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पुरुषों की आदतें बिगाड़ सकती हैं रिश्ते (Bad Habits Of Men Can Ruin Your Relationship)

पुरुषों की आदतें बिगाड़ सकती हैं रिश्ते (Bad Habits Of Men Can Ruin Your Relationship)

पुरुषों की ऐसी कई आदतें हैं, जो उनसे जुड़े लोगों को पसंद नहीं आतीं और आगे चलकर यही आदतें झगड़े का कारण भी बनती हैं, ख़ासतौर पर पति-पत्नी के रिश्ते में. फिर धीरे-धीरे छोटे-छोटे झगड़ों से ही रिश्ते में तनाव आने लगता है और रिश्ते बिगड़ जाते हैं. आइए, संक्षेप में इसके बारे में जानते हैं.

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– पुरुषों में ईगो यानी अहंकार ख़ूब होता है. वे अपने अहंकार के आगे भावनाओं की कद्र बहुत कम करते हैं. उनकी इस आदत से उनकी पार्टनर बहुत दुखी रहती है और बार-बार ऐसा होने पर वह अपने रिश्ते में घुटन महसूस करने लगती है.

– ऐसे कई पुरुष होते हैं, जो अपनी बात पर कायम नहीं रहते. वे आज कुछ कहते हैं और बाद में उनका स्टेटमेंट कुछ और हो जाता है. इससे रिश्तों में दरार पड़ते देर नहीं लगती.

– ऐसे पुरुषों पर महिलाएं कम ही विश्‍वास करती हैं, क्योंकि उन्हें पता होता है कि कल वह अपनी बात से मुकर जाएंगे.

– यह मानी हुई बात है कि जब रिश्ते में विश्‍वास ही न हो, तो वह टिकेगा कैसे. ऐसे में पत्नियां तो अपने ऐसे पतियों की किसी भी बात को गंभीरता से नहीं लेती हैं और अपनी बातें शेयर करने से भी कतराती हैं.

– क्योंकि पति की बात-बात पर पलट जाने की आदत पत्नी के मन में संशय के बीज बो देती है और रिश्ते में कड़वाहट आ जाती है.

– ऐसे पुरुषों की भी कमी नहीं है, जो अपने घर-परिवार को बिल्कुल वक़्त नहीं देते. उन्हें लगता है कि पैसे कमाकर घर में दे देना ही बहुत है. जबकि परिवार को उनके साथ समय बिताने की अधिक ज़रूरत होती है. ऑफिस से घर आकर वे मोबाइल फोन, टीवी या कंप्यूटर पर चिपक जाते हैं, जो सही नहीं है.

– मनोवैज्ञानिक शामा गुप्ता कहती हैं कि पुरुषों का घर को समय न देना, उससे जुड़े सभी रिश्तों को प्रभावित करता है, विशेषतौर पर जीवनसाथी से. तब वह इस बात को लेकर झगड़ती रहती है या अपनी एक अलग दुनिया बना लेती है और ज़्यादा समय बाहर गुज़ारना शुरू कर देती है. इसका परिणाम अक्सर अलगाव के रूप में दिखाई देता है.

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– पुरुषों की ज़रूरत से ज़्यादा कंट्रोल करने की आदत से भी रिश्तों में दम घुटने की नौबत आ जाती है.

– साथ ही पुरुषों का बेहद ख़्याल रखने की आदत से भी रिश्ते ख़राब होने लगते हैं.

– शामा गुप्ता कहती हैं कि पार्टनर को भी हक़ है कि वह ख़ुद कुछ निर्णय ले सके और तय कर सके कि उसे क्या करना है. पुरुष का प्रोटेक्टिव होना अच्छी बात है, पर वह इतना भी ख़्याल न रखे कि पार्टनर उसके बिना कुछ कर ही न पाए. इस तरह तो उसका वजूद ही डगमगाने लगता है और कई बार विद्रोह की नौबत आ जाती है.

– अधिकतर पुरुषों की वीकेंड पर देर तक सोने और नहीं नहाने की आदत होती है, जिससे पत्नी परेशान हो जाती है. यह क्या बात हुई कि हर चीज़ बेड पर ही चाहिए. बेड पर ही चाय, कॉफी, लंच और डिनर लेते हैं. दिनभर टीवी पर न्यूज़ और क्रिकेट देखते रहते हैं. और यदि आपने उन्हें नहाने के लिए कह दिया, तो समझो आपने उनका वीकेंड ख़राब कर दिया.

– कई पति इतने लापरवाह होते हैं कि वे अपना गीला तौलिया बिस्तर पर, गंदे मोज़े सोफे के नीचे डाल देते हैं. पत्नी अगर उनके बैग से लंच बॉक्स न निकाले, तो वह बाहर निकलेगा ही नहीं. और न जाने क्या-क्या करते हैं. घर को सजाकर रखनेवाली व व्यवस्थित तरी़के से रहनेवाली सफ़ाई पसंद पत्नी को अपने पति की ये आदत बिल्कुल भी पसंद नहीं आती है.

– पार्टनर ग़लती करे, तो उससे माफ़ी मंगवाए बिना न रहनेवाले पुरुष अपनी ग़लती को कभी मानने को तैयार नहीं होते. पुरुषों की यह ग़लती स्वीकार नहीं करने की आदत से भी महिलाओं को बहुत परेशानी होती है.

– कई पुरुषों की आदत होती है कि लड़ाई-झगड़ा होने पर पुरानी बातों को लेकर ताने-उलाहने देने लगते हैं. उनकी कुरेदने की यह आदत रिश्तों में कड़वाहट ला देती है. अतः यह ज़रूरी है कि हर पुरुष उपरोक्त सभी बातों पर ध्यान दें और उनमें उचित सुधार लाएं, जिससे रिश्तों की डोर मज़बूत बनी रहे.

– सुमन वत्स

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पुरुषों को इन 10 मामलों में दख़लअंदाज़ी पसंद नहीं (Men do not like Interference in These 10 Things)

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पुरुषों को अपनी सोच, पसंद, शौक़ या फिर उनके बनाए हुए सिद्धांत आदि को बदलना या उसमें दख़लअंदाज़ी करना बिल्कुल भी पसंद नहीं है. वैसे तो ये फेहरिस्त काफ़ी लंबी है, फिर भी हमने ऐसे 10 मामलों को बताने की कोशिश की है, जिनमें दख़लअंदाज़ी पुरुषों को कतई गवारा नहीं.

Men do not like Interference

1. ख़र्च संबंधी मामले- रुपए-पैसों के मामले में हमेशा पुरुष अपनी आमदनी को अपने हिसाब से ख़र्च करते हैं और सही भी मानते हैं. वो सही हैं या ग़लत इस पर किसी भी प्रकार की राय ख़ासकर पत्नियों की सलाह या टिप्पणी उन्हें कतई पसंद नहीं और हिसाब-किताब के बारे में पूछताछ उनके अहम् को चोट पहुंचाती है. साथ ही वे और ़ज़्यादा सीक्रेटिव हो जाते हैं.

2. ड्राइविंग सेंस- पुरुष घर का मुखिया है, इसलिए वो चाहता है कि घर-बाहर के हर मामले में उसका निर्णय सर्वमान्य होना चाहिए. ड्राइविंग सीट पर बैठने के साथ भी यही नज़रिया बना रहता है. इस विषय पर चलती कार में या आगे-पीछे कोई सलाह दे या उनकी क़ाबिलियत पर शंका या प्रश्‍न उठाए उन्हें पसंद नहीं. पुरुष को हमेशा अपनी ड्राइविंग सेंस पर ़ज़्यादा नाज़ होता है कि उनकी ड्राइविंग बेहतर व सुरक्षात्मक है.

