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जब अपनों को दें उधार 7 बातों का रखें ध्यान (7 Tips Keep In Mind While Giving Loans to Dear One)

giving loans to dear ones

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हर किसी के सामने कभी न कभी ऐसी स्थिति आती है जब उसे अतिरिक्त पैसों की ज़रूरत पड़ती है और तब मदद के लिए उसके दिमाग़ में सबसे पहले दोस्त व रिश्तेदार ही आते हैं. यदि आपका भी कोई दोस्त/रिश्तेदार आपसे पैसों की मदद मांगे, तो उनकी मदद ज़रूर करें, मगर कुछ बातों का ध्यान रखें. आमतौर पर लोग रिश्तेदारी में पैसों के लेनदेन से बचते हैं क्योंकि कई बार पैसा बेहद क़रीबी रिश्तों में भी कड़वाहट घोल देता है. इसलिए लोग दोस्त/रिश्तेदारों के साथ बिज़नेस पार्टनरशिप करने से भी बचते हैं, मगर बावजूद इसके कई बार ऐसी स्थिति आ जाती है कि आपका कोई क़रीबी आपसे मदद मांगता है और आप रिश्तों का लिहाज़ करके ना नहीं बोल पातें. अपनों की मदद करना अच्छी बात है, मगर पैसों के मामले में थोड़ी एहतियात भी बरतनी चाहिए, यदि आपको किसी अपने को उधार देना ही पड़ें, तो इन बातों का ध्यान ज़रूर रखें.

परिस्थितियों का आकलन करें
किसी अपने को उधार देने से पहले परिस्थितियों का अच्छी तरह से विश्‍लेषण कर लें, साथ ही मामले की गंभीरता को भी समझने की कोशिश करें. क्या सामने वाले को सचमुच किसी बेहद ज़रूरी काम के लिए पैसे चाहिए या फिर बस अपना कोई शौक़ पूरा करने लिए वो आपसे पैसे मांग रहा है. हालांकि इस मामले में बहुत ़ज़्यादा पूछताछ न करें, मगर इतना ज़रूर जानने की कोशिश करें कि उसे किस काम के लिए पैसे चाहिए? हो सके तो उसे तुरंत पैसे देने की बजाय कोई दूसरा रास्ता सुझाएं. यदि फिर भी बात न बनें और पैसे देने ही पड़े, तो अच्छी तरह से उसकी ज़रूरत की पड़ताल करने के बाद ही पैसे दें, कहीं ऐसा न हो कि वो आपके पैसों का ग़लत इस्तेमाल करें जिससे भविष्य में आपके रिश्ते में दरार पड़ जाए.

शर्त और नियम पर चर्चा कर लें
पैसों के मामले में भावनाओं को दूर ही रखें. आपकी क्या शर्तें और नियम है इसकी लिस्ट बना लें, जैसे- वो कितने दिनों में आपके पैसे लैटाएगा, पेमेंट कैसे करेगा? यदि ज़्याद अमाउंट है तो इंस्टॉलमेंट कितनी होगी आदि. ये सारी चीज़ें सामने वाले से डिस्कस कर लें ताकि भविष्य में किसी तरह की ग़लतफ़हमी की गुंजाइश न रहे. एक बात याद रखिए कि एक बार पैसे देने के बाद उससे बार-बार ये न पूछे कि उसने पैसों का क्या किया, कैसे ख़र्च किए. आपके बार-बार पूछने से रिश्ते में तनाव और दरार आ सकती है. यदि बहुत बड़ी रकम उधार दे रहे हैं, तो उसका लिखित सबूत (प्रूफ) ज़रूर रखें.

अपनी सहूलियत देखें
‘अरे चाचा जी ने आज पहली बार मुझसे पैसे मांगे है, अब तो किसी भी तरह से पैसों का इंतज़ाम करना ही पड़ेगा…’ अपने किसी क़रीबी द्वारा उधार मांगने पर क्या ऐसा रिएक्शन आपको ही मुश्किल में डाल देगा. मान लीजिए आपने अभी तो अपनी क्षमता से बाहर जाकर अपने किसी दोस्त या कलीग से पैसे मांगकर उन्हें दे दिए, लेकिन यदि सामने वाले ने आपको समय पर पैसे नहीं लौटाएं तब आप क्या करेगें. दोस्तों के बीच आपकी क्या इज़्ज़त रह जाएगी? अतः यदि आपके पास पैसे नहीं है तो इनकार करने में संकोच न करें. अपनी ज़रूरते पूरी होने के बाद यदि आपके पास अतिरिक्त पैसे हैं तो ही किसी को उधार दें. यदि आपको दोस्त/रिश्तेदार ने जितने पैसे मांगे है आपके पास उतना नहीं है, तो उनसे साफ़ शब्दों में कह दीजिए की आपके पास फिलहाल उतने पैसे नहीं हैं और जितना आपसे बन पड़े उतने ही पैसे दें.

पैसे वापस करने का समय निश्चित करें
चूंकि आप किसी अपने को ही उधार दे रहे हैं, ऐसे में शायद आपको लगे कि पैसे वापस करने का समय निश्‍चित करने की ज़रूरत नहीं है, मगर आपकी ये सोच सही नहीं है. आप चाहे किसी को भी उधार दें, पैसे देते समय ही उसे वापस करने का समय भी तय कर लें. इस बात का ध्यान रखें कि सामने वाला भी समय तय करने की ज़रूरत को समझें. दरअसल, ऐसा करना उसके लिए भी फ़ायदेमंद ही रहेगा क्योंकि समय तय करने से उस पर निश्‍चित तारीख़ तक पैसे देने का दबाव बढ़ेगा और आपके पैसे चुकता करने के लिए सेविंग करने में जुट जाएगा. जहां तक संभव हो कम पैसों के लिए ज़्याद लंबा समय न रखें. हां, यदि पैसे ज़्यादा दिए हैं, तो आप साल दो साल का समय तय कर सकते हैं. आपने कितना उधार दिया है, ये ज़रूर याद रखें.

ब्याज न वसूलें
आपने कोई बिज़नेस डील नहीं की है और न ही किसी बैंक या फायनेस कंपनी में निवेश किया है कि आपको ब्याज मिले. अपने किसी सगे-संबंधी को दिए पैसों पर ब्याज वसूलने की ग़लती न करें, हो सके उस व़क्त वो शख़्स आपकी बात मान लें, मगर आगे चलकर निश्‍चय ही आपके रिश्तों में दूरियां आ जाएंगी. एक बात याद रखिए कि उन्होंने बैंक या किसी फायनेंशियल कंपनी की बजाय आपसे पैसे इसलिए मांगे क्योंकि उन्हें आप पर विश्‍वास है कि आप उनकी मजबूरी समझेंगे और उसका नाजायज़ फ़ायदा नहीं उठाएंगे.

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उधार को न बनाएं आदत
हालांकि आप अपने किसी क़रीबी को पैसे देकर उसकी मदद कर रहे हैं, मगर उधार देने को अपनी आदत में शुमार न करें. वरना सामने वाला व्यक्ति आपको ग्रांटेड लेने लगेगा. वो पैसों की अहमियत भी नहीं समझेगा क्योंकि उसे पता है कि जब उसे ज़रूरत होगी तो आप तो हैं ही उसकी मदद करने के लिए और ये हालात आपके लिए ख़तरनाक हो सकते हैं. क्योंकि लंबे समय पैसे न चुकाने पर यदि आप उससे बार-बार तकादा करते हैं, तो वो अपमानति और असुरक्षित महसूस करने लगता है. इस स्थिति में कई बार उधार लेने वाला व्यक्ति आपके साथ कुछ ग़लत भी कर सकता है. ऐसे कई मामले देखे गए हैं जहां उधार लेने वाले व्यक्ति ने तंगहाली के कारण पैसे देने वाले को ही रास्ते से हटा दिया है.

