Movie Review Of Saand Ki Aa...

वर्ष 2019 न स़िर्फ स्पोर्ट्स, बल्कि फिल्मों के मामले में भी महिलाओं के नाम रहा. साल 2019 में एक के बाद एक बेहतरीन महिला प्रधान फिल्में रिलीज़ हुईं और इन फिल्मों में अपने दमदार अभिनय के दम पर अभिनेत्रियों ने ये साबित कर दिया कि महिला प्रधान फिल्में भी बॉक्स ऑफिस पर कमाल दिखा सकती हैं और इन फिल्मों को हिट कराने के लिए हीरो की ज़रूरत नहीं है. वर्ष 2019 ही नहीं 2020 भी महिला प्रधान फिल्मों के नाम रहनेवाला है यानी इस साल भी एक से बढ़कर एक महिला प्रधान फिल्में रिलीज़ के लिए तैयार हैं. इस साल आपको ये महिला प्रधान फिल्में ज़रूर देखनी चाहिए:

1) छपाक
जनवरी 2020 में रिलीज़ हुई दीपिका पादुकोण की फिल्म छपाक एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल के जीवन पर आधारित है. ये फिल्म आज की ज़रूरत है. इस फिल्म के माध्यम से एसिड अटैक की घटनाओं को रोकने का संदेश दिया गया है और लोगों को जागरूक करने की कोशिश की गई है. हालांकि दीपिका पादुकोण के जेएनयू दौरे के कारण कई जगहों पर फिल्म के प्रदर्शन में द़िक्क़त आई, लेकिन इस फिल्म को एक बेहतरीन महिला प्रधान फिल्म कहा जा सकता है.

2) पंगा
जनवरी 2020 में ही एक और महिला प्रधान फिल्म पंगा रिलीज़ हुई. ये फिल्म भारतीय महिला कबड्डी टीम की भूतपूर्व कप्तान रह चुकी जया निगम की कहानी है. फिल्म में जया निगम का क़िरदार कंगना रनौत ने निभाया है. फिल्म पंगा को भी दर्शकों ने पसंद किया. इस फिल्म में ये संदेश देने की कोशिश की गई है कि महिला को यदि अपने परिवारवालों का सपोर्ट मिले, तो वो अपने सपनों को आसानी से पूरा कर सकती है और सपनों को हासिल करने में उम्र कभी बाधा नहीं बनती.

3) थप्पड़
महिला प्रधान फिल्मों में तापसी पन्नू का होना ही फिल्म को स्पेशल बनाता है. फिल्म थप्पड़ में भी तापसी पन्नू ने दमदार अभिनय किया है. फरवरी 2020 में रिलीज़ हुई फिल्म थप्पड़ एक ड्रामा थ्रिलर है और एक बेहतरीन महिला प्रधान फिल्म भी.

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4) गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल
इस फिल्म की ख़ास बात ये है कि इसकी चर्चा 2019 में भी काफ़ी हो चुकी है. गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल फिल्म में जाह्नवी कपूर मुख्य भूमिका में हैं. यह फिल्म महिलाओं के लिए ही नहीं, पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है. वर्ष 2020 की महिला प्रधान फिल्मों में गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल एक महत्वपूर्ण फिल्म है.

5) धाकड़
कंगना रनौत का शानदार एक्शन आप पहले भी कई फिल्मों में देख चुके हैं. फिल्म धाकड़ में एक बार फिर कंगना एक्शन करती नज़र आएंगी. महिला प्रधान फिल्मों में कंगना रनौत का हमेशा से विशेष योगदान रहा है और इस फिल्म में भी वो अपनी एक अलग पहचान बनाती नज़र आएंगी.

6) शकुंतला देवी
बॉलीवुड की मोस्ट टैलेंटेड एक्ट्रेस विद्या बालन जल्द ही फिल्म शकुंतला देवी में नज़र आनेवाली हैं. इस फिल्म की कहानी महान गणितज्ञ शकुंतला देवी पर आधारित है. शकुंतला देवी तेज़ी से गणित का हिसाब करने की कला में माहिर थीं. इसी वजह से उन्हें मानव कंप्यूटर का उपनाम भी दिया गया था. फिल्म में विद्या बालन के पति का क़िरदार बांग्ला फिल्म जगत के लोकप्रिय अभिनेता जीशु सेनगुप्ता निभाएंगे.

