Tag Archives: motivational

Kids Story: राजा और लेखक (Kids Story: Raja Aur Lekhak)

Raja Aur Lekhak

Raja Aur Lekhak

Kids Story: राजा और लेखक (Kids Story: Raja Aur Lekhak)

एक नगर में एक राजा था. एक दिन वो यूं ही टहलने निकला. घूमते-घूमते उसे किताबों का एक बड़ा-सा संग्रहालय नज़र आया. राजा उसमें गया, तो वहां ढेर सारी किताबें देखकर ख़ुश हो गया. राजा को लगा एक ही जगह पर इतनी सारी ज्ञानवर्द्धक किताबें तो बेहद फ़ायदेमंद है. राजा को उन किताबों में से एक किताब बहुत पसंद आई. वो उस किताब को लेकर घर चला आया. किताब पढ़कर राजा उस लेखक से बहुत प्रभावित हुआ, क्योंकि उसमें लेखक ने लिखा था कि किस तरह से उसने अपना सारा जीवन अकेले ही बिता दिया. उस लेखक ने अपने बीवी-बच्चों पर ज़रा भी ध्यान नहीं दिया और संपूर्ण जीवन समाज में भ्रमण करके बिता दिया.

राजा ने सोचा वो भी अपना पूरा जीवन समाज में भ्रमण करके ही बिताएगा. राजा ने सोचा कि पहले मैं उस लेखक से भी मिल लेता हूं, जिसने ये किताब लिखी है. राजा उस लेखक के गांव जाकर उसके घर गया. वहां जाकर राजा ने देखा कि वो लेखक तो मज़े से अपने बीवी-बच्चों के साथ रह राह है. राजा को बहुत दुख भी हुआ और गुस्सा भी आया कि इसकी किताब पढ़कर मैं समाज भ्रमण के लिए निकल रहा था, पर ये तो मज़े से यहां रह रहा है और किताब में गलत बात लिखी है.

यह भी पढ़ें: Kids Story: जलपरी और दो चोर (Kids Story: Jalpari And Two Thieves)

राजा ने उस किताब को दिखाते हुए लेखक से गुस्से में पूछा कि उसने यह झूठ क्यों लिखा? लेखक ने राजा से कहा कि यह किताब उसने समाज में भटके हुए लोगों को सही राह दिखाने के इरादे से लिखी है. लेखक ने कहा कि मेरा काम है समाज के लोगों का मार्गदर्शन करना, ताकि लोग अपना जीवन सुधार सकें. लेखक ने राजा से अपने साथ बाहर चलने को कहा. वो राजा को एक भाला बनाने वाले के पास ले गया और उसे एक अच्छा सा भाला दिखाने को कहा.

भाला लेकर लेखक ने राजा से कहा कि यह देखिए इस भाले को. राजा ने कहा मैं क्या करूं इसका. लेखक ने कहा कि यह भाला यह दुकान वाला बनाता है, फिर उसने दुकान वाले से कहा कि तुम भाला इतना अच्छा बनाते हो, तो क्या तुम युद्ध में नहीं जा सकते?

भाला बनाने वाले ने हंसते हुए कहा कि यह मेरा काम नहीं है. युद्ध में तो बड़े-बड़े वीर योद्धा जाते हैं, तो मैं कैसे जा सकता हूं, क्योंकि मेरा काम उनके लिए अच्छे से अच्छा भाला बनाने का है, युद्ध लड़ना उनका काम है. उसकी बात सुनकर लेखक ने राजा से कहा कि इसी तरह मेरा काम दूसरों को अपने लेखन के ज़रिए जीने की कला सिखाना है, इसका यह मतलब नहीं कि वह जीवन या वह कला मैं ख़ुद जानता हूं.

लेखक के तर्क से राजा समझ गए कि दरअसल उस किताब में लिखी बातों का क्या अर्थ है. राजा ख़ुश हुआ, लेखक और भाला बनाने वाले को ईनाम देकर वह वापस अपने महल लौट आया, ताकि एक शासक की तरह अपनी जनता का ख़्याल रख सके.

यह भी पढ़ें: Fairy Tales: ब्यूटी एंड द बीस्ट… (Beauty And The Beast)

Kids Story: जलपरी और दो चोर (Kids Story: Jalpari And Two Thieves)

 

Kids Story

Kids Story: जलपरी और दो चोर (Kids Story: Jalpari And Two Thieves)

दूर किसी जगह पर एक नीली झील थी, जहां एक जलपरी रहती थी. उस जलपरी का नियम था कि वो रोज़ शाम को कुछ समय के लिए बाहरी दुनिया में आती थी. कुछ समय बिताती और फिर नियमित समय पर लौट जाती. एक बार वहां से दो चोर जा रहे थे और उन्होंने जलपरी को देख लिया. उसे देखकर दोनों ने एक योजना बनाई कि क्यों न इसे पकड़कर हम शहर में बेच आएं, जिससे हमें अच्छे ख़ासे पैसे मिलेंगे.

दोनों ने मछली पकड़नेवाला जाल ख़रीदा और अगले दिन झील के किनारे इंतज़ार करने लगे. तभी उनकी नज़र एक लड़के पर पड़ी. वो भी वहां मछलियां पकड़ने आया था. दोनों चोरों ने उस लड़के से कहा कि यहां से भाग जाए, क्योंकि यह उनका इलाका है. उस लड़के ने कहा कि इस झील का किनारा काफ़ी दूर तक फैला है और यह बहुत बड़ी झील है, तो आप लोग यहां मछलियां पकड़ो, मैं थोड़ी दूर पर जाकर मछलियां पकड़ता हूं.

 

यह भी पढ़ें: Fairy Tales: ब्यूटी एंड द बीस्ट… (Beauty And The Beast)

उसकी बात सुनकर दोनों चोरों को बहुत ग़ुस्सा आया. उन्होंने उस लड़के से कहा कि वो यहां से तुरंत चला जाए, वरना उसकी पिटाई होगी. वो लड़का उन दोनों के इरादों से अंजान था, उसे हैरानी हुई, इसलिए वो थोड़ी दूर जाकर पेड़ के पीछे छिप गया.

Mermaid

थोड़ी देर बाद वो जलपरी बाहर आई, उसे देखकर लड़का भी हैरान हो गया. वो जलपरी बेहद ख़ूबसूरत थी. दोनों चोरों ने जलपरी पर जाल फेंक दिया. यह देखकर वो लड़का वहां आ गया. एक चोर ने अपने साथी से कहा कि तुम जलपरी को देखो, मैं इस लड़के को ठिकाने लगाता हूं. लड़के के पास एक बड़ा सा डंडा था, जिससे उसने चोर की ख़ूब पिटाई की. अपने साथी को पिटता देख, दूसरा चोर भी मदद के लिए आ गया. मौक़ा देखकर जलपरी जाल से छूट गई और झील में चली गई.

दोनों चोर मिलकर उस लड़के को पीटने लगे कि तभी वहां एक बड़ा-सा मगरमच्छा आ गया और दोनों चोरों पर हमला कर दिया. किसी तरह मगर से बचकर दोनों चोर भाग खड़े हुए.

दरअसल, उस मगर को जलपरी ने ही लड़के की मदद के लिए भेजा था. इस तरह वो लड़का रोज़ वहां आने लगा और जलपरी भी रोज़ उससे मिलने लगी. दोनों में बहुत ही गहरी दोस्ती हो गई.

सीख: हमेशा दूसरों की मदद के लिए आगे आना चाहिए. किसी को मुसीबत में देखकर भागना नहीं चाहिए, बल्कि ग़लत लोगों के इरादे भांपकर सही निर्णय लेना चाहिए.

