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नोटबुक का पहला गाना ‘नहीं लगदा’ शेयर किया सलमान खान ने… (Nahi Lagda… Salman Khan Shares First Song From Notebook)

Song From Notebook

नोटबुक का पहला गाना ‘नहीं लगदा’ शेयर किया सलमान खान ने… (Nahi Lagda… Salman Khan Shares First Song From Notebook)

फिल्म नोटबुक (Notebook) का सॉन्ग (Song) सलमान खान (Salman Khan) ने सोशल मीडिया पर शेयर किया. यह रोमांटिक सॉन्ग है और सलमान की मानें, तो फैंस को यह गाना सुनकर महसूस करना चाहिए. यह एक रोमांटिक सॉन्ग है और नोटबुक सलमान खान के प्रोडक्शन हाउस की फिल्म है. इस फिल्म से डेब्यू कर रहे हैं एक्टर ज़हीर इकबाल और मोहनीश बहल की बेटी प्रनूतन. यह एक रोमांटिक मूवी है और सबको प्रनूतन की सिल्वर स्क्रीन पर एंट्री का भी बेसब्री से इंतज़ार है.

 

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Sanu Kehndi: अक्षय कुमार की केसरी का पहला सॉन्ग सानु केहंदी हुआ रिलीज़, म्यूज़िक चार्ट्स पर मचा रहा है धमाल…. देखें वीडियो! (The First Song From Kesari ‘Sanu Kehndi’ Out Now)

Kesari

Sanu Kehndi: अक्षय कुमार की केसरी का पहला सॉन्ग सानु केहंदी हुआ रिलीज़, म्यूज़िक चार्ट्स पर मचा रहा है धमाल…. देखें वीडियो! (The First Song From Kesari ‘Sanu Kehndi’ Out Now)

फिल्म केसरी (Kesari) काफ़ी चर्चा में है. पहले इसके ट्रेलर (Trailer) ने धमाल मचाया और अब इसका गाना (Song) भी अनवेल हो चुका है. इसका सॉन्ग सानु केहंदी (Sanu Kehndi) फैंस को काफ़ी पसंद आ रहा है और सब इसकी धुन पर झूम उठे हैं.

ऐसा लग रहा है कि यह गाना नए रिकॉर्ड्स बना डालेगा. अब सभी को इंतज़ार है फिल्म का. केसरी धरमा प्रोडक्शन के बैनर तले बन रही हिस्टॉरिक पीरियड फिल्म है. इसमें सिख सैनिकों की वीरता की गाथा दर्शाई है.

सुनने में आया है कि इस गाने को शूट करने में महज़ तीन दिन का ही समय लगा. करन जौहर ने ट्विटर पर गाने को पोस्ट किया है.
सॉन्ग वाकई काफ़ी जोश से भरा है. पंजाबी म्यूज़िक और बीट्स आप सभी को थिरकने पर मजबूर कर देंगे.

फिल्म के दमदार ट्रेलर और अब इस सॉन्ग के बाद सभी को बेसब्री से फिल्म के रिलीज़ का इंतज़ार है. पर आप फिल्हाल फिल्म के इस गाने को एंजॉय करें.

 

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मूवी रिव्यू: सुपर इफेक्ट्स, थ्रिल, अविश्‍वसनीय एक्शन से भरपूर अद्भुत 2.0 (Movie Review 2.0: Brilliant Visual Effects, Thrills And Action Sequences)

 

2.0

जब दो सुपरस्टार रजनीकांत (Rajinikanth) और अक्षय कुमार (Akshay Kumar) एक साथ हों, तो एक बेहतरीन फिल्म की उम्मीद हर किसी को होती है. लेकिन यहां पर इन दोनों से कई ऊपर रहे निर्देशक एस. शंकर. जैसा कि सभी जानते हैं कि इसे रजनीकांत और अक्षय कुमार की फिल्म करके ख़ूब प्रमोट किया गया, पर इसमें सबसे अधिक प्रभावित करते हैं निर्देशक शंकर. उन्होंने पूरी फिल्म में हर एक सीन पर ख़ूब मेहनत की है. सुपर इफेक्ट्स की भरमार है फिल्म में पर व्यवस्थित व योजनाबद्ध तरी़के से. क़रीब आठ साल पहले शंकर की ही रोबोट फिल्म आई थी, जिसमें रजनीकांत और ऐश्‍वर्या राय बच्चन मुख्य भूमिका में थे, 2.0 फिल्म को उसी का सीक्वल कह सकते हैं.

पहली बार इस तरह की साइंस फिक्शन मूवी के एक्शन, सुपर इफेट्स मिक्सिंग देख हॉलीवुड मेकर भी शंकरजी की तारीफ़ किए बगैर नहीं रह सकेंगे. इसमें कोई दो राय नहीं कि भारतीय सिनेमा ने इस फिल्म के ज़रिए फिल्म बनाने में एक और शिखर को छुआ है. फिल्म के विज़ुअल इफेक्ट्स काबिल-ए-तारीफ़ हैं. उस पर थ्रीडी में होने के कारण फिल्म और भी शानदार बन पड़ी है. इस तरह की फिल्मों में कहानी की उम्मीद बहुत कम होती है, क्योंकि निर्देशक का पूरा ध्यान एक्शन, वीएफएक्स पर होता है और यही एस. शंकर ने भी किया.

