mother exercise tip

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एक्सरसाइज़ के नाम पर जब बड़े कन्नी काट लेते हैं, तो भला बच्चे आपके कहने पर कैसे रोज़ाना एक्सरसाइज़ कर सकते हैं. इसीलिए हम बता रहे हैं बच्चों को खेल-खेल में एक्सरसाइज़ सिखाने के स्मार्ट टिप्स ताकि आपका बच्चा रहे फिट एंड फाइन.

 

खाने में आनाकानी करने वाले बच्चे कभी खेलने से इनकार नहीं करते. ऐसे में आप उन्हें जिस तरह खेल-खेल में खाना खिलाती हैं, ठीक उसी तरह खेल-खेल में उन्हें कसरत करना भी सिखा सकती हैं. इससे खेलने के शौक़ीन बच्चे खेल भी लेंगे और फिट भी रहेंगे. बच्चों के एक्सरसाइज़ के लिए कौन-कौन से गेम हैं बेस्ट? चलिए, हम बताते हैं.

शुरुआत करें बॉल से
बॉल खेलने से बच्चे कभी इनकार नहीं करते इसलिए बच्चों के साथ एक्सरसाइज़ की शुरुआत उनके पसंदीदा खिलौनों में से एक बॉल से करें. उछलकर बॉल फेंकना और पकड़ना दोनों ही बिल्कुल आसान और एक अच्छा वॉर्मअप एक्सरसाइज़ है. बॉल खेलते वक़्त ताक़त लगाकर उछालने, बॉल को हाथों से फेंकने और फिर उछलकर हाथों को ऊंचाई पर ले जाकर बॉल पकड़ने से हाथ के साथ-साथ पैर की भी एक्ससराइज़ हो जाती है.

मम्मी के लिए एक्सरसाइज़ टिप
बच्चों के साथ अगर आप भी रोज़ाना 10 मिनट बॉल फेंकती और पकड़ती हैं, तो आप रोज़ाना तक़रीबन 80 कैलोरी घटा सकती हैं.

सी-सॉ है बेहतरीन विकल्प

एक्सरसाइज़ के लिए सी-सॉ भी एक बेहतरीन विकल्प है. इसे खेलने के लिए दो बच्चों की ज़रूरत होती है. दोनों बच्चे दो अलग-अलग साइड पर बैठकर ये खेल खेलते हैं. एक बार पहला बच्चा ऊपर की ओर उठता है, तो दूसरी बार दूसरा बच्चा, इसी तरह दोनों बच्चे बैठकर ऊपर-नीचे होते हैं, जिससे उनकी एक्सरसाइज़ भी हो जाती है. सी-सॉ हाथ और छाती की एक्सरसाइज़ के लिए काफ़ी फ़ायदेमंद होता है.

मम्मी के लिए एक्सरसाइज़ टिप
अगर मम्मी बच्चों को अपनी गोद में बैठाकर उनके साथ
सी-सॉ खेलती हैं, तो थाइज़ (जांघ) की एक्सरसाइज़ के साथ ही उनकी रोज़ाना 50 से अधिक कैलोरी भी कम हो सकती है.

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स्लाइड गेम भी है ज़रूरी
बच्चों का पसंदीदा गेम स्लाइड भी फिट एंड फाइन रखने में उनकी मदद करता है. एक ओर जहां बच्चों को स्लाइड पर बैठकर पलक झपकते ही फिसलना अच्छा लगता है, वहीं स्लाइड तक पहुंचने में उन्हें कुछ सीढ़ियां भी चढ़नी पड़ती हैं. इससे हाथ और पैर के साथ उनके कंधों की भी एक्सरसाइज़ हो जाती है.

मम्मी के लिए एक्सरसाइज़ टिप
जब बच्चा स्लाइड से सरकने का मज़ा ले रहा हो, तब मम्मी सीढ़ियों पर दो-चार बार चढ़-उतरकर एक्सरसाइज़ कर सकती हैं.

क्लाइम्बिंग फ्रेम
हालांकि बहुत कम बच्चे क्लाइम्बिंग फ्रेम में खेलना पसंद करते हैं, मगर बाकी गेम्स के मुक़ाबले इसके फ़ायदे ज़्यादा हैं. इससे बच्चों की पीठ की एक्सरसाइज़ होती है, जबकि बाकी गेम्स में पीठ की एक्सरसाइज़ बहुत कम होती है. इससे बच्चों के आर्म्स की भी एक्सरसाइज़ हो जाती है. अगर बच्चे क्लाइम्बिंग फ्रेम की रॉड पकड़कर ऊपर उठने की कोशिश करते हैं, तो इससे उनकी हाइट भी बढ़ती है.

मम्मी के लिए एक्सरसाइज़ टिप
बच्चों के साथ अगर मम्मी भी बिना रुके 5 से 6 बार क्लाइम्बिंग फ्रेम की रॉड पकड़कर ऊपर उठने की कोशिश करें, तो इससे उनकी मांसपेशियां मज़बूत होंगी.

झूला झूलना
बचपन में पालने में झूलने वाले बच्चे बड़े होने के बाद गार्डन में जाकर झूला झूलना पसंद करते हैं. इस खेल में बच्चों को ज़्यादा मज़ा तब आता है, जब कोई दूसरा उन्हें झूला झुलाए. परंतु जब बच्चे ख़ुद अपने पैर पर ज़ोर देकर तेज़ी से झूला झूलने की कोशिश करते हैं, तो इससे थाइज़ (जांघ) के साथ पूरे पैर की एक्सरसाइज़ हो जाती है. इसी तरह अगर बच्चा पीछे से धक्का देकर अपने दोस्त की झूला झूलने में मदद करता है, तो इससे उसके हाथों की एक्सरसाइज़ हो जाती है.

मम्मी के लिए एक्सरसाइज़ टिप
ख़ुद की एक्सरसाइज़ के लिए मम्मी चाहें तो बच्चे को झूले पर बैठाकर उसे धक्का दे सकती हैं. आप जितनी बार धक्का देेंगी, शरीर से उतनी अधिक मात्रा में फैटी टीशूज़ कम होंगे.

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प्ले ग्राउंड की सैर
गार्डन में मौजूद तरह-तरह के गेम्स खेलने भर से ही बच्चों की एक्सरसाइज़ नहीं होती, बल्कि रोज़ाना सुबह-शाम प्ले ग्राउंड की सैर करना भी उनकी सेहत के लिए फ़ायदेमंद होता है. अगर आपका बच्चा उम्र में छोटा है, तो उसकी बाबा गाड़ी, स्कूटर, साइकिल आदि भी गार्डन में ले जाएं और बच्चे को उस पर बैठकर गार्डन की सैर करने को कहें. गाड़ी, स्कूटर आदि ख़ुद चलाने से बच्चे के हाथ-पैर की एक्सरसाइज़ हो जाएगी और गार्डन की सैर भी.

मम्मी के लिए एक्सरसाइज़ टिप

मम्मी अपनी कसरत के लिए बच्चे की गाड़ी को हल्के से पुश कर सकती हैं. अगर बच्चा बड़ा है और स्पीड में साइकिल आदि चला लेता है, तो उसके पीछे-पीछे भागें. इससे आप फिट रहेंगी.

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