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कब करें फैमिली प्लानिंग पर बात? (When Is The Best Time To Discuss Family Planning?)

शादी से पहले होनेवाले कपल को तरह-तरह की हिदायतें दी जाती हैं. ट्रेनिंग दी जाती है. नए माहौल में एडजेस्ट होने से लेकर खाना पकाने तक और ससुराल में सबका मन जीत लेने से लेकर पार्टनर को काबू में करने तक के गुरुमंत्र दिए जाते हैं. जिसकी समझ में जो आता है, वो वही स्पेशल टिप देकर चला जाता है. लेकिन इन सबके बीच एक बात जो अक्सर नज़रअंदाज़ कर दी जाती है, वो है फैमिली प्लानिंग की बात.

Family Planning

क्यों नहीं की जाती फैमिली प्लानिंग की बात?

–     दरअसल हमारे समाज में शादी का दूसरा मतलब ही होता है बच्चे. जी हां, शादी होते ही हर कोई गुड न्यूज़ सुनना चाहता है, ऐसे में फैमिली प्लानिंग के बारे में भला कौन सोचे?

–     शादी के बाद यदि एक साल के अंदर गुड न्यूज़ नहीं मिलती, तो लोग बातें बनाने लगते हैं, क्योंकि हम मदरहुड को बहुत ही ग्लोरिफाई करते हैं.

–     मां बनना ही जैसे एक स्त्री की ज़िंदगी का सबसे बड़ा उद्देश्य है, उसके बिना उसके अस्तित्व का कोई महत्व ही नहीं.

–     अक्सर पैरेंट्स अपने बच्चों के मन यह बात डाल देते हैं कि बेहतर होगा कंट्रासेप्शन यूज़ न किया जाए और पहला बच्चा जितना जल्दी हो जाए, उतना अच्छा होगा.

–     अक्सर बच्चे को लोग शादी व रिश्ते की सिक्योरिटी मान लेते हैं, यह भी वजह है कि शादी के बाद गुड न्यूज़ का ही इंतज़ार करते हैं.

क्यों ज़रूरी है फैमिली प्लानिंग?

–     आजकल बिज़ी शेड्यूल के चलते बहुत-सी प्राथमिकताएं बदल रही हैं. इनका असर शादी व फैमिली प्लानिंग पर भी पड़ा है. ऐसे में अनचाहा गर्भ यानी एक्सिडेंटल प्रेग्नेंसी बहुत से ़फैसले बदलने को मजबूर कर सकती है.

–     इन फैसलों में करियर से लेकर फाइनेंशियल प्लानिंग तक शामिल है.

–    पहला बच्चा कब चाहते हैं, दूसरा बच्चा यदि चाहते हैं, तो कितने अंतराल के बाद… बच्चा होने पर किस तरह से ज़िंदगी बदलेगी, ज़िम्मेदारियां बढ़ेंगी, ख़र्चे बढ़ेंगे, काम बढ़ेगा… इन सब पर चर्चा ज़रूरी है.

–     बच्चे की ज़िम्मेदारी व उससे जुड़े काम कपल किस तरह से आपस में बांटेंगे, करियर को किस तरह से मैनेज करेंगे… इन तमाम बातों पर चर्चा बेहद ज़रूरी है.

कब करें फैमिली प्लानिंग की चर्चा?

अब सवाल यह है कि इन बातों पर चर्चा कब करनी चाहिए?

–    ज़ाहिर-सी बात है, ये तमाम बातें कपल को शादी से पहले ही कर लेनी चाहिए.

–     दोनों के क्या विचार हैं, किसकी कितनी सहमति है, यह जानना बेहद ज़रूरी है, ताकि बाद में विवाद न हो.

–     इसी प्लानिंग का एक बड़ा हिस्सा है- कंट्रासेप्शन. किस तरह का कंट्रासेप्शन यूज़ करना है, किसे यूज़ करना है, कब तक यूज़ करना है आदि बातें कपल्स पहले ही डिसाइड कर लें, वरना एक्सिडेंटल प्रेग्नेंसी बहुत से प्लान्स चेंज करवा सकती है.

–     कंट्रासेप्शन यदि फेल हुआ, तो एक्सिडेंटल प्रेग्नेंसी के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना होगा. आपका करियर व फाइनांस बहुत हद तक इससे प्रभावित होगा, तो उस पर भी चर्चा ज़रूरी है.

–     आप चाहें तो काउंसलर के पास जाकर भी सलाह ले सकते हैं.

–     लेकिन ज़रूरी है कि शादी से पहले ही इन सब बातों को लेकर आप क्लीयर हो जाएं, ताकि बाद में एक-दूसरे पर टीका-टिप्पणी या आरोप न लगें.

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Family Planning Tips
बेझिझक बात करना है ज़रूरी

–     अक्सर कपल शादी से पहले इन बातों को जान-बूझकर भी अवॉइड करते हैं, क्योंकि उन्हें झिझक होती है.

–     उन्हें यह भी लगता है कि कहीं इतनी-सी बात को लेकर बनता रिश्ता टूट न जाए.

–     लड़कियों में भी हिचक होती है, क्योंकि उन्हें लगता है कि पार्टनर यह न समझे कि वो मर्यादा के बाहर जाकर बात कर रही है.

–     लेकिन बेहतर यही होगा कि आप हिचकिचाहट छोड़कर अपनी सारी शंकाएं दूर कर लें, ताकि बाद में यह महसूस न हो कि काश! पहले ही बात कर ली होती.

–     इससे आपको अपने होनेवाले पार्टनर की परिपक्वता, सोच-समझ व मानसिकता का भी अंदाज़ा हो जाएगा.

–     वो कितना सुलझा हुआ है, उसका थॉट प्रोसेस कितना क्लीयर है, यह आपको पता चल जाएगा.

बदलाव के लिए रहें तैयार

–     आप दोनों को इस बात पर भी चर्चा करनी होगी कि आप दोनों की ही ज़िंदगी बच्चा होने के बाद बहुत ज़्यादा बदल जाएगी.

–     एक तरफ़ ख़ुशख़बरी होगी, पर दूसरी तरफ़ ज़िम्मेदारियां भी.

–     उसी के अनुसार ख़र्च बढ़ेंगे, तो किस तरह से पहले से ही कितना अमाउंट इंवेस्ट करना है, ताकि बच्चा होने पर आपकी फाइनेंशियल हालत स्थिर रहे, उसकी प्लानिंग भी ज़रूरी है.

–     बच्चे के लिए कौन-कौन से प्लान्स लेने हैं, इसकी जानकारी ज़रूरी है.

–     स़िर्फ आर्थिक तौर पर ही नहीं, मानसिक व शारीरिक तौर पर भी बदलाव होंगे.

–     हल्का डिप्रेशन, शरीर में बदलाव, लाइफस्टाइल में बदलाव- इन सब पर भी चर्चा ज़रूरी है.

–     आपकी सेक्स लाइफ भी बदलेगी, जिसे लेकर हो सकता है आपसी तनाव हो जाए, तो यहां यदि आप पहले ही चर्चा करके एक-दूसरे के मन को जान लेंगे, परिपक्वता को परख लेंगे, तो भविष्य की चुनौतियों का सामना बेहतर तरी़के से कर पाएंगे.

–     बच्चा होने पर देर रात तक जागना, उसकी पूरी देखभाल करना शरीर व मन को थका सकता है और यह तनाव भी दे सकता है, जिससे आपस में विवाद भी हो सकते हैं.

–     करियर में बदलाव भी होगा. हो सकता है किसी एक को नौकरी छोड़नी भी पड़े या पार्ट टाइम काम करना पड़े, तो वो किस तरह से मैनेज होगा.

–     बच्चा होने के कितने समय बाद फिर से करियर को महत्व देना है, किस तरह से बच्चे की परवरिश करनी है, ये तमाम बातें छोटी लगती हैं, लेकिन आपके रिश्ते के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं.

समय ने मानसिकता भी बदल दी है…

यह सच है कि स्त्री को ही प्रकृति ने गर्भधारण का दायित्व दिया है. ऐसे में कंसीव करने के बाद यह सोचना कि यह कोई बड़ी मुसीबत है या यह बच्चा आपकी ही ज़िम्मेदारी नहीं है आदि ग़लत है. यह सच है कि बच्चा दोनों की ज़िम्मेदारी है, लेकिन स्त्री की शारीरिक संरचना व प्रकृति द्वारा प्रदत्त दायित्व के चलते उसकी ज़िम्मेदारी थोड़ी अलग व अधिक हो ही जाती है. निशांक व रिया ने फैमिली प्लानिंग नहीं की थी और न ही उस पर चर्चा की थी. नतीजा- शादी के एक साल के अंदर ही उनको बच्चा हो गया, लेकिन यह बच्चा रिया को बोझ लगने लगा, क्योंकि वो बात-बात पर निशांक से शिकायत करती कि बच्चा दोनों का है, तो तुम तो मज़े से ऑफिस चले जाते हो और मुझे इतना कुछ सहना पड़ता है. जबकि रिया वर्किंग नहीं थी, बावजूद इसके उसे यह अपेक्षा रहती थी कि यदि वो रात में जागकर बच्चे की नैप्पी बदल रही है, तो निशांक को भी यह करना होगा. प्रेग्नेंसी के बाद रिया में शारीरिक बदलाव भी आ गए थे, जिसको लेकर वो डिप्रेशन में रहने लगी थी. निशांक के अलावा रिया के जाननेवाले व सहेलियां भी उसे समझाती थीं कि यह नेचुरल है और समय के साथ सब नॉर्मल हो जाएगा, इसलिए रिया को बदले हालातों को स्वीकारना होगा, वो भी ख़ुशी-ख़ुशी. लेकिन रिया कुछ समझने को तैयार ही नहीं थी. उसे लगता था उसकी आज़ादी छिन गई, उसकी आउटिंग व पार्टीज़ बंद हो गईं, वो मोटी हो गई… जिसका असर दोनों के रिश्ते के साथ-साथ घर में आए नए मेहमान पर भी पड़ रहा था. एक्सिडेंटल प्रेग्नेंसी पर यदि रिया व निशांक ने पहले चर्चा की होती या फिर पहले से ही उन्होंने फैमिली प्लानिंग की चर्चा की होती, तो परिस्थितियां बेहतर होतीं.

इसके अलावा बेहतर होगा कि आज की जेनरेशन भी यह सच्चाई स्वीकारे कि प्रकृति ने स्त्री-पुरुष को अलग-अलग बनाया है और उसे कोई भी बदल नहीं सकता. बेहतर होगा कि अपने बच्चे का ख़ुशी-ख़ुशी स्वागत करें, ताकि वो सकारात्मक माहौल में पल-बढ़ सके.

ज़रूरत महसूस हो, तो काउंसलर की मदद भी ले सकते हैं या घर के बड़े-बज़ुर्गों का मार्गदर्शन लें.

– ब्रह्मानंद शर्मा

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न्यूली मैरिड के लिए बेस्ट सेक्स फॉर्मूले (Best Sex Formulas For Newly Married)

अपनी रोमांटिक लव लाइफ और सेक्स लाइफ को लेकर हर न्यूली मैरिड कपल बेहद एक्साइटेड रहता है. दोनों यही सोचते हैं कि सेक्स लाइफ को और बेहतर कैसे बनाएं, क्या करें कि पार्टनर आपके प्यार और रोमांस से हर व़क्त सराबोर रहे. यहां हम आपको कुछ ऐसे ही लेटेस्ट सेक्स फॉर्मूले बता रहे हैं, जिससे आपकी सेक्स लाइफ में रोमांच हमेशा बना रहेगा.

Sex Formulas For Newly Married

सुहागरात को हौवा न बनाएं

–     सबसे पहले तो अपने दिमाग़ से यह निकाल दीजिए कि सुहागरात में आपको सेक्स करना ही है, क्योंकि ज़्यादातर कपल्स शादी की रस्मों में इतने थक जाते हैं कि वो सेक्स को एंजॉय ही नहीं कर पाते.

–     बेहतर होगा कि आप सुहागरात को स़िर्फ रिलैक्स करें और अगली सुबह जब सोकर उठें, तब एक नए जोश और जुनून के साथ रिश्ता बनाएं. यक़ीनन इस सेक्सुअल एक्टिविटी को आप ज़्यादा एंजॉय करेंगे.

–     अगर आप सुहागरात को यादगार बनाना चाहते हैं, तो कमरे में मुहब्बत का ऐसा समां बांधें कि आपका पार्टनर ख़ुद आपकी तरफ़ खिंचता चला आए.

–     रोमांटिक म्यूज़िक, फूलों से सजी सेज के साथ, एसेंशियल ऑयल्स की ख़ुशबू पूरे कमरे में आपके प्यार को महकाएगी.

फोरप्ले से शुरू करें लव गेम

–     फोरप्ले यानी सेक्सुअल रिलेशन के पहले का वॉर्मअप है. एक-दूसरे को बांहों में भरकर प्यार करना, किस करना, एक-दूसरे को हग करना, नॉटी बातें करना ही फोरप्ले है.

–     फोरप्ले को स़िर्फ बेडरूम में ही सीमित न रखें. दिनभर में पार्टनर को नॉटी मैसेजेस भेजकर भी उनका मूड रोमांटिक बनाए रख सकते हैं.

