा करते ही हैं. इन बातों पर न तो ख़ुद परेशान हों और न ही ये बातें पैरेंट्स को
बताकर उन्हें परेशान करें. याद रखें आप हर किसी को ख़ुश नहीं रख सकतीं, इसलिए सब भूलकर अपना वेडिंग डे एंजॉय करें.

– कुछ भी न खाने की ग़लती

शादी के दिन काम की भागदौड़, लास्ट मोमेंेट की तैयारियों और एक्साइटमेंट के बीच अक्सर लड़कियां खाने पर ध्यान नहीं देतीं, जिसके कारण शाम तक उन्हें गैस-एसिडिटी हो जाती है या फिर चक्कर आने लगते हैं. आप ऐसा न करें. खाना समय से खाएं और पानी भी पर्याप्त पीएं, ताकि आप हाइड्रेटेड रहें और आपका चेहरा
खिला-खिला दिखे.

– सहेलियों के साथ मिलकर ससुरालवालों की ख़िंचाई करना

शादी की रस्मों के दौरान हंसी-मज़ाक अच्छा है, पर सहेलियों के साथ मिलकर ससुराल वालों की ख़िंचाई करना या मज़ाक बनाना ठीक नहीं.
ससुराल के लोग अब आपका परिवार हैं, ऐसे में उन पर आपका अच्छा प्रभाव नहीं पड़ेगा. हो सकता है, उसके लिए आपको बाद में सुनना भी पड़े, इसलिए जो भी करें, मर्यादा में रहकर करें.

– बहुत ज़्यादा हैवी लहंगा या साड़ी सिलेक्ट करना

शादी के दिन कई रस्में और विधि-विधान होते हैं और ऐसे में अगर आपका लहंगा और ज्वेलरी इतनी हैवी या चुभनेवाली है कि आप बहुत असहज महसूस कर रही हैं, तो शादी का सारा मज़ा किरकिरा हो जाएगा. कुछ लड़कियां तो इतने हैवी लहंगे पहन लेती हैं कि उठने-बैठन के लिए भी मदद की ज़रूरत पड़ती है. शादी का मतलब हैवी लहंगा या ज्वेलरी पहनना नहीं है. यह आपके लिए काफ़ी स्पेशल दिन है, तो आपका कंफर्टेबल रहना बहुत ज़रूरी है, इसलिए ऐसे कपड़े और ज्वेलरी पहनें, जो आप आसानी से कैरी कर सकें.

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 Brides And Grooms

दूल्हा बचे इन ग़लतियों से

– शेरवानी या सूट गाड़ी में न रखना

मुंबई में रहनेवाले किशोर की पिछले महीने शादी हुई. शादी का हॉल लड़कीवालों के घर के नज़दीक था, जो कि किशोर के घर से काफ़ी दूर था. जब किशोर की बारात हॉल पहुंची और शादी की विधि-विधान के लिए उसने शेरवानी ढूंढ़नी शुरू की, तो पता चला शेरवानी घर पर ही छूट गई. घर जाकर शेरवानी लाने में काफ़ी व़क्त निकल जाता, इसलिए पास में ही रह रहे किशोर के एक दोस्त ने उसे अपनी शादी की शेरवानी लाकर दी, जिससे फेरों की रस्म पूरी हुई. घरवाले एक-दूसरे के भरोसे रह गए और अच्छी-ख़ासी शेरवानी यूं ही रह गई. इससे सभी दूल्हों को सबक लेना चाहिए और शादी के कपड़े गाड़ी में रखना न भूलें.

– देर रात तक जागना

अक्सर देखा गया है कि शादी के ठीक पहले वाली रात दूल्हा भाई-बंधुओं और दोस्तों के साथ बैचलर पार्टी मनाने में इतना व्यस्त रहता है कि ठीक से सो नहीं पाता. एंजॉयमेंट के चक्कर में उसकी नींद पूरी नहीं होती, जिसके कारण शादी वाले दिन उसकी फोटोज़ उतनी अच्छी नहीं आती, जितनी फ्रेश फेस के साथ आ सकती थीं. इस बात का ख़ास ख़्याल रखें और अच्छी तरह नींद लें.

– एक्सेसरीज़ भूल जाना

शादी के लिए सब सूट या शेरवानी को ध्यान से ख़रीदते हैं, पर मोज़े, बेल्ट, कफलिंक्स, हैंकी आदि पर उतना ध्यान नहीं देते, जिससे बारात निकलने से पहले पता चलता है कि मोज़े नहीं हैं या फिर बेल्ट ख़रीदना भूल गए थे. आपके साथ ऐसा न हो, इसलिए इन बातों का ध्यान रखें.

– लास्ट मिनट की भाग-दौड़ ख़ुद करना

शादी के दिन सभी को समय से बुलाना, सभी वेंडर्स के साथ कोऑर्डिनेट करना, नाते-रिश्तेदारों को लाना-ले जाना, जैसे कई काम होते हैं, अगर आप ये सब काम ख़ुद करेंगे, तो थक जाएंगे. लास्ट मिनट की इस भाग-दौड़ की बजाय रिलैक्स करें, दूसरों में काम बांट दें.

