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प्यार, सेक्स और कमिटमेंट… कितना बदला रिश्ता? (Why Our Relationship Changes Over Time?)

Why Our Relationship Changes Over Time

समाज जितनी तेज़ी से बदल रहा है, उतनी ही तेज़ी से प्यार, सेक्स और कमिटमेंट की परिभाषा व अहमियत भी बदल रही है. नई पीढ़ी संबंधों के अर्थ को पुनः परिभाषित कर रही है. इस दौर में जब इंस्टेंट कॉफी, फास्ट फूड, फेसबुक, ट्विटर और नेट चैट एक ट्रेंड व इन-थिंग बन गया है, प्यार का अर्थ बदला है और उसके साथ ही सेक्स व कमिटमेंट को लेकर भी धारणाएं बदली हैं.  सेक्स को प्यार माना जा रहा है और कमिटमेंट को बंधन. विपरीत सेक्स के प्रति आकर्षण बरक़रार है, पर आज का युगल कमिटमेंट से डरता है. आज प्यार में सेक्स घुल गया है और जब रिश्तों में प्यार न हो, तो कमिटमेंट का सवाल ही नहीं उठता है. प्यार शॉर्ट एंड स्वीट और लिव-इन के चारों ओर चक्कर लगा रहा है.

आज सामाजिक संबंधों के साथ-साथ परिवार के आत्मीय रिश्तों से जुड़े सरोकार भी बहुत कमज़ोर पड़ रहे हैं. हर जगह स्वार्थ पसर गया है. परिवार के आत्मीय संबंधों पर चोट करनेवाली तमाम घटनाएं आज देखने में आ रही हैं.

Why Our Relationship Changes Over Time
शॉर्टकट रिश्तों में भी

प्यार, रिश्ते और अपनापन जैसी भावनाओं पर स्वार्थ और शारीरिक आकर्षण हावी हो गया है. कमिटमेंट अब लोगों को बंधन लगता है, ऐसे में ज़िम्मेदारियां निभाना भी बोझ लगता है. हर कोई अपनी तरह से जीने का नारा लगाता हुआ लगता है. रिश्तों में भी शॉर्टकट अपनाया जाने लगा है. मिलो, बैठो कुछ पल और फिर एक दूरी बना लो. हर कोई अपनी एक स्पेस की चाह में अपनों से ही दूर होता जा रहा है. आज रिश्ता चीन के उस उत्पाद की तरह हो गया है, जो सस्ता तो है, पर टिकाऊ है या नहीं, इसका पता नहीं.

वर्तमान समय में रिश्तों की अहमियत इतनी बदल चुकी है कि कोई भी व्यक्ति, चाहे अपनी व्यस्तता के कारण हो या निजी स्वार्थवश, बस रिश्तों को निभाने की बजाय उसे ढो रहा है.

समाजशास्त्री नेहा बजाज मानती हैं कि यह बबलगम प्यार का दौर है और इसमें युवा लड़का और लड़की दोनों ही की सोच एक जैसी है. जिस तरह आप बबलगम चबाते रहते हैं और जब मन भर जाता है, तब उसे थूक देते हैं, उसी तरह प्यार भी हो गया है. इसलिए आज के युग में कमिटमेंट का स़िर्फयही मतलब रह गया है कि फिल्में जाओ, पब और पार्टी में जाओ और अच्छे दोस्तों की तरह चिलआउट करो. इस बदलते दृष्टिकोण या व्यवहार का मुख्य कारण व्यक्तिगत स्वतंत्रता है, क्योंकि कोई भी अपनी आज़ादी नहीं खोना चाहता.

कमिटमेंट से डरने लगे हैं लोग

रिश्ते बनाना तो आसान है, मगर निभाना मुश्किल है, क्योंकि निभाने के लिए चाहिए होता है कमिटमेंट. पर आजकल लोग रिश्तों को स़िर्फ सोशल मीडिया से ही निभा रहे हैं.

आज बिना किसी ज़िम्मेदारीवाले संबंध आसान और आरामदायक होते जा रहे हैं. दीर्घकालीन संबंध बोरिंग लगने लगे हैं. विडंबना तो यह है कि आज रिश्तों में न तो कोई उम्मीद रख रहा है, न ही आश्‍वस्त कर पा रहा है कि हम हैं तुम्हारे साथ. कमिटमेंट बदलते हैं, लोग बदल जाते हैं और किसी को भी इससे शिकायत नहीं होती. दीर्घकालीन संबंध तेज़ी से इतिहास का हिस्सा बनते जा रहे हैं. युवा कमिटमेंट से बहुत अधिक डरे और सहमे हुए हैं और जब अफेयर गंभीर होने लगे, तो उन्हें परेशानी होने लगती है. उन्हें लगता है कि परंपरागत और ओल्ड फैशंड अफेयर का मतलब ग़ुलामी और स्वतंत्रता खो देना है.

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हालांकि अभी भी ऐसा वर्ग है, जो प्यार को महत्वपूर्ण मानता है और सेक्स को मर्यादित दृष्टि से देखता है व कमिटमेंट करने को भी तत्पर है. सारे रिश्ते बबलगम की तरह नहीं हो गए हैं. आज भी लोग प्रेम को गंभीरता से लेते हैं. उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात है सही साथी की तलाश. और तलाश ख़त्म होने पर जब उनका आपसी तालमेल बैठता जाता है, तो फिर पीछे मुड़कर देखने की कोई आवश्यकता नहीं होती.

Why Our Relationship Changes Over Time

निजी स्वार्थ बढ़ रहा है

वर्तमान की इस तेज़ी से भागती ज़िंदगी के मद्देनज़र अब यह बहस चल पड़ी है कि क्या सामाजिक रिश्तों में अभी और कड़वाहट बढ़ेगी? क्या भविष्य में विवाह और परिवार का सामाजिक-वैधानिक ढांचा बच पाएगा? क्या बच्चों को परिवार का वात्सल्य, संवेदनाओं का एहसास, मूल्यों तथा संस्कारों की सीख मिल पाएगी? क्या भविष्य के भारतीय समाज में एकल परिवार के साथ में लिव-इन जैसे संबंध ही जीवन की सच्चाई बनकर उभरेंगे?

छोटे-छोटे निजी स्वार्थों को लेकर रिश्तों में व्यापक बदलाव देखने को मिल रहा है. आज हर रिश्ता एक तनाव के दौर से गुज़र रहा है. वह चाहे माता-पिता का हो या पति-पत्नी का, भाई-बहन, दोस्त या अधिकारी व कर्मचारी का. इन सभी रिश्तों के बीच ठंडापन पनप रहा है.

संवादहीनता और व्यस्तता की वजह से प्यार रिश्तों के बीच से सरक रहा है और सेक्स मात्र रूटीन बनकर रह गया है. स्त्री-पुरुष दोनों आर्थिक रूप से सक्षम हैं, इसलिए अपनी-अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्रता की बात करते हुए कमिटमेंट से बचना चाहते हैं. अपने साथी से पहले जो भी बात कहनी होती थी, वह या तो साथ बैठकर एक-दूसरे से कही जाती थी या फोन पर बातचीत करके. आज इसकी जगह ले ली है व्हाट्सऐप ने. आप मैसेज छोड़ देते हैं. कई बार सामनेवाला पढ़ नहीं पाता और फिर झगड़ा होना तय होता है. कहीं से घूमकर आने के बाद पहले जहां मिल-जुलकर फोटो देखने का मज़ा लेते थे, वहीं आज फेसबुक पर एक-दूसरे की फोटो देखी जाती है.

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रिलेशनशिप में प्यार कम, लस्ट (वासना) ज़्यादा होता है. अगर आपका रिश्ता प्यार पर नहीं, वासना पर टिका है, तो वह रिश्ता ज़्यादा दिनों तक नहीं रहता. आमतौर पर रिश्ते टूटने की वजह भी यही बन रहा है. रिश्ते में फिज़िकल कनेक्शन ज़रूर बनता है, लेकिन भावनात्मक रूप से जुड़ाव देखने को नहीं मिलता. तो किस तरह का रिश्ता है यह? केवल आकर्षण या प्यार या फिर केवल लस्ट?

प्रोफेशनल होते रिश्ते

आजकल उन रिश्तों को ज़्यादा अहमियत दी जाती है, जो प्रोफेशनल होते हैं, क्योंकि वो हमारे फ़ायदे के होते हैं. रिश्तों में भी अब हम फ़ायदा-नुक़सान ही देखते हैं. जो कामयाब है, रसूखवाले हैं, पैसेवाले हैं, उनसे संबंध रखने में ही फ़ायदा है. इसके चलते कुछ रिश्ते ऐसे ही ख़त्म हो जाते हैं. हम अब उन रिश्तों को ही अहमियत देते हैं, जिनसे बिज़नेस में और लाइफ में भी ज़्यादा से ज़्यादा फ़ायदा हो. युवापीढ़ी प्रैक्टिकल और कैलकुलेटिव हो गई है. ऐसे में रिश्तों की अहमियत घटना स्वाभाविक ही है.

कमिटमेंट करने के लिए या प्यार निभाने के लिए सच्चाई व ईमानदारी की ज़रूरत होती है. अपने साथी की भावनाओं को समझने की ज़रूरत होती है. सेक्स को प्यार के साथ जोड़ने और रिश्ते में कमिटमेंट के जुड़ने से रिश्ता टिका रहता है. प्लास्टिक के फूलों की ख़ुशबू के साथ कृत्रिम ज़िंदगी जीने से अच्छा है कि प्यार और विश्‍वास के ताज़ा फूलों से रिश्तों को सजा लिया जाए.

– सुमन बाजपेयी

पहला अफेयर: मुहब्बत पर यक़ीन है मुझे (Pahla Affair: Mohabbat Per Yakeen Hai Mujhe)

Pahla Affair, Mohabbat Per Yakeen Hai Mujhe

Pahla Affair, Mohabbat Per Yakeen Hai Mujhe

पहला अफेयर: मुहब्बत पर यक़ीन है मुझे (Pahla Affair: Mohabbat Per Yakeen Hai Mujhe)

मुहब्बत हो जाती है किसी से… आपका दिल इस तरह किसी और का हो जाता है कुछ ही पलों में… वो भी आपको बिना बताए… ऐसे दगा दे जाता है, कभी सोचा ही नहीं था मैंने. मैं तो हमेशा कहा करती थी, “प्यार-व्यार बेकार की बातें हैं. और शादी का तो सवाल ही नहीं उठता.” मेरे विचार सुनकर कभी किसी ने मुझसे प्यार करने की शायद सोची ही नहीं या शायद मैंने कभी किसी के एहसास को महसूस ही नहीं किया.

वैसे तो मैं प्रतीक के प्रति अपनी चाहत को भी नहीं समझ पाई थी. उससे मेरी पहली मुलाक़ात पहले दिन ही ऑफ़िस में हुई. पहली ही नज़र में वो मुझे अपना-सा लगा और मेरी उससे अच्छी दोस्ती हो गई. खाली वक्त में हम अक्सर शेरो-शायरी, राजनीति, फ़िल्में और साहित्य की बातें करते. शादी के बारे में मेरे और उसके विचार बहुत मिलते थे. प्यार पर उसे भी विश्‍वास नहीं था, लेकिन कई लड़कियों के साथ उसका चक्कर था. जब भी मैं उससे पूछती, “जब प्यार पर विश्‍वास ही नहीं है तो प्यार करते क्यों हो?”
तो वो कहता, “अरे, मैं प्यार थोड़े ही करता हूं. वो तो बस, लड़कियों को ये यक़ीन दिलाने के लिए कि प्यार विश्‍वास की चीज़ है ही नहीं, यूं ही थोड़ा टाइम पास कर लेता हूं.” वो मुझसे भी फ्लर्ट करता, पर मैं उसे डांट देती.

मन ही मन मुझे उसका छेड़ना अच्छा लगने लगा था और दूसरी लड़कियों के साथ उसका घूमना-फिरना और बातें करना बुरा. उसे टोकती तो मज़ाकिया लहज़े में कहता, “बुरा लगता है तो तुम प्यार करो मुझे. देखो, सब लड़कियों को छोड़ दूंगा.” ऐसी बातें उसने कई बार कीं, मगर मैंने हर बार मज़ाक में टाल दिया.

