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मदर्स डे पर विशेष- ईश्वर का रूप है मां… (Mother’s Day Special- Quotes About Mothers)

Mother’s Day Quotes

हम एक शब्द हैं वह पूरी भाषा है

बस यही मां की परिभाषा है…

Mother’s Day Quotes

मैं रोया परदेस में भीगा मां का प्यार

दुख ने दुख से बातें की बिन चिट्ठी बिन तार

 

तू फिरश्तों की दुआ है मां

तू धरती पर खुदा है मां

 

कल अपने आपको देखा था मां की आंखों में

ये आईना हमें बूढ़ा नहीं बताता है…

 

घर में झीने रिश्ते मैंने लाखों बार उधड़ते देखे

चुपके-चुपके कर देती है जाने कब तुरपाई अम्मा

ज़िंदगी की पहली टीचर, पहली फ्रेंड मां

ज़िंदगी भी मां क्योंकि ज़िंदगी देनेवाली भी मां

 

जब-जब मैंने काग़ज़ पर लिखा मां-पिता का नाम

कलम अदब से कह उठी हो गए चारों धाम

 

संवेदना, भावना, एहसास है मां

जीवन के फूलों में ख़ुशबू का आभास है मां

 

मुर्गे की आवाज़ से खुलती घर की कुंडी जैसी मां

बेसन की सोंधी रोटी पर खट्टी चटनी जैसी मां

चलती फिरती हुई आंखों से अज़ां देखी है

मैंन जन्नत तो नहीं देखी है मां देखी है

 

किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकान आई

मैं घर में सबसे छोटा था मेरे हिस्से मां आई

 

मैंने मां की हथेली पर एक छोटा तिल देखा

और मां से कहा- ये दौलत का तिल है

मां ने अपने दोनों हाथों से मेरा चेहरा थामा और कहा-

देखो मेरे दोनों हाथों में कितनी दौलत है…

 

जब भी कोई रिश्ता उधड़े करती है तुरपाई मां

दुनिया के सब रिश्ते ठंडे गरम-गरम रजाई मां

इस दुनिया में मुझे उससे बहुत प्यार मिला है

मां के रूप में मुझे भगवान का अवतार मिला है

 

मैं तन पर लादे फिरता दुसाले रेशमी

लेकिन तेरी गोदी की गर्माहट कहीं मिलती नहीं मां

 

ये जो सख़्त रास्तों पे भी आसान सफ़र लगता है

ये मुझको मां की दुआओं का असर लगता है

 

एक मुद्दत हुई मेरी मां नहीं सोयी मैंने एक बार कहा था कि मुझे अंधेरे से डर लगता है…

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मुझे अपनी दुनिया, अपनी कायनात को एक लफ़्ज़ में बयां करनी हो, तो वो लफ़्ज़ है मां

 

सहनशीलता पत्थर-सी और दिल मोम-सा

ना जाने किस मिट्टी की बनी है मां

 

मेरी ख़्वाहिश है कि मैं फिर से फरिश्ता हो जाऊं

मां से इस तरह लिपट जाऊं कि बच्चा हो जाऊं

 

हालात बुरे थे मगर अमीर बनाकर रखती थी

हम गरीब थे, ये बस हमारी मां जानती थी

मांगने पर जहां पूरी हर मन्नत होती है

मां के पैरों में ही तो वो जन्नत होती है

गिन लेती है दिन बगैर मेरे गुज़ारे है कितने

भला कैसे कह दूं मां अनपढ़ है मेरी…

 

घर में ही होता है मेरा तीरथ

जब नज़र मुझे मां आती है

 

स्याही ख़त्म हो गई मां लिखते-लिखते

उसके प्यार की दास्तान इतनी लंबी थी…

– ऊषा मूरत गुप्ता

 

मदर्स डे के दिन दीजिए अपनी मां को एक अनमोल तोहफ़ा! (The Ultimate Mothers Day Gift!)

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मदर्स डे वो ख़ास मौक़ा होता है जब आप खुलकर अपनी मां के प्रति अपना प्यार व्यक्त कर सकते हैं. इस मौक़े को हाथ से जाने न दें. अपनी मां के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए आप बहुत कुछ कर सकते हैं.

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Mothers Day

मां से मॉम तक: ये हैं बॉलीवुड की मॉडर्न मॉम (Bollywood Actress And Most Stylish Mom In Real Life)

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मां से मॉम बनने तक के सफ़र में औरत की ज़िंदगी में कई बदलाव आए हैं. घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर उसने अपनी एक अलग पहचान बनाई है. इससे उसके मातृत्व में तो कोई कमी नहीं आई, लेकिन उसने मदरहुड की परिभाषा ज़रूर बदल दी है. मदर्स डे के ख़ास मौ़के पर आइए, जानते हैं मां से मॉम तक कितनी बदली है भारतीय महिलाओं की तस्वीर.

गया वो ज़माना जब मां अपने बच्चों को दुवाओं के सिवाय कुछ नहीं दे पाती थी. घर-परिवार व बच्चों की देखभाल करने में ही वो अपनी पूरी ज़िंदगी गुज़ार देती थी. अपने बारे में कभी कुछ नहीं सोचती थी. आज की मॉडर्न मॉम मदरहुड की तमाम ज़िम्मेदारियां निभाते हुए अपने वुमनहुड को भी बख़ूबी एंजॉय कर रही है. आज की मां पहले की तरह लाचार-असहाय नहीं, वो अपने बच्चों की भौतिक ज़रूरतें भी पूरी कर सकती है और भावनात्मक, बौद्धिक, सामाजिक ज़रूरतें भी. आज की मॉम स्मार्ट है, सफल है और अपनी हर ज़िम्मेदारी निभाने में सक्षम भी. जी हां, मदरहुड की परिभाषा बदल रही है और इस बदलाव से औरत की ज़िंदगी और भी ख़ूबसूरत हो गई है. आइए, जानें नए ज़माने की न्यू मॉम को.

