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मॉनसून में फिटनेस के लिए इंडोर एक्टिविटीज़ (Fitness Special: Indoor Activities For Monsoon)

Fitness Special
मॉनसून में फिटनेस के लिए इंडोर एक्टिविटीज़ (Fitness Special: Indoor Activities For Monsoon)

ख़ुद को फिट रखना आपका पैशन है, लेकिन बारिश की वजह से आप जिम नहीं जा पा रहे हैं. कोई बात नहीं, इंडोर एक्टिविटीज़ करके भी आप फिट रह सकते हैं. ट्रेडमिल, स्किपिंग, सूर्य नमस्कार, ऐरोबिक्स आदि बहुत सारी इंडोर एक्टिविटीज़ हैं, जिनके लिए किसी इक्विपमेंट की ज़रूरत नहीं होती और न ही जिम जाने की.

सूर्य नमस्कार
यह अपने आप में कंप्लीट एक्सरसाइज़ है. सूर्य नमस्कार करने के बाद अन्य वर्कआउट करने की ज़रूरत नहीं होती, क्योंकि इसमें इतने सारे स्टेप्स होते हैं, जिनसे पूरी बॉडी स्ट्रेच होती है और बॉडी भी शेप में रहती है. यदि आप भी मॉनसून में फिट एंड फाइन रहना चाहते हैं, तो प्रतिदिन कम से कम 20 बार सूर्य नमस्कार करें. धीरे-धीरे अपने स्टैमिना के अनुसार सूर्य नमस्कार का समय बढ़ाएं.

ब्रिस्क वॉक
मॉनसून में अगर वर्कआउट करने का मूड नहीं है, तो कोई बात नहीं. कान में ईयर फोन लगाकर म्यूज़िक सुनते हुए आप घर के अंदर ही 15-20 मिनट की ब्रिस्क वॉक कर सकते हैं.

स्किपिंग
मॉनसून में स्किपिंग करके भी आप फिट रह सकते हैं. फिटनेस एक्सपर्ट्स का मानना है कि रोज़ाना 20 मिनट स्किपिंग करने से 700 कैलोरीज़ बर्न होती है. हड्डियां व जोड़ मज़बूत होते हैं और मांसपेशियां लचीली बनती हैं.

पुशअप्स एंड प्लैंक्स
पुशअप और प्लैंक्स करने के लिए किसी इक्विपमेंट की ज़रूरत नहीं होती. इसे करने से पीठ, पेट और पैर मज़बूत होते हैं, साथ ही फिज़िकल स्टैमिना बढ़ता है. मॉनसून में अगर फिट रहना चाहते हैं, तो प्रतिदिन कम से कम 20 पुशअप एंड प्लैंक्स करें. धीरे-धीरे अपने स्टैमिना के अनुसार बढ़ाते जाएं.

ट्रेडमिल
मॉनसून वर्कआउट के बारे में सोचते ही सबसे पहला नाम ट्रेडमिल का आता है. ट्रेडमिल पर रोज़ाना 15 मिनट से 45 मिनट तक चल सकते हैं. इसके अलावा ट्रेडमिल पर आप ब्रिस्क वॉक और जॉगिंग भी कर सकते हैं.

इंडोर साइकिलिंग
पार्क जैसी खुली हवादार जगह पर साइकिलिंग करने का मज़ा ही अलग है, लेकिन बारिश में साइकिलिंग करना थोड़ा ख़तरनाक हो सकता है, पर परेशान होने की ज़रूरत नहीं है. टे्रडमिल की तरह इंडोर साइकिलिंग करके भी आप मॉनसून में एक्टिव रह सकते हैं.

होम कार्डियो वर्कआउट
जिम जाने का मूड नहीं, तो होम कार्डियो वर्कआउट करें. इस वर्कआउट की शुरुआत क्विक वॉर्मअप सेशन से करें, फिर जंपिंग जैक, डंबल्स, बाईसेप्स कर्ल, ट्राईसेप्स कर्ल, स्कवैट्स और माउंटेन क्लाइंबर भी ट्राई कर सकते हैं. इन एक्सरसाइज़ को प्रतिदिन 30 मिनट करने से बांहें और पैर मज़बूत होते हैं.

