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सेक्स से जुड़े मिथ्स कहीं कमज़ोर न कर दें आपके रिश्ते को (Sex Myths That Are Ruining Your Sex Life)

सेक्स प्यार का ही एक स्वरूप है और आपके रिश्ते को जोड़े रखनेवाली मज़बूत कड़ी व नींव भी है. यदि यह नींव किन्हीं कारणों से कमज़ोर पड़ गई, तो इसका सीधा असर आपके रिश्ते पर ही पड़ेगा. सेक्स को लेकर आज भी बहुत सी भ्रांतियां व डर हैं हमारे समाज में, जो आपके रिश्ते पर नकारात्मक असर डालते हैं. क्या हैं ये मिथ्स और क्या है सच्चाई यह जानना ज़रूरी है, ताकि आपका रिश्ता बना रहे व मज़बूती से टिका भी रहे.

रोज़ाना सेक्स नहीं करना चाहिए

यह मात्र ग़लतफ़हमी है. आप दोनों अगर रोज़ाना सेक्स करने की इच्छा रखते हो, तो ख़ुद को रोके रखने में समझदारी नहीं. पति का मन है, लेकिन पत्नी के मन में यह बात घर कर गई है कि यह रोज़ करनेवाली क्रिया नहीं है. ऐसे में पति का नाराज़ होना जायज़ है. बेहतर होगा कि इस बात को मन से निकाल दें और अपनी सेक्स लाइफ को क्रिएटिव बनाने की तरफ़ ध्यान दें.

दिन में बस एक बार ही सेक्स करना चाहिए

यह दूसरी सबसे बड़ी भ्रांति है. भूल जाइए कि आपके दोस्त व रिश्तेदार क्या कहते हैं, क्योंकि ऐसा कोई फिक्स नंबर नहीं है और न ही कोई मैजिक नंबर है, जो आपको पता चल जाए और आप उसको फॉलो करें. सेक्स हमेशा सहज और स्वाभाविक होना चाहिए. कपल जब भी एक-दूसरे के लिए यह महसूस करें, उन्हें सेक्स करना चाहिए और यदि दोनों में से एक का भी मन न हो, तो इंतज़ार करना ही बेहतर होगा, क्योंकि यह किसी एक को ख़ुश व संतुष्ट करने की क्रिया नहीं, बल्कि आपके रिश्ते को और भी ख़ूबसूरत बनाने की क्रिया है, तो यह जितना सहज होगा, उतना
बेहतर होगा.

सेक्स के लिए नियम नहीं बनाना चाहिए

जी नहीं, आप इसका टाइम टेबल ज़रूर बना सकते हो और यह आपको फन का एक्सपीरियंस देगा. यह सच है कि सेक्स सहज होना चाहिए, लेकिन याद करें रिश्ते के शुरुआती दिन, जब आप बन-ठनकर, कैंडल्स जलाकर, सेक्सी ड्रेस पहनकर मूड ऑन करते थे. तो क्यों न अपने कैलेंडर पर नए तरी़के से काम करें और सेक्स के लिए भी टाइम टेबल बनाकर रिश्ते में नयापन व ताज़गी लाएं.

सभी पुरुष रोज़ सेक्स करने की चाह रखते हैं

अधिकांश महिलाएं पुरुषों के बारे में यही राय रखती हैं. उन्हें लगता है पुरुष हमेशा सेक्स के लिए तैयार रहते हैं और यदि उन्हें ख़ुश न रखा गया, तो वो रिश्ते से बाहर सेक्स व प्यार ढूंढ़ने लगते हैं. जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं हैं. पुरुष ही नहीं, बहुत सी महिलाएं भी हैं, जिनके सेक्स की चाहत अपेक्षाकृत अधिक होती है. यह व्यक्ति पर निर्भर करता है कि उसकी सेक्स की इच्छा कब और कितनी होती है.

महिलाएं सेक्स को एंजॉय नहीं करतीं

यह भी बहुत बड़ी ग़लतफ़हमी है और इसका शिकार भी सबसे ज़्यादा महिलाएं ही हैं. महिलाओं को ख़ुद लगता है कि सेक्स स़िर्फ पुरुषों को ख़ुश करने के लिए होता है. ऐसे में वो सेक्स में पहल करने से भी कतराती हैं और सेक्स की इच्छा या अनिच्छा होने पर व्यक्त भी नहीं कर पातीं. वो अपने पार्टनर के मन व मूड के अनुसार सेक्स करती हैं. लेकिन इस तरह का सेक्स मशीनी प्रक्रिया से अधिक कुछ नहीं होगा. सेक्स भावना है, कोई रूटीन काम नहीं, जिसे बस निपटाना है. इस भावना को जब तक महसूस नहीं करेंगे, तब तक पार्टनर से कैसे जुड़ाव महसूस करेंगे?

उम्र बढ़ने पर सेक्स की इच्छा कम हो जाती है, इसलिए ख़ुद पर कंट्रोल रखना चाहिए

अधिकांश भारतीयों में यह सोच होती है कि बच्चे बड़े हो रहे हैं, तो ऐसे में यह सब शोभा नहीं देता. सेक्स से उम्र या बच्चों का कोई लेना-देना नहीं होता. आप जब तक हेल्दी हैं और जब तक आपकी इच्छा है आप सेक्स कर सकते हैं. इसमें कोई बुराई नहीं है.

मेरे पार्टनर को पता होना चाहिए कि मुझे सेक्स के दौरान क्या पसंद है, क्या नहीं

सबसे पहले तो यह जान लें कि आपका पार्टनर माइंड रीडर नहीं है. जब तक आप दोनों कम्यूनिकेट नहीं करेंगे, तब तक किसी को कुछ पता नहीं चलेगा. आप दोनों बस अंदाज़ा ही लगाते रह जाओगे. जिस तरह रिश्ते की मज़बूती के लिए कम्यूनिकेशन ज़रूरी है, उसी तरह अच्छी सेक्स लाइफ के लिए भी कम्यूनिकेशन बेहद ज़रूरी है. आप दोनों को एक-दूसरे से बात करनी चाहिए. अपनी फैंटसीज़, अपने प्लेज़र पॉइंट्स आदि बताने चाहिए, ताकि सेक्स आप दोनों के लिए संतोषजनक हो.

शादीशुदा कपल पारंपरिक सेक्स ही करते हैं

अधिकांश कपल्स की सेक्स को लेकर कई तरह की फैंटसीज़ होती हैं. उनकी कल्पना का सेक्स अलग ही होता है, जबकि हक़ीक़त इससे कोसों दूर होती है, क्योंकि सेक्स को लेकर आपके मन में बहुत से मिथ्स होते हैं. आपको लगता है कि शादी के बाद सेक्स में ज़्यादा एक्सपेरिमेंट नहीं कर सकते हैं. जबकि आप अपनी फैंटसीज़ एक-दूसरे के साथ डिसकस कर सकते हैं और जितना संभव हो, उन्हें पूरा करने का प्रयास भी कर सकते हैं. चाहे सेक्स पोज़ीशन की बात हो या नई जगह पर सेक्स करना… आप सब कुछ ट्राई कर सकते हो. ज़रूरी नहीं कि आप अपनी सेक्स लाइफ को पारंपरिक सेक्स का नाम देकर बोरिंग बना दें और अपने रिश्ते को कमज़ोर करने की नींव रख दें.

बढ़ती उम्र के साथ फोरप्ले और नॉटी बातें कम होती जाती हैं

यह सच नहीं है. आपकी उम्र से इन सब बातों का कोई लेना-देना नहीं होता. फोरप्ले हमेशा ही ज़रूरी होता है और नॉटी बातें आपके रोमांस को बरक़रार रखती हैं. बेहतर सेक्स व रिलेशनशिप के लिए दोनों का ही नॉटी होना बेहद ज़रूरी है, चाहे आपकी उम्र कितनी भी हो.

किसी यंग के साथ सेक्स का अनुभव बेहतर होता है

यह भी बहुत बड़ी भ्रांति है. सेक्स अनुभव व उम्र के साथ बेहतर होता जाता है और आप दोनों ही समय के साथ एक-दूसरे को बेहतर समझने लगते हैं. ऐसे में उम्र का सेक्स के अनुभव व बेहतर सेक्स से कोई लेना-देना नहीं होता. यह कतई ज़रूरी नहीं कि यंग पार्टनर के साथ सेक्स का अनुभव ज़्यादा अच्छा रहेगा. यहां मामला उल्टा भी हो सकता है.

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पत्नी को ऑर्गैज़्म न मिला, तो वो पति को कमज़ोर समझेगी

यह सोच पुरुष व महिलाएं दोनों में होती है. यदि सही तरी़के से फोरप्ले किया जाए, तो दोनों को ही एक साथ ऑर्गैज़्म मिल सकता है. लेकिन यदि इस क्रिया में कभी ज़्यादा एक्साइटमेंट के चलते या कभी अन्य कारणों से कोई एक जल्दी स्खलित हो जाए, तो इसका यह कतई अर्थ नहीं कि वो कमज़ोर है. ऐसा होना स्वाभाविक है. समय के साथ-साथ जब आप दोनों की कंपैटिबिलिटी व समझ बढ़ेगी, तो सेक्स को लेकर सहजता भी बढ़ेगी और आपका अनुभव बेहतर होता जाएगा. कई बार तो पत्नियां भी मात्र इस बात का प्रदर्शन करती हैं कि उन्हें ऑर्गैज़्म मिला है, पर बेहतर होगा सेक्स को लेकर खुलकर बात करें. इससे आपका रिश्ता भी बेहतर होगा, वरना कुंठाएं जन्म लेंगी.

सेक्स से कमज़ोरी आती है

यह सोच आज भी है. लंबे समय तक एथलीट्स को भी यही सलाह दी जाती थी कि अपनी परफॉर्मेंस से पहले की रात वो सेक्स न करें. इस सोच के पीछे की धारणा यह होती थी कि सेक्स न करने से आपकी ऊर्जा बचती है और वो एग्रेशन आप अपनी परफॉर्मेंस में देते हैं, जिससे आपका प्रदर्शन बेहतर होता है. पर अब कई शोध यह साबित कर चुके हैं कि इसमें सच्चाई कम ही है. बेहतर सेक्स आपके प्रदर्शन को बेहतर करता है, न कि कमज़ोर.

पोर्न फिल्म्स से आप अपनी सेक्स लाइफ में नई ताज़गी ला सकते हैं

बहुत से लोग यह सोचते हैं कि इस तरह की फिल्म्स में जो दिखाया जाता है वह सच में संभव है, जबकि यह मात्र सेक्स को ग़लत संदर्भ में ग़लत तरी़के से दिखाती हैं. यह स़िर्फ पैसे कमाने की इंडस्ट्री है, इसे आपकी सेक्स लाइफ या आपको एजुकेट करने में कोई दिलचस्पी नहीं होती. ये आपको वही दिखाती हैं, जो आपको अधिक उत्तेजक लगे, लेकिन यथार्थ में वह संभव नहीं हो सकता. कई लोग जब अपने पार्टनर पर पोर्न फिल्म देखकर उसी तरह परफॉर्म करने का दबाव बनाते हैं, तो रिश्तों में दूरियां व दरार आने लगती है. बेहतर सेक्स के लिए पार्टनर की भावनाओं का ख़्याल रखना सबसे ज़रूरी है. साथ ही यह भी ध्यान रखें कि पोर्न देखने की लत से आपका सेक्स जीवन पूरी तरह से ख़त्म होने की कगार पर आ सकता है, क्योंकि उसके बाद आपको रियल सेक्स बोरिंग लगने लगता है और आपको वो नकली दुनिया ज़्यादा हसीन व रंगीन नज़र आती है. बेहतर होगा कि इन फिल्मों की लत से बचें.

अल्कोहल सेक्सुअल परफॉर्मेंस बेहतर करता है

शुरुआती दौर में आपको ऐसा लगता है, लेकिन अल्कोहल आगे चलकर आपकी परफॉर्मेंस व सेहत दोनों को ख़राब ही करता है. साथ ही यह रिश्तों पर नकारात्मक असर डालता है. इसलिए कभी-कभार इसका सेवन आपका मूड बेहतर कर सकता है, पर इसकी भी लत अच्छी नहीं और इसे लेकर यह भ्रम ख़तरनाक है कि आपकी सेक्सुअल परफॉर्मेंस इससे बेहतर होगी.

सेक्स को लेकर क्यों हैं इतने मिथ्स?


– हमारे समाज में सेक्स पर आज भी अधिक कम्यूनिकेशन या बातचीत नहीं की जाती. इस वजह से बहुत से सवाल मन में ही रह जाते हैं.
– ग़लत जगह से जानकारी हासिल करना भी मिथ्स को बढ़ाता है.
– दोस्तों व सहेलियों की सेक्स को लेकर बढ़ा-चढ़ाकर बातें करने की आदत मन में कई ग़लत धारणाएं बना देती हैं.
– घर-परिवार में भी सेक्स की बातें करने की मनाही होती है.
– लड़कियों को हमेशा ही सेक्स की इच्छा को दबाकर रखने की सीख दी जाती है.
– उनकी परवरिश के दौरान उन्हें यही सिखाया जाता है कि सेक्स बुरी चीज़ है, जिसे ख़राब चरित्र के लोग ही तवज्जो देते हैं.
– बेटियों को यही बताया जाता है कि पति को ख़ुश करना ही उनके लिए सेक्स का उद्देश्य होना चाहिए.
– पर्सनल व सेक्सुअल हाइजीन व सेफ सेक्स की बातों को बताना ज़रूरी नहीं समझा जाता.
– रिलेशनशिप एक्सपर्ट या सेक्स थेरेपिस्ट के पास जाने की सलाह कभी नहीं दी जाती.
– रिश्ते की मज़बूती के लिए किस तरह से सेक्स को लेकर मैच्योरिटी होनी चाहिए इस ओर किसी का ध्यान नहीं जाता और न ही इसे महत्वपूर्ण माना जाता.
– लड़कों की परवरिश काफ़ी लापरवाही से की जाती है, जिसमें उनको यह भ्रम हो जाता है कि महिलाएं मात्र उनकी संतुष्टि का ज़रिया हैं.
– उन्हें महिलाओं की सेक्सुअल ज़रूरतों का ध्यान देने की हिदायतें कभी नहीं दी जातीं.
– सेक्स और भावनाओं के समन्वय को समझाया नहीं जाता.

