paresh rawal

पहली नज़र का प्यार बहुत कम लोगों की किस्मत में होता है. पहली ही नज़र में जिसे चाहो वो आपका हमसफ़र बन जाए, उससे ज़्यादा नसीबवाला भला कहां मिलेगा? स्वरूप संपत और परेश रावल यही वो ख़ुशनसीब जोड़ा है, जिन्होंने ज़िंदगी से जो चाहा उन्हें वो सब मिला. पहली नज़र का प्यार आज हमसफ़र बनकर ज़िंदगी की धूप छांव में पिछले 33 सालों से उनका साथ निभा रहा है और रंगमंच की यह जोड़ी असल ज़िंदगी में भी उतनी ही कामयाब है, जितनी रुपहले परदे पर. आइए जानें कहां और कैसे मिले ये लव बर्ड्स और कैसा रही इनकी प्रेम कहानी?

Paresh Rawal And Swaroop Sampat

दो कामयाब हस्तियां

‘ये जो है ज़िंदगी’ में रेनू वर्मा का किरदार निभानेवाली स्वरूप संपत और बॉलीवुड के मशहूर कलाकार परेश रावल की लव स्टोरी हर युवा जोड़े के लिए एक प्रेरणा है. जहां एक ओर मिस इंडिया रह चुकी स्वरूप संपत बॉलीवुड एक्ट्रेस, टीवी एक्ट्रेस और एक बेहतरीन थियेटर पर्सनालिटी हैं. फ़िल्म नाखुदा से बॉलीवुड में डेब्यू करनेवाली स्वरूप संपत ने सवाल, लोरी, हिम्मतवाला जैसी कई फ़िल्में कीं. उन्होंने कई मराठी और गुजराती प्ले में एक्टिंग और और डायरेक्शन दोनों किया है. हाल ही में वो करीना कपूर की फ़िल्म की एंड का और फिर उरी द सर्जिकल स्ट्राइक में नज़र आई थीं. वहीं दूसरी ओर परेश रावल ने शुरुआती दौर में निगेटिव किरदार निभाने के बाद, जो कॉमेडी की बरसात शुरू की तो अंदाज़ अपना अपना का तेजा हो या हेरा फेरी के बाबू भइया की ज़बर्दस्त कॉमेडी के बाद हंगामा, गोलमाल और मालामाल वीकली जैसी फिल्मों में दर्शकों को हंसा हंसाकर लोट पोट कर दिया. परेश रावल ने अभिनय के साथ ही 2014 से लेकर 2019 तक राजनीतिक पारी भी खेली, वो गुजरात से बीजेपी के लोकसभा सांसद चुने गए थे. साल 2014 में ही उन्हें अभिनय के क्षेत्र में योगदान के लिए भारत सरकार की तरफ़ से पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया.

Paresh Rawal And Swaroop Sampat

जब परेश को हुआ पहली नज़र का प्यार

ये उन दिनों की बात है, जब परेश रावल और स्वरूप संपत कॉलेज में पढ़ा करते थे. कॉलेज के मस्तीभरे दिनों में से ही एक ख़ुशगवार दिन था, जब परेश रावल ने गुलाबी साड़ी पहने एक बेहद ख़ूबसूरत लड़की को कॉलेज में ब्रोशर बांटते हुए देखा. गुलाबी साड़ी में उस लड़की की गुलाबी रंगत ने परेश रावल को ऐसा दीवाना बनाया कि वो पहली ही नज़र में उसे अपना दिल दे बैठे. उसी समय उन्होंने अपने दोस्त को कहा कि मैं इसी लड़की से शादी करूंगा. यह लड़की कोई और नहीं स्वरूप संपत ही थीं. शादी के बाद दिए एक इंटरव्यू में स्वरूप संपत ने बताया था कि उस दिन जब परेश रावल ने पहली बार मुझे देखा और अपने दोस्त से ऐसा कहा, तो मैंने उनकी बात सुनकर भी अनसुनी की. वो ब्रोशर लेने के बहाने काउंटर पर आए और फिर थोड़ी देर में चले गए. लेकिन सबसे मजेदार बात यह रही कि करीब सालभर तक इन्होंने मुझसे दोस्ती करने की कोई कोशिश भी नहीं की.

