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पैरेंट्स भी करते हैं ग़लतियां (5 Common Mistakes All Parents Make)

बच्चे तो ग़लतियां करते ही हैं, लेकिन कई बार पैरेंट्स भी ऐसी कुछ आम ग़लतियां कर बैठते हैं, जो उन्हें नहीं करनी चाहिए. आइए, इसी के बारे में संक्षेप में जानते हैं.

Common Mistakes Parents Make

बच्चों को बिगाड़ना

सभी पैरेंट्स अपने बच्चों को बहुत लाड़-प्यार से पालते हैं, लेकिन कुछ बच्चे उनके इसी लाड़-प्यार का नाजायज़ फ़ायदा उठाते हैं, जब उन्हें इस बात का पता चलता है कि उनके घर में दूसरा नन्हा मेहमान आनेवाला है, तो वे अपने को असुरक्षित महसूस करने लगते हैं. धीरे-धीरे असुरक्षा की यह भावना उनके मन में घर करने लगती है, जो आगे चलकर ईर्ष्या में बदल जाती है. कई बार बच्चे अवसाद में भी चले जाते हैं और दूसरे बच्चे के सामने उन्हें अपना अस्तित्व ख़तरे में लगने लगता है.

बच्चों को ज़रूरत से ज़्यादा सुरक्षा देना

जब पैरेंट्स बच्चों को ज़रूरत से ज़्यादा सुरक्षा प्रदान करते हैं, तो उनका आत्मविश्‍वास कमज़ोर पड़ने लगता है. जब उनके सामने आत्मविश्‍वास से भरपूर बच्चे आते हैं, तो उनमें ईर्ष्या या हीनभावना पनपने लगती है.

अन्य बच्चों के साथ तुलना करना

प्रतिस्पर्धा के दौर में अधिकतर पैरेंट्स अपने बच्चों की तुलना अन्य बच्चों से करते हैं, जिसका ख़ामियाज़ा बच्चों को भुगतना पड़ता है, परिणामस्वरूप उनमेंईर्ष्या और प्रतिस्पर्धा की भावना बढ़ने लगती है और उनका आत्मविश्‍वास कम होने लगता है.

यह भी पढ़ेख़तरनाक हो सकती है बच्चों में ईर्ष्या की भावना (Jealousy In Children Can Be Dangerous)

ब़ड़े की उपेक्षा कर छोटे बच्चे पर अधिक ध्यान देना

अधिकतर पैरेंट्स को इस स्थिति का सामना करना पड़ता है. पहला बच्चा जब बड़ा हो जाता है, तो छोटा होने के कारण दूसरे बच्चे की तरफ़ पैरेंट्स का अधिक ध्यान देना स्वाभाविक है, जिसके कारण पहले बच्चे में जलन की भावना बढ़ने लगती है.

ओवर कंट्रोल करना

बच्चों को अनुशासित रखने के लिए कुछ पैरेंट्स उन पर ज़रूरत से ज़्यादा नियंत्रण और सख्ती करते हैं. उनकी इस ग़लती के कारण बच्चों में ईर्ष्या पैदा होने लगती है. बिना बताए उनके साथ सख्ती करना या उन्हें नियंत्रण में रखने के लिए ज़बर्दस्ती नियम-क़ानून थोपने से बच्चों में आत्मविश्‍वास की कमी होने लगती है और वह ख़ुद को अपने भाई-बहन और दोस्तों से कमतर आंकने लगते हैं.

माता-पिता से बच्चों के अच्छे संबंध बच्चे के खाने, सोने और उसके दैनिक गतिविधि को प्रेरित करने के लिए ज़रूरी हो सकते हैं, इसलिए अपने बच्चे के साथ हमेशा बढ़िया संबंध बनाकर रखें.

   – पूनम शर्मा

अधिक पैरेंटिंग टिप्स के लिए यहां क्लिक करेंः Parenting Guide

बचें इन पैरेंटिंग मिस्टेक्स से (Parenting Mistakes You Should Never Make)

हर पैरेंट (Parent) की ये ख़्वाहिश ज़रूर होती है कि उनका बच्चा दुनिया का सबसे अच्छा बच्चा हो, बड़ा होकर ख़ूब नाम कमाए, उसे ज़िंदगी की हर ख़ुशी मिले. इस चक्कर में वे कभी बहुत ज़्यादा उदार हो जाते हैं, तो कभी बहुत ज़्यादा सख़्त और कई ग़लतियां (Mistakes) भी कर बैठते हैं. यहां हम कुछ ऐसी ही ग़लतियों की बात कर रहे हैं, जो अक्सर पैरेंट्स कर बैठते हैं और जिसका बच्चे के मन पर बुरा असर पड़ता है.

