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मूवी रिव्यू: मोहल्ला अस्सी/पीहू- दो ख़ूबसूरत प्रस्तुति- एक व्यंग्यात्मक तो दूसरी में मासूम अदाकारी (Movie Review: Mohalla Assi/Pihu- Remarkable Performances And Thought Provoking Scripts)

 

 Mohalla Assi/Pihu
मोहल्ला अस्सी- धर्म, संस्कृति, राजनीति पर करारा व्यंग्य

एक ओर सनी देओल अलग व दमदार अंदाज़ में नज़र आते हैं मोहल्ला अस्सी में, तो वहीं पीहू में दो साल की बच्ची की मासूम अदाकारी बेहद प्रभावित करती है.

हिंदी साहित्यकार काशीनाथ सिंह की काशी का अस्सी पर आधारित मोहल्ला अस्सी फिल्म धर्म, राजनीति, आस्था, परंपरा आदि के माननेवाले को बहुत पसंद आएगी. भारतीय सोच पर भी करारा व्यंग्य किया गया है. वैसे भी जो मज़ा बनारस में वो न पेरिस में है, न फारस में… इसी चरितार्थ करती है फिल्म. निर्माता विनय तिवारी की यह फिल्म चाणक्य सीरियल व पिंजर मूवी फेम डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी  के बेहतरीन निर्देशन के कारण बेहद आकर्षक व ख़ास बन गई है. बनारस के निवासी, गंगा नदी, घाट, गली-मोहल्ले, वहां के तौर-तरी़के, लोगों की विचारधारा, राजनीति का प्रभाव, धर्म, कर्मकांड सभी का ख़ूबसूरत चित्रण किया गया है.

कहानी बनारस के मोहल्ला अस्सी की है, जहां पर धर्मराज पांडे यानी सनी देओल ब्राह्मणों की बस्ती में अपनी पत्नी साक्षी तंवर और बच्चों के साथ रहते हैं. वे जजमानों की कुंडली बनाते हैं और संस्कृत भी पढ़ाते हैं. अपने धर्म व उससे जुड़ी अन्य बातों को लेकर वे इतने सख़्त रहते हैं कि अपने मोहल्ले में विदेशी सैलानियों को किराए पर घर रहने के लिए नहीं देते और न ही अन्य लोगों को ऐसा करने देते हैं. उनका मानना है कि विदेशियों के खानपान व आचरण के सब गंदा व अपवित्र हो रहा है. लेकिन हालात करवट बदलते हैं और उन्हें आख़िरकार न चाहते हुए वो सब करना पड़ता है, जिसके वे सख़्त ख़िलाफ़ थे. फिल्म में पप्पू चाय की दुकान भी है, जो किसी संसद से कम नहीं. जहां पर वहां के लोग हर मुद्दे पर गरमागरम बहस करते हैं, फिर चाहे वो राजनीति का हो या फिर कुछ और.

सनी देओल अपनी भाव-भंगिमाएं व प्रभावशाली संवाद अदाएगी से बेहद प्रभावित करते हैं. उनका बख़ूबी साथ देते हैं साक्षी तंवर, रवि किशन, सौरभ शुक्ला, राजेंद्र गुप्ता, मिथलेश चतुर्वेदी, मुकेश तिवारी, सीमा आज़मी, अखिलेंद्र मिश्रा आदि. अमोद भट्ट का संगीत स्तरीय है. विजय कुमार अरोड़ा की सिनेमाटोग्राफी क़ाबिल-ए-तारीफ़ है.

Mohalla Assi/Pihu

Pihu

 

पीहू- नन्हीं बच्ची का कमाल

निर्देशक विनोद कापड़ी की मेहनत, लगन और धैर्य की झलकियां बख़ूबी देखने मिलती है पीहू फिल्म में. आख़िरकार उन्होंने दो साल की बच्ची से कमाल का अभिनय करवाया है. कथा-पटकथा पर भी उन्होंने ख़ूब मेहनत की है. निर्माता सिद्धार्थ रॉय कपूर, रोनी स्क्रूवाला व शिल्पा जिंदल बधाई के पात्र हैं, जो उन्होंने विनोदजी और फिल्म पर अपना विश्‍वास जताया. बकौल विनोदजी यह सच्ची घटना पर आधारित है और इस पर फिल्म बनाना उनके लिए किसी चुनौती से कम न था.

फिल्म की जान है पीहू यानी मायरा विश्‍वकर्मा. उस नन्हीं-सी बच्ची ने अपने बाल सुलभ हरकतों, शरारतों, मस्ती, सादगी, भोलेपन से हर किसी का दिल जीत लेती है.

कहानी बस इतनी है कि पीहू की मां (प्रेरणा विश्‍वकर्मा) का देहांत हो चुका है और उनकी बॉडी के साथ वो मासूम बच्ची घंटों घर के कमरे में अकेले व़क्त बिताती है. उसे नहीं पता कि उसकी मां अब इस दुनिया में नहीं है, वो मासूम उनसे बात करती है, घर में इधर-उधर घूमती है, भूख लगने पर गैस जलाकर रोटी भी सेंकने की कोशिश करती है, घर को अस्त-व्यस्त, उल्टा-पुल्टा कर देती है. सीन दर सीन उत्सुकता, डर, घबराहट, बेचैनी भी बढ़ती जाती है. कम बजट में विनोदजी ने लाजवाब फिल्म बनाई है.

– ऊषा गुप्ता

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मूवी रिव्यू: ठग्स ऑफ हिंदोस्तान- अमिताभ बच्चन और आमिर ख़ान की ज़बर्दस्त जुगलबंदी (Movie Review: Thugs Of Hindostan- A Double Bonanza Of Amitabh Bachchan And Aamir Khan)

Thugs Of Hindostan

जब दो दिग्गज कलाकार आपस में टकराते हैं, तो धमाका तो होना ही है. दिवाली पर दर्शकों व अमिताभ बच्चन व आमिर ख़ान के प्रशंसकों के लिए ख़ास बंपर ऑफर के रूप में है ठग्स ऑफ हिंदोस्तान. पहली बार इन दो मंजे हुए कलाकारों ने साथ काम किया है. सिल्वर स्क्रीन पर इनकी अदाकारी देख आपका भी दिल कह उठेगा- भई वाह!… बेहतरीन… लाजवाब.

साल 1839 में फिलिप मीडोज टेलर द्वारा लिखे गए उपन्यास कन्फेशंस ऑफ ए ठग पर आधारित है यह फिल्म. कहानी तो ख़ूबसूरत है ही, उस पर विजय कृष्णा आचार्य का निर्देशन काबिल-ए-तारीफ़ है.

