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युवाओं में बढ़ता डिजिटल एडिक्शन (Why Youths Are So Addicted To Technology)

युवाओं (Youths) के लिए अब उनका स्मार्ट फोन (Smart Phone) ज़िंदगी की सबसे ज़रूरी चीज़ बन गया है. आप उनसे चाहे जो चीज़ मांग लें, लेकिन उनसे उनका मोबाइल (Mobile) नहीं ले सकते. युवाओं में बढ़ता मोबाइल एडिक्शन उनके लिए कितना ख़तरनाक हो सकता है, इसका उन्हें अंदाज़ा भी नहीं. इससे पहले कि बहुत देर हो जाए युवाओं को मोबाइल के एडिक्शन से बचाने के लिए क्या करें? आइए, हम आपको बताते हैं. 

Mobile Addiction

असल ज़िंदगी से दूर हो रहे हैं युवा
रोहित बहुत शर्मीले स्वभाव का लड़का है. उसे लोगों से मिलने या नए दोस्त बनाने में बड़ी हिचक होती है, लेकिन जब वो सोशल नेटवर्किंग साइट पर होता है, तो उसका एक अलग ही रूप देखने को मिलता है. सोशल साइट्स पर रोहित के हज़ारों दोस्त और फॉलोवर्स हैं. हैरानी तो तब हुई, जब ये पता चला कि अपने
आस-पास की लड़कियों को आंख उठाकर भी न देखने वाले रोहित की सोशल साइट्स पर कई गर्लफेंड्स हैं, जिसने वो अश्‍लील और उत्तेजक चैट करता है. सोशल मीडिया का ये हीरो असल ज़िंदगी में बेहद अकेला है. अगर कुछ देर के लिए रोहित का मोबाइल खो जाए या
इंटरनेट ना चले, तो वह बेचैन हो जाता है. उसे सोशल मीडिया की दुनिया में खोए रहना ही लुभाता है. रोहित जैसे कई युवा हैं, जो अपना काम, पढ़ाई, रिश्ते-नातों को ताक पर रखकर सोशल मीडिया की आभासी दुनिया में खोए रहना पसंद करते हैं. सोशल मीडिया पर अपनी फोटो पर मिलने वाले लाइक्स और कमेंट्स से ख़ुश होने वाले ये युवा असल ज़िंदगी की ख़ुशियों से दूर होते जा रहे हैं. उन्हें इस बात का अंदाज़ा भी नहीं होता कि जब उन्हें असल ज़िंदगी में किसी चीज़ की ज़रूरत होगी, तो इनमें से कोई भी उनके साथ नहीं होगा.

ऑनलाइन गेम की बढ़ती लत
चाहे बच्चे हों या बड़े, सब ऑनलाइम गेम के इस कदर दीवाने हो गए हैं कि इसके लिए वो अपनी पढ़ाई, काम, यहां तक कि नींद से भी समझौता कर लेते हैं. ऑनलाइन गेम के दीवाने युवा जब सोते समय गेम खेलते हैं, तो उन्हें समय का बिल्कुल भी होश नहीं रहता और देर रात सोने से उनकी नींद पूरी नहीं हो पाती, जिससे अगले दिन उनकी पढ़ाई और काम प्रभावित होता है. ये सिलसिला जब लंबे समय तक चलता है, इसका असर उनकी पढ़ाई और काम पर साफ़ झलकने लगता है, जिसके कारण उनका आत्मविश्‍वास कम होने लगता है. ऑनलाइन गेम का ये बढ़ता क्रेज़ युवाओं का बहुत सारा समय नष्ट कर रहा है, जिसका उनके भविष्य पर ख़तरनाक असर पड़ सकता है.

