obesity

बॉलीवुड में कब किसकी किस्मत चमक जाए और कब कोई स्टार फ्लॉप हो जाए, कहना मुश्किल है. यहां चढ़ते सूरज को सब सलाम करते हैं, लेकिन जिसके सितारे बुलंद नहीं, उसे कोई याद नहीं रखता. बॉलीवुड में कुछ अभिनेता ऐसे भी हैं, जिन्होंने अपने समय में अच्छी फिल्में की, लेकिन जब उनकी फिल्में फ्लॉप होने लगी, तो उन्हें काम मिलना बंद हो गया. इसका खामियाज़ा ये हुआ कि लोग उन्हें भूल गए और ये स्टार भी फिट से फैट हो गए हैं. अब आप इन्हें देखेंगे, तो इनका मोटापा देखकर हैरान रह जाएंगे.

Bollywood Actors Become Obese After Being Flopped In Bollywood

1) फरदीन खान (Fardeen Khan)
बॉलीवुड में कभी फरदीन खान चॉकलेटी हीरो के रूप में जाने जाते थे, तब फरदीन काफी हैंडसैम हुआ करते थे. लाखों लड़कियां उन पर फ़िदा थी. फरदीन ने अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत साल 1998 में फिल्म ‘प्रेम अगन’ से की थी. उनकी आखिरी फिल्म 2010 में ‘दूल्हा मिल गया’ आई थी. फरदीन का फिल्मी करियर कोई ख़ास नहीं रहा, क्योंकि उनकी लगभग हर फिल्म फ्लॉप हो जाती थी. फिल्मों से दूरी बनाने के बाद फरदीन खान काफी मोटे हो गए हैं. सोशल मीडिया पर उनकी लेटेस्ट तस्वीरों का मजाक भी उड़ा था.

Fardeen Khan fit to fat

2) उदय चोपड़ा (Uday Chopra)
यश राज चोपड़ा जैसे महान फिल्म मेकर के बेटे उदय चोपड़ा अपने एक्टिंग करियर में ख़ास कमाल नहीं दिखा पाए. उदय चोपड़ाने वर्ष 2000 में ‘मोहब्बतें’ फिल्म से अपने एक्टिंग करियर की शरुआत की थी. इस फिल्म में शाहरुख़ और अमिताभ भी थे इसलिए फिल्म चल गई थी. उदय चोपड़ा ‘धूम’ सीरिज में सपोर्टिंग एक्टर के रूप में भी नज़र आए, लेकिन उदय जब भी किसी फिल्म में लीड एक्टर प्ले करते हैं, तो वो फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह पिट जाती हैं. ऐसे में उदय को धीरे धीरे काम मिलना भी बंद हो गया. अब उदय चोपड़ा पर्दे के पीछे काम करते हैं. फिल्में न चलने के कारण उदय चोपड़ा पर्दे पर तो नज़र नहीं आ रहे हैं, लेकिन रियल लाइफ में वो अब इतने मोटे हो गए हैं कि लोग उन्हें पहचान ही नहीं पाते हैं.

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Uday Chopra fit to fat

3) हरमन बावेजा (Arman Baveja)
वर्ष 2008 में फिल्म ‘लव स्टोरी 2050’ से प्रियंका चोपड़ा के साथ डेब्यू करने वाले हरमन बावेजा बॉलीवुड में अपनी पहचान नहीं बना पाए. हरमन की पहली फिल्म के रिलीज़ के समय लोगो को ये लग रहा था कि वो बॉलीवुड में बड़े स्टार्स को कड़ी टक्कर देंगे, लेकिन ऐसा हो न सका. हरमन अपने फिल्मी करियर में कुछ ख़ास कमाल नहीं कर पाए. हरमन बावेजा ने वर्ष 2009 में ‘व्हॉट्स योर राशि’ फिल्म की थी, लेकिन ये फिल्म भी बुरी तरह फ्लॉप हुई थी. इस समय हरमन बावेजा इतने मोटे हो गए हैं कि उन्हें पहचानना मुश्किल है. कभी फिट दिखने वाले हरमन बावेजा अब फैट हो गए हैं.

Arman Baveja fit to fat

4) चंद्रचूड़ सिंह (Chandrachur Singh)
फैंस के बीच चॉकलेटी ब्वॉय के तौर पर जाने जाने वाले चंद्रचूड़ सिंह ने कई हिट फिल्में दीं, लेकिन आज वो गुमनामी की जिंदगी जी रहे हैं. बॉलीवुड की बेहतरीन फिल्मों में से एक ‘माचिस’ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत करने वाले एक्टर चंद्रचूड़ सिंह ने कई बेहतरीन फिल्मों में काम करके अपनी एक अलग पहचान बनाई. चंद्रचूड़ सिंह ने ‘तेरे मेरे सपने’, ‘माचिस’, ‘क्या कहना’, ‘जोश’, ‘दागः द फायर’ जैसी बेहतरीन फिल्मों में काम किया, लेकिन आज वो बॉलीवुड से जैसे गायब हो गए हैं. चंद्रचूड़ सिंह वर्ष 2017 में आखिरी बार फिल्म Yadvi – The Dignified Princess में एक महाराजा के रोल में नज़र आए थे. ख़बरों के अनुसार, वर्ष 2000 में चंद्रचूड़ सिंह के साथ एक हादसा हुआ था, जिसमें उनके कंधे बुरी तरह जख्मी हो गए थे. इस ज़ख्म से उबरने में उन्हें लगभग 10 साल का लंबा समय लग गया, जिसके कारण उनके फिल्मी करियर पर एक लंबा ब्रेक लग गया. बता दें कि चंद्रचूड़ सिंह ने क्लासिकल म्यूजिक सीखा हुआ है और बॉलीवुड में करियर बनाने से पहले दून यूनिवर्सिटी में म्यूजिक टीचर थे. चंद्रचूड़ सिंह इन दिनों में तो नहीं नज़र आते हैं, लेकिन बहुत मोटे ज़रूर नज़र आते हैं. कभी फिट और हैंडसम नज़र आने वाले चंद्रचूड़ सिंह अब बहुत मोटे हो गए हैं.

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Chandrachur Singh fit to fat

5) मुकुल देव (Mukul Dev)
मुकुल देव ने धारावाहिक ‘मुमकिन’ से अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की थी. इसके बाद वो ‘एक से बढ़कर एक’ ‘कहीं दिया जले कहीं जिया’, ‘कहानी घर घर की’, प्यार जिंदगी है’, ‘कभी कभी प्यार कभी कभी यार’ जैसे धारावाहिकों में नज़र आए. मुकुल ने ‘फियर फैक्टर इंडिया सीजन 1’ जैसे रियलिटी शो को भी होस्ट किया है. मुकुल देव को फिल्मों में पहला ब्रेक फिल्म ‘दस्तक’ में मिला. इसके बाद मुकुल ने ‘किला’, ‘वजूद’, ‘कोहराम’, ‘मुझे मेरी बीवी से बचाओ’ जैसी कई फिल्मों में काम किया. हाल ही में मुकुल ‘यमला पगला दीवाना’, ‘सन ऑफ सरदार’. ‘जय हो’, ‘आर. राजकुमार’ आदि फिल्मों में भी नज़र आए. मुकुल अब तक हिंदी, पंजाबी, बंगाली, कन्नड़ और तेलुगू भाषाओँ की फिल्मों में काम कर चुके हैं. एक्टिंग का इतना अनुभव होने और इतना सारा काम करने के बावजूद मुकुल देव अपनी फिटनेस का ध्यान नहीं रख पाए और अब वो मोटे हो गए हैं. अब आप मुकुल देव को देखेंगे तो पहचान ही नहीं पाएंगे.

