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बच्चों की अच्छी परवरिश के लिए जरुरी है कि पैरेंट्स होने के नाते हम अपने बच्चों की आदतों को समझें और उनकी गतिविधियों पर नज़र रखें. इसका कारण है कि बच्चे अपने पैरेंट्स की सभी अच्छी-बुरी आदतों को ग्रहण करते हैं. कई बार बच्चे पैरेंट्स की अच्छी आदतों को तो नहीं, बल्कि बुरी आदतों को जरुर फॉलो करते हैं, जिसका असर आगे चलकर उनके जीवन पर पड़ता है. आज हम पैरेंट्स की ऐसी कुछ बुरी आदतों के बारे में बता रहें हैं, जिन्हें बच्चों के अच्छे भविष्य के लिए छोड़ना आवश्यक हैं-

बच्चों के विकास के लिए आवश्यक है कि उन्हें एक्सपोज़र मिले, ताकि उन्हें अपनी योग्यता और कौशल दिखाने का मौका मिले. बच्चे अपने आसपास की सभी चीज़ों को ग्रहण करते हैं. यहां तक कि पैरेंट्स की आदतों को भी. इसलिए पैरेंट्स को अपनी उन आदतों के बारे में बहुत सावधान रहने की आवश्यकता है. जिन्हें वे अपने दैनिक जीवन में शामिल करते हैं. अत: पैरेंट्स को अपनी कुछ ऐसी आदतें छोड़ देनी चाहिए, जो बच्चों की परवरिश में रुकावट बनें.

  1. टेलीविज़न देखने का समय 
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पैरेंट्स हों या बच्चे- सभी के लिए टीवी टाइम एक निश्चित समय सीमा में होना चाहिए. अगर पैरेंट्स ही कई-कई घंटों तक स्क्रीन के सामने बैठे रहेंगे, तो बच्चे भी ऐसा ही करेंगे. बच्चे को मनोरंजन का एकमात्र जरिया टीवी ही नज़र आता है, जिसके कारण उन्हें इलेक्ट्रॉनिक गैज़ेट और टेक्नोलॉजी की  बुरी लत लग जाती है. अध्ययनों से यह बात सामने आई है कि बच्चों में टेक्नोलॉजी की लत बड़ी तेज़ी से बढ़ रही है. इसका बुरा असर बच्चों के बौद्धिक विकास पर पड़ सकता है और उनमें पढ़ाई और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं. इसलिए बच्चे के लिए स्क्रीन टाइम तय करने से पहले पैरेंट्स अपने लिए भी टीवी की लिमिट निर्धारित करें.

2. ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाना

साइकोलोजिस्ट के अनुसार, ज़्यादातर पैरेंट्स में यह बुरी आदत होती है कि हमेशा बच्चों पर चिल्लाते रहते हैं. दरअसल, बच्चों पर छोटी-छोटी बात पर चिल्लाना बिलकुल सही नहीं है. पैरेंट्स भूल जाते हैं कि उनके चिल्लाने की बुरी आदत का असर बच्चों पर भी पड़ता है और धीरे-धीरे उनमें भी यही आदत पनपने लगती है. कुछ बच्चे तो एंग्जायटी और डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं. इतना ही नहीं पैरेंट्स की इस आदत से पैरेंट्स-बच्चों के रिश्तों कड़वाहट आने लगती है. बेहतर होगा कि पैरेंट्स अपने पर नियंत्रण रखें. छोटी गलतियों पर बच्चे पर चिल्लाने की बजाय उसे प्यार से समझाएं.

3. तुलना करना

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चाइल्डहुड डेवलपमेंट स्पेशलिस्ट का मानना है कि दूसरे बच्चों के साथ अपने बच्चे की तुलना करना- पैरेंट्स की सबसे बुरी आदत है. सबसे पहले तो पैरेंट्स अपनी इस गंदी आदत को छोड़ें और कभी भी दूसरे बच्चों के साथ अपने बच्चे की तुलना करने की कोशिश न करें. इसका बुरा असर बच्चों के विकास और वृद्धि पर पड़ता है. पैरेंट्स के ऐसे व्यवहार से बच्चे का आत्मविश्वास डगमगाने लगता है और वो खुद को दूसरों से कम आंकने लगता है. अच्छा तो यही होगा कि पैरेंट्स बच्चों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें. उनकी खूबियों पर ध्यान केंद्रित करें और उन्हें सराहें.

4. मारपीट

अनेक चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, हिंसा का कोई भी रूप यहां तक ​​कि सबसे छोटा थप्पड़, खतरनाक तरीकों से दर्दनाक हो सकता है, विशेष रूप से बच्चों में. भारतीय समाज में पैरेंट्स अक्सर इस तरह की गलती करते है. छोटी-छोटी बातों पर पैरेंट्स बच्चों पर हाथ उठाते हैं, उनके साथ मारपीट करते हैं. पैरेंट्स का बच्चों को समझाने का यह तरीक़ा बिलकुल सही नहीं है. बार-बार उन पर हाथ उठाने से बच्चे विद्रोही बन जाते हैं.

5. कम सलाह और ज़्यादा मोटिवेशन

अधिकतर पैरेंट्स की आदत होती है कि वे बच्चों को हमेशा यही बताते और सिखाते रहते हैं कि उसे क्या करना है और क्या नहीं करना है? बाल मनोवैज्ञानिकों  के अनुसार बच्चों को सलाह जरूर दें, लेकिन एक सीमा तक. आपकी इच्छाओं को उन पर थोपें नहीं. उन्हें काम करने के लिए प्रोत्साहित. बच्चे प्रोत्साहित तभी होंगे, जब पैरेंट्स ख़ुद पहला क़दम उठाएंगे.

