Nazam

Poetry

तेरी तस्वीर…

मैं जहां में
कुछ अनोखी चीज़
ढूंढ़ने निकला
और शहर में मुझे
सिर्फ़ आईना मिला
जो मेरी बेबसी पर
मुस्कुराता दिखा
वही
जब दिल के सामने रखा
तो बेसाख्ता
तेरी तस्वीर देख
जवाब मिल गया…

ज़िंदगी के पन्ने

दे देना
वे शब्द
मुझे जो
तुम्हारे दिल के
क़रीब होकर गुज़रे
होंगे शब्द वो
तुम्हारे लिए
अनजाने ही वो
मेरे लिए
ज़िंदगी के
पन्ने हो जाएंगे…

Poetry

Murali Srivastava
मुरली श्रीवास्तव

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मेरे प्रेम की सीमा

कितनी है, क्या है

तुम्हें क्या पता है?

बहुत छोटी हैं वो

मन की रेखाएं

Kavita

नाराज़ होे तो हंसना

ख़ामोश हो, खिलखिलाना

उदास हो, मुस्कुराना

दुखी हो, ख़ुश होना

 

झगड़े के बाद पूछना

छोड़ो न ग़ुस्सा अब

सह नही सकती

चुप हूं तो कहना

बोलो न क्यूं सताना

रुठो तुम, मेरा मनाना

 

मन नहीं लग रहा

गुमसुम रहना तुम्हारा

भला नहीं लग रहा

यही अंतिम परिधि है

तेरा खिलखिलाना

मुस्कुराना, मान जाना

 

अंत है, यही मेरी

प्रेम, सीमाओं का

नहीं चाहिए, आकाश

कायनात, न ही अनंत

अंतरिक्ष, न अलक्षित

अगणित तारे, न सितारे

 

न रेत के कण

या समय के क्षण

मेरे प्यार की

परिणीति भी

केंद्र भी, बिंदु भी

स़िर्फ इतनी छोटी है

ख़ुशियों की रेखाएं

 

स़िर्फ तुम्हारी हूं

क्यूं हूं कब से हूं

इतना सा सुनो ना

यही हैं सीमाएं,

मेरे प्रेम की

पता है तुम्हें

और कुछ भी नहीं

अनंत प्रेम मेरा

कैसी, क्यूं, कौन-सी

टूट गई बाधाएं

 

आगे बढ़ चुकी हूं

छोड़ सभी सीमाएं

साथ ले असीम आशाएं

हे प्रिय, तुम्ही में समाहित

दसों दिशाएं असीमित

सीमाएं…

– निरंजन धुलेकर

 

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Kavay

मैं तुम्हारी हर चीज़ से

प्यार करती हूं

न चाहते हुए भी

जैसे

तुम्हारे सिगार की महक

बिस्तर पर फेंकी

हुई तुम्हारी टाई

ज़मीन पर पड़े बेतरतीब जूते

बाथरूम में पड़ा शेविंग रेजर

वैसे

तुम्हारी किताब में रखे सूखे

गुलाब भी समझते हैं

मेरे मौन को

और मोबाइल में रखी

ढेर सारी तस्वीरें भी

मुझे परेशान नहीं करती

क्योंकि

तुम्हारा साथ तो पा लिया

पर प्यार नहीं पाया

फिर भी मैं

प्यार करती हूं

तुम्हारी सब

प्रेमिकाओं से

हां

मैं तुम्हारी हर चीज़ से

प्यार करती हूं…

              – नीरज कुमार मिश्रा

यह भी पढ़ेShayeri

नज़रें जो उनकी बदलीं, ज़माने बदल गए

मयखाना तो वही है, पैमाने बदल गए

Kavay

तुम पूछते हो उनके, जाने से क्या हुआ

होंठों के गुनगुनाते, तराने बदल गए

वादा वो करके आए थे, न आए हैं वो अब

हर रोज़ उनके न आने के, बहाने बदल गए

जज़्बा मुहब्बतों का, है पाक आज भी

फिर क्यों मुहब्बतों के, फसाने बदल गए

कहने को क्या नहीं है, अब आदमी के पास

लेकिन अब दौलतों के, ख़ज़ाने बदल गए

नज़रें जो उनकी बदलीं, ज़माने बदल गए

मयखाना तो वही है, पैमाने बदल गए

Dinesh Khanna

  दिनेश खन्ना

यह भी पढ़ेShayeri

Kavay

लिपटकर रो लेती गर तुम होते

ग़म कुछ कम होते गर तुम होते

बांहों में सिमट जाते खो जाते गर तुम होते

तुम्हारे हो जाते गर तुम होते

कल भी पुकारा था दोराहे पर

आंख न नम होती गर तुम होते

हां उसी मोड़ पर जाकर देखा है अभी

साथ-साथ चलती गर तुम होते

मुकम्मल हो जाती मुहब्बत मेरी

हां तुम गर तुम बस तुम होते…

 

– विद्यावती

यह भी पढ़ेShayeri

दग़ाबाज़ दुनिया हसीं दिख रही है

बता साकिया तूने क्या दे दिया है

दराज़-ए-उमर की दुआ देने वालों

न दो बद्दुआएं, बहुत जी लिया है

Shayari

क़यामत बने या 1 हशर वो बला से

हमें क्या, गिरेबान को सी लिया है

 

बहुत देख ली है फ़रेबों की दुनिया

उठा ले ख़ुदाया, बहुत जी लिया है

निगाहों में 2 वहशत, ज़बां बहकी-बहकी

न जाने ‘कंवल’ ने ये क्या पी लिया है

Vedprakash Pahwa

वेद प्रकाश पाहवा ‘कंवल’

