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क्या आप जानते हैं सिंधु की पर्सनल लाइफ से जुड़ी ये 30 दिलचस्प बातें?(Do you know these 30 interesting things about Sindhu)

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रियो ओलिंपिक में सिल्वर मेडल जीतकर दुनियाभर में देश का नाम रोशन करनेवाली पी. वी. सिंधु बेहतरीन खिलाड़ी होने के साथ ही एक बेहतरीन इंसान भी हैं. खिलाड़ी के रूप में सिंधु का इंटरव्यू तो कई जगह छप चुका है, लेकिन मेरी सहेली अपने रिडर्स के लिए पी. वी. सिंधु की कुछ ऐसी बातें लेकर आयी है, जो आप नहीं जानते होंगे. अपने रिडर्स को पी. वी. सिंधु के एक अलग रूप से मिलवाने के लिए हमने उनसे बात की. बातचीत के दौरान लगा ही नहीं कि किसी स्टार प्लेयर से बात हो रही है. मेडल जीतने के साथ ही सिंधु ने इस छोटे से इंटरव्यू के दौरान हमारा दिल भी जीत लिया. मेरी सहेली से सिंधु ने एक ख़ास सहेली की तरह दिल खोलकर अपनी बातें कीं. पूरे इंटरव्यू के दौरान सिंधु कई बार हंसती और खिलखिलाती हुई  नज़र आईं.

अगर आप बैडमिंटन प्लेयर न होतीं, तो क्या होतीं?
हूं… जब मैं छोटी थी, तो डॉक्टर बनना चाहती थी, लेकिन अब बैडमिंटन के अलावा कोई दूसरा सपना नहींहै. इसी में आगे… बहुत आगे जाना चाहती हूं.

मैच से पहले होनेवाले स्ट्रेस को कैसे कम करती हैं आप?
मैच से पहले होनेवाले स्ट्रेस को मैं अपने कोच से शेयर करती हूं और फ्री महसूस करती हूं. उस खिलाड़ी और अपने गेम स्ट्रैटजी के बारे में अपने कोच से खुलकर बातचीत करती हूं और ख़ुद को रिलैक्स करती हूं.

आपका स्ट्रॉन्ग पॉइंट क्या है?
अटैक. मैं अपने गेम में विरोधी खिलाड़ी पर शुरुआत से ही अटैक करने की कोशिश करती हूं, ताकि शुरुआत से ही मेरा प्रेशर उस पर बना रहे.

आपका वीक पॉइंट क्या है?
(सोचते हुए) फिलहाल तो ऐसा कुछ भी नहीं है.

आपका फेवरेट फूड क्या है?
(मुस्कुराती हुई) इटैलियन. मुझे इटैलियन फूड बहुत पसंद है. इसके अलावा मुझे बिरयानी बहुत पसंद है. मां के हाथ की बिरयानी की बात ही कुछ और होती है.

लाखों प्रशंसकों की फेवरेट हैं आप. क्या आपका भी कोई फेवरेट प्लेयर है?
(हंसती हुई) हां, बिल्कुल. टेनिस स्टार रॉजर फेडरर मेरे फेवरेट प्लेयर हैं.

इंडियन प्लेयर में किसी का नाम बताइए.
विराट कोहली, धोनी और सचिन तेंदुलकर पसंद हैं.

मैच प्रैक्टिस के अलावा क्या करना अच्छा लगता है?
वैसे तो मेरा बहुत-सा समय प्रैक्टिस में ही जाता है, लेकिन इससे समय मिलने पर मैं फैमिली के साथ फिल्म देखना, कज़िंस से मिलना और दोस्तों के साथ एंजॉय करना पसंद करती हूं.

क्या आपको लगता है कि रियो में मेडल जीतने से पहले तक सायना नेहवाल और ज्वाला गुट्टा जैसी खिलाड़ियों की शैडो में आपकी पर्सनैलिटी कहीं दबी हुई सी थी?
(सोचती हुई) हूं… ऐसा नहीं है. हर खिलाड़ी का दिन होता है. इस बार मेरा था. फिलहाल मैं अपने प्रदर्शन से ख़ुश हूं. मुझे बाकी बातों से कोई फर्क़ नहीं पड़ता.

रियो अलिंपिक के बाद लाइफ कितनी बदल गई?
(हंसती हुई) ड्रीम था, जो सच हो गया. मैं बता नहीं सकती कि मैं कितनी ख़ुश हूं.

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पहली बार ओलिंपिक में हिस्सा लिया आपने और पहली बार में ही देश को सिल्वर मेडल दिलाया, लेकिन आपके कोच गोपीचंद कहते हैं कि आप अभी भी अनफिनिश्ड प्रोडक्ट हैं. क्या ये सुनकर बुरा लगता है?
बिल्कुल नहीं. अभी तो मेरी शुरुआत है. मुझे बहुत से टूर्नामेंट खेलने हैं. कोच सर जो कहते हैं सही कहते हैं.

