Tag Archives: movie review

मूवी रिव्यू- दो बेहतरीन विषयों पर बनी सार्थक फिल्म: बत्ती गुल मीटर चालू/मंटो (Meaningful Cinema: Both The Movies Will Stir Your Thoughts)

आमतौर पर लोग फिल्में (Movies) मनोरंजन (Entertainment) के लिए देखना पसंद करते हैं, लेकिन कुछ ऐसे विषय भी होते हैं, जिनके बारे में जानना-समझना भी ज़रूरी होता है.

Meaningful Movies

बत्ती गुल मीटर चालू

बिजली विभाग की ग़लती और भ्रष्टाचार के चलते किस तरह एक आम इंसान को परेशानियों का सामना करना पड़ता है, इसे ही फिल्म में मुख्य रूप से दिखाया गया है. यह उत्तराखंड के टिहरी जिले में रहनेवाले तीन मित्रों- शाहिद, श्रद्धा और दिव्येंदु की कहानी है. दिव्येंदु के प्रिंटिंग प्रेस का हमेशा बेहिसाब बिजली का बिल आता रहता है. वो इससे बेहद परेशान है. कई बार बिजली विभाग के चक्कर लगाने के बावजूद न ही न्याय मिल पाता है और न ही सुनवाई होती है. आख़िरकार तंग आकर वो आत्महत्या कर लेता है. शाहिद दोस्त की मौत से सकते में आ जाता है और उसे न्याय दिलाने की ठानता है और तब शुरू होती है क़ानूनी लड़ाई व संघर्ष. चूंकि फिल्म में शाहिद कपूर वकील बने हुए है, तो वे पूरा ज़ोर लगा देते हैं अपने दोस्त को इंसाफ़ दिलाने के लिए.

श्रद्धा कपूर फैशन डिज़ाइनर हैं. दो दोस्तों के बीच में फंसी एक प्रेमिका, पर उन तीनों की बॉन्डिंग देखने काबिल है. यामी गौतम एडवोकेट की छोटी भूमिका में अपना प्रभाव छोड़ती हैं. कोर्ट के सीन्स दिलचस्प हैं. शाहिद कपूर, श्रद्धा कपूर, यामी गौतम, दिव्येंदु शर्मा सभी कलाकारों ने सहज और उम्दा अभिनय किया है. श्रीनारायण सिंह टॉयलेट- एक प्रेम कथा के बाद एक बार फिर गंभीर विषय पर सटीक प्रहार करते हैं. अनु मलिक व रोचक कोहली का संगीत और संचित-परंपरा के गीत सुमधुर हैं. अंशुमन महाले की सिनेमैटोेग्राफी लाजवाब है. निर्माताओं की टीम भूषण कुमार, कृष्ण कुमार व निशांत पिट्टी ने सार्थक विषय को पर्दे पर लाने की एक ईमानदार कोशिश की है.

मंटो

जब कभी किसी विवादित शख़्स पर फिल्म बनती है, तब हर कोई उसे अपने नज़रिए से तौलने की कोशिश करने लगता है. मंटो भी इससे जुदा नहीं है. निर्देशक नंदिता दास ने फिराक फिल्म के बाद मंटो के ज़रिए अपने निर्देशन को और भी निखारा है. उस पर मंटो की भूमिका में नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी का बेमिसाल अभिनय मानो सोने पे सुहागा. मंटो की पत्नी के रूप में रसिका दुग्गल ने भी ग़ज़ब की एक्टिंग की है. वैसे फिल्म में कुछ कमियां हैं, जो मंटो को जानने व समझनेवालों को निराश करेगी.

सआदत हसन मंटो की लेखनी हमेशा विवादों के घेरे में रही, विशेषकर ठंडा गोश्त, खोल दो, टोबा टेक सिंह. उन पर उनकी लेखनी में अश्‍लीलता का भरपूर इस्तेमाल करने का आरोप ज़िंदगीभर रहा, फिर चाहे वो आज़ादी के पहले की बात हो या फिर देश आज़ाद होने पर उनका लाहौर में बस जाना हो. इसी कारण उन पर तमाम तरह के इल्ज़ामात, कोर्ट-कचहरी, अभावभरी ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव का दौर सिलसिलेवार चलता रहा. रेसुल पुक्कुटी का संगीत ठीक-ठाक है. साथी कलाकारों में ऋषि कपूर, जावेद अख़्तर, इला अरुण, ताहिर राज भसीन व राजश्री देशपांडे ने अपने छोटे पर महत्वपूर्ण भूमिकाओं के साथ न्याय किया है. निर्माता विक्रांत बत्रा और अजित अंधारे ने मंटो के ज़रिए लोगों तक उनकी शख़्सियत से रू-ब-रू कराने की अच्छी कोशिश की है.

– ऊषा गुप्ता

यह भी पढ़े: इस अंदाज़ में करीना कपूर ने मनाया अपना जन्मदिन, देखिए पार्टी पिक्स (Inside Kareena Kapoor’s Birthday Bash)

मूवी रिव्यू- मनमर्ज़ियां, लव सोनिया, मित्रों… (Movie Review- Manmarziyaan, Love Soniya, Mitron…)

ये तीनों ही फिल्में अपने अलग-अलग विषय के कारण ख़ास बन गई हैं.

Manmarziyaan, Love Soniya, Mitron

आनंद एल. राय द्वारा निर्मित अनुराग कश्यप की मनमर्ज़ियां बिंदास-मनमौजी प्रेमी-प्रेमिका के साथ-साथ त्रिकोण प्रेम को डिफरेंट अंदाज़ में पेश किया गया है. विक्की कौशल, तापसी पन्नू और अभिषेक बच्चन का ज़बर्दस्त अभिनय व अनुराग की सशक्त निर्देशन दर्शकों को बांधे रखती है. फिल्म का ख़ास आकर्षण तापसी का मदमस्त बोल्ड अंदाज़ है. अन्य कलाकारों में पवन मल्होत्रा भी प्रभावित करते हैं.

अमित त्रिवेदी का संगीत कर्णप्रिय है. हर्षदीप कौर, जाज़िम शर्मा, एम्मी विर्क, शाहिद माल्या, सिकंदर कहलोन, मस्त अली द्वारा गाए गाने भी सुमधुर हैं.

लव सोनिया फिल्म दुनियाभर में जिस्मफरोशी का फैलता मकड़जाल और उसमें कभी मजबूरी तो कभी अनजाने में फंसती जा रही स्त्रियों की त्रासदी को बयां करता है. सोनिया के क़िरदार में मृणाल ठाकुर की यह पहली फिल्म है, लेकिन अपने सहज व बेमिसाल अभिनय से उन्होंने सभी को प्रभावित किया. तबरेज नूरानी का निर्देशन ने फिल्म में अच्छी पकड़ बनाई है, जिसके कारण फिल्म में गाने की कमी भी खलती नहीं है. उन्होंने निर्माता से आगे बढ़कर इस फिल्म के जरिए निर्देशन की दुनिया में क़दम रखा है.

रिचा चड्ढा, राजकुमार राव, मनोज बाजपेयी, रिया शिशोदिया, फ्रिडा पिंटो, सई ताम्हणकर, आदिल हुसैन के साथ-साथा हॉलीवुड स्टार डेमी मूर की उपस्थिति भी फिल्म को लाजवाब बनाती है.

आज की युवापीढ़ी की बेरोज़गारी और लड़कियों की महत्वाकांक्षाओं से जुड़ी बारीक़ियों को दर्शाती है फिल्म मित्रों. फिल्म की कहानी-पटकथा और नितिन कक्कड़ का बेहतरीन निर्देशन इसे ख़ूबसूरत व ख़ास बना देता है. टीवी स्टार कृतिका कामरा मित्रों से फिल्मी दुनिया में पर्दापण कर रही हैं. जैकी भगनानी ने अपने सहज-सरल अदाकारी से दिल जीत लिया है. उनका साथ उनके मित्र के रूप में प्रतीक गांधी, नीरज सूद, शिवम पारेख ने अच्छा दिया है. सोनू निगम, यो यो हनी सिंह, आतिफ असलम के गाए गीत बेहद मधुर है और पहले से ही हिट हो चुके हैं, ख़ासकर कमरिया वाला गाना. यो यो हनी सिंह, तनिष्क बागची, अभिषेक नैलवाल, तोषी-शारीब सबरी, समीरुद्दीन- सभी संगीतकारों ने अच्छी मेहनत की है. फिल्म में ड्रामा, इमोशन, कॉमेडी सभी का मनोरंजन से भरपूर तड़का है.

