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अकबर-बीरबल की कहानी: जोरू का गुलाम (Akbar-Birbal Tale: Joru Ka Ghulam)

 

Akbar Aur Birbal

अकबर-बीरबल की कहानी: जोरू का गुलाम (Akbar-Birbal Tale: Joru Ka Ghulam)

बादशाह अकबर और बीरबल आपस में बातें कर रहे थे. बातों ही बातों में बात मियां-बीवी के रिश्ते पर चल निकली तो बीरबल ने कहा- अधिकतर मर्द जोरू के गुलाम ही होते हैं और अपनी बीवी से डरते हैं.

यह सुनकर बादशाह ने असहमति जताई और कहा कि मैं नहीं मानता.

यह सुन बीरबल ने कहा कि हुजूर, मैं यह बात सिद्ध कर सकता हूं.

बादशाह भी तैयार हो गए और कहा कि सिद्ध करो.

बीरबल ने कहा कि आप आज ही से आदेश जारी करें कि किसी के भी अपने बीवी से डरने की बात साबित हो जाती है तो उसे एक मुर्गा दरबार में बीरबल के पास में जमा करना होगा. बादशाह ने आदेश जारी कर दिया.

कुछ ही दिनों में बीरबल के पास ढेरों मुर्गे जमा हो गए, तब उसने बादशाह से कहा- अब तो इतने मुर्गे जमा हो गए हैं कि आप मुर्गीखाना खोल सकते हैं. अब तो मानते हैं न कि मेरी बात सिद्ध हो गई? अतः अब आप अपना आदेश वापस ले लें.

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बादशाह को न जाने क्या मज़ाक सूझा कि उन्होंने अपना आदेश वापस लेने से इंकार कर दिया. खीजकर बीरबल लौट आया और अगले दिन बीरबल दरबार में आया तो बादशाह अकबर से बोला- हुजूर, विश्‍वसनीय सूत्रों से पता चला है कि पड़ोसी राजा की पुत्री बेहद खूबसूरत है, आप कहें तो आपके विवाह का प्रस्ताव भेजूं?

यह क्या कह रहे हो तुम, कुछ तो सोचो, जनानाखाने में पहले ही दो हैं, अगर उन्होंने सुन लिया तो मेरी खैर नहीं.
बादशाह की यह बात सुनकर बीरबल ने कहा- हुजूर, दो मुर्गे आप भी दे ही दें अब.

बीरबल की बात सुनकर बादशाह झेंप गए और उन्होंने तुरंत अपना आदेश वापस ले लिया.

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अकबर-बीरबल की कहानी: राज्य के कौवों की गिनती (Akbar-Birbal Tale: How Many Crows In The Kingdom)

Akbar Birbal Story

अकबर-बीरबल की कहानी: राज्य के कौवों की गिनती (Akbar-Birbal Tale: How Many Crows In The Kingdom)

एक दिन राजा अकबर और बीरबल राज महल के बगीचे में टहल रहे थे. बहुत ही सुंदर सुबह थी. कई तरह के पंछी चहक रहे थे. वहीं तालाब के पास ही बहुत सारे कौवे भी आस-पास उड़ रहे थे. उन कौवों को देखते ही बादशाह अकबर के मन में एक सवाल उत्पन्न हुआ. उनके मन में यह सवाल आया कि उनके राज्य में कुल कितने कौवे होंगे?

बीरबल तो उनके साथ ही बगीचे में टहल रह थे, तो राजा अकबर ने बीरबल से ही यह सवाल कर डाला और पूछा कि बताओ बीरबल, आख़िर हमारे राज्य में कितने कौवे हैं? तुम तो बड़े चतुर हो, तुम्हें हर सवाल का उत्तर पता होता है.

यह सुनते ही चालाक बीरबल ने तुरंत उत्तर दिया कि महाराज, हमारे राज्य में कुल 95,463 कौवे हैं, आप चाहें तो गिनती करवा सकते हैं.
महाराज अकबर इतने तेज़ी से दिए हुए उत्तर को सुन कर हक्का-बक्का रह गए और उन्होंने बीरबल की परीक्षा लेने की सोची.

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Akbar Aur Birbal Ki Kahani

महाराज ने बीरबल से दोबारा सवाल किया- अगर तुम्हारी गणना के अनुसार कौवे ज़्यादा हुए तो?

बिना किसी संकोच के बीरबल बोले, हो सकता है महाराज, किसी पड़ोसी राज्य के कौवे हमारे राज्य में घूमने आये हों.

राजा फिर बोले- और अगर गिनती में कम कौवे हुए तो?

बीरबल ने फिर तपाक से उत्तर दिया- महाराज, हो सकता है हमारे राज्य के कुछ कौवे अपने किसी अन्य राज्यों के रिश्तेदारों के यहां घूमने गए हों.

यह सुन अकबर बेहद ख़ुश हुए, क्योंकि बीरबल ने अपनी चतुराई एक बार फिर साबित कर दी.

सीख: प्रश्‍न भले ही कितने मुश्किल क्यों न हों, बिना घबराई बुद्धि व चतुराई से काम लेना चाहिए. दुनिया का कोई ऐसा सवाल नहीं, जिसका जवाब न हो, बस ज़रूरत है, विवेक, धैर्य व बुद्धि की.

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सुविचार- Inspirational Quotes – Quote of the day

गिन लेती है दिन बग़ैर मेरे गुज़ारे हैं कितने… भला कैसे कह दूं कि मां अनपढ़ है मेरी!

परिवार और उसमें भी मां का दर्जा सबसे ऊंचा होता है, ऐसे ही मर्मस्पर्शी सुविचार परिवार और मां से संबंधित आप पढ़ें और अपनी भावनाओं को फिर उन्हीं बचपन की यादों में महसूस करें, जहां मां के सीने से लगकर ही दुनिया की हर ख़ुशी मिल जाया करती थी.

