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ट्यूशन फीवर (How to get rid of tution fever?)

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एक समय था जब ट्यूशन पढ़ने की ज़रूरत स़िर्फ उन बच्चों को पड़ती थी, जो स्कूल की पढ़ाई के साथ कोपअप नहीं कर पाते थे, लेकिन आज पैरेंट्स अपने मंथली बजट में बच्चों की स्कूल फ़ीस के साथ-साथ ट्यूशन फ़ीस भी शामिल करना नहीं भूलते. बच्चों के लिए भी ट्यूशन जाना अब उनकी एज्युकेशन का अहम् हिस्सा बन चुका है. पैरेंट्स और स्टूडेंट्स के बीच ट्यूशन के इस ट्रेंड की ज़रूरत और इससे जुड़े तमाम पहलुओं के बारे में बता रही हैं सरिता यादव.

 

इस बार अच्छे मार्क्स नहीं लाओगे तो अगले सेशन से ट्यूशन जाना होगा… लेकिन मुझे वहीं ट्यूशन जाना है, जहां मेरा बेस्ट फ्रेंड नैतिक जाता है… नहीं, तुम वहीं ट्यूशन जाओगे जहां दीदी जाती है… पढ़ाई के दौरान पैरेंट्स और बच्चों के बीच इस तरह के संवाद होना आम बात है. मुद्दा होता है स़िर्फ और स़िर्फ परफ़ॉर्मेंस का, जिसके लिए ट्यूशन जाना ज़रूरी समझा जाता है. हमारी यही सोच ट्यूशन फ़ीवर को बढ़ावा दे रही है, जिसके चलते ट्यूशन्स की मांग तेज़ी से बढ़ती जा रही है.

ट्यूशन्स ऑन डिमांड

अनऑफ़िशियल इंडस्ट्री के तौर पर दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही ट्यूशन इंडस्ट्री आज स्टूडेंट्स और पैरेंट्स दोनों के बीच ऑन डिमांड है. पिछले 5 सालों में ट्यूशन्स की मांग 40 से 45% बढ़ गई है. 70% स्टूडेंट्स मैथ्स, केमिस्ट्री, फ़िज़िक्स जैसे सब्जेक्ट्स के लिए ट्यूशन्स पर ही आश्रित होते हैं.

क्या हैं वजहें?

मुंबई स्थित एक मशहूर कोचिंग क्लासेस के एकॅडेमिक मैनेजर सतीश ऑडोबा बताते हैं, “हमने देखा है कि 85 % स्टूडेंट्स स्कूल एज्युकेशन से ख़ुश नहीं होते. हमारे पास अधिकतर ऐसे पैरेंट्स आते हैं, जो बच्चों को उन सब्जेक्ट्स में स्ट्रॉन्ग बनाना चाहते हैं, जिनमें वे पहले से कमज़ोर हैं.” ट्यूशन्स पर निर्भरता का आलम ये है कि 5वीं कक्षा तक पढ़ रहे बच्चों को पैरेंट्स एज्युकेशन बेस मज़बूत करने के लिए ट्यूशन भेजते हैं और इसके बाद क्लास में अच्छे मार्क्स और बेहतर करियर के लिए एक्स्ट्रा क्लासेस के रूप में भी यह सिलसिला चलता ही रहता है.

ट्यूशन्स की बढ़ती मांग के पीछे अच्छे परफ़ॉर्मेंस के अलावा और भी कई कारण हैं, जैसे-
* 65% पैरेंट्स वर्किंग होने के नाते बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पाते इसलिए वे अपने बच्चों को ट्यूशन भेजते हैं.
* ओवर ऐम्बिशियस पैरेंट्स अपने एवरेज बच्चों को रैंकिंग लिस्ट में सबसे ऊपर देखने की उम्मीद में बच्चे केलिए ट्यूशन का सहारा लेते हैं.
* कई पैरेंट्स का मानना है कि ट्यूशन उनके बच्चे को बिज़ी रखता है और पढ़ाई के लिए उन्हें रेग्युलर और पंचुअल बनाता है.
* कई पैरेंट्स तो स़िर्फ दूसरे बच्चों के पैरेंट्स से कॉम्पिटीशन के चलते अपने बच्चों को ट्यूशन भेजते हैं.
* ऐसे पैरेंट्स भी हैं, जो अपने चंचल बच्चों को हैंडल नहीं कर पाते, इसलिए उन्हें ट्यूशन भेज देते हैं.
* मार्केट में इंग्लिश की बढ़ती डिमांड भी बच्चों को ट्यूशन जाने के लिए मजबूर कर रही है, क्योंकि जो पैरेंट्स इंग्लिश नहीं जानते, उन्हें इंग्लिश मीडियम से पढ़ रहे बच्चों को पढ़ाने में द़िक़्क़त होती है और ट्यूशन का सहारा लेना ही पड़ता है.

