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इस अभिनेत्री ने बयां किया अपना दर्द, कहा मेरी किस्मत में नहीं है प्यार (This Bollywood Actress Said that Love is not in her Destiny)

बॉलीवुड की इस मशहूर अभिनेत्री को ऑनस्क्रीन तो बहुत प्यार मिला, लेकिन रीयल लाइफ में वो सच्चे प्यार के लिए तरसती रह गई. हम बात कर रहे हैं बॉलीवुड की जानी-मानी अभिनेत्री मनीषा कोइराला की. जी हां, मनीषा संजय दत्त की बायोपिक ‘संजू’ में उनकी मां नरगिस दत्त का किरदार निभाती हुई नज़र आएंगी. यह फिल्म 29 जून को रिलीज़ हो रही है. हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान मनीषा ने अपने दिल के दर्द को बयां करते हुए कहा था कि अब वो रोमांटिक प्यार का इंतज़ार नहीं कर रही हैं, क्योंकि उनकी किस्मत में शायद किसी मर्द का प्यार है ही नहीं.

बता दें कि मनीषा ने 19 जून, 2010 को नेपाली बिजनेसमैन सम्राट दहल से शादी की थी. हालांकि बाद में आपसी मतभेदों के चलते men 2012 में दोनों का तलाक हो गया. इससे पहले मनीषा का नाम अभिनेता नाना पाटेकर से जुड़ा था, हालांकि नाना पहले से ही शादीशुदा थे, इसलिए वो मनीषा से शादी नहीं कर सकते थे, लिहाज़ा दोनों का ब्रेकअप हो गया.

ग़ौरतलब है कि दिसंबर 2012 में मनीषा को पता चला था कि उन्हें ओवेरियन कैंसर है. जिसके बाद वो इलाज के लिए अमेरिका चली गईं.

न्यूयॉर्क में करीब 6 महीने तक उनका इलाज चला. कीमोथैरेपी ट्रीटमेंट की वजह से मनीषा के पूरे बाल झड़ गए थे. इस जानलेवा बीमारी को मात देने के बाद अब मनीषा फिल्म ‘संजू’ में कैंसर पेशेंट का किरदार निभा रही हैं. नरगिस दत्त का किरदार निभाने को लेकर मनीषा का मानना है कि उनके लिए उस दर्द और परेशानी को दोबारा जीना आसान नहीं था.

Kaala Movie Review: रिलीज़ हुई फिल्म काला, एक बार फिर चला रजनीकांत का जादू (Kaala Movie Review)

रजनीकांत इंडियन फिल्म इंडस्ट्री का एक ऐसा नाम है जो किसी पहचान का मोहताज नहीं है. अभिनेता रजनीकांत (Rajnikant) की इमेज सुपरहीरो की है और लोग उनकी हर फिल्म देखने के लिए बेताब रहते हैं, या यूं कह लें कि उनके चाहने वाले सिर्फ़ उनका दीदार करने के लिए सिनेमाघरों तक खींचे चले आते हैं. आज सिनेमाघरों में रजनीकांत की फिल्म ‘काला’ रिलीज़ हुई है और फिल्म में उनका काला अवतार दर्शकों को तेज़ी से सिनेमाघरों की ओर खींच रहा है.

फिल्म- काला
डायरेक्टर- पा. रंजीत
स्टार कास्ट- रजनीकांत, नाना पाटेकर, ईश्वरी राव, हुमा कुरैशी.
रेटिंग- 3/5

कहानी-  इस फिल्म की कहानी पूरी तरह से मुंबई के झोपड़पट्टी इलाके धारावी पर केंद्रित है. फिल्म में काला करिकलन (रजनीकांत) झोपड़पट्टी में रहनेवाले गरीबों का मसीहा, उनका हमदर्द और सुख-दुख का साथी है, लेकिन फिल्म में गैंगस्टर से नेता बने हरि बाबू (नाना पाटेकर) की नज़र इस इलाके पर है. वो इस ज़मीन को हथियाकर इसपर बड़ी-बड़ी इमारतें खड़ी करना चाहता है. जिसके बाद दोनों के बीच जंग छिड़ जाती है. दोनों के बीच की इस दिलचस्प जंग में जीत किसकी होती है यह देखने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी.

