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अटेंशन पाने की चाहत आपको बना सकती है बीमार! (10 Signs Of Attention Seekers: How To Deal With Them)

अटेंशन पाने की चाहत तो सभी में होती है लेकिन जब ये चाहत ज़रूरत से ज़्यादा बढ़ जाए, तो ये मेंटल डिसऑर्डर का रूप ले लेती है. अटेंशन सीकिंग बिहेवियर के शिकार लोगों से डील करना बहुत मुश्किल होता है. ऐसे लोग हर पल, हर घड़ी हर किसी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करना चाहते हैं और इसके लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं. यदि आप भी हर पल लोगों का अटेंशन पाना चाहते हैं, तो संभल जाइए..! आपकी अटेंशन पाने की चाहत दूसरों के लिए आफत और आपके लिए मेंटल डिसऑर्डर का कारण बन सकती है.

Attention Seekers

अटेंशन सीकर्स यानी हर पल अटेंशन पाने की चाहत रखने वालों के ये 10 लक्षण होते हैं:

1) अटेंशन सीकिंग बिहेवियर एक पर्सनैलिटी डिसऑर्डर है. इसके शिकार लोग बहुत संवेदनशील होते हैं और हर पल अटेंशन पाना चाहते हैं. ऐसे लोग वास्तविकता से दूर अपनी काल्पनिक दुनिया में ही खोए रहना पसंद करते हैं, उनमें सच का सामना करने की हिम्मत नहीं होती. महिलाएं अटेंशन सीकिंग डिसऑर्डर की सबसे ज़्यादा शिकार होती हैं.
2) अटेंशन सीकर्स का व्यवहार काफ़ी उग्र होता है. हर पल अटेंशन पाने की चाहत रखने वाले व्यक्ति की शादीशुदा ज़िंदगी में भी दरार पड़ सकती है, क्योंकि किसी भी व्यक्ति के लिए ये संभव नहीं है कि वो 24 घंटे स़िर्फ अपने पार्टनर पर ही ध्यान दे, उसकी तारीफ़ करे या फिर हर समय उससे प्यार से ही बात करे. ऐसे में ज़रा से इग्नोरेंस से उनका स्वाभिमान आहत हो जाता है.
3) मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक, जब कोई व्यक्ति चिल्लाकर या कुछ अजीब हरकतें जैसे- झूठी बीमारी या चोट लगने का बहाना बनाकर लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश करे, तो समझ लीजिए कि वो अटेंशन सीकिंग बिहेवियर यानी ASB का शिकार है.
4) अगर कोई अटेंशन सीकर्स पर ध्यान नहीं देता, तो वे असहज महसूस करने लगते हैं और अजीब हरक़तें करने लगते हैं, जैसे- कोई मनगढंत किस्सा सुनाना, जोर-जोर बातें करना आदि.
5) अटेंशन सीकर्स हर समय भावनात्मक सहारा ढूंढ़ते रहते हैं. इन्हें हर समय एक ऐसे साथी की ज़रूरत होती है, जो इनकी हां में हां मिलाए और इनकी हर बात को सही कहे. ज़रूरत से ज़्यादा अटेंशन पाने की चाह रखने वालों की निजी ज़िंदगी में समस्याएं आने लगती हैं. उनके अजीब बर्ताव के कारण धीरे-धीरे दोस्त भी उनसे दूर हो जाते हैं या फिर उनकी अनदेखी करने लगते हैं. ऐसे में व्यक्ति तनाव व अकेलेपन का शिकार हो सकता है.
6) अटेंशन सीकर्स के मुख्य लक्षण हैं- हमेशा एक्टिंग व दिखावा करना, झूठी बीमारी का बहाना, ख़ुद अपनी तारीफ़ करना, अपनी भावनाओं को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाना आदि.
7) अटेंशन सीकर्स दूसरों का ध्यान आकर्षित करने लिए भड़कीले कपड़े पहनते हैं, अजीबोगरीब हेयर स्टाइल बनाते हैं, महिलाएं लाउड मेकअप करती हैं.
8) अटेंशन सीकर्स ख़ुद से बेहतर किसी को समझते ही नहीं हैं इसलिए ये दूसरों की सफलता देख नहीं पाते और दूसरों की सफलता पर उनसे ईर्ष्या करने लगते हैं.
9) विशेषेज्ञों के मुताबिक, अटेंशन सीकर्स अपनी अयोग्यता व असुरक्षा की भावना को छुपाने के लिए अजीबोगरीब हरकतें करके दूसरों का ध्यान आकर्षित करते हैं. दरअसल, आत्मविश्‍वास की कमी के चलते अटेंशन सीकर्स ख़ुद कोे दूसरों से कम आंकते हैं. यही वजह है कि अटेंशन पाने के लिए वो कुछ भी करने को तैयार रहते हैं.
10) घमंडी और ओवरकॉन्फिडेंट लोगों को अटेंशन की ज़्यादा चाह होती है. उन्हें लगता है कि अटेंशन पाना उनका हक़ है, लेकिन इस तरह की सोच उनकी अपरिपक्वता को दर्शाती है. विशेषज्ञों के मुताबिक, इमोशनली इमैच्योर यानी भावनात्मक रूप से अपरिपक्व लोग हमेशा सेंटर ऑफ अट्रैक्शन बने रहना चाहते हैं. ऐसे लोग अटेंशन पाने के लिए छल-कपट, धोखेबाज़ी और किसी को धमकाने से भी पीछे नहीं हटते.