यह भी पढ़ें: अकबर-बीरबल की कहानी: तेली और कसाई (Akbar-Birbal Tale: The Oil Man And The Butcher)

अकबर-बीरबल की कहानी: तेली और कसाई (Akbar-Birbal Tale: The Oil Man And The Butcher)

Akbar Birbal Ki Kahani

अकबर-बीरबल की कहानी: तेली और कसाई (Akbar-Birbal Tale: The Oil Man And The Butcher)

बादशाह अकबर (Akbar) का दरबार लगा हुआ था. तभी दरबान ने सूचना दी कि दो व्यक्ति अपने झगड़े का निपटारा करवाने के लिए आना चाहते हैं. बादशाह ने दोनों को बुलवा लिया. दोनों दरबार में आ गए और बादशाह के सामने सिर झुकाकर खड़े हो गए.

बादशाह ने पूछा कि कहो क्या समस्या है?

मेरा नाम काशी है, मैं तेल बेचने का काम करता हूं और हुजूर यह कसाई है. इसने मेरी से तेल खरीदा और साथ में मेरी पैसों की भरी थैली भी ले गया. जब मैंने इसे पकड़ा और अपनी थैली मांगी तो यह उसे अपनी बताने लगा, अब आप ही न्याय करें.

बादशाह ने दूसरे व्यक्ति से पूछा कि अब तुम कहो तुम्हें क्या कहना है?

कसाई से कहा- मेरा नाम रमजान है. जब मैंने अपनी दुकान पर आज मांस की बिक्री के पैसे गिनकर थैली जैसे ही उठाई, यह तेली आ गया और मुझसे यह थैली छीन ली. अब उस पर अपना हक जमा रहा है. आप ही न्याय करें.

राजा को समझ में नहीं आ रहा था कि दोनों में से कौन सच बोल रहा है और कौन झूठ. दोनों की बातें सुनकर बादशाह सोच में पड़ गए और उन्होंने बीरबल से फैसला करने को कहा.

बीरबल ने वो पैसों की थैली ले ली और दोनों को कुछ देर के लिए बाहर भेज दिया. बीरबल ने सेवक से एक कटोरे में पानी मंगवाया और उस थैली में से कुछ सिक्के निकालकर पानी में डाले और पानी को गौर से देखा. फिर बादशाह से कहा- ये सिक्के रमजान कसाई के हैं.

बादशाह ने हैरान होकर पूछा कि भला बीरबल को कैसे पता चला?

बीरबल ने बादशाह को समझाया कि काशी एक तेली है, लेकिन इस पानी में सिक्के डालने से तेल का ज़रा-सा भी अंश पानी में नहीं उभर रहा है. अगर यह सिक्के तेली के होते तो उन पर तेल लगा होता और वह तेल पानी में भी दिखाई देता.

बादशाह ने भी पानी को गौर से देखा और फिर बीरबल की बात से सहमत हो गए.

बीरबल ने उन दोनों को दरबार में बुलाया और कहा- मुझे पता चल गया है कि यह थैली किसकी है. यह थैली रमजान कसाई की है. काशी, तुम झूठ बोल रहे हो.

बीरबल ने सिक्के डले पानी वाला कटोरा उसे दिखाते हुए कहा- यदि यह थैली तुम्हारी है तो इन सिक्कों पर कुछ-न-कुछ तेल अवश्य होना चाहिए, पर तुम भी देख लो तेल तो अंश मात्र भी नज़र नहीं आ रहा है.

काशी चुप हो गया और अपनी ग़लती उसने मान ली.

बीरबल ने रमजान कसाई को उसकी थैली दे दी और काशी को कारागार में डलवा दिया.

यह भी पढ़ें: Fairy Tales: ब्यूटी एंड द बीस्ट… (Beauty And The Beast)

Fairy Tales: ब्यूटी एंड द बीस्ट… (Beauty And The Beast)

Beauty And The Beast Story in Hindi

Fairy Tales: ब्यूटी एंड द बीस्ट… (Beauty And The Beast)

एक शहर में एक व्यापारी अपनी तीन बेटियों के साथ रहता था. तीनों बेटियां बेहद सुंदर थीं, पर सबसे छोटी बेटी ब्यूटी सबसे ख़ूबसूरत और समझदार थी. इसी वजह से उसकी दोनों बहनें उससे ईर्ष्या रखती थीं. दोनों बड़ी बहनें बेहद स्वार्थी थीं और अपने पिता की दौलत उड़ाने में ही उनकी दिलचस्पी थी. ब्यूटी हमेशा अपने पिता का ख़्याल रखती और हर रात वो एक सुंदर से राजकुमार का सपना देखती. उसे यकीन था कि एक दिन उसे वो राजकुमार अपने साथ महल में ले जाएगा.

दिन गुज़र रहे थे कि एक दिन की बात है व्यापारी को ख़बर मिलती है कि उनके सारे जहाज़ समुद्री तूफ़ान में डूब गए और वो तबाह हो गए. इस मुश्किल घड़ी में ब्यूटी ने पिता को संभाला, जबकि बाकी बहनें दिनभर रोना रोती रहतीं.

एक दिन व्यापारी को ख़बर मिली कि उनका एक जहाज़ मिल गया है. वो बेहद ख़ुश हुए और बंदरगाह जाने से पहले अपनी बेटियों से पूछने लगे कि उन्हें क्या उपहार चाहिए. दोनों बड़ी बहनों से कपड़े और गहने मांगे, जबकि ब्यूटी ने कहा कि आप सही सलामत वापस आ जाओ, इसके अलावा कुछ नहीं चाहती मैं. पर पिता ने ज़ोर दिया, तो उसने कहा कि मेरे लिए एक गुलाब का फूल लेते आना.

पिता बंदरगाह चल दिए, पर वहां जाकर देखा कि जहाज़ पूरी तरह अस्त-व्यस्त था, सारा माल गायब था. वो फिर निराश हो गए. वापसी में रास्ते में बर्फीले तूफ़ान से उनका सामना हुआ. उनका घोड़ा आगे चल नहीं पा रहा था. ऐसे में कुछ देर रुक जाना ही उन्हें सही लगा.

अपने घोड़े को एक पेड़ के नीचे खड़ाकर उन्होंने देखा कि कुछ दूरी पर रोशनी-सी चमक रही थी. वो उस तरफ़ चल पड़े. वहां जाकर देखा कि एक आलीशान महल था और वहां तूफ़ान का भी कोई असर नहीं था. बड़े से सोने के दरवाज़े से वो अंदर गए. वहां जाकर आवाज़ लगाई, पर वहां कोई नहीं था. अंदर जाकर उन्होंने देखा, खाने की मेज़ सजी हुई थी. उन्होंने इंतज़ार किया, पर जब कोई नहीं आया, तो भूख से व्याकुल उन्होंने खाना खा लिया. फिर ऊपर के कमरे की ओर जाकर देखा कि आरामदायक बिस्तर लगा हुआ था. वो आराम से सो गए.

Beauty Aur Beast Kahani

सुबह नींद खुली तो अपने कमरे में नए कपड़े देखे, उन्होंने नहाने के बाद कपड़े पहने और नीचे आ गए. नीचे नाश्ते का टेबल सजा हुआ था. लज़ीज़ नाश्ता करके उन्होंने ज़ोर से कहा कि आप जो कोई भी हैं, बड़े दयालू हैं. आपकी मेज़बानी के लिए धन्यवाद, अब मैं जा रहा हूं. जैसे ही वो बाहर गया, तो सामने गुलाबों का बगीचा था, जिसमें ख़ूबसूरत बैंगनी रंग के गुलाब लगे हुए थे. व्यापारी ने सोचा वो ब्यूटी की इच्छा तो पूरी कर ही सकता है, इसलिए उसने एक गुलाब तोड़ लिया. पर जैसे ही उसने गुलाब तोड़ा, अचानक धरती हिलने लगी और किसी के तेज़ गुर्राने की आवाज़ आने लगी. व्यापारी कुछ समझ पाता, इससे पहले ही उन्होंने देखा कि सामने से एक भीमकाय, दानवी आकृति चली आ रही है. उसके दांत और पंजे चाकू से भी तेज़ थे. वो जीता-जागता दानव था. उसने व्यापारी से कहा कि तुमको मेरे बगीचे से गुलाब तोड़ने की इजाज़त किसने दी. मैंने तुम्हारा इतना सत्कार किया और तुमने इस तरह से मेरा आभार प्रकट किया. इसकी सज़ा तुम्हें मिलनी चाहिए.

