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अच्छे करियर की तलाश में अक्सर स्टूडेंट्स इंस्टीट्यूट का चुनाव करते वक़्त उसकी चकाचौंध में ये भूल जाते हैं कि उन्हें आगे करना क्या है? कौन-सी जगह उनके भविष्य निर्माण के लिए सही साबित होगी? कैसे बचें इस तरह के प्रलोभन से और कैसे अपने करियर को सही दिशा दें? जानने के लिए हमने बात की करियर काउंसलर फ़रज़ाद दमानिया से.

अपनी क्षमता को पहचानें
पढ़ाई करते समय अक्सर बच्चों के दिमाग़ में ये बैठ जाता है कि वे बहुत ज़्यादा समझदार और क़ाबिल हैं. उनकी क्षमता बहुत कुछ करने और पाने की है. ऐसे में वे ख़ुद को ग़लत आंकने की भूल कर बैठते हैं और अपनी क्षमता के विपरीत ऐसी जगह दाखिला ले लेते हैं, जहां उन्हें नहीं होना चाहिए. अतः किसी भी तरह के प्रलोभन में पड़ने की बजाय अपनी क्षमता के अनुरूप ही इंस्टीट्यूट का चुनाव करें.

अच्छा कॉलेज या अच्छा कोर्स
सबसे पहले अपने लक्ष्य को जानें कि आपको क्या करना है और उसके लिए सही जगह कौन-सी है? फिर वहीं एडमिशन लेने की सोचें. किसी भी संस्थान में दाखिला लेने से पहले वहां के फैकल्टी मेंबर्स के बारे में सही जानकारी लें. आप जो कोर्स करना चाहते हैं, क्या वो उस संस्थान में दूसरे संस्थान की अपेक्षा बेहतर है? साथ ही पढ़ाई के मामले में उस संस्थान के बारे में पूछताछ करना न भूलें.

पैरेंट्स की सलाह ज़रूर लें
अक्सर 10वीं/12वीं के बाद बच्चे अपनी आगे की पढ़ाई के लिए पैरेंट्स से सलाह लेना ज़रूरी नहीं समझते. उन्हें लगता है कि आज के मार्केट के हिसाब से उनके माता-पिता उन्हें सलाह देने में सक्षम नहीं हैं, जबकि बच्चों की क्षमता को पैरेंट्स अच्छी तरह समझते हैं. उन्हें पता होता है कि उनका बच्चा क्या कर सकता है? ऐसे में आगे की पढ़ाई के लिए अपने पैरेंट्स से सलाह लेने में कभी पीछे न हटें.

अपनी रुचि के अनुसार चुनें विषय
आमतौर पर 12वीं के बाद ही करियर की दिशा निर्धारित होती है. ऐसे में हड़बड़ाहट या फिर किसी तरह के दबाव में आकर विषय का चुनाव न करें. स्वेच्छा से अपनी रुचि के अनुसार आगे की पढ़ाई के लिए विषयों का चुनाव करें. उदाहरण के तौर पर अगर आप साइंस पसंद नहीं करते, तो उस तरह की विधा में आगे जाने के बारे में न सोचें.

प्रोफेशनल काउंसलर की सलाह लें
अगर आप सही निर्णय लेने में असमर्थ हैं, तो जल्दबाज़ी में किसी भी संस्थान में दाख़िला न लें. इस समय आप किसी अच्छे काउंसलर की मदद ले सकते हैं. काउंसलर को अपने बारे में पूरी तरह सही जानकारी दें और सभी इंस्टीट्यूट्स के बारे में भी बताएं. इससे आपकी परेशानी सुलझाने में काउंसलर को मदद मिलेगी.

दोस्त की देखादेखी न करें
करियर काउंसलर फ़रज़ाद दमानिया कहते हैं, ङ्गङ्घकरियर और दोस्ती दोनों को अलग रखें. दोस्तों से दोस्ती वहीं तक रखें जहां तक ज़रूरत है. अब तक आप हर चीज़ अपने दोस्त की तरह लेते थे, लेकिन अब बात आपके करियर की है. जितना सही निर्णय लेंगे भविष्य में आपको उतना ही फ़ायदा होगा. बिना किसी झिझक और शर्म के अपने आगे के करियर का चुनाव करें. कभी भी किसी दोस्त के अनुसार अपना लक्ष्य निर्धारित न करें. इससे भविष्य में आपको हर पल मुंह की खानी पड़ेगी.फफ

इंस्टीट्यूट के बाहरी दिखावे में न आएं
उम्र के इस पड़ाव पर अर्जुन की तरह स़िर्फ अपने लक्ष्य पर ध्यान दें. आपको क्या करना है और कहां से करना है? इसका आभास आपको होना चाहिए. आज सभी इंस्टीट्यूट स्टूडेंट्स को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए तरह-तरह के प्रलोभन देते हैं. दूसरे संगठन की अपेक्षा ज़्यादा से ज़्यादा स्टूडेंट्स की भर्ती को लेकर वो कई बार ऐसे झूठे वादे और दिखावे करते हैं, जिनका पता आपको पढ़ाई के एक या दो साल बाद लगता है. ऐसे में आप पूरी तरह से उनकी जाल में फंस जाते हैं और आपके पास पछतावे के सिवाय और कुछ नहीं रहता. अतः करियर में आगे बढ़ने के लिए ऐसे दिखावे में न पड़ें.

प्लेसमेंट के चक्कर में कभी न पड़ें
अगर आप क़ाबिल हैं तो आपको नौकरी की चिंता कैसी? अगर आप जानते हैं कि आपकी क्षमता कम है, तो फिर प्लेसमेंट के चक्कर में क्यों पड़ते हैं? आज आपने ज़्यादा पैसे देकर प्लेसमेंट के चक्कर में दाख़िला तो ले लिया, लेकिन क्या कभी सोचा है कि जब बाहरी कंपनियां एक क़ाबिल और सक्षम कर्मचारी की ख़ोज में कैंपस सलेक्शन करने आएंगी, तो आपका चुनाव कर पाएंगी? करियर के इस पड़ाव पर ख़ुद को इस भुलावे में न रखें. किसी भी संगठन के प्लेसमेंट ऑफर में पड़कर वहां दाखिला कतई न लें.

ये भी जानें:

  •  उस संगठन के बारे में अच्छी तरह से छानबीन करें.
  • किसी पुराने बैच के स्टूडेंट्स से संपर्क करें और पढ़ाई के बारे में जानने की कोशिश करें.
  •  मार्केट में उस संस्थान की क्या एहमियत है उसको भी जानने की कोशिश करें.
  •  प्लेसमेंट के झांसे में न आएं.
  •  कभी भी अपनी क्षमता को अनदेखा न करें.
  •  संस्था के फैकल्टी मेंबर्स के बारे में पहले से ही जानें.
  •  यूजीसी के तहत वो संस्था रजिस्टर्ड है या नहीं, ये भी जानें.
  •  संस्था के पुराने बच्चे कहां कार्यरत हैं, ये भी जानने की कोशिश करें.
  •  गेस्ट फैकल्टी मेंबर्स की भी जानकारी रखें.
  •  स्टडी आवर्स और छुट्टियों की जानकारी लें.

– श्वेता सिंह