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क्या आपके हार्मोंस आपके रिश्ते को प्रभावित कर रहे हैं? (How Hormones Influence Love And Relationships)

How Hormones Influence Love And Relationships

ये रूह के रिश्ते क्यों स़िर्फ जिस्म तक ही सिमटते जा रहे हैं… और जिस्म से होते हुए सिसक-सिसक कर दम तोड़ते जा रहे हैं… दूरियां जो आ रही हैं दरमियान, मन का पंछी ढूंढ़ने लगा है एक नया आशियान… लेकिन मुहब्बत जो कभी हममें-तुममें थी… अब भी कह रही है कि बचे हैं उसके कुछ तो नामो-निशान… न कुसूर तुम्हारा था, न ख़ता हमारी थी… बस व़क्त के सितम हमें तन्हा करते चले गए… और क़रीब आने की हसरत में हम दूर होते चले गए…

How Hormones Influence Love And Relationships
जी हां, यह बात सच है कि मॉडर्न लाइफस्टाइल ने हमारे रूहानी रिश्तों को जिस्मानी बना दिया है. भावनाओं की जगह ज़रूरतों ने ले ली है और सपनों की जगह कठोर हक़ीक़तों ने अपना डेरा जमा लिया. यही वजह है कि सब कुछ बदल रहा है. हम बदल रहे हैं… हमारा खान-पान बदल रहा है… दिनचर्या बदल रही है… और इसका सीधा प्रभाव हमारी सेहत और हमारे रिश्तों की सेहत पर पड़ रहा है.
यह तो हम सभी जानते हैं कि हमारी तमाम गतिविधियों को हर्मोंस ही प्रभावित करते हैं. ऐसे में उनमें होनेवाले बदलाव हम में भी बहुत कुछ बदल देते हैं. हार्मोंस में यह बदलाव काफ़ी हद तक हमारी लाइफस्टाइल व डायट पर भी निर्भर करता है. यही वजह है कि आजकल तेज़ी से हमारा मूड और हमारे रिश्ते बदल रहे हैं, क्योंकि हर्मोंस बदल रहे हैं.

शोधों से यह बात साबित हो चुकी है कि आज के दौर में हम और ख़ासतौर से महिलाएं पहले की अपेक्षा अधिक हार्मोनल बदलाव से गुज़रती हैं. लेकिन अब यह बात भी लोग मानने लगे हैं कि हार्मोंस में होनेवाले यह बदलाव हमारे रिश्तों को भी प्रभावित करने लगे हैं.

हार्मोंस और मूड

हार्मोंस के बदलाव से बहुत कुछ बदलता है- हमारा मूड हो या शरीर में कोई परिवर्तन, हार्मोंस की उसमें अहम् भूमिका होती है.
बदलते हार्मोंस से बदलते हैं रिश्ते: जब कभी भी शरीर में हार्मोंस का असंतुलन होता है, आपकी सेक्स की इच्छा कम हो जाती है और मूड स्विंग्स बढ़ जाते हैं. ये दोनों ही चीज़ें रिश्ते को बुरी तरह प्रभावित करती हैं.

महिलाओं में सेक्सुअल डिज़ायर बनाए रखने के लिए प्रोजेस्टेरॉन और इस्ट्रोजेन में संतुलन बनाए रखना ज़रूरी है. लेकिन अधिकांश महिलाओं में इस्ट्रोजन की अधिकता होती है, जिससे सेक्स की इच्छा में कमी आती है.

प्रोजेस्टेरॉन शांत हार्मोन होता है, जो महिलाओं की सेक्सुअल हेल्थ व सामान्य सेहत को भी बेहतर बनाता है. इसी तरह से इस्ट्रोजेन का स्तर भी यदि सही व संतुलित रहेगा, तो सेक्स की इच्छा बढ़ेगी और सेक्स लाइफ बेहतर होगी. सेक्स लाइफ और रिलेशनशिप का बहुत गहरा संबंध होता है, यदि आपकी सेक्स लाइफ अच्छी है, तो आपका रिश्ता और बेहतर बनेगा और यदि सेक्स लाइफ सामान्य नहीं, तो रिश्ते पर इसका नकारात्मक प्रभाव साफ़तौर पर नज़र आएगा. यही वजह है कि हार्मोंस का संतुलन आपके रिश्ते के लिए बेहद ज़रूरी है.

सेल्फ इमेज पर प्रभाव: अगर अपने शरीर में कुछ परिवर्तन महसूस कर रहे हैं, तो इसका संबंध हार्मोंस से हो सकता है. हर्मोंस के असंतुलन से वज़न बढ़ना, थकान रहना, अचानक तेज़ गर्मी लगकर पसीना आना आदि समस्याएं हो सकती हैं. ये तमाम शारीरिक समस्याएं आपके ख़ुद को देखने के नज़रिए पर असर डालती हैं और इससे आपका रिश्ता भी प्रभावित हुए बिना नहीं रहता.
प्रोजेस्टेरॉन, टेस्टॉसटेरॉन और इस्ट्रोजेन- इन तीनों हार्मोंस के असंतुलन का आपके मूड पर और सेल्फ एस्टीम (आत्मसम्मान) पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है.
इन हार्मोंस को संतुलित रखना बेहद जरूरी है, ताकि आप अपने बारे में अच्छा महसूस करें और यही सकारात्मक भाव आपके रिश्ते को भी सकारात्मक रखेगा.

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आपके स्वभाव और व्यवहार भी होते हैं प्रभावित: इस्ट्रोजेन का बढ़ता स्तर आपको चिड़चिड़ा बना सकता है. साथ ही आपको अनिद्रा और मूड स्विंग्स जैसी समस्याएं भी दे सकता है. वहीं प्रोजेस्टेरॉन का घटता स्तर आपको स्वाभाव से चिंतित बना सकता है. ऐसे में यदि आप अपने स्वभाव को नियंत्रित नहीं कर पाते, तो दूसरों की नज़रों में आपकी इमेज प्रभावित हो सकती है. आपका पार्टनर भी आपको ग़लत समझ सकता है और आपके रिश्ते पर इसका बुरा असर हो सकता है.
प्रोजेस्टेरॉन के स्तर का सामान्य बनाए रखकर इस्ट्रोजेन के असर को कम किया जा सकता है, जिससे आपके स्वभाव व व्यवहार पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े.

आपके दोस्तों व रिश्तेदारों पर भी असर हो सकता है: हर किसी की चाहत होती है कि अपने दोस्तों व क़रीबी लोगों के साथ वो अच्छा व़क्त गुज़ारे, लेकिन आपके हार्मोंस आपको बेवजह को स्ट्रेस देकर आपसे यह अच्छा व़क्त छीन सकते हैं.
किसी भी हार्मोंस के स्तर का बेहद बढ़ना या एकदम कम होना आपके स्वभाव में निराशा, चिड़चिड़ापन, चिंता, अवसाद जैसे नकारात्मक भाव को जन्म दे सकता है. इसके अलावा वज़न बढ़ना या नींद न आना जैसी शारीरिक समस्याएं भी हो सकती हैं. जिससे आपकी ख़ुशियां बहुत हद तक प्रभावित हो सकती हैं.

 

How Hormones Influence Love And Relationships

क्या करें?

– जब कभी भी आप ख़ुद में इस तरह के बदलाव देखें और जब ये चीज़ें आपके व्यवहार व रिश्तों पर असर डालने लगें, तो फ़ौरन एक्सपर्ट की मदद लें. ऐसा करके आप ख़ुद को भी ख़ुश रख सकते हैं और अपने रिश्तों को भी बचा सकते हैं.
– पीरियड्स से पहले व बाद में महिलाओं के हार्मोंस काफ़ी तेज़ी से बदलते हैं, यही वजह है कि उनका मूड इस दौरान काफ़ी बदलता रहता है, ऐसे में अन्य लोगों को थोड़ी समझदारी दिखानी चाहिए, ताकि इसका असर उनके रिश्ते पर न पड़े.
– हेल्दी डायट लें, क्योंकि अनहेल्दी लाइफस्टाइल से हर्मोंस असंतुलित होते हैं. चाय, कॉफी, अल्कोहल, कोल्ड ड्रिंक्स, जंक फूड जितना हो सके कम लें. इनकी जगह गाजर, ब्रोकोली, फूलगोभी, पत्तागोभी, फ्लैक्ससीड, ग्रीन टी, ड्राइ फ्रूट्स, ओट्स, दही, फ्रेश फ्रूट्स, हरी सब्ज़ियां, अदरक, लहसुन आदि अपने डायट में शामिल करें. यह तमाम चीज़ें शरीर को डिटॉक्सिफाइ करके हार्मोंस को संतुलित करती हैं.
– डार्क चॉकलेट्स भी मूड को बेहतर बनाकर डिप्रेशन दूर करता है.
– वेजीटेबल ऑयल्स की जगह ऑलिव ऑयल व कोकोनट ऑयल को शामिल करें.
– लाइट एक्सरसाइज़, योग व प्राणायाम से हार्मोंस संतुलित होते हैं.

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हार्मोंस और बिहेवियर

हार्मोंस एंड बिहेवियर के नाम से हुए एक विस्तृत अध्ययन में यह पाया गया है कि किस तरह से महिलाओं के हार्मोंस, उनका अपने पार्टनर को देखने का नज़रिया और उनके रिश्ते में मज़बूत संबंध है.
दरअसल इन सबका संबंध महिलाओं के मासिक धर्म से है. अगर कोई महिला अपने पार्टनर को हॉट समझती है, तो जब उसका पीरियड क़रीब होता है, तो वो अधिक ख़ुश रहती है और अपने पार्टनर के और क़रीब आती है. जबकि यदि महिला अपने पार्टनर को बहुत हॉट नहीं समझती, तो ऑव्युलेशन के समय वो उसकी अधिक निंदा करने लगती है और उससे दूरी बनाए रखती है.

हैप्पी हार्मोंस

मात्र सेक्स ही वो शारीरिक क्रिया नहीं है, जो आपके तनाव को कम करके आपको हेल्दी रख सकती है. जी हां, यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना में हुए एक अध्ययन में यह पाया गया कि गले मिलने के बाद महिलाओं और पुरुषों में ऑक्सिटोसिन का स्तर अधिक पाया गया और कार्टिसोल का स्तर कम पाया गया.
दरअसल, ऑक्सिटोसिन वो हार्मोन है, जो तनाव कम करके मूड को बेहतर बनाता है, जबकि कार्टिसोल एक स्ट्रेस हार्मोन है. ऐसे में नतीजा यह निकला कि हाथ पकड़ना, प्यार से छूना, दुलार करना आदि केयरिंग बिहेवियर भी आपको
तनावमुक्त रखककर हेल्दी बना सकता है.

– गीता शर्मा

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August Born: प्यार ही नहीं, शादी में भी बेहद विश्‍वास रखते हैं अगस्त में जन्मे लोग (What Your Birth Month Says About Your Love Life)

August Born

August Born

प्यार ही नहीं, शादी में भी बेहद विश्‍वास रखते हैं अगस्त (August) में जन्मे लोग

  • इन्हें कैज़ुअल रिलेशनशिप्स पसंद नहीं होतीं.
  • ये शादी की परंपरा पर बेहद विश्‍वास करते हैं.
  • इनकी सबसे बड़ी ख़ासियत यही होती है कि ये अपने पार्टनर की कमियों को नज़रअंदाज़ करके स़िर्फ उनकी ख़ूबियों पर ध्यान देते हैं.
  • इन्हें रोमांस बहुत पसंद होता है.
  • ये अपने पार्टनर के प्रति बहुत ईमानदार होते हैं, साथ ही पार्टनर से भी उसी ऑनेस्टी की अपेक्षा रखते हैं.