मॉम या सुपर मॉम
पहले ज़्यादातर वर्किंग वुमन सुपर मॉम बनने के चक्कर में हर काम ख़ुद ही करने की कोशिश में इतनी थक जाती थी कि इससे या तो उन्हें कई हेल्थ प्रॉब्लस हो जाती थीं या फिर वो चिड़चिड़ी हो जाती थी. इससे उनकी हेल्थ और घर का माहौल दोनों बिगड़ जाते थे, लेकिन आज की मॉडर्न मॉम ऐसा नहीं करती. वो ये बात अच्छी तरह जानती है कि वो हर काम अकेले नहीं कर सकती, इसलिए वो घर के सभी सदस्यों से थोड़ी-थोड़ी मदद लेकर स्मार्टली सारा काम मैनेज कर लेती है. वो परिवार के साथ-साथ अपनी हेल्थ का भी पूरा ख़्याल रखती है.
क्या कहती हैं सेलिब्रिटी मॉम करीना कपूर ख़ान
बोल्ड एंड ब्यूटीफुल बेबो उर्फ करीना कपूर ख़ान कहती हैं, “मां का हेल्दी रहना, अपना ध्यान रखना, अपने करियर को आगे बढ़ाना, ये सब बच्चे के लिए भी ज़रूरी है. जो बच्चा अपनी मां को हेल्दी और हैप्पी देखते हुए बड़ा होता है, उसे समाज के लिए कुछ करते देखता है, एक बेहतर ज़िंदगी जीते देखता है, वो अपनी मां से ये तमाम गुण सीखकर ख़ुद भी ऐसी ही ज़िंदगी जीता है. बच्चे को ख़ुश और स्वस्थ रखने के लिए पहले आपका हैप्पी और हेल्दी होना ज़रूरी है.”

छोटी-छोटी ख़ुशियां
पहले महिलाएं अपनी छोटी-छोटी ख़ुशियों पर ध्यान नहीं देती थी. वो त्याग की मूर्ति बनकर स़िर्फ परिवार की ज़रूरतें पूरी करती रहती थी, लेकिन आज की मॉम ज़िंदगी की छोटी-छोटी ख़ुशियों को ज़रूरी मानती है. वो सेलिब्रेशन का कोई मौका नहीं गंवाती. वो हर ख़ुशी का पासवर्ड जानती है और उसे सेलिब्रेट करना भी उसे आता है. इसीलिए वो बर्थडे, एनिवर्सरी, न्यू ईयर… हर स्पेशल डे सेलिब्रेट करती है और अपनी फैमिली को देती है ख़ुशी का तोहफा.
क्या कहती हैं सेलिब्रिटी मॉम ऐश्‍वर्या राय बच्चन
दुनिया की बेहद ख़ूबसूरत लेडी और बॉलिवुड सुपरस्टार ऐश्‍वर्या राय बच्चन कहती हैं, “मां बनना किसी भी औरत के लिए ईश्‍वर का सबसे बड़ा आशीर्वाद है. आप चाहे कितनी भी बिज़ी क्यों न हों, अपने मदरहुड को पूरी तरह एंजॉय करें. अच्छी प्लानिंग करके इस स्वीट टाइम का पूरा लुत्फ़ उठाया जा सकता है.” ऐश्‍वर्या राय अपनी बेठी आराध्या को ख़ुद स्कूल छोड़ने जाती हैं और शूटिंग के बीच में से टाइम निकालकर उसे स्कूल से घर लाने भी जाती हैं. अपने करियर और मदरहुड को ऐश्‍वर्या बहुत अच्छी तरह बैलेंस कर रही हैं.

क्वालिटी टाइम
कई महिलाएं दिनभर घर में रहकर भी अपने बच्चे से थोड़ी देर भी ठीक से बात नहीं करतीं. वो दिनभर या तो फ्रेंड के साथ फोन पर बात करती रहती हैं या फिर टीवी देखती रहती हैं, जबकि स्मार्ट वर्किंग मॉम ऑफिस से लौटकर अपने बच्चे के साथ क्वालिटी टाइम बिताती है, उससे दिनभर की बातें पूछती है, उसका होमवर्क कराती है. इसके साथ ही पति और परिवार के लिए भी थोड़ा-थोड़ा क्वालिटी टाइम ज़रूर निकालती है.
क्या कहती हैं सेलिब्रिटी मॉम माधुरी दीक्षित नेने
धक-धक गर्ल माधुरी दीक्षित नेने ने भले ही अमेरिका में बसे डॉक्टर नेने से विवाह किया और उनके बच्चों के शुरुआती वर्ष विदेश में बीते, लेकिन उन्होंने अपने बच्चों को भारतीय संस्कार सिखाने में कहीं कोई कमी नहीं रखी. माधुरी कहती हैं, “मैंने अपने बच्चों को गायत्री मंत्र सिखाया है और घर में मैैं अपने बच्चों के साथ मराठी में ही बात करती हूं. मैं अपने दोनों बच्चों को स्कूल छोड़ने जाती हूं, उन्हें साथ बिठाकर होमवर्क करवाती हूं, उनकी हेल्थ और हाईजीन का ध्यान रखती हूं… वो सारे काम करती हूं जो एक आम मां अपने बच्चों के लिए करती है.”

यह भी पढ़ें: बच्चों के न खाने के बहाने: सेलिब्रिटी मॉम के ईज़ी सॉल्यूशन

बच्चे का भविष्य
पहले की मॉम बच्चे के भविष्य की पूरी ज़िम्मेदारी पति पर छोड़ देती थी और बच्चे को डॉक्टर, इंजीनियर… जैसे रटे-रटाए करियर को ही चुनने की सलाह देती थी, लेकिन आज की ग्लोबल मॉम ये बात जानती है कि रटे-रटाए करियर के अलावा भी अलग फील्ड में करियर बनाया जा सकता है और उसमें कामयाबी हासिल की जा सकती है इसीलिए वो अपने बच्चे के टैलेंट को जानते हुए उसे उसकी पसंद के फील्ड में आगे बढ़ने को प्रोत्साहित करती है.
क्या कहती हैं सेलिब्रिटी मॉम काजोल देवगन 
सुपर टैलेंटेड काजोल देवगन जितनी परफेक्शनिस्ट ऐक्टिंग में नज़र आती हैं, उतना ही परफेक्ट है उनका पैरेंटिंग स्टाइल. काजोल ये मानती हैं कि बच्चों को सही आदतें और अनुशासन सिखाने के लिए यदि थोड़ी सख़्ती भी दिखाई जाए तो इसमें कोई बुराई नहीं है. काजोल के अनुसार, “ये हर माता-पिता का कर्त्तव्य है कि वे अपने बच्चों को सही और ग़लत का फर्क़ सिखाएं.” काजोल हंसते हुए कहती हैं, “मां कहती हैं कि मैंने जो कह दिया वो पत्थर की लकीर होती है. वाकई मेरे घर में ऐसा है. मुझे इस बात का फख़्र है कि मेरे बच्चे मेरी 70% बातें सुन लेते हैं और बाक़ी 30% बातों पर या तो हम झगड़ लेते हैं या मिल बैठकर उनका हल निकाल लेते हैं. मेरे ख़्याल से ये रेशियो बुरा नहीं है.”

