Numbers

क्या वाकई नंबर्स हमारी ज़िंदगी से इस क़दर जुड़े होते हैं कि उनकी संख्या का बढ़ना या घटना हमें सफल या असफल बना सकता है? क्या 1 तारीख़ को पैदा हुए लोग वाकई हमेशा नंबर 1 बने रहते हैं और 8 नंबर वालों को बहुत मेहनत के बाद सफलता मिलती है? क्या है अंकशास्त्र यानी न्यूमेरोलॉजी का रहस्य और अंक हमारे जीवन को किस तरह प्रभावित करते हैं? आइए, जानते हैं.

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नंबर 1
न्यूमेरोलॉजी के रूलिंग नंबर 1 का स्वामी सूर्य है. 1 नंबर वाले लोग अपने फील्ड में भी नंबर वन होते हैं. इन्हें लीडर भी कहा जा सकता है. 1, 10, 19, 28 तारीख़ को जन्मे लोगों का रूलिंग नंबर 1 होता है. ऐश्‍वर्या राय, धीरूभाई अंबानी, मुकेश अंबानी, रतन टाटा, लता मंगेशकर आदि का रूलिंग नंबर 1 है.
नंबर 2
न्यूमेरोलॉजी के रूलिंग नंबर 2 का स्वामी चंद्र है. 2, 11, 20,29 तारीख़ को जन्मे लोगों का रूलिंग नंबर 2 होता है. अमिताभ बच्चन, शाहरुख ख़ान आदि इसके अंतर्गत आते हैं. इस नंबर वाले लोग अपने फ़ील्ड के सुपर स्टार होते हैं और ये काफ़ी पॉप्युलर भी होते हैं.
नंबर 3
न्यूमेरोलॉजी के रूलिंग नंबर 3 का स्वामी गुरु है. इस नंबर वाले लोग ख़ूब पैसा कमाते हैं. ये अपना काम ज़ीरो से शुरू करते हैं और उसमें काफ़ी नाम और पैसा कमाते हैं. 3, 12, 21, 30 तारीख़ को जन्मे लोग इस कैटेगरी में आते हैं. गोविंदा, रजनीकांत, करीना, रानी आदि का रूलिंग नंबर 3 है.

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न्यूमेरोलॉजिस्ट श्‍वेता जुमानी के अनुसार, “9 ग्रहों के 9 नंबर्स हमारे व्यक्तित्व, व्यवहार को रूल करते हैं और हमारी सफलता या असफलता का कारण भी बनते हैं. अपने डेट ऑफ़ बर्थ यानी जन्म तारीख़ पर तो हमारा कंट्रोल होता नहीं, लेकिन नाम को लकी बनाकर काफ़ी हद तक हम अपना भाग्य बदल सकते हैं. आज अनिल कपूर, इमरान हाशमी, सुनील शेट्टी, इरफ़ान ख़ान, अनु मलिक, अजय देवगन से लेकर स्मृति ईरानी, पूनम ढिल्लन, तनुश्री दत्ता, श्‍वेता साल्वे, सेलीना जेटली जैसे कई सेलिब्रिटीज़ हमसे कंसल्ट करने यूं ही नहीं चले आते. न्यूमेरोलॉजी के सही प्रेडिक्शन ही इसकी लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण हैं.”

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नंबर 4
न्यूमेरोलॉजी के रूलिंग नंबर 4 का स्वामी राहू है. इस अंक वाले लोग काफ़ी बुद्धिमान और स्पिरिचुअल होते हैं. इनका एक माइनस प्वाइंट है कि ये एडजस्ट नहीं कर पाते. तब्बू, जूही, उर्मिला मातोंडकर आदि का रूलिंग नंबर 4 है.
नंबर 5
न्यूमेरोलॉजी के रूलिंग नंबर 5 का स्वामी बुध है. ये बहुमुखी प्रतिभा के धनी होते हैं इसलिए किसी भी काम से बहुत जल्दी बोर हो जाते हैं और अलग-अलग फील्ड में काम करना पसंद करते हैं. 5, 14, 23 तारीख़ को जन्मे लोग 5 अंक की श्रेणी में आते हैं. हिमेश रेशमिया, आमिर ख़ान का रूलिंग नंबर 5 है.
नंबर 6
न्यूमेरोलॉजी के रूलिंग नंबर 6 का स्वामी शुक्र है. इस फील्ड के लोग फिल्म, मीडिया, स्पोर्ट्स आदि से जुड़ना पसंद करते हैं और उसमें ख़ूब नाम कमाते हैं. 6, 15, 24 तारीख़ को जन्मे लोगों का रूलिंग नंबर 6 है. माधुरी दीक्षित, आलिया भट्ट, सचिन तेंदुलकर, सुभाष घई, कपिल देव, सानिया मिर्ज़ा, संजय लीला भंसाली आदि इस श्रेणी में आते हैं.

