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नवरात्रि स्पेशल- सिद्धियां प्रदान करनेवाली मां सिद्धिदात्री (Navratri Special- Devi Siddhidatri)

Navratri Devi maa Siddhidatri

Navratri Devi maa Siddhidatri

या देवी सर्वभूतेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

नवरात्रि के नौंवे दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा-आराधना का विधान है.
चार भुजाओंवाली देवी सिद्धिदात्री सिंह पर सवार श्‍वेत वस्त्र धारण कर कमल पुष्प पर विराजमान है.
शास्त्रों के अनुसार, अणिमा, महिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, गरिमा व वशित्व ये आठ सिद्धियां हैं.
मां अपने भक्तों को ये सभी सिद्धियां प्रदान करती हैं, इसलिए इन्हें सिद्धिदात्री देवी के रूप में पूजा जाता है.
नवरात्रि में नौ दिन का व्रत रखनेवालों को नौ कन्याओं को नौ देवियों के रूप में पूजना चाहिए.
साथ ही इन सभी को भोग, दान-दक्षिणा आदि देने से दुर्गा मां प्रसन्न होती हैं.
पूजा के बाद आरती व क्षमा प्रार्थना करें.
हवन में चढ़ाया गया प्रसाद सभी को श्रद्धापूर्वक बांटें.
हवन की अग्नि ठंडी हो जाने पर जल में विसर्जित कर दें.
यदि चाहें, तो भक्तों में भी बांट सकते हैं.
मान्यता अनुसार, इस भस्म से बीमारी, चिंता-परेशानी, ग्रह दोष आदि दूर होते हैं.

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बीज मंत्र

ऊँ ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे नमो नम:

ध्यान

वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
कमलस्थितां चतुर्भुजा सिद्धीदात्री यशस्वनीम्॥

स्वर्णावर्णा निर्वाणचक्रस्थितां नवम् दुर्गा त्रिनेत्राम्।
शख, चक्र, गदा, पदम, धरां सिद्धीदात्री भजेम्॥

पटाम्बर, परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥

प्रफुल्ल वदना पल्लवाधरां कातं कपोला पीनपयोधराम्।
कमनीयां लावण्यां श्रीणकटि निम्ननाभि नितम्बनीम्॥

स्तोत्र

कंचनाभा शखचक्रगदापद्मधरा मुकुटोज्वलो।
स्मेरमुखी शिवपत्नी सिध्दिदात्री नमोअस्तुते॥

पटाम्बर परिधानां नानालंकारं भूषिता।
नलिस्थितां नलनार्क्षी सिद्धीदात्री नमोअस्तुते॥

परमानंदमयी देवी परब्रह्म परमात्मा।
परमशक्ति, परमभक्ति, सिध्दिदात्री नमोअस्तुते॥

विश्वकर्ती, विश्वभती, विश्वहर्ती, विश्वप्रीता।
विश्व वार्चिता विश्वातीता सिध्दिदात्री नमोअस्तुते॥

भुक्तिमुक्तिकारिणी भक्तकष्टनिवारिणी।
भव सागर तारिणी सिध्दिदात्री नमोअस्तुते॥

धर्मार्थकाम प्रदायिनी महामोह विनाशिनी।
मोक्षदायिनी सिद्धीदायिनी सिध्दिदात्री नमोअस्तुते॥

कवच

ओंकारपातु शीर्षो मां ऐं बीजं मां हृदयो।
हीं बीजं सदापातु नभो, गुहो च पादयो॥
ललाट कर्णो श्रीं बीजपातु क्लीं बीजं मां नेत्र घ्राणो।
कपोल चिबुको हसौ पातु जगत्प्रसूत्यै मां सर्व वदनो॥

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नवरात्रि स्पेशल- शुभंकारी मां कालरात्रि (Navratri Special- Devi Kalratri)

Navratri Devi Maa Kalratri

या देवी सर्वभूतेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

दुर्गा पूजा के सातवें दिन देवी कालरात्रि की पूजा-आराधना का विधान है.
यूं तो मां कालरात्रि का विकराल रूप है, पर सदा शुभ फल देनेवाली होने के कारण इन्हें शुभंकारी कहा जाता है.
मां कालरात्रि को व्यापक रूप से देवी- महाकाली, भद्रकाली, भैरवी, चामुंडा, चंडी, दुर्गा के कई विनाशकारी रूपों में से एक माना जाता है.
इनके द्वारा राक्षस, भूत-पिशाच व नकारात्मक ऊर्जाओं का नाश होता है.