कैसे दूर हों ये मिथ्स?

– ज़रूरी है सही समय पर सेक्स की सही शिक्षा.
– लिंग के आधार पर सेक्स की ज़रूरतों व ज़िम्मेदारियों को न बांटा जाए.
– सेक्स को लेकर बात करने में बच्चे सहज हों, पैरेंट्स को यह बच्चों को समझाना व ख़ुद भी समझना चाहिए.
– सेक्स को बुरा काम बताने की ग़लती न करें.
– यह एक सहज व प्राकृतिक क्रिया है, यह समझें व समझाएं.
– सेक्स को लेकर अपनी सोच में मैच्योरिटी लाएं. ऐसे में एक्सपर्ट्स की सलाह लेने से न हिचकें.
– पैरेंट्स ध्यान दें कि बच्चे ग़लत जगहों से जानकारी न लें.
– अलग-अलग तरीक़ों से उन्हें एजुकेट करें.
– रिश्ते की मज़बूती के लिए सेक्स व सेक्स को लेकर सही सोच के महत्व को समझाएं.
– कोई सेक्सुअल समस्या हो, तो उसे शेयर करने में न तो कमज़ोरी होगी, न ही बुराई.इसे छिपाना सेहत व रिश्ते के लिए घातक हो सकता है.

– विजयलक्ष्मी

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कैसे दूर करें अपने रिलेशनशिप फियर्स?(How To Overcome Relationship Fears?)

जो चीज़ हमें सबसे प्यारी होती है, उसे खोने का डर भी हमें उतना ही ज़्यादा होता है. ऐसे में हम अपने उस रिश्ते को इतना संभालकर और दुनिया से बचाकर रखना चाहते हैं कि हमारे मन में हर पल अपने रिश्ते के खो जाने का डर बना रहता है. लेकिन डरकर कोई रिश्ता नहीं जीया जा सकता, अपने रिलेशनशिप फियर्स से बाहर निकलकर ही आप एक हेल्दी रिश्ता जी सकते हैं. रिलेशनशिप फियर्स कौन-कौन से होते हैं और उन्हें कैसे दूर करें? आइए, जानते हैं.

रिश्ता न निभाने का डर

जब आप किसी से बेइंतहा प्यार करते हैं, तो उसे किसी भी हाल में खोना नहीं चाहते. ऐसे में आपको हर पल ये डर लगा रहता है कि क्या आपका पार्टनर इस रिश्ते को उम्रभर निभाएगा. कहीं आपको बीच सफ़र में छोड़ तो नहीं देगा.

कैसे दूर करें ये रिलेशनशिप फियर?

जब तक आप अपने रिलेशनशिप को शादी के बंधन में नहीं बांध देते, तब तक कुछ हद तक आपके मन में ये डर होना लाज़मी है, लेकिन अपने डर के कारण पार्टनर पर बेवजह शक करना सही नहीं है. यदि आप अपने इस डर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं, तो अपने पार्टनर से इस बारे में बात करें और अपने रिश्ते को बिना डरे प्यार से जीएं.

धोखा देने का डर

प्यार में धोखा कोई भी बर्दाश्त नहीं कर सकता, लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि दूसरों के रिश्ते में धोखे की बात सुनकर लोग अपने पार्टनर पर भी शक करने लगते हैं. उन्हें लगता है कि कहीं उनका पार्टनर भी उन्हें धोखा तो नहीं दे देगा. ऐसे में कई बार वो अपने पार्टनर को लेकर इतने पज़ेसिव हो जाते हैं कि जाने-अनजाने उसकी हर हरक़त पर नज़र रखने लगते हैं. उनकी इस हरक़त से पार्टनर को चिढ़ होने लगती है, जिससे उनके रिश्ते में बेवजह तनाव बढ़ने लगता है.

कैसे दूर करें ये रिलेशनशिप फियर?

प्यार के रिश्ते में विश्‍वास बहुत ज़रूरी है. बेवजह पार्टनर पर शक करना या उस पर नज़र रखना सही नहीं है. अपने पार्टनर को इतना स्पेस ज़रूर दें कि वो उसे आपके साथ घुटन न महसूस हो. आप चाहें तो अपना डर पार्टनर के साथ शेयर करके उनसे इस बारे में खुलकर बात कर सकते हैं.

ज़िम्मेदारी न निभाने का डर

कई लोगों को ये डर रहता है कि उनका पार्टनर क्या अपनी सभी ज़िम्मेदारियां बख़ूबी निभा सकेगा? जब आप किसी को अपना जीवनसाथी बनाते हैं, तो आपके रिश्ते की ज़िम्मेदारियां भी बढ़ जाती हैं. ऐसे में एक-दूसरे का साथ निभाने के साथ-साथ अपनी ज़िम्मेदारियां निभाना भी उतना ही ज़रूरी हो जाता है.

कैसे दूर करें ये रिलेशनशिप फियर?

कई बार ऐसा भी होता है कि एक पार्टनर ख़ुद आगे बढ़कर ज़रूरत से ज़्यादा ज़िम्मेदारियां ओढ़ लेता है, फिर जब उससे इतनी सारी ज़िम्मेदारियां नहीं निभाई जातीं, तो वो अपने पार्टनर को गैरज़िम्मेदार साबित करने लगता है. उसे लगता है कि उसने ये ज़िम्मेदारियां यदि अपने पार्टनर के साथ शेयर की, तो क्या उनका पार्टनर ये ज़िम्मेदारियां निभा सकेगा? अत: रिश्ते में बंधने से पहले अपनी ज़िम्मेदारियों के बारे में पार्टनर से बात कर लें, ताकि बाद में आप दोनों के बीच इस बात को लेकर मनमुटाव न हो.

सम्मान न मिलने का डर

दो लोग जब एक रिश्ते में बंधते हैं, तो उनके साथ-साथ दो परिवार भी एक हो जाते हैं. ऐसे में कई बार एक पार्टनर का परिवार दूसरे पर इस कदर हावी रहता है कि उसे वो सम्मान नहीं मिल पाता, जो उसका अधिकार है. कई बार पार्टनर भी एक-दूसरे का सम्मान नहीं करते, जिसके कारण परिवार और दोस्तों के बीच उनकी छवि ख़राब होती है और उनके रिश्ते में भी दरार पड़ने लगती है. किसी भी रिश्ते में सम्मान न मिल पाने का डर सही नहीं है.

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कैसे दूर करें ये रिलेशनशिप फियर?

शादी के रिश्ते में दोनों पार्टनर्स को उचित सम्मान मिले, इसका ख़्याल दोनों को रखना चाहिए. यदि आप दोनों ने साथ जीने का ़फैसला किया है, तो एक-दूसरे के सम्मान का ख़्याल भी आपको ही रखना होगा. यदि आपको ऐसा लगता है कि आपको वो सम्मान नहीं मिल रहा, जिसके आप हक़दार हैं, तो इसके लिए आपको अपने पार्टनर से ज़रूर बात करनी चाहिए.

समझौते का डर

रिश्ता निभाने के लिए दोनों को पार्टनर्स को कई समझौते करने पड़ते हैं. एक-दूसरे की पसंद-नापसंद का ध्यान रखना पड़ता है. लेकिन कई बार एक पार्टनर किसी भी तरह का समझौता करने के लिए राज़ी नहीं होता. ऐसे में दूसरे पार्टनर के लिए रिश्ता निभाना बहुत मुश्किल हो जाता है.

कैसे दूर करें ये रिलेशनशिप फियर?

यदि आपके पार्टनर भी किसी भी तरह के समझौते के लिए तैयार नहीं होते, तो आपका डर वाजिब है. ऐसे में अकेले आपकी कोशिश से कुछ नहीं होगा. आपको अपने पार्टनर से इस बारे में बात करनी होगी कि उन्हें आपकी भावनाओं का भी ध्यान रखना होगा, तभी आपके रिश्ते में प्यार और ख़ुशियां बरकरार रहेंगी.

एक्स से मिलने का डर

यदि आपके पार्टनर का आपसे पहले किसी और से अफेयर था और अब भी उनके बीच बातचीत जारी है, तो आपके मन में डर या शंका होना स्वाभाविक है. इस डर की वजह शक से ज़्यादा पार्टनर को खो देने का भय है. लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि आप पार्टनर की हर बात को उनकी एक्स से जोड़ें.

कैसे दूर करें ये रिलेशनशिप फियर?

यदि आपके पार्टनर की अपनी एक्स से फॉर्मल बातचीत है, तो कोई बात नहीं, लेकिन आपको यदि लगता है कि वो फिर उसकी तरफ़ आकर्षित हो रहे हैं, तो आपको पार्टनर के सामने अपनी शिकायत रखनी चाहिए. रिश्ते में पार्टनर को स्पेस देना ज़रूरी है, लेकिन ज़रूरत से ज़्यादा स्पेस देने से भी कई बार समस्या बढ़ जाती है.

रिलेशनशिप फियर्स दूर करने के आसान उपाय

अपने रिश्ते से डर को दूर भगाने और प्यार बढ़ाने के लिए आपको ये टिप्स ट्राई करने चाहिए-

  • अपने पार्टनर से हर मुद्दे पर खुलकर बात करें, ताकि आप दोनों के मन में यदि कोई बात हो, तो वो मन में दबी न रह जाए.
  • पार्टनर की भावनाओं का सम्मान करें. अपने परिवार और रिश्तेदारों के सामने कभी अपने पार्टनर का अपमान न होने दें.
  • अपने रिश्ते को भरपूर टाइम दें, ताकि समय के अभाव में आपके पार्टनर का मन कहीं और न लगे.
  • अपनी ज़िम्मेदारियों से कभी पीछे न हटें, पार्टनर का हमेशा साथ दें.
  • यदि आपको लगता है कि आपका पार्टनर आपको धोखा दे रहा है, तो कोई भी ़फैसला लेने से पहले पार्टनर को एक मौक़ा ज़रूर दें.
  • पार्टनर पर स़िर्फ अपनी इच्छाएं न थोपें, उनकी इच्छाओं का भी ध्यान रखें.
  • रिश्ते में वफ़ादारी की उम्मीद स़िर्फ पार्टनर से न करें, बल्कि ख़ुद भी अपने रिश्ते के प्रति ईमानदार रहें.
  • अपने रिश्ते में रोमांस कभी कम न होने दें, इससे आपके रिश्ते में ऊर्जा और प्यार हमेशा बना रहेगा.

– कमला बडोनी

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The Psychology Of Relationships: मुझे दोस्त बनाने में संकोच होता है (I Hesitate To Make Friends)

Psychology Of Relationships
मैं फाइनल ईयर की छात्रा हूं. इंदौर में पली-बढ़ी हूं. आगे की पढ़ाई के लिए मुंबई आई हूं. यहां सब कुछ बहुत एडवांस्ड है. लोग काफ़ी खुले विचारों के हैं. मुझे यहां दोस्त बनाने में भी संकोच होता है. बहुत अकेला महसूस करती हूं. सोचती हूं, वापस इंदौर चली जाऊं.
– रोमा त्रिपाठी, मुंबई.

बदलाव कभी आसान नहीं होता. हमें एक रूटीन जीवन जीने की आदत होती है और उसमें थोड़ा भी बदलाव हमें परेशान कर देता है, पर बदलाव ही संसार का नियम है. जिस चीज़ से हमें डर लगता है या तक़लीफ़ होती है, उससे भागने की बजाय उसका सामना करना उचित है. अपनी सोच बदलें, लोगों और चीज़ों को देखने का नज़रिया बदलें. ख़ुद को भी थोड़ा आत्मविश्‍वासी बनाने का प्रयास करें. लोगों से मिलना-जुलना शुरू करें. धीरे-धीरे संकोच समाप्त हो जाएगा और देखते-देखते आप भी मुंबईकर बन जाएंगी, क्योंकि ये शहर किसी को अजनबी नहीं रहने देता. सबको गले लगाकर अपना बना लेता है, लेकिन थोड़ी कोशिश तो आपको भी करनी होगी. अपनी झिझक दूर करें और यह सोचना बिल्कुल छोड़ दें कि आप किसी छोटे या दूसरे शहर से आई हैं, क्योंकि हर शहर की अपनी ख़ूबियां व ख़ूबसूरती होती है.

मैं 35 साल की नौकरीपेशा महिला हूं. कुछ दिनों से अजीब-सी परेशानी में हूं. मेरा मैनेजर मुझे ग़लत तरी़के से परेशान करके, नौकरी छीन लेने की और मुझे बदनाम करने की धमकी दे रहा है. समझ में नहीं आ रहा है, क्या करूं? घर में बताऊं, तो सब नौकरी छोड़कर घर पर बैठने की सलाह देंगे.
– बबीता शर्मा, पुणे.

आप अकेले ही इस समस्या से नहीं जूझ रहीं, काफ़ी महिलाओं को इन बदतमीज़ियों से गुज़रना पड़ता है. आपको आवाज़ उठानी होगी और हिम्मत करनी होगी. आजकल दफ़्तरों में स्पेशल कमिटी होती है. आप उन पर भरोसा कर सकती हैं और मदद ले सकती हैं, पर भविष्य में दोबारा कोई आपके साथ ऐसा ना करे, उसके लिए सतर्क रहें. अपने कम्यूनिकेशन और पर्सनैलिटी में बदलाव लाएं. कॉन्फिडेंट बनें और पूरी तत्परता से अपने साथ हो रहे अन्याय व शोषण के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएं. अपने अन्य सीनियर्स से भी बात करें और यदि सही राह दिखानेवाला न मिले, तो कोई कठोर कदम उठाने से पीछे न हटें. क़ानून का सहारा लें.

मेरी उम्र 32 साल है. मैं पिछले सात सालों से एक लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप में हूं. जब भी शादी की बात करती हूं, वह कोई न कोई बहाना बनाकर मुझे समझा लेते हैं. घरवाले शादी के लिए दबाव डाल रहे हैं, पर मैं किसी और से शादी करने की सोच भी नहीं सकती. क्या करूं?
– नेहा सिंह, प्रयागराज.