कहानी बस इतनी है कि अक्षय कुमार, पक्षीराजन, जो ओर्निथोलॉजिस्ट (पक्षी वैज्ञानिक) हैं, मोबाइल टॉवर से कूदकर आत्महत्या कर लेते हैं. दरअसल, मोबाइल फोन के रेडिएशन से पक्षियों को काफ़ी नुक़सान पहुंच रहा होता है, इसका प्रतिशोध अक्षय इंसानों से लेना चाहता है. एक तरह इसके ज़रिए सोशल मैसेज भी देने की कोशिश की गई है. इसके बाद शहरभर के सभी लोगों के मोबाइल फोन उड़ने लगते हैं. वसीकरण यानी रजनीकांत को इसकी छानबीन करने के लिए कहा जाता है. वे अपनी असिस्टेंट नीला यानी एमी जैक्सन जो एक रोबोट हैं, के साथ पता लगाने की कोशिश करते हैं. इसी बीच शहर में मोबाइल फोन की बनी एक चिड़िया (अक्षय कुमार) शहर पर दनादन हमला करने लगती है. आख़िरकार उससे मुक़ाबला करने के लिए वसीकरण को अपने रोबोट चिट्टी (रजनीकांत डबल रोल में) की मदद लेनी पड़ती है, क्योंकि पक्षीराजन और इंसानों के बीच केवल चिट्टी का अपग्रेडेड वर्ज़न 2.0 है.

पक्षीराजन और चिट्टी का आमना-सामना, लड़ाई, दांवपेंच और उसके अविश्‍वसनीय से एक्शन थ्रिल व रोमांच पैदा करते हैं. फिल्म में भावनाओं की कमी थोड़ी खलती है, पर दो सुपर मानव की टक्कर दिलचस्पी भी पैदा करती है. फिल्म की शुरुआत में ही अक्षय कुमार की मौत होने के बाद उनकी आत्मा, भूत या फिर औरा जो समझ लें का इंसानों से बदला लेने, रजनीकांत से संघर्ष देखने काबिल है.

फिल्म में सीन दर सीन स्पेशल इफेक्ट्स का बड़ी ख़ूबसूरती से इस्तेमाल किया गया है. एक समय ऐसा आता है, जब रजनीकांत व अक्षय कुमार की लड़ाई में पांच सौ रोबोट्स रजनीकांत के रूप में आ जाते हैं, तो हज़ारों अक्षय कुमार, फिर लाखों रजनीकांत- सब कुछ विस्मय, विलक्षण, रोगंटे खड़े कर देनेवाले दृश्य हैं, जो दर्शकों को पलभर के लिए भी हिलने नहीं देते और फिल्म से बांधे रखते हैं. इसके लिए टेकनीशियन और डायरेक्टर बधाई के पात्र हैं.

रजनीकांत, अक्षय कुमार के अलावा एमी जैक्सन, सुधांशु पांडे, आदिल शाह सभी ने बेहतरीन अभिनय किया है. अक्षय कुमार पहली बार रजनीकांत के साथ काम कर रहे हैं, उन्हें इस बात की बेहद ख़ुशी है, फिर चाहे वो खलनायक का ही क़िरदार क्यों न हो. बकौल अक्षय उन्हें शूटिंग के समय अपने पक्षीराजन के गेटअप में तैयार होने में क़रीब छह घंटे लग जाते थे. उन्हें इसके मेकअप के लिए मेकअप आर्टिस्ट के सामने घंटों ख़ामोश होकर बैठे रहना पड़ता था. उनके अनुसार, इस कारण उनकी सब्र करने और अपनी धैर्य की क्षमता को विकसित करने में भी मदद मिली.

निर्माता अलीराजा सुबासकरण व राजू महालिंगम ने इस तरह की फिल्म बनाने का रिस्क लिया, जो सराहनीय है. ए. आर. रहमान का संगीत फिल्म को गति देता है, पर गाने केवल दो ही हैं. फिल्म को टूडी और थ्रीडी फार्मेट में दुनियाभर में प्रदर्शित किया गया है और इसके लिए तकनीकी रूप से शंकरजी के पूरी टीम ने ख़ूब मेहनत भी की है. फिल्म में सरप्राइज़ पैकेज के रूप में 3.0 कुट्टी का भी ज़िक्र किया गया है, ताकि प्रशंसकों को शंकर की अगली फिल्म का इंतज़ार रहे.

फिल्म हिंदी, तमिल और तेलगु- इन तीन भाषाओं के साथ अन्य भाषाओं में भी डब होकर प्रदर्शित की गई है. यूं तो फिल्म 512 करोड़ रुपए की लागत में बनी है, पर उसने अभी से सेटेलाइट, डिजिटल, डिस्ट्रिब्यूशन के राइट्स के ज़रिए 350 करोड़ रुपए कमा लिए हैं. यह तो जगजाहिर है कि 2.0 फिल्म दक्षिण भारतीयों द्वारा सुपर-डुपर हिट हो ही जाएगी. लेकिन हिंदी प्रेमी दर्शकों को यह कितना पसंद आएगी, यह तो व़क्त ही बताएगा.

– ऊषा गुप्ता

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चीटर शाहरुख ने इस तरह पूरा किया सुई धागा चैलेंज (How SRK Cheated His Way Out Of #Sui Dhaga Challenge)

अनुष्का शर्मा (Anushka Sharma) और वरुण धवन (Varun Dhawan) अपनी फिल्म सुई धागा (Sui Dhaga) के प्रमोशन के लिए सेलिब्रिटीज़ को एक चैलेंज (Challenge) दे रहे हैं. वे एक बारीक़ सुई में धागा डालने की चुनौती सभी कलाकारों को दे रहे हैं.

SRK Sui Dhaga Challenge

अब तक अक्षय कुमार से लेकर आलिया भट्ट, रणबीर कपूर, करण जौहर इस पर अपना हाथ साफ़ कर चुके हैं. लेकिन शाहरुख ने इस चैलेंज को धोखे के साथ मज़ेदार तरी़के से पूरा किया. उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो अपलोड कर इस चैलेंज को पूरा करते हुए सुई धागा की टीम को शुभकामनाएं दी.

जहां अक्षय कुमार सुई में धागा नहीं डाल पाए और इसे बड़ा मुश्किल काम बताया. उनके अनुसार, इससे आसान तो कूदना है. वहीं चतुर शाहरुख ने एक बड़ी-सी सुई लेकर उसमें बड़ी आसानी से सेकंडभर में धागा डाल दिया. उनकी इस हरकत से जहां एक तबका मनोरंजन कर रहा है, तो कुछ लोग उन्हें ट्रोल करने बाज नहीं आए. बकौल टोलर्स शाहरुख चीटर है. तभी तो जब-तब वे चीटिंग करते रहते हैं, इसलिए तो कुछ कुछ होता है फिल्म में उन्हें अंजलि (काजोल) अक्सर राहुल (शाहरुख) इज़ ए चीटर कहती रहती है. सचमुच वे बड़े शातीर चीटर हैं.