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इधर कुछ दिनों से मैं महसूस करने लगी थी कि एक-दो दिन भी उसे देखे बिना, उससे बात किए बिना मुझे खालीपन-सा लगता. मैं हर किसी से उसके बारे में ही पूछती रहती. मेरी फ्रेंड श्‍वेता ने शायद मेरे मन को पढ़ लिया था. एक दिन उसने कहा, “अदिति, तुझे प्रतीक से प्यार हो गया है…” मैंने तो कभी ख़्वाब में भी नहीं सोचा था कि मुझे भी प्यार होगा किसी से. लेकिन श्‍वेता से बातें करने के बाद मुझे लगा कि सचमुच मुझे प्रतीक से प्यार होने लगा है, लेकिन उससे कैसे कहूं और क्या फ़ायदा उसे कहने का? वो तो हंसेगा मुझ पर. मेरे प्यार का मज़ाक उड़ाएगा. बस, इसी ऊहापोह में 4-5 दिन निकल गए.

इधर प्रतीक भी गायब था पिछले दो दिनों से. मैंने उसके सारे दोस्तों को फ़ोन करके पूछा तो उसके सबसे क़रीबी दोस्त राज ने बताया कि वो तो लॉन्ग लीव पर गया है अपने मम्मी-पापा के पास लंदन और एक पत्र छोड़ गया है मेरे लिए.
मैं फौरन वो पत्र लेने पहुंच गई, पत्र हाथ में आते ही मेरे दिल की धड़कन बढ गई.

प्रिय अदिति,
नहीं जानता था कि यूं मुहब्बत हो जाएगी. दिल्लगी करते-करते सचमुच किसी को दिल दे बैठूंगा, नहीं सोचा था. हां, मैं तुमसे प्यार करता हूं… सच्चा प्यार. कई बार कोशिश की तुम्हें बताने की, लेकिन तुम्हें यक़ीन नहीं दिला सका. अब मुझे प्यार पर विश्‍वास होने लगा है. मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं. मैं लंदन जा रहा हूं अपने मम्मी-पापा के पास. अगर तुम मेरे प्यार पर यक़ीन कर लो तो लौट आऊंगा छह महीने के बाद, वरना तुम्हारी यादों के सहारे पूरी ज़िंदगी काट लूंगा. फ़ोन करूंगा तुम्हें, तुम्हारा जवाब जानने के लिए. उम्मीद है तुम मेरे प्यार को, मेरी भावनाओं को समझोगी.

पत्र पढ़ते-पढ़ते न जाने कब मेरी आंखों से आंसू निकलने लगे. शायद ये ख़ुशी के आंसू थे, जिससे प्यार पर अविश्‍वास करने की मेरी सोच पूरी तरह धुल गई थी. अब बस, मुझे उसके फ़ोन का बेसब्री से इंतज़ार है. उसके प्यार पर विश्‍वास जो हो गया है मुझे.

– प्रीति तिवारी

 

हर किसी को जाननी चाहिए सेक्स से ज़ुड़ी ये 35 रोचक बातें (35 Interesting Facts About Sex)

Interesting Facts About Sex
सेक्स से जुड़ी बहुतसी ऐसी बातें हैं जिनके बारे में शायद ही आपको कोई जानकारी हो. आपकी सेक्स नॉलेज को बढ़ाने के लिए प्रस्तुत है वैज्ञानिकों द्वारा समयसमय पर किए गए सेक्स संबंधी शोध और सर्वे रिपोर्ट्स की संक्षिप्त जानकारी.

Interesting Facts About Sex

1. सप्ताह में दो या तीन बार सेक्स करनेवाले लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है.

2. एक सर्वे के अनुसार, 60% पुरुष चाहते हैं कि सेक्स के लिए औरत पहल करे.

3. सेक्स के दौरान हार्ट अटैक से मरनेवाले पुरुषों में से 85% पुरुष ऐसे होते हैं, जो अपनी पत्नी को धोखा दे रहे होते हैं.

4. जिन लोगों को अनिद्रा की शिकायत हो, उनके लिए सेक्स से बेहतर कुछ हो ही नहीं सकता, क्योंकि सेक्स के बाद अच्छी नींद आती है. रिसर्च के अनुसार, ये नींदवाली दूसरी दवाओं की तुलना में 10 गुना ज़्यादा कारगर है.

5. 20% पुरुषों को ओरल सेक्स से आनंद आता है, जबकि 6% महिलाओं को ये महज़ फोरप्ले का हिस्सा लगता है.

6. अमेरिका में 12-15 साल के किशारों में ओरल सेक्स का चलन तेज़ी से बढ़ रहा है और मज़ेदार बात तो ये है कि वो इसे सेक्सुअल क्रिया मानते ही नहीं.

7. 25 % महिलाएं सोचती हैं कि पुरुष रुपएपैसे से सेक्सी बनता है.

8. ज़्यादा सेक्स करनेवाले पुरुषों की दाढ़ी अपेक्षाकृत तेज़ी से बढ़ती है.

9. लेटेक्स कंडोम की औसत लाइफ़ 2 साल होती है.

10. रोमांटिक उपन्यास पढ़नेवाली औरतें ऐसे उपन्यास न पढ़नेवाली औरतों की तुलना में सेक्स का ज़्यादा आनंद उठा सकती हैं.

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11. यूनिवर्सिटी ऑफ रोचेस्टर्स के मनोवैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध के अनुसार, पुरुष किसी भी दूसरे रंग के मुक़ाबले लाल रंग के परिधान में महिलाओं की ओर ज़्यादा आकर्षित होते हैं.

12. हाल ही में हुए शोध के अनुसार, जिन महिलाओं में इमोशनल इंटेलिजेन्स (अपनी भावनाओं को समझने के साथसाथ अपने आसपास रहनेवाले लोगों की भावनाओं व ज़रूरतों की समझ) बेहतर होती है, वे सेक्स में उतनी ही अच्छी पार्टनर साबित होती हैं.

13. अक्सर कहा जाता है कि महिलाओं को सेक्स के लिए उत्तेजित होने में कम से कम 20 मिनट का समय लगता है, परंतु शोध से पता चला है कि किसी पुरुष की कल्पना और फोरप्ले से उत्तेजित होने में उन्हें मात्र 10 मिनट लगता है.

14. पुरुष तथा महिलाएं दोनों ही एक दिन में कई बार ऑगैऱ्ज्म का अनुभव कर सकते हैं.

15. अगर किसी महिला में सेक्स उत्तेजना उत्पन्न नहीं होती, तो एक बार ‘बर्थ कंट्रोल पिल्स’ को बदलकर देखें, क्योंकि कई बार अलगअलग पिल्स में पाए जानेवाले हार्मोंस सेक्स की उत्तेजना को प्रभावित करते हैं. इन्हें बदलने से समस्या हल हो सकती है.

Interesting Facts About Sex

 

16. कई बार सीमेन (वीर्य) से ब्लीच जैसी गंध आती है. इससे कोई हानि नहीं है. यह प्राकृतिक डिसइंफेक्टेंट होता है एवं स्पर्म्स को योनि में पाए जानेवाले एसिड के बुरे प्रभाव से बचाता है.

17. एंकलबोन के नीचे एड़ी में सर्कुलर मसाज करने से सेक्सुअल उत्तेजना बढ़ती है.

18. पुरुष रात्रि की नींद के दौरान औसतन 4 या 5 बार इरेक्शन अनुभव करते हैं.

19. रिसर्च द्वारा पता चला है कि जो लड़कियां साइकिल रेस में हिस्सा लेती हैं या हर हफ़्ते 100 मील साइकिल चलाती हैं, उनकी बाह्य जननेंद्रियों का सेंसेशन कम हो जाता है.

20. पेनिस की लंबाई का ऑर्गैज़्म से कोई संबंध नहीं होता, क्योंकि योनि का केवल 1/3 भाग ही संवेदनशील होता है. अगर सेक्स पोज़ीशन सही हो, तो छोटा पेनिस भी ऑर्गैज़्म दे सकता है.

21. जर्मन शोधकर्ताओं के अनुसार, सुरक्षित रिलेशनशिप में महिलाओं की सेक्सुअल इच्छा कम हो जाती है. 4-5 साल साथसाथ रहने के बाद महिलाएं पुरुषों की इच्छानुसार सेक्स करती हैं.

22. ऐसे पुरुष, जिनके अनेक स्रियों से संबंध होते हैं, वे सेक्स को बहुत महत्वपूर्ण तो समझते हैं, परंतु अपने रिलेशनशिप से पूरी तरह संतुष्ट नहीं होते.

23. एक सर्वे के अनुसार, सेक्स के लिए कपल्स की सबसे पसंदीदा जगह बेडरूम के अलावा कार होती है.

24. यूनिवर्सिटी ऑफ ट्रॉम्प में हुए रिसर्च के अनुसार, नीली आंखोंवाले पुरुष अक्सर नीली आंखोंवाली स्री को ही पसंद करतेे हैं. यदि उनका बच्चा भूरी आंखोंवाला हुआ, तो वे सोचते हैं कि उनकी पत्नी ने उनके साथ धोखा किया है. वैसे आनुवांशिकता का नियम भी यही कहता है.

25. महिलाएं पीरियड्स के दौरान या उसके ठीक पहले ज़्यादा सुखद ऑर्गैज़्म का अनुभव करती हैं. ऐसा उनके पेल्विक एरिया में रक्तसंचार के बढ़ने के कारण होता है.

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26. सेक्स के दौरान पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं ज़्यादा कल्पनाशील हो जाती हैं. इस तरह की सेक्सुअल फेंटेसी से उन्हें संतुष्टि तो मिलती ही है, आपसी संबंध भी मज़बूत होते हैं.

27. जो पुरुष ज़्यादातर सेक्सुअल फेंटेसी में रहते हैं, वे अपने रोमांटिक रिलेशनशिप से कम संतुष्ट रहते हैं.

28. एक रिसर्च के अनुसार, कॉलेज के दौरान जो लड़के सेक्स में लिप्त रहते हैं, वे अक्सर डिप्रेशन में चले जाते हैं, जबकि सेक्स न करनेवाले विद्यार्थी नॉर्मल रहते हैं.

29. कुछ महिलाओं को सीमेन (वीर्य) से एलर्जी होती है. सीमेन में मौजूद प्रोटीन के कारण उनके जननांग एवंं शरीर के अन्य हिस्सों पर जलन व खुजली की समस्या हो जाती है.

30. अध्ययन बताते हैं कि सेक्स से सिरदर्द व जा़ेडों का दर्द दूर होता है. वास्तव में ऑर्गैज़्म के तुरंत बाद ऑक्सीटोसिन हार्मोन का लेवल 5 गुना बढ़ जाता है, जिससे एंडॉरफिन हार्मोन का स्राव होता है. यह दर्द को दूर भगाता है.

31. सामान्यतः ऐसा समझा जाता है कि प्रेग्नेंसी से सेक्स की इच्छा मर जाती है, परंतु ऐसा नहीं है. गर्भावस्था के दौरान ज़्यादातर महिलाओं की सेक्स की इच्छा या तो बढ़ जाती है या पहले जैसी ही होती है.

32. रिसर्च के अनुसार, सिगरेट नहीं पीनेवालों की सेक्स की इच्छा, आनंद व संतुष्टि सिगरेट पीनेवालों की अपेक्षा ज़्यादा होती है.

33. जर्नल ऑफ सेक्स रिसर्च के अनुसार, कपल्स सामान्य तौर पर फोरप्ले में 11 से 13 मिनट लगाते हैं.

34. एक सर्वे के अनुसार, हफ़्ते में 3 या 4 बार सेक्स करने की इच्छा रखनेवाले पुरुषों व महिलाओं की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है.

35. जर्नल ऑफ सेक्सुअल मेडिसिन में छपी रिपोर्ट के अनुसार, बर्थ कंट्रोल पिल्स लेने से महिलाओं में सेक्स करने की इच्छा कम हो जाती है.

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नाम के पहले अक्षर से जानें कितना रोमांटिक है आपका पार्टनर? (First Letter Of Name Tells How Romantic Is Your Partner)

First Letter Of Name, How Romantic Is Your Partner

प्यार-मोहब्बत, रोमांस जीवन में ख़ुशियों के रंग भर देता है. आप भी तो जानना चाहते होंगे कि आपका पार्टनर कितना रोमांटिक व दिलफेंक है. आइए, नाम के पहले अक्षर से जानें अपने पार्टनर के प्यारभरे दिल, स्वभाव व रोमांटिक नेचर के बारे में.अपने जीवन में एक अच्छे पार्टनर की तलाश हर किसी को होती है. आइए, नाम के पहले अक्षर से पार्टनर के लव-नेचर पर एक नज़र डालते हैं.  