पहचान वालों को बनाएं गवाह
आप जो उधार दे रहे हैं यदि उसके लिए कोई लिखित सबूत नहीं है, तो कभी भी अकेले में पैसे उधार न दें भले ही वो आपके भाई/बहन ही क्यों न हो. जहां तक संभव हो ऐसे कुछ लोगों (2-3) के सामने पैसे दें, जो आप दोनों को जानते हों. इससे पैसे लेने वाले को अपनी ज़िम्मेदारी का एहसास रहेगा और वो जल्द पैसे वापस करने की कोशिश करेगा. इसी तरह इन्हीं जानकार लोगों के सामने पैसे वापस लौटाने पर उधार वापस करने वाले को भी तसल्ली रहती है.

मैंने अपने एक रिश्तेदार को 2-3 बार उधार दिए और उसने समय पर पैसे लौटा भी दिए, मगर एक बार उनके कहने पर मैंने 1 लाख रुपए 1 साल के लॉकिंग पिरियड पर उन्हें इन्वेस्ट करने के लिए दिए, मगर इस इनवेस्मेंट का उन्होंने मुझे कोई प्रूफ नहीं दिया. वो बेहद क़रीबी और विश्‍वसनीय रिश्तेदार थे इसलिए मैंने भी उनसे दुबारा प्रूफ के बारे में नहीं पूछा, मगर एक साल बाद जब मैंने उनसे पैसों के बारे में पूछा तो हर बार नए-नए बहाने बनाकर वो पैसे देने से बचते रहें. तब मुझे एहसास हुआ कि रिश्तेदारी में पैसे देकर मैंने कितनी बड़ी ग़लती की है. उनके बार-बार के झूठ से तंग आकर एक दिन मैंने उन्हें बहुत भला-बुरा सुनाया फिर क़रीब 6 महीने बाद उन्होंने पैसे तो लौटाए, मगर जिस इंटरेस्ट रेट की बाद करके उन्होंने पैसे निवेश करवाए थे वो इंटरेस्ट नहीं दिया. कम से कम मुझे मेरे मूल पैसे तो मिल गए इसी बात की तसल्ली है. इस वाक़ये के बाद से मैंने दुबारा अपने किसी रिश्तेदार से पैसे की लेन देन नहीं की और नही भविष्य में करूंगी.
नेहा शर्मा, दिल्ली

– कंचन सिंह

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मनी मैटर – बच्चों से डिस्कस करते समय न करें ये ग़लतियां (Money Matters: Do not discuss these points to children)

परवरिश

परवरिश

दिनोंदिन बढ़ती महंगाई के इस दौर में बच्चों को भी पैसों की अहमियत समझाना बेहद ज़रूरी है ताकि आगे चलकर उन्हें फायनांशियल मामलों में परेशानी न हो और वो संभालकर ख़र्च करें. यदि आप बच्चों को पैसों की अहमियत समझाना चाहती हैं, तो बचें इन ग़लतियों से.

अच्छे मार्क्स लाने पर गिफ्ट/पैसे देने का लालच
राहुल इस बार अगर तुम 90% मार्क्स लाओगे मैं तुम्हें साइकिल लाकर दूंगी या तुम जो चाहोगे तुम्हें मिल जाएगा. अक्सर माता-पिता बच्चों से ऐसे ही वादे करते हैं, उन्हें लगता है ऐसा करने से उनका बच्चा पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित होता है, मगर आपका ये रवैया बच्चे के भविष्य के लिए सही नहीं है. उन्हें लालच देने की बजाय पढ़ाई की अहमियत समझाएं और बताएं कि ऐसा न करने पर भविष्य में उन्हें कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करना अच्छा है, लालच देकर ऐसा करना सही नहीं है. बच्चे को समझ आना चाहिए कि वो अपने भले के लिए पढ़ाई कर रहे हैं न कि कोई चीज़ पाने के लिए.

घर के काम करने पर पैसे देना
पूजा बेटा ज़रा दुकान से नमक का पैकेट तो ले आना और ये तो 10 रुपए अपने लिए फ्रूटी ले लेना. क्या आप भी घर का कोई काम करवाने के लिए बच्चे को ऐसे ही रिश्‍वत देती हैं. पैरेंट्स का ये तरीक़ा सही नहीं है. इससे बड़े होने पर भी बच्चे घर के काम को अपनी ज़िम्मेदारी नहीं समझेंगे, वो यही उम्मीद करेंगे कि हर काम के लिए उन्हें गिफ्ट या पैसे मिले. इस तरह से न तो वह अपनी ज़िम्मेदारी समझेंगे और न ही पैसों की अहमियत.

बेटे-बेटियों में फर्क़ करना
आज भी कुछ घरों में बेटे-बेटियों में फर्क़ किया जाता है. कुछ पैरेंट्स स़िर्फ बेटे के साथ ही पैसों से जुड़े मामलें पर बात करते हैं, स़िर्फ उन्हें ही समझाते हैं कि पैसे कैसे ख़र्च करने चाहिए, कैसे बचत करनी चाहिए आदि. पैरेंट्स का ये रवैया ग़लत है चूकि आज लड़ियां भी पढ़ाई और नौकरी के सिलसिले में दूसरे शहर/देश जाती हैं. ऐसे में उनके लिए भी फायनांशियल एज्युकेशन उतनी ही ज़रूरी है जितनी लड़कों के लिए.

बच्चों के सामने फिज़ूलख़र्च करना
बेटा आपको रोज़-रोज़ नए खिलौने नहीं मिल सकते. पैसे बहुत मेहनत से आते हैं उन्हें बस खिलौनों और बेकार की चीज़ों पर ख़र्च नहीं करना चाहिए. आपने अपने बच्चे को तो नसीहत दे दी, मगर ख़ुद 4 जोड़ी नए जूते ले आए, ऐसे में ज़ाहिर है बच्चा आपकी फिज़ूलख़र्च की परिभाषा समझ नहीं पाएगा. उसके लिए दो विडियो गेम अगर फिज़ूलख़र्च है तो एकसाथ ख़रीदे गए आपके 4 जोड़ी जूते भी उसी कैटेगरी में आएंगे. अतः बच्चे को नसीहत देने से पहले ख़ुद अपने आप को सुधारें. क्योंकि वो वही करते और समझते हैं जैसा पैरेंट्स को करते देखते हैं.

यह भी पढ़ें:  जब अपनों को दें उधार 7 बातों का रखें ध्यान

छोटी उम्र से बात न करना
जब बच्चा थोड़ा समझने लगे तो उसे पिग्गी बैंक लाकर दें और उसमें पैसा जमा करना सिखाए इससे बच्चे को बचत की आदत पड़ेगी. उनकी हर डिमांड तुरंत पूरी करने की ग़लती न करें वरना वो पैसों की क़द्र कभी नहीं कर पाएंगे. यदि आप बच्चे को पॉकेट मनी देती हैं, तो उसका भी हिसाब रखें. ज़रूरत से ज़्यादा पैसे न दें. आज के दौर में जहां कपड़े, जूतों से लेकर खाने-पीने की हर चीज़ की ब्रांडिग हो गई है बच्चे भी अमुक ब्रांड की चॉकलेट और चीज़ पहचानने लगे हैं ऐसे में यदि शुरुआत से ही उन्हें पैसों की अहमियत नहीं समझाई गई, तो आगे चलकर उन्हें समस्या आएगी. अतः जैसे-जैसे बच्चे की उम्र बढ़ती जाए उन्हें एक-एक करके बचत और ख़र्च का सही तरीक़ा समझाएं.

