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पीरियड्स में अधिकतर महिलाएं आज भी सेनेटरी पैड का ही इस्तेमाल करती हैं, लेकिन यदि तुलना की बात की जाए, तो ये जानना ज़रूरी है कि सेनेटरी पैड, टैम्पून और मेंस्ट्रुअल कप में से आपके लिए क्या है बेहतर? इसके साथ ही महिलाओं को पीरियड्स में हेल्थ और हाइजीन का ध्यान कैसे रखें, इसकी जानकारी भी होनी चाहिए.

Sanitary Pads, Tampons And Menstrual Cups

क्या आप पीरियड्स में सेनेटरी पैड का उपयोग करती हैं?
ज़्यादातर महिलाएं पीरियड्स में सेनेटरी पैड यानी सेनेटरी नैपकिन का उपयोग करती हैं. सेनेटरी पैड्स कॉटन या अन्य फैब्रिक से बने होते हैं. इनमें लिक्विड को सोखने की क्षमता अधिक होती है और ये पांच से छह घंटे तक ब्लीडिंग को सोख सकते हैं. कुछ महिलाओं को सेनेटरी पैड्स के उपयोग के दौरान रैशेज़, खुजली जैसी तकलीफ़ों का सामना करना पड़ता है. ऐसी महिलाओं को अच्छी क्वालिटी के सेनेटरी पैड्स का इस्तेमाल करना चाहिए और सेनेटरी पैड्स को उचित समय पर बदलते रहना चाहिए. साथ ही हाइजीन का भी ख़ास ध्यान रखना चाहिए.

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Sanitary Pads

क्या आप पीरियड्स में टैम्पून का उपयोग करती हैं?
टैम्पून कॉटन और विशेष फैब्रिक से बना हुआ एक स्टिक जैसा होता है, जिसमें नीचे की ओर एक धागा लटका रहता है. टैम्पून का इस्तेमाल इसे वजायना में डालकर किया जाता है. जब टैम्पून पर्याप्त ब्लड को सोख लेता है, तो धागे की मदद से टैम्पून को वजायना के बाहर निकालकर उसे डिस्पोज़ कर दिया जाता है. कुछ महिलाएं पीरियड्स में टैम्पून का उपयोग करती हैं. टैम्पून चार-पांच घंटे तक ब्लीडिंग को सोख सकता है. हमारे देश में बहुत कम महिलाएं टैम्पून का इस्तेमाल करती हैं. कुछ महिलाओं को टैम्पून के उपयोग से यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन होने की शिकायत रहती है.

Tampons

क्या आप पीरियड्स में मेंस्ट्रुअल कप का उपयोग करती हैं?
मेंस्ट्रुअल कप मुलायम और लचीले लेटेक्स का बना एक कप है, जिसे पीरियड्स के दौरान कई बार इस्तेमाल किया जा सकता है. मार्केट में सिंगल यूज के लिए भी मेंस्ट्रुअल कप उपलब्ध हैं. पैड्स, टैम्पून और मेंस्ट्रुअल कप की तुलना में मेंस्ट्रुअल कप ज़्यादा सुरक्षित है यानी इसमें लीकेज का रिस्क कम होता है, इसके बावजूद हमारे देश में बहुत कम महिलाएं ही मेंस्ट्रुअल कप का इस्तेमाल करती हैं.

Menstrual Cups

सेनेटरी पैड, टैम्पून और मेंस्ट्रुअल कप, ये तीनों ही पीरियड्स में इस्तेमाल किए जाने वाले भरोसेमंद प्रोडक्ट्स हैं, आप अपनी सुविधा और ज़रूरत के अनुसार इनका चुनाव कर सकती हैं.

योनि संक्रमण (Vaginal Yeast Infection) का उपचार जानने के लिए देखें ये वीडियो:

पीरियड के दर्द से छुटकारा पाने के 5 आसान घरेलू उपाय आजमाकर आप पीरियड के दर्द से आसानी से छुटकारा पा सकती हैं. आपके किचन में मौजूद चीजों से आप आसानी से पीरियड के दर्द से छुटकारा पा सकती हैं. दादीमां के घरेलू नुस्खे जितने आसान होते हैं, उतने असरदार भी होते हैं. आप भी पीरियड के दर्द से छुटकारा पाने के 5 आसान घरेलू उपाय आजमाएं और पीरियड के दर्द से छुटकारा पाएं.