मानसिक स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव
एक्सपर्ट्स के अनुसार, डिजिटल एडिक्शन एक ऐसी लत है, जो युवाओं की सोचने-समझने की क्षमता को कम कर रही है, जिससे उनका पढ़ाई में भी मन नहीं लगता. सोशल मीडिया की लत उन्हें उनके रिश्तों से दूर ले जा रही है. जिस तरह किसी शराबी या जुआरी को अपनी लत के आगे कुछ नज़र नहीं आता, उसी तरह डिजिटल एडिक्शन की लत के कारण युवाओं की पढ़ाई, करियर, फैमिली और सोशल लाइफ भी डिस्टर्ब हो रही है. युवाओं का डिजिटल एडिक्शन उन्हें इन सबसे दूर कर रहा है. डिजिटल एडिक्शन के शिकार कई युवाओं की ये लत जब नहीं छूटती, तो कई बच्चों के पैरेंट्स उन्हें इलाज के लिए डॉक्टर के पास भी ले जाते हैं. डिजिटल एडिक्शन के कारण युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है, जिसके कारण उनके सोचने-समझने की क्षमता कम होने लगी है. शुरू-शुरू में तो समझ में नहीं आता, लेकिन समस्या जब गंभीर हो जाती है, तो इसका इलाज कराने के अलावा और कोई रास्ता नहीं होता.

क्या कहते हैं आंकड़े? 

  • दस देशों के 10,000 लोगों पर ए. टी. कियर्नी द्वारा किए गए सर्वे में यह बात सामने आई कि 53 फ़ीसदी भारतीय हर घंटे इंटरनेट से जुड़े रहते हैं जो कि वैश्‍विक औसत 51 फ़ीसदी से ज़्यादा है. इनमें 77 फ़ीसदी लोग सोशल नेटवर्किंग साइटों पर रोज़ाना लॉग इन करते हैं. दस देशों के 10,000 लोगों पर ए. टी. कियर्नी द्वारा किए गए सर्वे में यह बात सामने आई कि 53 फ़ीसदी भारतीय हर घंटे इंटरनेट से जुड़े रहते हैं जो कि वैश्‍विक औसत 51 फ़ीसदी से ज़्यादा है. इनमें 77 फ़ीसदी लोग सोशल नेटवर्किंग साइटों पर रोज़ाना लॉग इन करते हैं.
  •  एक ग्लोबल आईटी सुरक्षा समाधान फर्म की लैब द्वारा किए गए सर्वेक्षणों में यह बात सामने आई है कि 1007 भारतीय युवाओं में से 73 फ़ीसदी डिजिटल एडिक्शन के शिकार हैं. ये हर मुमकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म से लगातार खुद को इंटरनेट के माध्यम से जोड़े रहते हैं. ये युवा जितनी देर जागते हैं, उतनी देर सोशल मीडिया पर अपना व़क्त गुजारते हैं. ये घंटों गेम खेलते हैं, वीडियो देखते हैं, चैट करते हैं, रीट्वीट करते हैं, न्यूज़ और आर्टिकल पढ़ते हैं, ई-कॉमर्स की साइटें देखते हैं. फोन का खो जाना इनके लिए सबसे बड़ी तकलीफ़ का विषय है.
  •  रिसर्च के मुताबिक, भारत में 18 से 30 साल के बीच पांच में से दो युवा ऐसे हैं जो अपने स्मार्टफोन के बगैर इस तरह बेचैन हो जाते हैं, जैसे उनके शरीर का कोई ज़रूरी अंग ग़ायब हो गया हो. इनमें से 96 फ़ीसदी सवेरे उठकर सबसे पहले सोशल मीडिया पर जाते हैं. 70 फ़ीसदी युवाओं का कहना है कि वे ई-मेल और सोशल मीडिया को चेक किए बिना जी नहीं सकते.अपने बच्चों को डिजिटल एडिक्शन से कैसे बचाएं?
    इससे पहले कि बहुत देर हो जाए और डिजिटल एडिक्शन की लत आपके बच्चे को मानसिक रोगी बना दे, आपको अपने बच्चे को डिजिटल एडिक्शन से दूर करना होगा. आप अपने बच्चे को डिजिटल दुनिया से पूरी तरह अलग तो नहीं कर सकते, लेकिन उनके लिए कुछ सख़्त नियम बनाकर आप उन्हें इस लत से बचा सकते हैं.
    * अपने बच्चों को दिन-रात फोन से चिपके न रहने दें, उनके सोशल मीडिया पर जाने के लिए टाइम फिक्स कर लें.
    * आपका बच्चा किन सोशल साइट्स पर रहता है, कितनी देर गेम खेलता है, इस पर नज़र रखें.
    * घर में ये नियम बनाएं कि शाम के समय पूरा परिवार जब एक साथ हो, तो उस समय कोई भी फोन का इस्तेमाल नहीं करेगा.
    * बच्चों के सामने आप ख़ुद सोशल साइट्स पर न रहें, इससे उन्हें बढ़ावा मिलेगा.
    * बच्चों को उनकी पसंद की गतिविधियों में व्यस्त रखें, ताकि उनके पास खाली समय न हो.
    * अपने बच्चों को रात में सोने से पहले फोन को स्विच ऑफ करने या फ्लाइट मोड पर रखने को कहें. * बच्चों के सोने का टाइम फिक्स कर दें, उसके बाद उन्हें मोबाइल इस्तेमाल करने की इजाज़त न दें.
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कहीं आप भी टॉयलेट में फोन तो नहीं यूज़ करते? पड़ सकते हैं बीमार (Don’t Take Your Phone To The Bathroom)