–     किस करते व़क्त कभी-कभार आंखें खोलकर अपने पार्टनर को देखें. किस करते हुए पूरी तरह खोया हुआ पार्टनर बहुत प्यारा लगता है. उस पर और प्यार लुटाने का मन करता है.

–     पार्टनर से पूछें कि उसे क्या पसंद है. सेक्स के दौरान आपकी कौन-सी हरकत उसे सबसे ज़्यादा अच्छी लगती है.

–     शुरुआत में ही लंबे सेशन की उम्मीद न करें. आप दोनों नए हैं, इसलिए शुरू-शुरू में रिलेशन बनाने में आपको थोड़ा व़क्त लगेगा. इसे किसी तरह की कमी या कमज़ोरी न समझें, ऐसा सभी कपल्स के साथ होता है.

–     फोरप्ले के व़क्त एक्ट में खोने के साथ-साथ यह भी देखें कि आपके पार्टनर का रिएक्शन क्या है. क्या वो पूरी तरह इन्वॉल्व हो गया है या वो स़िर्फ आपकी ख़ुशी के लिए ज़बर्दस्ती एक्ट में बना हुआ है.

न्यूली मैरिड के लिए सेक्स फॉर्मूले

–     शादी के शुरुआती दिनों में कपल एक-दूसरे के साथ के लिए हर पल एक्साइटेड रहते हैं. हर पल एक-दूसरे में खोए रहने का जुनून, एक-दूसरे को निहारते रहना, एक-दूसरे की गोद में सिर रखकर पूरी दुनिया को भुला देने का उत्साह इसी समय चरम पर होता है.

–     हर दिन की शुरुआत ‘गुड मॉर्निंग किस’ से करें. शाम को काम पर से लौटने पर एक-दूसरे को गले ज़रूर लगाएं. जब भी मौक़ा मिले ‘आई लव यू’ ज़रूर कहें.

–     बहुत-से कपल्स अपने पार्टनर से अपनी इच्छाओं और चाहतों को बयां नहीं कर पाते, जिससे उन्हें एक कमी का एहसास होता है. आप अपने पार्टनर से उनके दिल की बातें जानें और अपनी ख़्वाहिशों की बातें करें.

–     सेक्सुअल लाइफ जितनी रोमांटिक होगी, आपकी मैरिड लाइफ उतनी ही ख़ुशहाल होगी, इसलिए एक-दूसरे की केयर करें. एक-दूसरे का ख़्याल रखने से प्यार और गहरा होता है.

–     शादी के शुरुआती कुछ महीने बहुत रोमांटिक होते हैं. हर रात कुछ अलग और नया करने का दोनों में बेहद उत्साह रहता है, लेकिन ज़रूरी नहीं कि हर रात आपका परफॉर्मेंस बेस्ट हो. कभी-कभार कम-ज़्यादा हो सकता है.

–     किसी दिन पार्टनर का मूड अच्छा न हो, तो उसे मनाने की पूरी कोशिश करें, लेकिन उसके लिए नाराज़ न हों.

–     शुरू-शुरू में ऑर्गैज़्म पर बहुत ज़्यादा फोकस न करें. बस, एक-दूसरे को प्यार करें और एक-दूसरे को ख़ुश रखने की कोशिश करें, बाकी सब अपने आप हो जाएगा.

–     दोनों के लिए ही ज़रूरी है कि अपनी सेक्सुअल हाइजीन का ख़्याल रखें. अपने प्राइवेट पार्ट्स को हमेशा क्लीन और हाइजीनिक बनाए रखें.

–     बेडरूम और बेड के अलावा भी अलग-अलग जगहों पर एडवेंचरस सेक्स ट्राई करें. आप चाहें, तो सोफे पर, शावर में और किचन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर सकते हैं.

–     रात को ग़ुस्सा होकर कभी न सोने जाएं. मन में जो भी शिकायतें हों कह दें और उनकी भी सुनें. अक्सर सुननेभर से बहुत-से मामले सुलझ जाते हैं. छोटी-छोटी अनबन को अपने रिश्ते पर हावी न होने दें.

–     आप दोनों को ही अपने पार्टनर के कामोत्तेजक अंगों के बारे में पता होना चाहिए, ताकि दोनों को ही बेस्ट सेक्सुअल एक्सपीरियंस मिले.

–     सेक्स लाइफ को रूटीन न बनाएं. रोज़ाना एक ही सेक्स पोज़ीशन ट्राई करने की बजाय कुछ नया करें.

–     शादी के पहले ही रिलेशनशिप के बारे में कुछ अच्छी किताबें पढ़ें.

–     सुहागरात के लिए फिल्मी ख़्वाब न पालें. फिल्मों और हक़ीक़त में बहुत फ़र्क़ होता है. अगर फिल्मोंवाली चीज़ें रियल लाइफ में एक्सपेक्ट करेंगे, तो आपको निराशा ही हाथ लगेगी.

–     अधिकांश पुरुषों को यह भ्रम होता है कि उन्हें पता है कि उनकी पार्टनर क्या चाहती है, जबकि उन्हें पता नहीं होता. इस भ्रम से बाहर निकलें और पार्टनर से बात करें.

–     महिलाओं के लिए सेक्स शारीरिक रूप से जुड़ने की बजाय भावनात्मक रूप से जुड़ना है, इसलिए पार्टनर से पहले इमोशनली जुड़ें.

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Sex Formulas
आफ्टरप्ले भी है बहुत ज़रूरी

–     सेक्स के बाद कहीं आप भी तो मुंह घुमाकर सो नहीं जाते, क्योंकि सेक्सुअल एक्टिविटी के बाद भी एक्ट तब तक पूरा नहीं होता, जब तक आफ्टरप्ले न हो.

–     एक्ट के बाद पार्टनर को गले लगाएं, प्यार से किस करें और उसकी ज़ुल्फ़ों को सहलाएं.

–     एक्ट के बाद महिलाओं को सहज होने में पुरुषों से ज़्यादा समय लगता है, इसलिए जब आप उसे प्यार से सहलाते हैं, तो उसे आपका प्यार महसूस होता हैै.

–     एक-दूसरे को बताएं कि आपको आज का सेशन कितना अच्छा लगा. इससे पार्टनर का कॉन्फिडेंस और बढ़ता है.

–     रिसर्च में यह बात सामने आई है कि महिलाएं इंटरकोर्स से ज़्यादा फोरप्ले और आफ्टरप्ले एंजॉय करती हैं, इसलिए इन्हें कभी अनदेखा न करें.

–     कभी-कभार आपका आफ्टरप्ले फोरप्ले बन जाता है और आप दूसरे राउंड के लिए भी तैयार हो जाते हैं, इसलिए आफ्टरप्ले में हमेशा कुछ सेंसुअल और अलग करने की कोशिश करें.

हनीमून गाइड

–     महीनों की शादी की प्लानिंग और रस्मों-रिवाज़ में कपल्स काफ़ी थक जाते हैं, इसलिए इस समय को टूरिज़्म की बजाय स़िर्फ ‘चिल आउट’ के लिए रखें.

–     हनीमून के लिए मोस्ट पॉप्युलर डेस्टिनेशन की बजाय किसी ऐसी जगह जाएं, जहां बहुत ज़्यादा भीड़-भाड़ न हो.

–     हनीमून पैकेज लेते व़क्त ध्यान रखें कि आपके टूर का शेड्यूल बहुत टाइट न हो. सुबह जल्दी निकलकर दिनभर घूमना, फिर देर रात लौटकर आना काफ़ी थकानेवाला होता है. ऐसे पैकेज लेने से बेहतर होगा, आप ख़ुद गाड़ी किराए पर लेकर एक्सप्लोर करें.

–     सुबह देर तक आराम से सोकर उठें, ब्रेकफास्ट रूम में ही ऑर्डर करें. ज़्यादा-से-ज़्यादा समय एक-दूसरे के साथ रिलैक्स करने में बिताएं.

–     हनीमून का सामान पैक करते व़क्त लुब्रिकेशन कभी न भूलें. शुरुआती दिनों में यह आपके बहुत काम आता है.

–     सेक्सी लॉन्जरी और परफ्यूम से अपने हनीमून को और रोमांटिक बनाएं.

–     हनीमून की तैयारी भी शादी की तैयारी के साथ ही कर लें. कपड़ों से लेकर लॉन्जरी तक में क्या ख़रीदना है, पहले से ही ले लें.

एक्सपर्ट एडवाइस

–    सेक्स को बेहतर बनाना चाहते हैं, तो एक्ट से पहले शावर ज़रूर लें.

–    रिलेशनशिप से पहले बहुत हैवी न खाएं.

–    परफ्यूम या डियो का इस्तेमाल ज़रूर करें.

–    इलायची या कोई माउथ फ्रेशनर खाएं.

–    अपनी फिटनेस का ध्यान रखें.

 

– सुनीता सिंह

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रिश्तों में बदल रहे हैं कमिटमेंट के मायने… (Changing Essence Of Commitments In Relationships Today)

कभी वो ख़्वाब हो जाता है, कभी हक़ीक़त… कभी चाहत बन जाता है, कभी इबादत… मुहब्बत नाम है उसका, इश्क़ अंजाम है उसका… पर व़क्त के साथ-साथ वो कुछ-कुछ बदल जाता है… ताउम्र का साथ है यूं तो, पर अब वो क़समें नहीं हैं, चल रहे हैं हाथों में डाले हाथ, पर अब वो रस्में नहीं हैं…

Relationships Tips

व़क्त के साथ-साथ बहुत कुछ बदलता है, जीवन के प्रति नज़रिया, हमारा दृष्टिकोण, चीज़ों और लोगों को परखना हो या फिर रिश्तों को… हर बात के मायने समय के साथ बदल जाते हैं और आज की तारीख़ में, जहां समाज में इतना सब कुछ बदल रहा है, तो इसका सबसे ज़्यादा असर हमारे रिश्तों पर ही पड़ा है.

हम अक्सर कहते हैं कि रिश्तों में वो पहले जैसी बात नहीं. लेकिन सच तो यह है कि बदले हम हैं, रिश्ते नहीं. दरअसल, रिश्ते तो वही हैं, लेकिन हमारा नज़रिया उनके प्रति अब पहले जैसा नहीं रहा. यही वजह है कि रिश्तों में जो सबसे अहम् कड़ी होती थी- कमिटमेंट, उसके भी मायने बदल गए हैं. कैसे? आइए जानें.

जन्म-जन्मांतर का साथ, पुरानी हो गई अब ये बात: पहले सात फेरों को हम इस जन्म का ही नहीं, सात जन्मों का बंधन मान लेते थे. लेकिन अब यह सोच पुरानी हो चुकी है. रिश्तों को भी हम कैज़ुअली लेने लगे हैं. निभ गया तो ठीक, वरना रास्ते अलग. शादी जैसे रिश्ते की गंभीरता को भी हमने खो दिया है.

प्रैक्टिकल अप्रोच

रिश्तों को लेकर हम सभी काफ़ी इमोशनल होते हैं, लेकिन अब लोग इनके प्रति भी प्रैक्टिकल अप्रोच रखने लगे हैं. बात-बात पर न तो अब भावुक होते हैं और न ही हर चीज़ में इमोशनल फैक्टर ढूंढ़ते हैं. पार्टनर का खाने पर इंतज़ार करना, उसके साथ ही मूवी देखने जाना या उसकी पसंद को ध्यान में रखते हुए कपड़े पहनना… ये तमाम बातें आज की तारीख़ में आपको इमोशनल फूल ही साबित करती हैं.

स्पेस देना

अब लोग स्पेस के नाम पर थोड़ी-बहुत चीटिंग भी कर लेते हैं. इसमें उनको कोई बुराई नज़र नहीं आती. न तो एक-दूसरे को हर बात बतानी होती है, न ही एक-दूसरे के पासवर्ड्स पता होने ज़रूरी हैं. एक पार्टनर को लगता है कि अगर मैंने अपने पार्टनर की पर्सनल लाइफ में ज़्यादा दख़लअंदाज़ी की, तो वो भी करेगा. इसलिए सेफ यही है कि न तो एक-दूसरे के मैसेज चेक करें और न ही एक-दूसरे का सोशल मीडिया अकाउंट.

कम्यूनिकेशन का तरीक़ा बदल गया है

अब साथ बैठकर डिनर के टेबल पर रोज़ की दिनचर्या डिसकस नहीं होती, पति एक कमरे में लैपटॉप पर रहता है, पत्नी टीवी के सामने अपने मोबाइल पर व्यस्त रहती है. हैरानी की बात नहीं है कि एक ही घर में एक-दूसरे को सोशल मीडिया पर ही मैसेज भेजकर बातें कर लेते हैं. फेस-टु-फेस कम्यूनिकेशन लगभग ख़त्म होता जा रहा है. फोन और मैसेजेस ही सबसे बड़ा ज़रिया हैं.

