Navratri

दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत का निधन हुए 16 महीने बीत गए हैं, लेकिन आज भी उनके परिवारवाले, करीबी दोस्त और उनके चाहनेवाले उन्हें भूल नहीं पाए हैं. नवरात्रि के आठवें दिन बहन श्वेता सिंह ने दिवंगत भाई सुशांत सिंह राजपूत को याद किया. श्वेता सिंह ने सोशल मीडिया पर दिवंगत भाई की तस्वीर शेयर की और साथ में लिखा भावुक कर देने वाला नोट.

नवरात्रि के आठवें दिन दिवंगत एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की बहन श्वेता सिंह कीर्ति ने अपने भाई को याद किया. श्वेता सिंह ने अपने दिवंगत भाई को याद करते हुए सोशल मीडिया पर सुशांत सिंह राजपूत की हंसते हुए एक प्यारी तस्वीर शेयर की है. इस तस्वीर को साझा करते हुए बहन श्वेता ने साथ में एक नोट भी लिखा है.

नोट में श्वेता ने लिखा, ‘सुशांत पर लोगों को बहुत गर्व है और वे प्रार्थना करती हैं कि उनकी मौत के पीछे छिपा हुआ सच जल्द-से-जल्द सामने आए.’ अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत 14 जून, 2020 को अपने मुंबई स्थित घर में मृत मिले थे.

आज 13 अक्टूबर को नवरात्रि के आठवें दिन के उपलक्ष्य में श्वेता सिंह ने सोशल मीडिया पर दिवगंत अभिनेता की थ्रोबैक फोटो शेयर की. साथ श्वेता ने भाई सुशांत के बारे में दिल को पिघला देनेवाला एक नोट लिखते हुए कहा है कि उनके परिवार को उनपर गर्व है. श्वेता ने लिखा, “आप थे, आप हो और आप हमेशा हमारा गर्व बने रहोगे! देखो, आपने सभी लोगों के दिल में कितना प्यार जगाया है… वे आपके लिए संघर्ष कर रहे हैं! मैं मां दुर्गा से प्रार्थना करती हूं कि मां प्लीज सच को सामने आने दें. ताकि  हमारे दुखी दिलों को कुछ शांति मिले #PreciousSushant @

बता दें कि 14  जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत अपने मुंबई स्थित अपार्टमेंट में मृत पाए गए थे. मुंबई पुलिस ने शुरूआती जांच-पड़ताल के बाद इस आत्महत्या का मामला बताया था. लेकिन पटना में अभिनेता के पिता केके सिंह ने रिया चक्रवर्ती के खिलाफ मामला दर्ज कराया, जो अभिनेता के साथ रिलेशनशिप में थी.

फोटो सोर्स: इंस्टाग्राम

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या देवी सर्वभूतेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

मां की श्रद्धापूर्वक पूजा, ध्यान-आराधना करने से सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं. अष्टमी के दिन महिलाएं अपने सुहाग के लिए मां को चुनरी भेंट करती हैं.

Devi Mahagauri

अष्टम नवरात्रि- एस्ट्रोलॉजर मनीषा कौशिक के अनुसार

मां दुर्गा का अष्टम स्वरूप है मां महागौरी.
गौर वर्ण एवं श्वेत युक्त आभूषणों के कारण इन्हें श्वेतांबरी भी कहा जाता है.
मां के दो हाथों में त्रिशूल व डमरू सुशोभित है.
बैल पर सवार मां अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं.

पूजा विधि

मां को सफ़ेद और लाल रंग के वस्त्र अर्पित करें.

मां गौरी को पांच प्रकार के मिष्ठान एवं फल का भोग लगाएं.

मां को नारियल का भोग अवश्य लगाएं.

सौभाग्य प्राप्ति के लिए कन्या पूजन करने का विशेष महत्व है.

उपाय
आज मां के लिए भोजन बनाते समय गायत्री मंत्र का जाप करें या उसे सुनते रहें, इससे घर में तृप्ति बढ़ेगी व पूजन अमृत से कम नहीं होगा.

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ध्यान

वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा महागौरी यशस्वनीम्॥

पूर्णन्दु निभां गौरी सोमचक्रस्थितां अष्टमं महागौरी त्रिनेत्राम्।
वराभीतिकरां त्रिशूल डमरूधरां महागौरी भजेम्॥

पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर, हार, केयूर किंकिणी रत्नकुण्डल मण्डिताम्

प्रफुल्ल वंदना पल्ल्वाधरां कातं कपोलां त्रैलोक्य मोहनम्।
कमनीया लावण्यां मृणांल चंदनगंधलिप्ताम्॥

Devi Mahagauri

स्तोत्र

सर्वसंकट हंत्री त्वंहि धन ऐश्वर्य प्रदायनीम्।
ज्ञानदा चतुर्वेदमयी महागौरी प्रणमाभ्यहम्॥

सुख शान्तिदात्री धन धान्य प्रदीयनीम्।
डमरूवाद्य प्रिया अद्या महागौरी प्रणमाभ्यहम्॥

त्रैलोक्यमंगल त्वंहि तापत्रय हारिणीम्।
वददं चैतन्यमयी महागौरी प्रणमाम्यहम्॥

कवच

ओंकारः पातु शीर्षो मां, हीं बीजं मां, हृदयो।
क्लीं बीजं सदापातु नभो गृहो च पादयो॥

ललाटं कर्णो हुं बीजं पातु महागौरी मां नेत्रं घ्राणो।
कपोत चिबुको फट् पातु स्वाहा मा सर्ववदनो॥

महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।

Devi Mahagauri

शारदीय नवरात्रि के चमत्कारी उपाय

डॉ. मधुराज वास्तु गुरु का मानना है कि गुप्त नवरात्रि में मनचाही सफलता के लिए विशेष उपाय होते हैं.

दांपत्य सुख के लिए उपाय
यदि जीवनसाथी से अनबन होती रहती है, तो नवरात्रि में प्रतिदिन नीचे लिखी चौपाई को पढ़ते हुए 108 बार अग्नि में घी से आहुतियां दें. अब हर रोज़ सुबह उठकर पूजा के समय इस चौपाई को 21 बार पढ़ें. यदि संभव हो, तो अपने जीवनसाथी से भी इस चौपाई का जाप करने के लिए कहें-
चौपाई
सब नर करहिं परस्पर प्रीति।चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीति।

धन लाभ के लिए उपाय
नवरात्रि के समय कम से कम 5 दिन सभी कार्यों से निवृत्त होकर उत्तर दिशा की ओर मुख करके पीले आसन पर बैठ जाएं. अपने सामने तेल के 9 दीपक जला लें. ये दीपक साधनाकाल तक जलते रहने चाहिए. दीपक के सामने लाल चावल (चावल को रंग लें) की एक ढेरी बनाएं. फिर उस पर एक श्रीयंत्र रखकर उसका कुंकुम, फूल, धूप तथा दीप से पूजन करें. उसके बाद एक प्लेट पर स्वस्तिक बनाकर उसे अपने सामने रखकर उसका पूजन करें. श्रीयंत्र को अपने पूजा स्थल पर स्थापित कर लें और शेष सामग्री को नदी में प्रवाहित कर दें. इस प्रयोग से आपको अचानक धन लाभ होने के योग बन सकते हैं.