आप कब तक इस तरह समय गंवाएंगी? घरवालों की चिंता स्वाभाविक है. आपको अपने प्रेमी से साफ़-साफ़ बात करनी होगी और एक अल्टीमेटम देना होगा. कहीं ऐसा न हो कि वो आपके भरोसे का फ़ायदा उठा रहा हो, इसलिए अपने बारे में गंभीरता से सोचना शुरू कर दें. ख़ुद पर विश्‍वास रखें. आपका जीवन और आपका भविष्य बहुत महत्वपूर्ण और क़ीमती है, किसी भी तरह से उससे समझौता करना नादानी होगी. समय रहते सही फैसला लें.

 

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Zeenat Jahan

ज़ीनत जहान
एडवांस लाइफ कोच व
सायकोलॉजिकल काउंसलर

[email protected]

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किस महीने में हुई शादी, जानें कैसी होगी मैरिड लाइफ? (Your Marriage Month Says A Lot About Your Married Life)

रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स के मुताबिक़ नवंबर में शादी करनेवाले कपल्स सबसे ज़्यादा ख़ुशहाल रहते हैं, जबकि वैलेन्टाइन्स डे के दिन शादी करनेवाले 18-36% कपल्स के तलाक़ हो जाते हैं. आपकी शादी किस महीने में हुई है और आपकी शादीशुदा ज़िंदगी कैसी होगी, आइए जानते हैं.

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जनवरी

इस महीने में जिन लोगों की शादी होती है, उन पर कुंभ राशि का प्रभाव पड़ता है. इनका दांपत्य जीवन ख़ुशहाल रहता है. दोनों पार्टनर्स में आपसी समझ काफ़ी अच्छी रहती है. दोनों एक-दूसरे के प्रति वफ़ादार होते हैं. समय-समय पर इन कपल्स को रोमांटिक सरप्राइज़ेस और गिफ्ट्स मिलते ही रहते हैं.

लव टिप: हर रिश्ता उसे निभानेवाले पर निर्भर करता है, इसलिए अपने रिश्ते को ख़ुशहाल बनाए रखने के लिए अपना सौ प्रतिशत दें.

फरवरी

इस महीने शादी करनेवाले कपल्स की शादीशुदा ज़िंदगी को आप ‘इमोशनल जर्नी’ कह सकते हैं, क्योंकि दोनों ही पार्टनर्स एक-दूसरे के प्रति इमोशनल होते हैं. आप पर मीन राशि का प्रभाव पड़ता है, जिसके कारण आप एक-दूसरे के प्रति सारी ज़िम्मेदारियां निभाते हैं. कुछ मामलों में यह भी देखा गया है कि पति या पत्नी में से एक बहुत वफ़ादार होता है, पर दूसरा उतना वफ़ादार नहीं होता और रिश्ता बिखर जाता है. यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबॉर्न में हुई स्टडी में पता चला है कि जो लव बर्ड्स वैलेंटाइन्स डे के दिन शादी करते हैं, उनके रिश्ते के टूटने के चांसेस 18 से 36% होता है.

लव टिप: जब भी आपको लगे कि रिश्ता कमज़ोर पड़ रहा है, तभी एक रोमांटिक हनीमून प्लान करें. अपने रिश्ते को ट्रैक पर लाने का इससे बेहतर उपाय नहीं हो सकता.

मार्च

अगर आपकी शादी इस महीने में हुई है, तो आपकी शादी पर मेष राशि का प्रभाव पड़ता है. आपका रिश्ता काफ़ी उतार-चढ़ाव के दौर से गुज़रता है, जहां अच्छे समय के साथ-साथ आप दोनों बुरा समय भी देखते हैं. कभी-कभी ऐसा भी हो सकता है कि आपको अपने पार्टनर का रवैया ही समझ में न आए. कल जिस बात पर वो आपसे सहमत थे, आज उसी चीज़ के लिए आपकी बहस हो जाए. छोटी-छोटी बातों पर इनकी बहस हो सकती है.

लव टिप: इतना याद रखें कि नोक-झोंक हर रिश्ते में होती है, इसलिए उसे मन में रखकर न बढ़ाएं. एक-दूसरे के व्यक्तित्व व विचारों को समझने का प्रयास ही आपके रिश्ते को मज़बूत बनाएगा.

अप्रैल

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह महीना विवाह के लिए सबसे अनुकूल समय लेकर आता है. तभी तो आज भी ज़्यादातर शादियां अप्रैल के महीने में होती हैं. इस महीने शादी करनेवालों पर वृषभ राशि का प्रभाव पड़ता है. इनकी सेक्स लाइफ भी काफ़ी रोमांटिक होती है. वृषभ के प्रभाव के कारण कुछ पार्टनर्स में से एक बहुत डॉमिनेटिंग होता है, पर दूसरे के कूल होने के कारण रिश्ता आसानी से निभ जाता है.

लव टिप: अपने प्यार को जताने में ज़रा भी कंजूसी न करें. कभी चॉकलेट्स, कभी फूल, तो कभी प्रेमपत्र के ज़रिए समय-समय पर अपने प्यार को जताते रहें.

मई

इस महीने शादी करनेवालों पर मिथुन राशि का प्रभाव पड़ता है. जैसा कि इस राशि की ख़ूबी है, दो पहलू या दो रूप होने की, इस ख़ूबी का असर आपके रिश्ते पर भी पड़ता है. ऐसा माना जाता है कि इस महीने शादी करनेवालों के रिश्ते के सफल होने की जितनी गुंजाइश होती है, उतनी ही गुंजाइश इसके असफल होने की भी होती है. मतलब या तो आप जन्म-जन्मांतर तक साथ निभानेवाले कपल बनते हैं या फिर जल्द ही अपनी-अपनी नई राह चुन लेते हैं. ऐसा भी हो सकता है कि दो में से एक साथी का स्वभाव बहुत बुरा हो या फिर बहुत ही अच्छा हो.

लव टिप: अपने रिश्ते को सफल या असफल बनाना आप दोनों के हाथ में है. सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ शादी को पूरे दिल से निभाएं. कभी कुछ बुरा लगे, तो भी रिश्ते को बचाने की पूरी कोशिश करें.

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जून

प्यार-दुलार के साथ-साथ दया भाव इन कपल्स में कूट-कूटकर भरा होता है, तभी तो लोग इनकी सफल शादी और प्यार की मिसालें देते हैं. अगर आपकी शादी इस महीने हुई है, तो आप पर कर्क राशि का प्रभाव पड़ता है. ये कपल्स एक-दूसरे के साथ एक-दूसरे के परिवार को भी बख़ूबी संभालते हैं. इसके अलावा अपनी आनेवाली पीढ़ी को सुरक्षित भविष्य देने की पूरी कोशिश करते हैं. कुल-मिलाकर कहें, तो ये सबसे ज़िम्मेदार और केयरिंग कपल्स होते हैं.

लव टिप: जब भी पार्टनर आपके या परिवार के लिए कुछ ख़ास करता है, तो उसके प्रयासों की सराहना करें. उन्हें जताएं कि वो आपके लिए कितने बहुमूल्य हैं.

जुलाई

इस महीने शादी करनेवालों पर सिंह राशि का प्रभाव पड़ता है. आप दोनों ही अपने रिश्ते को सफल बनाने के लिए अपना सौ प्रतिशत देते हैं और उसमें पूरी तरह सफल भी होते हैं. इस राशि का ऐसा प्रभाव है कि आप एक-दूसरे के प्रति हमेशा आकर्षण महसूस करते हैं. एक-दूसरे को आगे बढ़ाने की पूरी कोशिश करते हैं. आपका शाही अंदाज़ आप अपने पार्टनर कोे भी देते हैं, जिससे आपकी शादीशुदा ज़िंदगी रौनक़ से भरपूर होती है. आप अपने शादीशुदा रिश्ते से हमेशा संतुष्ट रहते हैं.

लव टिप: सेक्स लाइफ को बूस्ट करने के लिए हमेशा बेडरूम में कुछ नया ट्राई करें. आप चाहें, तो दोनों किसी एडवेंचर ट्रिप पर भी जा सकते हैं. यह आपके रिश्ते में नई जान डाल देगा.

अगस्त

एक्सपर्ट्स के मुताबिक़ इस महीने शादी करनेवाले कपल्स को बच्चे बहुत पसंद होते हैं, इसीलिए वो दो से ज़्यादा बच्चे पैदा करते हैं. इन्हें बड़ा परिवार  अच्छा लगता है. इस महीने शादी करनेवालों पर कन्या राशि का प्रभाव पड़ता है. इनकी ज़िंदगी में कई परेशानियां भी आती हैं, पर दोनों मिलकर उनका समाधान निकाल लेते हैं. अगर ये एक-दूसरे की पसंद-नापसंद का ध्यान रखें, तो इनका रिश्ता बहुत मज़बूत साबित होता है.

लव टिप: पतियों के लिए बहुत ज़रूरी है कि ‘तुम’ या ‘मैं’ की बजाय ‘हम’ शब्द का इस्तेमाल ज़्यादा करें. ‘हमें ऐसा करना चाहिए, हमारे लिए यह सही होगा…’ जैसे वाक्यों का ज़्यादा उपयोग करें. पत्नी को कभी अलग-थलग पड़नेवाली भावना का एहसास न होने दें.

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Married Life
सितंबर

अगर आपकी शादी भी इस महीने में हुई है, तो आप पर तुला राशि का प्रभाव रहता है. तुला की ख़ूबियों के कारण ये कपल काफ़ी बैलेंस्ड रहते हैं और इसीलिए ‘परफेक्ट कपल’ कहलाते हैं. इनके बीच शायद ही कभी बड़ा झगड़ा होता हो. हर तरह के विवाद को ये आपसी सहमति से सुलझाते हैं. दोनों के बीच का तालमेल ही इनकी ख़ुशहाल शादीशुदा ज़िंदगी का राज़ है.

लव टिप: हर रोज़ रोमांस के लिए थोड़ा समय निकालें. एक-दूसरे को यूं ही निहारना, बांहों में भरना, चुपके से किस कर लेना… इन छोटी-छोटी शरारतों से लाइफ में रोमांस बनाए रखें.

अक्टूबर

इस महीने शादी करनेवालों के वैवाहिक जीवन पर वृश्‍चिक राशि का प्रभाव पड़ता है. वृश्‍चिक राशि के गुणों के प्रभाव के कारण इनकी सेक्स लाइफ बेहद रोमांटिक होती है. ये कपल एक-दूसरे के प्रति अपने प्यार और आकर्षण को बिल्कुल छिपाते नहीं. ज़िंदगी को खुलकर जीने के इनके फलस़फे का असर इनकी सक्सेसफुल मैरिड लाइफ में नज़र आता है. इनकी एक और ख़ूबी है कि ये किसी भी विपरीत परिस्थिति में पार्टनर को अकेला नहीं छोड़ते.

लव टिप: ‘तुम कितनी अच्छी हो…’ ‘मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूं…’ ‘मैं समझता हूं…’ ‘मुझे माफ़ कर दो…’ ‘थैंक यू जी…’ ये वो वाक्य हैं, जो आपके रिश्ते में मिठास भरते हैं. रोज़ाना इन शब्दों का इस्तेमाल करें और देखें, किस तरह आपकी मैरिड लाइफ में मिठास बनी रहती है.

नवंबर

इस महीने शादी करनेवाले कपल्स सबसे ज़्यादा ख़ुशहाल या यूं कहें ‘हैप्पीएस्ट कपल’ माने जाते हैं. इन पर धनु राशि का प्रभाव होता है, जिसके कारण ये काफ़ी संवेदनशील होते हैं. एक-दूसरे की कमियों और ख़ामियों को समझकर रिश्ता निभा लेना ही इनके रिश्ते की ख़ूबी है. ये कपल अपने प्यार को पहली प्राथमिकता देते हैं.

लव टिप:  रोज़ाना ऑफिस से आने के बाद एक-दूसरे को गले लगाएं. शादी के पहलेवाले रोमांच को बनाए रखने के लिए शादी के बाद भी हर महीने या दो महीने में डेट पर ज़रूर जाएं. प्यार के ख़ूबसूरत एहसास से अपने रिश्ते को सराबोर रखें.

दिसंबर

इस महीने शादी करनेवालों पर मकर राशि का प्रभाव रहता है. ऐसा देखा गया है कि सबसे रोमांटिक कपल्स दिसंबर में शादी करते हैं. सुरक्षित भविष्य की चाह में ये सेविंग्स और इन्वेस्टमेंट को बहुत तवज्जो देते हैं, जिससे कभी-कभी एक-दूसरे के लिए समय नहीं निकाल पाते, पर प्यार हमेशा इनकी पहली प्राथमिकता बना रहता है.

लव टिप: उतार-चढ़ाव हर क्षेत्र में लगा रहता है, इसलिए फाइनेंस संबंधी मामलों में कभी ज़िद न करें.  रोज़ाना 10 मिनट का ‘वी टाइम’ ज़रूर निकालें. एक-दूसरे से दिनभर की बातें और क़िस्से शेयर करें.

– संतारा सिंह

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कब करें फैमिली प्लानिंग पर बात? (When Is The Best Time To Discuss Family Planning?)

शादी से पहले होनेवाले कपल को तरह-तरह की हिदायतें दी जाती हैं. ट्रेनिंग दी जाती है. नए माहौल में एडजेस्ट होने से लेकर खाना पकाने तक और ससुराल में सबका मन जीत लेने से लेकर पार्टनर को काबू में करने तक के गुरुमंत्र दिए जाते हैं. जिसकी समझ में जो आता है, वो वही स्पेशल टिप देकर चला जाता है. लेकिन इन सबके बीच एक बात जो अक्सर नज़रअंदाज़ कर दी जाती है, वो है फैमिली प्लानिंग की बात.

Family Planning

क्यों नहीं की जाती फैमिली प्लानिंग की बात?

–     दरअसल हमारे समाज में शादी का दूसरा मतलब ही होता है बच्चे. जी हां, शादी होते ही हर कोई गुड न्यूज़ सुनना चाहता है, ऐसे में फैमिली प्लानिंग के बारे में भला कौन सोचे?