फिल्म में उन दिनों के बारे में दिखाया गया है, जब साल 1795 में अंग्रेज़ भारत पर राज़ कर रहे थे और उन्होंने बिज़नेस के साथ-साथ देश पर भी अपना दबदबा बना लिया. उनके इसी घुसपैठ और अत्याचार का विरोध करते हुए उनसे जब-तब मुकाबला करता रहता है आज़ाद यानी अमिताभ बच्चन, जिनका बख़ूबी साथ देती हैं फातिमा शेख. कहानी में मोड़ तब आता है, जब अंग्रेज़ों द्वारा आज़ाद के लिए बिछाए गए जाल में वे ख़ुद ही फंस जाते हैं यानी वे आमिर ख़ान को फिरंगी मल्लाह के रूप में आज़ाद से टक्कर लेने के लिए इस्तेमाल करते हैं. लेकिन शुरू में साथ देने के बाद फिरंगी को अपनी ग़लती का एहसास होता है और वो अंग्रेज़ों को छोड़ आज़ाद का साथ देने लगता है.

अमिताभ बच्चन व आमिर ख़ान की सशक्त अभिनय की जुगलबंदी का अच्छा साथ दिया है कैटरीना कैफ और फातिमा सना शेख ने.

पीरियड फिल्म होने के कारण कलाकारों के परिधान, लोकेशन, संवाद अदायगी सब कुछ बेहद आकर्षित करती है.

फिल्म में अजय-अतुल व जॉन स्टीवर्ट का संगीत सुमधुर होने के साथ कहानी को बांधे रखने में भी मदद करता है. सुखविंदर, विशाल ददलानी, श्रेया घोषाल, सुनिधि चौहान,द्वारा गाए सभी गाने कर्णप्रिय हैं, फिर चाहे वो मंज़ूरे खुदा हो या सुरैय्या…

भारतीय दर्शकों के लिए इस फेस्टिवल के मौसम में सबसे ख़ूबसूरत प्यार भरा तोहफ़ा है यह फिल्म.

– ऊषा गुप्ता

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बाज़ार मूवी रिव्यू: यहां सब बिकता है- वफ़ादारी, ईमानदारी, इंसानियत… (Bazaar Movie Review: A Cut-throat Share Market Of Lies And Dishonesty)

Bazaar Movie Review

 

“यहां पैसा भगवान नहीं, पर भगवान से कम भी नहीं…” फिल्म का यह संवाद बहुत कुछ बयां कर जाता है. यूं तो बिज़नेस, पैसा, बाज़ार पर कई फिल्में बनी है, पर सैफ अली ख़ान की बाज़ार इन सबसे अलग है. शेयर मार्केट में पैसे कमाने के लिए छल, कपट, धोखा, फरेब सब कुछ दांव पर लगाते हैं सैफ. उनके लिए पैसा ही सब कुछ है और बाज़ार में टॉप पर बने रहने के लिए वे कुछ भी कर सकते हैं यानी साम, दंड, भेद अपनाकर बस मुनाफ़ा कमाना उनका एकमात्र लक्ष्य है. बहुत अरसे के बाद सैफ अली ख़ान ने उम्दा अभिनय किया है. उनकी अदाकारी से ऐसा लगता है, जैसे यह भूमिका उनके सिवा कोई और बेहतरीन तरी़के कर ही नहीं सकता था.

निर्माता निखिल आडवाणी की फिल्म बाज़ार एक्शन, थ्रिलर, रोमांच से भरपूर है. गौरव के. चावला का निर्देशन लाजवाब है. जाने-माने अभिनेता विनोद मेहरा के बेटे रोहन मेहरा इस फिल्म से फिल्मी दुनिया में क़दम रख रहे हैं. अपनी पहली ही फिल्म में उन्होंने बेहद प्रभावित किया है. फिल्म में वे सैफ को बराबरी का टक्कर देते नज़र आते हैं. बहुमुखी प्रतिभा की धनी राधिका आप्टे भी ग़ज़ब की लगी हैं. चित्रागंदा सिंह हमेशा की तरह बोल्ड व ग्लैमरस से भरपूर बेजोड़ हैं. सौरभ शुक्ला, अनुप्रिया गोयनका, डेंज़िल स्मिथ, एली एवराम ने भी बेहतरीन अदाकारी का नज़ारा पेश किया है.

फिल्म में संगीतकारों का तो मेला लगा है- यो यो हनी सिंह, बिलाल सईद, कनिका कपूर आदि. लेकिन फिल्म की गति में संगीत थोड़ा-सा खटकता है, पर फिर भी ठीक है. पिछले तीन हफ़्तों से वीकेंड पर दर्शकों का भरपूर मनोरंजन हो रहा है. पहले अंधाधुन फिर बधाई हो और अब बाज़ार यानी दर्शकों को हर हफ़्ते एक ज़बर्दस्त और बेहतरीन फिल्म देखने को मिल रही है.

Kashi - In Search of Ganges

काशी- इन सर्च ऑफ गंगा

धीरज कुमार की काशी बहुत कुछ कहती है. शरमन जोशी व ऐश्‍वर्या देवन का अभिनय और मनीष किशोर की कहानी फिल्म को अंत तक बांधे रखती है. धीरज कुमार द्वारा निर्देशित यह एक एडवेंचर्स व फुल ड्रामा से भरपूर फिल्म है. शरमन जोशी अपनी लापता बहन गंगा को जब खोजने निकलता है, तब कई रहस्यों का ख़ुलासा होता है. प्रेम, भावनाएं, प्रतिशोध, एक्शन सभी का मिला-जुला मसाला परोसा गया है. वाराणसी यानी बनारस के ख़ूबसूरत लोकेशन पर शूट की गई पूरी फिल्म आकर्षित करती है. अन्य कलाकारों में मनोज पाहवा, गोविंद नामदेव, अखिलेंद्र मिश्रा, क्रांति प्रकाश झा, गौरीशंकर, मनोज जोशी भी प्रभावित करते हैं.

Dassehra

दशहरा

नील नितिन मुकेश बहुत दिनों बाद अपने एक्टिंग का जादू बिखेर रहे हैं. एक हॉस्टल में चार लोगों की आत्महत्या करने की ख़बर मिलती है, पर पुलिस द्वारा खोजबीन करने व गुत्थियां सुलझाने पर पता चलता है कि यह तो मर्डर है. नील, टीना देसाई, गोविंद नामदेव, अश्‍विनी कासलेकर, पंकज झा, निशा डे, मुरली शर्मा, शुभांगी गोखले आदि ने अपनी भूमिकाओं ठीकठाक निभाई है, पर फिर भी फिल्म अधिक प्रभावित नहीं कर पाती है. मनीष वात्सलया का निर्देशन स्तरीय है.

– ऊषा गुप्ता

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मूवी रिव्यू- बधाई हो: सचमुच बधाई की पात्र है (Movie Review- Badhai Ho: A Well-Deserving And Applause-Worthy Film)

Badhai Ho

पहली बार किसी अछूते विषय पर मनोरंजन से भरपूर फिल्म बनी है. इसके लिए फिल्म के निर्देशक अमित रविंद्रनाथ शर्मा बधाई के हक़दार है. कौशिक परिवार में तब भूकंप आ जाता है, जब दो युवा बच्चों की मां नीना गुप्ता के दोबारा मां बनने का पता चलता है. बड़ा बेटा नकुल यानी आयुष्मान खुराना अपनी गर्लफ्रेंड सान्या मल्होत्रा के साथ शादी करने की प्लानिंग कर रहा है, उस पर उसके लिए मां के मां बनने की ख़बर किसी सदमे से कम नहीं होती.

