mudra

क्या कभी आपके ज़ेहन में यह बात आई है कि मंत्रों का क्या और कितना महत्व है? मंत्रों की शक्ति और उनके हेल्थ बेनीफिट्स के बारे में अक्सर हम सुनते रहते हैं, लेकिन शायद कभी भी हमने हेल्थ और मंत्र के साइंटिफिक कनेक्शन को जानने की कोशिश की हो. अगर हम मंत्रों के हेल्थ कनेक्शन को जान जाएंगे, तो ज़ाहिर है उन्हें बेहतर तरी़के से अपने जीवन में अपनाकर हेल्दी और बेहतर ज़िंदगी जी सकेंगे.

Mantra, Mudra And Meditation

धर्म या अंधविश्‍वास नहीं, ये है विज्ञान
* अक्सर लोग आज भी इसी ग़लतफ़हमी में हैं कि मंत्रों का संबंध किसी विशेष धर्म से है, जबकि तमाम साइंटिफिक रिसर्च और शोधों से यह साफ़ हो चुका है कि मंत्रों का आधार विज्ञान है. धर्म से इनका कोई संबंध नहीं, इसीलिए हर धर्म, समुदाय के लोग इनका प्रयोग करके स्वास्थ्य लाभ ले सकते हैं.
* मंत्र का यदि गूढ़ अर्थ जानें, तो मन का मतलब है- माइंड और त्र का अर्थ है तरंग या कंपन. मंत्रों के जप से जो कंपन होता है, वह न स़िर्फ हमारे मस्तिष्क को प्रभावित करता है, बल्कि मंत्रोच्चारण के समय श्‍वास-प्रश्‍वास की क्रिया व रिदम हमारे ग्लांड्स पर असर डालते हैं, जिसका सीधा प्रभाव हमारी हेल्थ पर होता है.

साउंड इज़ पावर
* मंत्र दरअसल साउंड यानी ध्वनि होते हैं, जिनकी एक निश्‍चित फ्रिक्वेंसी होती है और विज्ञान कहता है, ध्वनि ऊर्जा के सिवा कुछ नहीं है यानी मंत्र का सीधा-सीधा मतलब है- एनर्जी.
* मंत्र जप करने का अर्थ है शक्ति के अलग-अलग स्तर को महसूस करना.
* मंत्र किस तरह से हमारे जीवन व हेल्थ को प्रभावित करते हैं, इसका वर्णन वेदों में हज़ारों वर्ष पूर्व ही किया गया है. लेकिन इसके वैज्ञानिक आधार की खोज अब तक जारी थी. मंत्र और साइंस में बहुत ही गहरा कनेक्शन है.
* मंत्रों के नियमित जाप से हमारे शरीर के नर्वस सिस्टम में एक रिदम में दबाव यानी प्रेशर पैदा होता है, जिससे हमारे चक्र जाग जाते हैं और शरीर एवं मस्तिष्क में एनर्जी पैदा होती है.
* ओहायो यूनिवर्सिटी के शोध के मुताबिक भी यह साबित हुआ है कि ध्यान यानी डीप मेडिटेशन से लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता काफ़ी बढ़ जाती है. यही नहीं, जो लोग रोज़ाना ध्यान करते हैं, उन्हें ब्रेस्ट कैंसर का ख़तरा भी कम हो जाता है, साथ ही मांसपेशियों के दर्द से भी राहत मिलती है.
* साउंड व मंत्रों पर किए गए रिसर्च से यह पता चलता है कि निश्‍चित साउंड फ्रिक्वेंसी हमारे माइंड को विशेष प्रकार की आरामदायक परिस्थिति में पहुंचा देती हैं, जिसे वैज्ञानिक भाषा में अल्फा स्टेट कहा जाता है.
* मंत्रों के जप से शरीर रिलैक्स होता है और तनाव दूर होता है. मंत्र जप के व़क्त हम ध्यानावस्था में पहुंच जाते हैं और हमारा मस्तिष्क अल्फा स्टेट में, जिससे नर्वस सिस्टम बैलेंस होता है और तनाव दूर होता है.
* मंत्रों के नियमित जप से इम्यूनिटी बढ़ती है, क्योंकि इनका प्रभाव मस्तिष्क और नर्वस सिस्टम पर इस तरह से होता है, जिससे हमारे हार्मोंस प्रभावित होते हैं. सेरोटोनिन और डोपामाइन को हैप्पीनेस हार्मोंस कहा जाता है, मंत्रों के सकारात्मक प्रभाव से हैप्पी हार्मोंस रिलीज़ होकर मस्तिष्क को सुखद अवस्था में पहुंचाते हैं. स़िर्फ इतना ही नहीं, हमारे मूड से लेकर भूख और नींद तक से जुड़े मस्तिष्क के केंद्रों को यह प्रभावित करके हार्मोंस के स्तर को बैलेंस करते हैं, जिससे हमारी इम्यूनिटी बेहतर होती है.