mobile phone use in bathroom

कहीं आप भी अक्सर बाथरूम में अपना मोबाइल फोन तो नहीं ले जाते हैं. अगर ऐसा है तो सावधान हो जाइए, क्योंकि बाथरूम में फोन ले जाना आपकी सेहत के लिए ख़तरनाक हो सकता है.  

mobile phone use in bathroom

एनल्स ऑफ क्लिनिक माइक्रोबायोलॉजी में छपी हुई एक स्टडी में ये बात सामने आई है कि 95 फ़ीसदी हेल्थ केयर वर्क्स के मोबाइल फोन पर बैक्टीरिया के जमा होने के प्रमाण पाए गए हैं. ऐसे बैक्टीरिया से गंभीर इंफेक्शन हो सकता है.

कई लोगों दिन भर के बिज़ी शेड्यूल में अक्सर न्यूज़ या मैसेजेस नहीं पढ़ पाते हैं. ऐसे में घर जाकर आराम से बाथरूम में बैठकर फोन चेक करते हैं. पर ऐसा करके वो जाने अनजाने में कई बीमारियों को दावत दे बैठते हैं.

रेस्टरूम में मौजूद बैक्टीरिया और वायरस फोन पर चिपक जाते हैं. जो फिर हर उस जगह फैलते हैं, जहां-जहां आप फोन को रखते हैं, जैसे- आपकी जेब में, पर्स में, हाथ में. इसके अलावा जितनी बार आप अपना फोन मैसेज टाइप करने के लिए इस्तेमाल करते हैं, उतनी बार ये बैक्टीरिया आपके कीपैड पर चिपक जाते हैं. एक रिसर्च के मुताबिक़ मोबाइल इस्तेमाल करने वाला हर व्यक्ति अपने फोन को एक दिन में कम से कम 2600 बार टच करता है यानी ढेर सारा इंफेक्शन.

ये हैं ज़्यादा ख़तरे में

इन लोगों को ख़ास ख़्याल रखने की ज़रूरत है.

  • डायबिटिक 
  • कीमोथेरेपी लेने वाले
  • जिसे गंभीर बीमारी हो
  • किसी प्रकार का ट्रीटमेंट लेने वाले मरीज़

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इन बातों का ख़्याल रखें

अगर आप फोन से होने वाली इन बीमारियों को रिस्क को कम करना चाहते हैं, तो इन बातों का ख़ास ख़्याल रखें.

  • फोन टॉयलेट में न ले जाएं.
  • बाथरूम यूज़ करने के बाद या टॉयलेट से आने का बाद हाथ अच्छी तरह से हैंड वॉश से धो लें.
  • बाथरूम की सफ़ाई के बाद भी सीधे फोन को टच न करें. हाथों को अच्छी तरह से धोकर ही फोन यूज़ करें.
  • अल्कोहल बेस्ड सैनिटाइज़र का इस्तेमाल करें.
  • फोन और स्क्रीन का फोन के बनाए गए स्पेशल क्लींज़र से ही क्लीन करें.