– शादी की गाड़ी समय से न बुलाना

बारात निकलने के लिए सबसे ज़रूरी है, दूल्हे की गाड़ी. घर पर गाड़ी आने के बाद भी उसे सजाने में काफ़ी व़क्त लगता है, जिसके कारण ज़्यादातर बारातें लेट हो जाती हैं. अगर आप ऐसा नहीं चाहते, तो बारात निकलने के 2-3 घंटे पहले ही गाड़ी बुला लें.

– बिना बोले समझने की उम्मीद करना

आज आपकी शादी है, आप अपने लिए कुछ स्पेशल करवाना चाहते हैं या कुछ ख़ास करने की इच्छा है, तो आपको बोलना पड़ेगा. बिना बोले घरवालों से यह उम्मीद करना की वो अपने आप समझ जाएंगे, बेव़कूफ़ी है. अपने ख़ास दिन को और ख़ास बनाने के लिए जो चाहते हैं करें, घरवालों को भी अच्छा लगेगा.

– घरवालों की भावनाओं का ख़्याल न रखना

आज आपकी शादी है, इसका यह मतलब नहीं कि आप जो चाहें, बोलें, जो चाहें करें. सब आपको पैंपर करने के लिए वैसे ही कुछ न कुछ ख़ास करते रहते हैं. उनकी भावनाओं का ख़्याल रखें. मुझे यह पसंद नहीं या मुझे यह अच्छा नहीं लगता बोलकर उनका दिल न दुखाएं. माता-पिता के साथ-साथ बुआ, मौसी, चाची, दादी, नानी आदि की भी कई इच्छाएं होती हैं. इस दिन को अपने साथ-साथ उनके लिए भी ख़ास बनाएं और उन्हें हमेशा के लिए ढेरों ख़ुशियां दें.

– तैयारियों में कमी के लिए दुल्हन या घरवालों को सुनाना

कुछ दूल्हे ऐसे भी होते हैं, जो तैयारियों से नाख़ुश होने पर शादी के व़क्त ही नाराज़गी व्यक्त करने के लिए या तो मुंह फुला लेते हैं या फिर दुल्हन को सुनाते हैं. यह बहुत ही ग़लत है. ऐसा करके न स़िर्फ आप अपने ख़ास दिन को बर्बाद करते हैं, बल्कि दुल्हन व उसके घरवालों का भी मूड ख़राब कर देते हैं. इस बेकार-सी ग़लती से बचें.

घरवाले बचे इन ग़लतियों से

– लड़केवाले और लड़कीवाले दोनों के लिए सबसे ज़रूरी है कि वो शादी के हॉल में समय से पहुंचे, क्योंकि अगर वो लेट हो गए, तो सारे कार्यक्रम देरी से होंगे और रिश्तेदार देरी के कारण पूरी शादी एंजॉय नहीं कर पाएंगे.

– बारात पहुंचते ही पटाखों का शोर हर किसी को बता देता है कि बारात आ गई है, लेकिन कभी-कभार इससे हादसे भी हो जाते हैं. पटाखे जलाते समय इस बात का ध्यान रखें कि
नाचनेवालों के पास पटाखे उड़कर न जाएं, वरना किसी को चोट भी लग सकती है. दूल्हा-दुल्हन की गाड़ी में फर्स्ट एड बॉक्स ज़रूर रखें.

– रस्मों की चीज़ों के बैग संभालकर साथ रखें, वरना भीड़-भाड़ में बैग कहीं छूट सकते हैं.

– अरेंजमेंट का बैकअप ज़रूरी है. सभी वेंडर्स को पहले से इतल्ला कर दें कि किसी भी चीज़ की कमी के लिए शादी के व़क्त तैयार रहें.

– सबसे ज़रूरी बात इस गहमागहमी में यह न भूलें कि यह आपके बच्चे के लिए ख़ास दिन है, इसलिए किसी भी तरह की कमी के बावजूद ख़ुश रहें और माहौल को ख़ुशगवार बनाए रखें.

– अनीता सिंह

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शादी के बाद क्यों बढ़ता है वज़न? जानें टॉप 10 कारण (Top 10 Reasons For Weight Gain After Marriage)

अगर आपकी नई-नई शादी (New Marriage) हुई है और अचानक से अपने बढ़े हुए वज़न (Increased Weight) को लेकर आपके मन में कई सवाल उठे हैं और आप परेशान हैं, तो परेशान न हों. आपके सभी सवालों के जवाब यहां आपको मिलेंगे कि आख़िर शादी के बाद आपका वज़न इतनी तेज़ी से क्यों बढ़ा है? द ओबेसिटी जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक शादी के 5 साल के भीतर 82% कपल्स का वज़न 5-10 किलो तक बढ़ जाता है. इसमें महिलाओं का वज़न पुरुषों के मुकाबले ज़्यादा तेज़ी से बढ़ता है. लाइफस्टाइल में बदलाव के अलावा और क्या हैं कारण?