सुई धागा के इस चैलेंज को फिल्मी कलाकार मज़ेदार ढंग से पूरा कर रहे हैं. अक्षय, करण जहां इसमें फेल हो गए, वहीं आलिया भट्ट, आदित्य रॉय कपूर और रणबीर ने इसे आसानी से पूरा कर लिया. उन्होंने दीपिका पादुकोण व रणवीर सिंह को भी चैलेंज किया है. देखें, ये दोनों कब इस चैलेंज को पूरा करते हैं.

सुई धागा मूवी एक बेरोज़गार के स्व रोज़गार होने की दिलचस्प कहानी है, जिसमें उसकी पत्नी पूरा साथ देती है. इस फिल्म के ज़रिए पहली बार वरुण धवन और अनुष्का शर्मा एक साथ आ रहे हैं. दम लगा के हईशा की जोड़ी यानी निर्माता मनीष शर्मा और शरत कटारिया एक बार इस मूवी में अपना जलवा दिखाएंगे. यह फिल्म 28 सितंबर को रिलीज़ होनेवाली है.

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सलमान को बदलना पड़ा अपनी फिल्म का नाम, जानें क्यों? (SHOCKING! Salman Khan Renames Movie, Here’s The Actual Reason)

Salman Khan

सलमान (Salman Khan) और विवादों का चोली-दामन का साथ रहा है. फिर चाहे उनकी फिल्म हो या निजी ज़िंदगी. अब उनके एसकेएफ बैनर तैल बन रही फिल्म लवरात्रि को लेकर बढ़ते विवाद, शिकायत, केस आदि को देखते हुए उन्होंने सुरक्षात्मक रवैया अपनाते हुए फिल्म का नाम लवयात्री कर दिया है.

Salman Khan

दरअसल, एक संगठन ने चेतावनी दी थी कि यदि इस फिल्म का नाम नहीं बदला गया, तो वे फिल्म को रिलीज़ नहीं होने देंगे. उनका मानना था कि फिल्म के टाइटल से हिंदू त्योहार के साथ-साथ धार्मिक भावनाएं भी आहत हो रही हैं. जहां इसके विरोध में गुजरात हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, वहीं मुजफ़्फ़रपुर कोर्ट ने सलमान ख़ान और फिल्म से जुड़े कलाकारों के ख़िलाफ़ एफआईआर तक दर्ज करने का भी आदेश दिया था. इसी के साथ देशभर में कई जगहों से विरोध की लहर उठ रही थी. इन तमाम बातों, विरोधों को देखते हुए निर्माता ने फिल्म के टाइटल को बदलना ही श्रेयस्कर समझा.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सलमान की बहन अर्पिता के पति आयुष शर्मा इस फिल्म से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत कर रहे हैं. उन्हीं के साथ फिल्म की हीरोइन वारिना हुसैन और निर्देशक अभिराज मीनावाल भी अपनी फिल्मी पारी शुरू कर रहे हैं. साथ ही अरबाज़ ख़ान, रोनित रॉय, राम कपूर भी ख़ास भूमिकाओं में है.

यह फिल्म गुजरात की पृष्ठभूमि ख़ासकर नवरात्रि पर दो दिलों के एक-दूसरे के क़रीब आने, मिलने-बिछड़ने, ड्रामा, लव-रोमांस से भरपूर है, जो पांच अक्टूबर को रिलीज़ हो रही है.

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जानें कौन है प्रिया वारियर, जिसकी अदा ने पूरे Internet को सम्मोहित कर दिया (Who Is This Mistery Girl?)

इस video ने internet पे धूम मचा दी है… कुछ ही समय में ये video इतना वाइरल हो गया कि हर कोई इसी की बात और इसे share कर रहा है… यहां तक कि इसपे जोक्स और इंट्रेस्टिंग पोस्ट्स भी बनने लगी… आप भी देखिए ये दिलचस्प video… ये विडीओ है प्रिया वारियर (Priya Warrier) ( का जो साउथ की मूवी में डेब्यू करने जा रही है और उनकी इस अदा ने पूरे internet को सम्मोहित ही कर लिया.

प्रिया एक एक्ट्रेस हैं, वो 18 साल की हैं और बी कॉम की स्टूडेंट हैं, प्रिया मलयालम मूवी से अपना डेब्यू करने जा रही हैं, उनकी आंख मारने की इस अदा ने लोगों को उनका दीवाना बना दिया, वहीं उनके साथ वीडियो में नज़र आ रहे उस क्यूट बॉय को भी सभी पसंद कर रहे हैं…

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जाह्नवी-ईशान की डेब्यू फिल्म धड़क की आ गई है रिलीज़ डेट… (New Dhadak Poster: Release Date Revealed)

Dhadak Movie Release Date

Dhadak Movie Release Date

फिल्म धड़क (Dhadak) से अपना डेब्यू करने जा रही जाह्नवी कपूर (Janhvi Kapoor) को लेकर सभी एक्साइटेड हैं. फिल्म के पोस्टर रिजलीज़ के साथ ही अब फिल्म की रिलीज़ डेट भी आ चुकी है. जी हां, फिल्म रिलीज़ होने जा रही है इस साल 20 जुलाई को. पोस्टर से ही साफ़ हो रहा है कि ईशान खट्टर (Ishaan Khatter) और जाह्नवी की केमिस्ट्री ज़बर्दस्त होगी. फिल्म इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि यह मराठी ब्लॉकबस्टर सैराट की हिंदी रिमेक है. तो बस अब 20 जुलाई तक इंतज़ार करें, तब तक जाह्नवी की ये ख़ूबसूरत तस्वीरें देखें-

Dhadak Movie Release Date

Dhadak Movie Release Date

Dhadak Movie Release Date

Dhadak Movie Release Date

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अपनी बेटी की प्यूबर्टी को हमने सेलिब्रेट किया… पैडमैन अक्षय कुमार (Celebrate The Arrival Of Puberty With Your Daughter- Akshay Kumar)

Akshay Kumar padman

गम्भीर सामाजिक विषयों को फ़िल्मों के ज़रिए लोगों तक पहुँचाने का काम आसान नहीं होता, लेकिन लगता है अक्षय कुमार इसमें माहिर हो गए हैं… इसी कड़ी में उनकी चर्चित फ़िल्म पैडमैन पर सबकी नज़र है. क्या कहते हैं अक्षय इस बारे में, ख़ुद उनसे ही पूछ लेते हैं.