मी टाइम
ये बात तो हम सभी जानते हैं कि यदि आप ख़ुद ख़ुश नहीं हैं तो आप दूसरों को कभी ख़ुश नहीं रख सकते, इसलिए सबसे पहले आपका ख़ुश होना ज़रूरी है. आज की मॉडर्न मॉम ये बात अच्छी तरह जानती है इसलिए वो मी टाइम के लिए व़क्त ज़रूर निकालती है. घर-परिवार, बच्चों की तमाम ज़िम्मेदारियां निभाते हुए वो अपने लिए भी अलग से व़क्त निकालती है और वो टाइम स़िर्फ उसका होता है.
क्या कहती हैं सेलिब्रिटी मॉम शिल्पा शेट्टी कुंद्रा 
फिटनेस फ्रीक मॉम शिल्पा शेट्टी कुंद्रा के अनुसार, “हर औरत को अपनी सेहत और फिटनेस पर ध्यान देना चाहिए. एक हेल्दी मां ही हेल्दी बच्चे को जन्म से सकती है.” वर्किंग मदर्स के लिए शिल्पा कहती हैं, “चाहे आप कितनी ही बिज़ी क्यों न हों, अपनी ज़िम्मेदारियों के बीच अपनी सेहत के साथ कभी समझौता न करें. अपने लिए, ख़ासकर अपनी सेहत के लिए समय ज़रूर निकालें.”

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टाइम मैनेजमेंट
हम सभी के पास एक दिन में स़िर्फ 24 घंटे होते हैं. अब ये हम पर निर्भर करता है कि हम उस टाइम को किस तरह बिताते हैं. कई लोग टाइम की वैल्यू नहीं जानते और उसे यूं ही बर्बाद कर देते हैं, लेकिन आज की मॉडर्न मॉम सही टाइम मैनेजमेंट जानती है और अपने टाइम का सही इस्तेमाल करके घर और करियर में सही बैलेंस बनाकर रखती है.
क्या कहती हैं सेलिब्रिटी मॉम सोनाली बेंद्रे
सेलिब्रिटी मॉम सोनाली बेंद्रे कहती हैं, “आज की मॉम और बच्चे दोनों बिज़ी हैं. ऐसे में सही टाइम मैनेजमेंट बहुत ज़रूरी है. आज के बच्चों को मटीरियलिस्टिक चीज़ें ही नहीं, नॉलेज भी ज़्यादा मिल रहा है, और ये इंफ़ॉर्मेशन उन्हें जितनी आसानी से मिल रही है, उतनी ही तेज़ी से वे उसे पिकअप भी कर रहे हैं. ऐसे में इस बात पर ध्यान देना बहुत ज़रूरी है कि बच्चों को किस समय कितना एक्सपोज़र मिले. अपने बेटे की ख़ातिर मैं ज़्यादा काम नहीं करती. मैं कल इस बात पर अफ़सोस नहीं करना चाहती कि काश, मैंने अपने बच्चे को थोड़ा और वक़्त दिया होता.”

मां या बेस्ट फ्रेंड
आज की मॉडर्न मॉम बच्चे की अभिभावक ही नहीं, उसकी बेस्ट फ्रेंड भी होती है. वो अपने बच्चे की हर भावना को जानती-समझती है, उसकी भावनाओं की कद्र करती है. वो एक दोस्त की तरह अपने बच्चे की हर बात सुनती है, उसे सही-गलत के बारे में बताती है. उसके साथ हंसती-खेलती है और उसे हमेशा ख़ुश रखने की कोशिश करती है.
क्या कहती हैं सेलिब्रिटी मॉम जूही चावला
सेलिब्रिटी मॉम जूही चावला के अनुसार, “पहले के मुक़ाबले आज की मॉम अपने बच्चों के साथ ज़्यादा इंवॉल्व रहती है. बच्चा क्या कर रहा है, क्या सोच रहा है, क्या बनना चाहता है… इन सभी बातों की उसे जानकारी होती है. पहले की माएं बच्चों के बारे में इतना सब नहीं सोचती थीं. यदि मैं अपने बचपन की बात करूं, तो मुझे नहीं लगता कि मेरी मां को इस बात से कोई मतलब था कि मैं क्या पढ़ती हूं या पढ़ती भी हूं या नहीं?”

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वर्किंग मदर होने का गिल्ट नहीं
आज की मॉडर्न वुमन मां बनने के बाद भी अपना करियर जारी रखती है और उसे इस बात का कोई गिल्ट नहीं, क्योंकि वो जानती है कि वो अपने बच्चे को क्वालिटी टाइम दे रही है. बल्कि वर्किंग मॉम को बाहर की दुनिया का ज़्यादा अनुभव होता है इसलिए वो अपने बच्चे की परवरिश बदलते समय की ज़रूरतों के हिसाब से करती है.

वो जानती है रिश्ते निभाना
रिश्ते प्यार से सींचे जाते हैं. यदि आपके पास बहुत समय नहीं है, लेकिन आप फोन करके या कुछ समय साथ बिताकर यदि अपना प्यार जताते हैं, तो वो भी बहुत मायने रखता है. आज के सोशल नेटवर्किंग के दौर में मॉडर्न मॉम देश-विदेश में बसे अपने सभी रिश्तेदारों के टच में रहती हैं और उनके सुख-दुख में हमेशा उनके साथ देती हैं.