Home Remedies To Reduce Period Pain

पीरियड का दर्द महिलाओं की एक आम समस्या है. कई महिलाओं को पीरियड के दौरान इतना दर्द होता है कि उन्हें उठने-बैठने में भी तकलीफ होती है. पीरियड के दर्द के कारण कई महिलाएं अपने रोज़मर्रा के काम भी नहीं कर पाती हैं. पीरियड के दर्द से छुटकारा पाने के लिए यदि महिलाओं को आसान घरेलू उपायों की जानकारी मिल जाए, तो वो हर महीने होने वाले माहवारी के दर्द से छुटकारा पा सकती हैं.

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जानें पीरियड के दर्द से छुटकारा पाने के 5 आसान घरेलू उपाय
1) माहवारी संबंधी सभी परेशानियों के निवारण के लिए गरम पानी का सेवन उत्तम है. माहवारी शुरू होने के 10 दिन पहले से गरम पानी पीना शुरू कर दें.
2) पीरियड के दर्द से बचने के लिए 8-10 बादाम रात में पानी में भिगोकर रख दें. सुबह छिलका निकालकर खाली पेट इसका सेवन करें.
3) पिसी हुई अलसी और पिसी हुई राई की गर्म-गर्म पुल्टिस कमर पर बांधने से आराम मिलता है.
4) 3 ग्राम कुटी अदरक, 3 काली मिर्च का चूर्ण और 1 बड़ी इलायची चूर्ण, काली चाय और दूध व पानी एकसाथ मिलाकर अच्छी तरह पकाएं. आधा पानी रह जाने पर उतार लें. इसे कुनकुना ही पीएं. ऐसा करने से माहवारी के दर्द से आराम मिलेगा.
5) पीरियड के दौरान कमर में दर्द हो तो बरगद का दूध निकालकर कमर पर सुबह-शाम लेप करें.

पीरियड के दर्द से छुटकारा पाने के 5 आसान घरेलू उपाय जानने के लिए देखें ये वीडियो:

 

 

Tips To Keep Vagina Healthy

रखें वेजाइनल हेल्थ का ख़्याल (Easy Tips To Keep Your Vagina Healthy)

जागरूकता की कमी और शर्म-झिझक के कारण महिलाएं अक्सर वेजाइनल हेल्थ (Vagina Health) को अनदेखा कर देती हैं. नतीजा उन्हें कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम्स (Health Problems) की तकलीफ़ झेलनी पड़ती है. इसलिए ज़रूरी है कि वेजाइना (Vagina) की हेल्थ का भी ख़्याल रखा जाए और इसके लिए सबसे ज़रूरी है वेजाइनल हाइजीन (Vaginal Hygiene) का ख़्याल रखना.

कैसे रखें हाइजीन का ख़्याल?

क्लीनिंग के लिए सोप का इस्तेमाल न करें
कई लोग वेजाइना क्लीन करने के लिए परफ्यूमयुक्त साबुन या वेजाइनल डूशिंग का इस्तेमाल करते हैं, जो वेजाइनल हेल्थ के लिए ठीक नहीं. दरअसल, वेजाइना हानिकारक बैक्टीरिया से सुरक्षा के लिए अपने अंदर एक पीएच बैलेंस, नमी और तापमान बनाए रखती है, लेकिन साबुन और वेजाइनल डूशिंग के इस्तेमाल से ये पीएच संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे कई हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं. इसलिए ऐसा करने से बचें. इसकी बजाय सादे पानी का इस्तेमाल करें.

केमिकल्स का इस्तेमाल ना करें
वेजाइना में केमिकल बेस्ड क्रीम और लुब्रिकेशन का इस्तेमाल ना करें. वेजाइना सेल्फ लुब्रिकेटिंग होती है और इसमें नेचुरल नमी होती है, इसलिए आपको यहां आर्टिफिशियल लुब्रिकेंट इस्तेमाल करने की कोई ज़रूरत ही नहीं. अगर आप ऐसा करती हैं, तो इससे पीएच लेवल का संतुलन बिगड़ सकता है और बैक्टीरियल इंफेक्शन हो सकता है.