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा
वर्धन्मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयन्करि

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मां का वर्ण काला और बाल बिखरे हुए हैं.
गले में विद्युत की तरह चमकनेवाली माला है.
इनके तीन नेत्र हैं.
चार भुजाओंवाली मां के हाथों में लोहे का
कांटा व खड्ग है और दो हाथ वरमुद्रा व अभयमुद्रा के रूप में हैं.
इनके श्‍वास से अग्नि निकलती है और वाहन गर्दभ (गधा) है.
मां के हाथों में कटा हुआ सिर है, जिससे रक्त टपकता रहता है.
मां का यह रूप रिद्धि-सिद्धि प्रदान करनेवाला है.
शास्त्रों के अनुसार, दैत्यों के राजा रक्तबीज का वध करने के लिए मां दुर्गा ने अपने तेज से देवी कालरात्रि को उत्पन्न किया था.
इनकी पूजा-अर्चना करने से सभी तरह के पापों से मुक्ति मिलती है, साथ ही दुश्मनों का भी विनाश होता है.
मां कालरात्रि की पूजा करने से समस्त सिद्धियों की प्राप्ति होती रहती है.
देवी को गुड़ प्रिय है, इसलिए इन्हें भोग में गुड़ अर्पित करें और बाद में ब्राह्मण को दान कर दें.
इस दिन तरह-तरह के मिष्ठान देवी को अर्पित किए जाते हैं.
नवरात्र का यह दिन तंत्र-मंत्र के लिए उपयुक्त माना जाता है.
इस दिन तांत्रिकों द्वारा देवी को मदिरा का भोग भी लगाया जाता है.
सप्तमी की रात्रि को सिद्धियों की रात भी कहा जाता है.
देवी कालरात्रि को यंत्र-तंत्र-मंत्र की देवी भी कहा जाता है.
इनकी उपासना करने से मनुष्य भयमुक्त हो जाता है.
देवी की पूजा के बाद शिव व ब्रह्माजी की पूजा भी ज़रूर करनी चाहिए.
साथ ही नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का भी पाठ करें.

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ध्यान

करालवंदना धोरां मुक्तकेशी चतुर्भुजाम्।
कालरात्रिं करालिंका दिव्यां विद्युतमाला विभूषिताम॥

दिव्यं लौहवज्र खड्ग वामोघोर्ध्व कराम्बुजाम्।
अभयं वरदां चैव दक्षिणोध्वाघः पार्णिकाम् मम॥

महामेघ प्रभां श्यामां तक्षा चैव गर्दभारूढ़ा।
घोरदंश कारालास्यां पीनोन्नत पयोधराम्॥

सुख पप्रसन्न वदना स्मेरान्न सरोरूहाम्।
एवं सचियन्तयेत् कालरात्रिं सर्वकाम् समृध्दिदाम्॥

स्तोत्र

हीं कालरात्रि श्री कराली च क्लीं कल्याणी कलावती।
कालमाता कलिदर्पध्नी कमदीश कुपान्विता॥

कामबीजजपान्दा कमबीजस्वरूपिणी।
कुमतिघ्नी कुलीनर्तिनाशिनी कुल कामिनी॥

क्लीं हीं श्रीं मन्त्र्वर्णेन कालकण्टकघातिनी।
कृपामयी कृपाधारा कृपापारा कृपागमा॥

कवच

ऊँ क्लीं मे हृदयं पातु पादौ श्रीकालरात्रि।
ललाटे सततं पातु तुष्टग्रह निवारिणी॥

रसनां पातु कौमारी, भैरवी चक्षुषोर्भम।
कटौ पृष्ठे महेशानी, कर्णोशंकरभामिनी॥

वर्जितानी तु स्थानाभि यानि च कवचेन हि।
तानि सर्वाणि मे देवीसततंपातु स्तम्भिनी॥

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नवरात्रि स्पेशल- फलदायिनी मां कात्यायनी (Navratri Special- Devi Katyayani)