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न्यूमेरोलॉजिस्ट भाविक सांघवी मानते हैं कि अंकशास्त्र तभी सही रिज़ल्ट दे सकता है, जब उसे पूरी तरह फॉलो किया जाए. उनके अनुसार, ⁛ज़्यादातर लोग समझते हैं कि न्यूमेरोलॉजी में स़िर्फ नाम बदलना होता है और आपकी क़ामयाबी पक्की समझो, पर असल में ऐसा है नहीं. स़िर्फ नाम बदलने से ज़िंदगी नहीं बदलती, इसके साथ-साथ मंत्र, दान, उपवास, लकी जेम स्टोन्स, नंबर, कलर आदि का भी ध्यान रखना होता है. आपके बर्थ और कंपाउंड नंबर्स किसके साथ मैच करते हैं और किस समय पर कौन-सा काम आपको शुभ फल देगा, इसके अनुसार यदि कार्य किए जाएं तो ही सही रिज़ल्ट मिल पाते हैं. मेरे पास गोविंदा, सुष्मिता सेन, पूजा बेदी, अपरा मेहता जैसे कई सेलिब्रिटीज़ के अलावा कई कॉमन लोग भी आते हैं और उन्हें इस साइंस का फ़ायदा भी मिला है. फ़िल्म इंडस्ट्री में ही नहीं, आम लोगों में भी न्यूमेरोलॉजी का चलन बढ़ रहा है. फिल्म स्टार्स की कोई भी बात छुपी नहीं रहती इसलिए लोगों इसकी जानकारी तुरंत मिल जाती है.”

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नंबर 7
न्यूमेरोलॉजी के रूलिंग नंबर 7 का स्वामी केतु है. इस अंक वाले लोग काफ़ी भावुक और मूडी होते हैं, यही वजह है कि ये क्रिएटिव भी होते हैं. आर्ट से जुड़ना इन्हें पसंद होता है. 7, 16, 25 तारीख़ को जन्मे लोगों का रूलिंग नंबर 7 होता है. एकता कपूर, महेन्द्र सिंह धोनी, सैफ़ अली ख़ान, करण जौहर, कैटरीना कैफ़, विपाशा बसु, शोभा डे आदि इस श्रेणी में आते हैं.
नंबर 8
न्यूमेरोलॉजी के रूलिंग नंबर 8 का स्वामी शनि है. इस नंबर को अमूमन अनलकी माना जाता है, लेकिन ये लोग यदि स्पिरिचुअल हों तो ये इनके लिए फ़ायदेमंद होता है. इस राशि के लोगों को इनकी क़ाबिलियत के अनुसार सफलता नहीं मिल पाती. 8, 17, 26 तारीख़ को जन्मे लोग इस कैटेगरी में आते हैं. मदर टैरेसा, आसाराम बापू, सौरव गांगुली, शबाना आज़मी, आशा भोसले, शिल्पा शेट्टी आदि का रूलिंग नंबर 8 है.
नंबर 9
न्यूमेरोलॉजी के रूलिंग नंबर 9 का स्वामी मंगल है. ये तेज़ ग्रह है इसलिए इस अंक वाले लोग बहुत ग़ुस्से वाले होते हैं. आर्मी के ़ज़्यादातर ऑफ़िसर्स भी 9 अंक वाले ही पाए जाते हैं. 9, 18, 27 तारीख़ को जन्मे लोग इस श्रेणी में आते हैं. सलमान ख़ान, सुनिल शेट्टी, अक्षय कुमार, जैकी चैन, ब्रूसली आदि का रूलिंग नंबर 9 है.