इंटरव्यू में सफलता का उपाय
नवरात्रि में मंगल, गुरु और शुक्र के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद सफ़ेद रंग का सूती आसन बिछाकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके उस पर बैठ जाएं. अब अपने सामने पीला कपड़ा बिछाकर उस पर 108 दानों वाली स्फटिक की माला रख दें और इस पर केसर व इत्र छिड़ककर इसका पूजन करें. इसके बाद धूप, दीप और अगरबत्ती दिखाकर मंत्र का 31 बार उच्चारण करें. इस प्रकार 11 दिन तक करने से वह माला सिद्ध हो जाएगी. जब भी किसी इंटरव्यू में जाएं, तो इस माला को पहनकर जाएं. ये उपाय करने से इंटरव्यू में सफलता की संभावना बढ़ सकती है.
मंत्र
ऊँ ह्लीं वाग्वादिनी भगवती मम कार्य सिद्धि कुरु कुरु फट् स्वाहा।

Devi Mahagauri

मां अम्बे की आरती

ॐ जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी
तुम को निशदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवरी. ॐ जय अम्बे…

मांग सिंदूर विराजत टीको मृगमद को
उज्जवल से दो नैना चन्द्र बदन नीको. ॐ जय अम्बे…

कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजे
रक्त पुष्प दल माला कंठन पर साजे. ॐ जय अम्बे…

केहरि वाहन राजत खड़्ग खप्पर धारी
सुर-नर मुनिजन सेवत तिनके दुखहारी. ॐ जय अम्बे…

कानन कुण्डल शोभित नासग्रे मोती
कोटिक चन्द्र दिवाकर राजत सम ज्योति. ॐ जय अम्बे…

शुम्भ निशुम्भ विडारे महिषासुर धाती
धूम्र विलोचन नैना निशदिन मदमाती. ॐ जय अम्बे…

चण्ड – मुंड संहारे सोणित बीज हरे
मधु कैटभ दोऊ मारे सुर भयहीन करे.ॐ जय अम्बे…

ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमला रानी
आगम निगम बखानी तुम शिव पटरानी. ॐ जय अम्बे…

चौसठ योगिनी मंगल गावत नृत्य करत भैरु
बाजत ताल मृदंगा और बाजत डमरु. ॐ जय अम्बे…

तुम ही जग की माता तुम ही हो भर्ता
भक्तन की दुःख हरता सुख सम्पत्ति कर्ताॐ जय अम्बे…

भुजा चार अति शोभित वर मुद्रा धारी
मन वांछित फ़ल पावत सेवत नर-नारी. ॐ जय अम्बे…

कंचन थार विराजत अगर कपूर बाती
श्रीमालकेतु में राजत कोटि रत्न ज्योति. ॐ जय अम्बे…

श्री अम्बे जी की आरती जो कोई नर गावे
कहत शिवानंद स्वामी सुख संपत्ति पावे. ॐ जय अम्बे…

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दुर्गा पूजा के सातवें दिन देवी कालरात्रि की पूजा-आराधना का विधान है.
यूं तो मां कालरात्रि का विकराल रूप है, पर सदा शुभ फल देनेवाली होने के कारण इन्हें शुभंकारी कहा जाता है.
मां कालरात्रि को व्यापक रूप से देवी- महाकाली, भद्रकाली, भैरवी, चामुंडा, चंडी, दुर्गा के कई विनाशकारी रूपों में से एक माना जाता है.
इनके द्वारा राक्षस, भूत-पिशाच व नकारात्मक ऊर्जाओं का नाश होता है.

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा
वर्धन्मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयन्करि

मां का वर्ण काला और बाल बिखरे हुए हैं.
गले में विद्युत की तरह चमकनेवाली माला है.
इनके तीन नेत्र हैं.
चार भुजाओंवाली मां के हाथों में लोहे का
कांटा व खड्ग है और दो हाथ वरमुद्रा व अभयमुद्रा के रूप में हैं.
इनके श्‍वास से अग्नि निकलती है और वाहन गर्दभ (गधा) है.
मां के हाथों में कटा हुआ सिर है, जिससे रक्त टपकता रहता है.
मां का यह रूप रिद्धि-सिद्धि प्रदान करनेवाला है.
शास्त्रों के अनुसार, दैत्यों के राजा रक्तबीज का वध करने के लिए मां दुर्गा ने अपने तेज से देवी कालरात्रि को उत्पन्न किया था.
इनकी पूजा-अर्चना करने से सभी तरह के पापों से मुक्ति मिलती है, साथ ही दुश्मनों का भी विनाश होता है.
मां कालरात्रि की पूजा करने से समस्त सिद्धियों की प्राप्ति होती रहती है.
देवी को गुड़ प्रिय है, इसलिए इन्हें भोग में गुड़ अर्पित करें और बाद में ब्राह्मण को दान कर दें.
इस दिन तरह-तरह के मिष्ठान देवी को अर्पित किए जाते हैं.
नवरात्र का यह दिन तंत्र-मंत्र के लिए उपयुक्त माना जाता है.
इस दिन तांत्रिकों द्वारा देवी को मदिरा का भोग भी लगाया जाता है.
सप्तमी की रात्रि को सिद्धियों की रात भी कहा जाता है.
देवी कालरात्रि को यंत्र-तंत्र-मंत्र की देवी भी कहा जाता है.
इनकी उपासना करने से मनुष्य भयमुक्त हो जाता है.
देवी की पूजा के बाद शिव व ब्रह्माजी की पूजा भी ज़रूर करनी चाहिए.
साथ ही नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का भी पाठ करें.

ध्यान

करालवंदना धोरां मुक्तकेशी चतुर्भुजाम्।
कालरात्रिं करालिंका दिव्यां विद्युतमाला विभूषिताम॥

दिव्यं लौहवज्र खड्ग वामोघोर्ध्व कराम्बुजाम्।
अभयं वरदां चैव दक्षिणोध्वाघः पार्णिकाम् मम॥

महामेघ प्रभां श्यामां तक्षा चैव गर्दभारूढ़ा।
घोरदंश कारालास्यां पीनोन्नत पयोधराम्॥

सुख पप्रसन्न वदना स्मेरान्न सरोरूहाम्।
एवं सचियन्तयेत् कालरात्रिं सर्वकाम् समृध्दिदाम्॥

स्तोत्र

हीं कालरात्रि श्री कराली च क्लीं कल्याणी कलावती।
कालमाता कलिदर्पध्नी कमदीश कुपान्विता॥

कामबीजजपान्दा कमबीजस्वरूपिणी।
कुमतिघ्नी कुलीनर्तिनाशिनी कुल कामिनी॥

क्लीं हीं श्रीं मन्त्र्वर्णेन कालकण्टकघातिनी।
कृपामयी कृपाधारा कृपापारा कृपागमा॥

कवच

ऊँ क्लीं मे हृदयं पातु पादौ श्रीकालरात्रि।
ललाटे सततं पातु तुष्टग्रह निवारिणी॥

रसनां पातु कौमारी, भैरवी चक्षुषोर्भम।
कटौ पृष्ठे महेशानी, कर्णोशंकरभामिनी॥

वर्जितानी तु स्थानाभि यानि च कवचेन हि।
तानि सर्वाणि मे देवीसततंपातु स्तम्भिनी॥

या देवी सर्वभूतेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:


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🙏 जय माता दी 🙏

शारदीय नवरात्रि के चमत्कारी उपाय

नौ दिनों तक चलनेवाले नवरात्र पर्व में माता के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है और उन्हें प्रसन्न करने के लिए विभिन्न साधनाएं भी की जाती हैं. डॉ. मधुराज वास्तु गुरु कहते हैं कि गुप्त नवरात्रि में मनचाही सफलता के लिए विशेष उपाय भी किए जाते हैं. वहीं तंत्र शास्त्र के अनुसार गुप्त नवरात्रि में किए गए उपाय जल्दी ही शुभ फल प्रदान कर सकते हैं. धन, नौकरी, स्वास्थ्य, संतान, विवाह, प्रमोशन आदि कई मनोकामनाएं इन 9 दिनों में किए गए उपायों से प्राप्त हो सकती हैं. उपाय इस प्रकार हैं.

