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अक्सर देखा गया है कि जो महिलाएं पहली बार मां बनती हैं, वे कई बातों को लेकर परेशान या दुविधा में रहती हैं, ख़ासकर जब बच्चा पैदा होता है. जैसे-जैसे शिशु बढ़ता है उसकी खानपान, उसमें होनेवाले परिवर्तन को लेकर भी कई तरह की बातें नई-नई बनी मां के दिमाग़ में चलती रहती हैं.
डॉ. ज्योत्सना भगत के अनुसार, बच्चे के पैदा होने से लेकर सालभर तक का समय बहुत महत्वपूर्ण होता है. यहां पर हम कुछ छोटी-छोटी बातें बता रहे हैं, जिससे आप जान सकेंगी कि आपके शिशु की परवरिश सही हो रही है. बस, आपको ध्यान देने और सावधानी बरतने की ज़रूरत है.

  • मां का पहला दूध शिशु को देना बहुत ज़रूरी है, इसमें प्रचुर मात्रा में प्रोटीन एंटीबॉडीज होते हैं, जो बच्चे को पहले साल में इंफेक्शन से बचाते हैं.
  • ध्यान रहे, हर रोज़ बच्चे के वज़न में 25 से 30 ग्राम की बढ़ोतरी होती है.
  • बच्चे के पैदा होने पर दूध पिलाने को लेकर कोई ख़ास नियम नहीं है, विशेषकर शुरुआती कुछ दिन. जब बच्चा चाहे उसे दूध पिलाए यानी भूख लगने, रोने पर उसे तुरंत दूध पिलाएं. फिर चाहे वो आधा घंटा हो या एक-दो घंटा.
  • यदि शिशु काफ़ी कमज़ोर पैदा हुआ है, तो उसे जगाकर भी दूध दिया जा सकता है.
  • चार-पांच दिन बाद उसे दो घंटे में केवल मां का प्यार ही दूध दें. उसे ऊपर से ग्राइप वॉटर आदि ना दें.
  • कुछ लोग शिशु की मालिश पैदा होने के अगले दिन से शुरू कर देते हैं, तो कुछ 4-5 दिन बाद में करते हैं.
  • बच्चे के लिए मालिश बहुत ज़रूरी है. इससे रक्त का संचार बढ़ता है.
  • शिशु की मालिश किसी भी बेबी ऑयल या फिर सौम्य तेल से करें.
  • मां के लिए बच्चे को मसाज करना इसलिए भी ज़रूरी है, क्योंकि इससे शिशु-मां के बीच संवाद बनता है और बच्चे को भी मां का मालिश करना अच्छा लगता है.
  • तेल मालिश के आधे घंटे बाद शिशु को स्नान ज़रूर कराएं, वरना उसके रोमछिद्र बंद हो जाएंगे.
  • शुरुआती दिनों में शिशु अधिकतर सोते रहते हैं. उनकी नींद 16 से 20 घंटे तक भी हो सकती हैं.
  • यदि बच्चा दूध पीने के बाद सो रहा है, तो इसका मतलब है वह अपना पूरा आहार ले रहा है.
  • शिशु को सूती या नर्म-मुलायम कपड़े ही पहनाएं.
  • नैपी बदलने का ध्यान रखें.
  • उसके सारे कपड़े धोने के बाद थोड़ा-सा डेटॉल डालकर एक बार फिर से पानी से निकाल लें.
  • शिशु के कपड़े धूप में सुखाएं.
  • अक्सर मां को लगता है मेरा दूध बच्चे को पूरा नहीं होता, यह सोच सही नहीं. दरअसल हम यह नहीं देख सकते हैं कि बच्चे के पेट में कितना दूध जा रहा है. कुछ मिनट तक ब्रेस्ट फीडिंग यानी स्तनपान करने के बाद वो अलग हो जाता है. यदि वो दूध पीने के बाद सो रहा है, तो इसका मतलब है कि शिशु अपना पूरा आहार ले रहा है, क्योंकि गौर करनेवाली बात है कि भूखा बच्चा सोएगा नहीं.
  • जो शिशु हल्के-फुल्के होते हैं, वे जल्दी बैठने लगते हैं, जबकि भारी शिशु थोड़ा देर से बैठते हैं.
  • इस बात का ख़्याल रखे कि बच्चे का वज़न नहीं बढ़ रहा है, तो हो सकता है कि मां का दूध उसे पूरा नहीं पड़ रहा हो.
  • वर्किंग मांएं चार महीने के बाद शिशु को ऊपरी भोजन शुरू कर सकती हैं.
  • सबसे पहले उसे चावल का पानी देना शुरू करें, क्योंकि ये सुपाच्य होता है.
  • इसके बाद चावल का दलिया, राइस फ्लेक्स पका कर दे सकते हैं.
  • 15 से 20 दिन के अंदर दिन में दो बार चावल देना शुरू कर सकते हैं.
  • कुछ दिनों बाद उसके भोजन में कोई फल भी देना शामिल कर सकते हैं.
  • कुछ बच्चों की दांत चार-पांच महीने में आ जाते हैं, तो कुछ बच्चों के दांत आने में नौ महीने या सालभर भी लगता है.
  • कम वज़नवाला बच्चा जल्दी चलता है, भारी वज़न के बच्चे देर से चलना शुरू करते हैं.
  • सालभर के बच्चे को वो सब खाने को दें, जो घर में बनता है, जितनी कैलोरी बड़े लेते हैं, उससे आधी कैलोरी उसे दें.
  • ऊषा गुप्ता
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अनुपम खेर ऐसे शख़्सियत हैं, जो अक्सर सोशल मीडिया के ज़रिए कुछ-न-कुछ अनोखा शेयर करते रहते हैं. यह उनकी काबिलीयत ही है कि उन्होंने अपनी घरेलू मां दुलारीजी को भी दुलारी रॉक्स के रूप में दुनियाभर में मशहूर कर दिया है. फ़िलहाल हम एक भारतीय किसान द्वारा जस्टिन बीबर के गाए गाने के बारे में बात करते हैं.