3. सुपरमैन छवि- पुरुष हमेशा से स्वयं को महान व सुपरमैन समझते हैं. उनके मन में बसी उनकी इस छवि को कभी ठेस न पहुंचाएं, ये उनका अति संवेदनशील एरिया है. घर में शांति चाहिए, तो जैसा है, उसे उसी रूप में स्वीकारें. इस छवि में फेरबदल करने की कोशिश महंगी पड़ सकती है. यदि करना ही चाहती हैं, तो पहले अनुकूल माहौल तैयार करें. तारीफ़ के दो-चार शब्द कहें, फिर बड़े प्यार से मुद्दे पर आएं.

4. दूसरों से तुलना- अपने पति महोदय की तुलना भूलकर भी किसी और के साथ न करें, ख़ासकर अपने पिता, भाई, जीजा, पड़ोसी या मित्रों से. ऐसी तुलना उन्हें कभी भी अच्छी नहीं लगेगी, बल्कि मामला बिगड़ सकता है. मायकेवालों से की गई तुलना, तो निश्‍चित रूप से उनका मूड बिगाड़ेगी. आपकी और आपके मायकेवालों की अनगिनत कमज़ोरियां बढ़-चढ़कर सामने आ जाएंगी और आप उस पल को कोसेंगी, जब तुलना के शब्द मुंह से निकले थे.

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5. सेक्स अपील- ये भी एक ऐसा एरिया है, जहां स़िर्फ और स़िर्फ उनकी अपनी सोच मायने रखती है. बड़े तो बड़े टीनएजर्स को भी इस विषय में अपनी मां या बहन अथवा गर्लफ्रेंड की सलाह या राय नहीं चाहिए. उन्हें अपनी सेक्स अपील पर पूरा भरोसा है. वो जानते हैं कि उनकी किस अदा पर लोग दीवाने होते हैं और कौन-से अंदाज़ पर बात बन जाती है.

6. प्रिय आदतें- पुरुष को अपनी हर आदत से प्यार होता है. चाहे आदत बेमतलब लंबी-लंबी हांकने की हो या फिर चापलूसी करने की. पब्लिक में दांत या नाक कुरेदने की अनहाइजिनिक आदत हो या फिर सोशल एटीकेट तथा मैनर्स में कमी. इस बारे में चर्चा करना या टोकना अपनी शामत बुलाना है. दख़लअंदाज़ी या सुधारने की कोशिश महंगी पड़ सकती है. उनका मूड तो उखड़ेगा ही आप भी अपसेट होंगी और मामला वहीं
का वहीं.

7. लाइफ़स्टाइल- अपने रहन-सहन के बारे में भी उनकी अपनी सोच है. आपकी दख़लअंदाज़ी बिल्कुल नहीं चाहिए. बाथरूम में बैठकर बुक पढ़ना पसंद है या हर दो घंटे में चाय चाहिए. देर रात तक कंप्यूटर पर बैठें या बेड-टी बेड पर ही लें. ऑफ़िस में जींस पहनकर जाएं या पैंट के साथ चप्पल पहनें- ये सब उनका अपना लाइफ़स्टाइल है. इसमें वो कंफ़र्टेबल हैं. उन्हें सुकून मिलता है, तो किसी की दख़लअंदाज़ी क्यों पसंद आएगी और क्यों किसी की सलाह मानें? अगर बदलने की कोशिश करना चाहें, तो धैर्य और प्यार को अपना हथियार बनाइए.

8. प्यारे मित्र- यदि इनके चहेते मित्रों के बारे में आपने कुछ भी निगेटिव कह दिया, तो मुश्किल में पड़ सकती हैं. भले ही आपकी छठी इंद्रिय मित्रों की क़ाबिलियत या चरित्र पर शंका का संकेत दे रही हो. भले ही आपको लग रहा है कि वो मतलबी व चमचे हैं, लेकिन याद रखिए संगी-साथियों की आलोचना से पुरुष का मूड बिगड़ सकता है, तो कमेंट न करना ही बेहतर है.

9. मातृभक्ति- हर बेटे की दृष्टि में उसकी मां सर्वगुण संपन्न, सीधी-सादी, अच्छी व धर्मपरायण महिला है. अपनी मां और बहन के विषय में पुरुष बहुत संवेदनशील होते हैं. उनके बारे में किए गए कमेंट्स आपके आपसी संबंधों में कड़वाहट पैदा कर सकते हैं. रिश्तों की मधुरता व सलामती के लिए उनकी भावनाओं को समझिए और अपना मलाल अपने तक ही रखिए, वरना तू-तू मैं-मैं होने में देर
नहीं लगेगी.

10. मोबाइल, मेल, डायरी- किसी भी पुरुष को यह बिल्कुल भी पसंद नहीं कि उसके मैसेज, मेल या डायरी कोई उसकी अनुमति के बिना पढ़े. भले ही कोई ऐसी-वैसी सीक्रेट न भी हो. यदि आपने पढ़ ही लिया है, तो प्लीज़ उस पर कमेंट करके उनके पर्सनल क्षेत्र में दख़लअंदाज़ी न करें, वरना आपकी शांत ख़ुशहाल ज़िंदगी को अशांत होते समय नहीं लगेगा.

– प्रसून भार्गव

 

स्त्रियों की 10 बातें, जिन्हें पुरुष कभी समझ नहीं पाते (10 Things Men Don’t Understand About Women)

Things Men Don't Understand About Women

मुझे आज आइस्क्रीम खाने का नहीं, बल्कि कॉफी पीने का मन कर रहा है… हमेशा बोलकर बताना क्यों पड़ता है? क्या आप कभी बिना कहे समझ नहीं सकते… आप नहीं समझोगे…  (Things Men Don’t Understand About Women)इस तरह की बातें कई बार पुरुषों को महिलाओं से सुनने को मिलती हैं. क्या वाकई महिलाओं को समझना बहुत मुश्किल है? आइए, नारी-मन को टटोलने की कोशिश करें. women

Things Men Don't Understand About Women

स्त्री-मन एक तरफ़ जहां बहुत सरल है, वहीं बहुत जटिल भी है. स्त्री और पुरुष केवल शारीरिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी काफ़ी भिन्न हैं. कई बार स्त्री जो कहती है, उसका मतलब वह नहीं होता है, जो वो कहना चाहती है. तो आइए जानें, स्त्री-मन के कुछ ऐसे राज़, जिन्हें शायद पुरुष कभी जान ही ना पाएं.

1. पर स्त्री प्रशंसाः चाहे कभी भी स्त्री खुलेतौर पर यह ना कहे, पर अगर स्त्री को कोई बात सबसे ज़्यादा बुरी लगती है, तो वह है दूसरी स्त्री की प्रशंसा. फिर वह स्त्री चाहे आपकी मां-बहन, दोस्त-सहकर्मी या पड़ोसन ही क्यों न हो. इसलिए अब आगे किसी भी स्त्री की प्रशंसा करने से पहले दो बार सोचिएगा ज़रूर या फिर यदि आप किसी की प्रशंसा कर भी रहे हैं, तो साथ ही अपनी पत्नी की प्रशंसा भी कर देें. स्त्री, ख़ासकर एक पत्नी कभी भी नहीं चाहेगी कि उसका पति किसी और की तारीफ़ करे. हो सकता है कि वो इस बात को कभी सबके सामने ज़ाहिर न करे, लेकिन इसे आपको समझना होगा.