– कमला बडोनी

 

मदर्स डे स्पेशल- सेलिब्रिटी मदर्स के मदरहुड एक्सपीरियंस (Mother’s Day Special- Celebrity Mother’s And Motherhood Experience)

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वक़्त के साथ औरत की ज़िंदगी में ही नहीं, उसके मदरहुड के एक्सपीरियंस में भी बदलाव आया है. आज की ग्लोबल इंडियन वुमन फैमिली, मदरहुड, करियर, सोशल लाइफ के साथ-साथ अपनी ख़ूबसूरती, फिटनेस, हेल्थ को भी बहुत स्मार्टली मैनेज करती है. हम सबकी चहेती बॉलीवुड मदर्स किस तरह सेलिब्रेट करती हैं मदरहुड? आइए, जानते हैं.

 

रवीना टंडन- बच्चों की परवरिश सबसे ज़रूरी काम है…

मुझे आज भी याद है, जब मेरे बेटे का पहला दांत निकला था, तो हम दोनों इतने ख़ुश हुए थे कि हमारा बस चलता, तो उसके मुंह में कैमरा डालकर उसके दांत की फोटो खींच लेते. उस समय मुझे यह ख़्याल आया कि यदि मैं शूटिंग कर रही होती, तो इतना ख़ास पल कैसे देख पाती? वर्किंग मदर्स के लिए यही वक़्त मुश्किल भरा होता है, इसलिए मेरा मानना है कि बहुत ज़्यादा मजबूरी न हो, तो घर पर रहकर बच्चे की सही परवरिश को ही महत्व देना चाहिए.

माधुरी दीक्षित- बच्चों से मराठी में बात करती हूं…

मैं अपने दोनों बच्चों को स्कूल छोड़ने जाती हूं, उन्हें साथ बिठाकर होमवर्क करवाती हूं, वो सारे काम करती हूं, जो एक आम मां अपने बच्चों के लिए करती है. मैंने अपने बच्चों को गायत्री मंत्र सिखाया है और घर में मैैं उनसे मराठी में ही बात करती हूं. आज जब मैं अभिनय की दुनिया में लड़कियों को आगे बढ़ते देखती हूं, तो मुझे बहुत ख़ुशी होती है. लड़कियों के मामले में अब लोगों की सोच बदल रही है. मुझे आज भी याद है, जब मैंने फ़िल्मों में काम करने का मन बनाया, तो उस व़क़्त मेरे परिवारवाले (ख़ासतौर पर मेरे ननिहालवाले) इस बात के लिए राज़ी नहीं थे.

काजोल- मेरे बच्चे मुझे स्ट्रेस फ्री कर देते हैं…

मां बनने के बाद मेरी पूरी शख़्सियत ही बदल गई. पहले मुझे ग़ुस्सा बहुत आता था, पर अब मैंने अपने ग़ुस्से पर क़ाबू करना सीख लिया है. अब मैं वैसी नहीं रही, जैसी अपने करियर के शुरुआती दौर में थी. अब मैं चीज़ों को लाइटली लेने लगी हूं और कोई टेंशन हो भी, तो बच्चों के पास आकर सब छूमंतर हो जाता है. अब मेरे लिए तनाव दूर करने का सबसे अच्छा माध्यम है अपने बच्चों के साथ व़क़्त गुज़ारना. जब भी मैं उनके साथ होती हूं, तो वो मुझे पूरी तरह डीस्ट्रेस कर देते हैं.
वैसे तो मेरा फेवरेट हॉलीडे डेस्टिनेशन है लंदन, पर मां बनने के बाद ज़िंदगी में बहुत कुछ बदल गया है. अब मैं अपने बच्चों की पसंद के अनुसार ही हॉलीडे डेस्टिनेशन तय करती हूं. लंदन में बच्चों के साथ जाना थोड़ा मुश्किल है, इसलिए अब मैं डिज़नीलैंड व थीम पार्क में जाती हूं. वैसे भी अब मैं चाहे गोवा में रहूं, स्विट्ज़रलैंड में या फिर अपने बेडरूम में, यदि मेरे बच्चे मेरे साथ हैं, तो वही मेरी पसंदीदा जगह बन जाती है.

करिश्मा कपूर- हर औरत को मां बनना चाहिए…

मां बनना मेरा बेस्ट एक्सपीरियंस है. मुझे लगता है कि हर औरत को मां बनना चाहिए. किसी भी इंसान को दुनिया में लाने का काम केवल मां ही कर सकती है और यह बहुत ही स्पेशल होता है. अपने बच्चे के साथ समय बिताने और उसके सारे काम करने से अच्छा अनुभव और कुछ नहीं है.

सोनाली बेंद्रे- पैरेंटिंग टफ जॉब नहीं है…

अक्सर लोग कहते हैं कि आजकल के बच्चों की परवरिश बहुत मुश्किल हो गई है, उन्हें बहुत ज़्यादा एक्सपोज़र मिल रहा है, लेकिन ऐसा हर जनरेशन के साथ होता है. हमारे दादा-दादी, नाना-नानी भी हमारे बारे में यही सोचते थे. ये बदलाव हमेशा से होता रहा है, इसलिए मैं इस बात से घबराती नहीं. हां, बच्चों को किस समय कितना एक्सपोज़र मिलना चाहिए, इस पर पैरेंट्स को ध्यान देना ज़रूरी है.
हम लोगों को चीज़ें मिलती ही नहीं थीं, लेकिन आज के बच्चों को मटीरियलिस्टिक चीज़ें ही नहीं, नॉलेज भी ज़्यादा मिल रहा है और ये इंफॉर्मेशन उन्हें जितनी आसानी से मिल रही है, उतनी ही तेज़ी से वे उसे पिकअप भी कर रहे हैं. ऐसे में पैरेंट्स को लगातार अपने बच्चे पर ध्यान देना चाहिए.

