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कारगिल विजय दिवस: कारगिल युद्ध की याद दिलाती हैं बॉलीवुड की ये 5 फिल्में (Kargil Vijay Diwas: 5 Bollywood Films, Which are inspired from Kargil War)

26 जुलाई का दिन हर हिंदुस्तानी के लिए गर्व का दिन है, क्योंकि 18 साल पहले साल 1999 में आज ही के दिन भारत ने कारगिल युद्ध में पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को करारी शिकस्त देते हुए कारगिल की पहाड़ियों पर तिरंगा फहराया था. बता दें कि कारगिल में भारत और पाकिस्तान के बीच क़रीब ढाई महीने तक युद्ध चला था और भारत ने पाकिस्तान को मैदान-ए-जंग में धूल चटाई थी. इस युद्ध में कई वीर जवानों ने अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए हंसते-हंसते अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे. इसलिए आज का यह दिन जीत का जश्न मनाने के साथ-साथ इस युद्ध के शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का भी है. बता दें कि इस युद्ध पर आधारित बॉलीवुड में कई फिल्में भी बन चुकी हैं. इसी कड़ी में चलिए हम आपको बताते हैं देशभक्ति के रंग में रंगी कारगिल युद्ध पर बनी बॉलीवुड की 5 फिल्में…

 

1- लक्ष्य

साल 2004 में रिलीज़ हुई फिल्म लक्ष्य (Lakshay) में ऋतिक रोशन ने एक ऐसे लड़के का किरदार निभाया था, जिसे अपने जीवन का लक्ष्य ही नहीं मालूम था. हालांकि अपने दोस्तों को देख कर वो सेना में भर्ती होने चला जाता है और फिर ऋतिक कारगिल युद्ध में दुश्मन से लोहा लेते नज़र आते हैं. वो अपनी टीम का नेतृत्व करते हैं और युद्ध में जीत हासिल करते हैं. बता दें कि डायरेक्टर फरहान अख़्तर की इस फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाज़ा गया था.

Lakshay

2- टैंगो चार्ली 

साल 2005 में रिलीज़ हुई फिल्म टैंगो चार्ली (Tango Charlie) लोगों के दिलों में देशभक्ति का ज़ज़्बा जगाने के साथ ही कारगिल युद्ध की याद भी दिलाती है. साल 1999 के कारगिल युद्ध पर बनी इस फिल्म में अजय देवगन और बॉबी देओल मुख्य भूमिका में नज़र आए थे.

Tango Charlie

3- एलओसी कारगिल

डायरेक्टर जेपी दत्ता ने कारगिल युद्ध पर आधारित फिल्म एलओसी कारगिल (LOC Kargil) बनाई थी. साल 2003 में रिलीज़ हुई इस फिल्म में संजय दत्त, अजय देवगन, सैफ अली खान, सुनील शेट्टी, संजय कपूर, अभिषेक बच्चन जैसे सितारे नज़र आए थे. इस फिल्म में असली गोला-बारूद और हथियारों का इस्तेमाल किया गया था. क़रीब 4 घंटे 15 मिनट की यह फिल्म कारगिल युद्ध की यादें ताज़ा कर देती है.

LOC Kargil

4- मौसम 

साल 2011 में रिलीज़ हुई फिल्म मौसम (Mausam) में भी कारगिल युद्ध की कुछ झलकियां दिखाई गई हैं. फिल्म मेकर पकंज कपूर के इस फिल्म की कहानी में कारगिल का बैकड्रॉप था. फिल्म में शाहिद कपूर एक एयरफोर्स ऑफिसर के किरदार में थे, जिसे कारगिल युद्ध के चलते सगाई से ठीक पहले ड्यूटी पर जाना पड़ता है.

Mausam

5- धूप

साल 2003 में आई फिल्म धूप (Dhoop) साल 1999 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए कारगिल युद्ध पर आधारित है. यह फिल्म युद्ध में शहीद हुए जवान अनुज नायर पर बनी थी. फिल्म में अनुज नायर के पिता एस.के. नायर का रोल ओम पुरी ने निभाया था. जिसमें वो अपने शहीद बेटे के हक के लिए सिस्टम में लड़ते हुए नज़र आते हैं.

