Mother-in-law

Akshay Kumar

अक्षय कुमार ने अपने सास डिंपल कपाड़िया के सम्मान में कहा कि उन्हें उन पर गर्व है. दरअसल, क्रिस्टोफर नोलन की फिल्म टेनेट जो एक एक्शन थ्रिलर इंग्लिश फिल्म है, में डिंपल कपाड़िया ने काम किया है. फिल्म पूरी होने के बाद क्रिस्टोफर ने डिंपल को लेकर एक ख़ूबसूरत नोट लिखा. उन्होंने कहा कि जिस तरह से उन्होंने फिल्म में अपना किरदार निभाया है, उससे वे काफ़ी प्रभावित हुए. यदि उनकी जगह वे होते, तो शायद यह न कर पाते. साथ ही उन्होंने डिंपल की काफ़ी तारीफ़ भी की. इसे पढ़कर अक्षय कुमार को काफ़ी गर्व महसूस हुआ. उन्होंने अपनी यह ख़ुशी अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर की. अक्षय ने डिंपल की क्रिस्टोफर के साथ की तस्वीर और उनका नोट साझा किया. वाक़ई अक्षय को इस बात की बेहद ख़ुशी है कि वे प्रतिभाशाली और सुलझी हुई अदाकारा डिंपल कपाड़िया के दामाद हैं.
टेनेट एक्शन थ्रिलर फिल्म है, जो इंग्लैंड में अगस्त में ही रिलीज हो गई थी. अमेरिका और भारतभर में आज और कल में प्रदर्शित हुई. क्रिस्टोफर नोलन द्वारा लिखित व निर्देशित है. इसमें डिंपल कपाड़िया के साथ जॉन डेविड वॉशिंगटन, रॉबर्ट पैटिनसन, एलिजाबेथ डेबिकी, माइकल केन, केनेथ ब्रानघ जैसे सितारे हैं.
वैसे देखा जाए तो अक्षय कुमार भी एक प्यारे दामाद ही नहीं आज्ञाकारी बेटा, ज़िम्मेदार भाई और पिता भी हैं. सोशल मीडिया पर उनकी मां-सास के साथ के कई ख़ूबसूरत पल उन्होंने शेयर किए हैं. ख़ासतौर पर जब उन्होंने अपनी मां को चेयर पर बिठाकर ख़ुद पैदल चलकर उन्हें विदेश की सड़कों पर घुमाया था. तब उन्होंने पैरेंट्स को लेकर बेहद इमोशनल नोट भी लिखा था- जिस तरह हम बड़े हो रहे हैं, तो हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि हमारे पैरेंट्स भी बूढ़े हो रहे हैं. इसलिए हर किसी को अपने माता-पिता का ख़ास ख़्याल रखना चाहिए, खासतौर पर बुढ़ापे के समय. उन्होंने कई बार अभिभावकों को लेकर भावुक बातें कहीं हैं. वाक़ई अच्छा पुत्र, पति, पिता, दामाद कैसा हो, यह अक्षय कुमार से सीखना चाहिए. उन्होंने अपने हर रिश्ते को बख़ूबी निभाया है. फिर चाहे डिंपल कपाड़िया हो, साली सिंपल हो या ससुर राजेश खन्ना उन्होंने सभी अपनों का पूरा ध्यान रखा.

mithun chakraborty

इसी तरह ससुर की बात करें, तो मिथुन चक्रवर्ती भी कुछ कम प्यारे ससुर नहीं है. उन्होंने हाल ही में अपनी बहू मदालसा शर्मा के लिए अनुपमा सीरियल के सेट पर अपने हाथों से बनाई लज़ीज़ बिरयानी भेजी. मदलसा, जो अनुपमा में काव्या की भूमिका निभा रही हैं का कहना है कि उनके ससुर मिथुन चक्रवर्ती बहुत बढ़िया खाना बनाते हैं और जब भी वह कुछ ख़ास बनाते हैं, तो उसे ज़रूर खिलाते हैं. मदलसा के साथ सभी ने बिरियानी का स्वाद लिया. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मिथुन चक्रवर्ती के बेटे मिमोह से मदलसा की शादी हुई है. इन दिनों वे अनुपमा सीरियल में काव्या की दमदार भूमिका में नज़र आ रही हैं.