2. सुझाव देनाः यह ऐसी चीज़ है, जिसे स्त्रियां पसंद नहीं करतीं या शायद नफ़रत करती हैं. यदि आपको कोई स्त्री अपनी किसी परेशानी या समस्या के बारे में बताती है, तो इसका मतलब है कि वह चाहती है कि आप उसकी बातें किसी अच्छे श्रोता की तरह सुनें और उस पर कोई सुझाव न दें. अगर आपको अपनी पत्नी के चेहरे पर शिकन और परेशानी दिखे, तो समझ जाएं कि वह चाहती है कि आप अपने सारे काम छोड़कर उससे पूछें कि समस्या क्या है और स़िर्फ सुनें. उस पर तब तक सुझाव न दें, जब तक सामने से मांगा न जाए.

3. ख़र्चों का हिसाबः यहां मामला ज़रा हटकर है. एक बात हमेशा याद रखें कि लड़कियों और स्त्रियों को दूसरों के ख़र्चों का हिसाब रखना तो पसंद होता है, लेकिन यदि कोई उनसे ख़र्चों का हिसाब मांगे और ख़ासकर अगर हिसाब मांगनेवाला पति या बॉयफ्रेंड हो, तो उन्हें पसंद नहीं आता. इसलिए आगे से अपनी पत्नी या गर्लफ्रेंड को कभी भी फ़िज़ूलख़र्च करनेवाली ना कहें. अपने ख़र्चों की तुलना कभी भी उसके ख़र्चों से न करें. वे कभी भी आपसे इस बारे में नहीं कहेंगी, पर ऐसा कोई ज़िक्र होते ही उनका मूड ख़राब ज़रूर हो जाएगा.

4. बिन कहे समझ लेंः थोड़ा अजीब है ना, पर यह सौ फ़ीसदी सही है. सभी स्त्रियां चाहती हैं कि उन्हें किसी भी ज़रूरत या किसी भी चीज़ के लिए अपने पार्टनर से कहना न पड़े. वे चाहती हैं कि पुरुष बिना कहे ही उनकी सारी ज़रूरतों को समझ ले और उन्हें पूरा कर दे. फिर वह ज़रूरत प्यार की हो, सहारे की या फिर कोई और. ऐसा इसलिए है कि स्त्रियां ख़ुद भी ऐसी ही होती हैं, वे बिना कहे ही अपने साथी की सारी ज़रूरतों को समझ लेती हैं. स्त्रियों के लिए प्यार मांगने के लिए नहीं होता है. वे बिना मांगे मिलनेवाले प्यार में विश्‍वास रखती हैं.

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5. सेंटर ऑफ अट्रैक्शनः स्त्री चाहे कई सारी सहेलियों-रिश्तेदारों से घिरी रहे, पर वह हमेशा अपने पति या साथी का पूरा ध्यान पाना चाहती है. वह चाहती है कि उनके साथी का केंद्रबिंदु वो ही रहे. स्त्री की ख़ुद की दुनिया बहुत छोटी होती है. वो हर छोटी से छोटी बात में अपने साथी का प्रोत्साहन चाहती है.

6. सही संकेत देंः हमेशा याद रखें कि स्त्रियां अवलोकन करने में माहिर होती हैं. वे कही हुई बातों से ज़्यादा अपने अवलोकन पर विश्‍वास करती हैं. स्त्रियों को ख़ामोशी और संकेतों को पढ़ना अच्छा लगता है. उदाहरण के तौर पर, यदि आप बच्चों के साथ ज़्यादा घुलते-मिलते नहीं हैं, तो इसका उनकी नज़र में मतलब है कि आपमें मैरिज मटेरियल नहीं हैं. फिर आप उन्हें लाख समझाने की कोशिश करें कि आप उनसे शादी करके उन्हें ख़ुश रखेंगे. यदि आप किसी स्त्री के साथ हैं, तो उन्हें अपनी तरफ़ से सही संकेत दें.

7. स्पर्श की भाषाः पुरुष चाहे इसमें विश्‍वास रखे या न रखे, पर स्त्री स्पर्श की भाषा में बहुत विश्‍वास रखती है. हल्की-सी छुअन भी उसे रोमांचित कर सकती है या फिर किसी के ग़लत इरादों के बारे में बता सकती है. स्त्री के स्पर्श के मायने काफ़ी अलग हैं. पति का उनका स़िर्फ हाथ पकड़ना या ऑफिस से आने के बाद उन्हें बांहों में भर लेना, उनके लिए किसी ऐसे संवाद से कम नहीं, जिसमें शब्द न हो. इसलिए वे समय-समय पर चाहती हैं कि उनका साथी उन्हें प्यार से छूए या फिर बांहों में भर ले.

8. ग़ुस्से का मतलब हमेशा ग़ुस्सा नहीं होताः पुरुषों को शायद इसे समझने में थोड़ी मुश्किल हो, क्योंकि वे अपनी भावनाओं को सीधे तौर पर ज़ाहिर करते हैं, पर स्त्रियों के मामले में यह थोड़ा उल्टा है. यदि किसी दिन आप घर आएं और आपकी श्रीमतीजी ग़ुस्से में हैं, बात-बात पर आप पर बरस रही हैं, तो इसका मतलब यह मत निकालिए कि वे आपसे नाराज़ हैं. हो सकता है कि दिनभर में कुछ ऐसा हुआ हो, जिससे वह परेशान हो या हो सकता है कि उनके ग़ुस्से के पीछे कोई बहुत बड़ी पीड़ा छुपी हो. कई बार तो स्त्री अपनी किसी कमज़ोरी या बीमारी को छिपाने के लिए भी ग़ुस्सा करती है. अतः जब कभी आपको लगे कि आपकी पत्नी बेवजह ग़ुस्सा कर रही है, तो उससे लड़ने की बजाय यह जानने की कोशिश करें कि कौन-सी बात उसे परेशान कर रही है.

9. भावनात्मक प्यारः सेक्स स्त्रियों के मामले में ज़रा संवेदनशील मसला है. पहले ही यह बताया गया है कि स्त्रियां बहुत भावुक होती हैं. वे रिश्ते के हर स्तर पर पहले भावनाओं से जुड़ती हैं. सेक्स में भी ऐसा ही है. स्त्रियों के लिए सेक्स कोई प्रक्रिया या ज़रूरत नहीं है. उनके लिए सेक्स एक ऐसा माध्यम है, जिससे वे किसी पुरुष के साथ भावनात्मक स्तर पर जुड़ती हैं. वे सेक्स को शारीरिक नहीं, मानसिक स्तर पर अधिक महत्व देती हैैं. इसलिए सेक्स के मामले में उनकी ज़रूरतें भी अलग होती हैं. उन्हें सेक्स से पहले फोरप्ले पसंद है. वे चाहती हैं कि सेक्स के दौरान पार्टनर उन्हें पैंपर करे और सेक्स के बाद उनसे ख़ूब बातें भी करे.