6. गॉसिप करना

कुछ पैरेंट्स को गॉसिप करने की बुरी आदत होती है. उनकी यही आदत आगे चलकर बच्चों में पनपने है और बच्चे भी अपने दोस्तों के साथ गॉसिप करना शुरू कर देते हैं जो कि उनकी उम्र के हिसाब से गलत है.

7. बॉडी शेमिंग

बच्चों में डिप्रेशन, एंग्जायटी और आत्मविश्वास की कमी होने का एक कारण बॉडी शेमिंग भी है. बॉडी शेमिंग यानी बच्चे का बहुत अधिक दुबला-पतला होना या फिर बहुत अधिक मोटा होना. यदि आपका बच्चा भी बहुत अधिक दुबला या मोटा है, तो उसे इसके लिए शर्मिंदा न करें. पैरेंट्स बच्चे की खामियों को इंगित करने की बजाय उनके सकारात्मक गुणों पर जोर दें.

   8. अपमानित करना

बच्चों के विकास के लिए जैसे प्रोत्साहित करना जरुरी है, वैसे ही उनको अपशब्द बोलना, उनका अपमान करना बच्चों के विकास में बाधा उत्पन्न करते हैं. मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, बच्चों को डिग्रडिंग यानी अपमानित करना शारीरिक शोषण के तहत नहीं आता, लेकिन इसे मानसिक और भावनात्मक शोषण के रूप में वर्गीकृत किया जाता है और यह बच्चे के मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक दोनों तरीक़े से बच्चे के जीवन पर बुरा असर डालता है. इसलिए जरुरी है कि बच्चे को सामाजिक रूप से दूसरे लोगों से जुड़ने के लिए प्रेरित करें, जिससे उनमें आत्मविश्वास पनपे.

9. धूम्रपान

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 कुछ पैरेंट्स की आदत होती कि वे बच्चों के सामने धूम्रपान करने करने से ज़रा भी परहेज़ नहीं करते. सेकंड हैंड स्मोकिंग से बच्चों में स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है. छोटे बच्चों के फेफड़े अभी पूरी तरह से विकसित नहीं होते हैं और धूम्रपान के कारण अविकसित फेफड़े कमजोर और बीमारियों का कारण बनते हैं. इसके अलावा जैसे-जैसे बच्चे होने लगते हैं, तो चोरी छिपे वे भी पैरेंट्स की इस आदत को फॉलो करने लगते हैं.

10.शराब

 पैरेंट्स बच्चों के लिए रोल मॉडल होते हैं. इसलिए जरूरी है कि पैरेंट्स उनके सामने शराब पीने से बचें. कुछ पैरेंट्स तो अल्कोहल का सेवन करने के बाद बच्चों के अश्लील और अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं. घर में झगड़ा करते हैं, जिसका बुरा असर बच्चे में मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है.

पैरेंट्स बच्चों के रोल मॉडल होते है. है. हर बच्चा बड़ा होकर अपने माता-पिता के जैसा ही बनना चाहता है. यही वजह है कि बच्चे पैरेंट्स की हर अच्छी-बुरी आदत की नकल करते हैं. बेहतर होगा कि बच्चों की परवरिश करते समय पेरेंट्स अपनी बुरी आदतों को सुधारें. अगर जरुरत पड़ें, तो मनोवैज्ञानिक से सलाह-मशविरा भी करें.

– देवांश शर्मा

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विजयनगर राज्य के एक गांव में रामैया नाम का व्यक्ति रहता था. गांव के सभी लोग उसे मनहूस मानते थे. उनका मानना था कि अगर सुबह उठकर किसी ने सबसे पहले रामैया का चेहरा देख लिया, तो उसका पूरा दिन ख़राब गुजरता है और पूरे दिन भोजन नसीब नहीं होता. रामैया इस बात से बेहद दुखी और आहत रहता था, क्योंकि कोई उसका सामना नहीं करना चाहता था.

जब यह बात महाराज कृष्णदेव राय तक पहुँची, तो उन्होंने निर्णय लिया कि इसकी वास्तविकता वो खुद जानने की कोशिश करेंगे. इसलिए रामैया को राजमहल बुलाया गया, उसको खाना-पीना खिलाकर महाराज के कक्ष के सामने वाले कक्ष में उसके रहने की व्यवस्था की गई. अगली सुबह महाराज कृष्णदेव रामैया के कक्ष में गए और उसका चेहरा देखा, क्योंकि अब महाराज को देखना था कि उनका दिन कैसा गुज़रता है और क्या वाक़ई रामैया मनहूस है?

इसके बाद महाराज भोजन के लिए बैठ गए लेकिन जैसे ही उन्होंने भोजन की तरफ़ हाथ बढ़ाया उन्हें अचानक किसी आवश्यक मंत्रणा हेतु दरबार में जाना पड़ा, तो वे बिना भोजन करे ही दरबार चले गए. अपना पूरे दिन का काम निपटाकर महाराज कृष्णदेव राय को ज़ोरों की भूख लग आई थी. जब उन्हें भोजन परोसा गया, तो उन्होंने देखा कि उनके भोजन पर मक्खी बैठी हुई है तो उनको खाना छोड़ना पड़ा और अब उनकी भूख भी मर चुकी थी इसलिए वो बिना भोजन किए ही अपने शयन कक्ष चले गए और सो गए.