Mukul Dev fit to fat

6) शादाब खान (Shadab Khan)
रानी मुखर्जी के साथ फिल्म ‘राजा की आएगी बारात’ से बॉलीवुड में अपने करियर की शुरुआत करने वाले शादाब खान फिल्मों में कोई ख़ास कमाल नहीं कर पाए. अमजद खान के बेटे होने के बावजूद उन्हें बॉलीवुड में सफलता नहीं मिली. अब तो उनका लुक भी इतना बदल गया है कि एक पल को दर्शक उन्हें पहचान भी नहीं पाएंगे. फ्लॉप फिल्मों ने शादाब खान को भी फिट से फैट बना दिया है.

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Shadab Khan fit to fat

क्या आप अचानक मोटी हो गई हैं? आपकी लाइफस्टाइल में कोई बदलाव नहीं आया है, आप कोई जंक फूड या तला हुआ खाना भी नहीं खा रहे हैं, आपको समझ नहीं आ रहा है कि आखिर आपका वजन क्यों बढ़ रहा है. क्या आप अपने बढ़े हुए वजन को कम नहीं कर पा रहे हैं? यदि बिना वजह आपका वजन बढ़ रहा है, तो आपको अपने भावनात्मक स्वास्थ्य पर ध्यान देना होगा, क्योंकि मोटापे का इमोशनल कनेक्शन भी होता है. आखिर क्या है मोटापे का इमोशनल कनेक्शन, इसके बारे में बता रही हैं ट्रांसफॉर्मेशन कोच हित्ती रंगनानी.

Lose Weight Naturally

क्या है मोटापे का इमोशनल कनेक्शन?
मोटापा ज्यादा खाने से ही बढ़े ये जरूरी नहीं है, कई बार बेवजह वजन बढ़ने लगता है और स्थिति खतरनाक हो सकती है, क्योंकि ऐसे वजन बढ़ने का संबंध हमारे इमोशनल हेल्थ यानी भावनात्मक स्वास्थ्य से जुड़ा होता है. हमारी भावनाओं का हमारे शरीर पर इतना गहरा प्रभाव पड़ता है कि इससे हमें असाध्य बीमारी तक हो सकती है. स्वस्थ रहने के लिए शरीर ही नहीं, मन के स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना जरूरी है. यदि बिना वजह आपका वजन बढ़ रहा है, तो आपको अपने भावनात्मक स्वास्थ्य पर ध्यान देना होगा और इसका उपाय करना होगा.

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मोटापे का इमोशनल कनेक्शन जानने के लिए देखें ट्रांसफॉर्मेशन कोच हित्ती रंगनानी का ये वीडियो:

मोटापा कम करने के लिए अपनाएं ये 10 प्राकृतिक उपाय
मोटापा कम करने का प्राकृतिक तरीक़ा बहुत आसान है, इसके लिए आपको पैसे खर्च करने की भी जरूरत नहीं है. आइए, हम आपको मोटापा कम करने के 10 आसान और असरदार प्राकृतिक उपाय बताते हैं.

1) हेल्दी डायट का पहला मंत्र है दिनभर में थोड़ा-थोड़ा खाना इसलिए पूरे दिनभर में 5 बार खाएं. साथ ही यह भी देखें कि आप किस समय क्या खा रही हैं.
2) रोज़ सुबह उठकर सबसे पहले नींबू का रस और शहद मिला गरम पानी पीएं. अगर आपको अपना कोलेस्ट्रॉल कम करना है, तो गरम पानी में दालचीनी मिला सकती हैं, डायबिटीज़ कम करना है तो मेथी दाना भिगोकर मिला सकती हैं, सर्दी है तो पानी में हल्दी मिला सकती हैं. इन चीज़ों से सेहत अच्छी रहती है, वज़न घटना है और ख़ूबसूरती बढ़ती है.
3) अंकुरित अनाज, गाय का दूध, अंडे, नट्स आदि को अपने सुबह के नाश्ते में शामिल करें. इडली, डोसा, पोहा आदि भी ले सकती हैं.
4) नाश्ता व दोपहर के खाने के बीच में जब थोड़ी भूख होती है, उस समय मौसमी फल खाने चाहिए. ये आपको एनर्जी के साथ-साथ विटामिन्स और मिनरल्स भी प्रदान करते हैं, जिससे रोग-प्रतिरोधक शक्ति भी बढ़ती है. फलों के नियमित सेवन से आपको कम कैलोरी में सभी न्यूट्रीएंट्स मिल जाते हैं और ये वज़न कम करने में मददगार होते हैं.
5) दोपहर के खाने में ज्वारी, बाजरा, नाचनी से बनी रोटी खाएं. साथ ही हरी सब्ज़ियां व सभी प्रकार की दालें खा सकती हैं. भोजन के साथ सलाद भी खाएं. कैलोरीज़ कम करने के लिए रोटी में घी न लगाएं. सब्ज़ियों व दाल में भी कम घी/तेल का तड़का लगाएं. मसाले जैसे- हल्दी, कालीमिर्च, हींग आदि के प्रयोग से भोजन को स्वादिष्ट बनाया जा सकता है. इन मसालों से शरीर का मेटाबॉलिज़्म भी बढ़ता है, जिससे वज़न कम होने में मदद मिलती है.

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6) शाम के नाश्ते में नारियल पानी, छाछ या दही लिया जा सकता है. भूने हुए चने, ब्राउन ब्रेड सैंडविच, फ्रूट आदि भी ले सकती हैं.
7) रात को हल्का खाना जैसे- सूप, सलाद, खिचड़ी आदि लेने से वज़न कम होता है. रात के खाने और सोने में लगभग 3 घंटे का अंतर होना चाहिए.
8) स्लिम और जवां नज़र आने के लिए हेल्दी डायट के साथ-साथ वर्कआउट भी बेहद ज़रूरी है. इसके लिए रोज़ाना एक घंटा मॉर्निंग वॉक, जॉगिंग, एक्सरसाइज़, योग, मेडिटेशन आदि के लिए ज़रूर निकालें.
9) रात में जल्दी सोने और सुबह जल्दी उठने की आदत डालें, ताकि आपको पर्याप्त नींद मिल सके. सुबह जल्दी उठने से आप वर्कआउट के लिए आसानी से समय निकाल पाएंगे.
10) अपनी हॉबीज़ यानी शौक के लिए समय निकालें. हमारे शौक हमें खुश रखते हैं और हमारा तनाव दूर करते हैं, इससे इमोशनल मोटापा नहीं बढ़ता.

मैं 18 साल की हूं और मेरा वज़न 75 किलो है. पिछले 1 साल से डायटिंग और एक्सरसाइज़ द्वारा मैं अपना वज़न कम करने की कोशिश कर रही हूं, लेकिन वह घटने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है. मेरे चेहरे पर भी काफ़ी बाल हैं. मैं काफ़ी तनावग्रस्त रहती हूं. कृपया, मेरी मदद करें.
– रीना, रांची.