Anupam Kher

अनुपमजी ने कर्नाटक के एक सीधे-सादे किसान का वीडियो अपने अकाउंट पर शेयर किया है. इसमें वह शख़्स बड़े ही दिलचस्प अंदाज़ में जस्टिन के गाने बेबी… को प्यार से व पूरी तन्मयता के साथ गा रहा है. उन्होंने इस बात का भी ज़िक्र किया कि वो शख़्स शायद उतनी अंग्रेज़ी न जानता हो, पर इस इंग्लिश गाने को लेकर उसके जज़्बे को सलाम!

अनुपम खेर की यह ख़ासियत रही है कि वे इस तरह की छुपी प्रतिभाओं को अक्सर अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर करते रहते हैं. उनकी खोज का यह सफ़र लगातार ज़ारी है. फिर इसमें देशी हो या विदेशी सभी शामिल रहते हैं. इसके पहले भी वे कई विदेशियों के मज़ेदार वीडियो शेयर कर चुके हैं, जिसमें वे सभी हिंदी फिल्मी गानों को सुर-ताल के साथ गाते नज़र आते हैं.

खेरजी जितनी बेबाक़ी से अपनी बात व राय रखते हैं. उतनी कोमलता के साथ वे अपने मुंबई के मॉर्निंग वॉक के स्ट्रीट बच्चे जो उनके दोस्त भी है, से मिलते हैं. उनसे बातें करते हैं. उनके साथ खाना, मौज-मस्ती करना और उनकी ख़्वाहिशों को शेयर करते हैं. एक बार तो उन सभी बच्चों को खाना खिलाने के लिए फाइव स्टार होटल में भी ले गए थे. होटल का स्टाफ हैरान. वाकई दिल को छू लेने वाला नज़ारा था वो, जब बच्चों ने खाने के बाद पूछा अंकल ज़्यादा बिल तो नहीं आया… सच, बच्चों की मासूमियत और अनुपमजी की दरियादिली दोनों ही बेमिसाल है. अनुपमजी तुसी ग्रेट हो… जय हो!!

Anupam Kher Anupam Kher Anupam Kher

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सुष्मिता सेन (Sushmita Sen) ने मिस इंडिया व मिस यूनिवर्स जीतने से लेकर अब तक अपने शर्तों पर जीवन को जिया है. सुष्मिता को जन्मदिन (Birthday) की ढेर सारी शुभकामनाएं. आज उनके जन्मदिन पर उनके सुलझी सोच व जज़्बे के बारे में जानते हैं.

Sushmita Sen

* सुष्मिता बचपन से ही थोड़ी संकोची स्वभाव की थी.

* उनकी स्कूली पढ़ाई हिंदी मीडियम में हुई थी.

* उनके पिता विंग कंमाडर शुभर सेन वायुसेना में थे और मां शुभ्रा ज्वेलरी डिज़ाइनर थीं.

* सुष्मिता को कविता लिखने का शौक रहा है और वे आज भी भावनाओं से ओतप्रोत कविताएं लिखती रहती हैं.

Sushmita Sen Sushmita Sen Sushmita Sen

* 17 साल तक उनकी ज़िंदगी सीधी-सादी चलती रही, पर साल 1994 में 18 वें साल में उनके जीवन में रोमांचकारी बदलाव आया. यही उनके लाइफ का टर्निंग पाइंट भी रहा.

* इसी साल उन्होंने पहले मिस इंडिया उसके बाद मिस यूनिवर्स का ताज अपने नाम किया.

* वे पहली भारतीय महिला थीं, जिसने मिस यूनिवर्स का ख़िताब जीता था.

* इसके बाद वे आगे बढ़ती चली गई. उन्होंने मॉडलिंग, फिल्में और सोशल वर्क करना लगातार ज़ारी रखा. उनका एक चेरिटेबल फाउंडेशन भी है.

* दस्तक फिल्म से उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखा. इसी के साथ विक्रम भट्ट से उनके अ़फेयर्स की चर्चा भी सुर्ख़ियों में रही.

