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ब्लड डोनेशन से जुड़े मिथ्स…! (Myths About Blood Donation)

Myths About Blood Donation

ब्लड डोनेशन से जुड़े मिथ्स…! (Myths About Blood Donation)

रक्तदान को जीवनदान कहा जाता है, लेकिन आज भी इसे लेकर लोग बहुत उत्साहित नज़र नहीं आते, कारण- रक्तदान को लेकर बहुत-सी ग़लतफ़हमियां आज भी बनी हुई हैं. क्या हैं वो ग़लतफ़हमियां यह जानना ज़रूरी है, ताकि लोगों के मन से भ्रांतियां दूर हों और रक्तदान को लेकर वो अधिक उत्साहित हों.

1. रक्तदान आपको कमज़ोर बनाता है.
अक्सर लोग सोचते हैं कि रक्तदान करने के बाद उनमें कमज़ोरी आ जाएगी और उनकी रोगप्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाएगी.
लेकिन यह सोच ग़लत है. रक्तदान के बाद कुछ ही दिनों में रेड ब्लड सेल्स यानी लाल रक्त कण सामान्य संख्या में पहुंच जाते हैं. व्हाइट ब्लड सेल्स को थोड़ा ज़्यादा समय लगता है, लेकिन यदि शरीर को यह सिग्नल मिले कि वो ख़तरे में है, तो यह प्रक्रिया और भी तेज़ हो जाती है.

2. रक्तदान की प्रक्रिया काफ़ी तकलीफ़देह व दर्दनाक होती है.
जी नहीं, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. स़िर्फ सुई चुभनेभर का दर्द ज़रूर होता है, लेकिन रक्तदान के बाद आपके हाथ का वह भाग एक-दो दिन में ही सामान्य हो जाता है, जहां से सुई भीतर जाती है.

3. महिलाओं को ब्लड डोनेशन नहीं करना चाहिए.
अक्सर लोगों की यह धारणा होती है कि महिलाएं मासिक स्राव से गुज़रती हैं, इसलिए उन्हें रक्तदान नहीं करना चाहिए. कुछ लोग यह भी मानते हैं कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं का हीमोग्लोबिन स्तर कम होता है, इसलिए उन्हें रक्तदान से दूर रहना चाहिए, वरना वे अधिक कमज़ोर हो सकती हैं. हक़ीक़त यह है कि रक्तदान का लिंग से कोई लेना-देना नहीं होता. जिस तरह से पुरुषों पर रक्तदान असर करता है, महिलाओं को भी उसी तरह प्रभावित करता है. महिलाओं का हीमोग्लोबिन स्तर प्राकृतिक रूप से कम ही होता है, इसलिए उन्हें रक्तदान से कोई कमज़ोरी नहीं होगी. हां, यदि वे गर्भवती हों, स्तनपान करा रही हों, किसी बीमारी या समस्या के चलते वे एनिमिक हों, तो उन्हें रक्तदान नहीं करना चाहिए.

4. रक्तदान करनेवाले को जानलेवा इंफेक्शन्स का ख़तरा अधिक होता है.
रक्तदान के समय संक्रमण का डर भी बड़ी वजह है लोगों को रक्तदान से रोकने की. लेकिन रक्तदान के समय नई सुई का ही इस्तेमाल होता है और आप स्वयं भी जागरूक रहेंगे, तो ऐसा कोई ख़तरा नहीं होगा, इसलिए बेझिझक रक्तदान करें.

5. रक्तदान के बाद एक-दो दिन का आराम ज़रूरी होता है.
ऐसा कोई नियम नहीं है और न ही इसकी ज़रूरत है. आप रक्तदान के फ़ौरन बाद ही अपने काम पर लौट सकते हैं, बशर्ते आपने रक्तदान के बाद भरपूर पानी या जूस वगैरह पिया हो, ताकि शरीर में पानी की आपूर्ति हो जाए. हां, रक्तदान के बाद 24 घंटों तक अल्कोहल व तेज़ धूप से बचना चाहिए.