Paresh Rawal And Swaroop Sampat

जब दिल दे बैठीं स्वरूप

भले ही ब्रोशर काउंटर पर स्वरूप संपत ने परेश रावल को कुछ ख़ास तवज्जो नहीं दी, पर जब उन्होंने परेश को स्टेज पर ऐक्टिंग करते हुए देखा, तो अपनी नज़रें उन पर से हटा नहीं पायीं. एक इंटर कॉलेज ड्रामा कॉम्प्टीशन के दौरान जब उन्होंने परेश रावल को स्टेज पर अभिनय करते देखा, तो देखती ही रह गयीं. उनकी बेहतरीन अदाकारी ने स्वरूप का मन मोह लिया था. बकौल स्वरूप संपत सिर्फ़ मैं ही नहीं हॉल में बैठे लगभग सभी लोगों का यही हाल था. ड्रामा थोड़ा हिंसक था, लेकिन परेश की अदाकारी ने सबको मंत्रमुग्ध कर दिया था. उस समय जब ड्रामा ख़त्म हुआ तो पूरे हॉल में सन्नाटा था. स्वरूप बैकस्टेज जाने से ख़ुद को रोक नहीं पायीं. परेश रावल को उन्होंने बेहतरीन अभिनय के लिए बधाई दी और उसके बाद इस कपल को किसी बहाने की ज़रूरत नहीं पड़ी.

मिस इंडिया का ताज

Swaroop Sampat

कॉलेज के साथ-साथ थियेटर भी चल रहा था, उसी दौरान स्वरूप संपत के पिता ने उन्हें मिस इंडिया ब्यूटी कॉन्टेस्ट में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया, पर स्वरूप का इस कोई इरादा नहीं था. उन्होंने यह बात अपने भाई और परेश रावल को बताई और दोनों ने ही उनकी बात का समर्थन किया और ब्यूटी पेजेंट में हिस्सा लेने की सलाह दी. परेश रावल के सपोर्ट से उन्होंने कॉन्टेस्ट में हिस्सा लिया और नसीब देखिए, प्रतियोगिता जीतकर उन्होंने 1979 में मिस इंडिया का ताज अपने सर पर सजाया.

कहानी में आया एक अजीब मोड़

Swaroop Sampat

लेकिन कॉन्टेस्ट जीतने के ज़िंदगी ने अजीब मोड़ लिया. हमेशा से ही साथ खड़े रहनेवाले परेश रावल के मन में कहीं कुछ खटकने लगा. स्वरूप संपत ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके मन में न जाने कहां से यह बात आ गई कि अब पहले जैसा कुछ नहीं रहेगा, सब बदल जायेगा. उनके मन में यह डर समा गया था कि मैं बदल जाऊंगी. पर ऐसा कुछ नहीं हुआ. मैंने उनका डर दूर किया और उन्हें पापा से अपना हाथ मांगने के लिए कहा. ज़िंदगी में किसी और चीज़ की बजाय यह मेरे लिए यह सबसे ज़्यादा मयबे रखता था, इसलिए जैसा मैंने चाहा था, वैसा ही हुआ. परेश ने पापा से शादी की बात की और हमारी शादी पक्की हो गयी.

पेड़ के नीचे लिए सात फेरे

Paresh Rawal And Swaroop Sampat

दोनों ही बेहद शानदार शादी चाहते थे, पर सिर्फ़ घरवालों और करीबी दोस्तों की मौजूदगी में. वो सबको अपनी शादी के बारे में नहीं बताना चाहते थे. मुंबई के लक्ष्मी नारायण मंदिर में शादी का कार्यक्रम रखा गया. स्वरूप संपत ने बताया कि हमारे परिवार वाले 129 साल बाद बेटी की शादी देख रहे थे, इसलिए मैंने सबसे पहले ही कह दिया था कि कोई बहुत ज़्यादा इमोशनल मत होना. मैंने अपनी शादी ख़ूब एंजॉय की. हमने शादी की विधि के लिए 9 पंडित बुलाए थे, जो मंत्र जाप कर रहे थे. बाकी दुल्हनों की तरह बिना शरमाये मैंने अपनी शादी का खाना ख़ूब एंजॉय किया. शादी में बहुत ज़्यादा तामझाम नहीं था, बल्कि एक बहुत बड़ा पेड़ था, जिसके नीचे हमने सात फेरे लिए थे.

