Tag Archives: pornography

क्यों बढ़ रहा है सेक्स स्ट्रेस? (Why Sex Stress Is Increasing In Our Society?)

आज कहां नहीं है स्ट्रेस? घर-परिवार, करियर, नौकरी… हर जगह तनाव का मकड़जाल फैला हुआ है. और धीरे-धीरे इसने अंतरंग लम्हों में भी घुसपैठ कर दी है. क्या एक हेल्दी रिलेशन के लिए सेक्स स्ट्रेस को दूर करने की ज़रूरत नहीं है?

Sex Stress

मनोचिकित्सक डॉ. अजीत दांडेकर के अनुसार, “स्ट्रेस लेवल बढ़ने के कारण शरीर के कई ऐसे हार्मोंस प्रभावित होते हैं, जिनकी वजह से सेक्स स्ट्रेस बढ़ जाता है. यदि पति-पत्नी अपनी रोज़ाना की ज़िंदगी का विश्‍लेषण करने के लिए कुछ समय निकाल सकें तो सेक्स स्ट्रेस का कारण ख़ुद ही समझ में आ जाएगा. सेक्स स्ट्रेस का कोई एक कारण नहीं है. मॉडर्न लाइफ़स्टाइल व अनेक चाही-अनचाही परिस्थितियां इसके लिए ज़िम्मेदार हैं.” आइए, उन विभिन्न स्थितियों को समझें.

समय की कमी व अपनों की फ़िक्र

सेक्स क्रिया के लिए समय व तनावरहित वातावरण चाहिए, जो आजकल लोगों को नहीं मिलता है. यदि समय मिल भी गया तो मन तरह-तरह की चिंताओं से घिरा रहता है. बच्चों का प्रेशर, माता-पिता का प्रेशर, ऑफ़िस की चिंताएं अनेक ऐसी बातें हैं, जो व्यक्ति को तनावमुक्त होने ही नहीं देतीं. फिर अपनी-अपनी अलग सोच और थकान के कारण तालमेल की कमी भी सेक्स के प्रति उदासीनता की स्थिति पैदा करती है.

काम का प्रेशर

ऑफ़िस या बिजनेस में ख़ुद को बेहतरीन साबित करने का जुनून, प्रमोशन की चाह, बॉस की नज़रों में योग्य बने रहने के प्रयास में कभी-कभी व्यक्ति अपनी सारी एनर्जी ख़र्च कर डालता है. वैसे भी बड़े-बड़े पैकेज यानी लाखों में मिलने वाली सालाना तनख़्वाह व्यक्ति को निचोड़कर रख देती है. अधिक आमदनी के लिए 8 की जगह 12-15 घंटे काम करना पड़ता है. ऑफ़िस के बाद कभी-कभी घर पर भी काम पूरा करना पड़ता है. इस तरह के हाईप्रेशर जॉब के साथ प्रायः संतुलन बनाए रखना कठिन हो जाता है. ऑफ़िस व घर दोनों ही ज़िम्मेदारियों को निभाने के चक्कर में व्यक्ति इतना थक जाता है कि बिस्तर पर लेटते ही सो जाता है. इसका सीधा असर उसकी सेक्स लाइफ़ पर
पड़ता है.

करियर की चाह

करियर में आगे बढ़ने की चाह एक ओर सफलता की मंज़िल तक पहुंचने का उत्साह बढ़ाती है, तो दूसरी ओर रिश्तों की गर्माहट में बाधक भी बनती है. करियर के कारण कभी-कभी पति-पत्नी को एक-दूसरे से अलग रहना पड़ता है. वे वीकएंड पर ही साथ रह पाते हैं. ऐसे कपल्स अनेक कुंठाओं के शिकार होते हैं, भले ही यह स्थिति उन्होंने स्वेच्छा से चुनी हो. ऐसे में साथ होते हुए भी तरह-तरह की शंका-आशंका (जैसे- विवाहेतर संबंध) या अपराधबोध उन्हें जकड़ने लगता है, अनेक ऐसी बातें सेक्स लाइफ़ को प्रभावित करती हैं.

यह भी पढ़ें: क्यों घट रहा है पुरुषों में स्पर्म काउंट? (What Are The Reasons For Low Sperm Count In Men?)