6. अगर आप स्मोक करते हैं, तो आप रक्तदान नहीं कर सकते.
भले ही आप स्मोकर हों, पर आप ब्लड डोनेट कर सकते हैं. हां, ब्लड डोनेशन के बाद तीन घंटे तक स्मोक न करें और डोनेशन से एक दिन पहले शराब का सेवन भी न करें.

7. रक्तदान बहुत ही समय लेनेवाली प्रक्रिया है.
ब्लड डोनेशन में 45 मिनट से एक घंटे तक का समय लगता है, जिसमें ब्लड डोनेशन की प्रक्रिया मात्र 10-12 मिनट की ही होती है, लेकिन फॉर्म भरना और डोनेशन के बाद रिफ्रेशमेंट वगैरह मिलाकर 45 मिनट से एक घंटे तक का ही समय लगता है.

8. दुबले-पतले लोग रक्तदान नहीं कर सकते.
आपका वज़न 50 किलो से अधिक हो और आपकी आयु 18 वर्ष या अधिक हो, तो आप रक्तदान कर सकते हैं.

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Blood Donation Myths

9. उच्च रक्तचापवाले रक्तदान नहीं कर सकते.
ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. यदि आपका रक्तचाप 180 और 100 है, तो भी आप रक्तदान कर सकते हैं. यह रक्तचाप हालांकि अधिक है, लेकिन यह आपको रक्तदान से नहीं रोक सकता. यहां तक कि रक्तचाप की दवाइयां भी इस प्रक्रिया में अवरोध नहीं बनतीं.

10. डायबिटीज़ से ग्रसित लोग रक्तदान नहीं कर सकते.
अगर आप इंसुलिन जैसे सप्लीमेंट्स लेते हैं, तो ही रक्तदान नहीं कर सकते, लेकिन यदि आप पिल्स लेते हैं और लाइफस्टाइल के ज़रिए डायबिटीज़ नियंत्रित करते हैं, तो आप रक्तदान ज़रूर कर सकते हैं. जिन्हें हृदय रोग हों और जो टाइप 2 डायबिटीज़ की वजह से ब्लड प्रेशर से ग्रसित हों, वे किन्हीं असाधारण परिस्थितियों में रक्तदान न कर पाएं, लेकिन बाक़ी कोई वजह नहीं जो आपको रक्तदान से रोके.

11. रक्तदान के बाद स्पोर्ट्स या फिज़िकल एक्टीविटीज़ नहीं कर सकते.
यह मात्र एक भ्रांति है. रक्तदान के एक घंटे बाद ही आपकी ज़िंदगी पूरी तरह से सामान्य हो जाती है. यदि आप खेल-कूद के शौकीन हैं या किसी स्पोर्ट्स एक्टीविटी में हिस्सा लेना चाहते हैं, तो जिस दिन ब्लड डोनेट किया, उसी दिन आप हिस्सा ले सकते हैं या मनपसंद खेल खेल सकते हैं.

12. दवा खानेवाला व्यक्ति रक्तदान नहीं कर सकता.
आमतौर पर लोगों की यही धारणा होती है कि यदि आप किसी दवा का सेवन कर रहे हैं, तो रक्तदान नहीं कर सकते, लेकिन सच तो यह है कि अधिकांश दवाएं आपको रक्तदान से नहीं रोकतीं. अगर आप सर्दी-ज़ुकाम की दवा, कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स, विटामिन या न्यूट्रिएंट सप्लीमेंट, पेनकिलर, पैरासिटामॉल, एंटैसिड या एंटी एलर्जिक दवाएं ले रहे हैं, तो आप रक्तदान कर सकते हैं. हां, अगर आप एंटीबायोटिक्स का सेवन कर रहे हैं, तो आपको कोर्स पूरा होने के बाद 72 घंटे इंतज़ार करना होगा. यदि आप किसी मानसिक समस्या की दवा ले रहे हैं, तो अपने सायकिएट्रिस्ट से पूछकर ही रक्तदान करें.

