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क्यों मुस्कुराने में भी कंजूसी करते हैं लोग? (Why Don’t Some People Smile)

Smile

क्यों मुस्कुराने में भी कंजूसी करते हैं लोग? (Why Don’t Some People Smile)

ऐसे तमाम लोग (People) हमें रोज़ ही मिल जाते हैं, जो बेवजह ही मुस्कुराकर (Smile) चले जाते हैं और ऐसे भी लोग मिलते हैं, जिन्हें देखकर लगता है कि शायद ये ज़िंदगी में कभी मुस्कुराए ही नहीं. कोई उन्हें घमंडी समझता है, तो कोई ग़मग़ीन… आइए, जानते हैं कि वो ऐसे क्यों हैं?

टेस्टोस्टेरॉन का हाई लेवल: रिसर्च बताते हैं कि जिनका टेस्टोस्टेरॉन स्तर अधिक होता है, वो कम मुस्कुराते हैं. यही वजह है कि महिलाओं के मुक़ाबले पुरुष कम मुस्कुराते हैं.

पावर: कुछ अध्ययन यह बताते हैं कि ख़ास परिस्थितियों में मुस्कुराने का मतलब ख़ुद को कमज़ोर दर्शाना या एक तरह से आत्मसमर्पण की निशानी माना जाता है. जो लोग कम मुस्कुराते हैं, वो ख़ुद को पावरफुल महसूस करते हैं. उन्हें लगता है कि वो हर परिस्थिति का मुक़ाबला कर सकते हैं और उनमें वो शक्ति है.

कम संवेदनशीलता: स्टडीज़ इस बात की ओर भी इशारा करती हैं कि इमोशनल सेंसिटिविटी हंसने और मुस्कुराने से जोड़कर देखी जाती है, कम मुस्कुरानेवाले लोग इतने संवेदनशील नहीं होते यानी वो कम संवेदनशील होते हैं.

संवादहीनता व असहमति: कम मुस्कुरानेवाले दूसरों की बातों और विचारों से कम सहमत होते हैं. मुस्कुराहट को संवाद स्थापित करने का एक अच्छा ज़रिया माना जाता है, ऐसे में कम मुस्कुरानेवाले दूसरों से अधिक बात करना पसंद नहीं करते हैं.

कठोर व दृढ़ नज़र आने की कोशिश: कुछ लोग प्रभावशाली, मज़बूत, कठोर या दृढ़ नज़र आने की कोशिश में कम मुस्कुराते हैं. शायद ये ऐसे लोग होते हैं, जिनकी परवरिश के दौरान मन में यह बात बैठा दी जाती है या परिस्थितियां इन्हें ऐसा महसूस कराती हैं कि मुस्कुराना उन्हें कमज़ोर बना सकता है यानी मुस्कुराहट को वो कमज़ोरी की निशानी मानने लगते हैं.

नाख़ुश: ज़िंदगी से जिन्हें बहुत-सी शिकायतें हैं, जो ख़ुश नहीं हैं, वो चाहकर भी मुस्कुरा नहीं पाते.

रक्षात्मक प्रतिक्रिया: ज़िंदगी के कुछ कड़वे अनुभव और जो लोग भावनात्मक रूप से आहत हुए होते हैं कभी या फिर बुली का शिकार भी हुए होते हैं, तो वो ख़ुद को बचाने व अधिक आहत होने से बचाने के लिए न मुस्कुराने को एक रक्षात्मक प्रतिक्रिया के तौर पर लेते हैं.

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लोग गंभीरता से लें: कुछ लोग चाहते हैं कि दूसरे उन्हें अधिक गंभीरता से लें, इसलिए वो कम मुस्कुराते हैं, क्योंकि उनकी यह सोच होती है कि मुस्कुराने से अन्य लोग उन्हें उतनी गंभीरता से नहीं लेंगे या उनकी बातों को उतना महत्व नहीं देंगे, जितना वो चाहते हैं.

परिपक्वता: कम मुस्कुरानेवाले ख़ुद को परिपक्व दिखाने के लिए ऐसा करते हैं. उन्हें लगता है हंसना-मुस्कुराना अपरिपक्वता की निशानी है. उन्हें यह बचकाना लगता है. वे सोचते हैं कि कम मुस्कुराना उन्हें अधिक मैच्योर दिखाएगा और लोग उन्हें अधिक महत्व देंगे.

ख़ूबसूरत नहीं लगते: कुछ लोगों में यह भावना घर कर जाती है कि मुस्कुराते हुए वो अच्छे नहीं लगते या तो उनके दांत ख़राब होते हैं या उन्हें कभी किसी ने कहा होता है कि वो गंभीर अधिक आकर्षक नज़र आते हैं, इसलिए भी वो कम मुस्कुराते हैं.

मुखौटा: कुछ लोग इसे आवरण या मुखौटा बना लेते हैं, जिससे उनकी तकलीफ़ या भावनाएं दूसरों पर ज़ाहिर न हों. कहीं न कहीं वो तकलीफ़ में होते हैं, पर वो शेयर नहीं करना चाहते, इसलिए वो दूसरों से उतना कंफर्टेबल नहीं होना चाहते, जहां लोग उनकी मुस्कुराहट के पीछे दर्द को पहचान सकें. ऐसे में वो गंभीर व ख़ुद को मज़बूत दिखाने के लिए यह मुखौटा ओढ़ लेते हैं.

महत्व कम न हो: कुछ लोगों की यह पक्की धारणा बन जाती है कि बात-बात पर या जब-तब मुस्कुरानेवालों की वैल्यू कम हो जाती है. हर किसी को देखकर मुस्कुरा देने से वो व्यक्ति भी आपकी कद्र नहीं करता, जिसे देखकर आप मुस्कुराते हैं.