First Letter Of Name, How Romantic Is Your Partner

– जिन लोगों का नाम अक्षर से शुरू होता है, ऐसे लोग प्यार और रिश्तों की जीवन में अहम् भूमिका समझते हैं. ये आकर्षित करनेवाले ज़रूर होते हैं, लेकिन रोमांटिक नहीं होते हैं.

बी अक्षरवाले दोस्ती करना पसंद करते हैं. ऐसे लोग पहले अपने प्यार को याद रखना चाहते हैं और ये अपने से ज़्यादा अपने पार्टनर को ख़ुश रखने की कोशिश करते हैं.

सी अक्षरवाले दोस्ती करना पसंद करते हैं. ऐसे लोग प्यार के मामले में स्पष्टवादी होते हैं. इन्हें घुमा-फिरा कर बात करना पसंद नहीं होता है.

डी अक्षरवाले जिसे पाना चाहते हैं, उसे पा लेते हैैं और रोमांस इनके मूड पर निर्भर करता है.

अक्षरवाले मज़ाकिया व लाजवाब होते हैं. प्यार इनकी सबसे बड़ी कमज़ोरी होती है. ये ज़िंदादिली के साथ जीना पसंद करते हैं.

एफ अक्षरवाले प्रेम को लेकर सीरियस रहते हैं, जिसे भी प्यार करते हैं, टूटकर करते हैं. अपनी पर्सनल लाइफ और प्रोफेशनल लाइफ को अलग-अलग रखते हैं. ऐसे लोगों को अच्छा लाइफ पार्टनर मिलता है.

जी अक्षरवाले साफ़ दिल के होते हैं. ये अपने मन में कुछ नहीं रखते हैं. प्यार इनके लिए जीवन का एक हिस्सा भर रहता है. इन्हें किसी के ख़िलाफ या प्यार में साज़िश करना पसंद नहीं होता है.

एच अक्षरवाले अपनी बातें दूसरों को नहीं बताना चाहते, क्योंकि इन्हें डर बहुत होता है. ये प्यार में नहीं पड़ना चाहते और अगर पड़ गए, तो उससे बाहर नहीं निकल पाते.

आई अक्षरवाले दिमाग़ से ज़्यादा दिल से सोचते हैं. ये सच्चे दिल से प्यार करते हैं, लेकिन अपनी भावुकता के कारण इन्हें अक्सर नुक़सान उठाना पड़ता है.

जे अक्षरवाले ईमानदार और वफ़ादार स्वभाव के होते हैं. प्रेम के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित रहते हैं. अगर आपके पार्टनर का नाम जे से शुरू होेता है, तो आप भाग्यशाली हैं.

के अक्षरवाले मुंहफट होते हैं. ये थोड़े फ्लर्टी स्वभाव के होते हैं. बिना कुछ सोचे-समझे ये किसी को कुछ भी कह सकते हैं. ये अपने फ़ायदे के लिए कुछ भी कर सकते हैं.

एल अक्षरवाले कभी किसी को दुखी नहीं देख सकते हैं और जिससे भी प्यार करते हैं, उसे अकेला नहीं छोड़ते. आदर्श प्रेमी  होते हैं.

एन अक्षरवाले खुले विचार को समर्थन देनेवाले होते हैं. ये बहुत जल्दी बोर हो जाते हैं. ये फ्लर्ट करने में आगे होते हैं, पर जब प्यार में पड़ जाते हैं, तो इनसे दूर रहने में ही भलाई है. थोड़े सनकी होते हैं.

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एम अक्षरवाले स्वभाव के भावुक और संकोची होते हैं. प्यार को लेकर काफ़ी पज़ेसिव भी होते हैं. अक्सर ये छोटी-छोटी बातों को दिल से लगा लेते हैं.

अक्षरवाले प्रेम विवाह करते हैं और परिवार को साथ लेकर चलते हैं. ये एक आदर्श पार्टनर का रोल बख़ूबी निभाते हैं और बहुत भावुक भी होते हैं.

पी नाम वाले अपने प्यार पर दिलो-जान से न्योछावर होनेवाले होते हैं. घर, देश-दुनिया को साथ लेकर चलने में विश्‍वास करते हैं. ये उसूल पसंद होते हैं और मान-सम्मान के लिए कुछ भी कर गुज़रने के लिए तैयार रहतेे हैं.

क्यू अक्षरवाले मोहब्बत में जुनून की हद कर देते हैं. वे अपने प्यार को किसी से बांट नहीं सकते हैं. अपने आप में खोये रहते हैं. इन्हें दूसरे से कुछ लेना-देना नहीं होता है और इन्हें ग़ुस्सा भी कम आता है.

आर अक्षरवाले रोमांटिक, पर थोड़े दिलफेंक भी होते हैं. साथ ही मनमौजी स्वभाव के होते हैं. इन्हें दुनियादारी से कुछ मतलब नहीं रहता है. ये कम बोलते हैं. अपनी दुनिया में खोए रहते हैं.

एस अक्षरवाले प्यार पर विश्‍वास भी करते हैं, पर शक भी कुछ कम नहीं करते. ये बहुमुखी प्रतिभा के धनी होते हैं. ये अपने आप में सिमटे रहते हैं और अपने चारों ओर रहस्यमय वातावरण बनाए रहते हैं.

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टी अक्षरवाले सिंपल जीवन जीना पसंद करते हैं. यही सोच प्यार को लेकर भी रहती है. इन्हें प्यार में दिखावा करना पसंद नहीं है. ये रिश्ते और भावनाओं को लेकर बेहद भावुक होते हैं.

यू अक्षरवालों के लिए प्यार ही सब कुछ है. ये सदा उमंग-उत्साह में रहते हैं. बुद्धिमान व दिल के साफ़ होते हैं. ये छोटी-छोटी चीज़ों में ही ख़ुशियां ढूंढ़ते हैं और हमेशा ख़ुश रहते हैं.

वी अक्षरवाले ना कभी कुछ कहते हैं और ना ही किसी की सुनते हैं. जब इन्हें प्यार हो जाता है, तो कुछ भी कर सकते हैं. स्वभाव से बेहद रोमांटिक और भावुक होते हैं.

डब्ल्यू वालों के लिए प्यार बस जीवन का एक हिस्साभर होता है. दूसरों को दबाकर अपना रौब जमाने की आदत होती है, जिसके चलते इन्हें कोई पसंद नहीं करता.

एक्स अक्षरवाले लोगों में एक ख़ास आदत होती है कि ये जिनको पाने की इच्छा रखते हैं, उसे पाकर ही दम लेते हैं यानी प्यार में जुनून की हद तक गुज़र जाते हैं. ये प्यार में पूरी तरह से समर्पित रहते हैं.

वाय वाले सच्चे, खुले दिलवाले व रोमांटिक नेचर के होते हैं. ये समझौता नहीं करना चाहते हैं, इसलिए इनका जीवन मुश्किलों से भरा होता है. ये थोड़े लापरवाह व भुलक्कड़ क़िस्म के होते हैं. लेकिन अपनी ग़लती के लिए जल्दी माफ़ी भी मांग लेते हैं.

ज़ेड अक्षरवाले बेहद रोमांटिक होते हैं. इनकी तरफ़ कोई भी आसानी से आकर्षित हो जाता है. ये अपने पार्टनर को इस कदर प्यार करते हैं कि उनके सामने और कोई भी अहमियत नहीं रखता है.

– ऊषा गुप्ता

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हेल्दी रिलेशनशिप के लिए छोड़ें भावनाओं की ‘कंजूसी’ (Express Yourself For A Healthy Relationship)

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बच्चों के साथ कुछ पल मौज-मस्ती, बड़ों के साथ बैठकर बोलने-बतियाने की चाहत, पार्टनर के साथ चंद सुकून के पल… ऐसी न जाने कितनी हसरतें हैं, जिन्हें पूरा करने की ख़्वाहिश रखते हैं हम, पर न जाने कहां इतने बिज़ी हैं कि अपनी भावनाओं को अपनों तक पहुंचा ही नहीं पाते. क्या सचमुच इतने बिज़ी हो गए हैं हम या फिर भावनाओं की कंजूसी करने लगे हैं? क्या है भावनाओं की कंजूसी के कारण और कैसे छोड़ें ये कंजूसी आइए जानते हैं.

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क्यों करते हैं हम भावनाओं की कंजूसी?

–  करियर में आगे, और आगे बढ़ने की होड़ लगी है.

– हर कोई अपनी आर्थिक स्थिति को अच्छी से बेहतर और बेहतर से बेहतरीन करने में लगा है.

– ख़ुद को बेस्ट साबित करने में हम सबने अपना सर्वस्व लगा दिया है.

– बिज़ी लाइफस्टाइल और तनाव हमारी सेहत को भी नुक़सान पहुंचा रहा है.

– अपनों से ज़्यादा अपनी भावनाओं को तवज्जो देने लगे हैं.

हम सभी मानते हैं कि हमारी ज़िंदगी बहुत तेज़ रफ़्तार से दौड़ रही है, सब कुछ बहुत तेज़ी से बीत रहा है, घर चलाने की जद्दोज़ेहद में बहुत कुछ छूट रहा है, पर क्या किसी ने यह सोचा कि अपने और अपनों के लिए दौड़ते-भागते हम उनसे दूर तो नहीं निकल आए? ज़िंदगी जीने की कला कहीं भूलते तो नहीं जा रहे हैं?

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तय करें अपनी प्राथमिकताएं

हर किसी को अपनी प्राथमिकताएं तय करनी चाहिए और प्राथमिकताओं की फेहरिस्त में परिवार सबसे पहले होना चाहिए. हेल्दी रिलेशनशिप के लिए सबसे ज़रूरी है अपनी भावनाएं एक-दूसरे से शेयर करना. परिवार के सभी सदस्यों में आपसी प्यार-विश्‍वास और अपनापन यही तो हमारे परिवार और जीवन की पूंजी है, इसे प्राथमिकता दें. ऐसे अनगिनत उदाहरण हैं, जहां कामयाब लोगों ने इस बात को सबसे ज़्यादा अहमियत देने की बात कही है, तो आप भी ‘फैमिली कम्स फर्स्ट’ के स्लोगन को अपना लें और ज़िंदगी को एक नए नज़रिए से देखने की कोशिश करें.

बड़ों की हंसी कमाएं

पैसे तो हम सभी कमाते हैं, पर अपने परिवार की हंसी कितनी कमाते हैं? कोशिश करें रोज़ाना रात को खाना खाने के बाद कुछ देर अपने पैरेंट्स के साथ बैठें. उनसे बातें करें, उनका हालचाल लें और ऑफिस का कोई फनी क़िस्सा उन्हें सुनाएं या फिर कोई जोक सुनाएं, जिसे सुनकर उनके चेहरे पर मुस्कान आ जाए. आपके पैरेंट्स की मुस्कुराहट ही आपकी उस दिन की असली कमाई है.

बच्चे हैं बेस्ट ‘बैटरी चार्जर’

माना कि आप दिनभर के काम के बाद थक गए हैं और आपकी बैटरी डाउन है, पर क्या आप जानते नहीं कि बच्चे बेस्ट चार्जर होते हैं? तो जाइए, बच्चों को गुदगुदाएं, उनके साथ खेलें, उन्हें घुमाकर लाएं और अपने साथ-साथ बच्चों को भी दिन का बेस्ट टाइम दें.

पार्टनर के लिए है शरारतें

पति हो या पत्नी हर कोई चाहता है कि उसका पार्टनर उनकी भावनाओं को समझे. पार्टनर को समय दें, उसके साथ व़क्त बिताएं. पति-पत्नी के रिश्ते में प्यार-विश्‍वास के साथ-साथ थोड़ी शरारत और थोड़ी छेड़छाड़ भी ज़रूरी है. ये शरारतें ही आपकी रूटीन लाइफ को रोमांटिक बनाती हैं, तो थोड़ी भावनाएं रोमांस में भी ख़र्च करें और अपनी मैरिड लाइफ को मज़ेदार व रोमांटिक बनाएं.