सेफ सेक्स संबंध बनाएं
अनसेफ सेक्स से आपको वेजाइनल इंफेक्शन हो सकता है, इसलिए सुरक्षित यौन संबंध बनाएं. सेक्स के दौरान प्रोटेक्शन का इस्तेमाल करें, ताकि आप एचआईवी, जेनिटल हर्पीस आदि बीमारियों से सुरक्षित रहें.

जेनिटल एरिया को ड्राई रखें
अधिक पसीना आने और हवा न लगने से जेनिटल एरिया में नमी के कारण हानिकारक बैक्टीरिया पनपने की संभावना होती है, जिससेे खुजली और रैशेज़ की समस्या हो सकती है, इसलिए जेनिटल एरिया को हमेशा ड्राई रखने की कोशिश करें. कॉटन की पैंटी ही पहनें, ताकि वो पसीना सोख सके. साथ ही गीली पैंटी पहनने से बचें.

किसी भी तरह के इंफेक्शन को नज़रअंदाज़ ना करें
वेजाइना में छोटे-मोटे इंफेक्शन को भी अनदेखा न करें. ये इंफेक्शन कई बार भविष्य में गंभीर समस्या बन सकते हैं. इसलिए आपको जैसे ही वेजाइना में कोई एब्नॉर्मेलिटी या इंफेक्शन महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.
प्रोबायोटिक्स लेंः अपनी वेजाइनल हेल्थ को बरक़रार रखने के लिए बेहतर होगा कि अपने डायट में दही या प्रोबायोटिक्स शामिल करें. इंफेक्शन से लड़ने के लिए आपके वेजाइना को हेल्दी बैक्टीरिया की ज़रूरत होती है. प्रोबायोटिक्स से वेजाइना में अच्छे बैक्टीरिया बने रहेंगे और आपका मूत्राशय भी शेप  में रहेगा.

इन बातों का भी रखें ख़्याल

1. पब्लिक टॉयलेट के इस्तेमाल के समय हमेशा सतर्क रहें. एंटर होने से पहले फ्लश ज़रूर करें.

2. बहुत ज़्यादा टाइट पैंटी न पहनें. साथ ही बेहतर होगा कि रात में पैंटी निकालकर ही सोएं.

3. पैंटी की सफ़ाई किसी अच्छे डिटर्जेंट से करें.

4. पैंटी को अपने अन्य कपड़ों के साथ कभी न धोएं. उसे अलग से साफ़ करें.

5. पैंटी को हमेशा धूप में ही सुखाएं. इससे पैंटी बैक्टीरिया फ्री रहेगी.

6. रोज़ पहननेवाली पैंटी पर एक बार आयरन ज़रूर करें. आयरन की गर्मी से बैक्टीरिया पूरी तरह से ख़त्म हो जाते हैं और पैंटी इंफेक्शन से मुक्त हो जाती है.

7. पीरियड्स के दौरान हर छह घंटे के अंतराल पर पैड्स बदलें. इससे किसी तरह का इंफेक्शन होने का डर नहीं रहता.

8. डिटर्जेंट से धोने के बाद पैंटी को पानी में एंटीसेप्टिक की कुछ बूंदें डालकर ज़रूर साफ़ करें. ऐसा करने से आप फंगल या ऐसे किसी संक्रमण से सुरक्षित रहेंगी.

9. सिंथेटिक की बजाय कॉटन की पैंटी इस्तेमाल करें और पैंटी हर तीन महीने में चेंज करें.

10. एक्सरसाइज़ या धूप से आने के बाद पसीने से भीगी पैंटी को तुरंत बदल लें. नमी के कारण उसमें बैक्टीरिया पनपने का ख़तरा बढ़ जाता है.

11. वेजाइना को गुनगुने पानी से अच्छी तरह से साफ़ करें.

12. प्राइवेट पार्ट्स में टैल्कम पाउडर का इस्तेमाल न करें. इससे ओवेरियन कैंसर का ख़तरा बढ़ जाता है.