–     शादी के बाद यदि एक साल के अंदर गुड न्यूज़ नहीं मिलती, तो लोग बातें बनाने लगते हैं, क्योंकि हम मदरहुड को बहुत ही ग्लोरिफाई करते हैं.

–     मां बनना ही जैसे एक स्त्री की ज़िंदगी का सबसे बड़ा उद्देश्य है, उसके बिना उसके अस्तित्व का कोई महत्व ही नहीं.

–     अक्सर पैरेंट्स अपने बच्चों के मन यह बात डाल देते हैं कि बेहतर होगा कंट्रासेप्शन यूज़ न किया जाए और पहला बच्चा जितना जल्दी हो जाए, उतना अच्छा होगा.

–     अक्सर बच्चे को लोग शादी व रिश्ते की सिक्योरिटी मान लेते हैं, यह भी वजह है कि शादी के बाद गुड न्यूज़ का ही इंतज़ार करते हैं.

क्यों ज़रूरी है फैमिली प्लानिंग?

–     आजकल बिज़ी शेड्यूल के चलते बहुत-सी प्राथमिकताएं बदल रही हैं. इनका असर शादी व फैमिली प्लानिंग पर भी पड़ा है. ऐसे में अनचाहा गर्भ यानी एक्सिडेंटल प्रेग्नेंसी बहुत से ़फैसले बदलने को मजबूर कर सकती है.

–     इन फैसलों में करियर से लेकर फाइनेंशियल प्लानिंग तक शामिल है.

–    पहला बच्चा कब चाहते हैं, दूसरा बच्चा यदि चाहते हैं, तो कितने अंतराल के बाद… बच्चा होने पर किस तरह से ज़िंदगी बदलेगी, ज़िम्मेदारियां बढ़ेंगी, ख़र्चे बढ़ेंगे, काम बढ़ेगा… इन सब पर चर्चा ज़रूरी है.

–     बच्चे की ज़िम्मेदारी व उससे जुड़े काम कपल किस तरह से आपस में बांटेंगे, करियर को किस तरह से मैनेज करेंगे… इन तमाम बातों पर चर्चा बेहद ज़रूरी है.

कब करें फैमिली प्लानिंग की चर्चा?

अब सवाल यह है कि इन बातों पर चर्चा कब करनी चाहिए?

–    ज़ाहिर-सी बात है, ये तमाम बातें कपल को शादी से पहले ही कर लेनी चाहिए.

–     दोनों के क्या विचार हैं, किसकी कितनी सहमति है, यह जानना बेहद ज़रूरी है, ताकि बाद में विवाद न हो.

–     इसी प्लानिंग का एक बड़ा हिस्सा है- कंट्रासेप्शन. किस तरह का कंट्रासेप्शन यूज़ करना है, किसे यूज़ करना है, कब तक यूज़ करना है आदि बातें कपल्स पहले ही डिसाइड कर लें, वरना एक्सिडेंटल प्रेग्नेंसी बहुत से प्लान्स चेंज करवा सकती है.

–     कंट्रासेप्शन यदि फेल हुआ, तो एक्सिडेंटल प्रेग्नेंसी के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना होगा. आपका करियर व फाइनांस बहुत हद तक इससे प्रभावित होगा, तो उस पर भी चर्चा ज़रूरी है.

–     आप चाहें तो काउंसलर के पास जाकर भी सलाह ले सकते हैं.

–     लेकिन ज़रूरी है कि शादी से पहले ही इन सब बातों को लेकर आप क्लीयर हो जाएं, ताकि बाद में एक-दूसरे पर टीका-टिप्पणी या आरोप न लगें.

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Family Planning Tips
बेझिझक बात करना है ज़रूरी

–     अक्सर कपल शादी से पहले इन बातों को जान-बूझकर भी अवॉइड करते हैं, क्योंकि उन्हें झिझक होती है.

–     उन्हें यह भी लगता है कि कहीं इतनी-सी बात को लेकर बनता रिश्ता टूट न जाए.

–     लड़कियों में भी हिचक होती है, क्योंकि उन्हें लगता है कि पार्टनर यह न समझे कि वो मर्यादा के बाहर जाकर बात कर रही है.

–     लेकिन बेहतर यही होगा कि आप हिचकिचाहट छोड़कर अपनी सारी शंकाएं दूर कर लें, ताकि बाद में यह महसूस न हो कि काश! पहले ही बात कर ली होती.

–     इससे आपको अपने होनेवाले पार्टनर की परिपक्वता, सोच-समझ व मानसिकता का भी अंदाज़ा हो जाएगा.

–     वो कितना सुलझा हुआ है, उसका थॉट प्रोसेस कितना क्लीयर है, यह आपको पता चल जाएगा.

बदलाव के लिए रहें तैयार

–     आप दोनों को इस बात पर भी चर्चा करनी होगी कि आप दोनों की ही ज़िंदगी बच्चा होने के बाद बहुत ज़्यादा बदल जाएगी.

–     एक तरफ़ ख़ुशख़बरी होगी, पर दूसरी तरफ़ ज़िम्मेदारियां भी.

–     उसी के अनुसार ख़र्च बढ़ेंगे, तो किस तरह से पहले से ही कितना अमाउंट इंवेस्ट करना है, ताकि बच्चा होने पर आपकी फाइनेंशियल हालत स्थिर रहे, उसकी प्लानिंग भी ज़रूरी है.

–     बच्चे के लिए कौन-कौन से प्लान्स लेने हैं, इसकी जानकारी ज़रूरी है.

–     स़िर्फ आर्थिक तौर पर ही नहीं, मानसिक व शारीरिक तौर पर भी बदलाव होंगे.

–     हल्का डिप्रेशन, शरीर में बदलाव, लाइफस्टाइल में बदलाव- इन सब पर भी चर्चा ज़रूरी है.

–     आपकी सेक्स लाइफ भी बदलेगी, जिसे लेकर हो सकता है आपसी तनाव हो जाए, तो यहां यदि आप पहले ही चर्चा करके एक-दूसरे के मन को जान लेंगे, परिपक्वता को परख लेंगे, तो भविष्य की चुनौतियों का सामना बेहतर तरी़के से कर पाएंगे.

–     बच्चा होने पर देर रात तक जागना, उसकी पूरी देखभाल करना शरीर व मन को थका सकता है और यह तनाव भी दे सकता है, जिससे आपस में विवाद भी हो सकते हैं.

–     करियर में बदलाव भी होगा. हो सकता है किसी एक को नौकरी छोड़नी भी पड़े या पार्ट टाइम काम करना पड़े, तो वो किस तरह से मैनेज होगा.

–     बच्चा होने के कितने समय बाद फिर से करियर को महत्व देना है, किस तरह से बच्चे की परवरिश करनी है, ये तमाम बातें छोटी लगती हैं, लेकिन आपके रिश्ते के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं.

समय ने मानसिकता भी बदल दी है…

यह सच है कि स्त्री को ही प्रकृति ने गर्भधारण का दायित्व दिया है. ऐसे में कंसीव करने के बाद यह सोचना कि यह कोई बड़ी मुसीबत है या यह बच्चा आपकी ही ज़िम्मेदारी नहीं है आदि ग़लत है. यह सच है कि बच्चा दोनों की ज़िम्मेदारी है, लेकिन स्त्री की शारीरिक संरचना व प्रकृति द्वारा प्रदत्त दायित्व के चलते उसकी ज़िम्मेदारी थोड़ी अलग व अधिक हो ही जाती है. निशांक व रिया ने फैमिली प्लानिंग नहीं की थी और न ही उस पर चर्चा की थी. नतीजा- शादी के एक साल के अंदर ही उनको बच्चा हो गया, लेकिन यह बच्चा रिया को बोझ लगने लगा, क्योंकि वो बात-बात पर निशांक से शिकायत करती कि बच्चा दोनों का है, तो तुम तो मज़े से ऑफिस चले जाते हो और मुझे इतना कुछ सहना पड़ता है. जबकि रिया वर्किंग नहीं थी, बावजूद इसके उसे यह अपेक्षा रहती थी कि यदि वो रात में जागकर बच्चे की नैप्पी बदल रही है, तो निशांक को भी यह करना होगा. प्रेग्नेंसी के बाद रिया में शारीरिक बदलाव भी आ गए थे, जिसको लेकर वो डिप्रेशन में रहने लगी थी. निशांक के अलावा रिया के जाननेवाले व सहेलियां भी उसे समझाती थीं कि यह नेचुरल है और समय के साथ सब नॉर्मल हो जाएगा, इसलिए रिया को बदले हालातों को स्वीकारना होगा, वो भी ख़ुशी-ख़ुशी. लेकिन रिया कुछ समझने को तैयार ही नहीं थी. उसे लगता था उसकी आज़ादी छिन गई, उसकी आउटिंग व पार्टीज़ बंद हो गईं, वो मोटी हो गई… जिसका असर दोनों के रिश्ते के साथ-साथ घर में आए नए मेहमान पर भी पड़ रहा था. एक्सिडेंटल प्रेग्नेंसी पर यदि रिया व निशांक ने पहले चर्चा की होती या फिर पहले से ही उन्होंने फैमिली प्लानिंग की चर्चा की होती, तो परिस्थितियां बेहतर होतीं.

इसके अलावा बेहतर होगा कि आज की जेनरेशन भी यह सच्चाई स्वीकारे कि प्रकृति ने स्त्री-पुरुष को अलग-अलग बनाया है और उसे कोई भी बदल नहीं सकता. बेहतर होगा कि अपने बच्चे का ख़ुशी-ख़ुशी स्वागत करें, ताकि वो सकारात्मक माहौल में पल-बढ़ सके.

ज़रूरत महसूस हो, तो काउंसलर की मदद भी ले सकते हैं या घर के बड़े-बज़ुर्गों का मार्गदर्शन लें.

– ब्रह्मानंद शर्मा

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न्यूली मैरिड के लिए बेस्ट सेक्स फॉर्मूले (Best Sex Formulas For Newly Married)

अपनी रोमांटिक लव लाइफ और सेक्स लाइफ को लेकर हर न्यूली मैरिड कपल बेहद एक्साइटेड रहता है. दोनों यही सोचते हैं कि सेक्स लाइफ को और बेहतर कैसे बनाएं, क्या करें कि पार्टनर आपके प्यार और रोमांस से हर व़क्त सराबोर रहे. यहां हम आपको कुछ ऐसे ही लेटेस्ट सेक्स फॉर्मूले बता रहे हैं, जिससे आपकी सेक्स लाइफ में रोमांच हमेशा बना रहेगा.

Sex Formulas For Newly Married

सुहागरात को हौवा न बनाएं

–     सबसे पहले तो अपने दिमाग़ से यह निकाल दीजिए कि सुहागरात में आपको सेक्स करना ही है, क्योंकि ज़्यादातर कपल्स शादी की रस्मों में इतने थक जाते हैं कि वो सेक्स को एंजॉय ही नहीं कर पाते.

–     बेहतर होगा कि आप सुहागरात को स़िर्फ रिलैक्स करें और अगली सुबह जब सोकर उठें, तब एक नए जोश और जुनून के साथ रिश्ता बनाएं. यक़ीनन इस सेक्सुअल एक्टिविटी को आप ज़्यादा एंजॉय करेंगे.

–     अगर आप सुहागरात को यादगार बनाना चाहते हैं, तो कमरे में मुहब्बत का ऐसा समां बांधें कि आपका पार्टनर ख़ुद आपकी तरफ़ खिंचता चला आए.

–     रोमांटिक म्यूज़िक, फूलों से सजी सेज के साथ, एसेंशियल ऑयल्स की ख़ुशबू पूरे कमरे में आपके प्यार को महकाएगी.

फोरप्ले से शुरू करें लव गेम

–     फोरप्ले यानी सेक्सुअल रिलेशन के पहले का वॉर्मअप है. एक-दूसरे को बांहों में भरकर प्यार करना, किस करना, एक-दूसरे को हग करना, नॉटी बातें करना ही फोरप्ले है.

–     फोरप्ले को स़िर्फ बेडरूम में ही सीमित न रखें. दिनभर में पार्टनर को नॉटी मैसेजेस भेजकर भी उनका मूड रोमांटिक बनाए रख सकते हैं.

–     किस करते व़क्त कभी-कभार आंखें खोलकर अपने पार्टनर को देखें. किस करते हुए पूरी तरह खोया हुआ पार्टनर बहुत प्यारा लगता है. उस पर और प्यार लुटाने का मन करता है.

–     पार्टनर से पूछें कि उसे क्या पसंद है. सेक्स के दौरान आपकी कौन-सी हरकत उसे सबसे ज़्यादा अच्छी लगती है.

–     शुरुआत में ही लंबे सेशन की उम्मीद न करें. आप दोनों नए हैं, इसलिए शुरू-शुरू में रिलेशन बनाने में आपको थोड़ा व़क्त लगेगा. इसे किसी तरह की कमी या कमज़ोरी न समझें, ऐसा सभी कपल्स के साथ होता है.

–     फोरप्ले के व़क्त एक्ट में खोने के साथ-साथ यह भी देखें कि आपके पार्टनर का रिएक्शन क्या है. क्या वो पूरी तरह इन्वॉल्व हो गया है या वो स़िर्फ आपकी ख़ुशी के लिए ज़बर्दस्ती एक्ट में बना हुआ है.

न्यूली मैरिड के लिए सेक्स फॉर्मूले

–     शादी के शुरुआती दिनों में कपल एक-दूसरे के साथ के लिए हर पल एक्साइटेड रहते हैं. हर पल एक-दूसरे में खोए रहने का जुनून, एक-दूसरे को निहारते रहना, एक-दूसरे की गोद में सिर रखकर पूरी दुनिया को भुला देने का उत्साह इसी समय चरम पर होता है.

–     हर दिन की शुरुआत ‘गुड मॉर्निंग किस’ से करें. शाम को काम पर से लौटने पर एक-दूसरे को गले ज़रूर लगाएं. जब भी मौक़ा मिले ‘आई लव यू’ ज़रूर कहें.

–     बहुत-से कपल्स अपने पार्टनर से अपनी इच्छाओं और चाहतों को बयां नहीं कर पाते, जिससे उन्हें एक कमी का एहसास होता है. आप अपने पार्टनर से उनके दिल की बातें जानें और अपनी ख़्वाहिशों की बातें करें.