 

Inspirational Quotes in Hindi

 

Inspirational Quotes in Hindi

Inspirational Quotes in Hindi

Inspirational Quotes

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तेनालीराम और मूर्ख चोर (Tenali Rama And Foolish Thieves)

Tenali Rama Story

तेनालीराम और मूर्ख चोर (Tenali Rama And Foolish Thieves)

एक बार विजय नगर में बहुत अधिक गर्मी पड़ी. ऐसी भीषण गर्मी कि सूखे की नौबत आ गई. नदियों और तालाबों का जल स्तर घट गया. तेनालीराम के घर के पीछे भी एक बड़ा बाग था, जो सूखता जा रहा था. उसके बाग के बीच में एक कुआं था, मगर उसका पानी इतना नीचे चला गया था कि दो बाल्टी जल खींचना भी बेहद मुश्किल लग रहा था.

तेनालीराम को बाग की चिंता सताने लगी. एक शाम तेनालीराम अपने बेटे के साथ बाग का निरीक्षण कर रहा था और सिंचाई के विषय में ही बात कर रहा था. वो सोच रहा था कि सिंचाई के लिए मज़दूर को लगाया जाए या नहीं, लेकिन मज़दूर लगाएंगे, तो ख़र्चा भी बहुत अधिक होगा. इतने में ही उसकी नज़र तीन-चार व्यक्तियों पर पड़ी जो सड़क के दूसरी पार एक वृक्ष के नीचे खड़े उसके मकान की ओर देख रहे थे और फिर एक-दूसरे से संकेत व इशारों में कुछ बात कर रहे थे.

तेनालीराम को समझते देर नहीं लगी कि ये सेंधमार हैं और चोरी करने के इरादे से ही उसके मकान का मुआयना कर रहे हैं. तेनालीराम के मस्तिष्क में बाग की सिंचाई की एक युक्ति आ गई. उसने ऊंची आवाज़ में अपने पुत्र से कहा: बेटे! सूखे के दिन हैं. चोर-डाकू बहुत घूम रहे हैं. गहनों और अशर्फियों का वह संदूक घर में रखना ठीक नहीं. आओ, उस संदूक को उठाकर इस कुएं में डाल दें, ताकि कोई चुरा न सके.

अपनी बात कहकर तेनालीराम बेटे के साथ घर के भीतर चला गया. मन ही मन में वह कह रहा था… आज इन चोरों को ढंग का कुछ काम करने का मौका मिलेगा. अपने बाग की सिंचाई भी हो जाएगी. बाप-बेटे ने मिलकर एक सन्दूक में कंकर-पत्थर भरे और उसे उठाकर कुएं में फेंक दिया.

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तेनालीराम फिर ऊंचे स्वर में बोला, अब हमारा धन सुरक्षित है. उधर घर के पिछवाड़े खड़े चोर मन ही मन मुस्कराए. लोग तो व्यर्थ ही तेनालीराम को चतुर कहते हैं. यह तो निरा मूर्ख है. इतना भी नहीं जानता कि दीवारों के भी कान होते हैं. एक चोर ने अपने साथी से कहा: आओ चलें, आज रात इसका सारा खज़ाना हमारे कब्ज़े में होगा.

रात हुई और चोर अपनी योजना को अंजाम देने आए. वे बाल्टी भर-भर कुएं से पानी निकलते और धरती पर उड़ेल देते. उधर, तेनालीराम और उसका पुत्र पानी को क्यारियों की ओर करने के लिए खुरपी से नालियां बनाने लगे.

उन्हें पानी निकालते-निकालते सुबह के चार बज गए, तब कहीं जाकर संदूक का एक कोना दिखाई दिया. बस, फिर क्या था, उन्होंने कांटा डालकर संदूक बाहर खींचा और जल्दी से उसे खोला, तो यह देखकर हक्के-बक्के रह गए कि उसमें पत्थर भरे थे.

अब तो चोर सिर पर पैर रखकर भागे कि मूर्ख तो बन ही चुके हैं, अब कहीं पकड़े न जाएं. दूसरे दिन जब तेनालीराम ने यह बात महाराज को बताई तो वे खूब हंसे और बोले: कभी-कभी ऐसा भी होता है कि मेहनत तो कोई करता है और फल कोई और ही खाता है.

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पंचतंत्र की कहानी: जादुई चक्की (Panchtantra Story: The Magic Mill)

Panchtantra Story
पंचतंत्र की कहानी: जादुई चक्की (Panchtantra Story: The Magic Mill)

आज के हाईटेक युग में जब बच्चों को हर जानकारी कंप्यूटर/इंटरनेट पर ही मिल रही है, उनका पैरेंट्स से जुड़ाव कम हो रहा है. साथ ही उन्हें मोरल वैल्यूज़ (Moral Values) भी पता नहीं चल पाती, ऐसे में बेड टाइम स्टोरीज़ (Bed Time Stories) जैसे- पंचतंत्र (Panchtantra) की सीख देने वाली पॉप्युलर कहानियों के ज़रिए न स़िर्फ आपकी बच्चे से बॉन्डिंग स्ट्रॉन्ग होगी, बल्कि उन्हें अच्छी बातें भी पता चलती हैं.

एक गांव में दो भाई रहते थे. बड़ा भाई बेहद अमीर था और छोटा उतना ही ग़रीब. दिवाली के दिन पूरा गांव ख़ुश था. लेकिन छोटा भाई दुखी था, क्योंकि उसके परिवार के पास तो खाने को भी कुछ नहीं था. वो मदद मांगने अपने भाई के पास गया, पर भाई ने दुत्कार दिया. वो दुखी मन से वापस आने लगा, तो रास्ते में एक बूढ़ा व्यक्ति मिला. उसने कहा कि इतने दुखी क्यों हो, आज तो दिवाली है. ख़ुशियों को त्योहार. इस पर छोटे भाई ने अपनी व्यथा सुनाई.

बूढ़े व्यक्ति ने कहा कि तुम मेरा ये लकड़ियों का ढेर अगर मेरे घर तक पहुंचा दो, तो मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूं और तुम्हें अमीर बना सकता हूं. छोटा भाई मान गया और घर पहुंचने पर बूढ़े व्यक्ति ने उसे एक मालपुआ देकर कहा कि ये जंगल में लेकर जाओ. वहां तुम्हें तीन अजीब पेड़ दिखेंगे, जिसके पास एक चट्टान होगी. चट्टान के कोने में एक गुफा नज़र आएगी. उस गुफा में जाओगे, तो तुम्हें तीन बौने मिलेंगे. ये मालपुआ उन्हें देना, क्योंकि उनको यह बेहद पसंद है और इसके लिए वो हर क़ीमत चुकाने को तैयार होंगे, पर तुम उनसे धन मत मांगना. तुम कहना कि मुझे पत्थर की चक्की दे दो.