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न्यूमरोलॉजिस्ट श्‍वेता बरड़िया किसी भी विज्ञान को 100% सही नहीं मानतीं. उनके अनुसार, “कोई भी शास्त्र किसी के भी भविष्य की सौ फीसदी गारंटी नहीं दे सकता और न ही किसी की तक़दीर बदल सकता है. हां, अन्य शास्त्रों की तरह न्यूमेरोलॉजी भी बारिश में छाते का काम ज़रूर करती है. लेकिन तेज़ बारिश में जाने पर जिस तरह छाता साथ होते हुए भी शरीर पर बारिश के कुछ छींटे पड़ते ही हैं, उसी तरह कर्मों का फल तो भुगतना ही होता है, न्यूमेरोलॉजी कुछ हद तक आपकी राह आसान कर सकता है. आप अपने अच्छे समय में किसी अंक या ज्योतिषशास्त्री के पास जाते हैं और आपका सब कुछ अच्छा होता चला जाता है तो आपका इस पर विश्‍वास बढ़ने लगता है. लेकिन बुरे समय में जब यही शास्त्र असर नहीं दिखा पाता तो यक़ीन करना थोड़ा मुश्क़िल हो जाता है. कोई भी शास्त्र रात को दिन या दिन को रात में नहीं बदल सकता, ये स़िर्फ बता सकता है कि आगे खाई मिलेगी, लेकिन उसे पार तो आपको ही करना होगा. लोग कहते हैं कि अमिताभ बच्चन ने जब से नीलम की अंगूठी पहनी है, तब से उनका अच्छा समय शुरू हो गया, लेकिन तब हम ये सोचना क्यों भूल जाते हैं कि आज वे जादूगर, अजूबा, तू़फ़ान जैसी फ़िल्में नहीं साइन कर रहे हैं.”

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न्यूमेरोलॉजी में 1, 3, 5, 6 को पॉजीटिव नंबर कहा जाता है, इन नंबर्स के लोगों को क़ामयाबी पाने के लिए अन्य नंबर्स के मुक़ाबले कम मेहनत करनी पड़ती है. 2 और 7 क्रिएटिव नंबर माने जाते हैं, इन नंबर्स के लोग ज़्यादातर क्रिएटिव फ़ील्ड में क़ामयाबी हासिल करते हैं. न्यूमेरोलॉजी के सबसे टफ़ नंबर हैं 4, 8 और 9, इन नंबर्स के लोगों को क़ामयाबी पाने के लिए ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है. 8 नंबर वालों को तो ज़्यादातर 35 साल के बाद ही क़ामयाबी मिल पाती है.

– कमला बडोनी 

 

child activities final
बच्चों की मासूमियत और चंचलता हम सभी को लुभाती है, लेकिन ऐसा भी न हो कि बच्चों की चंचलता इतनी भी न बढ़ जाए कि पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान ही न दे पाएं. सभी पैरेंट्स चाहते हैं कि उनका बच्चा पढ़ाई में सबसे आगे रहे, जिसके लिए बहुत ज़रूरी है कि बच्चा पूरी तरह एकाग्र होकर पढ़ाई करे, क्योंकि एकाग्र हुए बिना अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा सकता. सफलता के लिए एकाग्रता आवश्यक है.

 

आजकल के टेक्नोसेवी युग में टीवी, मोबाइल, वीडियो गेम्स जैसे डिवाइस आ गए हैं, जो बच्चे को विचलित करने के लिए काफ़ी हैं. इससे उनका ध्यान एक जगह नहीं टिक पाता. कई बार बच्चे के तंग करने पर हम ही उन्हें ये चीज़ें पकड़ा देते हैं और फिर शिकायत करते हैं कि बच्चे में ना तो धैर्य है और ना ही एकाग्र होने की क्षमता.
जब बच्चा 1 से 3 साल का होता है, तो उसके कौशल सीमित होते हैं. उसे दिखनेवाली हर चीज़ नई प्रतीत होती है. इससे उसका ध्यान एक साथ अनेक चीज़ों पर होता है. वह इन चीज़ों और आसपास के वातावरण को समझने की कोशिश करता रहता है. इसलिए उसका ध्यान अलग-अलग चीज़ों में बंटने लगता है.
3 से 7 साल के बच्चे में एकाग्रता बढ़ने लगती है. वह अपनी पसंद की चीज़ों पर ध्यान लगाना और नापसंद चीज़ों को इग्नोर करना सीख जाता है. यही वह समय है, जब नीचे बताई गई कुछ एक्टिविटीज़ करके खेल-खेल में ही बच्चे की समझने की क्षमता बढ़ाकर उसकी एकाग्रता बढ़ाई जा सकती है.

1. मेमरी गेम
* इस गेम को खेलने के लिए बच्चों को चीज़ों, फलों, सब्ज़ियों आदि के नाम पता होने चाहिए, तभी वे यह गेम खेल सकते हैं. इस गेम के लिए टेबल पर कुछ चीज़ें- पेन, पेंसिल, कॉपी, बुक या अन्य कोई भी चीज़ रखें. बच्चे को 30 सेकंड तक ध्यान से देखने के लिए कहें. बाद में वे चीज़ें हटा दें या उन्हें कपड़े से ढंक दें. अब बच्चे से उन चीज़ों के नाम पूछें.
* यदि ज़्यादा बच्चे खेल रहे हों, तो जो बच्चा पूरे नाम या ज़्यादा से ज़्यादा नाम बताए, उसे इनाम दें.
* इसमें बदल-बदलकर कभी फल, सब्ज़ियां, खिलौनेवाले पक्षी, जानवर या घर की चीज़ें रखी जा सकती हैं, ताकि खेल में नवीनता रहे.
फ़ायदा- इस गेम को खेलने से बच्चे में याद रखने और फोकस करने की क्षमता बढ़ती है.