यह भी पढ़ें: तेनालीराम: महामूर्ख की उपाधि (Tenali Rama: The Fool Of The Year)

 

Beauty And The Beast

यह सुनकर व्यापारी डर गया. उसने कहा कि आप इतनी दयालू हैं, इसलिए मुझे लगा कि एक गुलाब तोड़ने पर आप नाराज़ नहीं होंगे. ये गुलाब भी मैंने अपनी बेटी की इच्छा पूरी करने के लिए तोड़ा था. यह सुनकर दानव की आंखें चमकने लगीं, वो बोला, तुम्हारी बेटी है? तो मेरे पास तुम्हारे लिए एक प्रस्ताव है, जिससे तुम्हारी जान बच सकती है.

व्यापारी ने कहा, मुझे क्षमा कर दें और अपना प्रस्ताव बताएं, क्योंकि मेरी तीन बेटियां मेरा इंतज़ार कर रही हैं.

दानव और ख़ुश हो गया. तुम्हारी तीन बेटियां हैं, तब तो बहुत अच्छा है. उनमें से किसी एक से कहो कि वो यहां आकर रहे. मैं उसे अपने पास इस महल में रखूंगा, इसके बदले तुम्हें आज़ादी मिलेगी.

व्यापारी ने कहा कि ठीक है, मैं घर जाकर अपनी बेटियों को बताता हूं, मुझे यकीन है कि उनमें से कोई न कोई ज़रूर तैयार हो जाएगी. मैं वापसी का वादा करता हूं.

बीस्ट ने कहा कि मैं तुम्हें अपना सबसे तेज़ घोड़ा देता हूं और एक महीने का समय, लेकिन तुम्हारी बेटी को यहां अपनी मर्ज़ी से आना होगा, ज़ोर-ज़बर्दस्ती से नहीं. अगर तुम एक महीने में नहीं आए, तो मैं ख़ुद तुम्हें ढूंढ़ने आऊंगा.

व्यापारी ने भले ही यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया था, पर उसे यही लग रहा था कि उसकी कोई भी बेटी तैयार नहीं होगी और उसकी मौत निश्‍चित है. घर जाकर सारी बातें बताईं. दोनों बहनें ब्यूटी पर क्रोधित हो उठीं कि ये सब तुम्हारे गुलाब की वजह से हुआ.
ब्यूटी ने कहा कि मैं पिताजी का वादा निभाने के लिए उनके साथ जाऊंगी. व्यापारी बेहद दुखी था कि उसके कारण यह दुर्भाग्य आया है. ब्यूटी ने समझाया और पिता का हौसला बढ़ाया. व्यापारी यही कहता रहा कि ब्यूटी अपनी ज़िंदगी जीओ, उसे यूं मुझ बूढ़े के लिए ख़राब मत करो.

Beauty And The Beast in Hindi

ब्यूटी ने कहा कि मैं इसका सामना कर सकती हूं. मुझमें हिम्मत है. आप घबराएं नहीं. दोनों जल्द ही आलिशान महल में पहुंच गए. वहां बढ़िया खाना मेज़ पर सजा हुआ था. दोनों ने खाना खाना शुरू किया. कुछ ही देर में बीस्ट वहां आ पहुंचा, जिसे देखकर ब्यूटी बेहद घबरा गई. बीस्ट ने ब्यूटी से पूछा कि क्या वो अपनी मर्ज़ी से यहां आई है, तो ब्यूटी ने सहमति जताई. बीस्ट ने कहा कि क्या तुम अपने पिताजी के बगैर मेरे साथ यहां रहने के लिए तैयार हो, तो ब्यूटी ने हां कहा.

बीस्ट ने व्यापारी से कहा कि आप अपने घोड़े के पास जाएं, वहां सोने से भरे ट्रंक हैं, जो आपकी दोनों बेटियों के लिए है. व्यापारी ने भारी मन से ब्यूटी से विदा ली. बीस्ट ने ब्यूटी को भी ऊपर जाकर आराम करने की सलाह दी. ब्यूटी ने ऊपर जाकर देखा कि बेहद ख़ूबसूरत कमरा उसके लिए तैयार था. वो सो गई. सुबह उठी तो उसकी ज़रूरत व शृंगार का हर सामान तैयार था. वो तैयार होकर नीचे आई, तो लज़ीज़ खाना मिला. खाना खाकर वो आराम ही कर रही थी कि बीस्ट ने उसके पास आकर पूछा कि क्या वो बदसूरत और डरावना है, तो ब्यूटी ने हां में गर्दन हिला दी. फिर बीस्ट ने पूछा क्या वो उससे शादी करेगी, बिना डरे उसे जवाब दे, तो ब्यूटी ने मना कर दिया. जवाब सुनकर बीस्ट चला गया. ब्यूटी हैरान थी कि इंकार करने पर भी बीस्ट नाराज़ नहीं हुआ, न ही ज़बर्दस्ती की.

Beauty And The Beast Hindi Story

बीस्ट हर रात को खाने के बाद ब्यूटी से शादी की बात कहता और ब्यूटी जब मना कर देती, तो वो बेहद उदास व दुखी होकर लौट जाता. धीरे-धीरे दिन गुज़रते गए. अब ब्यूटी को बीस्ट से डर नहीं लगता था. वो उसके नेक दिल का सम्मान करती थी. बीस्ट उसके लिए पियानो भी बजाता और लंबी-लंबी बातें करता. आलिशान महल में रहना ब्यूटी को अच्छा तो लग रहा था, लेकिन अब उसे अपने पिता की याद सताने लगी थी.

ब्यूटी को उदास देखकर बीस्ट ने पूछा, तो ब्यूटी ने एक हफ़्ते के लिए घर जाने की इच्छा जताई. बीस्ट ने कहा कि वो ब्यूटी की इच्छा को पूरा करेगा, लेकिन कहीं ऐसा तो नहीं कि ब्यूटी अपनी नफ़रत के कारण उससे दूर जाना चाह रही हो. ब्यूटी ने कहा कि वो बीस्ट से नफ़रत नहीं करती और उसे अकेला छोड़कर जाने का उसे भी अफ़सोस है. बीस्ट ने कहा कि तुम जा सकती हो, पर यदि समय पर वापस नहीं आई, तो मेरी मौत निश्‍चित है.

ब्यूटी ने कहा वो ऐसा नहीं होने देगी. बीस्ट ने उसे एक अंगूठी देकर कहा कि इसे पहनकर सो जाओ और जब तुम उठोगी, तो अपने पिता के घर पर होगी. जब तुम्हारी वापस आने की इच्छा हो, तो यह अंगूठी उतार देना, तुम फिर इस महल में आ जाओगी.
ब्यूटी बेहद ख़ुश थी. अगली सुबह उसने ख़ुद को अपने घर पर अपने बिस्तर पर पाया. पिता से मिलकर वो भावुक हो गई. पिता भी बेहद ख़ुश थे. एक हफ़्ता गुज़र गया, पर ब्यूटी महल में वापस जाने की बात भूल गई थी.