Akshay Kumar padman

बात पैडमैन की करें, तो ये एक ऐसे विषय पर है जिसके बारे में समाज में और परिवार में बात तक नहीं की जाती तो आपका क्या अनुभव रहा है?
आप सही कह रहे हैं, क्यूंकि मेरा भी यही अनुभव रहा था जब तक कि मैं ख़ुद इस विषय को समझ नहीं पाया था. असली बात समझते-समझते तो ज़ाहिर है वक़्त लगा कि हमारे समाज में ८२% महिलायें भी इस विषय को ठीक से नहीं समझ पातीं. यही वजह है कि पीरियड्स के दौरान वे राख, पत्ते, मिट्टी जैसी चीज़ें इस्तेमाल करने को मजबूर हैं और ये बेहद शर्मनाक बात है. जब मुझे इन बातों का पता चला तो मैंने सोचा ये तथ्य ज़रूर सामने आने चाहिए. लोगों को पता होना चाहिए कि ये प्राकृतिक क्रिया है इसे शर्म से जोड़कर नहीं देखना चाहिए.
फिर मेरी मुलाक़ात हुई अरुणाचलम मुर्गनाथन से, उन्होंने अपनी पत्नी की कितनी केयर की ये पता चला, उनकी सोच बहुत बेहतरीन थी, इसलिए उन्होंने पैड्स की मशीन बनाई मात्र ६० हज़ार में, जिसे लोग करोड़ों रुपए में बनाते हैं.
मुझे उनकी कहानी ने बहुत प्रेरित किया और उनकी ये बात दिल को छू गई कि किसी भी देश को मज़बूत बनाना है तो उस मुल्क की महिलाओं को मज़बूत करना होगा.
मुझे लगा कितना सही कहा उन्होंने, हम क्यूं इतने हथियार ख़रीदते हैं, जबकि हमारे देश की महिलायें ही मज़बूत नहीं हैं.
मुझे ख़ुद को इतनी समझ और जानकारी मिली कि अपनी बेटी के साथ अब हम खुलकर इस विषय पर बात करते हैं. वो १३-१४ साल की है और अब ज़रूरी है कि वो समझे इन चीज़ों को. जबकि हमारे समाज में आज भी महिलाओं को इस दौरान भेदभाव का भी शिकार होना पड़ता है.
मेरी बेटी की प्यूबर्टी पर हमने सेलिब्रेट किया, ताली बजाई क्यूँकि बेटी सयानी हो गई है तो ये तो सेलिब्रेशन की बात है. जब आप सेलब्रेट करोगे तभी तो बेटी को भी एहसास होगा कि ये नॉर्मल है, इसमें शर्म की बात नहीं. वहीं अगर आप उसको ये सीख दोगे कि किसी को बताना नहीं, ये छिपाने की बात है तो वो भी इसको सहजता से नहीं ले पाएगी
फ़िल्म रिलीज़ कि बाद कैसा करेगी क्या करेगी मुझे नहीं पता लेकिन आज मैं सोशल मीडिया पर जब देखता हूं कि लड़के भी इस विषय पर खुलकर बात कर रहे हैं तो मेरी जीत वहीं है. मुझे ये फ़िल्म किसी भी हाल में करनी ही थी और मैंने अपने दिल की सुनी.

देश में आज भी अधिकतर लड़कियां सैनिटेरी नैप्किन अफ़ॉर्ड नहीं कर पातीं.
जी हां, मैं इसलिए कहता हूं कि सैनिटेरी नैप्किन फ़्री होने चाहिए. डिफ़ेन्स में पैसे थोड़े कम कर दो पर ये बेसिक नीड़ है जिसे सबको मिलना चाहिए. मैंने फ़िल्म कि ज़रिए संदेश दे दिया है अब ये समानेवाले को चाहिए इसे कैसे लेता है.

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Akshay Kumar padman

कोई ख़ास वजह कि सामाजिक मुद्दों पर फ़िल्में करना पसंद करते हैं?
ख़याल और चाहत पहले से ही थी लेकिन तब पैसे नहीं थे अब हैं तो produce करता हूं. मेरा यही मानना है कि गम्भीर विषय को मनोरंजक तरीक़े से समझाओ तो बेहतर है बजाय भाषण देने के.

अपनी कामयाबी का श्रेय किसको देंगे? फ़िल्म के सब्जेक्ट्स या अपनी फ़िट्नेस?
फ़िल्मों के हिट होने का कोई फ़ॉर्म्युला नहीं होता.

चाहे टॉयलेट एक प्रेम कथा हो या पैडमैन तो महिलाओं से जुड़े और किन विषयों पर अब आगे फ़िल्म बनाना चाहते हैं?
मेरे दिमाग़ में नहीं था कोई विषय लेकिन एक लड़की ने मुझसे कहा कि सर आप डाउरी यानी दहेज पर फ़िल्म बनायें.

आपको क्या लगता है कि इस तरह की फ़िल्में सामाजिक स्तर पर बदलाव लाती हैं.
बदलाव लाती हैं लेकिन सरकार के समर्थन से बदलाव और प्रभाव जल्दी और ज़्यादा आता है. जैसे टॉयलेट में हुआ था क्यूंकि सरकार का बहुत समर्थन मिला था.