मनपसंद वर के लिए उपाय

नवरात्रि के दौरान तृतीया, पंचमी, सप्तमी और नवमी के दिन अपने आसपास स्थित किसी शिव मंदिर में जाएं. वहां भगवान शिव एवं मां पार्वती पर जल एवं दूध चढ़ाएं और पंचोपचार (चंदन, पुष्प, धूप, दीप एवं नैवेद्य) से उनका पूजन करें. अब मौली (पूजा में उपयोग किया जानेवाला लाल धागा) से उन दोनों के मध्य गठबंधन करें. अब वहां बैठकर लाल चंदन की माला से 108 बार मंत्र का जाप करें.
मंत्र
हे गौरी शंकरार्धांगी। यथा त्वं शंकर प्रिया। तथा मां कुरु कल्याणी, कान्त कान्तां सुदुर्लभाम।।
इसके बाद तीन महीने तक रोज़ इसी मंत्र का जाप शिव मंदिर में अथवा अपने घर के पूजा कक्ष में मां पार्वती के सामने 108 बार करें. घर पर भी आपको पंचोपचार पूजा करनी है।

शीघ्र विवाह के लिए उपाय

नवरात्रि में शिव-पार्वती का एक चित्र अपने पूजास्थल में रखें और उनकी पूजा-अर्चना करने के पश्चात मंत्र का 3, 5 या 10 माला जाप करें. जाप के बाद भगवान शिव से विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करें.
मंत्र
ऊं शं शंकराय सकल जन्मार्जित पाप विध्वंसनाय, पुरुषार्थ चतुष्टय लाभाय च पतिं मे देहि कुरु कुरु स्वाहा।

मां अम्बे की आरती

ॐ जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी
तुम को निशदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवरी. ॐ जय अम्बे…

मांग सिंदूर विराजत टीको मृगमद को
उज्जवल से दो नैना चन्द्र बदन नीको. ॐ जय अम्बे…

कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजे
रक्त पुष्प दल माला कंठन पर साजे. ॐ जय अम्बे…

केहरि वाहन राजत खड़्ग खप्पर धारी
सुर-नर मुनिजन सेवत तिनके दुखहारी. ॐ जय अम्बे…

कानन कुण्डल शोभित नासग्रे मोती
कोटिक चन्द्र दिवाकर राजत सम ज्योति. ॐ जय अम्बे…

शुम्भ निशुम्भ विडारे महिषासुर धाती
धूम्र विलोचन नैना निशदिन मदमाती. ॐ जय अम्बे…

चण्ड – मुंड संहारे सोणित बीज हरे
मधु कैटभ दोऊ मारे सुर भयहीन करे.ॐ जय अम्बे…

ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमला रानी
आगम निगम बखानी तुम शिव पटरानी. ॐ जय अम्बे…

चौसठ योगिनी मंगल गावत नृत्य करत भैरु
बाजत ताल मृदंगा और बाजत डमरु. ॐ जय अम्बे…

तुम ही जग की माता तुम ही हो भर्ता
भक्तन की दुःख हरता सुख सम्पत्ति कर्ताॐ जय अम्बे…

भुजा चार अति शोभित वर मुद्रा धारी
मन वांछित फ़ल पावत सेवत नर-नारी. ॐ जय अम्बे…

कंचन थार विराजत अगर कपूर बाती
श्रीमालकेतु में राजत कोटि रत्न ज्योति. ॐ जय अम्बे…

श्री अम्बे जी की आरती जो कोई नर गावे
कहत शिवानंद स्वामी सुख संपत्ति पावे. ॐ जय अम्बे…


यह भी पढ़ें: तुलसी को पवित्र मानकर क्यों की जाती है पूजा और तुलसी मंत्र किस तरह रखता है शरीर को निरोग, जानें इसके पीछे का विज्ञान! (A Sacred Practice For Healthy Living: Why Do We Worship Tulsi? Interesting Facts & Health Benefits Of Tulsi Mantra)

आज मां कात्यायनी की आराधना की जाएगी.
मां कात्यायनी फलदायिनी मानी गई हैं.
हाथ में फूल लेकर देवी को प्रणाम कर उपरोक्त मंत्रोच्चार करना चाहिए.
यदि देवी कात्यायनी की पूरी निष्ठा और भक्ति भाव से पूजा करते हैं, तो अर्थ व मोक्ष की प्राप्ति होती है.
चार भुजाधारी मां कात्यायनी सिंह पर सवार हैं.
इनके एक हाथ में तलवार और दूसरे में कमल है.
अन्य दोनों हाथ वरमुद्रा और अभयमुद्रा में हैं.

Devi Katyayani

शास्त्रों के अनुसार, कात्यायन ऋषि के घर देवी ने पुत्री के रूप में जन्म लिया, इसलिए इनका नाम कात्यायनी पड़ा.
इसी रूप में देवी ने महिषासुर दानव का वध किया था, इसलिए मां कात्यायनी को महिषासुरमर्दिनी के नाम से भी जाना जाता है.
मां कात्यायनी ने महिषासुर से युद्ध के समय अपनी थकान को दूर करने के लिए शहदयुक्त पान का सेवन किया था, इसलिए मां कात्यायनी के पूजन में शहदयुक्त पान ज़रूर चढ़ाना चाहिए.
इस दिन लाल रंग विशेष रूप से शुभ माना जाता है, इसलिए लाल रंग का वस्त्र धारण करें.
मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना करने से जीवन की सारी परेशानियां व बाधाएं स्वतः ही दूर हो जाती हैं.
यदि किसी कन्या के शादी में अड़चनें व परेशानियां आ रही हो, तो उसे मां कात्यायनी का व्रत व पूजन करना चाहिए.
विद्यार्थियों को मां कात्यायनी की विशेष रूप से पूजा-उपासना करनी चाहिए. इससे शिक्षा के क्षेत्र में सफलता अवश्य प्राप्त होती है.


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ध्यान
वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा कात्यायनी यशस्वनीम्॥
स्वर्णाआज्ञा चक्र स्थितां षष्टम दुर्गा त्रिनेत्राम्।
वराभीत करां षगपदधरां कात्यायनसुतां भजामि॥
पटाम्बर परिधानां स्मेरमुखी नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रसन्नवदना पञ्वाधरां कांतकपोला तुंग कुचाम्।
कमनीयां लावण्यां त्रिवलीविभूषित निम्न नाभिम॥

स्तोत्र

कंचनाभा वराभयं पद्मधरा मुकटोज्जवलां।
स्मेरमुखीं शिवपत्नी कात्यायनेसुते नमोअस्तुते॥
पटाम्बर परिधानां नानालंकार भूषितां।
सिंहस्थितां पदमहस्तां कात्यायनसुते नमोअस्तुते॥
परमांवदमयी देवि परब्रह्म परमात्मा।
परमशक्ति, परमभक्ति,कात्यायनसुते नमोअस्तुते॥

कवच
कात्यायनी मुखं पातु कां स्वाहास्वरूपिणी।
ललाटे विजया पातु मालिनी नित्य सुन्दरी॥
कल्याणी हृदयं पातु जया भगमालिनी॥
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी
या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

नवरात्रि पर विशेष

डॉ. मधुराज वास्तु गुरु के अनुसार…

संप्रदाय भेद से इन्हें चार भागों में विभाजित किया गया है.

  1. शैव संप्रदाय
  2. दक्षिण भारत वर्षे
  3. वैष्णव संप्रदाय
  4. माधव संप्रदाय

चतु: नवरात्र विषय विशेष विचार

  • महाकाल संहिता के अनुसार वर्ष में चार नवरात्र आते हैं.
  • अलग-अलग युग में अलग-अलग मास की महिमा रही है.
  1. सतयुग में चैत्र शुक्लपक्ष
  2. त्रेतायुग में आषाढ़ शुक्लपक्ष
  3. द्वापर में माघ शुक्लपक्ष
  4. कलयुग में आश्विन शुक्लपक्ष की नवरात्र पूजा प्रधान है

👉🏻 दुर्गा पूजन उत्सव के दो प्रधान अंग

आगमनि और विजया

  • आगमनि में कैलाश धाम से मां पार्वती का हिमालय पितृग्रह में आगमन एवं सप्तमी, अष्टमी और नवमी पितॄग्रह में मां की उपस्थिति तथा दशमी को विजया का विसर्जन अथवा मां पार्वती का स्वामीगृह गमन.
    इस कारण सप्तमी, अष्टमी, नवमी एवं दशमी को पूजा उत्सव का विशेष महत्व है.

देवी वाहन विचार

  • इस वर्ष देवी मां डोली में विराजमान होकर आ रही है. यह नवरात्रि के नव दिन देवी के नौ स्वरूपों को समर्पित होते हैं. प्रत्येक दिन प्रत्येक एक रूप को समर्पित होता है.
  • धर्म शास्त्र सम्मत ऐसी मान्यता है कि जिस वर्ष माता डोली में सवार होकर आगमन करती हैं, वह वर्ष बहुत शुभ होता है.
  • कहा गया है कि जिस वर्ष नवरात्रि का आरंभ गुरुवार या शुक्रवार से हो, उस वर्ष देवी मां डोली पर सवार होकर आगमन करती है. इस वर्ष अश्विन नवरात्रि गुरुवार को आरंभ हो रही है, इस कारण देवी डोली पर सवार होकर आगमन कर रही है..!

