Nirbhaya Gangrape

निर्भया की मौत को आठ साल हो गए, लेकिन हमारे देश में अब भी कुछ नहीं बदला. एक बार फिर उत्तरप्रदेश के हाथरस में एक बेटी गैंगरेप की शिकार हुई और उसकी भी निर्मम मौत हो गई. बलात्कारियों ने हैवानियत की सारी हदें पार कद दी. बलात्कारियों ने उस बेटी को इतनी पीड़ा दी है ,जिसकी हम और आप कल्पना भी नहीं कर सकते. बलात्कारियों ने उस बेटी की जीभ काट ली, रीढ़ की हड्डी पर गंभीर चोट की और उसे गला घोंटकर मारने की भी की. और आखिरकार उसकी मृत्यु हो गई. हाथरस में गैंगरेप की शिकार हुई देश की इस बेटी की निर्मम मृत्यु कई सवाल खड़े करती है. क्या इस देश में बेटी होना गुनाह है? क्या इस देश में बेटियों की स्थिति कभी नहीं सुधरेगी? क्या इस देश में कोई भी, किसी भी लड़की के साथ दुष्कर्म कर सकता है? इस देश में बेटियों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम कब उठाए जाएंगे?

Hathras Gangrape Case

ये है हाथरस गैंगरेप का सच
यूपी के हाथरस में 19 साल की एक दलित लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार ने एक बार फिर पूरे देश की झकझोर कर रख दिया है. घटना 4 सितंबर की है, जब चार वहशी दरिंदों ने 19 साल की लड़की के साथ न सिर्फ दुष्कर्म किया, बल्कि उसकी जीभ काट ली, रीढ़ की हड्डी पर गंभीर चोट की और उसे गला घोंटकर मारने की भी की. इतने जख्मों के साथ पीड़िता का अलीगढ़ के स्थानीय अस्पताल में इलाज चल रहा था, लेकिन जब उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ तो उसे दिल्ली के सफ़दरजंग अस्पताल लाया गया. वहां भी उसकी हालत नहीं सुधरी और आखिरकार उसकी मृत्यु हो गई.

अंतिम संस्कार में माता-पिता को शामिल नहीं किया गया
हाथरस गैंगरेप की शिकार लड़की का अंतिम संस्कार रात 3 बजे किया गया और उसके अंतिम संस्कार में उसके माता-पिता को शामिल नहीं किया गया. लड़की की मां अपनी बेटी को हल्दी लगाकर आखिरी विदाई देना चाहती थीं, लेकिन उनकी ये इच्छा भी पूरी नहीं हो सकी. यहां पर सवाल ये उठता है कि आखिर रात 3 बजे अंतिम संस्कार करने की जरूरत क्या थी? अंतिम संस्कार के लिए उसके मृत शरीर को उसके माता-पिता को क्यों नहीं सौंपा गया?

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क्या निर्भया की तरह इस बेटी को भी न्याय मिलने में लंबा समय लगेगा?
निर्भया को इन्साफ मिलने में पूरे आठ साल लग गए. निर्भया के साथ हुए बलात्कार के समय पूरा देश सड़कों पर आ गया था, तब ऐसा लग रहा था कि अब देश में बेटियों की स्थिति सुधरेगी, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. कुछ समय पहले हैदराबाद में एक डॉक्टर के साथ हुए बलात्कार के समय जब पुलिस ने आरोपियों का एनकाउंटर कर दिया था, तो पूरे देश ने इसका समर्थन किया था कि ऐसे दोषियों के लिए यही सज़ा सही है. एक बार फिर देश की एक और बेटी गैंग रेप का शिकार हुई और आज वो हमारे बीच नहीं है. आपको क्या लगता है, उसके दोषियों को क्या सज़ा मिलनी चाहिए?

Hathras Gangrape Case

हाथरस गैंगरेप पर फूटा बॉलीवुड सेलेब्स का गुस्सा, ट्वीट करके मांगा इंसाफ
हाथरस गैंगरेप मामले में बॉलीवुड सेलिब्रिटीज़ ने ट्वीट करके अपना गुस्सा जाहिर किया है और इन्साफ की मांग की है. कंगना रनौत से लेकर अक्षय कुमार, विराट कोहली, स्वरा भास्कर समेत कई सेलिब्रिटीज़ ने पीड़िता के लिए इंसाफ मांगा है. आप भी पढ़िए सेलिब्रिटीज़ के ये ट्वीट:

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आज सिर्फ निर्भया को न्याय नहीं मिला है, निर्भया की मां (Nirbhaya’s Mother) आशा देवी (Asha Devi) के संघर्ष को भी न्याय मिला है. निर्भया की मां आशा देवी ने जिस तरह अपनी बेटी को खोने के बाद उसके दोषियों को सज़ा दिलाने के लिए संघर्ष किया है, वो पूरे देश के लिए एक मिसाल है. निर्भया की मां आशा देवी ने भारतीय क़ानून व्यवस्था से सात साल बिना थके, बिना रुके, बिना डरे लड़कर देश को दी न्याय की आशा दी है. निर्भया के दोषियों को मिली सज़ा के बाद अब बलात्कारियों के मन में मौत का खौफ़ ज़रूर होगा और देश की बेटियां बेखौफ़ होकर घर से निकल सकेंगी.

asha devi Nirbhaya's Mother

ये है देश की बेटियों की जीत!
निर्भया के दोषियों को फांसी की सज़ा मिलने के बाद निर्भया की मां आशा देवी ने कहा, ये देश की बेटियों की जीत है. जैसा कि हम सब जानते हैं निर्भया के दोषियों के वकील ने दोषियों को बचाने की हर मुमकिन कोशिश की, निर्भया के केस को सात साल तक न्याय नहीं मिलने दिया, लेकिन निर्भया की मां आशा देवी ने हार नहीं मानी, वो अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए लगातार संघर्ष करती रहीं.