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क्या धर्म भी एक वजह है इस तरह कि विषयों पर खुलकर बात ना करने की?
धर्म भी है और हमारी सोच भी. लड़कों के लिए ये मज़ाक़ का विषय है इसलिए लड़कियां झिझकती हैं. मेरे एक दोस्त का क़िस्सा बताता हूं, देर रात उसकी नींद खुली और उसने देखा उसकी बेटी और पत्नी बात कर रहे हैं कि घर पे सैनिटेरी नैप्किन नहीं है और बेटी को उसकी पत्नी समझा रही है कि इतनी रात को क्या करें? तब वो अंदर गया और बेटी को बोला कि पीरियड्स हैं और पैड्स नहीं हैं? बेटी हैरान थी पर वो उसको गाड़ी में लेके गया, डे नाइट केमिस्ट से पैड्स लेके बेटी को दिया. उसके बाद उसने कहा कि उसकी बेटी उसको बेहद प्यार करने लगी, पहले से भी ज़्यादा! उसका रिलेशन पूरी तरह बदल गया. तो कहनी का मतलब है कि खुलकर बात करो, बच्ची को दोस्त बनाओ, उसकी समस्या को समझो और ख़ुद महिलाओं को भी यही करना चाहिए.
वो ख़ुद झिझकती हैं. मेरी फ़ैन ने मुझे कहा अक्षय मैंने ट्रेलर देखा बहुत अच्छा था, मैंने पूछा कौन सा ट्रेलर? तो वो बुदबुदाई यानी वो ख़ुद पैडमैन खुलकर नहीं बोल पा रही थी. तो ये चीज़ ख़त्म होनी चाहिए.

२०१७ आपका कैसा गुज़रा और नए साल में क्या कुछ नया करने का सोचा है आपने?
पिछला साल बहुत अच्छा गुज़रा. मैंने ऐसा कुछ सोचा नहीं है कि क्या resolution बनाऊं. सोचता हूं साल में चार की जगह तीन फ़िल्में करूं.

आप साल में चार फ़िल्में करते हैं जबकि ऐसे भी स्टार्स हैं जो एक ही फ़िल्म करते हैं तो इंडस्ट्री आप पर अच्छी फ़िल्मों के लिए काफ़ी निर्भर करती है, ऐसे में आप ख़ुद पर कीसी तरह का प्रेशर महसूस करते हैं?
प्रेशर क्यूं महसूस होगा… मैं तो ये पिछले २७ सालों से यह कर रहा हूं. एक मूवी ४०-५० दिनों में ख़त्म हो जाती है, तो इतना समय बचता है तो करूं क्या? इसलिए बीच बीच में ऐड कर लेता हूं.

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फैमिली फोटो! संजय दत्त-मान्यता हैं कज़ाकिस्तान में, ‘तोरबाज़’ की शूटिंग शुरू (Maanayata Dutt shares a selfie with Hubby Sanjay Dutt From The Sets Of Film ‘Torbaaz’)

selfie family photo of sanjay dutt

selfie family photo of sanjay dutt

संजय दत्त (Sanjay Dutt) और मान्यता दत्त (Maanayata Dutt) अपने बच्चों शाहरान और इकरा के साथ कज़ाकिस्तान में हैं. संजय दत्त वहां अपनी अगली फिल्म तोरबाज़ की शूटिंग कर रहे हैं. मान्यता ने अपने इंस्टग्राम एकाउंट पर संजय के साथ अपनी सेल्फी शेयर की है, जिसमें उन्होंने लिखा है, “तोरबाज़ के सेट से सेल्फी”selfie family photo of sanjay dutt

संजय दत्त फिल्म तोरबाज़ में एक ऐसे बेटे के पिता का किरदार निभा रहे हैं, जिसका बेटा सुसाइड बॉम्बर बन जाता है. इस फिल्म से पहले संजय ने फिल्म भूमि में अदिती राव हैदरी के पिता का किरदार निभाया था, लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर नहीं चल पाई थी.

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Exclusive Interview: जग जिस पर हंसता है, इतिहास वही रचता है… रेसलर संग्राम सिंह (When The World Says ‘Give UP’ Hope Whispers, Try It One More Time: Wrestler Sangram Singh)

Wrestler Sangram Singh Interview

मैंने सूरज को कैद किया था आंखों में, मैंने चांद उगाया था हथेली पर… स्याह रातें जब अंधेरा बिखेर रही थीं, मैंने उम्मीद का चिराग़ जलाया था अपनी पलकों पर… थककर रुक जाता, तो वहीं टूट जाता… रास्ता बदल देता, तो हर ख़्वाब पीछे छूट जाता… चलता रहा मैं कांटों पर भी, रुक न सका मैं उलझी हुई राहों पर भी… अपने पैरों की बेड़ियों को तोड़ दिया जब मैंने, सारी दुनिया ने कहा, हर नाउम्मीदी को बड़े जिगर से पीछे छोड़ दिया मैंने… लोग कहते थे लड़ना छोड़ दे, यही तेरी नियति है प्यारे… मैंने कहा, जो लड़ने से डर जाए, वो इंसान नहीं, जो नियति से हार जाए, वो संग्राम नहीं… क्या कोई सोच सकता है कि बचपन के आठ साल व्हील चेयर पर गुज़ारने के बाद कोई बंदा पहलवानी की दुनिया को अपने दम पर इस क़दर जीत सकता है कि आज बड़े अदब और सम्मान से उसका नाम लिया जाता है. उसे दुनिया का सर्वश्रेष्ठ पहलवान कहा जाता है… जी हां, हम बात कर रहें हैं रेसलर संग्राम सिंह (Wrestler Sangram Singh) की. क्या था उनका संघर्ष और कैसे लड़े वो अपनी नियति से, आइए उन्हीं से पूछते हैं…

Wrestler Sangram Singh Interview

आपको बचपन में आर्थराइटिस था लेकिन वहाँ से लेकर वर्ल्ड के बेस्ट रेस्लर बनने तक की जर्नी कैसी रही आपकी?