– ऊषा गुप्ता

यह भी पढ़ें: हिंदी दिवस पर विशेष- हिंदी फिल्मों में हिंदी का मिक्सचर… (Hindi Mixed In Hindi Cinema)

Movie Review: दर्शकों को खूब हंसा रही है ‘हैप्पी’ तो ‘जीनियस’ का नहीं चला जादू (Happy Phirr Bhag Jayegi and Genius Movie Review)

आज फिल्मी फ्राइडे है और सोनाक्षी सिन्हा की हैप्पी फिर भाग जाएगी (Happy Phirr Bhag Jayegi) के साथ फिल्म गदर-एक प्रेमकथा में सनी देओल के बेटे का किरदार निभा चुके उत्कर्ष शर्मा की फिल्म जीनियस (Genius) रिलीज़ हुई है. बता दें कि फिल्म हैप्पी फिर भाग जाएगी साल 2016 में आई फिल्म हैप्पी भाग जाएगी का सिक्वल है, जबकि गदर के डायरेक्टर अनिल शर्मा ने अपने बेटे उत्कर्ष शर्मा को लीड रोल में लेकर फिल्म जीनियस को डायरेक्ट किया है. बॉक्स ऑफिस पर रिलीज़ हुई ये दोनों फिल्में दर्शकों को पसंद आ रही हैं या उन्हें निराश कर रही है, चलिए जानते हैं.

Happy Phirr Bhag Jayegi and Genius Movie

मूवी- हैप्पी फिर भाग जायेगी

डायरेक्टर- मुदस्सर अज़ीज़

स्टार कास्ट- सोनाक्षी सिन्हा, जिम्मी शेरगिल, पीयूष मिश्रा, डेंजिल स्मिथ, डायना पेंटी, अली फ़ज़ल

रेटिंग- 3/5

Happy Phirr Bhag Jayegi

कहानी-

साल 2016 में आई डायरेक्टर मुदस्सर अज़ीज़ की फिल्म हैप्पी भाग जाएगी के बाद, उन्होंने एक बार फिर नई स्क्रिप्ट के साथ हैप्पी फिर भाग जाएगी फिल्म बनाई है. पिछली फिल्म में हैप्पी पाकिस्तान भाग जाती हैं, लेकिन इसके सीक्वल में दो-दो हैप्पी हैं जो चीन का सफर तय करती दिखाई देंगी. फिल्म की कहानी की शुरुआत चीन जा रही प्रोफेसर हरप्रीत कौर (सोनाक्षी सिन्हा) यानी हैप्पी और उनके पति गुड्डू (अली फज़ल) से शुरू होती है. इसी बीच दूसरी हरप्रीत कौर (डायना पेंटी) ऊर्फ हैप्पी भी एक स्टेज शो के लिए चीन के सफर पर निकल जाती हैं.

एयरपोर्ट पर कुछ चीनी किडनैपर दूसरी हैप्पी (डायना पेंटी) को किडनैप करने के लिए आते हैं, लेकिन एक जैसे नाम की वजह से वो पहली हैप्पी (सोनाक्षी सिन्हा) को ग़लती से किडनैप कर लेते हैं. कहानी में पवन सिंह बग्गा (जिम्मी शेरगिल) और पाकिस्तान के अफसर अफरीदी (पीयूष मिश्रा) भी हैप्पी की तलाश में चीन जाते हैं. इस बार फिल्म में मौजूद दोनों हैप्पी को किन-किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, यह सब जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी.

एक्टिंग- 

इस फिल्म में समय-समय पर आने वाले कॉमेडी के पंच दर्शकों को हंसा-हंसाकर लोटपोट कर सकते हैं. बात करें इस फिल्म के सितारों की तो सोनाक्षी सिन्हा ने अपने किरदार को बखूबी निभाया है. हिंदी-पंजाबी में अपनी डायलॉग डिलीवरी से सोनाक्षी अमृतसर की हरप्रीत कौर को पर्दे पर जीवंत करती दिखाई देती हैं. वहीं जिम्मी शेरगिल और पीयूष मिश्रा के बीच नोकझोंक और कॉमेडी के पंचेस दर्शकों को काफ़ी हंसाते हैं. जस्सी गिल, डायना पेंटी और अली फज़ल जैसे कलाकारों की मौजूदगी इस फिल्म को और भी दिलचस्प बनाती है.

डायरेक्शन-

स्क्रिप्टिंग में डायरेक्टर मुदस्सर अज़ीज़ की मेहनत साफ़ दिखाई देती है. फिल्म की कहानी और उसे पर्दे पर दिखाने का तरीक़ा भी कमाल का है. फिल्म का डायरेक्शन, सिनेमेटोग्राफी और लोकेशंस काफ़ी बढ़िया हैं. फिल्म भले ही चीन पर बेस्ड हो, लेकिन पूरी फिल्म दर्शकों को बेहद ख़ूबसूरती से पटियाला, अमृतसर, दिल्ली, कश्मीर और पाकिस्तान से भी जोड़कर रखती है. फिल्म के राइटर और डायरेक्टर मुदस्सर अज़ीज़ ने पूरी फिल्म में दमदार डायलॉग से भारत-पाकिस्तान और चीन के बीच की पूरी तनातनी पर व्यंग्य भी किया है जो दर्शकों को बहुत हंसाते हैं.

Genius Movie

मूवी- जीनियस

डायरेक्टर- अनिल शर्मा

स्टार कास्ट- उत्कर्ष शर्मा, इशिता चौहान, नवाज़ुद्दीन सिद्दिकी, मिथुन चक्रवर्ती

रेटिंग- 2/5 

कहानी- 

गदर- एक प्रेम कथा, अपने और वीर जैसी फिल्में बनाने वाले डायरेक्टर अनिल शर्मा ने इस बार अपने बेटे उत्कर्ष शर्मा को लीड रोल में लेकर फिल्म जीनियस बनाई है. इस फिल्म की कहानी मथुरा के रहने वाले वासुदेव शास्त्री (उत्कर्ष शर्मा) से शुरू होती है, जो पढ़ाई पूरी करने के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसी रॉ के लिए काम करता है. इसमें नंदिनी (इशिता चौहान) उनकी प्रेमिका का किरदार निभा रही हैं. जब वासुदेव रॉ के लिए काम करते हैं, उसी दौरान उनकी मुलाक़ात दोबारा उनके कॉलेज का प्यार रह चुकीं नंदिनी से होती है. फिल्म की कहानी में दिलचस्प मोड़ तब आता है, जब नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी की एंट्री होती है. ऐसे में वासुदेव के सामने मुश्किल तब आती है जब उसे अपने प्यार या देश की रक्षा में से किसी एक को चुनना पड़ता है. हालांकि पूरी फिल्म के दौरान कई ट्विस्ट और टर्न आते हैं, जिन्हें जानने के लिए आपको सिनेमाघरों का रूख़ करना पड़ेगा.

एक्टिंग-

फिल्म गदर-एक प्रेम कथा में सनी देओल के बेटे का किरदार निभा चुके उत्कर्ष शर्मा इस फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं. हालांकि उन्होंने फिल्म में अच्छा काम किया है, लेकिन उन्हें अभी एक्टिंग में और निखार लाने की ज़रूरत है. जबकि नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने हर बार की तरह इस बार भी अच्छी एक्टिंग की है, बावजूद इसके फिल्म की कमज़ोर कहानी और स्क्रीनप्ले के कारण जीनियस दर्शकों पर अपनी छाप छोड़ने में नाकाम होती दिखाई दे रही है.

डायरेक्शन-

इस दौर के हिसाब से फिल्म की कहानी काफ़ी कमज़ोर है और जिस तरह से इसका डायरेक्शन किया गया है उसमें कोई नयापन नहीं दिखाई दे रहा है. कहानी को पर्दे पर उतारने का तरीक़ा भी काफ़ी पुराना लगता है और इसके क्लाइमेक्स में भी कोई नयापन दिखाई नहीं देता है. वहीं मिथुन चक्रवर्ती जैसे कलाकारों का भी सही तरीक़े से इस्तेमाल इस फिल्म में नहीं किया गया है.

ग़ौरतलब है कि पहले से ही बॉक्स ऑफिस पर जॉन अब्राहम की सत्यमेव जयते, अक्षय कुमार की गोल्ड चल रही है. इसी बीच हैप्पी फिर भाग जाएगी की एंट्री दर्शकों को हंसाने में क़ामयाब होती दिख रही है, ऐसे हालात में जीनियस का जादू दर्शकों पर चल पाना थोड़ा मुश्किल लगता है. अब यह आपको तय करना है कि इस वीकेंड परिवार के साथ आप कौन सी फिल्म देखना पसंद करेंगे.

यह भी पढ़ें: Movie Review: ज़बर्दस्त एक्शन, दमदार डायलॉग्स और सस्पेंस से भरपूर है सत्यमेव जयते (Movie Review Satyameva Jayate)

 

मूवी रिव्यू- गोल्ड ने किया सबको बोल्ड (Movie Review- Gold- Awe- Inspiring And Power-Packed)

अक्षय कुमार की गोल्ड हॉकी खेल में भारत के सुनहरे दौर की कहानी है. आज़ादी के बाद जब देश ने साल 1948 में अपना पहला ओलिंपिक गोल्ड लंदन के वेंबले स्टेडियम में जीता था. इसके पहले अंग्रेज़ों का देश पर राज था और हम उनके लिए खेलते थे. इसमें कोई दो राय नहीं कि फिल्म देश के गर्व से जुड़ी हुई है. किस तरह हॉकी टीम के कोच बने अक्षय और सभी खिलाड़ी अपने देश के लिए पहला स्वर्ण पदक जीतना चाहते हैं और उसके लिए सब एकजुट होकर संघर्ष करते हैं.