शादी अब ज़रूरी नहीं

पहले अगर दो लोग प्यार करते थे, तो ज़ाहिर है उनकी मंज़िल शादी ही होती थी, लेकिन अब शादी के बारे में शायद बहुत बाद में सोचा जाता है, प्यार भी जब तक है, तब तक ठीक है, मनमुटाव हुआ, तो आसानी से लोग रास्ता बदल देते हैं. दूसरी ओर, लड़कियां भी अब शादी का कमिटमेंट रिश्तों में नहीं ढूंढ़तीं. दरअसल, सभी लोग एक्सपेरिमेंट करते हैं, अगर कामयाबी मिली, तो शादी भी हो ही जाएगी और यदि नहीं, तो ग़लत रिश्ते में बंधने से बच जाएंगे, इसी सोच के साथ आगे बढ़ते हैं.

फ्लर्टिंग से अब परहेज़ नहीं

अगर पार्टनर को पता है कि उसका पार्टनर अपनी कलीग या ऑनलाइन दोस्तों से फ्लर्ट करता है, तब भी वो इसे ग़लत नहीं मानती. इसे रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा समझकर लाइट मोड पर नज़रअंदाज़ कर देती है, क्योंकि इतनी-सी बात के लिए रिश्ते में अनबन को जगह क्यों देना. लोगों की सोच बदल रही है, उन्हें लगता है कि फ्लर्टिंग में कोई बुराई नहीं, यह स्ट्रेस को कम करने का मात्र एक तरीक़ा है, जो आपको रिफ्रेश कर देती है.

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Relationships Goals
परफेक्शन अब ज़रूरी नहीं

शुरू से ही हमारे समाज में पार्टनर को लेकर यही सोच बनी हुई है कि वो हर लिहाज़ से परफेक्ट होना चाहिए, उसमें कोई बुराई या ऐब नहीं होना चाहिए, लेकिन अब ऐसा नहीं है. लोग न तो एक-दूसरे को बदलने की सोचते हैं और न ही उस तरह से जज करते हैं. अगर पार्टनर में कोई कमी भी है, तो उसे अपना लेते हैं, क्योंकि दुनिया में कोई भी परफेक्ट नहीं होता.

हमेशा साथ-साथ नहीं हैं

हर निर्णय पार्टनर से पूछकर ही करना, हर चीज़ और हर बात शेयर ही करना, मूवी, डिनर, पार्टीज़ साथ करना… नहीं, अब ऐसा नहीं है. पहले ये तमाम बातें कमिटमेंट का हिस्सा थीं, पर अब नहीं. अब दोनों वर्किंग होते हैं और वर्किंग न भी हो, तो अपनी सुविधा व समयानुसार ही चीज़ें प्लान करते हैं, जिसमें ज़रूरी नहीं कि वो दोनों हमेशा साथ ही रहें. कभी अपने फ्रेंड्स के साथ, तो कभी कलीग्स के साथ पार्टनर्स अपना वीकेंड, हॉलीडेज़ या बाकी फन एक्टिविटीज़ प्लान कर लेते हैं. इसमें दोनों ही कंफर्टेबल फील करते हैं और बुरा नहीं मानते. उन्हें यह ज़्यादा आसान लगता है, क्योंकि हमेशा एक-दूसरे के सिर पर सवार रहने से बेहतर उन्हें लगता है कि एक-दूसरे को पर्सनल स्पेस दिया जाए.

इस बदलाव के क्या मायने हैं?

क्या ये बदलाव सही है या ग़लत? ये तो बहस का मुद्दा है, क्योंकि एक तरफ़ जहां प्रैक्टिकल होने के चक्कर में भावनाएं ख़त्म हो रही हैं, वहीं रिश्ते टूटने का दर्द भी कम होने लगा है अब लोगों को. फ्लर्टिंग, एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स, डिजिटल रिश्ते, बढ़ते तलाक़ आदि इस बदलाव के ही साइड इफेक्ट्स हैं. लेकिन इस बदलाव को रोका नहीं जा सकता, पर हां, निजी तौर पर हर कोई यह प्रयास कर सकता है कि हम अपने रिश्तों में ईमानदार रहें, क्योंकि रिश्तों का दूसरा नाम ही बंधन और अनुशासन होता है. यदि आपको यह अनुशासन और बंधन पसंद नहीं, तो बेहतर होगा कि रिश्तों में बंधें ही नहीं. आज़ाद रहें, अकेले रहें… क्योंकि इस तरह के रिश्ते ही साथी होते हुए भी अकेलेपन को और बढ़ाते हैं. यही वजह है कि आज हर कोई साथी के होते हुए भी कहीं-न-कहीं ख़ुद को अकेला पाता है.

ज़िंदगी के किसी मोड़ पर तो आकर ठहरना होता ही है, लेकिन यह ठहराव अब रिश्तों में नहीं नज़र आता, ऐसे में आप उस मोड़ पर नितांत अकेले रह जाते हैं, जहां सबसे ज़्यादा आपको प्यार, अपनेपन और साथ की ज़रूरत
होती है.

बेहतर होगा कि रिश्तों में समय, कम्यूनिकेशन, कमिटमेंट और प्यार इंवेस्ट करें, ताकि आपका रिलेशनशिप बैंक बैलेंस कभी खाली न हो.

– विजयलक्ष्मी

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क्यों बढ़ रहा है सेक्स स्ट्रेस? (Why Sex Stress Is Increasing In Our Society?)

आज कहां नहीं है स्ट्रेस? घर-परिवार, करियर, नौकरी… हर जगह तनाव का मकड़जाल फैला हुआ है. और धीरे-धीरे इसने अंतरंग लम्हों में भी घुसपैठ कर दी है. क्या एक हेल्दी रिलेशन के लिए सेक्स स्ट्रेस को दूर करने की ज़रूरत नहीं है?

Sex Stress

मनोचिकित्सक डॉ. अजीत दांडेकर के अनुसार, “स्ट्रेस लेवल बढ़ने के कारण शरीर के कई ऐसे हार्मोंस प्रभावित होते हैं, जिनकी वजह से सेक्स स्ट्रेस बढ़ जाता है. यदि पति-पत्नी अपनी रोज़ाना की ज़िंदगी का विश्‍लेषण करने के लिए कुछ समय निकाल सकें तो सेक्स स्ट्रेस का कारण ख़ुद ही समझ में आ जाएगा. सेक्स स्ट्रेस का कोई एक कारण नहीं है. मॉडर्न लाइफ़स्टाइल व अनेक चाही-अनचाही परिस्थितियां इसके लिए ज़िम्मेदार हैं.” आइए, उन विभिन्न स्थितियों को समझें.

समय की कमी व अपनों की फ़िक्र

सेक्स क्रिया के लिए समय व तनावरहित वातावरण चाहिए, जो आजकल लोगों को नहीं मिलता है. यदि समय मिल भी गया तो मन तरह-तरह की चिंताओं से घिरा रहता है. बच्चों का प्रेशर, माता-पिता का प्रेशर, ऑफ़िस की चिंताएं अनेक ऐसी बातें हैं, जो व्यक्ति को तनावमुक्त होने ही नहीं देतीं. फिर अपनी-अपनी अलग सोच और थकान के कारण तालमेल की कमी भी सेक्स के प्रति उदासीनता की स्थिति पैदा करती है.

काम का प्रेशर

ऑफ़िस या बिजनेस में ख़ुद को बेहतरीन साबित करने का जुनून, प्रमोशन की चाह, बॉस की नज़रों में योग्य बने रहने के प्रयास में कभी-कभी व्यक्ति अपनी सारी एनर्जी ख़र्च कर डालता है. वैसे भी बड़े-बड़े पैकेज यानी लाखों में मिलने वाली सालाना तनख़्वाह व्यक्ति को निचोड़कर रख देती है. अधिक आमदनी के लिए 8 की जगह 12-15 घंटे काम करना पड़ता है. ऑफ़िस के बाद कभी-कभी घर पर भी काम पूरा करना पड़ता है. इस तरह के हाईप्रेशर जॉब के साथ प्रायः संतुलन बनाए रखना कठिन हो जाता है. ऑफ़िस व घर दोनों ही ज़िम्मेदारियों को निभाने के चक्कर में व्यक्ति इतना थक जाता है कि बिस्तर पर लेटते ही सो जाता है. इसका सीधा असर उसकी सेक्स लाइफ़ पर
पड़ता है.

करियर की चाह

करियर में आगे बढ़ने की चाह एक ओर सफलता की मंज़िल तक पहुंचने का उत्साह बढ़ाती है, तो दूसरी ओर रिश्तों की गर्माहट में बाधक भी बनती है. करियर के कारण कभी-कभी पति-पत्नी को एक-दूसरे से अलग रहना पड़ता है. वे वीकएंड पर ही साथ रह पाते हैं. ऐसे कपल्स अनेक कुंठाओं के शिकार होते हैं, भले ही यह स्थिति उन्होंने स्वेच्छा से चुनी हो. ऐसे में साथ होते हुए भी तरह-तरह की शंका-आशंका (जैसे- विवाहेतर संबंध) या अपराधबोध उन्हें जकड़ने लगता है, अनेक ऐसी बातें सेक्स लाइफ़ को प्रभावित करती हैं.

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Sex Stress
असुरक्षा की भावना

आज की शादीशुदा ज़िंदगी में वर्किंग पति-पत्नी के रिश्तों में आजीवन साथ रह पाने की निश्‍चिंतता नहीं है. डर बना ही रहता है कि कब अलग हो जाना पड़े, क्योंकि दोनों के अहं होते हैं, जो कभी भी टकरा सकते हैं. दोनों में कोई भी समझौते के लिए तैयार नहीं होना चाहता है. लिहाज़ा महिलाओं के मन में अधिक बचत की चिंता रहती है. वे ज़्यादा से ज़्यादा कमाने की कोशिश में रहती हैं. वे सुरक्षित होना चाहती हैं. पुरुषों को स्त्रियों की सोच में स्वार्थ नज़र आता है. इस तरह की स्थिति तनाव व टकराहट को जन्म देती है.

प्लानिंग की कमी

आज का व्यक्ति अपनी चादर देख कर पैर नहीं पसारता, बल्कि पैर पसारने के बाद चादर की खींचातानी शुरू करता है. आधुनिक सुख-साधन जुटाना, रिसॉर्ट या विदेश में छुट्टियां बिताना हर दंपति की इच्छा होती है. संभव हो, न हो, उसकी कोशिश व चाह तो होती ही है. आज विकल्प के रूप में लोन व क्रेडिट कार्ड की उपलब्धता व बाद में उनकी किश्तें चुकाने का प्रेशर शरीर व मन दोनों को थका डालता है, बिना प्लानिंग के जो फ़ायनेंशियल स्ट्रेस झेलना पड़ता है, वो अंततः व्यक्ति की ज़िंदगी को पूरी तरह से प्रभावित करता है. सेक्स लाइफ़ के प्रति उदासीन कर देता है.

पोर्नोग्राफ़ी का असर

पोर्नोग्राफ़ी (यानी कामवासना संबंधी साहित्य, फ़ोटो, फ़िल्म आदि) के प्रभाव के कारण व्यक्ति सेक्स लाइफ़ फैंटेसी की दुनिया से जुड़ जाता है. उस तरह की इच्छा करने लगता है, जबकि वास्तविकता उससे कहीं दूर होती है. ऐसी फैंटेसी के कारण पार्टनर का सेक्स स्ट्रेस बढ़ने लगता है. वे साथ होकर भी काम-सुख या आनंद से वंचित रह जाते हैं. एक-दूसरे की उम्मीदों पर खरा न उतरने व पूर्ण संतुष्ट न कर पाने का तनाव व अनजाना भय रिश्तों में उदासीनता ले आता है.

मीडिया का रोल

आधी-अधूरी जानकारी व ग़लतफ़हमियां भी स्ट्रेस को बढ़ाती हैं. आज हर मैग़जीन में सेक्स कॉलम को ज़रूरी माना जाता है. कॉलम में सेक्सोलॉजिस्ट द्वारा पाठकों के प्रश्‍नों के उत्तर दिए जाते हैं. लेकिन पढ़ने वाला ये भूल जाता है कि संबंधित लेख या कॉलम में दी गई जानकारी एक सामान्य जानकारी होती है जबकि हर व्यक्ति दूसरे से भिन्न होता है. इसके अलावा इंटरनेट सेक्स, होमोसेक्सुअलिटी आदि भी आम व्यक्ति के मन को भ्रमित करने में ख़ास रोल निभा रहे हैं और सेक्स स्ट्रेस को बढ़ा रहे हैं. इसलिए आज यह बेहद ज़रूरी हो गया है कि कपल्स एक-दूसरे के लिए थोड़ा व़क़्त निकालें. साथ ही उपरोक्त सभी मुद्दों पर एकबारगी विचार-विमर्श भी करें, ताकि सेक्स
स्ट्रेस पनपने ही न पाए और ज़िंदगी ख़ुशनुमा बन जाए.

– प्रसून भार्गव

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शादीशुदा ज़िंदगी में कैसा हो पैरेंट्स का रोल? (What Role Do Parents Play In Their Childrens Married Life?)