रखें इन बातों का ख़्याल
* यदि आप बच्चे को पॉकेट मनी देती हैं, तो उसमें ख़र्च का हिसाब लिखने की आदत भी डालें. इससे उसे पता चलेगा कि उसने कितना ख़र्च किया है.
* बच्चे ने पैसे मांगे नहीं कि कुछ पैरेंट्स तुरंत उनकी डिमांड पूरी कर देते हैं बिना ये पूछे कि उन्हें पैसे क्यों चाहिए. आप ऐसी ग़लती न करें. यदि बच्चा आपसे पैसे मांगता है तो सबसे पहले उससे पूछे कि उसे पैसे क्यों चाहिए. बिना पूछे हमेशा उनकी मांग पूरी करने से वो पैसों की अहमियत नहीं समझेगा.
* बच्चे को पैसों की शेयरिंग भी सिखाएं. उसे कहे कि वो अपने भाई-बहन के लिए अपने पैसों से गिफ्ट ख़रीदें.
* पिग्गी बैंक में पैसे जमा करने की आदत डालें और जब वो भर जाए तो उन पैसों से उसे अपनी पसंद की चीज़ ख़रीदने के लिए कहें.
* जब बच्चा थोड़ा समझदार हो जाए तो उसे अपनी आर्थिक स्थिति से अवगत कराएं ताकि वो अपने दोस्तों की देखा-देखी हर चीज़ की डिमांड न करें. उसे समझ आना चाहिए की हर किसी का आर्थिक स्तर अलग होता है और उसे उसी के हिसाब से ख़र्च करना चाहिए.

कंचन सिंह

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जब अपनों को दें उधार 7 बातों का रखें ध्यान (7 Things keep in mind while lending money to relatives)

उधार

उधार

हर किसी के सामने कभी न कभी ऐसी स्थिति आती है जब उसे अतिरिक्त पैसों की ज़रूरत पड़ती है और तब मदद के लिए उसके दिमाग़ में सबसे पहले दोस्त व रिश्तेदार ही आते हैं. यदि आपका भी कोई दोस्त/रिश्तेदार आपसे पैसों की मदद मांगे, तो उनकी मदद ज़रूर करें, मगर कुछ बातों का ध्यान रखें. आमतौर पर लोग रिश्तेदारी में पैसों के लेनदेन से बचते हैं क्योंकि कई बार पैसा बेहद क़रीबी रिश्तों में भी कड़वाहट घोल देता है. इसलिए लोग दोस्त/रिश्तेदारों के साथ बिज़नेस पार्टनरशिप करने से भी बचते हैं, मगर बावजूद इसके कई बार ऐसी स्थिति आ जाती है कि आपका कोई क़रीबी आपसे मदद मांगता है और आप रिश्तों का लिहाज़ करके ना नहीं बोल पातें. अपनों की मदद करना अच्छी बात है, मगर पैसों के मामले में थोड़ी एहतियात भी बरतनी चाहिए, यदि आपको किसी अपने को उधार देना ही पड़ें, तो इन बातों का ध्यान ज़रूर रखें.

परिस्थितियों का आकलन करें
किसी अपने को उधार देने से पहले परिस्थितियों का अच्छी तरह से विश्‍लेषण कर लें, साथ ही मामले की गंभीरता को भी समझने की कोशिश करें. क्या सामने वाले को सचमुच किसी बेहद ज़रूरी काम के लिए पैसे चाहिए या फिर बस अपना कोई शौक़ पूरा करने लिए वो आपसे पैसे मांग रहा है. हालांकि इस मामले में बहुत ़ज़्यादा पूछताछ न करें, मगर इतना ज़रूर जानने की कोशिश करें कि उसे किस काम के लिए पैसे चाहिए? हो सके तो उसे तुरंत पैसे देने की बजाय कोई दूसरा रास्ता सुझाएं. यदि फिर भी बात न बनें और पैसे देने ही पड़े, तो अच्छी तरह से उसकी ज़रूरत की पड़ताल करने के बाद ही पैसे दें, कहीं ऐसा न हो कि वो आपके पैसों का ग़लत इस्तेमाल करें जिससे भविष्य में आपके रिश्ते में दरार पड़ जाए.

शर्त और नियम पर चर्चा कर लें
पैसों के मामले में भावनाओं को दूर ही रखें. आपकी क्या शर्तें और नियम है इसकी लिस्ट बना लें, जैसे- वो कितने दिनों में आपके पैसे लैटाएगा, पेमेंट कैसे करेगा? यदि ज़्याद अमाउंट है तो इंस्टॉलमेंट कितनी होगी आदि. ये सारी चीज़ें सामने वाले से डिस्कस कर लें ताकि भविष्य में किसी तरह की ग़लतफ़हमी की गुंजाइश न रहे. एक बात याद रखिए कि एक बार पैसे देने के बाद उससे बार-बार ये न पूछे कि उसने पैसों का क्या किया, कैसे ख़र्च किए. आपके बार-बार पूछने से रिश्ते में तनाव और दरार आ सकती है. यदि बहुत बड़ी रकम उधार दे रहे हैं, तो उसका लिखित सबूत (प्रूफ) ज़रूर रखें.

यह भी पढ़ें:  फायनेंशियल प्लानिंग शादी से पहले और शादी के बाद

अपनी सहूलियत देखें
‘अरे चाचा जी ने आज पहली बार मुझसे पैसे मांगे है, अब तो किसी भी तरह से पैसों का इंतज़ाम करना ही पड़ेगा…’ अपने किसी क़रीबी द्वारा उधार मांगने पर क्या ऐसा रिएक्शन आपको ही मुश्किल में डाल देगा. मान लीजिए आपने अभी तो अपनी क्षमता से बाहर जाकर अपने किसी दोस्त या कलीग से पैसे मांगकर उन्हें दे दिए, लेकिन यदि सामने वाले ने आपको समय पर पैसे नहीं लौटाएं तब आप क्या करेगें. दोस्तों के बीच आपकी क्या इज़्ज़त रह जाएगी? अतः यदि आपके पास पैसे नहीं है तो इनकार करने में संकोच न करें. अपनी ज़रूरते पूरी होने के बाद यदि आपके पास अतिरिक्त पैसे हैं तो ही किसी को उधार दें. यदि आपको दोस्त/रिश्तेदार ने जितने पैसे मांगे है आपके पास उतना नहीं है, तो उनसे साफ़ शब्दों में कह दीजिए की आपके पास फिलहाल उतने पैसे नहीं हैं और जितना आपसे बन पड़े उतने ही पैसे दें.

पैसे वापस करने का समय निश्‍चित करें
चूंकि आप किसी अपने को ही उधार दे रहे हैं, ऐसे में शायद आपको लगे कि पैसे वापस करने का समय निश्‍चित करने की ज़रूरत नहीं है, मगर आपकी ये सोच सही नहीं है. आप चाहे किसी को भी उधार दें, पैसे देते समय ही उसे वापस करने का समय भी तय कर लें. इस बात का ध्यान रखें कि सामने वाला भी समय तय करने की ज़रूरत को समझें. दरअसल, ऐसा करना उसके लिए भी फ़ायदेमंद ही रहेगा क्योंकि समय तय करने से उस पर निश्‍चित तारीख़ तक पैसे देने का दबाव बढ़ेगा और आपके पैसे चुकता करने के लिए सेविंग करने में जुट जाएगा. जहां तक संभव हो कम पैसों के लिए ज़्याद लंबा समय न रखें. हां, यदि पैसे ज़्यादा दिए हैं, तो आप साल दो साल का समय तय कर सकते हैं. आपने कितना उधार दिया है, ये ज़रूर याद रखें.