Sex Stress
असुरक्षा की भावना

आज की शादीशुदा ज़िंदगी में वर्किंग पति-पत्नी के रिश्तों में आजीवन साथ रह पाने की निश्‍चिंतता नहीं है. डर बना ही रहता है कि कब अलग हो जाना पड़े, क्योंकि दोनों के अहं होते हैं, जो कभी भी टकरा सकते हैं. दोनों में कोई भी समझौते के लिए तैयार नहीं होना चाहता है. लिहाज़ा महिलाओं के मन में अधिक बचत की चिंता रहती है. वे ज़्यादा से ज़्यादा कमाने की कोशिश में रहती हैं. वे सुरक्षित होना चाहती हैं. पुरुषों को स्त्रियों की सोच में स्वार्थ नज़र आता है. इस तरह की स्थिति तनाव व टकराहट को जन्म देती है.

प्लानिंग की कमी

आज का व्यक्ति अपनी चादर देख कर पैर नहीं पसारता, बल्कि पैर पसारने के बाद चादर की खींचातानी शुरू करता है. आधुनिक सुख-साधन जुटाना, रिसॉर्ट या विदेश में छुट्टियां बिताना हर दंपति की इच्छा होती है. संभव हो, न हो, उसकी कोशिश व चाह तो होती ही है. आज विकल्प के रूप में लोन व क्रेडिट कार्ड की उपलब्धता व बाद में उनकी किश्तें चुकाने का प्रेशर शरीर व मन दोनों को थका डालता है, बिना प्लानिंग के जो फ़ायनेंशियल स्ट्रेस झेलना पड़ता है, वो अंततः व्यक्ति की ज़िंदगी को पूरी तरह से प्रभावित करता है. सेक्स लाइफ़ के प्रति उदासीन कर देता है.

पोर्नोग्राफ़ी का असर

पोर्नोग्राफ़ी (यानी कामवासना संबंधी साहित्य, फ़ोटो, फ़िल्म आदि) के प्रभाव के कारण व्यक्ति सेक्स लाइफ़ फैंटेसी की दुनिया से जुड़ जाता है. उस तरह की इच्छा करने लगता है, जबकि वास्तविकता उससे कहीं दूर होती है. ऐसी फैंटेसी के कारण पार्टनर का सेक्स स्ट्रेस बढ़ने लगता है. वे साथ होकर भी काम-सुख या आनंद से वंचित रह जाते हैं. एक-दूसरे की उम्मीदों पर खरा न उतरने व पूर्ण संतुष्ट न कर पाने का तनाव व अनजाना भय रिश्तों में उदासीनता ले आता है.

मीडिया का रोल

आधी-अधूरी जानकारी व ग़लतफ़हमियां भी स्ट्रेस को बढ़ाती हैं. आज हर मैग़जीन में सेक्स कॉलम को ज़रूरी माना जाता है. कॉलम में सेक्सोलॉजिस्ट द्वारा पाठकों के प्रश्‍नों के उत्तर दिए जाते हैं. लेकिन पढ़ने वाला ये भूल जाता है कि संबंधित लेख या कॉलम में दी गई जानकारी एक सामान्य जानकारी होती है जबकि हर व्यक्ति दूसरे से भिन्न होता है. इसके अलावा इंटरनेट सेक्स, होमोसेक्सुअलिटी आदि भी आम व्यक्ति के मन को भ्रमित करने में ख़ास रोल निभा रहे हैं और सेक्स स्ट्रेस को बढ़ा रहे हैं. इसलिए आज यह बेहद ज़रूरी हो गया है कि कपल्स एक-दूसरे के लिए थोड़ा व़क़्त निकालें. साथ ही उपरोक्त सभी मुद्दों पर एकबारगी विचार-विमर्श भी करें, ताकि सेक्स
स्ट्रेस पनपने ही न पाए और ज़िंदगी ख़ुशनुमा बन जाए.

– प्रसून भार्गव

यह भी पढ़ें: सुहागरात में काम आएंगे ये सुपर सेक्स टिप्स (Super Sex Tips For Your First Night)

क्यों बढ़ रहा है सेक्स रिसेशन? (What Are The Reasons Behind Increasing Sex Recession?)