भाई-बहनों पर इंवेस्ट करें प्यार-दुलार

कभी शिकायतें, तो कभी टांग खिंचाई, कभी लड़ाई-झगड़े, तो कभी प्यार-दुलार- भाई-बहनों का रिश्ता ही कुछ ऐसा होता है. अपनी रोज़मर्रा की भागदौड़ में अगर आप एक-दूसरे से दूर हो गए हैं, तो रोज़ाना एक बार फोन पर बात ज़रूर करें. वीकेंड पर मिलें और अपनी भावनाएं एक-दूसरे से शेयर करें. भावनाओं में इंवेस्टमेंट का आपको प्यार-दुलार का अच्छा-ख़ासा रिटर्न मिलेगा, जो आपकी ज़िंदगी में ख़ुशहाली लाएगा.

दोस्तों की यारी पर करें न्योछावर

फैमिली के बाद फ्रेंड्स ही तो हमारे सबसे क़रीब होते हैं. कोई प्रॉब्लम शेयर करनी हो, एंजॉय करना हो या फिर गॉसिप करनी हो, दोस्तों से बेहतर कौन हो सकता है. सोशल मीडिया के इस ज़माने में दोस्तों से कनेक्टेड रहना बहुत आसान है, तो क्यों न अपने बिज़ी रूटीन से थोड़ा व़क्त निकालकर अपने दोस्तों तक अपनी भावनाएं पहुंचाई जाएं.

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कंजूसी छोड़ें, दिल खोलकर लुटाएं भावनाएं

– पैरेंट्स और घर के अन्य बड़ों को जब भी मौक़ा मिले ‘थैंक्यू’ कहना न भूलें. आपको उनकी परवाह है और उनके त्याग और समर्पण का एहसास है, यह उन्हें जताने में कभी कंजूसी न करें.

– बड़ों की तरह छोटों को भी उनके हिस्से का प्यार और दुलार दें. भावनाओं को स़िर्फ खाने-पीने और खिलौनों के ज़रिए ही नहीं, संस्कारों और डांट-डपट के ज़रिए भी ज़ाहिर करें.

– घरवालों को बर्थडे-एनीवर्सरीवाले दिन स्पेशल फील कराएं. उसके साथ दिन बिताकर या उसका मनपसंद खाना खिलाकर भी आप अपनी भावनाएं उस तक पहुंचा सकते हैं.

– कहते हैं ‘टच थेरेपी’ में बहुत ताक़त होती है. यह आपकी पॉज़िटिव फीलिंग्स को सामनेवाले तक बख़ूबी पहुंचाती है, तो फैमिली मेंबर्स को गले लगाना और शाबासी देना जैसी चीज़ें रोज़मर्रा की ज़िंदगी में शामिल करें.

– पैरेंट्स, पार्टनर और बच्चों को दिन में एक बार ‘आई लव यू’ ज़रूर कहें. अक्सर हमें लगता है कि प्यार तो करते हैं, फिर जताने की क्या ज़रूरत है, पर याद रहे, प्यार का स़िर्फ होना काफ़ी नहीं, प्यार को समय-समय पर ज़ाहिर भी करते रहना ज़रूरी है.

– बच्चों की तरह बड़ों के लिए भी प्ले टाइम बनाएं. घर के बड़ों को उनका फेवरेट इंडोर या आउटडोर गेम्स खेलने के लिए उत्साहित करें और सारा इंतज़ाम ख़ुद करें.

– परिवार के साथ ज़्यादा से ज़्यादा समय बिताने का बेस्ट तरीक़ा है कि सब साथ बैठकर खाना खाएं. हर किसी को घर में फैमिली डिनर टाइम बनाना चाहिए और हर किसी को उसके नियम का पालन भी करना चाहिए. यही वो समय होता है, जब पूरा परिवार एक साथ होता है और आप अपनी बात सबके साथ शेयर कर सकते हैं.

– परिवार के किसी सदस्य से अगर मनमुटाव या अनबन हो गई है, तो बैठकर उससे बात करें और अपना नज़रिया और पक्ष उसके सामने रखें. मन में कोई गुबार न रखें. अक्सर न कह पाने के कारण छोटी-छोटी बातें रिश्तों में दरार डाल देती हैं, इसलिए आप ऐसा न होने दें और यहां भी भावनाओं की कंजूसी न करें.

– फैमिली को स्पेशल फील कराने के लिए वीकली फैमिली नाइट रखें. वीकेंड पर या छुट्टी की रात कुछ ख़ास करें. मूवी देखें, नाटक देखने जाएं, अंताक्षरी खेलें या फिर बैठकर गप्पे मारें.

– भावनाओं को खुलकर शेयर करने के लिए मंथली प्लान भी बनाएं. महीने में एक बार परिवार को कहीं घुमाने ले जाएं या फिर कुछ ख़ास करें.

– याद रखें, दूसरों को ख़ुश करने का मौक़ा कभी हाथ से न जाने दें. अगर आपको पता है कि आपके एक फोन कॉल या मैसेज से किसी के चेहरे पर मुस्कान आ सकती है, तो ऐसा ज़रूर करें.

– दूसरों के साथ-साथ अपने लिए भी भरपूर भावनाएं लुटाएं. ख़ुद को ख़ुश रखने और पैंपर करने का कोई मौक़ा न गंवाएं, क्योंकि ख़ुशियां तभी बांट पाएंगे, जब आप ख़ुद ख़ुश रहेंगे.

– नाते-रिश्तेदारों को भी कभी-कभार याद कर लेंगे, तो वो ख़ुश हो जाएंगे.

– हमसे बहुत-से लोगों को बहुत-सी उम्मीदें होती हैं, सभी तो नहीं, पर कुछ की उम्मीदें तो हम ज़रूर ही पूरी कर सकते हैं.

– अनीता सिंह

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क्या आपके हार्मोंस आपके रिश्ते को प्रभावित कर रहे हैं? (How Hormones Influence Love And Relationships)

How Hormones Influence Love And Relationships

ये रूह के रिश्ते क्यों स़िर्फ जिस्म तक ही सिमटते जा रहे हैं… और जिस्म से होते हुए सिसक-सिसक कर दम तोड़ते जा रहे हैं… दूरियां जो आ रही हैं दरमियान, मन का पंछी ढूंढ़ने लगा है एक नया आशियान… लेकिन मुहब्बत जो कभी हममें-तुममें थी… अब भी कह रही है कि बचे हैं उसके कुछ तो नामो-निशान… न कुसूर तुम्हारा था, न ख़ता हमारी थी… बस व़क्त के सितम हमें तन्हा करते चले गए… और क़रीब आने की हसरत में हम दूर होते चले गए…

How Hormones Influence Love And Relationships
जी हां, यह बात सच है कि मॉडर्न लाइफस्टाइल ने हमारे रूहानी रिश्तों को जिस्मानी बना दिया है. भावनाओं की जगह ज़रूरतों ने ले ली है और सपनों की जगह कठोर हक़ीक़तों ने अपना डेरा जमा लिया. यही वजह है कि सब कुछ बदल रहा है. हम बदल रहे हैं… हमारा खान-पान बदल रहा है… दिनचर्या बदल रही है… और इसका सीधा प्रभाव हमारी सेहत और हमारे रिश्तों की सेहत पर पड़ रहा है.
यह तो हम सभी जानते हैं कि हमारी तमाम गतिविधियों को हर्मोंस ही प्रभावित करते हैं. ऐसे में उनमें होनेवाले बदलाव हम में भी बहुत कुछ बदल देते हैं. हार्मोंस में यह बदलाव काफ़ी हद तक हमारी लाइफस्टाइल व डायट पर भी निर्भर करता है. यही वजह है कि आजकल तेज़ी से हमारा मूड और हमारे रिश्ते बदल रहे हैं, क्योंकि हर्मोंस बदल रहे हैं.

शोधों से यह बात साबित हो चुकी है कि आज के दौर में हम और ख़ासतौर से महिलाएं पहले की अपेक्षा अधिक हार्मोनल बदलाव से गुज़रती हैं. लेकिन अब यह बात भी लोग मानने लगे हैं कि हार्मोंस में होनेवाले यह बदलाव हमारे रिश्तों को भी प्रभावित करने लगे हैं.

हार्मोंस और मूड

हार्मोंस के बदलाव से बहुत कुछ बदलता है- हमारा मूड हो या शरीर में कोई परिवर्तन, हार्मोंस की उसमें अहम् भूमिका होती है.
बदलते हार्मोंस से बदलते हैं रिश्ते: जब कभी भी शरीर में हार्मोंस का असंतुलन होता है, आपकी सेक्स की इच्छा कम हो जाती है और मूड स्विंग्स बढ़ जाते हैं. ये दोनों ही चीज़ें रिश्ते को बुरी तरह प्रभावित करती हैं.

महिलाओं में सेक्सुअल डिज़ायर बनाए रखने के लिए प्रोजेस्टेरॉन और इस्ट्रोजेन में संतुलन बनाए रखना ज़रूरी है. लेकिन अधिकांश महिलाओं में इस्ट्रोजन की अधिकता होती है, जिससे सेक्स की इच्छा में कमी आती है.

प्रोजेस्टेरॉन शांत हार्मोन होता है, जो महिलाओं की सेक्सुअल हेल्थ व सामान्य सेहत को भी बेहतर बनाता है. इसी तरह से इस्ट्रोजेन का स्तर भी यदि सही व संतुलित रहेगा, तो सेक्स की इच्छा बढ़ेगी और सेक्स लाइफ बेहतर होगी. सेक्स लाइफ और रिलेशनशिप का बहुत गहरा संबंध होता है, यदि आपकी सेक्स लाइफ अच्छी है, तो आपका रिश्ता और बेहतर बनेगा और यदि सेक्स लाइफ सामान्य नहीं, तो रिश्ते पर इसका नकारात्मक प्रभाव साफ़तौर पर नज़र आएगा. यही वजह है कि हार्मोंस का संतुलन आपके रिश्ते के लिए बेहद ज़रूरी है.

सेल्फ इमेज पर प्रभाव: अगर अपने शरीर में कुछ परिवर्तन महसूस कर रहे हैं, तो इसका संबंध हार्मोंस से हो सकता है. हर्मोंस के असंतुलन से वज़न बढ़ना, थकान रहना, अचानक तेज़ गर्मी लगकर पसीना आना आदि समस्याएं हो सकती हैं. ये तमाम शारीरिक समस्याएं आपके ख़ुद को देखने के नज़रिए पर असर डालती हैं और इससे आपका रिश्ता भी प्रभावित हुए बिना नहीं रहता.
प्रोजेस्टेरॉन, टेस्टॉसटेरॉन और इस्ट्रोजेन- इन तीनों हार्मोंस के असंतुलन का आपके मूड पर और सेल्फ एस्टीम (आत्मसम्मान) पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है.
इन हार्मोंस को संतुलित रखना बेहद जरूरी है, ताकि आप अपने बारे में अच्छा महसूस करें और यही सकारात्मक भाव आपके रिश्ते को भी सकारात्मक रखेगा.

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आपके स्वभाव और व्यवहार भी होते हैं प्रभावित: इस्ट्रोजेन का बढ़ता स्तर आपको चिड़चिड़ा बना सकता है. साथ ही आपको अनिद्रा और मूड स्विंग्स जैसी समस्याएं भी दे सकता है. वहीं प्रोजेस्टेरॉन का घटता स्तर आपको स्वाभाव से चिंतित बना सकता है. ऐसे में यदि आप अपने स्वभाव को नियंत्रित नहीं कर पाते, तो दूसरों की नज़रों में आपकी इमेज प्रभावित हो सकती है. आपका पार्टनर भी आपको ग़लत समझ सकता है और आपके रिश्ते पर इसका बुरा असर हो सकता है.
प्रोजेस्टेरॉन के स्तर का सामान्य बनाए रखकर इस्ट्रोजेन के असर को कम किया जा सकता है, जिससे आपके स्वभाव व व्यवहार पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े.