आपने यह नहीं बताया कि इन समस्याओं के साथ क्या आपको अनियमित माहवारी की भी समस्या है. आपको पॉलिसिस्टिक ओवेरियन सिन्ड्रोम की प्रबल संभावना लगती है, जिसके कारण वज़न बढ़ना, हिरसुट़िज़्म (अधिक बाल होना), कील-मुंहासे और अनियमित माहवारी होती है. लेकिन यह ज़रूरी नहीं कि सभी मरीज़ों में ये सभी लक्षण हों. यह एक सामान्य हार्मोनल समस्या है, जिसका पता सोनोग्राफ़ी और हार्मोन टेस्ट से चल जाता है. कुछ ऐसी दवाइयां हैं, जिनसे आपका मेटाबॉल़ि़ज़म बेहतर होने में मदद मिल सकती है. इससे चेहरे के बाल भी कम होंगे और माहवारी भी नियमित होगी.

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 Facial Hair
मेरी उम्र 48 वर्ष है. 2 साल पहले मेरी रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज़) हो गयी थी. मेरी समस्या ये है कि मुझे डिप्रेशन, अचानक बहुत ़ज़्यादा गर्मी लगना, योनि में सूखापन जैसी तकलीफ़ रहती है. कृपया, इस समस्या का उपाय बताएं.
– रचना, दिल्ली

आपको बहुत जल्दी मेनोपॉज़ हो गया है, अत: आपको इस बात का ख़ास ध्यान रखना चाहिए कि कहीं आपको ऑस्टियोपोेेेरोसिस की तकलीफ़ न हो जाए. अमूमन मेनोपॉज़ के बाद ऑस्टियोपोरोसिस यानी हड्डियों में कमज़ोरी की शिकायत होती है. इसके लिए आप नियमित एक्सरसाइज़ व कैल्शियमयुक्त डायट ले सकती हैं. सोया प्रोडक्ट से भी आपको फ़ायदा हो सकता है.

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Dr. Rajshree Kumar

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

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अक्सर मोटापे (Obesity) से बचने के चक्कर में लोग ऐसी आदतें अपना लेते हैं, जो मोटापा कम करने की बजाय बढ़ा देती हैं. भूखे रहना, ठीक से खाना न खाना, फैट्स अवॉइड करना, लो फैटवाली चीज़ें खाना आदि ऐसी आदतें हैं, जो अनजाने में ही आपका मोटापा बढ़ा रही हैं. तो सावधान हो जाइए और इन आदतों (Habits) से बचने की कोशिश कीजिए.

Habits That Make You Fat

1. ब्रेकफास्ट न करना

ज़्यादातर लोग यह ग़लती करते हैं. ब्रेकफास्ट न करने से शरीर का मेटाबॉलिज़्म धीमा हो जाता है, जिससे दोपहर के बाद आप ओवर ईटिंग करना शुरू कर देते हैं. रिसर्च में यह बात साबित हो चुकी है कि जो लोग ब्रेकफास्ट नहीं करते, वो बाकी लोगों के मुक़ाबले 5 गुना तेज़ी से मोटापे के शिकार होते हैं.

2. नींद कम लेना या ज़्यादा

वेक फॉरेस्ट यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स के अनुसार, अगर आप 5 घंटे या उससे कम नींद लेते हैं या फिर 8 घंटे से ज़्यादा सोते हैं, तो बाकी लोगों के मुक़ाबले आपका बेली फैट ढाई गुना तेज़ी से बढ़ेगा.

3. बहुत तेज़ी से खाना

अगर आप खाना देखते ही कंट्रोल नहीं कर पाते और जल्दी-जल्दी खाना खा लेते हैं, तो आप अन्य लोगों के मुक़ाबले ज़्यादा ओवरईटिंग करते हैं. दरअसल, हमारे ब्रेन को यह सिग्नल देने में कि पेट भर गया है 20 मिनट लगते हैं, इसलिए 10 मिनट में खाना ख़त्म न करें, बल्कि धीरे-धीरे चबा-चबाकर 20 मिनट तक खाएं. इससे आप ओवरईटिंग से बच जाएंगे.

4. लो फैटवाली चीज़ें खाना

वेट लॉस करने के लिए ज़्यादातर लोग लो फैटवाली चीज़ें खाना शुरू कर देते हैं, पर उन्हें यह जानकर हैरानी होगी कि कुछ कैलोरीज़ बचाने के चक्कर में वो ज़्यादा कैलोरीज़ खा लेते हैं. दरअसल, लो फैट प्रोडक्ट्स में मैन्युफैक्चरर्स फैट को शक्कर और दूसरे फैट्स से रिप्लेस करते हैं. ज़्यादा शक्कर के कारण आपको तुरंत भूख लग जाती है, जिससे आप आमतौर से डबल खा लेते हैं.

5. रोज़ाना सॉफ्ट ड्रिंक का सेवन

आपको शायद मालूम नहीं होगा कि एक सॉफ्ट ड्रिंक या सोडा में 11-15 ग्राम तक शक्कर होती है. सैन एंटोनियो के रिसर्चर्स ने इस बात का खुलासा किया है कि जो लोग रोज़ाना एक या दो सोडा पीते हैं, बाकी लोगों के मुक़ाबले उनका बेली फैट पांच गुना तेज़ी से बढ़ता है.

6. बहुत ज़्यादा टीवी देखना

जो लोग ज़्यादा टीवी देखते हैं, वो बाकी लोगों के मुक़ाबले ज़्यादा स्नैक्स खाते हैं. फैटी और फ्राइड ये स्नैक्स चुपके-चुपके आपका वज़न बढ़ाते हैं और आपका ध्यान भी नहीं जाता.

7. प्लास्टिक की बॉटल से पानी पीना

इस ओर शायद ही आपने ध्यान दिया हो कि आपकी प्लास्टिक की वॉटर बॉटल कई बीमारियों के साथ-साथ मोटापा भी दे सकती है. प्लास्टिक बॉटल्स में मौजूद बीपीए इसे बढ़ावा देते हैं, इसलिए जल्द से जल्द अपनी प्लास्टिक की वॉटर बॉटल को स्टेनलेस स्टील या तांबे से रिप्लेस करें.

8. छोटी-छोटी बातों पर स्ट्रेस

स्ट्रेस होने पर अक्सर लोगों को अनहेल्दी चीज़ें खाने की क्रेविंग होती है. इस चक्कर में वे ओवरईटिंग कर लेते हैं. इसे स्ट्रेस ईटिंग कहते हैं. स्ट्रेस ईटिंग कब आपकी आदत में शुमार हो जाता है, आपको पता भी नहीं चलता और आप मोटापे के शिकार हो जाते हैं.

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Habits That Make You Fat

9. बड़ी प्लेट में खाना

एक स्टडी में यह पाया गया कि अगर ऑप्शन दिया जाए, तो 98.6% लोग खाने के लिए बड़ी प्लेट उठाते हैं. बड़ी प्लेट यानी ज़्यादा खाना और ज़्यादा कैलोरीज़ यानी कुल मिलाकर आपका बढ़ता मोटापा. कोशिश करें कि छोटी प्लेट में खाएं, चाहें, तो दोबारा ले लें, पर बड़ी प्लेट अवॉइड करें.