ब्याज न वसूलें
आपने कोई बिज़नेस डील नहीं की है और न ही किसी बैंक या फायनेस कंपनी में निवेश किया है कि आपको ब्याज मिले. अपने किसी सगे-संबंधी को दिए पैसों पर ब्याज वसूलने की ग़लती न करें, हो सके उस व़क्त वो शख़्स आपकी बात मान लें, मगर आगे चलकर निश्‍चय ही आपके रिश्तों में दूरियां आ जाएंगी. एक बात याद रखिए कि उन्होंने बैंक या किसी फायनेंशियल कंपनी की बजाय आपसे पैसे इसलिए मांगे क्योंकि उन्हें आप पर विश्‍वास है कि आप उनकी मजबूरी समझेंगे और उसका नाजायज़ फ़ायदा नहीं उठाएंगे.

उधार को न बनाएं आदत
हालांकि आप अपने किसी क़रीबी को पैसे देकर उसकी मदद कर रहे हैं, मगर उधार देने को अपनी आदत में शुमार न करें. वरना सामने वाला व्यक्ति आपको ग्रांटेड लेने लगेगा. वो पैसों की अहमियत भी नहीं समझेगा क्योंकि उसे पता है कि जब उसे ज़रूरत होगी तो आप तो हैं ही उसकी मदद करने के लिए और ये हालात आपके लिए ख़तरनाक हो सकते हैं. क्योंकि लंबे समय पैसे न चुकाने पर यदि आप उससे बार-बार तकादा करते हैं, तो वो अपमानति और असुरक्षित महसूस करने लगता है. इस स्थिति में कई बार उधार लेने वाला व्यक्ति आपके साथ कुछ ग़लत भी कर सकता है. ऐसे कई मामले देखे गए हैं जहां उधार लेने वाले व्यक्ति ने तंगहाली के कारण पैसे देने वाले को ही रास्ते से हटा दिया है.

पहचान वालों को बनाएं गवाह
आप जो उधार दे रहे हैं यदि उसके लिए कोई लिखित सबूत नहीं है, तो कभी भी अकेले में पैसे उधार न दें भले ही वो आपके भाई/बहन ही क्यों न हो. जहां तक संभव हो ऐसे कुछ लोगों (2-3) के सामने पैसे दें, जो आप दोनों को जानते हों. इससे पैसे लेने वाले को अपनी ज़िम्मेदारी का एहसास रहेगा और वो जल्द पैसे वापस करने की कोशिश करेगा. इसी तरह इन्हीं जानकार लोगों के सामने पैसे वापस लौटाने पर उधार वापस करने वाले को भी तसल्ली रहती है.

मैंने अपने एक रिश्तेदार को 2-3 बार उधार दिए और उसने समय पर पैसे लौटा भी दिए, मगर एक बार उनके कहने पर मैंने 1 लाख रुपए 1 साल के लॉकिंग पिरियड पर उन्हें इन्वेस्ट करने के लिए दिए, मगर इस इनवेस्मेंट का उन्होंने मुझे कोई प्रूफ नहीं दिया. वो बेहद क़रीबी और विश्‍वसनीय रिश्तेदार थे इसलिए मैंने भी उनसे दुबारा प्रूफ के बारे में नहीं पूछा, मगर एक साल बाद जब मैंने उनसे पैसों के बारे में पूछा तो हर बार नए-नए बहाने बनाकर वो पैसे देने से बचते रहें. तब मुझे एहसास हुआ कि रिश्तेदारी में पैसे देकर मैंने कितनी बड़ी ग़लती की है. उनके बार-बार के झूठ से तंग आकर एक दिन मैंने उन्हें बहुत भला-बुरा सुनाया फिर क़रीब 6 महीने बाद उन्होंने पैसे तो लौटाए, मगर जिस इंटरेस्ट रेट की बाद करके उन्होंने पैसे निवेश करवाए थे वो इंटरेस्ट नहीं दिया. कम से कम मुझे मेरे मूल पैसे तो मिल गए इसी बात की तसल्ली है. इस वाक़ये के बाद से मैंने दुबारा अपने किसी रिश्तेदार से पैसे की लेन देन नहीं की और नही भविष्य में करूंगी.
नेहा शर्मा, दिल्ली

– कंचन सिंह

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मनी सेविंग के 7 अमेज़िंग टिप्स (7 amazing tips for money saving)

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किचन के डिब्बे, बच्चों की गुल्लक में पैसा जमा करना पुराना और फ्लॉप आइडिया है मनी सेविंग का. सेविंग के ये तरी़के आज की मॉडर्न और हाइ प्रोफाइल लाइफ में नहीं चलेगा. आपको स्मार्टली मनी सेविंग ट्रिक्स आनी चाहिए.

डेली बेसिस बजट
मंथली बजट बनाने के साथ ही आप डेली बेसिस पर बजट बनाएं. उदाहरण के लिए प्रतिदिन आपके घर का कितना ख़र्च है, हर दिन कौन-सी चीज़ें आप मंगाते ही हैं, बच्चों पर हर दिन कितना ख़र्च हो जाता है आदि का बजट बनाएं. इसी सिलसिले में हर दिन कुछ अमाउंट सेव करें.

RD है बेस्ट ऑप्शन
घर पर पैसे रखने से पैसे ख़र्च हो जाते हैं, इसलिए आप बैंक में आरडी अकाउंट खुलवाएं. हर माह कुछ पैसे इसमें जमा करते रहें. हो सके तो इसको अपने सैलरी अकाउंट से सीधे कनेक्ट करें. इससे ये फ़ायदा होगा कि महीने की एक तारीख़ को अपने आप सैलरी का एक हिस्सा आरडी में जाता रहेगा.

प्री शॉपिंग लिस्ट
स्मार्ट बायर बनिए. किसी भी व़क्त शॉपिंग के लिए निकलना बेवकूफ़ी है. इससे पैसे ज़्यादा ख़र्च होते हैं. पहली बात तो ये कि जब भी शॉपिंग पर जाएं, एक लिस्ट पहले ही बना लें. जो ख़रीदना है, उसकी लिस्ट जब आपके पास रहेगी, तो ज़्यादा ख़र्च से बचेंगे. ऐसे में आप उन्हीं चीज़ों की शॉपिंग करेंगे, जिसकी ज़रूरत है. ये ट्रिक आपको पैसा बचाने में कामयाब बनाएगी.

रेड्यूस इलेक्ट्रीसिटी बिल
पैसे बचाने का ये नायाब तरीक़ा है. आमतौर पर लोगों का ध्यान इस पर नहीं जाता. स्मार्ट बनिए और घर का बिजली का बिल कम करिए. बेकार में जली रही लाइट्स, चल रहे पंखे आदि बंद रखें. स़िर्फ एक महीने स्मार्ट सिटिजन बनकर पावर सेव कीजिए, बिजली का बिल अपने आप कम हो जाएगा.

इंटरनेट मेनिया
इंटरनेट का यूज़ करके भी आप पैसे बचा सकते हैं. उदाहरण के लिए न्यूज़ पेपर पढ़ने की बजाय ई पेपर पढ़ें. महीने में जो भी मैगज़ीन मंगाते हैं, उसे बंद करके ऑनलाइन ई मैगज़ीन पढ़ें. इससे हर महीने न्यूज़ पेपर और मैगज़ीन पर होनेवाले ख़र्च बंद हो जाएंगे और पैस बचेेंगे.

प्राइवेट नहीं पब्लिक ट्रांसपोर्ट
अपनी कार/बाइक से ऑफिस जाने की बुरी लत से बचिए. बेहतर होगा कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट का फ़ायदा उठाएं. इससे आपकी जर्नी भी सेफ होगी और पैसे भी सेव रहेंगे.

नो क्रेडिट ओन्ली कैश
क्रेडिट कार्ड का यूज़ आपको ज़्यादा ख़र्च करने पर बाध्य करता है. इसका मुख्य कारण है कार्ड. फिज़िकली आपको पैसा पे नहीं करना होता. इससे आपके दिमाग़ में ख़र्च का खाका नहीं बनता. अब से जब भी पे करना हो, तो क्रेडिट कार्ड के बदले कैश पे करें.