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Panchtantra Story

छोटे भाई ने वैसा ही किया, जैसा बूढ़े व्यक्ति ने कहा. चक्की लेकर जब छोटा बाहर जाने लगा, तब एक बौने ने कहा कि यह कोई मामूली चक्की नहीं है. इसे चलाने पर तुम जो मांगोगे वो मिलेगा. इच्छा पूरी होने पर इस पर लाल कपड़ा डाल देना, सामान निकलना बंद हो जाएगा.

छोटा घर पहुंचा, तो उसने चक्की को आज़माया. उसने चावल मांगा, फिर दाल मांगी… इस तरह खाने का ढेरों सामान उसे मिल गया, जिससे परिवार की भूख मिट गई. लाल कपड़े से चक्की को ढंककर वो चैन की नींद सो गया.

चक्की से निकला जो भी सामान बचा, उसे वो अगले दिन बाज़ार जाकर बेच आया. इस तरह से वो कुछ न कुछ सामान चक्की से निकालकर बाज़ार में बेच आता, कभी बादाम, कभी घी, नमक, मसाले, कपास आदि. देखते ही देखते वो बेहद अमीर हो गया.

उसकी तऱक्क़ी देखकर उसका बड़ा भाई जलने लगा. उसने सोचा कैसे ये इतना अमीर हो गया? एक रात वो छोटे के घर में छिप गया और उसने उस चक्की को देख लिया.

Panchtantra Story
अगले दिन जब छोटा बाज़ार गया था, तो बड़े ने चालाकी से घर में घुसकर चक्की को चुरा लिया. उसने सोचा वो यह गांव छोड़कर दूर जा बसेगा, क्योंकि उसके हाथ ख़ज़ाना जो लग गया. वो जल्दबाज़ी में सब कुछ छोड़कर परिवार सहित भागने लगा. समंदर पर जाकर एक नाव में सवार हुआ, तो पत्नी ने पूछा कि यह सब क्या है. पत्नी को दिखाने के लिए उसने चक्की को कहा कि चक्की नमक निकाल. नमक निकलता गया. चूंकि बड़े भाई को चक्की को बंद करना नहीं आता था, तो नमक के बोझ से नाव सहित पूरा परिवार ही डूब गया. कहते हैं कि वो चक्की अब भी चल रही है, इसीलिए समंदर का पानी खारा है.

सीख: लालच और ईर्ष्या बुरी बला है.

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पंचतंत्र की कहानी: दो दोस्त और बोलनेवाला पेड़ (Panchtantra Story: Two Friends And A Talking Tree)

 

Panchtantra Story

दो दोस्त और बोलनेवाला पेड़ (Panchtantra Story: Two Friends And A Talking Tree)

एक गांव में मनोहर और धर्मचंद नाम के दो दोस्त रहते थे. एक बार वे कमाने के लिए अपना गांव छोड़कर बाहर गए. दूसरे शहर से वो दोनों ख़ूब सारा धन कमाकर लाए. उन्होंने सोचा कि इतना सारा धन घर में रखेंगे, तो ख़तरा हो सकता है. बेहतर होगा कि इसे घर में न रखकर कहीं और रख दें, इसलिए उन्होंने उस धन को नीम के पेड़ की जड़ में गड्ढा खोदकर दबा दिया.

दोनों में यह भी समझौता हुआ कि जब भी धन निकालना होगा, साथ-साथ आकर निकाल लेंगे. मनोहर बेहद भोला और नेक दिल इंसान था, जबकि धर्मचंद बेईमान था. वह दूसरे दिन चुपके से आकर धन निकालकर ले गया, उसके बाद वह मनोहर के पास आया और बोला कि चलो कुछ धन निकाल लाते हैं. दोनों मित्र पेड़ के पास आए, तो देखा कि धन गायब है.

Two Friends And A Talking Tree Story

धर्मचंद ने फौरन मनोहर पर इल्ज़ाम लगा दिया कि धन तुमने ही चुराया है. दोनों मे झगड़ा होने लगा. बात राजा तक पहुंची, तो राजा ने कहा कि कल नीम की गवाही के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा. ईमानदार मनोहर ने सोचा कि ठीक है नीम भला झूठ क्यों बोलेगा?
धर्मचंद भी ख़ुशी-ख़ुशी मान गया. दूसरे दिन राजा उन दोनों के साथ जंगल में गया. उनके गांव के अन्य लोग भी थे. सभी सच जानना चाहते थे. राजा ने नीम से पूछा- हे नीमदेव बताओ धन किसने लिया है?

मनोहर ने… नीम की जड़ से आवाज़ आई.

यह सुनते ही मनोहर रो पड़ा और बोला- महाराज, पेड़ झूठ नहीं बोल सकता, इसमें ज़रूर किसी की कोई चाल है. कुछ धोखा है.
राजा ने पूछा कैसी चाल?

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मैं अभी सिद्ध करता हूं महाराज. यह कहकर मनोहर ने कुछ लकड़ियां इकट्ठी करके पेड़ के तने के पास रखी और फिर उनमें आग लगा दी.
तभी पेड़ से बचाओ-बचाओ की आवाज़ आने लगी. राजा ने तुरंत सिपाहियों को आदेश दिया कि जो भी हो उसे बाहर निकालो. सिपाहियों ने फौरन पेड़ के खोल में बैठे आदमी को बाहर निकाल लिया. उसे देखते ही सब चौंक पड़े, क्योंकि वह धर्मचंद का पिता था. अब राजा सारा माजरा समझ गया.

Two Friends And A Talking Tree Hindi Story

उसने पिता-पुत्र को जेल में डलवा दिया और उसके घर से धन ज़ब्त करके मनोहर को दे दिया. साथ ही उसकी ईमानदारी सिद्ध होने पर और भी बहुत-सा ईनाम व धन दिया.