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अटेंशन सीकिंग बिहेवियर के निम्न कारण होते हैं:

* अटेंशन सीकिंग बिहेवियर आनुवांशिक भी होता है इसलिए यदि बच्चे के पैरेंट्स अटेंशन सीकर्स हैं, तो बच्चे में भी अटेंशन सीकिंग बिहेवियरे देखा जाता है.
* अटेंशन सीकिंग बिहेवियर के लिए व्यक्ति की शिक्षा, परिवार और आस-पास का माहौल भी ज़िम्मेदार होता है.
* कई बार पैरेंट्स द्वारा समय न दिए जाने के कारण बच्चा ख़ुद को उपेक्षित महसूस करने लगता है. इसके अलावा बात-बात पर पैरेंट्स के डांटने-फटकारने, बच्चों की भावनाओं की अनदेखी करने या फिर उनके इमोशन को दबाने के कारण भी बच्चे में अटेंशन पाने की चाहत बढ़ जाती है. बड़े होने पर ऐसे ही बच्चे अटेंशन सीकिंग बिहेवियर के शिकार हो जाते हैं.

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अटेंशन सीकर्स से कैसे करें डील?

* अटेंशन सीकिंग बिहेवियर से डील करने के लिए सबसे पहले ऐसे व्यवहार के लिए ज़िम्मेदार कारणों का पता लगाकर उन्हें दूर करने की कोशिश की जानी चाहिए.
* साइकोलॉजिस्ट ऐसे व्यक्तियों को डांस, म्यूज़िक, पेंटिंग, क्रिएटिव राइटिंग जैसे एक्सप्रेसिव आर्ट में शामिल होने की सलाह देते हैं. इनके ज़रिए अपनी भावनाओं को व्यक्त करने से उन्हें ख़ुशी का अनुभव होता है और उनकी आंतरिक शक्ति बढ़ती है.
* पैरेंट्स अगर छोटी उम्र से ही बच्चों को ख़ुद से प्यार और अपना सम्मान करना सिखाएं, उनका आत्मविश्‍वास बढ़ाने की कोशिश करें, तो बड़े होने पर उनमें अटेंशन पाने की चाह या यूं कहें कि अटेंशन की भूख नहीं रहेगी.
* यदि अटेंशन सीकर्स का व्यवहार कंट्रोल में न हो और समस्या ज़्यादा गंभीर हो जाए, तो साइकोथेरेपिस्ट की मदद लेनी चाहिए.