ईगो: यह भी एक कारण है, क्योंकि कई बार आपसी रिश्तों या दोस्तों में भी लोग यह सोचते हैं कि एक स्वीट-सी स्माइल से अगर झगड़ा ख़त्म होता है, तो क्या बुराई है, पर वहीं कुछ लोग अपना ईगो सैटिस्फाई करने के लिए यह सोचकर नहीं मुस्कुराते कि भला मैं क्यों झुकूं, ग़लती तो सामनेवाले की थी, मैं क्यों पहल करूं… यदि सामनेवाला पहल करता है, तो भी वो जल्दी से अपनी प्रतिक्रिया नहीं देते, क्योंकि उन्हें लगता है कि इतनी जल्दी माफ़ करने पर अगली बार आपको वो हल्के में लेंगे और आपका महत्व धीरे-धीरे ख़त्म हो जाएगा.

Sad Face

क्या-क्या और कैसे-कैसे बहाने…

जी हां, कम मुस्कुराने के मनोविज्ञान व मनोवैज्ञानिक कारणों की चर्चा तो हम कर चुके. अब उन बहानों को भी जानते हैं, जो लोग अपने न मुस्कुराने पर बनाते हैं.

क्या मैं पागल हूं: बहुत-से लोग यही कहते हैं कि बेवजह या बात-बात पर मुस्कुराने व हंसनेवाला तो पागल होता है. क्या मैं आपको पागल लगता/लगती हूं, जो हर बात पर या हर किसी को देखकर मुस्कुराऊं?

मूड भी कोई चीज़ है या नहीं: न मुस्कुराने की वजह पूछने पर कुछ लोग यही तर्क देते हैं कि मूड भी कोई चीज़ है, बिना मूड के कोई काम नहीं होता, फिर चाहे वो मुस्कुराना ही क्यों न हो.

झूठी हंसी क्यों भला: हम ज़बर्दस्ती किसी को ख़ुश करने के लिए नहीं मुस्कुरा सकते. झूठी हंसी नहीं आती हमें. यह बहाना भी बहुत लोग बनाते हैं.

कुछ अच्छा तो हो मुस्कुराने के लिए: कुछ लोग इतने नकारात्मक होते हैं कि उन्हें हर बात में, हर चीज़ में, हर इंसान में और हर परिस्थिति में कमियां ही नज़र आती हैं. उनके लिए कुछ भी कभी भी अच्छा नहीं होता, तो भला मुस्कुराना किस बात का.

मैं क्यों अपनी वैल्यू कम करूं: कुछ लोगों को लगता है कि उनकी वैल्यू कम हो जाएगी, लोगों के बीच उन्होंने जो छवि बना रखी है, वो हल्की पड़ जाएगी.

जब मेरा मन होगा, तब हंसूंगा/हंसूंगी: तुम्हारे कहने या दुनिया के चाहने से थोड़ी हंसी आएगी. जब मेरी मर्ज़ी होगी, मन होगा, भीतर से हंसने जैसा महसूस होगा तब हंसूगा.

कोई ज़बर्दस्ती है क्या: नहीं हंसना, तो नहीं हंसना, कोई ज़ोर-ज़बर्दस्ती है क्या कि हर बात पर मुस्कुराया जाए या हर चुटकुले पर हंसा ही जाए.

हम तो ऐसे ही हैं: आपको हम पसंद हों या न हों, पर हम तो ऐसे ही हैं. हमको नहीं आता मुस्कुराना. बात करनी हो, तो करो, वरना आप अपने रास्ते, हम अपने रास्ते.

आपको क्या तकलीफ़ है: हमारे नहीं मुस्कुराने से क्या आपका कोई नुक़सान हो रहा है? नहीं न, तो फिर?

हम किसी के ग़ुलाम नहीं: आपको जब लगेगा कि हमें मुस्कुराना चाहिए, क्या तब हम मुस्कुराएंगे? हम किसी के ग़ुलाम नहीं कि किसी के चाहने पर हंसे या मुस्कुराएं.

आपके पेट में दर्द क्यों है: हमारे कम या नहीं मुस्कुराने से दूसरों के पेट में दर्द क्यों होता है, यह बात आज तक समझ नहीं आई. अगर हमें कोई घमंडी या सिरफिरा समझता है, तो यह हमारी प्रॉब्लम है, इससे आपको क्या लेना-देना भला?

–  गीता शर्मा

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शादीशुदा ज़िंदगी में बढ़ता अकेलापन…! (Why Do People Feel Lonely In Their Marriage?)

शादी (Marriage) का मतलब (Meaning) ही होता है कंपैनियनशिप यानी एक साथी, जो सुख-दुख में साथ दे, जिसके साथ शेयरिंग हो, जो केयरिंग हो, व़क्त आने पर न स़िर्फ रोने के लिए कंधा दे, बल्कि हमारे आंसू भी पोंछे… जो हमेशा यह कोशिश करे कि ज़िंदगी का सफ़र उसके साथ हसीन लगे, रास्ते आसान हो जाएं और मुश्किलों से लड़ने का हौसला मिले… लेकिन अगर इंसान अकेला ही है, तो वो अकेले लड़ना सीख जाता है, पर किसी के साथ रहकर अकेलापन जब हो, तो वहां मुश्किलें और सवाल उठने लाज़िमी हैं.

Relationship Problems

जी हां, एक शोध से यह बात सामने आई है कि कम से कम 20% शादीशुदा लोग अपनी शादी में भी अकेलापन महसूस करते हैं. यह बेहद गंभीर बात है, क्योंकि रिश्तों में पनपता अकेलापन आपको कई मानसिक व शारीरिक समस्याएं भी दे सकता है.

क्या हैं वजहें?

