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35 होम रेमेडीज़ जो आपको बचाएंगी पीरियड्स की तकलीफों से (35 Home Remedies for Period Problems)

पीडियड्स के समय दर्द, अनियमित पीरियड्स, अत्यधिक ब्लीडिंग आदि प्रॉब्लम्स से क्विक रिलीफ पाना चाहती हैं तो ये होम रेमेडीज़ ट्राई करें.

 

Home Remedies for Period Problems

 

जब हो बहुत ज़्यादा दर्द

पीरियड्स के दौरान होनेवाले अत्यधिक दर्द में पेनकिलर लेने की बजाय ये होम रेमेडीज़ ट्राई करें.
* जैसे ही दर्द शुरू हो दो-तीन ग्लास गर्म पानी पी लें.
* एक जगह बैठने या लेटे रहने की बजाय टहलें. इससे दर्द से राहत मिलती है.
* दादी मां ये नुस्खा आज़माएं- एक टीस्पून शक्कर को आधा टीस्पून घी और आधा टीस्पून आजवायन के साथ गर्म करें और पानी के साथ इसका सेेवन करें.
* 2 से 3 ग्राम अदरक, 4 काली मिर्च, एक बड़ी इलायची, इन्हें कूटकर उबलते पानी में डालिए, फिर इसमें काली चाय, दूध और शक्कर मिलाइए. उबालकर थोड़ी देर रखने के बाद गर्म ही पीजिए. मासिक धर्म के दर्द से मुक्ति के लिए यह अत्यंत उपयोगी नुस्खा है.
* पीरियड्स के पहले ही दिन एक ग्लास गुनगुने पानी में डेढ़ टीस्पून दालचीनी पाउडर और 1 टेबलस्पून शहद मिलाकर दिन में तीन बार पीएं.
* एक कप पानी में अदरक का एक टुकड़ा, शहद और नींबू का रस मिलाकर पांच मिनट तक उबालें. दिन में तीन बार पीएं.
* एक कप पानी में 1 टेबलस्पून तुलसी की पत्तियां उबालकर थोड़ी-थोड़ी देर में पीएं.
* अलसी में दर्दनिवारक गुण होते हैं, जो पीरियड्स में होनेवाले दर्द व मरोड़ मेें आराम दिलाते हैं. 1-2 टेबलस्पून अलसी फांक लें.
* गर्म पानी की थैली से पेट के निचले हिस्से में सेंक करें. तुरंत आराम मिलेगा.
* एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण पपीता पीरियड्स के दर्द में काफ़ी फ़ायदेमंद साबित होता है.

अनियमित माहवारी

* पीरियड्स नियमित न हो तो यह नुस्खा आज़माएं- 10 ग्राम तिल को 200 ग्राम पानी में उबालें. चौथाई रहने पर उसे उतारकर तथा उसमें गुड़ मिलाकर पीएं.
* गाजर का रस पीने से भी पीरियड्स नियमित हो जाता है. सुबह-शाम 200 ग्राम गाजर का जूस पानी के साथ पीनेे से मासिक धर्म नियमित होने लगता है.
* पीरियड्स अनियमित तथा दर्द के साथ हो तो आधा चम्मच कलौंजी दिन में दो बार मासिक धर्म के दौरान लें. कलौंजी के बीजों का चूर्ण बनाकर रख लें और इसे गर्म पानी के साथ लें.
* पीरियड्स शुरू होने के कुछ दिन पहले ही 1 टीस्पून साबूत धनिया दो कप पानी में डालकर उबालें. जब पानी आधा रह जाए, तब उसे उतारकर छान लें. दिन में तीन बार इसे पीएं. धीरे-धीरे माहवारी सामान्य हो जाएगी.
* एक कप पानी में आधा टीस्पून अदरक मिलाकर पांच-सात मिनट तक उबालें. स्वाद के लिए थोड़ी शक्कर मिला लें. खाना खाने के बाद दिन में तीन बार यह काढ़ा लें. महीनेभर यह उपाय करें.
* 1 ग्लास दूध में डेढ़ टीस्पून दालचीनी पाउडर मिलाकर तीन-चार हफ़्तों तक पीएं. अगर आप चाहें, तो चाय में दालचीनी पाउडर भी मिलाकर पी सकती हैं.
* एक ग्लास दूध में 1/4 टीस्पून हल्दी पाउडर मिलाकर रोज़ाना पीएं. अनियमित माहवारी को नियमित करने में यह भी काफ़ी मदद करता है.
* एक ग्लास पानी में 2 टेबलस्पून सौंफ भिगोकर रातभर रखें. सुबह छानकर सौंफ का पानी पी लें. इस नुस्ख़े को एक महीने
तक आज़माएं.
* 1 टीस्पून पुदीना के पत्तों को सुखाकर पीस लें. उसमें 1 टीस्पून शहद मिलाकर दिन में तीन बार उसका सेवन करें.
* गाजर का जूस भी अनियमित माहवारी को नियमित बनाता है.