कहते हैं, घर की ख़ुशहाली व आपसी रिश्तों की मज़बूती में पैरेंट्स का आशीर्वाद, सहयोग व प्यार काफ़ी मायने रखता है. लेकिन जब बच्चों की शादीशुदा ज़िंदगी में पैरेंट्स का सहयोगपूर्ण रवैया दख़लअंदाज़ी-सा लगने लगे, तो उनकी भूमिका सोचनीय हो जाती है. ऐसे में क्या करें पैरेंट्स? आइए, जानते हैं.

Childrens Married

आज के बदले माहौल में पति-पत्नी की विचारधारा काफ़ी बदल गई है. शादी के बाद पति-पत्नी अलग घर बसाना चाहते हैं. स्वतंत्रता व आत्मनिर्भरता दोनों ही उनके लिए अहम् हैं. सब कुछ वो ख़ुद ही करना चाहते हैं. लेकिन ऐसे एकल परिवारों में भी समय-असमय पैरेंट्स या बुज़ुर्गों की ज़रूरत आन ही पड़ती है और पैरेंट्स को भी उनकी मदद  करनी पड़ती है, फिर चाहे वो ख़ुशी से हो या कर्त्तव्यबोध के कारण. ऐसी स्थिति आज के पैरेंट्स को दुविधा में डाल रही है. वे समझ नहीं पाते हैं कि आत्मनिर्भर बच्चों की ज़िंदगी में उनका क्या स्थान है? उनकी क्या भूमिका
होनी चाहिए?

अधिकतर पैरेंट्स के लिए बच्चे हमेशा बच्चे ही रहते हैं. उनकी हर संभव मदद करना वे अपना कर्त्तव्य समझते हैं, जबकि अन्य लोगों का मानना है कि जब बच्चे बड़े हो जाते हैं और उनकी शादी हो जाती है, तब पैरेंट्स की ज़िम्मेदारियां ख़त्म हो जाती हैं. बच्चों को अपनी ज़िंदगी ख़ुद संभालनी चाहिए. पैरेंट्स से कोई उम्मीद नहीं रखनी चाहिए.

देखा गया है कि पैरेंट्स को जब विवाहित बच्चों की ज़िंदगी में परेशानियां व असुविधाएं दिखाई देती हैं, तब कभी तो वे तुरंत मदद के लिए हाथ बढ़ा देते हैं और कभी-कभी उन्हें समय व हालात के भरोसे छोड़ अपना हाथ खींच लेते हैं. ख़ासकर तब, जब ज़रूरत आर्थिक मदद की होती है.

काफ़ी समय पहले कोलकाता की एक एज्युकेशन रिसर्च संस्था अल्फा बीटा ओमनी ट्रस्ट द्वारा एक सर्वे किया गया था, जिसमें लगभग 200 पैरेंट्स से बातचीत की गई थी. 150 से भी ज़्यादा पैरेंट्स का कहना था- यदि संभव हो और सहूलियत हो, तो हर प्रकार की मदद की जानी चाहिए, क्योंकि बच्चे तो हमेशा ही हमारे लिए बच्चे रहेंगे. साथ ही उनका मानना था कि शादीशुदा ज़िंदगी का शुरुआती दौर कई बार मुश्किलों व असंतुलन से भरा होता है. कई प्रकार के पारिवारिक व भावनात्मक एडजस्टमेंट करने पड़ते हैं. कभी-कभी अनचाहे आर्थिक संकट भी ज़िंदगी को कठिन बना देते हैं. ऐसे में आर्थिक सहायता से ज़िंदगी आसान व ख़ुशहाल हो सकती है. दूसरे मत के अनुसार, शादी तभी की जानी चाहिए, जब व्यक्ति शादी के बाद आनेवाली हर परिस्थिति का मुक़ाबला करने के लिए तैयार हो, आर्थिक रूप से सुरक्षित व ठोस हो. बच्चों को पढ़ाना-लिखाना, ज़िम्मेदारियों के लिए तैयार करना पैरेंट्स की ज़िम्मेदारी है. उसके बाद पैरेंट्स की ज़िम्मेदारी ख़त्म. फिर तो बच्चों की ज़िम्मेदारी बनती है कि वो पैरेंट्स की देखभाल करें.

समाजशास्त्री डॉ. कामेश्‍वर भागवत का मानना है कि पैरेंट्स हमेशा ही पैरेंट्स रहते हैं. अपने बच्चों की ज़िंदगी में हमेशा ही उनकी भूमिका बनी रहती है. कभी मुख्य, तो कभी सहयोगी के तौर पर. इसलिए न तो पूरी तरह इनसे अलग हों और न ही रोज़मर्रा की हर बात में अपनी राय दें. यानी रास्ता बीच का होना चाहिए. वैसे भी भारतीय परिवार एक कड़ी की तरह जुड़े रहते हैं, एक तरफ़ हम अपने बच्चों की ज़िम्मेदारियां पूरी करते हैं, तो दूसरी तरफ़ पैरेंट्स के साथ जुड़े रहकर उनके प्रति दायित्व निभाते हैं. दरअसल शेयरिंग व केयरिंग की भावना ही परिवार है. पैरेंट्स का रोल कभी ख़त्म नहीं होता है, बस उनका स्वरूप बदल जाता है. आर्थिक योगदान के अलावा भी विवाहित बच्चों के जीवन में पैरेंट्स की एक सुखद भूमिका हो सकती है.

–    पति-पत्नी यदि अकेले व समर्थ हैं, तो भी उन्हें अपने पैरेंट्स के भावनात्मक सहयोग, उनके प्यार व आशीर्वाद की ज़रूरत होती है.

–    पति-पत्नी दोनों वर्किंग हैं, तो बच्चे की सुरक्षा व देखभाल की ज़िम्मेदारी लेकर आप उन्हें चिंतामुक्त कर सकते हैं. पैरेंट्स की मदद से वे लोग अपना काम बेहतर तरी़के से कर सकेंगे.

–   तकलीफ़ या बीमारी के दौरान आपका समय व अनुभव उनके लिए किसी वरदान से कम न होगा.

–   तनाव व संघर्ष के दौरान आपका भावनात्मक सहयोग व ज़िंदगी के अनुभव उन्हें संबल व हौसला प्रदान कर सकते हैं.

–   बच्चों को स्कूल से लाना व छोड़ना प्रायः ग्रैंड पैरेंट्स को भी अच्छा लगता है और ग्रैंड चिल्ड्रेन भी दादा-दादी का साथ एंजॉय करते हैं.

–   बच्चों में आध्यात्मिक व नैतिक गुणों तथा शिक्षा की शुरुआत भी ग्रैंड पैरेंट्स द्वारा बेहतर रूप से होती है.

–   आज अकेला बच्चा हर समय टीवी, कंप्यूटर, प्ले स्टेशन जैसे गैजेट्स से चिपका रहता है, ऐसे में आपका साथ व मार्गदर्शन  उसे समय का बेहतर उपयोग करना सिखा सकता है.

–    बच्चे जिज्ञासु होते हैं, उनकी जिज्ञासा ग्रैंड पैरेंट्स बहुत अच्छी तरह से शांत कर सकते हैं.

–    इन बातों के अलावा आपके विवाहित बच्चों की और भी अनेक व्यक्तिगत समस्याएं व ज़रूरतें हो सकती हैं, जिनका समाधान आपकी सहयोगी भूमिका से हो सकता है और बच्चों की विवाहित ज़िंदगी ख़ुशहाल हो सकती है.

–    आर्थिक सहायता निश्‍चय ही जटिल व निजी मामला है. इससे हालात सुधर भी सकते हैं और पैरेंट्स बुढ़ापे में स्वयं को सुरक्षित भी कर सकते हैं.

याद रखें, बच्चे आपके ही हैं, फिर भी पराए हो चुके हैं. एक नए बंधन में बंध चुके हैं. एक नई दुनिया बसा रहे हैं. तो बस, पास रहकर भी दूर रहें और दूर रहकर भी अपने स्पर्श का एहसास उन्हें कराते रहें.

आपकी सहयोगी भूमिका आपके शादीशुदा बच्चों को कैसी लग रही है, यह जानने के लिए इन बातों पर ध्यान दें-

–    क्या बच्चे आपकी मदद से ख़ुश हैं? आपकी भूमिका को सराहते हैं? आपके प्रति आभार व्यक्त करते हैं? यदि नहीं, तो आप मदद नहीं दख़ल दे रहे हैं.

–     अब आपके बच्चे अकेले नहीं हैं, उनकी ज़िंदगी उनके जीवनसाथी के साथ जुड़ी है. क्या उनके साथी को भी आपका रोल पसंद है? यदि नहीं, तो एक दूरी बनाना बेहतर होगा.

–     मदद के दौरान क्या आपको ऐसा महसूस होता है कि आपका फ़ायदा उठाया जा रहा है या आपको इस्तेमाल किया जा रहा है? ऐसी स्थिति कुंठा को जन्म देती है.

–     मदद के दौरान होनेवाला आपका ख़र्च आपको परेशानी में तो नहीं डाल रहा है? यदि ऐसा है तो हाथ रोक लें, वरना पछतावा होगा.

–     उनकी व्यस्तता को कम करने के लिए, उनकी ज़िंदगी को ख़ुशहाल बनाने के लिए अपनी ज़िंदगी को जीना न छोड़ें. अपनी दिनचर्या, अपनी हॉबीज़ पर भी ध्यान दें.

–     बिना मांगे, आगे बढ़कर ख़ुद को ऑफ़र न करें, न ही उनकी ज़िंदगी में दख़लअंदाज़ी करें, वरना रिश्ते बिगड़ सकते हैं, आपके साथ भी और आपस में उनके भी.

–     हर व़क़्त उनकी ज़िंदगी में झांकने की कोशिश न करें. जब वो शेयर करना चाहें, तो खुले मन से आत्मीयता बरतें.

–     अपनी चिंताओं व कुंठाओं का रोना भी हर व़क़्त उनके सामने न रोएं. चाहे वो स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हों या पारिवारिक रिश्तों की कड़वाहट.

–     बदलते समय के साथ अपने व्यवहार व सोच में परिवर्तन लाएं, ताकि बच्चे आपसे खुलकर बात कर सकें.

 

– प्रसून भार्गव

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सोनम कपूर- शादी के बाद ज़िम्मेदारियां व प्राथमिकताएं बदल जाती हैं… (Sonam Kapoor- Responsibilities And Priorities Change After Marriage…)

सोनम कपूर (Sonam Kapoor) कम फिल्में करती हैं, पर जो भी करती हैं दिलचस्प होती हैं, जैसे द ज़ोया फैक्टर. इसके व उनकी पर्सनल लाइफ से जुड़ी बातों के बारे में जानते हैं.

Sonam Kapoor

* मुझे ख़ुशी है कि अनुजा चौहान के उपन्यास पर आधारित अभिषेक शर्मा द्वारा निर्देशित मेरी फिल्म द ज़ोया फैक्टर को लोगों ने पसंद किया. जब इस फिल्म के लिए सचिन तेंदुलकर ने ट्वीट किया, तब भी मुझे बेहद ख़ुशी हुई थी. इस तरह की फिल्म करने का एक अलग ही मज़ा है.

* फिल्म इंडस्ट्री में हमेशा से ही पुरुषों का बोलबाला रहा है. यहां तक कि महिला निर्देशक भी एक्टर को ध्यान में रखकर पुरुष प्रधान फिल्में ही अधिक करती हैं, जबकि उन्हें महिला प्रधान फिल्मों पर अधिक ध्यान देना चाहिए, फिर चाहे वो फराह ख़ान हों या ज़ोया अख़्तर. नायिका प्रधान फिल्में बहुत कम ही बनती हैं. बॉलीवुड में हीरोइन को अपनी पहचान बनाने के लिए अधिक संघर्ष करना पड़ता है.

* हीरोज़ भी महिला प्रधान फिल्मों में काम नहीं करना चाहते. मेरी कई फिल्में, जो नायिका प्रधान थीं, के लिए हीरोज़ ढूंढ़ने में मुश्किलें आईं.

* मेरा यह मानना है कि अपने बेस्ट फ्रेंड से शादी करना हमेशा अच्छा रहता है. मेरे और पति आनंद के बीच ग़ज़ब की ट्यूनिंग है, ऐसा हमारी दोस्ती के कारण है. हम एक-दूसरे के विचारों व मूल्यों का पूरा सम्मान करते हैं.

Sonam Kapoor

* मैं जब उठती हूं, तब आनंद बिस्तर पर नहीं होते. दरअसल, उन्हें सुबह जल्दी उठने की आदत है और वे रात में 10 बजे तक सो भी जाते हैं. जबकि मैं थोड़ा देरी से सोती हूं. वैसे हम दोनों को लेट नाइट पार्टीज़ पसंद नहीं, तो हम रात में कहीं बाहर भी नहीं जाते हैं.

* आनंद बहुत अच्छे जीवनसाथी हैं. वे शांत स्वभाव के हैं. मुझे पूरा स्पेस भी देते हैं. मेरा यह मानना है कि शादी के बाद हमें एक और नया परिवार मिलता है. तब हमारी ख़ुशियां, ज़िम्मेदारियां व प्राथमिकताएं भी बदल जाती हैं. हम दोनों के साथ भी ऐसा ही हुआ, पर हम दोनों ने आपने दोनों परिवारों के साथ अच्छा बैलेंस बनाकर रखा है. हम ख़ुश हैं और हर लम्हे को एंजॉय करते हैं.