कौशिक परिवार के मुखिया गजराज राव ने लाजवाब अभिनय किया है. नीना गुप्ता के साथ उनकी जुगलबंदी देखते ही बनती है. नीनाजी की भाव-भंगिमाएं, प्रतिक्रियाएं, संवाद अदायगी दर्शकों को बांधे रखती है. आयुष्मान खुराना तो हमेशा की तरह ज़बर्दस्त व लाजवाब लगे हैं. इस तरह की भूमिकाओं के साथ वे पूरा न्याय करते हैं. उनकी दादी के रूप में बहुत समय बाद सुरेखा सिकरी को पर्दे पर देखना सुखद लगा. बेटे को लेकर शर्मिंदगी, समाज की आरोप-प्रत्यारोप का डर उन्हें हरदम परेशान करता रहता है. सान्या मल्होत्रा ख़ूबसूरत लगी हैं. कमोबेश हर कलाकार ने अपनी भूमिका को बेहतरीन तरी़के से निभाया है. मेरठ-दिल्लीवाला अंदाज़ फिल्म को और भी मजेदार बना देता है.

निर्माता अमित शर्मा, विनीत जैन, एलेया सेन, हेमंत भंडारी को बहुत-बहुत बधाई, जो उन्होंने इस तरह के अलग सब्जेक्ट पर फिल्म बनाने का निर्णय लिया. तनिष्क बागची, रोचक कोहली, सन्नी बावरा की म्यूज़िक दिल को गुदगुदाती और सुकून देती है. बधाइयां तेनू, मोरनी बनके, नैन ना जोडीं… गीतों को गुरु रंधावा, नेहा कक्कड़, आयुष्मान खुराना, बृजेश शंडल्लय, रोमी, जॉर्डन ने दमदार आवाज़ में अच्छा साथ दिया है. शांतनु श्रीवास्तव, ज्योति कपूर व अक्षत घिल्डियाल ने कहानी पर अच्छी मेहनत की है, जो फिल्म में दिखाई देती है. कह सकते हैं कि बहुत दिनों बाद मनोरंजन से भरपूर एक पारिवारिक फिल्म देखने को मिली.

Namaste England

नमस्ते इंग्लैंड- को दूर से ही सलाम

निर्माता-निर्देशन विपुल अमृतलाल शाह की फिल्म नमस्ते लंदन को दर्शकों ने बेहद पसंद किया था. लेकिन उसी का सीक्वल मानकर चल रहे नमस्ते इंग्लैंड में वो पैनापन देखने को नहीं मिला.

परिणीती चोपड़ा के बड़े ख़्वाब हैं. विदेश में जाकर कुछ करना और बनना चाहती है. अर्जुन कपूर से मुलाक़ात, प्यार, शादी पर बाद में नौकरी को लेकर परिवार का विरोध, परिणीती को विद्रोही बना देता है और वो झूठी शादी करके विदेश चली जाती है. अर्जुन कपूर का अवैध तरी़के से पत्नी को लेने इंग्लैंड जाना और वहां पर अति नाटकीयता का सिलसिला चलता रहता है.

अजुर्न-परिणीता ने अच्छा अभिनय किया है, पर कमज़ोर पटकथा, स्तरीय निर्देशन अधिक प्रभावित नहीं कर पाती है. अन्य कलाकारों में सतीश कौशिक, आदित्य सील, अलंकृता सहाय, अनिल मांगे, मनोज आनंद, अतुल शर्मा, हितेन पटेल, डिजाना डेजानोविक आदि ने अपनी-अपनी भूमिकाएं ठीक से निभाने की कोशिश की है. पंजाब व लंदन के लोकेशन ख़ूबसूरत हैं.

रितेश शाह व सुरेश नायर की कहानी में कोई नयापन नहीं है. इयानिस की सिनेमाट्रोग्राफी आकर्षक है. भरे बाज़ार, धूम धड़ाका, तेरे लिए… गाना पहले से ही सभी को पसंद आ रहे हैं. बादशाह, विशाल ददलानी, पायल देव, अंतरा मित्रा, शाहिद माल्या, आतिफ असलम, अकांखषा भंडारी की आवाज़ ने इन गानों को और भी सुमधुर बना दिया है. प्रोपर पटोला गाने का रिक्रिएशन बढ़िया है. बादशाह, ऋषि रिच, मैननान शाह का संगीत लुभाता है.

– ऊषा गुप्ता

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मूवी रिव्यू: 4 अलग, पर लाजवाब फिल्में… (Movie Review: Fryday, Helicopter Eela, Jalebi, Tumbbad- These Movies Bring An Assortment Of Thrill And Brilliance)

Movie Review
फ्राईडे

साजिद कुरेशी और पीवीआर पिक्चर्स के बैनर तले बनी फ्राईडे फुल टाइमपास मूवी है. अभिषेक डोगरा का कमाल का निर्देशन है. गोविंदा की कमबैक के तौर पर ले सकते हैं. उनकी ग़ज़ब की कॉमेडी है और वरुण शर्मा ने भी उनका अच्छा साथ दिया है. अन्य कलाकारों में बृजेंद्र काला, दिगांगना सूर्यवंशी, प्रभलीन संधू, राजेश शर्मा, संजय मिश्रा ने भी अच्छा साथ दिया है. मनु ऋषि के संवाद बढ़िया है. मीका सिंह, अंकित तिवारी, प्रियंका गोयत, नवराज हंस के गाए गाने मज़ेदार हैं. गोविंदा के फैन के लिए यह फिल्म एक बेहतरीन तोहफ़ा है.

हेलिकॉप्टर ईला

प्रदीप सरकार का बेहतरीन निर्देशन है. आनंद गांधी के गुजराती नाटक बेटा कागड़ो पर आधारित है. इसकी कहानी आनंद गांधी और मितेश शाह ने मिलकर लिखी है.

काजोल सिंगल मदर है औरवो अपने बेटे रिद्धि सेन की अच्छी परवरिश करती है और हरदम उसके ईदगिर्द प्रोटेक्शन के तौर पर रहती है. लेकिन अति तब हो जाती है, जब वो कॉलेज में हरदम उसकी निगरानी करती रहती है. दरअसल, अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए वो बेटे के कॉलेज में ही एडमिशन लेती है. फिल्म वर्किंग व सिंगल मदर के संघर्ष को बख़ूबी बयां करती है. मां-बेटे की बॉन्डिंग, मां का अति सुरक्षात्मक रवैया, इससे बेटे की परेशानी, स्पेस के लिए बेचैन होना… सब कुछ बढ़िया बन पड़ा है. इमोशंस के साथ एक मैसेज भी देती है कि रिश्तों में स्पेस देना भी ज़रूरी है.

बेटे के रूप में रिद्धि सेन ने अपनी पहली फिल्म में प्रभावशाली अभिनय किया है. काजोल तो हमेशा से ही बेजोड़ अदाकारा रही हैं. हर सीन में वे ख़ूबसूरत, आकर्षक व बेहतरीन लगी हैं.