अधिक रक्तस्राव

अगर आपके पीरियड्स सात दिन से ज़्यादा रहते हैं और आपको हर 2-3 घंटों में सैनिटरी नैपकीन बदलनी पड़ती है, तो आप अधिक रक्तस्राव की समस्या से जूझ रही हैं. यह आपके लिए नुक़सानदायक है, क्योंकि इसके कारण आप एनीमिया की भी शिकार हो सकती हैं. इसलिए इन होम रेमेडीज़ की मदद से उसे कंट्रोल करें.
* एक ग्लास ऑरेंज जूस में 2 टेबलस्पून नींबू का रस मिलाकर दिन में चार-पांच बार पीएं.
* हैवी ब्लीडिंग में मूली काफ़ी लाभदायक होती है. 2-3 मूली को पीसकर उसमें 1 कप छाछ मिलाकर 3-4 बार पीएं.
* कद्दू को पीसकर उसमें थोड़ी-सी शक्कर मिलाएं. इस मिश्रण को दूध या दही में मिलाकर खाएं.
* पीरियड्स के 1-2 हफ़्ते पहले कुछ दिनों तक गन्ने का जूस पीएं. यह पीरियड्स को नियमित करने के साथ-साथ हैवी ब्लीडिंग को भी कंट्रोल करता है.
* बेल की पत्तियों को पानी में उबालकर-छानकर पीएं. इसके अलावा बेल खाने से भी अत्यधिक रक्तस्राव की समस्या में राहत
मिलती है.
* सरसों को पीसकर पाउडर बना लें. आधा टीस्पून सरसों पाउडर एक ग्लास दूध में मिलाकर दिन में दो बार पीएं.

 

व्हाइट डिस्चार्ज

व्हाइट डिस्चार्ज को ज़्यादातर महिलाएं हल्के में लेती हैं, पर बहुत अधिक व्हाइट डिस्चार्ज सेक्सुअली ट्रांस्मिटेड डिसीज़, हार्मोनल प्रॉब्लम्स, वेजाइनल इंफेक्शन, ओवेरियन कैंसर और सर्वाइकल इंफेक्शन्स का कारण भी बन सकता है. इससे निजात पाने के लिए अपनाएं कुछ घरेलू नुस्ख़े.
* एक कप पानी में कुछ भिंडी उबालें. जब पानी गाढ़ा हो जाए, तब उसे छानकर व ठंडा करके पी लें.
* 2 टेबलस्पून आंवला पाउडर में शहद मिलाकर दिन में दो बार खाएं. व्हाइट डिस्चार्ज से जल्द राहत मिलेगी.
* इस दौरान चावल का मांड़ दिन में दो बार पीएं. यह काफ़ी लाभदायक होता है.
* अमरूद की पत्तियों को पानी में उबालकर दिन में दो बार पीएं.
* अनार की पत्तियों को पीसकर रोज़ाना खाली पेट खाने से भी व्हाइट डिस्चार्ज की समस्या से राहत मिलती है.

यूरिनरी इंफेक्शन्स

महिलाओं में यह एक आम समस्या है. संकोच के कारण अक्सर महिलाएं इसे छिपाए रखती हैं, ऐसे में ये होम रेमेडीज़ उनके लिए काफ़ी कारगर सिद्ध होंगी.
* इसमें भरपूर पानी पीना आपके लिए बहुत लाभदायक होगा. इसलिए ख़ूब पानी पीएं.
* ककड़ी जैसे पानी से भरपूर फ्रूट्स को अपने डायट में शामिल करें.
* अदरक की चाय आपको इससे राहत दिलाएगी.
* गर्म पानी की थैली से सेंक करें.
* दो कप पानी में 1 टेबलस्पून पार्सले की सूूखी पत्तियों को उबालकर उसका पानी पीएं.
                                                                                                                                    – सुनीता सिंह

पीरियड्स में क्या है नॉर्मल, क्या है ऐब्नॉर्मल? (What is Normal & Abnormal in Periods?)