गृहस्थ जीवन

Paresh Rawal's Family

परेश रावल और स्वरूप संपत ने 1987 में शादी के बाद अपनी गृहस्थी को आगे बढ़ाया. उनके दो बेटे हैं, अनिरुद्ध और आदित्य रावल. अनिरुद्ध ने फ़िल्म सुल्तान में बतौर असिस्टेंट डायरेक्ट काम किया था, साथ ही वो अभिनेता नसरुद्दीन के साथ प्ले में मदद करते हैं. वहीं आदित्य न्यूयॉर्क में स्क्रीनप्ले की पढ़ाई कर रहा है.

Paresh Rawal And Swaroop Sampat

कॉलेज के ज़माने से देखें तो परेश रावल और स्वरूप संपत पिछले 40 से भी ज़्यादा सालों से एक साथ हैं. जीवन के हर मोड़ पर साथ निभानेवाले और हर सुख-दुख में सबकुछ साथ झेलनेवाले इन लव बर्ड्स का प्यार यूं ही बना रहे. आपको इनकी प्यारी सी लव स्टोरी कैसी लगी, हमें ज़रूर बताएं.

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फिल्मों में हर कोई हीरो का किरदार निभाना चाहता है. लेकिन यह भी सच है कि बॉलीवुड की कोई भी फिल्म  खलनायक के बिना पूर्ण नहीं होती है. अब वो दिन बीत गए, जब फिल्मों में खलनायक के रोल के लिए भारी भरकम आवाज़ और लंबी-चौड़ी कद-काठी की जरुरत होती थी. पिछले कुछ सालों से दर्शक ऐसे विलेन्स को परदे पर देख रहे हैं, टेलेंटेड होने के साथ-साथ चार्मिंग भी है और जिन्होंने निगेटिव रोल अदा करके  बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाई और दर्शकों को अपना मुरीद बना लिया. आइये ऐसे ही एक्टर्स के बारे में हम आपको बताते हैं.

  1. निकेतन धीर
Niketan Dheer

यह टोल और हैंडसम एक्टर बॉलीवुड के पॉप्युलर अभिनेता पंकज धीर के बेटे हैं. निकेतन धीर ने ऋतिक रोशन और ऐश्वर्या रॉय स्टार्रर फिल्म जोधा अकबर में खलनायक की भूमिका निभाकर बॉलीवुड में करियर की शुरुआत की. उसके बाद निकेतन फिल्म रेड्डी और दबंग २ के अलावा कुछ और फिल्मों में भी निगेटिव रोल में दिखाई दिए. लेकिन शाहरुख़ खान-दीपिका पादुकोन अभिनीत फिल्म चेन्नई में “थंगबली” की भूमिका को कोई नहीं भूल सकता है.  

2. नील नितिन मुकेश

Neil Nitin Mukesh

मूवी जॉनी गद्दार में श्रीराम राघवन का निगेटिव किरदार निभाकर नील नितिन मुकेश ने बॉलीवुड में एंट्री की. अपने इस निगेटिव किरदार से नील ने ऑडियंस को प्रभावित किया. इसके अलावा उन्होंने फिल्म “प्रेम रतन धन पायो” में भी खलनायक की भूमिका अदा की.