मेंस्ट्रुअल हाइजीन की 5 बातें
पीरियड्स के दौरान भी महिलाओं को हाइजीन का विशेष ध्यान रखना चाहिए. फर्टिलिटी संबंधी अधिकतर प्रॉब्लम्स की वजह पीरियड्स के दौरान हाइजीन का ख़्याल न रखना है, इसलिए पीरियड्स के दौरान हाइजीन से जुड़ी इन बातों का ख़्याल रखें.

1. सैनिटेशन का तरीक़ा: गांवों में आज भी लोग सैनिटरी पैड्स का इस्तेमाल नहीं करते, नतीजा उन्हें प्रजनन संबंधी कई तरह की प्रॉब्लम्स झेलनी पड़ती हैं, इसलिए पीरियड्स के दौरान सही सैनिटेशन का इस्तेमाल ज़रूरी है. आज मार्केट में कई तरह के साधन उपलब्ध हैं, जैसे- सैनिटरी नैपकिन, टैंपून्स और मैंस्ट्रुअल कप, ये पीरियड्स के दौरान हाइजीन का ध्यान रखते हैं.

2. रोज़ नहाएं: आज भी कई जगहों पर यह मान्यता है कि पीरियड्स के दौरान महिलाओं को नहाना नहीं चाहिए. लेकिन ये सही नहीं है, नहाने से न स़िर्फ बॉडी क्लीन होती है, बल्कि गर्म पानी से स्नान करने से पीरियड्स के दौरान होनेवाली ऐंठन, दर्द, पीठदर्द, मूड स्विंग जैसी परेशानियों से भी राहत मिलती है.

3. साबुन इस्तेमाल न करें: पीरियड्स के दौरान साबुन से वेजाइना की सफ़ाई करने पर अच्छे बैक्टीरिया के नष्ट होने का ख़तरा रहता है, जो इंफेक्शन का कारण बन सकता है. लिहाज़ा, इस दौरान वेजाइना की सफ़ाई के लिए सोप की बजाय गुनगुना पानी इस्तेमाल करें.

4. हाथ धोना ज़रूरी: सैनिटरी पैड, टैंपून या फिर मैंस्ट्रुअल कप बदलने के बाद हाथ ज़रूर धोएं. हाइजीन की इस आदत का हमेशा पालन करें. इसके अलावा इस्तेमाल किए गए पैड या टैंपून को पेपर में अच्छे से रैप करके डस्टबिन में ही डालें, फ्लश न करें.

5. अलग अंडरवियर यूज़ करें: पीरियड्स के दौरान अलग अंडरवियर का इस्तेमाल करें. इन्हें स़िर्फ पीरियड्स के दौरान ही इस्तेमाल करें और अलग से गुनगुने पानी और साबुन से धोएं. एक एक्स्ट्रा पैंटी साथ ज़रूर रखें, ताकि ज़रूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल किया जा सके.

हेल्दी वेजाइना के लिए ईज़ी एक्सरसाइज़
कीगल एक्सरसाइज़ः घुटने मोड़कर आराम की स्थिति में बैठ जाएं. अब पेल्विक मसल्स को टाइट करके स्क्वीज़ यानी संकुचित करें. 5 तक गिनती करें. फिर मसल्स को रिलीज़ कर दें. ध्यान रखें ये एक्सरसाइज़ भरे हुए ब्लैडर के साथ न करें. यूरिन पास करने के बाद ही करें.
लेग लिफ्टिंगः सीधे लेट जाएं. दोनों हाथ बगल में हों. अब एक पैर ऊपर उठाएं. थोड़ी देर इसी स्थिति में रहें. पूर्व स्थिति में आ जाएं. यही क्रिया दूसरे पैर से भी दोहराएं. अब दोनों पैरों को एक साथ लिफ्ट करके यही क्रिया दोहराएं. इससे पेल्विक एरिया के मसल्स मज़बूत होते हैं.
स्न्वैट्सः सीधे खड़े रहें. दोनों हाथ सामने की ओर खुले रखें. अब घुटनों को मोड़ते हुए ऐसे बैठें जैसे आप किसी कुर्सी पर बैठ रहे हों. थोड़ी देर इसी अवस्था में रहें. पूर्वस्थिति में आ जाएं.