आपके दोस्तों व रिश्तेदारों पर भी असर हो सकता है: हर किसी की चाहत होती है कि अपने दोस्तों व क़रीबी लोगों के साथ वो अच्छा व़क्त गुज़ारे, लेकिन आपके हार्मोंस आपको बेवजह को स्ट्रेस देकर आपसे यह अच्छा व़क्त छीन सकते हैं.
किसी भी हार्मोंस के स्तर का बेहद बढ़ना या एकदम कम होना आपके स्वभाव में निराशा, चिड़चिड़ापन, चिंता, अवसाद जैसे नकारात्मक भाव को जन्म दे सकता है. इसके अलावा वज़न बढ़ना या नींद न आना जैसी शारीरिक समस्याएं भी हो सकती हैं. जिससे आपकी ख़ुशियां बहुत हद तक प्रभावित हो सकती हैं.

 

How Hormones Influence Love And Relationships

क्या करें?

– जब कभी भी आप ख़ुद में इस तरह के बदलाव देखें और जब ये चीज़ें आपके व्यवहार व रिश्तों पर असर डालने लगें, तो फ़ौरन एक्सपर्ट की मदद लें. ऐसा करके आप ख़ुद को भी ख़ुश रख सकते हैं और अपने रिश्तों को भी बचा सकते हैं.
– पीरियड्स से पहले व बाद में महिलाओं के हार्मोंस काफ़ी तेज़ी से बदलते हैं, यही वजह है कि उनका मूड इस दौरान काफ़ी बदलता रहता है, ऐसे में अन्य लोगों को थोड़ी समझदारी दिखानी चाहिए, ताकि इसका असर उनके रिश्ते पर न पड़े.
– हेल्दी डायट लें, क्योंकि अनहेल्दी लाइफस्टाइल से हर्मोंस असंतुलित होते हैं. चाय, कॉफी, अल्कोहल, कोल्ड ड्रिंक्स, जंक फूड जितना हो सके कम लें. इनकी जगह गाजर, ब्रोकोली, फूलगोभी, पत्तागोभी, फ्लैक्ससीड, ग्रीन टी, ड्राइ फ्रूट्स, ओट्स, दही, फ्रेश फ्रूट्स, हरी सब्ज़ियां, अदरक, लहसुन आदि अपने डायट में शामिल करें. यह तमाम चीज़ें शरीर को डिटॉक्सिफाइ करके हार्मोंस को संतुलित करती हैं.
– डार्क चॉकलेट्स भी मूड को बेहतर बनाकर डिप्रेशन दूर करता है.
– वेजीटेबल ऑयल्स की जगह ऑलिव ऑयल व कोकोनट ऑयल को शामिल करें.
– लाइट एक्सरसाइज़, योग व प्राणायाम से हार्मोंस संतुलित होते हैं.

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हार्मोंस और बिहेवियर

हार्मोंस एंड बिहेवियर के नाम से हुए एक विस्तृत अध्ययन में यह पाया गया है कि किस तरह से महिलाओं के हार्मोंस, उनका अपने पार्टनर को देखने का नज़रिया और उनके रिश्ते में मज़बूत संबंध है.
दरअसल इन सबका संबंध महिलाओं के मासिक धर्म से है. अगर कोई महिला अपने पार्टनर को हॉट समझती है, तो जब उसका पीरियड क़रीब होता है, तो वो अधिक ख़ुश रहती है और अपने पार्टनर के और क़रीब आती है. जबकि यदि महिला अपने पार्टनर को बहुत हॉट नहीं समझती, तो ऑव्युलेशन के समय वो उसकी अधिक निंदा करने लगती है और उससे दूरी बनाए रखती है.

हैप्पी हार्मोंस

मात्र सेक्स ही वो शारीरिक क्रिया नहीं है, जो आपके तनाव को कम करके आपको हेल्दी रख सकती है. जी हां, यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना में हुए एक अध्ययन में यह पाया गया कि गले मिलने के बाद महिलाओं और पुरुषों में ऑक्सिटोसिन का स्तर अधिक पाया गया और कार्टिसोल का स्तर कम पाया गया.
दरअसल, ऑक्सिटोसिन वो हार्मोन है, जो तनाव कम करके मूड को बेहतर बनाता है, जबकि कार्टिसोल एक स्ट्रेस हार्मोन है. ऐसे में नतीजा यह निकला कि हाथ पकड़ना, प्यार से छूना, दुलार करना आदि केयरिंग बिहेवियर भी आपको
तनावमुक्त रखककर हेल्दी बना सकता है.

– गीता शर्मा

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August Born: प्यार ही नहीं, शादी में भी बेहद विश्‍वास रखते हैं अगस्त में जन्मे लोग (What Your Birth Month Says About Your Love Life)

August Born

August Born

प्यार ही नहीं, शादी में भी बेहद विश्‍वास रखते हैं अगस्त (August) में जन्मे लोग

  • इन्हें कैज़ुअल रिलेशनशिप्स पसंद नहीं होतीं.
  • ये शादी की परंपरा पर बेहद विश्‍वास करते हैं.
  • इनकी सबसे बड़ी ख़ासियत यही होती है कि ये अपने पार्टनर की कमियों को नज़रअंदाज़ करके स़िर्फ उनकी ख़ूबियों पर ध्यान देते हैं.
  • इन्हें रोमांस बहुत पसंद होता है.
  • ये अपने पार्टनर के प्रति बहुत ईमानदार होते हैं, साथ ही पार्टनर से भी उसी ऑनेस्टी की अपेक्षा रखते हैं.

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  • बेडरूम में कोई इन्हें समझाए, यह इन्हें पसंद नहीं आता.
  • ये इस बात पर भी ध्यान देते हैं कि उनके पार्टनर में वो सब कुछ है, जो ये चाहते हैं. अगर ऐसा नहीं है, तो इन्हें उनसे अलग होकर कोई दूसरा साथी तलाशने में भी देर नहीं लगती.
  • प्यार और सेक्स के मामले में ये थोड़ा ईगोइस्ट होते हैं.
  • सेक्स व प्यार के मामले में ये या तो एकदम ही सेलफिश हो सकते हैं या फिर ये बेहद उदार होते हैं. यानी इनके व्यक्तित्व में ये विरोधाभास हो सकता है.

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बेहतर रिश्ते के लिए पति-पत्नी जानें एक-दूसरे के ये 5 हेल्थ फैक्ट्स( Couples Know These 5 Health Facts- Keep your Relationship Strong)

Keep your Relationship Strong

बेहतर रिश्ते के लिए प्यार, केयर और दूसरी कई बातों के साथ ही ज़रूरी है एक-दूसरे के हेल्थ (Keep your Relationship Strong) की पूरी जानकारी, ताकि हेल्थ भी ठीक रहे और रिश्तो भी हेल्दी बना रहे.

Keep your Relationship Strong

क्या पार्टनर की फैमिली हेल्थ फाइल की जानकारी है?

– फैमिली में किसे कौन-सी हेल्थ प्रॉब्लम्स हैं या रह चुकी हैं, इसकी जानकारी बेहद ज़रूरी है. डायबिटीज़ से लेकर कैंसर व हार्ट प्रॉब्लम तक पैरेंट्स से बच्चों में आ सकती हैं.
– ऐसे में आप अगर इसे नज़रअंदाज़ करेंगे, तो पार्टनर को व उसके बाद आपके बच्चों तक को आप अंजाने में ही बीमारियां देते जाएंगे.
– यदि समय रहते आप फैमिली हेल्थ फाइल्स पर आपस में बात करें, तो नियमित चेकअप व डायट से बीमारी से बचा जा सकता है, साथ ही अपने बच्चों को भी आप इन बीमारियों की चपेट में आने से बचा सकते हैं.
– यदि आपने इस ओर ध्यान ही नहीं दिया, तो आपके पार्टनर की हेल्थ के साथ-साथ आपके रिश्ते की सेहत भी ख़राब हो सकती है.
– आपको यह भी लग सकता है कि आपको धोखे में रखा गया या जान-बूझकर आपसे यह बात छिपाई गई. जबकि सच्चाई यह होती है कि अक्सर पार्टनर्स इस ओर ध्यान ही नहीं देते और बाद में पता चलने पर उन्हें अपनी ग़लती का एहसास होता है.
– अच्छा होगा कि आप समय-समय पर एक-दूसरे को ध्यान दिलाते रहें व साथ में चेकअप कराते रहें.
– साथ ही एक्सपर्ट की सलाह भी लेते रहें.

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कहीं पार्टनर ओवरवेट तो नहीं?

– अक्सर साथ रहते-रहते फिटनेस कब लापता हो जाती है, पता ही नहीं चलता. लेकिन आपके रिश्ते के लिए बहुत ज़रूरी है कि आपको फिटनेस फैक्ट्स का पता हो.
– अगर पार्टनर का वज़न बढ़ रहा है और वो ओवरवेट हो गया है, तो इसका असर उसकी पूरी हेल्थ पर पड़ेगा. बढ़ता वज़न कई बीमारियां लेकर आता है, जिससे सेक्स लाइफ प्रभावित होती है. साथ ही स्वभाव में चिड़चिड़ापन भी आता है.
– बेहतर होगा कि आप दोनों नियम बना लें और समय-समय पर वज़न चेक कराएं.
– अगर वज़न बढ़ रहा है, तो डायट प्लान करें और एक साथ एक्सरसाइज़, जॉगिंग या जिमिंग करें, इससे साथ में व़क्त भी गुज़ार पाएंगे और एक-दूसरे को मोटिवेट भी कर पाएंगे.

क्या पार्टनर का स्लीप पैटर्न चेंज हो रहा है?

– सोने की आदत में अगर बदलाव नज़र आने लगे, तो अलर्ट हो जाइए, क्योंकि हो सकता है कि पार्टनर फिज़िकली हेल्दी नज़र आ रहा हो, लेकिन कहीं न कहीं वो या तो स्ट्रेस में है या फिर उसे कोई हेल्थ प्रॉब्लम है.
– अगर लगातार पार्टनर स्ट्रेस में रहेगा या ठीक से सो नहीं पाएगा, तो वो धीरे-धीरे ग़ुस्सैल स्वभाव का होता जाएगा. उसे अन्य हेल्थ प्रॉब्लम्स भी होने लगेंगी, जिससे आपकी पर्सनल लाइफ काफ़ी प्रभावित होगी.
– पार्टनर से बात करें और पता करें कि उसके स्ट्रेस का कारण क्या है.
– उसे सहयोग दें और हौसला बढ़ाएं.
– अगर उसे ख़ुद को अंदाज़ा नहीं कि उसका स्लीप पैटर्न क्यों बदल रहा है, तो एक्सपर्ट की सलाह ज़रूर लें.

पार्टनर को कोई सेक्सुअल डिसीज़ तो नहीं?

– यह जानना बेहद ज़रूरी है, क्योंकि यह बात आपकी सेक्सुअल हेल्थ व आपके रिश्ते को भी प्रभावित करेगी.
– अक्सर पार्टनर इस तरह की बातें एक-दूसरे से छिपाते हैं, उन्हें लगता है कि उनका साथी उनको ग़लत समझेगा.
– लेकिन इस तरह से वो अपने पार्टनर को भी वो बीमारी दे देते हैं.
– इस तरह हेल्थ के साथ-साथ रिश्तों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.
– बेहतर होगा कि चाहे जो भी बात हो, अपने पार्टनर से शेयर करें. अपनी सेक्सुअल डिसीज़ को छिपाने की बजाय उसका इलाज कराएं.
– इस मामले में बहुत अधिक देर करना ठीक नहीं.
– पार्टनर से खुलकर बात करें और उन्हें विश्‍वास में लें.

मेंटल हेल्थ के बारे में भी जानना ज़रूरी है.

– पार्टनर का टेम्परामेंट, उसके स्वभाव को प्रभावित करता है. वो कितना सहनशील है, प्रेशर को कितना हैंडल कर पाता है, विपरीत परिस्थितियों में कैसे व्यवहार करता है, ये तमाम बातें पार्टनर की मेंटल हेल्थ व स्ट्रेंथ को दर्शाती हैं.
– तनाव या ग़ुस्से में पार्टनर की प्रतिक्रिया कैसी रहती है?
– क्या वाद-विवाद के बाद वो अपनी ग़लती स्वीकारता है या सॉरी बोलकर बात को ख़त्म करने की कोशिश करता है?
– बेहतर होगा कि एक-दूसरे को मानसिक रूप से आप दोनों मज़बूत बनाएं, इससे आपका रिश्ता भी मज़बूत होगा.
– ऐसा करने के लिए एक-दूसरे की कमज़ोरी व ताक़त को पहचानना भी ज़रूरी है.
– आपस में बात करें और कोशिश करें कि बिना किसी को हर्ट किए, आप अपनी बात कह सकें, साथी की कमज़ोरी व उसकी स्ट्रेंथ पर चर्चा करें.
– साथ ही अपनी कमज़ोरियों के बारे में भी साथी को बताएं. इसके अलावा कैसे आप दोनों एक-दूसरे की मदद कर सकते हो, इस पर भी ज़रूर बात करें.