इनके साथ नेहा धूपिया, जाकिर हुसैन, टोटा राय चौधरी ने भी लाजवाब अभिनय किया है. अमित त्रिवेदी व राघव सच्चर का संगीत मधुर है. मम्मा की परछाई, यादों की आलमारी गाना अच्छा बना है. फिल्म में अमिताभ बच्चन, शान, और महेश भट्ट का कैमियो भी है.

 

जलेबी

मुकेश भट्ट की जलेबी वाकई में एक अर्थपूर्ण फिल्म है. पुष्पदीप भारद्वाज का तारीफ़-ए-काबिल निर्देशन है.

एक प्रेमकहानी है. जहां दो प्यार करनेवाले अलग हो जाते हैं. फिर दोनों की ट्रेन में मुलाक़ात होती है, जहां प्रेमी अपनी दूसरी पत्नी व बच्चे के साथ है. यादों का सिलसिला, आपसी जुड़ाव, ग़लती कहां हुई… आदि का सोच का दौर चलता है.

अपनी पहली ही फिल्म में वरुण मित्रा ने शानदार परफॉर्मेंस दिया है. साथ ही रिया चक्रवर्ती, दिगांगना सूर्यवंशी का अभिनय भी बेजोड़ है. यह बंगाली फिल्म प्रकटन की रीमेक है. तनिष्क बागची व जीत गांगुली का संगीत कर्णप्रिय है. गाने ख़ूबसूरत है, विशेषकर पल, तेरे नाम से… अरिजित सिंह, श्रेया घोषाल, ज़ुबिन नौटियाल, जावेद मोहसिन के गाए हर गीत मधुर हैं. कौसर मुनीर की पटकथा सशक्त है.

 

तुंबाड

निर्माता आनंद एल राय व सोहम शाह की तुंबाड फैंटेसी, हॉरर, पीरियड, हिस्टॉरिकल बेस फिल्म है. यह रहस्य, रोमांच व तिलिस्म से भरी सशक्त थ्रिल फिल्म है. सिनेमाटोग्राफी, कॉस्टयूम, आर्ट सब कुछ ख़ूबसूरत हैं.

साल 1920 के दौर की कहानी है, महाराष्ट्र के तुंबाड गांव में तीन पीढ़ियों से रह रहे ब्राह्मण परिवार की है. उनकी जमीदारी थी. वहीं पर वे बरसों से ख़ज़ाने की खोज  करते हैं, पर सफल नहीं हो पाते.

अपनी पहली ही फिल्म में राही अनिल बर्वे ने प्रशंसनीय निर्देशन दिया है. साथ ही सभी कलाकारों- सोहम शाह, हरीश खन्ना, रोजिनी चक्रवर्ती, मोहम्मद समद, ज्योति मालशे, अनीता दाते ने प्रभावशाली अभिनय किया है. रहस्य व रोमांच से भरपूर यह फिल्म दर्शकों को बांधे रखती है.  क्रिएटिव डायरेक्टर आनंद गांधी ने भी फिल्म को ख़ूबसूरत बनाने में पूरा योगदान दिया है. अजय-अतुल व जेस्पर कीड की म्यूज़िक लाजवाब है.

– ऊषा गुप्ता

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मूवी रिव्यू- अंधाधुन: रहस्य-रोमांच की धुन में दर्शक गुम… (Movie Review- Andhadhun: A Rollercoaster Of Thrills And Mystery)

बदलापुर, जॉनी गद्दार के बाद एक बार फिर श्रीराम राघवन ने साबित कर दिया कि थ्रिलर-सस्पेंस मूवी बनाने में उन्हें महारात हासिल है. अंधाधुन फिल्म की कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, परत-दर-परत आश्‍चर्य, रोमांच, रहस्य, बेचैनी भी बढ़ती चली जाती है. बहुत दिनों बाद सशक्त कथा-पटकथा और निर्देशन का संगम देखने को मिला. फ्रेंच शॉर्ट फिल्म द पियानो ट्यूनर पर आधारित फिल्म की जान है आयुष्मान खुराना और तब्बू.

Andhadhun

 

आयुष्मान ने एक नेत्रहीन संगीतकार के रूप में ग़ज़ब का अभिनय किया है. राधिका आप्टे ने उनका बख़ूबी साथ निभाया है.

किस तरह राधिका व आयुष्मान मिलते हैं, फिर राधिका उन्हें अपने पिता के पब में पियानो प्लेयर का जॉब दिलवा देती हैं. कहानी में ट्विस्ट तब आता है, जब तब्बू के पति तब्बू को सरप्राइज़ देने जाते हैं और उनका मर्डर हो जाता है. फिर तब्बू और उनका प्रेमी लाश को ठिकाने लगाने में अचानक घर पहुंचे अंधे आयुष्मान की भी मदद लेते हैं. फिर शुरू होता है- लालच, धोखा, फरेब का मायाजाल और इससे जुड़ा हर कलाकार उसमें फंसता चला जाता है.

बहुत दिनों बाद ग्रे शेड में तब्बू ने बेहद प्रभावशाली अभिनय किया है. उनकी भूमिका डर, चिढ़, घबराहट, ग़ुस्सा सब कुछ पैदा करती है. आयुष्मान का क़िरदार पूरी फिल्म में रहस्य से भरपूर रहता है. कभी लगता है कि ऐसा हो सकता है, तो कभी लगता है नहीं यह ठीक नहीं है. साथी कलाकारों में अनिल धवन, जाकिर हुसैन, अश्‍विनी कालसेकर ने भी बेहतरीन अभिनय किया है. अमित त्रिवेदी, रफ़्तार, गिरीश नकोड का संगीत यूं तो अधिक बांधे नहीं रखता, पर कहानी को फ्लो में भी ले जाता है.

Andhadhun
लवयात्री

प्यार के सफ़र में न जाने कितने मंज़र मिले..

कुछ दर्द से बंधे, कुछ दिल से मिले…

कुछ ऐसा ही महसूस होता है लवयात्री को देखकर. अब यह दर्शकों पर ही निर्भर है कि वे क्या सोचते हैं. सलमान ख़ान के बैनर तले बनी लवयात्री प्यार करनेवालों को पसंद आ जाए, इतना ही बहुत है. हीरो आयुष शर्मा की नवरात्री में हीरोइन वारिना हुसैन से मुलाक़ात, दोस्ती, प्यार, फिर घरवालों का विरोध… वही आम-सी कहानी. संगीत और कुछ सीन्स अच्छे बन पड़े हैं. आयुष-वारिना की यह पहली फिल्म है, पर दोनों ही ख़ास प्रभावित नहीं कर पाए. रोनित रॉय, राम कपूर ने अपनी भूमिका के साथ न्याय किया है.