* चिंगारी फिल्म में निभाया गया उनका क़िरदार चुनौतीभरा और यादगार रहा.

Sushmita Sen Sushmita Sen Sushmita Sen

* सुष्मिता की निश्छल हंसी, मासूम अदाएं हर किसी को दीवाना कर जाती हैं, जैसे- स़िर्फ तुम व बीवी नंबर वन में उनकी दिलकश अदाएं. स़िर्फ तुम का दिलबर… दिलबर… गाना तो मिल का पत्थर साबित हुआ. इसका जादू इस कदर रहा कि हाल ही में सत्यमेव जयते में इसे रिक्रिएशन किया गया और वो भी सुपरहिट रहा.

* सुष्मिता को शाहरुख ख़ान के साथ की गई फिल्म मैं हूं ना में अपना चांदनी का क़िरदार बेहद पसंद है. बहुत कम लोगों को मालूम है कि पहले यह रोल ऐश्‍वर्या राय को ऑफर हुआ था.

* उन्होंने 25 साल की कम उम्र में ही बच्चियों को गोद लेने का ़फैसला किया.

* आज वे गोद ली हुई दो बेटियों रिनी व अलीशा की मां हैं. इस तरह समाज में उन्होंने एक मिसाल कायम की.

* हाल ही में जब उनकी बेटी ने स्कूल के निबंध में मां पर ममस्पर्शी भावनाओं में डूबी बातें लिखीं, तो उसे पढ़कर सुष्मिता की आंखें भर आईं. इसे उन्होंने शेयर भी किया. सच मां-बेटी के प्यार को देख सभी भावविभोर हो गए.

Sushmita Sen Sushmita Sen

 

* सुष्मिता अपने फिटनेस का ख़ास ख़्याल रखती हैं. वे अक्सर वर्कआउट्स करते, मुश्किलभरे एक्सरसाइज़ करते हुए अपनी वीडियोज़ सोशल मीडिया पर शेयर करती हैं. इससे यूज़र्स ख़ूब लाइक्स करते हैं और उन्हें सुष्मिता से प्रेरणा भी मिलती है.

* लंबे समय से फिल्म न करने के बावजूद अपने काम, मातृत्व ज़िम्मेदारी व कार्यों, प्रेम संबंध, सोशल वर्क के चलते वे हमेशा सुर्ख़ियों में रहती हैं.

* अपनी बेटियों व बॉयफ्रेंड रोहमन शॉल के साथ छुट्टियां मनाते, शॉपिंग करते, योग-एक्सरसाइज़ करते, फैन्स के साथ रू-ब-रू होते दिखाई देती हैं.

 

* रोहमन शॉल मॉडलिंग करते हैं, सुष्मिता उनसे सोशल मीडिया के ज़रिए जुड़ी थी और इससे जुड़ी एक दिलचस्प कहानी भी है, जिसे सुष्मिता ने शेयर भी किया था.

सुष्मिता अपने रिश्ते, प्यार और अपनों को एक अलग नज़रिए से देखती हैं और उन्हें भरपूर उमंग-उत्साह व ज़िंदादिली के साथ जीती भी हैं. तभी तो वे कहती हैं कि मैं खुली आंखों से सपने देखती हूं. इसे उन्होंने साबित भी कर दिखाया है. उनकी लाइफस्टाइल प्रेरणा देने के साथ बहुत कुछ बयां भी करती है, जैसे- मैं ज़िंदगी का साथ निभाती चली गई… हर फ्रिक को धुएं में उड़ाती चली…

विशेष: आज महान कुश्ती चैंपियन व अभिनेता दारा सिंह और उभरती अदाकारा तारा सुतारिया का भी जन्मदिन हैं.
तारा को हैप्पी बर्थडे व भविष्य के लिए शुभकामना!

– ऊषा गुप्ता

यह भी पढ़ेक्या बॉडी बनाने के लिए स्टेरॉइड का इस्तेमाल करते हैं सलमान खान? (Salman Khan’s Advice For Fitness Lovers)

यूं तो सभी के लिए उनके बच्चों में उनकी दुनिया होती है, पर सेलेब्रिटीज के लिए उनकी बेटियां हमेशा ख़ास रही हैं. फिर चाहे वो अमिताभ बच्चन की श्वेता हो या अक्षय कुमार की नितारा. आज डॉटर्स डे पर अजय देवगन और काजोल ने अपनी बेटी न्यासा को विश करते हुए प्यारी-सी तस्वीरें शेयर कीं. 

#HappyDaughtersDay

जहां काजोल ने न्यासा को बांहों में भरते हुए प्यार-दुलार किया, वहीं अजय देवगन के लिए तो रोज़ ही डॉटर्स डे है, बस आज के दिन थोड़ा ज्यादा है.

#HappyDaughtersDay
नम्रता शिरोड़कर और महेश बाबू ने भी अपनी बेटी सितारा के फोटो व वीडियो को शेयर करते हुए बेटी के प्रति अपने अगाध प्रेम का इज़हार किया.