सच की हमेशा जीत होती है
निर्भया के चारों दोषियों विनय कुमार शर्मा (Vinay Kumar Sharma), पवन कुमार गुप्ता (Pawan Kumar Gupta), मुकेश सिंह (Mukesh Singh) और अक्षय कुमार सिंह (Akshay Kumar Singh) को आज यानी शुक्रवार, 20 मार्च 2020 को सुबह 5:30 बजे तिहाड़ जेल में फांसी पर लटका दिया गया है. आज यानी 20 मार्च 2020 का दिन इतिहास में निर्भया न्याय दिवस के रूप में दर्ज हो गया है. आज का दिन सही मायने में बेटियों के नाम है. आज देश की सभी बेटियों और उनके माता-पिता का देश की न्याय व्यवस्था पर भरोसा और बढ़ जाएगा. निर्भया के दोषियों को फांसी की सज़ा मिलने पर देशभर में ख़ुशी की लहर देखने को मिल रही है.

यह भी पढ़ें: निर्भया को मिला न्याय: निर्भया के चारों दोषियों को मिली फांसी की सज़ा (Nirbhaya Gets Justice: Nirbhaya’s All Four Convicts Hanged Till Death)

निर्भया की मां आशा देवी के संघर्ष को पूरे देश का सलाम!
आप निर्भया की मां आशा देवी के संघर्ष के लिए क्या कहना चाहते हैं, हमें कमेंट करके ज़रूर बताएं!

निर्भया (Nirbhaya) को आखिरकार सात साल बाद न्याय मिल गया है. निर्भया के चारों दोषियों विनय कुमार शर्मा (Vinay Kumar Sharma), पवन कुमार गुप्ता (Pawan Kumar Gupta), मुकेश सिंह (Mukesh Singh) और अक्षय कुमार सिंह (Akshay Kumar Singh) को आज यानी शुक्रवार, 20 मार्च 2020 को सुबह 5:30 बजे फांसी पर लटका दिया गया. आज के दिन को निर्भया न्याय दिवस के रूप में मनाया जाएगा. आज का दिन सही मायने में बेटियों के नाम है. आज देश की सभी बेटियों और उनके माता-पिता का देश की न्याय व्यवस्था पर भरोसा और बढ़ जाएगा. निर्भया के दोषियों को फांसी की सज़ा मिलने पर देशभर में ख़ुशी की लहर देखने को मिल रही है.

निर्भया को सात साल बाद मिला न्याय
निर्भया केस में दोषियों को सज़ा न मिल पाने से लोगों के मन में आक्रोश था. आख़िरकार आज की सुबह निर्भया न्याय दिवस के रूप में बेटियों के लिए एक उम्मीद की किरण लेकर आई है. अब देश की बेटियां घर से बाहर निकलने से डरेंगी नहीं. देश की बेटियों के माता-पिता को भी इस बात की तसल्ली रहेगी कि भारत की न्याय व्यवस्था उनके और उनकी बेटियों के साथ है.

बलात्कारियों को सज़ा का डर होना ज़रूरी है
निर्भया के दोषियों को सज़ा मिलने से अब बलात्कारियों के मन में सज़ा का डर होगा और बलात्कार के मामले ज़रूर कम होंगे. देश की बेटियां बिना डरे घर से बाहर निकल सकेंगी. बेटियों के माता-पिता भी निश्चिंत होकर अपनी बेटियों को घर से बाहर भेज सकेंगे.

निर्भया न्याय दिवस पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट करके ज़रूर बताएं.

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16 दिसंबर, 2012 में हुए निर्भया गैंगरेप की घटना से पूरे देश में आक्रोश का सैलाब उमड़ पड़ा था. आज 5 मई, 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने उसके चारों दोषियों की मौत की सज़ा के फैसले को बरक़रार रखने के फैसले पर अंतिम मुहर लगाई. सभी ने कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया. निर्भया, जो इस घटना की रात दिल्ली में अपने एक मित्र के साथ फिल्म देखकर बस से घर वापस लौट रही थी. तब बस में मौजूद छह बदमाशों ने न केवल उसके साथ छेड़छाड़ व सामूहिक बलात्कार किया, बल्कि निर्भया व उसके मित्र के साथ अमानवीय अत्याचार भी किए. इंसानियत को शर्मसार कर देनीवाली इस घटना ने पूरे देश को सदमे में ला दिया था. फिर कुछ दिनों के इलाज के बाद निर्भया की मृत्यु हो गई थी, तब निर्भया के दोषी को सज़ा दिलाने के लिए पूरा देश एक हो गया था. कहते हैं, क़ानून के इंसाफ़ में देर है, पर अंधेर नहीं. आख़िरकार छह दोषियों में से चार को मौत की सज़ा सुना दी गई. आरोपियों ने हाई कोर्ट के फैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई. लेकिन तमाम गवाहों व सुनवाई के बाद आख़िरकार सुप्रीम कोर्ट ने आज फांसी की सज़ा को बरक़रार रखा.
इस दिल दहला देनेवाले शर्मनाक सामूहिक बलात्कार में छह आरोपी थे. इसमें मुख्य आरोपी बस ड्राइवर राम सिंह ने तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली थी. और एक नाबालिग आरोपी बाल सुधार गृह में तीन साल की सज़ा काटने के बाद जमानत पर रिहा हो गया. आज सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला प्रताड़ित होती महिलाओं के लिए मील का पत्थर साबित होगा, इसमें कोई दो राय नहीं है.

– ऊषा गुप्ता