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  • बेडरूम में कोई इन्हें समझाए, यह इन्हें पसंद नहीं आता.
  • ये इस बात पर भी ध्यान देते हैं कि उनके पार्टनर में वो सब कुछ है, जो ये चाहते हैं. अगर ऐसा नहीं है, तो इन्हें उनसे अलग होकर कोई दूसरा साथी तलाशने में भी देर नहीं लगती.
  • प्यार और सेक्स के मामले में ये थोड़ा ईगोइस्ट होते हैं.
  • सेक्स व प्यार के मामले में ये या तो एकदम ही सेलफिश हो सकते हैं या फिर ये बेहद उदार होते हैं. यानी इनके व्यक्तित्व में ये विरोधाभास हो सकता है.

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बेहतर रिश्ते के लिए पति-पत्नी जानें एक-दूसरे के ये 5 हेल्थ फैक्ट्स( Couples Know These 5 Health Facts- Keep your Relationship Strong)

Keep your Relationship Strong

बेहतर रिश्ते के लिए प्यार, केयर और दूसरी कई बातों के साथ ही ज़रूरी है एक-दूसरे के हेल्थ (Keep your Relationship Strong) की पूरी जानकारी, ताकि हेल्थ भी ठीक रहे और रिश्तो भी हेल्दी बना रहे.

Keep your Relationship Strong

क्या पार्टनर की फैमिली हेल्थ फाइल की जानकारी है?

– फैमिली में किसे कौन-सी हेल्थ प्रॉब्लम्स हैं या रह चुकी हैं, इसकी जानकारी बेहद ज़रूरी है. डायबिटीज़ से लेकर कैंसर व हार्ट प्रॉब्लम तक पैरेंट्स से बच्चों में आ सकती हैं.
– ऐसे में आप अगर इसे नज़रअंदाज़ करेंगे, तो पार्टनर को व उसके बाद आपके बच्चों तक को आप अंजाने में ही बीमारियां देते जाएंगे.
– यदि समय रहते आप फैमिली हेल्थ फाइल्स पर आपस में बात करें, तो नियमित चेकअप व डायट से बीमारी से बचा जा सकता है, साथ ही अपने बच्चों को भी आप इन बीमारियों की चपेट में आने से बचा सकते हैं.
– यदि आपने इस ओर ध्यान ही नहीं दिया, तो आपके पार्टनर की हेल्थ के साथ-साथ आपके रिश्ते की सेहत भी ख़राब हो सकती है.
– आपको यह भी लग सकता है कि आपको धोखे में रखा गया या जान-बूझकर आपसे यह बात छिपाई गई. जबकि सच्चाई यह होती है कि अक्सर पार्टनर्स इस ओर ध्यान ही नहीं देते और बाद में पता चलने पर उन्हें अपनी ग़लती का एहसास होता है.
– अच्छा होगा कि आप समय-समय पर एक-दूसरे को ध्यान दिलाते रहें व साथ में चेकअप कराते रहें.
– साथ ही एक्सपर्ट की सलाह भी लेते रहें.

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कहीं पार्टनर ओवरवेट तो नहीं?

– अक्सर साथ रहते-रहते फिटनेस कब लापता हो जाती है, पता ही नहीं चलता. लेकिन आपके रिश्ते के लिए बहुत ज़रूरी है कि आपको फिटनेस फैक्ट्स का पता हो.
– अगर पार्टनर का वज़न बढ़ रहा है और वो ओवरवेट हो गया है, तो इसका असर उसकी पूरी हेल्थ पर पड़ेगा. बढ़ता वज़न कई बीमारियां लेकर आता है, जिससे सेक्स लाइफ प्रभावित होती है. साथ ही स्वभाव में चिड़चिड़ापन भी आता है.
– बेहतर होगा कि आप दोनों नियम बना लें और समय-समय पर वज़न चेक कराएं.
– अगर वज़न बढ़ रहा है, तो डायट प्लान करें और एक साथ एक्सरसाइज़, जॉगिंग या जिमिंग करें, इससे साथ में व़क्त भी गुज़ार पाएंगे और एक-दूसरे को मोटिवेट भी कर पाएंगे.

क्या पार्टनर का स्लीप पैटर्न चेंज हो रहा है?

– सोने की आदत में अगर बदलाव नज़र आने लगे, तो अलर्ट हो जाइए, क्योंकि हो सकता है कि पार्टनर फिज़िकली हेल्दी नज़र आ रहा हो, लेकिन कहीं न कहीं वो या तो स्ट्रेस में है या फिर उसे कोई हेल्थ प्रॉब्लम है.
– अगर लगातार पार्टनर स्ट्रेस में रहेगा या ठीक से सो नहीं पाएगा, तो वो धीरे-धीरे ग़ुस्सैल स्वभाव का होता जाएगा. उसे अन्य हेल्थ प्रॉब्लम्स भी होने लगेंगी, जिससे आपकी पर्सनल लाइफ काफ़ी प्रभावित होगी.
– पार्टनर से बात करें और पता करें कि उसके स्ट्रेस का कारण क्या है.
– उसे सहयोग दें और हौसला बढ़ाएं.
– अगर उसे ख़ुद को अंदाज़ा नहीं कि उसका स्लीप पैटर्न क्यों बदल रहा है, तो एक्सपर्ट की सलाह ज़रूर लें.

पार्टनर को कोई सेक्सुअल डिसीज़ तो नहीं?

– यह जानना बेहद ज़रूरी है, क्योंकि यह बात आपकी सेक्सुअल हेल्थ व आपके रिश्ते को भी प्रभावित करेगी.
– अक्सर पार्टनर इस तरह की बातें एक-दूसरे से छिपाते हैं, उन्हें लगता है कि उनका साथी उनको ग़लत समझेगा.
– लेकिन इस तरह से वो अपने पार्टनर को भी वो बीमारी दे देते हैं.
– इस तरह हेल्थ के साथ-साथ रिश्तों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.
– बेहतर होगा कि चाहे जो भी बात हो, अपने पार्टनर से शेयर करें. अपनी सेक्सुअल डिसीज़ को छिपाने की बजाय उसका इलाज कराएं.
– इस मामले में बहुत अधिक देर करना ठीक नहीं.
– पार्टनर से खुलकर बात करें और उन्हें विश्‍वास में लें.

मेंटल हेल्थ के बारे में भी जानना ज़रूरी है.

– पार्टनर का टेम्परामेंट, उसके स्वभाव को प्रभावित करता है. वो कितना सहनशील है, प्रेशर को कितना हैंडल कर पाता है, विपरीत परिस्थितियों में कैसे व्यवहार करता है, ये तमाम बातें पार्टनर की मेंटल हेल्थ व स्ट्रेंथ को दर्शाती हैं.
– तनाव या ग़ुस्से में पार्टनर की प्रतिक्रिया कैसी रहती है?
– क्या वाद-विवाद के बाद वो अपनी ग़लती स्वीकारता है या सॉरी बोलकर बात को ख़त्म करने की कोशिश करता है?
– बेहतर होगा कि एक-दूसरे को मानसिक रूप से आप दोनों मज़बूत बनाएं, इससे आपका रिश्ता भी मज़बूत होगा.
– ऐसा करने के लिए एक-दूसरे की कमज़ोरी व ताक़त को पहचानना भी ज़रूरी है.
– आपस में बात करें और कोशिश करें कि बिना किसी को हर्ट किए, आप अपनी बात कह सकें, साथी की कमज़ोरी व उसकी स्ट्रेंथ पर चर्चा करें.
– साथ ही अपनी कमज़ोरियों के बारे में भी साथी को बताएं. इसके अलावा कैसे आप दोनों एक-दूसरे की मदद कर सकते हो, इस पर भी ज़रूर बात करें.

– विजयलक्ष्मी

पहला अफेयर: मेरे हमसफ़र… (Pahla Affair: Mere Humsafar)

Pahla Affair, Mere Humsafar

Pahla Affair, Mere Humsafar

पहला अफेयर: मेरे हमसफ़र… (Pahla Affair: Mere Humsafar)

मन बड़ा बेईमान होता है. आप उसे लाख समझाएं कि वह काबू में रहे, पर वो नादान कहां आपकी सुनता है. बस आपको दगा दे जाता है. और आपके कई राज़ों को फाश कर देता है. उसके कहे में चेहरे और आंखें क्या कह-सुन जाते हैं. आपको पता ही नहीं चलता कि कब आपका मन आपका रहा ही नहीं… वह तो किसी और का हो गया.

मेरी नज़रों में वो मंज़र और ज़ेहन में वो सफ़र आज भी ताज़ा है, जब कसौली में एक अजनबी ज़िंदगी में आया और फिर इश्क़ वादियों में घुल-मिल गया. कहां तो बस सफ़र में एक पड़ाव पर मिले और बाद में मन में उसकी हर ख़ुशबू बस गई.

हर साल गर्मियों की छुट्टियों में पूरा परिवार पहाड़ों पर छुट्टियां मनाने जाता था. उत्तर भारत की भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए बर्फीले पहाड़ों से बेहतर पनाह कहां मिलती. और इस बार योजना बनी, तो कसौली जाने की ठानी, जहां मामाजी एयरफोर्स में पदस्थ थे.

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सुना था छोटी-सी मगर प्यारी-सी जगह है और मामाजी का ख़ूब आग्रह भी था. तपिश के बीच ट्रेन में सवार हुए. फिर टैक्सी से पहाड़ों के घुमावदार रास्ते पर चलते चले गए. चीड़ के पेड़ों के साथ-साथ दौड़ते-दौड़ते आख़िरकार हमारी मंज़िल भी आ गई.

मामाजी का घर बेहद ख़ूबसूरत था. चारों ओर बस पहाड़ ही पहाड़. हम सब बहुत ख़ुश हुए. मामाजी ने बताया कि हम लोगों के आने की ख़ुशी में एक छोटी-सी दावत रखी है रात को. वाह, कहते हुए पता नहीं था कि क्या करवट लेगी ज़िंदगी. दोपहर में थकान उतारने के लिए जो सोई, तो मां के जगाने पर ही आंख खुली.

रात की दावत में मामाजी ने बहुत सारे लोगों को बुलाया था. उन्हीं में से एक थे पंकज. उस रात पार्टी में हम लोग मिले, यहां-वहां की बातें कीं. फिर अपनी-अपनी राह चल दिए. अगले दिन सुबह यूं ही टहलते हुए हम फिर मिले. फिर बातें हुईं. जाने क्यों पंकज की बातें बड़ी भली-सी लगीं. मन बावरा दिनभर पकंज के बारे में सोचता रहा. शाम को चर्च की छांव तले फिर हम मिले. मन में कुछ गुदगुदाहट-सी हुई. “कीनू, इस ड्रेस में तुम बहुत सुंदर लग रही हो.” पंकज कहने लगे. मेरे गाल गुलाबी हो गए. हफ़्तेभर से ज़्यादा हम लोग रहे और पंकज लगातार मिलते रहे.

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फिर एक दिन मामाजी ने शिमला चलने का ऐलान कर दिया. मन कुछ बुझ गया. जब जीप में सवार हुए, तो पंकज एक सरप्राइज़ की तरह मिले. हौले-हौले मैंने उनकी आंखों में देखा. उनमें ग़ज़ब का आकर्षण था. शिमला में रहने के दौरान हमारी बातें-मुलाक़ातें जारी रहीं. देवदार के पेड़ों तले टहलते कितनी ही बातें कीं. फिर जुदाई का दिन आ गया. औपचारिक रूप से एक-दूसरे को अलविदा कह दिया.

घर लौटने के बाद मन बुझ गया. पंकज की बातें और उनकी सूरत ही हर ओर दिखती. परिवार में इश्क़ की बात कहना और क्या पता पंकज को भी ऐसा कुछ महसूस हुआ कि नहीं. मन को समझा लिया कि पंकज को एक मीठी याद समझकर अपनी नींद में दफ़न कर ले.

दिन बीते, व़क्त गुज़रा, साल बीत गया. मामाजी का ट्रांसफर हो गया. कॉलेज की पढ़ाई भी ख़त्म हो चली. लेक्चररशिप मिल गई. एक दिन मां ने कहा, “शाम को लड़केवाले आ रहे हैं. आज छुट्टी कर लो.” उस समय न जाने क्यों अचानक पंकज आंखों में तिर गए. मन को समझाया और परीक्षा देने के लिए जुट गई.