–  आजकल लाइफस्टाइल बदल गई है, कपल्स वर्किंग होते हैं और उनका अधिकांश समय ऑफिस में कलीग्स के साथ ही बीतता है. ऐसे में पार्टनर के लिए समय कम होता जाता है.

–   काम का तनाव इतना बढ़ गया है कि कम्यूनिकेशन कम हो गया है.

–   घर पर भी दोनों अपने-अपने कामों में ही व्यस्त रहते हैं.

–   सोशल नेटवर्किंग साइट्स ने इस बढ़ते अकेलेपन को और हवा दी है, क्योंकि वहां हमें नए दोस्त मिलते हैं, जो ज़्यादा आकर्षित करते हैं. ऐसे में कब हम पार्टनर को इग्नोर करने लगते हैं, पता ही नहीं चलता.

–   साथ में बैठकर बातें करना, एक-दूसरे की तकलीफ़ों को समझना तो जैसे अब समय की बर्बादी लगती है.

–   बात जब हद से ज़्यादा बढ़ जाती है, तब यह एहसास होता है कि हम कितने तन्हा हैं एक रिश्ते में होते हुए भी.

–   अब तो पार्टनर्स को यह भी नहीं पता होता कि हमारा साथी इन दिनों क्या महसूस कर रहा है या किन तकलीफ़ों से गुज़र रहा है.

–  इस बढ़ते अकेलेपन का असर सेक्स लाइफ पर भी पड़ता है, साथ ही कम होते सेक्सुअल रिलेशन भी अकेलेपन को बढ़ाते हैं यानी दोनों तरह से इसे देखा जा सकता है.

–   हर व़क्त पार्टनर्स अपने फोन या लैपटॉप में ही बिज़ी रहते हैं, चाहे डिनर का समय हो या बेड पर सोने का टाइम हो. यह वो समय होता है, जो पार्टनर्स एक-दूसरे के साथ प्यार और रोमांस में बिता सकते हैं, अपनी परेशानियां, अपने सुख-दुख शेयर कर सकते हैं, लेकिन वो आजकल ऐसा न करके अपनी-अपनी दुनिया में खोए रहते हैं. बाद में एहसास होता है कि एक-दूसरे से वो कितना दूर हो चुके हैं.

क्या आपके रिश्ते में भी पनप रहा है अकेलापन?

–   कुछ लक्षण हैं, जिन पर यदि आप ग़ौर करेंगे, तो जान पाएंगे कि आपके रिश्ते में भी यह अकेलापन तो घर नहीं कर गया.

–   आप दोनों आख़िरी बार कब क़रीब आए थे?

–  अपनी दिनचर्या साथ बैठकर कब शेयर की थी?

–  कब एक-दूसरे को आई लव यू या कोई प्यारभरी बात बोली थी?

–  कब कहीं साथ यूं ही हाथों में हाथ डाले बाहर घूमने निकले थे?

–  ख़ास दिन यानी बर्थडे, एनीवर्सरी याद रहती है या भूलने लगे?

–  एक-दूसरे से अपनी ज़रूरतों के बारे में बात करते हैं या नहीं?

इन तमाम सवालों पर ग़ौर करें, तो आप स्वयं समझ जाएंगे कि आप किस दौर से गुज़र रहे हैं.

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Relationship Fights

अकेलेपन से होता है स्वास्थ्य पर असर…

–   आप डिप्रेशन का शिकार होने लगते हैं.

–   ज़्यादा अकेलापन महसूस होने पर यह अवसाद आत्महत्या तक ले जाता है.

–   नशे की लत का शिकार हो सकते हैं.

–   याद्दाश्त पर बुरा असर पड़ता है.

–   हृदय रोग हो सकते हैं.

–   व्यवहार बदलने लगता है.

–   स्ट्रोक के शिकार हो सकते हैं.

–   ब्रेन फंक्शन्स पर बुरा असर होने लगता है.

–   निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होने लगती है.

–   चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है.

–   सोशल गैदरिंग में जाना बंद करने लग जाते हैं.

कैसे दूर करें इस अकेलेपन को?

–   कम्यूनिकेट करें. किसी भी समस्या का हल बातचीत से ही निकल सकता है. आप जो इन दिनों महसूस कर रहे हैं, उसके बारे में पार्टनर को बताएं.

–   अगर व्यस्तता के चलते यह सब हो रहा है, तो आप दोनों को ही हल निकालना होगा.

–   इनिशियेटिव लेकर कुछ सरप्राइज़ेस अरेंज करें और अपने रिश्ते को फिर से ताज़ा करने की कोशिश करें.

–   मैसेजेस करें, रोमांटिक बातें करनी शुरू करें.

–   एक-दूसरे को समय दें और एक रूल बनाएं कि डिनर के समय और बेड पर कोई भी फोन पर समय नहीं बिताएगा.

–   अपनी सेक्स लाइफ रिवाइव करें. कुछ नया ट्राई करें- बेडरूम के बाहर या कोई नई पोज़ीशन वगैरह.

–   ज़रूरत पड़ने पर काउंसलर की सलाह भी ले सकते हैं.

–  यदि आप दोनों के बीच कोई और आ गया है, तो मामला अलग होगा. तब आपको किसी ठोस नतीज़े पर पहुंचना होगा.

–   अगर रिश्ता फिर से जीवित होने की संभावना नहीं दे रहा है, तो अकेलेपन से डरें नहीं, उसे कुछ क्रिएटिव करने का एक अवसर समझें.

–   अपनी हॉबीज़ पर ध्यान दें.

–  दोस्तों के साथ सोशलाइज़ करें. उनके साथ पार्टी या गेट-टुगेदर प्लान करें और एंजॉय करना शुरू करें.

–   करियर पर फोकस करना शुरू कर दें.

–   अपनी सेहत पर ध्यान दें.

–   ख़ुद से प्यार करना सीखें.