एक्टिंग- हमेशा की तरह इस फिल्म के ज़रिए भी रजनीकांत का जादू दर्शकों के सिर चढ़कर बोल रहा है. रजनीकांत का पुल के ऊपर बारिश में फाइट सीन काफ़ी जबरदस्त है. वैसे भी जिस फिल्म में रजनीकांत होते हैं,  फैंस बाकी एक्टर्स को देखना भूल जाते हैं, लेकिन बात करें नाना पाटेकर की तो उन्होंने भी काफ़ी अच्छी एक्टिंग की है. फिल्म में हुमा कुरैशी सिंगल मदर बनी हैं और वो काला की प्रेमिका का किरदार निभा रही हैं, लेकिन दोनों के बीच उम्र का ज़बरदस्त फ़ासला दिखाई दे रहा है. हालांकि ईश्वरी राव ने काला की पत्नी के रूप में बेहतरीन अभिनय किया है.

डायरेक्शन-  फिल्म के डायरेक्टर पा रंजीत ने फिल्म में रजनीकांत को नया रूप देने की कोशिश की है. हालांकि इस कहानी में कोई नयापन नहीं है, लेकिन मुंबई और धारावी को अच्छे से शूट किया गया है. बारिश में हो रही लड़ाई और नाना पाटेकर के साथ टकराव वाले सीन पर थिएटर तालियों से गूंज उठता है. फिल्म थोड़ी लंबी है और यह बात दर्शकों को परेशान कर सकती है.

अगर आप रजनीकांत और नाना पाटेकर के ज़बरदस्त फैंन हैं तो फिल्म काला ज़रूर देखें.

 

 

 

 

 

कंप्लीट एक्टर नाना पाटेकर को जन्मदिन की शुभकामनाएं! (happy birthday: nana patekar… a complete actor)

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  • शब्द कम पड़ जाते हैं… तारी़फें बेमानी सी लगने लगती हैं… जब इनका हुनर हम देखते हैं, तो आसमान की ऊंचाई भी कम लगने लगती है… कहने को तो ये अभिनेता कहे जाते हैं, लेकिन अभिनय ख़ुद को अभिभूत महसूस करता है, जब सामने नाना (nana patekar) जैसा कलाकार होता है. कला के क्षेत्र को इन्होंने और भी रोशन किया है, एक अद्भुत व बेमिसाल अभिनेता के तौर पर ही नहीं, बल्कि एक लाजवाब व्यक्तित्व के नाते भी.

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  • यूं तो नाना का फिल्मी सफ़र गमन मूवी से शुरू हुआ था, लेकिन फिल्म परिंदा में जो उन्होंने नकारात्मक भूमिका निभाई उसने इस उम्दा कलाकार को सबके बीच पहचान दिलाई. एक सायकॉटिक पर्सनैलिटी का रोल करके उन्होंने सबके रोंगटे खड़े कर दिए थे.
  • यही वजह है कि इस रोल के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार व सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला.
  • इसके बाद नाना ने फिल्म इंडस्ट्री में अपने अभिनय की जो छाप छोड़ी, वो आज भी सबके दिलों पर चस्पा है.

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  • अंकुश, क्रांतिवीर, यशवंत, राजनीति, तिरंगा, अब तक छप्पन जैसी फिल्मों में सबने उनको सराहा और वेलकम जैसी फिल्मों में कॉमेडी करके उन्होंने ख़ुद को एक कंप्लीट एक्टर के तौर पर साबित किया.
  • 1 जनवरी 1951 को जन्मे नाना को उनके जन्मदिन पर मेरी सहेली की ओर से ढेरों शुभकामनाएं!

– गीता शर्मा 

भारत-पाकिस्तान तनाव और कलाकारों पर दबाव (Reaction of celebs on uri attack)

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देश से बढ़कर कुछ भी नहीं…!!!