टॉयलेट सीट से ज़्यादा बैक्टीरिया

यूनिवर्सिटी ऑफ एरिज़ोना ने भी अपनी रिसर्च में पाया है कि फोन पर टॉयलेट सीट से 10 गुना ज़्यादा बैक्टीरिया पाए जाते हैं.

रिलायंस Jio ने लॉन्च किया इंडिया का सबसे सस्ता 4G इंटेलीजेंट स्मार्टफोन (Reliance Launches Its New 4G Jio Free Smartphone)

रिलायंस इंडस्‍ट्रीज लिमिटेड की 40वीं एन्‍युअल जनरल मीटिंग में मुकेश अंबानी ने जियो फोन से जुड़ी कई अहम् घोषणाएं की. जियो का यह 4G फीचर वाला फोन भारत का सबसे सस्ता फोन होगा. इसे इंडिया का इंटेलिजेंट स्मार्टफोन नाम दिया गया है. बिना कीबोर्ड प्रेस किए केवल आवाज़ पर ये फोन ऑपरेट करेगा और 22 भाषाओं को सपोर्ट करेगा. इस मौक़े पर मुकेश अंबानी ने मां कोकिलाबेन और पिता धीरू भाई अंबानी को धन्यवाद दिया. कोकिलाबेन इस मौक़े पर भावुक हो गईं.

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इंडिया के स्मार्टफोन के ख़ास फीचर्स

इंटेलिजेंट स्मार्टफोन के बारे में ये अहम् बातें जान लें

  • यह फोन जियो कस्टमर्स को मुफ्त में मिलेगा, लेकिन इसे मिस यूज़ से बचाने के लिए यूजर को 1500 रुपए का सिक्योरिटी डिपोज़िट देना होगा, जो 3 साल बाद रिफंडेबल होगा.
  • 15 अगस्त से इसका ट्रायल शुरू होगा.
  • 24 अगस्त से इसकी प्री बुकिंग शुरू होगी. प्री बुक करने वाले ग्राहकों को सितंबर 2017 से फोन मिलना शुरू हो जाएगा.
  • 153 रुपये में मिलेगा अनलिमिटेड डेटा.
  • लाइफ टाइम फ्री डेटा वॉइस कॉलिंग की भी सुविधा.
  • यह फोन पूरी तरह से मेड इन इंडिया होगा.
  • जियो फोन पर दो दिन का टैरिफ प्लान 24 रुपये का होगा और हफ़्ते भर का प्लान 54 रुपये का होगा.
  • यह फोन 22 भाषाओं को सपोर्ट करेगा.
  • बिना कीबोर्ड को प्रेस किए केवल आवाज़ पर भी इस फोन को ऑपरेट किया जा सकेगा.
  • फोन में #5 बटन दबाए रखने पर यह इमर्जेंसी मैसेज भेज देगा.
  • इसमें जियोफोन टीवी केबल होगा, जो इसे सभी स्मार्ट और गैर स्मार्ट टीवी से जोड़ देगा.
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स्मार्टफोन आंखों के लिए है हानिकारक (Smartphone Overuse May Damage Your Eyes)

Smartphone Overuse

दिन-रात फोन से चिपके रहने की आदत भले ही आपको दूर-दराज़ बैठे लोगों से जोड़ रही हो, लेकिन ये आपकी आंखों की सेहत बड़ी तेज़ी से बिगाड़ रहा है. आंखों का एकटक मोबाइल फोन पर टिके रहना, उसकी सेहत को डैमेज कर रही है. आइए, हम आपको बताते हैं कि कैसे मोबाइल फोन बहुत स्मार्टली आपकी आंखों को ख़राब कर रहा है. स्मार्टफोन की स्क्रीन आंखों के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकती है. स्मार्टफोन के आने से आंखों की परेशानी में इज़ाफ़ा हुआ है. नई-नई तरह की बीमारियां सुनने और देखने को मिल रही हैं.

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रेटिना पर अटैक

रात में जब आप अपना फोन यूज़ करते हैं, तो उससे निकलनेवाली लाइट सीधे रेटिना पर असर करती है. इससे आपकी आंखें जल्दी ख़राब होने लगती हैं. देखने की क्षमता धीरे-धीरे घटने लगती है.