–     सेक्सुअल लाइफ जितनी रोमांटिक होगी, आपकी मैरिड लाइफ उतनी ही ख़ुशहाल होगी, इसलिए एक-दूसरे की केयर करें. एक-दूसरे का ख़्याल रखने से प्यार और गहरा होता है.

–     शादी के शुरुआती कुछ महीने बहुत रोमांटिक होते हैं. हर रात कुछ अलग और नया करने का दोनों में बेहद उत्साह रहता है, लेकिन ज़रूरी नहीं कि हर रात आपका परफॉर्मेंस बेस्ट हो. कभी-कभार कम-ज़्यादा हो सकता है.

–     किसी दिन पार्टनर का मूड अच्छा न हो, तो उसे मनाने की पूरी कोशिश करें, लेकिन उसके लिए नाराज़ न हों.

–     शुरू-शुरू में ऑर्गैज़्म पर बहुत ज़्यादा फोकस न करें. बस, एक-दूसरे को प्यार करें और एक-दूसरे को ख़ुश रखने की कोशिश करें, बाकी सब अपने आप हो जाएगा.

–     दोनों के लिए ही ज़रूरी है कि अपनी सेक्सुअल हाइजीन का ख़्याल रखें. अपने प्राइवेट पार्ट्स को हमेशा क्लीन और हाइजीनिक बनाए रखें.

–     बेडरूम और बेड के अलावा भी अलग-अलग जगहों पर एडवेंचरस सेक्स ट्राई करें. आप चाहें, तो सोफे पर, शावर में और किचन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर सकते हैं.

–     रात को ग़ुस्सा होकर कभी न सोने जाएं. मन में जो भी शिकायतें हों कह दें और उनकी भी सुनें. अक्सर सुननेभर से बहुत-से मामले सुलझ जाते हैं. छोटी-छोटी अनबन को अपने रिश्ते पर हावी न होने दें.

–     आप दोनों को ही अपने पार्टनर के कामोत्तेजक अंगों के बारे में पता होना चाहिए, ताकि दोनों को ही बेस्ट सेक्सुअल एक्सपीरियंस मिले.

–     सेक्स लाइफ को रूटीन न बनाएं. रोज़ाना एक ही सेक्स पोज़ीशन ट्राई करने की बजाय कुछ नया करें.

–     शादी के पहले ही रिलेशनशिप के बारे में कुछ अच्छी किताबें पढ़ें.

–     सुहागरात के लिए फिल्मी ख़्वाब न पालें. फिल्मों और हक़ीक़त में बहुत फ़र्क़ होता है. अगर फिल्मोंवाली चीज़ें रियल लाइफ में एक्सपेक्ट करेंगे, तो आपको निराशा ही हाथ लगेगी.

–     अधिकांश पुरुषों को यह भ्रम होता है कि उन्हें पता है कि उनकी पार्टनर क्या चाहती है, जबकि उन्हें पता नहीं होता. इस भ्रम से बाहर निकलें और पार्टनर से बात करें.

–     महिलाओं के लिए सेक्स शारीरिक रूप से जुड़ने की बजाय भावनात्मक रूप से जुड़ना है, इसलिए पार्टनर से पहले इमोशनली जुड़ें.

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Sex Formulas
आफ्टरप्ले भी है बहुत ज़रूरी

–     सेक्स के बाद कहीं आप भी तो मुंह घुमाकर सो नहीं जाते, क्योंकि सेक्सुअल एक्टिविटी के बाद भी एक्ट तब तक पूरा नहीं होता, जब तक आफ्टरप्ले न हो.

–     एक्ट के बाद पार्टनर को गले लगाएं, प्यार से किस करें और उसकी ज़ुल्फ़ों को सहलाएं.

–     एक्ट के बाद महिलाओं को सहज होने में पुरुषों से ज़्यादा समय लगता है, इसलिए जब आप उसे प्यार से सहलाते हैं, तो उसे आपका प्यार महसूस होता हैै.

–     एक-दूसरे को बताएं कि आपको आज का सेशन कितना अच्छा लगा. इससे पार्टनर का कॉन्फिडेंस और बढ़ता है.

–     रिसर्च में यह बात सामने आई है कि महिलाएं इंटरकोर्स से ज़्यादा फोरप्ले और आफ्टरप्ले एंजॉय करती हैं, इसलिए इन्हें कभी अनदेखा न करें.

–     कभी-कभार आपका आफ्टरप्ले फोरप्ले बन जाता है और आप दूसरे राउंड के लिए भी तैयार हो जाते हैं, इसलिए आफ्टरप्ले में हमेशा कुछ सेंसुअल और अलग करने की कोशिश करें.

हनीमून गाइड

–     महीनों की शादी की प्लानिंग और रस्मों-रिवाज़ में कपल्स काफ़ी थक जाते हैं, इसलिए इस समय को टूरिज़्म की बजाय स़िर्फ ‘चिल आउट’ के लिए रखें.

–     हनीमून के लिए मोस्ट पॉप्युलर डेस्टिनेशन की बजाय किसी ऐसी जगह जाएं, जहां बहुत ज़्यादा भीड़-भाड़ न हो.

–     हनीमून पैकेज लेते व़क्त ध्यान रखें कि आपके टूर का शेड्यूल बहुत टाइट न हो. सुबह जल्दी निकलकर दिनभर घूमना, फिर देर रात लौटकर आना काफ़ी थकानेवाला होता है. ऐसे पैकेज लेने से बेहतर होगा, आप ख़ुद गाड़ी किराए पर लेकर एक्सप्लोर करें.

–     सुबह देर तक आराम से सोकर उठें, ब्रेकफास्ट रूम में ही ऑर्डर करें. ज़्यादा-से-ज़्यादा समय एक-दूसरे के साथ रिलैक्स करने में बिताएं.

–     हनीमून का सामान पैक करते व़क्त लुब्रिकेशन कभी न भूलें. शुरुआती दिनों में यह आपके बहुत काम आता है.

–     सेक्सी लॉन्जरी और परफ्यूम से अपने हनीमून को और रोमांटिक बनाएं.

–     हनीमून की तैयारी भी शादी की तैयारी के साथ ही कर लें. कपड़ों से लेकर लॉन्जरी तक में क्या ख़रीदना है, पहले से ही ले लें.

एक्सपर्ट एडवाइस

–    सेक्स को बेहतर बनाना चाहते हैं, तो एक्ट से पहले शावर ज़रूर लें.

–    रिलेशनशिप से पहले बहुत हैवी न खाएं.

–    परफ्यूम या डियो का इस्तेमाल ज़रूर करें.

–    इलायची या कोई माउथ फ्रेशनर खाएं.

–    अपनी फिटनेस का ध्यान रखें.

 

– सुनीता सिंह

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रिश्तों में बदल रहे हैं कमिटमेंट के मायने… (Changing Essence Of Commitments In Relationships Today)

कभी वो ख़्वाब हो जाता है, कभी हक़ीक़त… कभी चाहत बन जाता है, कभी इबादत… मुहब्बत नाम है उसका, इश्क़ अंजाम है उसका… पर व़क्त के साथ-साथ वो कुछ-कुछ बदल जाता है… ताउम्र का साथ है यूं तो, पर अब वो क़समें नहीं हैं, चल रहे हैं हाथों में डाले हाथ, पर अब वो रस्में नहीं हैं…

Relationships Tips

व़क्त के साथ-साथ बहुत कुछ बदलता है, जीवन के प्रति नज़रिया, हमारा दृष्टिकोण, चीज़ों और लोगों को परखना हो या फिर रिश्तों को… हर बात के मायने समय के साथ बदल जाते हैं और आज की तारीख़ में, जहां समाज में इतना सब कुछ बदल रहा है, तो इसका सबसे ज़्यादा असर हमारे रिश्तों पर ही पड़ा है.

हम अक्सर कहते हैं कि रिश्तों में वो पहले जैसी बात नहीं. लेकिन सच तो यह है कि बदले हम हैं, रिश्ते नहीं. दरअसल, रिश्ते तो वही हैं, लेकिन हमारा नज़रिया उनके प्रति अब पहले जैसा नहीं रहा. यही वजह है कि रिश्तों में जो सबसे अहम् कड़ी होती थी- कमिटमेंट, उसके भी मायने बदल गए हैं. कैसे? आइए जानें.

जन्म-जन्मांतर का साथ, पुरानी हो गई अब ये बात: पहले सात फेरों को हम इस जन्म का ही नहीं, सात जन्मों का बंधन मान लेते थे. लेकिन अब यह सोच पुरानी हो चुकी है. रिश्तों को भी हम कैज़ुअली लेने लगे हैं. निभ गया तो ठीक, वरना रास्ते अलग. शादी जैसे रिश्ते की गंभीरता को भी हमने खो दिया है.

प्रैक्टिकल अप्रोच

रिश्तों को लेकर हम सभी काफ़ी इमोशनल होते हैं, लेकिन अब लोग इनके प्रति भी प्रैक्टिकल अप्रोच रखने लगे हैं. बात-बात पर न तो अब भावुक होते हैं और न ही हर चीज़ में इमोशनल फैक्टर ढूंढ़ते हैं. पार्टनर का खाने पर इंतज़ार करना, उसके साथ ही मूवी देखने जाना या उसकी पसंद को ध्यान में रखते हुए कपड़े पहनना… ये तमाम बातें आज की तारीख़ में आपको इमोशनल फूल ही साबित करती हैं.

स्पेस देना

अब लोग स्पेस के नाम पर थोड़ी-बहुत चीटिंग भी कर लेते हैं. इसमें उनको कोई बुराई नज़र नहीं आती. न तो एक-दूसरे को हर बात बतानी होती है, न ही एक-दूसरे के पासवर्ड्स पता होने ज़रूरी हैं. एक पार्टनर को लगता है कि अगर मैंने अपने पार्टनर की पर्सनल लाइफ में ज़्यादा दख़लअंदाज़ी की, तो वो भी करेगा. इसलिए सेफ यही है कि न तो एक-दूसरे के मैसेज चेक करें और न ही एक-दूसरे का सोशल मीडिया अकाउंट.

कम्यूनिकेशन का तरीक़ा बदल गया है

अब साथ बैठकर डिनर के टेबल पर रोज़ की दिनचर्या डिसकस नहीं होती, पति एक कमरे में लैपटॉप पर रहता है, पत्नी टीवी के सामने अपने मोबाइल पर व्यस्त रहती है. हैरानी की बात नहीं है कि एक ही घर में एक-दूसरे को सोशल मीडिया पर ही मैसेज भेजकर बातें कर लेते हैं. फेस-टु-फेस कम्यूनिकेशन लगभग ख़त्म होता जा रहा है. फोन और मैसेजेस ही सबसे बड़ा ज़रिया हैं.

शादी अब ज़रूरी नहीं

पहले अगर दो लोग प्यार करते थे, तो ज़ाहिर है उनकी मंज़िल शादी ही होती थी, लेकिन अब शादी के बारे में शायद बहुत बाद में सोचा जाता है, प्यार भी जब तक है, तब तक ठीक है, मनमुटाव हुआ, तो आसानी से लोग रास्ता बदल देते हैं. दूसरी ओर, लड़कियां भी अब शादी का कमिटमेंट रिश्तों में नहीं ढूंढ़तीं. दरअसल, सभी लोग एक्सपेरिमेंट करते हैं, अगर कामयाबी मिली, तो शादी भी हो ही जाएगी और यदि नहीं, तो ग़लत रिश्ते में बंधने से बच जाएंगे, इसी सोच के साथ आगे बढ़ते हैं.

फ्लर्टिंग से अब परहेज़ नहीं

अगर पार्टनर को पता है कि उसका पार्टनर अपनी कलीग या ऑनलाइन दोस्तों से फ्लर्ट करता है, तब भी वो इसे ग़लत नहीं मानती. इसे रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा समझकर लाइट मोड पर नज़रअंदाज़ कर देती है, क्योंकि इतनी-सी बात के लिए रिश्ते में अनबन को जगह क्यों देना. लोगों की सोच बदल रही है, उन्हें लगता है कि फ्लर्टिंग में कोई बुराई नहीं, यह स्ट्रेस को कम करने का मात्र एक तरीक़ा है, जो आपको रिफ्रेश कर देती है.

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Relationships Goals
परफेक्शन अब ज़रूरी नहीं

शुरू से ही हमारे समाज में पार्टनर को लेकर यही सोच बनी हुई है कि वो हर लिहाज़ से परफेक्ट होना चाहिए, उसमें कोई बुराई या ऐब नहीं होना चाहिए, लेकिन अब ऐसा नहीं है. लोग न तो एक-दूसरे को बदलने की सोचते हैं और न ही उस तरह से जज करते हैं. अगर पार्टनर में कोई कमी भी है, तो उसे अपना लेते हैं, क्योंकि दुनिया में कोई भी परफेक्ट नहीं होता.

हमेशा साथ-साथ नहीं हैं

हर निर्णय पार्टनर से पूछकर ही करना, हर चीज़ और हर बात शेयर ही करना, मूवी, डिनर, पार्टीज़ साथ करना… नहीं, अब ऐसा नहीं है. पहले ये तमाम बातें कमिटमेंट का हिस्सा थीं, पर अब नहीं. अब दोनों वर्किंग होते हैं और वर्किंग न भी हो, तो अपनी सुविधा व समयानुसार ही चीज़ें प्लान करते हैं, जिसमें ज़रूरी नहीं कि वो दोनों हमेशा साथ ही रहें. कभी अपने फ्रेंड्स के साथ, तो कभी कलीग्स के साथ पार्टनर्स अपना वीकेंड, हॉलीडेज़ या बाकी फन एक्टिविटीज़ प्लान कर लेते हैं. इसमें दोनों ही कंफर्टेबल फील करते हैं और बुरा नहीं मानते. उन्हें यह ज़्यादा आसान लगता है, क्योंकि हमेशा एक-दूसरे के सिर पर सवार रहने से बेहतर उन्हें लगता है कि एक-दूसरे को पर्सनल स्पेस दिया जाए.

इस बदलाव के क्या मायने हैं?