जूही चावला- वक़्त के साथ बदली है पैरेंटिंग स्टाइल…

आजकल के पैरेंट्स अपने बच्चों के साथ बहुत ज़्यादा इंवॉल्व रहते हैं. उनका बच्चा क्या पढ़ता है? कैसे पढ़ता है? इन सारी बातों की जानकारी उन्हें रहती है. यदि मैं अपने बचपन की बात करूं, तो मुझे नहीं लगता कि मेरी मां को इस बात से कोई मतलब था? लेकिन आज समय के साथ पैरेंटिंग स्टाइल में भी बदलाव आया है. आज के पैरेंट्स काफ़ी प्रोटेक्टिव हो गए हैं. अपने बच्चों को अच्छी आदतें सिखाने के लिए मैं भी बात-बात में उन्हें नसीहत देती हूं, मैं अपने बच्चों के साथ ज़्यादा से ज़्यादा समय रहती हूं, ताकि मेरे बच्चों का बचपन मुझसे छूट न जाए. मैं उनसे जुड़ा एक भी पल मिस नहीं करना चाहती.

नीतू कपूर- बच्चों की कामयाबी से बड़ी ख़ुशी कोई नहीं…

अपने बच्चों को आगे बढ़ते देखने की ख़ुशी को शब्दों में बयां करना बहुत मुश्किल है. हर माता-पिता को इस दिन का इंतज़ार रहता है. ऋषि और मुझे भी बच्चों को सफल होते देखकर संतुष्टि मिलती है. सच बताऊं तो मेरे बच्चों ने मेरे सारे अरमान पूरे कर दिए. रिद्धिमा ने फैशन डिज़ाइनिंग को करियर के लिए चुना और जहां तक रणबीर का सवाल है, तो हमें बचपन से ही पता था कि वो स्टार बननेवाला है. उसे फिल्म और ऐक्टिंग का बचपन से ही शौक़ था. ऋषि ने रणबीर की पहली फिल्म ‘सांवरिया’ देखते समय एक सीन पर खड़े होकर ताली बजाते हुए कहा था कि मेरा बेटा अच्छा ऐक्टर है. वह मेरी ज़िंदगी का सबसे बड़ा दिन था.

मलाइका अरोड़ा- औरत हर रिश्ते को अच्छी तरह मैनेज करती है…

मैं नहीं समझ पाती कि लोगों को ऐसा क्यों लगता है कि ग्लैमर वर्ल्ड और परिवार में संतुलन नहीं बन सकता? काम, काम है, फिर चाहे वो किसी भी फील्ड से जुड़ा हो. मेरा मानना है कि ईश्‍वर ने औरत को मैनेजमेंट स्किल तोह़फे के रूप में दी है, इसलिए वो हर काम, हर रिश्ते को अच्छी तरह मैनेज कर लेती है, मदरहुड को भी.

श्‍वेता तिवारी- मैं अपने बच्चों को बेस्ट लाइफ देना चाहती हूं…

मेरे बचपन की यादें बहुत सुखद नहीं हैं. मैं एक मिडल क्लास, बल्कि लोअर मिडल क्लास फैमिली में पली-बढ़ी हूं. मेरे माता-पिता दोनों काम करते थे. बहुत छोटी उम्र से ही मैं ये महसूस करने लगी थी कि मां को घर और हमारी पढ़ाई का ख़र्च उठाने में बहुत मुश्किल होती है, इसलिए सातवीं क्लास से मैंने भी काम करना शुरू कर दिया. मैंने टयूशन लेने से लेकर डोर टु डोर सेल्स गर्ल का काम भी किया है. मैं छुट्टियों में इतना काम कर लेती थी कि मेरी पढ़ाई का ख़र्च निकल जाए. मुझे अपने बचपन से कोई शिकायत नहीं, लेकिन मैंने हमेशा यही कोशिश की है कि मेरी तरह मेरे बच्चों का बचपन न बीते. मैं उनकी हर ज़रूरत का पूरा ख़्याल रखती हूं.

स्मृति ईरानी- मातृत्व कामयाबी के आड़े नहीं आता…

मैं भारत के टेलीविज़न इतिहास में पहली महिला हूं, जिसने नौ महीने की प्रेग्नेंसी में टीवी पर एक टॉक शो किया. ज़्यादातर टॉक शोज़ में एंकर को ग्लैमरस रूप में प्रस्तुत किया जाता है, लेकिन मेरे साथ ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. मुझे ख़ुशी है कि उस वक़्त भी लोगों ने मुझे नहीं, बल्कि मेरे काम को देखा और उसकी तारीफ़ भी की. उस वक़्त ख़ुद पर ज़रूर फ़ख़्र हुआ कि मेरी प्रेग्नेंसी मेरे लिए किसी भी तरह से रुकावट नहीं बनी. ज़्यादातर वर्किंग वुमन से पूछा जाता है कि वो घर और करियर के बीच तालमेल कैसे बिठाती हैं? मुझे हैरानी होती है कि ये सवाल पुरुषों से क्यों नहीं पूछा जाता. इसका मतलब तो यही हुआ ना कि समाज मानता है कि पुरुष घर पर काम नहीं करता.

गौरी ख़ान- घर में स्टारडम जैसी कोई बात नहीं होती…

हमारे घर का माहौल बहुत ही कैजुअल है. हम अपने बच्चों की परवरिश वैसे ही कर रहे हैं जैसे आम घरों में होती है. जिस तरह सभी पैरेंट्स चाहते हैं कि उनके बच्चे अच्छे इंसान बनें, हम भी ऐसा ही चाहते हैं और इसके लिए कोशिश करते रहते हैं. शाहरुख़ जब भी काम से लौटते हैं, तो बच्चों के साथ ही अपना पूरा टाइम बिताते हैं. सच कहूं तो शाहरुख़ से अच्छा लाइफपार्टनर और फादर कोई हो ही नहीं सकता.