– विजयलक्ष्मी

पहला अफेयर: मेरे हमसफ़र… (Pahla Affair: Mere Humsafar)

Pahla Affair, Mere Humsafar

Pahla Affair, Mere Humsafar

पहला अफेयर: मेरे हमसफ़र… (Pahla Affair: Mere Humsafar)

मन बड़ा बेईमान होता है. आप उसे लाख समझाएं कि वह काबू में रहे, पर वो नादान कहां आपकी सुनता है. बस आपको दगा दे जाता है. और आपके कई राज़ों को फाश कर देता है. उसके कहे में चेहरे और आंखें क्या कह-सुन जाते हैं. आपको पता ही नहीं चलता कि कब आपका मन आपका रहा ही नहीं… वह तो किसी और का हो गया.

मेरी नज़रों में वो मंज़र और ज़ेहन में वो सफ़र आज भी ताज़ा है, जब कसौली में एक अजनबी ज़िंदगी में आया और फिर इश्क़ वादियों में घुल-मिल गया. कहां तो बस सफ़र में एक पड़ाव पर मिले और बाद में मन में उसकी हर ख़ुशबू बस गई.

हर साल गर्मियों की छुट्टियों में पूरा परिवार पहाड़ों पर छुट्टियां मनाने जाता था. उत्तर भारत की भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए बर्फीले पहाड़ों से बेहतर पनाह कहां मिलती. और इस बार योजना बनी, तो कसौली जाने की ठानी, जहां मामाजी एयरफोर्स में पदस्थ थे.

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सुना था छोटी-सी मगर प्यारी-सी जगह है और मामाजी का ख़ूब आग्रह भी था. तपिश के बीच ट्रेन में सवार हुए. फिर टैक्सी से पहाड़ों के घुमावदार रास्ते पर चलते चले गए. चीड़ के पेड़ों के साथ-साथ दौड़ते-दौड़ते आख़िरकार हमारी मंज़िल भी आ गई.

मामाजी का घर बेहद ख़ूबसूरत था. चारों ओर बस पहाड़ ही पहाड़. हम सब बहुत ख़ुश हुए. मामाजी ने बताया कि हम लोगों के आने की ख़ुशी में एक छोटी-सी दावत रखी है रात को. वाह, कहते हुए पता नहीं था कि क्या करवट लेगी ज़िंदगी. दोपहर में थकान उतारने के लिए जो सोई, तो मां के जगाने पर ही आंख खुली.

रात की दावत में मामाजी ने बहुत सारे लोगों को बुलाया था. उन्हीं में से एक थे पंकज. उस रात पार्टी में हम लोग मिले, यहां-वहां की बातें कीं. फिर अपनी-अपनी राह चल दिए. अगले दिन सुबह यूं ही टहलते हुए हम फिर मिले. फिर बातें हुईं. जाने क्यों पंकज की बातें बड़ी भली-सी लगीं. मन बावरा दिनभर पकंज के बारे में सोचता रहा. शाम को चर्च की छांव तले फिर हम मिले. मन में कुछ गुदगुदाहट-सी हुई. “कीनू, इस ड्रेस में तुम बहुत सुंदर लग रही हो.” पंकज कहने लगे. मेरे गाल गुलाबी हो गए. हफ़्तेभर से ज़्यादा हम लोग रहे और पंकज लगातार मिलते रहे.

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फिर एक दिन मामाजी ने शिमला चलने का ऐलान कर दिया. मन कुछ बुझ गया. जब जीप में सवार हुए, तो पंकज एक सरप्राइज़ की तरह मिले. हौले-हौले मैंने उनकी आंखों में देखा. उनमें ग़ज़ब का आकर्षण था. शिमला में रहने के दौरान हमारी बातें-मुलाक़ातें जारी रहीं. देवदार के पेड़ों तले टहलते कितनी ही बातें कीं. फिर जुदाई का दिन आ गया. औपचारिक रूप से एक-दूसरे को अलविदा कह दिया.

घर लौटने के बाद मन बुझ गया. पंकज की बातें और उनकी सूरत ही हर ओर दिखती. परिवार में इश्क़ की बात कहना और क्या पता पंकज को भी ऐसा कुछ महसूस हुआ कि नहीं. मन को समझा लिया कि पंकज को एक मीठी याद समझकर अपनी नींद में दफ़न कर ले.

दिन बीते, व़क्त गुज़रा, साल बीत गया. मामाजी का ट्रांसफर हो गया. कॉलेज की पढ़ाई भी ख़त्म हो चली. लेक्चररशिप मिल गई. एक दिन मां ने कहा, “शाम को लड़केवाले आ रहे हैं. आज छुट्टी कर लो.” उस समय न जाने क्यों अचानक पंकज आंखों में तिर गए. मन को समझाया और परीक्षा देने के लिए जुट गई.

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शाम को लड़केवाले आए. लड़का साथ नहीं था. पर उसके मम्मी-पापा से मिलकर लगा कि पहले से पहचान हो. उनके अपनेपन ने कुछ पलों के लिए पंकज को कहीं गुम कर दिया. मां-पापा ख़ुश थे. अगले ही दिन मंगनी भी होनेवाली थी. मन में बड़ी बेचैनी थी. एक अंजान के साथ बंधने की. मन में दुविधा-सी थी. एक ओर प्यार, जो मेरी तरफ़ से था और दूसरी ओर परिवार की ख़ुशी. मंगनी की रस्म के लिए जब पहुंची, तो सिर शर्म से झुका रहा. “अरे देख लो, बाद में न कहना कि कहां ब्याह दिया.” मां ने टल्ला मारा. मैंने सिर उठाकर सामनेवाले शख़्स को देखा, “अरे, आप…” इतना ही कह सकी. सब हंस पड़े.

कहने की ज़रूरत ही नहीं थी कि प्यार एक तरफ़ा नहीं था. वह तो दोनों ओर से था. यह पूरी साज़िश मेरे मामाजी ने रची थी, जिन्होंने बिना किसी शोर-शराबे के कसौली बुलाकर हम लोगों को मिलने-जुलने का मौक़ा दिया था, ताकि हम जीवन की राह में हमक़दम बनें.

– राजेश्‍वरी शुक्ला

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पार्टनर या कंप्लीट पैकेज, क्या चाहते हैं आप? (partner or complete package, what you want?)

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मॉडर्न और ज़रूरत से ज़्यादा प्रैक्टिकल आज की युवा पीढ़ी रिश्ते-नातों में भी अपनी सहूलियत ढूंढ़ रही है. पैकेज की तरह ही पार्टनर से भी उनकी उम्मीदें दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं और ज़रूरत से ज़्यादा उम्मीदों का यही बोझ उनके रिश्ते को खोखला कर रहा है. युवाओं की इस चाह ने कितनी बदली है पति-पत्नी के रिश्तों की परिभाषा? पेश है ख़ास रिपोर्ट.

 

सफल-सुंदर-संस्कारी
ऐश्‍वर्या जैसी ख़ूबसूरत, नूयी/चंदा कोचर जैसी सफल, पार्वती जैसी सर्वगुण संपन्न बहू और सीता जैसी सुशील पत्नी… ये है आधुनिक ज़माने के पुरुषों की पत्नी से उम्मीदें. उनकी सोच में विरोधाभास साफ़ नज़र आता है. एक ओर तो उन्हें ज़माने के साथ क़दम मिलाकर चलनेवाली स्मार्ट और सक्सेसफुल वाइफ चाहिए, तो दूसरी ओर उनसे ये उम्मीद भी करते हैं कि वो घर की सारी ज़िम्मेदारी उठाने के साथ ही उनके माता-पिता की सेवा भी करे, मगर वो कभी ये नहीं सोचते कि दोहरी ज़िम्मेदारियों के बोझ तले उनकी पत्नी किस क़दर दबती चली जा रही है. उस पर यदि पत्नी ने कभी घर की ज़िम्मेदारी निभाने से इनकार किया या पति से मदद मांगी या फिर ख़ुद के लिए व़क्त न निकाल पाने की शिकायत की, तो उसे तरह-तरह के ताने सुनने पड़ते हैं. 30 वर्षीया शिवानी कहती हैं, “मेरी शादी ज्वाइंट फैमिली में हुई है. शुरू-शुरू में लगा कि मैं वर्किंग हूं, तो ज्वाइंट फैमिली मेरे लिए अच्छी है, मगर धीरे-धीरे मेरी ये सोच ग़लत साबित होने लगी. ऑफिस में भले ही कितनी भी देर हो जाए, खाना बनाने की ज़िम्मेदारी मेरी ही होती थी. कई बार इतनी थक जाती कि खड़े होने की हिम्मत भी नहीं होती थी, मगर कहूं तो किससे? पति को हमेशा वर्किंग वाइफ तो चाहिए थी, मगर अपनी शर्तों पर. कुछ अपवादों को छोड़ दिया जाए तो हमारे समाज में वर्किंग बहू कभी भी वर्किंग बेटे की बराबरी नहीं कर सकती, भले ही उसका पद और वेतन ज़्यादा ही क्यों न हो.”

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कितनी बदली है पुरुषों की मानसिकता?
ये सच है कि आज की महिलाओं को अपने मन-मुताबिक़ नौकरी करने की आज़ादी मिली है, मगर इस आज़ादी की अपनी शर्तें हैं, यानी तुम नौकरी, मगर ये मत भूलो कि घर आकर खाना बनाना अब भी तुम्हारी ही ज़िम्मेदारी है, सारे रिश्ते-नाते निभाना तुम्हारा ही फ़र्ज़ है. पेशे से मैकेनेकिल इंजीनियर राहुल कहते हैं, “आज के महंगाई के दौर में अच्छी लाइफस्टाइल मेंटेन करने के लिए पति-पत्नी दोनों का वर्किंग होना ज़रूरी है और मैं भी वर्किंग वाइफ ही चाहता हूं, मगर मुझे मिनी स्कर्ट वाली बीवी नहीं चाहिए. मेरे माता-पिता बुज़ुर्ग हैं, तो मैं चाहूंगा कि मेरी होने वाली पत्नी उनका भी ख़्याल रखे और घर के काम की भी ज़िम्मेदारी संभाले.”
ये सोच अकेले राहुल की नहीं है, आजकल के ज़्यादातर मध्यम वर्गीय परिवार के लड़के ऐसा ही सोचते हैं. हमारे पुरुष प्रधान समाज ने औरतों को घर से बाहर निकलने की आज़ादी तो दी, मगर फ़र्ज़ और ज़िम्मेदारियों के नाम पर इस क़दर जकड़ दिया है कि कभी-कभी इस सुपरवुमन वाले अवतार में महिलाओं को कोफ़्त होने लगती है.

दोहरी मानसिकता
अधिकांश पुरुष पत्नी को लेकर दोहरी मानसिकता अपनाते हैं, जैसे- पत्नी यदि घर पर है तो सलीके से कपड़े पहने, माता-पिता और रिश्तेदारों के सामने ज़्यादा मॉडर्न न बने यानी कुल मिलाकर घर के माहौल के मुताबिक़ ख़ुद को ढाल ले, मगर पत्नी यदि उनके दोस्तों से मिले या उनके साथ ऑफिस की किसी पार्टी में जाए तो उसे आधुनिक ज़माने के मुताबिक़ न स़िर्फ कपड़े पहनने चाहिए, बल्कि चाल-ढाल, बोली सब कुछ उनके मुताबिक़ होना चाहिए. उसे नए ट्रेंड्स की जानकारी होनी चाहिए ताकि दोस्तों के सामने उसे शर्मिंदा न होना पड़े. पत्नी की अपनी कोई व्यक्तिगत इच्छा नहीं होती, पति बोले तो मॉडल बन जाओ और पति बोले तो सति सावित्री. पेशे से बैंकर सुनील कहते हैं, “मेरी पत्नी वर्किंग होने के साथ ही घर की ज़िम्मेदारियां भी बख़ूबी निभाती है, मगर मैं उसे कभी अपने दोस्तों के बीच या हमारी पार्टी में नहीं ले जाता, क्योंकि वो बिल्कुल भी मॉडर्न नहीं है. यदि उसे दोस्तों के बीच ले जाऊंगा तो बाद में सब मेरा मज़ाक उड़ाएंगे कि बड़ा मॉडर्न बनता था और बीवी कैसी है?” मॉडर्निटी का चोला ओढ़े ज़्यादातर पुरुषों की यही समस्या है कि पत्नी तो उन्हें घरेलू चाहिए, मगर कभी-कभार पार्टी-फंक्शन में जाते समय वो अपनी तथाकथित मॉडर्निटी को पत्नी पर थोपने की कोशिश भी करते रहते हैं.