– विजयलक्ष्मी

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मुफ़्त के सलाहकारों से रहें सावधान (Stay Away From Free And Unwanted Advises)

अगर आपको शारीरिक (Physical) या मानसिक कष्ट (Mental Distress) हो या वैवाहिक जीवन की बढ़ती मुश्किलें, या फिर किसी भी तरह की अन्य समस्या (Problem) हो, तो फ़िक्र न करें, आपकी समस्या के समाधान के लिए आपको कहीं जाने की ज़रूरत नहीं, घर बैठे और राह चलते आपको आपकी समस्या के मिलेंगे सैकड़ों उपाय, वो भी मुफ़्त में. जी हां, हमारे देश में मुफ़्त के सलाहकारों की बड़ी तादाद है, आपसे भी ये यक़ीनन हर रोज़ टकराते होंगे. तो क्या आपने कभी सोचा कि लगभग कितने तरह के सलाहकार हैं हमारे आसपास और क्यों देते हैं वो इतनी सलाहें, नहीं न, तो हम बताते हैं.

Unwanted Advises

सलाहकारों की क़िस्में

इस दुनिया में हर क़िस्म के लोग होते हैं. हर फील्ड में भी हर क़िस्म के लोग पाए जाते हैं, तो भला ऐसा कैसे हो सकता है कि मुफ़्त के सलाहकारों की क़िस्में न हों. यक़ीन मानिए इन्हें आप भी जानते हैं, बस कभी ग़ौर नहीं किया.

मुफ़्त के डॉक्टर

शरीर के किसी भी हिस्से में दर्द हो, आपको बस बोलने भर की देर है, हर दूसरा आदमी ख़ुद पर आज़माया हुआ बेहतरीन नुस्ख़ा आपको बताएगा, भले ही आपके बॉडी टाइप और उसके बॉडी टाइप में कितना ही फ़र्क़ क्यूं न हो. यह तो कुछ भी नहीं, कुछ लोग तो अस्पताल में भर्ती मरीज़ को देखने कम उसकी रिपोर्ट्स और एक्स-रे देखने ज़्यादा जाते हैं. ऐसे लोगों को मेडिकल साइंस का एम भी पता नहीं होता, पर एक्स-रे की रिपोर्ट इतनी गंभीरता से देखते हैं, जैसे इनसे बड़ा कोई डॉक्टर नहीं. साथ ही डायटीशियन बनकर मरीज़ को डायट आदि के ढेरों टिप्स भी देकर आते हैं.

सावधान: सेहत बहुत ही गंभीर मामला है, बिना सही जानकारी के किसी तकलीफ़ के लिए किसी को मुफ़्त सलाह देना उसके लिए नुक़सानदायक भी हो सकता है.
– हर व्यक्ति का बॉडी टाइप अलग-अलग होता है, ज़रूरी नहीं, जो नुस्ख़े आप पर कारगर रहे हों, वही दूसरों पर भी कारगर साबित होंगे. इस बात का ध्यान रखें और न मुफ़्त के डॉक्टर बनें और न ही मुफ़्त की सलाहों पर ग़ौर करें.
– किसी भी तरह की तकलीफ़ में एक्सपर्ट डॉक्टर से संपर्क करें.

मुफ़्त के रिलेशनशिप एक्सपर्ट

शादी के बाद पति को मुट्ठी में रखना है, वरना ससुराल में तुम्हारी कोई अहमियत नहीं होगी… सास-ससुर की बहुत ज़्यादा जीहज़ूरी न करना, वरना ज़िंदभीगर उनकी ग़ुलामी करनी पड़ेगी… ननद और जेठानी से ख़ुद को आगे रखना… लड़कों को ससुरालवालों का ज़्यादा ख़्याल नहीं रखना चाहिए, वरना उनकी वैल्यू कम हो जाती है… से लेकर पति-पत्नी का रिश्ता कैसा होना चाहिए, उन्हें बच्चे कब पैदा करने चाहिए… जैसे विषयों पर अक्सर लोग सलाह देते रहते हैं. ज़रूरी नहीं कि सभी सलाहें ग़लत ही हों, पर ज़्यादातर मामलों में यह देखा गया है कि ऐसे विषयों पर मुफ़्त सलाह बांटनेवालों का निजी अनुभव कटु होता है, जिसके कारण वो ऐसी सलाहें देते हैं.

सावधान: जिस तरह हर व्यक्ति अलग होता है, उसी तरह हर घर का माहौल भी अलग होता है. ज़रूरी नहीं, जो बातें एक घर में होती हों, वो दूसरे घरों में भी हो. इसलिए किसी को भी कोई भी सलाह देने से पहले इन पहलुओं पर सोच लें.
– लोग हमेशा अपने अनुभव के आधार पर सलाह देते हैं, जो ज़रूरी नहीं कि आपके लिए सही ही हो, इसलिए किसी विश्‍वासपात्र से ही अपनी समस्या बांटें.
– पति-पत्नी का रिश्ता, बच्चे पैदा करना, न करना, कब करना, जैसे विषय बेहद निजी हैं, जिन पर दूसरों की दख़लंदाज़ी लोगों को पसंद नहीं.
– ऐसे रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स से हर कोई दूर भागता है, इसलिए अगर आपको भी मुफ़्त सलाह देने की आदत हैं, तो इससे बचें.

मुफ़्त के लवगुरू

आज का ज़माना प्यार का कम और अफेयर का ज़्यादा है. आपको अपने स्कूल, कॉलेज, ऑफिस या आस-पड़ोस में ऐसे मुफ़्त के लवगुरू बहुत मिल जाएंगे, जिनका काम ही अफेयर करनेवालों को मुफ़्त सलाह बांटना है. इन लवगुरुओं की तादाद फिल्मों और मोबाइल फोन ने कुछ ज़्यादा ही बढ़ा दी है. इनके टिप्स से कुछ लोगों को फ़ायदा भी होता है, पर फेल होनेवालों की संख्या ज़्यादा है. प्यार-मोहब्बत टिप्स से नहीं, जज़्बात से होते हैं.