कोर्ट पर और कोर्ट के बाहर भी आपको काफ़ी शांत प्लेयर के रूप में देखा जाता है. रियल सिंधु कैसी हैं?
हूं… सच कहूं तो रियल में भी मैं बहुत शांत हूं. हां, ये बात अलग है कि कोर्ट पर अब मैं अटैक के मूड में रहती हूं. ऐसा पहले नहीं था.

फेवरेट फिल्म कौन-सी है?
मुझे सारी फिल्में अच्छी लगती हैं. चाहे वो बॉलीवुड हो या तेलगु या तमिल.

आपका पसंदीदा बॉलीवुड ऐक्टर कौन है?
(ख़ुश होते हुए) मुझे ऋतिक रोशन पसंद हैं. और हां, रणबीर कपूर भी.

आपकी फेवरेट बॉलीवुड एक्ट्रेस कौन हैं?
दीपिका पादुकोण.

आपका फेवरेट डेस्टिनेशन क्या है?
(हंसती हुई) ओह! ये बता पाना बहुत मुश्किल है. मुझे घूमने का बहुत शौक़ है. हर जगह मुझे पसंद आ जाती है.

ख़ास मौक़ों पर क्या पहनना पसंद करती हैं आप?
मेरे मूड पर डिपेंड करता है. जब जो मूड करता है पहन लेती हूं.

क्या आपको त्योहार पसंद हैं?
हां, मुझे फेस्टिवल्स बहुत अच्छे लगते हैं. दशहरा, दीपावली और गणेश चतुर्थी मेरे पसंदीदा त्योहार हैं.

घर पर रहने पर क्या करना पसंद करती हैं आप?
टीवी देखना और गाना सुनना. इससे मुझे बहुत सुकून मिलता है.

अपने पैरेंट्स की कोई अच्छी बात बताइए.
बहुत ही सपोर्टिव हैं और प्यार करनेवाले हैं. मुझे बहुत मोटीवेट करते हैं.

बाहर जाते समय पर्स में क्या रखना पसंद करती हैं?
(हंसती हुई) पैसा. वैसे मुझे लिपग्लॉस बहुत पसंद है. मेरे पर्स में ये रहता ही है.

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टेनिस स्टार सानिया मिर्ज़ा अपने गेम के साथ ही अपनी ग्लैमरस पर्सनैलिटी से भी लोगों को अट्रैक्ट करती हैं. क्या आप भी ग्लैमराइज़्ड होने में दिलचस्पी रखती हैं?
(हंसती हुई) हा..हा..हा.. क्यों नहीं. वैसे मेरे लिए खेल पहले है. मुझे लगता है कि जैसे-जैसे मैं मैच जीतूंगी ग्लैमर अपने आप आ जाएगा. वैसे ग्लैमराइज़्ड होना कोई बुरी बात नहीं है.

क्या आप गैजेट्स लवर हैं?
(मुस्कुराती हुई) हां, मुझे मेरा मोबाइल बहुत पसंद है. रियो ओलिंपिक में मुझे इससे दूर रखा गया था.

आज की लड़कियों को क्या संदेश देना चाहेंगी?
अच्छा करो. जो जी में आए, उसी फील्ड में करियर बनाओ.

लड़कियों के पैरेंट्स के लिए कोई संदेश?
हां, बेटों की ही तरह अपनी बेटियों को प्रोत्साहित कीजिए. उन्हें आपके सपोर्ट की ज़रूरत है. उन पर विश्‍वास कीजिए और उन्हें आगे बढ़ने में मदद कीजिए. वो आपको कभी निराश नहीं करेंगी.

क्या मेडल जीतने के बाद दोस्तों के बीच अब दूसरी सिंधु दिखती है?
(हंसती हुई) बिल्कुल नहीं, मैं अपने दोस्तों के लिए कभी चेंज नहीं हो सकती.

क्या आपको ड्राइविंग आती है? सचिन द्वारा गिफ्ट की गई कार को आपने चलाया?
हां, मुझे ड्राइविंग आती है, लेकिन अभी तक मैंने वो कार नहीं चलाई है.

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कम उम्र में नेम-फेम के साथ बहुत सारा पैसा भी आपने कमा लिया, तो क्या अब आप आत्मनिर्भर बनकर अलग से उन पैसों को इन्वेस्ट करेंगी या पैरेंट्स को दे दिया है?
(हंसती हुई) जी बिल्कुल भी नहीं, मैंने अपने पैरेंट्स को ये ज़िम्मेदारी दी है. उन्हें जो करना होगा वो करेंगे. मेरा काम स़िर्फ मैच खेलना है.