Mantra and Meditation

मुद्रा विज्ञान
मंत्र और साइंस में बहुत ही गहरा कनेक्शन है. मंत्रों के उच्चारण के साथ उनके जाप के समय आप किस मुद्रा में बैठे हैं, यह भी बहुत मायने रखता है. जिस तरह से मंत्रों का वैज्ञानिक आधार है, ठीक उसी तरह मुद्राओं का भी वैज्ञानिक आधार है.
मुद्राओं को यदि सिंपल तरी़के से समझें, तो यह हाथों का योगा है. हमारे हाथों और उंगलियों में जो ऊर्जा है, उसमें संतुलन बनाकर हम स्वस्थ रह सकते हैं.
आयुर्वेद के मूल सिद्धांत पर ही आधारित है योग मुद्रा. आयुर्वेद की मानें, तो वात, पित्त और कफ़- इन तीनों तत्वों के संतुलन से ही शरीर स्वस्थ रहता है. इनमें असंतुलन का अर्थ है शरीर में रोग या अस्वस्थता का पनपना. जिस तरह से योग हमारे शरीर में ऊर्जा उत्पन्न करके तीनों तत्वों को संतुलित करता है, ठीक इसी तरह योग मुद्राएं भी काम करती हैं. हाथों में जो मैग्नेटिक वेव्स होती हैं, उनका प्रयोग करके हम वात, पित्त और कफ़ को संतुलित कर सकते हैं.
हम सभी जानते हैं कि हमारा शरीर 5 तत्वों से बना है- अग्नि, वायु, जल, पृथ्वी और ईथर. हमारे हाथों की उंगलियां इन तत्वों का प्रतीक हैं. इन तत्वों में असंतुलन से वात, पित्त और कफ़ भी असंतुलित हो जाते हैं और वही हमारी बीमारी व अस्वस्थ होने की वजह बनते हैं, क्योंकि इनमें असंतुलन होने पर हमारी रोगप्रतिरोधक क्षमता में कमी आ जाती है. इन तत्वों को संतुलित रखने का सबसे कारगर तरीक़ा है योग मुद्रा!
जो उंगली, जिस तत्व का प्रतिनिधित्व करती है, उसे जब अंगूठे के संपर्क में लाया जाता है, तो वो तत्व संतुलन में आ जाता है. दरअसल मुद्रा शरीर में चुंबकीय तरंगें (इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स) निर्मित करती है, जिससे शरीर में संबंधित तत्व संतुलित होता है.