– कमला बडोनी

मदर्स डे स्पेशल- मां सदा दिल के क़रीब रहती है… (Mother’s Day Special)

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मां, ज़िंदगी जीने का हौसला देती है… मां, बच्चों की ख़ुशी के लिए अपनी ख़ुशी त्याग देती है… मां धरती पर ईश्‍वर का प्रतिरूप है. मां के प्रेम, त्याग, समर्पण, सहनशीलता और ताक़त को हम शब्दों में बांध नहीं सकते. लेकिन मां के प्रति सेलिब्रिटीज़ की भावनाओं को शब्दों में पिरोने की एक छोटी-सी कोशिश ज़रूर की है हमने.
शाहरुख ख़ान

मेरी मां ने अपनी प्यारी भाव-भंगिमाओं द्वारा मुझे एक्टिंग करना सिखाया था, लेकिन सबसे अहम् रहा उनका सिखाया ज़िंदगी का फ़लसफ़ा, जिसे मैं कभी नहीं भूल सकता. उन्होंने मुझे समझाया कि जीवन में कुछ भी परमानेंट नहीं है, इसलिए आज जो भी तुम्हारे पास है, उसे एंजॉय करो. आज वे नहीं हैं, पर मुझे हमेशा यूं लगता है कि वे यहीं मेरे बेहद क़रीब हैं. यह भी सच है कि वे मेरे आसपास हैं और मेरा हमेशा ख़्याल रखती हैं, वरना आज जो कुछ भी मैं हूं, उस मुक़ाम तक कभी नहीं पहुंच पाता. वे मेरी ख़्वाहिशों को पूरा करने में मेरे और भगवान के बीच एसटीडी फोन की तरह माध्यम रहीं, क्योंकि मेरे जीवन में ऐसा कुछ भी नहीं रहा, जिसे मैंने चाहा और मुझे न मिला. जब कभी मैं बहुत ख़ुश होता हूं, तो रोता हूं, क्योंकि मैं अपनी ख़ुशियां अपनी मां के साथ बांट जो नहीं सकता.

ऐश्‍वर्या राय बच्चन

मेरी मां मेरी ज़िंदगी, मेरे अस्तित्व की केंद्रबिंदु रही है. मैं जब कभी दुखी और परेशान हुई, उन्होंने मुझे संभाला और ज़िंदगी के प्रति मेरी सोच व नज़रिए को बदलने में भी मदद की. उन्होंने हमेशा ही मुझ पर अटूट विश्‍वास किया. मां ने मेरे टैलेंट को न केवल समझा-जाना, बल्कि उसे डेवलप करने के गुर भी सिखाए.

रणबीर कपूर

मेरे जीवन में मां ही ऐसी शख़्स हैं, जो मुझसे जुड़ी और होनेवाली हर बात को बख़ूबी जानती और समझती हैं. हम बरसों से मॉम की देखरेख में अनुशासन में रहे हैं. मज़ाक ही सही, पर मेरा तो यह मानना है कि यदि देश की कमान मॉम को दे दी जाए, तो जिस डेवलपमेंट में हमने बरसों लगा दिए, वे उन्हें कुछ सालों में करके दिखा देंगी. मॉम ने पूरे कपूर परिवार को अपने प्यार की डोर में बांधे रखा है. उन्होंने हमें अनुशासन से जीने और व़क्त पर भोजन और सभी कामों को करने की सीख बचपन से दी. उन्होंने कभी भी हमें सेलिब्रिटी के बच्चे होने का एहसास नहीं करवाया. वे ब्यूटीफुल हार्ट, ब्रेन और पर्सनैलिटी का ख़ूबसूरत संगम हैं.

प्रियंका चोपड़ा

चाहे मेरे जीवन में करियर को संवारने की बात हो या पर्सनल लाइफ में कुछ करने की. मां का मार्गदर्शन हमेशा मिलता रहा. मॉडलिंग, फिल्मी करियर, सिंगिंग यानी मैंने जीवन में जो कुछ किया, मां की सही और तर्कपूर्ण सलाह हमेशा मेरे विज़न को क्लीयर करती रहती थी. मॉडलिंग व एक्टिंग में मां की वजह से ही मैं कुछ बन पाई और क़ामयाब रही. मेरा तो यह मानना है कि मां हमारे लिए ईश्‍वर की अनमोल सौग़ात है.

रितिक रोशन

मैं अपनी मां की महानता और कुछ भी कर गुज़रने की क्षमता व साहस से बेहद प्रभावित हूं. वे मेरे जीवन में उन लोगों में से एक हैं, जिन्होंने मुझे नारी के संघर्ष और महत्व को समझने में मदद की.

कटरीना कैफ़

मैं अपनी क़ामयाबी को मेरी मां द्वारा किए गए अच्छे कार्यों के प्रतिफल के रूप में देखती हूं. आज मैं जिस मुक़ाम पर हूं, उसमें उनकी मेहनत व हिम्मत का काफ़ी योगदान रहा है. मां ने मुझे जो संस्कार दिए, वे भले ही इंडियन कल्चर के अनुरूप न हों, पर उन्होंने जो कुछ सिखाया है, वो यहां भी मेरी क़ामयाबी में मददगार रहा है. मेरे ख़्याल से मां की सीख ग्लोबल होती है. आप कहीं भी चले जाएं, आपकी हिफ़ाज़त करती है. मैं अपनी मां को लेकर प्राउड फील करती हूं. उन्होंने मुझे स्ट्रॉन्ग बनाया और ऐसी परवरिश दी, जिसके बलबूते मैंने विदेश से यहां आकर ख़ुद की मेहनत-लगन से अपना एक अलग मुक़ाम बनाया.

सलमान ख़ान

मां का ख़्याल आते ही मैं एक सुकून और मह़फूज़ ख़याल से भर उठता हूं. मां का साथ और उनकी ममता मेरे मन को शांति और राहत का एहसास कराती है. मैं अपनी मां का शुक्रगुज़ार हूं, जिन्होंने मुझे अच्छे संस्कार और मानवीय मूल्यों की कद्र करना सिखाया. हम मां की तुलना किसी से नहीं कर सकते. मां दुनिया में सबसे अलग और अनमोल है, इस एहसास को हर कोई जीता है.

सोनम कपूर

मेरे अभिनय और काम को लेकर मॉम हमेशा प्रेरित करती रहती हैं. मां का नाम सुनते ही एक ऐसी स्ट्रॉन्ग व इंडिपेंडेंड हाउसवाइफ मेरी नज़रों के सामने आ जाती है, जिसने अपना करियर अपने बच्चों को बड़ा करने व फैमिली को मज़बूत करने में बनाया. मां का यह इन्वेस्टमेंट था, जिसका रिटर्न अनमोल है. मैं उन्हें बेस्ट करियर वुमन मानती हूं. उन्होंने घर को घर बनाया और हमें बेहतर इंसान बनाने में अपनी पूरी एनर्जी लगा दी.