– प्रतिभा तिवारी

मैं 23 वर्षीया कॉलेज स्टूडेंट हूं. मेरे पीरियड्स अनियमित हैं और मेरा वज़न भी काफ़ी बढ़ गया है. इसके अलावा कुछ भी करने पर मैं बहुत जल्दी थक जाती हूं. मुझे क्या करना चाहिए? कृपया, मेरा मार्गदर्शन करें.
– ख़ुशी अग्रवाल, अजमेर.

हमारी बदलती लाइफस्टाइल का ही नतीजा है कि आजकल लोगों का वज़न पहले के मुक़ाबले ज़्यादा तेज़ी से बढ़ने लगा है. बढ़ते हुए वज़न के कारण शरीर में हार्मोंस अनियंत्रित हो सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप अनियमित माहवारी, शरीर पर अधिक बाल आना, चेहरे पर कील-मुंहासे और बालों का गिरना जैसी समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं. मैं आपको यही सलाह दूंगी कि आप रोज़ाना आधा-एक घंटा एक्सरसाइज़, योगा व प्राणायाम करें और जंक फूड कम से कम खाएं. अनियमित माहवारी की समस्या को दूर करने के लिए किसी अच्छे गायनाकोलॉजिस्ट से मिलें.

 Why Do I Get Tired Very Soon During Periods
मेरी उम्र 29 साल है और हाल ही में मेरा लगातार दूसरा मिसकैरेज हो गया, जो दो महीने का था. क्या इसका यह मतलब है कि भविष्य में मैं कभी हेल्दी बच्चे को जन्म नहीं दे पाऊंगी?
– श्यामली राव, नागपुर.

ये बड़े दुर्भाग्य की बात है कि आजकल गर्भपात के मामले बहुत तेज़ी से बढ़े हैं और यह एक आम बात हो गई है. लगातार तीसरी बार गर्भपात की आशंका बहुत ही कम होती है. इसका कारण पैरेंट्स में किसी जेनेटिक समस्या का होना भी हो सकता है. इसलिए सबसे पहले किसी अच्छे गायनाकोलॉजिस्ट को मिलकर गर्भपात के कारणों को जानने के लिए सारे ज़रूरी टेस्ट्स कराएं. सही कारण पता चलते ही तुरंत इलाज कराएं. आप सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ें. भविष्य में आप जल्दी ही एक हेल्दी बच्चे को जन्म देंगी.

 

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

 

 

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मैं 26 वर्षीया युवती हूं और छह महीने बाद मेरी शादी होनेवाली है. आज तक मैं कभी गायनाकोलॉजिस्ट (Gynecologist) से नहीं मिली, पर मेरी सहेलियों का कहना है कि शादी से पहले मुझे एक बार गायनाकोलॉजिस्ट से ज़रूर मिलना चाहिए. आप क्या सलाह देंगी? मुझे क्या करना चाहिए? 

 

– स्नेहा यादव, इंदौर.

मैं समझ सकती हूं कि आपको थोड़ा अजीब लग रहा होगा, क्योंकि आप आज तक कभी किसी गायनाकोलॉजिस्ट (gynecologist) से नहीं मिली हैं, पर इसके लिए आपको ज़्यादा संकोच करने की ज़रूरत नहीं. आमतौर पर ज़्यादातर कपल्स शादी से पहले काउंसलिंग के लिए गायनाकोलॉजिस्ट से मिलते हैं. उनसे मिलकर आप गर्भनिरोध के ऑप्शन्स के बारे में जानकारी व सलाह ले सकती हैं. इसके अलावा आप उनसे फैमिली प्लानिंग या उससे जुड़ी अपनी ग़लतफ़हमियां दूर कर सकती हैं. प्रेग्नेंसी से जुड़े किसी अन्य विषय पर भी आप गायनाकोलॉजिस्ट से सलाह ले सकती हैं.

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मैं 50 वर्षीया महिला हूं और पिछले साल ही मेरे पीरियड्स बंद हुए हैं. पिछले दो महीने से मुझे अक्सर योनि में खुजली व डिस्चार्ज हो रहा है. क्या मुझे डॉक्टर से मिलना पड़ेगा?
– तुलिका कमानी, हैदराबाद.