Navratri Devi Maa Katyayani

Navratri Devi Maa Katyayani

 

चन्द्रहासोज्जवलकरा थाईलवरवाहना
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी
या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

नवरात्रि के छठवें दिन मां कात्यायनी की आराधना की जाती है.
मां कात्यायनी फलदायिनी मानी गई हैं.
हाथ में फूल लेकर देवी को प्रणाम कर उपरोक्त मंत्रोच्चार करना चाहिए.
यदि देवी कात्यायनी की पूरी निष्ठा और भक्ति भाव से पूजा करते हैं, तो अर्थ व मोक्ष की प्राप्ति होती है.
चार भुजाधारी मां कात्यायनी सिंह पर सवार हैं.
इनके एक हाथ में तलवार और दूसरे में कमल है.
अन्य दोनों हाथ वरमुद्रा और अभयमुद्रा में हैं.
शास्त्रों के अनुसार, कात्यायन ऋषि के घर देवी ने पुत्री के रूप में जन्म लिया, इसलिए इनका नाम कात्यायनी पड़ा.
इसी रूप में देवी ने महिषासुर दानव का वध किया था, इसलिए मां कात्यायनी को महिषासुरमर्दिनी के नाम से भी जाना जाता है.
मां कात्यायनी ने महिषासुर से युद्ध के समय अपनी थकान को दूर करने के लिए शहदयुक्त पान का सेवन किया था, इसलिए मां कात्यायनी के पूजन में शहदयुक्त पान ज़रूर चढ़ाना चाहिए.
इस दिन लाल रंग विशेष रूप से शुभ माना जाता है, इसलिए लाल रंग का वस्त्र धारण करें.
मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना करने से जीवन की सारी परेशानियां व बाधाएं स्वतः ही दूर हो जाती हैं.
यदि किसी कन्या के शादी में अड़चनें व परेशानियां आ रही हो, तो उसे मां कात्यायनी का व्रत व पूजन करना चाहिए.
विद्यार्थियों को मां कात्यायनी की विशेष रूप से पूजा-उपासना करनी चाहिए. इससे शिक्षा के क्षेत्र में सफलता अवश्य प्राप्त होती है.

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ध्यान

वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा कात्यायनी यशस्वनीम्॥
स्वर्णाआज्ञा चक्र स्थितां षष्टम दुर्गा त्रिनेत्राम्।
वराभीत करां षगपदधरां कात्यायनसुतां भजामि॥
पटाम्बर परिधानां स्मेरमुखी नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रसन्नवदना पञ्वाधरां कांतकपोला तुंग कुचाम्।
कमनीयां लावण्यां त्रिवलीविभूषित निम्न नाभिम॥

स्तोत्र

कंचनाभा वराभयं पद्मधरा मुकटोज्जवलां।
स्मेरमुखीं शिवपत्नी कात्यायनेसुते नमोअस्तुते॥
पटाम्बर परिधानां नानालंकार भूषितां।
सिंहस्थितां पदमहस्तां कात्यायनसुते नमोअस्तुते॥
परमांवदमयी देवि परब्रह्म परमात्मा।
परमशक्ति, परमभक्ति,कात्यायनसुते नमोअस्तुते॥

कवच

कात्यायनी मुखं पातु कां स्वाहास्वरूपिणी।
ललाटे विजया पातु मालिनी नित्य सुन्दरी॥
कल्याणी हृदयं पातु जया भगमालिनी॥

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नवरात्रि स्पेशल- समस्त इच्छाओं को पूर्ण करनेवाली स्कन्दमाता (Navratri Special- Devi Skandmata)

Navratri Devi Skandmata worship pujan

Navratri Devi Skandmata worship pujan

 