Devi Katyayani

मां अम्बे की आरती

ॐ जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी
तुम को निशदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवरी. ॐ जय अम्बे…

मांग सिंदूर विराजत टीको मृगमद को
उज्जवल से दो नैना चन्द्र बदन नीको. ॐ जय अम्बे…

कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजे
रक्त पुष्प दल माला कंठन पर साजे. ॐ जय अम्बे…

केहरि वाहन राजत खड़्ग खप्पर धारी
सुर-नर मुनिजन सेवत तिनके दुखहारी. ॐ जय अम्बे…

कानन कुण्डल शोभित नासग्रे मोती
कोटिक चन्द्र दिवाकर राजत सम ज्योति. ॐ जय अम्बे…

शुम्भ निशुम्भ विडारे महिषासुर धाती
धूम्र विलोचन नैना निशदिन मदमाती. ॐ जय अम्बे…

चण्ड – मुंड संहारे सोणित बीज हरे
मधु कैटभ दोऊ मारे सुर भयहीन करे.ॐ जय अम्बे…

ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमला रानी
आगम निगम बखानी तुम शिव पटरानी. ॐ जय अम्बे…

चौसठ योगिनी मंगल गावत नृत्य करत भैरु
बाजत ताल मृदंगा और बाजत डमरु. ॐ जय अम्बे…

तुम ही जग की माता तुम ही हो भर्ता
भक्तन की दुःख हरता सुख सम्पत्ति कर्ताॐ जय अम्बे…

भुजा चार अति शोभित वर मुद्रा धारी
मन वांछित फ़ल पावत सेवत नर-नारी. ॐ जय अम्बे…

कंचन थार विराजत अगर कपूर बाती
श्रीमालकेतु में राजत कोटि रत्न ज्योति. ॐ जय अम्बे…

श्री अम्बे जी की आरती जो कोई नर गावे
कहत शिवानंद स्वामी सुख संपत्ति पावे. ॐ जय अम्बे…

यह भी पढ़ें: शादी के बाद भारतीय महिलाएं मांग में सिंदूर क्यों भरती हैं? जानें मांग में सिंदूर भरने से जुड़ी मान्यताएं… (Importance Of Sindoor: Know Why Indian Married Women Put Sindoor In Their Maang)

आज नवरात्रि के चौथे दिन अंबे मां के चौथे स्वरूप कूष्मांडा और पांचवें स्कन्दमाता दोनों की पूजा-आराधना की जाएगी.


देवी कूष्मांडा अष्टभुजा से युक्त है,
इसलिए इन्हें अष्टभुजा भी कहा जाता है.
जिस तरह से ब्रह्माचारिणी व चंद्रघंटा देवी
की पूजा-अर्चना की जाती है,
उसी तरह से कूष्मांडा देवी की पूजा का विधान है.
देवी को पंचामृत से स्नान कराकर फूल, अक्षत, रोली, चंदन, कुमकुम अर्पित करें.

Devi Kushmanda/Devi Skandmata


देवी मां को अरूहूल (लाल रंग का एक विशेष फूल) का फूल विशेष रूप से पसंद है, इसलिए हो सके, तो इसकी माला बनाकर पहनाएं.

इनकी पूजा करने से आयु, यश व आरोग्य की प्राप्ति होती है.

देवी कूष्मांडा की पूजा-अर्चना करने से हमारे जीवन में तप, संयम, त्याग व सदाचार की वृद्धि होती है.

ध्यान मंत्र
वन्दे वांछित कामर्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्
सिंहरूढा अष्टभुजा कुष्माण्डा यशस्वनीम्॥
भास्वर भानु निभां अनाहत स्थितां चतुर्थ दुर्गा त्रिनेत्राम्
कमण्डलु चाप, बाण, पदमसुधाकलश चक्र गदा जपवटीधराम्॥
पटाम्बर परिधानां कमनीया कृदुहगस्या नानालंकार भूषिताम्
मंजीर हार केयूर किंकिण रत्नकुण्डल मण्डिताम्
प्रफुल्ल वदनां नारू चिकुकां कांत कपोलां तुंग कूचाम्
कोलांगी स्मेरमुखीं क्षीणकटि निम्ननाभि नितम्बनीम् ॥

स्त्रोत मंत्र
दुर्गतिनाशिनी त्वंहि दारिद्रादि विनाशिनीम्
जयंदा धनदां कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥
जगन्माता जगतकत्री जगदाधार रूपणीम्
चराचरेश्वरी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥
त्रैलोक्यसुंदरी त्वंहि दु:ख शोक निवारिणाम्
परमानंदमयी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥

कवच मंत्र
हसरै मे शिर: पातु कूष्माण्डे भवनाशिनीम्
हसलकरीं नेत्रथ, हसरौश्च ललाटकम्॥
कौमारी पातु सर्वगात्रे वाराही उत्तरे तथा
पूर्वे पातु वैष्णवी इन्द्राणी दक्षिणे मम
दिग्दिध सर्वत्रैव कूं बीजं सर्वदावतु॥

या देवी सर्वभूतेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।


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वात्सल्य रूप देवी स्कन्दमाता (Navratri- Devi Skandmata)

Devi Skandmata

सिंहासनगता नित्यं पद्याश्रितकरद्वया
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी

नवरात्रि के पांचवें दिन अंबे मां के पांचवें स्वरूप स्कन्दमाता की पूजा-आराधना की जाती है.
मां अपने भक्तों की सभी इच्छाओं को पूर्ण करती हैं.
मां को माहेश्‍वरी व गौरी के नाम से भी जाना जाता है.
महादेव शिव की वामिनी यानी पत्नी होने के कारण माहेश्‍वरी भी कहलाती हैं.
अपने गौर वर्ण के कारण गौरी के रूप में पूजी जाती है.
मां को अपने पुत्र स्कन्द (कार्तिकेय) से अत्यधिक प्रेम होने के कारण पुत्र के नाम से कहलाना पसंद करती हैं, इसलिए इन्हें स्कन्दमाता कहा जाता है.
अपने भक्तों के प्रति इनका वात्सल्य रूप प्रसिद्ध है.
कमल के आसन पर विराजमान होने के कारण इन्हें पद्यासना भी कहते हैं.
स्कन्दमाता अपने इस स्वरूप में स्कन्द के बालरूप को अपनी गोद में लेकर विराजमान रहती हैं.
इनकी चार भुजाएं हैं. दाईं ओर कमल का फूल व बाईं तरफ़ वरदमुद्रा है.

संतान की कामना करनेवाले भक्तगण इनकी विशेष रूप से पूजा करते हैं.
वे इस दिन लाल वस्त्र में लाल फूल, सुहाग की वस्तुएं- सिंदूर, लाल चूड़ी, महावर, लाल बिंदी, फल, चावल आदि बांधकर मां की गोद भरनी करते हैं.

ध्यान
वंदे वांछित कामार्थे चंद्रार्धकृतशेखराम्
सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा स्कंदमाता यशस्वनीम्
धवलवर्णा विशुद्ध चक्रस्थितों पंचम दुर्गा त्रिनेत्रम्
अभय पद्म युग्म करां दक्षिण उरू पुत्रधराम् भजेम्
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानांलकार भूषिताम्
मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल धारिणीम्
प्रफु्रल्ल वंदना पल्लवांधरा कांत कपोला पीन पयोधराम्
कमनीया लावण्या चारू त्रिवली नितम्बनीम्

कवच
ऐं बीजालिंका देवी पदयुग्मघरापरा। हृदयं पातु सा देवी कार्तिकेययुता॥
श्री हीं हुं देवी पर्वस्या पातु सर्वदा। सर्वांग में सदा पातु स्कन्धमाता पुत्रप्रदा॥
वाणंवपणमृते हुं फ्ट बीज समन्विता। उत्तरस्या तथाग्नेव वारुणे नैॠतेअवतु॥
इन्द्राणां भैरवी चैवासितांगी च संहारिणी। सर्वदा पातु मां देवी चान्यान्यासु हि दिक्षु वै॥

यदि आप कफ़, वात, पित्त जैसी बीमारियों से ग्रस्त हैं, तो आपको स्कंदमाता की विशेष रूप से पूजा करनी चाहिए.
मां को अलसी चढ़ाकर प्रसाद में रूप में ग्रहण करना चाहिए.
केले का भोग लगाना चाहिए, क्योंकि केला मां को प्रिय है.