Beauty Aur Beast Kahani

एक रात उसे सपना आया कि बीस्ट ज़मीन पर गिरा हुआ है और बस मौत के क़रीब है. वो बेहद डर गई और उसने वापस जाने का निर्णय लिया. सबसे अलविदा कहकर उसने अंगूठी उतारी और अगली सुबह वो महल में पहुंच गई. वो फ़ौरन उस बगीचे में गई, जहां सपने में उसने बीस्ट को मरते हुए देखा था. वो चौंक गई, क्योंकि बीस्ट सचमुच में बेहोशी की हालत में था. ब्यूटी ने पानी के छींटें मारे, तो बीस्ट को होश आया. उसे होश में आया देख ब्यूटी ख़ुशी से झूम उठी और उसे यह एहसास हुआ कि बीस्ट उसके दिल में जगह बना चुका था.

ब्यूटी ने कहा कि मैं बुरी तरह डर गई थी, अगर आपको कुछ हो जाता, तो मैं ख़ुद को कभी माफ़ नहीं करती. मैं आपसे बेहद प्यार करती हूं.
यह सुनकर बीस्ट ने कहा कि क्या तुम मुझ जैसे बदसूरत व अजीब से दिखनेवाले प्राणी से प्यार कर सकती हो?

ब्यूटी ने कहा क्यों नहीं, आपका दिल इतना सुंदर है कि कोई भी आपसे प्यार कर सकता है. मुझे जीवन में और कुछ नहीं चाहिए.
बीस्ट ने पूछा, क्या तुम मुझसे शादी करोगी?

ब्यूटी ने कहा कि हां, करूंगी.

यह सुनते ही बीस्ट के चारों तरफ़ रौशनी का साया मंडराने लगा और वो एक ख़ूबसूरत नौजवान में बदल गया.

ये देख ब्यूटी हैरान थी, क्योंकि ये वही नौजवान था, जिसके सपने वो देखती थी. उसने राजकुमार को बताया कि वो अक्सर उसके सपनों में आता था. राजकुमार ने बताया कि तुम्हारी वजह से मुझे एक भयंकर शाप से मुक्ति मिली. एक चुडैल को मैंने लड़ाई में हराया था, जब वो मर रही थी, तो उसने मुझे शाप दिया था कि मैं इतना कुरूप हो जाऊंगा कि कोई मुझसे प्यार नहीं करेगा. उसके शाप से मैं भयंकर दरिंदे में बदल गया था, पर तुम्हारे सच्चे प्यार ने मुझे फिर से जीवन दे दिया.

Beauty And The Beast Hindi Kahani

राजकुमार ब्यूटी को उसके घर ले गया, जहां उसके पिता से उसका हाथ मांगा. दोनों ने शादी की और ख़ुशी-ख़ुशी रहने लगे.

सीख: सुंदरता स़िर्फ तन की नहीं होती, उससे कहीं बड़ी सुंदरता मन की होती है, जिससे सारा जग जीता जा सकता है. चेहरा समय के साथ बदल जाता है, पर मन की ख़ूबसूरती हमेशा बरक़रार रहती है. इसलिए बाहरी सुंदरता से आकर्षित होने की बजाय मन की सुंदरता का सम्मान करना सीखें.

यह भी पढ़ें: पंचतंत्र की कहानी: दो दोस्त और बोलनेवाला पेड़ (Panchtantra Story: Two Friends And A Talking Tree)

अकबर-बीरबल की कहानी: जोरू का गुलाम (Akbar-Birbal Tale: Joru Ka Ghulam)

 

Akbar Aur Birbal

अकबर-बीरबल की कहानी: जोरू का गुलाम (Akbar-Birbal Tale: Joru Ka Ghulam)

बादशाह अकबर और बीरबल आपस में बातें कर रहे थे. बातों ही बातों में बात मियां-बीवी के रिश्ते पर चल निकली तो बीरबल ने कहा- अधिकतर मर्द जोरू के गुलाम ही होते हैं और अपनी बीवी से डरते हैं.

यह सुनकर बादशाह ने असहमति जताई और कहा कि मैं नहीं मानता.

यह सुन बीरबल ने कहा कि हुजूर, मैं यह बात सिद्ध कर सकता हूं.

बादशाह भी तैयार हो गए और कहा कि सिद्ध करो.

बीरबल ने कहा कि आप आज ही से आदेश जारी करें कि किसी के भी अपने बीवी से डरने की बात साबित हो जाती है तो उसे एक मुर्गा दरबार में बीरबल के पास में जमा करना होगा. बादशाह ने आदेश जारी कर दिया.

कुछ ही दिनों में बीरबल के पास ढेरों मुर्गे जमा हो गए, तब उसने बादशाह से कहा- अब तो इतने मुर्गे जमा हो गए हैं कि आप मुर्गीखाना खोल सकते हैं. अब तो मानते हैं न कि मेरी बात सिद्ध हो गई? अतः अब आप अपना आदेश वापस ले लें.

यह भी पढ़ें: अकबर-बीरबल की कहानी: राज्य के कौवों की गिनती (Akbar-Birbal Tale: How Many Crows In The Kingdom)

बादशाह को न जाने क्या मज़ाक सूझा कि उन्होंने अपना आदेश वापस लेने से इंकार कर दिया. खीजकर बीरबल लौट आया और अगले दिन बीरबल दरबार में आया तो बादशाह अकबर से बोला- हुजूर, विश्‍वसनीय सूत्रों से पता चला है कि पड़ोसी राजा की पुत्री बेहद खूबसूरत है, आप कहें तो आपके विवाह का प्रस्ताव भेजूं?

यह क्या कह रहे हो तुम, कुछ तो सोचो, जनानाखाने में पहले ही दो हैं, अगर उन्होंने सुन लिया तो मेरी खैर नहीं.
बादशाह की यह बात सुनकर बीरबल ने कहा- हुजूर, दो मुर्गे आप भी दे ही दें अब.

बीरबल की बात सुनकर बादशाह झेंप गए और उन्होंने तुरंत अपना आदेश वापस ले लिया.

यह भी पढ़ें: पंचतंत्र की कहानी: तीन काम (Panchtantra Story:Three Tasks)

अकबर-बीरबल की कहानी: राज्य के कौवों की गिनती (Akbar-Birbal Tale: How Many Crows In The Kingdom)

Akbar Birbal Story

अकबर-बीरबल की कहानी: राज्य के कौवों की गिनती (Akbar-Birbal Tale: How Many Crows In The Kingdom)

एक दिन राजा अकबर और बीरबल राज महल के बगीचे में टहल रहे थे. बहुत ही सुंदर सुबह थी. कई तरह के पंछी चहक रहे थे. वहीं तालाब के पास ही बहुत सारे कौवे भी आस-पास उड़ रहे थे. उन कौवों को देखते ही बादशाह अकबर के मन में एक सवाल उत्पन्न हुआ. उनके मन में यह सवाल आया कि उनके राज्य में कुल कितने कौवे होंगे?

बीरबल तो उनके साथ ही बगीचे में टहल रह थे, तो राजा अकबर ने बीरबल से ही यह सवाल कर डाला और पूछा कि बताओ बीरबल, आख़िर हमारे राज्य में कितने कौवे हैं? तुम तो बड़े चतुर हो, तुम्हें हर सवाल का उत्तर पता होता है.

यह सुनते ही चालाक बीरबल ने तुरंत उत्तर दिया कि महाराज, हमारे राज्य में कुल 95,463 कौवे हैं, आप चाहें तो गिनती करवा सकते हैं.
महाराज अकबर इतने तेज़ी से दिए हुए उत्तर को सुन कर हक्का-बक्का रह गए और उन्होंने बीरबल की परीक्षा लेने की सोची.