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शाम को लड़केवाले आए. लड़का साथ नहीं था. पर उसके मम्मी-पापा से मिलकर लगा कि पहले से पहचान हो. उनके अपनेपन ने कुछ पलों के लिए पंकज को कहीं गुम कर दिया. मां-पापा ख़ुश थे. अगले ही दिन मंगनी भी होनेवाली थी. मन में बड़ी बेचैनी थी. एक अंजान के साथ बंधने की. मन में दुविधा-सी थी. एक ओर प्यार, जो मेरी तरफ़ से था और दूसरी ओर परिवार की ख़ुशी. मंगनी की रस्म के लिए जब पहुंची, तो सिर शर्म से झुका रहा. “अरे देख लो, बाद में न कहना कि कहां ब्याह दिया.” मां ने टल्ला मारा. मैंने सिर उठाकर सामनेवाले शख़्स को देखा, “अरे, आप…” इतना ही कह सकी. सब हंस पड़े.

कहने की ज़रूरत ही नहीं थी कि प्यार एक तरफ़ा नहीं था. वह तो दोनों ओर से था. यह पूरी साज़िश मेरे मामाजी ने रची थी, जिन्होंने बिना किसी शोर-शराबे के कसौली बुलाकर हम लोगों को मिलने-जुलने का मौक़ा दिया था, ताकि हम जीवन की राह में हमक़दम बनें.

– राजेश्‍वरी शुक्ला

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पार्टनर या कंप्लीट पैकेज, क्या चाहते हैं आप? (partner or complete package, what you want?)

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मॉडर्न और ज़रूरत से ज़्यादा प्रैक्टिकल आज की युवा पीढ़ी रिश्ते-नातों में भी अपनी सहूलियत ढूंढ़ रही है. पैकेज की तरह ही पार्टनर से भी उनकी उम्मीदें दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं और ज़रूरत से ज़्यादा उम्मीदों का यही बोझ उनके रिश्ते को खोखला कर रहा है. युवाओं की इस चाह ने कितनी बदली है पति-पत्नी के रिश्तों की परिभाषा? पेश है ख़ास रिपोर्ट.

 

सफल-सुंदर-संस्कारी
ऐश्‍वर्या जैसी ख़ूबसूरत, नूयी/चंदा कोचर जैसी सफल, पार्वती जैसी सर्वगुण संपन्न बहू और सीता जैसी सुशील पत्नी… ये है आधुनिक ज़माने के पुरुषों की पत्नी से उम्मीदें. उनकी सोच में विरोधाभास साफ़ नज़र आता है. एक ओर तो उन्हें ज़माने के साथ क़दम मिलाकर चलनेवाली स्मार्ट और सक्सेसफुल वाइफ चाहिए, तो दूसरी ओर उनसे ये उम्मीद भी करते हैं कि वो घर की सारी ज़िम्मेदारी उठाने के साथ ही उनके माता-पिता की सेवा भी करे, मगर वो कभी ये नहीं सोचते कि दोहरी ज़िम्मेदारियों के बोझ तले उनकी पत्नी किस क़दर दबती चली जा रही है. उस पर यदि पत्नी ने कभी घर की ज़िम्मेदारी निभाने से इनकार किया या पति से मदद मांगी या फिर ख़ुद के लिए व़क्त न निकाल पाने की शिकायत की, तो उसे तरह-तरह के ताने सुनने पड़ते हैं. 30 वर्षीया शिवानी कहती हैं, “मेरी शादी ज्वाइंट फैमिली में हुई है. शुरू-शुरू में लगा कि मैं वर्किंग हूं, तो ज्वाइंट फैमिली मेरे लिए अच्छी है, मगर धीरे-धीरे मेरी ये सोच ग़लत साबित होने लगी. ऑफिस में भले ही कितनी भी देर हो जाए, खाना बनाने की ज़िम्मेदारी मेरी ही होती थी. कई बार इतनी थक जाती कि खड़े होने की हिम्मत भी नहीं होती थी, मगर कहूं तो किससे? पति को हमेशा वर्किंग वाइफ तो चाहिए थी, मगर अपनी शर्तों पर. कुछ अपवादों को छोड़ दिया जाए तो हमारे समाज में वर्किंग बहू कभी भी वर्किंग बेटे की बराबरी नहीं कर सकती, भले ही उसका पद और वेतन ज़्यादा ही क्यों न हो.”

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कितनी बदली है पुरुषों की मानसिकता?
ये सच है कि आज की महिलाओं को अपने मन-मुताबिक़ नौकरी करने की आज़ादी मिली है, मगर इस आज़ादी की अपनी शर्तें हैं, यानी तुम नौकरी, मगर ये मत भूलो कि घर आकर खाना बनाना अब भी तुम्हारी ही ज़िम्मेदारी है, सारे रिश्ते-नाते निभाना तुम्हारा ही फ़र्ज़ है. पेशे से मैकेनेकिल इंजीनियर राहुल कहते हैं, “आज के महंगाई के दौर में अच्छी लाइफस्टाइल मेंटेन करने के लिए पति-पत्नी दोनों का वर्किंग होना ज़रूरी है और मैं भी वर्किंग वाइफ ही चाहता हूं, मगर मुझे मिनी स्कर्ट वाली बीवी नहीं चाहिए. मेरे माता-पिता बुज़ुर्ग हैं, तो मैं चाहूंगा कि मेरी होने वाली पत्नी उनका भी ख़्याल रखे और घर के काम की भी ज़िम्मेदारी संभाले.”
ये सोच अकेले राहुल की नहीं है, आजकल के ज़्यादातर मध्यम वर्गीय परिवार के लड़के ऐसा ही सोचते हैं. हमारे पुरुष प्रधान समाज ने औरतों को घर से बाहर निकलने की आज़ादी तो दी, मगर फ़र्ज़ और ज़िम्मेदारियों के नाम पर इस क़दर जकड़ दिया है कि कभी-कभी इस सुपरवुमन वाले अवतार में महिलाओं को कोफ़्त होने लगती है.

दोहरी मानसिकता
अधिकांश पुरुष पत्नी को लेकर दोहरी मानसिकता अपनाते हैं, जैसे- पत्नी यदि घर पर है तो सलीके से कपड़े पहने, माता-पिता और रिश्तेदारों के सामने ज़्यादा मॉडर्न न बने यानी कुल मिलाकर घर के माहौल के मुताबिक़ ख़ुद को ढाल ले, मगर पत्नी यदि उनके दोस्तों से मिले या उनके साथ ऑफिस की किसी पार्टी में जाए तो उसे आधुनिक ज़माने के मुताबिक़ न स़िर्फ कपड़े पहनने चाहिए, बल्कि चाल-ढाल, बोली सब कुछ उनके मुताबिक़ होना चाहिए. उसे नए ट्रेंड्स की जानकारी होनी चाहिए ताकि दोस्तों के सामने उसे शर्मिंदा न होना पड़े. पत्नी की अपनी कोई व्यक्तिगत इच्छा नहीं होती, पति बोले तो मॉडल बन जाओ और पति बोले तो सति सावित्री. पेशे से बैंकर सुनील कहते हैं, “मेरी पत्नी वर्किंग होने के साथ ही घर की ज़िम्मेदारियां भी बख़ूबी निभाती है, मगर मैं उसे कभी अपने दोस्तों के बीच या हमारी पार्टी में नहीं ले जाता, क्योंकि वो बिल्कुल भी मॉडर्न नहीं है. यदि उसे दोस्तों के बीच ले जाऊंगा तो बाद में सब मेरा मज़ाक उड़ाएंगे कि बड़ा मॉडर्न बनता था और बीवी कैसी है?” मॉडर्निटी का चोला ओढ़े ज़्यादातर पुरुषों की यही समस्या है कि पत्नी तो उन्हें घरेलू चाहिए, मगर कभी-कभार पार्टी-फंक्शन में जाते समय वो अपनी तथाकथित मॉडर्निटी को पत्नी पर थोपने की कोशिश भी करते रहते हैं.

परफेक्शन की चाह बढ़ा रही है तनाव
मैरिज काउंसलर डॉक्टर राजीव आनंद कहते हैं, “व़क्त के साथ लोगों की ज़रूरतें, चाहतें और सामाजिक अपेक्षाएं बदली हैं. एक ओर तो हम कमाऊ पत्नी चाहते हैं और दूसरी तरफ़ हम उससे ये भी उम्मीद करते हैं कि वो एक अच्छी बहू व पत्नी के भी सारे फ़र्ज़ निभाए. इसके चलते निश्‍चय ही महिलाओं पर शारीरिक व मानसिक दबाव बढ़ा है, जिससे उनका दिमाग़ स्थिर नहीं रह पाता, वो डिस्टर्ब हो जाती हैं, अपनी ज़िम्मेदारियां ठीक से नहीं निभा पातीं. धीरे-धीरे परिवार के प्रति उनका प्यार व परवाह भी कम होने लगती है और उनके व्यवहार में होने वाले बदलाव की वजह जाने बिना ही परिवार और समाज ऐसी महिलाओं को ग़ैर ज़िम्मेदार और लापरवाह करार कर दे देता है. पुरुष आज भी औरतों को सेकेंड सेक्स का ही दर्जा देते हैं.”

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सामाजिक/पारिवारिक ढांचा
हमारा सामाजिक ढांचा ही कुछ ऐसा रहा है जहां लड़कियों को हमेशा लड़कों से कमतर आंका गया है, हालांकि धीरे-धीरे ही सही, हालात थोड़े बदल रहे हैं, मगर आज भी ऐसे लोगों की संख्या ही ज़्यादा है जो लड़की (बहू) से बहुत ज़्यादा उम्मीद रखते हैं, मगर कभी उस बहू के बारे में नहीं सोचते जो उनके बेटे की ही तरह 9-10 घंटे ऑफिस में काम करती है और घर आकर भी किचन में मुस्तैदी से अपना ज़िम्मा संभाल लेती है. इतना करते हुए भी हमेशा उसे ये एहसास दिलाया जाता है कि अपनी प्रोफेशनल लाइफ के चक्कर में वो अच्छी पत्नी, बहू और मां नहीं बन पाई है. हमारे यहां शुरू से ही लड़कों के काम करने का रिवाज़ नहीं है. कुछ अपवादों को छोड़ दिया जाए तो पत्नी के रहते यदि पति किचन में चला गया, एक ग्लास पानी ले लिया या फिर ख़ुद खाना सर्व कर लिया तो जैसे भूचाल आ जाता है. रूमाल से लेकर मोजे तक हर बात के लिए पत्नी को आवाज़ देने की आदत से अब भी ये बाज़ नहीं आए हैं. विदेशों में जहां छोटी उम्र से ही बच्चों को (लड़का-लड़की में यहां फर्क़ नहीं होता) आत्मनिर्भर बनना सिखाया जाता है, वहीं हमारे देश में लड़कों के लिए आत्मनिर्भरता का मतलब बस, नौकरी से है, घर के काम से नहीं.

कैसे बदलेंगे हालात?
आपसी समझ और परिपक्वता से ही बदलाव संभव है… हिंदी दैनिक से जुड़ी गीता ध्यानी कहती हैं, “हमारी परवरिश ही इस तरह से की गई है कि लड़कियों को लगता है कि घर का काम उन्हीं की ज़िम्मेदारी है और पति यदि पानी लाकर दे या फिर खाना बनाने लगे तो हमें ख़ुद ही अजीब लगने लगता है या फिर दूसरे देखकर ये कहने लगते हैं ये क्या लड़कियों वाले काम कर रहे हो. इन हालात को चाहकर भी बदल पाना अकेले लड़कियों के लिए संभव नहीं है.” 32 वर्षीया सीमा की भी कुछ ऐसी ही राय है. सीमा कहती हैं, “जहां लड़कियां ये कहने लगें कि मैं भी तो आपके बराबर कमाती हूं, मैं भी थक जाती हूं तो मैं ही अकेले घर का सारा काम क्यूं करूं? तो उन्हें सीधा जवाब मिलता है- ङ्गतो नौकरी छोड़ दोफ ऐसे में उनके पास हालात से समझौता करने के अलावा कोई चारा नहीं रह जाता. हालात तभी बदल सकते हैं जब लड़कों में इतनी समझ और परिपक्वता आ जाए कि वो अपनी पत्नी को समझ सकें और ख़ुद उनकी मदद की पहल करें.”