परफेक्शन की चाह बढ़ा रही है तनाव
मैरिज काउंसलर डॉक्टर राजीव आनंद कहते हैं, “व़क्त के साथ लोगों की ज़रूरतें, चाहतें और सामाजिक अपेक्षाएं बदली हैं. एक ओर तो हम कमाऊ पत्नी चाहते हैं और दूसरी तरफ़ हम उससे ये भी उम्मीद करते हैं कि वो एक अच्छी बहू व पत्नी के भी सारे फ़र्ज़ निभाए. इसके चलते निश्‍चय ही महिलाओं पर शारीरिक व मानसिक दबाव बढ़ा है, जिससे उनका दिमाग़ स्थिर नहीं रह पाता, वो डिस्टर्ब हो जाती हैं, अपनी ज़िम्मेदारियां ठीक से नहीं निभा पातीं. धीरे-धीरे परिवार के प्रति उनका प्यार व परवाह भी कम होने लगती है और उनके व्यवहार में होने वाले बदलाव की वजह जाने बिना ही परिवार और समाज ऐसी महिलाओं को ग़ैर ज़िम्मेदार और लापरवाह करार कर दे देता है. पुरुष आज भी औरतों को सेकेंड सेक्स का ही दर्जा देते हैं.”

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सामाजिक/पारिवारिक ढांचा
हमारा सामाजिक ढांचा ही कुछ ऐसा रहा है जहां लड़कियों को हमेशा लड़कों से कमतर आंका गया है, हालांकि धीरे-धीरे ही सही, हालात थोड़े बदल रहे हैं, मगर आज भी ऐसे लोगों की संख्या ही ज़्यादा है जो लड़की (बहू) से बहुत ज़्यादा उम्मीद रखते हैं, मगर कभी उस बहू के बारे में नहीं सोचते जो उनके बेटे की ही तरह 9-10 घंटे ऑफिस में काम करती है और घर आकर भी किचन में मुस्तैदी से अपना ज़िम्मा संभाल लेती है. इतना करते हुए भी हमेशा उसे ये एहसास दिलाया जाता है कि अपनी प्रोफेशनल लाइफ के चक्कर में वो अच्छी पत्नी, बहू और मां नहीं बन पाई है. हमारे यहां शुरू से ही लड़कों के काम करने का रिवाज़ नहीं है. कुछ अपवादों को छोड़ दिया जाए तो पत्नी के रहते यदि पति किचन में चला गया, एक ग्लास पानी ले लिया या फिर ख़ुद खाना सर्व कर लिया तो जैसे भूचाल आ जाता है. रूमाल से लेकर मोजे तक हर बात के लिए पत्नी को आवाज़ देने की आदत से अब भी ये बाज़ नहीं आए हैं. विदेशों में जहां छोटी उम्र से ही बच्चों को (लड़का-लड़की में यहां फर्क़ नहीं होता) आत्मनिर्भर बनना सिखाया जाता है, वहीं हमारे देश में लड़कों के लिए आत्मनिर्भरता का मतलब बस, नौकरी से है, घर के काम से नहीं.

कैसे बदलेंगे हालात?
आपसी समझ और परिपक्वता से ही बदलाव संभव है… हिंदी दैनिक से जुड़ी गीता ध्यानी कहती हैं, “हमारी परवरिश ही इस तरह से की गई है कि लड़कियों को लगता है कि घर का काम उन्हीं की ज़िम्मेदारी है और पति यदि पानी लाकर दे या फिर खाना बनाने लगे तो हमें ख़ुद ही अजीब लगने लगता है या फिर दूसरे देखकर ये कहने लगते हैं ये क्या लड़कियों वाले काम कर रहे हो. इन हालात को चाहकर भी बदल पाना अकेले लड़कियों के लिए संभव नहीं है.” 32 वर्षीया सीमा की भी कुछ ऐसी ही राय है. सीमा कहती हैं, “जहां लड़कियां ये कहने लगें कि मैं भी तो आपके बराबर कमाती हूं, मैं भी थक जाती हूं तो मैं ही अकेले घर का सारा काम क्यूं करूं? तो उन्हें सीधा जवाब मिलता है- ङ्गतो नौकरी छोड़ दोफ ऐसे में उनके पास हालात से समझौता करने के अलावा कोई चारा नहीं रह जाता. हालात तभी बदल सकते हैं जब लड़कों में इतनी समझ और परिपक्वता आ जाए कि वो अपनी पत्नी को समझ सकें और ख़ुद उनकी मदद की पहल करें.”

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लड़कियों को भी चाहिए हैंडसम-हाई सैलरी-हाइली एज्युकेटेड पति
गांव व कस्बों की लड़कियों के हालात भले ही बहुत न बदले हों, मगर शहरी शिक्षित लड़कियों के एक तबके की सोच और हालात में थोड़ा बदलाव आया है. पुरुषों की तरह अब उनकी भी अपने हमसफर से उम्मीदें काफ़ी बढ़ गई हैं. उन्हें पति हैंडसम, पढ़ा-लिखा और ज़्यादा कमाने वाला चाहिए ताकि वो अपने सारे शौक़ पूरे कर सकें. इस बारे में फ्रीलांस राइटर सारंग उपाध्याय कहते हैं, “बड़े शहरों की शिक्षित लड़कियां गांव व कस्बों की लड़कियों की तुलना में जीवन की वास्तविकता से ज़्यादा बेहतर तरी़के से वाकीफ़ होती हैं. उन्हें पता है कि आज के दौर में अच्छी ज़िंदगी जीने के लिए पैसा बहुत ज़रूरी है, इसलिए वो चाहती हैं कि उनका पार्टनर आर्थिक रूप से मज़बूत हो, क्योंकि अब महिलाओं की इच्छाएं, महत्वाकांक्षाएं भी बढ़ने लगी हैं.” दरअसल, आज की आत्मनिर्भर महिलाएं जीवनसाथी को लेकर किसी तरह का समझौता नहीं चाहतीं. उन्हें अच्छी लाइफस्टाइल चाहिए इसलिए वो ऐसा पार्टनर चाहती हैं, जो उनकी उम्मीदों पर खरा उतरे. हां, कई बार उनकी ज़रूरत से ़ज़्यादा उम्मीदें मुसीबत का कारण भी बन जाती हैं.

बिज़नेस डील बनता पति-पत्नी का रिश्ता
“मैंने ये किया, तुमने मेरे लिए क्या किया”, यदि पति-पत्नी के रिश्ते में कुछ इस तरह एहसान गिनाए जाने लगें, तो समझ लीजिए कि ये शादी नहीं, बल्कि बिज़नेस डील है और आजकल की अधिकांश युवा पीढ़ी का हाल कुछ ऐसा ही है. प्यार देने का नाम है, आज की जनरेशन इस बात से इत्तेफ़ाक नहीं रखती, बल्कि वो ये सोचती है कि यदि उन्होंने पार्टनर के लिए कुछ किया है, तो पार्टनर का भी फ़र्ज़ बनता है कि वो उनके लिए कुछ करे. राजीव आनंद कहते हैं, “समर्पण और विश्‍वास जो मज़बूत और लंबे रिश्ते की बुनियाद है, इसे लोग भूलते जा रहे हैं. पति-पत्नी दोनों एक-दूसरे से ये उम्मीद करते हैं कि सामने वाला उनकी केयर करे, उनकी भावनाओं को समझे और सारी चीज़ें उनकी सुविधानुसार हो. आजकल हर कोई इतना स्वार्थी हो गया है कि मैं से ऊपर कुछ सोच ही नहीं पाता. आज के युवा शादी के बाद से ही पति/पत्नी की जासूसी करने लगते हैं, हर बात/काम पर उंगली उठाने लगते हैं. इतना ही नहीं, कई बार पैरेंट्स ही अपने बेटा/बेटी से कहते हैं कि वो पार्टनर की हरकतों पर नज़र रखे, क्योंकि आजकल ज़माना बड़ा ख़राब है, मगर वो ये नहीं समझते कि विश्‍वास के बिना शादी का रिश्ता खोखला होता है और खोखले रिश्तों की उम्र बहुत छोटी होती है.”

ज़रूरी है सामंजस्य-संतुलन-संवाद
दो अलग परिवार और विचारों के लोग जब शादी के बंधन में बंधकर एक होते हैं, तो इस रिश्ते को निभाने के लिए दोनों को ख़ुद को थोड़ा बदलना होता है. नई परिस्थितयों से सामंजस्य बिठाना पड़ता है. तुरंत किसी भी निर्णय पर पहुंचने से पहले एक-दूसरे को अच्छी तरह समझना बेहद ज़रूरी है और इसके लिए पति-पत्नी दोनों का आपस में बात करना ज़रूरी है. मैरिज काउंसलर मीता दोषी कहती हैं, “शादी के रिश्ते में बैलेंस बनाए रखने के लिए कपल्स के बीच अंडरस्टैंडिंग और कम्युनिकेशन होना बेहद ज़रूरी है. दोनों को ईगो से दूर रहना चाहिए, मगर ऐसा होता नहीं है. किसी बात पर नाराज़ होने पर कपल्स आपस में बात करना ही बंद कर देते हैं. अब जब बात ही नहीं करेंगे तो समस्या का समाधान कैसे निकलेगा.” ये सच है कि जीवनसाथी से नाराज़ होने पर अक्सर कपल्स आपस में बात करना बंद कर देते हैं जिससे उनके बीच खामोशी की दीवार खड़ी हो जाती है और ये दीवार उनके बीच दूरियां ले आती है.

शहरों में शिक्षित परिवारों में महिलाओं की स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ है, ख़ासकर न्यूक्लियर फैमिली में पति घर के काम में पत्नी की मदद भी करते हैं. मगर कुछ मामलों में जहां लड़कियों की एक्सपेक्टेशन बहुत हाई होती है, तो ऐसी शादियां ज़्यादा दिनों तक नहीं टिकतीं.

– मीता दोषी,  मैरिज काउंसलर

– कंचन सिंह

पहला अफेयर- तुम मेरे हो… (Pahla Affair- Tum Mere Ho)

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पहला अफेयर- तुम मेरे हो… (Pahla Affair- Tum Mere Ho)

बरखा की इन बूंदों में अपने महबूब को ढूंढ़ती मेरी नज़रें… उसकी प्यास, उसकी आस और उसकी बांहों में अपने वजूद का एहसास… इंद्रधनुष के रंग बिखर जाते हैं निगाहों में… बादल बन उड़ने लगता है दिल आसमान में… उस अधूरे प्यार को पूरा करने की ख़्वाहिश में, जिसके सपने हम दोनों ने मिलकर बुने थे… पर जब आंख खुली, तो कांच के खिलौनों की तरह सब टूट गए… आज फिर वही बरसात है… महबूब की याद है… वही अधूरी प्यास और वही अधूरी आस भी…

बीते दिन जब भी याद आते हैं, स़िर्फ आखों को ही नम नहीं करते, बल्कि हर एहसास को भिगो जाते हैं. तुम्हारी आंखों की वो शरारत, बातों का अंदाज़, वो बेपरवाह-सा जीने की अदा जब भी याद आती है, मेरे दिल की धड़कनों को आज भी तेज़ कर देती है. मुहब्बत का मीठा एहसास क्या होता है, तुमसे मिलने के बाद ही तो समझ पाई थी मैं, लेकिन मुहब्बत में इतना दर्द भी होता है यह भी तुमसे ही सीखूंगी सोचा न था. कहते हैं प्यार के रिश्ते में अपने साये तक एक हो जाते हैं, ऐसे में किसी ग़ैर के लिए जगह ही कहां बचती है. लेकिन हमारे बीच कब किसी और ने अपनी जगह बना ली पता ही नहीं चला.