यह भी पढ़ें: अकबर-बीरबल की कहानी: बीरबल की खिचड़ी (Akbar-Birbal Tale: Birbal’s Stew)

Akbar Aur Birbal Ki Kahani

महाराज ने बीरबल से दोबारा सवाल किया- अगर तुम्हारी गणना के अनुसार कौवे ज़्यादा हुए तो?

बिना किसी संकोच के बीरबल बोले, हो सकता है महाराज, किसी पड़ोसी राज्य के कौवे हमारे राज्य में घूमने आये हों.

राजा फिर बोले- और अगर गिनती में कम कौवे हुए तो?

बीरबल ने फिर तपाक से उत्तर दिया- महाराज, हो सकता है हमारे राज्य के कुछ कौवे अपने किसी अन्य राज्यों के रिश्तेदारों के यहां घूमने गए हों.

यह सुन अकबर बेहद ख़ुश हुए, क्योंकि बीरबल ने अपनी चतुराई एक बार फिर साबित कर दी.

सीख: प्रश्‍न भले ही कितने मुश्किल क्यों न हों, बिना घबराई बुद्धि व चतुराई से काम लेना चाहिए. दुनिया का कोई ऐसा सवाल नहीं, जिसका जवाब न हो, बस ज़रूरत है, विवेक, धैर्य व बुद्धि की.

यह भी पढ़ें: पंचतंत्र की कहानी: जादुई चक्की (Panchtantra Story: The Magic Mill)

सुविचार- Inspirational Quotes – Quote of the day

गिन लेती है दिन बग़ैर मेरे गुज़ारे हैं कितने… भला कैसे कह दूं कि मां अनपढ़ है मेरी!

परिवार और उसमें भी मां का दर्जा सबसे ऊंचा होता है, ऐसे ही मर्मस्पर्शी सुविचार परिवार और मां से संबंधित आप पढ़ें और अपनी भावनाओं को फिर उन्हीं बचपन की यादों में महसूस करें, जहां मां के सीने से लगकर ही दुनिया की हर ख़ुशी मिल जाया करती थी.

 

Inspirational Quotes in Hindi

 

Inspirational Quotes in Hindi

Inspirational Quotes in Hindi

Inspirational Quotes

यह भी पढ़ें: सुविचार- Inspirational Quotes – Quote of the day

तेनालीराम और मूर्ख चोर (Tenali Rama And Foolish Thieves)

Tenali Rama Story

तेनालीराम और मूर्ख चोर (Tenali Rama And Foolish Thieves)

एक बार विजय नगर में बहुत अधिक गर्मी पड़ी. ऐसी भीषण गर्मी कि सूखे की नौबत आ गई. नदियों और तालाबों का जल स्तर घट गया. तेनालीराम के घर के पीछे भी एक बड़ा बाग था, जो सूखता जा रहा था. उसके बाग के बीच में एक कुआं था, मगर उसका पानी इतना नीचे चला गया था कि दो बाल्टी जल खींचना भी बेहद मुश्किल लग रहा था.

तेनालीराम को बाग की चिंता सताने लगी. एक शाम तेनालीराम अपने बेटे के साथ बाग का निरीक्षण कर रहा था और सिंचाई के विषय में ही बात कर रहा था. वो सोच रहा था कि सिंचाई के लिए मज़दूर को लगाया जाए या नहीं, लेकिन मज़दूर लगाएंगे, तो ख़र्चा भी बहुत अधिक होगा. इतने में ही उसकी नज़र तीन-चार व्यक्तियों पर पड़ी जो सड़क के दूसरी पार एक वृक्ष के नीचे खड़े उसके मकान की ओर देख रहे थे और फिर एक-दूसरे से संकेत व इशारों में कुछ बात कर रहे थे.

तेनालीराम को समझते देर नहीं लगी कि ये सेंधमार हैं और चोरी करने के इरादे से ही उसके मकान का मुआयना कर रहे हैं. तेनालीराम के मस्तिष्क में बाग की सिंचाई की एक युक्ति आ गई. उसने ऊंची आवाज़ में अपने पुत्र से कहा: बेटे! सूखे के दिन हैं. चोर-डाकू बहुत घूम रहे हैं. गहनों और अशर्फियों का वह संदूक घर में रखना ठीक नहीं. आओ, उस संदूक को उठाकर इस कुएं में डाल दें, ताकि कोई चुरा न सके.

अपनी बात कहकर तेनालीराम बेटे के साथ घर के भीतर चला गया. मन ही मन में वह कह रहा था… आज इन चोरों को ढंग का कुछ काम करने का मौका मिलेगा. अपने बाग की सिंचाई भी हो जाएगी. बाप-बेटे ने मिलकर एक सन्दूक में कंकर-पत्थर भरे और उसे उठाकर कुएं में फेंक दिया.

यह भी पढ़ें: पंचतंत्र की कहानी: जादुई चक्की (Panchtantra Story: The Magic Mill)

तेनालीराम फिर ऊंचे स्वर में बोला, अब हमारा धन सुरक्षित है. उधर घर के पिछवाड़े खड़े चोर मन ही मन मुस्कराए. लोग तो व्यर्थ ही तेनालीराम को चतुर कहते हैं. यह तो निरा मूर्ख है. इतना भी नहीं जानता कि दीवारों के भी कान होते हैं. एक चोर ने अपने साथी से कहा: आओ चलें, आज रात इसका सारा खज़ाना हमारे कब्ज़े में होगा.

रात हुई और चोर अपनी योजना को अंजाम देने आए. वे बाल्टी भर-भर कुएं से पानी निकलते और धरती पर उड़ेल देते. उधर, तेनालीराम और उसका पुत्र पानी को क्यारियों की ओर करने के लिए खुरपी से नालियां बनाने लगे.

उन्हें पानी निकालते-निकालते सुबह के चार बज गए, तब कहीं जाकर संदूक का एक कोना दिखाई दिया. बस, फिर क्या था, उन्होंने कांटा डालकर संदूक बाहर खींचा और जल्दी से उसे खोला, तो यह देखकर हक्के-बक्के रह गए कि उसमें पत्थर भरे थे.

अब तो चोर सिर पर पैर रखकर भागे कि मूर्ख तो बन ही चुके हैं, अब कहीं पकड़े न जाएं. दूसरे दिन जब तेनालीराम ने यह बात महाराज को बताई तो वे खूब हंसे और बोले: कभी-कभी ऐसा भी होता है कि मेहनत तो कोई करता है और फल कोई और ही खाता है.

यह भी पढ़ें: पंचतंत्र की कहानी: तीन काम (Panchtantra Story:Three Tasks)

पंचतंत्र की कहानी: जादुई चक्की (Panchtantra Story: The Magic Mill)

Panchtantra Story
पंचतंत्र की कहानी: जादुई चक्की (Panchtantra Story: The Magic Mill)

आज के हाईटेक युग में जब बच्चों को हर जानकारी कंप्यूटर/इंटरनेट पर ही मिल रही है, उनका पैरेंट्स से जुड़ाव कम हो रहा है. साथ ही उन्हें मोरल वैल्यूज़ (Moral Values) भी पता नहीं चल पाती, ऐसे में बेड टाइम स्टोरीज़ (Bed Time Stories) जैसे- पंचतंत्र (Panchtantra) की सीख देने वाली पॉप्युलर कहानियों के ज़रिए न स़िर्फ आपकी बच्चे से बॉन्डिंग स्ट्रॉन्ग होगी, बल्कि उन्हें अच्छी बातें भी पता चलती हैं.