– ऊषा गुप्ता

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मूवी रिव्यू- सुई धागा+पटाखा- देसी टच कंप्लीट इंटरटेंमेंट (Movie Review- Sui Dhaga+Patakha: Entertaining With A Dose Of Desi)

इन दिनों देसी अंदाज़ के साथ संदेश व मनोरंजन से भरपूर कई फिल्में बन रही हैं. इसी फेहरिस्त में सुई धागा भी है. अनुष्का शर्मा और वरुण धवन अभिनीत यह फिल्म एक आम इंसान की सीधी-सादी ज़िंदगी और स्व रोज़गार को लेकर संघर्ष को बड़ी ख़ूबसूरती से उकेरती है. मेड इन इंडिया के थीम के साथ भी फिल्म न्याय करती है.

ui Dhaga and Patakha

यशराज बैनर तले मनीष शर्मा द्वारा निर्मित व लिखित यह फिल्म सेल्फ एम्प्लॉयमेंट के प्रति जागरूकता भी पैदा करती है. अनुष्का एवं वरुण ने बेहतरीन अभिनय किया है. दोनों की सादगी, संघर्ष, आपसी प्रेम, देसी लुक व अंदाज़ दिल को छू जाती है. वरुण के पिता के रूप में रघुवीर यादव और मां की भूमिका में आभा परमार ने ग़ज़ब की एक्टिंग की है.

अनु मलिक व एंड्रिया गुएरा का संगीत माहौल व मन को ख़ुशनुमा बना देता है. चाव लगा, खटर-पटर, तू ही अहम्, सब बढ़िया है… गीत कर्णप्रिय हैं. पापोन व रोन्किनी गुप्ता की सुमधुर आवाज़ इसे और भी शानदार बना देती है. सुई धागा मेड इन इंडिया, वाकई में बढ़िया सिनेमा का अनुसरण करती है.

Sui Dhaga and Patakha
पटाखा

विशाल भारद्वाज को चरण सिंह पथिक की कहानी दो बहनें इस कदर पसंद आई कि उन्होंने इस पर पटाखा बना डाली. फिल्म की पटकथा, संगीत, निर्देशन- सभी की ज़िम्मेदारी विशालजी ने ख़ुद ही संभाली है.

टीवा स्टार राधिका मदान इसके ज़रिए फिल्मी दुनिया में प्रवेश कर रही हैं. बड़ी बहन चंपा उ़र्फ बड़की के रूप में उन्होंने अपनी पहली ही फिल्म में ज़बर्दस्त अभिनय किया है. उनका साथ दंगल फेम सान्या मल्होत्रा ने गेंदा कुमारी के रूप में बख़ूबी निभाया है. दो बहनें बचपन से लेकर बड़े होने तक अक्सर लड़ाई-झगड़े करती रहती हैं. उनकी लड़ाई को बढ़ाने और उसमें आग में घी का काम करता है उनका पड़ोसी सुनील ग्रोवर. दोनों बेटियों के पिता के रूप मेंं विजय राज ने कमाल की परफॉर्मेंस दी है. सानंद वर्मा ने उनका अच्छा साथ दिया है.

निर्माताओं की टीम यानी रेखा विशाल भारद्वाज, इशान सक्सेना, अजय कपूर, धीरज वाधवान ने दर्शकों को एक अच्छी फिल्म परोसी है. गुलज़ार साहब के गीत फिल्म को और भी ख़ूबसूरत बना देते हैं. रेखा-विशाल भारद्वाज, सुनिधि चाहौन की आवाज़ की जादूगरी फिल्म को बांधे रखती है.

दोनों ही फिल्में शुद्ध देसी अंदाज़ और मनोरंजन से भरपूर है.

– ऊषा गुप्ता

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मूवी रिव्यू- दो बेहतरीन विषयों पर बनी सार्थक फिल्म: बत्ती गुल मीटर चालू/मंटो (Meaningful Cinema: Both The Movies Will Stir Your Thoughts)

आमतौर पर लोग फिल्में (Movies) मनोरंजन (Entertainment) के लिए देखना पसंद करते हैं, लेकिन कुछ ऐसे विषय भी होते हैं, जिनके बारे में जानना-समझना भी ज़रूरी होता है.

Meaningful Movies

बत्ती गुल मीटर चालू

बिजली विभाग की ग़लती और भ्रष्टाचार के चलते किस तरह एक आम इंसान को परेशानियों का सामना करना पड़ता है, इसे ही फिल्म में मुख्य रूप से दिखाया गया है. यह उत्तराखंड के टिहरी जिले में रहनेवाले तीन मित्रों- शाहिद, श्रद्धा और दिव्येंदु की कहानी है. दिव्येंदु के प्रिंटिंग प्रेस का हमेशा बेहिसाब बिजली का बिल आता रहता है. वो इससे बेहद परेशान है. कई बार बिजली विभाग के चक्कर लगाने के बावजूद न ही न्याय मिल पाता है और न ही सुनवाई होती है. आख़िरकार तंग आकर वो आत्महत्या कर लेता है. शाहिद दोस्त की मौत से सकते में आ जाता है और उसे न्याय दिलाने की ठानता है और तब शुरू होती है क़ानूनी लड़ाई व संघर्ष. चूंकि फिल्म में शाहिद कपूर वकील बने हुए है, तो वे पूरा ज़ोर लगा देते हैं अपने दोस्त को इंसाफ़ दिलाने के लिए.

श्रद्धा कपूर फैशन डिज़ाइनर हैं. दो दोस्तों के बीच में फंसी एक प्रेमिका, पर उन तीनों की बॉन्डिंग देखने काबिल है. यामी गौतम एडवोकेट की छोटी भूमिका में अपना प्रभाव छोड़ती हैं. कोर्ट के सीन्स दिलचस्प हैं. शाहिद कपूर, श्रद्धा कपूर, यामी गौतम, दिव्येंदु शर्मा सभी कलाकारों ने सहज और उम्दा अभिनय किया है. श्रीनारायण सिंह टॉयलेट- एक प्रेम कथा के बाद एक बार फिर गंभीर विषय पर सटीक प्रहार करते हैं. अनु मलिक व रोचक कोहली का संगीत और संचित-परंपरा के गीत सुमधुर हैं. अंशुमन महाले की सिनेमैटोेग्राफी लाजवाब है. निर्माताओं की टीम भूषण कुमार, कृष्ण कुमार व निशांत पिट्टी ने सार्थक विषय को पर्दे पर लाने की एक ईमानदार कोशिश की है.

मंटो

जब कभी किसी विवादित शख़्स पर फिल्म बनती है, तब हर कोई उसे अपने नज़रिए से तौलने की कोशिश करने लगता है. मंटो भी इससे जुदा नहीं है. निर्देशक नंदिता दास ने फिराक फिल्म के बाद मंटो के ज़रिए अपने निर्देशन को और भी निखारा है. उस पर मंटो की भूमिका में नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी का बेमिसाल अभिनय मानो सोने पे सुहागा. मंटो की पत्नी के रूप में रसिका दुग्गल ने भी ग़ज़ब की एक्टिंग की है. वैसे फिल्म में कुछ कमियां हैं, जो मंटो को जानने व समझनेवालों को निराश करेगी.