Weight Gain After Marriage

1. खानपान की आदतों में बदलाव

आपके मायके और ससुराल के खानपान में अंतर है. मसाले और पकाने की टेक्नीक दोनों जगह अलग है, जिसके कारण आपकी पाचनक्रिया पर इसका प्रभाव पड़ता है. इसके अलावा मायके खाने के बाद टहलना, मॉर्निंग वॉक जैसी चीज़ें आपके रूटीन में शामिल थीं, जो यहां नहीं हैं.

2. अक्सर बाहर खाना

शादी के बाद से ही दोस्तों, रिश्तेदारों के यहां खाने का सिलसिला जो शुरू होता है, वो कई हफ़्तों तक जारी रहता है. इस बीच हनीमून पर आप बेरोक-टोक हर तरह के खाने को एंजॉय करते हैं, जिससे ज़रूरत से ज़्यादा कैलोरीज़ खा लेते हैं.

3. प्राथमिकताएं बदल जाती हैं

शादी के बाद आप पति और ससुरालवालों की पसंद से खाना बनाती हैं और इंप्रेस करने के चक्कर में ख़ूब घी, तेल, मसाला इस्तेमाल करती हैं. इतनी मेहनत से बनाया खाना ख़राब न हो, इस चक्कर में ओवरईटिंग भी कर लेती हैं. समय के साथ बदली ये प्राथमिकताएं आपका वज़न बढ़ाने के लिए ज़िम्मेदार हैं.

4. लापरवाह हो जाती हैं

शादी के दिन स्टनिंग दिखने के लिए खाने-पीने पर ध्यान रखना, एक्सरसाइज़ करना, स्ट्रेस न लेना जैसी चीज़ें शादी के बाद लगभग पूरी तरह बदल जाती हैं. न चाहते हुए भी स्ट्रेस आ ही जाता है और बाकी कामों के चलते एक्सरसाइज़ का व़क्त नहीं मिलता. खाने का समय बदल जाता है और कहीं न कहीं यह सोच घर कर जाती है कि अब तो शादी हो गई, अब क्या फ़र्क़ पड़ता है.

5. नींद की कमी

शादी के बाद सोने का समय और पैटर्न दोनों ही बदल जाते हैं, जिससे नींद पूरी नहीं हो पाती. नींद की कमी भी वज़न बढ़ने का एक कारण है.

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After Marriage

6. पार्टनर का पैंपर करना

शादी के बाद सभी कपल्स एक-दूसरे पर अपना प्यार न्योछावर करने और ख़ुश रखने में कोई कसर नहीं छोड़ते. एक-दूसरे को पैंपर करने के लिए केक, पेस्ट्रीज़, चॉकलेट्स, पिज़्ज़ा, पास्ता जैसी सरप्राइज़ ट्रीट देते रहते हैं. कैलोरीज़ से भरपूर ये फैटी चीज़ें वज़न बढ़ाती हैं.

7. स्ट्रेस ईटिंग करना

शादी के बाद नए माहौल में ढलना थोड़ा मुश्किल होता है, ऐसे में अगर दुल्हन वर्किंग है, तो उसकी ज़िम्मेदारियां और भी बढ़ जाती है. ऑफिस के साथ-साथ घर पर भी अपना बेस्ट देने की कोशिश में हमेशा स्ट्रेस में रहती हैं और स्ट्रेस ईटिंग की शिकार हो जाती है.

8. हार्मोनल बदलाव

लाइफस्टाइल में बदलाव के कारण शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिसके कारण तेज़ी से वज़न बढ़ता है. इसके अलावा सेक्सुअल एक्टिविटीज़ के कारण होनेवाले हार्मोनल बदलाव भी इसका कारण बनते हैं. हांलाकि कुछ लोग इसे मिथ मानते हैं, पर वज़न बढ़ाने में हार्मोंस का अहम् रोल होता है, यह सभी मानते हैं.

9. मेटाबॉलिक बदलाव

आजकल ज़्यादातर कपल्स 28-30 साल की उम्र में शादी करते हैं. इस समय शरीर के मेटाबॉलिक रेट में बदलाव आता है, जिससे वज़न पहले के मुकाबले ज़्यादा तेज़ी से बढ़ता है.

10. प्रेग्नेंसी

बहुत-सी महिलाएं शादी के बाद ही कंसीव कर लेती हैं, जिससे परिवारवाले उसे पैंपर करने के लिए ओवर न्यूट्रीशियस चीज़ें खिलाते हैं, जिसे  डिलीवरी के बाद भी वो कम नहीं कर पातीं.

वेट कंट्रोल के लिए क्या करें?