बचपन में मुझे रूमैटॉइड आर्थराइटिस हुआ था. जब मैं 3 साल का था, तो पैरों में दर्द हुआ और फिर पैरों में गांठ-सी बन गई. चूंकि मैं हरियाणा के रोहतक डिस्ट्रिक्ट के मदीना गांव से हूं, तो मेरे पैरेंट्स भी बहुत ही सिंपल हैं और उस समय इतनी जानकारी नहीं थी, सुविधाएं नहीं थीं और न ही इतने पैसे थे, सो मुझे कभी इस डॉक्टर को दिखाया, तो कभी किसी दूसरे को. इसी में इतना समय निकल गया कि जब बड़े हॉस्पिटल में डॉक्टर्स को दिखाया गया, तो उन्होंने सीधेतौर पर कह दिया कि यह बीमारी तो मेरी मौत के साथ ही ख़त्म होगी. लेकिन मेरी मां ने हिम्मत नहीं हारी और कुछ मेरी भी इच्छाशक्ति थी कि 8 साल तक व्हील चेयर पर रहने के बाद आज मैं रेसलर हूं.
दरसअल मेरे बड़े भाई स्टेट लेवल के रेसलर थे, तो मैंने भी टूर्नामेंट यानी दंगल के बारे में सुना कि उन्हें घी-दूध सब मिलता है, तो मैं उसके साथ दंगल देखने गया. दंगल देखकर मुझे न जाने क्यों यह महसूस हुआ कि काश मैं भी रेसलर बन सकता. फिर अपने दोस्त को कहा कि मुझे अखाड़े में लेकर चल. वहां गया, तो सब मुझे देखकर मेरा मज़ाक उड़ाने लगे. अखाड़े के उस्ताद ने भी मुझसे पूछा कि आप क्या करना चाहते हो, तो मैंने अपने मन की बात कही कि मैं भी रेसलर बनना चाहता हूं. मेरी बात सुनकर उन्होंने भी यही कहा कि अगर भी आप बन गए, तो सब बन जाएंगे… खंडहर देखकर इमारत का पता चल जाता है… इत्यादि बातें… न जाने क्या कुछ नहीं कहा उन्होंने मुझे.
लेकिन मेरी मां ने गिवअप नहीं किया और न मैंने हिम्मत हारी. आप सोच सकते हैं कि गांव में नेचर कॉल के लिए भी बाहर जाना पड़ता था, हमारे पास व्हील चेयर तक के पैसे नहीं होते थे… मैं सुबह उठ तो जाता था, आंखें खुल जाती थीं, लेकिन मेरी बॉडी मूव नहीं होती थी. 8 साल तक बिस्तर पर पड़े रहना आसान नहीं था, क्योंकि यह बीमारी मेरे शरीर में फैलती जा रही थी. हर जॉइंट में आ गई थी. यहां तक कि मैं अपना मुंह भी खोलता था, तो मुझे दर्द होता था. मैं हर रोज़ जीने की एक नई कोशिश करता था, अपने पैरों पर खड़े होने के लिए संघर्ष करता था… मेरा यही मानना है कि यदि इंसान हिम्मत न हारे, तो नामुमकिन कुछ भी नहीं… मुझे प्रोफेशनल रेसलिंग में वर्ल्ड के बेस्ट रेसलर का टाइटल मिला, तो मैं यही कहूंगा कि जग जिस पर हंसता है, इतिहास वही रचता है.
यही वजह है कि अपने इस संघर्ष को मैं भूलता नहीं और मैं उन बच्चों की हर तरह से मदद करने की कोशिश करता हूं, जो इस बीमारी से पीड़ित हैं. उनकी पढ़ाई-लिखाई, रोज़ी-रोटी के लिए मुझसे जो बन पड़ता है, मैं ज़रूर करने की कोशिश करता हूं. दरअसल, हम स़िर्फ एक ज़रिया हैं, भगवान ही सब कुछ करता है.

Wrestler Sangram Singh Interview

आज की बिज़ी लाइफस्टाइल में फिटनेस कितनी महत्वपूर्ण है? और आप अपनी फ़िट्नेस के लिए क्या कुछ ख़ास करते हैं?

फिटनेस के लिए आप कहीं भी समझौता नहीं कर सकते और न करना चाहिए. ख़ासतौर से आज की बिज़ी लाइफस्टाइल में. यह एक ऐसा इंवेस्टमेंट है कि कोई भी मुझसे पूछे, तो यही कहूंगा कि अपने शरीर में इंवेस्ट करो रोज़ाना, चाहे एक घंटा, दो घंटा या जब भी, जितना भी टाइम मिले, आपको अपने शरीर में इंवेस्टमेंट करना चाहिए, क्योंकि शेयर मार्केट हो या आपका बिज़नेस हो, वो आपको धोखा दे सकता है, लेकिन यह शरीर धोखा नहीं देगा. मैं फिटनेस के लिए हर रोज़ 3 घंटे वर्कआउट करता ही हूं, चाहे कितना ही बिज़ी क्यों न होऊं. कोशिश करता हूं अलग-अलग चीज़ें करने की, जो मैं 15 साल की उम्र में नहीं कर पाता था, वो वर्कआउट मैं आज करता हूं. रेसलिंग भी करता हूं. युवाओं को मोटिवेशनल स्पीच भी देता हूं, टीवी शोज़ करता हूं, फिल्म भी कर रहा हूं. तो हर चीज़ बैलेंस करने की कोशिश करता हूं. 5-6 घंटे सोता हूं.