सावधान: हो सकता है कि किसी के बताए गुरु मंत्रों से एक बार आप किसी का दिल जीत लें, पर आपका प्यार अगर सच्चा नहीं, तो टिक नहीं पाएगा और अगर सच्चा हो, तो उसे किसी टिप्स की ज़रूरत नहीं.
– रोमियो-मजनू बनने के चक्कर में बहुत-से यंगस्टर्स पढ़ाई-लिखाई, करियर, रिश्ते-नाते सब दांव पर लगा देते हैं, जो कहीं से भी सही नहीं.
– प्यार इंसान को एक और बेहतर बनाता है, पर अक्सर देखा गया है कि ज़्यादातर यंगस्टर्स को प्यार नहीं अफेयर करना होता है.

मुफ़्त के करियर काउंसलर्स

कहते हैं हमेें वह काम करना चाहिए, जिसमें हमारा पैशन हो, पर आजकल ज़्यादातर लोग हमें यही सलाह देते हैं कि काम वो करना चाहिए, जिसमें पैकेज अच्छा मिलता है. आपके रिश्तेदारों में चाचा, मौसा, मामा या भइया, ज़रूर ऐसे होंगे, जिन्होंने अपना करियर बनाने के लिए इतने पापड़ बेले होते हैं कि उनका अनुभव अच्छा-ख़ासा होता है. अक्सर देखा गया है कि मुफ़्त की सलाह देनेवाले ये करियर काउंसलर्स ज़िंदगी में ख़ुद कोई ख़ास मुकाम हासिल नहीं कर पाते, पर दूसरों से बड़ी अपेक्षाएं रखते हैं. किस स्टूडेंट को कौन-सा कोर्स करना चाहिए, यह निर्णय लेने का हक़ ये अपने पास रखना पसंद करते हैं.

सावधान: करियर से हमारी रोज़ी-रोटी ही नहीं, हमारा पैशन भी जुड़ा होता है.
– करियर का चुनाव किसी के भी पसंद और पैशन के अनुसार होना चाहिए.
– अच्छे पैकेज के लालच में भले ही आप किसी करियर का चुनाव कर लें, पर एक समय के बाद वही काम आपके तनाव का कारण बनने लगता है.
– एक करियर के फेलियर पर दूसरा करियर शुरू कर पाना इतना आसान नहीं होता, इसलिए कोई भी करियर चुनने में किसी की सलाह के बजाय अपने दिल की सुनें.

मुफ़्त के फिटनेस एक्सपर्ट्स

आज की भागदौड़ और तनाव भरी ज़िंदगी में हर कोई हेल्थ और फिटनेस से जूझ रहा है. ऐसे में बहुत-से लोग मुफ़्त के फिटनेस एक्सपर्ट्स बने फिरते हैं. रोज़ाना पुशअप किया करो…क्रंचेज़ मारा करो… कार्डियो किया करो… 2-4 योगासन किया करो… सलाह मिली और आप लग गए फिटनेस बनाने और दो दिन बाद पता चला शरीर के सारे पुर्ज़े तकलीफ़ देने लगे. मुफ़्त के फिटनेस एक्सपर्ट की सलाह ने आपको डॉक्टर के पास पहुंचा दिया.

सावधान: एक्सरसाइज़ और योग ऐसे विषय हैं, जो हमेशा सही एक्सपर्ट्स की निगरानी में किए जाने चाहिए. इसलिए बिना सोच-समझे किसी की भी फिटनेस सलाह न मान लें.
– फिटनेस एक्सपर्ट्स व योगा टीचर्स हर किसी के बॉडी टाइप और हेल्थ कंडीशन्स को देखकर उन्हें एक्सरसाइज़ और योग की सलाह देते हैं.
– योग व एक्सरसाइज़ के डायट व लाइफस्टाइल से जुड़े अपने कुछ नियम होते हैं, जिनका पालन करना बहुत ज़रूरी होता है, जो आपके मुफ़्त के फिटनेस एक्सपर्ट को कभी पता नहीं होंगे.
– एकसरसाइज़ या योग के लिए किस समय करें, उससे पहले या उसके बाद कितने अंतराल पर खाएं-पीएं आदि का बहुत ध्यान रखना पड़ता है.
– हेल्थ और फिटनेस के मामले में कभी भी बिना सोचे-समझे किसी की सलाह न मानें. आप अपनी सेहत के प्रति जागरूक हैं, तो सही एक्सपर्ट्स से मिलिए, वरना मुफ़्त में तो लेने के देन पड़ सकते हैं.