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वैसे अक्षय कुमार इन दिनों हर तरफ छाए हुए हैं फिर चाहे वह मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगीजी को मिलना हो, उनके रामसेतु फिल्म की शूटिंग अयोध्या में करने की बात हो या फिर अतरंगी रे फिल्म की शूटिंग हो… इसमें वे सारा अली खान के साथ हैं. इसके अलावा तमाम विज्ञापन भी कर रहे हैं और टीवी पर पूरे छाए हुए हैं. कह सकते हैं कि अक्षय कुमार अपनी इतनी व्यस्तता के बावजूद अपनों के लिए समय निकाल ही लेते हैं. फिर चाहे वह उनकी पत्नी-बच्चे हों या फिर सास!

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Akshay Kumar

सना खान आजकल कुछ ऐसा करती हैं कि सब चौंक जाते हैं, अचानक फ़िल्म इंडस्ट्री छोड़ दी और कहा अल्लाह की राह पर चलूँगी और फिर अचानक मौलाना अनस सईद से निकाह कर लिया वो भी उन्होंने कहा अल्लाह ने ही हमको मिलवाया. उसके बाद अपना नाम भी बदल दिया. अब सना काफ़ी खुश नज़र आ रही हैं और खुश हों भी क्यों ना आख़िर ससुराल में ऐसी ख़ातिरदारी जो हो रही है उनकी.

सना की सासू मां ने बहूरानी के आने की ख़ुशी में ख़ास बिरयानी बनाई जो सना ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर भी की.

Sana Khan
Sana Khan
Sana Khan
Sana Khan
Sana Khan
Sana Khan
Sana Khan

इतना ही नहीं सना के शौहर ने पहली इंस्टाग्राम पोस्ट शेयर की जिसमें सना के साथ अपनी शादी की तस्वीर डाली है और लिखा है एक रोमांटिक नोट- और तुम अपने रब की कौन-कौन से नैमतों को झुठलाओगे? अल्हमदुलिल्लाह♥️

मेरी जिंदगी में आने और इसे खूबसूरत यात्रा बनाने का शुक्रिया. प्यार और सपोर्ट के लिए शुक्रिया. उम्मीद करता हूं कि तुम्हारे साथ शांतिपूर्ण और सुखमय निकाह का आनंद सदियों तक लूंगा.

हमेशा तुम्हारा

Sana Khan

साथ ही अनस ने अपने निकाह की एक तस्वीर भी शेयर की

Sana Khan

इसके अलावा उन्होंने कार में ट्रैवल करते हुए भी तस्वीरें शेयर कीं जिन्हें देख लग रहा है कि सना अपनी शादी में रम चुकी हैं और बेहद खुश हैं.

Sana Khan
Sana Khan
Sana Khan

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एक ज़माना था जब सास-बहू के रिश्ते में घबराहट, संकोच, डर, न जाने कितनी शंकाएं व आशंकाएं रहती थीं. लेकिन वक़्त के साथ ही हालात बदले और लोगों की सोच भी. अब पहले जैसी डरवाली बात तो बिल्कुल ही नहीं रही. जहां सास ने बहू को बेटी के रूप में अपनाना शुरू कर दिया है, वहीं बहू भी सास को मां का दर्जा देने लगी हैं. ऐसे तमाम उदाहरण आए दिन देखने को मिलते हैं, जब सास-बहू की मज़ेदार जुगलबंदी दिलों को ख़ुशनुमा कर जाती हैं.