डांस
इंडोर मॉनसून वर्कआउट को एंजॉय करने का बेस्ट तरीक़ा है डांस. वर्कआउट के लिए ऐसे सॉन्ग का सिलेक्शन करें, जो हाई एनर्जीवाले हों. इन हाई एनर्जीवाले सॉन्ग पर आप सोलो डांस भी कर सकते हैं और पार्टनर के साथ भी. डांस करने से एक्स्ट्रा कैलोरीज़ बर्न होती है और मांसपेशियां भी स्ट्रेच होती हैं.

ऐरोबिक्स
ऐरोबिक्स करने का सबसे बड़ा फ़ायदा यह है कि आप जिम गए बिना अपना वज़न कम कर सकते हैं और अपने को फिट रख सकते हैं. इस इंडोर एक्टिविटी को करने से मसल्स टोन्ड होती हैं और आप ख़ुद को भी एक्टिव महसूस करते हैं.

योगा
बारिश के कारण अगर जिम नहीं जा पा रहे हैं, तो आप योगा करके ख़ुद को फिट रख सकते हैं. क्या आप जानते हैं कि रोज़ाना 45 मिनट योगा करने से 700 कैलोरीज़ बर्न होती हैं. इसे करने से बॉडी में फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ती है, इम्यूनिटी स्ट्रॉन्ग होती है और श्‍वसन तंत्र में होनेवाली समस्याएं दूर होती हैं, जो मॉनसून में होना आम बात है.

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Indoor Fitness

हाउसहोल्ड एक्टिविटीज़
मॉनसून में हाउसहोल्ड एक्टिविटीज़ करके आप एक्टिव रह सकते हैं. शेल्फ्स और अलमारियां साफ़ करें, मशीन की जगह हाथों से कपड़े धोएं, पोछा लगाएं आदि. इन एक्टिविटीज़ से आप फिट भी रहेंगे और धीरे-धीरे आपका घर भी क्लीन हो जाएगा.

सीढ़ियां चढ़ना-उतरना
बारिश के मौसम में वॉकिंग या जॉगिंग करना संभव नहीं है, तो रोज़ाना 20 मिनट तक सीढ़ियां चढ़ें और उतरें. इस मौसम में एक्स्ट्रा कैलोरीज़ बर्न करने के लिए यह बेस्ट वर्कआउट है. फिटनेस एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर आप रोज़ाना 15 मिनट भी सीढ़ियां चढ़ते-उतरते हैं, तो आपका 80% तक वर्कआउट होता है. यह ट्रेडमिल पर चलने जैसा ही वर्कआउट है. अगर आपके पास ट्रेडमिल नहीं है, तो ख़रीदने की बजाय सीढ़ियां चढ़ें-उतरें. सीढ़ियां चढ़ने व उतरने से न केवल मांसपेशियां लचीली होती हैं, बल्कि मेटाबॉलिक रेट भी बढ़ता है.

स्पोर्ट्स
अगर आपके घर के आसपास कोई क्लब हाउस या जिम है, तो वहां जाकर इंडोर गेम्स भी खेल सकते हैं, जैसे- बैडमिंटन, टेबल टेनिस, स्न्वैश आदि. स्पोर्ट्स बॉडी में एकत्रित फैट्स को कम करने और ख़ुद को एनर्जेटिक रखने का बेस्ट ऑप्शन है.

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Home Fitness

बच्चों के लिए बेस्ट इंडोर एक्टिविटीज़
आर्ट एंड क्राफ्ट: इसमें बच्चों को कलरफुल क्राफ्ट पेपर की मदद से फ्लावर मेकिंग, ग्रीटिंग कॉर्ड आदि बनाना सिखा सकते हैं.
कार्ड और बोर्ड गेम्स: इन गेम्स में बच्चों को फ्रूट्स, वेजीटेबल्स, अल्फाबेट्स, एनीमल कार्ड को अलग-अलग शेप्स और डिज़ाइन में अरेंज करना सिखा सकते हैं.