महाराज को विश्वास हो गया कि रामैया मनहूस है और उन्होंने क्रोध में आकर उसे फांसी पर चढ़ा देने का आदेश दे दिया. ये जब रामैया को सैनिक फांसी पर लटकाने के लिए ले जा रहे थे तो उनका सामना तेनालीराम से हुआ और उन्होंने पूरा माजरा समझकर रामैया के कान में कुछ कहा.

फांसीगृह पहुंचने के बाद सैनिकों ने रामैया से उसकी अंतिम इच्छा पूछी. रामैया ने कहा कि मैं महाराज को एक संदेश भिजवाना चाहता हूं और फिर एक सैनिक द्वारा वह संदेश महाराज तक पहुंचाया गया.

Tenali Rama Story

इस संदेश को सुनकर महाराज सकते में आ गए क्योंकि संदेश इस प्रकार था- महाराज, सबका मानना है और अब आपको भी विश्वास हो चला है कि सुबह सबसे पहले मेरा चेहरा देखने से किसी को पूरे दिन भोजन नसीब नहीं होता, लेकिन महाराज मेरी अंतिम इच्छा ये है कि मैं पूरी जनता के सामने ये बताना चाहता हूं कि मेरा चेहरा देखने के बाद तो महाराज को सिर्फ़ भोजन नहीं मिला लेकिन मैंने तो सुबह सबसे पहले महाराज आपका मुंह देखा और उसको देखने पर तो मुझे जीवन से ही हाथ धोना पड़ रहा है. बताइए ऐसे में कौन ज़्यादा मनहूस हुआ?

संदेश सुनकर महाराज को अपनी अंधविश्वासी सोच पर शर्म आई और उनको लगा कि यदि ये संदेश जनता के सामने कहा गया तो क्या होगा? उन्होंने सैनिकों से कहकर रामैया को बुलवाया और पूछा कि उसे ऐसा संदेश भेजने का परामर्श किसने दिया था?

रामैया ने तेनालीराम का नाम लिया. महाराज तेनालीराम की बुद्धिमत्ता से बहुत प्रसन्न हुए. उन्होंने रमैया की फांसी की सज़ा निरस्त कर दी और तेनालीराम को पुरुस्कृत किया, क्योंकि उसकी वजह से ही ये अंधविश्वास का पर्दा उनकी आंखों पर से हटा और बेक़सूर रामैया के प्राण भी बच पाए!

सीख: अंधविश्वास से दूर रहना चाहिए वर्ना उसके चलते निर्दोष और बेक़सूर को सज़ा मिलती है!

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Akbar Birbal Ki Khaniya
सौजन्य: lets-inspire.com

अकबर-बीरबल कथा: पूर्णिमा का चांद (Akbar-Birbal Story: poornima Ka Chand)

एक बार बीरबल फारस देश के राजा के निमंत्रण पर उनके देश गए हुए थे. उनके सम्मान दावत का आयोजन किया गयाथा और अनेक उपहार दिए गए थे. अपने देश लौटने की पूर्व संध्या पर एक अमीर व्यक्ति ने पूछा कि वह कैसे अपने राजाकी फारस के राजा से तुलना करेंगे?

बीरबल ने कहा, “आपके राजा पूर्णिमा के चांद जैसे हैं. हालांकि हमारे राजा दूज के चंद्रमा के समान हैं.”

यह सुन फारसी बहुत खुश थे, लेकिन जब बीरबल घर गए, तो उन्होंने पाया कि सम्राट अकबर बहुत गुस्से में थे.

अकबर ने गुस्से में कहातुम अपने राजा को कैसे कमजोर बता सकते हो.”  तुम एक गद्दार हो !” बीरबल ने कहा, “नहीं, महाराज मैंने आपको कमज़ोर नहीं बताया है.

दरसल, पूर्णिमा का चांद कम हो जाता है और गायब हो जाता है, जबकि दूज के चांद में शक्ति बढ़ती है.

मैं वास्तव में दुनिया को बताता हूं कि दिन प्रतिदिन आपकी शक्ति बढ़ रही है, जबकि फारस के राजा का पतन हो रहा है.”

अकबर ने बीरबल की बुद्धिमत्ता का फिर लोहा माना. उनकी बात का असली अर्थ समझकर संतोष व्यक्त किया औरबीरबल का गर्मजोशी से स्वागत किया.

सीख: शब्दों से खेलकर कैसे गूढ़ अर्थ में अपनी बात भी कही जा सकती है और समानेवाले को नाराज़ भी नहीं किया गयायह कला सीखना ज़रूरी है.