3. विद्युत जामवाल

vidyut jamwal

बॉलीवुड में ऐसे बहुत कम कलाकार हैं, जो एक्टिंग में निपूर्ण होने के साथ-साथ मार्शल आर्ट में भी माहिर हैं. विद्युत जामवाल ऐसे ही बहुमुखी प्रतिभावान  कलाकारों में से एक हैं.  विद्युत ने फिल्म फोर्स से बॉलीवुड में डेब्यू किया. इस फिल्म में उन्होंने निगेटिव रोल निभाया था. फिल्म फोर्स में जॉन अब्राहम ने मुख्य भूमिका निभाई थी. विद्युत अभिनीत इस फिल्म मेन रोल की तुलना में खलनायक के रोल को ऑडियंस ने काफी सराहा.

4. ताहिर राज भसीन

Tahir Raj Bhasin

इस चॉकलेटी बॉय ने फिल्म मर्दानी में नकारात्मक भूमिका निभाकर बॉलीवुड में डेब्यू किया. इस फिल्म में उन्होंने रानी मुखर्जी के साथ काम किया है. इस फिल्म में उनकी परफॉरमेंस को क्रिटिक्स और ऑडियंस द्वारा काफी सराहा गया. इस निगेटिव रोल के लिए ताहिर राज को बेस्ट एक्टर इन सपोर्टिंग रोल के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला.

5. फ्रेड्डी दारुवाला

Freddy Daruvala

कोई ऐसा सोच भी नहीं सकता है कि बॉलीवुड का यह हैंडसम फ्रेड्डी दारुवाला निगेटिव रोल भी अदा  कर सकता है. अपनी बेहतरीन एक्टिंग से ऑडियंस का दिल जीतने वाले फ्रेड्डी दारुवाला ने फिल्म “हॉलिडे” में निगेटिव रोल प्ले किया था.

6. राहुल देव

Rahul Dev

राहुल देव ने अपने करियर की शुरुआत फिल्म चैंपियन में निगेटिव रोल निभाकर की थी. उसके बाद उन्होंने बॉलीवुड की अनगिनत फिल्मों में निगेटिव रोल निभाए, जिनमें फाइट क्लब, फुटपाथ, आवारा पागल दीवाना  शामिल है. हाल ही में वे छोटे परदे के धारावाहिक “देवों के देव महादेव” में निगेटिव किरदार में नज़र आए हैं. 

7. सास्वत चटर्जी

Saswata Chatterjee

फिल्म कहानी-२ में सास्वता चटर्जी की परफॉरमेंस को कौन भूल सकता है, जिसमें उन्होंने पेड शूटर का निगेटिव रोल अदा किया है. हालांकि फिल्म में उनका रोल बहुत छोटा था पर अपनी बेहतरीन एक्टिंग से दर्शकों के मन में गहरी छाप छोड़ दी. उनके इस नकारात्मक भूमिका की आलोचकों ने भी बहुत सराहना की.

8. परेश रावल

Paresh Rawal

बॉलीवुड के मशहूर और प्रतिभावान अभिनेताओं में से एक हैं परेश रावल. पिछले कुछ सालों से वे फिल्मों कॉमेडियन की भूमिका निभा रहे हैं. लेकिन क्या आपको मालूम है कि परेश रावल ने वर्ष १९८६ में आई फिल्म नाम में खलनायक की भूमिका निभाकर बॉलीवुड में डेब्यू किया था. अपने फिल्मी करियर में उन्होंने अनेक फिल्मों में  बहुत सारे निगेटिव रोल अदा किए.

9. परमीत सेठी

Parmeet Sethi

फिल्म “दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे” में कुलजीत का रोल आज भी ऑडियंस के जेहन में ताज़ा है. इस फिल्म कुलजीत का रोल बहुत हल्का-पुलका और मस्तीवाला था, जिस दर्शकों ने बहुत प्यार दिया। इसके अलावा परमीत सेठी अनेक फिल्मों में खलनायक का किरदार निभाया है.

10. प्रकाश राज

Prakash Raj

साउथ फिल्म इंडस्ट्री के मोस्ट टेलेंटेड एक्टर्स में से एक प्रकाश राज ने फिल्म खाकी में नकारात्मक भूमिका निभाकर बॉलीवुड में अपने करियर की शुरुआत की. इस फिल्म में उन्होंने एसीपी  नायडू का निगेटिव रोल निभाया था. बाद में, उन्होंने सिंघम, दबंग 2, वांटेड और कई जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में कई नकारात्मक भूमिकाएँ निभाईं. 