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Unwanted Advises

मुफ़्त के फाइनेंशियल एडवाइज़र्स

कम समय में दुगुना फ़ायदा मिलेगा, पैसे जमा कर दो… लोन लेकर फलां जगह इन्वेस्ट कर दो, फ़ायदे में रहोगे… ऐसी स्कीम दोबारा नहीं आएगी, कहीं से भी जुगाड़ करके पैसे भर दो… शेयर मार्केट अच्छा चल रहा है, इन्वेस्ट करो… मेरे दोस्त के दोस्त ने फलां स्कीम ली थी, तुम भी ट्राई करो… रिस्क लोगे, तभी तो फ़ायदा मिलेगा… जैसी तमाम सलाह देनेवाले हमारे मुफ़्त के फाइनेंशियल एडवाइज़र्स होते हैं, जो कहीं दूर से नहीं बल्कि हमारे पड़ोस या रिश्तेदारों में से एक होते हैं. अगर आपका कोई रिश्तेदार इंश्योरेंस एजेंट है, तो ज़रूरत हो न हो, बेवजह के इन्वेस्टमेंट और प्लान आपकी झोली में डालकर वह अपना टारगेट ज़रूर पूरा करेंगे.
सावधान: फाइनेंशियल एडवाइज़र्स हमेशा यही सलाह देते हैं कि कोई भी इन्वेस्टमेंट करने से पहले यह देखें कि वह आपके लिए कितना ज़रूरी है, उसके अच्छे रिर्ट्न्स कब तक मिलेंगे, इन्कम टैक्स रिटर्न में कितना फ़ायदेमंद साबित होगा आदि.
– शेयर मार्केट और म्यूच्युअल फंड में निवेश रिस्की होता है, बिना सही जानकारी के आप अपने पैसे डूबो देंगे.
– लोन लेकर इन्वेसट करनेवाले अक्सर दोहरी मार खाते हैं. एक तरफ़ बिना सोचे-समझे इन्वेस्टमेंट में नुक़सान तो दूसरी तरफ़ लोन भरने का बोझ आपकी फाइनेंशियल स्थिति को डगमगा सकता है.
– कोई फलां बिज़नेस में अच्छे पैसे कमा रहा है, तो ज़रूरी नहीं, आप भी कमा लें. बिज़नेस एक हुनर है, जो हर किसी में नहीं होता.
– कभी भी अपने मुफ़्त एडवाइज़र की बातों में आकर या किसी की देखा-देखी फाइनेंस के ़फैसले न लें.
– कम समय में ज़्यादा पैसे कमानेवाले स्कीम्स के अक्सर भंडाफोड़ होते हैं, फिर भी लोग ऐसी लुभावनी स्कीम्स में पैसे लगाने से ख़ुद को रोक नहीं पाते.
– अगर लोगों को समझ में आ जाए कि कोई बिना कुछ किए उन्हें इतने सारे पैसे भला क्यों और कहां से लाकर देगा, तो ऐसी घटनाएं ही न हों.
– जैसे अपवाद हर जगह होते हैं, वैसे ही हो सकता है, आपके मुफ़्त फाइनेंशियल एडवाइज़र की मुफ़्त सलाह से आपको फ़ायदा भी हो जाए. पर कोई भी काम हमेशा सोच-समझकर करें.

क्यों है सलाहकारों की इतनी भरमार?

– आदत से मजबूर

अब सवाल उठता है कि आख़िर हमारे देश में लोगों को मुफ़्त सलाह देेने की इतनी अच्छी आदत क्यों है? और जो जवाब सबसे पहले सूझता है, वो है आदत. कुछ लोगों की आदत ही होती है, मुफ़्त में सलाह देने की. आप सलाह मांगो न मांगो, वो आपको ज़रूर देकर जाएंगे.

– ज्ञान बघारने का शौक़

यह भी काफ़ी देखा जाता है कि लोगों को अपने ज्ञान का प्रदर्शन करने का बहुत शौक़ होता है. आप उनसे किसी विषय पर बात छेड़कर तो देखिए, आपको ऐसे-ऐसे लफ़्ज़ सुनने को मिलेंगे, जो शायद एक्सपर्ट्स भी इस्तेमाल न करते हों. अपने ज्ञान प्रदर्शन के लिए ही ज़्यादातर लोग सलाह बांटते रहते हैं.

– सामाजिक दायित्व

मुफ़्त के सलाहकारों की बढ़ती तादात के ज़िम्मेदार कहीं न कहीं हम भी हैं. हम भी तो अपना रोना किसी के भी सामने लेकर बैठ जाते हैं, ऐसे में हमें उस दुख से उभारना वह अपना सामाजिक दायित्व समझते हैं और भरसक प्रयास करते हैं, आपको उस दुख से उबारने का.

– ख़ुद को बेस्ट साबित करने का मौक़ा

सबके सामने ख़ुद को बेस्ट साबित करने के लिए कुछ लोग बेवजह दूसरों से उनके बारे में पूछ-पूछकर सलाह देते रहते हैं. यदि किसी विषय पर चर्चा हो रही हो, तो इनकी सलाह का पिटारा जल्दी बंद नहीं होता.

मुफ़्त की सलाह के साइड इफेक्ट्स
भले ही हमें ऐसा लगता हो कि मुफ़्त की चीज़ हमेशा फ़ायदेमंद होती है, पर ऐसा है नहीं. इसके भी साइड इफेक्ट्स हैं और कुछ तो बहुत ही गंभीर होते हैं.

ज़िंदगीभर की लत

– अंबिकाजी की उम्र क़रीब 45 साल है. उन्हें मसूड़ों और दांतों में दर्द की शिकायत होने लगी, तो उन्होंने डेंटिस्ट को दिखाने की बजाय अपनी सहेलियों से इस बात का ज़िक्र किया. जैसा कि अपेक्षित था, सबने अपने-अपने तजुर्बे के मुताबिक उन्हें ढेरों मुफ़्त की सलाहें दे दीं, पर उसमें से एक सलाह उन्हें जंच गई, जो थी, कच्ची तंबाकू को थोड़ी देर के लिए दांतों के नीचे दबाकर रखने की. अंबिकाजी ने इसे आजमाना शुरू किया और उन्हें दर्द में राहत महसूस हुई और फिर क्या था,
धीरे-धीरे उन्हें इसकी लत लग गई. यह समझने के बावजूद कि तंबाकू से कैंसर होता है, वो इस लत से ख़ुद को आज़ाद नहीं कर पा रहीं.