2. मिसिंग लेटर/वर्ड
* बच्चे के सामने चित्रवाली या स्पेलिंगवाली क़िताब रखें. क़िताब में उसे कोई 1 चित्र या स्पेलिंग या कोई लेटर अथवा वर्ड ढूंढ़ने के लिए कहें. 30 सेकंड या चाहें, तो उससे कम समय दें.
* इसे दूसरी तरह से भी खेला जा सकता है. कुछ चीज़ों की स्पेलिंग लिखें और जान-बूझकर एक शब्द ना लिखें. बच्चे से वही मिसिंग वर्ड लिखने के लिए कहें. हां, समय अवश्य निर्धारित कर दें.
* आजकल मार्केट में ऐसे गेम्स की क़िताबें उपलब्ध हैं. इस एक्टिविटी को घर बैठे ही आसानी से करवाया जा सकता है.
फ़ायदा- मिसिंग चीज़ें/लेटर ढूंढ़ने के लिए, कम समय देने से बच्चे ज़्यादा ध्यान से ढूंढ़ते हैं. इससे उनका कान्संट्रेशन बढ़ता है.

3. अंताक्षरी
* गानों की अंताक्षरी तो सभी खेलते हैं, बच्चों के लिए अलग तरह की खेलें. अंताक्षरी किसी जानवर के नाम से शुरू करें. नाम के अंतिम अक्षर को बोलें. दूसरा बच्चा उस अक्षर से नाम कहे, फिर उसके अंतिम अक्षर को चुनकर तीसरा बच्चा कोई नाम कहे, जैसे-डॉग, गोरिल्ला, लोमड़ी आदि.
* बच्चों को अंताक्षरी का अभ्यास होने के बाद, अंताक्षरी का टाइप चुनें. कभी जानवरों की, कभी पक्षियों की, कभी फल-सब्ज़ियों, कभी लोगों के नामों की अंताक्षरी खेलें. बच्चे बहुत एंजॉय करेंगे.
फ़ायदा- इस गेम में बच्चों को बहुत मज़ा आता है. चूंकि यह बहुत तेज़ी से फटाफट खेला जाता है, अतः यह बच्चे के मस्तिष्क को उत्तेजित और प्रोत्साहित करने का कार्य करता है.

4. मिसिंग नंबर्स
* इस गेम में नंबर्स (संख्याएं) बोले जाते हैं, जिसमें जान-बूझकर एक-दो नंबर छोड़ दिए जाते हैं. इसे ही बच्चे को पहचानना है, जैसे- 3, 4, 5, 7, 9. इसमें 6 और 8 मिसिंग है. यदि बच्चा नहीं पहचान पाता, तो फिर से शुरू करें.
* अभ्यास होने पर 2 संख्याओं 12 से 19 तक मिसिंग नंबर्स खेलें. इसके बाद पहाड़ों (टेबल्स) 2, 4, 6, 8 से अभ्यास करवाएं.
फ़ायदा- इससे सोचने, याद रखने और फोकस करने की शक्ति बढ़ती है. बच्चों को तेज़ी से पहाड़े सिखाने का यह बहुत अच्छा तरीक़ा है.

5. मिसिंग थिंग्स
* बच्चे को कमरे की चीज़ें दिखाकर याद रखने के लिए कहें और उसे बाहर भेज दें. अब 1-2 चीज़ें हटा दें और उसे पहचानने के लिए कहें.
फ़ायदा- इस गेम को खेलने से, घर में या बच्चे के स्कूल बैग में एक भी चीज़ मिसिंग हो जाए, तो बच्चे को पता चल जाता है. इससे याद रखने की क्षमता बढ़ती है.