फन गेम्स: चेस, कैरम, पज़ल्स, लूडो, मैकेनिकल गेम्स आदि.

मूवी टाइम: बच्चों को एनिमेटेड 3डी/4डी मूवी दिखा सकते हैं. उनके मूवी टाइम को फन टाइम बनाने के लिए स्नैक्स का अरेंजमेंट ज़रूर करें.

इंडोर गार्डनिंग: इसमें बच्चे बैंगन, टमाटर, लहसुन, प्याज़ और हरे धनिया को छोटे गमलों में उगा सकते हैं. ये पौधे मॉनसून के लिए परफेक्ट प्लान्ट्स हैं, क्योंकि इन्हें अधिक सनलाइट की आवश्यकता नहीं होती.

स्टोरी टाइम: बच्चों के लिए ऐसा स्टोरी टाइम प्लान करें, जिसे वे एंजॉय कर सकें. बड़े बच्चों को स्टोरी बुक पढ़ने के लिए कहें और छोटे बच्चों को पिक्चर बुक्स और बोर्ड बुक्स दिखाकर स्टोरी सुनाएं.

पार्टी टाइम: बिना किसी कारण के बच्चों और उनके दोस्तों के लिए इनहाउस पार्टी प्लान करें, जैसे- गुड़िया का बर्थडे, उसकी शादी, पप्पी का बर्थडे. डांस और यम्मी स्नैक्स के साथ उनकी पार्टी को सफल बनाएं.

असिस्टेंट बनाएं: बच्चों को कुकिंग, क्लीनिंग, डस्टिंग में मदद करने के लिए प्रेरित करें. रिवॉर्ड के तौर पर उन्हें मूवी दिखाएं, फेवरेट गेम और फेवरेट ट्रीट दें.

कुकिंग एंड बेकिंग: इसमें बच्चों को सलाद, सैंडविच, कपकेक बनाना सिखा सकते हैं.

– पूनम कोठारी

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मॉनसून में कैसे रखें सेहत का ख़्याल? (Monsoon Health Care)

 

Monsoon Health Care
मॉनसून में कैसे रखें सेहत का ख़्याल? (Monsoon Health Care)

गर्मी की तपिश से राहत दिलानेवाली बारिश की फुहारें अपने साथ कई हेल्थ प्रॉब्लम्स भी लेकर आती हैं. सर्दी-ज़ुकाम जैसी आम समस्याओं के अलावा टायफॉइड, हैजा, मलेरिया जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारियां भी इसी मौसम की देन हैं, लेकिन सही खानपान और कुछ हेल्दी आदतें अपनाकर आप बरसात में होनेवाली बीमारियों से बच सकते हैं.

मॉनसून हेल्थ प्रॉब्लम्स

बारिश का मौसम अपने साथ कई आम व गंभीर बीमारियां भी लेकर आता है, इसलिए ज़रूरी है कि हम पहले से ही उसके लिए सावधान रहें. एटलांटा हॉस्पिटल के जनरल फिजिशियन डॉ. फतेह सिंह ने बरसाती बीमारियों से बचाव के बारे में हमें जानकारी दी.

डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया 

जहां डेंगू में तेज़ बुख़ार, बहुत ज़्यादा सिरदर्द और जोड़ों में दर्द होता है, वहीं बुख़ार, ठंड लगना, मांसपेशियों में दर्द और कमज़ोरी आना मलेरिया के लक्षण हैं. चिकनगुनिया के भी लक्षण लगभग यही हैं.

बचाव

–    इससे बचाव का सबसे आसान तरीक़ा यही है कि घर के आसपास कहीं भी पानी का जमाव न होने दें, ताकि मच्छरों को पनपने के लिए जगह न मिले.

–    घर में कबाड़ जमा करके न रखें. जितना हो सके, घर साफ़ रखें.