स्टूडेंट्स की नज़र में कितना ज़रूरी है ट्यूशन?

* ऐसा नहीं है कि स़िर्फ पैरेंट्स ही बच्चों को ट्यूशन भेजने के लिए परेशान रहते हैं, कई बार स्टूडेंट्स ख़ुद भी ट्यूशन जाने का निर्णय लेते हैं.
* अच्छे परफ़ॉर्मेंस के लिए कई स्टूडेंट्स ट्यूशन के नोट्स और ट्यूटर के साथ अपनी अंडरस्टैंडिंग को अहम् मानते हैं.
* 71% स्टूडेंट्स मानते हैं कि ट्यूशन्स से पढ़ाई में एक्स्ट्रा हेल्प मिलती है जो अच्छे मार्क्स पाने के लिए ज़रूरी है.
* वहीं 85% स्टूडेंट्स ये मानते हैं कि ट्यूशन्स में पढ़ाई फास्ट होती है. ट्यूशन में स्कूल से पहले पढ़ाया गया टॉपिक जब स्कूल में पढ़ाया जाता है तो ख़ुद-ब-ख़ुद माइंड में उसका रिविज़न हो जाता है.
* ज़्यादातर स्टूडेंट्स स्कूल टीचर से ज़्यादा ट्यूशन टीचर के साथ कंफ़र्टेबल महसूस करते हैं.
* चौंकानेवाली बात ये है कि एक तरफ़ जहां पैरेंट्स बच्चों के अच्छे परफ़ॉर्मेंस के लिए पैसे ख़र्च करने में पीछे नहीं हटते, वहीं 65% स्टूडेंट्स स़िर्फ, इसलिए ट्यूशन ज्वाइन करते हैं, क्योंकि उनके फ्रेंड्स भी ट्यूशन जाते हैं और इस मामले में वे ख़ुद को पीछे नहीं देखना चाहते.
* मात्र 22% स्टूडेंट्स ही ऐसे हैं जो ट्यूशन में लगने वाली फ़ीस को वेस्टेज ऑफ़ मनी मानते हैं.

कैसे करें ट्यूशन सलेक्शन?

* आप जो भी ट्यूशन सलेक्ट कर रहे हैं पहले उस टीचर के नोट्स की अन्य ट्यूशन टीचर के नोट्स से तुलना कर लें और जो बेहतर लगे उसे चुनें.
* ट्यूशन टीचर एक्सपीरियंस्ड, क्वालिफ़ाइड और अपने काम के प्रति ईमानदार हो, ये पहले जान लें.

* आपका बच्चा जिस सब्जेक्ट के लिए ट्यूशन जा रहा है उस सब्जेक्ट की टीचर को सही नॉलेज है या नहीं, यह भी ज़रूर पता करें.
* स्कूल टीचर को ही ट्यूशन टीचर बनाने से बचें, क्योंकि वो आपके बच्चे के लिए अगर सही टीचर होते तो आपके बच्चे को ट्यूशन की ज़रूरत ही नहीं पड़ती.

ट्यूशन के साइड इ़फेक्ट्स

वुमन एंड चाइल्ड साइकियाट्रिस्ट शरीता शाह बताती हैं, “हाल में ही मेरे पास एक ऐसी पेशेंट आई थी, जो 10वीं कक्षा में पढ़ रहे अपने बच्चे की ट्यूशन फ़ीस न भर पाने की वजह से इतनी चिंतित थी कि उसके कारण वह डिप्रेशन में आ गई और हो भी क्यों न, उसके बच्चे की ट्यूशन फ़ीस 1,90,000 रुपये जो थी.” शरीता कहती हैं,“ पहले पैरेंट्स स्कूल की पढ़ाई को प्राथमिकता देते थे और बच्चे को ट्यूशन तभी भेजते थे, जब उसे एक्स्ट्रा हेल्प की ज़रूरत होती थी, लेकिन आजकल स्कूल जाने से पहले ही बच्चे ट्यूशन जाना शुरू कर देते हैं और स्कूल की पढ़ाई को एक्स्ट्रा एज्युकेशन समझने लगते हैं. इस सोच के विकसित होते ही उनके एकेडेमिक करियर में ट्यूशन अपनी ख़ास जगह बना लेता है.”