10. जेंटलमैन पहली पसंदः आज स्त्री-पुरुष समानता का ज़माना है, बाहर स्त्री चाहे जितना पुरुषों की तरह सबल और कठोर दिखने की कोशिश कर ले, पर अपना पार्टनर वो ऐसा चाहती है, जिस पर वो निर्भर हो सके. वह ऐसा पुरुष चाहती है, जो न केवल उसकी अच्छाइयों को, बल्कि उसकी कमज़ोरियों को भी जाने. और न स़िर्फ उन्हें जाने, बल्कि उन्हें आत्मसात् कर ले और स्वीकार कर ले. वह चाहती है कि उसका पार्टनर कभी उसकी कमज़ोरियों को किसी बाहरवाले के सामने न आने दे.

– विजया कठाले निबंधे

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30 के बाद करें रिटायरमेंट प्लानिंग ( Retirement Planning After 30 )

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ज़िंदगी में क़ामयाब करियर पाने के लिए प्लानिंग करना जितना ज़रूरी है, उतना ही अहम् है रिटायरमेंट के बाद की ज़िंदगी का नक्शा तैयार करना यानी अपना रिटायरमेंट प्लान करना. किन अहम् बातों का ध्यान रखकर रिटायरमेंट के बाद की ज़िंदगी को भी आप ख़ुशगवार बना सकते हैं.

कुछ अहम् सवाल
रिटायरमेंट प्लानिंग की बात आते ही सबसे पहले जो बात ज़ेहन में आती है, वो यही है कि रिटायरमेंट के बाद नियमित आमदनी में कोई बाधा तो नहीं आएगी? इसके साथ ही कुछ और सवाल भी जुड़ जाते हैं, जैसे-

  • क्या मेरे पास इतनी संपत्ति या साधन होंगे, जो रिटायरमेंट के बाद भी पर्याप्त आय दे सकें?
  • उस व़क़्त तक ख़र्चों (लिविंग कॉस्ट) का स्तर कितना बढ़ जाएगा?
  • उस समय तक हेल्थ केयर कितना महंगा हो जाएगा?
  • सोशल सिक्यॉरिटी बेनिफिट्स का लेवल क्या होगा?
  • लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट में कितना नफ़ा-नुक़सान होगा? नुक़सान होने पर अगर शुरू में ही ज़्यादा पैसा निकालना पड़ा तो…?

इन सारी चिंताओं का निचोड़ यही है कि रिटायरमेंट तक देश की मुद्रास्फीति में कितनी बढ़ोत्तरी होगी और आपकी बचत, जमाराशि व इन्वेस्टमेंट पर इसका कितना असर पड़ेगा? मुद्रास्फीति का असर ही आपके ख़र्चों यानी लिविंग कॉस्ट व हेल्थ केयर लागत को भी बढ़ा देता है. ज़ाहिर है, रिटायरमेंट प्लानिंग करते व़क़्त आपको मुद्रास्फीति के संभावित स्तर को भी ध्यान में रखना होगा. भविष्य की मुद्रास्फीति के स्तर का अंदाज़ा लगाने के लिए आपको दस या बीस साल पहले के मुद्रास्फीति स्तर से इसके मौजूदा स्तर की तुलना करनी होगी. देखना होगा कि इन सालों में मुद्रास्फीति किस दर से बढ़ी है. इससे दस या बीस साल बाद के संभावित मुद्रास्फीति स्तर का कुछ अनुमान आप लगा सकेंगे.

रिटायरमेंट प्लानिंग के 5 स्टेप्स
मुद्रास्फीति का आकलन कर लेनेे के बाद आप अपने पैसे को इस तरह मैनेज कर पाएंगे कि वह अंत तक आपका साथ दे सके. इसके लिए इन 5 स्टेप्स पर
अमल करें-

1. इन बातों पर ग़ौर करें

  • इन्फ्लेशन (मुद्रास्फीति) आपकी संपत्ति(जमाराशि, निवेश और प्रॉपर्टी) पर कितना असर डालेगी?
  • रिटायरमेंट इनकम टिकाऊ होने के साथ-साथ बढ़ती भी रहेगी या नहीं.
  • लाभदायक सरकारी योजनाओं पर नज़र रखें. सोशल सिक्योरिटी व मेडीकेयर जैसी योजनाएं आपके बजट को संतुलित रखने में मददगार हो सकती हैं.
  • रिटायरमेंट इनकम प्लानिंग में लंबी उम्र, हेल्थ केयर के बढ़ते ख़र्चों और अन्य अतिरिक्त ख़र्चों का ध्यान ज़रूर रखें, ताकि आपको अपना कोई निवेश समय से पहले न निकालना पड़े.

2. बचत व निवेश विकल्पों को परखें
हर व्यक्ति अधिक से अधिक उम्र तक जीना चाहता है. अतः अपनी इनकम प्लान की लॉन्गेविटी (अवधि या उम्र) भी अधिक से अधिक रखें, ताकि आपका पैसा अधिक समय तक आपके साथ रहे. इसके साथ ही, इन्फ्लेशन यानी मुद्रास्फीति को नज़र में रखते हुए अपनी लाइफ़ स्टाइल का एक ख़ाका बनाएं. मुद्रास्फीति न स़िर्फ आपके ख़र्चों की लागत बढ़ा देती है, बल्कि आपकी बचत व निवेश की क़ीमत भी घटा देती है. बचत व निवेश के विकल्पों को अच्छी तरह परखें, जिनमें आप अपना पैसा डालेंगे. इस बात का ध्यान रखें कि यहां भी मुद्रास्फीति आपके मैच्योरिटी अमाउंट पर अपना असर डालेगी. साथ ही ऐसे विकल्पों में बचत या निवेश करें, जिनमें आपको आयकर नहीं देना पड़े या कम देना पड़े. कई निवेश विकल्पों में आयकर से छूट दी जाती है.

3. सेहत से जुड़े जोखिम
उम्र बढ़ने पर सेहत से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ेंगी, अत: उस व़क़्त के लिए हेल्थ केयर का पूरा इंतज़ाम अभी से कर लें. ऐसा हेल्थ केयर व इन्श्योरेंस प्लान लें, जिसमें रिटायरमेंट के बाद के सालों में अधिकतम बेनिफिट मिले. आजीवन हेल्थ केयर व इन्श्योरेंस पॉलिसीज़ इसी उम्र में ख़रीद लें. रिटायरमेंट के बाद जिनमें कोई प्रीमियम न देनी पड़े और जो सेहत से जुड़े अधिकांश जोखिम को कवर करें, ऐसे प्लान एवं पॉलिसीज़ चुनें.

4. एक्सेस विथड्राल से बचें
रिटायरमेंट प्लानिंग में यह भी ध्यान में रखना होगा कि उस व़क़्त आपको कोई अतिरिक्त निकासी (एक्सेस विथड्रॉल) न करना पड़े. जिन पॉलिसीज़ व प्लान्स को आपने रिटायरमेंट को ध्यान में रखकर ख़रीदा है, उन्हें बीच में छोड़ना या निकालना न पड़े, इसका पक्का बंदोबस्त करें. साथ ही यह भी सुनिश्‍चित करें कि रिटायरमेंट के बाद भी आप योजना के अनुरूप केवल नियमित पैसे की ही निकासी करेंगे. उस व़क़्त कोई अतिरिक्त निकासी न करनी पड़े, इसके लिए एक आपातकालीन बैंक सेविंग अकाउंट ज़रूर रखें.