– श्वेता सिंह

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बुढ़ापे में कैसे करें मनी मैनेजमेंट? (how to do money management in old days?)

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रिटायरमेंट के बाद अपनी देखभाल के लिए बच्चों पर आश्रित रहने से बेहतर है कि आप पहले से ही रियाटरमेंट की प्लानिंग कर लें यानी कुछ इन्वेस्टमेंट कर लें, लेकिन पैसे बचाना ही काफ़ी नहीं है. रिटायरमेंट के बाद ख़ुशहाल ज़िदंगी के लिए उसे सही तरह से मैनेज करना भी ज़रूरी है. बढ़ती उम्र में कैसे करें मनी मैनेजमेंट?

सीमित हों ज़रूरतें
युवावस्था में व्यक्ति की ज़रूरतें व इच्छाएं बहुत अधिक होती हैं और उन्हें पूरा करने के लिए वो दिन-रात बहुत मेहनत भी करता है, लेकिन वृद्धावस्था में बहुत मेहनत करना संभव नहीं होता, इसलिए बेहतर होगा कि आप अपनी ज़रूरतों को सीमित कर लें. ऐसा करने से आपको मेहनत भी कम करनी पड़ेगी और पैसे भी कम ख़र्च होंगे, जैसे- आपके पास यदि एक बड़ा घर है, तो उसे मेंटेन करने के लिए समय, पैसा व मेहनत तीनों ही ख़र्च होते हैं. ऐसे में बेहतर होगा कि आप उसे बेचकर ज़रूरत के मुताबिक़ एक छोटा घर ख़रीद लें और बचे हुए पैसों को किसी सुरक्षित जगह इन्वेस्ट कर दें. इससे बुढ़ापे में भी आपको किसी के सामने हाथ फैलाने की ज़रूरत   नहीं पड़ेगी.

प्लानिंग भी है ज़रूरी
पैसे को सही तरह से मैनेज करने के लिए प्लानिंग ज़रूरी है. मसलन, आप अपनी इनकम के मुताबिक़ पैसे को अलग-अलग हिस्सों में बांट दें, जैसे- एक हिस्सा रोज़मर्रा के ख़र्चं, एक हिस्सा सेविंग, एक हिस्सा मेडिकल एक्सपेंस और एक आकस्मिक ख़र्च के लिए. इस तरह अलग-अलग ख़र्च के लिए अमाउंट तय कर लेने पर बजट बिगड़ेगा नहीं. चूंकि बढ़ती उम्र में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों पर ज़्यादा पैसे ख़र्च होते हैं, इसलिए अच्छा होगा कि आप पहले ही कोई हेल्थ इंश्योरेंस आदि     ले लें.

ढूंढे इनकम के तरीक़े 
आमतौर पर वृद्धावस्था में लोग स़िर्फ पेंशन के सहारे ही अपना ख़र्च चलाने की कोशिश करते हैं, लेकिन बढ़ती महंगाई को देखते हुए ये बहुत मुश्किल हो गया है, इसलिए अपनी ज़रूरतें सीमित करने के साथ ही यदि संभव हो, तो इनकम का कोई और ज़रिया तलाशें. आपका तरीक़ा ऐसा होना चाहिए, जिसमें आपको बहुत अधिक शारीरिक श्रम न करना पड़े और न ही ज़्यादा परेशानी हो. बेहतर होगा कि आप अपनी हॉबी को रीक्रिएट करके उसे ही आमदनी का ज़रिया बनाएं, जैस- आपको यदि अच्छा खाना बनाना आता है, योगा या एक्सरसाइज़ में महारत हासिल है, कोई वाद्य यंत्र अच्छा बजाते हैं या फिर आपको कई भाषाओं का ज्ञान है, तो आप इसकी क्लासेस घर में ही खोल सकते हैं. इससे आपका समय भी अच्छा बीतेगा और अपनी हॉबी को बुढ़ापे में भी जारी रखने से आपको ख़ुशी व सुकून का एहसास होगा. साथ ही आय का एक अच्छा स्रोत मिल जाएगा.

समझदारी से करें ख़र्च
इस उम्र में बहुत ज़रूरी है कि आप सोच-समझकर ख़र्च करें. पैसे स़िर्फ ज़रूरत के लिए ख़र्च करें, दिखावे या लग्ज़री के लिए नहीं. यदि आपको लगता है कि आप बहुत ख़र्चीले हैं और माह के अंत तक कुछ बचत नहीं कर पाते, तो महीने के शुरू में कुछ रकम की बचत कर लें. इससे आप काफ़ी हद तक फिज़ूलख़र्च से बच जाएंगे. यदि आप टेक्नोसेवी हैं, तो कुछ ऐप्स की मदद से भी अपने ग़ैर ज़रूरी ख़र्च पर लगाम लगा सकते हैं. र्चींशश्रेशिी, ोपशू र्ींळशु, सेेव र्लीवसशीं आदि कुछ ऐसे यूजफुल ऐप्स हैं, जो आपकी इस काम में मदद कर सकते हैं.

करें छोटी-छोटी सेविंग
आपने वह कहावत तो सुनी ही होगी कि बूंद-बूंद से सागर बनता है. ख़ासतौर से वृद्ध लोगों से बेहतर सेविंग की क़ीमत कोई नहीं समझ सकता. आप भी उम्र के इस दौर में छोटी-छोटी सेविंग करने की कोशिश करें. मसलन, घर के काम ख़ुद करने से नौकर का ख़र्च कम हो जाएगा, साथ ही आपकी सेहत भी बरकरार रहेगी. इसके अतिरिक्त ग्रॉसरी का सामान इकट्ठा लाना या सेल में शॉपिंग करने से बहुत फ़ायदा होता है. इन सबके अलावा बहुत ज़रूरी है कि आप युवावस्था में ही कुछ सेविंग करनी शुरू कर दें. यदि आप अपनी आय का एक छोटा-सा हिस्सा सेविंग के रूप में रखेंगे, तो वृद्धावस्था में आपके पास अच्छी ख़ासी रकम होगी, जिससे आप आर्थिक परेशानी से बच सकते हैं.

मेंटेंन करें डायरी
भले ही आप कितनी भी समझदारी से ख़र्च करें, लेकिन फिर भी माह के अंत तक ख़र्च का हिसाब नहीं मिल पाता. ऐसे में बेहतर होगा कि आप एक डायरी मेंटेंन करें. इससे आपको अपने ख़र्च के बारे में तो पता चलेगा ही, साथ ही आप फिज़ूलख़र्च से भी बच जाएंगे.

इन्वेस्टमेंट पर दें ध्यान
उम्र के इस पड़ाव पर आपका इन्वेस्टमेंट ऐसा होना चाहिए जिसमें रिस्क कम और रिटर्न ज़्यादा हो. आप अपनी सेविंग को शेयर मार्केट या म्युचुअल फंड में इन्वेस्ट करने की बजाय बैंक में पीएफ में डाल सकते हैं या पोस्ट ऑफिस में कोई सेविंग स्कीम ले सकते हैं. यहां इन्वेस्ट करने पर जोखिम नहीं रहता. साथ ही जीवन बीमा व हेल्थ इंश्योरेंस पर भी आप पैसे ख़र्च कर सकते हैं. कोशिश करें कि आपका इन्वेस्टमेंट ऐसा हो, जिससे आपके चले जाने के बाद भी आपके पार्टनर (पति/पत्नी) को पैसों की दिक्कत न हो. यदि आपको इन्वेस्टमेंट के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं है, तो किसी प्रोफेशनल से सलाह लेने के बाद ही निवेश करें.