हेल्दी नहीं है पढ़ाई का प्रेशर

मुंबई के एक म्युनिसिपल स्कूल में बतौर टीचर काम कर रही मयूरी चंद्रा दूसरे पैरेंट्स की तरह ही अपने बच्चे के कम मार्क्स से परेशान थीं. उन्होंने एक अच्छे ट्यूटर की तलाश की, लेकिन 6 महीने ट्यूशन पढ़ने के बावजूद उनके बेटे के मार्क्स काफ़ी कम आए. मयूरी तुरंत समझ गईं कि बेटे का समय ट्यूशन में बर्बाद करने से कोई फ़ायदा नहीं होगा. उनके बेटे को अपना समय अपनी दूसरी प्रतिभाओं को निखारने में लगाना चाहिए. उनका बेटा मोनो एक्टिंग में माहिर है और अब मराठी नाटकों में काम करके वाहवाही बटोर रहा है. बेटे की एक्टिंग से मिलनेवाली तारीफ़ों में मयूरी यह भूल गई हैं कि उनका बच्चा स्कूल के क्लास रूम में एक एवरेज स्टूडेंट है. मयूरी कहती हैं,“ मैंने अपने बेटे को वैसे ही स्वीकार कर लिया है जैसा वो है, इसलिए मैं पढ़ाई के लिए उस पर ज़्यादा दबाव नहीं देती. हां, समय-समय पर उसे एज्युकेशन के महत्व और ज़रूरत के बारे में ज़रूर बताती रहती हूं.”
विशेषज्ञ भी मानते हैं कि हर बच्चा क्लास का टॉपर हो यह ज़रूरी नहीं, लेकिन हर बच्चे में कुछ ख़ासियत ज़रूर होती है. क्लासरूम का एक एवरेज स्टूडेंट अन्य ऐक्टिविटीज़ में अपने क्लासमेट से बहुत आगे हो सकता है. पैरेंट्स इस बात का ध्यान रखें कि आज स़िर्फ एज्युकेशन में ही नहीं, अन्य एक्टीविटीज़ में भी बहुत प्रतियोगिता है. अत: अपने बच्चों को सही तरह से समझ कर ही उन पर एज्युकेशन संबंधी प्रेशर बनाएं, वरना स़िर्फ पढ़ाई के प्रेशर में बच्चों की क्रिएटिविटी नष्ट हो सकती है.

स़िर्फ ट्यूशन ही नहीं है विकल्प

* पैरेंट्स की व्यस्तता और स्कूल में बच्चे पर अच्छे परफ़ॉर्मेंस के प्रेशर ने पैरेंट्स के पास ट्यूशन के अलावा दूसरा कोई विकल्प छोड़ा भी नहीं है, लेकिन जो पैरेंट्स बच्चों की ट्यूशन फ़ीस पर बड़ी रकम नहीं ख़र्च कर सकते, उनके लिए ये ऑप्शन बेहतर साबित हो सकते हैं.
यदि दोनों पैरेंट्स वर्किंग हैं, तो आपस में तय करके कोई भी एक पार्टनर प्रतिदिन दो घंटे बच्चे को पढ़ाने की ज़िम्मेदारी ले.
* अगर आप बच्चे को ट्यूशन नहीं भेज सकते, तो घर के किसी भी शिक्षित और सक्षम व्यक्ति को बच्चे की पढ़ाई की ज़िम्मेदारी सौंप सकते हैं.
* अपने बच्चों को उनके स्कॉलर फ्रेंड्स के साथ ग्रुप में पढ़ाई करने की सलाह दें.
* ज़्यादा फ़ीस से बचने के लिए प्राइवेट ट्यूशन के बजाय अपनी कॉलोनी या सोसायटी के बच्चों के साथ ग्रुप ट्यूशन रखें.

ट्यूशन्स की हक़ीक़त बयां करते आंकड़े

* एसोचेम के सोशल डेवलपमेंट फ़ाउंडेशन के रिसर्च बताते हैं कि 38% पैरेंट्स हर महीने प्राइमरी लेवल के ट्यूशन पर 1000 रुपये और सेकेंडरी लेवल के ट्यूशन पर 3500 रुपये एक बच्चे पर ख़र्च करते हैं.
* मिडल क्लास फैमिली के पैरेंट्स अपने हर महीने की इन्कम का 1/3 हिस्सा बच्चों के प्राइवेट ट्यूशन्स पर ख़र्च करते हैं.
* सामान्यत: प्रतिमाह 25000 रुपए तक सैलरी पाने वाले 60% पैरेंट्स अपने 2 बच्चों के प्राइवेट ट्यूशन पर 8000 रुपये प्रति महीने ख़र्च करते हैं.