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लड़कियों को भी चाहिए हैंडसम-हाई सैलरी-हाइली एज्युकेटेड पति
गांव व कस्बों की लड़कियों के हालात भले ही बहुत न बदले हों, मगर शहरी शिक्षित लड़कियों के एक तबके की सोच और हालात में थोड़ा बदलाव आया है. पुरुषों की तरह अब उनकी भी अपने हमसफर से उम्मीदें काफ़ी बढ़ गई हैं. उन्हें पति हैंडसम, पढ़ा-लिखा और ज़्यादा कमाने वाला चाहिए ताकि वो अपने सारे शौक़ पूरे कर सकें. इस बारे में फ्रीलांस राइटर सारंग उपाध्याय कहते हैं, “बड़े शहरों की शिक्षित लड़कियां गांव व कस्बों की लड़कियों की तुलना में जीवन की वास्तविकता से ज़्यादा बेहतर तरी़के से वाकीफ़ होती हैं. उन्हें पता है कि आज के दौर में अच्छी ज़िंदगी जीने के लिए पैसा बहुत ज़रूरी है, इसलिए वो चाहती हैं कि उनका पार्टनर आर्थिक रूप से मज़बूत हो, क्योंकि अब महिलाओं की इच्छाएं, महत्वाकांक्षाएं भी बढ़ने लगी हैं.” दरअसल, आज की आत्मनिर्भर महिलाएं जीवनसाथी को लेकर किसी तरह का समझौता नहीं चाहतीं. उन्हें अच्छी लाइफस्टाइल चाहिए इसलिए वो ऐसा पार्टनर चाहती हैं, जो उनकी उम्मीदों पर खरा उतरे. हां, कई बार उनकी ज़रूरत से ़ज़्यादा उम्मीदें मुसीबत का कारण भी बन जाती हैं.

बिज़नेस डील बनता पति-पत्नी का रिश्ता
“मैंने ये किया, तुमने मेरे लिए क्या किया”, यदि पति-पत्नी के रिश्ते में कुछ इस तरह एहसान गिनाए जाने लगें, तो समझ लीजिए कि ये शादी नहीं, बल्कि बिज़नेस डील है और आजकल की अधिकांश युवा पीढ़ी का हाल कुछ ऐसा ही है. प्यार देने का नाम है, आज की जनरेशन इस बात से इत्तेफ़ाक नहीं रखती, बल्कि वो ये सोचती है कि यदि उन्होंने पार्टनर के लिए कुछ किया है, तो पार्टनर का भी फ़र्ज़ बनता है कि वो उनके लिए कुछ करे. राजीव आनंद कहते हैं, “समर्पण और विश्‍वास जो मज़बूत और लंबे रिश्ते की बुनियाद है, इसे लोग भूलते जा रहे हैं. पति-पत्नी दोनों एक-दूसरे से ये उम्मीद करते हैं कि सामने वाला उनकी केयर करे, उनकी भावनाओं को समझे और सारी चीज़ें उनकी सुविधानुसार हो. आजकल हर कोई इतना स्वार्थी हो गया है कि मैं से ऊपर कुछ सोच ही नहीं पाता. आज के युवा शादी के बाद से ही पति/पत्नी की जासूसी करने लगते हैं, हर बात/काम पर उंगली उठाने लगते हैं. इतना ही नहीं, कई बार पैरेंट्स ही अपने बेटा/बेटी से कहते हैं कि वो पार्टनर की हरकतों पर नज़र रखे, क्योंकि आजकल ज़माना बड़ा ख़राब है, मगर वो ये नहीं समझते कि विश्‍वास के बिना शादी का रिश्ता खोखला होता है और खोखले रिश्तों की उम्र बहुत छोटी होती है.”

ज़रूरी है सामंजस्य-संतुलन-संवाद
दो अलग परिवार और विचारों के लोग जब शादी के बंधन में बंधकर एक होते हैं, तो इस रिश्ते को निभाने के लिए दोनों को ख़ुद को थोड़ा बदलना होता है. नई परिस्थितयों से सामंजस्य बिठाना पड़ता है. तुरंत किसी भी निर्णय पर पहुंचने से पहले एक-दूसरे को अच्छी तरह समझना बेहद ज़रूरी है और इसके लिए पति-पत्नी दोनों का आपस में बात करना ज़रूरी है. मैरिज काउंसलर मीता दोषी कहती हैं, “शादी के रिश्ते में बैलेंस बनाए रखने के लिए कपल्स के बीच अंडरस्टैंडिंग और कम्युनिकेशन होना बेहद ज़रूरी है. दोनों को ईगो से दूर रहना चाहिए, मगर ऐसा होता नहीं है. किसी बात पर नाराज़ होने पर कपल्स आपस में बात करना ही बंद कर देते हैं. अब जब बात ही नहीं करेंगे तो समस्या का समाधान कैसे निकलेगा.” ये सच है कि जीवनसाथी से नाराज़ होने पर अक्सर कपल्स आपस में बात करना बंद कर देते हैं जिससे उनके बीच खामोशी की दीवार खड़ी हो जाती है और ये दीवार उनके बीच दूरियां ले आती है.

शहरों में शिक्षित परिवारों में महिलाओं की स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ है, ख़ासकर न्यूक्लियर फैमिली में पति घर के काम में पत्नी की मदद भी करते हैं. मगर कुछ मामलों में जहां लड़कियों की एक्सपेक्टेशन बहुत हाई होती है, तो ऐसी शादियां ज़्यादा दिनों तक नहीं टिकतीं.

– मीता दोषी,  मैरिज काउंसलर

– कंचन सिंह

पहला अफेयर- तुम मेरे हो… (Pahla Affair- Tum Mere Ho)

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पहला अफेयर- तुम मेरे हो… (Pahla Affair- Tum Mere Ho)

बरखा की इन बूंदों में अपने महबूब को ढूंढ़ती मेरी नज़रें… उसकी प्यास, उसकी आस और उसकी बांहों में अपने वजूद का एहसास… इंद्रधनुष के रंग बिखर जाते हैं निगाहों में… बादल बन उड़ने लगता है दिल आसमान में… उस अधूरे प्यार को पूरा करने की ख़्वाहिश में, जिसके सपने हम दोनों ने मिलकर बुने थे… पर जब आंख खुली, तो कांच के खिलौनों की तरह सब टूट गए… आज फिर वही बरसात है… महबूब की याद है… वही अधूरी प्यास और वही अधूरी आस भी…

बीते दिन जब भी याद आते हैं, स़िर्फ आखों को ही नम नहीं करते, बल्कि हर एहसास को भिगो जाते हैं. तुम्हारी आंखों की वो शरारत, बातों का अंदाज़, वो बेपरवाह-सा जीने की अदा जब भी याद आती है, मेरे दिल की धड़कनों को आज भी तेज़ कर देती है. मुहब्बत का मीठा एहसास क्या होता है, तुमसे मिलने के बाद ही तो समझ पाई थी मैं, लेकिन मुहब्बत में इतना दर्द भी होता है यह भी तुमसे ही सीखूंगी सोचा न था. कहते हैं प्यार के रिश्ते में अपने साये तक एक हो जाते हैं, ऐसे में किसी ग़ैर के लिए जगह ही कहां बचती है. लेकिन हमारे बीच कब किसी और ने अपनी जगह बना ली पता ही नहीं चला.

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हम स़िर्फ प्रेमी ही नहीं, बल्कि बहुत अच्छे दोस्त भी थे. कहीं कोई पर्दा न था, कोई तकल्लुफ़ नहीं. दो नहीं, एक ही तो थे हम. ज़िंदगी बेहद हसीं लगती थी तब, हर लम्हा ख़ास था. आज़ाद पंछी की तरह खुला छोड़ दिया था मैंने तुम्हें, क्योंकि मेरा मानना था कि प्यार में बंधन नहीं होना चाहिए, प्यार तो आज़ाद होता है… लेकिन कब, क्यों और कैसे तुम्हारे दिल में किसी और के लिए भी जगह बनती चली गई इसका एहसास जब होने लगा, तब जैसे हर सपना धीरे-धीरे टूटता चला गया…

जहां तक मुझे पता था तुम्हें मेरी वो सहेली ज़्यादा पसंद नहीं थी, लेकिन न जाने कब वो तुम्हारे इतने क़रीब आ गई कि तुम छिप-छिपकर उससे बातें-मुलाक़ातें करने लगे. जब मुझे तुमसे दूरी का एहसास होने लगा, तुम में बदलाव नज़र आने लगा तो अपने प्यार का वास्ता देकर यक़ीन दिलाते रहे कि तुम स़िर्फ मुझसे प्यार करते हो. मैं भी बार-बार दिल को समझाकर तुम पर यक़ीन करती गई और हर बार मेरा यक़ीन टूटा…

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आख़िर इस कशमकश में कब तक ज़िंदा रह पाता हमारा मासूम प्यार और कोमल रिश्ता. सिसक-सिसककर दम तोड़ दिया आख़िर इस
रिश्ते ने… लेकिन कहते हैं कि प्यार कभी मरता नहीं… इतने सालों बाद तुमसे फिर एक मोड़ पर जब टकराई, तो एहसास हुआ कि तुम सही थे, सच्चे थे, तुम्हारा प्यार कोई फरेब नहीं था, वरना अब तक तुम उसके हो चुके होते, लेकिन तुम्हेें तो स़िर्फ मेरा इंतज़ार था… अगर कुछ ग़लत था तो स़िर्फ वो हालात और वो लोग, जिनसे हमारे बीच दूरी पैदा हुई.

लेकिन अब जब व़क़्त ने सारे घाव भर दिए हैं, तो इन फ़ासलों को भी हम हमेशा-हमेशा के लिए दूर कर दें, ताकि फिर कोई तीसरा हमारे बीच न आने पाए… अब किसी ग़लतफ़हमी की कोई गुंजाइश न बचे… मुझे भी शायद इसी मोड़ का इंतज़ार था, इसलिए तुम पर तमाम अविश्‍वासों के बावजूद मैं भी तो किसी और की न हो पाई.

तुम ही मेरी पहली मुहब्बत हो, तुम ही मेरा यक़ीन. तुम्हें ही तो तलाशती रहीं हर पल ये नज़रें, तुम नहीं तो मैं नहीं. तुम अक्सर कहा करते थे, प्यार विश्‍वास का ही दूसरा नाम है. तुमने मुझे सिखा ही दिया आख़िर इस विश्‍वास के साथ जीना… अब मुझे यक़ीन है कि तुम मेरे हो, स़िर्फ मेरे!

– योगिनी 

 

मसाज थेरेपी फॉर बेटर सेक्स (Massage Therapy For Better Sex)

Therapy For Better Sex

मसाज द्वारा सेक्स लाइफ़ के कई ख़ूबसूरत पलों का आनंद उठाया जा सकता है. मसाज थेरेपी (Therapy For Better Sex) सेक्सुअल पावर को बढ़ाने के साथ-साथ शरीर को चुस्त-दुरुस्त व तनावमुक्त रखने में भी अहम् भूमिका निभाती है.

Therapy For Better Sex
सेक्सुअल(Therapy For Better Sex) पावर को बढ़ाने में मसाज अहम् भूमिका निभाता है. वैज्ञानिक शोधों से भी यह बात प्रमाणित हुई है कि शरीर के अंग विशेष का मसाज करने से वहां की स्नायु प्रणाली अत्यंत मज़बूत और क्रियाशील होती है. इससे शरीर में उमंग-उत्साह का संचार होता है और व्यक्ति विशेष की सेक्स क्षमता में वृद्धि होती है. मसाज से रक्तसंचार एकाएक बढ़ जाता है, जिससे सेक्स उत्तेजना में गज़ब की बढ़ोत्तरी होती है.