– अनीता सिंह

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लेडी लक के बहाने महिलाओं को निशाना बनाना कितना सही? (Targeting Women In Name Of Lady Luck)

Targeting Women, In Name Of Lady Luck
मैं ख़्वाब नहीं, हक़ीक़त हूं… मैं ख़्वाहिश नहीं, एक मुकम्मल जहां हूं… किसी की बेटी, बहन या अर्द्धांगिनी बनने से पहले मैं अपने आप में संपूर्ण आसमान हूं, क्योंकि मैं एक व्यक्ति हूं, व्यक्तित्व हूं और मेरा भी अस्तित्व है… मुझमें संवेदनाएं हैं, भावनाएं हैं, जो यह साबित करती हैं कि मैं भी इंसान हूं… 

Targeting Women In Name Of Lady Luck

जी हां, एक स्त्री को हम पहले स्त्री और बाद में इंसान के रूप में देखते हैं या फिर यह भी हो सकता है कि हम उसे स़िर्फ और स़िर्फ एक स्त्री ही समझते हैं… उसके अलग अस्तित्व को, उसके अलग व्यक्तित्व को शायद ही हम देख-समझ पाते हैं. यही वजह है कि उसे हम एक शगुन समझने लगते हैं. कभी उसे अपना लकी चार्म बना लेते हैं, तो कभी उसे शापित घोषित करके अपनी असफलताओं को उस पर थोपने का प्रयास करते हैं…

…बहू के क़दम कितने शुभ हैं, घर में आते ही बेटे की तऱक्क़ी हो गई… बेटी नहीं, लक्ष्मी हुई है, इसके पैदा होते ही बिज़नेस कितना तेज़ी से बढ़ने लगा है… अक्सर इस तरह के जुमले हम अपने समाज में सुनते भी हैं और ख़ुद कहते भी हैं… ठीक इसके विपरीत जब कभी कोई दुखद घटना या दुर्घटना हो जाती है, तो भी हम कुछ इस तरह की बातें कहते-सुनते हैं… इस लड़की के क़दम ही शुभ नहीं हैं, पैदा होते ही यह सब हो गया या फिर ससुराल में नई बहू के आने पर यदि कोई दुर्घटना हो जाती है, तब भी इसी तरह की बातें कहने-सुनने को मिलती हैं. कुल मिलाकर बात यही है कि हर घटना को किसी स्त्री के शुभ-अशुभ क़दमों से जोड़कर देखा जाता है और आज हम इसी की चर्चा करेंगे कि यह कहां तक जायज़ है?

– अगर किसी सेलिब्रिटी की लाइफ में कोई लड़की आती है, तो उसकी हर कामयाबी या नाकामयाबी को उस लड़की से जोड़कर देखा जाने लगता है. ऐसे कई उदाहरण हमने देखे हैं, फिर चाहे वो क्रिकेटर हो या कोई एक्टर, उनकी परफॉर्मेंस को हम उस लड़की को पैमाना बनाकर जज करने लगते हैं.

– यहां तक कि हम ख़ुद भी बहुत ही सूक्ष्म स्तर पर यह सब करते हैं, चाहे जान-बूझकर न करें,  लेकिन यह हमारी मानसिकता बन चुकी है.  श्र हम ख़ुद भी बहुत गर्व महसूस करते हैं, जब हमारा कोई अपना हमारे लिए यह कहे कि तुम मेरे लिए बहुत लकी हो…

– लेडी लक की अक्सर बहुत बातें की जाती हैं और इसे हम सकारात्मक तरी़के से ही लेते हैं, लेकिन ग़ौर करनेवाली बात यह है कि हर सुखद व दुखद घटना को किसी स्त्री के लकी या अनलकी होने से जोड़ना सही है?

– कर्म और भाग्य सबके अपने ही होते हैं, किसी दूसरे को अपने कर्मों या अपने भाग्य के लिए ज़िम्मेदार बताना कितना सही है?

– 42 वर्षीया सुनीता शर्मा (बदला हुआ नाम) ने इस संदर्भ में अपने अनुभव शेयर किए, “मेरी जब शादी हुई थी, तो मेरे पति और ससुरजी का बिज़नेस काफ़ी आगे बढ़ने लगा था. मुझे याद है कि हर बात पर मेरे पति और यहां तक कि मेरी सास भी कहती थीं कि सुनीता इस घर के लिए बहुत लकी है. मेरे पति की जब भी कोई बड़ी बिज़नेस डील फाइनल होती थी, तो घर आकर मुझे ही उसका श्रेय देते थे कि तुम जब से ज़िंदगी में आई हो, सब कुछ अच्छा हो रहा है. कितनी लकी हो तुम मेरे लिए… उस व़क्त मैं ख़ुद को बहुत ही ख़ुशनसीब समझती थी कि इतना प्यार करनेवाला पति और ससुराल मिला है. फिर कुछ सालों बाद मुझे बेटा हुआ, सब कुछ पहले जैसा ही था, बिज़नेस के उतार-चढ़ाव भी वैसे ही थे, कभी अच्छा, तो कभी कम अच्छा होता रहता था. फिर बेटे के जन्म के 3 साल बाद मुझे बेटी हुई. हम सब बहुत ख़ुश थे कि फैमिली कंप्लीट हो गई.

मेरे पति भी अक्सर कहते कि तुम्हारी ही तरह देखना, हमारी बेटी भी हमारे लिए बहुत लकी होगी. मैं ख़ुश हो जाती थी उनकी बातें सुनकर, लेकिन बिटिया के जन्म के कुछ समय बाद ही उनको बिज़नेस में नुक़सान हुआ, तो मेरी सास ने कहना शुरू कर दिया कि जब से गुड़िया का जन्म हुआ है, बिज़नेस आगे बढ़ ही नहीं रहा… मेरे पति भी बीच-बीच में कुछ ऐसी ही बातें करते, तब जाकर मुझे यह महसूस हुआ कि हम कितनी आसानी से किसी लड़की को अपने लिए शुभ-अशुभ घोषित कर देते हैं और यहां तक कि मैं ख़ुद को भी इसके लिए ज़िम्मेदार मानती हूं. जब पहली बार मुझे अपने लिए यह सुनने को मिला था, उसी व़क्त मुझे टोकना चाहिए था, ताकि इस तरह की सोच को पनपने से रोका जा सके.