–    बारिश से पहले घर में पेस्ट कंट्रोल ज़रूर करवाएं.

हैजा

बारिश के मौसम में फैलनेवाली यह एक गंभीर व जानलेवा बीमारी है, जो दूषित भोजन या पानी के कारण होती है. गंदगी और हाइजीन की कमी इस बीमारी को बढ़ावा देती है. उल्टी और पतली दस्त इस बीमारी के शुरुआती लक्षण हैं.

बचाव

–    सबसे ज़रूरी है कि आप हैजे का टीका लगवाएं, इससे 6 महीनों तक आप सुरक्षित रहेंगे.

–   हाथ धोने के लिए लिक्विड हैंड सोप का ही इस्तेमाल करें.

–   साफ़ और शुद्ध पानी के लिए प्यूरिफायर का इस्तेमाल करें अथवा पानी उबालकर पीना सबसे बेहतरीन उपाय है.

–    दूध व दूध से बनी चीज़ें, जैसे- आइस्क्रीम, मलाई वगैरह ज़्यादा न खाएं.

–    स्ट्रीट फूड से दूर रहें.

टायफॉइड

बारिश के दौरान होनेवाली यह एक आम बीमारी है. यह भी दूषित पानी व खाने के कारण ही होती है. इसमें सबसे ख़तरनाक बात यह है कि ठीक होने के बावजूद इसका इंफेक्शन मरीज़ के गॉल ब्लैडर में रह जाता है. बुख़ार, पेटदर्द और सिरदर्द इसके लक्षण हैं.

Monsoon Health Tips

बचाव

यह एक संक्रामक बीमारी है, जो बहुत तेज़ी से फैलती है, इसलिए मरीज़ को अलग कमरे में दूसरों से थोड़ा दूर रखें.

–    उबला व साफ़ पानी ही पीएं.

–    डिहाइड्रेशन से बचने के लिए मरीज़ को लगातार लिक्विड डायट लेते रहना चाहिए.

–    खाना खाने से पहले हाथों को अच्छी तरह ज़रूर धोएं.

–    होमियोपैथिक ट्रीटमेंट ज़्यादा मददगार होती है.

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डायरिया/ पेट के इंफेक्शन्स

इस मौसम में पेट की बीमारियां, जैसे- डायरिया और गैस्ट्रो सबसे ज़्यादा लोगों को परेशान करती हैं, जो वायरल या बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण हो सकती हैं. पेट के ज़्यादातर इंफेक्शन्स में उल्टी और दस्त होते हैं, जिसके लिए तुरंत डॉक्टर से मिलना बहुत ज़रूरी है.

बचाव

–    खानपान के साथ-साथ पर्सनल हाइजीन का  भी ख़ास ख़्याल रखें. टॉयलेट के बाद और डायपर बदलने पर हैंडवॉश से हाथ ज़रूर धोएं.

–    बर्तनों और कटिंग बोर्ड को अच्छी तरह साफ़ रखें.

–    ऐसे फल और सब्ज़ियां खाएं, जिनके छिलके निकाल सकते हैं.

–   अगर ट्रैवेल करनेवाले हैं, तो हेपेटाइटिस ए का टीका ज़रूर लगवाएं.

पीलिया

मॉनसून के दौरान लिवर में वायरल इंफेक्शन काफ़ी आम बात है. हेपेटाइटिस के वायरस पानी के ज़रिए तेज़ी से फैलते हैं. यह इंफेक्शन गंभीर हो सकता है, क्योंकि हेपेटाइटिस का कारण पीलिया होता है, जिससे आंखें और यूरिन आदि पीले पड़ जाते हैं.

बचाव

–    हेपेटाइटिस ए और बी का वैक्सीन लें.

–    दूषित खाने और पानी से बचें.

–    हाइजीन का ख़ास ख़्याल रखें.

हेल्थ अलर्ट्स

–    अगर तीन दिन से बुख़ार आ रहा है, तो ख़ुद से दवा खाने की बजाय डॉक्टर को दिखाएं, क्योंकि यह कोई गंभीर बुख़ार भी हो सकता है.