एक गांव में दो भाई रहते थे. बड़ा भाई बेहद अमीर था और छोटा उतना ही ग़रीब. दिवाली के दिन पूरा गांव ख़ुश था. लेकिन छोटा भाई दुखी था, क्योंकि उसके परिवार के पास तो खाने को भी कुछ नहीं था. वो मदद मांगने अपने भाई के पास गया, पर भाई ने दुत्कार दिया. वो दुखी मन से वापस आने लगा, तो रास्ते में एक बूढ़ा व्यक्ति मिला. उसने कहा कि इतने दुखी क्यों हो, आज तो दिवाली है. ख़ुशियों को त्योहार. इस पर छोटे भाई ने अपनी व्यथा सुनाई.

बूढ़े व्यक्ति ने कहा कि तुम मेरा ये लकड़ियों का ढेर अगर मेरे घर तक पहुंचा दो, तो मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूं और तुम्हें अमीर बना सकता हूं. छोटा भाई मान गया और घर पहुंचने पर बूढ़े व्यक्ति ने उसे एक मालपुआ देकर कहा कि ये जंगल में लेकर जाओ. वहां तुम्हें तीन अजीब पेड़ दिखेंगे, जिसके पास एक चट्टान होगी. चट्टान के कोने में एक गुफा नज़र आएगी. उस गुफा में जाओगे, तो तुम्हें तीन बौने मिलेंगे. ये मालपुआ उन्हें देना, क्योंकि उनको यह बेहद पसंद है और इसके लिए वो हर क़ीमत चुकाने को तैयार होंगे, पर तुम उनसे धन मत मांगना. तुम कहना कि मुझे पत्थर की चक्की दे दो.

यह भी पढ़ें: पंचतंत्र की कहानी: दो दोस्त और बोलनेवाला पेड़ (Panchtantra Story: Two Friends And A Talking Tree)

Panchtantra Story

छोटे भाई ने वैसा ही किया, जैसा बूढ़े व्यक्ति ने कहा. चक्की लेकर जब छोटा बाहर जाने लगा, तब एक बौने ने कहा कि यह कोई मामूली चक्की नहीं है. इसे चलाने पर तुम जो मांगोगे वो मिलेगा. इच्छा पूरी होने पर इस पर लाल कपड़ा डाल देना, सामान निकलना बंद हो जाएगा.

छोटा घर पहुंचा, तो उसने चक्की को आज़माया. उसने चावल मांगा, फिर दाल मांगी… इस तरह खाने का ढेरों सामान उसे मिल गया, जिससे परिवार की भूख मिट गई. लाल कपड़े से चक्की को ढंककर वो चैन की नींद सो गया.

चक्की से निकला जो भी सामान बचा, उसे वो अगले दिन बाज़ार जाकर बेच आया. इस तरह से वो कुछ न कुछ सामान चक्की से निकालकर बाज़ार में बेच आता, कभी बादाम, कभी घी, नमक, मसाले, कपास आदि. देखते ही देखते वो बेहद अमीर हो गया.

उसकी तऱक्क़ी देखकर उसका बड़ा भाई जलने लगा. उसने सोचा कैसे ये इतना अमीर हो गया? एक रात वो छोटे के घर में छिप गया और उसने उस चक्की को देख लिया.

Panchtantra Story
अगले दिन जब छोटा बाज़ार गया था, तो बड़े ने चालाकी से घर में घुसकर चक्की को चुरा लिया. उसने सोचा वो यह गांव छोड़कर दूर जा बसेगा, क्योंकि उसके हाथ ख़ज़ाना जो लग गया. वो जल्दबाज़ी में सब कुछ छोड़कर परिवार सहित भागने लगा. समंदर पर जाकर एक नाव में सवार हुआ, तो पत्नी ने पूछा कि यह सब क्या है. पत्नी को दिखाने के लिए उसने चक्की को कहा कि चक्की नमक निकाल. नमक निकलता गया. चूंकि बड़े भाई को चक्की को बंद करना नहीं आता था, तो नमक के बोझ से नाव सहित पूरा परिवार ही डूब गया. कहते हैं कि वो चक्की अब भी चल रही है, इसीलिए समंदर का पानी खारा है.

सीख: लालच और ईर्ष्या बुरी बला है.

यह भी पढ़ें: विक्रम-बेताल की कहानी- पति कौन? (Vikram-Baital Story- The Groom)

पंचतंत्र की कहानी: दो दोस्त और बोलनेवाला पेड़ (Panchtantra Story: Two Friends And A Talking Tree)

 

Panchtantra Story

दो दोस्त और बोलनेवाला पेड़ (Panchtantra Story: Two Friends And A Talking Tree)

एक गांव में मनोहर और धर्मचंद नाम के दो दोस्त रहते थे. एक बार वे कमाने के लिए अपना गांव छोड़कर बाहर गए. दूसरे शहर से वो दोनों ख़ूब सारा धन कमाकर लाए. उन्होंने सोचा कि इतना सारा धन घर में रखेंगे, तो ख़तरा हो सकता है. बेहतर होगा कि इसे घर में न रखकर कहीं और रख दें, इसलिए उन्होंने उस धन को नीम के पेड़ की जड़ में गड्ढा खोदकर दबा दिया.

दोनों में यह भी समझौता हुआ कि जब भी धन निकालना होगा, साथ-साथ आकर निकाल लेंगे. मनोहर बेहद भोला और नेक दिल इंसान था, जबकि धर्मचंद बेईमान था. वह दूसरे दिन चुपके से आकर धन निकालकर ले गया, उसके बाद वह मनोहर के पास आया और बोला कि चलो कुछ धन निकाल लाते हैं. दोनों मित्र पेड़ के पास आए, तो देखा कि धन गायब है.

Two Friends And A Talking Tree Story

धर्मचंद ने फौरन मनोहर पर इल्ज़ाम लगा दिया कि धन तुमने ही चुराया है. दोनों मे झगड़ा होने लगा. बात राजा तक पहुंची, तो राजा ने कहा कि कल नीम की गवाही के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा. ईमानदार मनोहर ने सोचा कि ठीक है नीम भला झूठ क्यों बोलेगा?
धर्मचंद भी ख़ुशी-ख़ुशी मान गया. दूसरे दिन राजा उन दोनों के साथ जंगल में गया. उनके गांव के अन्य लोग भी थे. सभी सच जानना चाहते थे. राजा ने नीम से पूछा- हे नीमदेव बताओ धन किसने लिया है?

मनोहर ने… नीम की जड़ से आवाज़ आई.

यह सुनते ही मनोहर रो पड़ा और बोला- महाराज, पेड़ झूठ नहीं बोल सकता, इसमें ज़रूर किसी की कोई चाल है. कुछ धोखा है.
राजा ने पूछा कैसी चाल?

यह भी पढ़ें: पंचतंत्र की कहानी: खरगोश, तीतर और धूर्त बिल्ली (Panchtantra Story: The Hare, Partridge & Cunning Cat)

मैं अभी सिद्ध करता हूं महाराज. यह कहकर मनोहर ने कुछ लकड़ियां इकट्ठी करके पेड़ के तने के पास रखी और फिर उनमें आग लगा दी.
तभी पेड़ से बचाओ-बचाओ की आवाज़ आने लगी. राजा ने तुरंत सिपाहियों को आदेश दिया कि जो भी हो उसे बाहर निकालो. सिपाहियों ने फौरन पेड़ के खोल में बैठे आदमी को बाहर निकाल लिया. उसे देखते ही सब चौंक पड़े, क्योंकि वह धर्मचंद का पिता था. अब राजा सारा माजरा समझ गया.

Two Friends And A Talking Tree Hindi Story

उसने पिता-पुत्र को जेल में डलवा दिया और उसके घर से धन ज़ब्त करके मनोहर को दे दिया. साथ ही उसकी ईमानदारी सिद्ध होने पर और भी बहुत-सा ईनाम व धन दिया.