5. तमाम जोख़िमों का आकलन
हर व्यक्ति की लाइफ़ स्टाइल व ज़रूरतें अलग-अलग होती हैं, अत: आप भी अपनी जीवनशैली के अनुरूप ही उसी के हिसाब से संभावित जोखिम यानी ख़तरों का आकलन करें. अपनी लाइफ़ स्टाइल व इनकम के हिसाब से रिटायरमेंट प्लान बनाएं और उसमें तमाम संभावित जोखिमों से निपटने के उपाय भी शामिल करें. साथ ही अपने रिटयारमेंट प्लान में अपने जीवनसाथी और उसकी ज़रूरतों व जोख़िम को भी शामिल करें तथा उनके लिए भी बीमा व मेडिकल प्लान या पॉलिसीज़ ज़रूर ख़रीदें. किसी आकस्मिक ख़तरे, दुर्घटना या आर्थिक ज़रूरत से आप कैसे निपटेंगे, इसके लिए भी अलग से कुछ बचत या निवेश कर लें, जिन्हें आपातकालीन ज़रूरतों के व़क़्त निकाला जा सके. साथ ही जैसा कि पहले भी बताया गया है, मुद्रास्फीति, आयकर कटौती, बढ़ते ख़र्चों आदि जोखिमों का भी आकलन करना ज़रूरी है.
और हां, उम्र के इस पायदान पर रिटायरमेंट प्लानिंग के साथ-साथ आपको तमाम मौजूदा जिम्मेदारियां भी तो निभानी ही हैं, जैसे-अपना घर, बच्चों की पढ़ाई, उनकी शादी आदि. अत: इनकी प्लानिंग करना भी न भूलें, ताकि रिटायरमेंट के बाद आपकी परेशानियों में कोई इजाफ़ा न हो.

थर्टीज़ में क्या-क्या करें?
उम्र के इस पड़ाव पर रिटायरमेंट प्लानिंग के साथ-साथ इन बातों पर भी पूरा ध्यान देना ज़रूरी है-

  • बच्चों की परवरिश, स्वास्थ्य पर ख़र्च.
  • जीवनसाथी की मौजूदा ज़रूरत तथा भविष्य की आर्थिक सुरक्षा का बंदोबस्त.
  • बच्चों की उच्च शिक्षा, शादी तथा करियर में सैटल करने के लिए बचत या निवेश.
  • अगर अपना घर न हो तो घर ख़रीदना.
  • रिटायरमेंट प्लानिंग.
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अपनी तारीफ़ में क्या सुनना पसंद करते हैं पुरुष? (Compliments men like to hear)

Compliments men like to hear

अपनी तारीफ़ (Compliments men like to hear) सुनना किसे अच्छा नहीं लगता? तारीफ़ के दो मीठे बोल कानों में मिश्री-सी घोल देते हैं. तारीफ़ छोटे-बड़े सभी में ऊर्जा का संचार करती है और हमारे काम करने की गति को ही बदल देती है. पुरुषों से जुड़े कुछ ऐसे ही तारीफ़ों के बारे में जानते हैं.

Compliments men like to hear

बात पुरुषों की है, तो वे स्वभाव से भले ही थोड़े सख़्त माने जाते हैं, पर उनके मन में भी कोमल भावनाएं छिपी होती हैं और अपनी प्रशंसा सुनते ही उनका दिल तेज़ी से धड़कने लगता है. आइए जानें, किस तरह की तारीफ़ सुनना पसंद करते हैं पुरुष.

आज आप बहुत स्मार्ट लग रहे हैं

लुक्स की तारीफ़ महिलाओं को ही नहीं, पुरुषों को भी पसंद है. अपने डैशिंग लुक्स, हेयर स्टाइल, ब्रांडेड जूतों और घड़ियों को लेकर मिला कोई भी कॉम्प्लीमेंट पुरुषों को बेहद पसंद आता है. कपड़े ख़रीदने या एक्सेसरीज़ लेने में अगर कोई उनका सहयोग मांगे, तो उन्हें बहुत अच्छा लगता है.

आप बहुत सपोर्टिव हैं

दूसरों का ध्यान रखना, सहयोगियों के साथ मिलकर काम करना, हमेशा सबकी मदद करना आदि पौरुष की निशानी है. ऐसे कॉम्प्लीमेंट्स अगर पुरुषों को अपने पुरुष सहकर्मियों से मिलें, तो उन्हें अच्छा लगता है, लेकिन अगर महिलाएं यह कॉम्प्लीमेंट दें, तो पुरुषों का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है.

आपका सेंस ऑफ ह्यूमर बहुत अच्छा है

चतुर, हाज़िरजवाब, ख़ुशमिज़ाज पुरुष सभी को अच्छे लगते हैं. ये हर महफ़िल की शान होते हैं. अगर यह कॉम्प्लीमेंट अपने जाननेवालों, मिलनेवालों से उन्हें मिले तो पुरुष गदगद हो जाते हैं.

आप बहुत लविंग और केयरिंग हैं

जीवनसाथी या बच्चे, फ्रेंड्स या कलीग आपको लविंग और केयरिंग कहें, तो पुरुषों का आत्मबल बढ़ जाता है. परिवार के लिए वो जो कुछ भी करते हैं, अगर घर के सदस्य उन्हें केयरिंग मान लें, तो बस इतना ही काफ़ी है. पुरुष उनके लिए जान भी न्योछावर कर सकते हैं.

आप अपने काम में माहिर हैं

अपने वर्क फील्ड में अगर पुरुष को उनके बॉस, सहकर्मी या कोई सीनियर एक्सीलेंट कह दे या उनके प्रयासों की सराहना करे,  तो पुरुष प्रफुल्लित हो उठते हैं. अपने काम की सराहना हर पुरुष में आत्मविश्‍वास भर देती है.

आप सचमुच बहुत टैलेंटेड हैं

नौकरी, व्यापार या अपने पेशे के अतिरिक्त अगर कोई गुण उनमें है और उसमें वे परफेक्ट हैं और अगर कोई उसे पहचानकर उनकी तारीफ़ करे, तो उन्हें बहुत अच्छा लगता है. समाजसेवा, गायन, लेखन और खेलकूद आदि किसी भी क्षेत्र में अपनी प्रतिभा की मान्यता न केवल पुरुषों को ख़ुशी देती है, बल्कि उन्हें और अच्छा करने के लिए प्रोत्साहित भी करती है.

आज आप बहुत अच्छे लग रहे हैं

महिलाओं की तरफ़ से ख़ासतौर पर गर्लफ्रेंड की ओर से मिला यह कॉम्प्लीमेंट पुरुषों को घंटों, हफ़्तों, महीनों तक ख़ुश रख सकता है. आज के ज़माने में सहकर्मियों से भी यदि यह तारीफ़ सुनने को मिले, तो पुरुष बेहद ख़ुश हो जाते हैं.

आप अपनी उम्र से कम लगते हैं

पुरुषों को भी अपनी उम्र से कम लगना अच्छा लगता है और यह कॉम्प्लीमेंट अगर महिलाओं से मिले, तो सोने पर सुहागा. किसी भी उम्र के पुरुष को छोटा लगना हमेशा पसंद होता है.

आपको तो बहुत लोग पसंद करते हैं

कहनेवाला न केवल इससे अपनी चाहत दर्शाता है, बल्कि वो ख़ास व्यक्ति कितना प्रसिद्ध है यह भी बताता है. पुरुषों को ऐसे जुमले बहुत पसंद होते हैं. उनका कॉन्फिडेंस बूस्ट हो जाता है और काम करने की शक्ति दुगुनी हो जाती है.