 

आपका मेनोपॉज़ हो चुका है और आपके द्वारा बताए लक्षणों से लग रहा है कि आपको इंफेक्शन है. सबसे पहले आपको चेकअप कराना पड़ेगा, ताकि पता चल सके कि आपको किस तरह का इंफेक्शन है, जिससे सही इलाज किया जा सके. इसके अलावा आपको पैप स्मियर टेस्ट और ब्लड शुगर चेकअप (फास्टिंग और पोस्ट लंच) ज़रूर कराना चाहिए.

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यूरिनरी इंफेक्शन्स के लिए होम रेमेडीज़   

बहुत-सी महिलाओं में यह एक आम समस्या है. संकोच व लिहाज के कारण अक्सर महिलाएं इसे छिपा लेती हैं, ऐसे में ये होम रेमेडीज़ उनके लिए काफ़ी कारगर सिद्ध होंगी.
– इसमें भरपूर पानी पीना आपके लिए बहुत लाभदायक होगा, इसलिए ख़ूब पानी पीएं.
– ककड़ी जैसे पानी से भरपूर फ्रूट्स को अपने डायट में शामिल करें.
– अदरक की चाय आपको इससे राहत दिलाएगी.
– गर्म पानी की थैली से सेंक करें.
– दो कप पानी में 1 टेबलस्पून पार्सले की सूूखी पत्तियों को उबालकर उसका पानी पीएं.

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डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected] 

 

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मैं 29 वर्षीया युवती हूं. हाल ही में मैंने ध्यान दिया कि पिछले साल की तुलना में इस साल पीरियड्स के दौरान मुझे बहुत ज़्यादा रक्तस्राव (Bleeding) हो रहा है. पहले मेरे पीरियड्स स़िर्फ 4 दिनों तक रहते थे, पर अब 6 दिनों तक रहते हैं. आमतौर पर कितना ब्लड लॉस सामान्य होता है? और मुझे कैसे पता चलेगा कि मुझे अत्यधिक रक्तस्राव (Bleeding) हो रहा है? 

– श्‍वेता मोरे, पुणे.

पीरियड्स के दौरान आमतौर पर महिलाओं को 40 मि.ली. तक ब्लड लॉस होता है, जो 20 मि.ली. से 80 मि.ली. तक भी हो सकता है. अत्यधिक रक्तस्राव (Bleeding) के बारे में जानने का सबसे आसान तरीक़ा यह देखना है कि रक्तस्राव के दौरान ब्लड क्लॉट (खून के थक्के) निकलते हैं या नहीं, क्योंकि अगर पीरियड्स के दौरान ब्लड क्लॉट्स ज़्यादा आ रहे हैं और आपको कमज़ोरी महसूस हो रही है, तो समझ जाएं कि आपको अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा है. ऐसे में आपको तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए.

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Heavy Menstrual Bleeding
मैं 32 वर्षीया महिला हूं व मेरा 4 साल का बच्चा है. डिलीवरी के छह महीने बाद से ही मैं इंट्रायूटेराइन डिवाइस कॉपर टी इस्तेमाल कर रही हूं. मैं यह जानना चाहती हूं कि क्या कॉपर टी निकलवाने के तुरंत बाद मेरी फर्टिलिटी लौट आएगी या फिर मुझे कंसीव करने में बहुत ज़्यादा समय लगेगा?

– जयश्री मिश्रा, राजकोट.

आपको बता दें कि इंट्रायूटेराइन डिवाइस कॉपर टी निकलवाने के तुरंत बाद ही आपकी फर्टिलिटी वापस आ जाएगी, जबकि हार्मोंसवाले गर्भनिरोधक साधनों का इस्तेमाल करनेवाली महिलाओं के साथ ऐसा नहीं होता. उनकी फर्टिलिटी लौटने में 3 से 6 महीने का समय लगता है, इसलिए अपने पति से इस बारे में बात करें और जब आप प्रेग्नेंसी के लिए तैयार हों, तभी कॉपर टी निकलवाएं.