सीख: विपरीत परिस्थितियों में भी अपना आपा नहीं खोना चाहिए. अपनी समझ-बूझ से काम करना चाहिए. कठिन परिस्थितियों में भी डरने की बजाय उसका सामना करने की हिम्मत करें और शांत होकर अपने दिमाग से फैसले लें.

यह भी पढ़ें: तेनालीराम की कहानी : तेनालीराम और सोने के आम (Tenali Rama And The Golden Mangoes)

रोज़ाना चेक करें अपनी लाइफ का हैप्पीनेस मीटर (Check Your Daily Happiness Meter)

ज़िंदगी में हर रोज़ हम कुछ न कुछ नया सीखते या अनुभव करते हैं. कुछ चीज़ें हमें ख़ुशी देती हैं, तो कुछ तकलीफ़, पर ज़्यादातर लोग उन तकलीफ़ों के बोझ को ही रोज़ाना ढोते रहते हैं, जबकि हम सबको पता है कि जो व़क्त बीत रहा है, वो लौटकर कभी नहीं आएगा, तो क्यों न रोने की बजाय उसे हंसकर बिताएं. आज से ही एक नई शुरुआत करें, रोज़ाना कुछ अलग करें और देखें कि आज का आपका हैप्पीनेस मीटर कितना है.

Happiness

दिमाग़ी कचरा साफ़ करें

हम रोज़ अपने सबकॉन्शियस माइंड में न जाने कितने निगेटिव ख़्याल भर देते हैं और जब वो हमें परेशान करने लगते हैं, तो हम बेवजह दुखी रहने लगते हैं. आज ही ये सारा दिमाग़ी कचरा साफ़ करें.

–    आपके बारे में कौन क्या सोचता है, इस सोच को अपने दिमाग़ से निकाल दें, बल्कि ये सोचकर ख़ुश हो जाएं कि कोई आपके बारे में सोचता तो है.

–     अगर बातचीत के दौरान कोई ग़लतफ़हमी हो गई है, तो उसे तुरंत क्लीयर कर लें. जितनी जल्दी निगेटिव ख़्याल निकलेगा, उतनी जल्दी आपको ख़ुशी का एहसास होगा.

–     माफ़ कर देना और माफ़ी मांग लेना उतना भी कठिन नहीं है, जितना लोगों ने बना रखा है, इसलिए सॉरी कहने में बिल्कुल भी देर न करें. ख़ुद भी ख़ुश रहें और दूसरों को भी ख़ुश रखें.

मैजिकल वर्ड्स का करें इस्तेमाल

हमारे पास मैजिकल वर्ड्स का ख़ज़ाना है, पर अफ़सोस कि हम उनका इस्तेमाल ही नहीं करते, तभी तो दुखी रहते हैं.

–     थैंक यू एक ऐसा जादुई शब्द है, जो न स़िर्फ बोलनेवाले के चेहरे पर मुस्कान लाता है, बल्कि सुननेवाला भी ख़ुश हो जाता है. तो फिर इसे कहने में कंजूसी क्यों करें. सुबह की शुरुआत ही भगवान को थैंक यू कहने से करें, यकीन मानें आपका दिन ख़ुशियों भरा होगा.

–     हर कोई चाहता है कि लोग उसे प्यार करें. पार्टनर, मम्मी-पापा, भाई-बहन, दादा-दादी, नाना-नानी या बच्चे सभी को रोज़ाना वो थ्री मैजिकल वर्ड्स ‘आई लव यू’ ज़रूर कहें. उनके चेहरे की मुस्कान आपके हैप्पीनेस मीटर को बढ़ा देगी.

–     ‘आप अच्छी लग रही हो’ या ‘अच्छे लग रहे हो,’ जैसे जादुई शब्द किसी का भी दिन बना सकते हैं. तो दिल खोलकर लोगों की तारीफ़ करें और ख़ुशियां फैलाते रहें.

चुनें अनजानी राहें

जान-पहचान के लोगों से तो हम हमेशा बोलते-बतियाते हैं, कभी अनजानों से भी दोस्ती करके देखें. बस, यूं ही किसी अजनबी से बातें करें, बहुत अच्छा लगेगा.

–     वर्किंग लोग बस, ट्रेन, ऑटो में रोज़ाना न जाने कितने लोगों से टकराते हैं, तो क्यों न उनसे दोस्ती करें और अपने दोस्तों का दायरा बढ़ाएं.

–     एक-दो बार जिन्हें मिले हैं, उन्हें देखकर स्माइल ज़रूर दें, उनकी स्माइल आपका हैप्पीनेस मीटर बढ़ा देगी.

–     रास्ते में चलते हुए कभी किसी अजनबी को देखकर स्माइल करें, वो जब तक सोचेगा कि आपको कहां मिला था, आप हंसते-हंसते आगे बढ़ जाओगे.

–     कोई उम्रदराज़ महिला अगर भारी सामान लेकर जा रही है, तो निस्वार्थ भाव से उनकी मदद करें. उन्हें तो ख़ुशी मिलेगी ही, पर आपको भी कुछ कम सुकून नहीं मिलेगा.

यह भी पढ़ें: सफलता के 10 सूत्र (10 Ways To Achieve Your Dream)

Happy
कुछ रिफ्रेशिंग हो जाएं

–     क्यों न आज थोड़ी मटरगश्ती कर लें. किसी पुराने दोस्त को उसके ऑफिस में या घर पर जाकर सरप्राइज़ दें. यक़ीन मानिए, एक ही दिन में आपके पूरे हफ़्ते का हैप्पीनेस मीटर रीचार्ज हो जाएगा.

–     गाने सुनने के शौक़ीन हैं, तो अपना मनपसंद गाना स़िर्फ सुनें नहीं, बल्कि गुनगुनाएं भी और अगर घर पर हैं, तो गाने पर थिरकें भी. मूड फ्रेश रखने के लिए म्यूज़िक से बेहतर थेरेपी कुछ नहीं.

–     खाने के शौक़ीन हैं, तो कुछ ऐसा चटपटा खाएं, जो बहुत दिनों से खाया न हो. मनपसंद डिश न स़िर्फ आपका मूड अच्छा करेगी, बल्कि एक ख़ुशी भी देगी.

–     हमेशा दूसरों को ही एंटरटेन न करें. कभी ख़ुद को भी एंटरटेन कर लें. आपके साथ-साथ आपकी फैमिली भी ख़ुश रहेगी.

–     मॉनसून तो वैसे ही बहुत रोमांटिक मौसम है, तो आज अपने पार्टनर के लिए कुछ ख़ास करें. उन्हें चॉकलेट, फूल या टेडी दें. इस रोमांटिक मौसम में आपका रोमांटिक अंदाज़ आपके पार्टनर के हैप्पीनेस मीटर को फुल चार्ज कर देगा.

–     हमेशा दूसरों के बारे में ही न सोचें. कभी-कभी ख़ुद के बारे में भी सोचें. ख़ुद की ख़ुशी के लिए भी कुछ चीज़ें करें. थोड़ा स्वार्थी होने में कोई हर्ज़ नहीं.

फैलाएं पॉज़िटिविटी

आजकल ज़्यादातर लोग सोशल मीडिया के ज़रिए आप तक बहुत-सी निगेटिव चीज़ें पहुंचाते रहते हैं, जिससे जाने-अनजाने आप लगातार निगेटिव ख़्यालों  से घिरे रहते हैं. इसे बदलना चाहते हैं, तो शुरुआत ख़ुद से करें.