बचें फ्रॉड से
आपने कई ऐसे विज्ञापन देखे होंगे या कई लोगों के मुंह से सुना होगा जहां कुछ स्कीम्स, लॉटरी आदि में बहुत जल्दी ढेर सारा पैसा कमाने का लालच दिया जाता है. भूलकर भी इन सब पर भरोसा करने की ग़लती न करें. कहीं भी पैसा इन्वेस्ट करने से पहले जानकार की सलाह अवश्य ले लें. चूंकि आपकी सेविंग आपकी सारी उम्र की जमा पूंजी होती है, इसलिए इस उम्र में किसी फ्रॉड का शिकार होने पर उबरना बहुत मुश्किल होता है.

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ऐसे करेंगे ख़र्च, तो सेविंग होगी ज़्यादा (spend like this and save more money)

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पैसे कमाना जितना मुश्किल है उसे खर्च करना उतना ही आसान. कई बार लोगों को खर्च की ऐसी लत लग जाती है कि पैसे बचाने की तरफ़ उनका ध्यान ही नहीं जाता. आप भी ऐसी ग़लती न करे इसलिए होममेकर ने ख़ास आपके लिए जुटाए है मनी सेविंग के कुछ यूज़़फुल टिप्स.

बजट बनाएं
बचत करने के लिए सबसे पहले ज़रूरी है बजट बनाना. बजट बनाने से आपको ये अंदाज़ा हो जाएगा कि किस चीज़ पर कितना खर्च करना है और अगर खर्च आपकी इनकम से ़ज़्यादा हो रहा है तो कहां कटौती करनी है इसका आइडिया भी आपको मिल जाएगा. विशेषज्ञों के अनुसार बजट बनाने से आपको ये भी पता चल जाएगा कि किसी चीज़ पर आप पैसे बर्बाद तो नहीं कर रहें, इससे आप आसानी से फिज़ूलखर्ची पर लगाम लगा सकते हैं.

लक्ष्य तय करें
अगर आप ये तय कर लेगें कि आज से दो साल बाद आपको मकान खरीदना है या नई गाड़ी लेनी है तो अपने इस लक्ष्य पर फोकस करके आपके लिए बचत करना थोड़ा आसान हो जाएगा. बिना कि लक्ष्य के आप रोज़ ये तय ज़रूर करके रहेंगे कि आज से पैसे बचाने है लेकिन कर नहीं पाएंगे. एक बार लक्ष्य तय कर लेने पर उसकी प्रति प्रतिबद्धता आपको सेविंग करने के लिए विवश करेगी.

तय करें कितनी बचत करनी है
हर महीने आपको कितनी राशि बचानी है ये तय कर लें, फिर उसी के मुताबिक महीने का खर्च करें, लेकिन राशि तय करते समय अपनी सैलेरी का भी ध्यान रखें कहीं ऐसा न हो कि सेविंग के चक्कर में आपके महीने का बजट ही बिगड़ जाए.

खर्च का हिसाब-किताब
एक डायरी में अपने महीने के खर्च का हिसाब-किताब रखें. इससे आपको पता चल पाएगा कि कहीं आपका खर्च आपनी आमदनी से ़ज़्यादा तो नहीं है. खर्चों का हिसाब लिखते समय छोटे से छोटे खर्च को भी लिखना चाहिए.

सेविंग अकाउंट खोलें
बचत के पैसों को जमा करने के लिए अलग से सेविंग अकाउंट खोले, इससे आपको याद रहेगा कि आपने कितनी बचत की है, और जैसे-जैसे आपका बैंक बैलेंस बढ़ेगा आप और ़ज़्यादा सेविंग के लिए प्ररेति होंगे. विशेषज्ञों के मुताबिक किसी सेविंग स्कीम में पैसे डालना ़ज़्यादा फ़ायदेमंद होता है.

क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कम करें
जब तक बहुत ज़रूरी न हो क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल न करें. हमेशा कैश में ही भुगतान करने की कोशिश करें और अगर कभी क्रेडिट कार्ड से शॉपिंग करना ही पड़े तो भुगतान जल्द से जल्द कर दें वरना ब्याज़ ज़्यादा देना पड़ेगा. साथ ही कोई भी सामान इंस्टॉलमेंट में न खरीदें इससे ब्याज़ के रूप में आपको अतिरिक्त पैसे खर्च करने पड़ते है, इसलिए बेहतर होगा कि पहले बचत करें और फिर वो सामान खरीदें.

बच्चों को बताएं बचत की अहमियत
अगर आप चाहती हैं कि आपके बच्चे ब़डे होकर फिज़ूलखर्ची न बनें तो बचपन से ही उनमें बचत की आदत डालिए, इसके लिए आप निम्न तरीके इस्तेमाल कर
सकती हैं.

पॉकेट मनी खुद कमाने दें 
हर महीने फ्री में बच्चों को पैसे देने की बजाय उन्हें कोई काम करने के लिए कहें और उसे पूरा करने पर ही पैसे दें, इससे उन्हें पता चलेगा कि पैसे आसानी से नहीं आतें.

अकाउंट मेंनेट करना सिखाएं
अपने बच्चे से उसके खर्च का हिसाब रखने के लिए कहें, इससे उसे पता चलेगा कि उसने कितना खर्च किया है और कितनी सेविंग की है.

सही खर्च करना सिखाएं 
सेविंग का ये मतलब नहीं है कि आप उसे खर्च करने से ही रोक दें, बल्कि उसे ज़रूरी और सही चीज़ पर खर्च करना सिखाएं.

बैंक बनाएं
बच्चों में बचत की आदत डालने के लिए उन्हें बैंक बनाकर दें (कोई बॉक्स जिसमें पैसे डाल सके). उसे एक बुक भी दे दें जिसमें वो अपना बैलेंस लिख सके.

ख़ास मौक़ों पर उपहार खरीदने दें
त्योहार या किसी ख़ास अवसर पर उसे बचत से अपने लिए कोई बड़ा तोहफा खरीदने दें. इससे बच्चे को सेविंग की वजह समझ में आएगी.

सेविंग ट्रिक

खर्च पर लगाम
ये बचत का सबसे अच्छा ही नहीं बल्कि ज़रूरी हिस्सा है. अगर आप वाक़ई सेविंग करना चाहते हैं तो अपने खर्च पर नज़र रखने के साथ ही ये भी सोचिए कि आप कैसे उसे कम कर सकती हैं, जैसे डेली न्यूज़पेपर लेती हैं लेकिन उसे पढ़ नहीं पातीं तो उसे बंद करा सकती हैं और जब टाइम मिले तो लाइब्रेरी में जाकर पढ़ सकती है, इसी तरह घर में किताबों का ढेर लगाने से अच्छा है कि आप पब्लिक लाइब्रेरी से किताबे ले आएं. ऑफिस में फ्री टाइम में रोज़ाना बाहर से स्नैक्स मंगाने से बेहतर होगा कि आप घर से ही कुछ बनाकर ले जाएं, ये आपके शारीरिक और वित्तिय स्वास्थ्य के लिए अच्छा रहेगा. इस तरह छोटे छोटे खर्च पर लगाम लगाकर आप अपनी मेहनत की कमाई को बचा सकती हैं.

कपड़ों की खरीददारी
– कोशिश करें कि आप ऑफ़ सीज़न में ही कपड़े खरीदें, इससे सेल में आपको किफायती रेट में कपड़े मिल जाएंगे.

– न्यूट्रल कलर के कपड़े चुनें, ऐसे कपड़ें आप किसी भी सीज़न में पहन सकती हैं, कपड़े खरीदे समय स्टाइल का भी ध्यान रखें, ऐसा कुछ न खरीदे जिसके थोड़े समय बाद आउडेटेड होने की आशंका हो.