क्या ये बदलाव सही है या ग़लत? ये तो बहस का मुद्दा है, क्योंकि एक तरफ़ जहां प्रैक्टिकल होने के चक्कर में भावनाएं ख़त्म हो रही हैं, वहीं रिश्ते टूटने का दर्द भी कम होने लगा है अब लोगों को. फ्लर्टिंग, एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स, डिजिटल रिश्ते, बढ़ते तलाक़ आदि इस बदलाव के ही साइड इफेक्ट्स हैं. लेकिन इस बदलाव को रोका नहीं जा सकता, पर हां, निजी तौर पर हर कोई यह प्रयास कर सकता है कि हम अपने रिश्तों में ईमानदार रहें, क्योंकि रिश्तों का दूसरा नाम ही बंधन और अनुशासन होता है. यदि आपको यह अनुशासन और बंधन पसंद नहीं, तो बेहतर होगा कि रिश्तों में बंधें ही नहीं. आज़ाद रहें, अकेले रहें… क्योंकि इस तरह के रिश्ते ही साथी होते हुए भी अकेलेपन को और बढ़ाते हैं. यही वजह है कि आज हर कोई साथी के होते हुए भी कहीं-न-कहीं ख़ुद को अकेला पाता है.

ज़िंदगी के किसी मोड़ पर तो आकर ठहरना होता ही है, लेकिन यह ठहराव अब रिश्तों में नहीं नज़र आता, ऐसे में आप उस मोड़ पर नितांत अकेले रह जाते हैं, जहां सबसे ज़्यादा आपको प्यार, अपनेपन और साथ की ज़रूरत
होती है.

बेहतर होगा कि रिश्तों में समय, कम्यूनिकेशन, कमिटमेंट और प्यार इंवेस्ट करें, ताकि आपका रिलेशनशिप बैंक बैलेंस कभी खाली न हो.

– विजयलक्ष्मी

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क्यों बढ़ रहा है सेक्स स्ट्रेस? (Why Sex Stress Is Increasing In Our Society?)

आज कहां नहीं है स्ट्रेस? घर-परिवार, करियर, नौकरी… हर जगह तनाव का मकड़जाल फैला हुआ है. और धीरे-धीरे इसने अंतरंग लम्हों में भी घुसपैठ कर दी है. क्या एक हेल्दी रिलेशन के लिए सेक्स स्ट्रेस को दूर करने की ज़रूरत नहीं है?

Sex Stress

मनोचिकित्सक डॉ. अजीत दांडेकर के अनुसार, “स्ट्रेस लेवल बढ़ने के कारण शरीर के कई ऐसे हार्मोंस प्रभावित होते हैं, जिनकी वजह से सेक्स स्ट्रेस बढ़ जाता है. यदि पति-पत्नी अपनी रोज़ाना की ज़िंदगी का विश्‍लेषण करने के लिए कुछ समय निकाल सकें तो सेक्स स्ट्रेस का कारण ख़ुद ही समझ में आ जाएगा. सेक्स स्ट्रेस का कोई एक कारण नहीं है. मॉडर्न लाइफ़स्टाइल व अनेक चाही-अनचाही परिस्थितियां इसके लिए ज़िम्मेदार हैं.” आइए, उन विभिन्न स्थितियों को समझें.

समय की कमी व अपनों की फ़िक्र

सेक्स क्रिया के लिए समय व तनावरहित वातावरण चाहिए, जो आजकल लोगों को नहीं मिलता है. यदि समय मिल भी गया तो मन तरह-तरह की चिंताओं से घिरा रहता है. बच्चों का प्रेशर, माता-पिता का प्रेशर, ऑफ़िस की चिंताएं अनेक ऐसी बातें हैं, जो व्यक्ति को तनावमुक्त होने ही नहीं देतीं. फिर अपनी-अपनी अलग सोच और थकान के कारण तालमेल की कमी भी सेक्स के प्रति उदासीनता की स्थिति पैदा करती है.

काम का प्रेशर

ऑफ़िस या बिजनेस में ख़ुद को बेहतरीन साबित करने का जुनून, प्रमोशन की चाह, बॉस की नज़रों में योग्य बने रहने के प्रयास में कभी-कभी व्यक्ति अपनी सारी एनर्जी ख़र्च कर डालता है. वैसे भी बड़े-बड़े पैकेज यानी लाखों में मिलने वाली सालाना तनख़्वाह व्यक्ति को निचोड़कर रख देती है. अधिक आमदनी के लिए 8 की जगह 12-15 घंटे काम करना पड़ता है. ऑफ़िस के बाद कभी-कभी घर पर भी काम पूरा करना पड़ता है. इस तरह के हाईप्रेशर जॉब के साथ प्रायः संतुलन बनाए रखना कठिन हो जाता है. ऑफ़िस व घर दोनों ही ज़िम्मेदारियों को निभाने के चक्कर में व्यक्ति इतना थक जाता है कि बिस्तर पर लेटते ही सो जाता है. इसका सीधा असर उसकी सेक्स लाइफ़ पर
पड़ता है.

करियर की चाह

करियर में आगे बढ़ने की चाह एक ओर सफलता की मंज़िल तक पहुंचने का उत्साह बढ़ाती है, तो दूसरी ओर रिश्तों की गर्माहट में बाधक भी बनती है. करियर के कारण कभी-कभी पति-पत्नी को एक-दूसरे से अलग रहना पड़ता है. वे वीकएंड पर ही साथ रह पाते हैं. ऐसे कपल्स अनेक कुंठाओं के शिकार होते हैं, भले ही यह स्थिति उन्होंने स्वेच्छा से चुनी हो. ऐसे में साथ होते हुए भी तरह-तरह की शंका-आशंका (जैसे- विवाहेतर संबंध) या अपराधबोध उन्हें जकड़ने लगता है, अनेक ऐसी बातें सेक्स लाइफ़ को प्रभावित करती हैं.

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Sex Stress
असुरक्षा की भावना

आज की शादीशुदा ज़िंदगी में वर्किंग पति-पत्नी के रिश्तों में आजीवन साथ रह पाने की निश्‍चिंतता नहीं है. डर बना ही रहता है कि कब अलग हो जाना पड़े, क्योंकि दोनों के अहं होते हैं, जो कभी भी टकरा सकते हैं. दोनों में कोई भी समझौते के लिए तैयार नहीं होना चाहता है. लिहाज़ा महिलाओं के मन में अधिक बचत की चिंता रहती है. वे ज़्यादा से ज़्यादा कमाने की कोशिश में रहती हैं. वे सुरक्षित होना चाहती हैं. पुरुषों को स्त्रियों की सोच में स्वार्थ नज़र आता है. इस तरह की स्थिति तनाव व टकराहट को जन्म देती है.

प्लानिंग की कमी

आज का व्यक्ति अपनी चादर देख कर पैर नहीं पसारता, बल्कि पैर पसारने के बाद चादर की खींचातानी शुरू करता है. आधुनिक सुख-साधन जुटाना, रिसॉर्ट या विदेश में छुट्टियां बिताना हर दंपति की इच्छा होती है. संभव हो, न हो, उसकी कोशिश व चाह तो होती ही है. आज विकल्प के रूप में लोन व क्रेडिट कार्ड की उपलब्धता व बाद में उनकी किश्तें चुकाने का प्रेशर शरीर व मन दोनों को थका डालता है, बिना प्लानिंग के जो फ़ायनेंशियल स्ट्रेस झेलना पड़ता है, वो अंततः व्यक्ति की ज़िंदगी को पूरी तरह से प्रभावित करता है. सेक्स लाइफ़ के प्रति उदासीन कर देता है.

पोर्नोग्राफ़ी का असर

पोर्नोग्राफ़ी (यानी कामवासना संबंधी साहित्य, फ़ोटो, फ़िल्म आदि) के प्रभाव के कारण व्यक्ति सेक्स लाइफ़ फैंटेसी की दुनिया से जुड़ जाता है. उस तरह की इच्छा करने लगता है, जबकि वास्तविकता उससे कहीं दूर होती है. ऐसी फैंटेसी के कारण पार्टनर का सेक्स स्ट्रेस बढ़ने लगता है. वे साथ होकर भी काम-सुख या आनंद से वंचित रह जाते हैं. एक-दूसरे की उम्मीदों पर खरा न उतरने व पूर्ण संतुष्ट न कर पाने का तनाव व अनजाना भय रिश्तों में उदासीनता ले आता है.

मीडिया का रोल

आधी-अधूरी जानकारी व ग़लतफ़हमियां भी स्ट्रेस को बढ़ाती हैं. आज हर मैग़जीन में सेक्स कॉलम को ज़रूरी माना जाता है. कॉलम में सेक्सोलॉजिस्ट द्वारा पाठकों के प्रश्‍नों के उत्तर दिए जाते हैं. लेकिन पढ़ने वाला ये भूल जाता है कि संबंधित लेख या कॉलम में दी गई जानकारी एक सामान्य जानकारी होती है जबकि हर व्यक्ति दूसरे से भिन्न होता है. इसके अलावा इंटरनेट सेक्स, होमोसेक्सुअलिटी आदि भी आम व्यक्ति के मन को भ्रमित करने में ख़ास रोल निभा रहे हैं और सेक्स स्ट्रेस को बढ़ा रहे हैं. इसलिए आज यह बेहद ज़रूरी हो गया है कि कपल्स एक-दूसरे के लिए थोड़ा व़क़्त निकालें. साथ ही उपरोक्त सभी मुद्दों पर एकबारगी विचार-विमर्श भी करें, ताकि सेक्स
स्ट्रेस पनपने ही न पाए और ज़िंदगी ख़ुशनुमा बन जाए.

– प्रसून भार्गव

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शादीशुदा ज़िंदगी में कैसा हो पैरेंट्स का रोल? (What Role Do Parents Play In Their Childrens Married Life?)

कहते हैं, घर की ख़ुशहाली व आपसी रिश्तों की मज़बूती में पैरेंट्स का आशीर्वाद, सहयोग व प्यार काफ़ी मायने रखता है. लेकिन जब बच्चों की शादीशुदा ज़िंदगी में पैरेंट्स का सहयोगपूर्ण रवैया दख़लअंदाज़ी-सा लगने लगे, तो उनकी भूमिका सोचनीय हो जाती है. ऐसे में क्या करें पैरेंट्स? आइए, जानते हैं.

Childrens Married

आज के बदले माहौल में पति-पत्नी की विचारधारा काफ़ी बदल गई है. शादी के बाद पति-पत्नी अलग घर बसाना चाहते हैं. स्वतंत्रता व आत्मनिर्भरता दोनों ही उनके लिए अहम् हैं. सब कुछ वो ख़ुद ही करना चाहते हैं. लेकिन ऐसे एकल परिवारों में भी समय-असमय पैरेंट्स या बुज़ुर्गों की ज़रूरत आन ही पड़ती है और पैरेंट्स को भी उनकी मदद  करनी पड़ती है, फिर चाहे वो ख़ुशी से हो या कर्त्तव्यबोध के कारण. ऐसी स्थिति आज के पैरेंट्स को दुविधा में डाल रही है. वे समझ नहीं पाते हैं कि आत्मनिर्भर बच्चों की ज़िंदगी में उनका क्या स्थान है? उनकी क्या भूमिका
होनी चाहिए?

अधिकतर पैरेंट्स के लिए बच्चे हमेशा बच्चे ही रहते हैं. उनकी हर संभव मदद करना वे अपना कर्त्तव्य समझते हैं, जबकि अन्य लोगों का मानना है कि जब बच्चे बड़े हो जाते हैं और उनकी शादी हो जाती है, तब पैरेंट्स की ज़िम्मेदारियां ख़त्म हो जाती हैं. बच्चों को अपनी ज़िंदगी ख़ुद संभालनी चाहिए. पैरेंट्स से कोई उम्मीद नहीं रखनी चाहिए.

देखा गया है कि पैरेंट्स को जब विवाहित बच्चों की ज़िंदगी में परेशानियां व असुविधाएं दिखाई देती हैं, तब कभी तो वे तुरंत मदद के लिए हाथ बढ़ा देते हैं और कभी-कभी उन्हें समय व हालात के भरोसे छोड़ अपना हाथ खींच लेते हैं. ख़ासकर तब, जब ज़रूरत आर्थिक मदद की होती है.

काफ़ी समय पहले कोलकाता की एक एज्युकेशन रिसर्च संस्था अल्फा बीटा ओमनी ट्रस्ट द्वारा एक सर्वे किया गया था, जिसमें लगभग 200 पैरेंट्स से बातचीत की गई थी. 150 से भी ज़्यादा पैरेंट्स का कहना था- यदि संभव हो और सहूलियत हो, तो हर प्रकार की मदद की जानी चाहिए, क्योंकि बच्चे तो हमेशा ही हमारे लिए बच्चे रहेंगे. साथ ही उनका मानना था कि शादीशुदा ज़िंदगी का शुरुआती दौर कई बार मुश्किलों व असंतुलन से भरा होता है. कई प्रकार के पारिवारिक व भावनात्मक एडजस्टमेंट करने पड़ते हैं. कभी-कभी अनचाहे आर्थिक संकट भी ज़िंदगी को कठिन बना देते हैं. ऐसे में आर्थिक सहायता से ज़िंदगी आसान व ख़ुशहाल हो सकती है. दूसरे मत के अनुसार, शादी तभी की जानी चाहिए, जब व्यक्ति शादी के बाद आनेवाली हर परिस्थिति का मुक़ाबला करने के लिए तैयार हो, आर्थिक रूप से सुरक्षित व ठोस हो. बच्चों को पढ़ाना-लिखाना, ज़िम्मेदारियों के लिए तैयार करना पैरेंट्स की ज़िम्मेदारी है. उसके बाद पैरेंट्स की ज़िम्मेदारी ख़त्म. फिर तो बच्चों की ज़िम्मेदारी बनती है कि वो पैरेंट्स की देखभाल करें.