मैंने अपने घरवालों को प्यार से समझाया, उनसे बात की, उन्हें महसूस करवाया कि इस तरह किसी भी लड़की को लकी या अनलकी कहना ग़लत है. वो लोग समझदार थे, सो समझ गए. कुछ समय बाद हमारा बिज़नेस फिर चल पड़ा, तो यह तो ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव लगे रहते हैं, इसके लिए किसी की बेटी-बहू को ज़िम्मेदार ठहराना बहुत ही ग़लत है. समाज को अपनी धारणा बदलनी चाहिए.”

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Targeting Women In Name Of Lady Luck

– भले ही हमें यह बात छोटी-सी या ग़ैरज़रूरी लगे, लेकिन अब यह ज़रूरी हो गया है कि हम इस तरह की मानसिकता से बाहर निकलें कि जब कोई क्रिकेटर यदि आउट ऑफ फॉर्म हो, तो उसके लिए पूरा समाज उसकी सेलिब्रिटी गर्लफ्रेंड को दोषी ठहराने लगे. उस पर तरह-तरह के ताने-तंज कसे जाने लगें या उस पर हल्की बातें, अपशब्द, सस्ते जोक्स बनाकर सोशल मीडिया पर फैलाने लगें.

– हम ख़ुद भी इस कुचक्र का हिस्सा बन जाते हैं और इस तरह की बातें सर्कुलेट करते हैं. न्यूज़ में अपनी स्टोरी की टीआरपी बढ़ाने के लिए चटखारे ले-लेकर लोगों के रिएक्शन्स दिखाते हैं, लेकिन इन सबके बीच हम भूल जाते हैं कि जिसके लिए यह सब कहा जा रहा है, उसके मनोबल पर इसका क्या असर होता होगा…?

– किसी को भी किसी के लिए शुभ-अशुभ कहनेवाले भला हम कौन होते हैं? और क्यों किसी लेडी लक के बहाने हर बार एक स्त्री को निशाना बनाया जाता है?

– दरअसल, इन सबके पीछे भी हमारी वही मानसिकता है, जिसमें पुरुषों के अहं को तुष्ट करने की परंपरा चली आ रही है.

– हम भले ही ऊपरी तौर पर इसे अंधविश्‍वास कहें, लेकिन कहीं न कहीं यह हमारी छोटी मानसिकता को ही दर्शाता है.

– इस तरह के अंधविश्‍वास किस तरह से रिश्तों व समाज के लिए घातक सिद्ध हो सकते हैं यह समझना ज़रूरी है.

– किसी स्त्री के अस्तित्व पर ही आप प्रश्‍नचिह्न लगा देते हैं और फिर आप इसी सोच के साथ जीने भी लगते हैं. हर घटना को उसके साथ जोड़कर देखने लगते हैं… क्या यह जायज़ है?

– क्या कभी ऐसा देखा या सुना गया है कि किसी पुरुष को इस तरह से लकी-अनलकी के पैमाने पर तोला गया हो?

– चाहे आम ज़िंदगी हो या फिर सेलिब्रिटीज़, किसी भी पुरुष को इन सबसे नहीं गुज़रना पड़ता, आख़िर क्यों?

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Targeting Women In Name Of Lady Luck

– घूम-फिरकर हम फिर वहीं आ रहे हैं कि लेडी लक के बहाने क्यों महिलाओं को ही निशाना बनाया जाता है? और यह कब तक चलता रहेगा?

– सवाल कई हैं, जवाब एक ही- जब तक हमारे समाज की सोच नहीं बदलेगी और इस सोच को बदलने में अब भी सदियां लगेंगी. एक पैमाना ऐसी भी न जाने कितनी घटनाएं आज भी समय-समय पर प्रकाश में आती हैं, जहां किसी महिला को डायन या अपशगुनि घोषित करके प्रताड़ित या समाज से बहिष्कृत कर दिया जाता है. कभी किसी पेड़ से बांधकर, कभी मुंह काला करके, तो कभी निर्वस्त्र करके गांवभर में घुमाया जाता है… हालांकि पहले के मुकाबले अब ऐसी घटनाएं कम ज़रूर हो गई हैं, लेकिन पूरी तरह से बंद नहीं हुई हैं. ये और इस तरह की तमाम घटनाएं महिलाओं के प्रति हमारी उसी सोच को उजागर करती हैं, जहां उन्हें शुभ-अशुभ के तराज़ू में तोला जाता है.

– गीता शर्मा

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जयललिता के निधन से दुखी लोग, 77 ने दी जान! ( AIADMK: 77 people die in grief of jayalalitha’s demise)

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अन्नाद्रमुक पार्टी का कहना है कि जयललिता (Jayalalitha) की बीमारी व उनके निधन के सदमे में अब तक 77 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. हालांकि केंद्र की एजेंसी की मानें, तो यह आंकड़ा 30 के आसपास है. दरअसल, जयललिता को लोग अपना भगवान मानते थे और उनकी पूजा की जाती थी. यही वजह है कि वो इतनी पॉप्युलर थीं कि लोग अब उनके जाने का ग़म बर्दाश्त नहीं कर पा रहे.
राज्य सरकार ने जान गंवा चुके लोगों के परिवारों के लिए 3 लाख रुपए के मुआवज़े का भी ऐलान किया है. इसके अलावा कुछ लोगों ने ख़ुद को आग लगाने व अपनी उंगली काटने की भी कोशिश की थी, जिन्हें 50 हज़ार का मुआवज़ा दिया जाएगा.