सीख: विपरीत परिस्थितियों में भी अपना आपा नहीं खोना चाहिए. अपनी समझ-बूझ से काम करना चाहिए. कठिन परिस्थितियों में भी डरने की बजाय उसका सामना करने की हिम्मत करें और शांत होकर अपने दिमाग से फैसले लें.

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रोज़ाना चेक करें अपनी लाइफ का हैप्पीनेस मीटर (Check Your Daily Happiness Meter)

ज़िंदगी में हर रोज़ हम कुछ न कुछ नया सीखते या अनुभव करते हैं. कुछ चीज़ें हमें ख़ुशी देती हैं, तो कुछ तकलीफ़, पर ज़्यादातर लोग उन तकलीफ़ों के बोझ को ही रोज़ाना ढोते रहते हैं, जबकि हम सबको पता है कि जो व़क्त बीत रहा है, वो लौटकर कभी नहीं आएगा, तो क्यों न रोने की बजाय उसे हंसकर बिताएं. आज से ही एक नई शुरुआत करें, रोज़ाना कुछ अलग करें और देखें कि आज का आपका हैप्पीनेस मीटर कितना है.

Happiness

दिमाग़ी कचरा साफ़ करें

हम रोज़ अपने सबकॉन्शियस माइंड में न जाने कितने निगेटिव ख़्याल भर देते हैं और जब वो हमें परेशान करने लगते हैं, तो हम बेवजह दुखी रहने लगते हैं. आज ही ये सारा दिमाग़ी कचरा साफ़ करें.

–    आपके बारे में कौन क्या सोचता है, इस सोच को अपने दिमाग़ से निकाल दें, बल्कि ये सोचकर ख़ुश हो जाएं कि कोई आपके बारे में सोचता तो है.

–     अगर बातचीत के दौरान कोई ग़लतफ़हमी हो गई है, तो उसे तुरंत क्लीयर कर लें. जितनी जल्दी निगेटिव ख़्याल निकलेगा, उतनी जल्दी आपको ख़ुशी का एहसास होगा.

–     माफ़ कर देना और माफ़ी मांग लेना उतना भी कठिन नहीं है, जितना लोगों ने बना रखा है, इसलिए सॉरी कहने में बिल्कुल भी देर न करें. ख़ुद भी ख़ुश रहें और दूसरों को भी ख़ुश रखें.

मैजिकल वर्ड्स का करें इस्तेमाल

हमारे पास मैजिकल वर्ड्स का ख़ज़ाना है, पर अफ़सोस कि हम उनका इस्तेमाल ही नहीं करते, तभी तो दुखी रहते हैं.

–     थैंक यू एक ऐसा जादुई शब्द है, जो न स़िर्फ बोलनेवाले के चेहरे पर मुस्कान लाता है, बल्कि सुननेवाला भी ख़ुश हो जाता है. तो फिर इसे कहने में कंजूसी क्यों करें. सुबह की शुरुआत ही भगवान को थैंक यू कहने से करें, यकीन मानें आपका दिन ख़ुशियों भरा होगा.

–     हर कोई चाहता है कि लोग उसे प्यार करें. पार्टनर, मम्मी-पापा, भाई-बहन, दादा-दादी, नाना-नानी या बच्चे सभी को रोज़ाना वो थ्री मैजिकल वर्ड्स ‘आई लव यू’ ज़रूर कहें. उनके चेहरे की मुस्कान आपके हैप्पीनेस मीटर को बढ़ा देगी.

–     ‘आप अच्छी लग रही हो’ या ‘अच्छे लग रहे हो,’ जैसे जादुई शब्द किसी का भी दिन बना सकते हैं. तो दिल खोलकर लोगों की तारीफ़ करें और ख़ुशियां फैलाते रहें.

चुनें अनजानी राहें

जान-पहचान के लोगों से तो हम हमेशा बोलते-बतियाते हैं, कभी अनजानों से भी दोस्ती करके देखें. बस, यूं ही किसी अजनबी से बातें करें, बहुत अच्छा लगेगा.

–     वर्किंग लोग बस, ट्रेन, ऑटो में रोज़ाना न जाने कितने लोगों से टकराते हैं, तो क्यों न उनसे दोस्ती करें और अपने दोस्तों का दायरा बढ़ाएं.

–     एक-दो बार जिन्हें मिले हैं, उन्हें देखकर स्माइल ज़रूर दें, उनकी स्माइल आपका हैप्पीनेस मीटर बढ़ा देगी.

–     रास्ते में चलते हुए कभी किसी अजनबी को देखकर स्माइल करें, वो जब तक सोचेगा कि आपको कहां मिला था, आप हंसते-हंसते आगे बढ़ जाओगे.

–     कोई उम्रदराज़ महिला अगर भारी सामान लेकर जा रही है, तो निस्वार्थ भाव से उनकी मदद करें. उन्हें तो ख़ुशी मिलेगी ही, पर आपको भी कुछ कम सुकून नहीं मिलेगा.

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Happy
कुछ रिफ्रेशिंग हो जाएं

–     क्यों न आज थोड़ी मटरगश्ती कर लें. किसी पुराने दोस्त को उसके ऑफिस में या घर पर जाकर सरप्राइज़ दें. यक़ीन मानिए, एक ही दिन में आपके पूरे हफ़्ते का हैप्पीनेस मीटर रीचार्ज हो जाएगा.

–     गाने सुनने के शौक़ीन हैं, तो अपना मनपसंद गाना स़िर्फ सुनें नहीं, बल्कि गुनगुनाएं भी और अगर घर पर हैं, तो गाने पर थिरकें भी. मूड फ्रेश रखने के लिए म्यूज़िक से बेहतर थेरेपी कुछ नहीं.

–     खाने के शौक़ीन हैं, तो कुछ ऐसा चटपटा खाएं, जो बहुत दिनों से खाया न हो. मनपसंद डिश न स़िर्फ आपका मूड अच्छा करेगी, बल्कि एक ख़ुशी भी देगी.

–     हमेशा दूसरों को ही एंटरटेन न करें. कभी ख़ुद को भी एंटरटेन कर लें. आपके साथ-साथ आपकी फैमिली भी ख़ुश रहेगी.