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पीरियड्स में थोड़ी-बहुत तकलीफ़ होना नॉर्मल है, लेकिन तकलीफ़ ज़्यादा और बार-बार हो तो ये किसी हेल्थ प्रॉब्लम का संकेत हो सकता है. इसलिए ये जानना ज़रूरी है कि पीरियड्स में क्या नॉर्मल है और क्या ऐब्नॉर्मल, ताकि सही समय पर ज़रूरी क़दम उठाया जा सके.

पीरियड्स कभी-कभी बहुत ही पीड़ादायी होते हैं. पीरियड्स शुरू होने से पहले अधिकतर लड़कियों व महिलाओं को सिरदर्द, पेट में ऐंठन और दर्द की शिकायत होती है. पीरियड्स में ये सभी लक्षण होना सामान्य है. इसे पीएमएस यानी प्री-मेंस्ट्रूअल सिंड्रोम भी कहते हैं. इसके अलावा कुछ अन्य लक्षण भी होते हैं, जो इस प्रकार से हैं-
* चिड़चिड़ापन
* अनिद्रा
* अधिक भूख लगना और वज़न बढ़ना
* पेडू, पीठ व कमर में दर्द होना
* पेडू पर दबाव पड़ना
* मुंहासे होना
* पेट फूलना
* स्तनों में भारीपन महसूस होना
* मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, थकान महसूस होना
* वॉटर रिटेंशन और सूजन आना
* दर्द के कारण एकाग्रता में कमी होना

सावधानियां: पीरियड्स में दर्द होने पर हल्की एक्सरसाइज़ करें. इससे ताज़गी का एहसास होता है.
* पेडू में दर्द होने पर गरम पानी की बोतल से सिंकाई करें.
* पीरियड्स के दौरान भारी सामान न उठाएं.

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क्या है ऐब्नॉर्मल पीरियड्स?
अनियमित व असामान्य मासिक धर्म का अर्थ है मासिक धर्म की अवधि में बदलाव आना. जब पीरियड्स महीने में एक से अधिक बार होने लगे या फिर 2-3 महीने में एक बार हो, तो उसे पीरियड्स का अनियमित होना कहते हैं.

किन कारणों से होते हैं पीरियड्स ऐब्नॉर्मल?
* पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस)
* पेल्विक इंफ्लेमेट्री डिसीज़ (पीआईडी)
* प्री-मैच्योर ओवेरियन इंएफिशियंसी
* यूटेराइन ऐब्नॉर्मलिटीज़
* ईटिंग डिसऑर्डर, जैसे- एनोरेक्सिया, बुलिमिया आदि
* बहुत अधिक वज़न बढ़ना या कम होना
* बहुत अधिक एक्सरसाइज़ करना
* बर्थ कंट्रोल पिल्स
* भावनात्मक तनाव (इमोशनल स्ट्रेस)
* धूम्रपान और अल्कोहल का अधिक सेवन
* मेनोपॉज़
* एनीमिया

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ऐब्नॉर्मल पीरियड्स 3 तरह के होते हैं-
1. पीरियड्स न होना
2. हैवी पीरियड्स होना
3. पेनफुल पीरियड्स
ज़्यादातर महिलाएं अनियमित पीरियड्स की समस्या से पीड़ित होती हैं, लेकिन शर्म व झिझक के कारण इस विषय पर बात नहीं करतीं. कुछ स्थितियों में यह समस्या गंभीर बीमारियों का कारण बन जाती है, जो इस प्रकार से हैं-

पीरियड्स न होना (एमेनोरिया):
एमेनोरिया में 2 तरह की स्थिति होती है- प्राइमरी एमेनोरिया और सेकंडरी एमेनोरिया. प्राइमरी एमेनोरिया की स्थिति में लड़कियों को 15 साल तक की उम्र तक पीरियड्स शुरू नहीं होते या फिर प्यूबर्टी के संकेत दिखने के 3 साल बाद तक भी पीरियड्स आरंभ नहीं होते. प्राइमरी एमेनोरिया होने के कारण हैं- जेनेटिक ऐब्नॉर्मलिटीज़, हार्मोंस का असंतुलित होना और प्रजनन अंगों का पूरी तरह से विकसित न होना आदि.
सेकंडरी एमेनोरिया: हार्मोंस में गड़बड़ी होने के कारण भी सेकंडरी एमेनोरिया की समस्या होती है. इस स्थिति में लड़कियों को पीरियड्स तो नॉर्मल होते हैं, लेकिन अचानक 3 महीने या उससे अधिक समय तक के लिए बंद हो जाते हैं.
एमेनोरिया संबंधी अन्य कारण-
* तनाव
* बहुत अधिक वज़न बढ़ना या कम होना
* एनोरेक्सिया
* बर्थ कंट्रोल पिल्स रोकने पर
* ओवेरियन सिस्ट
* थायरॉइड होने पर
* अन्य मेडिकल कंडीशन, जिसके कारण हार्मोंस का स्तर प्रभावित हो.