Gold Movie

एक्सेल एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी गोल्ड मूवी इतिहास के पन्नों में दर्ज एक सच्ची घटना पर आधारित है. इसकी कहानी साल 1936 से लेकर 1948 के बीच की है.

रीमा कागती का बेहतरीन निर्देशन फिल्म को नई ऊंचाइयां देती है. अक्षय कुमार-मौनी रॉय के अलावा सभी कलाकारों ने लाजवाब अभिनय किया है.

अक्षय कुमार इसमें भारतीय हॉकी टीम के मैनेजर तपन दास की भूमिका में अपने शानदार अभिनय से हर किसी का दिल जीत लेते हैं. उनकी पत्नी की भूमिका में मौनी रॉय पहली बार टीवी से फिल्मों में पर्दापण कर रही हैं.

अमित साध, कुणाल कपूर, अंगद बेदी, विनीत कुमार सिंह, सन्नी कौशन, निकिता दत्ता, भावशील सिंह सहानी, जतीन सरना, अब्दुल कादिर अमिल भी अहम् भूमिका में है. हर किसी ने अपने क़िरदार के साथ न्याय किया है.

आज़ादी के बाद पहला गोल्ड मेडल जीतने के बाद सभी का जश्‍न मनाना, हर किसी के दिलोदिमाग़ में जीत के जज़्बे और देशभक्ति के भाव को रोमांच से भर देता है.

Gold Movie

यह भी पढ़ें: ट्रोलर्स को मीरा राजपूत ने दिया करारा जवाब (Mira Rajput Breaks Silence On Being Trolled)

गोल्ड के निर्माता रितेश सिधवानी और फरहान अख़्तर की यह पहल क़ाबिल-ए-तारीफ़ है. उस पर जावेद अख़्तर के प्रभावशाली संवाद फिल्म को और भी जानदार बनाते हैं. राजेश देवराज की पटकथा व कहानी फिल्म की जान हैै. संगीत का जादू सचिन-जिगर, तनिष्क बागची और आक्रो पार्वो मुखर्जी ने बिखेरा है.

स्वतंत्रता दिवस पर रिलीज़ आज़ादी के उमंग-उत्साह को दुगुना कर देती है यह फिल्म. जितने बाजू उतने सर देख ले दुश्मन जान के… हारेगा वो हर बाज़ी जब हम खेले जी जान से… इस गीत को सार्थक करती है फिल्म गोल्ड.

– ऊषा गुप्ता

Gold

यह भी पढ़ें: फिल्म ‘सुई धागा’ का ट्रेलर हुआ लॉन्च, देसी अंदाज़ में नज़र आए वरुण धवन और अनुष्का शर्मा (Film Sui Dhaaga Trailer Launch)

Vishwaroopam 2 Movie Review: ‘विश्वरूपम 2’ में दिखा कमल हासन का ज़बरदस्त एक्शन अवतार (Vishwaroopam 2 Movie Review)

एक्टर कमल हासन की फिल्म विश्वरूपम 2 सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है. यह फिल्म विश्वरूपम का सीक्वल है. बता दें कि कमल हासन की फिल्में हमेशा लीक से हटकर किसी न किसी ख़ास मुद्दे पर आधारित होती हैं. 15 अगस्त से पहले रिलीज़ हुई यह फिल्म देशभक्ति और आतंक के मुद्दे पर आधारित एक स्पाई थ्रिलर फिल्म है, जिसमें कमल हासन का जबरदस्त एक्शन अवतार दिख रहा है. साल 2013 में आई फिल्म विश्वरूपम का यह सिक्वल दर्शकों को कुछ ख़ास पसंद नहीं आ रहा है, क्योंकि इसकी कहानी पेश करने का अंदाज़ और इसके प्रीक्वल के फ्लैशबैक सीन्स दर्शकों की उलझन बढ़ा रहे हैं.
Vishwaroopam 2 Movie
मूवी- विश्वरूपम 2
प्रोड्यूसर व डायरेक्टर- कमल हासन
स्टार कास्ट- कमल हासन, राहुल बोस, शेखर कपूर, पूजा कुमार, एंड्रिया जेरेमिया, जयदीप अहलावत, वहीदा रहमान
अवधि- 2 घंटा 21 मिनट
रेटिंग- 2/5
Vishwaroopam 2 Movie

कहानी-

विश्वरूपम 2 कहानी और स्क्रिप्ट के मामले में एक औसत फिल्म है. यह फिल्म वन मैन शो है, क्योंकि इसकी स्क्रिप्टिंग, डायरेक्शन की पूरी बागडोर कमल हासन ने ख़ुद संभाली थी. इस फिल्म की कहानी वहीं से शुरू होती है, जहां पर पिछली फिल्म की कहानी ख़त्म हुई थी. फिल्म में रॉ एजेंट मेजर विशाम अहमद कश्मीरी (कमल हासन) अपनी पत्नी निरूपमा (पूजा कुमार) और अपनी सहयोगी अस्मिता (एंड्रिया जेरेमिया) के साथ अलकायदा के मिशक को पूरा करने के बाद वापस लौटते हैं. पिछली फिल्म से कहानी आगे बढ़ती है और इस बार आतंकी उमर कुरैशी (राहुल बोस) ने भारत में 60 से भी ज़्यादा बम लगा दिए हैं, जिन्हें ढूंढकर उसके मकसद को नाकाम करने की चुनौती मेजर विशाम अहमद कश्मीरी के सामने है. फिल्म का हीरो आंतक के इस ख़ौफनाक खेल को रोकने में क़ामयाब होता है या नहीं, इसके लिए यह फिल्म देखनी पड़ेगी.

डायरेक्शन- 

विश्वरूपम 2 में कमल हासन ने निर्माता, निर्देशक, लेखक और एक्टर जैसी कई ज़िम्मेदारियां निभाई है. फिल्म का फर्स्ट हाफ स्लो है, लेकिन सेकेंड हाफ इससे बेहतर है. फिल्म का स्क्रीन प्ले कमज़ोर है, लेकिन संवाद बेहतर हैं. ख़ुफियागिरी और एक्शन ही इस फिल्म का मुख्य आधार है, बावजूद इसके फिल्म बार-बार अपने मुद्दे से भटकती हुई दिखाई देती है. अगर आपने इस फिल्म का प्रीक्वल नहीं देखा तो विश्वरूपम 2 को समझने में आपको दिक्कत हो सकती है.

एक्टिंग- 

एक्टिंग के मामले में 63 साल के कमल हासन एक कमाल के अभिनेता है, लेकिन जब वो एक्शन करते दिखाई देते हैं तो उसपर उनकी उम्र भारी पड़ती दिख रही है. अभिनेत्रियों में पूजा कुमार और एंड्रिया जेरेमिया ने अच्छा अभिनय किया है. फिल्म में आतंकी का किरदार निभाने वाले राहुल बोस खलनायक के रूप में थोड़े कमज़ोर पड़ते दिख रहे हैं. वहीदा रहमान फिल्म में कमल हासन की मां बनी हैं, जो अल्ज़ाइमर से पीड़ित हैं. इसके अलावा शेखर कपूर और जयदीप अहलावत ने भी अच्छी एक्टिंग की है.

अगर आप कमल हासन के ज़बरदस्त फैन हैं और उनकी किसी भी फिल्म को देखना नहीं भूलते, तो इस वीकेंड आप अपने पसंदीदा हीरो कमल हासन की फिल्म विश्वरूपम 2 देख सकते हैं.

यह भी पढ़ें: Karwaan Movie Review: भागदौड़ भरी ज़िंदगी के बीच सुकून के तलाश की कहानी है फिल्म ‘कारवां’ (Karwaan Movie Review)

 

Movie Review: रिलीज़ हुई साहेब बीवी और गैंगस्टर 3, संजय दत्त में नहीं दिखी गैंगस्टर वाली बात (Saheb Biwi Aur Gangster 3 Movie Review)

साल 2011 में जब डायरेक्टर तिग्‍मांशु धूल‍िया पहली बार साहेब बीवी और गैंगस्टर लेकर दर्शकों के बीच आए थे तो दर्शकों ने फिल्म की प्यार और बदले की कहानी को काफ़ी पसंद किया था, लेकिन साल 2013 में रिलीज़ हुई साहेब बीवी और गैंगस्टर 2 को उनकी पहली फिल्म से भी ज़्यादा सराहना मिली थी.आज क़रीब 5 साल बाद उनकी फिल्म साहेब बीवी और गैंगस्टर 3 सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई है. इस फिल्म में संजय दत्त एक गैंगस्टर की भूमिका निभा रहे हैं.

Gangster 3 Movie

मूवी- साहेब बीवी और गैंगस्टर 3

स्टार कास्ट- संजय दत्त, चित्रांगदा सिंह, माही गिल, जिमी शेरगिल, कबीर बेदी, दीपक तिजोरी. 