13. सीज़नल एलर्जी से ग्रसित लोग रक्तदान नहीं कर सकते.
सर्दी-ज़ुकाम जैसी सीज़नल एलर्जी आपको रक्तदान से नहीं रोकतीं. आप बेझिझक रक्तदान कर सकते हैं.

14. बहुत जल्दी-जल्दी रक्तदान नहीं करना चाहिए, वरना शरीर कमज़ोर हो जाएगा.
एक स्वस्थ व्यक्ति साल में चार बार रक्तदान कर सकता है. हर तीन महीने के अंतराल पर आप रक्तदान कर सकते हैं, इसलिए यह भ्रम मन से निकाल दें कि आप कमज़ोर हो जाएंगे.

15. हाई कोलेस्ट्रॉलवाले रक्तदान नहीं कर सकते.
यदि आप हाई कोलेस्ट्रॉल की दवाएं भी ले रहे हैं, तब भी रक्तदान कर सकते हैं.

16. रक्तदान से मोटापा बढ़ता है.
रक्तदान से वज़न नहीं बढ़ता, लेकिन कुछ लोग रक्तदान के बाद मानसिक तौर पर यह मान लेते हैं कि वो कमज़ोर हो गए और उन्हें अधिक पोषण की ज़रूरत है. ऐसे में वो अधिक खाने लगते हैं और एक्सरसाइज़ या शारीरिक गतिविधियां घटा देते हैं, जिससे उनका वज़न बढ़ सकता है. तो सीधे तौर पर यह मोटापे से नहीं जुड़ा है.

कौन रक्तदान नहीं कौन रक्तदान नहीं कर सकता?
  • 60 वर्ष से अधिक व 18 वर्ष से कम आयु के लोग रक्तदान नहीं कर सकते.
  • गर्भवती स्त्रियां.
  • स्तनपान करानेवाली मांएं.
  • अगर आपने व्रत रखा है, तो रक्तदान नहीं कर सकते, क्योंकि रक्तदान से चार घंटे पहले अच्छा भोजन करना बेहतर होता है.
  • अल्कोहल के सेवन के बाद.
  • इंसुलिन लेनेवाले डायबिटीज़ के रोगी.

– गीता शर्मा

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कंडोम से जुड़े 10 Interesting मिथ्स और फैक्ट्स (10 Interesting Myths And Facts Related To Condoms)

यह सच है कि आज भी समाज में सेक्स और सुरक्षित यौन संबंधों को लेकर ज़्यादा बात नहीं होती और न ही इसे अधिक तवज्जो दी जाती है, जिसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं और होते भी हैं. दरअसल, लोगों में आज भी कंडोम को लेकर बहुत-सी भ्रांतियां और ग़लतफ़हमियां हैं, जिन्हें दूर करना ज़रूरी है, ताकि आप सुरक्षित यौन संबंध बना सकें और कई तरह के यौन रोगों से बचे रहें.

Myths And Facts Related To Condoms

1. दो कंडोम एक साथ यूज़ करना ज़्यादा सुरक्षित रहता है.

ये सबसे बड़ी ग़लतफ़हमी है. एक साथ दो कंडोम का इस्तेमाल करने से आपको किसी भी तरह से अधिक सुरक्षा नहीं मिलेगी, बल्कि उससे असुविधा अधिक होगी. बेहतर होगा एक ही कंडोम यूज़ करें.

2. अगर मेरी पार्टनर कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स ले रही है, तो कंडोम यूज़ करना ज़रूरी नहीं.

कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स आपको अनचाहे गर्भ से कुछ हद तक सुरक्षा प्रदान तो करती हैं, लेकिन सेक्सुअली ट्रान्समिटेड डिसीज़ से नहीं. बेहतर होगा कि सुरक्षित यौन संबंधों के लिए कंडोम भी यूज़ करें.

3. कंडोम से मेरी सेंसिटिविटी कम हो जाती है और सेक्स सुख उतना अधिक नहीं मिल पाता.

यह महज़ एक ग़लत धारणा है. कंडोम से आपकी सेक्सुअल क्रिया अपेक्षाकृत लंबी चल सकती है. आजकल अलग-अलग फ्लेवर्स और प्रकार के कंडोम उपलब्ध हैं, आपको अपनी सुविधानुसार सही कंडोम सिलेक्ट करना है.

4. कंडोम आसानी से फट जाते हैं.

नहीं, आपको स़िर्फ उन्हें सही ढंग से पहनने की ज़रूरत है. पहनते व़क्त यह ध्यान रहे कि टिप पर कोई एयर बबल न हो.

5. कंडोम्स की एक्सपायरी डेट नहीं होती.

जी नहीं, उनकी भी एक्सपायरी डेट होती है. आप पैकेट पर तारीख़ चेक करें और एक्सपायर्ड कंडोम यूज़ न करें, क्योंकि उससे खुजली, जलन, रैशेज़ जैसी समस्या हो सकती है. वो फट सकता है, क्योंकि उसकी फ्लैक्सीबिलिटी और इलास्टिसिटी ख़त्म हो चुकी होती है.

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6. एक्स्ट्रा लुब्रिकेशन की ज़रूरत होती है कंडोम के साथ.

कंडोम्स लुब्रिकेटेड ही होते हैं, लेकिन यदि आप और लुब्रिकेशन चाहते हैं, तो वॉटर या सिलिकॉन बेस्ड लुब्रिकेंट्स ही यूज़ करें, क्योंकि ऑयल बेस्ड लुब्रिकेंट्स से कंडोम फट सकता है. दरअसल ऑयल में कंडोम का रबर घुलने लगता है, जिससे वो फट सकता है.

7. लैटेक्स एलर्जी आपको कंडोम के इस्तेमाल से रोकती है.

लैटेक्स एलर्जी आपको अनप्रोटेक्टेड सेक्स करने के लिए बाध्य नहीं कर सकती. नॉन लैटेक्स कंडोम भी बाज़ार में मिलते हैं. आप इनके बारे में पता करें और यूज़ करें.

8. ओरल या ऐनल सेक्स के लिए कंडोम यूज़ करना ज़रूरी नहीं.

बहुत-सी सेक्सुअल बीमारियां और इंफेक्शन्स ओरल व ऐनल सेक्स से भी फैलते हैं, इसलिए कंडोम को नज़रअंदाज़ न करें.

9. कंडोम ख़रीदने के लिए आपको 18 साल का होना ज़रूरी है.

आप किसी भी उम्र में कंडोम ख़रीद सकते हैं. इसके लिए उम्र की बंदिश नहीं है.

10. मैं स़िर्फ अच्छे और डीसेंट पार्टनर के साथ ही सेक्स करता/करती हूं, जिसमें कंडोम यूज़ करने की ज़रूरत नहीं.

आप किसी को देखकर या महज़ अनुमान लगाकर यह पता नहीं लगा सकते कि उसकी सेक्स लाइफ कैसी है और वो किन-किन लोगों के साथ सेक्स कर चुका है. बेहतर होगा यौन रोगों से सुरक्षित रहने के लिए कंडोम यूज़ करें और महिलाएं भी अपने पार्टनर से बेझिझक कंडोम यूज़ करने को कहें.

– योगिनी भारद्वाज

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ओरल सेक्स से जुड़े 5 मिथ्स और फैक्ट्स (Myths & Facts Related To Oral Sex)

Oral Sex

ओरल सेक्स से जुड़े 5 मिथ्स और फैक्ट्स

Oral Sex

मिथ 1: ओरल सेक्स करनेवाले वर्जिन नहीं रहते?