ड्राईनेस

दिनभर काम करते रहने से आंखों को आराम नहीं मिलता, ऐसे में रात में भी सोने की बजाय फोन पर देर तक बिज़ी रहना आंखों को ड्राई कर देती है. इससे आंखों में खुजली और जलन होने लगती है. लगातार ऐसा करने से आंखों की अश्रु ग्रंथि पर बुरा प्रभाव पड़ता है.

आईसाइट डैमेज

क्या आप जानते हैं कि स्मार्टफोन हमेशा के लिए आंखों की रोशनी छीन सकता है? जी हां, कई शोधों में ये बात साबित हो चुकी है. फोन से निकलनेवाली ब्लू लाइट (कएत श्रळसहीं) आंखों को पूरी तरह से डैमेज कर सकती है.

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आंखों से पानी गिरना

घंटों स्मार्टफोन से चिपके रहने से आंखों से पानी गिरने लगता है. ऐसा मोबाइल से निकलनेवाली किरणों के कारण होता है. लगातार मोबाइल पर देखते रहने से पलकों का झपकना लगभग कम हो जाता है. इससे आखों को आराम नहीं मिलता और आंखों से पानी गिरने लगता है.

चश्मा लगना

ये मोबाइल फोन आपको भले ही सोशल साइट्स से जोड़कर सुकून पहुंचाते हों, लेकिन आपकी आंखों पर जल्द ही चश्मा चढ़ा देते हैं. इतना ही नहीं, धीरे-धीरे आंखों का नंबर बढ़ने लगता है और पतला चश्मा मोटा होने लगता है. कुछ सालों के बाद आपको आंखों का ऑपरेशन तक करवाना पड़ सकता है.

पुतलियों का सिकुड़ना

स्मार्टफोन का अधिक उपयोग करने से न केवल पलक झपकाने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है, बल्कि आंखों की पुतलियां भी सिकुड़ने लगती हैं. आंखों की नसें सिकुड़ने लगती हैं. इससे आंखों की रोशनी के साथ सिरदर्द की समस्या भी होने लगती है.

आंखों का लाल होना

लगातार फोन की स्क्रीन पर देखते रहने से आंखों का स़फेद भाग लाल होने लगता है. आईड्रॉप डालने से भी ये समस्या कम नहीं होती. लाल होने के साथ ही आंखें हमेशा सूजी हुई भी लगती हैं.

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टेंपरेरी ब्लाइंडनेस

लगातार फोन की तरफ़ देखने से जब अचानक आप कहीं और देखते हैं, तो कुछ देर के लिए सब ब्लैक दिखता है. आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है. यह आपकी आंखों के लिए अच्छा संकेत नहीं है.

धुंधला दिखना

स्मार्टफोन का अधिक उपयोग आपको इतना नुक़सान पहुंचाता है कि आपको धुंधला दिखने लगता है. अंग्रेज़ी में इसे ब्लर्ड विज़न कहते हैं. यह प्रक्रिया आगे चलकर गंभीर हो जाती है और आपको दिखने में समस्या होने लगती है

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कैसे बचें?

अगर आप चाहते हैं कि आपकी आंखें ख़राब न हों, तो आप नीचे दिए गए सुझावों को अपनाएं.

दूरी मेंटेन करें

आप अचानक तो फोन का यूज़ करना बंद या कम नहीं कर सकते. ये सच भी है लेकिन फोन को आंखों से दूर रखकर कुछ हद तक आंखों को सेफ रख सकते हैं. जब भी फोन यूज़ करें इस बात का ज़रूर ध्यान रखें कि फोन आंखों के बेहद क़रीब न हो.

20 सेकंड का ब्रेक

दिनभर ऑफिस में कंप्यूटर पर काम करने के बाद वैसे ही आपकी आंखें थक जाती हैं. ऐसे में फोन की स्क्रीन से चिपके रहने पर आंखों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है. जब भी फोन इस्तेमाल करें, तब हर 20 मिनट के बाद 20 सेकंड का ब्रेक लें. यह ब्रेक आंखों को रिलैक्स करेगा.