दुर्गायै दुर्गपारायै सारायै सर्वकारिण्यै
ख्यात्यै तथैव कृष्णायै धूम्रायै सततं नमः
या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

नवरात्रि के पांचवें दिन अंबे मां के पांचवें स्वरूप स्कन्दमाता की
पूजा-आराधना की जाती है.
मां अपने भक्तों की सभी इच्छाओं को पूर्ण करती हैं.
मां को माहेश्‍वरी व गौरी के नाम से भी जाना जाता है.
महादेव शिव की वामिनी यानी पत्नी होने के कारण माहेश्‍वरी भी कहलाती हैं.
अपने गौर वर्ण के कारण गौरी के रूप में पूजी जाती है.
मां को अपने पुत्र स्कन्द (कार्तिकेय) से अत्यधिक प्रेम होने के कारण पुत्र के नाम से कहलाना पसंद करती हैं, इसलिए इन्हें स्कन्दमाता कहा जाता है.
अपने भक्तों के प्रति इनका वात्सल्य रूप प्रसिद्ध है.
कमल के आसन पर विराजमान होने के कारण इन्हें पद्यासना भी कहते हैं.
स्कन्दमाता अपने इस स्वरूप में स्कन्द के बालरूप को अपनी गोद में लेकर विराजमान रहती हैं.
इनकी चार भुजाएं हैं. दाईं ओर कमल का फूल व बाईं तरफ़ वरदमुद्रा है.
इनका वाहन सिंह है.

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सिंहासनगता नित्यं पद्याश्रितकरद्वया
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी

संतान की कामना करनेवाले भक्तगण इनकी विशेष रूप से पूजा करते हैं.
वे इस दिन लाल वस्त्र में लाल फूल, सुहाग की वस्तुएं- सिंदूर, लाल चूड़ी, महावर, लाल बिंदी, फल, चावल आदि बांधकर मां की गोद भरनी करते हैं.

ध्यान
वंदे वांछित कामार्थे चंद्रार्धकृतशेखराम्
सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा स्कंदमाता यशस्वनीम्
धवलवर्णा विशुद्ध चक्रस्थितों पंचम दुर्गा त्रिनेत्रम्
अभय पद्म युग्म करां दक्षिण उरू पुत्रधराम् भजेम्
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानांलकार भूषिताम्
मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल धारिणीम्
प्रफु्रल्ल वंदना पल्लवांधरा कांत कपोला पीन पयोधराम्
कमनीया लावण्या चारू त्रिवली नितम्बनीम्
कवच
ऐं बीजालिंका देवी पदयुग्मघरापरा। हृदयं पातु सा देवी कार्तिकेययुता॥
श्री हीं हुं देवी पर्वस्या पातु सर्वदा। सर्वांग में सदा पातु स्कन्धमाता पुत्रप्रदा॥
वाणंवपणमृते हुं फ्ट बीज समन्विता। उत्तरस्या तथाग्नेव वारुणे नैॠतेअवतु॥
इन्द्राणां भैरवी चैवासितांगी च संहारिणी। सर्वदा पातु मां देवी चान्यान्यासु हि दिक्षु वै॥

 

यदि आप कफ़, वात, पित्त जैसी बीमारियों से ग्रस्त हैं, तो आपको स्कंदमाता की विशेष रूप से पूजा करनी चाहिए.
मां को अलसी चढ़ाकर प्रसाद में रूप में ग्रहण करना चाहिए.
केले का भोग लगाना चाहिए, क्योंकि केला मां को प्रिय है.

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नवरात्रि स्पेशल- आदिदेवी कूष्मांडा (Navratri Special- Devi Kushmanda)

Navratri Devi Kushmanda worship

Navratri Devi Kushmanda worship

या देवी सर्वभूतेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

देवी कूष्मांडा अष्टभुजा से युक्त है,
इसलिए इन्हें अष्टभुजा भी कहा जाता है.
जिस तरह से ब्रह्माचारिणी व चंद्रघंटा देवी
की पूजा-अर्चना की जाती है,
उसी तरह से कूष्मांडा देवी की पूजा का विधान है.
इनकी पूजा करने से आयु, यश व आरोग्य की प्राप्ति होती है.