क्या आप चैरिटी में इंटरेस्ट रखती हैं?
जी, मुझे चैरिटी करना पसंद है, ख़ासतौर पर बूढ़े, ग़रीब, अनाथ बच्चों और लड़कियों के लिए बहुत कुछ करने की इच्छा है और मैं करती भी हूं.

रियो में कांस्य पदक जीतने वाली साक्षी मलिक की शादी की चर्चा ज़ोरों पर हैं. ऐसा लगता है साक्षी बहुत जल्द ही जीवन की दूसरी इंनिंग की शुरुआत करेंगी. क्या आपका भी ऐसा कुछ प्लान है?
(ज़ोर से हंसती हुई) वेल, अभी नहीं. अभी तो मेरा पूरा ध्यान अपनी गेम पर है और आनेवाले ओलिंपिक के साथ दूसरे टूर्नामेंट पर. शादी को अभी टाइम है.

– श्वेता सिंह

रियो पैरालिंपिक: मरियप्पन ने दिलाया देश को पहला गोल्ड (Mariyappan wins gold)

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दिल में अगर दुनिया जीतने का जज़्बा हो, तो कोई भी आपको आगे बढ़ने से नहीं रोक सकता. इसकी मिसाल पूरी दुनिया को रियो पैरालिंपिक में देखने को मिली, ख़ासतौर पर हर भारतीय के लिए गर्व करने का समय है ये. रियो में चल रहे पैरालिंपिक में देश के मरियप्पन थांगावेलू ने हाई जंप में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया. गोल्ड की प्यास तो देश को रियो ओलिंपिक में थी, लेकिन उन खिलाड़ियों ने देश को निराश किया. मरियप्पन के गोल्ड के साथ ही वरुण सिंह भाटी ने हाई जंप के कांस्य पदक पर क़ब्ज़ा जमाया.

यहां हम आपको बता दें कि पैरालिंपिक उन खिलाड़ियों का खेल है, जो किसी न किसी तरह से शारीरिक रूप से अपूर्ण हैं. ज़रा सोचिए शारीरिक रूप से पूर्ण न होते हुए भी मरियप्पन ने देश की झोली में गोल्ड मेडल डाला है. इसे मरियप्प्न का जज़्बा ही कहेंगे. कभी न हार मानने की वो ज़िद्द, जो देश का नाम रोशन कर गई.

जब मरियप्पन गंवा बैठे थे अपना एक पैर
रियो में चल रहे पैरालिंपिक में देश की झोली में चमचमाता स्वर्ण पदक डालने वाले मरियप्पन दुर्घटना में अपना एक पैर गंवा बैठे थे. बात
1995 की है. मरियप्पन महज़ पांच साल के थे. तब उनके स्कूल के पास एक सरकारी बस से टक्कर होने के बाद वह अपना पैर खो बैठे. मरियप्पन की तरह और भी लोग हैं, जो इस तरह की दुर्घटना के बाद हारकर बैठ जाते हैं, लेकिन मरियप्पन की मां ने उन्हें कभी हारना सिखाया ही नहीं. ये उनकी मां का ही विश्‍वास और मनोबल था कि उन्होंने आज देश ही नहीं, बल्कि पूरे विश्‍व में अपनी मां के साथ मातृभूमि का नाम भी रोशन कर दिया.

सब्ज़ी बेचती हैं मरियप्पन की मां
शारीरिक रूप से कमज़ोर होने के साथ ही 22 साल के मरियप्पन की आर्थिक स्थिति भी कमज़ोर है. उनकी मां ने सब्ज़ी बेचकर बच्चों की परवरिश की है. मरियप्पन की ग़रीबी का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि पूरे दिन सब्ज़ी बेचने के बाद स़िर्फ 100 रुपए की आमदनी में पूरे घर का ख़र्च चलाना पड़ता था. फिर भी उनकी मां ने हार नहीं मानी और न ही अपने बच्चों को हारना सिखाया. शायद यही कारण है कि आज देश के लिए उनका बेटा स्वर्ण पदक जीत सका.

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कौन हैं वरुण सिंह भाटी?
जमालपुर गांव के पैरा एथलीट वरुण सिंह भाटी का परिवार किसान है. बचपन में पोलियो ने वरुण के एक पैर को तो प्रभावित कर दिया, लेकिन उनके हौसले को नहीं. अपनी इस कमी को वरुण ने अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया और खेल की दुनिया में क़िस्मत आज़माने निकल पड़े. हम आपको बता दें कि वरुण देश के चुनिंदा पैरा
एथलीट में से एक हैं. वो कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं.

प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ने दी बधाई
देश का नाम रोशन करनेवाले दोनों खिलाड़ियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने बधाई दी.