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सफल शादी के मानसिक फ़ायदे (A Happy Marriage Leads To Better Mental Health)

Marriage Leads To Better Mental Health

शादी ख़ुशहाल जीवन के लिए ज़रूरी तो है ही, साथ ही एक सर्वे के अनुसार इसके कई मानसिक फ़ायदे (Better Mental Health) भी हैं. प्रस्तुत लेख में क़ामयाब शादी से जुड़े ऐसे ही कई मानसिक फ़ायदों के बारे में बताया गया है.

Marriage Leads To Better Mental Health

वाकई में सफल शादीशुदा जीवन बिताने वाले लोग ज़्यादा ख़ुश व लंबा जीवन जीते हैं? अविवाहित लोगों की तुलना में क्या वे मानसिक रूप से अधिक संतुष्ट और सुखी होते हैं? जी हां, यह काफ़ी हद तक सच है. हाल ही में हुए एक सर्वे के अनुसार, शादी व ख़ुशी के बीच एक पॉज़ीटिव रिलेशनशिप होता है, जिससे शादीशुदा लोग अविवाहितों की तुलना में अधिक ख़ुुश भी रहते हैं. आइए, जानें क़ामयाब शादी के मानसिक फ़ायदों के बारे में.
*    सफल शादी एक सुरक्षा कवच की तरह होती है, जो पति-पत्नी दोनों को एक निश्‍चिंत जीवन जीने का आश्‍वासन देती है.
* ऐसे कपल बहुत शांत और बेफ़िक्र ढंग से न स़िर्फ परिवार को सुखमय बनाने में क़ामयाब रहते हैं, बल्कि अपने करियर में भी निरंतर आगे बढ़ते रहते हैं.
* सफल शादी में शेयरिंग करने से पति-पत्नी दोनों जहां एक तरफ़ अपनी सारी परेशानियों से बाहर निकल आते हैं, वहीं फ़ाइनेंशियली भी बहुत सिक्योर महसूस करते हैं.
*  शारीरिक संतुष्टि अगर एक तरफ़ उन्हें कुंठा से बचाती है, तो दूसरी ओर साथ होने का विश्‍वास व एहसास, उन्हें मानसिक रूप से भी सक्षम बनाता है.
*  सुख-दुख में कोई उनके साथ है, यह एहसास इतना स्ट्रॉन्ग होता है कि वे किसी भी तरह की चुनौती का सामना करने को तत्पर रहते हैं.
* यदि उनके साथ कुछ ग़लत या बुरा हो भी गया, तो उनका पार्टनर उन्हें सपोर्ट करेगा और उस स्थिति से बाहर आने में मदद करेगा, यह बात उन्हें बड़े से बड़े फैसले लेने में भी मदद करती है.
*  पार्टनर का साथ पति-पत्नी दोनों को एक कॉन्फ़िडेंस देता है, जिसके बल पर वे कठिन से कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए भी तैयार रहते हैं.
*  सफल शादी पति-पत्नी को हमेशा ख़ुशी के एहसास से भरे रहती है, जिससे उन्हें पॉज़ीटिव इमोशन्स का अनुभव होता है और अभाव या परेशानियां होने के बावजूद वे निराश या कुंठित नहीं होते हैं.
* उन्हें इस बात का डर नहीं सताता कि यदि कल किसी वजह से वे मुसीबत से घिर जाते हैं, तो उनका भविष्य ख़राब हो सकता है.
* जीवनसाथी किसी प्रकार की दुविधा होने या निर्णय लेने की स्थिति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. उस पर आंख बंद करके विश्‍वास किया जा सकता है कि वह उसका अहित नहीं करेगा, इसलिए उसके निर्णय से उलझन को सुलझाने में मदद मिलती है.
* सफल शादी से स्ट्रेस लेवल कम होता है.
* अकेला व्यक्ति जब घंटों किसी चीज़ में उलझा रहता है, तो उसका डिप्रेशन का शिकार होना स्वाभाविक है, पर सफल विवाहित जोड़ों के साथ ऐसा नहीं होता है.
* उसकी ख़ुशी न स़िर्फ उसके चेहरे, हाव-भाव, बातचीत करने के ढंग आदि से झलकती है, बल्कि वह उसकी परफ़ॉर्मेंस में भी दिखाई देती है.
* जब तनाव न हो, तो मन शांत रहता है और काम करना बोझ नहीं लगता. फिर चाहे वह घर का काम हो या ऑफ़िस का, व्यक्ति मन लगाकर करता है.
* काम से थकने पर पार्टनर से कुछ पल बात कर वह फ्रेश हो जाता है.
* घर का टेंशन फ्री माहौल उसे हमेशा दुखी व च़िड़चिड़ा होने से बचाता है.
* जहां पति-पत्नी दोनों वर्किंग होते हैं, वहां एक पार्टनर के बीमार होने या नौकरी छूट जाने पर भी टेंशन नहीं होती. पार्टनर का इमोशनल सपोर्ट भी लगातार मिलने से उसका मनोबल नहीं टूटता. जो साथी काम कर रहा है, उसकी आय से घर चलता रहता है.
* एक सर्वे के अनुसार, जिन पुरुषों का वैवाहिक जीवन सफल होता है, वे अपने वर्कप्लेस में भी सक्सेसफुल होते हैं. वे न तो ज़्यादा छुट्टियां लेते हैं और न ही ऑफ़िस देर से पहुंचते हैं.
* सफल शादीशुदा कपल्स की मेंटल हेल्थ पऱफेक्ट होती है.