शरीता शाह के अनुसार, इन बातों पर ग़ौर करके आप ये समझ सकते हैं कि आपके बच्चे को ट्यूशन की ज़रूरत है या नहीं.
* जानने की कोशिश करें कि आपका बच्चा क्लास में टॉप रैंकर्स की लिस्ट में आता है या उसका परफ़ॉर्मेंस ऐवरेज है. इसके आधार पर तय करें कि उसे ट्यूशन की ज़रूरत है या नहीं.
* बच्चे से पूछें कि उसे किस सब्जेक्ट में एक्स्ट्रा हेल्प की ज़रूरत है. उसकी ज़रूरत के हिसाब से ही ट्यूशन सलेक्ट करें.
* आपका बच्चा अगर पढ़ाई में कमज़ोर है और कड़ी मेहनत के बाद भी अच्छे मार्क्स नहीं ला पा रहा, तो उसे सच में गाइडेंस की ज़रूरत है. अत: उसे ट्यूशन ज़रूर भेजें.
* पढ़ाई के मामले में अगर बच्चा आपकी बात नहीं सुनता, तो एक सही ट्यूटर आपकी मदद कर सकता है.
* कुछ पैरेंट्स अपने बच्चे के लिए एक्सपीरियंस टीचर के बजाय सीनियर स्टूडेंट्स को प्रीफ़र करते हैं. यह निर्णय बच्चे की क्षमता के आधार पर ही लें.
* कुछ टयूशन सेंटर्स में बच्चों पर ज़रूरत से ज़्यादा होमवर्क और प्रोजेक्ट्स का प्रेशर डाल दिया जाता है. ऐसे में बच्चे पढ़ाई से भागने लगते हैं. अतः ट्यूटर की बिहेवियरल जानकारी ज़रूर रखें.

इमेज कसल्टेंट- बदलें दुनिया (Image consultant- change the world)

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लीक से हटकर कुछ अलग करने की चाह रखने वालों के लिए इमेज कंसल्टेंट बेहतरीन करियर साबित हो सकता है. इस क्षेत्र में नाम और पैसा दोनों हैं. आज हर इंसान बेहतर पाने की चाह रखता है, लेकिन उसके अनुसार ख़ुद में बदलाव लाने में समर्थ नहीं होता. ऐसे में इमेज कंसल्टेंट सामने वाले व्यक्ति की पूरी पर्सनैलिटी में बदलाव करके उसे उसके लक्ष्य तक पहुंचाने में मदद करता है. इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए कैसे करें शुरुआत? बता रही हैं करियर काउंसलर मालिनी शाह. 

कौन कर सकता है?
बदलते ज़माने और फैशन इंडस्ट्री में रुचि रखने वाले इस फील्ड के लिए उपयुक्त होते हैं. इमेज कंसल्टेंट बनने के लिए आपको लेटेस्ट ट्रेंड की जानकारी होनी ज़रूरी है. साथ ही ज़रूरत के अनुसार सामने वाले की पर्सनैलिटी को बदलने की ख़ूबी भी आपको इस फील्ड में सफलता दिलाएगी.

शैक्षणिक योग्यता
प्रोफेशनल इमेज कंसल्टेंट बनने के लिए किसी ख़ास तरह की शैक्षणिक योग्यता की ज़रूरत नहीं होती. हां, बेसिक पढ़ाई के साथ इस फील्ड में रुचि रखने वालों को इन चीज़ों की जानकारी होनी चाहिए.

  •  पब्लिक रिलेशन
  •  फैशन
  •  हेयर एंड ब्यूटी थेरेपी
  •  कंसल्टेंसी
  •  ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट

क्या हैं कोर्सेस?
इमेज कंसल्टेंट बनने के लिए कई तरह के कोर्सेस आप कर सकते हैं, जैसे-

  •  कंप्लीट फाउंडेशन कोर्स
  •  पर्सनली स्टाइलिस्ट कोर्स
  •  एडवांस्ड ट्रेनिंग मॉड्यूल

कोर्स के दौरान
कई बार कोर्स करने के बाद भी अनुभव न होने पर सही तरह का काम नहीं मिल पाता और आत्मविश्‍वास कम हो जाता है. ऐसे में इन बातों का ध्यान रखें.

