pollution

जैसे-जैसे हम तऱक्क़ी करते जा रहे हैं, वैसे-वैसे उसकी क़ीमत भी चुका रहे हैं. औद्योगिक विकास हो या फिर तकनीकी, हमने हर विकास की क़ीमत चुकाई है, क्योंकि कहीं न कहीं हमने अपने पर्यावरण के साथ नाइंसाफ़ी की है. यही वजह है कि दिन-ब-दिन प्रदूषण बढ़ता जा रहा है और हम बीमारियों की चपेट में अधिक आने लगे हैं. पानी से लेकर हवा तक- सभी कुछ दूषित होता जा रहा है और इसी कड़ी में इन दिनों बढ़ते एयर पॉल्यूशन ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है, क्योंकि प्रदूषण का स्तर इतना अधिक हो जाता है कि जान के ख़तरे से भी इंकार नहीं किया जा सकता.

क्या कारण है बढ़ते वायु प्रदूषण का?
यदि संक्षेप में समझें, तो गाड़ियों की धूल-धुआं, फैक्टरीज़ के गैसेस, डस्ट, पोलन, आग, पराली वगैरह से वायु प्रदूषण होता है.

वायु प्रदूषण के साइड इफेक्ट्स…
सिरदर्द, मतली, चक्कर आना, हृदय रोग, अस्थमा, श्‍वास संबंधी अन्य रोग, लंग कैंसर आदि. इसके अलावा किडनी, लिवर, नर्वस सिस्टम, मस्तिष्क व अन्य अंगों पर भी वो प्रभाव डाल सकता है.

कैसे हो बचाव?

  • प्राइवेट गाड़ियों की बजाय पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अधिक इस्तेमाल करें.
  • कचरा या अन्य वेस्ट प्रोडक्ट्स को जलाने से बचें.
  • अपनी गाड़ियों की जांच करवाकर उन्हें अच्छी कंडीशन में रखें.
  • पर्यावरण के लिए सुरक्षित साधनों का अधिक प्रयोग करें.
  • वॉटर बेस्ड पेंट्स का इस्तेमाल करें.
  • जिन-जिन चीज़ों को रिसाइकिल कर सकें, करें.
  • जिन लोगों को अस्थमा व सांस संबंधी परेशानी हो, वे प्रदूषण अधिक होने पर बाहर कम निकलें या फिर मास्क का प्रयोग करें.
  • बाहर ही नहीं, घर के भीतर के प्रदूषण को भी कम करें.
  • सिगरेट व स्टोव के धुएं से बचें.
  • कॉस्मेटिक्स, परफ्यूम्स, रूम फ्रेशनर्स, हेयर स्प्रे, पेंट्स आदि की वजह से भी अस्थमा के मरीज़ों को समस्या हो सकती है.
Health Benefits Of Air Purifiers