डायरेक्टर- तिग्मांशु धूलिया. 

अवधि- 2 घंटा 20 मिनट.

रेटिंग- 2.5/5. 

Gangster 3 Movie

कहानी

इस फिल्म की कहानी का प्लॉट भी तिग्मांशु की पहले वाली दोनों फिल्मों से मिलता-जुलता है, लेकिन इस बार जिमी शेरगिल और माही गिल के बीच गैंगस्टर के तौर पर एंट्री ली है अभिनेता संजय दत्त ने. फिल्म की कहानी पिछले पार्ट से आगे बढ़ती है, जिसमें  दिखाया जाता है कि साहेब आदित्य प्रताप सिंह (जिमी शेरगिल) जेल में हैं और बीवी माधवी देवी (माही गिल) राजमहल में रहकर सियासत को संभाल रही हैं. उधर लंदन में गैंगस्टर व दूसरी सियासत के राजकुमार उदय प्रताप सिंह (संजय दत्त) अपना एक बार चलाते हैं. माधवी देवी नहीं चाहतीं कि उनके पति जेल से बाहर आएं. इसके लिए जब उदय प्रताप सिंह भारत आते हैं तो वो उनकी मदद लेती हैं. इस बीच दोनों के बीच नज़दीकियां बढ़ जाती हैं, लेकिन एक दिन आदित्य प्रताप को ज़मानत मिल जाती है. उसके बाद साहेब आदित्य और गैंगस्टर उदय का आमना-सामना होता है. जिसे देखने के लिए आपको सिनेमा घरों का रूख़ करना पड़ेगा.

संजय में नहीं दिखी गैंगस्टर वाली बात 

संजय दत्त की बायोपिक संजू में उनकी इमेज को काफ़ी पॉलिश करके दिखाया गया है. इस फिल्म से पहले भी संजय दत्त फिल्मों में खलनायक की भूमिका में नज़र आ चुके हैं, लेकिन इस फिल्म में संजय दत्त के किरदार में गैंगस्टर वाले स्वैग और एटीट्यूड दोनों की कमी नज़र आ रही है. बता दें कि गैंगस्टर वाले रोल्स के मशहूर संजय इस फिल्म के किसी भी सीन में गैंगस्टर वाला फील देने में असफल रहे हैं.

डायरेक्शन 

तिग्मांशु धूलिया एक टैलेंटेड डायरेक्टर हैं. वो अपनी फिल्मों के लिए एक्टर्स बेहद सोच-समझकर चुनते हैं और उन्हें किरदार के हिसाब से बढ़िया तरीके से गढ़ते भी हैं. बेशक पहले वाली दोनों फिल्मों साहेब बीवी और गैंगस्टर को दर्शकों ने बेहद पसंद किया था, लेकिन इस बार उनकी इस फिल्म की कहानी और डायरेक्शन दोनों में कमियां दिखाई दे रही हैं. इस फिल्म में संजय दत्त के किरदार के जो शेड्स दिखने चाहिए थे वो मिसिंग हैं और डायरेक्शन काफ़ी स्लो है.

एक्टिंग

बात करे सितारों के एक्टिंग की तो, फिल्म में जिमी शेरगिल ने अपने किरदार को बांधे रखा है. सिससे वो दर्शकों को ख़ुद से जोड़ने में क़ामयाब साबित होते हैं. माही गिल का किरदार पहले दो हिस्सों की तुलना में इस बार ज़्यादा मज़बूत था और वो इसे निभाने में सफल भी रहीं. फिल्म में चित्रांगदा सिंह गैंगस्टर बने संजय दत्त की गर्लफ्रेंड की भूमिका में हैं. वहीं दीपक तिजोरी ने ठीक-ठाक एक्टिंग की है. इस फिल्म की कहानी में कबीर बेदी, नफीसा अली और दीपक तिजोरी जैसे कलाकारों के किरदारों का ग्राफ नाममात्र है.

बहरहाल, अगर आप यह फिल्म देखना चाहते हैं तो फिर इसमें आपको कई शानदार डायलॉग्स भी मिलेंगे. फिल्म में चित्रांगदा और संजय दत्त का रोमांस आपके चेहरे पर हंसी ला सकता है, लेकिन दोनों की केमेस्ट्री शायद ही आपको पसंद आए. फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर अच्छा है, लेकिन गाने शायद ही आपकी ज़ुबान पर चढ़ पाए. हालांकि तिग्मांशु धूलिया ने अपनी इस फिल्म में एक और सीक्वल की उम्मीद ज़रूर छोड़ी है.

Nawabzade

फिल्म- नवाबज़ादे

डायरेक्टर तिग्मांशु धूलिया की फिल्म साहेब बीवी और गैंगस्टर 3 के अलावा कॉमेडी फिल्म नवाबज़ादे भी रिलीज़ हुई है. डायरेक्टर जयेश प्रधान की इस फिल्म में धर्मेंश येलांडे, राघव जुयाल और पुनीत पाठक मुख्य भूमिका में हैं. इस फिल्म के एक गाने में श्रद्धा कपूर, वरुण धवन, बादशाह और आथिया शेट्टी नज़र आएंगी. अगर आप कॉमेडी फिल्म देखने की सोच रहे हैं इस वीकेंड आप यह फिल्म देख सकते हैं.

यह भी पढ़ें: Dhadak Movie Review: ‘धड़क’ में ईशान और जाह्नवी की केमेस्ट्री देख धड़का दर्शकों का दिल (Dhadak Movie Review)

Dhadak Movie Review: ‘धड़क’ में ईशान और जाह्नवी की केमेस्ट्री देख धड़का दर्शकों का दिल (Dhadak Movie Review)

बॉलीवुड की दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी (Sridevi) की बेटी जाह्नवी कपूर (Jhanvi Kapoor) की डेब्यू फिल्म ‘धड़क’ के रिलीज़ होने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे फैंस का यह इंतज़ार आख़िरकार ख़त्म हो ही गया और फिल्म ‘धड़क’ सिनेमाघरों में रिलीज़ हो गई है. यह फिल्म ब्लॉकबस्टर मराठी फिल्म ‘सैराट’ का हिंदी रीमेक है. यह जाह्नवी कपूर की पहली फिल्म है जबकि ईशान खट्टर (Ishaan Khattar) की यह दूसरी फिल्म है. इससे पहले ईशान इंटरनेशनल फेम डायरेक्टर माजिद मजीदी की फिल्म ‘बियॉन्ड द क्लाउड’ में अपनी प्रतिभा दिखा चुके हैं. बता दें कि रिलीज़ से पहले ही इस युवा जोड़ी की इस फिल्म का यंगस्टर्स में जबर्दस्त क्रेज देखा जा रहा था.
Dhadak Movie Review
मूवी- धड़क
स्टारकास्ट- जाह्नवी कपूर, ईशान खट्टर, आशुतोष राणा.
डायरेक्टर- शशांक खेतान.
अवधि- 2 घंटा 18 मिनट.
रेटिंग- 3.5/5
Dhadak Movie Review
कहानी-
फिल्म के डायरेक्टर शशांक खेतान (Shashank Khaitan) ने ‘सैराट’ की कहानी को महाराष्ट्र से राजस्थान की ख़ूबसूरत पृष्ठभूमि में तब्दील किया है और उन्होंने फिल्म में कुछ बदलाव भी किए हैं. इस फिल्म की कहानी राजस्थान के उदयपुर से शुरू होती है. जहां रहने वाली पार्थवी (जाह्नवी कपूर) राज परिवार के मुखिया ठाकुर रतन सिंह (आशुतोष राणा) की बेटी हैं, जो इस शाही परिवार के नियम और बंधनों का पालन दिल से करती हैं. कॉलेज में साथ पढ़ने वाले मधुकर (ईशान खट्टर) को पहली नज़र में ही पार्थवी से प्यार हो जाता है. उधर, चुनावी माहौल में जब पार्थवी के पिता को दोनों के प्यार की भनक लगती है तो वो छोटी जाति के मधुकर और उसके परिवार वालों पर काफ़ी जुल्म करते हैं. हालांकि अपने प्यार को बचाने के लिए पार्थवी हर मुमक़िन हथकडें अपनाती हैं, आख़िर में दोनों घर से भाग जाते हैं. उदयपुर से मुंबई और नागपुर से होते हुए दोनों कोलकाता पहुंचते हैं. एक राज परिवार से ताल्लुक रखने वाली पार्थवी क्या एक आम लड़के के साथ प्यार निभा पाती है? यह जानने के  लिए आपको सिनेमा घरों की ओर रूख करना पड़ेगा.
Dhadak Movie Review
एक्टिंग-
बेहतरीन अदायगी जाह्नवी के ख़ून में ही मौजूद है और उन्होंने अपनी पहली ही फिल्म में इस बात को साबित किया है. हालांकि जाह्नवी ने कैमरा फेस करने से पहले लंबा होमवर्क किया था. उधर शाहिद कपूर के भाई ईशान खट्टर अपनी दमदार एक्टिंग से दर्शकों की कसौटी पर खरे उतरते दिखाई दे रहे हैं. एक्टिंग के मामले में ईशान जाह्नवी पर भारी पड़ते नज़र आ रहे हैं. हालांकि पर्दे पर ईशान और जाह्नवी की केमेस्ट्री देखते ही बनती है. ठाकुर रतन सिंह का किरदार निभाने वाले आशुतोष राणा ने कमाल की एक्टिंग की है. मधुकर के दोस्त बने अंकित बिष्ट और श्रीधरन अपने-अपने किरदार में फिट नज़र आए.
Dhadak Movie Review
डायरेक्शन-
‘धड़क’ फिल्म को डायरेक्ट करने से पहले शशांक खेतान दो साधारण लव स्टोरी ‘बद्रीनाथ की दुल्हनियां’ और ‘हम्प्टी शर्मा की दुल्हनियां’ को डायरेक्ट कर चुके हैं. ये दोनों ही फिल्में बॉक्स ऑफिस पर क़ामयाब रही हैं. जिस तरह से साल 2016 में आई सुपरहिट मराठी फिल्म ‘सैराट’ के क्लाइमेक्स ने दर्शकों को अंदर तक हिलाकर रख दिया था. ‘धड़क’ में वैसा ही कुछ करने की कोशिश की है डायरेक्टर शशांक खेतान ने. हालांकि शशांक ने इस फिल्म के क्लाइमेक्स में कुछ बदलाव किए हैं, जो फिल्म को और भी मनोरंजक बनाते हैं.
Dhadak Movie
 म्यूज़िक-
मराठी फिल्म सैराट में अतुल और अजय ने म्यूज़िक दिया था जो काफ़ी हिट हुआ था और फिल्म धड़क में भी इन्हीं दोनों ने म्यूज़िक दिया है. हिंदी में इस फिल्म के गानों के बोल अमिताभ भट्टाचार्य ने लिखे हैं. बता दें कि फिल्म के टाइटल ट्रैक और ‘झिंगाट’ सहित इसमें कुल चार गाने हैं. बहरहाल, जाह्नवी कपूर और ईशान खट्टर की धड़क आपके दिल को धड़का पाती है या नहीं इसका फ़ैसला करने के लिए आपको यह फिल्म देखनी पड़ेगी.
Dhadak