आप बड़े टेक्नोसैवी हैं

गैजेट्स पर मास्टरी आज के ज़माने में एक अतिरिक्त टैलेंट है. जब पुरुष कंप्यूटर, लेटेस्ट एप्लीकेशंस, कैमरा, मोबाइल के विषय में अक्सर कॉम्प्लीमेंट पाते हैं, तो इससे उनको स्मार्ट और फिट फील होता है. उनकी कार्यक्षमता भी निखरती है.

आप विश्‍वास के योग्य हैं

किसी भी पुरुष को यह सुनकर बेहद अच्छा लगता है कि लोग उन पर विश्‍वास करते हैं,  फिर चाहे बात चरित्र की हो या काम की, रिश्ते निभाने की हो या सहयोग करने की.

आप बहुत कूल हैं  

कूल होना आज के ज़माने में कॉम्प्लीमेंट है. यह स्मार्टनेस और धैर्य को दर्शाता है. वर्कप्लेस, घर या किसी और पब्लिक प्लेस में अगर आप कूल कहलाए जाते हैं, तो मतलब आप में कोई ख़ास बात है. पत्नी अगर पति की तारीफ़ अकेले में करे, तो उन्हें अच्छा लगता है, पर अगर सोसायटी में सबके सामने करे, तो उन्हें बहुत अच्छा लगता है.

तारीफ़ तो हर रूप में अच्छी लगती है और दिल खोलकर करनी भी चाहिए. पुरुषों को महिलाओं से मिले काम्प्लीमेंट्स ज़्यादा गुदगुदाते हैं और देर तक याद रहते हैं. अपने हुनर, काम या ख़ास प्रयास की सराहना पुरुषों में स्फूर्ति भर देता है. देखने में कठोर, रफ एंड टफ इन पुरुषों पर भी प्रशंसा जादुई असर करती है. तो क्यों न आज ही से दिल खोल के करें उनकी तारीफ़.

– पूनम मेहता

30 बातें जहां महिलाएं पुरुषों से बेहतर हैं (30 things women do better than men)

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पुरुष भले ही ये साबित करें कि वे महिलाओं से श्रेष्ठ हैं, लेकिन कई बातों में महिलाएं पुरुषों से कहीं बेहतर हैं और ये हम नहीं कहते, हमारी रिसर्च रिपोर्ट्स कहती हैं.

1. महिलाएं रिश्तों के प्रति वफ़ादार और ईमानदार होती हैं, जबकि अक्सर पुरुष इस कसौटी पर खरे नहीं उतरते. एक बार महिलाएं किसी से रिश्ते में बंध गईं, तो अपना 100% देने की कोशिश करती हैं. वे रिश्तों को लेकर बेहद संवेदनशील भी होती हैं.

2. पूरी दुनिया में हुए शोध बताते हैं कि महिलाओं का आईक्यू लेवल पुरुषों की तुलना में कहीं ज़्यादा अच्छा होता है.

3. हाइजीन और साफ़-सफ़ाई के मामले में भी महिलाएं पुरुषों से आगे हैं. चाहे घर में वॉर्डरोब, बेड या डाइनिंग टेबल की बात हो या ऑफिस डेस्क की-  सफ़ाई के मामले में पुरुष महिलाओं से पीछे ही रहते हैं.

4. महिलाएं मल्टीटास्किंग होती हैं. वे एक साथ कई काम कर सकती हैं, खाना बनाना, सफ़ाई, बच्चे का होमवर्क, मोबाइल पर बातें- कई काम एक  साथ वे उतने ही परफेक्शन के साथ कर सकती हैं, जबकि पुरुष ऐसा नहीं कर पाते. दरअसल, महिलाओं का मस्तिष्क ज़्यादा सक्रिय होता है, जिसकी  वजह से वे एक साथ कई कार्य कर पाती हैं.

5. यूके की एक स्टडी के मुताबिक महिलाएं अच्छी ड्राइवर भले ही न हों, पर सुरक्षित ड्राइविंग के मामले में वे पुरुषों से काफ़ी आगे हैं. रिपोर्ट के  अनुसार महिलाओं द्वारा होनेवाले एक्सीडेंट की दर पुरुषों के मुक़ाबले बहुत कम है. इसके अलावा ट्रैफिक रूल्स फॉलो करने में भी वे पुरुषों से बेहतर हैं.

6. दर्द झेलने और बोरिंग काम करने की क्षमता भी स्त्रियों में पुरुषों से अधिक होती है. पुरुष घंटों बेमतलब के टीवी कार्यक्रम देख सकते हैं, यूं ही खाली  बैठे रह सकते हैं, जबकि स्त्रियां ऐसा नहीं कर सकतीं.

7. चेहरे की भाव-भंगिमा पढ़ने में महिलाएं मास्टर होती हैं. एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी में हुए एक रिसर्च में ये बात सामने आई है. रिसर्च से यह भी पता  चला है कि कोई सामाजिक निर्णय लेना हो, तो पुरुष मस्तिष्क को इसके लिए ज़्यादा काम करना पड़ता है, जबकि महिलाएं ऐसे निर्णय चुटकियों में  ले लेती हैं.

8. महिलाएं लोगों को बेहतर समझ पाती हैं. किसी के व्यक्तित्व, उसके बॉडी लैंग्वेज को वे पुरुषों के मुक़ाबले बेहतर और जल्दी समझ पाती हैं.

9. रिश्ते जोड़नेे में भी महिलाएं माहिर होती हैं. वे लोगों से बहुत जल्दी कनेक्ट हो जाती हैं और रिश्ते भी जल्दी बना लेती हैं. अपने मन की बात भी वे  लोगों से शेयर कर लेती हैं, जबकि पुरुष ऐसा नहीं कर पाते.

10. जॉर्जिया और कोलंबिया यूनिवर्सिटी की एक स्टडी रिपोर्ट के अनुसार, महिलाएं अच्छी लर्नर होती हैं यानी वे बहुत जल्दी सीख-समझ जाती हैं.  रिसर्च के अनुसार वे अलर्ट, फ्लेक्सिबल और ऑर्गेनाइज़्ड होती हैं और किसी भी टास्क को पुरुषों के मुक़ाबले जल्दी समझ जाती हैं.

11. महिलाएं फाइनेंस भी पुरुषों से बेहतर ढंग से हैंडल करती हैं. चाहे सेविंग की बात हो, शॉपिंग की या इन्वेस्टमेंट की, महिलाएं पैसे को बहुत अच्छी  तरह से मैनेज करती हैं, जबकि पुरुष ऐसा नहीं कर पाते.

12. बच्चों को संभालना, फिर चाहे नवजात शिशु हो या बड़े बच्चे- पुरुषों के वश की बात नहीं. न वे रोते बच्चे को चुप करा पाते हैं, न उसका डायपर  बदल सकते हैं, न उनकी ज़िद को हैंडल कर सकते हैं और न ही उन्हें बहला-फुसला सकते हैं, जबकि महिलाएं ये काम पूरी ज़िम्मेदारी व ईमानदारी के
साथ करती हैं.

13. महिलाएं पुरुषों की तुलना में ज़्यादा स्ट्रॉन्ग होती हैं. अगर उनके हाथ-पैर में कहीं चोट लग जाए, तो वेे जानती हैं कि उसे कैसे ठीक किया जाए,  जबकि पुरुष छोटी-सी चोट से भी घबरा जाते हैं. हल्का-सा बुखार भी आ जाए, तो उन्हें कमज़ोरी महसूस होने लगती है और आराम करने का बहाना  मिल जाता है, जबकि महिलाएं बड़ी-बड़ी तकलीफ़ होने पर भी अपना काम और ज़िम्मेदारियां उसी तेज़ी और ख़ूबी से निभाती हैं.