स्ट्रेस-फ्री लाइफ़स्टाइल आपको फिज़िकली ही नहीं, मेंटली भी फ़िट रखता है.
* घर में अगर तनाव नहीं रहता, तो बाहर जाकर कुछ करने में झुंझलाहट महसूस नहीं होती है. तब पति-पत्नी दोनों की प्रतिभा खुलकर सबके सामने आती है.
सफल शादीशुदा जीवन बिताने वाली पत्नियों को होनेवाले कुछ ख़ास फ़ायदे
* जिन महिलाओं का वैवाहिक जीवन क़ामयाब रहता है, वे खुले मन और सोच के साथ काम कर पाती हैं, जिससे तरक़्क़ी करने के अवसर निरंतर उन्हें मिलते रहते हैं.
* पति का सहयोग मिलने व उनके काम की महत्ता व मांग को समझने के कारण उन्हें रात को देर से घर पहुंचने की टेंशन नहीं होती, जिससे वे अपना 100% काम को दे पाती हैं.
* सफल शादीशुदा जीवन का सबसे बड़ा मानसिक फ़ायदा यह है कि इस कारण पत्नी का एनर्जी लेवल हमेशा हाई रहता है.
* जीवन के प्रति सकारात्मक नज़रिया होने के कारण उन पर प्रेशर कम होते हैं.
* कोई घुटन या कुंठा न होने के कारण वह बेहतर ढंग से समाज में अपना योगदान दे पाती है.
* यदि पति कॉपरेटिव हो, तो पत्नी के सोशल रिलेशनशिप बेहतर होते हैं और वे अपनी क्षमताओं का प्रयोग पूरी तरह से कर पाती हैं.
* यदि पार्टनर समझदार हो, तो अधिक ज़िम्मेदारियां आसानी से पूरे किए जा सकते हैं. तब पत्नी घर व ऑफ़िस में बैलेंस बना पाती है, जिससे उसे मानसिक संतुष्टि होती है कि वह अपने उत्तरदायित्वों को ठीक से निभाने में सक्षम है.
* सुखी विवाहित महिला अपने व्यवहार व मुस्कान से सबका दिल जीत लेती है और प्रशंसा का पात्र बनती है.
* सफल विवाहित कपल्स को दूसरों को सहयोग व सम्मान देने में ख़ुशी मिलती है और इस तरह वे समाज में अपनी एक ख़ास पहचान व जगह बनाने में क़ामयाब हो पाते हैं.

– वत्सल बाजपेयी

क्या करें जब वर्कलोड आए सेक्स लाइफ के बीच? (How Workload Affects Your Sex Life?)