इससे पहले संयुक्त परिवार होने की वजह से मर्यादा, बहुत-सी पाबंदियां और हिचक रहती थी. बहू सास को खुलकर अपनी बात कह नहीं पाती थी और ना ही सास बहू से दोस्ताना व्यवहार ही रख पाती थी. दोनों के बीच प्यारा-सा बंधन होने के बावजूद एक दूरी बनी रहती थी. यही दूरी वजह होती थी उनके क़रीब ना आने की. लेकिन जैसे-जैसे वक़्त और हालात बदलते गए, बहुतों की सोच में क्रांतिकारी परिवर्तन आया. आज बहू अपनी सास से बहुत कुछ शेयर कर लेती है. अपने सुख-दुख का साथी बना लेती है. हर बात को बिना किसी संकोच के कह देती है, फिर चाहे वह खाना-पहनना हो या फिर रिश्तेदारी निभाना.
पहले मन में बहुत से सवाल रहते थे कि अगर ऐसा करूंगी, तो सासू मां क्या कहेंगी.. ससुरालवाले क्या सोचेंगे.. अक्सर कई सारी ग़लतफ़हमियां भी दिलोंदिमाग़ पर हावी रहती थीं, जिससे बहू खुलकर अपनी बात सास से कह नहीं पाती थी.
कहते है ना एक्स्पोज़र का नुक़सान है, तो फ़ायदे भी बहुत है. जिस तरह से आपसी रिश्ते में खुलापन आता गया, धीरे-धीरे रिश्ते मज़बूत होते चले गए. इसमें टीवी और फिल्मों ने भी अहम भूमिका निभाई. यह और बात है कि हम इसे स्वीकार नहीं करते, लेकिन कई बार देखा गया है कि छोटा पर्दा हो या सिनेमा उसका कहीं-ना-कहीं असर लोगों पर होता ही है. रिश्ते प्रभावित होते हैं. फिर वो दोस्ती हो, प्यार-मोहब्बत हो या सास-बहू का रिश्ता ही क्यों ना हो.

क्योंकि सास भी कभी बहू थी…
हमारी एक रिश्तेदार जो दो उच्च पढ़ी-लिखी बहुओं की सास थीं अक्सर कहा करती थीं कि उन्होंने अपनी दोनों बहुओं को पूरी आज़ादी दे रखी है. वह भी आज से नहीं, बल्कि सालों से यह नियम बना दिया है कि बहू को जो करना है.. जैसे करना है.. इसकी पूरी खुली छूट उन्होंने दे रखी है. इसका असर यह हुआ कि बहू ने भी सास के मान और इच्छाओं को सिर आंखों पर रखा. आज वे सहेलियों जैसी रहती हैं. वे कहती हैं कि हम यह क्यों भूल जाते हैं बहू भी किसी की बेटी है. उसके भी कुछ अरमान-इच्छाएं हैं. यह क्यों कहा जाए या फिर मान लिया जाए कि मायके से ससुराल आई है, तो उसे ख़ुद को बदलना ही है. ससुराल को हौव्वा क्यों बना दिया जाता है. बहू को बेटी की तरह ही सुख-सुविधा और स्वतंत्रता मिले, तो ससुराल में किसी बात का तनाव हो ही ना!.. बड़े सुलझे हुए ढंग से उन्होंने अपनी बात को समझाया. साथ ही मज़ाक में यह भी कहा कि हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए… क्योंकि सास भी कभी बहू थी… हम भी कभी बहू थीं, तो हमने जो अनुभव लिए, जो परेशानी झेली, तो हमारी यही कोशिश रहनी चाहिए कि हमारी बहू को उन सब दिक़्क़तों का सामना ना करना पड़े.

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आज जिस तरह से सास-बहू के रिश्ते को नई परिभाषा मिल रही है, उन छोटी-छोटी बातों को देखते-समझते हैं...