हमारी ज़िंदगी (Life) में कई बार ऐसे मौ़के आते हैं, जब हमारे लिए निर्णय लेना मुश्किल हो जाता है. हम चाहकर भी समझ नहीं पाते कि अब क्या करें. ऐसी स्थिति में दोराहे (Crossroads) पर खड़ी ज़िंदगी को कैसे आगे बढ़ाएं? ज़िंदगी में जब निर्णय लेना मुश्किल हो जाए, तो ऐसी स्थिति से कैसे उबरें, दोराहे पर खड़ी ज़िंदगी को आगे बढ़ाने के कुछ आसान रास्ते बता रही हैं काउंसलिंग सायकोलॉजिस्ट डॉ. माधवी सेठ (Psychologist Dr. Madhavi Seth). डॉ. माधवी के अनुसार, इस स्थिति को सायकोलॉजी में कॉन्फ्लिक्ट कहते हैं. मॉडर्न सोशल सायकोलॉजी के फादर कहे जानेवाले कर्ट लुइन, जो एक सोशल सायकोलॉजिस्ट हैं, उन्होंने कॉन्फ्लिक्ट थ्योरी पर गहन अध्ययन किया है. कर्ट लुइन का कहना है कि कॉन्फ्लिक्ट हर किसी की ज़िंदगी में होते हैं. आप उनसे बच तो नहीं सकते, लेकिन सही फैसला लेकर या बीच का रास्ता निकालकर आप इन कॉन्फ्लिक्ट्स से बाहर ज़रूर निकल सकते हैं. माधवी सेठ से हमने दोराहे पर खड़ी ज़िंदगी से जुड़ी कुछ स्थितियां शेयर कीं, जिनका हल उन्होंने कुछ इस तरह बताया.

Crossroads In Life

1) समस्या: मेरी शादी को आठ साल हो गए हैं, हमारे दो बच्चे हैं. दो साल पहले तक तो सब ठीक था, लेकिन दो साल से मेरे पति का अपने ऑफिस की कलीग से अफेयर चल रहा है. मेरे पति कहते हैं कि अब वो स़िर्फ उसे ही प्यार करते हैं, उन्हें अब मुझमें कोई दिलचस्पी नहीं है. वो मुझसे तलाक़ चाहते हैं, लेकिन मैं उन्हें तलाक़ देकर आज़ाद नहीं घूमने देना चाहती. मेरे सास-ससुर मुझे बहुत प्यार करते हैं, लेकिन पति उनकी भी नहीं सुनते. सास-ससुर बच्चों के भविष्य के लिए चुपचाप सब कुछ सहने को कहते हैं, लेकिन मैं ये बात सहन नहीं कर पा रही हूं.
समाधान: आपकी जगह कोई भी महिला होती, तो वह पति का ऐसा व्यवहार सहन नहीं कर पाती. आप इस बारे में पति और सास-ससुर से खुलकर बात करें, उनसे बच्चों के भविष्य के बारे में डिस्कस करें. हो सके तो उस महिला से भी मिलें, जिससे पति का अफेयर चल रहा है. अगर ऐसा करने से स्थितियां सुधरती हैं, तो ठीक है, लेकिन इतना करने के बाद भी यदि आपके पति को आपका और बच्चों का ख़्याल नहीं आता, तो समझ लीजिए कि वो अपने नए रिश्ते में बहुत आगे निकल गए हैं. ऐसे में साथ रहने का कोई मतलब नहीं. आप एक बेवफ़ा इंसान के साथ ऐसे कितने दिनों तक एक छत के नीचे रह सकेंगी. बेहतर होगा कि आप अपने और बच्चों के भविष्य के बारे में सोचें और ज़िंदगी में आगे बढ़ें.

2) समस्या: मेरा बेटा एक रिलेशनशिप में नहीं रहता. वो कहता है कि मैं एक लड़की को बहुत दिनों तक डेट नहीं कर सकता. उसका बार-बार ब्रेकअप होता रहता है और उसे इसका दुख भी नहीं होता.
समाधान: आजकल के युवा रिलेशनशिप मेंटेनेंस की परवाह नहीं करते. ऐसी हरकत को इमोशनल डिनायल भी कह सकते हैं. ऐसे युवा भले ही अपने ब्रेकअप से दुखी हुए हों, लेकिन ये बात दूसरों पर ज़ाहिर नहीं होने देते, हर समय कूल दिखने की कोशिश करते हैं. जो युवा अपने इमोशन को दबा देते हैं, उन्हें ज़ाहिर नहीं करते, आगे चलकर वो डिप्रेशन के शिकार तक हो सकते हैं. कई बार ऐसे लोग आगे चलकर भावनाशून्य भी हो जाते हैं यानी उन पर किसी भी भावना का कोई असर नहीं होता, इसलिए बच्चों को अपनी भावनाएं स्वीकार करना सिखाएं, वरना आगे चलकर उन्हें रिलेशनशिप में बहुत द़िक्क़तें आ सकती हैं.

3) समस्या: मेरी शादी को पांच साल हो गए हैं और हमारा तीन साल का बेटा है. मेरे पति बिना ग़लती के बात-बात पर मुझ पर हाथ उठाते हैं और सास-ससुर भी उनका ही साथ देते हैं. मायके में शिकायत की, तो वो भी कहते हैं कि घर बचाने और बच्चे की ख़ातिर सहन कर लो, वरना तुम्हें कौन पालेगा. लेकिन मुझसे बार-बार ये बेइज़्ज़ती सहन नहीं होती.
समाधान: पति के हाथों बार-बार बिना ग़लती के मार खाना बहुत अपमानजनक है. आप कमाती नहीं हैं, तो इसका ये मतलब नहीं है कि आपकी कोई इज़्ज़त नहीं है. सबसे पहले तो आप स्वावलंबी बनने के लिए कोई काम शुरू कीजिए, इससे आपका आत्मविश्‍वास बढ़ेगा और आपके मन से अपने और बच्चे के भविष्य का डर निकल जाएगा. साथ ही पति और सास-ससुर से इस बारे में बात करें कि आप आगे से ये सब सहन नहीं करेंगी. अपने लिए आपको ख़ुद ही बात करनी होगी, ख़ुद ही आगे आना होगा.