–     व्हाट्सऐप पर किसी को ऐसी फोटोज़ या वीडियोज़ न भेजें, जिसे देखकर बुरा लगे. जोक्स, मोटिवेशनल बातें या कोट्स आपके साथ-साथ उनको भी ख़ुश करेंगे.

–     अगर आपके आसपास कोई निगेटिव बातें कर रहा है, तो उसे निगेटिव में भी पॉज़िटिव देखना सिखाएं.

–     सकारात्मक सोच आपके चेहरे पर एक मुस्कान की तरह है, जो हर व़क्त आपकी ख़ूबसूरती को निखारती रहती है. तो सुंदर दिखना चाहते हैं, तो मुस्कुराइए, खिलखिलाइए और दूसरों को भी ख़ुश रखिए.

–     निगेविट बात करनेवालों को बताएं कि कैसे सकारात्मक सोच आपके शरीर में अच्छी फीलिंग वाले हार्मोंस का स्राव करती है और आप अच्छा फील करते हैं.

चेक करें हैप्पीनेस मीटर

–     ऐसी कई बातें होती हैं, जो हमारे चेहरे पर मुस्कान लाती हैं. ध्यान दें कि किससे बातें करते समय आप सबसे ज़्यादा ख़ुश रहते हैं और जैसे ही आपको वो शख़्स मिले, जी भरकर उससे बातें करें.

–     कोई न कोई तो ऐसा होता है, जिसके बारे में सोचते ही आपके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है. कोशिश करें कि उससे ज़्यादा से ज़्यादा मिलें. उसके साथ ज़्यादा समय बिताने की कोशिश करें.

–     दोस्तों-यारों के संग बिताई कौन-सी पुरानी यादें आपको गुदगुदाती हैं. उन यादों को दोबारा जीने की कोशिश करें.

–     घर से निकलते व़क्त अगर ‘अपना ख़्याल रखना’ कहने भर से आपके चेहरे पर स्माइल आती है, तो इसे अपनी आदत में शुमार करें.

–     पर्सनल लाइफ के अलावा प्रोफेशनल लाइफ में भी रोज़ कुछ अलग व क्रिएटिव करें, कभी काम में, कभी लुक्स में, तो कभी अपने कलीग्स की ख़ुशी के लिए.

–     अपने भीतर के छोटे मासूम बच्चे को कभी सीरियस न होने दें. वह हंसी-मज़ाक और शरारतों से आपको हमेशा ख़ुशहाल बनाए रखेगा.

– सुनीता सिंह

यह भी पढ़ें:  सीखें ख़ुश रहने के 10 मंत्र (10 Tips To Stay Happy)

पंचतंत्र की कहानी: खरगोश, तीतर और धूर्त बिल्ली (Panchtantra Story: The Hare, Partridge & Cunning Cat)

Panchtantra Story

Panchtantra Story

पंचतंत्र की कहानी: खरगोश, तीतर और धूर्त बिल्ली (Panchtantra Story: The Hare, Partridge & Cunning Cat)

आज के हाईटेक युग में जब बच्चों को हर जानकारी कंप्यूटर/इंटरनेट पर ही मिल रही है, उनका पैरेंट्स से जुड़ाव कम हो रहा है. साथ ही उन्हें मोरल वैल्यूज़ (Moral Values) भी पता नहीं चल पाती, ऐसे में बेड टाइम स्टोरीज़ (Bed Time Stories) जैसे- पंचतंत्र (Panchtantra) की सीख देने वाली पॉप्युलर कहानियों के ज़रिए न स़िर्फ आपकी बच्चे से बॉन्डिंग स्ट्रॉन्ग होगी, बल्कि उन्हें अच्छी बातें भी पता चलती हैं.

एक नगर में बड़े से पेड़ पर एक तीतर का घोंसला था. वो बड़े मज़े से वहां रहता था. एक दिन वह अपना भोजन व दाना पानी ढूंढ़ने के चक्कर में दूसरी जगह किसी अच्छी फसलवाले खेत में पहुंच गया. वहां उसके खाने पीने की मौज हो गई. उस खुशी में वो उस दिन घर लैटना भी भूल गया और उसके बाद तो वो मज़े से वहीं रहने लगा. उसकी ज़िंदगी बहुत अच्छी कटने लगी.

यहां उसका घोसला खाली था, तो एक शाम को एक खरगोश उस पेड़ के पास आया. पेड़ ज़्यादा ऊंचा नहीं था. खरगोश ने उस घोसले में झांककर देखा तो पता चला कि यह घोसला खाली पड़ा है. खरगोश को वो बेहद पसंद आया और वो आराम से वहीं रहने लगा, क्योंकि वो घोसला काफ़ी बड़ा और आरामदायक था.

कुछ दिनों बाद वो तीतर भी नए गांव में खा-खाकर मोटा हो चुका था. अब उसे अपने घोसले की याद सताने लगी, तो उसने फैसला किया कि वो वापस लौट आएगा. आकर उसने देखा कि घोसले में तो खरगोश आराम से बैठा हुआ है. उसने ग़ुस्से से कहा, “चोर कहीं के, मैं नहीं था तो मेरे घर में घुस गए… निकलो मेरे घर से.”

खरगोश शान्ति से जवाब देने लगा, “ये तुम्हारा घर कैसे हुआ? यह तो मेरा घर है. तुम इसे छोड़कर चले गए थे और कुआं, तालाब या पेड़ एक बार छोड़कर कोई जाता है, तो अपना हक भी गवां देता है. अब ये घर मेरा है, मैंने इसे संवारा और आबाद किया.”
यह बात सुनकर तीतर कहने लगा, “हमें बहस करने से कुछ हासिल नहीं होने वाला, चलो किसी ज्ञानी पंडित के पास चलते हैं. वह जिसके हक में फैसला सुनायेगा उसे घर मिल जाएगा.”

यह भी पढ़ें: पंचतंत्र की कहानी: तीन काम

उस पेड़ के पास से एक नदी बहती थी. वहां एक बड़ी सी बिल्ली बैठी थी. वह कुछ धर्मपाठ करती नज़र आ रही थी. वैसे तो बिल्ली इन दोनों की जन्मजात शत्रु है, लेकिन वहां और कोई भी नहीं था, इसलिए उन दोनों ने उसके पास जाना और उससे न्याय लेना ही उचित समझा. सावधानी बरतते हुए बिल्ली के पास जाकर उन्होंने अपनी समस्या बताई, “हमने अपनी उलझन बता दी, अब आप ही इसका हल निकालो. जो भी सही होगा उसे वह घोसला मिल जाएगा और जो झूठा होगा उसे आप खा लेना.”

“अरे, यह कैसी बातें कर रहे हो, हिंसा जैसा पाप नहीं है कोई इस दुनिया में. दूसरों को मारनेवाला खुद नरक में जाता है. मैं तुम्हें न्याय देने में तो मदद करूंगी लेकिन झूठे को खाने की बात है तो वह मुझसे नहीं हो पाएगा. मैं एक बात तुम लोगों को कानों में कहना चाहती हूं, ज़रा मेरे करीब आओ तो.”

खरगोश और तीतर खुश हो गए कि अब फैसला होकर रहेगा और उसके बिलकुल करीब गए. बस फिर क्या था, करीब आए खरगोश को पंजे में पकड़कर मुंह से तीतर को भी उस चालाक बिल्ली बिल्ली ने नोंच लिया और दोनों का काम तमाम कर दिया.

सीख: अपने शत्रु को पहचानते हुए भी उस पर विश्‍वास करना बहुत बड़ी बेवक़फ़ी है. तीतर और खरगोश इसी विश्‍वास और बेवक़फ़ी के चलते को अपनी जान गवांनी पड़ी.

यह भी पढ़ें: पंचतंत्र की कहानी: दिन में सपने…