आइए, आज डॉटर्स डे पर फिल्मी सितारों की बेटियों के साथ उनकी बॉन्डिंग की ख़ूबसूरत तस्वीरों पर एक नज़र डालते हैं…

amitabh bachchan and shweta nanda Aishwarya Rai and Aaradhya Bachchan Shahid Kapoor and Misha Kapoor #HappyDaughtersDay #HappyDaughtersDay #HappyDaughtersDay #HappyDaughtersDay

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Happy Daughters Day Bollywood

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हम एक शब्द हैं वह पूरी भाषा है

बस यही मां की परिभाषा है…

Mother’s Day Quotes

मैं रोया परदेस में भीगा मां का प्यार

दुख ने दुख से बातें की बिन चिट्ठी बिन तार

तू फिरश्तों की दुआ है मां

तू धरती पर खुदा है मां

कल अपने आपको देखा था मां की आंखों में

ये आईना हमें बूढ़ा नहीं बताता है…

घर में झीने रिश्ते मैंने लाखों बार उधड़ते देखे

चुपके-चुपके कर देती है जाने कब तुरपाई अम्मा

ज़िंदगी की पहली टीचर, पहली फ्रेंड मां

ज़िंदगी भी मां क्योंकि ज़िंदगी देनेवाली भी मां

जब-जब मैंने काग़ज़ पर लिखा मां-पिता का नाम

कलम अदब से कह उठी हो गए चारों धाम

संवेदना, भावना, एहसास है मां

जीवन के फूलों में ख़ुशबू का आभास है मां

मुर्गे की आवाज़ से खुलती घर की कुंडी जैसी मां

बेसन की सोंधी रोटी पर खट्टी चटनी जैसी मां

चलती फिरती हुई आंखों से अज़ां देखी है

मैंन जन्नत तो नहीं देखी है मां देखी है

किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकान आई

मैं घर में सबसे छोटा था मेरे हिस्से मां आई

मैंने मां की हथेली पर एक छोटा तिल देखा

और मां से कहा- ये दौलत का तिल है

मां ने अपने दोनों हाथों से मेरा चेहरा थामा और कहा-

देखो मेरे दोनों हाथों में कितनी दौलत है…

जब भी कोई रिश्ता उधड़े करती है तुरपाई मां

दुनिया के सब रिश्ते ठंडे गरम-गरम रजाई मां

इस दुनिया में मुझे उससे बहुत प्यार मिला है

मां के रूप में मुझे भगवान का अवतार मिला है

मैं तन पर लादे फिरता दुसाले रेशमी

लेकिन तेरी गोदी की गर्माहट कहीं मिलती नहीं मां

ये जो सख़्त रास्तों पे भी आसान सफ़र लगता है

ये मुझको मां की दुआओं का असर लगता है

एक मुद्दत हुई मेरी मां नहीं सोयी मैंने एक बार कहा था कि मुझे अंधेरे से डर लगता है…

मुझे अपनी दुनिया, अपनी कायनात को एक लफ़्ज़ में बयां करनी हो, तो वो लफ़्ज़ है मां

सहनशीलता पत्थर-सी और दिल मोम-सा

ना जाने किस मिट्टी की बनी है मां

मेरी ख़्वाहिश है कि मैं फिर से फरिश्ता हो जाऊं

मां से इस तरह लिपट जाऊं कि बच्चा हो जाऊं

हालात बुरे थे मगर अमीर बनाकर रखती थी

हम गरीब थे, ये बस हमारी मां जानती थी

मांगने पर जहां पूरी हर मन्नत होती है

मां के पैरों में ही तो वो जन्नत होती है

गिन लेती है दिन बगैर मेरे गुज़ारे है कितने

भला कैसे कह दूं मां अनपढ़ है मेरी…

घर में ही होता है मेरा तीरथ

जब नज़र मुझे मां आती है

स्याही ख़त्म हो गई मां लिखते-लिखते

उसके प्यार की दास्तान इतनी लंबी थी…

– ऊषा मूरत गुप्ता

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सेलिना जेटली दूसरी बार जुड़वां बच्चों की मां बनने जा रही हैं. सेलिना ने हाल में इंस्टाग्राम पर अपनी एक पिक्चर शेयर की है, जिसमें वो अपना बेबी बंप शो कर रहीं हैं. पिक्चर में बेहद ख़ूबसूरत नज़र आ रही सेलिना ने अपनी इस फोटो के साथ एक संदेश भी दिया है. उन्होंने अपनी उस पिक्चर को लेकर लिखा है, “मुझे पता है कि बहुत सारे लोग इसे लेकर नेगेटिव कमेंट करेंगे, लोग पूछेंगे कि क्यों मैं प्रेग्नेंसी से जुड़ी तस्वीरें बिकिनी में शेयर कर रही हूं, लेकिन मुझे लगता है कि भारत में प्रेग्नेंसी से जुड़ी पुरानी सोच को बदलना बहुत ज़रूरी है.” सेलिना ने ये भी कहा कि उन्होंने दो बार दो जुड़वा बच्चों को जन्म देने की प्रक्रिया के दौरान यही समझा है कि सही डायट और एक्सरसाइज़ करके अपने शरीर पर भरोसा करें. ये आपके शरीर और मन दोनों को पोषण देने के साथ ही इस बात का एहसास भी कराएगा कि ब्यूटी, हेल्थ और स्ट्रेंथ हर साइज़ में उपलब्ध है.