Sonam KapoorSonam Kapoor Sonam Kapoor Sonam Kapoor

सोनमनामा…

* सोनम के सना, जिराफ व सोंज निक नेम्स हैं.

* हिंदी व अंग्रेज़ी के अलावा उन्हें पंजाबी, मराठी व उर्दू भाषा की अच्छी जानकारी है.

* उन्हें लिखना-पढ़ना, शॉपिंग, वीडियो गेम, बास्केट बॉल व स्न्वॉश खेलने का बहुत शौक है.

* शास्त्रीय संगीत, कत्थक व लेटिन डांस का भी उन्होंने बाक़ायदा प्रशिक्षण लिया है.

* जेब ख़र्च के लिए सोनम ने वेट्रेस के रूप में नौकरी भी की है.

* मोटापे के लिए आलोचना करने पर उन्होंने अपने बॉयफ्रेंड के साथ रिश्ता तोड़ दिया था.

* उन्होंने सिंगापुर में थिएटर व आर्ट की पढ़ाई की है.

* ब्लैक फिल्म में संजय लीला भंसाली के असिस्टेंट डायरेक्टर से करियर की शुरुआत की.

* अपनी पहली फिल्म सांवरिया के लिए सोनम ने दो साल में 35 किलो वज़न कम किया था.

* स्टाइल आयकॉन सोनम की मां सुनीता कॉस्ट्यूम डिज़ाइनर हैं, साथ ही वे मॉडल भी रह चुकी हैं.

* जल्द ही सोनम को पॉलिटिक्स करते हुए भी देखा जाएगा. दरअसल, सोनम का इरादा राजनीति में आने का है.

ऊषा गुप्ता

Sonam Kapoor

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क्यों घट रहा है पुरुषों में स्पर्म काउंट? (What Are The Reasons For Low Sperm Count In Men?)

पिछले 40 सालों में पुरुषों (Men) के स्पर्म काउंट (Sperm Count) में काफ़ी गिरावट आई है और यह गिरावट दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही है. ऐसा नहीं है कि स़िर्फ भारतीय पुरुष ही इसके शिकार हैं, बल्कि यह पूरी दुनिया के पुुरुषों को प्रभावित कर रहा है. क्या हैं इसके कारण और बचाव के उपाय, आइए जानते हैं. 

Low Sperm Count In Men

क्या कहते हैं आंकड़े?

–     वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइज़ेशन (WHO) के अनुसार, पिछले 40 सालों में पूरी दुनिया के पुरुषों के स्पर्म काउंट और क्वालिटी में भारी कमी आई है.  पहले हर सैंपल में जो स्पर्म काउंट 60 मिलियन होता था, अब वो महज़ 20 मिलियन रह गया है.

–     हमारे देश में हर साल 12-18 मिलियन कपल्स इंफर्टिलिटी के शिकार हो रहे हैं, जिसमें 50% पुरुष शामिल हैं.

–     आज यह स्थिति आ गई है कि हर छह में से एक कपल इंफर्टिलिटी का शिकार हो रहा है.

–     साथ ही यह बहुत गंभीर बात है कि हर साल पुरुषों के स्पर्म काउंट में 2% की कमी देखी जा रही है. ऐसा ही चलता रहा, तो कुछ ही सालों में इंफर्टिलिटी एक गंभीर सामाजिक समस्या बन जाएगी.

क्यों घट रहा है स्पर्म काउंट?

हमारी बदलती लाइफस्टाइल और वर्क कल्चर ने बहुत कुछ बदल दिया है. जिस तेज़ी से पुरुषों के स्पर्म काउंट में कमी आ रही है, उसके लिए बहुत हद तक ये चीज़ें ही ज़िम्मेदार हैं. इसके अलावा और क्या हैं इस कमी के कारण, आइए देखते हैं.

–     दिन-ब-दिन बढ़ता मोटापा

–     अनहेल्दी लाइफस्टाइल

–     फिज़िकल एक्टिविटी की कमी

–     बहुत ज़्यादा टाइट कपड़े पहनना

–     वर्कप्लेस पर बढ़ता प्रेशर

–     स्मोकिंग और अल्कोहल

–     बहुत ज़्यादा इमोशनल स्ट्रेस

–     हार्मोंस का असंतुलन

–     इनडोर व आउटडोर पोल्यूशन

–     लगातार लैपटॉप पर काम करने से टेस्टिकल्स का तापमान बढ़ता है, जिससे स्पर्म प्रोडक्शन पर असर पड़ता है.

–     कुछ दवाइयों के साइड इफेक्ट के कारण भी ऐसा हो सकता है.

–     पर्यावरण में बढ़ती गर्मी इसका एक और कारण है.

पहचानें इसके लक्षण

अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण नज़र आता है, तो तुरंत किसी एक्सपर्ट सेे संपर्क करें. याद रखें, स्पर्म काउंट की समस्या को जितनी जल्दी सुलझाएंगे, ज़िंदगी उतनी आसान होगी. ग़ौर करें इन लक्षणों पर.

–     इजैकुलेशन में द़िक्क़त महसूस होना.

–     बहुत कम सीमेन का निकलना.

–     इरेक्टाइल डिस्फंक्शन.

–     सेक्सुअल डिज़ायर में कमी.

–     साथ ही बार-बार सांस संबंधी समस्या होना.

–     चेहरे और शरीर पर बालों का बढ़ना.

–     इंफर्टिलिटी से जूझ रहे पुरुषों के सूंघने की शक्ति में भी कमी देखी जाती है.

क्या है सामान्य स्पर्म काउंट?

आमतौर पर एक मि.ली. सीमेन में 15 मिलियन या फिर हर सैंपल में 39 मिलियन स्पर्म काउंट सामान्य माना जाता है. दूसरे शब्दों में कहें, तो एक मि.ली. सीमेन में 10 मिलियन से कम स्पर्म काउंट असामान्य माना जाता है और ऐसे पुरुषों को इंफर्टिलिटी का इलाज कराना पड़ता है.

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Low Sperm Count In Men
कैसे बढ़ाएं स्पर्म काउंट?

–     रोज़ाना 30-45 मिनट्स की फिज़िकल एक्टीविटी स्पर्म काउंट को बढ़ाने में मदद करती है.

–    एक्सपर्ट्स के मुताबिक़, वेट लॉस और स्पर्म काउंट की बढ़ोत्तरी में डायरेक्ट लिंक देखा गया है. बेहतर होगा कि वेट लॉस पर ध्यान दें.

–     स्मोकिंग ब्लड वेसल्स को डैमेज करती है, जिससे गुप्तांगों में भी ब्लड फ्लो में द़िक्क़त आती है. साथ ही ये आपकी कामोत्तेजना को भी प्रभावित करती है, इसलिए बेहतर होगा कि जल्द-से-जल्द स्मोकिंग छोड़ दें.

–     लो स्पर्म काउंट के बारे में अपने डॉक्टर को बताएं, हो सकता है उनके द्वारा दी गई दवाइयों के कारण ऐसा हो रहा हो.

–     बढ़ते हुए स्ट्रेस के कारण शरीर रिप्रोडक्शन पर ज़्यादा ध्यान नहीं दे पाता है, इसलिए ़तनाव को कम करने की कोशिश करें.

–     ताज़े फल, सब्ज़ियां और साबूत अनाज अपने डायट में शामिल करें. कोशिश करें कि जंक फूड या पैक्ड फूड ज़्यादा न खाएं.

–     द जर्नल रिप्रोडक्टिव बायोलॉजी एंड एंडोक्रेनोलॉजी में प्रकाशित स्टडी के मुताबिक, पुरुषों के विटामिन डी और कैल्शियम के लेवल और स्पर्म काउंट का सीधा संबंध है, इसलिए अगर विटामिन डी की कमी रही, तो कपल को कंसीव करने में द़िक्क़त महसूस होती है. अपने शरीर में विटामिन डी और कैल्शियम का लेवल बनाए रखें.

–     रेग्युलर एक्सरसाइज़ और अच्छी नींद से भी स्पर्म काउंट बढ़ता है.

–     लंबे समय तक एक ही जगह पर न बैठें. इससे पुरुष गुप्तांग में गर्मी बढ़ जाती है, जो स्पर्म प्रोडक्शन में रुकावट पैदा कर सकता है.

–     कोशिश करें कि ज़्यादा-से -ज्यादा हेल्दी फैट्स लें. ओमेगा3 और ओमेगा6 इसमें काफ़ी लाभदायक सिद्ध होता है. आप चाहें, तो ओमेगा3 के सप्लीमेंट्स भी ले सकते हैं.

अपनाएं ये फर्टिलिटी फूड्स

अंडा: स्पर्म काउंट बढ़ाने के लिए यह बेस्ट फूड माना जाता है. अंडे में भरपूर मात्रा में प्रोटीन और विटामिन ई होता है, जो स्पर्म को फ्री रैडिकल्स से बचाते हैं.

केला: विटामिन ए, बी1 और सी के गुणों से भरपूर केला स्पर्म प्रोडक्शन को बढ़ावा देता है. इसमें ब्रोमेलेन नामक नेचुरल एंटी इंफ्लेमेट्री एंज़ाइम होता है, जो स्पर्म की गुणवत्ता और गतिशीलता कोे बढ़ाता है.

पालक: फॉलिक एसिड के गुणों से भरपूर पालक हेल्दी स्पर्म काउंट बढ़ाने में उपयोगी साबित होता है. अगर आपके शरीर में फॉलिक एसिड की कमी होगी, तो अनहेल्दी स्पर्म बनेंगे, जो आपके किसी काम नहीं आएंगे.

मेथी: लो स्पर्म काउंट और कामोत्तेजना को बढ़ानेवाला यह पारंपरिक घरेलू नुस्ख़ा है. एक शोध के मुताबिक़, लगातार 12 हफ़्तों तक मेथी के सेवन से स्पर्म काउंट और सीमेन में बढ़ोत्तरी देखी गई है.

अनार: यह एक बेहतरीन फर्टिलिटी बूस्टर माना जाता है. इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स ब्लड फ्री रैडिकल्स से लड़ने में मदद करते हैं. यह स्पर्म काउंट और क्वालिटी दोनों में लाभदायक है.

लहसुन: यह एक बेहतरीन इम्यूनिटी बूस्टर है. विटामिन बी6 और सेलेनियम के गुणों से भरपूर लहसुन स्पर्म प्रोडक्शन को बढ़ाता है.

ब्रोकोली: इसमें मौजूद फॉलिक एसिड फर्टिलिटी दूर करने में मदद करता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक़, अगर रोज़ खाने में इसे शामिल किया जाए, तो आपका स्पर्म काउंट 70% तक बढ़ सकता है.

डार्क चॉकलेट: रात के खाने के बाद अगर आप और आपके पार्टनर स़िर्फ एक टुकड़ा डार्क चॉकलेट खाएं, तो स्पर्म काउंट की समस्या जल्द ही ख़त्म हो जाएगी. इसमें मौजूद एल-आर्जिनाइन स्पर्म प्रोडक्शन में काफ़ी लाभदायक सिद्ध होता है.

अखरोट: ब्रेन फूड के नाम से मशहूर अखरोट स्पर्म काउंट बढ़ाने में भी मदद करता है. ओमेगा3 फैटी एसिड्स से भरपूर अखरोट स्पर्म की गतिशीलता बढ़ाने में मददगार साबित होता है.

टमाटर: बेहतरीन फर्टिलिटी फूड्स में शुमार टमाटर इंफर्टिलिटी की समस्या को दूर करने में काफ़ी फ़ायदेमंद साबित होता है. इसमें मौजूद लाइकोपीन स्पर्म की बनावट और गतिशीलता में काफ़ी मदद करता है. अपने रोज़ाना के खाने में टमाटर शामिल करें.

गाजर: बीटा कैरोटीन और एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर गाजर स्पर्म को फ्री रैडिकल्स से बचाती है, जिससे स्पर्म जल्दी नष्ट नहीं होते. यह उनकी गतिशीलता बढ़ाने में भी सहायक होती है.

अश्‍वगंधा: सालों से हमारे देश में इसे आयुर्वेदिक दवा के रूप में लिया जाता रहा है. अश्‍वगंधा न स़िर्फ टेस्टोस्टेरॉन के लेवल को बढ़ाता है, बल्कि इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या को भी दूर करता है.

कद्दू के बीज: अमीनो एसिड्स और एंटी-ऑक्सीडेंट्स के गुणों से भरपूर कद्दू के बीज पुरुषों की फर्टिलिटी बढ़ाते हैं. यह हेल्दी स्पर्म काउंट को बढ़ाने में मदद करता है, जिससे उनकी गतिशीलता भी बढ़ जाती है.