– घर में हर कोई खाना खा ले, उसके बाद मैं खाऊंगी वाला एटीट्यूट बदलें. नियमित समय पर खाना खाएं. ओवरईटिंग से बचें.

– अपने लुक्स के प्रति लापरवाह न हों.

– स्ट्रेस ईटिंग से बचने के लिए ख़ुद को ख़ुश रखें.

– एक-दूसरे के साथ ज़्यादा से ज़्यादा समय बिताने के लिए योगा क्लासेस या जिम जॉइन करें.

– अनीता सिंह     

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भारत में डोमेस्टिक वॉयलेंस से 40% अधिक मौतें… (Domestic Violence In India)

Domestic Violence
भारत में डोमेस्टिक वॉयलेंस से 40% अधिक मौतें… (Domestic Violence In India)

बेटी होना कोई गुनाह नहीं है, लेकिन हमारी सामाजिक सोच ने इसे भी किसी अपराध से कम नहीं बना रखा है… बेटियों को हर बात पर हिदायतें दी जाती हैं, हर पल उसे एहसास करवाया जाता है कि ये जो भी तुम पहन रही हो, खा रही हो, हंस रही हो, बोल रही हो… सब मेहरबानी है हमारी… घरों में इसी सोच के साथ उसका पालन-पोषण होता है कि एक दिन शादी हो जाएगी और ज़िम्मेदारी ख़त्म… ससुराल में यही जताया जाता है कि इज़्ज़त तभी मिलेगी, जब पैसा लाओगी या हमारे इशारों पर नाचोगी… इन सबके बीच एक औरत पिसती है, घुटती है और दम भी तोड़ देती है… भारत के घरेलू हिंसा व उससे जुड़े मृत्यु के आंकड़े इसी ओर इशारा करते हैं…

वो कहते हैं तुम आज़ाद हो… तुम्हें बोलने की, मुस्कुराने की थोड़ी छूट दे दी है हमने… वो कहते हैं अब तो तुम ख़ुश हो न… तुम्हें आज सखियों के संग बाहर जाने की इजाज़त दे दी है… वो कहते हैं अपनी आज़ादी का नाजायज़ फ़ायदा मत उठाओ… कॉलेज से सीधे घर आ जाओ… वो कहते हैं शर्म औरत का गहना है, ज़ोर से मत हंसो… नज़रें झुकाकर चलो… वो कहते हैं तुमको पराये घर जाना है… जब चली जाओगी, तब वहां कर लेना अपनी मनमानी… ये कहते हैं, मां-बाप ने कुछ सिखाया नहीं, बस मुफ़्त में पल्ले बांध दिया… ये कहते हैं, इतना अनमोल लड़का था और एक दमड़ी इसके बाप ने नहीं दी… ये कहते हैं, यहां रहना है, तो सब कुछ सहना होगा, वरना अपने घर जा… वो कहते हैं, सब कुछ सहकर वहीं रहना होगा, वापस मत आ… ये कहते हैं पैसे ला या फिर मार खा… वो कहते हैं, अपना घर बसा, समाज में नाक मत कटा… और फिर एक दिन… मैं मौन हो गई… सबकी इज़्ज़त बच गई…!

 