6. टंग ट्विस्टर
* पहले सरल टंग ट्विस्टर, ‘कच्चा पापड़, पक्का पापड़’ बोलने को कहें. जब बच्चे की ज़ुबान पलटने लगे, तो कठिन, ‘चंदू के चाचा ने चंदू की चाची को चांदनी रात में चांदी की चम्मच से चटनी चटाई.’ इसी तरह अंग्रेज़ी टंग ट्विस्टर की प्रैक्टिस करवाएं ‘she sells sea shells on the sea shore’. इस तरह के बहुत से टंग ट्विस्टर आपको मिल जाएंगे.
फ़ायदा- यह बहुत तेज़ी से कहना होता है. ग़लतियां होंगी, तो भी आपका बच्चा आनंद उठाएगा और सही कहने की पूरी कोशिश से ध्यान लगाएगा. इससे एकाग्रता के
साथ-साथ उसका शब्द भंडार भी बढ़ेगा.

7. अपोज़िट्स (विरुद्धार्थी)
* इस गेम में बच्चे को अपोज़िट्स कहना होता है, जैसे- मोटा-पतला, हैपी-सैड आदि. इसे खेलने के लिए आपके बच्चे को अपोज़िट्स पहले से पता होने चाहिए.
फ़ायदा- इससे एकाग्रता बढ़ने के साथ-साथ शब्दों की समझ भी बढ़ती है.

8. माइंड-बॉडी समन्वय
* बच्चों द्वारा खेला जानेवाला गेम ‘स्टेच्यू और ओवर’ बेहद फ़ायदेमंद है, जिसमें ‘स्टेच्यू’ में 1 ही स्थिति में लंबे समय तक बिना
हिले-डुले खड़ा होना होता है.
फ़ायदा- इस गेम में बॉडी और माइंड यानी शरीर और मस्तिष्क दोनों को एक साथ काम करना होता है. इससे ‘सेल्फ कंट्रोल’ बढ़ता है.
यह एक्टिविटी बॉडी और ब्रेन के बीच के नर्व (नाड़ी) संबंधों को मज़बूत करती है. इससे फोकस बढ़ता है.

9. कॉइन गेम
* इस गेम में अलग-अलग सिक्कों का ढेर बनाएं- 1, 2 या 5 के सिक्के, जिसमें से 5 सिक्के अलग निकालकर एक निश्‍चित क्रम में (1,2,5) एक के ऊपर एक रखें. बच्चे से इसी क्रम में सिक्के रखने को कहें. आप देखेंगे कि अभ्यास के बाद बहुत कम समय में वह गेम पूरा कर लेगा.
फ़ायदा- इससे बच्चे की सोचने की शक्ति, याद रखने की क्षमता और ध्यान (अटेंशन) बढ़ता है. बच्चा जितना ज़्यादा खेलेगा, उसकी स्मरणशक्ति और फोकस उतना ही बढ़ेगा.

10. उल्टा-पुल्टा
* इस खेल में बच्चे को हफ़्ते के दिन, साल के महीने, नंबर्स, इंद्रधनुष के रंग उल्टे-पुल्टे बताएं. अब उन्हें सही क्रम में बताने को कहें.
फ़ायदा- इससे याद रखने की क्षमता व एकाग्रता बढ़ती है.

11. पहेलियां (पज़ल्स)
* शुरुआत सरल पहेली से करें. बच्चे को पहेली में कोई संकेत दें और पहचानने के लिए कहें, जैसे- मैं स़फेद हूं, तुम मुझे पी सकते हो (दूध). इसी तरह सरल से कठिन पहेलियां बूझने दें.
फ़ायदा- इससे बच्चे की क्रिएटिविटी व एकाग्रता बढ़ेगी.

12. आवाज़ पहचानना
* यह छोटे बच्चों के लिए बेहतर है. बच्चे को आंख बंद करने के लिए कहें. अब पक्षियों या जानवरों की आवाज़ निकालें. इस तरह के कैसेट भी मार्केट में मिलते हैं. अब बच्चे को आवाज़ पहचानने के लिए कहें.
फ़ायदा- चूंकि इस गेम में आंखें बंद होती हैं और ध्यान पूरी तरह से आवाज़ पर होता है, तो इससे एकाग्रता बढ़ती है.

ध्यान दें…

* बच्चों से एक्टिविटीज़ करवाते समय आसपास शोर ना हो, न तो म्यूज़िक बज रहा हो, ना ही टेलीविज़न चल रहा हो.
* हमेशा शुरुआत छोटे व सरल गेम से करें, धीरे-धीरे उसे लंबा और कठिन बनाते जाएं.
* अकेले बच्चे से एक्टिविटीज़ करवाने की बजाय 1-2 बच्चे और बुला लें. आपस में स्पर्धा से बच्चे और अच्छा करने की कोशिश करेंगे और दोस्तों के होने से एंजॉय भी करेंगे.

– डॉ. सुषमा श्रीराव
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