माना कि कला और फनकार को सीमाओं में नहीं बांधना चाहिए, लेकिन जब बात देश की सुरक्षा की हो, तो ये बातें बेमानी हो जाती हैं. दरअसल 18 सितंबर, 2016 में उरी (कश्मीर) में हुए आतंकी हमले और 18 भारतीय जवानों के शहीद हो जाने के बाद पूरा देश ग़मगीन हो गया था. उस पर दोबारा बारामूला में आतंकियों द्वारा हमले का दुस्साहस करना इस बात को उजागर करता है कि कश्मीर में हालात कितने संवेदनशील हो गए हैं. इसके बाद देश के प्रमुख शहरों व राज्यों को हाई अलर्ट कर दिया गया है. ऐसे माहौल में पाकिस्तानी कलाकारों को लेकर बैन व विवाद भी चल रहे हैं.
फिल्मी जगत दो हिस्सों में बंट गया है. एक वर्ग इन कलाकारों को सपोर्ट कर रहा है, तो वहीं दूसरा वर्ग देश को सर्वोपरि मानते हुए इनका
बहिष्कार. इसमें राजनीतिक पार्टियां, फिल्मी संस्थाएं व हस्तियां- हर किसी की अपनी-अपनी राय है.
वैसे असली विवाद तब उठा जब एक राजनीतिक पार्टी द्वारा पाकिस्तानी कलाकारों को देश छोड़कर जाने की धमकी दी गई और इस पर बालीवुड में काम करनेवाले कुछ पाकिस्तानी कलाकारों ने उरी हमले और आतंकवाद पर कुछ भी प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया. इससे माहौल और भी गरमा गया. उनके इस व्यवहार से जहां एक वर्ग आहत हुआ, वहीं दूसरे ने उन्हें सही ठहराया.
करण जौहर की फिल्म ऐ दिल है मुश्किल में पाकिस्तानी ऐक्टर फवाद ख़ान हैं, तो शाहरुख ख़ान की रईस में पाकिस्तानी ऐक्ट्रेस माहिरा ख़ान काम कर रही हैं. पाकिस्तानी कलाकारों के बैन को लेकर विवाद के चलते इन दोनों ही फिल्मों के प्रदर्शन पर भी असर होगा. ऐसे में फवाद खान के बिना कोई प्रतिक्रिया दिए पाकिस्तान चले जाने को लेकर नए सिरे से विवाद उठ गया है.
इस पर करण जौहर, महेश भट्ट, सलमान ख़ान, ओम पुरी, अनुराग कश्यप के बयानों ने आग में घी का काम किया. इस प्रकरण पर जहां नाना पाटेकर ने अपने बयान से हर भारतीय का दिल जीत लिया, वहीं जावेद अख़्तर ने भी पाकिस्तानी कलाकारों के व्यवहार पर सवालिया निशाना साधा.
आइए, जानें इस बैन/विवाद पर कुछ फिल्मी हस्तियों के विचार-

नाना पाटेकर

मेरे लिए देश सबसे पहले बाकी सब बाद में. देश के सामने कलाकारों की कोई क़ीमत नहीं. मैं ढाई साल तक सेना में रहा हूं, जानता हूं असली हीरो कौन है. पाकिस्तानी कलाकार मेरे लिए बाद की बात है. मेरे लिए सबसे पहले मेरा देश. हम
कलाकार देश के सामने खटमल की तरह बहुत छोटे हैं. जवानों से ब़ड़ा हीरोे कोई हो ही नहीं सकता दुनिया में. हम तो बहुत मामूली व नकली लोग हैं, इसलिए हम जो बोलते हैं, उस पर ध्यान मत दो.

जावेद अख़्तर

पाकिस्तानी कलाकारों की चुप्पी एक तरह का क़बूलनामा है कि पाकिस्तान हमले के लिए ज़िम्मेदार है. अगर पाकिस्तान कहता है कि उरी हमले के लिए वो ज़िम्मेदार नहीं है, तो पाकिस्तानी कलाकारों को भी इसकी निंदा करने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए.