जॉन अब्राहम

मेरी मॉम बेहद इमोशनल और प्यारी हैं. उन्होंने बचपन से लेकर आज तक मुझे कई ऐसी बातों के बारे में बताया और समझाया, जो आगे चलकर मेरे लिए क़ामयाबी की वजह बनी. वैसे मैं कभी भी अपनी मां के लिए उनका होनहार व आज्ञाकारी बेटा जैसा नहीं बन पाया. हमारे बीच कई बातों को लेकर प्यारभरी तकरार होती रहती है. हम किसी बात को लेकर बहुत बहस भी करते हैं. वैसे मॉम की कुकिंग का मैं फैन हूं. उनकी बनाई टेस्टी करेले की सब्ज़ी और बैंगन का भरता शायद ही कोई बना सके. मेरी मॉम इतनी भावुक हैं कि मेरी फिल्म आई, यू और मैं व मद्रास कैफे को देख वे बहुत रोईं. मॉम का प्यार भरा भावुक मन अक्सर मेरे दिल को छू जाता है.

सोनाक्षी सिन्हा

मेरी मां मेरी प्रशंसक होने के साथ-साथ मेरी सबसे बड़ी आलोचक भी रही हैं. मेरे काम के प्रति अच्छी-बुरी सभी बातों से जुड़ी उनकी सलाह को मैं पूरी गंभीरता के साथ लेती हूं, क्योंकि मैं यह अच्छी तरह से जानती हूं कि वे ही ऐसी शख़्स हैं, जो हमेशा मेरी भलाई के बारे में सोचती हैं.

अर्जुन रामपाल

मैं अपनी मां को दुनियाभर की सैर कराना चाहता हूं, क्योंकि उन्हें ट्रैवेल करना पसंद है. मैं उन्हें अक्सर कहता हूं कि यदि मेरा अगला जन्म हुआ, तो मैं उनकी कोख से ही पैदा होना चाहूंगा. वे दुनिया की सबसे ब्यूटीफुल और बेस्ट मॉम हैं.

सोहा अली ख़ान

अम्मी ने हम तीनों भाई-बहनों की परवरिश बहुत लाड़-प्यार से की है. वे हमेशा ही समय के साथ चलती रही हैं. उनके संपर्क में जो भी आता है, प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाता. मैंने उनसे ज़िंदगी का ऐसा फ़लसफ़ा सीखा है, जो ज़िंदगी में किसी भी ग्रूमिंग स्कूल या एक्टिंग स्कूल में नहीं सिखाया जाता. मां एक कंप्लीट स्कूल हैं.

अभिषेक बच्चन

मैं मां के रिश्ते को शब्दों में बयां नहीं कर सकता. बहुत सारी ऐसी बातें हैं, जिन्हें मैं मां के सहारे ही सुलझा पाया हूं. मां ने मेरे व्यक्तित्व में हमारी संस्कृति व परंपराओं को कुछ इस तरह बुना है कि मैं कुछ ग़लत करूं, इससे पहले ही मेरी आत्मा मुझे ऐसा करने से रोक देती है. मैं मां को हमेशा ख़ुश देखने की ख़्वाहिश रखता हूं.

विवियान डिसेना

मेरी मां ने अब तक मेरे लिए जो कुछ भी किया है, उन सभी के लिए मैं उन्हें धन्यवाद देना चाहूंगा. ख़ास ‘मदर्स डे’ पर मैं उन्हें इस बात का एहसास करना चाहता हूं कि व़क्त बीतने के साथ-साथ वे मेरे और भी क़रीब हो गई हैं. मैं उनके प्यार और समर्पण का हमेशा कर्ज़दार रहूंगा. मेरी मां के सहयोग और विश्‍वास के कारण ही आज मैं अभिनय के क्षेत्र में हूं. उनका हमेशा ही मुझ पर अटूट विश्‍वास रहा है, जो मुझे ख़ुशी और संतुष्टि का एहसास कराता है.

दीपिका सैमसन

दुनियाभर में मां प्यार, ख़ुशी और ममता का प्रतिरूप है. परिवार को जोड़ने और आपसी रिश्तों को मज़बूती प्रदान करने का आधार हैं मां. बचपन से आज तक मैंने ऐसा बहुत कुछ देखा है, जब मेरी मां ने बिना किसी शिकायत के हमारी ख़ुशियों और भलाई के लिए बहुत कुछ किया है. मां अपने सभी बच्चों को हमेशा ख़ुश देखना चाहती हैं और हम उनकी इस भावना और समर्पित सेवा के लिए धन्यवाद भी नहीं कह सकते, क्योंकि मां की ममता अनमोल है. सीरियल में मां का रोल निभाते हुए ही मुझे इस बात का भी एहसास हुआ कि मां का अपने बच्चे के साथ कितना मज़बूत व प्यारा बंधन होता है और उसके लिए वो कितनी स्पेशल भी रहती है. मैं तो यही दुआ करती हूं कि दुनिया की सभी मांओं को उनके हिस्से की सारी ख़ुशियां मिलें.

सिद्धार्थ शुक्ला

मेरी मां ने मेरी हर परेशानी और कठिन परिस्थितियों में मेरा साथ दिया है. ऐसे में जब मेरे अपने मुझे ममाज़ बॉय कहते हैं, तो मैं बुरा नहीं मानता. बल्कि मेरी मां ने जो कुछ मेरे लिए किया है, उन सबके बारे में सोचता हूं, तो उनके प्रति गर्व महसूस करता हूं. ‘मदर्स डे’ पर मैं दुनियाभर की सभी मांओं को ‘हैप्पी मदर्स डे’ कहते हुए अपनी शुभकामनाएं देता हूं.

अविका गौर

हम बच्चे जो कुछ भी चाहते हैं, उसे मां एक सहेली, मार्गदर्शक, रक्षक के रूप में पूरा करती रहती हैं. वो हमारी ज़िंदगी को संवारने के लिए कई बार अपनी ज़िंदगी के साथ भी जाने कितने समझौते करती चली जाती हैं. मां के प्यार, त्याग और स्नेह का कोई मोल नहीं है.