घरेलू हिंसा और भारत…
  • भारत में डोमेस्टिक वॉयलेंस व प्रताड़ना के बाद महिलाओं की मृत्यु की लगभग 40% अधिक आशंका रहती है, बजाय अमेरिका जैसे विकसित देश के… यह ख़तरनाक आंकड़ा एक सर्वे का है.
  • वॉशिंगटन में हुए इस सर्वे का ट्रॉमा डाटा बताता है कि भारत में महिलाओं को चोट लगने के तीन प्रमुख कारण हैं- गिरना, ट्रैफिक एक्सिडेंट्स और डोमेस्टिक वॉयलेंस.
  • 60% भारतीय पुरुष यह मानते हैं कि वो अपनी पत्नियों को प्रताड़ित करते हैं.
  • हाल ही में हुए एक सर्वे के अनुसार महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित देशों में भारत अब पहले स्थान पर पहुंच चुका है. हालांकि इस सर्वे और इसका सैंपल साइज़ विवादों के घेरे में है और अधिकांश भारतीय यह मानते हैं कि यह सही नहीं है…
  • 2011 में भी एक सर्वे हुआ था, जिसमें यूनाइटेड नेशन्स के सदस्य देशों को शामिल किया गया था, उसमें पहले स्थान पर अफगानिस्तान, दूसरे पर कांगो, तीसरे पर पाकिस्तान था और भारत चौथे स्थान पर था.
  • भारतीय सरकारी आंकड़े भी बताते हैं कि 2007 से लेकर 2016 के बीच महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराधों में 83% इज़ाफ़ा हुआ है.
  • हालांकि हम यहां बात घरेलू हिंसा की कर रहे हैं, लेकिन ये तमाम आंकड़े समाज की सोच और माइंड सेट को दर्शाते हैं.
  • नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक़, प्रोटेक्शन ऑफ वुमन फ्रॉम डोमेस्टिक वॉयलेंस एक्ट के पास होने के बाद से (2005) अब तक लगभग दस लाख से अधिक केसेस फाइल किए गए, जिनमें पति की क्रूरता और दहेज मुख्य कारण हैं.
मानसिकता है मुख्य वजह
  • हमारे समाज में पति को परमेश्‍वर मानने की सीख आज भी अधिकांश परिवारों में दी जाती है.
  • पति और उसकी लंबी उम्र से जुड़े तमाम व्रत-उपवास को इतनी गंभीरता से लिया जाता है कि यदि किसी घर में पत्नी इसे न करे, तो यही समझा जाता है कि उसे अपने पति की फ़िक़्र नहीं.
  • इतनी तकलीफ़ सहकर वो घर और दफ़्तर का रोज़मर्रा का काम भी करती हैं और घर आकर पति के आने का इंतज़ार भी करती हैं. उसकी पूजा करने के बाद ही पानी पीती हैं.
  • यहां कहीं भी यह नहीं सिखाया जाता कि शादी से पहले भी और शादी के बाद भी स्त्री-पुरुष का बराबरी का दर्जा है. दोनों का सम्मान ज़रूरी है.
  • किसी भी पुरुष को शायद ही आज तक घरों में यह सीख व शिक्षा दी जाती हो कि आपको हर महिला का सम्मान करना है और शादी से पहले कभी किसी भी दूल्हे को यह नहीं कहा जाता कि अपनी पत्नी का सम्मान करना.
  • ऐसा इसलिए होता है कि दोनों को समान नहीं समझा जाता. ख़ुद महिलाएं भी ऐसा ही सोचती हैं.
  • व्रत-उपवासवाले दिन वो दिनभर भूखी-प्यासी रहकर ख़ुद को गौरवान्वित महसूस करती हैं कि अब उनके पति की उम्र लंबी हो जाएगी.
  • इसे हमारी परंपरा से जोड़कर देखा जाता है, जबकि यह लिंग भेद का बहुत ही क्रूर स्वरूप है.