– ऐसे स्टोर्स और आउटलेट्स का पता लगाएं जहां डिस्काउंट चल रहा हो.

– कुछ ऐसे कपड़े खरीदें जिन्हें आप एक से ़ज़्यादा आउटफिट्स के साथ पहन सकें. जैसे ब्लैक पैंट के साथ आप कई तरह के टॉप पहन सकती हैं, इसी तरह व्हाइट लैगिज़ के साथ भी आप कई रंग के कुर्ते ट्राई कर सकती हैं.

– अगर पार्टी या किसी ख़ास मौकों के लिए ड्रेस खरीदना चाहती हैं तो जल्दबाज़ी न करें, सेल या डिस्काउंट सीज़न का वेट करें, इसमें आपको कम दाम में अच्छी चीज़ मिल सकती है.

– इस बात का भी ध्यान रखें कि सेल के लालच में कहीं आप अपनी साइज़ से छोटे कपड़ें न ले लें. आपको किस ब्रांड कें किस साइज़ का कपड़ा फिट आता है इसका पता लगाने के बाद ही आप सेल का सही फायदा उठा सकती हैं.

फूड आइटम्स
– जो फूड आइटम्स ज़्यादा दिनों तक खराब नहीं होते उन्हें थोक में खरीदकर आप डिस्काउंट का फायदा उठा सकती हैं.

– अगर आपको हर हफ्ते बाहर खाने की आदत है तो उसे बदल लीजिए क्योंकि होटल का खाना आपकी सेहत और जेब दोनों के लिए हानिकारक है.

– स़िर्फ ब्रांड का नाम सुनकर ही कोई फूड आइटम न खरीदें क्योंकि कई बार ब्रांडेड फूड और सामान्य फूड की क्वालिटी एक जैसी ही होती है.

– सीज़न में जब कोई फल या सब्ज़ी सस्ती हो तो ब़डी मात्रा में खरीद कर उन्हें प्रिजर्व कर लें.

– अगर आपके घर के आस-पास खाली जगह है तो वहां कोई फल या सब्ज़ी उगाकर आप पैसे बचा सकती हैं.

– नॉन वेज की बजाय वेजिटेरियन खाने को तवज्जो दें.

– कई लोग भूख न होने पर भी स़िर्फ तनाव दूर करने के लिए कुछ न कुछ खाते रहते हैं, जो सही नहीं है. भूख लगने पर ही खाना खाना चाहिए.

– कंचन सिंह

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ट्रैवलिंग में कैसे करें बचत? (How to save money during travelling)

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क्या आप उन लोगों में से हैं, जिन्हें हमेशा यात्रा करनी पड़ती है? कभी ऑफिस का काम, तो कभी फैमिली ट्रिप. अब ऐसे में आपकी जेब पर भार तो पड़ेगा ही, लेकिन कुछ स्मार्ट तरी़के से आप इससे बच सकते हैं. बढ़ती महंगाई में बचत करने की आपकी आदत को तब क्या हो जाता है, जब आप टूर पर निकलते हैं. सालभर की बचाई रकम यूं मिनटों में एक ही ट्रिप पर उड़ा देना समझदारी नहीं है. असली बचत तो तब होगी, जब आप ट्रैवलिंग में भी बचत कर सकें. चलिए, जानते हैं क्या हैं वो टिप्स, जिन्हें अपनाकर आप स्मार्ट ट्रैवलर बन सकते हैं.

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ट्रैवल कार्ड का इस्तेमाल करें
किसी भी जगह का टूर प्लान करते समय ट्रैवल कार्ड का इस्तेमाल करें. जिस तरह आप शॉपिंग करने के लिए डेबिट/क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, ठीक उसी तरह ट्रैवलिंग के लिए ट्रैवल कार्ड का इस्तेमाल करें. इसे आप बैंक के ज़रिए बनवा सकते हैं. बेहतर होगा कि जिस बैंक में आपका अकाउंट है, उसी बैंक से ट्रैवल कार्ड बनवाएं. इस ट्रैवल कार्ड की ख़ासियत यह है कि ज़रूरत पड़ने पर आप इसे रिचार्ज भी करा सकते हैं. हर छोटी-बड़ी चीज़ के लिए आपको कैश देने की ज़रूरत नहीं. इससे आप टेंशन फ्री रहेंगे और सफ़र का आनंद भी उठा पाएंगे.

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अपने वॉलेट में ज़्यादा पैसे न रखें
आमतौर पर किसी भी ट्रिप पर जाने से पहले लोग अपने पर्स में एक्स्ट्रा अमाउंट रख लेते हैं. वो ऐसा इसलिए करते हैं ताकि इमर्जेंसी के व़क्त अगर कोई एटीएम मशीन आसपास न दिखे, तो वो इस कैश का इस्तेमाल कर सकें. हो सकता है, आपकी आदत भी कुछ ऐसी ही हो, लेकिन ये सही तरीक़ा नहीं है. इस तरह आपका पूरा ध्यान आपके पर्स पर ही रहता है और आप घूमने का आनंद नहीं ले पाते.

बैंक को इंफॉर्म करें
ट्रैवलिंग में पैसे बचाने का ये एक बेहतरीन तरीक़ा है. ट्रैवलिंग के बारे में अपने बैंक और क्रेडिट कार्ड कंपनी को जानकारी दें. पूरा ट्रैवल प्लान बताएं. ऐसे में ग़लती से अगर आपका कार्ड खो जाता है, तो बैंक उसे ब्लॉक करके आपको दूसरी आईडी मुहैया कराती है ताकि आप आसानी से अपनी ट्रिप एंजॉय कर सकें. कई बार बैंक के पास घूमने के अच्छे प्लान होते हैं. ऐसे में आप काफ़ी पैसे बचा सकते हैं.

फ़र्जी एटीएम से बचें
आप अपने साथ चाहे जितना भी कैश ले जाएं, लेकिन यात्रा करते समय पैसों की कमी हो सकती है. ऐसे में पैसों को सुरक्षित रखने के लिए किसी भी एटीएम मशीन से पैसे नहीं निकालें. उसी एटीएम से पैसा निकालें जिस बैंक के बारे में आपको जानकारी हो. कोशिश करें कि जिस बैंक में आपका अकाउंट है, उसी बैंक के एटीएम का इस्तेमाल करें.

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पब्लिक कंप्यूटर का यूज़ न करें
कई बार ऐसा होता है कि सफ़र के दौरान हमें नेट बैंकिंग का इस्तेमाल करना पड़ता है. ऐसे में आप अपना लैपटॉप लेकर जाएं. कभी भी होटल या साइबर कैफे के कम्प्यूटर का इस्तेमाल न करें. आपके नेट बैंकिंग की निजी जानकारी आसानी से कोई भी हैक कर सकता है, इसलिए पब्लिक कंप्यूटर से नेट बैंकिंग न करें. प्रकित नंदी जो एक एडवर्टाइज़िंग कंपनी में काम करते हैं, उनका कहना है कि एक साल पहले वो अपने परिवार के साथ सिंगापुर छुट्टियां बिताने गए थे. वहां उन्होंने होटल के कंप्यूटर से नेट बैंकिंग की. जब वो सफ़र से वापस आए, तो कुछ दिनों बाद उन्हें पता लगा कि उनके अकाउंट से 15,000 रुपए किसी दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर हुए थे. आपके साथ ऐसा कुछ न हो, इसलिए सतर्क रहें.