ध्यान मंत्र

वन्दे वांछित कामर्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्.
सिंहरूढा अष्टभुजा कुष्माण्डा यशस्वनीम्॥
भास्वर भानु निभां अनाहत स्थितां चतुर्थ दुर्गा त्रिनेत्राम्.
कमण्डलु चाप, बाण, पदमसुधाकलश चक्र गदा जपवटीधराम्॥
पटाम्बर परिधानां कमनीया कृदुहगस्या नानालंकार भूषिताम्.
मंजीर हार केयूर किंकिण रत्नकुण्डल मण्डिताम्.
प्रफुल्ल वदनां नारू चिकुकां कांत कपोलां तुंग कूचाम्.
कोलांगी स्मेरमुखीं क्षीणकटि निम्ननाभि नितम्बनीम् ॥

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स्त्रोत मंत्र

दुर्गतिनाशिनी त्वंहि दारिद्रादि विनाशिनीम्.
जयंदा धनदां कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥
जगन्माता जगतकत्री जगदाधार रूपणीम्.
चराचरेश्वरी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥
त्रैलोक्यसुंदरी त्वंहि दु:ख शोक निवारिणाम्.
परमानंदमयी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥

 

कवच मंत्र

हसरै मे शिर: पातु कूष्माण्डे भवनाशिनीम्.
हसलकरीं नेत्रथ, हसरौश्च ललाटकम्॥
कौमारी पातु सर्वगात्रे वाराही उत्तरे तथा.
पूर्वे पातु वैष्णवी इन्द्राणी दक्षिणे मम.
दिग्दिध सर्वत्रैव कूं बीजं सर्वदावतु॥

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नवरात्रि स्पेशल- कल्याणकारी व शांति की प्रतीक देवी चंद्रघंटा (Navratri Special- Devi Chandraghanta)

Navratri Puja Devi Chandraghanta

Navratri Puja Devi Chandraghanta

 

या देवी सर्वभूतेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

नवरात्रि के तीसरे दिन चंद्रघंटा देवी की पूजा की जाती है.
देवी का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है.
इनके मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चंद्र है,
इसलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है.
इनके दस हाथ हैं, जो कमल, धनुष-बाण, कमंडल,
त्रिशूल, गदा, खड्ग, अस्त्र-शस्त्र से विभूषित हैं.
चंद्रघंटा देवी की सवारी सिंह है.

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पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता

इस दिन सांवली रंगत की महिला को घर बुलाकर पूजा-अर्चना करें.
भोजन में दही-हलवा आदि खिलाएं.
कलश व मंदिर की घंटी भेंट करें.
इनकी आराधना करने से निर्भयता व सौम्यता दोनों ही प्राप्त होती है.
इनके घंटे की ध्वनि सदा अपने भक्तों की प्रेतबाधा से रक्षा करती है.

                           स्त्रोत मंत्र

ध्यान वन्दे वाच्छित लाभाय चन्द्रर्घकृत शेखराम।
सिंहारूढा दशभुजां चन्द्रघण्टा यशंस्वनीम्घ
कंचनाभां मणिपुर स्थितां तृतीयं दुर्गा त्रिनेत्राम।

खड्ग, गदा, त्रिशूल, चापशंर पद्म कमण्डलु माला वराभीतकराम्घ
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्यां नानालंकार भूषिताम।
मंजीर हार, केयूर, किंकिणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम्घ
प्रफुल्ल वंदना बिबाधारा कांत कपोलां तुग कुचाम।

कमनीयां लावाण्यां क्षीणकटिं नितम्बनीम्घ
स्तोत्र आपद्धद्धयी त्वंहि आधा शक्तिरू शुभा पराम।
अणिमादि सिद्धिदात्री चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यीहम्घ्
चन्द्रमुखी इष्ट दात्री इष्ट मंत्र स्वरूपणीम।