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7) थलाइवी
जानी-मानी राजनीतिज्ञ और फिल्म अभिनेत्री रहीं जयललिता की बायोपिक थलाइवी में कंगना रनौत उनका क़िरदार निभाएंगी. इस फिल्म को ए एल विजय निर्देशित कर रहे हैं. 2020 में थलाइवी फिल्म को तमिल, तेलुगू और हिंदी में एक साथ रिलीज़ किया जाएगा.

8) गंगूबाई काठियावाड़ी
संजय लीला भंसाली की फिल्म गंगूबाई काठियावाड़ी भी वर्ष 2020 की एक प्रमुख महिला प्रधान फिल्म है. इस फिल्म में आलिया भट्ट मुख्य भूमिका में हैं. मुंबई के कमाठीपुरा में रहनेवाली एक माफिया क्वीन गंगूबाई पर आधारित फिल्म गंगूबाई काठियावाड़ी की कहानी हुसैन ज़ैदी की क़िताब माफिया क्वीन्स ऑफ मुंबई से ली गई है.

वर्ष 2019 की ये महिला प्रधान फिल्में हर महिला को देखनी चाहिए
वर्ष 2019 न स़िर्फ स्पोर्ट्स, बल्कि फिल्मों के मामले में भी महिलाओं के नाम रहा. साल 2019 में एक के बाद एक बेहतरीन महिला प्रधान फिल्में रिलीज़ हुईं और इन फिल्मों में अपने दमदार अभिनय के दम पर अभिनेत्रियों ने ये साबित कर दिया कि महिला प्रधान फिल्में भी बॉक्स ऑफिस पर कमाल दिखा सकती हैं और इन फिल्मों को हिट कराने के लिए हीरो की ज़रूरत नहीं है.

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1) सांड की आंख
तापसी पन्नू और भूमि पेडनेकर की फिल्म सांड की आंख वर्ष 2019 की सबसे बेहतरीन महिला प्रधान फिल्म थी. इस फिल्म की सबसे ख़ास बात ये थी कि पहली बार कोई महिला प्रधान फिल्म दीपावली के समय रिलीज़ हुई और सांड की आंख फिल्म को दर्शकों ने ख़ूब पसंद भी किया. इस फिल्म में दोनों अभिनेत्रियों ने शूटर दादी का ज़बर्दस्त क़िरदार निभाया. फिल्म की कहानी और तापसी-भूमि की शानदार एक्टिंग के लिए फिल्म को काफी सराहना मिली. फिल्म सांड की आंख ने बॉक्स आफिस पर शानदार कमाई की.

2) मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी
बॉलीवुड की क्वीन कही जानेवाली एक्ट्रेस कंगना रनौत की फिल्म मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी इस साल की सबसे बड़ी महिला प्रधान फिल्म है. यह फिल्म झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के जीवन पर आधारित है. इस फिल्म में कंगना ने झांसी की रानी की भूमिका निभाई है और फिल्म में कंगना के काम को दर्शकों ने बहुत पसंद किया. हालांकि फिल्म अपने कुछ अंदरूनी मसलों के कारण विवादों में रही, लेकिन इसके बावजूद फिल्म को दर्शकों की अच्छी सराहना मिली. महिला प्रधान फिल्म होने के साथ ही इस फिल्म की ख़ास बात ये है कि इस फिल्म की निर्देशक भी कंगना रनौत ही हैं.

3) मिशन मंगल
इसरो की पहली ही कोशिश में मंगल पहुंचने की कहानी पर आधारित फिल्म मिशन मंगल में मुख्य क़िरदार में विद्या बालन, तापसी पन्नू, सोनाक्षी सिन्हा, कीर्ति कुल्हारी और नित्या मेनन हैं. हालांकि फिल्म में अक्षय कुमार मुख्य अभिनेता के रूप में थे, लेकिन ये फिल्म पूरी तरह से महिला प्रधान है. मार्स मिशन में महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान था और मिशन मंगल फिल्म में यही बताया गया है. हालांकि फिल्म के प्रमोशन के लिए अक्षय कुमार के नाम का सहारा लेने के लिए इस फिल्म की आलोचना भी हुई, लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट साबित हुई और सभी एक्ट्रेस की एक्टिंग की ख़ूब तारीफ़ भी हुई.