अपने डाइयट कि बारे में बताइए…

मैं प्योर वेजीटेरियन हूं. मेरा यही मानना है कि यदि ज़िंदगी में आपको सच में स्ट्रॉन्ग बनना है, आगे बढ़ना है, तो खाओ कम, काम ज़्यादा करो. एक और दिलचस्प बात ज़रूर करना चाहूंगा, हालांकि मैं किसी की बुराई नहीं करना चाहूंगा, लेकिन जैसे हम जिम में जाते हैं, तो ट्रेनर डरा देते हैं कि अरे, आपका वज़न इतना है, तो आपको तो इतने ग्राम प्रोटीन खाना है… आप 70 किलो के हैं, तो और ज़्यादा प्रोटीन खाओ… सब वहम की बातें हैं. आप ख़ुद अपने डायट का ध्यान रखो, हेल्दी खाओ. पानी पीओ. सूखी रोटी और प्याज़ में भी इतनी ताकत और विटामिन होते हैं, जितना किसी बड़े होटल के खाने में भी नहीं होंगे. हर रोज़ वर्कआउट करो, ख़ुश रहो. अच्छी हेल्थ का यही फॉर्मूला है कि खाना भूख से कम, पानी डबल, वर्कआउट ट्रिप्पल और हंसना चार गुना.
मैं सुबह दलिया खाता हूं. आंवला-एलोवीरा का जूस लेता हूं. अश्‍वगंधा, शहद, गुड़, दूध, रोटी, दाल-सब्ज़ी और घी. यह सभी चीज़ें संतुलित रूप से खाता हूं. आजकल एक मूवी के लिए वज़न कम कर रहा हूं. 20 किलो वज़न कम किया है, इसलिए संतुलन ज़रूरी है.

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रेसलिंग को आज इंडिया में किस मुक़ाम पर देखते हैं?

रेसलिंग आज इंडिया में क्रिकेट बाद नंबर 2 स्पोर्ट है, जबकि क्रिकेट में तो प्रोफेशनलिज़्म बहुत पहले से था, लेकिन अब यह अन्य स्पोर्ट्स में भी आ रहा है. इसी तरह रेसलिंग भी आगे बढ़ रहा है, लोग भी काफ़ी जागरूक हुए हैं. सुविधाएं भी बढ़ी हैं. एक समय था, जब इतनी जागरूकता और फैसिलीटीज़ नहीं थीं, लेकिन अब वैसा नहीं है. हमें मेडल्स भी मिलते रहे हैं. जब किसी और स्पोर्ट्स में ऑलिंपिक्स या अन्य टूर्नामेंट में हमें मेडल्स नहीं मिल रहे थे, तब रेसलिंग ही थी, जहां हमें मेडल्स मिले. इसके बाद अब तो बहुत-से स्पार्ट्स हैं, जो आगे बढ़ रहे हैं. कुल मिलाकर रेसलिंग को आज बेहद सम्मान मिलने लगा है और यह आगे और बढ़ेगा.

आपने हाल ही में के डी जाधव चैंपियनशिप शुरुआत की उसके विषय में बताइए?

के डी जाधव जी जैसा कोई दूसरा नहीं हुआ देश में. वे बेहद सम्मानित हैं और उनका दर्जा बहुत ऊंचा है. वे पहले भारतीय थे, जिन्होंने कुश्ती में हमें ओलिंपिक मेडल दिलाया था. मैं चाहता हूं कि लोग उनके बारे में और जानें, ताकि युवाओं को प्रेरणा मिले, इसलिए मैं दिल से चाहता था कि उनके लिए कुछ कर सकूं, तो यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी उन्हें.

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इंडियन रेसलर्स कितने प्रोफेशनल हैं अगर विदेशी प्लेयर्स से कम्पेयर करें तो…

हम काफ़ी प्रोफेशनल हैं और अब तो हम किसी भी तरह से विदेशी प्लेयर्स से पीछे नहीं हैं. चाहे टेकनीक हो या फिटनेस- हर स्तर पर हम उन्हें तगड़ा कॉम्पटीशन दे रहे हैं और भारतीय पहलवान तो अब दुनियाभर में नाम कमा रहे हैं, सारा जग उनका लोहा मान चुका है.

यहां सुविधाएं कैसी हैं? क्या बदलाव आने चाहिए?

सुविधाएं बहुत अच्छी हैं. प्रशासन की तरफ़ से भी बहुत गंभीरता से लिया जाता है हर चीज़ को, इसलिए पहले जो द़िक्क़तें हुआ करती थीं, वा अब नहीं हैं. बदलाव तो यही है कि हम और बेहतर करें, आगे बढ़ें. जो ग़रीब बच्चे हैं, जिनमें हुनर है, उन्हें ज़रूर बेहतर सुविधाएं दी जानी चाहिए, ताकि वे बेहतर स्पोर्ट्समैन बन सकें. अब तो महिलाएं भी ख़ूब नाम कमा रही हैं रेसलिंग में भी और अन्य खेलों में भी. तो बस, उन्हें बढ़ावा मिलना चाहिए. हम भी अपने स्तर पर प्रयास करते ही हैं.

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आप मोटिवेशनल स्पीकर और स्पोर्ट्स सायकोलॉजिस्ट भी हैं, तो फैंस और आम लोगों को कोई संदेश देना चाहेंगे?

मैं यही कहना चाहूंगा कि जीवन में कभी भी निराश मत होना. उम्मीद का दामन कभी मत छोड़ना. अपने प्रयास हमेशा जारी रखना. मंज़िल ज़रूर मिलेगी. मैं भी अगर अपनी कोशिशें छोड़ देता, मेरी मां भी थक-हरकर नाउम्मीद हो जाती, तो कभी अपनी मंज़िल तक नहीं पहुंचता. बाकी तो ऊपरवाले का साथ और चाहनेवालों की दुआएं तो हौसला देती ही हैं. फैंस ने मुझे काफ़ी प्यार दिया, मैं भी अपनी तरफ़ से जितना संभव हो सके, करने की कोशिश हमेशा करता रहा हूं और करता रहूंगा.

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स्ट्रेस दूर करने के लिए क्या करते हैं?