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सेलिना पहले ही 5 साल के दो जुड़वां बेटों विंस्टन और विराज की मम्मी हैं. देखें उनके बच्चों की तस्वीर.

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पूनम पांडे ने शेयर किया अपना सबसे सेक्सी फोटो शूट

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बॉलीवुड और टीवी वर्ल्ड की फेवरेट मां मानी जाने वाली रीमा लागू नहीं रहीं. देर रात उन्हें हार्ट अटैक आया था, जिसके बाद उन्हें कोकिलाबेन अस्पताल में भर्ती कराया गया था. गुरुवार सुबह 3 बजकर 15 मिनट पर उनका निधन हो गया. 59 की उम्र में उनके यूं अचानक चले जाने से बॉलीवुड और टीवी जगत के साथ उनके फैंस भी बेहद सदमें में हैं. रीमा लागू महेश भट्ट के टीवी शो नामकरण में काम कर रही थीं.

हम आपके हैं कौन, मैंने प्यार किया और हम साथ-साथ हैं जैसी फिल्मों में सलमान खान की मम्मी का रोल निभा चुकीं रीमा बॉलीवुड की चहेती मां होने के साथ-साथ एक बेहद ही सशक्त ऐक्ट्रेस थीं. फिल्म आशिकी, साजन, वास्तव, कुछ-कुछ होता है जैसी फिल्मों में भी उन्होंने अपने अभिनय की छाप छोड़ी. हिंदी के अलावा मराठी फिल्मों और सीरियल्स में भी रीमा अभिनय कर चुकीं हैं. सुपरहिट हिंदी सीरियल श्रीमान श्रीमती और तू तू मैं मैं में निभाया गया उनका किरदर भला कौन भूल सकता है.

मेरी सहेली की ओर से रीमा लागू को भावभीनी श्रद्धांजलि.

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हर किसी के लिए ख़ास होती है मां. बच्चे की सबसे अच्छी दोस्त, टीचर, गाइड मां ही होती है. बिज़ी लाइफ के चलते कई बार हम उन्हें थैंक्यू बोलना भूल जाते हैं. आइए, मदर्स डे के इस ख़ास दिन को सेलिब्रेट करते हैं बॉलीवुड में मां की ममता पर बने 10 गानों के साथ.

मेरी सहेली की ओर से हैप्पी मदर्स डे. देखें ये गाने.

फिल्म- राजा और रंक

फिल्म- दादी मां

https://www.youtube.com/watch?v=MLh5PqDYEuw

फिल्म- एबीसीडी 2

फिल्म- तारे ज़मीन पर

फिल्म- दसविदानिया

फिल्म- रंग दे बसंती

फिल्म- छोटा भाई

फिल्म- फटा पोस्टर निकला हीरो

फिल्म- यारियां

फिल्म- शूटआउट एट लोखंडवाला

 

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बच्चे कितने भी बड़े हो जाएं, लेकिन मां के लिए हमेशा बच्चे ही रहते हैं. अनिल कपूर भी उन्हीं में से हैं. मदर्स डे के ख़ास मौक़े पर अनिल ने अपनी मम्मी को गिफ्ट में दिया शैंपेन. शैंपेन की बॉटल गिफ्ट हाथों में थामें उनकी मम्मी कैमरे में स्माइल करती नज़र आईं. अनिल ने इंस्टाग्राम पर इस पिक्चर को शेयर करते हुए लिखा एक इमोशनल-सा मैसेज भी लिखा है, जिसमें उन्होंने अपनी मम्मी को रियल हीरो कहते हुए थैंक्यू कहा है. आप भी देखें ये क्यूट मैसेज.

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निरूपा रॉय

बॉलीवुड में मां का किरदार निभाने वाली स्व. निरूपा रॉय के घर में बेटों के रिश्तों में भी दीवार आ गई है. आपको जानकर आश्चर्य होगा कि निरूपा रॉय के कमरे को लेकर उनके दोनों बेटों किरन और योगेश में ठन गई है. निरूपा रॉय के दोनों बेटे उनके बेडरूम पर दावा कर रहे हैं, उनकी कहना है कि उनकी भावनाएं इस कमरे से जुड़ी हुई हैं.
वैसे साल 2004 में निरूपा रॉय की मौत के बाद से ही उनकी संपत्ति को लेकर विवाद शुरु हो गया था. उनकी पूरी संपत्ति लगभग 100 करोड़ की है. उनका 3000 स्क्वैर का अपार्टमेंट है, जिसमें किरन और योगेश के हिस्से में दो दो बेडरूम हैं. साथ ही इसमें 8000 स्क्वैर का गार्डन भी है.