Movie Review: हौसले व संघर्ष की कहानी है फिल्म सूरमा, दिलजीत ने जीता दर्शकों का दिल (Soorma Movie Review)

नेशनल हॉकी टीम के कैप्टन और अर्जुन अवॉर्ड विनर संदीप सिंह के जीवन पर बनी फिल्म ‘सूरमा’ (Soorma) आज सिनेमा घरों में रिलीज़ हुई है. डायरेक्टर शाद अली की इस फिल्म में संदीप सिंह का किरदार निभाते दिख रहे हैं मशहूर पंजाबी एक्टर और सिंगर दिलजीत दोसांझ (Diljit Dosanjh). तो चलिए, ज़िंदगी और मौत के बीच हौसले व संघर्ष की गाथा को बयान करती इस फिल्म के बारे में विस्तार से जानते हैं.

Soorma Movie

मूवी- सूरमा.

स्टार कास्ट- दिलजीत दोसांझ, तापसी पन्नू, अंगद बेदी, विजय राज, दानिश हुसैन.

डायरेक्टर- शाद अली.

अवधि- 2 घंटे 11 मिनट.

रेटिंग- 3/5.

Soorma Movie

कहानी- 

फिल्म की कहानी साल 1994 के शाहाबाद से शुरू होती है, जहां संदीप सिंह (दिलजीत दोसांझ) अपने बड़े भाई विक्रमजीत सिंह (अंगद बेदी), पिता (सतीश कौशिक) और मां के साथ रहता है. दोनों भाईयों का यही सपना है कि वो भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा बनें, लेकिन कोच के सख़्त रवैए से नाराज़ होकर संदीप अपने इस सपने से पीछे हटने लगता है. अचानक एक दिन संदीप की मुलाक़ात महिला हॉकी खिलाड़ी हरप्रीत (तापसी पन्नू) से होती है और उसे पहली नज़र में ही उससे प्यार हो जाता है.

हरप्रीत ही संदीप के दिल में एक बार फिर से हॉकी खेलने का जज़्बा जगाती है और उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है. जिससे एक बार फिर हॉकी प्लेयर बनना संदीप के जीवन का मक़सद बन जाता है और इसमें उसके बड़े भाई विक्रमजीत सिंह भी उसका पूरा साथ देता है, लेकिन इस कहानी में दिलचस्प मोड़ तब आता है, जब अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए संदीप सिंह ट्रेन से सफर करते हैं, तब गलती से वो किसी की गोली का शिकार हो जाते हैं और उनके शरीर के नीचे का हिस्सा पैरालाइज्ड हो जाता है. यही से शुरू होता है संदीप सिंह की ज़िंदगी का असली संघर्ष, लेकन अपने हौसले के दम पर वो एक बार फिर मैदान में वापस लौटने में कामयाब रहते हैं.

एक्टिंग- 

फिल्म में हॉकी प्लेयर बनें दिलजीत दोसांझ ने संदीप सिंह का किरदार बेहतरीन ढंग से निभाया है. फिल्म में उन्होंने जैसा अभिनय किया है वह बेहतरीन है. वो अपने किरदार के हर भाव और लम्हे को जीते और जीवंत करते दिखाई देते हैं. जबकि तापसी पन्नू हर बार की तरह इस बार भी एक्टिंग में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देती दिख रही हैं. अंगद बेदी ने संदीप के बड़े भाई के रूप में अच्छा काम किया है. वहीं सतीश कौशिक ने पिता और विजय राज ने कोच की भूमिका बखूबी निभाई है.

डायरेक्शन- 

डायरेक्टर शाद अली ने फिल्म के फर्स्ट हाफ में संदीप सिंह के हॉकी प्लेयर बनने की कहानी को दिखाया है. इंटरवल के पहले की कहानी आपको भावुक कर सकती है. शाद ने इसमें कस्बे के छोटे-छोटे लम्हों और फिल्म के मुख्य कलाकारों के रोमांस को अच्छी तरह से पर्दे पर उतारा है. फिल्म में हॉकी से जुड़े कई सीन हैं जो दर्शकों को पसंद आएंगे. फिल्म का स्क्रीनप्ले कमाल का है. सिनेमेटोग्राफी अच्छी है और फिल्म के कुछ वाकये देखकर आप ख़ुद को इमोशनल होने से नहीं रोक पाएंगे. हालांकि फिल्म का म्यूज़िक अपना कमाल दिखाने में पूरी तरह से कामयाब नहीं हो पाया है.

बहरहाल अगर आप यह जानने में दिलचस्पी रखते हैं कि नेशनल हॉकी प्लेयर संदीप सिंह की ज़िंदगी में कब, क्या और कैसे हुआ, तो इस वीकेंड आप यह फिल्म देख सकते हैं.

Teri Bhabhi Hai Pagle

फिल्म- तेरी भाभी है पगले.
स्टार कास्ट- कृष्णा अभिषेक, रजनीश दुग्गल, मुकुल देव, नाज़िया हसन.
डायरेक्टर- विनोद तिवारी.
रेटिंग- 1.5/5.
रिव्यू-  फिल्म ‘तेरी भाभी है पगले’ बतौर डायरेक्टर विनोद तिवारी की डेब्यू फिल्म है. इस फिल्म में रजनीश दुग्गल फिल्म मेकर देव का किरदार निभा रहे हैं. जो अपनी फिल्म के लिए अपनी गर्लफ्रेंड रागिनी ( नाज़िया हसन) को मुख्य कलाकार को तौर पर कास्ट कर लेता है, जबकि कृष्णा अभिषेक इसमें मूवी स्टार राज का किरदार निभा रहे हैं और मुकुल देव अंडरवर्ल्ड फाइनांसर अरु भाई बने हैं.
इस फिल्म के मेल किरदारों का एक ही महिला रागिनी पर दिल आ जाता है और हर कोई उसका दिल जीतने की कोशिश करता है. पूरी फिल्म में बस इसी जद्दोजहद को दिखाया गया है . फिल्म की स्क्रिप्ट से लेकर डायलॉग्स तक की हर कड़ी बेहद कमज़ोर नज़र आती है. यहां हैरत की बात तो यह है कि लोगों को हंसा-हंसाकर लोट-पोट करने वाले एक्टर कृष्णा अभिषेक भी दर्शकों को हंसाने में नाकाम दिख रहे हैं, लेकिन मुकुल देव ने बेहतरीन एक्टिंग की है. अगर आप इस वीकेंड सिर्फ़ टाइम पास करने के मूड में हैं तो यह फिल्म देख सकते हैं.