–   शरीर पर किसी भी तरह के रैशेज़ या फोड़े-फुंसी नज़र आएं, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं, यह कोई इंफेक्शन भी हो सकता है.

–    अगर आपको अस्थमा या कोई और ब्रीदिंग प्रॉब्लम है, तो ध्यान रखें कि सीलनवाली दीवार से चिपककर न बैठें. घर की दीवारें गीली न रखें, वरना फंगस के कारण आपको तकलीफ़ हो सकती है.

–    अस्थमा और डायबिटीज़ के मरीज़ ज़्यादा तीखा और मसालेदार खाना न खाएं, वरना उन्हें हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं.

–   डायबिटीज़ के मरीज़ नंगे पांव गीली ज़मीन पर न चलें, वरना जर्म्स और बैक्टीरिया से आपको इंफेक्शन हो सकता है.

मॉनसून डायट

मॉनसून में हमारी पाचन क्रिया धीमी हो जाती है, इम्यून सिस्टम कमज़ोर हो जाती है और शारीरिक क्षमता पर भी इसका असर पड़ता है. इस मौसम में खाना ठीक तरी़के से पचता नहीं, जिससे एसिडिटी और गैस जैसी समस्याएं होने लगती हैं. ऐसे में आपको खानपान का ख़ास ध्यान रखना चाहिए.

–    बारिश में उबालकर छाना हुआ पानी ही पीएं, वरना दूषित पानी के कारण बीमार पड़ सकते हैं.

–    मॉनसून में हरी पत्तेदार सब्ज़ियां खाने से बचें, क्योंकि बारिश में उनमें कीड़े लगने लगते हैं, जो आपके खाने के साथ पेट में जा सकते हैं.

–    मसालेदार और तले हुए खाने से अपच, उबकाई आना, वॉटर रिटेंशन आदि की समस्या हो सकती है.

–    रोज़ाना गर्म दाल या सूप ज़रूर पीएं. उसमें हल्दी, लौंग, कालीमिर्च और सौंफ ज़रूर डालें. यह इंफेक्शन से लड़ने में आपकी मदद करेगा.

–    खाने के बाद सौंफ का पानी पीने से गैस और एसिडिटी की समस्या नहीं होती. घर के सभी सदस्यों को खाने के बाद ये पानी दें.

–    उबला व अच्छी तरह पका हुआ खाना मॉनसून में आपकी सेहत की देखभाल करेगा.

–   एंटीबैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट के गुणों से भरपूर हर्बल टी और ग्रीन टी इस मौसम में काफ़ी फ़ायदेमंद साबित होती हैं. इसे डेली डायट का हिस्सा बनाएं.

–    गाय का दूध पीएं. यह हल्का व सुपाच्य होता है, जिससे आपको इंस्टेंट एनर्जी मिलती है.

–    खाने में गेहूं के आटे और मैदा की जगह जौ और चने के आटे का इस्तेमाल करें.

–    रोज़ाना अरहर की दाल की बजाय मूंगदाल का इस्तेमाल करें.

–    फ्रेश फ्रूट्स में आप सेब, अनार, मोसंबी और केला खाएं. ड्रायफ्रूट्स को अपने डेली डायट का हिस्सा बनाएं.

–    इस मौसम में जितना हो सके, प्रोसेस्ड फूड अवॉइड करें.

–   नॉन वेज के शौक़ीन बरसात में इसका सेवन कम कर दें.

–    अगर आप दही खाना पसंद करते हैं, तो ज़रूर खाएं, पर उसमें नमक या शक्कर मिला लें.

–    इस मौसम में गाय का घी खाना काफ़ी फ़ायदेमंद होता है, क्योंकि वो न स़िर्फ आपकी पाचन क्रिया  को दुरुस्त रखता है, बल्कि रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर आपकी याद्दाश्त को बेहतर बनाता है.