नो नाइट वॉच

क्या आपको नहीं लगता कि रात सोने के लिए बनी है. दिनभर काम और रात को फोन पर चैटिंग, वीडियो वॉचिंग आदि आपको कितना थका देता है. ख़ुद ही एक लिमिट तय करें. रात में एक समय के बाद फोन यूज़ न करें. देर रात तक फोन यूज़ करने से नींद ख़राब होती है और बाद में ये आदत-सी हो जाती है. इससे आंखों के नीचे डार्क सर्कल, पफनेस आदि होने के साथ आईसाइट पर भी बुरा असर होता है.

लाइट कम करें

शुरुआत में फोन की लत से बचना बहुत मुश्किल है. हां, धीरे-धीरे इस आदत को आप कम कर सकते हैं, इसलिए बेहतर होगा कि फोन यूज़ करते समय फोन की ब्राइटनेस कम करें. इससे आंखों पर प्रेशर कम पड़ेगा.

– श्‍वेता सिंह

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स्लो फोन को सुपरफास्ट बनाने के 5 स्मार्ट ट्रिक्स (5 Smart Tricks To Make Your Mobile Phone Super Fast)

Smart Tricks for Mobile Phone speed
जैसे-जैसे आपका मोबाइल पुराना होने लगता है, वैसे-वैसे उसके स्लो होने, हैंग होने और स्टोरेज की कमी जैसी समस्या आने लगती है. ऐसे में इससे निपटने के लिए आपको थोड़ा स्मार्ट बनना होगा. मोबाइल को स्लो से फास्ट और फास्ट से सुपरफास्ट बनाने के लिए अपनाएं ये स्मार्ट ट्रिक्स. 

Smart Tricks for Mobile Phone speed

 

अनइंस्टॉल करें ग़ैरज़रूरी ऐप्स

कुछ लोगों के मोबाइल में ऐप्स की भरमार रहती है, भले ही वो उन्हें इस्तेमाल करें या नहीं अपने पास रखते ज़रूर हैं. तो ऐसे लोगों को यह समझना चाहिए, जब आप उन ऐप्स को इस्तेमाल ही नहीं कर रहे हैं, तो मोबाइल में भीड़भाड़ करने की क्या ज़रूरत है? आज ही अपने मोबाइल से ग़ैरज़रूरी ऐप्स को अनइंस्टॉल कर दें और स़िर्फ ज़रूरी ऐप्स ही मोबाइल में रखें.

कैश डाटा क्लीयर करें

अगर आप कोई ऐप अनइंस्टॉल नहीं करना चाहते, तो उसमें मौजूद कैश डाटा को क्लीयर करके भी काफ़ी स्टोरेज बढ़ा सकते हैं. ऐसा करने से मोबाइल की स्पीड भी बढ़ जाती है. इसके लिए सेटिंग्स में जाकर ऐप्स में जाएं. जिस ऐप का कैश डाटा क्लीयर करना चाहते हैं, उसे ओपन करें और क्लीयर कैश बटन दबाएं. इससे आपको काफ़ी स्टोरेज स्पेस मिलेगा और मोबाइल भी फास्ट चलेगा.

एनिमेशन बंद कर दें

मोबाइल के होम स्क्रीन पर लाइव वॉलपेपर्स और तरह-तरह के एनिमेशन्स रखने से मोबाइल की स्पीड कम हो जाती है. एनिमेशन इफेक्ट्स स्पेस के साथ-साथ बैटरी भी काफ़ी यूज़ करते हैं, जिससे मोबाइल हैंग होने लगते हैं, इसलिए ऐसा कोई भी एनिमेशन बंद कर दें. लाइव वॉलपेपर्स की बजाय नॉर्मल पिक्चर्स का इस्तेमाल करें.