Movie Review: बहन सोनम की ‘वीरे दी वेडिंग’ और भाई हर्षवर्धन की ‘भावेश जोशी सुपरहीरो’ हुई रिलीज़ (Movie Review: Veere Di Wedding and Bhavesh Joshi Superhero)

आज बॉक्स ऑफिस पर एक भाई और बहन के बीच कड़ी टक्कर हो रही है. जी हां, एक ओर जहां बहन सोनम कपूर की फिल्म ‘वीरे दी वेडिंग’ रिलीज़ हुई है, तो वहीं भाई हर्षवर्धन कपूर की ‘भावेश जोशी सुपरहीरो’ इस फिल्म को कड़ी टक्कर देने के लिए बॉक्स ऑफिस पर उतरी है. इसके अलावा एक और फिल्म ‘फेमस’ ने सिनेमाघरों में दस्तक दी है. बॉक्स ऑफिस पर हो रहे इस कड़े मुक़ाबले में जीत किसकी होगी यह देखना बेहद दिलचस्प होगा.
यंगस्टर्स को पसंद आएगी ‘वीरे दी वेडिंग’ 
मूवी- वीरे दी वेडिंग 
स्टार कास्ट- करीना कपूर खान, सोनम कपूर, स्वरा भास्कर, शिखा तल्सानिया. 
डायरेक्टर- शशांक घोष 
टाइम- 2 घंटा 5 मिनट
रेटिंग- 3.5/5
कहानी-
‘वीरे दी वेडिंग’ बॉलीवुड की दूसरी फिल्मों से थोड़ी अलग और दिलचस्प है. फिल्म की कहानी 4 लड़कियों की दोस्ती की दास्तां बयां करती है, जो दिल्ली के एक स्कूल में साथ पढ़ा करती थीं. इनकी ख़ासियत है कि ये सभी सहेलियां अपने शर्तों पर जीती हैं और बेबाकी से बात करती हैं. ये चारों सहेलियां सेक्स और ऑर्गेज़्म पर निडरता से बातें करती हैं. डायरेक्टर ने उनकी ज़िंदगी की कमियों और समस्याओं को बेहद ख़ूबसूरत अंदाज़ में पेश करने की कोशिश की है.
फिल्म में शादी की उलझनों में उलझी कालिंदी (करीना कपूर) परिवार व रिश्तेदारों की उम्मीदों पर खरा उतरने की जद्दोजहद करती नज़र आती हैं, तो अवनी (सोनम कपूर) को कोई पार्टनर ही नहीं मिल रहा है और उनकी मां दिन-रात उनके लिए जीवनसाथी ढूंढने में लगी हैं. वहीं साक्षी (स्वरा भास्कर) रिलेशनशिप में बंधना ही नहीं चाहतीं और मीरा (शिखा तल्सानिया) एक विदेशी से शादी कर चुकी हैं और उनका एक बच्चा भी है, लेकिन उनकी शादीशुदा ज़िंदगी बहुत बोरिंग है. ये सभी सहेलियां कालिंदी (करीना कपूर) की शादी के लिए मिलती हैं और इस दौरान सभी की ज़िंदगी की कई सारी कहानियां सामने आती हैं.
डायरेक्शन- 
फिल्म के डायरेक्टर शशांक घोष ने फिल्म में इन चारों सहेलियों की केमेस्ट्री को बेहद तगड़े अंदाज़ में पेश किया है. फिल्म के कुछ डायलॉग्स को इन चारों अभिनेत्रियों ने शानदार तरीक़े से बोला है. फिल्म में कई ऐसे वन लाइनर्स हैं, जो आपको हंसने पर मजबूर कर सकते हैं. डायरेक्शन, सिनेमेटोग्राफी, लोकेशन के साथ कास्टिंग भी बेहतरीन है. फर्स्ट हाफ में फिल्म की कहानी दर्शकों को बांधे रखती है, लेकिन सेकेंड हाफ थोडा स्लो है.  फिल्म के ‘तारीफां’ और ‘भांगड़ा ता सजदा’ जैसे गाने आपको ख़ूब इंटरटेन करेंगे.
एक्टिंग-
फिल्म में करीना कपूर खान, स्वरा भास्कर, सोनम कपूर और शिखा तल्सानिया पूरी तरह से अपने किरदारों के साथ न्याय करती दिखाई दे रही हैं. हर फ्रेंम में ये चारों बेहतरीन आउटफिट्स पहने हुए नज़र आती हैं और सभी ने अपने डॉयलॉग्स को पूरे कॉन्फिडेंस के साथ पर्दे पर उतारा है. अगर आप ड्रामा और कॉमेडी के साथ-साथ सेक्स चैट के शौकीन हैं तो यह फिल्म आपके उम्मीदों पर खरी उतर सकती है.
करप्शन से जंग की कहानी है ‘भावेश जोशी सुपरहीरो’
मूवी- भावेश जोशी सुपरहीरो 
स्टार कास्ट- हर्षवर्धन कपूर,प्रियांशु पैन्यूली,निशिकांत कामत,राधिका आप्टे,आशीष वर्मा
डायरेक्टर- विक्रमादित्य मोटवाने
टाइम- 2 घंटा 35 मिनट
रेटिंग- 2.5/5
कहानी-
फिल्म की कहानी वाटर स्कैम और समाज में फैले दूसरे करप्शन के खिलाफ़ लड़ने वाले एक आम आदमी के सुपरहीरो बनने की है. भावेश जोशी (हर्षवर्धन कपूर) अपने दोस्तों प्रियांसु पैन्यूली और आशीष वर्मा के साथ कॉलेज में पढ़ता है. ये तीनों दोस्त समाज से बुराइयों को दूर करने के मिशन पर लग जाते हैं. फिल्म में हर्षवर्धन कागज़ का मास्क पहनकर करप्शन करने वालों का पर्दाफाश करने की कोशिश करते हैं, लेकिन भ्रष्टाचारियों को यह नागवार गुज़रता है और वो इस मास्क के पीछे छुपे सुपरहीरो को ढूंढ निकालते हैं और इस सुपरहीरो की खूब पीटाई करते हैं, लेकिन सुपरहीरो हार नहीं मानता और इन सबको सबक सिखाता है. फिल्म में निशिकांत कामत राजनेता बने विलेन के रोल में हैं.
डायरेक्शन-
फिल्म के डायरेक्टर विक्रमादित्य मोटवाने ने डार्क शेड में लीक से हटकर फिल्म बनाई है. इस फिल्म से पहले एक्टर हर्षवर्धन कपूर राकेश ओम प्रकाश की ‘मिर्जिया’ में नज़र आ चुके हैं, लेकिन वो फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अपना कमाल नहीं दिखा पाई थी. फिल्म की कहानी अनुराग कश्यप और विक्रमादित्य मोटवाने ने मिलकर लिखी है. यह एक बहुत अच्छी कहानी बन सकती थी, लेकिन मेकर्स इसे दिलचस्प बनाने में असफल साबित हुए हैं. फिल्म की कहानी भले ही आम आदमी से जुड़ी है, लेकिन आम आदमी से यह कनेक्ट नहीं कर पाती है और फिल्म के संवाद भी कुछ ख़ास नहीं हैं.
एक्टिंग- 
हर्षवर्धन कपूर की यह दूसरी फिल्म है, लेकिन वो दर्शकों को आकर्षित करने में असफल दिख रहे हैं. हालांकि उन्होंने कोशिश बहुत अच्छी की है जो काबिले तारीफ़ है. फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर अच्छा है और साथ ही हर्षवर्धन कपूर के दोस्त के रूप में दोनों एक्टर्स ने बढ़िया काम किया है, जबकि विलेन के रूप में निशिकांत कामत की दबंगई काफ़ी कमज़ोर दिखाई पड़ रही है. बहरहाल, अगर आप लीक से हटकर कोई फिल्म देखना चाहते हैं तो ‘भावेश जोशी सुपरहीरो’ देख सकते हैं.
भारी भरकम स्टार कास्ट वाली फिल्म है फेमस 
मूवी- फेमस 
स्टार कास्ट- जिमी शेरगिल, केके मेनन, श्रिया सरन, पंकज त्रिपाठी, जैकी श्रॉफ, माही गिल. 
डायरेक्टर- करण ललित बुटानी 
रेटिंग- 2/5
इन दोनों फिल्मों के अलावा डायरेक्टर करण ललित बुटानी की फिल्म ‘फेमस’ भी रिलीज़ हुई है. इस फिल्म में जिमी शेरगिल, श्रिया सरन, केके मेनन, पंकज त्रिपाठी, जैकी श्रॉफ और माही गिल जैसे कलाकरों ने काम किया है. भारी भरकम स्टार कास्ट होने के बावजूद यह फिल्म आपको बांध नहीं पाएगी. फिल्म की स्क्रिप्ट से लेकर स्क्रीनप्ले हर जगह कमियां नज़र आएंगी. फिल्म की कहानी चंबल से जुड़ी है और इस फिल्म के हर एक किरदार की अपनी एक अलग कहानी है. जिसे समझते-समझते आपका सिर चकराने लगेगा. बावजूद इसके अगर आप जिमी शेरगिल, केके मेनन और जैकी श्रॉफ के जबरदस्त फैन हैं तो यह फिल्म देख सकते हैं.