–   कच्ची सब्ज़ियां और सलाद खाने से बचें. अगर घर पर खा रहे हैं, तो सब्ज़ियों को अच्छी तरह धोकर ही इस्तेमाल करें.

हेल्दी लाइफस्टाइल

–   बहुत ज़्यादा भीड़भाड़वाली जगह पर जाना अवॉइड करें, क्योंकि वहां वायरल इंफेक्शन होने की संभावना ज़्यादा रहती है.

–    फुल स्लीव शर्ट और फुल पैंट पहनें, ताकि मच्छर काट न सकें.

–    जिन्हें एलर्जी और इंफेक्शन्स की समस्या है, वो नीम की पत्तियों को उबालकर उसे नहाने के पानी में मिलाकर नहाएं.

–    एक्सरसाइज़ इस मौसम में भी उतनी ही ज़रूरी है, जितनी हर मौसम में.

–    हो सके तो शाम को घर पहुंचने पर नहाएं.

अपनाएं ये होम रेमेडीज़

–    सर्दी-खांसी से राहत के लिए एक कप पानी में सोंठ पाउडर उबालकर पीएं, राहत मिलेगी.

–    गले में ख़राश या दर्द है, तो गुनगुने पानी में नमक और हल्दी मिलाकर गरारे करें.

–    सर्दी से नाक बंद हो गई हो, तो गर्म पानी में नीलगिरी तेल कीकुछ बूंदें डालकर भाप लें या फिर रुमाल में उसकी कुछ बूंदें छिड़ककर सूंघें.

–    अगर वायरल फीवर है, तो एक कप पानी में तुलसी और अदरक मिलाकर उबाल लें. आंच से उतारकर शहद मिलाएं और चाय की तरह पीएं.

–    अपच व बदहज़मी से बचने के लिए हर बार खाने से पहले अदरक के एक छोटे से टुकड़े पर सेंधा नमक लगाकर खाएं.

–    रोज़ाना हल्दीवाला दूध न स़िर्फ आपको दूषित पानी के कारण होनेवाली बीमारियों से बचाएगा, बल्कि आपकी रोगप्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाएगा.

– सुनीता सिंह

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मॉनसून में रखें सेहत का ख़्याल ( Simple Skin, Hair and Health Care Tips for Monsoon – Safety Measures)

Health Care Tips for Monsoon

बारिश के मौसम में नमी व सीलन के कारण कई तरह के इंफेक्शन्स बहुत तेज़ी से फैलते हैं. अगर आपका इम्यून सिस्टम कमज़ोर है, तो कई बीमारियां बहुत जल्दी आपको अपना शिकार बना सकती हैं. बीमारियों से बचे रहने के लिए आपको ज़रूरत है कुछ ख़ास हेल्थ व न्यूट्रीशनल टिप्स की, जो आपको बनाए रखेंगे हेल्दी व फिट.

 

बचें इन मॉनसूनी बीमारियों से
मलेरिया

बारिश के मौसम में यहां-वहां जमा पानी में पनपनेवाले मच्छर मलेरिया का कारण बनते हैं. इस मौसम में होनेवाली यह सबसे आम बीमारी है. इसके लिए बचाव बहुत ज़रूरी है, क्योंकि रिकॉर्ड्स बताते है कि भारत में सबसे ज़्यादा लोगों की जान इसी बीमारी के कारण गई है.
लक्षण: सर्दी के साथ बुख़ार आना, सिरदर्द, उल्टी आना, बदनदर्द, मांसपेशियों में दर्द, कमज़ोरी आदि.
बचाव: मच्छरों के कारण होनेवाली इस बीमारी से बचने का सबसे सरल उपाय मच्छरों को ख़त्म करना है.
– घर के आस-पास पानी जमा न होने दें.
– मच्छरदानी व बाज़ार में उपलब्ध मच्छर मारने की दवाएं इस्तेमाल करें.
– अगर किसी में उपरोक्त लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाकर टेस्ट कराएं.