सआदत हसन मंटो की लेखनी हमेशा विवादों के घेरे में रही, विशेषकर ठंडा गोश्त, खोल दो, टोबा टेक सिंह. उन पर उनकी लेखनी में अश्‍लीलता का भरपूर इस्तेमाल करने का आरोप ज़िंदगीभर रहा, फिर चाहे वो आज़ादी के पहले की बात हो या फिर देश आज़ाद होने पर उनका लाहौर में बस जाना हो. इसी कारण उन पर तमाम तरह के इल्ज़ामात, कोर्ट-कचहरी, अभावभरी ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव का दौर सिलसिलेवार चलता रहा. रेसुल पुक्कुटी का संगीत ठीक-ठाक है. साथी कलाकारों में ऋषि कपूर, जावेद अख़्तर, इला अरुण, ताहिर राज भसीन व राजश्री देशपांडे ने अपने छोटे पर महत्वपूर्ण भूमिकाओं के साथ न्याय किया है. निर्माता विक्रांत बत्रा और अजित अंधारे ने मंटो के ज़रिए लोगों तक उनकी शख़्सियत से रू-ब-रू कराने की अच्छी कोशिश की है.

– ऊषा गुप्ता

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मूवी रिव्यू- मनमर्ज़ियां, लव सोनिया, मित्रों… (Movie Review- Manmarziyaan, Love Soniya, Mitron…)

ये तीनों ही फिल्में अपने अलग-अलग विषय के कारण ख़ास बन गई हैं.

Manmarziyaan, Love Soniya, Mitron

आनंद एल. राय द्वारा निर्मित अनुराग कश्यप की मनमर्ज़ियां बिंदास-मनमौजी प्रेमी-प्रेमिका के साथ-साथ त्रिकोण प्रेम को डिफरेंट अंदाज़ में पेश किया गया है. विक्की कौशल, तापसी पन्नू और अभिषेक बच्चन का ज़बर्दस्त अभिनय व अनुराग की सशक्त निर्देशन दर्शकों को बांधे रखती है. फिल्म का ख़ास आकर्षण तापसी का मदमस्त बोल्ड अंदाज़ है. अन्य कलाकारों में पवन मल्होत्रा भी प्रभावित करते हैं.

अमित त्रिवेदी का संगीत कर्णप्रिय है. हर्षदीप कौर, जाज़िम शर्मा, एम्मी विर्क, शाहिद माल्या, सिकंदर कहलोन, मस्त अली द्वारा गाए गाने भी सुमधुर हैं.

लव सोनिया फिल्म दुनियाभर में जिस्मफरोशी का फैलता मकड़जाल और उसमें कभी मजबूरी तो कभी अनजाने में फंसती जा रही स्त्रियों की त्रासदी को बयां करता है. सोनिया के क़िरदार में मृणाल ठाकुर की यह पहली फिल्म है, लेकिन अपने सहज व बेमिसाल अभिनय से उन्होंने सभी को प्रभावित किया. तबरेज नूरानी का निर्देशन ने फिल्म में अच्छी पकड़ बनाई है, जिसके कारण फिल्म में गाने की कमी भी खलती नहीं है. उन्होंने निर्माता से आगे बढ़कर इस फिल्म के जरिए निर्देशन की दुनिया में क़दम रखा है.

रिचा चड्ढा, राजकुमार राव, मनोज बाजपेयी, रिया शिशोदिया, फ्रिडा पिंटो, सई ताम्हणकर, आदिल हुसैन के साथ-साथा हॉलीवुड स्टार डेमी मूर की उपस्थिति भी फिल्म को लाजवाब बनाती है.

आज की युवापीढ़ी की बेरोज़गारी और लड़कियों की महत्वाकांक्षाओं से जुड़ी बारीक़ियों को दर्शाती है फिल्म मित्रों. फिल्म की कहानी-पटकथा और नितिन कक्कड़ का बेहतरीन निर्देशन इसे ख़ूबसूरत व ख़ास बना देता है. टीवी स्टार कृतिका कामरा मित्रों से फिल्मी दुनिया में पर्दापण कर रही हैं. जैकी भगनानी ने अपने सहज-सरल अदाकारी से दिल जीत लिया है. उनका साथ उनके मित्र के रूप में प्रतीक गांधी, नीरज सूद, शिवम पारेख ने अच्छा दिया है. सोनू निगम, यो यो हनी सिंह, आतिफ असलम के गाए गीत बेहद मधुर है और पहले से ही हिट हो चुके हैं, ख़ासकर कमरिया वाला गाना. यो यो हनी सिंह, तनिष्क बागची, अभिषेक नैलवाल, तोषी-शारीब सबरी, समीरुद्दीन- सभी संगीतकारों ने अच्छी मेहनत की है. फिल्म में ड्रामा, इमोशन, कॉमेडी सभी का मनोरंजन से भरपूर तड़का है.

– ऊषा गुप्ता

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Movie Review: दर्शकों को खूब हंसा रही है ‘हैप्पी’ तो ‘जीनियस’ का नहीं चला जादू (Happy Phirr Bhag Jayegi and Genius Movie Review)

आज फिल्मी फ्राइडे है और सोनाक्षी सिन्हा की हैप्पी फिर भाग जाएगी (Happy Phirr Bhag Jayegi) के साथ फिल्म गदर-एक प्रेमकथा में सनी देओल के बेटे का किरदार निभा चुके उत्कर्ष शर्मा की फिल्म जीनियस (Genius) रिलीज़ हुई है. बता दें कि फिल्म हैप्पी फिर भाग जाएगी साल 2016 में आई फिल्म हैप्पी भाग जाएगी का सिक्वल है, जबकि गदर के डायरेक्टर अनिल शर्मा ने अपने बेटे उत्कर्ष शर्मा को लीड रोल में लेकर फिल्म जीनियस को डायरेक्ट किया है. बॉक्स ऑफिस पर रिलीज़ हुई ये दोनों फिल्में दर्शकों को पसंद आ रही हैं या उन्हें निराश कर रही है, चलिए जानते हैं.

Happy Phirr Bhag Jayegi and Genius Movie

मूवी- हैप्पी फिर भाग जायेगी

डायरेक्टर- मुदस्सर अज़ीज़

स्टार कास्ट- सोनाक्षी सिन्हा, जिम्मी शेरगिल, पीयूष मिश्रा, डेंजिल स्मिथ, डायना पेंटी, अली फ़ज़ल

रेटिंग- 3/5

Happy Phirr Bhag Jayegi

कहानी-

साल 2016 में आई डायरेक्टर मुदस्सर अज़ीज़ की फिल्म हैप्पी भाग जाएगी के बाद, उन्होंने एक बार फिर नई स्क्रिप्ट के साथ हैप्पी फिर भाग जाएगी फिल्म बनाई है. पिछली फिल्म में हैप्पी पाकिस्तान भाग जाती हैं, लेकिन इसके सीक्वल में दो-दो हैप्पी हैं जो चीन का सफर तय करती दिखाई देंगी. फिल्म की कहानी की शुरुआत चीन जा रही प्रोफेसर हरप्रीत कौर (सोनाक्षी सिन्हा) यानी हैप्पी और उनके पति गुड्डू (अली फज़ल) से शुरू होती है. इसी बीच दूसरी हरप्रीत कौर (डायना पेंटी) ऊर्फ हैप्पी भी एक स्टेज शो के लिए चीन के सफर पर निकल जाती हैं.