ख्यात्यै तथैव कृष्णायै धूम्रायै सततं नमः
या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

नवरात्रि पर विशेष

डॉ. मधुराज वास्तु गुरु के अनुसार…

दो तिथियां एक साथ पड़ने से इस साल आठ दिन के होंगे शारदीय नवरात्रि…
नवरात्रि यानी मां दुर्गा की उपासना का पावन पर्व. नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है.
इस साल शारदीय नवरात्रि सात अक्टूबर से शुरू हो रहे हैं और 15 अक्टूबर को विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा.
इस साल शारदीय नवरात्रि की शुरुआत गुरुवार से हो रही है. ऐसे में मां दुर्गा डोली (पालकी) पर सवार पर होकर आएंगी.
इस साल शारदीय नवरात्रि आठ दिन तक चलेंगे. नवरात्रि में तृतीया और चतुर्थी तिथि एक साथ पड़ रही है.
हिंदू पंचांग के अनुसार, 09 अक्टूबर, दिन शनिवार को तृतीया सुबह 07 बजकर 48 मिनट तक रहेगी. इसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू हो जाएगी. 10 अक्टूबर, दिन रविवार को सुबह 05 बजे तक रहेगी.
शारदीय नवरात्रि चित्रा नक्षत्र में प्रारंभ हो रहे है.

शारदीय नवरात्रि की तिथियां

पहला दिन 07 अक्टूबर- मां शैलपुत्री की पूजा
दूसरा दिन 08 अक्टूबर- मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
तीसरा दिन 09 अक्टूबर- मां चंद्रघंटा व मां कुष्मांडा की पूजा
चौथा दिन 10 अक्टूबर- मां स्कंदमाता की पूजा
पांचवां दिन 11 अक्टूबर- मां कात्यायनी की पूजा
छठवां दिन 12 अक्टूबर- मां कालरात्रि की पूजा.
सातवां दिन 13 अक्टूबर- मां महागौरी की पूजा
आठवां दिन 14 अक्टूबर- मां सिद्धिदात्री की पूजा
15 अक्टूबर- दशहरा (विजयादशमी)

प्रथम तीन दिन दुर्गा (महाकाली) प्रधान पूजन!
द्वितीय तीन दिन महालक्ष्मी प्रधान पूजन!
अंतिम तीन दिन महासरस्वती की प्रधान पूजा होती है!

तिथि को ही देवी स्वरूपा माना है. अतः नवतिथि आधार पर ही नवरात्रि किए जाते हैं. प्रत्येक तिथि की पूजा उस अतिथि की महाशक्ति को अर्पण करें.

Navratri 2021

मां अम्बे की आरती

ॐ जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी
तुम को निशदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवरी. ॐ जय अम्बे…

मांग सिंदूर विराजत टीको मृगमद को
उज्जवल से दो नैना चन्द्र बदन नीको. ॐ जय अम्बे…

कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजे
रक्त पुष्प दल माला कंठन पर साजे. ॐ जय अम्बे…

केहरि वाहन राजत खड़्ग खप्पर धारी
सुर-नर मुनिजन सेवत तिनके दुखहारी. ॐ जय अम्बे…

कानन कुण्डल शोभित नासग्रे मोती
कोटिक चन्द्र दिवाकर राजत सम ज्योति. ॐ जय अम्बे…

शुम्भ निशुम्भ विडारे महिषासुर धाती
धूम्र विलोचन नैना निशदिन मदमाती. ॐ जय अम्बे…

चण्ड – मुंड संहारे सोणित बीज हरे
मधु कैटभ दोऊ मारे सुर भयहीन करे.ॐ जय अम्बे…

ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमला रानी
आगम निगम बखानी तुम शिव पटरानी. ॐ जय अम्बे…

चौसठ योगिनी मंगल गावत नृत्य करत भैरु
बाजत ताल मृदंगा और बाजत डमरु. ॐ जय अम्बे…

तुम ही जग की माता तुम ही हो भर्ता
भक्तन की दुःख हरता सुख सम्पत्ति कर्ताॐ जय अम्बे…

भुजा चार अति शोभित वर मुद्रा धारी
मन वांछित फ़ल पावत सेवत नर-नारी. ॐ जय अम्बे…

कंचन थार विराजत अगर कपूर बाती
श्रीमालकेतु में राजत कोटि रत्न ज्योति. ॐ जय अम्बे…

श्री अम्बे जी की आरती जो कोई नर गावे
कहत शिवानंद स्वामी सुख संपत्ति पावे. ॐ जय अम्बे…

Devi Kushmanda

indu-traditions/
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या देवी सर्वभूतेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

नवरात्रि के तीसरे दिन चंद्रघंटा देवी की पूजा की जाती है.
देवी का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है.
इनके मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चंद्र है,
इसलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है.
इनके दस हाथ हैं, जो कमल, धनुष-बाण, कमंडल,
त्रिशूल, गदा, खड्ग, अस्त्र-शस्त्र से विभूषित हैं.
चंद्रघंटा देवी की सवारी सिंह है.

Devi Chandraghanta


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पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता

इस दिन सांवली रंगत की महिला को घर बुलाकर पूजा-अर्चना करें.
भोजन में दही-हलवा आदि खिलाएं.
कलश व मंदिर की घंटी भेंट करें.
इनकी आराधना करने से निर्भयता व सौम्यता दोनों ही प्राप्त होती है.
इनके घंटे की ध्वनि सदा अपने भक्तों की प्रेतबाधा से रक्षा करती है.

                           स्त्रोत मंत्र

ध्यान वन्दे वाच्छित लाभाय चन्द्रर्घकृत शेखराम।
सिंहारूढा दशभुजां चन्द्रघण्टा यशंस्वनीम्घ
कंचनाभां मणिपुर स्थितां तृतीयं दुर्गा त्रिनेत्राम।

खड्ग, गदा, त्रिशूल, चापशंर पद्म कमण्डलु माला वराभीतकराम्घ
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्यां नानालंकार भूषिताम।
मंजीर हार, केयूर, किंकिणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम्घ
प्रफुल्ल वंदना बिबाधारा कांत कपोलां तुग कुचाम।

कमनीयां लावाण्यां क्षीणकटिं नितम्बनीम्घ
स्तोत्र आपद्धद्धयी त्वंहि आधा शक्तिरू शुभा पराम।
अणिमादि सिद्धिदात्री चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यीहम्घ्
चन्द्रमुखी इष्ट दात्री इष्ट मंत्र स्वरूपणीम।

धनदात्री आनंददात्री चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यहम्घ
नानारूपधारिणी इच्छामयी ऐश्वर्यदायनीम।
सौभाग्यारोग्य दायिनी चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यहम्घ्
कवच रहस्यं श्रणु वक्ष्यामि शैवेशी कमलानने।

श्री चन्द्रघण्टास्य कवचं सर्वसिद्धि दायकम्घ
बिना न्यासं बिना विनियोगं बिना शापोद्धरं बिना होमं।
स्नान शौचादिकं नास्ति श्रद्धामात्रेण सिद्धिकमघ
कुशिष्याम कुटिलाय वंचकाय निन्दकाय च।

नवरात्रि का वैज्ञानिक-आध्यात्मिक रहस्य 3

नवरात्रि के बारे में डॉ. मधुराज वास्तु गुरु ने दिलचस्प जानकारियां दीं. उनका कहना है कि पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा के काल में 1 साल की 4 संधियां हैं. उनमें मार्च व सितंबर माह में पड़नेवाली गोल संधियों में साल के दो मुख्य नवरात्रि पड़ते हैं. इस समय रोगाणु आक्रमण की सर्वाधिक आशंका होती है. ऋतु संधियों में अक्सर शारीरिक बीमारियां बढ़ती हैं, अत: उस समय स्वस्थ रहने के लिए, शरीर को शुद्ध रखने के लिए और तन-मन को निर्मल और पूर्णत: स्वस्थ रखने के लिए की जानेवाली प्रक्रिया का नाम ‘नवरात्रि’ है.