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Domestic Violence

कहीं न कहीं लिंग भेद से ही उपजती हैं ये समस्याएं…
  • महिलाओं के ख़िलाफ़ जितने भी अत्याचार होते हैं, चाहे दहेजप्रथा हो, भ्रूण हत्या हो, बलात्कार हो या घरेलू हिंसा… इनकी जड़ लिंग भेद ही है.
  • बेटा-बेटी समान नहीं हैं, यह सोच हमारे ख़ून में रच-बस चुकी है. इतनी अधिक कि जब पति अपनी पत्नी पर हाथ उठाता है, तो उसको यही कहा जाता है कि पति-पत्नी में इस तरह की अनबन सामान्य बात है.
  • यदि कोई स्त्री पलटवार करती है, तो उसे इतनी जल्दी समर्थन नहीं मिलता. उसे हिदायतें ही दी जाती हैं कि अपनी शादी को ख़तरे में न डाले.
  • शादी को ही एक स्त्री के जीवन का सबसे अंतिम लक्ष्य माना जाता है. शादी टूट गई, तो जैसे ज़िंदगी में कुछ बचेगा ही नहीं.
शादी एक सामान्य सामाजिक प्रक्रिया मात्र है…
  • यह सोच अब तक नहीं पनपी है कि शादी को हम सामान्य तरी़के से ले पाएं.
  • जिस तरह ज़िंदगी के अन्य निर्णयों में हमसे भूल हो सकती है, तो शादी में क्यों नहीं?
  • अगर ग़लत इंसान से शादी हो गई है और आपको यह बात समय रहते पता चल गई है, तो झिझक किस बात की?
  • अपने इस एक ग़लत निर्णय का बोझ उम्रभर ढोने से बेहतर है ग़लती को सुधार लिया जाए.
  • पैरेंट्स को भी चाहिए कि अगर शादी में बेटी घरेलू हिंसा का शिकार हो रही है या दहेज के लिए प्रताड़ित की जा रही है, तो जल्दी ही निर्णय लें, वरना बेटी से ही हाथ धोना पड़ेगा.
  • यही नहीं, यदि शादी के समय भी इस बात का आभास हो रहा हो कि आगे चलकर दहेज के लिए बेटी को परेशान किया जा सकता है, तो बारात लौटाने में कोई झिझक नहीं होनी चाहिए.
  • ग़लत लोगों में, ग़लत रिश्ते में बंधने से बेहतर है बिना रिश्ते के रहना. इतना साहस हर बेटी कर सके, यह पैरेंट्स को ही उन्हें सिखाना होगा.
सिर्फ प्रशासन व सरकार से ही अपेक्षा क्यों?
  • हमारी सबसे बड़ी समस्या यही है कि हम हर समस्या का समाधान सरकार से ही चाहते हैं.
  • अगर घर के बाहर कचरा है, तो सरकार ज़िम्मेदार, अगर घर में राशन कम है, तो भी सरकार ज़िम्मेदार है…
  • जिन समस्याओं के लिए हमारी परवरिश, हमारी मानसिकता व सामाजिक परिवेश ज़िम्मेदार हैं. उनके लिए हमें ही प्रयास करने होंगे. ऐसे में हर बात को क़ानून, प्रशासन व सरकार की ज़िम्मेदारी बताकर अपनी ज़िम्मेदारियों से मुंह मोड़ लेना जायज़ नहीं है.
  • हम अपने घरों में किस तरह से बच्चों का पालन-पोषण करते हैं, हम अपने अधिकारों व स्वाभिमान के लिए किस तरह से लड़ते हैं… ये तमाम बातें बच्चे देखते व सीखते हैं.
  • बेटियों को शादी के लिए तैयार करने व घरेलू काम में परफेक्ट करने के अलावा आर्थिक रूप से भी मज़बूत करने पर ज़ोर दें, ताकि वो अपने हित में फैसले ले सकें.
  • अक्सर लड़कियां आर्थिक आत्मनिर्भरता न होने की वजह से ही नाकाम शादियों में बनी रहती हैं. पति की मार व प्रताड़ना सहती रहती हैं. बेहतर होगा कि हम बेटियों को आत्मनिर्भर बनाएं और बेटों को सही बात सिखाएं.
  • पत्नी किसी की प्राइवेट प्रॉपर्टी नहीं है, सास-ससुर को भी यह समझना चाहिए कि अगर बेटा घरेलू हिंसा कर रहा है, तो बहू का साथ दें.
  • पर अक्सर दहेज की चाह में सास-ससुर ख़ुद उस हिंसा में शामिल हो जाते हैं, पर वो भूल जाते हैं कि उनकी बेटी भी दूसरे घर जाए और उसके साथ ऐसा व्यवहार हो, तो क्या वो बर्दाश्त करेंगे?
  • ख़ैर, किताबी बातों से कुछ नहीं होगा, जब तक कि समाज की सोच नहीं बदलेगी और समाज हमसे ही बनता है, तो सबसे पहले हमें अपनी सोच बदलनी होगी.
बेटों को दें शिक्षा…
  • अब वो समय आ चुका है, जब बेटों को हिदायतें और शिक्षा देनी ज़रूरी है.
  • पत्नी का अलग वजूद होता है, वो भी उतनी ही इंसान है, जितनी आप… तो किस हक से उस पर हाथ उठाते हैं?
  • शादी आपको पत्नी को पीटने का लायसेंस नहीं देती.
  • अगर सम्मान कर नहीं सकते, तो सम्मान की चाह क्यों?
  • शादी से पहले हर पैरेंट्स को अपने बेटों को ये बातें सिखानी चाहिए, लेकिन पैरेंट्स तो तभी सिखाएंगे, जब वो ख़ुद इस बात को समझेंगे व इससे सहमत होंगे.
  • पैरेंट्स की सोच ही नहीं बदलेगी, तो बच्चों की सोच किस तरह विकसित होगी?
  • हालांकि कुछ हद तक बदलाव ज़रूर आया, लेकिन आदर्श स्थिति बनने में अभी लंबा समय है, तब तक बेहतर होगा बेटियों को सक्षम बनाएं और बेटों को बेहतर इंसान बनाएं.

– गीता शर्मा

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न्यूली मैरिड के लिए शादी से जुड़ी आवश्यक क़ानूनी सलाहें (Legal Things To Do For Newly Married Couples)

शादी के बाद लड़की की ज़िंदगी ही नहीं बदलती, ज़्यादातर मामलों में उसका सरनेम भी बदल जाता है. अगर शादी के पहले ही शादी के बाद होनेवाली ज़रूरी क़ानूनी बदलावों के बारे में जान-समझ लें, तो हर तरह की काग़ज़ी कार्यवाही आसान हो जाती है. बहुत-से लोग इसे अहमियत नहीं देते और जब ज़रूरत आ पड़ती है, तब भागदौड़ शुरू कर देते हैं. ऐसी स्थिति आपके सामने न आए, इसलिए शादी से जुड़ी ज़रूरी क़ानूनी सलाह को समझें.

Newly Married Couples

लड़कियां अपनी शादी को परफेक्ट बनाने के लिए सारी तैयारियां करती हैं, पर शादी के बाद विवाह को क़ानूनी मान्यता देने जैसे महत्वपूर्ण काम को अनदेखा कर देती हैं. मैरिज सर्टिफिकेट आपकी शादी का महज़ क़ानूनी गवाह नहीं, बल्कि भविष्य में होनेवाली किसी भी अनहोनी परिस्थिति में आपके लिए कवच की तरह काम करता है. वैसे भी वर्ष 2006 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे अनिवार्य घोषित कर दिया है. इसलिए इसकी पूरी जानकारी रखना बहुत ज़रूरी है.