Parenting Mistakes

* अपना पैरेंटल अधिकार बनाए रखें. बच्चों के फ्रेंड बनें, लेकिन उसकी सीमा ज़रूर निर्धारित करें.

* मोबाइल हो या गेम्स- आज़ादी हो या ज़िम्मेदारी- न उन्हें समय से पहले दें, न ज़रूरत से ज़्यादा, ताकि वो चीज़ों व भावनाओं की कद्र करना सीखें.

* हर बात में टोका-टोकी न करें. वो आपसे भले ही कुछ न कहें, लेकिन अपनी मित्रमंडली में दूसरों को टोकना, छेड़ना या बुली करना उनका स्वभाव बन सकता है.

* उनकी बातों को ध्यान से सुनें. हमारी इंडियन फैमिलीज़ में इसे ़ज़्यादा ज़रूरी नहीं समझा जाता. ज़्यादातर पैरेंट्स बोलते हैं और बच्चे उनकी हर बात सुनते हैं, किंतु चाइल्ड सायकोलॉजिस्ट का कहना है कि बच्चे को अपनी बात कहने का मौक़ा दिया जाना चाहिए और उसे ध्यान से सुना भी जाना चाहिए.

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* हर व़क़्त बच्चे को अनुशासन या एक ही दिनचर्या में बांधकर न रखें. इससे बच्चे की क्रिएटिविटी तथा पर्सनैलिटी का विकास नहीं हो पाएगा.

* बच्चों की ज़िद को उनका स्वभाव न समझें. ज़िद करना बाल सुलभ स्वभाव है. आपके समझदारीपूर्ण रवैये से उम्र के साथ यह आदत अपने आप ही बदल जाएगी.

* बच्चों के सामने बहस या अपशब्दों का प्रयोग कभी न करें. इस तरह उनमें असुरक्षा की भावना पैदा होने लगती है और वो घर से बाहर मित्रों या मित्र के परिवार के बीच समय गुज़ारना पसंद करने लगते हैं.

* ख़ुद को इतना व्यस्त न करें कि बच्चों के लिए समय ही न हो. बच्चों के विकास और दिनचर्या में शामिल होना भी बच्चों के संपूर्ण विकास का हिस्सा है.

* बच्चों के सामने झूठ न बोलें और यदि झूठ बोलना ही पड़ रहा है, तो आगे-पीछे उसकी वजह बताएं और उसे विश्‍वास दिलाएं कि अगली बार आप सच्चाई के साथ परिस्थिति का सामना करेंगी.

बच्चे झूठ क्यों बोलते हैं? जानने के लिए देखें वीडियो:

* बच्चों को अपने संघर्ष की कहानी सुनाकर उनके साथ अपनी तुलना न करें. यदि आप संपन्न हैं, तो उन्हें ख़ुशहाल बचपन दें. आपका संघर्ष उनकी प्रेरणा बन सकता है.

* बच्चों को पैरेंट्स अपने आपसी झगड़ों के बीच इस्तेमाल न करें और न ही उनके सामने फैमिली पॉलिटिक्स की चर्चा करें. इसका बच्चे के दिलोदिमाग़ पर बुरा असर हो सकता है.

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* हर उम्र में बच्चों से समान व्यवहार की अपेक्षा न करें. कल तक बच्चा आपकी हर बात मानता रहा है, लेकिन हो सकता है कि आज उसी बात के लिए प्रश्‍न करने लगे.

* डॉमिनेटिंग पैरेंट न बनें. ‘जैसा कहते हैं वैसा करो’ वाली भाषा न बोलें, बल्कि अच्छे रोल मॉडल बनकर उनके भावनात्मक व संवेदनात्मक विकास को सही रूप से हैंडल करें.

* स्कूली समस्याओं के प्रति उदासीन न हों, बच्चे की प्रॉब्लम को सुनें और उसे सॉल्व करने की कोशिश करें.

* चोरी-छिपे बच्चों की बातें सुनना या ताका-झांकी करना ग़लत है. इस तरह आपके प्रति उनका आदर प्रभावित होगा. आपकी इस आदत को वो पॉज़िटिव रूप में नहीं लेंगे.

– लता कुंदर

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