समाजशास्त्री डॉ. कामेश्‍वर भागवत का मानना है कि पैरेंट्स हमेशा ही पैरेंट्स रहते हैं. अपने बच्चों की ज़िंदगी में हमेशा ही उनकी भूमिका बनी रहती है. कभी मुख्य, तो कभी सहयोगी के तौर पर. इसलिए न तो पूरी तरह इनसे अलग हों और न ही रोज़मर्रा की हर बात में अपनी राय दें. यानी रास्ता बीच का होना चाहिए. वैसे भी भारतीय परिवार एक कड़ी की तरह जुड़े रहते हैं, एक तरफ़ हम अपने बच्चों की ज़िम्मेदारियां पूरी करते हैं, तो दूसरी तरफ़ पैरेंट्स के साथ जुड़े रहकर उनके प्रति दायित्व निभाते हैं. दरअसल शेयरिंग व केयरिंग की भावना ही परिवार है. पैरेंट्स का रोल कभी ख़त्म नहीं होता है, बस उनका स्वरूप बदल जाता है. आर्थिक योगदान के अलावा भी विवाहित बच्चों के जीवन में पैरेंट्स की एक सुखद भूमिका हो सकती है.

–    पति-पत्नी यदि अकेले व समर्थ हैं, तो भी उन्हें अपने पैरेंट्स के भावनात्मक सहयोग, उनके प्यार व आशीर्वाद की ज़रूरत होती है.

–    पति-पत्नी दोनों वर्किंग हैं, तो बच्चे की सुरक्षा व देखभाल की ज़िम्मेदारी लेकर आप उन्हें चिंतामुक्त कर सकते हैं. पैरेंट्स की मदद से वे लोग अपना काम बेहतर तरी़के से कर सकेंगे.

–   तकलीफ़ या बीमारी के दौरान आपका समय व अनुभव उनके लिए किसी वरदान से कम न होगा.

–   तनाव व संघर्ष के दौरान आपका भावनात्मक सहयोग व ज़िंदगी के अनुभव उन्हें संबल व हौसला प्रदान कर सकते हैं.

–   बच्चों को स्कूल से लाना व छोड़ना प्रायः ग्रैंड पैरेंट्स को भी अच्छा लगता है और ग्रैंड चिल्ड्रेन भी दादा-दादी का साथ एंजॉय करते हैं.

–   बच्चों में आध्यात्मिक व नैतिक गुणों तथा शिक्षा की शुरुआत भी ग्रैंड पैरेंट्स द्वारा बेहतर रूप से होती है.

–   आज अकेला बच्चा हर समय टीवी, कंप्यूटर, प्ले स्टेशन जैसे गैजेट्स से चिपका रहता है, ऐसे में आपका साथ व मार्गदर्शन  उसे समय का बेहतर उपयोग करना सिखा सकता है.

–    बच्चे जिज्ञासु होते हैं, उनकी जिज्ञासा ग्रैंड पैरेंट्स बहुत अच्छी तरह से शांत कर सकते हैं.

–    इन बातों के अलावा आपके विवाहित बच्चों की और भी अनेक व्यक्तिगत समस्याएं व ज़रूरतें हो सकती हैं, जिनका समाधान आपकी सहयोगी भूमिका से हो सकता है और बच्चों की विवाहित ज़िंदगी ख़ुशहाल हो सकती है.

–    आर्थिक सहायता निश्‍चय ही जटिल व निजी मामला है. इससे हालात सुधर भी सकते हैं और पैरेंट्स बुढ़ापे में स्वयं को सुरक्षित भी कर सकते हैं.

याद रखें, बच्चे आपके ही हैं, फिर भी पराए हो चुके हैं. एक नए बंधन में बंध चुके हैं. एक नई दुनिया बसा रहे हैं. तो बस, पास रहकर भी दूर रहें और दूर रहकर भी अपने स्पर्श का एहसास उन्हें कराते रहें.

आपकी सहयोगी भूमिका आपके शादीशुदा बच्चों को कैसी लग रही है, यह जानने के लिए इन बातों पर ध्यान दें-

–    क्या बच्चे आपकी मदद से ख़ुश हैं? आपकी भूमिका को सराहते हैं? आपके प्रति आभार व्यक्त करते हैं? यदि नहीं, तो आप मदद नहीं दख़ल दे रहे हैं.

–     अब आपके बच्चे अकेले नहीं हैं, उनकी ज़िंदगी उनके जीवनसाथी के साथ जुड़ी है. क्या उनके साथी को भी आपका रोल पसंद है? यदि नहीं, तो एक दूरी बनाना बेहतर होगा.

–     मदद के दौरान क्या आपको ऐसा महसूस होता है कि आपका फ़ायदा उठाया जा रहा है या आपको इस्तेमाल किया जा रहा है? ऐसी स्थिति कुंठा को जन्म देती है.

–     मदद के दौरान होनेवाला आपका ख़र्च आपको परेशानी में तो नहीं डाल रहा है? यदि ऐसा है तो हाथ रोक लें, वरना पछतावा होगा.

–     उनकी व्यस्तता को कम करने के लिए, उनकी ज़िंदगी को ख़ुशहाल बनाने के लिए अपनी ज़िंदगी को जीना न छोड़ें. अपनी दिनचर्या, अपनी हॉबीज़ पर भी ध्यान दें.

–     बिना मांगे, आगे बढ़कर ख़ुद को ऑफ़र न करें, न ही उनकी ज़िंदगी में दख़लअंदाज़ी करें, वरना रिश्ते बिगड़ सकते हैं, आपके साथ भी और आपस में उनके भी.

–     हर व़क़्त उनकी ज़िंदगी में झांकने की कोशिश न करें. जब वो शेयर करना चाहें, तो खुले मन से आत्मीयता बरतें.

–     अपनी चिंताओं व कुंठाओं का रोना भी हर व़क़्त उनके सामने न रोएं. चाहे वो स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हों या पारिवारिक रिश्तों की कड़वाहट.

–     बदलते समय के साथ अपने व्यवहार व सोच में परिवर्तन लाएं, ताकि बच्चे आपसे खुलकर बात कर सकें.

 

– प्रसून भार्गव

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सोनम कपूर- शादी के बाद ज़िम्मेदारियां व प्राथमिकताएं बदल जाती हैं… (Sonam Kapoor- Responsibilities And Priorities Change After Marriage…)

सोनम कपूर (Sonam Kapoor) कम फिल्में करती हैं, पर जो भी करती हैं दिलचस्प होती हैं, जैसे द ज़ोया फैक्टर. इसके व उनकी पर्सनल लाइफ से जुड़ी बातों के बारे में जानते हैं.

Sonam Kapoor

* मुझे ख़ुशी है कि अनुजा चौहान के उपन्यास पर आधारित अभिषेक शर्मा द्वारा निर्देशित मेरी फिल्म द ज़ोया फैक्टर को लोगों ने पसंद किया. जब इस फिल्म के लिए सचिन तेंदुलकर ने ट्वीट किया, तब भी मुझे बेहद ख़ुशी हुई थी. इस तरह की फिल्म करने का एक अलग ही मज़ा है.

* फिल्म इंडस्ट्री में हमेशा से ही पुरुषों का बोलबाला रहा है. यहां तक कि महिला निर्देशक भी एक्टर को ध्यान में रखकर पुरुष प्रधान फिल्में ही अधिक करती हैं, जबकि उन्हें महिला प्रधान फिल्मों पर अधिक ध्यान देना चाहिए, फिर चाहे वो फराह ख़ान हों या ज़ोया अख़्तर. नायिका प्रधान फिल्में बहुत कम ही बनती हैं. बॉलीवुड में हीरोइन को अपनी पहचान बनाने के लिए अधिक संघर्ष करना पड़ता है.

* हीरोज़ भी महिला प्रधान फिल्मों में काम नहीं करना चाहते. मेरी कई फिल्में, जो नायिका प्रधान थीं, के लिए हीरोज़ ढूंढ़ने में मुश्किलें आईं.

* मेरा यह मानना है कि अपने बेस्ट फ्रेंड से शादी करना हमेशा अच्छा रहता है. मेरे और पति आनंद के बीच ग़ज़ब की ट्यूनिंग है, ऐसा हमारी दोस्ती के कारण है. हम एक-दूसरे के विचारों व मूल्यों का पूरा सम्मान करते हैं.

Sonam Kapoor

* मैं जब उठती हूं, तब आनंद बिस्तर पर नहीं होते. दरअसल, उन्हें सुबह जल्दी उठने की आदत है और वे रात में 10 बजे तक सो भी जाते हैं. जबकि मैं थोड़ा देरी से सोती हूं. वैसे हम दोनों को लेट नाइट पार्टीज़ पसंद नहीं, तो हम रात में कहीं बाहर भी नहीं जाते हैं.

* आनंद बहुत अच्छे जीवनसाथी हैं. वे शांत स्वभाव के हैं. मुझे पूरा स्पेस भी देते हैं. मेरा यह मानना है कि शादी के बाद हमें एक और नया परिवार मिलता है. तब हमारी ख़ुशियां, ज़िम्मेदारियां व प्राथमिकताएं भी बदल जाती हैं. हम दोनों के साथ भी ऐसा ही हुआ, पर हम दोनों ने आपने दोनों परिवारों के साथ अच्छा बैलेंस बनाकर रखा है. हम ख़ुश हैं और हर लम्हे को एंजॉय करते हैं.

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सोनमनामा…

* सोनम के सना, जिराफ व सोंज निक नेम्स हैं.

* हिंदी व अंग्रेज़ी के अलावा उन्हें पंजाबी, मराठी व उर्दू भाषा की अच्छी जानकारी है.

* उन्हें लिखना-पढ़ना, शॉपिंग, वीडियो गेम, बास्केट बॉल व स्न्वॉश खेलने का बहुत शौक है.

* शास्त्रीय संगीत, कत्थक व लेटिन डांस का भी उन्होंने बाक़ायदा प्रशिक्षण लिया है.

* जेब ख़र्च के लिए सोनम ने वेट्रेस के रूप में नौकरी भी की है.

* मोटापे के लिए आलोचना करने पर उन्होंने अपने बॉयफ्रेंड के साथ रिश्ता तोड़ दिया था.

* उन्होंने सिंगापुर में थिएटर व आर्ट की पढ़ाई की है.

* ब्लैक फिल्म में संजय लीला भंसाली के असिस्टेंट डायरेक्टर से करियर की शुरुआत की.

* अपनी पहली फिल्म सांवरिया के लिए सोनम ने दो साल में 35 किलो वज़न कम किया था.

* स्टाइल आयकॉन सोनम की मां सुनीता कॉस्ट्यूम डिज़ाइनर हैं, साथ ही वे मॉडल भी रह चुकी हैं.

* जल्द ही सोनम को पॉलिटिक्स करते हुए भी देखा जाएगा. दरअसल, सोनम का इरादा राजनीति में आने का है.

ऊषा गुप्ता

Sonam Kapoor

यह भी पढ़ेआयुष्मान खुराना- मां के सामने उस फैन ने स्पर्म की डिमांड की. (Ayushmann Khurrana- That Fan Demanded Sperm In Front Of My Mother)

क्यों घट रहा है पुरुषों में स्पर्म काउंट? (What Are The Reasons For Low Sperm Count In Men?)

पिछले 40 सालों में पुरुषों (Men) के स्पर्म काउंट (Sperm Count) में काफ़ी गिरावट आई है और यह गिरावट दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही है. ऐसा नहीं है कि स़िर्फ भारतीय पुरुष ही इसके शिकार हैं, बल्कि यह पूरी दुनिया के पुुरुषों को प्रभावित कर रहा है. क्या हैं इसके कारण और बचाव के उपाय, आइए जानते हैं. 

Low Sperm Count In Men

क्या कहते हैं आंकड़े?

–     वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइज़ेशन (WHO) के अनुसार, पिछले 40 सालों में पूरी दुनिया के पुरुषों के स्पर्म काउंट और क्वालिटी में भारी कमी आई है.  पहले हर सैंपल में जो स्पर्म काउंट 60 मिलियन होता था, अब वो महज़ 20 मिलियन रह गया है.

–     हमारे देश में हर साल 12-18 मिलियन कपल्स इंफर्टिलिटी के शिकार हो रहे हैं, जिसमें 50% पुरुष शामिल हैं.

–     आज यह स्थिति आ गई है कि हर छह में से एक कपल इंफर्टिलिटी का शिकार हो रहा है.

–     साथ ही यह बहुत गंभीर बात है कि हर साल पुरुषों के स्पर्म काउंट में 2% की कमी देखी जा रही है. ऐसा ही चलता रहा, तो कुछ ही सालों में इंफर्टिलिटी एक गंभीर सामाजिक समस्या बन जाएगी.

क्यों घट रहा है स्पर्म काउंट?

हमारी बदलती लाइफस्टाइल और वर्क कल्चर ने बहुत कुछ बदल दिया है. जिस तेज़ी से पुरुषों के स्पर्म काउंट में कमी आ रही है, उसके लिए बहुत हद तक ये चीज़ें ही ज़िम्मेदार हैं. इसके अलावा और क्या हैं इस कमी के कारण, आइए देखते हैं.

–     दिन-ब-दिन बढ़ता मोटापा

–     अनहेल्दी लाइफस्टाइल

–     फिज़िकल एक्टिविटी की कमी

–     बहुत ज़्यादा टाइट कपड़े पहनना

–     वर्कप्लेस पर बढ़ता प्रेशर

–     स्मोकिंग और अल्कोहल

–     बहुत ज़्यादा इमोशनल स्ट्रेस

–     हार्मोंस का असंतुलन

–     इनडोर व आउटडोर पोल्यूशन

–     लगातार लैपटॉप पर काम करने से टेस्टिकल्स का तापमान बढ़ता है, जिससे स्पर्म प्रोडक्शन पर असर पड़ता है.

–     कुछ दवाइयों के साइड इफेक्ट के कारण भी ऐसा हो सकता है.

–     पर्यावरण में बढ़ती गर्मी इसका एक और कारण है.

पहचानें इसके लक्षण

अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण नज़र आता है, तो तुरंत किसी एक्सपर्ट सेे संपर्क करें. याद रखें, स्पर्म काउंट की समस्या को जितनी जल्दी सुलझाएंगे, ज़िंदगी उतनी आसान होगी. ग़ौर करें इन लक्षणों पर.

–     इजैकुलेशन में द़िक्क़त महसूस होना.

–     बहुत कम सीमेन का निकलना.

–     इरेक्टाइल डिस्फंक्शन.

–     सेक्सुअल डिज़ायर में कमी.

–     साथ ही बार-बार सांस संबंधी समस्या होना.