हैजा
दूषित पानी व खाना हैजे का कारण बनता है. इसे अनदेखा करना जानलेवा हो सकता है, इसलिए हाइजीन और खाने-पीने का ध्यान रखें. अत्यधिक संक्रामक बीमारी होने के कारण इसमें हाइजीन व साफ़-सफ़ाई का ख़ास ध्यान रखें.
लक्षण: तेज़ पेटदर्द, डायरिया, उल्टी आना और बुख़ार इसके लक्षण हैं.
बचाव: अगर आपके इलाके में हैजा फैलने की संभावना अधिक है, तो बारिश शुरू होने से पहले हैजे का टीका ज़रूर लगवाएं.
– पानी उबालकर-छानकर ही पीएं. खाना अच्छी तरह पकाएं और ढंककर रखें, ताकि उन पर मक्खियां न बैठें.
– खुले में बिकनेवाली चीज़ें न खाएं.
– खाना खाने से पहले और शौच के बाद हाथ अच्छी तरह एंटीबैक्टीरियल साबुन से धोएं.
– पर्सनल हाइजीन का ख़ास ख़्याल रखें और अपने घर को भी साफ़-सुथरा रखें.
– डेयरी प्रोडक्ट्स अवॉइड करें.
–  हाइड्रेशन का ख़ास ध्यान रखें.

टायफॉइड

मॉनसून में दूषित पानी व खाने के कारण होनेवाली यह एक आम बीमारी है. इस बीमारी की सबसे ख़तरनाक बात यही है कि बीमारी का इलाज हो जाने के बावजूद यह मरीज़ के गॉल ब्लैडर में छुपी रह सकती है.
लक्षण: लंबे समय तक बुख़ार, तेज़ पेटदर्द और सिरदर्द इसके लक्षण हैं.
बचाव: मॉनसून शुरू होने से पहले टायफॉइड का टीका ज़रूर लगावाएं. हाइजीन का ध्यान रखें. लक्षण दिखते ही डॉक्टर को दिखाकर टेस्ट्स करवाएं. टायफॉइड के मरीज़ को पर्याप्त मात्रा में लिक्विड दें, वरना डिहाइड्रेशन हो सकता है. यह बहुत ही संक्रामक बीमारी है, इसलिए बाकी लोगों को मरीज़ से दूर रखें.

वायरल फीवर

वैसे तो यह सबसे आम बीमारी है, जो बदलते मौसम के साथ होती है, पर मॉनसून में यह कुछ ज़्यादा ही तेज़ी से फैलती है.
लक्षण: बुख़ार, लगातार छींक आना, गला ख़राब होना आदि इसके लक्षण हैं.
बचाव: इससे बचने का सबसे आसान तरीक़ा है, बारिश में भीगने से बचें. और भीग गए हैं, तो एक ग्लास हल्दीवाला गर्म दूध पीएं. गुनगुने पानी से गरारे करें और ख़ुद को गर्म रखें, ताकि ठंड न लगे.

स्टमक इंफेक्शन (पेट ख़राब होना)

गैस्ट्रो जैसी पेट की बीमारियां इस मौसम में आम बात है, जिसके कारण उल्टी और डायरिया होने लगता है. पेट की आंतों में जलन होने के कारण मरीज़ को काफ़ी तकलीफ़ होती है. बैक्टीरियल या वायरल इंफेक्शन इसका कारण हो सकता है.
लक्षण: लगातार उल्टी और दस्त होना.
बचाव: साबुन और पानी से हाथ अच्छी तरह धोएं. किचन में बर्तनों की साफ़-सफ़ाई का भी ध्यान रखें. कटिंग बोर्ड को साफ़ रखें. ज़्यादा देर से कटे हुए फल व सब्ज़ियां न खाएं. इनके अलावा डेंगू, चिकनगुनिया, हेपेटाइटिस ए, लेप्टोस्पाइरॉसिस, पीलिया आदि रोग बारिश में तेज़ी से फैलते हैं. इन सबका कारण या तो मच्छर हो सकते हैं या दूषित खाना व पानी. इसलिए इनसे बचें और पर्सनल हाइजीन का भी ख़ास ध्यान रखें.