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4) समस्या: हमारा इकलौता बेटा अमेरिका में सेटल हो गया है, उसकी बीवी भी वहीं नौकरी करती है. वो चाहते हैं कि हम वहां उनके साथ रहें, लेकिन वहां हमारा अपना कोई नहीं है. हमारा वहां मन नहीं लगता. बेटे-बहू के बिना हमारा यहां भी मन नहीं लगता. इस तरह ज़िंदगी कैसे कटेगी, समझ नहीं आता.
समाधान: ऐसी स्थिति में पैरेंट्स को समझदारी से काम लेना चाहिए. आप बेटे-बहू का भविष्य ख़राब नहीं कर सकते, इसलिए आपको बीच का रास्ता निकालना चाहिए. ये सच है कि पूरी ज़िंदगी अपने देश में बिताने के बाद विदेश में रहना मुश्किल है, लेकिन अकेले रहना भी तो संभव नहीं. ऐसे में पैरेंट्स को विन-विन सिचुएशन अपनानी चाहिए यानी अपनी सुविधानुसार दोनों जगहों पर रहना चाहिए. आप चाहें तो त्योहारों के समय या सर्दियों में अपने देश में रह सकते हैं और गर्मियों में या फ्री टाइम में बेटे-बहू के साथ विदेश में रह सकते हैं. ऐसा करके आप बिज़ी भी रहेंगे और ख़ुश भी. ज़िद करके आप भी दुखी रहेंगे और आपके बच्चे भी. बच्चों की और अपनी सुविधानुसार समाधान निकाल लीजिए.

5) समस्या: हमारी शादी को एक साल हो गया है. अभी कुछ दिन पहले ही मेरी पत्नी ने मुझे बताया कि शादी से पहले उसका अफेयर था और ब्रेकअप के बाद से उन दोनों ने न कभी एक-दूसरे को फोन किया और न ही कभी एक-दूसरे से मिले. लेकिन पत्नी की पिछली ज़िंदगी का सच जानने के बाद मैं उसके साथ नॉर्मल व्यवहार नहीं कर पा रहा हूं. मुझे लगता है कि वो मन ही मन उसकी तुलना मुझसे करती होगी. मेरे साथ रहते हुए भी उसके ख़्यालों में वो ही रहता होगा. अब मैं अपनी पत्नी के साथ पहले की तरह बेहिचक नहीं रह पा रहा हूं.
समाधान: आप सबसे पहले अपनी पत्नी की जगह ख़ुद को रखकर देखिए. अगर आपके साथ ऐसा हुआ होता, तो आप क्या करते? आपकी पत्नी ने अपनी बीती ज़िंदगी के बारे में आपको ईमानदारी से सब कुछ बताया और अब वो बीती बातों को भूलकर ज़िंदगी में आपके साथ आगे बढ़ चुकी है. फिर आप क्यों उनकी पिछली ज़िंदगी के बारे में सोचकर अपना आज ख़राब कर रहे हैं. आप भी बीती बातों को भूल जाइए और अपनी शादीशुदा ज़िंदगी को ख़ुशनुमा बनाइए.

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How To Deal With Crossroads In Life

6) समस्या: मेरे पापा का ऑटोमोबाइल का बिज़नेस है, लेकिन मैं फोटोग्राफी में करियर बनाना चाहता हूं. मेरे पापा ने अपने इस बिज़नेस को खड़ा करने में अपनी पूरी ज़िंदगी लगा दी, अब वो चाहते हैं कि मैं अपना पैशन छोड़कर उनका काम संभालूं, लेकिन मेरा बिज़नेस में ज़रा भी मन नहीं लगता. मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं क्या करूं.
समाधान: जहां तक करियर की बात है, तो ज़िंदगी का ये फैसला हमें ख़ुद ही लेना होता है. कई बार ऐसा भी होता है कि जिस काम को हम अपना पैशन समझते हैं, जब हम उसे करने बैठते हैं, तो समझ आता है कि ये मात्र हमारा शौक था, हम उस काम के लिए बने ही नहीं थे. आपको सबसे पहले अपने पैशन को पहचानना होगा. यदि फोटोग्राफी वाकई आपका पैशन है, तो आप उसके बिना नहीं रह पाएंगे. ऐसे में आप यदि बेमन से अपने पिता का बिज़नेस संभालेंगे, तो शायद उसे उस मुक़ाम तक न पहुंचा सकें, जहां आप अपने मनपसंद करियर को पहुंचा सकते हैं. आपको अपने पापा से इस बारे में बात करनी चाहिए और अपने पैशन के लिए काम करना चाहिए. आपके पापा अपने बिज़नेस को इसलिए इतना आगे बढ़ा पाए, क्योंकि ये उनका पैशन था. इसी तरह आपको अपने पैशन को ही करियर बनाना चाहिए.