 

फिल्म रिव्यू: आलिया की दमदार एक्टिंग की झलक है ‘राज़ी’ (Film Review: Alia Bhatt’s Strong Acting In Raazi)

Film Review, Alia Bhatt, Raazi movie

‘ऐ वतन, वतन मेरे आबाद रहे तू…’ थियेटर हॉल से बाहर निकलते व़क्त लगभग सभी दर्शकों के होंठों पर गाने की ये पंक्तियां फिल्म ‘राज़ी’ में दिखाए गए राष्ट्रभक्ति की भावना को ज़ोर दे रही थीं. ऐसे न जाने कितने लोग हैं, जो देश की सुरक्षा के लिए शहीद हो जाते है, मेघना गुलज़ार की यह फिल्म उन्हीं अनसंग हीरोज़ की कुर्बानी से सबको रूबरू कराती है. 1971 में जब भारत-पाकिस्तान के बीच जंग के हालात बन रहे थे, तब पाकिस्तान के एक हाई रैंकिंग आर्मी परिवार में भारतीय लड़की की शादी करके स़िर्फ इसलिए भेजा जाता है कि वो वहां से देश के लिए ख़ूफ़िया जानकारी हासिल कर सके. यह फिल्म रिटायर्ड नेवी आफिसर हरिंदर सिक्का के नॉवेल ‘कॉलिंग सहमत’ पर आधारित है. भारतीय अंडरकवर एजेंट की सच्ची कहानी से प्रेरित यह फिल्म देशभक्ति का जज़्बा रखनेवालों को बेहद पसंद आएगी. जंगली पिक्चर्स और धर्मा प्रोडक्शन्स ने मिलकर यह फिल्म प्रोड्यूस की है.

फिल्म- राज़ी
निर्देशक- मेघना गुलज़ार
स्टार कास्ट- आलिया भट्ट, विकी कौशल, रजित कपूर, शिशिर शर्मा, जयदीप अहलावत और सोनी राजदान.
अवधि- 2 घंटा 20 मिनट
रेटिंग- 4/5 स्टार

कहानी

फिल्म की शुरुआत होती है सन् 1971 के भारत-पाकिस्तान के बीच फैले तनाव के साथ. जब पाकिस्तान ईस्ट पाकिस्तान में शुरू हुई क्रांति को ख़त्म कर भारत को सबक सिखाना चाहता है और भारत को तबाह करने की योजना बनानी शुरू कर देते हैं. भारतीय बिज़नेसमैन और भारत को पाकिस्तान की ख़ुफ़िया जानकारी देनेवाले हिदायत ख़ान (रजित कपूर) को इसकी भनक लग जाती है. बिज़नेस के सिलसिले में पाकिस्तान आने-जानेवाले हिदायत ख़ान की पाकिस्तानी आर्मी के ब्रिगेडियर परवेज़ सैय्यद (शिशिर शर्मा) से गहरी दोस्ती है. इसी दोस्ती के सहारे हिदायत ख़ान अपनी बेटी सहमत (आलिया भट्ट) की शादी परवेज़ सैय्यद के छोटे बेटे इकबाल (विकी कौशल) से कर देता है, जो एक आर्मी ऑफिसर है. सहमत 20 साल की बेहद मासूम और नाज़ुक लड़की है. पाकिस्तान भेजने के अपने ़फैसले के बारे में जब पिता उसे बताते हैं, तो देश की सुरक्षा को लेकर परेशान पिता को देखकर वह इस काम के लिए राज़ी हो जाती है. एक अंडरकवर एजेंट बनने की कड़ी ट्रेनिंग उसे रॉ एजेंट ख़ालिद मीर (जयदीप अहलावत) से मिलती है. शादी करके सहमत पाकिस्तान जब पाकिस्तान पहुंचती है, तो ससुरालवालों के दिल में अपनी जगह बनाने की पूरी कोशिश करती है. साथ ही भारत के ख़िलाफ़ रचे जा रहे षड़यंत्र की जानकारी भारत भेजती रहती है. आर्मी परिवार में रहकर यह सब करना बेहद मुश्किल होता है, पर सहमत ख़तरों के बीच से जानकारी लेकर भेजती रहती है. इस दौरान उसे ऐसे कई कठोर ़फैसले लेने पड़ते हैं, जिसके बारे में उसने कभी सोचा भी नहीं था. इस दौरान सहमत और इकबाल की एक प्यारी-सी लव स्टोरी भी देखने को मिलती है. कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती ख़तरे बढ़ते हैं और सहमत अपनी सच्चाई छुपाने के लिए काफ़ी कुछ करती है… कैसे सहमत उन हालातों से जूझती है और कैसे वह देश की सुरक्षा में अहम योगदान देती है, जानने के लिए आपको फिल्म ज़रूर देखनी चाहिए.


एक्टिंग
बात करें एक्टिंग की, तो पूरी फिल्म में आलिया भट्ट का दमदार अभिनय देखने को मिला. एक बेटी, एक पत्नी और एक जासूस बनकर आलिया ने दर्शकों का दिल जीत लिया. उनके कुछ डायलॉग्स पर लोगों ने तालियां भी बजाई. एक आर्मी ऑफिसर के रोबीले किरदार में विकी कौशल की एक्टिंग भी काबिले तारीफ़ है. एक हिंदुस्तानी पत्नी की अपने देश के प्रति भावनाओं को समझनेवाले पति के किरदार को उन्होंने बख़ूबी निभाया है. लीड एक्टर्स के अलावा जयदीप अहलावत, रजित कपूर और शिशिर शर्मा की एक्टिंग की भी सराहना करनी होगी. आलिया के मां की भूमिका निभा रहीं उनकी रियल लाइफ मां सोनी राजदान के सीन्स बहुत ही कम हैं, फिर भी एक्टिंग में उनकी परिपक्वता की झलक आपको ज़रूर मिलेगी.

निर्देशन
मेघना गुलज़ार के दमदार निर्देशन का ही कमाल है कि आप ख़ुद कहानी से बहते चले जाते हैं और ख़ुद को पाकिस्तान के उस तनावभरे माहौल में पाते हैं. फिल्म का निर्देशन इतना दमदार है कि इस दौरान आप बाहरी दुनिया को थोड़ी देर के लिए भूल जाते हैं. कहानी और किरदारों पर पकड़ रखनेवाली मेघना के निर्देशन की सराहना करनी होगी.

यह भी पढ़ें: सोनम की रिसेप्शन पार्टी में हुआ बॉलीवुड के इन 5 एक्स लवर्स का आमना-सामना 

मूवी रिव्यू: दो अलग कॉन्सेप्ट वाली फिल्में हैं ‘102 नॉट आउट’ और ‘ओमेर्टा’ (102 Not Out And Omerta Movie Review)

आज फिल्मी फ्राइडे है और सिनेमा घरों में दो अलग कॉन्सेप्ट वाली फिल्में रिलीज़ हुई हैं. एक तरफ है सदी के महानायक अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर की फिल्म ‘102 नॉट आउट’ है तो वहीं दूसरी तरफ इस फिल्म को टक्कर दे रही है अभिनेता राजकुमार राव की फिल्म ‘ओमेर्टा’. अमिताभ की यह फिल्म बुजुर्गों के एकाकीपन की कहानी बयां करती है तो राजकुमार राव की फिल्म एक आतंकी की कहानी को अलग अंदाज़ में दर्शकों के सामने पेश करती है.

फिल्म- 102 नॉट आउट
निर्देशक- उमेश शुक्ला
स्टार कास्ट- अमिताभ बच्चन, ऋषि कपूर, जिमित त्रिवेदी
अवधि- 1 घंटा 45 मिनट
रेटिंग- 3.5/5
फिल्म की कहानी-
निर्देशक उमेश शुक्ला की फिल्म ‘102 नॉट आउट’ बुजुर्गों के एकाकीपन की त्रासदी की कहानी है. इस फिल्म में 75 साल के बाबूलाल वखारिया (ऋषि कपूर) घड़ी की सुईयों के हिसाब से चलनेवाले एक सनकी बुजुर्ग हैं. जो अपने एनआरआई बेटे और उसके परिवार से पिछले 17 सालों से नहीं मिले हैं. हालांकि उनका बेटा हर साल मिलने का वादा तो करता है पर मिलता नहीं है.

उधर, बाबूलाल के 102 साल के पिता दत्तात्रेय वखारिया (अमिताभ बच्चन) एक ऐसे 102 साल का जवान हैं जो ज़िंदगी को ज़िंदादिली के साथ जीना पसंद करते हैं. एक दिन दत्तात्रेय अपने बेटे बाबूलाल के सामने कुछ शर्ते रखते हुए उसे वृद्धाश्रम भेजने की धमकी देते हैं. दरअसल वो अपने 75 साल के बेटे की जीवनशैली और सोच में इन शर्तों के ज़रिए बदलाव लाना चाहता हैं, लेकिन क्यों इसके लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी.

कैसी है फिल्म?