आजकल की युवापीढ़ी स़िर्फ जॉब रिसेशन का ही नहीं, बल्कि सेक्स रिसेशन (Sex Recession) का भी सामना कर रही है. अब आप सोच रहे होंगे कि यह सेक्स रिसेशन क्या बला है और भला युवाओं का सेक्स रिसेशन से क्या लेना-देना? तो हमारी और आपकी इसी उलझन को सुलझाने के लिए हमने बात की कुछ सेक्स एक्सपर्ट्स से.

Sex Recession

क्या है सेक्स रिसेशन?

सेक्स रिसेशन यानी सेक्स में घटती दिलचस्पी. बढ़ती उम्र के साथ सेक्स में रुचि कम होना स्वाभाविक है, पर जब कम उम्र में ही सेक्स में रुचि घटने लगे, तो यह सेक्स रिसेशन का संकेत हो सकता है. आपको यह जानकर आश्‍चर्य होगा कि भारत सहित कई देशों में हुए शोधों से यह बात पता चली है कि पिछले दशक की तुलना में अब लोग ख़ासतौर पर युवा कम सेक्स कर रहे हैं.

क्या कहते हैं आंकड़े?

2013 में नेशनल सर्वे ऑफ सेक्सुअल एंड लाइफस्टाइल (नैटसाल)  द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक़, 16 से 44 साल के लोग हर महीने पांच से कम बार सेक्स करने लगे हैं. 2014 में ऑस्ट्रलियाई नेशनल सर्वे ऑफ सेक्सुअल एक्टिविटी के मुताबिक़, आजकल कपल्स प्रति सप्ताह औसतन दो बार सेक्स संबंध बनाते हैं, जबकि 10 साल पहले यह औसत चार बार था. यह स्थिति जापान में और भी भयावह दिख रही है. वहां किए गए एक सर्वे के अनुसार 16 से 25 साल की उम्र की 46 फ़ीसदी जापानी महिलाएं और 25 फ़ीसदी जापानी पुरुष सेक्स संबंधों से घृणा करते हैं. जबकि ब्रिटेन में हाल ही में हुए एक सर्वे के अनुसार, वहां की आधी आबादी हफ़्ते में स़िर्फ एक ही बार सेक्स करती है. 16 से 44 वर्ष की आयुवाले पुरुष और महिलाओं पर किए इस सर्वे में पाया गया कि वर्ष 2001 से 2012 के दौरान वहां के लोगों की सेक्सुअल एक्टिविटी 50 फ़ीसदी कम हो गई है.

ऐसा क्यों हो रहा है?

इसकी कई वजहें हैं. विशेषज्ञों की मानें तो इसका सबसे प्रमुख कारण है तकनीक का बढ़ता इस्तेमाल. ऑनलाइन पोर्नोग्राफी, इंटरनेट और सोशल मीडिया इत्यादि कारणों से सेक्स के प्रति लोगों की रुचि कम होती जा रही है. आइए, इस बारे में विस्तार से जानते हैं.

पोर्नोग्राफी

ऑनलाइन पोर्नोग्राफी के बढ़ते चलन से कई लोगों में इंटरनेट सेक्स एडिक्शन जैसी बीमारी  देखने को मिल रही है, जिसके कारण उनका रियल सेक्स के प्रति झुकाव कम होते जा रहा है. इस बारे में बात करते हुए के.ई.एम हॉस्पिटल मुंबई के कंसल्टेंट इन सेक्सुअल मेडिसिन एंड सेक्सोलॉजिस्ट डॉ. राजन भोसले कहते हैं, “जिन लोगों को पोर्न फिल्मों की लत लग जाती है, उन्हें रियल सेक्स की जगह पोर्न में ही मज़ा आने लगता है, क्योंकि वे उस काल्पनिक दुनिया से बाहर नहीं आ पाते और उसी तरह के सेक्स की कल्पना करने लगते हैं. ऐसे में अगर पार्टनर उनकी अपेक्षाओं पर पूरा नहीं उतर पाता, तो सेक्स संबंध बनाने से उन्हें अरुचि हो जाती है. वहीं कुछ कपल्स में यह हीनभावना भी घर कर जाती है कि उनमें पोर्न में दिखाए जानेवाले स्टार की तरह न ही स्टेमिना है और न ही वैसी परफेक्ट बॉडी. ऐसे में वे पार्टनर से दूरी बना लेते हैं.”