ऑयल मसाज के फ़ायदे
मसाज करने के लिए नारियल, जैतून, तिल के तेल के साथ-साथ अन्य सुगंधित तेलों का इस्तेमाल करें. ख़ुश्बू वाले ऑयल का उपयोग करने से दोहरा लाभ होता है. यह मसाज थेरेपी का काम तो करता ही है, साथ ही सुगंधित होने के कारण यह सेक्सुअल पावर को भी बढ़ाता है. यदि किसी व्यक्ति को सेक्स संबंधी कोई समस्या है, तो ऑयल मसाज(Therapy For Better Sex) से वह भी दूर हो जाती है.

मसाज थेरेपी का वैज्ञानिक दृष्टिकोण
तनाव का सेक्स जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ता है, लेकिन कई शोधों और अध्ययनों से यह प्रमाणित हुआ है कि मसाज से चुटकियों में तनाव दूर हो जाता है. वैज्ञानिकों के अनुसार, मसाज(Therapy For Better Sex) के कारण त्वचा के भीतर रक्तप्रवाह तीव्र गति से शुरू हो जाता है, जिससे यौनांगों व मांसपेशियों को नया ख़ून और पोषण मिलता है. मसाज को वैज्ञानिक रूप देनेवाले स्वीडन के डॉ. पीटर हेनरी ने इसे तीन भागों में बांटा है- सक्रिय अंग विक्षेप, निष्क्रिय अंग विक्षेप और दुष्क्रिय अंग विक्षेप. आज की वैज्ञानिक मालिश में प्राय: इन्हीं विधियों का समावेश है.

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सक्रिय अंग विक्षेपः इस मसाज प्रक्रिया में घर्षण (Friction) का विशेष रूप से प्रयोग होता है. दोनों हाथों से मांसपेशियों को रगड़ना घर्षण कहलाता है. इससे रक्तसंचार तेज़ होता है और मांसपेशियों तथा ऊतकों को शक्ति मिलती है.

निष्क्रिय अंग विक्षेपः इस मसाज थेरेपी में हल्की-हल्की थपकी, कम्पन, ताल आदि का प्रयोग होता है. यह उंगलियों या हथेली से पूरे शरीर अथवा किसी एक अंग में दिया जा सकता है. इस प्रकार का मसाज मूत्राशय व प्रजनन अंगों की कमज़ोरी में विशेष रूप से फ़ायदेमंद होता है. महिलाओं की माहवारी संबंधी गड़बड़ी, स्नायुशूल, अजीर्ण, कब्ज़ आदि समस्याएं इससे दूर होती हैं. मुक्की (Beating) भी एक प्रकार की थपकी है. नितंब पर बंद मुट्ठी करके मुक्के मारने से महिलाओं का कमज़ोर प्रजनन अंग मज़बूत होता है. इस मसाज थेरेपी में जिस तरह आटा गूंधते हैं, उसी तरह शरीर की मांसपेशियों को गूंधा जाता है. इससे शरीर के विभिन्न प्रकार के रोगों के अलावा सेक्स संबंधी समस्याओं को दूर करने में भी मदद मिलती है.

निष्क्रिय मसाजः इसे एक तरह से पैसीव एक्सरसाइज़ अर्थात् निष्क्रिय व्यायाम भी कह सकते हैं. अत: जो लोग एक्सरसाइज़ के लिए व़क़्त नहीं निकाल पाते, उनके लिए निष्क्रिय मसाज(Therapy For Better Sex) बेहद फ़ायदेमंद होता है. मसाज करने से त्वचा का रक्तसंचार बढ़ता है और दिलोदिमाग़ में तरोताज़गी छा जाती है.

दंपतियों के लिए मसाज टिप्स
मसाज पति-पत्नी में मुहब्बत के एहसास जगाता है. इससे शरीर और त्वचा दोनों में ही निखार आता है.

टच थेरेपीः सेक्स में टच यानी स्पर्श ख़ास रोल अदा करता है. आपके प्यार से छूने भर से सिहरन-सी पैदा हो जाती है साथी के दिलोदिमाग़ में. धीरे-धीरे सहलाने और स्पर्श करते रहने से प्यार के साथ-साथ सेक्स की इच्छा बलवती होने लगती है. अतः जब भी पति-पत्नी अकेले में हों, तो ख़ामोशी के आलम के साथ स्पर्श के जरिए एक-दूसरे की भावनाओं को जानें-समझें. इससे मन में एक रोमांच-सा पैदा होने लगता है. कभी-कभी यह स्थिति आपको ऑर्गे़ज़म तक भी पहुंचा देती है.

एक-दूसरे का मसाज करनाः मसाज आपके मूड को बनाने के साथ-साथ सेक्स की चाह को भी बढ़ाता है. यदि ऐसे में पति-पत्नी एक-दूसरे का मसाज करें तो यह बॉडी पर जादू-सा असर करती है. इससे दोनों के बीच की दूरियां दूर होने के साथ-साथ नीरसता भी छंटती है. उनमें आपसी प्रेम मज़बूत होता है. वे इमोशनली एक-दूसरे के क़रीब आते हैं. आपसी समझदारी और केयर की भावना भी बढ़ती है.

फ़िट व हेल्दी रहने का फॉर्मूला
मसाज थेरेपी स्वस्थ और चुस्त-दुरुस्त रखती है. यदि आप मोटी हैं या फिर शरीर में अतिरिक्त चर्बी बढ़ गयी है, तो इसे दूर करने के लिए आप मसाज थेरेपी की सहायता ले सकती हैं. अध्ययन द्वारा यह भी देखा गया है कि मोटापा सेक्स लाइफ़ को प्रभावित करता है. ऐसे में मसाज थेरेपी द्वारा आप ना केवल ख़ुद को हेल्दी रख सकती हैं, बल्कि सेक्सुअल लाइफ़ का भी भरपूर आनंद उठा सकती हैं.

मसाज करने का तरीक़ा
हमेशा मसाज इस तरह करें कि रक्त का प्रवाह ऊपर की ओर होता रहे, ताकि रक्तशुद्धि का कार्य भी होता रहे. मसाज की शुरुआत पैरों से करें. फिर शरीर के अन्य भागों का मसाज करते जाएं. ध्यान रखें, मसाज शरीर में होनेवाले रक्तसंचार की विपरीत दिशा में कदापि न करें. पैर के तलुओं से प्रारंभ करके क्रमशः पैर की उंगलियों, पिंडलियों, जंघा, इसके बाद दोनों हाथों, भुजाओं, पेट, छाती, पीठ और फिर कंधों की मालिश करनी चाहिए.

जांघों के अंदरूनी भाग पर, छाती के ऊपर, गर्दन के पीछे, नितंबों के ऊपर, हाथ-पैरों की उंगलियों के मध्य, स्तनों के आस-पास मसाज करने से सेक्स उत्तेजना अप्रत्याशित रूप से तीव्र हो उठती है. अपनी क्षमता व उम्र के अनुसार 15-20 मिनट तक  मसाज करना चाहिए. इससे यौनांगों में तीव्र उत्तेजना उत्पन्न होती है.

मसाज करने के लिए पहले सुगंधित तेल हथेलियों पर लगाकर जिस अंग का मसाज करना हो, उस जगह पर हाथ फिराकर तेल लगाएं. इसके बाद हथेलियों का हल्का-हल्का दबाव डालकर तब तक मसाज करें, जब तक कि  शरीर तेल सोख न ले. इस प्रकार तेल की भीनी-भीनी ख़ुश्बू रोमछिद्रों एवं नाक के माध्यम से मस्तिष्क में पहुंचकर संपूर्ण शरीर में मादकता और मस्ती भर देते हैं. इससे सेक्स संबंधी संवेदनाओं का नियंत्रण भी होता है. परिणामस्वरूप व्यक्ति सेक्स के समय जल्दी स्खलित नहीं होता. मसाज थेरेपी शीघ्रपतन के मरीज़ों के लिए एक वरदान है.

– भावना

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अपनी तारीफ़ में क्या सुनना पसंद करते हैं पुरुष? (Compliments men like to hear)

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अपनी तारीफ़ (Compliments men like to hear) सुनना किसे अच्छा नहीं लगता? तारीफ़ के दो मीठे बोल कानों में मिश्री-सी घोल देते हैं. तारीफ़ छोटे-बड़े सभी में ऊर्जा का संचार करती है और हमारे काम करने की गति को ही बदल देती है. पुरुषों से जुड़े कुछ ऐसे ही तारीफ़ों के बारे में जानते हैं.

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बात पुरुषों की है, तो वे स्वभाव से भले ही थोड़े सख़्त माने जाते हैं, पर उनके मन में भी कोमल भावनाएं छिपी होती हैं और अपनी प्रशंसा सुनते ही उनका दिल तेज़ी से धड़कने लगता है. आइए जानें, किस तरह की तारीफ़ सुनना पसंद करते हैं पुरुष.

आज आप बहुत स्मार्ट लग रहे हैं

लुक्स की तारीफ़ महिलाओं को ही नहीं, पुरुषों को भी पसंद है. अपने डैशिंग लुक्स, हेयर स्टाइल, ब्रांडेड जूतों और घड़ियों को लेकर मिला कोई भी कॉम्प्लीमेंट पुरुषों को बेहद पसंद आता है. कपड़े ख़रीदने या एक्सेसरीज़ लेने में अगर कोई उनका सहयोग मांगे, तो उन्हें बहुत अच्छा लगता है.

आप बहुत सपोर्टिव हैं

दूसरों का ध्यान रखना, सहयोगियों के साथ मिलकर काम करना, हमेशा सबकी मदद करना आदि पौरुष की निशानी है. ऐसे कॉम्प्लीमेंट्स अगर पुरुषों को अपने पुरुष सहकर्मियों से मिलें, तो उन्हें अच्छा लगता है, लेकिन अगर महिलाएं यह कॉम्प्लीमेंट दें, तो पुरुषों का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है.

आपका सेंस ऑफ ह्यूमर बहुत अच्छा है

चतुर, हाज़िरजवाब, ख़ुशमिज़ाज पुरुष सभी को अच्छे लगते हैं. ये हर महफ़िल की शान होते हैं. अगर यह कॉम्प्लीमेंट अपने जाननेवालों, मिलनेवालों से उन्हें मिले तो पुरुष गदगद हो जाते हैं.

आप बहुत लविंग और केयरिंग हैं

जीवनसाथी या बच्चे, फ्रेंड्स या कलीग आपको लविंग और केयरिंग कहें, तो पुरुषों का आत्मबल बढ़ जाता है. परिवार के लिए वो जो कुछ भी करते हैं, अगर घर के सदस्य उन्हें केयरिंग मान लें, तो बस इतना ही काफ़ी है. पुरुष उनके लिए जान भी न्योछावर कर सकते हैं.

आप अपने काम में माहिर हैं

अपने वर्क फील्ड में अगर पुरुष को उनके बॉस, सहकर्मी या कोई सीनियर एक्सीलेंट कह दे या उनके प्रयासों की सराहना करे,  तो पुरुष प्रफुल्लित हो उठते हैं. अपने काम की सराहना हर पुरुष में आत्मविश्‍वास भर देती है.

आप सचमुच बहुत टैलेंटेड हैं

नौकरी, व्यापार या अपने पेशे के अतिरिक्त अगर कोई गुण उनमें है और उसमें वे परफेक्ट हैं और अगर कोई उसे पहचानकर उनकी तारीफ़ करे, तो उन्हें बहुत अच्छा लगता है. समाजसेवा, गायन, लेखन और खेलकूद आदि किसी भी क्षेत्र में अपनी प्रतिभा की मान्यता न केवल पुरुषों को ख़ुशी देती है, बल्कि उन्हें और अच्छा करने के लिए प्रोत्साहित भी करती है.