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4) बदला
ये एक ऐसी महिला प्रधान फिल्म है, जिसने ये साबित कर दिखाया कि कम बजट में भी अच्छी फिल्म बनाई जा सकती है. कम बजट में बनी शाहरुख ख़ान के रेड चिलीज़ प्रोडक्शन की फिल्म बदला ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई की. फिल्म में तापसी पन्नू और अमिताभ बच्चन मुख्य भूमिका में हैं. फिल्म में तापसी एक कत्ल के इल्ज़ाम में फंस जाती है और ख़ुद को बचाने के लिए अमिताभ बच्चन से मदद मांगती है. फिल्म बदला की कहानी और कलाकारों की एक्टिंग इतनी अच्छी है कि इसी कारण कम बजट में इतनी बेहतरीन फिल्म बन पाई है.

5) द स्काई इज़ पिंक
देसी गर्ल प्रियंका चोपड़ा लंबे समय से हिंदी फिल्मों में नज़र नहीं आईं, लेकिन जब उनकी फिल्म द स्काई इज़ पिंक रिलीज़ हुई, तो एक बार फिर दर्शक उनकी एक्टिंग के कायल हो गए. फिल्म में प्रियंका चोपड़ा ने जिस तरह एक प्रेमिका और मां की भूमिका निभाई है, उसने दर्शकों का दिल जीत लिया. फिल्म में प्रियंका के साथ फरहान अख़्तर भी हैं. इस फिल्म की कहानी और प्रियंका चोपड़ा की एक्टिंग इतनी भावुक है कि द स्काई इज़ पिंक फिल्म की तारीफ़ न स़िर्फ दर्शकों ने की, बल्कि कई कलाकारों ने भी की.

6) मर्दानी 2
पिछले कुछ समय से रानी मुखर्जी लगातार महिला प्रधान फिल्मों में काम कर रही हैं. मर्दानी, हिचकी जैसी संवेदनशील फिल्मों में काम करने के बाद 2019 में रानी मुखर्जी फिल्म मर्दानी 2 में इंस्पेक्टर शिवानी शिवाजी राव बनकर महिलाओं पर ज़ुल्म करनेवाले अपराधियों पर कहर बरपाती नज़र आईं. मर्दानी 2 फिल्म को दर्शकों ने पसंद किया और इसे रिलीज़ के पहले दिन से ही अच्छा रिस्पॉन्स मिला.

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7) एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा
इस फिल्म में यूं तो सोनम कपूर के साथ अनिल कपूर और राजकुमार राव भी मुख्य भूमिका में हैं, लेकिन अपने नाम और कहानी के कारण फिल्म सोनम कपूर के इर्दगिर्द ही घूमती है. एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा फिल्म की कहानी लेस्बियन यानी समलैंगिकता पर आधारित है. फिल्म का विषय अच्छा होते हुए भी ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ख़ास कमाल नहीं दिखा पाई, लेकिन वर्ष 2019 की महिला प्रधान फिल्मों में इस फिल्म को शामिल किए बिना महिला प्रधान फिल्मों की बात अधूरी रह जाएगी.

8) द ज़ोया फैक्टर
सोनम कपूर ने वर्ष 2019 में दो महिला प्रधान फिल्मों (एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा और द ज़ोया फैक्टर) में काम किया, लेकिन अफ़सोस उनकी दोनों ही फिल्में बॉक्स ऑफिस पर कुछ ख़ास कमाल नहीं कर पाईं. फिल्म द ज़ोया फैक्टर में सोनम कपूर ने एक ऐसी लड़की का क़िरदार निभाया है, जो इंडियन क्रिकेट टीम का लकी चार्म होती है, उसकी मौजूदगी में टीम सारे मैच जीतने लगती है. हालांकि फिल्म में सोनम कपूर के साथ दुलकर सलमान भी हैं, लेकिन फिल्म की कहानी पूरी तरह से सोनम कपूर के इर्दगिर्द ही घूमती है. सोनम कपूर की ये फिल्म भी ख़ास नहीं चली, लेकिन इस फिल्म को भी महिला प्रधान फिल्मों की कैटेगरी में रखना ज़रूरी है.
कमला बडोनी