शादी का रजिस्ट्रेशन/मैरिज सर्टिफिकेट

हमारे देश में शादी का रजिस्ट्रेशन द हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 या फिर द स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 के तहत किया जाता है. जहां हिंदू मैरिज एक्ट में पहले से हुई शादी का रजिस्ट्रेशन कर मैरिज सर्टिफिकेट प्राप्त किया जाता है, तो वहीं स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी व उसका रजिस्ट्रेशन दोनों एक साथ किया जाता है.

स्पेशल मैरिज एक्ट- शादी/रजिस्ट्रेशन

इसे आमतौर पर कोर्ट मैरिज कहते हैं. इसमें विवाह के इच्छुक लोगों को अपने इलाके के मैरिज ऑफिसर या सब रजिस्ट्रार को नोटिस देनी पड़ती है. याद रहे, दोनों में से कोई एक उस स्थान पर 30 दिनों से रह रहा हो. इसके बाद मैरिज ऑफिसर से उन्हें एक महीने का नोटिस पीरियड मिलता है, जिसके ख़त्म होने पर तय दिन व समय पर शादी व उसका रजिस्ट्रेशन दोनों एक साथ किया जाता है.

रजिस्ट्रेशन के लिए डॉक्यूमेंट्स

– शादी के 1 महीने के भीतर ही रजिस्ट्रेशन करवाना चाहिए. अपने माता-पिता/गार्जियन और गवाहों के साथ आपको रजिस्ट्रार के ऑफिस में जाना पड़ता है.

– इस दौरान जो रजिस्ट्रेशन नहीं करा पाते हैं, उन्हें क्षमादान के साथ 5 साल के भीतर रजिस्ट्रार के पास यह प्रक्रिया पूरी करवानी पड़ती है.

– इसके लिए आप दोनों को बर्थ प्रूफ, रेसिडेंस प्रूफ, शादी की पूरी जानकारी वाला एफिडेविट, पति-पत्नी के पासपोर्ट साइज़ फोटोग्राफ्स, शादी की एक फोटो, शादी का निमंत्रण कार्ड आदि डॉक्यूमेंट्स की ज़रूरत पड़ेगी.

– रजिस्ट्रेशन के 7-90 दिनों के भीतर आपका मैरिज सर्टिफिकेट मिल जाता है.

सरनेम बदलना

हर महिला को यह अधिकार है कि वो शादी के पहलेवाला अपना सरनेम बनाए रख सकती है, पर ज़्यादातर महिलाएं क़ानूनी झंझटों से बचने के लिए सरनेम बदलवा ही लेती है. अगर आप भी अपना सरनेम बदलना चाहती हैं, तो आपको ये टिप्स.

– मैरिज सर्टिफिकेट मिलने के बाद सरनेम बदलने के लिए आपको राज्य सरकार के गैज़ेट ऑफिस में जाकर सरनेम बदलने के लिए आवेदन देना पड़ता है.

– सरनेम बदलने के बाद आपके बदले हुए नाम को ऑफिशियल बनाने के लिए किसी स्थानीय समाचार पत्र में प्रकाशित किया जाता है.

– उस समाचार पत्र की कॉपी आपको हमेशा संभलाकर रखनी चाहिए. भविष्य में उसे आप लीगल डॉक्यूमेंट के तौर पर इस्तेमाल कर

सकते हैं.

यह भी पढें:  20 Tips: शादी से पहले करें शादी के बाद की तैयारियां

Documents Change

ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स में बदलाव

एक बार सरनेम में बदलाव हो जाए, तो आपको अपने सभी ज़रूरी काग़ज़ातों पर इसे बदलना पड़ता है. याद रहे, जब भी डॉक्यूमेंट्स में सरनेम बदलवाएं, आधे-अधूरे नहीं, बल्कि सभी में बदलवाएं.

पैन कार्ड: आजकल ज़्यादातर फाइनेंशियल  ट्रांज़ैक्शन्स के लिए आपको पैनकार्ड की ज़रूरत पड़ती है. ऐसे में मैरिज सर्टिफिकेट मिलते ही अपना पैनकार्ड अपडेट करवाएं.

– पैनकार्ड पर सरनेम बदलने की प्रक्रिया नया पैनकार्ड लेने जैसे ही है.

– इसके लिए आपको पैनकार्ड नेम करेक्शन का फॉर्म भरकर साथ में पुराने पैनकार्ड का नंबर और मैरिज सर्टिफिकेट या ऑफिशियल गर्वंमेंट गैज़ेट की कॉपी जमा करनी होगी.

– इसके अलावा आप जॉइंट नोटराइज़्ड एफिडेविट जमा करके भी पैनकार्ड अपडेट कर सकते हैं.

– पैनकार्ड अपडेट होने पर अपने इन्कम टैक्स पेपर्स अपडेट करना ना भूलें.

बैंक अकाउंट्स: आपका अगला क़दम बैक अकाउंट्स को अपडेट करना है. यहां

आपको अपने नाम के साथ-साथ नए पते को भी अपडेट कराना होगा.