– सुनीता सिंह

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सफल अरेंज मैरिज के एक्सक्लूसिव 15 मंत्र (15 Exclusive Relationship Mantra For Successful Arrange Marriage)

दादी-नानी या माता-पिता के समय की अरेंज मैरिज की सफलता का फ़ॉर्मूला आज के दौर में फिट नहीं बैठता. मॉडर्न युग में क्या हैं सफल अरेंज मैरिज के मंत्र, आइए जानते हैं. कहते हैं शादियां स्वर्ग में तय होती हैं और हर किसी के लिए कोई न कोई जीवनसाथी ज़रूर होता है. पर आज की युवापीढ़ी इस कथन में अधिक विश्‍वास नहीं करती. वह तो लव मैरिज को अधिक महत्व देती है. लेकिन मेट्रो सिटीज़ व खुले विचारोंवाले परिवारों को छोड़ दें, तो आज भी ज़्यादातर शादियां अरेंज ही होती हैं और वैवाहिक जीवन भी सफल होता है. तो आइए, सफल अरेंज मैरिज के इन मंत्रों को जानें.

Relationship Mantra

1. शादी को सफल बनाने का मूल मंत्र है- प्यार, विश्‍वास, समझौता और सामंजस्य. धीरे-धीरे एक-दूसरे को समझें, एडजस्ट होने के लिए व़क़्त और स्पेस दें. फिर देखें, किस तरह रिश्तों में मज़बूती आती है.

2. अरेंज मैरिज में दोनों पार्टनर एक-दूसरे के लिए अजनबी होते हैं. अतः घबराहट होना स्वाभाविक है. यदि आप भी ऐसा महसूस करती हैं, तो कारण जानने की कोशिश करें. कई बार किसी अनजान व्यक्ति के साथ रहने की कल्पना, नए परिवार के साथ तालमेल बैठाने का डर, वहां के तौर-तरीक़ों की चिंता आदि से मन डरता है. मन की घबराहट को पार्टनर के साथ शेयर करें. उसके ज़रिए परिवार के बारे में जानने की कोशिश करें. पार्टनर के साथ सहज हो जाने पर परिवार के साथ सामंजस्य बैठाने में परेशानी नहीं होगी.

3. अरेंज मैरिज का अर्थ है- ज़्यादा ज़िम्मेदारियां और ज़्यादा अपेक्षाएं. दोनों ही पार्टनर्स पर उन सारी बातों पर खरा उतरने का दबाव रहता है. दबाव ज़रूर लें, लेकिन इतना नहीं कि आपसी तालमेल ही गड़बड़ाने लगे.

4. जरूरी नहीं कि पार्टनर को आपकी हर पसंद-नापसंद में रुचि हो या आप दोनों के विचार एक जैसे हों. कभी-कभी विपरीत स्वभाववाले पार्टनर्स भी बहुत ख़ुश रहते हैं.

5. हो सकता है नए परिवार की सोच आपके जीवन मूल्यों को सही न माने और आपको लगातार बताया जाए कि इस परिवार में ऐसा ही होता है. निश्‍चय ही ऐसे माहौल में आप परेशान हो जाएं, घुटन भी हो, पर रिलैक्स! शादी में सामंजस्य व अनुकूलता भी होती है. ऐसी स्थिति में पार्टनर से सही शब्दों के चुनाव के साथ सौम्य लहजे में बात करें. उन्हें अपनी उलझन बताएं, ताकि परिवार के किसी भी सदस्य को नाराज़ किए बिना समस्या का हल निकल आए.

6. शुरू-शुरू में पार्टनर या परिवार के सदस्यों की किसी भी बात, कमेंट या व्यवहार को दिल पर न लें. न ही जैसे को तैसा वाली पॉलिसी अपनाएं, बल्कि जो लोग परेशानियां पैदा करते हैं, उनसे संभलकर रहें. सूझबूझ से स्थिति को संभालें. निश्‍चय ही ऐसा व्यवहार आप दोनों को ख़ुशियां देगा. एक-दूसरे के क़रीब लाएगा.

7. परिवार में होनेवाली हर छोटी-छोटी बात की शिकायत पार्टनर से न करें, न ही बात-बात पर आंसू बहाएं. याद रहे, वो भी आपकी तरह ही ज़्यादा नहीं, तो थोड़ी-बहुत दुविधा से गुज़र रहा है.

8. प्यार एक ऐसी भावना है, जो हर मुश्किल को आसान बना देती है. अरेंज मैरिज में भी कभी तो देखते ही प्यार हो जाता है और कभी साथ चलते-चलते प्यार हो जाता है, वो भी ऐसा कि जीवन के हर आंधी-तूफ़ान से जूझने की ताक़त बन जाता है. प्यार देंगे, तो प्यार मिलेगा भी.

9. प्यार की नींव है विश्‍वास. पार्टनर पर विश्‍वास करें और उनके भरोसे को भी बनाए रखें. धैर्य से काम लें. पार्टनर या परिवार के सदस्यों की ग़लतियों के प्रति क्षमाशील बनें. जो बीज हम बोते हैं, वही फल हमें मिलता है.

10. शादी एक कमिटमेंट है, जहां आप अपनी बेफ़िक़्र दुनिया से निकलकर ज़िम्मेदारी, कमिटमेंट, त्याग, समझौतों के भंवर में घूमते रहते हैं. लेकिन यही बातें विवाह को मज़बूत बनाती हैं.

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Relationship Mantra

11. हो सकता है आप अपने नए परिवार के मुक़ाबले आर्थिक रूप से ज़्यादा संपन्न परिवार से हों, ज़्यादा स्मार्ट या हर तरह से बेहतर हों. लेकिन याद रहे, शादी किसी मुक़ाबले का प्लेटफॉर्म नहीं है. अतः तुलनात्मक विचारधारा को आड़े न लाएं. अब यह परिवार आपका है, इसे बेहतर बनाने में सहयोग दें.

12. रिश्तों को मज़बूत करने के लिए संवाद सबसे मुख्य है. कभी भी अपने पार्टनर से झूठ न बोलें. एक झूठ आपको मुसीबत में डाल सकता है. एक बार आपका झूठ पकड़ा गया, तो फिर से वह विश्‍वास पाना असंभव हो जाता है.

13. विवाह की सफलता के लिए दोनों परिवारों को जोड़कर रखना भी आपका व आपके पार्टनर का काम है. यह तभी संभव है जब दोनों परिवारों के प्रति स्नेह व आदर का समान भाव हो.

14. रिश्तों को बनाए रखने में मुस्कुराहट बड़ा काम करती है. आप ख़ुद भी आनंदित होते हैं और दूसरों का मन भी जीत लेते हैं.

15. इन सारी बातों के अलावा कुछेक व्यक्तिगत बातें भी हो सकती हैं, जिन्हें अपने ढंग से सुलझाकर विवाह को सफल बनाया जा सकता है.

– प्रसून भार्गव

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ऑफिस रोमांस के साइड इफेक्ट्स (Side Effects Of Office Romance)

कहते हैं इश्क़ और मुश्क छिपाए नहीं छिपते… और इश्क़ यदि ऑफिस कलीग से हो जाए, तो इसकी ख़बर आग की तरह पूरे ऑफिस में फैल जाती है… और फिर शुरू होता है ऑफिस रोमांस (Office Romance) के साइइ इफेक्ट्स (Side Effects) का सिलसिला…

Side Effects Of Office Romance

बढ़ते कॉम्पटीशन ने ऑफिस में काम के घंटे बढ़ा दिए हैं, जिसके कारण लोग अपना ज़्यादातर समय ऑफिस में ही बिताते हैं. ऐसे में लंबे समय तक साथ काम करते हुए अपने सहकर्मी से प्यार हो जाना कोई आश्‍चर्य की बात नहीं है. साथ काम करते हुए हम कलीग से अपने सुख-दुख बांटते हैं, एक-दूसरे की रुचियों को जानते हैं. ऐसे में जब कोई मनचाहा सहकर्मी मिलता है, तो उसके प्रति आकर्षण बढ़ जाता है. हम उसके साथ ज़्यादा से ज़्यादा समय बिताना पसंद करते हैं और ऐसा करते हुए अक्सर कलीग से प्यार हो जाता है. लेकिन ऑफिस रोमांस की राह इतनी आसान नहीं है. यदि आपको अपने सहकर्मी से इश्क़ हो जाए, तो ये एहसास आपके लिए जितना रूमानी होगा, उतनी ही मुश्किलें भी खड़ी कर सकता है.

हां, वो मुश्किल दौर था मेरे लिए…

28 वर्षीया सुहानी ने बताया, वो मेरी पहली जॉब थी और मैं अपने काम के प्रति पूरी तरह समर्पित थी. फिर एक प्रोजेक्ट में मुझे रोहित के साथ काम करने का मौक़ा मिला. रोहित का सुलझा हुआ व्यवहार और अपने काम के प्रति लगन मुझे बहुत पसंद आई. मैं रोहित से काम को लेकर कई सवाल पूछती और वो पूरे धैर्य के साथ मेरे हर सवाल का जवाब देता. शायद रोहित को भी अब मेरा साथ अच्छा लगने लगा था. फिर प्रोजेक्ट पूरा होने की ख़ुशी में रोहित ने मुझे ट्रीट दी और उसी दिन अपने प्यार का इज़हार भी कर लिया. मैं तो जैसे तैयार बैठी थी रोहित का साथ पाने के लिए. रोहित का साथ पाकर मुझे ऑफिस और भी अच्छा लगने लगा था, लेकिन उसके बाद हम ऑफिस में नॉर्मल व्यवहार नहीं कर पाते थे. हमारा प्यार हमारी बॉडी लैंग्वेज से झलकने लगा था. हम रोज़ सुबह साथ ऑफिस आते और शाम को भी ऑफिस से जल्दी निकलने के बहाने तलाशते. ऑफिस में भी लंच ब्रेक, टी ब्रेक के बहाने बाहर निकल जाते. ऑफिस टाइम में एक-दूसरे को मैसेज करते. धीरे-धीरे हमारे इश्क़ के चर्चे पूरे ऑफिस में चर्चा का विषय बन गए. रोहित सीनियर था, इसलिए वो अपना काम संभाल लेता था, लेकिन मेरे काम में अब शिकायतें आने लगी थीं. बॉस और सीनियर्स से अब मुझे वॉर्निंग मिलने लगी थी. ऑफिस में हम दोनों की इमेज ख़राब होने लगी थी. मैं समझ गई थी कि अब हमें एक ऑफिस में काम नहीं करना चाहिए. इससे पहले कि बात और बिगड़ जाती, मैंने दूसरी नौकरी तलाश ली. ये हम दोनों के लिए मुश्किल ज़रूर था, लेकिन हमारे रिश्ते के लिए यही सही फैसला था.

ऑफिस रोमांस की वजहें

ऑफिस कलीग से प्यार हो जाने की कई वजहें हैं और ऐसा होना स्वाभाविक है. आमतौर पर इन वजहों से ऑफिस रोमांस शुरू होता है:

लंबे समय तक साथ काम करना

आजकल काम के घंटे बढ़ते जा रहे हैं और शिफ्ट ड्यूटी, नाइट शिफ्ट में साथ काम करते हुए सहकर्मी आपस में भावनात्मक रूप से जुड़ जाते हैं. ऐसे में उनके बीच अफेयर या रोमांस होना आम बात है.

समानताएं

एक ही प्रोफेशन में काम करनेवाले लोगों की कई आदतें और पसंद-नापसंद भी आपस में मेल खाती हैं, इसलिए ऐसे व्यक्ति से प्रभावित होना या उससे प्यार हो जाना स्वाभाविक है. साथ काम करते हुए ऐसे सहकर्मी कई बार एक-दूसरे के इतने क़रीब आ जाते हैं कि उन्हें प्यार हो जाता है और फिर वो एक-दूसरे से दूर नहीं रह पाते.

भावनात्मक लगाव

भावनात्मक लगाव हमें किसी से भी हो सकता है. साथ काम करते हुए कुछ लोगों से हम बहुत ज़्यादा घुल-मिल जाते हैं, ऐसे में उस शख़्स से प्यार हो जाना कोई आश्‍चर्य की बात नहीं है.

ऑफिस रोमांस के साइड इफेक्ट्स

ऑफिस कलीग से प्यार हो जाना कोई बुरी बात नहीं है, लेकिन आप जब ऑफिस के काम और अपने इस रिश्ते को सही तरह से बैलेंस नहीं कर पाते, तब ऑफिस रोमांस के साइड इफेक्ट्स दिखने शुरू हो जाते हैं.

काम पर होता है असर

जब ऑफिस में दो लोगों के बीच रोमांस चल रहा होता है, तो वो हर पल साथ रहना चाहते हैं. साथ रहने के बहाने तलाशने के लिए वो बार-बार टी ब्रेक लेते हैं या आपस में मैसेज करते रहते हैं. इससे उनका काम पर से ध्यान हटता है और इसका उनके परफॉर्मेंस पर असर होता है.

एक साथ छुट्टी लेना

दो प्यार करनेवाले हमेशा मिलने के बहाने तलाशते रहते हैं और जब किसी को अपने ऑफिस कलीग से प्यार हो जाता है, तो वो भी डेट पर जाने के बहाने तलाशते रहते हैं. ऐसे में दोनों के एक साथ छुट्टी लेने से ऑफिस के काम पर असर पड़ता है.