–     चेहरे और शरीर पर बालों का बढ़ना.

–     इंफर्टिलिटी से जूझ रहे पुरुषों के सूंघने की शक्ति में भी कमी देखी जाती है.

क्या है सामान्य स्पर्म काउंट?

आमतौर पर एक मि.ली. सीमेन में 15 मिलियन या फिर हर सैंपल में 39 मिलियन स्पर्म काउंट सामान्य माना जाता है. दूसरे शब्दों में कहें, तो एक मि.ली. सीमेन में 10 मिलियन से कम स्पर्म काउंट असामान्य माना जाता है और ऐसे पुरुषों को इंफर्टिलिटी का इलाज कराना पड़ता है.

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Low Sperm Count In Men
कैसे बढ़ाएं स्पर्म काउंट?

–     रोज़ाना 30-45 मिनट्स की फिज़िकल एक्टीविटी स्पर्म काउंट को बढ़ाने में मदद करती है.

–    एक्सपर्ट्स के मुताबिक़, वेट लॉस और स्पर्म काउंट की बढ़ोत्तरी में डायरेक्ट लिंक देखा गया है. बेहतर होगा कि वेट लॉस पर ध्यान दें.

–     स्मोकिंग ब्लड वेसल्स को डैमेज करती है, जिससे गुप्तांगों में भी ब्लड फ्लो में द़िक्क़त आती है. साथ ही ये आपकी कामोत्तेजना को भी प्रभावित करती है, इसलिए बेहतर होगा कि जल्द-से-जल्द स्मोकिंग छोड़ दें.

–     लो स्पर्म काउंट के बारे में अपने डॉक्टर को बताएं, हो सकता है उनके द्वारा दी गई दवाइयों के कारण ऐसा हो रहा हो.

–     बढ़ते हुए स्ट्रेस के कारण शरीर रिप्रोडक्शन पर ज़्यादा ध्यान नहीं दे पाता है, इसलिए ़तनाव को कम करने की कोशिश करें.

–     ताज़े फल, सब्ज़ियां और साबूत अनाज अपने डायट में शामिल करें. कोशिश करें कि जंक फूड या पैक्ड फूड ज़्यादा न खाएं.

–     द जर्नल रिप्रोडक्टिव बायोलॉजी एंड एंडोक्रेनोलॉजी में प्रकाशित स्टडी के मुताबिक, पुरुषों के विटामिन डी और कैल्शियम के लेवल और स्पर्म काउंट का सीधा संबंध है, इसलिए अगर विटामिन डी की कमी रही, तो कपल को कंसीव करने में द़िक्क़त महसूस होती है. अपने शरीर में विटामिन डी और कैल्शियम का लेवल बनाए रखें.

–     रेग्युलर एक्सरसाइज़ और अच्छी नींद से भी स्पर्म काउंट बढ़ता है.

–     लंबे समय तक एक ही जगह पर न बैठें. इससे पुरुष गुप्तांग में गर्मी बढ़ जाती है, जो स्पर्म प्रोडक्शन में रुकावट पैदा कर सकता है.

–     कोशिश करें कि ज़्यादा-से -ज्यादा हेल्दी फैट्स लें. ओमेगा3 और ओमेगा6 इसमें काफ़ी लाभदायक सिद्ध होता है. आप चाहें, तो ओमेगा3 के सप्लीमेंट्स भी ले सकते हैं.

अपनाएं ये फर्टिलिटी फूड्स

अंडा: स्पर्म काउंट बढ़ाने के लिए यह बेस्ट फूड माना जाता है. अंडे में भरपूर मात्रा में प्रोटीन और विटामिन ई होता है, जो स्पर्म को फ्री रैडिकल्स से बचाते हैं.

केला: विटामिन ए, बी1 और सी के गुणों से भरपूर केला स्पर्म प्रोडक्शन को बढ़ावा देता है. इसमें ब्रोमेलेन नामक नेचुरल एंटी इंफ्लेमेट्री एंज़ाइम होता है, जो स्पर्म की गुणवत्ता और गतिशीलता कोे बढ़ाता है.

पालक: फॉलिक एसिड के गुणों से भरपूर पालक हेल्दी स्पर्म काउंट बढ़ाने में उपयोगी साबित होता है. अगर आपके शरीर में फॉलिक एसिड की कमी होगी, तो अनहेल्दी स्पर्म बनेंगे, जो आपके किसी काम नहीं आएंगे.

मेथी: लो स्पर्म काउंट और कामोत्तेजना को बढ़ानेवाला यह पारंपरिक घरेलू नुस्ख़ा है. एक शोध के मुताबिक़, लगातार 12 हफ़्तों तक मेथी के सेवन से स्पर्म काउंट और सीमेन में बढ़ोत्तरी देखी गई है.

अनार: यह एक बेहतरीन फर्टिलिटी बूस्टर माना जाता है. इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स ब्लड फ्री रैडिकल्स से लड़ने में मदद करते हैं. यह स्पर्म काउंट और क्वालिटी दोनों में लाभदायक है.

लहसुन: यह एक बेहतरीन इम्यूनिटी बूस्टर है. विटामिन बी6 और सेलेनियम के गुणों से भरपूर लहसुन स्पर्म प्रोडक्शन को बढ़ाता है.

ब्रोकोली: इसमें मौजूद फॉलिक एसिड फर्टिलिटी दूर करने में मदद करता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक़, अगर रोज़ खाने में इसे शामिल किया जाए, तो आपका स्पर्म काउंट 70% तक बढ़ सकता है.

डार्क चॉकलेट: रात के खाने के बाद अगर आप और आपके पार्टनर स़िर्फ एक टुकड़ा डार्क चॉकलेट खाएं, तो स्पर्म काउंट की समस्या जल्द ही ख़त्म हो जाएगी. इसमें मौजूद एल-आर्जिनाइन स्पर्म प्रोडक्शन में काफ़ी लाभदायक सिद्ध होता है.

अखरोट: ब्रेन फूड के नाम से मशहूर अखरोट स्पर्म काउंट बढ़ाने में भी मदद करता है. ओमेगा3 फैटी एसिड्स से भरपूर अखरोट स्पर्म की गतिशीलता बढ़ाने में मददगार साबित होता है.

टमाटर: बेहतरीन फर्टिलिटी फूड्स में शुमार टमाटर इंफर्टिलिटी की समस्या को दूर करने में काफ़ी फ़ायदेमंद साबित होता है. इसमें मौजूद लाइकोपीन स्पर्म की बनावट और गतिशीलता में काफ़ी मदद करता है. अपने रोज़ाना के खाने में टमाटर शामिल करें.

गाजर: बीटा कैरोटीन और एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर गाजर स्पर्म को फ्री रैडिकल्स से बचाती है, जिससे स्पर्म जल्दी नष्ट नहीं होते. यह उनकी गतिशीलता बढ़ाने में भी सहायक होती है.

अश्‍वगंधा: सालों से हमारे देश में इसे आयुर्वेदिक दवा के रूप में लिया जाता रहा है. अश्‍वगंधा न स़िर्फ टेस्टोस्टेरॉन के लेवल को बढ़ाता है, बल्कि इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या को भी दूर करता है.

कद्दू के बीज: अमीनो एसिड्स और एंटी-ऑक्सीडेंट्स के गुणों से भरपूर कद्दू के बीज पुरुषों की फर्टिलिटी बढ़ाते हैं. यह हेल्दी स्पर्म काउंट को बढ़ाने में मदद करता है, जिससे उनकी गतिशीलता भी बढ़ जाती है.

– सुनीता सिंह

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सफल अरेंज मैरिज के एक्सक्लूसिव 15 मंत्र (15 Exclusive Relationship Mantra For Successful Arrange Marriage)

दादी-नानी या माता-पिता के समय की अरेंज मैरिज की सफलता का फ़ॉर्मूला आज के दौर में फिट नहीं बैठता. मॉडर्न युग में क्या हैं सफल अरेंज मैरिज के मंत्र, आइए जानते हैं. कहते हैं शादियां स्वर्ग में तय होती हैं और हर किसी के लिए कोई न कोई जीवनसाथी ज़रूर होता है. पर आज की युवापीढ़ी इस कथन में अधिक विश्‍वास नहीं करती. वह तो लव मैरिज को अधिक महत्व देती है. लेकिन मेट्रो सिटीज़ व खुले विचारोंवाले परिवारों को छोड़ दें, तो आज भी ज़्यादातर शादियां अरेंज ही होती हैं और वैवाहिक जीवन भी सफल होता है. तो आइए, सफल अरेंज मैरिज के इन मंत्रों को जानें.

Relationship Mantra

1. शादी को सफल बनाने का मूल मंत्र है- प्यार, विश्‍वास, समझौता और सामंजस्य. धीरे-धीरे एक-दूसरे को समझें, एडजस्ट होने के लिए व़क़्त और स्पेस दें. फिर देखें, किस तरह रिश्तों में मज़बूती आती है.

2. अरेंज मैरिज में दोनों पार्टनर एक-दूसरे के लिए अजनबी होते हैं. अतः घबराहट होना स्वाभाविक है. यदि आप भी ऐसा महसूस करती हैं, तो कारण जानने की कोशिश करें. कई बार किसी अनजान व्यक्ति के साथ रहने की कल्पना, नए परिवार के साथ तालमेल बैठाने का डर, वहां के तौर-तरीक़ों की चिंता आदि से मन डरता है. मन की घबराहट को पार्टनर के साथ शेयर करें. उसके ज़रिए परिवार के बारे में जानने की कोशिश करें. पार्टनर के साथ सहज हो जाने पर परिवार के साथ सामंजस्य बैठाने में परेशानी नहीं होगी.

3. अरेंज मैरिज का अर्थ है- ज़्यादा ज़िम्मेदारियां और ज़्यादा अपेक्षाएं. दोनों ही पार्टनर्स पर उन सारी बातों पर खरा उतरने का दबाव रहता है. दबाव ज़रूर लें, लेकिन इतना नहीं कि आपसी तालमेल ही गड़बड़ाने लगे.

4. जरूरी नहीं कि पार्टनर को आपकी हर पसंद-नापसंद में रुचि हो या आप दोनों के विचार एक जैसे हों. कभी-कभी विपरीत स्वभाववाले पार्टनर्स भी बहुत ख़ुश रहते हैं.

5. हो सकता है नए परिवार की सोच आपके जीवन मूल्यों को सही न माने और आपको लगातार बताया जाए कि इस परिवार में ऐसा ही होता है. निश्‍चय ही ऐसे माहौल में आप परेशान हो जाएं, घुटन भी हो, पर रिलैक्स! शादी में सामंजस्य व अनुकूलता भी होती है. ऐसी स्थिति में पार्टनर से सही शब्दों के चुनाव के साथ सौम्य लहजे में बात करें. उन्हें अपनी उलझन बताएं, ताकि परिवार के किसी भी सदस्य को नाराज़ किए बिना समस्या का हल निकल आए.

6. शुरू-शुरू में पार्टनर या परिवार के सदस्यों की किसी भी बात, कमेंट या व्यवहार को दिल पर न लें. न ही जैसे को तैसा वाली पॉलिसी अपनाएं, बल्कि जो लोग परेशानियां पैदा करते हैं, उनसे संभलकर रहें. सूझबूझ से स्थिति को संभालें. निश्‍चय ही ऐसा व्यवहार आप दोनों को ख़ुशियां देगा. एक-दूसरे के क़रीब लाएगा.

7. परिवार में होनेवाली हर छोटी-छोटी बात की शिकायत पार्टनर से न करें, न ही बात-बात पर आंसू बहाएं. याद रहे, वो भी आपकी तरह ही ज़्यादा नहीं, तो थोड़ी-बहुत दुविधा से गुज़र रहा है.

8. प्यार एक ऐसी भावना है, जो हर मुश्किल को आसान बना देती है. अरेंज मैरिज में भी कभी तो देखते ही प्यार हो जाता है और कभी साथ चलते-चलते प्यार हो जाता है, वो भी ऐसा कि जीवन के हर आंधी-तूफ़ान से जूझने की ताक़त बन जाता है. प्यार देंगे, तो प्यार मिलेगा भी.

9. प्यार की नींव है विश्‍वास. पार्टनर पर विश्‍वास करें और उनके भरोसे को भी बनाए रखें. धैर्य से काम लें. पार्टनर या परिवार के सदस्यों की ग़लतियों के प्रति क्षमाशील बनें. जो बीज हम बोते हैं, वही फल हमें मिलता है.

10. शादी एक कमिटमेंट है, जहां आप अपनी बेफ़िक़्र दुनिया से निकलकर ज़िम्मेदारी, कमिटमेंट, त्याग, समझौतों के भंवर में घूमते रहते हैं. लेकिन यही बातें विवाह को मज़बूत बनाती हैं.

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Relationship Mantra

11. हो सकता है आप अपने नए परिवार के मुक़ाबले आर्थिक रूप से ज़्यादा संपन्न परिवार से हों, ज़्यादा स्मार्ट या हर तरह से बेहतर हों. लेकिन याद रहे, शादी किसी मुक़ाबले का प्लेटफॉर्म नहीं है. अतः तुलनात्मक विचारधारा को आड़े न लाएं. अब यह परिवार आपका है, इसे बेहतर बनाने में सहयोग दें.

12. रिश्तों को मज़बूत करने के लिए संवाद सबसे मुख्य है. कभी भी अपने पार्टनर से झूठ न बोलें. एक झूठ आपको मुसीबत में डाल सकता है. एक बार आपका झूठ पकड़ा गया, तो फिर से वह विश्‍वास पाना असंभव हो जाता है.

13. विवाह की सफलता के लिए दोनों परिवारों को जोड़कर रखना भी आपका व आपके पार्टनर का काम है. यह तभी संभव है जब दोनों परिवारों के प्रति स्नेह व आदर का समान भाव हो.

14. रिश्तों को बनाए रखने में मुस्कुराहट बड़ा काम करती है. आप ख़ुद भी आनंदित होते हैं और दूसरों का मन भी जीत लेते हैं.

15. इन सारी बातों के अलावा कुछेक व्यक्तिगत बातें भी हो सकती हैं, जिन्हें अपने ढंग से सुलझाकर विवाह को सफल बनाया जा सकता है.

– प्रसून भार्गव

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