स्मार्ट टिप्स

  • सफ़र के दौरान अपने बैंक का पासवर्ड, एटीएम पिन आदि की जानकारी फोन पर किसी को न दें.
  • सफ़र पर जाने के बाद अगर बैंक का कस्टमर केयर आपसे आपका पासवर्ड मांगे, तो भूल से भी उन्हें अपना पासवर्ड या एटीएम पिन न बताएं. ये फ़र्जी कॉल हो
    सकता है.
  • अगर आपको और पैसों की ज़रूरत लगे, तो आप मनी ट्रांसफर में जाएं और अपने किसी ख़ास दोस्त या रिश्तेदार को पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहें.
  • बहुत से देशों में अपने राष्ट्रीयकृत बैंक आपको मिल जाएंगे. उन्हीं बैंकों से पैसे निकालें. ऐसा करने से पहले एक बार छानबीन अवश्य करें.
  • अगर दूसरे देश में कोई आपको आपकी करेंसी के बदले उनकी करेंसी देने को कहे, तो भूलकर भी ऐसा न करें. वो आपको धोखा देकर फेक करेंसी दे सकता है.

– सुषमा विश्वकर्मा

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क्या है आपका मनी स्टाइल ? ( What’s Your Money Style?)

Money Style

 

आर्थिक रूप से आप कितने सक्षम हैं, यह इस बात पर निर्भर नहीं करता कि आप कितना कमाते हैं. महत्वपूर्ण यह है कि आप कितना बचाते हैं, आप किस तरह ख़र्च करते हैं? पैसे ख़र्च करने और बचत की आदतों के अनुसार दुनिया में 6 तरह के लोग होते हैं. तो आइए देखते हैं कि आप किस कैटेगरी में आते हैं?

जमाख़ोर या कंजूस

जहां ज़्यादातर लोग पैसे को जीवन की सुख-सुविधा जुटाने का साधन समझते हैं, वहीं कंजूस लोग पैसे को अपनी सुरक्षा का साधन समझते हैं और बड़ी मुश्किल से ख़र्च कर पाते हैं. ऐसे लोगों का अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण होता है और ये बजट से बाहर ख़र्च नहीं करते. मोल-भाव करने में भी मास्टर होते हैं.

कमियां
* बेहतर भविष्य के चक्कर में वर्तमान को एन्जॉय नहीं कर पाते.
* इनवेस्टमेंट करने से डरते हैं.
* बचत के पुराने तरी़के अपनाते हैं, जिससे कोई ख़ास फ़ायदा नहीं होता.

क्या हो स्मार्ट मूव?
* पैसे को एन्जॉय करना सीखें.
* कुएं का मेंढक न बनें. बचत के पुराने तरीकों के आगे सोचें. बचत का कुछ हिस्सा स्टॉक, म्युचुअल फंड, शेयर मार्केट, रियल इस्टेट इत्यादि में निवेश करें.

ख़र्चीले

शॉपिंग करना ख़र्चीलों का सबसे बड़ा शौक़ होता है. शॉपिंग के बाद वे रिलैक्स महसूस करते हैं. इन्हें वर्तमान में जीना आता है. ये ज़िंदगी को एन्जॉय करने में माहिर होते हैं. दोस्तों और अपनों को क़ीमती उपहारों से ख़ुश रखते हैं.

कमियां
* अपनी इच्छाओं पर काबू नहीं रख पाते.
* ख़र्च करने की आदत के कारण बचत नहीं कर पाते, जिससे रिटायरमेंट के बाद या ज़रूरत के समय इनके पास पैसे नहीं होते.

क्या हो स्मार्ट मूव?
* ख़र्च पर कंट्रोल करें, क्योंकि भविष्य को सुरक्षित करना भी ज़रूरी है.
* भावनात्मक दूरियों को पैसे से कम करना हमेशा सही नहीं होता.
* आय और व्यय का हिसाब-किताब रखें.
* क्रेडिट कार्ड से तौबा कर लें.
* सिर्फ़ दिखावा करने के लिए ख़र्च न करें.

मूडी

मूडी लोगों में कंजूसी और ख़र्चीलापन दोनों गुण होते हैं. ये बचत के महत्व को समझते हैं और आमतौर पर ख़र्च करने से बचते हैं.

कमियां
* ख़र्च करने के मूड में आने के बाद पर्स खाली करने से बाज़ नहीं आते.
* बचत का महत्व समझ कर भी बचत नहीं कर पाते.

क्या हो स्मार्ट मूव?
* जोश में आकर ख़र्च करने से बचें.
* ख़र्च करने की सीमा तय करें.
* शॉपिंग लिस्ट तैयार करके ही शॉपिंग करने जाएं.
* शॉपिंग के लिए जाते समय ज़रूरत से ज़्यादा पैसे न ले कर जाएं.

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चिंतित प्रवृत्ति

ऐसे लोग पैसे होने के बावजूद हमेशा हैरान-परेशान रहते हैं. उन्हें हर पल बिल के भुगतान, टैक्स और अन्य ख़र्च की चिंता सताती है. इनकी ये अच्छाई है कि ये बिल समय पर भरना नहीं भूलते. अधिक चिंतित रहने के कारण मनी एडवाइज़रों की सलाह लेते हैं, जो उन्हें निवेश करने की सही राय दे सकते हैं.

कमियां
* पैसे की चिंता उन्हें रात-दिन परेशान करती रहती है.
* उनमें पैसे को हैंडल करने का आत्मविश्‍वास नहीं होता.
* निर्णय लेने में काफ़ी समय लगाते हैं, जिससे कई बार मौ़के हाथ से फिसल जाते हैं.

क्या हो स्मार्ट मूव?
* हर दिन अपनी चिंताओं को लिखें. साथ में यह भी लिखें कि बुरी से बुरी स्थिति क्या हो सकती है, जिससे आपको यह अंदाज़ा हो जाएगा कि आपकी स्थिति कहीं बेहतर है.
* बजट बनाने में मनी एडवाइज़रों की सलाह लें.
* हर दिन बजट का विश्‍लेषण न करें.

उदासीन या संन्यासी प्रवृत्ति

दुनिया में बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो रुपये-पैसे को ज़्यादा महत्व नहीं देते. ऐसे लोग नैतिक मूल्यों को अधिक महत्व देते हैं और दिल खोलकर दान देते हैं. रुपये-पैसे के मामले में ये बड़े उदार होते हैं.

कमियां
* भविष्य की आर्थिक सुरक्षा की अनदेखी करते हैं.
* निवेश और बचत नहीं करते.

क्या हो स्मार्ट मूव?
* आपको यह समझना होगा कि ज़्यादा कमाना कोई बुरी बात नहीं है.
* जितने ज़्यादा पैसे होंगे, आप उतना अधिक दान कर सकते हैं.
* बेहतर भविष्य के लिए बचत करना भी ज़रूरी है.

मनी मास्टर

पैसे को बेहतर ढंग से हैंडल करने की कला में ऐसे लोग निपुण होते हैं. मनी मास्टर रुपये-पैसे को स्मार्ट तरी़के से हैंडल करते हैं. ये लोग भविष्य पर नज़र रखते हुए अपने ख़र्च, बचत और निवेश में संतुलन बनाए रखते हैं. साथ ही आमदनी बढ़ने पर अपनी लाइफस्टाइल में सुधार लाते रहते हैं.

कमियां
* अपने दोस्तों, संबंधियों को बिना मांगे रुपये-पैसे के बारे में सलाह देते रहते हैं, जिससे वे उनसे दूर भागते हैं.
* वे दूसरों से सलाह नहीं मांगते, क्योंकि उन्हें लगता है कि वे रुपये-पैसे के बारे में दूसरों से ज़्यादा जानते हैं.

क्या हो स्मार्ट मूव?
* हालांकि आपका इरादा नेक होता है, पर बिना मांगे दूसरों को सलाह देने से बचें.
* आप बुद्धिमान हैं इसमें कोई शक नहीं, पर बड़े फायनांशियल (आर्थिक) फैसले लेते समय विशेषज्ञों से एक बार सलाह ले लेनी चाहिए.

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