एयर पोल्यूषण से बचने का बेहतरीन उपाय है एयर प्यूरिफायर…

  • यह अस्थमा अटैक्स की संभावना को कम करता है, क्योंकि यह इंडोर यानी घर के भीतर के प्रदूषण को कम करके हवा को शुद्ध करता है.
  • यह घर में कार्बनडाइऑक्साइड के स्तर को कम करके शुद्ध हवा यानी ऑक्सीजन प्रदान करता है, जिससे आप हेल्दी रहते हो, क्योंकि कार्बनडाइऑक्साइड से आपको सिरदर्द, चक्कर, मतली, कमज़ोरी, बेहोशी, ब्लड प्रेशर, लंग्स की बीमारियां, पसीना, सांस लेने में द़िक्क़त व यहां तक की मृत्यु तक हो सकती है. ऐसे में एयर प्यूरिफायर आपकी सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं.
  • एलर्जिक रिएक्शन्स को कम करता है, क्योंकि यह आपके पेट्स के शरीर की दुर्गंध, अन्य धूल व कणों को कम करता है.
  • एयर प्यूरिफायर तंबाकू और सिगरेट की धुएं से बचाव करके आपके फेफड़ों को बीमारी से बचाता है. तंबाकू के धुएं से फेफड़ों की गंभीर बीमारियों के साथ-साथ हृदय रोग भी हो सकते हैं. इसके अलावा कान में इंफेक्शन, अस्थमा, निमोनिया व ब्रॉन्काइटिस जैसे रोग भी सिगरेट व तंबाकू के धुएं से हो सकते हैं. सेकंड हैंड स्मोक भी उतना ही ख़तरनाक होता है, ख़ासतौर से बच्चों के लिए, क्योंकि उनके फेफड़े अभी विकास की प्रक्रिया में होते हैं और उनकी श्‍वास गति व्यस्कों के मुकाबले तेज़ होती है, जिससे वो इसकी चपेट में जल्दी आते हैं. एयर प्यूरिफायर हेपा फिल्टर्स व एक्टिवेटेड कार्बन के द्वारा इस तरह के धुएं के प्रभाव को ख़त्म करता है.
  • ये हवा में मौजूद ज़हरीले व नुक़सान पहुंचानेवाले कणों व तत्वों को भी शुद्ध करता है, जिससे मेसोथेलियोमा, जो कि एक प्रकार का कैंसर है, उसके होने की संभावनाएं कम हो जाती हैं.
  • यह रेडॉन गैस को ख़त्म करता है, जो कि लंग कैंसर पैदा कर सकती है.
  • यह ल्यूकेमिया व लिम्फोमा जैसी घातक बीमारियों के लिए ज़िम्मेदार कंपाउंड्स को भी ख़त्म करके आपको सुरक्षित रखने में मदद करता है.
  • यह बच्चों और बुज़ुर्गों को सांस की बीमारियों से बचाने में काफ़ी मदद करता है.
  • यह मच्छर व अन्य बीमारी पैदा करनेवाले कीटों से आपका बचाव करता है, जिससे मलेरिया जैसे रोग नहीं हो पाते.
  • यह वायु की शुद्धता बढ़ाकर आपके मस्तिष्क को शांत व हेल्दी रखता है, जिससे तनाव व डिप्रेशन आपको कम घेरते हैं और आपको अच्छी नींद लेने में भी मदद करता है.
  • स़िर्फ घर ही नहीं, यह हेल्थ क्लीनिक्स व अस्पतालों में भी शुद्ध वायु प्रदान करके आपको हेल्दी माहौल देता है.
    कैसे करें सही एयर प्यूरिफायर का सिलेक्शन?
  • आपको बाज़ार में इनके कई प्रकार मिल जाएंगे, जिनमें अलग-अलग क्षमता, शेप, साइज़ व कलर्स होंगे.
  • बेहतर होगा आप अपनी ज़रूरत को समझें व कमरे या घर के आकार को भी ध्यान में रखें. आपके प्यूरिफायर में आपके कमरे को शुद्ध करने की क्षमता होनी चाहिए, वरना पता चला कि वह कमरे के आकार के हिसाब से छोटा या कम क्षमतावाला निकला, तो कोई फ़ायदा नहीं.
  • आप यह भी पता करें कि क्या यह स़िर्फ बदबू को ही हटाता है या फिर कई तरह के बीमारी पैदा करनेवाले तत्वों का भी नाश करता है.
  • नॉइस कंट्रोल का भी ध्यान रखें और साथ ही बजट का भी.
  • सबसे अच्छा प्यूरिफायर वही होगा जिसमें हेपा फिल्टर्स हों, क्योंकि यह प्रदूषण पैदा करनेवाले तत्वों को लगभग शत-प्रतिशत ख़त्म कर सकता है और आपको पूरी तरह से शुद्ध हवा प्रदान करता है.
  • पोर्टेबल व इस्तेमाल में आसान हो यानी यूज़र फ्रेंडली होना ज़रूरी है. बाकी आप ख़ुद रिसर्च करके अच्छी तरह से देखभाल कर ही ख़रीदें, तो बेहतर परिणाम मिलेंगे.