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हम स़िर्फ प्रेमी ही नहीं, बल्कि बहुत अच्छे दोस्त भी थे. कहीं कोई पर्दा न था, कोई तकल्लुफ़ नहीं. दो नहीं, एक ही तो थे हम. ज़िंदगी बेहद हसीं लगती थी तब, हर लम्हा ख़ास था. आज़ाद पंछी की तरह खुला छोड़ दिया था मैंने तुम्हें, क्योंकि मेरा मानना था कि प्यार में बंधन नहीं होना चाहिए, प्यार तो आज़ाद होता है… लेकिन कब, क्यों और कैसे तुम्हारे दिल में किसी और के लिए भी जगह बनती चली गई इसका एहसास जब होने लगा, तब जैसे हर सपना धीरे-धीरे टूटता चला गया…

जहां तक मुझे पता था तुम्हें मेरी वो सहेली ज़्यादा पसंद नहीं थी, लेकिन न जाने कब वो तुम्हारे इतने क़रीब आ गई कि तुम छिप-छिपकर उससे बातें-मुलाक़ातें करने लगे. जब मुझे तुमसे दूरी का एहसास होने लगा, तुम में बदलाव नज़र आने लगा तो अपने प्यार का वास्ता देकर यक़ीन दिलाते रहे कि तुम स़िर्फ मुझसे प्यार करते हो. मैं भी बार-बार दिल को समझाकर तुम पर यक़ीन करती गई और हर बार मेरा यक़ीन टूटा…

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आख़िर इस कशमकश में कब तक ज़िंदा रह पाता हमारा मासूम प्यार और कोमल रिश्ता. सिसक-सिसककर दम तोड़ दिया आख़िर इस
रिश्ते ने… लेकिन कहते हैं कि प्यार कभी मरता नहीं… इतने सालों बाद तुमसे फिर एक मोड़ पर जब टकराई, तो एहसास हुआ कि तुम सही थे, सच्चे थे, तुम्हारा प्यार कोई फरेब नहीं था, वरना अब तक तुम उसके हो चुके होते, लेकिन तुम्हेें तो स़िर्फ मेरा इंतज़ार था… अगर कुछ ग़लत था तो स़िर्फ वो हालात और वो लोग, जिनसे हमारे बीच दूरी पैदा हुई.

लेकिन अब जब व़क़्त ने सारे घाव भर दिए हैं, तो इन फ़ासलों को भी हम हमेशा-हमेशा के लिए दूर कर दें, ताकि फिर कोई तीसरा हमारे बीच न आने पाए… अब किसी ग़लतफ़हमी की कोई गुंजाइश न बचे… मुझे भी शायद इसी मोड़ का इंतज़ार था, इसलिए तुम पर तमाम अविश्‍वासों के बावजूद मैं भी तो किसी और की न हो पाई.

तुम ही मेरी पहली मुहब्बत हो, तुम ही मेरा यक़ीन. तुम्हें ही तो तलाशती रहीं हर पल ये नज़रें, तुम नहीं तो मैं नहीं. तुम अक्सर कहा करते थे, प्यार विश्‍वास का ही दूसरा नाम है. तुमने मुझे सिखा ही दिया आख़िर इस विश्‍वास के साथ जीना… अब मुझे यक़ीन है कि तुम मेरे हो, स़िर्फ मेरे!

– योगिनी 

 

मसाज थेरेपी फॉर बेटर सेक्स (Massage Therapy For Better Sex)

Therapy For Better Sex

मसाज द्वारा सेक्स लाइफ़ के कई ख़ूबसूरत पलों का आनंद उठाया जा सकता है. मसाज थेरेपी (Therapy For Better Sex) सेक्सुअल पावर को बढ़ाने के साथ-साथ शरीर को चुस्त-दुरुस्त व तनावमुक्त रखने में भी अहम् भूमिका निभाती है.

Therapy For Better Sex
सेक्सुअल(Therapy For Better Sex) पावर को बढ़ाने में मसाज अहम् भूमिका निभाता है. वैज्ञानिक शोधों से भी यह बात प्रमाणित हुई है कि शरीर के अंग विशेष का मसाज करने से वहां की स्नायु प्रणाली अत्यंत मज़बूत और क्रियाशील होती है. इससे शरीर में उमंग-उत्साह का संचार होता है और व्यक्ति विशेष की सेक्स क्षमता में वृद्धि होती है. मसाज से रक्तसंचार एकाएक बढ़ जाता है, जिससे सेक्स उत्तेजना में गज़ब की बढ़ोत्तरी होती है.

ऑयल मसाज के फ़ायदे
मसाज करने के लिए नारियल, जैतून, तिल के तेल के साथ-साथ अन्य सुगंधित तेलों का इस्तेमाल करें. ख़ुश्बू वाले ऑयल का उपयोग करने से दोहरा लाभ होता है. यह मसाज थेरेपी का काम तो करता ही है, साथ ही सुगंधित होने के कारण यह सेक्सुअल पावर को भी बढ़ाता है. यदि किसी व्यक्ति को सेक्स संबंधी कोई समस्या है, तो ऑयल मसाज(Therapy For Better Sex) से वह भी दूर हो जाती है.

मसाज थेरेपी का वैज्ञानिक दृष्टिकोण
तनाव का सेक्स जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ता है, लेकिन कई शोधों और अध्ययनों से यह प्रमाणित हुआ है कि मसाज से चुटकियों में तनाव दूर हो जाता है. वैज्ञानिकों के अनुसार, मसाज(Therapy For Better Sex) के कारण त्वचा के भीतर रक्तप्रवाह तीव्र गति से शुरू हो जाता है, जिससे यौनांगों व मांसपेशियों को नया ख़ून और पोषण मिलता है. मसाज को वैज्ञानिक रूप देनेवाले स्वीडन के डॉ. पीटर हेनरी ने इसे तीन भागों में बांटा है- सक्रिय अंग विक्षेप, निष्क्रिय अंग विक्षेप और दुष्क्रिय अंग विक्षेप. आज की वैज्ञानिक मालिश में प्राय: इन्हीं विधियों का समावेश है.

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सक्रिय अंग विक्षेपः इस मसाज प्रक्रिया में घर्षण (Friction) का विशेष रूप से प्रयोग होता है. दोनों हाथों से मांसपेशियों को रगड़ना घर्षण कहलाता है. इससे रक्तसंचार तेज़ होता है और मांसपेशियों तथा ऊतकों को शक्ति मिलती है.

निष्क्रिय अंग विक्षेपः इस मसाज थेरेपी में हल्की-हल्की थपकी, कम्पन, ताल आदि का प्रयोग होता है. यह उंगलियों या हथेली से पूरे शरीर अथवा किसी एक अंग में दिया जा सकता है. इस प्रकार का मसाज मूत्राशय व प्रजनन अंगों की कमज़ोरी में विशेष रूप से फ़ायदेमंद होता है. महिलाओं की माहवारी संबंधी गड़बड़ी, स्नायुशूल, अजीर्ण, कब्ज़ आदि समस्याएं इससे दूर होती हैं. मुक्की (Beating) भी एक प्रकार की थपकी है. नितंब पर बंद मुट्ठी करके मुक्के मारने से महिलाओं का कमज़ोर प्रजनन अंग मज़बूत होता है. इस मसाज थेरेपी में जिस तरह आटा गूंधते हैं, उसी तरह शरीर की मांसपेशियों को गूंधा जाता है. इससे शरीर के विभिन्न प्रकार के रोगों के अलावा सेक्स संबंधी समस्याओं को दूर करने में भी मदद मिलती है.

निष्क्रिय मसाजः इसे एक तरह से पैसीव एक्सरसाइज़ अर्थात् निष्क्रिय व्यायाम भी कह सकते हैं. अत: जो लोग एक्सरसाइज़ के लिए व़क़्त नहीं निकाल पाते, उनके लिए निष्क्रिय मसाज(Therapy For Better Sex) बेहद फ़ायदेमंद होता है. मसाज करने से त्वचा का रक्तसंचार बढ़ता है और दिलोदिमाग़ में तरोताज़गी छा जाती है.

दंपतियों के लिए मसाज टिप्स
मसाज पति-पत्नी में मुहब्बत के एहसास जगाता है. इससे शरीर और त्वचा दोनों में ही निखार आता है.

टच थेरेपीः सेक्स में टच यानी स्पर्श ख़ास रोल अदा करता है. आपके प्यार से छूने भर से सिहरन-सी पैदा हो जाती है साथी के दिलोदिमाग़ में. धीरे-धीरे सहलाने और स्पर्श करते रहने से प्यार के साथ-साथ सेक्स की इच्छा बलवती होने लगती है. अतः जब भी पति-पत्नी अकेले में हों, तो ख़ामोशी के आलम के साथ स्पर्श के जरिए एक-दूसरे की भावनाओं को जानें-समझें. इससे मन में एक रोमांच-सा पैदा होने लगता है. कभी-कभी यह स्थिति आपको ऑर्गे़ज़म तक भी पहुंचा देती है.

एक-दूसरे का मसाज करनाः मसाज आपके मूड को बनाने के साथ-साथ सेक्स की चाह को भी बढ़ाता है. यदि ऐसे में पति-पत्नी एक-दूसरे का मसाज करें तो यह बॉडी पर जादू-सा असर करती है. इससे दोनों के बीच की दूरियां दूर होने के साथ-साथ नीरसता भी छंटती है. उनमें आपसी प्रेम मज़बूत होता है. वे इमोशनली एक-दूसरे के क़रीब आते हैं. आपसी समझदारी और केयर की भावना भी बढ़ती है.

फ़िट व हेल्दी रहने का फॉर्मूला
मसाज थेरेपी स्वस्थ और चुस्त-दुरुस्त रखती है. यदि आप मोटी हैं या फिर शरीर में अतिरिक्त चर्बी बढ़ गयी है, तो इसे दूर करने के लिए आप मसाज थेरेपी की सहायता ले सकती हैं. अध्ययन द्वारा यह भी देखा गया है कि मोटापा सेक्स लाइफ़ को प्रभावित करता है. ऐसे में मसाज थेरेपी द्वारा आप ना केवल ख़ुद को हेल्दी रख सकती हैं, बल्कि सेक्सुअल लाइफ़ का भी भरपूर आनंद उठा सकती हैं.

मसाज करने का तरीक़ा
हमेशा मसाज इस तरह करें कि रक्त का प्रवाह ऊपर की ओर होता रहे, ताकि रक्तशुद्धि का कार्य भी होता रहे. मसाज की शुरुआत पैरों से करें. फिर शरीर के अन्य भागों का मसाज करते जाएं. ध्यान रखें, मसाज शरीर में होनेवाले रक्तसंचार की विपरीत दिशा में कदापि न करें. पैर के तलुओं से प्रारंभ करके क्रमशः पैर की उंगलियों, पिंडलियों, जंघा, इसके बाद दोनों हाथों, भुजाओं, पेट, छाती, पीठ और फिर कंधों की मालिश करनी चाहिए.

जांघों के अंदरूनी भाग पर, छाती के ऊपर, गर्दन के पीछे, नितंबों के ऊपर, हाथ-पैरों की उंगलियों के मध्य, स्तनों के आस-पास मसाज करने से सेक्स उत्तेजना अप्रत्याशित रूप से तीव्र हो उठती है. अपनी क्षमता व उम्र के अनुसार 15-20 मिनट तक  मसाज करना चाहिए. इससे यौनांगों में तीव्र उत्तेजना उत्पन्न होती है.

मसाज करने के लिए पहले सुगंधित तेल हथेलियों पर लगाकर जिस अंग का मसाज करना हो, उस जगह पर हाथ फिराकर तेल लगाएं. इसके बाद हथेलियों का हल्का-हल्का दबाव डालकर तब तक मसाज करें, जब तक कि  शरीर तेल सोख न ले. इस प्रकार तेल की भीनी-भीनी ख़ुश्बू रोमछिद्रों एवं नाक के माध्यम से मस्तिष्क में पहुंचकर संपूर्ण शरीर में मादकता और मस्ती भर देते हैं. इससे सेक्स संबंधी संवेदनाओं का नियंत्रण भी होता है. परिणामस्वरूप व्यक्ति सेक्स के समय जल्दी स्खलित नहीं होता. मसाज थेरेपी शीघ्रपतन के मरीज़ों के लिए एक वरदान है.

– भावना

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