धनदात्री आनंददात्री चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यहम्घ
नानारूपधारिणी इच्छामयी ऐश्वर्यदायनीम।
सौभाग्यारोग्य दायिनी चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यहम्घ्
कवच रहस्यं श्रणु वक्ष्यामि शैवेशी कमलानने।

श्री चन्द्रघण्टास्य कवचं सर्वसिद्धि दायकम्घ
बिना न्यासं बिना विनियोगं बिना शापोद्धरं बिना होमं।
स्नान शौचादिकं नास्ति श्रद्धामात्रेण सिद्धिकमघ
कुशिष्याम कुटिलाय वंचकाय निन्दकाय च।

नवरात्रि स्पेशल- आज करें देवी शैलपुत्री की पूजा (Navratri Special- Devi Shailputri)

देवी शैलपुत्री की पूजा

देवी शैलपुत्री की पूजा

जय माता दी!

सभी को नवरात्रि की शुभकामनाएं!

आश्‍विन माह की शारदीय नवरात्र महानवरात्रि के रूप में मनाई जाती है. यह दशहरे से ठीक पहले होती है. नवरात्रि में नौ दिनों तक मां दुर्गा की नौ शक्तियों की पूजा-अर्चना की जाती है. मां के हर रूप का अपना विशेष महत्व है. उनके नौ रूप इस प्रकार हैं- शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री.
आज पहले दिन शैलपुत्री की पूजा-अर्चना का विधान है.
यह नवदुर्गा में प्रथम दुर्गा हैं. पवर्र्तराज हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा.
देवी शैलपुत्री के चरणों में गाय का घी अर्पित करने से भक्तों को सुख-समृद्धि व आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है. देवी की उपासना के मंत्र इस प्रकार हैं-

वन्दे वान्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्

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मां शैलपुत्री का वर्ण चंद्र समान है. यह शिव की अर्द्धांगिनी पार्वती का ही रूप हैं. इनका वाहन बैल है.
इस दिन ओम् शं शैलपुत्री देव्यैः नमः मंत्र का जाप करना चाहिए.
इससे मन में शांति मिलने के साथ-साथ सभी दुख-कष्ट दूर होते हैं.
इसके अलावा देवी के निम्न पाठ से भी आपका जीवन ख़ुशियों से भर जाएगा-

प्रथम दुर्गा त्वंहि भवसागरः तारणीम्
धन ऐश्‍वर्य दायिनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यम् ll
त्रिलोजननी त्वंहि परमानंद प्रदीयमान्
सौभाग्यरोग्य दायनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यहम् ll
चराचरेश्‍वरी त्वंहि महामोहः विनाशनि
मुक्ति भुक्ति दायनी शैलपुत्री प्रमनाम्यहम् ll

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नवरात्र स्पेशल: किस राशि वाले किस देवी की पूजा करें (Navratri 2017: Durga Puja According To Zodiac Sign)