–     मॉनसून तो वैसे ही बहुत रोमांटिक मौसम है, तो आज अपने पार्टनर के लिए कुछ ख़ास करें. उन्हें चॉकलेट, फूल या टेडी दें. इस रोमांटिक मौसम में आपका रोमांटिक अंदाज़ आपके पार्टनर के हैप्पीनेस मीटर को फुल चार्ज कर देगा.

–     हमेशा दूसरों के बारे में ही न सोचें. कभी-कभी ख़ुद के बारे में भी सोचें. ख़ुद की ख़ुशी के लिए भी कुछ चीज़ें करें. थोड़ा स्वार्थी होने में कोई हर्ज़ नहीं.

फैलाएं पॉज़िटिविटी

आजकल ज़्यादातर लोग सोशल मीडिया के ज़रिए आप तक बहुत-सी निगेटिव चीज़ें पहुंचाते रहते हैं, जिससे जाने-अनजाने आप लगातार निगेटिव ख़्यालों  से घिरे रहते हैं. इसे बदलना चाहते हैं, तो शुरुआत ख़ुद से करें.

–     व्हाट्सऐप पर किसी को ऐसी फोटोज़ या वीडियोज़ न भेजें, जिसे देखकर बुरा लगे. जोक्स, मोटिवेशनल बातें या कोट्स आपके साथ-साथ उनको भी ख़ुश करेंगे.

–     अगर आपके आसपास कोई निगेटिव बातें कर रहा है, तो उसे निगेटिव में भी पॉज़िटिव देखना सिखाएं.

–     सकारात्मक सोच आपके चेहरे पर एक मुस्कान की तरह है, जो हर व़क्त आपकी ख़ूबसूरती को निखारती रहती है. तो सुंदर दिखना चाहते हैं, तो मुस्कुराइए, खिलखिलाइए और दूसरों को भी ख़ुश रखिए.

–     निगेविट बात करनेवालों को बताएं कि कैसे सकारात्मक सोच आपके शरीर में अच्छी फीलिंग वाले हार्मोंस का स्राव करती है और आप अच्छा फील करते हैं.

चेक करें हैप्पीनेस मीटर

–     ऐसी कई बातें होती हैं, जो हमारे चेहरे पर मुस्कान लाती हैं. ध्यान दें कि किससे बातें करते समय आप सबसे ज़्यादा ख़ुश रहते हैं और जैसे ही आपको वो शख़्स मिले, जी भरकर उससे बातें करें.

–     कोई न कोई तो ऐसा होता है, जिसके बारे में सोचते ही आपके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है. कोशिश करें कि उससे ज़्यादा से ज़्यादा मिलें. उसके साथ ज़्यादा समय बिताने की कोशिश करें.

–     दोस्तों-यारों के संग बिताई कौन-सी पुरानी यादें आपको गुदगुदाती हैं. उन यादों को दोबारा जीने की कोशिश करें.

–     घर से निकलते व़क्त अगर ‘अपना ख़्याल रखना’ कहने भर से आपके चेहरे पर स्माइल आती है, तो इसे अपनी आदत में शुमार करें.

–     पर्सनल लाइफ के अलावा प्रोफेशनल लाइफ में भी रोज़ कुछ अलग व क्रिएटिव करें, कभी काम में, कभी लुक्स में, तो कभी अपने कलीग्स की ख़ुशी के लिए.

–     अपने भीतर के छोटे मासूम बच्चे को कभी सीरियस न होने दें. वह हंसी-मज़ाक और शरारतों से आपको हमेशा ख़ुशहाल बनाए रखेगा.

– सुनीता सिंह

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पंचतंत्र की कहानी: खरगोश, तीतर और धूर्त बिल्ली (Panchtantra Story: The Hare, Partridge & Cunning Cat)

Panchtantra Story

पंचतंत्र की कहानी: खरगोश, तीतर और धूर्त बिल्ली (Panchtantra Story: The Hare, Partridge & Cunning Cat)

आज के हाईटेक युग में जब बच्चों को हर जानकारी कंप्यूटर/इंटरनेट पर ही मिल रही है, उनका पैरेंट्स से जुड़ाव कम हो रहा है. साथ ही उन्हें मोरल वैल्यूज़ (Moral Values) भी पता नहीं चल पाती, ऐसे में बेड टाइम स्टोरीज़ (Bed Time Stories) जैसे- पंचतंत्र (Panchtantra) की सीख देने वाली पॉप्युलर कहानियों के ज़रिए न स़िर्फ आपकी बच्चे से बॉन्डिंग स्ट्रॉन्ग होगी, बल्कि उन्हें अच्छी बातें भी पता चलती हैं.

एक नगर में बड़े से पेड़ पर एक तीतर का घोंसला था. वो बड़े मज़े से वहां रहता था. एक दिन वह अपना भोजन व दाना पानी ढूंढ़ने के चक्कर में दूसरी जगह किसी अच्छी फसलवाले खेत में पहुंच गया. वहां उसके खाने पीने की मौज हो गई. उस खुशी में वो उस दिन घर लैटना भी भूल गया और उसके बाद तो वो मज़े से वहीं रहने लगा. उसकी ज़िंदगी बहुत अच्छी कटने लगी.

यहां उसका घोसला खाली था, तो एक शाम को एक खरगोश उस पेड़ के पास आया. पेड़ ज़्यादा ऊंचा नहीं था. खरगोश ने उस घोसले में झांककर देखा तो पता चला कि यह घोसला खाली पड़ा है. खरगोश को वो बेहद पसंद आया और वो आराम से वहीं रहने लगा, क्योंकि वो घोसला काफ़ी बड़ा और आरामदायक था.

कुछ दिनों बाद वो तीतर भी नए गांव में खा-खाकर मोटा हो चुका था. अब उसे अपने घोसले की याद सताने लगी, तो उसने फैसला किया कि वो वापस लौट आएगा. आकर उसने देखा कि घोसले में तो खरगोश आराम से बैठा हुआ है. उसने ग़ुस्से से कहा, “चोर कहीं के, मैं नहीं था तो मेरे घर में घुस गए… निकलो मेरे घर से.”