आज आप बहुत अच्छे लग रहे हैं

महिलाओं की तरफ़ से ख़ासतौर पर गर्लफ्रेंड की ओर से मिला यह कॉम्प्लीमेंट पुरुषों को घंटों, हफ़्तों, महीनों तक ख़ुश रख सकता है. आज के ज़माने में सहकर्मियों से भी यदि यह तारीफ़ सुनने को मिले, तो पुरुष बेहद ख़ुश हो जाते हैं.

आप अपनी उम्र से कम लगते हैं

पुरुषों को भी अपनी उम्र से कम लगना अच्छा लगता है और यह कॉम्प्लीमेंट अगर महिलाओं से मिले, तो सोने पर सुहागा. किसी भी उम्र के पुरुष को छोटा लगना हमेशा पसंद होता है.

आपको तो बहुत लोग पसंद करते हैं

कहनेवाला न केवल इससे अपनी चाहत दर्शाता है, बल्कि वो ख़ास व्यक्ति कितना प्रसिद्ध है यह भी बताता है. पुरुषों को ऐसे जुमले बहुत पसंद होते हैं. उनका कॉन्फिडेंस बूस्ट हो जाता है और काम करने की शक्ति दुगुनी हो जाती है.

आप बड़े टेक्नोसैवी हैं

गैजेट्स पर मास्टरी आज के ज़माने में एक अतिरिक्त टैलेंट है. जब पुरुष कंप्यूटर, लेटेस्ट एप्लीकेशंस, कैमरा, मोबाइल के विषय में अक्सर कॉम्प्लीमेंट पाते हैं, तो इससे उनको स्मार्ट और फिट फील होता है. उनकी कार्यक्षमता भी निखरती है.

आप विश्‍वास के योग्य हैं

किसी भी पुरुष को यह सुनकर बेहद अच्छा लगता है कि लोग उन पर विश्‍वास करते हैं,  फिर चाहे बात चरित्र की हो या काम की, रिश्ते निभाने की हो या सहयोग करने की.

आप बहुत कूल हैं  

कूल होना आज के ज़माने में कॉम्प्लीमेंट है. यह स्मार्टनेस और धैर्य को दर्शाता है. वर्कप्लेस, घर या किसी और पब्लिक प्लेस में अगर आप कूल कहलाए जाते हैं, तो मतलब आप में कोई ख़ास बात है. पत्नी अगर पति की तारीफ़ अकेले में करे, तो उन्हें अच्छा लगता है, पर अगर सोसायटी में सबके सामने करे, तो उन्हें बहुत अच्छा लगता है.

तारीफ़ तो हर रूप में अच्छी लगती है और दिल खोलकर करनी भी चाहिए. पुरुषों को महिलाओं से मिले काम्प्लीमेंट्स ज़्यादा गुदगुदाते हैं और देर तक याद रहते हैं. अपने हुनर, काम या ख़ास प्रयास की सराहना पुरुषों में स्फूर्ति भर देता है. देखने में कठोर, रफ एंड टफ इन पुरुषों पर भी प्रशंसा जादुई असर करती है. तो क्यों न आज ही से दिल खोल के करें उनकी तारीफ़.

– पूनम मेहता

कैसा हो पार्टनर का पोस्ट सेक्स बिहेवियर? (Partners Post Sex Behavior)

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सफल सेक्स लाइफ के लिए जितना महत्वपूर्ण फोरप्ले और आफ्टरप्ले होता है, उतना ही अहम् होता है पार्टनर का पोस्ट सेक्स बिहेवियर(Partners Post Sex Behavior). पोस्ट सेक्स बिहेवियर यानी सेक्स के बाद पार्टनर द्वारा किया जाने वाला व्यवहार किस तरह का होना चाहिए. अधिकतर पार्टनर्स पोस्ट सेक्स बिहेवियर को ज़्यादा महत्व नहीं देते, जिसके कारण उनके रिश्तों की गरमाहट ख़त्म हो जाती है.

Partners Post Sex Behavior

क्या है पोस्ट सेक्स बिहेवियर (Partners Post Sex Behavior)?

मुंबई के केईएम हॉस्पिटल एंड जी.एस. मेडिकल कॉलेज के सेक्सोलॉजिस्ट डॉ. राजन भोसले के अनुसार, “पोस्ट सेक्स बिहेवियर ऐसा रोमांटिक रिलेशनशिप है, जिसमें पार्टनर्स एक-दूसरे से सेक्सुअल सैटिस्फैक्शन के बारे में बातें करते हैं, अपनी भावनाएं व्यक्त करते हैं, जिसका प्रभाव उनके दांपत्य जीवन पर पड़ता है. एक-दूसरे को किस करना, आलिंगन करना, पिलो टॉक (प्राइवेट बातें) आदि पोस्ट सेक्स बिहेवियर का एक हिस्सा है. अधिकतर दंपतियों को इस बात की शिकायत रहती है कि उनके प्रति पार्टनर का पोस्ट सेक्स बिहेवियर उन्हें आहत करता है, उनका ऐसा रूखा व्यवहार उनके रिश्तों में कड़वाहट पैदा करता है.”

Partners Post Sex Behavior

क्या न करें पोस्ट सेक्स बिहेवियर में (Partners Post Sex Behavior)?

–  सेक्स के बाद कोई भी पार्टनर तुरंत अपना मोबाइल चेक करने, मैसेज भेजने या लैपटॉप लेकर बैठने आदि जैसी ग़लतियां न करें.

– रोमांटिक बातों के बाद ब्रेकफास्ट/लंच में क्या बनेगा… घर के ख़र्चे जैसे- बिल कैसे भरेंगे… आदि बातों के अलावा पार्टनर से कोई बहस या सवाल पूछने जैसी भूल न करें.

– रियल सेक्स लाइफ की तुलना पोर्नोग्राफी से न करें.

– कोई भी पार्टनर किसी दोस्त की सेक्स लाइफ की तुलना अपनी सेक्स लाइफ से कभी न करे, क्योंकि सबकी सेक्सुअल ज़रूरतें अलग-अलग होती हैं.

पुरुषों का मुंह फेर कर सो जाना…

– सेक्स के बाद अक्सर महिलाओं को यह शिकायत रहती है कि उनके पार्टनर सेक्स के बाद तुरंत मुंह फेर कर सो जाते हैं. पुरुषों की यह आदत महिला पार्टनर को बिल्कुल अच्छी नहीं लगती. उनका ऐसा व्यवहार पार्टनर को आहत करता है.

– सेक्सोलॉजिस्ट का मानना है कि पुरुषों का ऐसा व्यवहार पार्टनर के प्रति बिल्कुल भी सही नहीं है. उनके ऐसे व्यवहार से वह पूर्णत्व का अनुभव नहीं करती. कई बार महिलाएं पुरुष पार्टनर द्वारा आफ्टरप्ले या सही ढंग से पोस्ट सेक्स बिहेवियर न किए जाने पर नाराज़ या ग़ुस्सा हो जाती हैं. यहां तक कि पुरानी बातों को लेकर पुरुष पार्टनर से झगड़ा भी करती हैं.

Partners Post Sex Behavior

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पार्टनर के पोस्ट सेक्स बिहेवियर के बारे में कुछ ज़रूरी बातें

सेक्स में ऑगैऱ्ज्म की अनुभूति होने के बाद पुरुष पार्टनर के जल्दी सो जाने की एक वजह हार्मोंस भी हो सकते हैं, लेकिन सेक्स के बाद कुछ रोमांटिक पल बिताना रिश्तों की मज़बूती के लिए अच्छा होता है. इसलिए महिलाएं पुरुषों से अच्छे पोस्ट सेक्स बिहेवियर की अपेक्षा करती हैं. पोस्ट सेक्स बिहेवियर के बारे में दोनों पार्टनर को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए-

–   सेक्स के तुरंत बाद अधिकतर पुरुष बिना कुछ कहे बेड से उठकर चले जाते हैं. उनका ऐसा व्यवहार सेक्स ऐटिकेट्स के विरुद्ध है. इससे महिला पार्टनर को बुरा महसूस होता है. इस स्थिति से बचने के लिए पुरुष पार्टनर बेड से उठने से पहले ‘एक्सक्यूज़ मी’ कहकर जाएं और वापस आने पर पार्टनर को ‘हग’ या ‘किस’ करें.

–   दोनों पार्टनर अपनी शारीरिक स्वच्छता का ध्यान रखें.

–  सेक्स के बाद तुरंत सोने की बजाय पार्टनर्स कुछ पल रोमांटिक बातचीत में बिताएं.

–  पार्टनर्स आफ्टरप्ले करें, जैसे- हग या किस करना, एक-दूसरे को सहलाना, बालों में हाथ फेरना आदि.

–  रिलेशनशिप के बाद पार्टनर्स आपस में पिलो टॉक करें. पिलो टॉक करने से पार्टनर्स भावनात्मक रूप से एक-दूसरे के क़रीब आते हैं.

–  पुरुष अपने पार्टनर से पूछें कि वह क्या चाहती है, ताकि वह अगली बार उसकी इच्छाओं और पसंद-नापसंद का ध्यान रखें.

–  भावनात्मक स्तर पर रिश्तों को मज़बूत बनाने के लिए ज़रूरी है कि महिलाएं अपने पार्टनर से अपने मन की बात शेयर करें.

–  यदि पार्टनर को ऑर्गैज़्म की अनुभूति न हुई हो और वह दोबारा रिलेशन बनाना चाहता/चाहती है, तो दूसरा पार्टनर उसकी इच्छा का सम्मान करे.

– आफ्टरप्ले करने के बाद भी पार्टनर्स एक-दूसरे को स्पर्श करते हुए सोएं.

– दोनों पार्टनर सारी ज़िम्मेदारियों और बातों को भूलकर थोड़ी देर रोमांटिक माहौल बनाए रखें.

–  यदि पार्टनर्स अच्छी सेक्सुअल लाइफ चाहते हैं, तो सेक्स के दौरान एक-दूसरे की आलोचना करने से बचें. इससे दांपत्य जीवन में दरार आ सकती है.

– पूनम कोठारी

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कितनी हेल्दी है आपकी सेक्स लाइफ ? (How Healthy Is Your Sex Life?)

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तुम्हारे लबों को छूने की चाहत में न जाने कितने अरमान पिघल जाएंगे… तुम्हारे दामन में सिमटने की ख़्वाहिश में न जाने कितने ही चांद जल जाएंगे… मखमली रातें जब आती हैं चंद अरमानों की चिलमन में… बुझते चराग़ जल उठते हैं, शमा को छूने की हसरत में…

बात जब प्यार-मुहब्बत की होती है, तो माहौल रूमानी हो ही जाता है, लेकिन न जाने कब ये रोमांस धीरे-धीरे ज़िंदगी की उलझनों में खो जाता है और कब आपकी मुहब्बत बस एक रूटीन बनकर रह जाती है, पता ही नहीं चलता. ऐसे में बेहतर है कि आप ख़ुद यह जानें व समझें कि आपकी रिलेशनशिप व ख़ासतौर से सेक्स लाइफ कितनी हेल्दी है.
यहां हम कुछ बेसिक पॉइंट्स पर बात करेंगे, जिनकेआधार पर आप यह डिसाइड कर सकते हैं कि आपका बेडरूम बिहेवियर कैसा है और आपकी सेक्स लाइफ कितनी हेल्दी है.