किस राशि वाले किस देवी की पूजा करें
21 सितंबर 2017 से नवरात्र पर्व की शुरुआत हो रही है. नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में माता के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है और उन्हें प्रसन्न करने के लिए विभिन्न साधनाएं भी की जाती हैं. इस नवरात्र में नवरात्रि में क्या है घट स्थापना का शुभ मुहूर्त, सही पूजा विधि, व्रत-उपवास आदि के बारे में संपूर्ण जानकारी दे रहे हैं पं. राजेंद्र जी.
* इस बार नवरात्र में घट स्थापना मुहूर्त प्रात: 6.18 से 8.20 मिनट तक है.
* हवन स़िर्फ और स़िर्फ अष्टमी को ही करें. 28 सितंबर को अष्टमी है.
* नवरात्रि में सत्वगुण का प्रभाव बढ़ता है, तमोगुण का प्रभाव घटता है.
किस राशि वाले किस देवी की पूजा करें
 * नवरात्रि में इन पांच में से कोई भी एक चीज़ घर पर लाने से समस्याएं दूर होती हैं:  
1) नवरात्रि में किसी शुभ मुहूर्त पर तुलसी का पौधा घर लाकर उसे गमले में रोपें. सुबह-शाम इस पौधे के पास दीपक जलाएं तथा इसे जल से सींचें. इससे मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है. धन तथा परिवार संबंधी सभी समस्याओं का निवारण होता है.
2) शुभ मुहूर्त में केले के पौधे को घर लाएं. उसे गमले में लगाएं, नौ दिन तक जल चढ़ाएं. गुरुवार पूजा करके जड़ में थोड़ा कच्चा दूध भी चढ़ाएं. ऐसा करने से धन की आवक शुरू हो जाती है.
3) शुभ मुहूर्त में बड़ का पत्ता तोड़ें तथा उस पर ताज़ी हल्दी से स्वस्तिक बनाकर घर के पूजा स्थल में रख लें. ऐसा करने से आपके सारे काम बनने लगेंगे.
4) भगवान शिव को अतिप्रिय धतूरा मां काली की पूजा में भी काम आता है. नवरात्रि में धतूरे की जड़ को शुभ मुहूर्त में घर में स्थापित कर मां के बीजमंत्र क्रीं का जाप करें. ऐसा करने से समस्याएं कम होने लगती हैं.
5) नवरात्रि में किसी भी शुभ मुहूर्त पर शंखपुष्पी की जड़ लाएं. इस जड़ को चांदी की डिब्बी में रखकर घर की तिजोरी या अलमारी में रख दें. ऐसा करने से कभी पैसे की कमी नहीं होती है.

 

किस राशि वाले किस देवी की पूजा करें: 
1) मेष: स्कंदमाता की पूजा करें, दुर्गा चालीसा का पाठ करें
2) वृषभ: महागौरी स्वरूप की पूजा करें, ललिता सहस्रनाम का पाठ करें
3) मिथुन: ब्रह्मचारिणी की पूजा करें, दुर्गा द्वादश का पाठ करें
4) कर्क: शैलपुत्री की पूजा करें, लक्ष्मी सहस्रनाम का पाठ करें
5) सिंह: कुष्मांडा देवी की आराधना करें, दुर्गा मंत्र का जाप करें
6) कन्या: ब्रह्मचारिणी की उपासना करें, लक्ष्मी मंत्र का जाप करें
7) तुला: महागौरी की पूजा करें, काली चालीसा पढ़ें
8) वृश्‍चिक: स्कंदमाता का ध्यान करें, दुर्गा सप्तशती पढ़ें
9) धनु: चंद्रघंटा की आराधना करें, दुर्गा कवच का पाठ करें
10) मकर: मां काली की उपासना करें, ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे मंत्र का जाप करें
11) कुंभ: मां कालरात्रि की आराधना करें, सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का जाप करें
12) मीन: चंद्रघंटा की पूजा करें, हल्दी की माला से बगलामुखी मंत्र का जाप करें
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नवरात्र स्पेशल: 10 सरल उपाय नवरात्र में पूरी करते हैं मनचाही मुराद (Navratri 2017: 10 Special Tips For Navratri Puja)

Special Tips, Navratri Puja

ऐसी मान्यता है कि नवरात्र के लिए किए गए उपाय जल्दी ही शुभ फल प्रदान करते हैं. धन, संतान, प्रमोशन, विवाह, रुके हुए कार्य… कई मनोकामनाएं इन 9 दिनों में किए गए उपायों से पूरी हो सकती हैं. अगर आपके मन में भी कोई मनोकामना है, तो पं. राजेंद्र जी के बताए गए उपायों से आपकी मनोकामना अवश्य पूरी होगी.

नवरात्र में मां दुर्गा की कृपा प्राप्ति के लिए 10 सरल उपाय: देखें वीडियो

* कर्जमुक्ति के लिए करें ये उपाय
यदि लाख कोशिशों के बाद भी आपका कर्ज से पीछा नहीं छूट रहा, तो नवरात्र में सूर्य डूबने के पश्‍चात 21 गुलाब के फूल, सवा किलो साबूत लाल मसूर लाल कपड़े में बांधकर माता के सामने रखकर घी का दीपक जलाकर रोज़ाना 108 बार ये मंत्र पढ़ें- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
पूजा समाप्त होने के बाद अपने ऊपर सात बार उतारें व किसी को भी दान कर दें. माता से कर्ज मुक्ति की प्रार्थना करें. ऐसा करने से आपको अवश्य कर्ज से मुक्ति मिलेगी.