7) समस्या: मैं एक हाउसवाइफ हूं. मेरा बचपन एक छोटे शहर में बीता. मेरी शादी मुंबई के लड़के से हुई, इसलिए शादी के बाद मैं यहां आ गई. मेरे पति और ससुराल वालों को लगता है कि मेरा रहन-सहन, बातचीत करने का तरीक़ा उन जैसा नहीं है. मेरे पति मुझे कहीं घुमाने-फिराने, पार्टी वगैरह में नहीं ले जाते. मुझे ये सब अच्छा नहीं लगता, इससे मेरा कॉन्फिडेंस कम होता जा रहा है.
समाधान: सबसे पहले इस बात पर ध्यान दें कि आपके पति या ससुरालवाले आपके साथ ऐसा व्यवहार क्यों कर रहे हैं. आपमें वाकई कमी है या वो आपको नीचा दिखाने के लिए ऐसा करते हैं. यदि आप में कमी है, तो आप अपनी पर्सनैलिटी को निखारने की कोशिश करें और यदि वो स़िर्फ आपको नीचा दिखाने के लिए ऐसा कर रहे हैं, तो उनसे इस बारे में बात करें और कहें कि आप ये सब सहन नहीं करेंगी.

8) समस्या: मेरी उम्र 30 साल है. मेरी प्रॉब्लम ये है कि मैं अफेयर तो कर लेता हूं, लेकिन जैसे ही बात शादी तक पहुंचती है, तो मैं डर जाता हूं और ब्रेकअप कर लेता हूं. मैं शादी की ज़िम्मेदारी लेने से डरता हूं.
समाधान: ये आपकी अकेले की प्रॉब्लम नहीं है, आजकल अधिकतर युवा कमिटमेंट फोबिया के शिकार हैं. वो अफेयर तो करना चाहते हैं, लेकिन शादी की ज़िम्मेदारी नहीं उठाना चाहते. कई लोग शादी तो कर लेते हैं, लेकिन बच्चे की ज़िम्मेदारी नहीं उठाना चाहते. ये आपको तय करना होगा कि यदि आपको सेटल्ड लाइफ चाहिए, तो आपको उसकी ज़िम्मेदारियां उठाने के लिए भी तैयार रहना होगा.

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9) समस्या: मेरे शादी को पांच साल हो गए हैं. मेरा चार साल का बेटा है. कुछ समय पहले मेरे पति की अचानक एक्सीडेंट में मौत हो गई. अब मेरे ससुराल वाले चाहते हैं कि मैं अपने देवर से शादी कर लूं, लेकिन मेरा मन उसे अपना पति मानने को तैयार ही नहीं है. मैंने कभी अपने देवर को उस नज़र से देखा ही नहीं है. मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं क्या करूं.
समाधान: आपकी स्थिति में फैसला लेना वाकई मुश्किल होता है. पति को खोने का दर्द, बच्चे के भविष्य की चिंता, अपनी ज़िंदगी की फिक्र… आपके मन में न जाने कितनी उथल-पुथल मच रही होगी. यदि आप अभी फैसला नहीं ले पा रही हैं, तो ख़ुद को थोड़ा और टाइम दीजिए. किसी भी इंसान को अपनी ज़िंदगी में शामिल करने से पहले उसे मन से स्वीकार करना ज़रूरी होता है. यदि आप अपने देवर को पति के रूप में नहीं स्वीकार कर पाएंगी, तो उनके साथ ख़ुश नहीं रह पाएंगी इसलिए अपनी ज़िंदगी का फैसला सोच-समझकर लें, जिसमें आपकी और आपके बच्चे दोनों की ख़ुशी शामिल हो.

– कमला बडोनी

क्या रिश्ते स्वर्ग में बनते हैं? जानने के लिए देखें वीडियो:

यदि हम अपने आप से पूछें कि हमारे लिए ख़ुशी की क्या परिभाषा है, हमें किस बात से ख़ुशी मिलती है, क्या हम वाकई ख़ुश हैं? तो शायद हम अपने ही सवालों का जवाब नहीं दे पाएंगे. ऐसा नहीं है कि हमें जवाब पता नहीं, लेकिन हम उसे स्वीकारना नहीं चाहते, क्योंकि हम अपने लिए कम और दूसरों के लिए ज़्यादा जीते हैं. हम ख़ुद से ज़्यादा लोगों की परवाह करने में लगे रहते हैं. हमें क्या पसंद है, हम क्या चाहते हैं, इससे ज़्यादा हमें इस बात की परवाह रहती है कि लोग क्या कहेंगे? आइए, हम आपको बताते हैं ख़ुशहाल ज़िंदगी जीने के 5 आसान तरीके.

Ways To Live Life

क्या आप वाकई खुश हैं?
क्या आपने कभी ख़ुद से ये सवाल किया है कि आप अपनी ख़ुशी के नाम पर जो भी करते हैं, क्या उसमें वाकई आपकी ख़ुशी होती है? चाहे त्योहार हो या शादी-ब्याह ऐसे ख़ास मौक़ों पर अपने लिए कुछ ख़रीदते समय भी हम ये सोचते रहते हैं कि ये चीज़ लोगों को पसंद आएगी या नहीं. आप अपनी ख़ुशी के बारे में कम और दूसरों की ख़ुशी के बारे में ज़्यादा सोचते रहते हैं. कई बार दूसरों पर अपना इंप्रेशन जमाने के लिए हम अपने बजट से ज़्यादा ख़र्च तो कर देते हैं, लेकिन बाद में उसकी भरपाई करना हमें मुश्किल लगने लगता है. दूसरों के बारे में सोच-सोचकर हम अपने सुंदर-सरल जीवन को इतना जटिल बना देते हैं कि कई बार हम अपनी पहचान ही खो देते हैं. हम ये भूल जाते हैं कि हमें किस चीज़ से ख़ुशी मिलती है.