एयरपोर्ट पर कुछ चीनी किडनैपर दूसरी हैप्पी (डायना पेंटी) को किडनैप करने के लिए आते हैं, लेकिन एक जैसे नाम की वजह से वो पहली हैप्पी (सोनाक्षी सिन्हा) को ग़लती से किडनैप कर लेते हैं. कहानी में पवन सिंह बग्गा (जिम्मी शेरगिल) और पाकिस्तान के अफसर अफरीदी (पीयूष मिश्रा) भी हैप्पी की तलाश में चीन जाते हैं. इस बार फिल्म में मौजूद दोनों हैप्पी को किन-किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, यह सब जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी.

एक्टिंग- 

इस फिल्म में समय-समय पर आने वाले कॉमेडी के पंच दर्शकों को हंसा-हंसाकर लोटपोट कर सकते हैं. बात करें इस फिल्म के सितारों की तो सोनाक्षी सिन्हा ने अपने किरदार को बखूबी निभाया है. हिंदी-पंजाबी में अपनी डायलॉग डिलीवरी से सोनाक्षी अमृतसर की हरप्रीत कौर को पर्दे पर जीवंत करती दिखाई देती हैं. वहीं जिम्मी शेरगिल और पीयूष मिश्रा के बीच नोकझोंक और कॉमेडी के पंचेस दर्शकों को काफ़ी हंसाते हैं. जस्सी गिल, डायना पेंटी और अली फज़ल जैसे कलाकारों की मौजूदगी इस फिल्म को और भी दिलचस्प बनाती है.

डायरेक्शन-

स्क्रिप्टिंग में डायरेक्टर मुदस्सर अज़ीज़ की मेहनत साफ़ दिखाई देती है. फिल्म की कहानी और उसे पर्दे पर दिखाने का तरीक़ा भी कमाल का है. फिल्म का डायरेक्शन, सिनेमेटोग्राफी और लोकेशंस काफ़ी बढ़िया हैं. फिल्म भले ही चीन पर बेस्ड हो, लेकिन पूरी फिल्म दर्शकों को बेहद ख़ूबसूरती से पटियाला, अमृतसर, दिल्ली, कश्मीर और पाकिस्तान से भी जोड़कर रखती है. फिल्म के राइटर और डायरेक्टर मुदस्सर अज़ीज़ ने पूरी फिल्म में दमदार डायलॉग से भारत-पाकिस्तान और चीन के बीच की पूरी तनातनी पर व्यंग्य भी किया है जो दर्शकों को बहुत हंसाते हैं.

Genius Movie

मूवी- जीनियस

डायरेक्टर- अनिल शर्मा

स्टार कास्ट- उत्कर्ष शर्मा, इशिता चौहान, नवाज़ुद्दीन सिद्दिकी, मिथुन चक्रवर्ती

रेटिंग- 2/5 

कहानी- 

गदर- एक प्रेम कथा, अपने और वीर जैसी फिल्में बनाने वाले डायरेक्टर अनिल शर्मा ने इस बार अपने बेटे उत्कर्ष शर्मा को लीड रोल में लेकर फिल्म जीनियस बनाई है. इस फिल्म की कहानी मथुरा के रहने वाले वासुदेव शास्त्री (उत्कर्ष शर्मा) से शुरू होती है, जो पढ़ाई पूरी करने के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसी रॉ के लिए काम करता है. इसमें नंदिनी (इशिता चौहान) उनकी प्रेमिका का किरदार निभा रही हैं. जब वासुदेव रॉ के लिए काम करते हैं, उसी दौरान उनकी मुलाक़ात दोबारा उनके कॉलेज का प्यार रह चुकीं नंदिनी से होती है. फिल्म की कहानी में दिलचस्प मोड़ तब आता है, जब नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी की एंट्री होती है. ऐसे में वासुदेव के सामने मुश्किल तब आती है जब उसे अपने प्यार या देश की रक्षा में से किसी एक को चुनना पड़ता है. हालांकि पूरी फिल्म के दौरान कई ट्विस्ट और टर्न आते हैं, जिन्हें जानने के लिए आपको सिनेमाघरों का रूख़ करना पड़ेगा.

एक्टिंग-

फिल्म गदर-एक प्रेम कथा में सनी देओल के बेटे का किरदार निभा चुके उत्कर्ष शर्मा इस फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं. हालांकि उन्होंने फिल्म में अच्छा काम किया है, लेकिन उन्हें अभी एक्टिंग में और निखार लाने की ज़रूरत है. जबकि नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने हर बार की तरह इस बार भी अच्छी एक्टिंग की है, बावजूद इसके फिल्म की कमज़ोर कहानी और स्क्रीनप्ले के कारण जीनियस दर्शकों पर अपनी छाप छोड़ने में नाकाम होती दिखाई दे रही है.

डायरेक्शन-

इस दौर के हिसाब से फिल्म की कहानी काफ़ी कमज़ोर है और जिस तरह से इसका डायरेक्शन किया गया है उसमें कोई नयापन नहीं दिखाई दे रहा है. कहानी को पर्दे पर उतारने का तरीक़ा भी काफ़ी पुराना लगता है और इसके क्लाइमेक्स में भी कोई नयापन दिखाई नहीं देता है. वहीं मिथुन चक्रवर्ती जैसे कलाकारों का भी सही तरीक़े से इस्तेमाल इस फिल्म में नहीं किया गया है.

ग़ौरतलब है कि पहले से ही बॉक्स ऑफिस पर जॉन अब्राहम की सत्यमेव जयते, अक्षय कुमार की गोल्ड चल रही है. इसी बीच हैप्पी फिर भाग जाएगी की एंट्री दर्शकों को हंसाने में क़ामयाब होती दिख रही है, ऐसे हालात में जीनियस का जादू दर्शकों पर चल पाना थोड़ा मुश्किल लगता है. अब यह आपको तय करना है कि इस वीकेंड परिवार के साथ आप कौन सी फिल्म देखना पसंद करेंगे.

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मूवी रिव्यू- गोल्ड ने किया सबको बोल्ड (Movie Review- Gold- Awe- Inspiring And Power-Packed)

अक्षय कुमार की गोल्ड हॉकी खेल में भारत के सुनहरे दौर की कहानी है. आज़ादी के बाद जब देश ने साल 1948 में अपना पहला ओलिंपिक गोल्ड लंदन के वेंबले स्टेडियम में जीता था. इसके पहले अंग्रेज़ों का देश पर राज था और हम उनके लिए खेलते थे. इसमें कोई दो राय नहीं कि फिल्म देश के गर्व से जुड़ी हुई है. किस तरह हॉकी टीम के कोच बने अक्षय और सभी खिलाड़ी अपने देश के लिए पहला स्वर्ण पदक जीतना चाहते हैं और उसके लिए सब एकजुट होकर संघर्ष करते हैं.