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अपनी बॉडी को लेकर कितना अच्छा महसूस करते हैं: यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास में 18 से 49 वर्ष की महिलाओं पर हुए शोध के मुताबिक, जिन महिलाओं को अपनी बॉडी इमेज पर सर्वाधिक स्कोर मिला, उनकी सेक्स लाइफ काफ़ी अच्छी थी. दरअसल, अपने शरीर व बॉडी फैट्स को लेकर महिलाएं काफ़ी कॉन्शियस रहती हैं, यही वजह है कि अगर उनके पेट या थाईज़ के आसपास फैट्स बढ़ता है, तो सेक्स के दौरान उनका ध्यान वहीं रहता है. इस वजह से वो सेक्स में पूरी तरह से इन्वॉल्व नहीं हो पातीं, जिसका असर ऑर्गेज़्म पर भी पड़ता है.
टिप: नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करें. इससे अपनी बॉडी इमेज के प्रति सकारात्मकता बढ़ती है और आत्मविश्‍वास में भी इज़ाफा होता है, जिससे सेक्स लाइफ बेहतर बनती है.

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आप यह कहने से हिचकते नहीं कि आपको सेक्स में क्या चाहिए: हेल्दी सेक्स का अर्थ है अपनी परफेक्ट रेसिपी का पता लगाना. आप अपने पार्टनर से यह उम्मीद नहीं कर सकते कि वो आपके मन की बात बिना कहे ही पढ़ ले. ऐसे में आप दोनों को ही इतना ओपन होना चाहिए कि सेक्स में अपनी चाहत के बारे में खुलकर कह सकें.
टिप: अगर आप सामने से बात करने से हिचकते हैं, तो अपने पार्टनर को मैसेज करके अपनी सेक्सुअल फैंटेसीज़ के बारे में बता सकते हैं.

क्या आप सेक्स शेड्यूल करते हैं: अक्सर सेक्स को लेकर हमारी यही सोच होती है कि यह तो नेचुरल है, प्लान नहीं किया जा सकता. जब फीलिंग हो, तब करना चाहिए. लेकिन अगर आप सेक्स का भी टाइम टेबल बनाते हैं, तो आपकी सेक्स लाइफ हेल्दी होगी. आप अपने शेड्यूल के हिसाब से सब कुछ करेंगे, जिससे आपका मूड बेहतर होगा.
टिप: जिस दिन शेड्यूल किया है, उस दिन बच्चों को समय पर सुला दें. सारे काम समय से पहले निपटा दें, लाइट फूड खाएं. सेक्सी ड्रेस पहनकर साथ में रोमांटिक मूवी देखें.

सेक्स को काउंट न करें: आप हफ़्ते में या महीने में कितनी बार सेक्स करते हैं, यह गिनना हेल्दी नहीं. मन में यह बात आना कि आप कम या ज़्यादा सेक्स कर रहे हैं, आप पर प्रेशर डालता है. शोध में यह पाया गया है कि जिनको कहा गया कि आप अधिक सेक्स करें, वो अपनी सेक्स लाइफ से उतने ख़ुश नहीं थे, जितने वो कपल्स, जिन्हें नॉर्मल रहने को कहा गया था.
टिप: रोमांटिक डेट्स प्लान करें और कुछ नया ट्राई करें, इससे आपकी सेक्स लाइफ बेहतर बनेगी.

आप कैसा महसूस करते हैं: सेक्स के बाद क्या आप ख़ुद को अपने पार्टनर के और भी क़रीब महसूस करते हैं? क्या आपका मूड पहले सेबेहतर होता है और क्या आप अधिक पॉज़िटिव सोचते हैं? अगर हां, तो आपकी सेक्स लाइफ काफ़ी अच्छी और हेल्दी है.
टिप: सेक्स कितनी बार किया जाए यह महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि सेक्स किस तरह से आपको बेहतर महसूस करवाता है यह ज़रूरी है. तो अगली बार ख़ुद से यही सवाल करें कि किस तरह से आप सेक्स के बाद बेहतर महसूस करते हैं.

सेक्स के लिए मना करते हैं: कभी-कभी ऐसा भी होता है कि आपके पार्टनर का मूड हो और आपका नहीं… ऐसे में आप क्या करते हैं? कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि पार्टनर की ख़ुशी के लिए आपको मना नहीं करना चाहिए, लेकिन दूसरी ओर यह भी सच है कि अगर आप अक्सर ऐसा करते हैं, तो सेक्स आपके लिए मात्र एक रूटीन बनकर रह जाएगा. इसलिए कभी-कभी मना करना भी हेल्दी होता है.
टिप: यहां यह ज़रूर ध्यान में रखें कि मूड न होने पर अगर आप अपने पार्टनर को मना करते हैं, तो कभी-कभी सेक्स में पहल भी करें, ताकि आपके पार्टनर को यह महसूस हो कि आप उन्हें पसंद करते हैं और वो आपको अट्रैक्ट करते हैं.

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आप जानते हैं कि कब और क्या बदलाव करने हैं: अक्सर एक समय के बाद कपल्स को सेक्स एक रूटीन ही लगने लगता है, ऐसे में यदि आप जानते हैं कि सेक्स को बोरियत से बचाने के लिए कब और क्या बदलाव करने हैं, तो आपकी सेक्स लाइफ काफ़ी हेल्दी है.
टिप: सेक्स को बोरिंग होने से बचाने के लिए सेक्स की जगह बदलें, कमरे का डेकोर भी बदल सकते हैं, रूटीन से हटकर कुछ करें, सेक्सीआउटफिट पहनें, ताकि आपकी सेक्स लाइफ में नई ताज़गी आए.

आप अपने पार्टनर के साथ ख़ुश हैं: सोशल साइंस रिसर्च के अनुसार यह बहुत ही सिंपल, लेकिन बेसिक बात है कि अगर आप अपने पार्टनर के साथ ख़ुश हैं, तो आपकी सेक्स लाइफ भी हेल्दी होगी.
टिप: पार्टनर की कंपनी एंजॉय करें. रोमांटिक बातें, कभी-कभार सेक्स को लेकर बहस भी करें, एक-दूसरे के लिए अट्रैक्टिव व फिट नज़र आने की कोशिश करें.

सेक्सी बातें करते हैं: सामने या सेक्स के समय ही नहीं, जब एक-दूसरे से दूर होते हैं, ऑफिस या कहीं और तो क्या सेक्सी मैसेज भेजते हैं? या फोन पर फ्लर्ट करते हैं? अगर हां, तो आप राइट ट्रैक पर हैं. जरनल ऑफ इंटिग्रेटेड सोशल साइंसेस के अनुसार ये तमाम छोटी-छोटी बातें आपकी सेक्स लाइफ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, क्योंकि यही बातें आप को फिज़िकली और रोमांटिकली क़रीब लाती हैं.
टिप: कभी भी मौक़ा देखकर अपने पार्टनर के कानों में धीरे से आई लव यू या कोई भी रोमांटिक बात कहें, फिर देखें असर. इस तरह के सरप्राइज़ेस आपकी सेक्स लाइफ को फे्रश बनाए रखेंगे.

रियलिस्टिक अप्रोच रखते हैं: सेक्स लाइफ को लेकर आप जितना प्रैक्टिकल और मैच्योर अप्रोच रखेंगे, उतनी ही हेल्दी आपकी सेक्स लाइफ होगी. यह ज़रूरी नहीं कि सेक्स हर बार बहुत ही ज़्यादा इंटेंस और पैशनेट हो. उसमें आनेवाले उतार-चढ़ाव व बदलावों को जितना जल्दी आप स्वीकार कर लेंगे, उतना ही अच्छा होगा.
टिप: सेक्सुअल होने के कोई बंधे-बंधाए नियम नहीं हैं, उसमें कुछ भी सही या कुछ भी ग़लत नहीं होता. आप और आपका पार्टनर जब इस हद तक मैच्योर और ओपन हो जाएंगे कि आपको कब सेक्स की ज़रूरत है और कब नहीं, तब आपकी सेक्स लाइफ परफेक्ट और हेल्दी हो जाएगी.

– योगिनी भारद्वाज

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क्या आप पार्टनर को फायनांशियली चीट कर रहे हैं? (Are you cheat Financial partner?)

cheat financial partner

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माना शादीशुदा ज़िंदगी में हमसफ़र को हर बात बतानी ज़रूरी नहीं है, मगर कुछ मामलों में उनसे बोला गया झूठ आपके रिश्ते पर भारी पड़ सकता है, ख़ासकर पैसों से जुड़े मामले. आमतौर पर कपल्स पार्टनर से फायनांस से जुड़ी कौन-सी बातें छुपाते हैं? आइए, जानते हैं.

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इनकम (आय) छुपाना
अमित अपनी कुल सैलरी की रकम से कम ही रकम अपनी पत्नी को बताते हैं. उन्हें डर है कि ज़्यादा रकम सुनकर पत्नी कोई महंगी पर्सनल चीज़ की डिमांड ना कर दे, क्योंकि उसे लोगों से तुलना करने की आदत है. रेखा भी अपनी इनकम के बारे में पति से झूठ बोलती है. स़िर्फ इसलिए ताकि उसके पति के अहम् को चोट ना पहुंचे कि वह अपने पति से ज़्यादा कमाती है.

क्या करें?
ऐसा भी हो सकता है कि जिस तरह की सोच अमित और रेखा अपने पार्टनर के बारे में रखते हैं, उनका स्वभाव ऐसा न हो, इसलिए पार्टनर से खुलकर बात करनी ज़रूरी है. इससे उन्हें भी अच्छा लगेगा कि आप उन पर विश्‍वास करते हैं.
प अपने पार्टनर से सलीके और बुद्धिमानी से इस तरह बात करें कि उन्हें बुरा ना लगे. उन्हें अपनी पे स्लिप या बैंक स्टेटमेंट दिखाएं और कहें कि अपनी और बच्चों की आर्थिक सुरक्षा के लिए एक निश्‍चित रकम बचत में जाएगी और बचे हुए पैसों से ही घर ख़र्च चलेगा. निश्‍चित ही पार्टनर इसका विरोध नहीं करेंगे.

ख़र्च छुपाना
राहुल अपने ख़र्चों के बारे में पत्नी को कभी नहीं बताते या झूठ बोलते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है वह बहुत सवाल करती है और उनके ख़र्च को हमेशा ग़लत ठहराती है. जबकि उनकी पत्नी रीता का कहना है, ङ्गङ्घराहुल होटल और दोस्तों को खाने-खिलाने में तो पैसे उड़ाते हैं, मगर घर ख़र्च के लिए पैसे देते समय हाथ खींच लेते हैं. मैं हाउसवाइफ हूं इसलिए मुझे घर ख़र्च के पैसों से ही अपने पर्सनल ख़र्च भी पूरे करने पड़ते हैं.फफ रीता के पैसे महीना पूरा होने से पहले ही ख़त्म हो जाते हैं और इसी बात पर अक्सर पति-पत्नी में झगड़ा हो जाता है.

क्या करें?
इन हालात में सबसे ज़्यादा ज़रूरी है कि घर का बजट बनाया जाए, जिसमें पति-पत्नी के पर्सनल ख़र्च, बच्चों की फीस, उनके ख़र्च, बिल, राशन आदि तथा अन्य ख़र्च के लिए निश्‍चित राशि रखी जाए. साथ ही बचत के लिए अलग से रकम रखें. इस नियम का कठोरता से पालन करें. इससे आपस में झगड़े भी नहीं होंगे और सारी समस्या हल हो जाएगी.

बचत/प्रॉपर्टी के बारे में छुपाना
अतुल अपनी मां का बहुत आदर करता है, परंतु मां की उसकी पत्नी से नहीं बनती. अतुल ने अपनी बचत से एक प्लॉट लिया, परंतु नॉमिनी पत्नी की जगह मां को बनाया. इस बारे में पत्नी को बताया भी नहीं. इसी तरह अन्य दस्तावेजों में भी मां, भाई या बहन ही नॉमिनी थे. अचानक अतुल की एक कार एक्सीडेंट में मृत्यु हो गई. उसकी पत्नी को प्रॉपर्टी के बारे में कुछ भी मालूम नहीं था. ससुरालवालों ने हाथ खड़े कर लिए. उसे बहुत परेशानी झेलनी पड़ी.