खरगोश शान्ति से जवाब देने लगा, “ये तुम्हारा घर कैसे हुआ? यह तो मेरा घर है. तुम इसे छोड़कर चले गए थे और कुआं, तालाब या पेड़ एक बार छोड़कर कोई जाता है, तो अपना हक भी गवां देता है. अब ये घर मेरा है, मैंने इसे संवारा और आबाद किया.”
यह बात सुनकर तीतर कहने लगा, “हमें बहस करने से कुछ हासिल नहीं होने वाला, चलो किसी ज्ञानी पंडित के पास चलते हैं. वह जिसके हक में फैसला सुनायेगा उसे घर मिल जाएगा.”

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उस पेड़ के पास से एक नदी बहती थी. वहां एक बड़ी सी बिल्ली बैठी थी. वह कुछ धर्मपाठ करती नज़र आ रही थी. वैसे तो बिल्ली इन दोनों की जन्मजात शत्रु है, लेकिन वहां और कोई भी नहीं था, इसलिए उन दोनों ने उसके पास जाना और उससे न्याय लेना ही उचित समझा. सावधानी बरतते हुए बिल्ली के पास जाकर उन्होंने अपनी समस्या बताई, “हमने अपनी उलझन बता दी, अब आप ही इसका हल निकालो. जो भी सही होगा उसे वह घोसला मिल जाएगा और जो झूठा होगा उसे आप खा लेना.”

“अरे, यह कैसी बातें कर रहे हो, हिंसा जैसा पाप नहीं है कोई इस दुनिया में. दूसरों को मारनेवाला खुद नरक में जाता है. मैं तुम्हें न्याय देने में तो मदद करूंगी लेकिन झूठे को खाने की बात है तो वह मुझसे नहीं हो पाएगा. मैं एक बात तुम लोगों को कानों में कहना चाहती हूं, ज़रा मेरे करीब आओ तो.”

खरगोश और तीतर खुश हो गए कि अब फैसला होकर रहेगा और उसके बिलकुल करीब गए. बस फिर क्या था, करीब आए खरगोश को पंजे में पकड़कर मुंह से तीतर को भी उस चालाक बिल्ली बिल्ली ने नोंच लिया और दोनों का काम तमाम कर दिया.

सीख: अपने शत्रु को पहचानते हुए भी उस पर विश्‍वास करना बहुत बड़ी बेवक़फ़ी है. तीतर और खरगोश इसी विश्‍वास और बेवक़फ़ी के चलते को अपनी जान गवांनी पड़ी.

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Panchtantra Story
पंचतंत्र की कहानी: तीन काम (Panchtantra Story:Three Tasks)

आज के हाईटेक युग में जब बच्चों को हर जानकारी कंप्यूटर/इंटरनेट पर ही मिल रही है, उनका पैरेंट्स से जुड़ाव कम हो रहा है. साथ ही उन्हें मोरल वैल्यूज़ (Moral Values) भी पता नहीं चल पाती, ऐसे में बेड टाइम स्टोरीज़ (Bed Time Stories) जैसे- पंचतंत्र (Panchtantra) की सीख देने वाली पॉप्युलर कहानियों के ज़रिए न स़िर्फ आपकी बच्चे से बॉन्डिंग स्ट्रॉन्ग होगी, बल्कि उन्हें अच्छी बातें भी पता चलती हैं.

एक बार दो गरीब दोस्त एक सेठ के पास काम मांगने जाते हैं. कंजूस सेठ उन्हें फ़ौरन काम पर रख लेता है और पूरे साल काम करने पर साल के अंत में दोनों को 12-12 स्वर्ण मुद्राएं देने का वचन देता है. साथ ही सेठ यह भी शर्त रखता है कि अगर उन्होंने काम ठीक से नहीं किया या किसी आदेश का पालन ठीक से नहीं किया, तो उस एक गलती के बदले 4 सुवर्ण मुद्राएं वो उनकी तनख्वाह से काट लेगा.

दोनों दोस्त सेठ की शर्त मान जाते हैं और पूरे साल कड़ी मेहनत करते हैं. दौड़-दौड़कर सारे काम करते और सेठ के हर आदेश का पालन करते. इस तरह पूरा साल बीत गया. दोनों सेठ के पास 12-12 स्वर्ण मुद्राएं मांगने जाते हैं, पर सेठ बोलता है कि अभी साल का आखरी दिन पूरा नहीं हुआ है और मुझे तुम दोनों से आज ही तीन और काम करवाने हैं. दोनों हैरान थे, पर क्या कर सकते थे. सेठ ने तीन काम बताने शुरू किए-

पहला काम: छोटी सुराही में बड़ी सुराही डालकर दिखाओ.
दूसरा काम: दुकान में पड़े गीले अनाज को बिना बाहर निकाले सुखाओ.
तीसरा काम: मेरे सर का सही-सही वज़न बताओ.
यह तो असंभव है… उन दोनों ने सेठ से कहा.

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सेठ की चालकी काम कर गई, उसने कहा कि ठीक है तो फिर यहां से चले जाओ. इन तीन कामों को ना कर पाने के कारण मैं हर एक काम के लिए 4 स्वर्ण मुद्राएं काट रहा हूं. मक्कार सेठ की इस धोखाधड़ी से उदास हो कर दोनों दोस्त बोझिल मन से जाने लगते हैं. उन्हें रास्ते में एक चतुर पंडित मिलता है. उनके ऐसे चेहरे देखकर पंडित उनसे उनकी उदासी का कारण पूछता है और पूरी बात समझने के बाद उन्हें वापस सेठ पास भेजता है.

दोनों सेठ के पास पहुंचकर बोलते हैं, सेठजी अभी आधा दिन बाकी है, हम आपके तीनों काम कर देते हैं.

सेठ हैरान था, पर सोचा कि उसका क्या बिगड़ेगा. वो तीनों दुकान में जाते हैं. दोनों दोस्त अपना काम शुरू कर देते हैं. वो बड़ी सुराही को तोड़-तोड़कर उसके टुकड़े कर देते हैं और उन्हें छोटी के अन्दर डाल देते हैं. सेठ मन मसोसकर रह जाता है, पर कुछ कर नहीं पाता है.

इसके बाद दोनों गीले अनाज को दुकान के अन्दर फैला देते हैं, तो सेठ बोल पड़ता है कि स़िर्फ फैलाने से ये कैसे सूखेगा? इसके लिए तो धूप और हवा चाहिए, सेठ मुस्कुराते हुए कहता है.