नौ दिन या रात
अमावस्या की रात से अष्टमी तक या प्रतिपदा से नवमी की दोपहर तक व्रत-नियम चलने से नौ रात यानी ‘नवरात्रि’ नाम सार्थक है. यहां रात गिनते हैं, इसलिए नवरात्रि यानी नौ रातों का समूह कहा जाता है. रूपक द्वारा हमारे शरीर को 9 मुख्य द्वारों वाला कहा गया है. इसके भीतर निवास करनेवाली जीवनी शक्ति का नाम ही दुर्गा देवी है.

इन मुख्य इन्द्रियों के अनुशासन, स्वच्छ्ता, तारतम्य स्थापित करने के प्रतीक रूप में शरीर तंत्र को पूरे साल के लिए सुचारु रूप से क्रियाशील रखने के लिए 9 द्वारों की शुद्धि का पर्व 9 दिन मनाया जाता है. इनको व्यक्तिगत रूप से महत्व देने के लिए 9 दिन 9 दुर्गाओं के लिए कहे जाते हैं.

शरीर को सुचारु रखने के लिए सफ़ाई या शुद्धि प्रतिदिन तो हम करते ही हैं, किंतु अंग-प्रत्यंगों की पूरी तरह से भीतरी सफ़ाई करने के लिए हर 6 माह के अंतर से सफ़ाई अभियान चलाया जाता है. सात्विक आहार के व्रत का पालन करने से शरीर की शुद्धि, साफ़-सुथरे शरीर में शुद्ध बुद्धि, उत्तम विचारों से ही उत्तम कर्म, कर्मों से सच्चरित्रता और क्रमश: मन शुद्ध होता है. स्वच्छ मन-मंदिर में ही तो ईश्वर की शक्ति का स्थायी निवास होता है.

मां अम्बे की आरती

ॐ जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी
तुम को निशदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवरी. ॐ जय अम्बे…

मांग सिंदूर विराजत टीको मृगमद को
उज्जवल से दो नैना चन्द्र बदन नीको. ॐ जय अम्बे…

कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजे
रक्त पुष्प दल माला कंठन पर साजे. ॐ जय अम्बे…

केहरि वाहन राजत खड़्ग खप्पर धारी
सुर-नर मुनिजन सेवत तिनके दुखहारी. ॐ जय अम्बे…

कानन कुण्डल शोभित नासग्रे मोती
कोटिक चन्द्र दिवाकर राजत सम ज्योति. ॐ जय अम्बे…

शुम्भ निशुम्भ विडारे महिषासुर धाती
धूम्र विलोचन नैना निशदिन मदमाती. ॐ जय अम्बे…

चण्ड – मुंड संहारे सोणित बीज हरे
मधु कैटभ दोऊ मारे सुर भयहीन करे.ॐ जय अम्बे…

ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमला रानी
आगम निगम बखानी तुम शिव पटरानी. ॐ जय अम्बे…

चौसठ योगिनी मंगल गावत नृत्य करत भैरु
बाजत ताल मृदंगा और बाजत डमरु. ॐ जय अम्बे…

तुम ही जग की माता तुम ही हो भर्ता
भक्तन की दुःख हरता सुख सम्पत्ति कर्ताॐ जय अम्बे…

भुजा चार अति शोभित वर मुद्रा धारी
मन वांछित फ़ल पावत सेवत नर-नारी. ॐ जय अम्बे…

श्री अम्बे जी की आरती जो कोई नर गावे
कहत शिवानंद स्वामी सुख संपत्ति पावे. ॐ जय अम्बे…

कंचन थार विराजत अगर कपूर बाती
श्रीमालकेतु में राजत कोटि रत्न ज्योति. ॐ जय अम्बे…


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देवी ब्रह्मचारिणी ब्रह्म स्वरूप है.

यहां ब्रह्म का अर्थ तपस्या से है यानी तपस्या का मूर्तिमान स्वरूप है.
यह देवी कई नाम से प्रसिद्ध हैं, जैसे-
तपश्‍चारणी, अपर्णा, उमा आदि.

सिद्धि प्राप्ति के लिए नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की विशेष पूजा की जाती है.

Devi Brahmcharini

या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप भक्तों व सिद्धों को अनंत फल देनेवाला है.
देवी ब्रह्मचारिणी हिमालय व मैना की पुत्री हैं.
इन्होंने भगवान शंकर को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी.
इस कठिन तपस्या के कारण ही इनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा.
इन्हें त्याग व तपस्या की देवी माना जाता है.
इनके दाहिने हाथ में अक्षमाला और बाएं हाथ में कमंडल है.

इनकी पूजा-अर्चना करने से हमारे जीवन में तप, संयम, त्याग व सदाचार की वृद्धि होती है.
इनकी पूजा करने से पहले हाथ में एक फूल लेकर यह प्रार्थना करें-
दधाना करपप्राभ्यामक्षमालाकमण्डलू l
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्माचारिण्यनुत्तमा ll

इसके बाद देवी को पंचामृत से स्नान कराकर
फूल, अक्षत, रोली, चंदन, कुमकुम अर्पित करें.
देवी को अरूहूल (लाल रंग का एक विशेष फूल) का फूल विशेष रूप से पसंद है, इसलिए हो सके, तो इसकी माला बनाकर पहनाएं.
मान्यता के अनुसार, इस दिन ऐसी कन्याओं की पूजा व आवभगत की जाती है, जिनका विवाह तय हो गया है, पर अभी शादी नहीं हुई है. इन्हें घर बुलाकर पूजन के बाद भोजन कराकर वस्त्र उपहार स्वरूप दिया जाता है.


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Devi Brahmcharini

नवरात्रि का वैज्ञानिक-आध्यात्मिक रहस्य 2

डॉ. मधुराज वास्तु गुरु के अनुसार, ऋषियों ने नवरात्रि के महत्व को अत्यंत सूक्ष्मता के साथ वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य में समझने और समझाने का प्रयत्न किया. रात्रि में प्रकृति के बहुत सारे अवरोध ख़त्म हो जाते हैं. आधुनिक विज्ञान भी इस बात से सहमत है. हमारे ऋषि-मुनि आज से कितने ही हज़ारों वर्ष पूर्व ही प्रकृति के इन वैज्ञानिक रहस्यों को जान चुके थे.
दिन में आवाज़ दी जाए, तो वह दूर तक नहीं जाएगी, किंतु रात्रि को आवाज़ दी जाए, तो वह बहुत दूर तक जाती है. इसके पीछे दिन के कोलाहल के अलावा एक वैज्ञानिक तथ्य यह भी है कि दिन में सूर्य की किरणें आवाज़ की तरंगों और रेडियो तरंगों को आगे बढ़ने से रोक देती हैं. रेडियो इस बात का जीता-जागता उदाहरण है. कम शक्ति के रेडियो स्टेशनों को दिन में पकड़ना अर्थात सुनना मुश्किल होता है, जबकि सूर्यास्त के बाद छोटे से छोटा रेडियो स्टेशन भी आसानी से सुना जा सकता है.
वैज्ञानिक सिद्धांत यह है कि सूर्य की किरणें दिन के समय रेडियो तरंगों को जिस प्रकार रोकती हैं, उसी प्रकार मंत्र जाप की विचार तरंगों में भी दिन के समय रुकावट पड़ती है, इसीलिए ऋषि-मुनियों ने रात्रि का महत्व दिन की अपेक्षा बहुत अधिक बताया है. मंदिरों में घंटे और शंख की आवाज़ के कंपन से दूर-दूर तक वातावरण कीटाणुओं से रहित हो जाता है. यह रात्रि का वैज्ञानिक रहस्य है, जो इस वैज्ञानिक तथ्य को ध्यान में रखते हुए रात्रियों में संकल्प और उच्च अवधारणा के साथ अपने शक्तिशाली विचार तरंगों को वायुमंडल में भेजते हैं, उनकी कार्यसिद्धि अर्थात मनोकामना सिद्धि, उनके शुभ संकल्प के अनुसार उचित समय और ठीक विधि के अनुसार करने पर अवश्य होती है.