मेडिटेशन: ध्यान की संपूर्ण अवस्था
हमारे मन में बहुत-सी शक्तियां छिपी होती हैं, लेकिन हम उन्हें पहचानते ही नहीं या फिर कभी प्रयास ही नहीं करते उनसे एकाकार होने का और मन में उतरकर उन शक्तियों को जागृत करने का. अपने मन को जानने या उससे एकाकार होने की प्रक्रिया ही है मेडिटेशन यानी ध्यान!
* यह शरीर के चक्रों को जागृत करके ऊर्जा प्रदान करता है.
* दरअसल हमारे शरीर का हर अंग किसी न किसी चक्र से संबंध रखता है. यदि किसी अंग में कोई समस्या आ जाए, तो संबंधित चक्र को एक्टिवेट करके उस अंग को संतुलित किया जा सकता है और उससे संबंधित बीमारी को ठीक किया जा सकता है.
* ध्यान की अवस्था में शरीर में हैप्पी हार्मोंस का रिसाव होता है.
* मेडिटेशन कई तरह के शारीरिक कष्टों का भी निवारण करता है.
* मेडिटेशन से इम्यूनिटी स्ट्रॉन्ग होती है.
* हाई बीपी, अनिद्रा, मांसपेशियों के दर्द, हार्ट डिसीज़, डायबिटीज़, ओबेसिटी और यहां तक कि कैंसर जैसी बीमारी को भी बेहतर तरी़के से मैनेज किया जा सकता है.

मस्तिष्क में रक्तसंचार बढ़ाता है और इम्यूनिटी बढ़ाता है मेडिटेशन…
कई तरह के शोधों से पता चला है कि मेडिटेशन से स्ट्रेस से संबंध रखनेवाले हार्मोन कार्टिसॉल का स्तर घटता है, पैरासिम्पथेटिक नर्वस सिस्टम सुकून की अवस्था का निर्माण करता है, जिससे मस्तिष्क के उस हिस्से में क्रियाशीलता बढ़ जाती है, जो हैप्पी हार्मोंस रिलीज़ करता है. हार्ट रेट संतुलित होती है, मस्तिष्क में रक्तसंचार बढ़ता है, स्टैमिना बढ़ता है, शरीर ऑक्सीजन का इस्तेमाल बेहतर ढंग से कर पाता है, सेल्स का निर्माण बेहतर होता है.

Meditation

वैदिक हीलिंग मंत्रा ऐप से पाएं हेल्दी लाइफ
वैदिक हीलिंग मंत्रा ऐप का आप अब तक लाभ ले रहे थे, इसी कड़ी में एक क़दम और आगे बढ़कर हमने काफ़ी गूढ़ व गहन अध्ययन, रिसर्च व विशेषज्ञों की मदद से ध्यान की विशिष्ट तकनीकों को भी जोड़ दिया है. जी हां, 48 बीमारियों से संबंधित 48 मंत्रों व मुद्राओं के साथ-साथ अब 48 रोगों के लिए गाइडेड मेडिटेशन टेक्नीक यानी ध्यान के तरीक़ों को भी ऐप में जोड़ दिया गया है. इस तरह आप मंत्र, मुद्रा व ध्यान विज्ञान की इस प्राचीन विद्या का लाभ उठाकर स्वस्थ-निरोगी जीवन पा सकते हैं. ये ऐप एंड्रॉयड और आइओएस दोनों के लिए उपलब्ध है. यह न भूलें कि स्वस्थ शरीर से अनमोल व क़ीमती कुछ भी नहीं!

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आंखें न स़िर्फ किसी के व्यक्तित्व का आईना होती हैं, बल्कि ये आपकी सेहत भी दर्शाती हैं, ऐसे में बेहद ज़रूरी है कि इन आंखों का ख़ास ख़्याल रखा जाए. आंखों को हेल्दी रखने के लिए भी योग (Yoga for Eyes) बहुत लाभकारी है, तो इन आसनों को अपनाएं और अपनी आंखों को हेल्दी बनाएं.

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त्राटक
* किसी बिंदु पर अपलक दृष्टि से देखना त्राटक कहलाता है.
* आमतौर पर आप मोमबत्ती की ज्योति पर त्राटक करें. कमरे में पंखा, कूलर आदि न चलाएं. सूर्योदय के 30 मिनट बाद तक व सूर्यास्त के 30 मिनट पूर्व से लेकर सूर्यास्त तक सूर्य पर भी त्राटक कर सकते हैं.
* त्राटक आपकी नेत्र ज्योति बढ़ाने में लाभकारी है.
* इन क्रियाओं के दौरान अपनी पलकों को बार-बार न झपकाएं. अगर आंख से पानी आता है, तो घबराए नहीं. धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाएं.