ब्रेकअप का दर्द

ज़रूरी नहीं कि ऑफिस की हर लव स्टोरी सक्सेसफुल ही हो, ऐसे में जब दोनों का ब्रेकअप होता है, तो उनका काम में मन नहीं लगता. वो ऑफिस में एक-दूसरे को देखकर डिस्टर्ब हो जाते हैं. इससे भी ऑफिस का ही नुक़सान होता है.

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Office Romance Effects
कैसे बचें ऑफिस रोमांस के साइड इफेक्ट्स से?

कॉलेज के बाद ऑफिस ही एक ऐसी जगह है, जहां पर सबसे ज़्यादा अफेयर होते हैं. ऑफिस में हमउम्र सहकर्मी के प्रति आकर्षित होना आम बात है. लेकिन जब आपको ऑफिस में किसी से प्यार हो जाए, तो आपको ऑफिस के नियमों का पालन करते हुए अपनी लव स्टोरी को आगे बढ़ाना चाहिए. ऑफिस रोमांस के साइड इफेक्ट्स से बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखें.

* ऑफिस में भले ही आपका अपने कलीग के साथ अफेयर चल रहा हो, लेकिन काम के समय स़िर्फ अपने काम पर ध्यान दें. अपने इस ख़ास रिश्ते के लिए ऑफिस के पहले और बाद का समय रखें.

* काम के समय आपस में मैसेज द्वारा या इशारों में बात न करें. इससे आपका काम प्रभावित होगा और ऑफिस में आपकी इमेज भी ख़राब होगी.

* आपके अफेयर की ख़बर आपके अन्य सहकर्मियों या बॉस तक न पहुंचे तो ही अच्छा है, वरना आपकी हर गतिविधि पर नज़र रखी जाएगी और हर बात को आपके अफेयर से जोड़कर देखा जाएगा. इससे आपकी नौकरी ख़तरे में पड़ सकती है.

* बार-बार टी ब्रेक के बहाने या लंच के लिए बाहर न जाएं, रोज़ ऐसा करने से आपके अफेयर की बात सबको पता चल जाएगी और फिर आपके ब्रेक लेने पर भी पाबंदी लग सकती है.

* डेट पर जाने का प्रोग्राम छुट्टी के दिन बनाएं. ऑफिस में एक साथ दोनों की ग़ैरहाज़िरी से एक तो आपके अफेयर के बारे में सबको पता चल जाएगा और इससे ऑफिस का काम भी प्रभावित होगा.

* अपने पर्सनल रिश्ते को ऑफिस के काम पर हावी न होने दें. यदि किसी बात पर डिबेट चल रहा हो, तो बिना सोचे-समझे स़िर्फ अपने पार्टनर का सपोर्ट न करें, वो जहां पर ग़लत हों, वहां पर उनका विरोध अवश्य करें.

ऑफिस रोमांस के आंकड़े
सुहानी और रोहित की कहानी आपको लगभग हर ऑफिस में मिल जाएगी, क्योंकि एक साथ काम करने वाले सहकर्मियों के बीच प्यार हो जाना कोई नई बात नहीं है. एक सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार 58 प्रतिशत लोगों का ये मानना है कि वे या तो ऑफिस रोमांस में शामिल रहे हैं या उन्हें ऐसा करने में कोई आपत्ति नहीं है.
ऑफिस रोमांस के फ़ायदे

माना ऑफिस रोमांस आपके काम या जॉब के लिए हानिकारक हो सकता है, लेकिन आप यदि समझदारी से काम लें और काम पर फोकस करते हुए अपने रिश्ते को भी बैलेंस करते जाएं, तो ऑफिस रोमांस आपके लिए एक सुखद अनुभव हो सकता है. ऑफिस रोमांस के अपने ही फ़ायदे हैं-

* रोज़ ऑफिस आने का मन करता है.

* आप ऑफिस में ख़ुश रहते हैं, इसलिए काम अच्छा करते हैं

* ऑफिस के काम में आपका मन लगता है.

* आप ऑफिस में हमेशा प्रेज़ेंटेबल रहते हैं.

* पार्टनर पर अपना इंप्रेशन जमाने के लिए आप हर काम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं.

* वर्क प्रेशर में भी ख़ुशी से मिल-जुलकर काम करते हैं.

* ऑफिस अफेयर की वजह से आप घर की समस्याएं ऑफिस तक नहीं लाते.

– कमला बडोनी

 

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क्यों बढ़ रहा है सेक्स रिसेशन? (What Are The Reasons Behind Increasing Sex Recession?)

आजकल की युवापीढ़ी स़िर्फ जॉब रिसेशन का ही नहीं, बल्कि सेक्स रिसेशन (Sex Recession) का भी सामना कर रही है. अब आप सोच रहे होंगे कि यह सेक्स रिसेशन क्या बला है और भला युवाओं का सेक्स रिसेशन से क्या लेना-देना? तो हमारी और आपकी इसी उलझन को सुलझाने के लिए हमने बात की कुछ सेक्स एक्सपर्ट्स से.

Sex Recession

क्या है सेक्स रिसेशन?

सेक्स रिसेशन यानी सेक्स में घटती दिलचस्पी. बढ़ती उम्र के साथ सेक्स में रुचि कम होना स्वाभाविक है, पर जब कम उम्र में ही सेक्स में रुचि घटने लगे, तो यह सेक्स रिसेशन का संकेत हो सकता है. आपको यह जानकर आश्‍चर्य होगा कि भारत सहित कई देशों में हुए शोधों से यह बात पता चली है कि पिछले दशक की तुलना में अब लोग ख़ासतौर पर युवा कम सेक्स कर रहे हैं.

क्या कहते हैं आंकड़े?

2013 में नेशनल सर्वे ऑफ सेक्सुअल एंड लाइफस्टाइल (नैटसाल)  द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक़, 16 से 44 साल के लोग हर महीने पांच से कम बार सेक्स करने लगे हैं. 2014 में ऑस्ट्रलियाई नेशनल सर्वे ऑफ सेक्सुअल एक्टिविटी के मुताबिक़, आजकल कपल्स प्रति सप्ताह औसतन दो बार सेक्स संबंध बनाते हैं, जबकि 10 साल पहले यह औसत चार बार था. यह स्थिति जापान में और भी भयावह दिख रही है. वहां किए गए एक सर्वे के अनुसार 16 से 25 साल की उम्र की 46 फ़ीसदी जापानी महिलाएं और 25 फ़ीसदी जापानी पुरुष सेक्स संबंधों से घृणा करते हैं. जबकि ब्रिटेन में हाल ही में हुए एक सर्वे के अनुसार, वहां की आधी आबादी हफ़्ते में स़िर्फ एक ही बार सेक्स करती है. 16 से 44 वर्ष की आयुवाले पुरुष और महिलाओं पर किए इस सर्वे में पाया गया कि वर्ष 2001 से 2012 के दौरान वहां के लोगों की सेक्सुअल एक्टिविटी 50 फ़ीसदी कम हो गई है.

ऐसा क्यों हो रहा है?

इसकी कई वजहें हैं. विशेषज्ञों की मानें तो इसका सबसे प्रमुख कारण है तकनीक का बढ़ता इस्तेमाल. ऑनलाइन पोर्नोग्राफी, इंटरनेट और सोशल मीडिया इत्यादि कारणों से सेक्स के प्रति लोगों की रुचि कम होती जा रही है. आइए, इस बारे में विस्तार से जानते हैं.

पोर्नोग्राफी

ऑनलाइन पोर्नोग्राफी के बढ़ते चलन से कई लोगों में इंटरनेट सेक्स एडिक्शन जैसी बीमारी  देखने को मिल रही है, जिसके कारण उनका रियल सेक्स के प्रति झुकाव कम होते जा रहा है. इस बारे में बात करते हुए के.ई.एम हॉस्पिटल मुंबई के कंसल्टेंट इन सेक्सुअल मेडिसिन एंड सेक्सोलॉजिस्ट डॉ. राजन भोसले कहते हैं, “जिन लोगों को पोर्न फिल्मों की लत लग जाती है, उन्हें रियल सेक्स की जगह पोर्न में ही मज़ा आने लगता है, क्योंकि वे उस काल्पनिक दुनिया से बाहर नहीं आ पाते और उसी तरह के सेक्स की कल्पना करने लगते हैं. ऐसे में अगर पार्टनर उनकी अपेक्षाओं पर पूरा नहीं उतर पाता, तो सेक्स संबंध बनाने से उन्हें अरुचि हो जाती है. वहीं कुछ कपल्स में यह हीनभावना भी घर कर जाती है कि उनमें पोर्न में दिखाए जानेवाले स्टार की तरह न ही स्टेमिना है और न ही वैसी परफेक्ट बॉडी. ऐसे में वे पार्टनर से दूरी बना लेते हैं.”

इंटरनेट

इंटरनेट ने हमारी ज़िंदगी आसान तो बना दी है, लेकिन इसके कई साइड इफेक्ट्स भी हैं. सेक्स रिसेशन उनमें से एक है. इस बारे में बताते हुए डॉ. राजन भोसले कहते हैं, “आजकल के ज़्यादातर कपल्स अपने स्मार्ट फोन में इतने व्यस्त रहते हैं कि वे साथ होते हुए भी साथ नहीं हो पाते. खाली व़क्त में एक-दूसरे के साथ समय बिताने और सेक्स की पहल करने से ज़्यादा उन्हें मोबाइल स्क्रीन में दिलचस्पी होती है.” इस बारे में अपनी राय रखते हुए डिपार्टमेंट ऑफ यूरोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पिटल, नई दिल्ली के डायरेक्टर डॉ. रजिन्द्र यादव कहते हैं, “आजकल की युवापीढ़ी एक-दूसरे से मिलकर रिलेशनशिप रखने की बजाय ऑनलाइन डेटिंग और डिजिटल सोशलाइज़िंग ज़्यादा पसंद करती है, जिसका असर उनके सेक्स संबंधों पर भी पड़ता है.”

2014 में अमेरिका में माइकल मैलकॉल्म और जॉर्ज नाउफैल नामक दो शोधकर्ताओं ने 18 से 35 साल के 1500 युवाओं पर सर्वे किया. इनसे इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल और उनके रोमांटिक जीवन पर पड़ने वाले असर के बारे में पूछा गया. ईस्टर्न इकोनॉमिक जरनल में प्रकाशित इस अध्ययन में देखा गया कि जो लोग ज़्यादा देर तक इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं, उनमें शादी करने की दर कम होती है.

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Sex Recession
काम का बढ़ता प्रेशर व तनाव

स्ट्रेस और वर्क प्रेशर भी सेक्स के प्रति नीरसता की प्रमुख वजहों में से एक है. डॉ. राजन भोसले के अनुसार,“पहले के समय में महिलाएं घर पर रहती थीं. दिनभर काम करके जब पति घर लौटता था, तो वे उसे रिझाने की कोशिश करती थीं, जिससे उनकी सेक्स लाइफ में उत्तेजना बनी रहती थी. पर आज के समय में पति-पत्नी दोनों ही वर्किंग होते हैं. दोनों पर काम का दबाव इतना होता है कि सेक्स उनकी प्राथमिकता की लिस्ट से गायब हो जाता है. काम का तनाव कपल्स को शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से इतना शिथिल कर देता है कि उनकी कामोत्तेजना ख़त्म होने लगती है.” इसका समर्थन करते हुए डॉ. रजिन्द्र यादव कहते हैं, “तनाव से हार्मोंस का स्तर गड़बड़ हो जाता है और इन सबका असर सेक्स संबंधों पर भी पड़ता है.”

बॉडी बिल्डिंग का क्रेज़

डॉ. रजिन्द्र यादव का मानना है कि आज के युवाओं में बॉडी बिल्डिंग का इतना अधिक क्रेज़ हो गया है कि वे जल्दी से जल्दी बॉडी बनाने के चक्कर में डायट सप्लीमेंट्स और स्टेरॉयड्स  का सहारा लेते हैं, जिससे उनकी बॉडी थोड़े समय के लिए बन तो जाती है, लेकिन लॉन्ग टर्म में उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ता है. स्टेरॉयडयुक्त डायट सप्लीमेंट खाने से नपुंसकता व सेक्स में अरुचि जैसी समस्याएं होती हैं.

ग़लत खानपान

डॉ. राजन भोसले के अनुसार, “युवा कपल्स में सेक्स के प्रति घटती अरुचि के लिए उनका अनहेल्दी खानपान भी काफ़ी हद तक ज़िम्मेदार है. वे जंक फूड, फ्राइड फूड इत्यादि का अधिक मात्रा में सेवन करते हैं. इस तरह के खाद्य पदार्थों में हाइड्रोजेनटेड फैट्स की मात्रा ज़्यादा होती है, जो सेक्स हार्मोन टेस्टोस्टेरॉन के स्तर को कम करती है, जिसके कारण उनकी सेक्स ड्राइव घटती है.”

2011 में इटली में पोर्न देखने वाले 28 हज़ार लोगों पर एक सर्वे किया गया. सर्वे के मुताबिक़, लोगों पर पोर्न में दिखने वाली काल्पनिक तस्वीरों का ऐसा असर होता है कि वे बेडरूम में सेक्स संबंध के लिए तैयार ही नहीं हो पाते हैं और उनकी स्थिति असहाय जैसी हो जाती है.