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मेडल जीतकर सिखा गए की जीत क्या होती है!
मरियप्पन और वरुण सिंह शारीरिक रूप से दिव्यांग होते हुए भी देश के तमाम उन लोगों को एक सबक सिखा गए कि जीत कहते किसे हैं. हार तो आपके भीतर है. बस उस पर जिस दिन आप विजय पा लेंगे दुनिया आपके क़दमों में होगी.

– श्वेता सिंह

योगेश्‍वर दत्त ने लंदन सिल्वर मेडल लेने से किया इंकार!-Hats off to yogeshwar

योगेश्‍वर के जज़्बे को सलाम !

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  • जैसाकि सब जानते हैं कि लंदन ओलिंपिक में योगेश्‍वर दत्त के कांस्य पदक को सिल्वर में अपग्रेड कर दिया गया था, क्योंकि सिल्वर मेडल विजेता रूस के पहलवान बेसिक कुदुखोव का डोप टेस्ट पॉज़िटिव पाया गया था, लेकिन योगेश्‍वर ने ट्विटर पर अपने विचार रखे कि वो चाहते हैं यह सिल्वर मेडल बेसिक के परिवार के पास ही रहे.
  • योगेश्‍वर ने अपने ट्वीट में कहा… अगर हो सके तो ये मेडल उन्हीं पे पास रहने दिया जाए. उनके परिवार के लिए सम्मानपूर्ण होगा.मेरे लिए मानवीय संवेदना सर्वोपरि है.
  • बेसिक कुदुखोव शानदार पहलवान थे. उनका मृत्यु के पश्‍चात डोप टेस्ट में फेल हो जाना दुखद है. मैं खिलाड़ी के रूप में उनका सम्मान करता हूं.

योगेश्‍वर का कांस्य पदक अब सिल्वर में तब्दील होगा!

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  • 2012 लंदन ओलिंपिक के दौरान भारतीय पहलवान योगेश्‍वर दत्त को जो कांस्य पदक हासिल हुआ था, वो अपग्रेड होकर सिल्वर में तब्दील होने जा रहा है.
  • इसकी वजह यह है कि जिस रूसी पहलवान ने उस दौरान सिल्वर मेडल हासिल किया था, उसका डोप टेस्ट पॉज़िटिव निकला.
  • 2012 में 60 किलोग्राम की फ्रीस्टाइल कुश्ती में रूस के बेसिक कुदुखोव ने सिल्वर मेडल जीता था, लेकिन उनका डोप टेस्ट पॉज़िटिव आया और अब योगेश्‍वर इस मेडल के हक़दार हैं.
  • ध्यान रहे, बेसिक कुदुखोव की वर्ष 2013 में कार दुर्घटना में मौत हो चुकी है, लेकिन इस माह रियो ओलिंपिक से पहले अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक समिति ने लंदन ओलिंपिक के दौरान एकत्र किए सैंपल्स का फिर से परीक्षण किया था. ये सैंपल्स 10 वर्ष तक सुरक्षित रखे जाते हैं और यह एक स्टैंडर्ड प्रैक्टिस है.

Sakshi Malik-रियो ओलिंपिक… जीत की साक्षी… महिला कुश्ती में भारत को मिला कांस्य पदक!

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छा गईं साक्षी मलिक!
  • फ्री स्टाइल महिला कुश्ती में 58 किलोग्राम की वेट केटेगरी में भारत की साक्षी मलिक ने बाज़ी मार ली और इस तरह से रियो ओलिंपिक में भारत को पहला पदक भी मिल गया.(Sakshi Malik)
  • 23 वर्षीय साक्षी(Sakshi Malik) ने बुधवार को हुए कुश्ती के मुकाबले में कज़ाकिस्तान की अइसुलू टाइबेकोवा के पराजित कर कांस्य पदक हासिल किया.

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  • एक समय था जब साक्षी इस मुकाबले में 0-5 से पिछड़ रही थीं, लेकिन साक्षी ने दूसरे राउंड में 8-5 से यह मुकाबला जीत लिया.
  • प्रेस कॉन्फ्रेंस में साक्षी ने कहा कि उनके मन में एक बार भी यह ख़्याल नहीं आया कि वो हार जाएंगी.
  • साक्षी का कहना था, “भले ही मैं पिछड़ रही थी, लेकिन मेरे मन में नकारात्मक ख़्याल नहीं आए. मुझे यही लग रहा था कि यह मेडल मेरा है और देखिए मेरे हाथ में मेडल आ गया. मेरे सपना था कि मैं अपने देश का झंडा लेकर ग्राउंड में सबके सामने गर्व से सिर ऊंचा करके दौड़ सकूं और आज मेरा यह सपना पूरा हो गया.”
  • साक्षी ओलिंपिक में कुश्ती में पदक हासिल करनेवाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं. हमें गर्व है देश की बेटी साक्षी पर!!!