  1. मुसीबत 
  2. पागलपन

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Kavay- Diwali

Kavay

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Kavay

बिखरते ख़्वाबों को देखा

सिसकते जज़्बातों को देखा

रूठती हुई ख़ुशियां देखीं

बंद पलकों से

टूटते हुए अरमानों को देखा…

अपनों का बेगानापन देखा

परायों का अपनापन देखा

रिश्तों की उलझन देखी

रुकती सांसों ने

हौले से ज़िंदगी को मुस्कुराते देखा…

तड़प को भी तड़पते देखा

आंसुओं में ख़ुशियों को देखा

नफ़रत को प्यार में बदलते देखा

रिश्तों के मेले में

कितनों को मिलते-बिछड़ते देखा…

नाकामियों का मंज़र देखा

डूबती उम्मीदों का समंदर देखा

वजूद की जद्दोज़ेहद देखी

एक ज़िंदगी ने

हज़ारों ख़्वाहिशों को मरते देखा…

– ऊषा गुप्ता

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Hindi Kavita

सुनो ना…

सावन से पहले चले आना

बड़ा तरसी है आरज़ू तेरी ख़ातिर

इस बरस खुल के बरस जाना

मद्धिम हवा को साथ लिए

कुछ गुनगुनी बूंदों को हाथ लिए

जब दूर कहीं सूरज ढले

जब यहीं कहीं गगन धरा से मिले

दबे पांव

धीमी दस्तक से

दर मेरा खटखटाना

सुनो ना…

सावन से पहले चले आना

                                               – मंजू चौहान

 

मेरी सहेली वेबसाइट पर मंजू चौहान की भेजी गई कविता को हमने अपने वेबसाइट में शामिल किया है. आप भी अपनी कविता, शायरी, गीत, ग़ज़ल, लेख, कहानियों को भेजकर अपनी लेखनी को नई पहचान दे सकते हैं

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किसी की ज़िंदगी इतनी आसान

तो किसी की इतनी मुश्किल क्यों है?

काव्य

किसी के पास सब कुछ है

तो कोई कंगाल क्यों है?

 

कोई अकेले होकर भी किसी के साथ है

तो कोई भीड़ में भी तन्हा क्यों है?

 

कोई ग़मों में भी मुस्कुराता है

तो कोई ख़ुशियों में भी उदास क्यों है?

 

कोई एक लम्हे में ज़िंदगी जी लेता है

तो कोई ज़िंदगीभर उस एक लम्हे की

तलाश में क्यों है?

 

कोई अपने फैसलों में आज़ाद है

तो कोई रिश्तों की ज़ंजीरों में कैद क्यों है?

 

किसी को पल भर में ख़ुदा मिल जाता है

तो किसी का इंतज़ार इतना लंबा क्यों है?

 

किसी का सपना एक उड़ता हुआ गुब्बारा

तो किसी का आसमान क्यों है?

 

किसी के पास रास्ते ही रास्ते हैं

तो किसी के पास हर बार बंद दरवाज़ा क्यों है?

 

किसी की ज़िंदगी इतनी आसान

तो किसी इतनी मुश्किल आख़िर क्यों है?…

                                           – शिल्पी राय जेम्स

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Hindi Gazal

जब भी मैंने देखा है दिलदार तुम्हारी आंखों में

चाहत का इक़रार मिला हर बार तुम्हारी आंखों में

 

रमता जोगी भूल गया है रस्ता अपनी मंज़िल का

देख लिया है उसने अब इक़रार तुम्हारी आंखों में

 

जो सदियों से गुम था मेरा, आज मिला दिल क़िस्मत से

उसको मैंने ढूंढ़ लिया दिलदार तुम्हारी आंखों में

 

जिसको योगी ढूंढ़ रहे थे, युगों युगों से जंगल में

मैंने है वो खोज लिया इसरार तुम्हारी आंखों में

 

हर कोई मेरी जां का दुश्मन बना हुआ है महफ़िल में

जाने कितने 1फ़ितने हैं सरकार तुम्हारी आंखों में

vedprakash pahwa

वेद प्रकाश पाहवा ‘कंवल’

  1. शरारतें

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कौन कहता है अकेले ज़िंदगी नहीं गुज़रती

मैंने चांद को तन्हा देखा है सितारों के बीच में

Kavay

 

कौन कहता है ग़म में मुस्कुराया नहीं जाता

मैंने फूलों को हंसते देखा है कांटों के बीच में

कौन कहता है पत्थरों को एहसास नहीं होता

मैंने पर्वतों को रोते देखा है झरने के रूप मेंं

कौन कहता है दलदल में जाकर सब गंदे हो जाते हैं

मैंने कमल को खिलते देखा है कीचड़ के बीच में

कौन कहता है दूसरे की आग जला देती है

मैंने सूरज को जलते देखा है ख़ुद की आग में

कौन कहता है ज़िम्मेदारी निभाना आसान नहीं होता

मैंने प्यार से सबका बोझ उठाते देखा है धरती माता के रूप में

– रेश्मा कुरेशी

मेरी सहेली वेबसाइट पर रेश्मा कुरेशी की भेजी गई कविता को हमने अपने वेबसाइट में शामिल किया है. आप भी अपनी कविता, शायरी, गीत, ग़ज़ल, लेख, कहानियों को भेजकर अपनी लेखनी को नई पहचान दे सकते हैं…

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