डिप्रेशन

पिछले कुछ सालों में युवाओं में डिप्रेशन और एंज़ायटी के केसेज़ बढ़े हैं. डॉ. रजिन्द्र यादव कहते हैं कि आज की युवापीढ़ी नौकरी की असुरक्षा, अपना घर बनाने की जद्दोज़ेहद और कट थ्रोटकॉम्प्टीशन के बीच उलझी है. इन सबका असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है. ऐसे में वे एंटी डिप्रेसेंट जैसी दवाइयों का सेवन करने लगते हैं और इन सबका दुष्प्रभाव उनकी सेक्स लाइफ पर पड़ता है.

सेक्स रिसेशन को दूर करने के उपाय

–     सबसे पहले इंटरनेट और सोशल मीडिया की लत को दूर करना ज़रूरी है. हफ़्ते में कुल मिलाकर दो घंटा पोर्न देखना सेक्स इच्छा को प्रबल करता है. इससे ज़्यादा पोर्न देखने का नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. अतः इस बात का ख़्याल रखना ज़रूरी है.

–     खानपान पर ध्यान दें. जल्दी बॉडी बनाने के चक्कर में अपनी सेहत से खिलवाड़ न करें. सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने के लिए सेक्स बूस्टर खाद्य पदार्थ, जैसे- अंडा, मछली, तेल, ऑलिव ऑयल, एवोकैडो, डार्क चॉकलेट का सेवन करें.

–     काम का बोझ घर लेकर न आएं, क्योंकि  सेक्स का मज़ा उठाने के लिए आराम करना भी ज़रूरी है. जब हम रिलैक्स होते हैं, तो शरीर में सेक्स हार्मोंस का स्राव होता है, जो सेक्स पावर को स्वाभाविक तौर पर बढ़ाता है.

 

– शिल्पी शर्मा

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क्या आपने आज़माए हैं ये 7 सेक्स ड्राइव बूस्टिंग फूड्स? (7 Best Sex Drive Boosting Foods)

सभी जानते और मानते हैं कि सुखी वैवाहिक जीवन का आधार सफल सेक्स लाइफ (Sex Life) है. अगर आपकी सेक्स लाइफ हेल्दी (Healthy) नहीं है, तो आपके वैवाहिक जीवन की नींव भी चरमरा सकती है. ऐसे में बहुत ज़रूरी है कि आप अपने खानपान का ख़्याल रखें, क्योंकि वो तो आपने सुना ही होगा- जैसा खाए अन्न वैसा होए मन. तो ऐसा क्या खाएं कि आपकी सेक्स लाइफ बूस्ट हो जाए. सेक्स लाइफ को बूस्ट करनेवाले सेक्स फूड बूस्टर्स की यहां हमने एक लिस्ट दी है, तो आप भी आज़माएं ये सेक्स पावर फूड्स अपनी सेक्स लाइफ में दोबारा रोमांच जगाएं. 

Boosting Foods For Sex

1. तरबूज़

बहुत से शोधों से यह सिद्ध हुआ है कि तरबूज़ प्राकृतिक वियाग्रा की तरह काम करते हुए सेक्स इच्छा को तेज़ करता है. इसमें लाइकोपीन, बीटा कैरोटीन और सीट्रलाइन जैसे फाइटोन्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं, जो रक्तवाहिकाओं को आराम पहुंचाने में मदद करते हैं. इसका नियमित सेवन करने से कामेच्छा बढ़ती  है.

2. केला

केला सेक्सुअल हेल्थ के लिए अच्छा होता है. इसमें ब्रोमेलिन नामक एंज़ाइम पाया जाता है, जो कामेच्छा बढ़ाने व सेक्स हार्मोन्स को नियंत्रित करने में मदद करता है. इसके अलावा इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी, ए और बी 1 पाया जाता है, जो पुरुषों के शरीर में शुक्राणु पैदा करने की क्षमता को बढ़ाता है.

3. हरी सब्ज़ियां

पालक व अन्य हरी सब्ज़ियों में सेक्स बूस्टर तत्व होते हैं. ये पुरुषों में इरेक्शन को लंबे समय तक बनाए रखने में बेहद कारगर होते हैं, क्योंकि इनमें आर्जिनाइन नामक अमीनो एसिड भरपूर मात्रा में होता है, जो शरीर में जाकर नाइट्रिक ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाता है और इरेक्शन को बेहतर बनाता है.

4. हरी मिर्च

स्वाद में तीखी हरी मिर्च सेहत के साथ-साथ आपकी सेक्स लाइफ में भी रोमांस का तड़का लगाने में मदद कर सकती है. हरी मिर्च का सेवन करने से पुरुषों के प्राइवेट पार्ट्स के आसपास के अंगों में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और कामोत्तेजना बढ़ती है. इसलिए आज ही से अपने डायट में हरी मिर्च को शामिल कर लें.

5. कद्दू के बीज

कद्दू के बीज महिलाओं और पुरुषों दोनों की प्रजनन क्षमता बढ़ाने के लिए फ़ायदेमंद है. इसमें ज़िंक, कैल्शियम, पोटैशियम और फास्फोरस के साथ-साथ विटामिन सी, बी, डी, ई और के पाए जाते हैं, जो कामेच्छा जागृत करने में मदद करते हैं. ज़िंक पुरुषों के सेक्स हार्मोन टेस्टोस्टेरॉन का स्राव व शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने के लिए ज़रूरी है.

6. डार्क चॉकलेट

यह कामेच्छा बढ़ाने में मदद करता है. इसमें एल-आर्जिनिन और अमीनो एसिड होता है, जो सेक्स ड्राइव को प्राकृतिक तरी़के से बढ़ाने में मदद करता है.

7. अंडा

यह प्राकृतिक रूप से यौन शक्ति बढ़ाने में मदद करता है. अंडे में विटामिन बी 5 और बी 6 होते हैं, जो सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने में मदद करते हैं. इसमें मौजूद प्रोटीन से शारीरिक कमज़ोरी दूर होती है और शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है.

ये उपाय भी आज़माएं
तनावरहित रहें

तनाव हृदयगति को बढ़ा देता है, जिससे ब्लड प्रेशर भी बढ़ जाता है. इसका विपरीत प्रभाव सेक्स लाइफ पर भी पड़ता है. इससे बचने के लिए तनाव को मन में रखने की बजाय इस बारे में अपने पार्टनर से बात करें. इससे मन का बोझ हल्का होगा और पार्टनर के साथ रिश्ता भी मज़बूत होगा. तनाव घटाने के लिए नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करें.

भरपूर नींद लें

सेक्सुअल ड्राइव बढ़ाने के लिए आठ घंटे की नींद लेना बहुत ज़रूरी है. वज़न नियंत्रित रखेंः मोटापे का सेक्सुअल ड्राइव पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. अतः वज़न नियंत्रण में रखें.

एक्सपेरिमेंट करें

बहुत से कपल्स एक ही तरह के सेक्सुअल पैटर्न को फॉलो करते हैं. रोज़मर्रा की ज़िंदगी की तरह सेक्स में भी एक ही  रूटीन होने से वो बोरिंग व नीरस बन जाता है. अतः रिश्तों में नई ताज़गी और ऊर्जा लाने के लिए सेक्सुअल एक्सपेरिमेंट्स करते रहें.

 

– शिल्पी शर्मा

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सेक्सुअल पावर बढ़ाने की अमेज़िंग किचन रेमेडीज़ (Amazing Kitchen Remedies To Increase Sexual Stamina)

How to Increase Sexual Stamina

सुखी वैवाहिक जीवन के लिए सेक्स लाइफ का हेल्दी होना बहुत ज़रूरी है. यदि किन्हीं कारणों से आपकी सेक्सुअल लाइफ में पहले जैसी गर्माहट नहीं रह गई, तो परेशान होने की ज़रूरत नहीं है. किचन में मौजूद आसानी से उपलब्ध खाद्य पदार्थोंं की मदद से आप अपनी बेजान सेक्स लाइफ में नई ऊर्जा का संचार कर सकते हैं.

How to Increase Sexual Stamina

–     सेब न सिर्फ़ हमें बीमारियों से बचाता है, बल्कि शहद के साथ सेब का सेवन करने से कामेच्छा जागृत होती है. इसके लिए एक सेब को छीलकर काट लें और मिक्सी में ब्लेंड करें. इसमें 1 टीस्पून शहद, 3-4 बूंद गुलाबजल, चुटकीभर केसर, चुटकीभर जायफल और चुटकीभर इलायची पाउडर डालकर अच्छी तरह मिलाएं. इस सेक्स टॉनिक को खाना खाने के आधा घंटे बाद लें और इसे लेने के बाद चार घंटे तक दूध, दही या मछली का सेवन न करें.

–     आंवला में पर्याप्त मात्रा में आयरन, ज़िंक और विटामिन सी पाया जाता है, जो न स़िर्फ सेहत के लिए फ़ायदेमंद होता है, बल्कि कामोत्तेजना बढ़ाने में भी मदद करता है. दो टेबलस्पून आंवले के रस में एक टीस्पून सूखे आंवले का पाउडर व एक टेबलस्पून शुद्ध शहद मिलाकर दिन में दो बार खाएं. इस नुस्ख़े केइस्तेमाल से आपका और आपके पार्टनर दोनों का सेक्स पावर धीरे-धीरे बढ़ने लगेगा.

–     कामेच्छा बढ़ाने में बादाम भी बेहद फ़ायदेमंद होता है. बादाम को दूध में मिलाकर नियमित सेवन करें. इसके लिए 10 बादाम को रात में पानी में भिगो दें. सुबह छीलकर खाएं या बादाम का दूध बनाकर पीएं. दूध बनाने के लिए भिगोए हुए बादाम को छील लें. एक कप दूध में छिले हुए बादाम, चुटकीभर केसर, चुटकीभर जायफल, स्वादानुसार शक्कर मिलाकर मिक्सी में ब्लेंड करें.

–     लो सेक्स ड्राइव के मामले में खजूर का सेवन करने से फ़ायदा होता है. इसके लिए 10 ताज़े खजूर को एक कटोरी घी में भिगो दें. इसमें एक टीस्पून सोंठ पाउडर, आधा टीस्पून इलायची पाउडर और चुटकीभर केसर मिलाएं. इस मिश्रण को जार में डालें और जार का मुंह ढंककर किसी गर्म स्थान पर 12 दिन के लिए रख दें. रोज़ाना सुबह इस मिश्रण का सेवन करें.

–     प्याज़ और लहसुन कामेच्छा बढ़ाने में प्रभावी हैं. एक टेबलस्पून प्याज़ के रस में एक टीस्पून लहसुन का रस मिलाएं. इस मिश्रण को रोज़ाना खाली पेट शहद के साथ पीएं.

–     यौन रोग, स्वप्नदोष, सेक्स डिज़ायर में कमी, शीघ्रपतन, कमज़ोरी, थकान… आदि किसी भी तरह की सेक्सुअल समस्या को दूर करने के लिए स़फेद प्याज़ बेहद कारगर होता है. 10 मिलीग्राम स़फेद प्याज़ के रस में उतनी ही मात्रा में  शहद, अदरक का रस और घी मिलाकर रोज़ाना पीने से कामेच्छा बढ़ती है.

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How to Increase Sexual Stamina

–     सेक्सुअल पावर बढ़ाने में कालीमिर्चवाला दूध बहुत लाभकारी होता है. इसके लिए एक ग्लास गर्म दूध में एक चौथाई टीस्पून कालीमिर्च पाउडर मिलाकर सोने से पहले पीएं. इससे शारीरिक शक्ति बढ़ेगी और आप व आपके पति सेक्स को ज़्यादा समय तक एंजॉय कर पाएंगे.

–     यौन शक्ति बढ़ाने में जायफल बेहद असरकारी होता है. रोज़ सुबह पानी के साथ एक ग्राम जायफल पाउडर का सेवन करें. इससे काफ़ी फ़ायदा होगा.

–     अजवायन भी सेक्स इच्छा बढ़ाने में मदद करती है. दरअसल अजवायन में एंड्रोस्टेरोन होता है, जो एक तरह  का सेक्स हार्मोन है. इसलिए इसके इस्तेमाल से कामेच्छा जागती है.

–     सेक्स पावर बढ़ाना हो, तो सुबह-शाम दूध के साथ दो ग्राम दालचीनी पाउडर का सेवन करें.

–     उड़द की दाल का इस्तेमाल यौन शक्ति के लिए किया जाता है. आधा टेबलस्पून  उड़द की दाल को कौंच के साथ पीसकर सुबह-शाम लेने से सेक्स पावर बढ़ता है.

–     30 ग्राम काली किशमिश को 200 मिलीलीटर दूध में उबालकर रोज़ाना सुबह-शाम सेवन करने से शारीरिक शक्ति के साथ-साथ कामेच्छा में भी वृद्धि होगी.

–    सेक्सुअल स्टैमिना बढ़ाने में गाजर बेहद कारगर है. इसके लिए 150 ग्राम गाजर को बारीक़ काट लें. इसमें आधा उबला हुआ अंडा और एक टेबलस्पून शहद मिलाकर रोज़ाना दिन में एक बार खाएं.

– शिल्पी शर्मा

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