दिल्ली में प्रदूषण (Delhi Pollution)  इतना बढ़ गया है कि लोग अब इसकी वजह से बीमार होने लगे हैं. आम इंसान के साथ सेलिब्रिटीज़ पर भी इसका असर पड़ रहा है. दिल्ली में प्रदूषण की वजह से स्मॉग (Smog) इतना बढ़ गया है कि 10 कदम आगे तक भी कुछ नहीं दिख रहा. जहां धुंध की वजह से कई एक्सीडेंट्स हो रहे हैं, तो वहीं दिल्ली की ज़हरीली हवा ने लोगों का सांस लेना भी मुश्किल कर रखा है.

Delhi Pollution smog

वरुण ने एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा, यह समय दोष देने का नहीं, बल्कि बदलाव करने का है. मैं दिल्ली से बेहद प्यार करता हूं और दिल्ली का ऐसा हाल देखकर दिल टूट जाता है. छोटे-छोटे स्टेप्स लेकर हम इससे बाहर आ सकते हैं. पॉलिटिक्स को साइड में रखकर आइए साथ मिलकर सबको दिखाते हैं कि दिल्ली कितनी ख़ूबसूरत है.

वरुण ने इस वीडियो के अलावा एक सेल्फी भी शेयर की थी, जिसमें उन्होंने लिखा, ” ‘मैंने यह सेल्फी इसलिए क्लिक की है, ताकि मैं आप सबको दिखा सकूं कि स्मॉग कैसा दिखता है.” साथ ही वरुण ने लिखा कि एक-दूसरे या सरकार पर इल्ज़ाम लगाने से अच्छा है हम ख़ुद को बदलें. इट्स टाइम वी गो ग्रीन.

परिणीति चोपड़ा ने भी चेहरे पर मास्क लगाकर एक सेल्फी शेयर की है, जिसमें उन्होंने लिखा, “दिल्ली में दो दिन शूट करने के बाद मेरे चेस्ट, सिर और गले में दर्द हो रहा है. मुझे यक़ीन नहीं होता कि अब बात हाथ से इतनी निकल चुकी है कि इंसानों को सांस लेने के लिए हवा भी नहीं है. बच्चों और बूढ़ों का क्या हाल होगा, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती. हम अपने प्लानेट के साथ ऐसा नहीं कर सकते हैं.”

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विजेंदर सिंह, सोनम कपूर और श्रद्धा कपूर ने भी दिल्ली की ज़हरीली हवा के बारे में सोशल मीडिया पर जमकर लिखा है.

https://twitter.com/sonamakapoor/status/928249917625085952

मौसम विभाग का कहना है कि ये समस्या 3-4 दिन चल सकती हैं. धुंध और प्रदूषण की वजह से स्कूलों को भी रविवार तक के लिए बंद कर दिया गया है.

Kareena Kapoor Khan, Gifts, Sonam Kapoorबीमार सोनम कपूर को उनकी फिल्म वीरे दी वेडिंग फिल्म की कोस्टार करीना कपूर ने भेजा एक ख़ास गिफ्ट. सोनम कपूर को ब्रोंकाइटिस हो गया है, जिसकी ख़बर सोनम ने ख़ुद सोशल मीडिया के ज़रिए दी. सोनम और करीना यूं तो अच्छी दोस्त हैं, लेकिन ये दोस्ती फिल्म वीरे दी वेडिंग के सेट पर और भी गहरी हो गई है. ऐसे में सोनम की हेल्थ के बारे में जैसे ही करीना को पता चला, उन्होंने सोनम के लिए भेज दिया ह्यूमिडिफायर.

ह्यूमिडिफायर आसपास की हवा को साफ़ करने का काम करता है. ब्रोंकाइटिस से परेशान सोनम को इससे काफ़ मदद मिलेगी, क्योंकि इसमें अगर हवा साफ़ न हो, तो समस्या और बढ़ जाती है.