 

Modi’s mother  फोटो सौजन्य: ANI

  • करंसी को लेकर इन दिनों देश में बहुत कुछ हो रहा है. लोग मोदीजी के फैसले की तारीफ़ कर रहे हैं, लेकिन अपनी परेशानी भी बयां कर रहे हैं.
  • इन सबके बीच मोदीजी (Narendra Modi) की मां हीराबा भी आम नागरिक की तरह नोट बदलवाने बैंक की लाइन में खड़ी हुईं.
  • उन्होंने साढ़े चार हज़ार के नोट चेंज करवाए. ओरिएंटल बैंक में उन्होंने पहले फॉर्म भरा और फिर करंसी एक्सचेंज करवाई.
  • इस पर लोगों ने ट्विटर पर भी अपनी प्रतिक्रियाएं दीं.

https://twitter.com/IndiaHistorypic/status/798417137756962818

 

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ज़िंदगी की हर रेस में जीत दर्ज करने के बावजूद उसकी क़ामयाबी तब तक अधूरी रहती है जब तक उसकी गोद न भर जाए. आख़िर बच्चे के जन्म को औरत के अस्तित्व और पूर्णता से जोड़कर क्यों देखा जाता है? क्या बच्चे को जन्म दिए बिना औरत को ख़ुशहाल ज़िंदगी जीने का हक़ नहीं है? क्या उसका अपना कोई वजूद नहीं है? महिलाओं की ज़िंदगी से जुड़े कुछ ऐसे ही संवेदनशील पहलुओं को छूने की कोशिश की है हमने अपनी इस स्पेशल रिपोर्ट में.

शादी और फिर बच्चा, ये दो शब्द ऐसे हैं जिनकी ग़ैर मौजूदगी में किसी भी औरत की ज़िंदगी को पूर्ण नहीं माना जा सकता. भले ही बेटा नकारा, निकम्मा हो और बहू दिनभर मेहनत करके घर का ख़र्च चला रही हो, फिर भी किसी कारणवश यदि वो बच्चे को जन्म देने में समर्थ नहीं है, तो उसे परिवार व समाज की चुभती निगाहों और तानों से रोज़ाना छलनी होना पड़ता है, मगर पुरुष पर कोई उंगली नहीं उठाता. हम आधुनिक और शिक्षित होने का लाख दंभ भरें, लेकिन हमारी कथनी और करनी में बहुत अंतर है. देश के अलग-अलग हिस्सों में कई औरतों को मां न बन पाने का
खामियाज़ा अपनी जान देकर चुकाना पड़ता है.

क्या हमारा कोई वजूद नहीं?
एक मल्टीनेशनल कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत इंदु गुप्ता (परिवर्तित नाम) कहती हैं, “शादी के 1 साल बाद भी जब मैं प्रेग्नेंट नहीं हुई तो डॉक्टर को दिखाया. फिर दवाइयों का सिलसिला शुरू हो गया. क़रीब 2-3 साल इधर-उधर भटकने के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकला. एक तरफ़ दवाइयां बेअसर हो रही थीं और दूसरी तरफ़ ससुराल वालों के दबाव और तानों ने मुझे डिप्रेस कर दिया था. मैं इतनी तनावग्रस्त हो गई थी कि देर रात तक पागलों की तरह ऑफिस में ही बैठी रहती, रास्ते पर यूं ही घूमती रहती. घर में न तो किसी को मुझसे कोई लगाव था और न ही मेरी परवाह. हां, इस मुश्किल दौर में पति ने हर मोड़ पर मेरा साथ दिया. तीन साल बाद मैंने आईवीएफ ट्रीटमेंट कराना शुरू किया, मगर लाखों रुपए
फूंकने और पूरे शरीर में सूइयां चुभोने के बावजूद ये सफल न हो सका. सासू मां के ताने ‘हमारे परिवार में आज तक ऐसा नहीं हुआ’ और पार्टी-फंक्शन में लोगों के तीखे सवाल ‘अरे! तेरा हुआ कि नहीं अब तक?’ मेरे दिल को छलनी कर देते हैं, अब तो लोगों के बीच जाने से भी डर लगने लगा है.”
साइकोलॉजिस्ट निमिषा रस्तोगी कहती हैं, “हमारे देश में मां बनने को लेकर लोगों का नज़रिया बहुत संकुचित है, वो इसे महिलाओं की क़ाबिलियत से जोड़कर देखते हैं. इसी सोच के कारण महिलाएं धीरे-धीरे हीन भावना से घिर जाती हैं, जिसका असर उनकी पर्सनल लाइफ के साथ ही प्रोफेशनल लाइफ पर भी पड़ता है. बैंग्लोर की एक शिक्षिका के केस में भी ऐसा ही हुआ. बच्चा न होने के कारण वो महिला इस कदर अवसादग्रस्त हो गई कि धीरे-धीरे उसने बाहर आना-जाना, यहां तक कि नौकरी भी छोड़ दी. पति से भी उसके संबंध अच्छे नहीं रहे.”
महिलाओं के प्रति शिक्षित परिवारों की भी मानसिकता नहीं बदली है. महिलाएं कितनी भी तरक्क़ी क्यों न कर लें, लेकिन मां बने बिना उसकी सारी सफलता बेकार है. आख़िर समाज ये क्यों नहीं समझता कि औरतों का भी अपना वजूद है, उनकी भी भावनाएं हैं, उन्हें भी दर्द होता है, उनमें भी एहसास है. क्यों उसे एक मशीन की तरह ट्रीट किया जाता है?
मैरिज काउंसलर मोना बक्षी कहती हैं, “पढ़ी-लिखी और प्रतिष्ठित पद पर काम करने वाली क़ामयाब महिलाएं भी मां न बन पाने के अपराधबोध से ग्रसित रहती हैं, क्योंकि उन्हें सही मार्गदर्शन और सपोर्ट नहीं मिलता. इस स्थिति से बाहर आने के लिए परिवार, ख़ासकर पति का सपोर्ट बेहद ज़रूरी है.”