Gold Movie

एक्सेल एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी गोल्ड मूवी इतिहास के पन्नों में दर्ज एक सच्ची घटना पर आधारित है. इसकी कहानी साल 1936 से लेकर 1948 के बीच की है.

रीमा कागती का बेहतरीन निर्देशन फिल्म को नई ऊंचाइयां देती है. अक्षय कुमार-मौनी रॉय के अलावा सभी कलाकारों ने लाजवाब अभिनय किया है.

अक्षय कुमार इसमें भारतीय हॉकी टीम के मैनेजर तपन दास की भूमिका में अपने शानदार अभिनय से हर किसी का दिल जीत लेते हैं. उनकी पत्नी की भूमिका में मौनी रॉय पहली बार टीवी से फिल्मों में पर्दापण कर रही हैं.

अमित साध, कुणाल कपूर, अंगद बेदी, विनीत कुमार सिंह, सन्नी कौशन, निकिता दत्ता, भावशील सिंह सहानी, जतीन सरना, अब्दुल कादिर अमिल भी अहम् भूमिका में है. हर किसी ने अपने क़िरदार के साथ न्याय किया है.

आज़ादी के बाद पहला गोल्ड मेडल जीतने के बाद सभी का जश्‍न मनाना, हर किसी के दिलोदिमाग़ में जीत के जज़्बे और देशभक्ति के भाव को रोमांच से भर देता है.

Gold Movie

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गोल्ड के निर्माता रितेश सिधवानी और फरहान अख़्तर की यह पहल क़ाबिल-ए-तारीफ़ है. उस पर जावेद अख़्तर के प्रभावशाली संवाद फिल्म को और भी जानदार बनाते हैं. राजेश देवराज की पटकथा व कहानी फिल्म की जान हैै. संगीत का जादू सचिन-जिगर, तनिष्क बागची और आक्रो पार्वो मुखर्जी ने बिखेरा है.

स्वतंत्रता दिवस पर रिलीज़ आज़ादी के उमंग-उत्साह को दुगुना कर देती है यह फिल्म. जितने बाजू उतने सर देख ले दुश्मन जान के… हारेगा वो हर बाज़ी जब हम खेले जी जान से… इस गीत को सार्थक करती है फिल्म गोल्ड.

– ऊषा गुप्ता

Gold

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Vishwaroopam 2 Movie Review: ‘विश्वरूपम 2’ में दिखा कमल हासन का ज़बरदस्त एक्शन अवतार (Vishwaroopam 2 Movie Review)

एक्टर कमल हासन की फिल्म विश्वरूपम 2 सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है. यह फिल्म विश्वरूपम का सीक्वल है. बता दें कि कमल हासन की फिल्में हमेशा लीक से हटकर किसी न किसी ख़ास मुद्दे पर आधारित होती हैं. 15 अगस्त से पहले रिलीज़ हुई यह फिल्म देशभक्ति और आतंक के मुद्दे पर आधारित एक स्पाई थ्रिलर फिल्म है, जिसमें कमल हासन का जबरदस्त एक्शन अवतार दिख रहा है. साल 2013 में आई फिल्म विश्वरूपम का यह सिक्वल दर्शकों को कुछ ख़ास पसंद नहीं आ रहा है, क्योंकि इसकी कहानी पेश करने का अंदाज़ और इसके प्रीक्वल के फ्लैशबैक सीन्स दर्शकों की उलझन बढ़ा रहे हैं.
Vishwaroopam 2 Movie
मूवी- विश्वरूपम 2
प्रोड्यूसर व डायरेक्टर- कमल हासन
स्टार कास्ट- कमल हासन, राहुल बोस, शेखर कपूर, पूजा कुमार, एंड्रिया जेरेमिया, जयदीप अहलावत, वहीदा रहमान
अवधि- 2 घंटा 21 मिनट
रेटिंग- 2/5
Vishwaroopam 2 Movie

कहानी-

विश्वरूपम 2 कहानी और स्क्रिप्ट के मामले में एक औसत फिल्म है. यह फिल्म वन मैन शो है, क्योंकि इसकी स्क्रिप्टिंग, डायरेक्शन की पूरी बागडोर कमल हासन ने ख़ुद संभाली थी. इस फिल्म की कहानी वहीं से शुरू होती है, जहां पर पिछली फिल्म की कहानी ख़त्म हुई थी. फिल्म में रॉ एजेंट मेजर विशाम अहमद कश्मीरी (कमल हासन) अपनी पत्नी निरूपमा (पूजा कुमार) और अपनी सहयोगी अस्मिता (एंड्रिया जेरेमिया) के साथ अलकायदा के मिशक को पूरा करने के बाद वापस लौटते हैं. पिछली फिल्म से कहानी आगे बढ़ती है और इस बार आतंकी उमर कुरैशी (राहुल बोस) ने भारत में 60 से भी ज़्यादा बम लगा दिए हैं, जिन्हें ढूंढकर उसके मकसद को नाकाम करने की चुनौती मेजर विशाम अहमद कश्मीरी के सामने है. फिल्म का हीरो आंतक के इस ख़ौफनाक खेल को रोकने में क़ामयाब होता है या नहीं, इसके लिए यह फिल्म देखनी पड़ेगी.

डायरेक्शन- 

विश्वरूपम 2 में कमल हासन ने निर्माता, निर्देशक, लेखक और एक्टर जैसी कई ज़िम्मेदारियां निभाई है. फिल्म का फर्स्ट हाफ स्लो है, लेकिन सेकेंड हाफ इससे बेहतर है. फिल्म का स्क्रीन प्ले कमज़ोर है, लेकिन संवाद बेहतर हैं. ख़ुफियागिरी और एक्शन ही इस फिल्म का मुख्य आधार है, बावजूद इसके फिल्म बार-बार अपने मुद्दे से भटकती हुई दिखाई देती है. अगर आपने इस फिल्म का प्रीक्वल नहीं देखा तो विश्वरूपम 2 को समझने में आपको दिक्कत हो सकती है.

एक्टिंग- 

एक्टिंग के मामले में 63 साल के कमल हासन एक कमाल के अभिनेता है, लेकिन जब वो एक्शन करते दिखाई देते हैं तो उसपर उनकी उम्र भारी पड़ती दिख रही है. अभिनेत्रियों में पूजा कुमार और एंड्रिया जेरेमिया ने अच्छा अभिनय किया है. फिल्म में आतंकी का किरदार निभाने वाले राहुल बोस खलनायक के रूप में थोड़े कमज़ोर पड़ते दिख रहे हैं. वहीदा रहमान फिल्म में कमल हासन की मां बनी हैं, जो अल्ज़ाइमर से पीड़ित हैं. इसके अलावा शेखर कपूर और जयदीप अहलावत ने भी अच्छी एक्टिंग की है.

अगर आप कमल हासन के ज़बरदस्त फैन हैं और उनकी किसी भी फिल्म को देखना नहीं भूलते, तो इस वीकेंड आप अपने पसंदीदा हीरो कमल हासन की फिल्म विश्वरूपम 2 देख सकते हैं.

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