फैक्ट: सेक्स का नाम सुनते ही लोगों को लगता है कि सेक्स से जुड़ा कुछ भी करो, आपकी वर्जिनिटी चली जाएगी, जबकि ऐसा है नहीं. जब आपके सेक्सुअल ऑर्गन्स एक-दूसरे से मिलते हैं, तब वर्जिनिटी जाती है. दूसरे शब्दों में कहें, तो वर्जिनिटी के लिए फिज़िकल पेनिट्रेशन ज़रूरी है. एक्सपर्ट कहते हैं कि इससे आपकी वर्जिनिटी तो नहीं जाएगी, पर हां आप इमोशनल वर्जिनिटी ज़रूर खो सकते हैं.

मिथ 2: ओरल सेक्स हमेशा अनहाइजीनिक होता है.

फैक्ट: हाइजीन व्यक्ति विशेष पर निर्भर करता है. अगर आप और आपका पार्टनर साफ़-सफ़ाई का ध्यान रखते हैं, तो आपको यह सोचने की ज़रूरत नहीं है. यह प्रॉब्लम वहां आती है, जहां एक से ज़्यादा पार्टनर्स होते हैं. एक्सपर्ट कहते हैं कि अपने प्राइवेट पार्ट्स को हमेशा साफ़-सुथरा रखें. ओरल सेक्स से पहले और बाद में अपने प्राइवेट पार्ट्स को क्लीन करें. शाम को घर लौटने पर शावर लें. आपकी फ्रेशनेस आपके रिश्ते को भी फ्रेश रखेगी.

मिथ 3: ओरल सेक्स से कभी ऑर्गैज़्म नहीं मिलता.

फैक्ट: ओरल सेक्स फोरप्ले की तरह होता है, पर इसमें पूरी संभावना रहती है कि पार्टनर्स को ऑर्गैज़्म मिले. ख़ासतौर से महिलाओं के ऑर्गैज़्म के चांसेस इसमें ज़्यादा होते हैं. इसलिए ऐसा बिल्कुल न सोचें कि आप इससे वंचित रह जाएंगे, इसलिए इसे करने का कोई फ़ायदा नहीं.

मिथ 4: ओरल सेक्स से सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिसीज़ के चांसेज़ नहीं होते.

फैक्ट: ऐसा बिल्कुल भी नहीं है, क्योंकि ओरल सेक्स के दौरान एक-दूसरे के बॉडी फ्लूइड एक्सचेंज होते हैं, जो इंफेक्शन का कारण बन सकता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक इसमें इंफेक्शन की संभावना अधिक रहती है, इसलिए प्रिकॉशन लेना बहुत ज़रूरी है. इसमें सबसे ज़्यादा बुरी बात जो है, वो यह कि ये इंफेक्शन्स आपके चेहरे पर साफ़ दिखाई देते हैं यानी ओरल इंफेक्शन्स हो सकते हैं.

मिथ 5: ओरल सेक्स में कंडोम की ज़रूरत नहीं.

फैक्ट: यह बहुत आश्‍चर्य की बात है कि मार्केट में फ्लेवर्ड कंडोम की बहुत सारी रेंज आ गई है, बावजूद इसके लोगों को इसकी जानकारी है. एक्सपर्ट कहते हैं कि कंडोम के फ्लेवर्ड लुब्रिकेंट को लेकर ज़्यादातर महिलाओं में यह झिझक रहती है कि कहीं उसका लुब्रिकेंट उनकी सेहत के लिए नुक़सानदायक हो सकता है. जबकि उन्हें यह समझना चाहिए जो चीज़ ओरल सेक्स में सुरक्षा के लिहाज़ से ही बना हो, भला उसमें क्या प्रॉब्लम हो सकती है.

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