प्यार व त्याग के बदले अपमान
परिवार के लिए किए उसके सारे त्याग व समझौते क्या बच्चा न होने के कारण ज़ाया हो जाएंगे? ये कहां की नैतिकता है? पराये घर से आने के बावजूद वो आपके घर को, उसके तौर-तरीक़ों को न स़िर्फ अपनाती है, बल्कि उन्हें बेहतर बनाने की कोशिश में अपनी पूरी ताक़त लगा देती है, मगर इन कोशिशों का उसे क्या सिला मिलता है?
मुंबई की अचला (परिवर्तित नाम) शादी के 13 साल बाद भी मां नहीं बन पाईं. कई साल डॉक्टरों के चक्कर काटने के बाद उन्हें पता चला कि कमी उनके पति में है. कोई पति की मर्दानगी पर सवाल न उठाए और परिवार व समाज के सामने उनका सिर शर्म से न झुक जाए, इसलिए अचला ने पति के बाप न बन पाने वाला राज़ अपने सीने में ही दफ़न कर लिया. अचला ने तो पति से यहां तक कह दिया कि यदि वो चाहे तो बच्चे के लिए दूसरी शादी कर सकता है, उसे कोई दिक्क़त नहीं है, मगर उसके इस त्याग के बदले उसे मिली ज़िल्लत और दर्द. ससुराल वाले उसके पति पर उसे छोड़कर दूसरी शादी का दबाव डालने लगे. जिस पति की कमी को उसने दुनिया से छिपाया, वही पति मां और भाई की बातों में आकर उसे ही प्रताड़ित करने लगा. उस पर किसी और से रिश्ता होने का झूठा आरोप लगाकर हर रोज़ शारीरिक व मानसिक रूप से परेशान करने लगा. इन सबसे आजीज़ आकर अचला अब अलग रह रही हैं और पति से तलाक़ लेना चाहती हैं, मगर वो उसे आसानी से तलाक़ देने को भी राज़ी नहीं है, क्योंकि तलाक़ की सूरत में उसे मुआवज़ा देना पड़ेगा.
हमारे देश में अचला के पति और ससुराल वालों जैसी ओछी मानसिकता वाले लोगों की कोई कमी नहीं है. बच्चे के लिए बेटे की दूसरी शादी कराने वाले लोग ये जानने की ज़हमत भी नहीं उठाते कि कमी बहू में है या बेटे में. लोगों ने तो जैसे मान ही लिया है कि जो भी बुरा होता है उसके लिए बहू ही ज़िम्मेदार है. मैरिज काउंसलर मोना बक्षी कहती हैं, “कई केसेस में महिलाएं इतनी परेशान व डिप्रेस्ड हो जाती हैं कि वो ख़ुद ही पति से दूसरी शादी करने के लिए कह देती हैं. बच्चा न होने के लिए ख़ुद को ज़िम्मेदार मानकर वो हमेशा एक अपराधबोध से घिरी रहती हैं.”