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ख़ुशहाल ज़िंदगी जीने के 5 आसान तरीके

1) सुबह उठते ही सबसे पहले मुस्कुराएं और कहें कि मैं अपना/अपनी फेवरिट हूं. फिल्म जब वी मेट में करीना कपूर का यह डायलॉग सच में इतना पावरफुल है कि ये आपको ख़ुशी और एनर्जी से भर देता है. यकीन मानिए, जो लोग ख़ुद से प्यार करते हैं, वो दूसरों को भी हमेशा ख़ुश देखना चाहते हैं इसलिए सबसे पहले ख़ुद से प्यार करें.

2) सच्ची ख़ुशी पाने के लिए वही करें जो आपको अच्छा लगता है, न कि जो लोग कर रहे हैं.

3) हमेशा बड़ों की तरह बर्ताव न करें, कभी-कभी बच्चों की तरह खिलखिलाकर हंसें, उछलकूद करें, बेपरवाह होकर नाचे-गाएं, दोस्तों के साथ घूमने जाएं, सड़क पर खड़े होकर चाट का लुत्फ़ उठाएं… ऐसी छोटी-छोटी बातों में ही ज़िंदगी की असली ख़ुशी छुपी होती है.

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4) समस्या या परेशानियां सभी के जीवन में आती हैं, लेकिन जीवन में क़ामयाब वही होते हैं, जो परेशानियों से डरते नहीं, बल्कि उनका हल निकालने के रास्ते तलाशते हैं. आप भी ऐसा ही करें, आपके सोचने से समस्या हल नहीं होगी, उसके लिए आपको समस्या से बाहर निकलने के रास्ते तलाशने होेंगे.

5) कभी भी किसी और से अपनी तुलना न करें. ईश्‍वर ने हम सबको अलग और स्पेशल बनाया है इसलिए अपनी ख़ूबियों को पहचानें और अपनी अलग पहचान बनाएं. आपको ईश्‍वर ने जो भी हुनर दिया है, उसे निखारने की हमेशा कोशिश करते रहें, ताकि आप अपनी ज़िंदगी में कभी भी बोर न हों.

सीखें प्यार की 5 भाषाएं, देखें वीडियो:

Do Good Things For Othersकहते हैं कि जो लोग दूसरों के लिए गड्ढा खोदते हैं, एक दिन वो ख़ुद उसी गड्ढे में गिर जाते हैं. ठीक वैसे ही जो व्यक्ति दूसरों का भला करता है, उसका भला स्वयं भगवान करते हैं, इसलिए यदि आप चाहते हैं कि आपका भला हो, तो अब से दूसरों का भला करने की कोशिश करें.

जो बोएंगे, वही पाएंगे ये बात हम सदियों से सुनते आ रहे हैं, फिर भी न जाने क्यों? हम बबूल का पेड़ उगाकर उससे मीठा फल पाने की इच्छा रखते हैं. तो आइए, इस बार अपने मन-आंगन में भलाई के बीज बोने का प्रयास करते हैं, ताकि स्वादिष्ट फल का सुख भोग सकें.

सज्जन व्यक्ति करते हैं दूसरों का भला

तरुवर फल नहिं खात है, सरवर पियहि न पान।
कहि रहीम पर काज हित, संपति संचहि सुजान॥

संत रहीम दास जी कहते हैं कि पेड़ पर फलने वाले फल का सेवन स्वयं पेड़ नहीं करते और न ही नदी में बहता पानी ख़ुद नदी पीती है. ठीक उसी तरह जो संत पुरुष होते हैं, वो ख़ुद के लिए नहीं बल्कि दूसरों के हित के लिए धन संचय करते हैं. अतः अगर आप चाहते हैं कि आपकी गिनती भी सज्जन व्यक्ति में की जाए, तो दूसरों का हित करने की कोशिश करें.

दूसरों का भला करने से होता है ख़ुद का भला
यह बात सोलह आने सच है कि दूसरों का भला करने से ख़ुद का भला होता है. इस बात को परिभाषित करने के लिए प्रस्तुत है संत रहीम दास जी की निम्न पंक्ति,

वे रहीम नर धन्य हैं, पर उपकारी अंग।
बांटनवारे को लगै, ज्यौं मेहंदी को रंग॥

अर्थात जो व्यक्ति स्वयं अपने हाथों से दूसरों को मेहंदी बांटता है, उसके हाथ में ख़ुद-ब-ख़ुद मेंहदी का रंग चढ़ जाता है, ठीक इसी तरह जो नर दूसरों का भला करता है, उसका भी भला होता है.

ऐसे व्यक्ति किसी काम के नहीं…..

बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर।
पंथी को छाया नहीं फल लागे अति दूर॥

अपार धन-संपत्ति होने के बावजूद जो लोग कभी किसी की मदद नहीं करते और न ही दूसरों के हित के बारे में सोचते, ऐसे लोग बिल्कुल खजूर के उस पेड़ की तरह हैं, जो गगन चुंबी होते हुए भी न किसी को फल का सुख देता है और न ही राहगिरों को छाया दे पाता है.

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ख़ुशी की कोई परिभाषा नहीं, कोई फॉर्मूला नहीं… हर किसी के लिए ख़ुशी के मायने अलग-अलग होते हैं. हां, एक बात सभी पर लागू होती है कि ख़ुश रहना सबके लिए ज़रूरी है. आपकी ख़ुशी का पासवर्ड क्या है?