10. पर्याप्त पानी न पीना

पर्याप्त पानी पीने से हमारे बॉडी के सभी फंक्शन्स सुचारु रूप से चलते रहते हैं, पर कम पानी पीने से इनमें समस्या आती है. जब शरीर में पानी की कमी होती है, तो उसकी जगह बॉडी फैट लेने लगता है, जो मोटापे का कारण बनता है.

11. एक्सरसाइज़ न करना

अगर आप सही तरी़के से डायट नहीं फॉलो कर पा रहे हैं, तो कम से कम हफ़्ते में 5 दिन रोज़ाना 45 मिनट तक एक्सरसाइज़ करें. अगर आप यह भी नहीं करेंगे, तो रोज़ाना की एक्स्ट्रा कैलोरीज़ से बढ़नेवाले मोटापे के लिए किसी को दोष नहीं दे पाएंगे.

12. हेल्दी फैट्स से भी दूरी

मोटापे से बचने के लिए बहुत से लोग फैट्स से एकदम दूर रहते हैं, जबकि फ्लैक्स सीड्स और ड्रायफ्रूट्स से मिलनेवाले फैट्स न स़िर्फ हेल्दी होते हैं, बल्कि स्लिम बने रहने में भी आपकी मदद करते हैं, इसलिए अपने रोज़ाना के डायट में हेल्दी फैट्स को शामिल करें.

13. नमक को अनदेखा करना

रिसर्च में यह बात सामने आई है कि बहुत से लोग ज़रूरत से ज़्यादा क़रीब 50% अधिक नमक का सेवन रोज़ाना करते हैं. पैक्ड फूड, प्रोसेस्ड फूड और वेफर्स जैसे स्नैक्स में सोडियम की मात्रा बहुत अधिक होती है. नमक हमारे शरीर में न स़िर्फ वॉटर रिटेंशन बढ़ाता है, बल्कि मोटापे को भी बढ़ाता है.

14. न्यूट्रीशन लेबल न देखना

मार्केट में कुछ भी ख़रीदते व़क्त हम पैकेट के आगे देखते हैं, कभी पलटकर पैकेट के पीछे नहीं देखते, वरना हमें पता चल जाए कि उस प्रोडक्ट में कितनी शक्कर, कितना सोडियम, कितना फैट और कितनी कैलोरीज़ हैं. अगली बार कोई भी स्नैक्स का पैकेट ख़रीदें, तो उसमें मौजूद शक्कर, कैलोरीज़ की मात्रा यकीनन आपको चौंका देगी. आपने सोचा भी नहीं होगा कि अनजाने में आपने कितनी कैलोरीज़ का ओवरडोज़ कर लिया.

15. खाने के तुरंत बाद सो जाना

ज़्यादातर लोग खाना खाते ही बिस्तर पर लुढ़क जाते हैं, जबकि डॉक्टर्स भी कहते हैं कि खाने के 2 घंटे बाद सोएं. इससे हमारे शरीर को खाने को पचाने के लिए समय मिल जाता है, लेकिन ऐसा न करने से हम ख़ुद अपना ही नुक़सान कर बैठते हैं.

– सुनीता सिंह

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Sugar Tips

इन 10 तरीक़ों से शक्कर कर सकती है आपको बीमार (10 Reasons Why Too Much Sugar Is Bad For You)

खाने में मिठास घोलनेवाली शक्कर (Sugar) की सच्चाई कितनी कड़वी है, इस बारे में शायद ही आपने कभी ध्यान दिया हो. शक्कर न स़िर्फ हमारी ज़िंदगी में पूरी तरह घुल-मिल गई है, बल्कि इसके साइड इफेक्ट्स (Side Effects) से हमारा स्वास्थ्य (Health) भी धीरे-धीरे घुल रहा है. रिफाइंड शक्कर का ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल कर अनजाने में ही आप कई बीमारियों को न्योता दे रहे हैं. कौन-सी हैं वो बीमारियां और कितनी हानिकारक है शक्कर, आइए देखते हैं.

मैं शक्कर हूं!

सबसे पहले तो आपको बता दें कि शक्कर एक कार्बोहाइड्रेट है. मार्केट में मिलनेवाली शक्कर गन्ने या स़फेद चुकंदर से बनी प्रोसेस्ड व रिफाइंड शक्कर होती है, जिसमें कोई भी पोषक तत्व नहीं होते. यह हमारे शरीर में स़िर्फ कैलोरीज़ जमा करती है.

क्यों हानिकारक है शक्कर?

प्रोसेसिंग के दौरान शक्कर की चमक बढ़ाने के लिए उसमें सल्फर डाइऑक्साइड, फॉस्फोरिक एसिड, कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड, एक्टिवेटेड कार्बन जैसे ख़तरनाक केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे इसके सारे पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं. यह पचने में भी इतनी हेवी होती है कि इसे पचाने के लिए शरीर को अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ती है. यह हमारे शरीर में धीरे-धीरे फैट के रूप में जमा होती रहती है, जो किसी न किसी बीमारी के रूप में बाहर निकलती है. यही वजह है कि इसे ‘स्लो व्हाइट पॉयज़न’ भी कहते हैं.

कहां-कहां से मिलती है शक्कर?

मार्केट में मिलनेवाली रिफाइंड शक्कर के अलावा कई और प्राकृतिक स्रोतों से भी हमें शक्कर मिलती है.

ग्लूकोज़: यह फलों और पौधों में पाया जाता है, जो फोटोसिंथेसिस के कारण बनता है. ज़रूरत पड़ने पर हमारा शरीर भी ग्लूकोज़ बनाता है.

फ्रूक्टोज़: यह फ्रूट शुगर होता है, जो फलों से मिलता है. यह गन्ने और शहद में पाया जाता है.

सुक्रोज़: यह गन्ना, स़फेद चुकंदर और कुछ ग्लूकोज़ के साथ कुछ फलों व सब्ज़ियों में भी पाया जाता है.

लैक्टोज़: दूध से मिलनेवाली इस शक्कर को हम मिल्क शुगर भी कहते हैं.

क्या होता है जब हम खाते हैं शक्कर?

जब हम किसी भी फॉर्म में शक्कर खाते हैं, तो हमारे शरीर के पास उसके लिए दो ऑप्शन्स होते हैं-

  1. उन कैलोरीज़ को बर्न करके एनर्जी में कनवर्ट करना.
  2. कार्बोहाइड्रेट्स को फैट में बदलकर फैट सेल्स में जमा करना.

हमारी बॉडी की एक्टिविटी इस बात पर निर्भर करती है कि उस दिन हमारे शरीर में कितनी शक्कर गई है. अगर शक्कर सही मात्रा में है, तो वो एनर्जी में कन्वर्ट होगी, लेकिन अगर ज़रूरत से ज़्यादा है, तो बॉडी फैट में बदल जाएगी.

कितनी शक्कर की होती है ज़रूरत?

वैसे तो हमें फलों और सब्ज़ियों से ज़रूरत के मुताबिक़ शक्कर मिल जाती है, लेकिन अगर आप रोज़ाना फल, सब्ज़ी और दूध नहीं लेते, तो अपने खाने में निम्नलिखित मात्रा से ज़्यादा शक्कर न लें.

पुरुष: रोज़ाना 9 टीस्पून या लगभग

37.5 ग्राम (150 कैलोरीज़)

महिला: रोज़ाना 6 टीस्पून या लगभग

25 ग्राम (100 कैलोरीज़)

रोज़ाना हमारे शरीर को लगभग 2000 कैलोरीज़ की ज़रूरत होती है, जिनमें से शक्कर का हिस्सा इतना ही है, लेकिन अगर आप इससे ज़्यादा शक्कर लेंगे, तो वो एक्स्ट्रा कैलोरीज़ आपको ही नुक़सान पहुंचाएंगी.