सावधानियां: डॉक्टरी सलाह के अनुसार हार्मोन थेरेपी लें.
* यदि किसी बीमारी के ट्रीटमेंट के कारण पीरियड्स नहीं आ रहे हैं, तो पहले उस बीमारी का सही इलाज कराएं.
* डॉक्टर द्वारा बताए गए डायट चार्ट को फॉलो करें.
* एमेनोरिया के कारण इमोशनल स्ट्रेस का लेवल बढ़ जाता है. स्ट्रेस कम करने के लिए स्ट्रेस मैनेजमेंट टेकनीक को अपनाएं.
* स्ट्रेस लेवल को कम करने के लिए मेडिटेशन और रिलैक्सेशन एक्सरसाइज़ करें. स्ट्रेस लेवल कम होने पर मासिक चक्र अपने आप ही नॉर्मल हो जाते हैं.
* अल्कोहल और धूम्रपान से दूर रहें और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं.
* बहुत अधिक वज़न कम होना और एनोरेक्सिया जैसी बीमारियों से बचने के लिए ज़रूरी है कि हेल्दी बॉडी वेट मेंटेन करें.
* एमेनोरिया की स्थिति में हैवी एक्सरसाइज़ करने की बजाय मॉडरेट एक्सरसाइज़ प्रोग्राम को फॉलो करें.
* जिन महिलाओं व लड़कियों का वज़न बहुत ज़्यादा है, वे अपने वज़न को
कम करें.

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हैवी पीरियड्स होना (मेनोरेजिया):
इस स्थिति में नॉर्मल पीरियड्स की अपेक्षा बहुत अधिक ब्लीडिंग होती है और पीडियड्स की अवधि भी लंबी होती है. पीरियड्स के दौरान खून के बड़े-बड़े थक्के (क्लॉट्स) निकलते हैं. यही इसका मुख्य संकेत है. वैसे भी किशोरावस्था में हार्मोंस में असंतुलन होने के कारण हैवी ब्लीडिंग होती है, इसलिए लड़कियों में मेनोरेजिया की समस्या होना आम बात है.
किन कारणों से होता है मेनोरेजिया: शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरॉन की मात्रा के बीच असंतुलन होने पर.
* थायरॉइड होने पर.
* यूटरस में फायब्रॉइड्स या पॉलिप्स होने पर.
* क्लॉटिंग डिसऑर्डर होने पर.
* योनि और सर्विक्स में जलन या संक्रमण होने पर

सावधानियां: यदि पीरियड्स 7 दिनों से ज़्यादा दिन तक आए, तो गायनाकोलॉजिस्ट से मिलें.
* यदि हैवी ब्लीडिंग हो, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें.
* अधिक ब्लीडिंग होने के कारण यदि एनीमिया की समस्या हो, तो नियमित रूप से आयरन सप्लीमेंट्स लें.
* अपनी मर्ज़ी से दवाएं लेने की बजाय डॉक्टरी सलाह के अनुसार हार्मोनल दवाएं लें.
* यदि मेनोरेजिया में ड्रग्स ट्रीटमेंट से सफलता नहीं मिल रही हो, तो सर्जिकल ट्रीटमेंट भी करा सकती हैं.

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अत्यंत पीड़ादायक पीरियड्स (डिसमेनोरिया):
यह दो तरह का होता है. प्राइमरी डिसमेनोरिया और सेकंडरी डिसमेनोरिया. प्राइमरी डिसमेनोरिया गर्भाशय में प्रोस्टग्लैंडीन नामक केमिकल का स्तर अधिक होने के कारण होता है, जिससे ऐंठन, सिरदर्द, पीठदर्द, मितली, जी घबराना, डायरिया और क्रैम्प्स की समस्या होती है. ये लक्षण 1-2 दिन तक तो रहते ही हैं.
सेकंडरी डिसमेनोरिया: इस स्थिति में यूटरस में पॉलिप्स और फायब्रॉयड के कारण, एंडोमीट्रिओसिस, पेल्विक इंफ्लेमेट्री डिसीज़ (पीआईडी) और एडिनोमायोसिस के कारण तेज़ दर्द (क्रैम्प्स) होता है. ये क्रैम्प्स प्रतिमाह 1-2 दिन तक तो रहते ही हैं.