– नाम बदलने के लिए आपको एक फॉर्म भरकर देना होगा और साथ ही में मैरिज सर्टिफिकेट की कॉपी और ऑफिशियल गर्वंमेंट गैज़ेट जमा करना होगा.

– एड्रेस बदलने के लिए आपको अपने पति के एड्रेस प्रूफ और पासपोर्ट की कॉपी जमा करनी होगी.

पासपोर्ट: चाहे बात आइडेंटिटी प्रूफ की हो या रेसिडेंशियल प्रूफ की, पासपोर्ट सबसे बेस्ट लीगल प्रूफ है. अपने पुराने पासपोर्ट को अपडेट करने के लिए-

– आपको पासपोर्ट री-इश्यू के लिए अप्लाई करना होगा.

– इसके साथ आपको आपका मैरिज सर्टिफिकेट और पुराना ओरिजनल पासपोर्ट, पासपोर्ट की सेल्फ अटेस्टेड कॉपी और पति के पासपोर्ट की कॉपी भी जमा करनी होगा.

फाइनेंशियल डॉक्यूमेंट्स: शादी के बाद आपको अपने फाइनेंशियल डॉक्यूमेंट्स, जैसे- इन्वेस्टमेंट्स, इंश्योरेंस, लोन आदि के डॉक्यूमेंट्स को भी अपडेट करना होगा.

– इन्वेस्टमेंट्स, जैसे- म्यूचल फंड, पोस्ट ऑफिस, स्टॉक्स बॉन्ड आदि को अपडेट करें. – पर्सनल या हाउसिंग लोन आदि से जुड़े सभी डॉक्यूमेंट्स पर सरनेम ज़रूर बदलवाएं.

– सभी के साथ लाइफ इंश्योरेंस, मेडीक्लेम आदि को भी अपडेट करें. अगर आप किसी और की इंश्योरेंस पॉलिसी में नॉमिनी हैं, तो उसे भी

अपडेट ज़रूर कराएं. इन सभी के लिए आपका मैरिज सर्टिफिकेट और पति का रेसिडेंशियल प्रूफ जमा करना है.

प्रॉपर्टी: आजकल लड़कियां आत्मनिर्भर होती हैं, इसलिए प्रॉपटीज़ आदि की पूरी जानकारी संभालकर रखती हैं. अगर आप भी किसी प्रॉपर्टी की मालकिन या वारिस हैं, तो शादी के बाद उन डॉक्यूमेंट्स को अपडेट करना न भूलें. प्रॉपर्टी से जुड़े पेपर्स के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने लीगल एडवाइज़र से मिलें.

वोटिंग कार्ड: यह भी एक बहुत ज़रूरी आइडेंटिटी और रेसिडेंशियल लीगल प्रूफ है. शादी के बाद नेम करेक्शन का फॉर्म भरकर आप अपना नाम चेंज करा सकती हैं. इसके अलावा अपने ससुराल के  इलेक्टोरल रोल में भी आपको अपना नाम दर्ज कराना होगा.

ये छोटी-छोटी बातें बहुत मायने रखती हैं, इसलिए शादी के बाद इन सभी ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स को अपडेट कराएं. हमेशा ध्यान रखें, आपके सभी डॉक्यूमेंट्स पर आपका एक जैसा नाम होना चाहिए.

एनआरआई दूल्हे के मामले में

पिछले कुछ सालों में एनआरआई शादियों में जिस तरह की धोखाधड़ी सामने आई है, बहुत-से पैरेंट्स अपनी बेटियों की सुरक्षा के लिए ऐसे रिश्तों को कम तवज्जों दे रहे हैं. पर इसका यह कतई मतलब नहीं कि सभी एनआरआई लड़कों को शक के घेरे में खड़ा कर दें, पर अपने सुरक्षित भविष्य के लिए थोड़ी सावधानी ज़रूर बरतें.

– शादी से पहले लड़के के बारे में पूरी छानबीन करें. उसका नाम, पता, सोसाइटी में इमेज आदि सोशल मीडिया के ज़रिए या फिर वहां स्थित इंडियन ऐम्बसी के ज़रिए पता करें.

– अगर आप किसी और धर्म के लड़के से शादी कर रही हैं और शादी के बाद धर्म बदलना आदि प्रक्रिया है, तो शादी से पहले अपने लीगल एडवाइज़र से यहां व वहां के क़ानूनों की पूरी जानकारी हासिल कर लें, ताकि शादी के बाद किसी भी अनहोनी स्थिति में आप ख़ुद को लाचार महसूस न करें.

– जहां तक हो सके, शादी अपने ही देश में करें. विदेशी धरती पर शादी करने पर आप कई ज़रूरी  क़ानूनी हक़ीक़तों से अनजान रहती हैं, जिसका ग़लत फ़ायदा आपके ससुराल वाले उठा सकते हैं.

– अनीता सिंह

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