किस तरह बना सकती है रोगी?

शक्कर हमारे शरीर को कई तरह से प्रभावित करती है. किसी विशेष अंग को प्रभावित करने के साथ-साथ यह कई शारीरिक क्रियाओं पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती है.

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Sugar Control

  1. वज़न बढ़ाकर दे सकती है मोटापा

आजकल हम जो भी पैक्ड फूड, प्रोसेस्ड फूड और शुगरी ड्रिंक्स ले रहे हैं, उनमें भारी मात्रा में शक्कर होती है. इन प्रोडक्ट्स में आमतौर पर फ्रूक्टोज़ का इस्तेमाल किया जाता है, जो शक्कर की क्रेविंग्स को और बढ़ा देता है. जो लोग सॉफ्ट ड्रिंक्स, सोडा और पैक्ड फ्रूट जूसेज़ पीते हैं, उनका वज़न बाकी लोगों के मुक़ाबले तेज़ी से बढ़ता है.

  1. प्रभावित करती है इंसुलिन की प्रक्रिया

ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखने के लिए हमारा शरीर इंसुलिन रिलीज़ करता रहता है, लेकिन जब हम ज़रूरत से ज़्यादा शक्करवाली चीज़ें

खाने-पीने लगते हैं, तब शरीर को बहुत ज़्यादा इंसुलिन बनाना पड़ता है, जिससे इंसुलिन प्रोडक्शन का पूरा सिस्टम बिगड़ जाता है और शरीर इंसुलिन की ज़रूरत को पूरा नहीं कर पाता. इससे टाइप 2 डायबिटीज़, हार्ट डिसीज़ और मेटाबॉलिक सिंड्रोम जैसी बीमारियां जन्म लेती हैं.

  1. बढ़ा सकती है हार्ट डिसीज़ का ख़तरा

शक्कर के ओवरडोज़ से कई बीमारियां हो सकती हैं, उन्हीं में से एक है, हार्ट प्रॉब्लम्स, जो पूरी दुनिया में इस समय मौत का सबसे बड़ा कारण बन गया है. रिसर्च में यह बात साबित हो गई है कि ज़्यादा शक्कर के सेवन से ओबेसिटी,

इंफ्लेमेशन, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर हो सकता है. ये सभी हार्ट प्रॉब्लम्स के रिस्क फैक्टर्स हैं.

  1. बढ़ाती है कैंसर के रिस्क फैक्टर्स

मोटापा और इंसुलिन की कमी दोनों ही फैक्टर्स कैंसर को ट्रिगर कर सकते हैं. एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि जो महिलाएं हफ़्ते में तीन बार या उससे ज़्यादा कुकीज़ और बिस्किट्स खाती हैं, उनमें इंडोमेट्रियल कैंसर का ख़तरा बाकी महिलाओं के मुक़ाबले डेढ़ गुना ज़्यादा बढ़ जाता है.

  1. फंसा सकती है एनर्जी ड्रेनिंग साइकल में

अगर कमज़ोरी महसूस कर रहे हों, तो कुछ मीठा खा लें, एनर्जी तुरंत बूस्ट हो जाती है, पर क्या आप जानते हैं कि अगर शक्कर के साथ प्रोटीन, फाइबर या फैट नहीं हो, तो वो एनर्जी टिक नहीं पाती और तुरंत नष्ट हो जाती है. जितनी तेज़ी से एनर्जी लेवल बढ़ता है, उसी तेज़ी से घट जाएगा, जिससे आप दोबारा विकनेस फील करेंगे. इस एनर्जी ड्रेनिंग साइकल से बचना चाहते हैं, तो स़िर्फ शक्करवाली चीज़ें लेना अवॉइड करें. आप लो फील कर रहे हैं, तो कोई शुगरी ड्रिंक पीने की बजाय सेब के साथ कुछ बादाम खा लें.

  1. दे सकती है आपको फैटी लिवर

लंबे समय तक हाई फ्रूक्टोज़ डायट के इस्तेमाल से फैटी लिवर का ख़तरा बढ़ जाता है. ग्लूकोज़ और अन्य तरह की शक्कर शरीर के अन्य सेल्स में घुल जाती हैं, पर फ्रूक्टोज़ स़िर्फ और स़िर्फ लिवर में घुलती है. लिवर उसे एनर्जी के रूप में इस्तेमाल करता है, लेकिन जब ज़रूरत से ज़्यादा फ्रूक्टोज़ लिवर में आने लगता है, तो वह फैट में बदलने लगता है, जिससे धीरे-धीरे लिवर फैटी होने लगता है.

  1. बढ़ने लगती हैं दांतों की बीमारियां

पिछले कुछ सालों में दांतों की बीमारियां तेज़ी से बढ़ी हैं, क्योंकि हमारे

खान-पान में शक्कर की मात्रा तेज़ी से बढ़ी है. हमारे मुंह में बहुत से हेल्दी व अनहेल्दी बैक्टीरिया रहते हैं. शक्कर एक ऐसी चीज़ है, जिसके कारण अनहेल्दी बैक्टीरिया तेज़ी से बढ़ते हैं और हमें दांतों की समस्याएं होने लगती हैं. शक्कर के कारण दांतों पर एसिड अटैक्स ज़्यादा होते हैं, जो कैविटी का मुख्य कारण बनते हैं.

  1. बढ़ाती है यूरिक एसिड की मात्रा

यूरिक एसिड बनने का मुख्य कारण फ्रूक्टोज़ है. जब शरीर में फ्रूक्टोज़ का लेवल बढ़ जाता है, तो शरीर उसे यूरिक एसिड के रूप में बाहर निकालने लगता है, जिससे हार्ट और किडनी प्रॉब्लम्स शुरू हो जाती हैं.

  1. शुगर एडिक्शन को बढ़ाती है

क्या आप जानते हैं कि शक्कर किसी ड्रग एडिक्शन से कम नहीं है? जी हां, यह हम नहीं बल्कि रिसर्चर्स कहते हैं. उनके मुताबिक़, जब हम शक्करवाली चीज़ें खाते हैं, तो हमारे ब्रेन से डोपामाइन नामक हार्मोन रिलीज़ होता है, जो हमें और शक्कर खाने के लिए उकसाता है और न चाहते हुए भी हम शक्कर का ओवरडोज़ ले लेते हैं.

  1. कम उम्र में बना सकती है अल्ज़ाइमर और डिमेंशिया का शिकार

हमारा खानपान हमारे ब्रेन के स्ट्रक्चर और फंक्शनिंग को प्रभावित करता है. रिसर्चर्स के मुताबिक़, ज़रूरत से ज़्यादा शक्कर ब्रेन की उस फंक्शनिंग को प्रभावित करती है, जो हमारी मेमोरी को कंट्रोल करती है. लगातार शक्कर का ओवरडोज़ बहुत कम उम्र में आपको अल्ज़ाइमर और डिमेंशिया का शिकार बना सकता है.

क्या हैं शक्कर के हेल्दी विकल्प?