सोनम ने ट्वीट करके बताया था कि उन्हें ब्रोंकाइटिस हो गया है. सोनम ने लिखा, “मुझे ज़िंदगी में कभी सांस लेने में तकलीफ़ नहीं हुई. लेकिन कुछ समय से मुझे सांस लेने परेशानी हो रही है और मुझे ब्रोंकाइटिस हो गया है. यह बहुत ही डरावना है.”

https://twitter.com/sonamakapoor/status/925573986074771457

सोनम के इस पोस्ट के बाद रिचा चड्ढा और सोफी चौधरी ने टि्वटर के ज़रिए बताया कि उन्हें भी पर्यावरण में फैले प्रदूषण की वजह से सांस लेने में दिक़्क़त हो रही है.

रिचा ने लिखा, “किसी को मुंबई के ऊपर धुंध दिख रही है? पिछले कुछ दिनों से मुझे सांस लेने में परेशानी हो रही है. ऐसा लग रहा है कि हम टेल्कम पाउडर खा रहे हैं.”

सोफी चौधरी ने लिखा, सांस की तकलीफ़ और आंखों का इंफेक्शन, थैंक्स टु दी पॉल्यूशन. यहा पागलपन है. जो हम बोते हैं, वही काटते हैं.

खैर इन सब के बीच करीना का गिफ्ट यक़ीनन सोनम के लिए फ़ायदेमंद साबित होगा.

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दिल्ली के लोगों की उम्र 9 साल तक बढ़ सकती है, अगर वहां की दवा की क्वालिटी में सुधार किया जाए तो. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन के मानकों को अगर पूरा कर लिया जाए, तो यह संभव है. यह रिसर्च यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के एनर्जी एंड पॉलिसी इंस्टिट्यूट के एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स ने की है. उनके मुताबिक़ राष्ट्रीय स्तर पर वायु की गुणवत्ता के लिए अगर विश्व स्वास्थ्य संगठन  के मानकों को पूरा किया जाए, तो भारत में रहने वालों की उम्र चार साल बढ़ सकती है.

वायु प्रदूषण की वजह से कई सांस से संबंधित कई बीमारियां हो रही हैं. इस पर कंट्रोल करने से कई शहरों को फ़ायदा पहुंचेगा. रिसर्च में एयरबोर्न कणों को पीएम 2.5 लेवल पर मापा गया, जिससे ये पता लगाने की कोशिश की गई कि इसकी मात्रा कम होने से लोगों की लाइफ पर क्या असर पड़ेगा. नतीजों में पाया गया कि अगर दिल्ली के एयर में  2.5 लेवल के तहत डब्ल्यूएचओ के सालाना 10 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर के मानक को पूरा कर लिया जाए, तो शहर के लोगों की उम्र 9 साल बढ़ जाएगी.

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वायु प्रदूषण स्मोकिंग से भी ज़्यादा ख़तरनाक है. एयर पॉल्यूशन के मामले में दिल्ली की नाम ऊपर है. ऐसे में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन के मानकों को पूरा करने से दिक़्क़त काफ़ी हद तक कम हो सकती है.

दिवाली के दिन पूरी दिल्ली और आसपास के इलाकों में इस क़दर लोगों ने पटाखे फोड़े कि उसका ख़ामियाज़ा लोगों को अब भुगतना पड़ रहा है. दिल्ली और आसपास के इलाकों में कई दिनों से धुंध पसरी है. इसके चलते रणजी ट्रॉफी रद्द हो गई. स्कूलों को कुछ दिनों के लिए बंद कर दिया गया है. लोग सड़कों पर मास्क लगाकर निकल रहे हैं. डॉक्टर के पास मरीज़ों की संख्या बढ़ने लगी है. जिन लोगों को सांस फूलने की समस्या है, उन्हें और भी द़िक्क़त हो रही है. बच्चों का घरों से निकलना बंद हो गया है. पूरी तरह से दिल्ली पॉल्युटेड प्लेस बन गई है. दिल्ली की जनता को भारतीय टेस्ट टीम के कैप्टन विराट कोहली ने अपने ट्विटर के ज़रिए लोगों को एक वीडियो संदेश भेजा, जिसमें लोगों से पर्यावरण को लेकर अधिक संवेदनशील बनने की बात की है. आप भी सुनिए आख़िर क्या कह रहे हैं विराट.