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ताकि खिली रहे चेहरे पर मुस्कान
ज़िंदगी की भागदौड़, गलाकाट कॉम्पटीशन में अक्सर हम इतने उलझ जाते हैं कि अपनी छोटी-छोटी ख़ुशियों को भी नज़रअंदाज़ करने लगते हैं. कई बार तो ऐसा भी होता है कि हम ये तक भूल जाते हैं कि हमें ख़ुशी किस बात से मिलती है. ये वो संकेत हैं जब हम जाने-अनजाने कई बड़ी बीमारियों को न्योता दे रहे होते हैं. ऐसी स्थिति आने से पहले ही संभल जाना ज़रूरी है. हवा, पानी, भोजन की तरह ही ख़ुशी भी जीवन की खुराक है. इसके बिना आप हेल्दी लाइफ नहीं जी सकते. अतः अपनी अन्य ज़रूरतों की लिस्ट में ख़ुशी के लिए भी ख़ास जगह बनाएं और उसे अपने चेहरे से हटने न दें.

यूं बनाएं ख़ुशी का पासवर्ड
यदि आपको घूमने का शौक़ है और आप किसी ख़ास जगह घूमने जाना चाहते हैं, तो उसके लिए आज से ही थोड़ी-थोड़ी सेविंग करना शुरू कर दें. हर बार पैसे बचाते समय उस जगह के बारे में सोचकर ख़ुशी महसूस करें. फिर जब सेविंग हो जाए, तो टिकिट बुक करें और बुकिंग की तारीख़ या उस जगह के नाम को अपने मोबाइल या लैपटॉप का पासवर्ड बनाएं. फिर आप जब भी पासवर्ड टाइप करेंगे तो आपके चेहरे पर उस जगह पर जाने की ख़ुशी साफ़ झलकेगी. काम के बोझिल माहौल में भी आपकी ख़ुशी का पासवर्ड आपको रिफ्रेश कर देगा.

वजहें कई हैं 
यदि आप कोई महंगी ज्वेलरी ख़रीदना चाहती हैं, तो उसकी फोटो को अपने मोबाइल की डिसप्ले पिक्चर बनाएं. फिर जब भी आप अपना मोबाइल देखेंगी, तो अपनी पसंदीदा ज्वेलरी देखकर आपके चेहरे पर मुस्कान खिल जाएगी. ज्वेलरी की फोटो देखकर उसे ख़रीदने की उत्सुकता बढ़ेगी और आप बचत के लिए और तैयारी करने लगेंगी.

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आज़माएं स्मार्ट ट्रिक्स
* वज़न घटाने के लिए स्लिम एंड सेक्सी पासवर्ड रख सकती हैं.
* घर ख़रीदने के लिए ड्रीम होम पासवर्ड रखें.
* पैरेंट्स बनना चाहते हैं तो माई बेबी शब्द का चुनाव कर सकते हैं.
* गाड़ी ख़रीदना चाहते हैं तो लॉन्ग ड्राइव शब्द को अपने लैपटॉप या मोबाइल का पासवर्ड बनाएं.

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छोटी-छोटी ख़ुशियां
ख़ुशी पाने के लिए महंगे होटल में खाना, इंटरनेशनल टूर आदि ज़रूरी नहीं हैं, छोटी-छोटी बातों से भी ख़ुशियां मिलती हैं. यकीन न हो तो आज़माकर देख लीजिए.
* दोस्तों से मिलने के लिए स्पेशल ओकेज़न का इंतज़ार न करें. हफ्ते या महीने में एक बार अपने दोस्तों से ज़रूर मिलें और हर वो काम करें जिससे आपको ख़ुशी मिलती है.
* बॉस ने आपको बिना वजह डांटा, लेकिन आप अपने बचाव में कुछ नहीं कह सके, तो काग़ज़-कलम उठाइए और अपने मन की भड़ास काग़ज़ पर उतार दीजिए. बॉस को जो भी कहना चाहते हैं, वो सब उस काग़ज़ पर लिख दीजिए और उस काग़ज़ को जला दीजिए. उसके बाद एक लंबी सांस लीजिए और खुलकर मुस्कुराइए. यकीन मानिए, आप बहुत हल्का महसूस करेंगे.
* लंबी छुट्टियों का इंतज़ार न करें, वीकेंड पर छोटी-सी ट्रिप प्लान करके भी आप ख़ुशी के पल जुटा सकते हैं.
* आपकी उम्र चाहे जो होे, अपने भीतर के बच्चे को कभी बड़ा न होने दें. उसे शरारतें करने दें, तभी आप ज़िंदगी की असली ख़ुशी महसूस कर सकेंगे.
* अपने शौक को कभी नज़रअंदाज़ न करें. डांस, स्पोर्ट्स, पेंटिंग… आपको जिस चीज़ का शौक हो, उसके लिए थोड़ा टाइम ज़रूर निकालें. इससे आपको कभी बोरियत नहीं महसूस होगी और आप ज़िंदगी से हमेशा प्यार करेंगे.
* ख़ुशी पाने से कहीं ज़्यादा ख़ुशी देने से संतुष्टि मिलती है इसलिए जीवन में ऐसे काम ज़रूर करें जिनसे आप दूसरों के चेहरे पर ख़ुशी बिखेर सकें. यक़ीन मानिए, उसकी ख़ुशी आपके चेहरे पर भी साफ़ नज़र आएगी.
– कमला बडोनी

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