ऑर्गैनिक शहद: इसकी एंटीफंगल, एंटीबैक्टीरियल और एंटीमाइक्रोबियल प्रॉपर्टीज़ के कारण यह बेस्ट स्वीटनर माना जाता है. यह शक्कर से ज़्यादा मीठा होता है, इसलिए कम क्वांटिटी में इस्तेमाल होता है.

गुड़: इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने, आयरन लेवल को बढ़ाने, लिवर को डिटॉक्सिफाई करने के साथ-साथ यह सर्दी-खांसी में भी आपको राहत दिलाता है. जहां भी आपको शक्कर की ज़रूरत पड़ती हो, वहां गुड़ का इस्तेमाल करें.

खजूर: खजूर का इस्तेमाल आप हलवा, खीर जैसे डेज़र्ट्स और मिठाइयां बनाने के लिए कर सकते हैं. शक्कर की बजाय खजूर और काजू पाउडर आदि इस्तेमाल कर सकते हैं. ब्राउन शुगर की बजाय आप डेट शुगर का इस्तेमाल कर सकते हैं.

अनरिफाइंड शुगर: इसे रिफाइंड नहीं किया जाता, जिससे आयरन और मैग्नीशियम जैसे प्राकृतिक तत्व बने रहते हैं. देखने में यह भूरे रंग का होता है, जिसका स्वाद शहद जैसा होता है. रिफाइन्ड शक्कर की जगह इसका इस्तेमाल करें.

कोकोनट या पाम शुगर: यह एक बेहतरीन नेचुरल स्वीटनर है, क्योंकि इसे प्रोसेस करने के लिए किसी केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता. रोज़ाना की कुकिंग में इसे शामिल करें. चाय में डालकर आप रिफाइंड शक्कर से बच सकते हैं.

– अनीता सिंह

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Sex Life

हेल्थ प्रॉब्लम्स प्रभावित करती हैं आपकी सेक्स लाइफ (Health Problems That Affect Your Sex Life)

बीमारियों के चलते हम न स़िर्फ सेहतमंद ज़िंदगी के सुख से वंचित रह जाते हैं, बल्कि सेक्स क्रिया का सुख भी नहीं भोग पाते हैं. बीमारियों का हमारी सेक्स लाइफ पर क्या असर होता है तथा ये हमारी सेक्स लाइफ को किस तरह प्रभावित करती हैं? आइए, हम आपको बताते हैं.

 

धूल-मिट्टी, प्रदूषण, बदलती लाइफ स्टाइल और बदलते मौसम के चलते आए दिन हमें कई बीमारियों का सामना करना पड़ता है. ये बीमारियां हमारी सेहतमंद ज़िंदगी को प्रभावित करने के साथ ही हमारी सेक्स लाइफ पर भी गहरा असर डालती हैं. जानिए कौन-सी बीमारी से कैसे निपटना चाहिए?

डायबिटीज़

डायबिटीज़ का सेक्स लाइफ पर गहरा असर होता है. यह रोगी की कामेच्छा, परफॉर्मेंस और ऑर्गेज़्म को बुरी तरह से प्रभावित करता है. कई बार डायबिटीज़ के रोगी नपुंसक तक हो जाते हैं. जो लोग इंसुलिन लेते हैं, वो कई बार सेक्स क्रिया के दौरान अधिक उत्तेजना के चलते हाइपोग्लेसेमिया की चपेट में भी आ जाते हैं. सेक्स क्रिया के दौरान चक्कर आना, कंपन, धड़कनों का तेज़ होना, ध्यान केद्रिंत न कर पाना जैसी तकली़फें हाइपोग्लेसेमिया के संकेत हैं.

कैसे निपटें?

यदि हाइपोग्लेसेमिया का कोई भी संकेत नज़र आए, तो तुरंत शुगर की गोलियां लें. सेक्स क्रिया से पहले एक्स्ट्रा स्टार्ची कार्बोहाइड्रेट युक्त फूड, जैसे-पास्ता, चावल या ब्रेड खाने से बचें. साथ ही शुगर लेवल को भी नियंत्रण में रखें.

कोरोनरी हार्ट डिसीज़

कोरोनरी हार्ट पेशेंट को सेक्स के दौरान सांस लेने में तकलीफ़ या छाती में दर्द होने की संभावना हो सकती है, क्योंकि सेक्स क्रिया को अंजाम देते वक़्त अधिकांशतः कोरोनरी हार्ट डिसीज़ पेशेंट का हार्ट रेट बढ़ने लगता है तथा ब्लड प्रेशर भी हाई हो जाता है. ऐसे में यदि लगातार दो घंटे तक सेक्स क्रिया चलती रहे, तो अटैक आने की संभावना और भी बढ़ जाती है.

कैसे निपटें?

जिन हार्ट पेशेंट को हाल ही में हार्ट अटैक आया हो, उन्हें 3 से 6 सप्ताह तक सेक्स से परहेज़ करना चाहिए. कोरोनरी हार्ट डिसीज़ से पीड़ित रोगी को यदि डायबिटीज़ हो, तो अटैक आने की गुंज़ाइश और अधिक बढ़ जाती है. ऐसे पेशेंट को तभी सेक्स करना चाहिए, जब उनका ब्लड प्रेशर व पल्स रेट नॉर्मल हो. साथ ही ऐसे पेशेंट्स को भोजन के 3 घंटे बाद तक सेक्स से परहेज़ करना चाहिए.

मोटापा

हालांकि मोटापा एक आम समस्या है, लेकिन मोटापा सेक्स लाइफ को काफ़ी हद तक प्रभावित करता है. मोटापा न स़िर्फ संबंधित व्यक्ति की कामेच्छा को प्रभावित करता है, बल्कि उसके परफॉर्मेंस पर भी गहरा असर डालता है. कई बार मोटे व्यक्ति ऑर्गेज़्म का सुख भी नहीं भोग पाते हैं.

कैसे निपटें?

मोटापा न स़िर्फ आपकी सेक्स लाइफ को प्रभावित करता है, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी ठीक नहीं है. अतः सबसे पहले मोटापा कम करने की कोशिश करें. तली-भुनी चीज़ों के सेवन से परहेज़ करें. एक्सरसाइज़ एवं योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करें, ताकि आप सेक्स का भरपूर आनंद उठा सकें.

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Sex Life
अस्थमा

अस्थमा से पीड़ित रोगियों में सेक्स क्रिया के दौरान अधिक उत्तेजना के चलते अस्थमा का अटैक आने की संभावना होती है. कई बार महिलाओं में उनके पार्टनर के सेमिनल फ्लूइड में मौजूद प्रोटीन्स की एलर्जी के कारण भी सेक्स के दौरान अस्थमैटिक अटैक आने का ख़तरा बना रहता है. कई महिलाओं एवं पुरुषों को लैटेक्स एलर्जी के कारण कंडोम यूज़ करने पर अस्थमैटिक अटैक आने की गुंजाइश होती है.

कैसे निपटें?

सेक्स क्रिया से पहले ब्रोंकोडिलेटर थेरेपी लें. इससे आपको आराम मिलेगा. डॉक्टर की सलाह पर उचित एक्सरसाइज़ एवं दवाइयां भी आपको राहत दिलाएंगी.

हाइपोथायरॉइज़्म

हाइपोथायरॉइज़्म से पीड़ित व्यक्ति के शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव आते हैं, जैसे- अचानक से वज़न का बढ़ना, ज़्यादा गर्मी का एहसास होना आदि. नतीजतन ऐसे व्यक्ति की कामेच्छा भी कम हो जाती है.