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क्यों मंज़ूर नहीं गोद लेने का विकल्प?
21वीं सदी में जब हम आधुनिकता का दंभ भरते हैं ये स्थिति बदलनी बेहद ज़रूरी है. लोगों को ये समझना होगा कि पति और बच्चे से अलग भी महिला का अपना एक अलग अस्तित्व होता है और बच्चा न होने का ये मतलब नहीं कि ज़िंदगी ही ख़त्म हो गई. किसी ग़रीब, बेसहारा अनाथ बच्चे को गोद लेकर न स़िर्फ उसकी ज़िंदगी संवारी जा सकती है, बल्कि ममता के सुख से वंचित महिलाओं की ज़िंदगी के खालीपन को भी भरा जा सकता है. निमिषा कहती हैं, “एडॉप्शन को लेकर कई तरह की मान्यताएं हैं, जैसे- अपना बच्चा या ख़ून का रिश्ता ही सच्चा है, गोद लिए बच्चे को जब सच्चाई का पता चलेगा तो वो हमें छोड़कर चला जाएगा, पता नहीं उसकी रगो में कैसा ख़ून है? आदि. ऐसी सोच के कारण ही ज़्यादातर दंपति बच्चा गोद नहीं लेते, मगर ये सोच बिल्कुल ग़लत है. कुछ साल पहले मेरे पास एक केस आया जिसमें शादी के 12 साल बाद भी मां न बन पाने के कारण वो महिला बहुत ज़्यादा तनावग्रस्त हो गई थी. दो बार आईवीएफ करवाने का भी कोई फ़ायदा नहीं हुआ. अब वो फोबिया की शिकार हो चुकी थी, उसे इंजेक्शन और डॉक्टर से चिढ़ हो गई थी, वो रिश्तेदारों व अपने कलीग से भी मिलना पसंद नहीं करती थी. जब ये कपल मेरे पास आए, तो कई हफ़्तों तक लगातार सेशन करने के बाद वो बच्चा गोद लेने के लिए राज़ी हो गए. उन्होंने अनाथाश्रम से 1 महीने की बच्ची को गोद लिया. आज अपनी इस प्यारी-सी बच्ची के साथ ये कपल बहुत ख़ुश है. वो मानते हैं कि अपनी पुरानी सोच बदलकर उन्होंने समझदारी का काम किया, तभी तो आज एक ओर जहां उनकी ज़िंदगी की कमी पूरी हो चुकी है, वहीं उस बेसहारा बच्ची को भी परिवार का प्यार और सहारा मिल गया.”
मोना बक्षी कहती हैं, “जो लोग इस डर से कि गोद लिया बच्चा हमसे अटैच हो पाएगा या नहीं, बच्चा एडॉप्ट करने से कतराते हैं, उन्हें ये याद रखना चाहिए कि जब बच्चा पैदा होता है तो उसका मां से भी कोई अटैचमेंट नहीं होता, वो मां से तब जुड़ता है जब वो उसे पहली बार गोद में लेती है और फिर धीरे-धीरे ये रिश्ता गहरा होता है.”

महिलाओं के लिए ज़रूरी है थोड़ी सतर्कता
कई बार महिलाएं करियर या किसी मुक़ाम पर पहुंचने की ख़ातिर मां बनने का फैसला टालती रहती हैं और जब वो बच्चा चाहती हैं, तो उनका शरीर साथ नहीं देता या किसी मेडिकल प्रॉब्लम की वजह से वो कंसीव नहीं कर पातीं. ऐसे में सब कुछ होते हुए भी वो तनाव से घिर जाती हैं और उन्हें अपनी सारी क़ामयाबी बेकार लगने लगती है. अतः करियर और बाक़ी चीज़ों के साथ ही ज़रूरी है कि अपनी ज़िंदगी के इस महत्वपूर्ण फैसले को हल्के में न लें और सही समय पर प्लानिंग कर लें. डॉक्टर किरण कोयले के अनुसार, “30 वर्ष के बाद प्रेग्नेंसी में कई तरह के कॉम्पलीकेशन हो सकते हैं.”

मां बनना ज़िंदगी का हिस्सा है, ज़िंदगी नहीं
अपनी तरफ़ से सावधानी बरतने और हर चीज़ का ख़्याल रखने के बाद भी यदि आप मां नहीं बन पाती हैं, तो इस ग़म को दिल से लगाकर बैठने की बजाय ख़ुद को ख़ुश करने के दूसरे तरी़के निकालिए. समाज और परिवार क्या कहेगा? की चिंता छोड़ दीजिए. यदि आपका दिल कहता है कि बच्चा गोद लेकर आप इस कमी को पूरा कर सकती हैं, तो बेझिझक अपने दिल की सुनिए. हो सकता है, घरवाले इसका विरोध करें, मगर ये ज़िंदगी आपकी है और इसे अपनी मर्ज़ी व ख़ुशी से जीने का आपको पूरा हक़ है. मां बनना किसी भी औरत की ज़िंदगी का ज़रूरी हिस्सा है, मगर ये ज़िंदगी नहीं है. क्या पिता न बनने पर पुरुष जीना छोड़ देते हैं? नहीं ना, तो फिर महिलाएं ऐसा क्यों करती हैं? वैसे भी मां बनने के लिए बच्चे पैदा करना ज़रूरी नहीं है. यशोदा ने कृष्ण को जन्म नहीं दिया था, मगर उनकी मां तो वही कहलाती हैं, क्योंकि उन्होंने कृष्ण को दिल से प्यार किया, आप भी ऐसा कर सकती हैं.

एक्सपर्ट स्पीक
यदि हम सोच बदल लें तो आईवीएफ और सरोगेसी की ज़रूरत ही नहीं रहेगी. किसी बेघर अनाथ को अच्छी ज़िंदगी देकर हम अपने घर और उसकी ज़िंदगी दोनों को रोशन कर सकते हैं.     – मोना बक्षी, साइकोलॉजिस्ट

लोगों की संकुचित मानसिकता के लिए कहीं न कहीं मीडिया भी ज़िम्मेदार है. कई सीरियल्स में वही दकियानूसी सोच दिखती है कि मां न बन पाने पर ज़िंदगी अधूरी है. ये ग़लत है और इसे बदलने की ज़रूरत है.       – निमिषा रस्तोगी

– कंचन सिंह