सावधानियां: पीरियड्स के दौरान पेट के निचले हिस्से में दर्द या ऐंठन होने पर गरम पानी की बॉटल या हीट पैड से सिंकाई करें.
* रोज़ाना व्यायाम करने से क्रैम्प्स को कम किया जा सकता है.
* प्राइमरी डिसमेनोरिया की स्थिति में डॉक्टर द्वारा बताई दवाएं लें.
* सेकंडरी डिसमेनोरिया की स्थिति में यदि क्रैम्प्स 3 दिन से अधिक हो, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें.
* अल्कोहल और धूम्रपान का अधिक सेवन करने से पीरियड्स क्रैम्प्स और तेज़ होते हैं. इसलिए इन्हें नज़रअंदाज़ करें.
* पीरियड्स के दौरान तनावरहित रहें.

किन स्थितियों में मिलें डॉक्टर से?
* यदि पीरियड्स 15 साल तक की उम्र तक शुरू न हुए हों.
* पीरियड्स शुरू होने के 3 साल बाद यदि पीरियड्स रेग्युलर न हों.
* जब पीरियड्स 21 दिन से पहले आएं या फिर 35 दिन के बाद आएं.
* जब पीरियड्स अचानक रुक जाए.
* शुरुआत में पीरियड्स नॉर्मल थे, लेकिन कुछ समय बाद अनियमित या बंद हो गए हों.
* हैवी और 7 दिन से ज़्यादा ब्लीडिंग होने पर.
* पेनफुल पीरियड्स होने पर.
* पीरियड्स के दौरान उल्टी और जी घबराने पर.
* बर्थ कंट्रोल पिल्स बंद करने के दो महीने बाद भी यदि पीरियड्स न आए.
* प्रेग्नेंसी की संभावना होने पर.
* यदि पीरियड्स के संबंध में कोई सवाल हो.

– पूनम शर्मा

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योग द्वारा सिरदर्द से छुटकारा (Yoga for Migraine and Headache | Cure Migraine with Yoga)

अक्सर हम सिरदर्द के लिए पेनकिलर्स का सहारा लेते हैं, जिनके अपने साइडइफेक्ट्स होते हैं. बेहतर है दर्दनिवारक दवाओं की बजाय आप योगासन करें और सिरदर्द से मुक्ति पाएं (Cure Migraine with Yoga).
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महासिर मुद्रा

* सुखासन में बैठ जाएं.
* मध्यमा, तर्जनी और अंगूठे के आगे के भाग आपस में मिलाएं.
* अनामिका को मोड़कर अंगूठे की जड़ के पास लगाएं. छोटी उंगली सीधी रहनी चाहिए.
* आंखें बंद रखें और रिलैक्स रहें.

  • यदि माइग्रेन है, तो भुजंगासन, ब्रह्म मुद्रा व महासिर मुद्रा करें.
  • सामान्य सिरदर्द के लिए अनुलोम-विलोम, शलभासन, मकरासन, बालासन व ताड़ासन
    भी करें.
चंद्रभेदन प्राणायाम
* पद्मासन या सुखासन में बैठ जाएं.
* बाईं नाक से सांस लें और दाईं नाक से सांस छोड़ें. इस प्रकार इसे करते रहें. आंखें बंद रखें.
* कमर व रीढ़ एकदम सीधी रखें.
* 2 मिनट तक कर सकते हैं.
युवराज सिंह, क्रिकेटर
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कैंसर से लड़ने के बाद युवराज सिंह पूरी तरह से योग की शरण में आ गए. उनका मानना है कि योग के ज़रिए वो बेहतर तरी़के से रिकवर कर सकते हैं. बीमारी के बाद दोबारा भारतीय क्रिकेट टीम में वापसी की कोशिश में जुटे युवराज सिंह ने फिटनेस के लिए योग को ज़रूरी बताते हुए कहा था, “मैं अपनी ऊर्जा को वापस पाने के लिए नियमित योग कर रहा हूं. शारीरिक व मानसिक तौर पर फिर से ऊर्जावान होना बहुत मुश्किल होता है. लेकिन मैंने चुनौतियों का सामना किया और मुश्किलों से बाहर भी आया, अब मेरा लक्ष्य है कि शत-प्रतिशत फिट होकर वापसी करना. अगले 5-6 साल मेरे करियर के बेहतरीन साल होंगे और मैं बहुत आशान्वित हूं अपने भविष्य को लेकर.”