कैसे निपटें?

डॉक्टर की मदद से थायरॉइड को कंट्रोल में रखने की कोशिश करें. इससे आपकी सेक्स लाइफ में संतुलन बना रहेगा.

पीठदर्द

पीठदर्द की वजह से न स़िर्फ आपकी दिनचर्या की गति धीमी हो जाती है, बल्कि आपकी सेक्स लाइफ भी प्रभावित होती है. कई बार सेक्स के दौरान ग़लत पोश्‍चर भी पीठदर्द का कारण बन जाता है, तो कई बार पीठदर्द के चलते सेक्स क्रिया का भरपूर आनंद नहीं लिया जा सकता.

कैसे निपटें?

सही एवं उचित पोश्‍चर में सेक्स क्रिया को अंजाम देने की कोशिश करें. पति-पत्नी दोनों में से जिसे पीठदर्द की शिकायत न हो, उसे टॉप पोजीशन अपनाने को कहें, जैसे- यदि पति को पीठदर्द की शिकायत है, तो पत्नी को तथा पत्नी को पीठदर्द की शिकायत है, तो पति को टॉप पोजीशन लेने को कहें. इसके साथ ही भुजंगासन, शलभासन, सुलभ उत्तासन, सर्पासन आदि आसन करें. इससे पीठदर्द से आराम मिलेगा.

आर्थराइटिस

आर्थराइटिस से पीड़ित रोगी की सेक्स लाइफ भी काफ़ी प्रभावित होती है. सेक्स में अधिक एक्सपेरिमेंट या मुद्राओं का प्रयोग ऐसे व्यक्तियों के लिए घातक साबित होता है तथा नए एक्सपेरिमेंट से उन्हें कई तरह की तकली़फें भी होती हैं.

कैसे निपटें?

सेक्स के दौरान ऐसे आसनों का प्रयोग करें, जिनसे जोड़ों पर अधिक दबाव न पड़े. हो सके तो पार्टनर को ही सेक्स क्रिया के दौरान एक्टिव रहने की सलाह दें.

 

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Fat Tax

कालेधन पर अंकुश के बाद अब सरकार की नज़र आपके मोटापे पर है, जी हां करप्शन फ्री देश की चाहत रखने वाली वर्तमान सरकार अब चाहती है कि हर देशवासी फिट रहे, तभी तो आपको मोटा बनाने वाले पिज़्ज़ा, बर्गर जैसे जंकफूड पर सरकार फैट टैक्स लगाने की तैयारी में है. इस टैक्स के बाद कोल्ड ड्रिंक्स और जंकफूड की कीमत बढ़ेगी.

Fat Tax

केरल सरकार कुछ महीनों पहले ही जंक फूड पर 5 फीसदी टैक्स लगा चुकी है. जापान और डेनमार्क ने भी कई साल से ऐसे ही टैक्स के जरिये मोटापे के खिलाफ जंग छेड़ रखी है. मोटापे के मामले में भारत दुनिया में तीसरे नंबर पर है. मोटापे के सबसे ज़्यादा शिकार 13 से 18 साल के बच्चे हैं. ’द वाल स्ट्रीट जर्नल’ में छपी एक ख़बर के मुताबिक, ब्रिटिश मेडिकल जर्नल ’लांसेट’ ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि 2014 में भारत में 2 करोड़ महिलाएं और करीब 98 लाख पुरुष मोटापे से ग्रस्त हैं. पिछले कुछ सालों में बच्चों ख़ासकर शहरी बच्चों में मोटापे की समस्या बहुत बढ़ी है और इसका कारण जंक फूड ही है. ख़बरों की मानें तो बजट में सरकार फैट टैक्स का एलान कर सकती है.

 

– कंचन सिंह

मोटापा कई बीमारियों की जड़ है. यह व्यक्ति को केवल शारीरिक तौर पर ही नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक तौर पर भी नुक़सान पहुंचाता है. एक रिसर्च के मुताबिक़ भारत में लगभग 50 फ़ीसदी तलाक की वजह है सेक्सुअली असंतुष्टि, जिसका मुख्य कारण है मोटापा. इसके बारे में और जानकारी दे रही हैं बैरिएट्रिक सर्जन डॉ. जयश्री टोडकर, डायरेक्टर, जेटी ओबेसिटी सॉल्यूशन एट मुंबई एंड पूणे.

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मोटापा है सेक्स का दुश्मन

– मोटापे का सीधा असर सेक्स ड्राइव पर पड़ता है.

–  दोनों में से एक पार्टनर अगर मोटा है, तो मोटे शरीर की वजह से सेक्स करते व़क्त वो सहज महसूस नहीं करता, जिसकी वजह से सेक्स में उसकी रुचि कम हो जाती है.

– मोटापे की वजह से शरीर का आकार बिगड़ जाता है, जिसकी वजह से वह अपने पार्टनर को सेक्स करने के लिए उत्तेजित या आकर्षित नहीं कर पाता है.

– सेक्स करने में झिझक या सही से परफॉर्म न करने की वजह से वैवाहिक जीवन में समस्याएं आने लगती हैंं.

– मोटापा सेक्सुअल एक्टिविटी को भी प्रभावित करता है. यौन क्रियाएं करने के लिए मसल्स का लचीला होना और शरीर में ऊर्जा का होना ज़रूरी है.

– बॉडी इमेज यानी मोटे शरीर को लेकर झिझक और शर्म महसूस करने की वजह से यह एक साइकोलॉजिकल समस्या भी बन गई है.

– मोटापे का असर सीधा मूड पर होता है. ख़राब मूड सेक्स क्रियाओं में बाधा बनता है.

– ज़्यादा वज़न स्टैमिना को प्रभावित करता है. स्टैमिना कम होने की वजह से ऑर्गेज़्म तक पहुंचने में द़िक्क़त हो सकती है.

– मोटापे की वजह से शरीर में हार्मोन्स का संतुलन बिगड़ जाता है. शरीर में फैट्स बढ़ने की वजह से टेस्टोस्टेरॉन हार्मोन के स्तर में गिरावट आ जाती है, जिसकी वजह से कामेच्छा कम हो जाती है. एक स्टडी में ये बात सामने आई है कि जब शरीर का फैट कम या ज़्यादा होता है, तो उसका सीधा असर कामेच्छा पर पड़ता है.

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पुरुषों को होती हैं ये समस्याएं

 

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इरेक्टाइल डिसफंक्शन

मोटापे की वजह से कई बीमारियां हो जाती हैं और शरीर के कई अंगों तक रक्त संचार ठीक से नहीं हो पाता. हाई कोलेस्ट्रॉल और टाइप 2 डायबिटीज़, हाई ब्लडप्रेशर जैसी बीमारियों की वजह से धमनियां ब्लॉक होने लगती हैं और जननांगों तक ब्लड सर्कुलेशन ठीक ढंग से नहीं हो पाता, जिसकी वजह से इरेक्टाइल डिसफंक्शन की समस्या हो सकती है.

प्रीमैच्योर इजेकुलेशन

मोटापे की वजह से पुरुष जल्दी स्खलित हो जाते हैं, जिसकी वजह से वो सेक्स के समय अपने पार्टनर को संतुष्ट नहीं कर पाते हैं.