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जाने-माने अभिनेता, दिग्गज थिएटर आर्टिस्ट और ई.एन.टी सर्जन डॉ. श्रीराम लागू का कल शाम यानी 17 दिसंबर को निधन हो गया. 16 नवंबर 1927 को सातारा में जन्में डॉ. श्रीराम लागू पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे . 100 से अधिक हिंदी और मराठी फिल्मों में काम कर चुके डॉ. श्रीराम लागू के रिश्तेदार सुनील महाजन ने मीडिया को बताया कि शाम लगभग साढ़े सात बजे पुणे में उन्होंने अंतिम सांस ली. सिनेमा के अलावा मराठी, हिंदी और गुजराती थिएटर से जुड़े रहे डॉ. श्रीराम लागू ने 20 से अधिक मराठी नाटकों का निर्देशन भी किया.  मराठी थिएटर में तो उन्हें 20वीं सदी के सबसे बेहतरीन कलाकारों में गिना जाता है.

Dr. Shriram Lagoo
डॉ. श्री राम लागू की मौत की खबर सुनते ही कई बॉलीवुड सेलिब्रिटीज़ ने सोशल मीडिया पर शोक व्यक्त किया. ऋषि कपूर ने शोक व्यक्त करते हुए लिखा कि R I P. अपने समय के  सबसे नैचुरल एक्टर्स में से एक डॉ. श्रीराम लागू हमें छोड़कर चले गए. मैंने उनके साथ पहले बहुत सी फिल्में की, लेकिन दुर्भाग्यवश पिछले 25-30 सालों में उनके साथ काम करने का अवसर नहीं मिला. वे पुणे में रिटार्यड लाइफ बिता रहे हैं. लव यू डॉ. साहब.
एक्टर परेश रावल ने सांत्वना व्यक्त करते हुए लिखा कि महान थिएटर एक्टर डॉ. श्रीराम लागू साब नहीं रहे. ओम शांति. बॉलीवुड फिल्म डायरेक्ट मधुर भंडारकर ने ट्वीट किया कि डॉ. श्री राम लागू जी के निधन के बारे में सुनकर दुख हुआ. ये बहुत महान सोशलिस्ट और एक्टर थे. थिएटर और फिल्मों में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा.
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी ने डॉ. श्रीराम लागू की मौत पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा कि महान एक्टर डॉ. श्रीराम लागू की मौत के बारे में सुनकर दुख हुआ. उन्होंने मराठी फिल्मों, स्टेच और हिंदी फिल्मों में अभूतपूर्व योगदान दिया. उनके फैंस व परिवारवालों को मेरी ओर से सांत्वना. फिल्म डायरेक्टर अशोक पंडित ने लिखा कि 92 वर्ष की उम्र में डॉ. श्रीराम लागू के निधन के बारे में सुनकर दुख हुआ. थिएटर और फिल्म इंडस्ट्री उन्हें मिस करेगी.  कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चौहान ने शोक व्यक्त डॉ. श्रीराम लागू जी के निधन के बारे में सुनकर दुख हुआ. वे न  सिर्फ बेहतरीन एक्टर थे, बल्कि महाराष्ट्र में प्रोग्रेसिव व रैश्नलिस्ट मूवमेंट के सूत्रधार भी थे. मैं सामना में उनके किरदार को हमेशा याद करूंगा. उनके परिवार को मेरी ओर से सांत्वना.
आपको बता दें कि डॉ. श्रीराम लागू ने 42 साल की उम्र में डॉक्टरी का पेशा छोड़कर एक्टिंग की ओर रूख किया था.  पुणे और मुंबई में पढ़ाई करने वाले श्रीराम लागू को एक्टिंग का शौक बचपन से ही था . पढ़ाई के लिए उन्होंने मेडिकल को चुना पर नाटकों का सिलसिला वहां भी चलता रहा. मेडकिल का पेशा उन्हें अफ्रीका समेत कई देशों में लेकर गया. वो सर्जन का काम करते रहे लेकिन मन एक्टिंग में ही अटका था.  राम लागू ने हिंदी और मराठी फिल्मों में कई यादगार रोल किए.  मसलन 1977 की फिल्म घरौंदा का वो उम्रदराज बॉस (मिस्टर मोदी) जो अपने ऑफिस में काम करने वाली एक युवा लड़की (जरीना वहाब) से शादी करता है. जरीना वहाब दरअसल अमोल पालेकर से प्यार करती है लेकिन अमोल पैसे के लालच में जरीना को मजबूर करता है कि वो डॉ. श्रीराम लागू से शादी करे.  मगर धीरे-धीरे एक उम्रदराज मर्द और एक युवा लड़की के बीच प्यार पनपता है, घरौंदा उसकी खूबसूरत सी कहानी है । ये रोल आसानी से नेगेटिव शेड ले सकता था लेकिन श्रीराम लागू इसे बड़ी नजाकत से निभाते हैं.  घरौंदा के लिए उन्हें फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहअभिनेता का अवॉर्ड मिला था. सिंहासन, सामना, पिंजरा जैसी मराठी फिल्मों और चलते-चलते, मुकद्दर का सिंकदर, सौतन और लवारिस जैसे कई हिंदी और मराठी फिल्मों में उन्होंने काम किया. रिचर्ड एटनब्रा की फिल्म गांधी में गोपाल कृष्ण गोखले का उनका छोटा सा रोल भी हमेशा याद रहता है, वही रोल जो उन्होंने बचपन में पुणे के अपने स्कूल में किया था. अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने एक बार कहा था कि श्रीराम लागू की आत्मकथा ‘लमाण’ किसी भी एक्टर के लिए बाइबल की तरह है.