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फैक्टरी मोड रिसेट कर दें

अगर उपरोक्त उपायों से भी मोबाइल की स्पीड नहीं बढ़ रही है, तो सबसे बेस्ट और लास्ट ऑप्शन है, मोबाइल को फैक्टरी मोड पर रिसेट करना. इसके लिए आपको सेटिंग्स में जाकर बैकअप और रिसेट पर क्लिक करना होगा. यहां आपको यह सावधानी बरतनी होगी कि मोबाइल को फैक्टरी रिसेट करने से पहले अपने कॉन्टैक्ट्स, इमेज़ेस, मैसेजेस आदि का बैकअप लेना होगा, क्योंकि फैक्टरी रिसेट करने पर ये सारी जानकारी मोबाइल से डिलीट हो जाती है. अगर आप ऐसा नहीं करेंगे, तो आप अपने क़ीमती डाटा से हाथ धो बैठेंगे.

रिस्टार्ट और स्विच ऑफ करें

रोज़ाना एक बार अपना मोबाइल रिस्टार्ट, रिबूट या स्विच ऑफ करें, ताकि ग़ैरज़रूरी कैश डाटा क्लीयर हो जाए.

व्हाट्सऐप के चैट्स क्लीयर करते रहें

रोज़ाना आपके व्हाट्सऐप पर न जाने कितनी चैट्स होती हैं. ख़ासतौर से गुप्स में तो लोग काफ़ी चैट करते हैं. ये सारी चैट्स आपके मोबाइल में काफ़ी स्पेस लेती हैं, जिसके कारण भी मोबाइल स्लो हो जाता है, इसलिए जैसे ही ़फुर्सत मिले चैट्स क्लीयर करते जाएं.

– दिनेश सिंह

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मोबाइल चार्जिंग में रखें इन बातों का ख़्याल

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  • मोबाइल हमेशा अपने फोन के चार्जर से ही चार्ज करें. किसी और मोबाइल का चार्जर इस्तेमाल करने से या तो चार्जिंग धीरे-धीरे होती है या होती ही नहीं या फिर वह आपके फोन या बैटरी को नुक़सान पहुंचा सकता है.
  • अपने मोबाइल को बहुत गरम होने से बचाएं, क्योंकि ज़्यादा गर्म होने से मोबाइल के साथ-साथ उसकी बैटरी को भी नुक़सान पहुंच सकता है.
  • मोबाइल को दिनभर चार्जिंग में लगाकर न रखें, क्योंकि उस दौरान मोबाइल बहुत गर्म रहता है, जो आपके मोबाइल के लिए ठीक नहीं.
  • जैसे ही आपका मोबाइल पूरा चार्ज हो जाए, उसे चार्जिंग से निकाल दें. 80% या 90% हो गया है, इसलिए मोबाइल दिनभर लगाए न रखें.
  • टेक एक्सपर्ट्स के मुताबिक़ अपने मोबाइल के लाइफस्पैन कोे बढ़ाने के लिए मोबाइल की चार्जिंग हमेशा 50% से ऊपर रखें.
  • एक्सपर्ट्स के मुताबिक़ बैटरी की लंबी लाइफ के लिए महीने में एक बार मोबाइल को पूरी तरह डिस्चार्ज करके चार्ज करना चाहिए.
  • जब ज़रूरत न हो, जैसे- सोते व़क्त, ज़रूरी मीटिंग के दौरान आदि तो मोबाइल को बंद करके रखें. इससे बैटरी की चार्जिंग बेवजह ख़त्म नहीं होती.
  • वाइब्रेशन में बैटरी तेज़ी से डिस्चार्ज होती है, इसलिए मोबाइल को वाइब्रेशन की बजाय स्लो रिंग टोन पर रखें.
  • ब्लूटूथ, जीपीएस, वाई-फाई बेवजह ऑन न रखें, इससे भी आपके मोबाइल की बैटरी जल्द ख़त्म होती है.
  • बहुत से लोग मोबाइल को रातभर के लिए चार्जिंग पर लगाकर सो जाते हैं. ऐसे में मोबाइल चार्ज तो होता है, पर ओवरहीट भी हो जाता है,
    जिससे आपकी बैटरी डैमेज हो सकती है, इसलिए ऐसा करने से बचें.
  • एनीमेशनवाली थीम्स न रखें और न ही बहुत ज़्यादा इफेक्टवाले या लाइव वॉलपेपर्स, क्योंकि इनसे बैटरी बहुत जल्दी डिस्चार्ज होती है.

– सत्येंद्र सिंह