सैफ अली ख़ान

हम कलाकार हैं, हम प्यार व शांति की बात करते हैं. लेकिन सरकार को क़ानून से जुड़े और किसे यहां काम करने की इजाज़त देनी है और किसे नहीं, ऐसे ़फैसले लेने होते हैं.

अभिजीत

सुपरस्टार उरी हमले की ख़बरें नहीं देखते. पाकिस्तानी भारतीयों को मार रहे हैं. वे पाकिस्तानी कलाकारों के साथ शूटिंग में व्यस्त हैं.

सुर्खियों में रहीं भारत-पाकिस्तान पर बनी अब तक की फिल्में

* साल 1973 की फिल्म हिंदुस्तान की क़सम (राजकुमार) चेतन आनंद द्वारा निर्देशित भारत-पाकिस्तान के साल 1971 में हुए युद्ध पर आधारित थी.
* जे. पी. दत्ता की बॉर्डर 1971 में हुई इंडो-पाक वॉर में राजस्थान के लांगेवाला पर केंद्रित थी.
साल 2000 में रिलीज़ विधु विनोद चोपड़ा की मिशन कश्मीर भारत-पाकिस्तान के कश्मीर विवाद व आतंकवाद से जुड़ी थी.
* एलओसी करगिल, लक्ष्य, हिंदुस्तान की क़सम (अजय देवगन), अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों आदि फिल्में भारत-पाक के रिश्तों पर आधारित थीं.

एक अनकहा पहलू यह भी…

कई भारतीय कलाकारों ने भी पाकिस्तानी फिल्मों में काम किया है, जिसमें शिला रमानी (अनोखी), ओम पुरी (एक्टर इन लॉ, जिसकी शूटिंग हाल ही में उन्होंने पूरी की और अगस्त में वे पाकिस्तान भी गए थे, फिल्म के प्रमोशन के लिए.) नसीरुद्दीन शाह (खुदा के लिए व ज़िंदा भाग), किरण खेर-शिल्पा शुक्ला (ख़ामोश पानी), विनोेद खन्ना, अरबाज़ ख़ान, ऋषिता भट्ट, प्रीति झंगियानी, किम शर्मा (गॉडफादर), नंदिता दास (रामचंद्र पाकिस्तानी), आकाशदीप सहगल-श्‍वेता तिवारी (सल्तनत)
उल्लेखनीय हैं.

वैसे तो हम सभी जानते हैं कि कलाकार कहीं भी काम करने के लिए आज़ाद हैं, उन्हें सरहदों में नहीं बांधना चाहिए, लेकिन देश व वक़्त की नज़ाकत को देखते हुए कलाकारों को भी कुछ अहम् फैसले लेने ही चाहिए.

Reaction of celebs on uri attack

– ऊषा गुप्ता

OMG! रजनीकांत के लिए ये क्या कह दिया नाना ने-Kabali

जहां एक ओर कबाली(Kabali) फिल्म करोड़ों का बिज़नेस कर रही है, वहीं दूसरी तरफ़ नाना पाटेकर इस फिल्म को लेकर कुछ और ही कह रहे हैं. एक इवेंट के दौरान जब नाना से कबाली फिल्म के बारे में पूछा गया एक सवाल तो नाना ने कुछ ऐसा कहा, जिसे सुनकर आप भी सोच में पड़ जाएंगे. देखें वीडियो.

जंगल-जंगल पता चला है…फिर लौटा मोगली…देखें वीडियो

the jungle book

यक़ीनन ये गाना आपको बचपन में ले जाएगा. मोगली, बघीरा, शेर ख़ान को भला कैसे भूला जा सकता है. एक बार फिर यादें ताज़ा होंगी इन सबकी हॉलीवुड फिल्म दी जंगल बुक के ज़रिए. गुलज़ार साहब का लिखा ये गीत 90 के दशक में ख़ासा पसंद किया गया था और अब दी जंगल बुक के हिंदी वर्जन के लिए इस गाने को दोबारा रिकॉर्ड किया गया है. इस गाने के संगीतकार हैं विशाल भारद्वाज. आप भी देखिए ये वीडियो और खो जाइए बचपन की यादों में.