– ऊषा गुप्ता

HAPPY MOTHER’S DAY! प्यारी मां को डेडिकेट करें बॉलीवुड के ये 10 गाने (Top 10 Bollywood Songs Dedicated To All Lovely Moms)

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हर किसी के लिए ख़ास होती है मां. बच्चे की सबसे अच्छी दोस्त, टीचर, गाइड मां ही होती है. बिज़ी लाइफ के चलते कई बार हम उन्हें थैंक्यू बोलना भूल जाते हैं. आइए, मदर्स डे के इस ख़ास दिन को सेलिब्रेट करते हैं बॉलीवुड में मां की ममता पर बने 10 गानों के साथ.

मेरी सहेली की ओर से हैप्पी मदर्स डे. देखें ये गाने.

फिल्म- राजा और रंक

फिल्म- दादी मां

फिल्म- एबीसीडी 2

फिल्म- तारे ज़मीन पर

फिल्म- दसविदानिया

फिल्म- रंग दे बसंती

फिल्म- छोटा भाई

फिल्म- फटा पोस्टर निकला हीरो

फिल्म- यारियां

फिल्म- शूटआउट एट लोखंडवाला

 

मदर्स डे पर टीवी स्टार्स ने कहा- मां तुझे सलाम! (Mother’s day Special: TV folks talk emotionally about their mother!)

मदर्स डे के ख़ास मौके पर टीवी स्टार्स ने मां के लिए अपना प्यार जताया और दिल से कहा, मां तुझे सलाम!

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रश्मि देसाई: मेरी मां टीचर हैं. उन्होंने मुझे अच्छे संस्कार के साथ ही डिसिप्लिन भी सिखाया, जो आज भी मेरे बहुत काम आता है. सभी बच्चों को अनुशासन का पालन ज़रूर करना चाहिए, इससे वो हमेशा जीवन में आगे ही बढ़ेंगे. बचपन में मैं बहुत शर्मीली थी, लेकिन स्कूल में एक्स्ट्रा करिक्युलर एक्टिविटीज़ में हिस्सा लेने के बाद मेरी हिचक दूर हो गई. मां ने मुझे सिखया कि मेहनत ही वो जादू की छड़ी है, जो आपको कभी फेल नहीं होने देती. मां मेरी लाइफलाइन हैं. मैं उनके बिना ज़िंदगी की कल्पना भी नहीं कर सकती. मेरे लिए उनकी ख़ुशी से बढ़कर और कोई चीज़ नहीं है. उनकी पॉज़िटिविटी मुझे हमेशा आगे बढ़ने का हौसला देती है. ज़िंदगी के हर अच्छे-बुरे दौर में वो हमेशा मेरे साथ रही हैं.

1 Rashami Desai with mother Rasila Desai

शरद मल्होत्रा: मैं कलकत्ता में पला-बढ़ा हूं. मेरी मां ने मुझे बहुत अच्छी परवरिश दी है. उन्होंने हमें कभी किसी चीज़ के लिए मना नहीं किया, लेकिन मुझे और मेरी बहन को पूरे अनुशासन में भी रखा. मैं मुंबई में रहता हूं, लेकिन ऐसा एक भी दिन नहीं गुजरता जब मेरी मां से बात नहीं होती. मेरे कुछ कहने से पहले ही मां मेरे मन की बात समझ लेती हैं. ज़ी सिनेस्टार की खोज में हिस्सा लेने के लिए उन्होंने ही मुझे प्रोत्साहित किया था. मुझसे इतनी दूर रहते हुए भी मां को यही चिंता रहती है कि मैंने ठीक से खाया कि नहीं. मां हर तीन महीने में मुझसे मिलने मुंबई आती हैं. मैं अपनी मां से हर बात शेयर कर सकता हूं. वो मेरा सपोर्ट सिस्टम हैं. मैं जब भी निराश होता हूं, तो मां मुझे उस सिच्युएशन का पॉज़िटिव पहलू दिखाती हैं.

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वाहबिज़ दोराबजी: मुझे इस बात का फख़्र है कि मैं फिरोज़ा दोराबजी की बेटी हूं. वो मेरी दोस्त भी हैं, बहन भी और राज़दार भी. मां की सबसे बड़ी ख़ूबी है कि वो जितनी ख़ूबसूरत हैं, उतनी ही पॉज़िटिव और ज़िंदादिल भी हैं. आज मैं जो कुछ भी हूं अपनी मां की वजह से हूं. उनके दिए संस्कार हमेशा मेरे साथ रहेंगे. ग्लैमर इंडस्ट्री में रहते हुए भी मैं एक फैमिली पर्सन हूं और अपने परिवार के बिना नहीं रह सकती. सच कहूं, तो मैं अपनी मां की परछाईं हूं.

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मृणाल जैन: मैं मां के बिना अपनी ज़िंदगी की कल्पना भी नहीं कर सकता. वो मेरे मन की हर बात बिना कहे ही समझ जाती हैं. मारवाड़ी फैमिली में एक्टिंग में करियर बनाना आसान नहीं था, लेकिन मेरी मां ने पापा को मनाया और मुझे मेरा मनपसंद करियर चुनने में मदद की. मां मेरी अच्छाई-बुराई सब जानती हैं, वो मेरा चेहरा पढ़ सकती हैं, मेरे झूठ पकड़ सकती हैं. पापा ऑफिस जाते हैं इसलिए बच्चे अपना ज़्यादा समय मां के साथ ही बिताते हैं इसलिए मां से एक अलग ही बॉन्डिंग हो जाती है. वो मुझे आज भी अक्सर अपने हाथों से खिलाती हैं. मां जैसा दुनिया में और कोई हो ही नहीं सकता.

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इंटरनेशनली देसी (Internationally Desi)

Internationally Desi

मदर्स डे के मौ़के पर बी. डी. सोमानी इंस्टिट्यूट ऑफ आर्ट एंड फैशन टेक्नोलॉजी के एन्युअल फैशन शो ‘इंटरनेशनली देसी’ में फैशन के ख़ूबसूरत रंग देखने को मिले. इस एन्युअल फैशन शो, अवॉर्ड सेरेमनी और अवॉर्ड फेलिसिटेशन के मौ़के पर कई सेलिब्रिटीज़ ने रैम्प पर कैट वॉक किया.
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