Dhoop

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Birth Anniversary: संजीदा संजीव के चुलबुले अंदाज़! (Remembering Sanjeev Kumar: A Versatile Hero And An Effortless Actor)

संजीदा संजीव के चुलबुले अंदाज़

Capture (2)

Birth Anniversary: संजीदा संजीव के चुलबुले अंदाज़! (Remembering Sanjeev Kumar: A Versatile Hero And An Effortless Actor)
  • आंखों में संजीदगी, पर होंठों पर कभी मासूम, तो कभी शरारती मुस्कान… कुछ ऐसा ही अंदाज़ था संजीव कुमार का. बात अदाकारी की करें, तो लगता है जैसे ये लफ़्ज़ ही उनके लिए बना हो.
  • हर क़िरदार में ख़ुद को इस तरह ढाल लेना कि देखनेवाला मंत्रमुग्ध हो जाए. संजीव यानी हरिभाई जरीवाला का जन्म 9 जुलाई 1938 को गुजरात के मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था.
  • संजीव की बचपन से ही अभिनय में रुचि थी, यही शौक उन्हें पहले थिएटर की तरफ़ और फिर मायानगरी मुंबई तक ले आया.
  • शुरुआत में उन्हें हम हिंदुस्तानी फिल्म में एक छोटा-सा रोल करने का अवसर मिला और संजीव जैसे उम्दा कलाकार ने इस अवसर को ही अपनी पहचान बना ली, क्योंकि इसके बाद उन्होंने जो भी फिल्में बतौर सहयोगी कलाकार या लीड रोल भी कीं, तो उनसे उनका क़द बढ़ता ही चला गया.
  • संघर्ष जैसी फिल्म ने उन्हें एक पायदान और ऊपर पहुंचा दिया, क्योंकि यहां उनके सामने थे दिलीप कुमार, लेकिन संजीव (Sanjeev Kumar) के सहज अभिनय को देखकर वो भी उनके फैन हुए बिना नहीं रह सके.
  • आंधी, मौसम और खिलौना जैसी फिल्मों ने उन्हें एक संजीदा कलाकार के रूप में दर्शकों के दिलों में ख़ास जगह दिलाई, तो वहीं सीता और गीता, मनचली और अंगूर जैसी फिल्मों में उनकी कॉमिक टाइमिंग और चुलबुले अंदाज़ ने सबको अपना दीवाना बना दिया.
  • शोले के ठाकुर का बदला हो या फिर जानी दुश्मन का वो बेबस पिता, जिसमें एक बुरी आत्मा का कब्ज़ा होता है, त्रिशूल की निगेटिव भूमिका हो या पति पत्नी और वो का बेवफ़ा पति- सबमें ख़ूब जंचे संजीव!
  • खिलौना में एक पागल शायर का रोल, कोशिश में गूंगे-बहरे पति की भूमिका, अनामिका में एक धोखा खाए प्रेमी व लेखक या फिर सिलसिला में एक सीधे-सादे डॉक्टर, जो अपनी पत्नी की बेवफ़ाई को भी आसानी से माफ़ कर देता है- इस तरह के तमाम रोल्स से न्याय संजीव कुमार के अलावा शायद ही कोई कर पाता.
  • लेकिन उनकी सबसे यादगार फिल्म रही नया दिन, नई रात, जिसने उन्हें देश के सबसे बेहतरीन अभिनेताओं की फेहरिस्त में खड़ा कर दिया.
  • रोमांस का बादशाह कहें या कॉमेडी किंग, ट्रेजेडी का मास्टर कहें या इमोशन्स का पैकेज- संजीव कुमार वाकई एक कंप्लीट एक्टर थे.
  • 6 नवंबर 1985 को संजीव ने दुनिया को अलविदा कह दिया था. उनकी बर्थ एनीवर्सरी पर हम उन्हें नम आंखों से याद करते हैं.
देखिए उनके अलग अंदाज़ इन गानों के माध्यम से-

फिल्म: आंधी, गाना- तेरे बिना ज़िंदगी से कोई शिकवा तो नहीं…

फिल्म: मौसम, गाना- छड़ी से छड़ी कैसी गले में पड़ी

फिल्म: मनचली, गाना- मनचली कहां चली…

फिल्म: सीता और गीता, गाना- हवा के साथ-साथ, घटा के संग-संग

फिल्म: मौसम, दिल ढूंढ़ता है फिर वही फुर्सत के रात-दिन…