देखते जाइए, ऐसा कहते हुए दोनों मित्र हथौड़ा उठा आगे बढ़ जाते हैं और दुकान की दीवार और छत तोड़ डालते हैं, जिससे वहां हवा और धूप दोनों आने लगती है.

क्रोधित मित्रों को सेठ और उसके आदमी देखते रह जाते हैं, पर किसी की भी उन्हें रोकने की हिम्मत नहीं होती.

अब आख़िरी काम बचा होता है, दोनों मित्र तलवार लेकर सेठ के सामने खड़े हो जाते हैं और कहते हैं, मालिक आपके सिर का सही-सही वज़न तौलने के लिए इसे धड़ से अलग करना होगा. कृपया बिना हिले स्थिर खड़े रहें.

अब सेठ को समझ आ जाता है कि वह ग़रीबों का हक इस तरह से नहीं मार सकता और बिना आनाकानी के वह उन दोनों को 12-12 स्वर्ण मुद्राएं सौंप देता है.

सीख: बेईमानी का फल हमेशा बुरा ही होता है.

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सफलता के 10 सूत्र (10 Ways To Achieve Your Dream)

सफलता के 10 सूत्र आपकी ज़िंदगी बदल सकते हैं. सफल बनने और अपने सपनों को पूरा करने के लिए आप भी अपनाएं सफलता के 10 सूत्र.

10 Ways To Achieve Your Dream

1) निर्धारित लक्ष्य के बिना आप जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफल नहीं हो सकते. यदि आपको अपनी मंजिल का ही पता नहीं होगा तो भला रास्ता कैसे तय करेंगे? स्पष्ट लक्ष्य के अभाव में आप अंजान रास्तों पर यूं ही भटकते रहेंगे. अतः क़ामयाबी पाने के लिए सबसे पहले अपना लक्ष्य निर्धारित करिए और फिर पूरी ईमानदारी और मेहनत से उसे हासिल करने में जुट जाइए.

2) कठिनाइयों में भी अपने लक्ष्यों का पीछा करते रहें, और विपत्तियों को अवसरों में बदल दें.
– धीरूभाई अंबानी

3 ) कोई लक्ष्य मनुष्य के साहस से बड़ा नहीं, हारा वही जो लड़ा नहीं.
– अज्ञात

4) आप कभी भी लक्ष्य निर्धारित करने या नया सपना देखने के लिए बहुत बूढ़े नहीं होते.
– सी.एस. लुईस

5) अपने मिशन में क़ामयाब होने के लिए आपको अपने लक्ष्य के प्रति एकचित्त निष्ठावान होना पड़ेगा.
– अज्ञात

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6) लक्ष्यों के बारे में सबसे महत्वपूर्ण चीज़ है उनका होना.
– जेफ्री ऍफ ऐबर्ट

7 ) स्पष्ट और लिखित लक्ष्य जिनके होते हैं, वे कम समय में ही इतनी सफलता प्राप्त करते हैं जितनी कि बिना ऐसे लक्ष्यों वाले सोच भी नहीं सकते.
– ब्रायन ट्रेसी

8 ) लक्ष्य न होने के साथ समस्या ये है कि आप अपना समस्त जीवन मैदान में ऊपर नीचे दौड़ते रहने के बाद भी कोई जीत हासिल नहीं कर पाते.
– बिल कोपलेंड

9 )जब कोई व्यक्ति अपने लक्ष्य को इतनी गहराई से चाहे कि वह उसके लिए अपना सब कुछ दांव पर लगाने के लिए तैयार हो, तो उसका जीतना सुनिश्‍चित है.
– नेपोलियन हिल

10 ) मुट्ठीभर संकल्पवान लोग जिनकी अपने लक्ष्य में दृढ़ आस्था है, इतिहास की धारा को बदल सकते हैं.
– महात्मा गांधी

जानें ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी की सफलता का राज़, देखें वीडियो:

 

तेनालीरामा की कहानी: रसगुुल्ले की जड़ (Tenali Rama Story: Root Of Rassagulla)

Tenali Rama Story, Root Of Rassagulla
Tenali Rama Story, Root Of Rassagulla
तेनालीरामा की कहानी: रसगुुल्ले की जड़ (Tenali Rama Story: Root Of Rassagulla)

बच्चों को हमेशा से ही प्रेरणादायक कहानियां (Motivational Stories) घर के बड़े-बुज़ुर्ग सुनाते आए हैं, जिनमें प्रमुख होती हैं तेनालीरामा (TenaliRama), पंचतंत्र (Panchtantra Talses) की कहानियां, फेयरी टेल्स (Fairy Tales), ऐसी किड्स स्टोरी (Kids Story) उन्हें सही-सच्ची सीख (Motivation-Inspiration) देती है और जीवन में सही दिशा भी.

एक बार मध्य पूर्वी देश से एक व्यापारी महाराज कृष्णदेव राय का अतिथि बनकर आया. महाराज ने उसके स्वागत में कोई कसर नहीं छोड़ी, क्योंकि अपने अतिथि का सत्कार वो हमेशा ही बड़े भव्य तरीके से करते हैं.

एक दिन भोजन पर महाराज का रसोइया व्यापारी के लिए स्वदिष्ट रसगुल्ले बनाकर लता है. व्यापारी कहता है कि उसे रसगुल्ले नहीं खाने हैं, पर हो सके तो उन्हें इस बात की जानकारी ज़रूर दी जाए कि दरअसल रसगुल्ले की जड़ क्या है?

रसोइया बेचारा सोच में पड़ जाता है और महाराज कृष्णदेव राय के पास जाकर उस व्यापारी की मांग बताता है. महाराज रसगुल्ले की जड़ पकड़ने के लिए चतुर तेनालीराम को बुलाते हैं, क्योंकि उन्हें भी पता है कि तेनालीरामा के पास हर सवाल का जवाब होता है.
तेनालीराम रसगुल्ले की जड़ खोजने की चुनौती का प्रस्ताव स्वीकार कर लेते हैं. वह एक खाली कटोरे और धारदार छुरी की मांग करते हैं और महाराज से एक दिन का समय मांगते हैं.