इस फिल्म के ज़रिए निर्देशक उमेश शुक्ला ने विदेश में रहने वाले एनआरआई बच्चों से मिलने के लिए तड़पने वाले माता-पिता तक एक भावनात्मक संदेश भी पहुंचाने की कोशिश की है. इस फिल्म का पहला हिस्सा थोड़ा धीमा है, लेकिन इसके दूसरे हिस्से में फिल्म अपनी रफ्तार पकड़ लेती है और क्लाइमेक्स आपको इमोशनल करने के साथ-साथ जीत की खुशी का एहसास भी करा जाता है.

एक्टिंग

इस फिल्म में अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर की जोड़ी क़रीब 27 साल बाद पर्दे पर साथ नज़र आ रही है. एक तरफ जहां दत्तात्रेय की भूमिका में अमिताभ बच्चन किरदार के नब्ज़ को पकड़ते हुए कभी दर्शकों को लुभाते तो कभी चौंकाते हुए नज़र आ रहे हैं तो वहीं बाबूलाल की भूमिका अदा कर रहे ऋषि कपूर ने भी अपने किरदार को बेहद सहजता और संयम के साथ निभाया है. एकाकीपन से लड़ते दो बुजुर्गों की मज़ेदार नोकझोंक आपको बेहद पसंद आएगी.

फिल्म- ओमेर्टा
निर्देशक- हंसल मेहता 
स्टार कास्ट- राजकुमार राव, टिमोथी रायन, केवल अरोड़ा, राजेश तेलांग
अवधि- 1 घंटा 36 मिनट
रेटिंग- 3.5/5
फिल्म की कहानी- 
राजकुमार राव लीक से हटकर बनी फिल्मों में काम करने से बिल्कुल भी पीछे नहीं हटते हैं. एक बार फिर निर्देशक हंसल मेहता की फिल्म में राजकुमार राव का अलग अंदाज़ देखने को मिल रहा है. फिल्म ‘ओमेर्टा’ के ज़रिए एक आतंकी की कहानी को कुछ अलग ढंग से पेश करने की कोशिश की गई है. बता दें कि ओमेर्टा एक इटैलियन शब्द है और ऐसे आतंकी के लिए इस शब्द का प्रयोग किया जाता है जो पुलिस के बेइंतहां ज़ुल्म के बाद भी नहीं टूटता.
फिल्म की कहानी साल 2002 की है. जब लंदन में रह रहा अहमद ओमार सईद शेख (राजकुमार राव) पत्रकार डेनियल पर्ल (टिमोथी रायन) की हत्या की कहानी को अपने शब्दो में बयां करता है. इस कहानी के ज़रिए हंसल मेहता ने यह दिखाने की सराहनीय कोशिश की है कि आखिर क्यों आज की भटकी हुई युवा पीढ़ी आंतकवादी संगठनों की ओर आकर्षित हो रही है. उन्हें आईएसआई जैसे आतंकवादी संगठनों में ऐसा क्या नज़र आता है जो वो अपने सिर पर कफ़न बांधकर इसमें शामिल हो जाते हैं.
फिल्म की शूटिंग-
फिल्म की कहानी के अनुसार, इसकी सारी शूटिंग आउटडोर लोकेशन्स पर की गई है. लंदन और भारत की लोकेशन्स पर शूट की गई इस फिल्म में पाकिस्तान दवारा चलाए जा रहे आतंकी कैंपेन को भी अच्छी तरह से पेश किया है. इस फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर भी ठीक ठाक है. इस फिल्म को देखने के बाद आप भी यही महसूस करेंगे कि एक खूंखार आतंकवादी को आपने बेहद क़रीब से समझा है.
एक्टिंग-
अगर एक्टिंग की बात करें तो एक आंतकी के किरदार को राजकुमार राव ने अपने लाजवाब अभिनय से जीवंत कर दिखाया है. इस फिल्म में दमदार अभिनय करके एक बार फिर राजकुमार राव ने ख़ुद को एक बेहतरीन और बेमिसाल एक्टर साबित किया है. वहीं टिमोथी रायन, केवल अरोड़ा, राजेश तेलांग जैसे कलाकारों ने अपने-अपने किरदार को बेहतरीन ढंग से पेश किया है.
बहरहाल, अगर आप इस वीकेंड भावनात्मक संदेश देनेवाली पारिवारिक फिल्म देखना चाहते हैं तो ‘102 नॉट आउट’ देख सकते हैं और अगर लीक से हटकर एक आतंकी की कहानी से रूबरू होना चाहते हैं तो फिर ‘ओमेर्टा’ आपके लिए एक बेहतर विकल्प है.

Movie Review: सत्ता, साज़िश और चाहत की कहानी है देवदास का मॉडर्न वर्ज़न ‘दास देव’ (Daas Dev Movie Review)

Daas Dev, Movie Review, das dev movie review ratings

आज फिल्मी फ्राइडे है और फिल्म देखने के शौकीनों को इस दिन का बेसब्री से इंतज़ार होता है, जब कोई नई फिल्म सिनेमाघरों में दस्तक देती है. देवदास पर अब तक बॉलीवुड में कई फिल्में बन चुकी हैं और आज सिनेमा घरों में देवदास का मॉडर्न वर्जन दास देव रिलीज़ हुई है. फिल्म का जोनर रोमांटिक और राजनीतिक थ्रिलर है. हालांकि इससे पहले इस विषय पर बनी फिल्मों में प्रेम की मासूमियत नज़र आई थी, लेकिन यह फिल्म सबसे अलग है क्योंकि इसमें सत्ता और पावर की लालसा प्यार की मासूमियत पर भारी पड़ती दिखाई देती है.

Daas Dev, Movie Review, das dev movie review ratings

फिल्म- दास देव 
निर्देशक- सुधीर मिश्रा
अवधि- 1 घंटा 51 मिनट
स्टार- राहुल भट्ट, रिचा चड्ढा, अदिति राव हैदरी, सौरभ शुक्ला और विनीत सिंह.
रेटिंग- 3/5

 

Daas Dev, Movie Review, das dev movie review ratings

कहानी

निर्देशक सुधीर मिश्रा के इस मॉडर्न ‘दास देव’ की कहानी की पृष्ठभूमि उत्तरप्रदेश की है. कहानी के मुताबिक राजनीतिक घराने का उत्तराधिकारी देव (राहुल भट्ट)  पारो (रिचा चड्ढा) से प्यार करता है, लेकिन उसे नशे और अय्याशी की बुरी लत होती है. छोटी उम्र में ही देव अपने पिता को हेलीकॉप्टर हादसे में खो देता है और उसे चाचा अवधेश (सौरव शुक्ला) पाल-पोसकर बड़ा करते हैं. उसके चाचा अवधेश मुख्यमंत्री हैं इसलिए वो चाहते हैं कि वो अपने खानदान की इस राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाए.

उधर पारो अपने प्रेमी देव को नशे और अय्याशी की आदतों से बाहर निकालने की कोशिश करती है, लेकिन उसे राजनीति में लाने के लिए उसके चाचा (चांदनी) अदिति राव हैदरी को लेकर आते हैं. चांदनी देव से प्रेम करती है और एक ऐसा चक्रव्यूह रचती है, जिससे देव राजनीति की बागडोर अपने हाथ में लेने पर मजबूर हो जाता है. उधर सत्ता की बागडोर हाथ में लेते ही पारो और देव के बीच टकराव बढ़ जाता है और वो विपक्ष के नेता (विपिन शर्मा) से शादी कर लेती है. इसके आगे की कहानी क्या मोड़ लेती है, इसके लिए आपको यह फिल्म देखनी पड़ेगी.

डायरेक्शन

डार्क और इंटेंस सिनेमा हमेशा से ही डायरेक्टर सुधीर मिश्रा की ख़ासियत रही है. जिसकी झलक ‘दास देव’ में दिखाई दे रही है. उन्होंने शरत चंद्र की देवदास के तीनों मुख्य पात्रों देव, पारो और चांदनी को लेकर उसमें शेक्सपियर का ट्रैजिक, ग्रे और विश्वघाती रंग मिला दिया है. इस फिल्म में सुधीर ने यह दिखाने की कोशिश की है कि कोई भी दूध का धुला नहीं है. इस फिल्म में राजनीतिक साज़िशों की एक के बाद एक करके कई परतें खुलती हैं. फिल्म के कुछ गीत आपको पसंद आएंगे और फिल्म का बैकग्राउंड भी दमदार है.

एक्टिंग

एक्टर राहुल भट्ट ने देव के किरदार के साथ न्याय करने की पूरी कोशिश की है. उन्होंने अपने किरदार की विषमताओं को बेहतर ढंग से निभाया है. रिचा ने पारो की तो अदिति ने चांदनी की भूमिका के साथ पूरा न्याय किया है. सौरव शुक्ला, विनीत सिंह, दीपराज राणा जैसे सभी कलाकारों ने अपने किरदारों में जान डालकर कहानी को विश्वसनीय बनाया है. इस फिल्म में मेहमान कलाकार के तौर पर अनुराग कश्यप भी नज़र आएंगे, जो देव के पिता बने हैं.