Devi Brahmcharini

मां अम्बे की आरती

ॐ जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी
तुम को निशदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवरी. ॐ जय अम्बे…

मांग सिंदूर विराजत टीको मृगमद को
उज्जवल से दो नैना चन्द्र बदन नीको. ॐ जय अम्बे…

कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजे
रक्त पुष्प दल माला कंठन पर साजे. ॐ जय अम्बे…

केहरि वाहन राजत खड़्ग खप्पर धारी
सुर-नर मुनिजन सेवत तिनके दुखहारी. ॐ जय अम्बे…

कानन कुण्डल शोभित नासग्रे मोती
कोटिक चन्द्र दिवाकर राजत सम ज्योति. ॐ जय अम्बे…

शुम्भ निशुम्भ विडारे महिषासुर धाती
धूम्र विलोचन नैना निशदिन मदमाती. ॐ जय अम्बे…

चण्ड – मुंड संहारे सोणित बीज हरे
मधु कैटभ दोऊ मारे सुर भयहीन करे.ॐ जय अम्बे…

ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमला रानी
आगम निगम बखानी तुम शिव पटरानी. ॐ जय अम्बे…

चौसठ योगिनी मंगल गावत नृत्य करत भैरु
बाजत ताल मृदंगा और बाजत डमरु. ॐ जय अम्बे…

तुम ही जग की माता तुम ही हो भर्ता
भक्तन की दुःख हरता सुख सम्पत्ति कर्ताॐ जय अम्बे…

भुजा चार अति शोभित वर मुद्रा धारी
मन वांछित फ़ल पावत सेवत नर-नारी. ॐ जय अम्बे…

कंचन थार विराजत अगर कपूर बाती
श्रीमालकेतु में राजत कोटि रत्न ज्योति. ॐ जय अम्बे…

श्री अम्बे जी की आरती जो कोई नर गावे
कहत शिवानंद स्वामी सुख संपत्ति पावे. ॐ जय अम्बे…


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Devi Brahmcharini

Navratri 2021

मां दुर्गा की कृपा सभी पर बनी रहे.

नवरात्रि की शुभकामनाएं! जय माता दी!
नवरात्रि में नौ दिनों तक देवी मां दुर्गा की नौ शक्तियों की पूजा-अर्चना की जाती है.
मां के हर रूप का अपना विशेष महत्व है.
उनके नौ रूप इस प्रकार हैं- शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री.

आज पहले दिन शैलपुत्री की पूजा-अर्चना का विधान है.
यह नवदुर्गा में प्रथम दुर्गा हैं.
पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा.
देवी शैलपुत्री के चरणों में गाय का घी अर्पित करने से भक्तों को सुख-समृद्धि व आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है.

देवी की उपासना के मंत्र इस प्रकार हैं-

वन्दे वान्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्

मां शैलपुत्री का वर्ण चंद्र समान है.
यह शिव की अर्द्धांगिनी पार्वती का ही रूप हैं.
इनका वाहन बैल है.
इस दिन ॐ शं शैलपुत्री देव्यैः नमः मंत्र का जाप करना चाहिए.
इससे मन में शांति मिलने के साथ-साथ सभी दुख-कष्ट दूर होते हैं.

देवी के निम्न पाठ से भी आपका जीवन ख़ुशियों से भर जाएगा-

प्रथम दुर्गा त्वंहि भवसागरः तारणीम्
धन ऐश्‍वर्य दायिनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यम् ll
त्रिलोजननी त्वंहि परमानंद प्रदीयमान्
सौभाग्यरोग्य दायनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यहम् ll
चराचरेश्‍वरी त्वंहि महामोहः विनाशनि
मुक्ति भुक्ति दायनी शैलपुत्री प्रमनाम्यहम् ll

Navratri 2021


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ऐसी मान्यता है कि नवरात्र के लिए किए गए उपाय जल्दी ही शुभ फल प्रदान करते हैं. धन, संतान, प्रमोशन, विवाह, रुके हुए कार्य… कई मनोकामनाएं इन 9 दिनों में किए गए उपायों से पूरी हो सकती हैं. अगर आपके मन में भी कोई मनोकामना है, तो पंडित राजेंद्रजी के बताए गए उपायों से आपकी मनोकामना अवश्य पूरी होगी.

Special Tips For Navratri Puja
  • कर्जमुक्ति के लिए करें ये उपाय
    यदि लाख कोशिशों के बाद भी आपका कर्ज से पीछा नहीं छूट रहा, तो नवरात्र में सूर्य डूबने के पश्‍चात 21 गुलाब के फूल, सवा किलो साबूत लाल मसूर लाल कपड़े में बांधकर माता के सामने रखकर घी का दीपक जलाकर रोज़ाना 108 बार ये मंत्र पढ़ें-
    ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
    पूजा समाप्त होने के बाद अपने ऊपर सात बार उतारें व किसी को भी दान कर दें. माता से कर्ज मुक्ति की प्रार्थना करें. ऐसा करने से आपको अवश्य कर्ज से मुक्ति मिलेगी.
Special Tips For Navratri Puja
  • मनोकामना पूरी करने के लिए करें ये उपाय
    पूरे नौ दिन अखंड दीपक व घट के सामने बैठकर सिद्ध कुजिका स्त्रोत का पाठ करें. हर दिन एक-एक गुलाब का फूल बढ़ाते जाएं. नौवें दिन नौ गुलाब अर्पण कर मां से प्रार्थना करें. ऐसा करने से मनोकामना पूरी होती है.

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Special Tips For Navratri Puja
  • विवाह के लिए करें ये उपाय
    अर्गला स्तोत्र व कीलकम् का पाठ रोज़ाना माता के सामने करें व हलवा का भोग चढ़ाकर एक कमल का पुष्प अर्पण करें. ऐसा करने से आपकी विवाह की चाहत पूरी हो जाएगी. श्रद्धा और विश्‍वास से प्रार्थना करने से मनोकामना ज़रूर पूरी होती है.

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  • धनवृद्धि के लिए करें ये उपाय
    पूरी नवरात्रि में लाल आसन पर बैठकर संध्याकाल में जो जातक विष्णु सहस्रनाम तथा ललिता सहस्रनाम का पाठ करता है और रोज़ाना एक कमल का पुष्प माता को अर्पण करता है. सात्विक रहता है, आचरण ठीक रखता है, कलह नहीं करता… ये सारे पालन करते हुए ऊपर दिया उपाय जो भी जातक करता है, मां उस पर प्रसन्न होकर धन वर्षा अवश्य करती है और उसके कष्टों को हरती है.

टीवी सितारे कैसे सेलिब्रेट करते हैं नवरात्रि का त्यौहार, यदि आप भी ये जानना चाहते हैं, तो हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसे टीवी एक्ट्रेसेस के बारे में, जिन्हें नवरात्रि का त्यौहार बहुत पसंद है और वो ऐसे सेलिब्रेट करती हैं नवरात्रि का त्यौहार.