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जीह्व मुद्रा
* मुंह बंद करके जीभ को ऊपरी तालू से चिपकाएं.
* अब अपने मुंह को जितना खोल सकते हैं, खोलें.
* अपना पूरा ध्यान नाक के ऊपरी हिस्से पर लगाएं.
* सामान्य रूप से नाक से सांस लें और छोड़ें.
फ़ायदे
* रक्तसंचार को बेहतर बनाकर ब्लड प्रेशर को
कंट्रोल में रखता है.
* यह मुद्रा आंतरिक रूप से थायरॉइड और
पैराथायरॉइड ग्लैंड पर काम करती है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर की समस्या नहीं होती. इससे चेहरे का सौंदर्य भी बढ़ता है.
सिंह मुद्रा
* आराम से बैठ जाएं. दोनों हथेली को घुटनों पर दबाकर रखें और शरीर को थोड़ा आगे की तरफ़ लाएं.
* सांस छोड़ते हुए जीभ को इस तरह बाहर निकालें, जैसे ठोडी को टच कर रहे हों. मुंह खुला रखें. आंखों से आज्ञा चक्र को देखने का प्रयास करें.
* मुंह या नाक से सांस लें.
* चेहरे का सौंदर्य बढ़ाता है और आंखों की रौशनी भी बेहतर करता है.

 

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सायना नेहवाल, बेडमिंटन प्लेयर
संतुलित डायट, नियमित एक्सरसाइज़ और टफ ट्रेनिंग सेशन में भी सायना रोज़ाना सुबह और शाम को रिलैक्सेशन के लिए योगाभ्यास ज़रूर करती हैं. वो योग निद्रा करती हैं, जो एक तरह का योग मेडिटेशन है.

 

अक्सर हम सिरदर्द के लिए पेनकिलर्स का सहारा लेते हैं, जिनके अपने साइडइफेक्ट्स होते हैं. बेहतर है दर्दनिवारक दवाओं की बजाय आप योगासन करें और सिरदर्द से मुक्ति पाएं (Cure Migraine with Yoga).
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महासिर मुद्रा

* सुखासन में बैठ जाएं.
* मध्यमा, तर्जनी और अंगूठे के आगे के भाग आपस में मिलाएं.
* अनामिका को मोड़कर अंगूठे की जड़ के पास लगाएं. छोटी उंगली सीधी रहनी चाहिए.
* आंखें बंद रखें और रिलैक्स रहें.

  • यदि माइग्रेन है, तो भुजंगासन, ब्रह्म मुद्रा व महासिर मुद्रा करें.
  • सामान्य सिरदर्द के लिए अनुलोम-विलोम, शलभासन, मकरासन, बालासन व ताड़ासन
    भी करें.
चंद्रभेदन प्राणायाम
* पद्मासन या सुखासन में बैठ जाएं.
* बाईं नाक से सांस लें और दाईं नाक से सांस छोड़ें. इस प्रकार इसे करते रहें. आंखें बंद रखें.
* कमर व रीढ़ एकदम सीधी रखें.
* 2 मिनट तक कर सकते हैं.
युवराज सिंह, क्रिकेटर
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कैंसर से लड़ने के बाद युवराज सिंह पूरी तरह से योग की शरण में आ गए. उनका मानना है कि योग के ज़रिए वो बेहतर तरी़के से रिकवर कर सकते हैं. बीमारी के बाद दोबारा भारतीय क्रिकेट टीम में वापसी की कोशिश में जुटे युवराज सिंह ने फिटनेस के लिए योग को ज़रूरी बताते हुए कहा था, “मैं अपनी ऊर्जा को वापस पाने के लिए नियमित योग कर रहा हूं. शारीरिक व मानसिक तौर पर फिर से ऊर्जावान होना बहुत मुश्किल होता है. लेकिन मैंने चुनौतियों का सामना किया और मुश्किलों से बाहर भी आया, अब मेरा लक्ष्य है कि शत-प्रतिशत फिट होकर वापसी करना. अगले 5-6 साल मेरे करियर के बेहतरीन साल होंगे और मैं बहुत आशान्वित हूं अपने भविष्य को लेकर.”