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Tenali Rama Story, Root Of Rassagulla

अगले दिन रसगुल्ले की जड़ से भरे कटोरे को मलमल के कपड़े से ढककर दरबार में बैठे व्यापारी को देते हैं और उसे कपड़ा हटाकर रसगुल्ले की जड़ देखने को कहते हैं. व्यापारी जैसे ही कपड़ा हटाता है, तो कटोरे में गन्ने के टुकड़े देखकर हैरान हो जाता है और सारे दरबारी तथा महाराज कृष्णदेव राय, तेनालीराम से पूछते हैं कि यह सब क्या है?

तेनालीराम समझाते हैं कि हर मिठाई शक्कर से बनती है और शक्कर का स्रोत गन्ना होता है, इसलिए रसगुल्ले की जड़ गन्ना है. तेनालीराम के इस गणित से सारे दरबारी, व्यापारी और महाराज भी बेहद प्रभावित हो जाते हैं. तेनालीराम के तर्क से सहमत भी होते हैं और सभी हंस पड़ते हैं.

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पंचतंत्र की कहानी: वंश की रक्षा (Panchtantra Ki Kahani: Frogs That Rode A Snake)

Panchtantra Ki Kahani

आज के हाईटेक युग में जब बच्चों को हर जानकारी कंप्यूटर/इंटरनेट पर ही मिल रही है, उनका पैरेंट्स से जुड़ाव कम हो रहा है. साथ ही उन्हें मोरल वैल्यूज़ (Moral Values) भी पता नहीं चल पाती, ऐसे में बेड टाइम स्टोरीज़ (Bed Time Stories) जैसे- पंचतंत्र (Panchtantra) की सीख देने वाली पॉप्युलर कहानियों के ज़रिए न स़िर्फ आपकी बच्चे से बॉन्डिंग स्ट्रॉन्ग होगी, बल्कि उन्हें अच्छी बातें भी पता चलती हैं.

Panchtantra Ki Kahani

पंचतंत्र की कहानी: वंश की रक्षा (Panchtantra Ki Kahani: Frogs That Rode A Snake)

एक पर्वत प्रदेश में मन्दविष नाम का एक बूढ़ा सांप रहता था. एक दिन वह विचार करने लगा कि ऐसा क्या उपाय हो सकता है, जिससे बिना परिश्रम किए ही उसकी आजीविका चलती रहे. उसने बहुत सोचा और उसके मन में एक विचार आया.
वह पास के मेंढकों से भरे तालाब के पास चला गया. वहां पहुंचकर वह बड़ी बेचैनी से इधर-उधर घूमने लगा. उसे घूमते देखकर तालाब के किनारे एक पत्थर पर बैठे मेंढक को आश्‍चर्य हुआ तो उसने पूछा, “आज क्या बात है मामा? शाम हो गई है, पर तुम भोजन-पानी की व्यवस्था नहीं कर रहे हो?”

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सांप बड़े दुखी मन से कहने लगा, “क्या करूं बेटा, अब मैं बूढ़ा हो चला हूं. मुझे तो अब भोजन की अभिलाषा ही नहीं रह गई है. आज सवेरे ही मैं भोजन की खोज में निकल पड़ा था. एक सरोवर के तट पर मैंने एक मेंढक को देखा. मैं उसको पकड़ने की सोच ही रहा था कि उसने मुझे देख लिया. पास ही कुछ ब्राह्मण तपस्या में लीन थे, वह उनके बीच जाकर कहीं छिप गया. उसको तो मैंने फिर देखा नहीं, पर उसके भ्रम में मैंने एक ब्राह्मण के पुत्र को काट लिया, जिससे उसकी तत्काल मृत्यु हो गई. उसके पिता को इसका बड़ा दुख हुआ और उस शोकाकुल पिता ने मुझे शाप देते हुए कहा, “दुष्ट सांप! तुमने मेरे पुत्र को बिना किसी अपराध के काटा है, अपने इस अपराध के कारण तुमको मेंढकों का वाहन बनना पड़ेगा.”

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मैं बस अपने पाप का प्रायश्‍चित करना चाहता हूं और तुम लोगों के वाहन बनने के उद्देश्य से ही मैं यहां तुम लोगों के पास आया हूं.
मेंढक सांप से यह बात सुनकर अपने परिजनों के पास गया और उनको भी उसने सांप की वह बात बता दी. इस तरह से यह बात सब मेढकों तक पहुंच गई.

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उनके राजा जलपाद को भी इसकी ख़बर लगी. उसको यह सुनकर बड़ा आश्‍चर्य हुआ. सबसे पहले वही सांप के पास जाकर उसके फन पर चढ़कर बैठ गया. उसे चढ़ा हुआ देखकर अन्य सभी मेंढक उसकी पीठ पर चढ़ गए. सांप ने किसी को कुछ नहीं कहा.

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मन्दविष ने उन्हें तरह-तरह के करतब दिखाए. सांप की कोमल त्वचा का स्पर्श पाकर जलपाद तो बहुत ही प्रसन्न हुआ. इस प्रकार एक दिन निकल गया.

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दूसरे दिन जब वह उनको बैठाकर चला, तो उससे चला नहीं गया.  उसको देखकर जलपाद ने पूछा, “क्या बात है, आज आप चल नहीं पा रहे हैं?”
“हां, मैं आज भूखा हूं और इस उम्र में कमज़ोरी भी बहुत हो जाती है, इसलिए चलने में कठिनाई हो रही है.”

जलपाद बोला, “अगर ऐसी बात है, तो आप परेशना न हों. आप आराम से साधारण कोटि के छोटे-मोटे मेंढकों को खा लिया कीजिए और अपनी भूख मिटा लिया कीजिए.”

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इस प्रकार वह सांप अब रोज़ बिना किसी परिश्रम के अपना भोजन करने लगा. किन्तु वह जलपाद यह भी नहीं समझ पाया कि अपने क्षणिक सुख के लिए वह अपने वंश का नाश करने का भागी बन रहा है. धीरे-धीरे सांप ने अपनी चालाकी से सभी मेंढकों को खा लिया और उसके बाद एक दिन जलपाद को भी खा गया. इस तरह मेंढकों का पूरा वंश ही नष्ट हो गया.

 

सीख: अपने हितैषियों की रक्षा करने से हमारी भी रक्षा होती है.

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