Television Actresses Celebrate Navratri

रश्मि देसाई (Rashmi Desai)
नवरात्रि गुजरातियों का सबसे शाही और कलरफुल त्योहार है. मैं गुजराती हूं इसलिए मेरे लिए नवरात्रि रेग्युलर पूजा के साथ ही सजने-संवरने, दोस्तों से मिलने, डांडिया और गरबा का लुत्फ़ उठाने का बेस्ट टाइम है. अब मैं हर दिन गरबा खेलने नहीं जा सकती, लेकिन मैं हर साल कम से कम तीन दिन गरबा खेलने ज़रूर जाती हूं. मैं सालों से नवरात्रि में नौ दिन का व्रत रखती हूं. नवरात्रि में मैं स़िर्फ फ्रूट्स खाती हूं. इन दिनों मैं अपने फेवरेट फ्रूट्स सेब, केला और कीवी खाती हूं. नवरात्रि की यादों मेरे बचपन की सबसे अनमोल यादें वो हैं जब नवरात्रि के दिनों में मां मुझे गरबा और डांडिया की शॉपिंग के लिए ले जाती थीं. तब मैं कलरफुल कपड़े और ज्वेलरी पहनकर पूरे नौ दिन गरबा खेलने जाती थी. मैं व्रत भी रखती थी इसलिए मां मुझे व्रत में खाई जाने वाली टेस्टी डिशेज़ बनाकर खिलाती थीं. हम नवरात्रि में गरबी (मिट्टी का डेकोरेट किया हुआ छोटा घड़ा, जिसके अंदर दीया रखकर पूरे नौ दिन तक जलाए रखना होता है) भी लेकर आते थे और पूरे नौ दिन पूजा-आरती करते थे. नवरात्रि के दिनों में मैं बहुत एक्साइटेड हो जाती हूं.

Rashmi Desai

जैस्मिन भसीन (Jasmin Bhasin)
सलमान खान के शो बिग बॉस 14 की कॉन्ट्रोवर्सी क्वीन जैस्मिन भसीन को भी नवरात्रि का त्यौहार बहुत पसंद है. जैस्मिन भसीन कहती हैं, “मेरी नवरात्रि से जुड़ी बहुत ही ख़ूबसूरत यादें हैं. मुझे याद है, हम स्कूल में नवरात्रि ऑर्गनाइज़ करते थे और सब मिलकर डांडिया खेलते थे. मुझे इस फेस्टिवल का बेसब्री से इंतज़ार रहता है. इस बार मैं नवरात्रि में काम में बहुत बिज़ी हूं, लेकिन काम से यदि फुर्सत मिली, तो मैं ज़रूर डांडिया खेलूंगी.”

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Jasmin Bhasin

सुप्रिया कुमारी (Supriya Kumari) 
मुझे बहुत ज़्यादा भीड़ पसंद नहीं है इसलिए मैं डांडिया नहीं खेलती. हां, मेरी मां दुर्गा में बहुत आस्था है इसलिए मैं पूरे नौ दिन दुर्गा पूजा सेलिब्रेट करती हूं. मैं कलर पैटर्न में भी विश्‍वास नहीं करती इसलिए मैं नवरात्रि में अपनी पसंद के कलरफुल कपड़े पहनती हूं.

Supriya Kumari

शीबा (Sheeba) 
मेरे लिए नवरात्रि फेस्टिविटी की ख़ूबसूरत शुरुआत है. इस दौरान मुझमें अपने आप ही एक अलग तरह की ऊर्जा आ जाती है. मैं नवरात्रि के दौरान हर दिन देवी का हर रंग पहनने की कोशिश करती हूं. हां, शूटिंग के लिए मुझे अपने रोल के अनुरूप कपड़े बदलने पड़ते हैं, फिर भी मैं घर से परफेक्ट कलर पहनकर निकलती हूं. मैं नवरात्रि में पूरे नौ दिन का व्रत रखती हूं और इस दौरान मैं स़िर्फ फलाहार लेती हूं. इस साल मैं नवरात्रि में दिल्ली में हूं इसलिए रामलीला का भी जमकर लुत्फ़ उठाऊंगी.

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Sheeba

नवरात्रि में मां दुर्गा जैसे साक्षात आशीर्वाद देने घर घर चली आती हैं, उनका हर रूप वंदनीय है, पूजनीय है… जानें माता रानी के 9 रूपों को और जी भरकर करें दर्शन और लें उनका आशीष, देखें यह वीडियो!

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नवरात्र 2020 कल यानी 17 अक्टूबर से शुरू हो रहे हैं. देश में कई राज्यों में कोरोना के केसेस की अधिकता के कारण कई लोग नवरात्र पूजा के लिए ज़रूरी सामान नहीं ख़रीद पा रहे हैं, जिसके चलते लोगों के मन में निराशा का भाव भी है. इस विपरीत परिस्थिति में जो भी संसाधन उपलब्ध हैं, उनसे आप किस तरह नवरात्र की तैयारी कर सकते हैं, ये जानने के लिए हमने बात की एस्ट्रो-टैरो एक्सपर्ट व न्यूमरोलॉजिस्ट मनीषा कौशिक से. मनीषा कौशिक ने हमें कोरोना काल में नवरात्र की तैयारी करने के कुछ आसान उपाय बताए इस तरह बताए:

Navratri 2020

आश्विन मास की शुक्ल पक्ष – शारदीय नवरात्रि नवरात्र 2020 का शुभ मुहूर्त
17 अक्टूबर 2020 से शारदीय नवरात्र शुरू हो रहे हैं. नवरात्र 2020 घटस्थापना का शुभ मुहूर्त है:

पहला ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 4 से 6 बजे तक
दूसरा मुहूर्त सुबह 6:27 से 10:13 बजे तक
तीसरा अभिजीत मुहूर्त 11:43 से 12:28 बजे तक
चौथा सबसे अच्छा और शुभ मुहूर्त सुबह 7:53 से 9:18 बजे तक
वैसे तो ये सभी मुहूर्त अच्छे हैं, लेकिन चौथा मुहूर्त सभी के लिए बहुत अच्छा है. यदि संभव हो तो, इस मुहूर्त पर पूजा-आराधना करें.

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कोरोना काल में ऐसे करें नवरात्र 2020 की तैयारियां
कई लोग इस बात से परेशान हैं कि कोरोना काल के चलते वो नवरात्र पूजा और घटस्थापना के लिए ज़रूरी सामान नहीं खरीद पा रहे हैं. यदि आपके साथ भी ऐसा ही हो रहा है, तो घबराएं नहीं. कोरोना काल में आप इस तरह नवरात्र 2020 की तैयारियां कर सकते हैं:

  • यदि आप नवदुर्गा को चढ़ाने के लिए नई चुनरी नहीं ख़रीद पा रहे हैं, तो आज यानी नवरात्र से एक दिन पहले घर की पुरानी चुनरी धोकर उसका प्रयोग करें.
  • यदि किसी कारणवश पुरानी चुनरी भी नहीं धो पाए, तो चुनरी पर गंगाजल छिड़ककर फिर उसे पूजा में प्रयोग में लाएं.
  • यदि आपके पास चुनरी नहीं है, तो नवदुर्गा के सिर पर मौली का एक टुकड़ा रख दें, ये भी वस्त्र का ही काम करता है.
  • यदि आप घटस्थापना के लिए श्रीफल यानी नारियल नहीं ख़रीद पा रही हैं, तो मंदिर में सिर्फ घी का दीया जलाकर भी अपने व्रत की शुरुआत कर सकती हैं.
  • कोरोना काल के चलते आपको कन्या जिमाने में भी दिक्कत आ सकती है, क्योंकि लोग अपनी लड़कियों को नहीं भी भेज सकते हैं. यदि आपको कन्या जिमाने में दिक्कत आ रही है, तो आप पूजा का भोग-प्रसाद बनाकर उसे एक थाली में नौ भागों में रख दें और उस थाली को छत में रखें. ऐसा करने से पक्षी आपका भोग-प्रसाद खाएंगे, जिससे आपको उतना ही पुण्य मिलेगा. हां, भोग के साथ छत पर पानी भी ज़रूर रखें. जिस तरह खाने के बाद हमें पानी की ज़रूरत पड़ती है, उसी तरह पक्षियों को भी प्यास लगती है, इसलिए भोग के साथ एक बर्तन में पानी भी ज़रूर रखें.

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नवरात्र 2020 का व्रत रखते समय इस बात का रखें ख़ास ध्यान
किसी भी पूजा-अर्चना, व्रत-उपवास में उसकी सामग्री से कहीं ज्यादा भक्त की भावना मायने रखती है, इसलिए आपकी पूजा या उपवास में कोई कमी रह भी जाए, तो परेशान न हों, माता रानी आपकी भावना को समझेंगी और आपको ढेर सारा आशीर्वाद देंगी. नवरात्र 2020 आप सभी के जीवन सुख-सौभाग्य-समृद्धि लेकर आए!
– कमला बडोनी

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