फिल्मः सांड की आंख
कलाकारः तापसी पन्नू, भूमि पेडनेकर, प्रकाश झा, विनीत कुमार सिंह
निर्देशकः तुषार हीरानंदानी
स्टारः 3 

यह फिल्म भारत की सबसे उम्रदराज शार्पशूटर्स चंद्रो तोमर और प्रकाशी तोमर की बायॉग्रफी है. शूटर दादियों की जिंदगी की कहानी भी हमारे देशवासियों के लिए किसी मिसाल से कम नहीं है और इस पर बनी तापसी पन्नू और भूमि पेडनेकर की फिल्म सांड की आंख से बड़ा ट्रिब्यूट दोनों के लिए शायद ही कुछ और हो सकता है.

Saand Ki Aaankh

 कहानीः  बागपत के जोहर गांव में स्थित ये कहानी है तोमर परिवार की बहू चंद्रो और प्रकाशी तोमर की, जो अपनी जिंदगी में घर का काम करने, खाना पकाने, अपने पति की सेवा करने, खेत जोतने और भट्टी में काम करने के अलावा ज्यादा कुछ खास कर नहीं पाईं. उनके पति दिन भर हुक्का फूंकते और बड़ी-बड़ी बातें करते हैं. जिंदगी के 60 साल ऐसे ही जीवन निकाल देने के बाद चन्द्रो और प्रकाशी को अचानक से अपने शूटिंग टैलेंट का पता चलता है. लेकिन शूटर बनने का सपना देखने लगी इन दोनों दादियों के सामने एक-दो नहीं बल्कि हजारों चुनौतियां हैं. इनमें से सबसे बड़ी है शूटिंग की ट्रेनिंग लेना और उससे भी बड़ी है टूर्नामेंट में जाकर खेलना. जो औरतें कभी अपने घर से बिना किसी मर्द के बाहर ना निकली हों, उन्होंने कैसे अपने इस सपने को ना सिर्फ पूरा किया बल्कि बाकी देशभर की महिलाओं को भी कर दिखाने की प्रेरणा कैसे दी यही इस फिल्म में दिखाया गया है.

एक्टिंगः  तापसी और भूमि की एक्टिंग दर्शकों को कभी हंसने पर तो कभी रोने पर मजबूर कर देती है.  पर्दे पर जब दोनों साथ में होती हैं, तो आप उनका काम देखकर मन ही मन उनकी दाद दे रहा होता है. कई सीन ऐसे हैं, जिनमें दोनों की एक्टिंग दूसरे से बेहतर है. लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि दोनों की केमिस्ट्री इतनी लाजवाब है कि दोनों एक-दूसरे के साथ फिट बैठती हैं. दोनों ही अदाकाराओं के साथ प्रकाश झा ने भी देसी हरियाणवी व्यक्ति का अच्छा किरदार निभाया है.

डायरेक्शनः  तुषार हीरानंदानी का निर्देशन भी इस फिल्म का एक मजबूत पक्ष है. फिल्म में जिस तरह से हरियाणा की पृष्ठभूमि को फिल्माया है वह काबिलेतारीफ है. कलाकारों और निर्देशक का अच्छा तालमेल देखने को मिलता है जिस वजह से छोटे-छोटे सीन्स भी पूरी कहानी बयां करते हैं.

म्यूज़िकः फिल्म के गाने ‘वूमनिया’ और ‘उड़ता तीतर’ पहले से ही पॉप्युलर है और अच्छे बन पड़े हैं. फिल्म के डायलॉग्स भी ठीक-ठाक ही हैं, लेकिन सबसे ज्यादा आपको तापसी और भूमि का प्रोस्थेटिक मेकअप अखर सकता है. फिल्म का फर्स्ट हाफ थोड़ा स्लो है लेकिन सेकंड हाफ दर्शकों को अच्छे से बांधे रखता है.