  • एक वक़्त था जब सास को बिना कहे या बताएं बहू ससुराल से घर से बाहर निकल नहीं सकती थी. लेकिन अब हालात भिन्न हैं. आज भी बहू सास से पूछती है.. उन्हें बताती है, पर पहले जैसे दबाव और हिचकिचाहट वाला माहौल नहीं रहा.
  • आज बहू अपनी इच्छा के बारे में खुलकर कहती है और सास भी उसे सम्मान देते हुए उसकी ख़्वाहिशों को पूरी करने की कोशिश करती हैं.
  • ख़ुशी होती है कि अब सास-बहू का रिश्ता ना होकर मां-बेटी का रिश्ता बन गया है और इसमें दोनों ही ख़ुश भी हैं और वे इस रिश्ते की ख़ूबसूरती को भी बढ़ाते हैं.
  • अब सास पहले की तरह ताना नहीं मारती और ना ही अधिक दबाव डालती है.
  • जो भी सही-ग़लत है, बहू को खुलकर बताती और समझाती हैं. ध्यान देने के लिए कहती है.
  • ठीक इसी तरह बहू भी सास की बातों को समझते हुए परिवार में तालमेल बिठाती है. सास-बहू के रिश्ते को नया आयाम देती है.
  • पहले ऐसा था कि सास ने जो कह दिया वही होगा, पर आज बहू को लगता है कि नहीं यह काम ऐसे होना चाहिए, तो वो सास को स्पष्ट होकर बताती है कि मां इस तरह से होना चाहिए… मम्मीजी हम लोग ऐसा करें… क्या मम्मा आप तो सब जानती हैं… सब कुछ ऐसे करेंगे, तो शायद बेहतर रहेगा… इत्यादि.
  • स्थितियों को बनाने में दोनों ही अपना समर्पित योगदान देती हैं.

खट्टे-मीठे अनुभव…
फिल्मी हस्तियां भी अपने इस रिश्ते की ख़ूबसूरती को बहुत ही प्यार से जी रही हैं और इसे नई परिभाषा दे रही हैं. इसमें चाहे भाग्यश्री, ऐश्वर्या राय बच्चन, करीना कपूर, शिल्पा शेट्टी हो या समीरा रेड्डी. सभी अक्सर सोशल मीडिया पर अपनी सास से जुड़े खट्टे-मीठे अनुभव उनके साथ शेयर करती रहती हैं. इन सब में समीरा रेड्डी तो टॉप पर हैं. वह अपनी सास के साथ ऐसे-ऐसे वीडियोज़ बनाती हैं और उसे अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर डालती हैं कि जिसे देखकर आप दंग रह जाएंगे. उनकी सास भी उतनी ही मॉडर्न और खुले दिल की हैं. वह भी बहू को भरपूर साथ देने से नहीं चूकतीं. फिर चाहे वह कोई रेसिपी बनानी हो, जैसे उन्होंने गोवा की फिश करी की रेसिपी बनाई थी और उसको एक नए अंदाज़ में पेश किया था. या फिर रसोड़े में कौन था… वायरल गाने को ही अपने अंदाज़ में सास-बहू और पोती ने अंजाम दिया था. देखने-सुनने में यह बहुत ही मस्तीभरा मज़ेदार लगता है, क्योंकि जहां बहू मॉडर्न है, तो सास भी कुछ कम नहीं है. सास-बहू में आपसी सामंजस्य और तालमेल ग़ज़ब का है. अब किसी बात का दबाव या बंधन नहीं है कि सास ऐसा कहेगी, वैसा कहेगी. अब मदर इन लॉ की जगह केवल मदर है, वहीं डॉटर इन लॉ बस डॉटर है. सास-बहू दोनों ही अपने रिश्ते को सहजता से जीते हैं और एक नई परिभाषा गढ़ रहे हैं, जिसमें बस प्यार, स्नेह और अपनापन है. यह नई परिभाषा बहुतों को रास भी आ रही है. कह सकते हैं कि वक़्त के साथ हर रिश्ते की भूमिका कमोबेश बदल रही है, उससे सास-बहू का रिश्ता भी अछूता नहीं है. सास ने बहू को बेटी के रूप में स्वीकार किया है. वे हमराज़ कहे या सहेली के तौर पर भी इस रिश्ते को जी रही हैं. वहीं बहू भी सारे संकोच, डर को त्यागकर सास को मां के रूप में स्वीकार कर रही हैं. मां, जिससे हम प्यार भी करते हैं, तो लड़ते भी हैं… जिससे हम शिकायत भी करते हैं, तो रुठते भी हैं. नई परिभाषा के तहत यही मां-बेटी सा अटूट संबंध अब सास-बहू में भी देखने मिल रहा है.

– ऊषा गुप्ता

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