क्या करें?
कई बार पति पत्नी को प्रॉपर्टी या बचत के बारे में बताना ज़रूरी नहीं समझते. कई बार पत्नी भी इसमें रुचि नहीं लेती, इसलिए उसे बताया नहीं जाता. आप ऐसी ग़लती ना करें. प्रॉपर्टी या कोई भी बड़ा इन्वेस्टमेंट आपसी सहमति से ही करें. पत्नी को ही नॉमिनी बनाएं. इसी तरह बैंक अकाउंट्स, इंश्योरेंस या अन्य किसी भी दस्तावेज में नॉमिनी का कॉलम होता है. उसे कभी खाली ना छोड़ें. नॉमिनेशन ना होने पर आपके जाने के बाद प्रॉपर्टी के लिए पत्नी को काफ़ी मशक्कत करनी पड़ेगी.

उधार/ऋण छुपाना
सबसे ज़्यादा झूठ क्रेडिट कार्ड के मामले में ही बोला जाता है. पति या पत्नी क्रेडिट कार्ड से ख़र्च करते रहते हैं और आपस में बताते ही नहीं. कई बार वो लोन लेने के बारे में भी पार्टनर को नहीं बताते. मुश्किल तो तब आती है जब पति की मृत्यु हो जाती है और रकम की वसूली के लिए बैंक पत्नी को तंग करते हैं और तब परिवार आर्थिक परेशानियों से घिर जाता है.

क्या करें?
क्रेडिट कार्ड से ख़र्च करने/लोन लेने पर पार्टनर को ना बताना रिस्की हो सकता है. यदि क्रेडिट कार्ड है, तो ध्यान रखें कि पार्टनर देय राशि समय पर चुका दें. यदि पैसों की तंगी है तो पर्सनल लोन लेने की बजाय अपनी संपत्ति, सोना या फिक्स्ड डिपॉज़िट पर लोन लेना बेहतर होगा.

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कैसे जानें पार्टनर कुछ छुपा रहा है?

  •  क्या आपके पार्टनर का व्यवहार अचानक बदल गया है? क्या वो अचानक चिड़चिड़ा और ग़ुस्सैल हो गया है? क्या वो आपके ख़र्च पर सवाल उठा रहा है? यदि हां, तो संभल जाइए. जब कोई व्यक्ति कुछ ग़लत करता या छुपाता है, तभी वह दूसरों से सवाल करता है.
  •  यदि पत्नी घर ख़र्च के लिए पैसों की कमी की शिकायत करती है. वह वर्किंग नहीं है, फिर भी स्वयं के लिए कोई महंगी चीज़ ख़रीद लेती है. इसी तरह महीने के अंत में कुछ भी रकम नहीं बचती कहनेवाला पति ख़ुद के लिए बाइक ख़रीद लेता है. इसका मतलब है कि पति जितना कहता है, उससे ज़्यादा कमाता है और पत्नी ने या तो घर ख़र्च से पैसे बचाए हैं या किसी से उधार लिया है.
  •  यदि पार्टनर के पर्सनल ख़र्च, क्रेडिट कार्ड, टेलिफोन बिल, अचानक बढ़ गए हैं, तो ध्यान दें.
  •  आजकल बहुत से लोग बैंक ट्रांजेक्शन नेट पर करते हैं या ऑनलाइन ख़रीददारी करते हैं. यदि आपका पार्टनर हर बार आपके आते ही जल्दी से कंप्यूटर बंद कर दे, आपको ट्रांजेक्शन देखने ना दे या आपसे अपना पासवर्ड शेयर ना करे, तो समझ जाएं ज़रूर कुछ छुपाया जा रहा है.

क्या कहती है रिसर्च?

  •  रिसर्च बताती है कि लगभग 42% पुरुष अपनी आय के बारे में झूठ बोलते हैं.
  • सर्वे से पता चला है कि 56% पुरुष पत्नी को बताए बिना ही ख़र्च करते हैं.
  • सर्वे में 39% महिलाओं का विश्‍वास है कि शादी में पैसों का इस तरह का छोटा-मोटा झूठ चलता है, जबकि 16% महिलाएं मानती हैं, कि छोटे-छोटे ख़र्च तो नहीं, पर बड़े ख़र्च बताए जाने चाहिए.
  • अधिक फाइनेंस आर्टिकल के लिए यहां क्लिक करें: FINANCE ARTICLES 

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10 अलर्ट्स जो बताएंगे कि आपका पार्टनर सही है या ग़लत (10 Alerts to tell you your partner is perfect or not)

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 10 अलर्ट्स जो बताएंगे कि आपका पार्टनर (Fraud partner alerts) सही है या ग़लत

Fraud partner alerts

  1. बहुत शो ऑफ करता हो

भले ही आपका साथी रईस न हो, पर महंगे शौक़ रखता हो और उनका हर जगह प्रदर्शन भी करता हो. ख़ुद को हाई प्रोफाइल कहलाना उसे बेहद पसंद हो. उधार लेकर भी अपने शौक़ पूरे करता हो और पैसों के लिए ग़लत काम करने से भी हिचकिचाता ना हो. ऐसे लोग स़िर्फ अपने बारे में सोचते हैं और आज में जीते हैं. ऐसा साथी आपके वर्तमान और भविष्य दोनों को ख़तरे में डाल सकता है, अगर समय रहते आपको इसका पता चल गया है, तो समझ जाएं कि यह इंसान आपके लिए सही नहीं है.

2. हमेशा फिज़िकल क्लोज़नेस चाहता हो

अक्सर उसकी तारीफ़ों में आपकी ख़ूबसूरती की बजाय बॉडी पार्ट्स की तारीफ़ छिपी रहती है. साथ घूमने जाने या मिलने के लिए एकांत या सुनसान जगह ही चुनता हो. मौक़ा पाते ही आपको हाथ लगाने, चूमने या स्पर्श करने से चूकता न हो. आपको हमेशा बॉडी रिवीलिंग ड्रेसेज़ गिफ्ट करता हो और पहनने की फ़रमाइश भी करता हो. फोन पर ज़्यादातर नॉटी व वल्गर मैसेजेस भेजता हो, तो सावधान हो जाइए. आपको उसकी ऐसी हरक़तों पर पैनी नज़र रखनी चाहिए, ताकि कोई भी ़फैसला लेने से पहले पूरी तरह आश्‍वस्त रहें.

3. आपसे अक्सर पैसे उधार लेता हो

ज़माना बेशक कामकाजी महिलापुरुष का हो, पर जो पुरुष अपनी गर्लफ्रेंड, प्रेमिका या मंगेतर से पैसे उधार मांगता रहता हो, उससे सावधान रहिए. यहां हम कभीकभार का ज़िक्र नहीं कर रहे हैं, पर अगर ऐसा अक्सर होता है, तो ज़रूर सोचनेवाली बात है. क्या गारंटी है कि शादी के बाद वो पूरी तरह से आप पर आश्रित नहीं होगा. हर महिला चाहती है कि उसका पति स्वावलंबी हो, पर अगर वो शुरू से ही आप पर निर्भर है, तो अभी भी व़क्त है.

4. आपसे बातें छिपाता हो

काफ़ी समय के रिश्ते के बाद भी यदि वो आपसे बातें छिपाए, कुछ पूछने पर टालमटोल करे, खुलकर अपने घरपरिवार के बारे में न बताए, मोबाइल न छूने दे, तो सावधान हो जाइए, दाल में कुछ काला है. अगर आपका मंगेतर विदेश में काम करता है, तो अपने स्थानीय मित्रों या रिश्तेदारों के ज़रिए उसके बारे में पता लगाएं. सोशल नेटवर्किंग साइट्स भी इसमें आपकी मदद कर सकती हैं. इस तरह तहक़ीक़ात करने पर उसे बुरा लगेगा, इस डर से अपने भविष्य को ख़तरे में न डालें.

5. अचानक अजीब ढंग से व्यवहार करता हो

अचानक यूं ही किसी दिन अपनी सगाई की अंगूठी उतार दी, आपको टाइम देकर वहां आना भूल गया या सार्वजनिक स्थान पर आपको बेइज़्ज़त कर दिया या आपसे ज़्यादा अपनी भावनाओं को तवज्जो देता हो, तो चिंता की बात है. इसके अलावा आप पर ध्यान न देना, आपको अनदेखा करना, आपमें दिलचस्पी न लेना आदि दोहरा चरित्र या व्यवहार ख़तरे की घंटी है. ख़ुद को ऊंचा उठाने के लिए अक्सर दूसरों को नीचा दिखाना कुछ लोगों की आदत होती है.

6. आपके सामने कुछ और पीठ पीछे कुछ और

दोहरापन और चुगलखोरी किसी भी रिश्ते में दरार डाल सकते हैं. आप ही सोचिए आपके सामने अच्छा और पीठ पीछे बुरा कहनेवाला भला आपका अपना कैसे बन सकता है. अगर आपका साथी भी ऐसा करता है, तो वो यक़ीनन इस रिश्ते को लेकर गंभीर नहीं है.

7. सैलरी या फाइनेंशियल कंडीशन्स के बारे में छुपाता हो

किसी भी रिश्ते की मज़बूती के लिए पारदर्शिता बहुत ज़रूरी है. आपका होनेवाला लाइफ पार्टनर अगर आपको अपनी फाइनेंशियल कंडीशन के बारे में सहीसही नहीं बताता या छुपाता हो या बहाने बनाता हो, तो आपको सतर्क हो जाना चाहिए. कुछ लोग दिखावे के लिए कभी लोन, तो कभी क्रेडिट कार्ड से ख़र्च करके इम्प्रेस करने की कोशिश करते हैं. ऐसे में यह बहुत ज़रूरी है कि आपको उसकी परचेज़िंग पावर पता हो, वरना शादी के बाद आप उसके क्रेडिट कार्ड के बिल चुकाती रह जाएंगी.

 

8. दोस्तों को शक की नज़र से देखता हो

उसकी भले ही कितनी लड़कियां दोस्त क्यों न हों, पर आपके दोस्तों या पुरुष सहकर्मियों को शक की नज़र से देखता हो. अपने दोस्तों के साथ काफ़ी फ्री रहता हो और वेस्टर्न व मॉडर्न तरीक़ों से पेश आता हो, पर आपके लिए ‘पज़ेसिवनेस’ वाला जुमला सुनाते हुए आपके मेल कलीग्स को शक की नज़र से देखता हो, तो सावधान हो जाइए, क्योंकि शक्की लोगों के साथ जीवन बिताना आसान नहीं है.

9. आपसे ऑबसेस्ड हो

यदि आपका साथी आपको दिलोजान से चाहता हो और उसके सिवा आप पर किसी और का हक़ नहीं और आपकी थोड़ीसी भी जुदाई को जीनेमरने का सवाल बना लेता हो, हर व़क्त स़िर्फ आपके साथ रहना चाहता हो या फिर ओवरपज़ेसिव हो रहा हो, आपको बिल्कुल आज़ादी न देता हो, तो सावधान हो जाइए, क्योंकि किसी कारणवश यदि यह रिश्ता टूट गया, तो वो किसी भी सीमा तक जा सकता है. अक्सर ऐसे जुनूनी पुरुष असफल होने पर कुछ भी कर सकते हैं. पज़ेसिव होना आम बात है, पर ऑब्सेशन सही नहीं. यह आपको समझना होगा.

10. साथी की कई बातें आपको अजीब लग सकती हैं. हमेशा दिल से काम मत लीजिए, ऐसे मामलों में दिमाग़ से भी काम लेना ज़रूरी हो जाता है. जहां थोड़ा भी संशय हो, तसल्ली कर लीजिए. साथी को बुरा लगेगा, ये मत सोचिए, अपने विवेक का इस्तेमाल कीजिए और सोचसमझकर निर्णय लीजिए. अगर थोड़ीसी सावधानी आपको ज़िंदगीभर के पछतावे से बचा सकती है, तो सावधानी ज़रूर बरतें और इन अलर्ट्स पर ध्यान दें.

पूनम मेहता

5 शिकायतें हर पति-पत्नी एक दूसरे से करते हैं (5 Biggest Complaints Of Married Couples)