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हैवी ब्लीडिंग के लिए होम रेमेडीज़ 

  • हैवी ब्लीडिंग से राहत के लिए ठंडा सेंक करें. कॉटन के कपड़े में बर्फ के टुकड़े लपेटकर १५-२०  मिनट  सेंक करें. अगर चाहें, तो 4 घंटे बाद
    रिपीट करें.
  • एप्पल साइडर विनेगर शरीर से टॉक्सिन्स को निकालकर हार्मोंस को संतुलित करता है. 1 ग्लास पानी में 1-2 टेबलस्पून एप्पल साइडर विनेगर
    मिलाकर दिन में 3 बार लें.
  • 2 कप पानी में 1 टीस्पून साबूत धनिया डालकर उबालें. जब पानी आधा रह जाए, तब उसमें थोड़ा-सा शहद मिलाकर रख लें. इसे गुनगुना ही पीरियड्स
    के दौरान 2-3 बार पीएं.
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डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected] 

 

 

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मेरी 16 वर्षीया भांजी के पीरियड्स (periods) वैसे तो नियमित हैं, पर अक्सर एग्ज़ाम्स के दौरान अनियमित हो जाते हैं और एग्ज़ाम्स के बाद वापस से सामान्य हो जाते हैं. क्या यह नॉर्मल है?
– विनिता मल्होत्रा, रायपुर.
परीक्षा के दौरान सभी बच्चे तनाव महसूस करते हैं, पर कुछ में उस तनाव का असर ज़्यादा दिखाई देता है. कुछ लड़कियों को तो परीक्षा के दौरान पीरियड्स (periods) ही नहीं आते, पर परीक्षा के बाद पीरियड्स अपने नियमित समय पर आने लगते हैं. दरअसल, तनाव के कारण शरीर में हार्मोंनल चेंजेज़ होते हैं, जो पीरियड्स को प्रभावित करते हैं. आपकी भांजी को इस तनाव से निपटना सीखना होगा. वो योग या एक्सरसाइज़ कर सकती है या फिर म्यूज़िक सुनकर भी ख़ुद को रिलैक्स रख सकती है. साथ ही पैरेंट्स को भी समझना होगा कि एग्ज़ाम्स के व़क्त बच्चों पर बहुत ज़्यादा दबाव न डालें.

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irregular periods during exams
कुछ ही महीने में मेरी दूसरी डिलीवरी है. दो साल पहले, पहली डिलीवरी के व़क्त डिलीवरी की तारीख़ के एक हफ़्ते बाद भी जब डिलीवरी नहीं हुई, तब डॉक्टर ने लेबर पेन शुरू करनेवाली दवाइयां दी थीं. मेरे डॉक्टर ने कहा है कि इस बार भी शायद मेरा लेबर पेन ख़ुद से शुरू न हो. क्या ऐसा ही होता है?
– श्रुति झा, दरभंगा.
आप अकेली नहीं हैं, जिसके साथ ऐसा हुआ है. ऐसा लगभग 7% महिलाओं के साथ होता है. चूंकि पिछली प्रेग्नेंसी के व़क्त ऐसा हुआ था, इसलिए दोबारा इसकी संभावना बनी हुई है. हालांकि हर प्रेग्नेंसी अलग होती है, फिर भी अभी आपके पास कुछ महीने हैं, डॉक्टर से संपर्क बनाए रखें.
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हैप्पी पीरियड्स के लिए टिप्स

  • रोज़ाना कम से कम दो लीटर पानी पीएं. शरीर हाइड्रेटेड रहेगा, तो वॉटर रिटेंशन का असर कम होगा और आप अच्छा महसूस करेंगी.
  • खाने में नमक और चाय-कॉफी की मात्रा कम कर दें.
  • डार्क चॉकलेट खाएं. इसमें मौजूद तत्व शरीर में सेराटॉनिन की मात्रा बढ़ा देते हैं, जिससे चिड़चिड़ापन, थकान और मूड स्विंग्स से आपको राहत मिलती है.
  • अधिक रक्तस्राव या दर्द हो रहा हो, तो गर्म पानी की बॉटल से पेट के निचले हिस्से में सेंक करें, अच्छा लगेगा.
     
    डॉ. राजश्री कुमार
    स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
    [email protected] 

 

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