स्ट्रेस को दूर करने का सबसे बेहतरीन ज़रिया है वर्कआउट. मैं दुखी होता हूं, तो वर्कआउट करता हूं, ख़ुश होता हूं, तो भी वर्कआउट करता हूं. स्ट्रेस को दूर करने का सिंपल सा उपाय है, यहां सब कुछ टेम्प्रेरी है. चाहे दुख हो, तकलीफ़ हो, स्ट्रेस हो… यहां तक कि ख़ुशियां भी टेम्प्रेरी ही हैं. तो जब सब कुछ टेम्प्रेरी है, तो यहां किस चीज़ के लिए दुखी होना, उदास होना. मैं स़िर्फ 500 लेकर मुंबई आया था और आज भगवान की दया से इतना कुछ कर रहा हूं, लेकिन मैं अगर आज भी वापस जाता हूं, तो भी बहुत ख़ुश रहूंगा, क्योंकि इतने लोगों का प्यार मिला, सब कुछ मिला, तो दुख किस बात का. मैं अब यहां हूं, तो ढेर सारे बच्चों की मदद का ज़रिया बन रहा हूं, क्योंकि मैं भी तो उस जगह से आया हूं, जहां रनिंग करते समय पैरों में जूते नहीं होते थे, बस का किराया नहीं होता था, 20 कि.मी. पैदल चलता था नंगे पैर. क्योंकि एक जोड़ा जूते-चप्पल होते थे, जो टूट जाते थे. आज मालिक का दिया हुआ सब है, तो किस बात की शिकायत और किस बात का स्ट्रेस. मैं तो आप सबसे भी यही कहूंगा कि जो नहीं है, उसका स्ट्रेस न लो, जो है, उसके लिए ईश्‍वर को धन्यवाद कहो और ख़ुश रहो.

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आज की लाइफस्टाइल में कैसे पॉज़िटिव और फ़िट रहा जाए उसके लिए आपके स्पेशल टिप्स?

आज की लाइफस्टाइल में फिट और पॉज़िटिव रहने के लिए थोड़ा-सा अपनी लाइफ में डिसिप्लिन लाओ. शेड्यूल बनाओ, घर का खाना खाओ. फैमिली के साथ समय बिताओ. अपने पैरेंट्स के साथ, भाई-बहन, दोस्तों के साथ, पार्टनर के साथ हंसों, खेलो, शेयर करो. माता-पिता का आशीर्वाद लो. छोटी-सी ये ज़िंदगी है, पता नहीं कल क्या हो, कल किसने देखा और ज़िंदगी में किसी को भी कम मत आंको. कहते हैं न कि बंद घड़ी भी दिन में दो बार सही समय दिखाती है. एक प्यारी-सी तितली को देखा है आपने कभी, कितनी रंग-बिरंगी, कितनी चमक होती है उसमें, जबकि उसकी ज़िंदगी बहुत छोटी होती है, फिर भी वो अपने रंगों से लोगों को आकर्षित करते ख़ुशियां देती है. तो हमें ज़िंदगी में किस बात का तनाव? हमें तो इतना कुछ मिला है, बस उसकी कद्र करने का हुनर आना चाहिए. हमेशा ख़ुश रहो, नए-नए अवसरों को क्रिएट करने का प्रयास करो. अगर आज नहीं हुआ, तो कल होगा, कल नहीं, तो परसों हो जाएगा… कहां जाएगा यार, सारी चीज़ें यहीं तो हैं. कई बार आख़िरी चाभी ताला खोल देती है. तो प्रयास जारी रखो.

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Go Go Go Golmaal! लॉजिक नहीं मैजिक होगा ‘गोलमाल अगेन’ में, देखें ट्रेलर (Golmaal Again Official Trailer Out)

Golmaal Again Official Trailer

इस दिवाली लॉजिक नहीं सिर्फ़ मैजिक होगा फिल्म गोलमाल अगेन से. गोलमाल की सीरिज़ की चौथी फिल्म गोलमाल अगेन में रोहित शेट्टी की पुरानी टीम में शामिल हुए हैं दो नए चेहरे परिणीति चोपड़ा और तब्बू. अजय देवगन, अरशद वारसी, तुषार कपूर, श्रेयस तलपड़े और कुनाल खेमू एक बार फिर साथ हैं. फिल्म के पोस्टर पर इस बार इन सबके अलावा नींबू मिर्च भी नज़र आ रहा है. अंदाज़ा लग ही गया होगा आपको, ये नींबू मिर्च भूतों को दूर भगाने के लिए लगाया गया है. रोहित की इस फिल्म में कॉमेडी के साथ-साथ भूत भी होंगे.

देखें फिल्म का ये मज़ेदार ट्रेलर.

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WOW! स्पेस में जाने के लिए NASA में ट्रेनिंग ले रहे हैं सुशांत सिंह राजपूत! (Sushant Singh Rajput to Play Astronaut in his next Film Chanda Mama Door Ke)

Sushant Singh Rajput to Play Astronaut

Sushant Singh Rajput to Play Astronaut

सुशांत सिंह राजपूत अब आंतरिक्ष में जाने के लिए तैयार हैं. सुशांत इसके लिए नासा में ख़ास ट्रेनिंग भी ले रहे हैं. एस्ट्रोनॉट बनने की ये तैयारी सुशांत कर रहे हैं अपनी अगली फिल्म चंदा मामा दूर के लिए, जो कि एक साइंस फिक्शन फिल्म होगी. आइफा अटेंड करने के बाद सुशांत न्यूयॉर्क से सीधे वाशिंगटन डीसी चले गए, जहां नासा में वो आंतरिक्ष यात्री बनने की बारीक़ियां सीख रहे हैं.

Sushant Singh Rajput to Play Astronaut

नासा से कुछ तस्वीरें भी सुशांत ने टि्वटर पर पोस्ट की थी. एक तस्वीर में वो आंतरिक्ष यात्री की ड्रेस में नज़र आ रहे हैं, तो वबीं एक पिक्चर में उन्होंने हाथों में टॉय रॉकेट थाम रखा है.

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ख़बरे हैं कि फिल्म में नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी और आर माधवन भी होंगे. चंदा मामा दूर के अगले साल 26 जनवरी पर रिलीज़ होगी.Sushant Singh Rajput to Play Astronaut

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