14. महिलाएं पुरुषों से बेहतर इसलिए भी हैं, क्योंकि कई क़ानून ख़ासकर महिलाओं के हितों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं, उन्हें कई सुविधाएं
प्राप्त  हैं.

15. महिलाओं की रोगप्रतिरोधक क्षमता भी पुरुषों से मज़बूत होती है. कनाडा में हुए एक शोध के अनुसार फीमेल सेक्स हार्मोन एस्ट्रोजन महिलाओं  की रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और उन्हें इंफेक्शन से लड़ने की बेहतर क्षमता प्रदान करता है.

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16. ग्रैजुएशन करने में भी महिलाएं पुरुषों से आगे हैं. डिपार्टमेंट ऑफ एजुकेशन के आंकड़ों के अनुसार पुरुष स्नातक की डिग्री लेने में महिलाओं से पीछे हैं. इतना ही नहीं, स्नातक की डिग्री हासिल करने में पुरुषों को 5 वर्ष से अधिक समय लगता है, जबकि महिलाएं 5 वर्ष में ही  स्नातक की डिग्री हासिल कर लेती हैं.

17. महिलाएं पुरुषों की तुलना में हेल्दी डायट लेती हैं. पुरुष जहां दिनभर ऊल-जुलूल खाते हैं, ड्रिंक व स्मोकिंग करते हैं, वहीं महिलाएं हेल्दी फूड पसंद करती हैं. महिलाओं के बैग में आपको सलाद, फ्रूट, ड्रायफ्रूट्स, बिस्किट जैसे हेल्दी ऑप्शन मिल  जाएंगे, जबकि पुरुषों के बैग से ये सब मिसिंग होते हैं.

18. महिलाएं पुरुषों की तुलना में 5 से 10 वर्ष अधिक जीती हैं यानी आयु के मामले में भी बाज़ी महिलाओं ने ही मारी है. इतना ही नहीं, महिलाएं पुरुषों  के मुक़ाबले बेहतर जीवन जीती हैं यानी जीवन को ज़्यादा एंजॉय करती हैं.

19. पुरुषों के मुक़ाबले महिलाएं स्टाफ को ज़्यादा बेहतर ढंग से हैंडल कर पाती हैं.

20. महिलाएं अनुशासित और समय की पाबंद होती हैं. लेटलतीफ़ी उन्हें पसंद नहीं.

21. महिला लीडर्स सहायता के लिए हमेशा उपलब्ध होती हैं और किसी प्रॉब्लम की स्थिति में जल्दी रिस्पॉन्ड भी करती हैं.

22. पर्सनल ग्रूमिंग के मामले में भी वे पुरुषों से बेहतर हैं. हम उनके अपीयरेंस, उनके मेकअप, ड्रेस की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि पर्सनल हाइजीन की  बात कर रहे हैं. आप महिलाओं और पुरुषों के नाखून देख लें, आप ख़ुद ही समझ जाएंगे कि हम क्या कहना चाहते हैं.

23. महिलाएं समस्याओं को जल्दी भांप लेती हैं और उसका समाधान भी जल्दी निकाल लेती हैं.

24. महिलाओं की कम्युनिकेशन स्किल भी बेहतर होती है. भले ही वे ज़्यादा बोलती हों, लेकिन अपने विचारों को खुलकर व्यक्त करती हैं. विवाद-बहस आदि की स्थिति में भी महिलाएं बोलना बंद नहीं करतीं, न ही न सुनने का बहाना बनाती हैं. शोधों से साबित हो  चुका है कि महिलाओं का मस्तिष्क कई सारे शब्द, भावनाओं और एहसासात को प्रोसेस कर सकता है, जबकि पुरुष मस्तिष्क ऐसा नहीं कर सकता.

25. महिलाएं फ्युचर प्लानिंग व रिलेशनशिप को बेहतर ढंग से मैनेज करती हैं.

26. ख़तरों को जल्दी भांप लेती हैं और सुरक्षा को लेकर भी ज़्यादा सतर्क रहती हैं. कहीं जाना हो तो घर की सुरक्षा, सेफ्टी सिस्टम पर अधिक ध्यान  देती हैं.

27. महिलाएं सामनेवाले के चरित्र को तुरंत ही पहचान जाती हैं. उनका सिक्स्थ सेंस इतना स्ट्रॉन्ग होता है कि सामनेवाले के मन में क्या चल रहा है, वे  देखते ही समझ जाती हैं.

28. महिलाएं जीवन में संतुलन को बेहतर ढंग से मेंटेन करती हैं. महिलाओं के शरीर में सेरोटोनिन का लेवल पुरुषों की तुलना में हाई होता है.  सेरोटोनिन इमोशन्स को कंट्रोल में रखता है, जिससे महिलाओं को लाइफ को बैलेंस करने में आसानी होती है.

29. महिलाएं तनाव को पुरुषों के मुक़ाबले बेहतर ढंग से हैंडल करती हैं. हां, ये सच है कि तनाव व मुश्किल परिस्थिति में महिलाएं जल्दी रो देती हैं, लेकिन एक बार दिल का गुबार आंसू बनकर निकल गया, तो उनकी सोच एकदम स्पष्ट हो जाती है और वे एकदम सटीक निर्णय लेने में सक्षम हो  जाती हैं. अमेरिका में पुरुष और महिलाओं पर हुए एक शोध से ये बात सामने आई कि तनाव दोनों को उतना ही प्रभावित करता है, लेकिन तनाव की  स्थिति में भी महिलाओं का परफॉर्मेंस बेहतर था, जबकि पुरुष इसमें चूक गए.

30. महिलाओं की याद्दाश्त भी पुरुषों से तेज़ होती है. महिलाएं कोई फिल्म देखती हैं, तो कॉस्ट्यूम, मेकअप, फिल्म के सेट से लेकर हर चीज़ उन्हें याद   रहती है. ऐसा इसलिए नहीं है कि वे अपीयरेंस पर ज़्यादा ध्यान देती हैं, बल्कि उनका इनबिल्ट सिस्टम ऐसा होता है कि देखी हुई चीज़ें उन्हें याद
रहती  हैं.

– प्रतिभा तिवारी

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पुरुषों के लिए हेल्थ चेकअप गाइड (The All-in-One Guide to Men’s Health Check Up)

Men's Health Check Up Guide

Men's Health Check Up Guide

जीवन की जद्दोज़ेहद में अधिकतर पुरुष अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह हो जाते हैं, जिससे उन्हें अनेक बीमारियां घेर लेती हैं. आइए, जानते हैं कुछ ऐसे आवश्यक टेस्ट्स के बारे में जिन्हें कराने से कुछ बीमारियों का पता प्राथमिक अवस्था में ही चल जाता है.

 

जब उम्र 20 से 35 वर्ष हो

20 से 30 वर्ष के पुरुष हर वर्ष नॉर्मल फ़िज़िकल चेकअप करवाएं, जिसमें वज़न,  हाइट व ब्लड प्रेशर आदि चेक कराएं. लेकिन जब तीस साल की उम्र को पार कर जाएं, तो सामान्य शारीरिक जांच के साथ-साथ डायबिटीज़, हार्ट, थायरॉइड, लीवर व एनीमिया के लिए भी ज़रूरी टेस्ट्स करवाएं.