  •  अपनी पढ़ाई के दौरान न्यू ट्रेंड्स और स्टाइल का अपने दोस्तों और घर वालों पर एक्सपेरिमेंट करते रहें.
  •  जब भी कुछ अलग कलर कॉम्बिनेशन या इंट्रेस्टिंग टेक्सचर दिखाई दे,उसे नोटबुक पर लिखते चलें.
  • फैशन के बारे में पूरी जानकारी इक्ट्ठा करते रहें. इसके साथ ही तरह-तरह के लोगों से मिलना-जुलना और उन्हें परखने की प्रवृत्ति जारी रखें.

ज़रूरी बातें
इमेज कंसल्टेंट बनने के लिए व्यक्ति में इन बातों का होना बहुत ज़रूरी हैः

 जानकारी
इस क्षेत्र में सफल होने के लिए बहुत ज़रूरी है कि व्यक्ति को अपने क्लाइंट्स की ज़रूरतों के बारे में पता हो और उन्हें सही तरी़के से हैंडल करना आता हो. साथ ही सही प्लान के मुताबिक चलना आता हो. इसके अलावा टेक्निकल नॉलेज, जैसे- आउटफिट, बॉडी लैंग्वेज, वोकल कम्युनिकेशन, ग्रूमिंग आदि की विस्तृत जानकारी होनी भी आवश्यक है.

 प्रैक्टिस
प्रैक्टिस में इमेज कंसल्टेंट मुख्य रूप से दो तरीक़ों को अपनाते हैंः

  •  सबसे पहले वो क्लाइंट के साथ अकेले में समय बिताकर उसकी बॉडी लैंग्वेज, लाइफ स्टाइल, पर्सनल स्टाइल आदि की बारीक़ी से जानकारी लेते हैं.
  •  दूसरा, वो क्लाइंट के वॉर्डरोब को बदलते हैं और उसकी ज़रूरत के हिसाब से उसमें बदलाव लाते हैं.

सलाह
विख्यात इमेज कंसल्टेंट बनने के लिए तीसरी सबसे अहम चीज़ है कि व्यक्ति को अपने क्लाइंट्स को सही सलाह देनी आनी चाहिए.

स्कोप
आज इस क्षेत्र में बहुत तेज़ी से लोगों की डिमांड बढ़ रही है. बड़ी-बड़ी कंपनियों में इस तरह के लोगों की डिमांड होती है. कंपनियां अपने स्टाफ का लुक चेंज करने और तरक्क़ी करने की दृष्टि से समय-समय पर बदलाव करती रहती हैं. इसके साथ ही आप मशहूर हस्तियों के साथ उनका पर्सनल इमेज कंसल्टेंट बनकर भी नाम और पैसा कमा सकते हैं. इसके अलावा यदि आप ख़ुद अपना बॉस बनकर काम करना चाहते हैं, तो पर्सनल लेवल पर इसकी शुरुआत कर सकते हैं. इसके लिए सबसे पहले आप अपने आसपास के लोगों से अपना व्यवसाय शुरू कर सकते हैं.

सैलरी
इस क्षेत्र में करियर बनाने वालों को शुरुआत में 20-25 हज़ार रुपए प्रति माह मिलते हैं. अनुभव के साथ ये पैकेज बढ़ता जाता है.

प्रमुख संस्थान

  •  फर्स्ट इम्प्रेशन कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड, मुंबई.
  •  इमेज कंसल्टिंग बिज़नेस इंस्टीट्यूट, मुंबई.
  •  इमेज कंसल्टिंग बिज़नेस इंस्टीट्यूट, दिल्ली.
  •  इमेज कंसल्टिंग बिज़नेस इंस्टीट्यूट, बैंगलोर.
  •  इमेज कंसल्टिंग बिज़नेस इंस्टीट्यूट, चेन्नई.
  •  इमेज कंसल्टिंग बिज़नेस इंस्टीट्यूट, कोलकाता.
  •  इमेज कंसल्टिंग बिज़नेस इंस्टीट्यूट, चंडीगढ़.
  •  इमेज कंसल्टिंग बिज़नेस इंस्टीट्यूट, जयपुर.
  •  इमेज कंसल्टिंग बिज़नेस इंस्टीट्यूट, अहमदाबाद.
  •  इमेज कंसल्टिंग बिज़नेस इंस्टीट्यूट, पुणे.
  •  इमेज कंसल्टिंग बिज़नेस इंस्टीट्यूट, नागपुर.
  •  इमेज कंसल्टेंट स्टाइल एकेडमी, दिल्ली.

– श्वेता सिंह