रेनप्रूफ डायट अपनाएं

– मॉनसून के दौरान कच्ची सब्ज़ियां हाइजीनिक नहीं रह जातीं, इसलिए उन्हें उबालकर या पकाकर ही खाएं.
– फल आपकी एनर्जी को रिस्टोर करने में मदद करते हैं. अनार, प्लम, लीची, पेर जैसे मौसमी फल और गाजर, मूली, मेथी जैसी मौसमी सब्ज़ियों को अपने डायट में शामिल करें.
– तरबूज़ और खरबूजा जैसे पानी से भरपूर फल खाने से बचें, क्योंकि ये शरीर में सूजन का कारण बनते हैं.
– कॉर्न, काबुली चना, बेसन जैसी सूखी चीज़ों को अपने डायट में शामिल करें.
– ब्राउन राइस, ओट्स, बारली जैसी हेल्दी व न्यूट्रीशियस चीज़ें अपनी डायट में शामिल करें.
– दूध की बजाय दही लेना ज़्यादा फ़ायदेमंद होगा.
– इमली, टमाटर, नींबू जैसे खट्टे फल शरीर में वॉटर रिटेंशन बढ़ाते हैं, इसलिए इन्हें अवॉइड करें.
– इस मौसम में अक्सर लोग ज़रूरत से ज़्यादा चाय-कॉफी का सेवन करते हैं, पर उन्हें पता नहीं कि ऐसा करने से शरीर डिहाइड्रेट होने लगता है, इसलिए चाय-कॉफी का सेवन करें, पर समझदारी के साथ. अगर आप चाय के शौक़ीन हैं, तो हर्बल टी लें.
– शरीर को डिटॉक्सीफाई करने के लिए भरपूर पानी पीएं. बस, ध्यान रखें कि पानी उबालकर-छानकर ही पीएं.
– बारिश के मौसम में शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर हो जाती है, ऐसे में इम्यूनिटी बूस्टर फूड, जैसे- ड्रायफ्रूट्स, आंवला, मोसंबी आदि का भरपूर उपयोग करें.
– करेला, नीम और हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट्स और औषधीय तत्व होते हैं, जो इस मौसम में इंफेक्शन से बचाने में आपकी मदद करते हैं.
– फूलगोभी, ग्वारफली, आलू, भिंडी जैसी सब्ज़ियां अवॉइड करें.
– सर्दी-खांसी से बचने के लिए ताज़ा मूली का जूस पीएं.
– तली-भुनी व मसालेदार चीज़ें खाने से बचें.
– मॉनसून की तकलीफ़ों से बचने के लिए गुनगुने पानी में सेंधा नमक और पीपली मिलाकर पीएं.

मॉनसून में जनरल केयर

– मच्छर-मक्खियों के कारण बहुत-सी मॉनसूनी बीमारियां होती हैं, इसलिए इनसे बचने के लिए बारिश शुरू होने से पहले ही घर में पेस्ट कंट्रोल ज़रूर कराएं.
– बारिश के पानी में ज़्यादा देर तक न रहें, वरना पैरों में फंगल इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है.
– घर पहुंचने पर हाथ-पैरों को अच्छी तरह मेडिकेटेड साबुन से धोकर सुखा लें.
– अगर आपको अस्थमा या डायबिटीज़ है, तो भीगी हुई दीवारों से दूर रहें, वरना दीवारों के फंगस आपके लिए नुक़सानदायक हो सकते हैं.
– अगर वर्किंग हैं, तो ऑफिस में कपड़े ज़रूर रखें, ताकि भीगने पर बदल सकें.
– बारिश में रास्ते कीचड़ भरे व फिसलनवाले हो जाते हैं, इसलिए रेनी फुटवेयर सिलेक्ट करें.
– कॉटन और सिंथेटिक कपड़ों का चुनाव करें.
– बैक्टीरियल व फंगल इंफेक्शन से बचने के लिए ज़्यादा देर तक गीले रहने से बचें.

– संतारा सिंह