1. ब्लड टेस्ट : कंप्लीट ब्लड काउंट, लीवर ़फंक्शन टेस्ट, फ़ास्टिंग एवं पोस्ट प्रैंडियल ब्लड शुगर, लिपिड प्रोफ़ाइल, थायरॉइड टेस्ट आदि.

कब कराएं?
हर तीसरे वर्ष. यदि टेस्ट में कोई चीज़ असामान्य आती है, तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें.

क्यों कराएं?
इससे कई बातों का पता चलता है, जैसे- व्हाइट सेल्स, प्लेटलेट काउंट, किडनी व लीवर की स्थिति, कोलेस्ट्रॉल लेवल, थायरॉइड, एनीमिया, डायबिटीज़ या प्रीडायबेटिक अवस्था आदि. कोई भी असाधारण स्थिति हो, तो दवाइयों से इलाज संभव है.

2. ईसीजी- इसे इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम कहते हैं, इसमें छोटी-छोटी विद्युत तरंगें उत्पन्न होती हैं, जो हार्ट की क्रियाशीलता को रिकॉर्ड करती हैं.

कब कराएं?
यदि सीने में दर्द, हांफना या तेज़ धड़कन की शिकायत न हो, तो हर तीसरे वर्ष कराएं. यदि परिवार में हार्ट प्रॉब्लम का इतिहास हो या कोई रिस्क फैक्टर्स हों, तो हर साल कराए.

क्यों कराएं?
यह हृदय संबंधी समस्याओं की पहचान का मुख्य टेस्ट है.

3. चेस्ट एक्स-रे

कब कराएं?
हर तीन साल बाद.

क्यों कराएं?
इससे फेफड़ों के संक्रमण, लंग कैंसर व टी.बी. के बारे में पता चलता है.

4. सोनोग्राफ़ी

कब कराएं?
हर तीन साल बाद.

क्यों कराएं?
इससे पेट की समस्याएं, जैसे- लीवर की वृद्धि होना, किडनी स्टोन तथा गाल ब्लैडर स्टोन के बारे में पता चलता है.

जब उम्र 35 से 50 वर्ष हो

1. ट्रेडमील टेस्ट

कब कराएं?
40 वर्ष की उम्र तक हर दो साल बाद एवं उसके बाद हर साल यह टेस्ट कराएं.

क्यों कराएं?
यह एंजाइना व हार्ट अटैक के लिए ज़िम्मेदार कोरोनरी हार्ट डिसीज़ का स्क्रीनिंग टेस्ट है. इसमें बीमारी का जल्दी पता लगने से आनेवाली दुर्घटना से बचा जा सकता है.

2. इको कार्डियोग्राफ़ी

कब कराएं?
40 वर्ष की उम्र तक हर दो साल बाद एवं उसके बाद हर साल यह टेस्ट कराएं.

क्यों कराएं?
यह टेस्ट हार्ट की आरामावस्था में उसकी रचना एवं बनावट संबंधी सारी विस्तृत जानकारी देता है. यदि ब्लॉकेज है, तो उसका पता लगाने में मदद करता है. इससे आगे का इलाज कराने में आसानी होती है.

3. लंग फंक्शन टेस्ट या पलमोनरी फंक्शन टेस्ट

कब कराएं?
40 वर्ष की उम्र तक हर 2 साल बाद एवं उसके बाद हर साल यह टेस्ट कराएं.

क्यों कराएं?
यह फेफड़ों के आकार एवं क्षमता को मापता है. इससे फेफड़ों से संबंधित अनेक समस्याओं व बीमारियों, जैसे- अस्थमा व क्रॉनिक ब्रॉन्काइटिस का पता चल जाता है, जिससे आसानी से इलाज किया जा सकता है.
40 की उम्र के बाद डायबिटीज़ टाइप 2 के लिए एचबी 1, एएलएसी टेस्ट करवाएं. यदि शुगर लेवल 120 से लेकर 200 के बीच में है, तो तीन महीने में टेस्ट करवाएं. साथ ही ग्लूकोज़ टॉलरेंट टेस्ट भी करवाएं.

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जब उम्र 50 वर्ष व उससे अधिक हो

क्या कराएं?
हर साल टाइप 2 डायबिटीज़ व लिपिड डिसऑर्डर के लिए ब्लड टेस्ट ज़रूर करवाएं. इसके अलावा इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम, आंख व कान के टेस्ट्स, प्रोस्टेट व कोलोन कैंसर के लिए स्क्रीनिंग और अगर परिवार में हार्ट डिसीज़ की हिस्ट्री है या फिर सिगरेट, शराब, मोटापा, ब्लड प्रेशर जैसे रिस्क ़फैक्टर्स हैं, तो उसकी भी जांच करवाएं. मोतियाबिंद का भी चेकअप करवाते रहें. साथ ही लिवर एंज़ाइम्स के स्तर की जांच के लिए लिवर की जांच और डिप्रेशन की जांच भी ज़रूरी है. अगर उम्र 60 के पार हो, तो अलज़ाइमर्स और डेमेंशिया की जांच भी करवानी चाहिए.

ऊपर बताए टेस्ट्स के अलावा ये जांच भी करवाएं

1. ब्लड टेस्ट- ब्लड शुगर, लिपिड प्रोफ़ाइल, प्रोस्टेट स्पेसिफ़िक एंटीजन. प्रोस्टेट के लिए टेस्ट बेहद महत्वपूर्ण है और इसका स्तर यदि 20 ग्राम से अधिक हो, तो सतर्क रहें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

कब कराएं?
प्रतिवर्ष.

क्यों कराएं?
एनीमिया, कोलेस्ट्रॉल लेवल, टाइप 2 डायबिटीज़ व प्रोस्टेट कैंसर की जानकारी के लिए.

2. स्टूल टेस्ट/ कोलनोस्कोपी/ अपर गैस्ट्रोइंटस्टाइनल एंडोस्कोपी (स्टूल में ब्लड पाए जाने पर)

कब कराएं?
प्रतिवर्ष.

क्यों कराएं?
गैस्ट्रोइंटस्टाइनल कैंसर की जानकारी पाने के लिए.

3.आई चेकअप, ईएनटी चेकअप, ऑडियोमेट्री (कान का चेकअप)

कब कराएं?
प्रतिवर्ष.

क्यों कराएं?
आंखों व कानों की जांच के लिए, ख़ासकर मोतियाबिंद की.

4. ईसीजी, ट्रेडमील, इकोकार्डियोग्राफ़ी

कब कराएं?
प्रतिवर्ष.

क्यों कराएं?
कोरोनरी हार्ट डिसीज़ की जानकारी के लिए.

5. बोन मिनरल डेंसिटी स्कैन

कब कराएं?
हर 2 वर्ष में.

क्यों कराएं?
हड्डियों के कमज़ोर होने की स्थिति के बारे में जानने के लिए.

ज़रूरी टेस्ट्स

  • नियमित रूप से डेंटल चेकअप करवाएं. इससे डेंटल प्रॉब्लम का पता जल्दी चल जाता है.
  •  टीथ क्लीनिंग साल में 1 बार कराएं.
  • ध्यान रहे, मसूड़ों की बीमारी हार्ट अटैक व दिल की बीमारी से जुड़ी हुई है.
  • कंप्लीट आई चेकअप करवाएं स्वस्थ व्यक्ति तीन साल में एक बार कराएं.
  • देखने में परेशानी हो रही हो, फैमिली हिस्ट्री हो, आंख में कोई घाव हो गया
    हो, मोतियाबिंद हो, तो जल्दी चेकअप करवाएं.