सिनेमा घरों में राष्ट्रगान को अनिवार्य किए जाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बॉलीवुड दो गुटों में बंट गया है. कुछ सेलेब्रिटीज़ इस फैसले से ख़ुश हैं और कुछ नाराज़. आइए जानते हैं किसने क्या कहा?

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शेखर कपूर ने टि्वटर पर कहा, ”उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट संसद में भी हर सदन से पहले राष्ट्रगान गाने का आदेश दे दे. आखिरकार वहां भी फिल्मों की तरह ड्रामा होता है.” 

राम गोपाल वर्मा ने भी टि्वटर पर इससे जुड़े कई सवाल पूछे हैं. उन्होंने लिखा है, ”सम्मान दिल से महसूस किया जाना चाहिए. अगर ज़बरदस्ती सम्मान करने के लिए कहा जाएगा तो ये और भी अपमानजनक होगा.”

राम गोपाल वर्मा ने ताना देते हुए कई सवाल किए कि नाइट क्लबों में ड्रिंकिंग और डांसिग शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाने को अनिवार्य क्यों नहीं किया जाना चाहिए? मंदिरों, चर्च और मस्जिदों में प्रार्थना से पहले क्या राष्ट्रगान नहीं बजना चाहिए?

चेतन भगत भी कोर्ट के इस फैसले से काफ़ी नाराज़ नज़र आए. उनका टि्वटर पेज इसी विषय से भरा पड़ा है.

प्रकाश झा सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से काफ़ी ख़ुश नज़र आए. उन्होंने कहा, ”इस फैसले का पूरे दिल से स्वागत है…जय हो!”

परेश रावल ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया और इस फैसले का विरोध कर रहे लोगों पर निशाना साधते हुए कहा, ”जो इसका विरोध कर रहे हैं, मुझे लगता है कि उनमें बुद्धि कम है. वे हर चीज का विरोध करेंगे. यह एक अच्छा फैसला है.’’ संसद के बाहर परेश ने कहा, ” अगर हमारा राष्ट्रगान नहीं बजेगा तो किसका बजेगा, सोमालिया का?”

अशोक पंडित ने भी कोर्ट को सम्मान देते हुए इस फैसले का स्वागत किया है.