टेस्टोस्टेरॉन में कमी

टेस्टोस्टेरॉन को मेल सेक्स हार्मोन भी कहा जाता है. इसकी कमी पुरुष को चिड़चिड़ा, गुस्सैल बना देती है. मूड का भी सीधा संबंध इस हार्मोन से होता है. इसकी कमी कामेच्छा को कम कर देती है. शरीर में अतिरिक्त फैट्स टेस्टोस्टेरॉन के स्तर को कम कर देता है. अमेरिका में हुए एक रिसर्च के मुताबिक़ मोटे लोगों में टेस्टोस्टेरॉन का स्तर 50 फ़ीसदी तक कम हो जाता है. टेस्टोस्टेरॉन की कमी इंफर्टिलिटी का कारण बन सकती है.

मोटापा साथ ले आता है बीमारियां

मोटे लोगों को ब्लडप्रेशर, हार्ट डिसीज़, डायबिटीज़ जैसी कई बीमारियां घेर लेती हैं, जिसकी वजह से दवाएं खानी पड़ती हैं. इन बीमारियों में ली जानेवाली दवाओं से भी कामेच्छा पर असर पड़ता है. एक रिसर्च के मुताबिक़ ओबेज़ यानी मोटे लोगों की सेक्स लाइफ में नॉर्मल वज़नवाले लोगों के मुकाबले 25 गुना ज़्यादा परेशानियां होती हैं.

महिलाओं की समस्याएं पुरुषों से ज़्यादा हैं

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आत्मविश्‍वास की कमी

मोटापे की शिकार महिलाओं में आत्मविश्‍वास कम हो जाता है. ख़ूबसूरत शरीर न होने की वजह से उन्हें ऐसा लगता है कि सेक्स करते व़क्त वो आकर्षक नहीं लगेंगी. सेक्सुअल एक्टिविटीज़ की क्वालिटी और मोटापे में सीधा संबंध होता है.

ब्लड सर्कुलेशन ठीक से न हो पाने का असर

केवल पुरुषों में ही मोटापे की वजह से ब्लड सर्कुलेशन की समस्या नहीं होती, महिलाएं भी इससे पीड़ित होती हैं. मोटापे के कारण वेजाइना तक रक्त संचार ठीक से न हो पाने के कारण सेक्स ड्राइव कम हो जाता है.

झिझक-शर्म महसूस होना

मोटापे की वजह से महिलाएं सेक्स के दौरान अपनी बॉडी इमेज को लेकर झिझक महसूस करती हैं, जिसकी वजह से वो खुलकर सेक्सुअल एक्टिविटीज़ में हिस्सा नहीं ले पाती हैं.

ऑर्गेज़्म तक न पहुंचना

मोटापे के कारण महिलाओं को ऑर्गेज़्म तक पहुंचने में भी द़िक्क़त होती है. कई महिलाओं को इंटरकोर्स के दौरान दर्द या जांघों की मांसपेशियों में होनेवाले खिंचाव के कारण भी सेक्स करने की इच्छा ख़त्म हो जाती है.

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मोटापा कम करें, सेक्सुअली फिट रहें

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– डायट में बदलाव करें. भले ही वज़न कम न हो पाए, लेकिन खानपान पर ध्यान रखकर सेक्स ड्राइव को बढ़ाया जा सकता है.

– लो फैट डायट के साथ फल व सब्ज़ियां खाएं. यह डायट ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में रखेगा और सेक्स करने की चाह बनाए रखेगा.

– आहार में सैचुरेटेड फैट की मात्रा कम करें और प्रोटीन की मात्रा बढाएं. इससे वज़न कम करने में मदद मिलेगी और सेक्स हार्मोन्स का संतुलन बना रहेगा.

– लाइफस्टाइल बदलें और वर्कआउट करें. ऐसी एक्सरसाइज़ या एक्टिविटीज़ जिससे जांघों, कमर, कूल्हों की मांसपेशियों तक रक्त संचार हो. इसके लिए ब्रिस्क वॉक यानी तेज़ चलना, योग, साइकिलिंग आदि एक्टिविटीज़ जननांगों तक रक्त संचार को बढ़ा देते हैं और मोटापा कम करने में भी मदद करते हैं, जिससे कामोत्तेजना बढ़ जाती है.

– अगर मोटापे का कारण आनुवांशिक है, तो डॉक्टर की मदद लें.

– जीवनशैली सुधारें. धूम्रपान, अल्कोहल से दूरी बनाएं.

कैसे पता करें कि आप ओबेज़ हैं?

 

1– यह जानने के लिए आपको अपना बीएमआई चेक करना होगा. बीएमआई यानी बॉडी मास इंडेक्स, जो ये बताता है कि हाइट के अनुसार आपका वज़न कितना होना चाहिए.

–  स्वास्थ्य मंत्रालय के मानकों के अनुसार भारतीयों में सामान्य बीएमआई 23 से कम होना चाहिए, जिनका बीएमआई 25 से ज़्यादा है, उन्हें मोटापे की श्रेणी में रखा गया है.

क्या है इलाज?

मोटापा एक ऐसी बीमारी है, जो व्यक्ति को डिप्रेशन में ले जाती है. कई बार एंटी डिप्रेज़ेंट दवाएं भी इसमें कारगर साबित नहीं होती हैं.
मोटापे का सही उपचार न हो पाने की वजह से कई बार व्यक्ति के शरीर में ज़रूरी विटामिन्स की कमी हो जाती है. एनीमिया, स्वभाव में चिड़चिड़ापन आदि समस्याएं भी हो जाती हैं. इसलिए इस समस्या का सही इलाज ज़रूरी है.

मोटापे के शिकार पार्टनर का मज़ाक न बनाएं

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अगर एक पार्टनर मोटापे का शिकार है, तो दूसरे पार्टनर की ज़िम्मेदारी है कि वो उसे कंफर्टेबल फील कराए. सेक्स के दौरान उसका मज़ाक न बनाए और न ही उसे अपमानित करे. अपने पार्टनर से इस समस्या के बारे में बात करे और वज़न कम करने के लिए प्रेरित करे.

डॉ. जयश्री का कहना है कि मोटापा केवल बाहरी अपीयरेंस नहीं है, बल्कि ये शरीर में हुए कई हार्मोनल और दूसरी शारीरिक प्रणाली मेंं आए बदलावों को दर्शाता है. ख़ुद से वज़न घटाना सही तरीक़ा नहीं है. न्यूट्रिशनल और मेटाबोलिक मूल्यांकन के बाद ही ओबेसिटी एक्सपर्ट्स मोटापे का ट्रीटमेंट करते हैं. विभिन्न मेटाबोलाइट, जैसे- यूरिक एसिड, लिपिड, हार्मोन्स, किडनी, लिवर फंक्शन आदि की जांच के बाद ही इलाज किया जाता है. ऊपर बताए गए मूल्यांकन के बाद इंटरनेशनल सेंटर ऑफ एक्सेलेंस गाइडलाइन्स के तहत मोटापे से पीड़ित के लिए उपयुक्त मेडिकल या सर्जिकल मार्ग अपनाया जाता है. डॉ. जयश्री का कहना है कि बैरियाट्रिक मेटाबोलिक ट्रीटमेंट से कई लोगों को सेक्सुअल फंक्शन के मामले में संतोषजनक परिणाम मिले हैं.

– प्रियंका सिंह

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