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* मनोकामना पूरी करने के लिए करें ये उपाय
पूरे नौ दिन अखंड दीपक व घट के सामने बैठकर सिद्ध कुजिका स्त्रोत का पाठ करें. हर दिन एक-एक गुलाब का फूल बढ़ाते जाएं. नौवें दिन नौ गुलाब अर्पण कर मां से प्रार्थना करें. ऐसा करने से मनोकामना पूरी होती है.

Special Tips, Navratri Puja

* विवाह के लिए करें ये उपाय
अर्गला स्तोत्र व कीलकम् का पाठ रोज़ाना माता के सामने करें व हलवा का भोग चढ़ाकर एक कमल का पुष्प अर्पण करें. ऐसा करने से आपकी विवाह की चाहत पूरी हो जाएगी. श्रद्धा और विश्‍वास से प्रार्थना करने से मनोकामना ज़रूर पूरी होती है.

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* धनवृद्धि के लिए करें ये उपाय
पूरी नवरात्रि में लाल आसन पर बैठकर संध्याकाल में जो जातक विष्णु सहस्रनाम तथा ललिता सहस्रनाम का पाठ करता है और रोज़ाना एक कमल का पुष्प माता को अर्पण करता है. सात्विक रहता है, आचरण ठीक रखता है, कलह नहीं करता… ये सारे पालन करते हुए ऊपर दिया उपाय जो भी जातक करता है, मां उस पर प्रसन्न होकर धन वर्षा अवश्य करती है और उसके कष्टों को हरती है.

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नवरात्रि पर विशेष: आरती… मां अम्बे की (Navratri Special: Ma Ambe Ki Aarti)

ma durga aarti
नवरात्रि पर विशेष: आरती... मां अम्बे की
नवरात्रि पर विशेष: आरती… मां अम्बे की (Navratri Special: Ma Ambe Ki Aarti)

मां अम्बे की आरती

ॐ जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी
तुम को निशदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवरी. ॐ जय अम्बे…

मांग सिंदूर विराजत टीको मृगमद को
उज्जवल से दो नैना चन्द्र बदन नीको. ॐ जय अम्बे…

कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजे
रक्त पुष्प दल माला कंठन पर साजे. ॐ जय अम्बे…

केहरि वाहन राजत खड़्ग खप्पर धारी
सुर-नर मुनिजन सेवत तिनके दुखहारी. ॐ जय अम्बे…

कानन कुण्डल शोभित नासग्रे मोती
कोटिक चन्द्र दिवाकर राजत सम ज्योति. ॐ जय अम्बे…

शुम्भ निशुम्भ विडारे महिषासुर धाती
धूम्र विलोचन नैना निशदिन मदमाती. ॐ जय अम्बे…

चण्ड – मुंड संहारे सोणित बीज हरे
मधु कैटभ दोऊ मारे सुर भयहीन करे.ॐ जय अम्बे…

ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमला रानी
आगम निगम बखानी तुम शिव पटरानी. ॐ जय अम्बे…

चौसठ योगिनी मंगल गावत नृत्य करत भैरु
बाजत ताल मृदंगा और बाजत डमरु. ॐ जय अम्बे…

तुम ही जग की माता तुम ही हो भर्ता
भक्तन की दुःख हरता सुख सम्पत्ति कर्ताॐ जय अम्बे…

भुजा चार अति शोभित वर मुद्रा धारी
मन वांछित फ़ल पावत सेवत नर-नारी. ॐ जय अम्बे…

कंचन थार विराजत अगर कपूर बाती
श्रीमालकेतु में राजत कोटि रत्न ज्योति. ॐ जय अम्बे…

श्री अम्बे जी की आरती जो कोई नर गावे
कहत शिवानंद स्वामी सुख संपत्ति पावे. ॐ जय अम्बे…

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