इंटरनेट

इंटरनेट ने हमारी ज़िंदगी आसान तो बना दी है, लेकिन इसके कई साइड इफेक्ट्स भी हैं. सेक्स रिसेशन उनमें से एक है. इस बारे में बताते हुए डॉ. राजन भोसले कहते हैं, “आजकल के ज़्यादातर कपल्स अपने स्मार्ट फोन में इतने व्यस्त रहते हैं कि वे साथ होते हुए भी साथ नहीं हो पाते. खाली व़क्त में एक-दूसरे के साथ समय बिताने और सेक्स की पहल करने से ज़्यादा उन्हें मोबाइल स्क्रीन में दिलचस्पी होती है.” इस बारे में अपनी राय रखते हुए डिपार्टमेंट ऑफ यूरोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पिटल, नई दिल्ली के डायरेक्टर डॉ. रजिन्द्र यादव कहते हैं, “आजकल की युवापीढ़ी एक-दूसरे से मिलकर रिलेशनशिप रखने की बजाय ऑनलाइन डेटिंग और डिजिटल सोशलाइज़िंग ज़्यादा पसंद करती है, जिसका असर उनके सेक्स संबंधों पर भी पड़ता है.”

2014 में अमेरिका में माइकल मैलकॉल्म और जॉर्ज नाउफैल नामक दो शोधकर्ताओं ने 18 से 35 साल के 1500 युवाओं पर सर्वे किया. इनसे इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल और उनके रोमांटिक जीवन पर पड़ने वाले असर के बारे में पूछा गया. ईस्टर्न इकोनॉमिक जरनल में प्रकाशित इस अध्ययन में देखा गया कि जो लोग ज़्यादा देर तक इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं, उनमें शादी करने की दर कम होती है.

यह भी पढ़ें: किसिंग के ये हेल्थ बेनीफिट्स नहीं जानते होंगे आप (Health Benefits Of Kissing You May Not Know)

Sex Recession
काम का बढ़ता प्रेशर व तनाव

स्ट्रेस और वर्क प्रेशर भी सेक्स के प्रति नीरसता की प्रमुख वजहों में से एक है. डॉ. राजन भोसले के अनुसार,“पहले के समय में महिलाएं घर पर रहती थीं. दिनभर काम करके जब पति घर लौटता था, तो वे उसे रिझाने की कोशिश करती थीं, जिससे उनकी सेक्स लाइफ में उत्तेजना बनी रहती थी. पर आज के समय में पति-पत्नी दोनों ही वर्किंग होते हैं. दोनों पर काम का दबाव इतना होता है कि सेक्स उनकी प्राथमिकता की लिस्ट से गायब हो जाता है. काम का तनाव कपल्स को शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से इतना शिथिल कर देता है कि उनकी कामोत्तेजना ख़त्म होने लगती है.” इसका समर्थन करते हुए डॉ. रजिन्द्र यादव कहते हैं, “तनाव से हार्मोंस का स्तर गड़बड़ हो जाता है और इन सबका असर सेक्स संबंधों पर भी पड़ता है.”

बॉडी बिल्डिंग का क्रेज़

डॉ. रजिन्द्र यादव का मानना है कि आज के युवाओं में बॉडी बिल्डिंग का इतना अधिक क्रेज़ हो गया है कि वे जल्दी से जल्दी बॉडी बनाने के चक्कर में डायट सप्लीमेंट्स और स्टेरॉयड्स  का सहारा लेते हैं, जिससे उनकी बॉडी थोड़े समय के लिए बन तो जाती है, लेकिन लॉन्ग टर्म में उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ता है. स्टेरॉयडयुक्त डायट सप्लीमेंट खाने से नपुंसकता व सेक्स में अरुचि जैसी समस्याएं होती हैं.

ग़लत खानपान

डॉ. राजन भोसले के अनुसार, “युवा कपल्स में सेक्स के प्रति घटती अरुचि के लिए उनका अनहेल्दी खानपान भी काफ़ी हद तक ज़िम्मेदार है. वे जंक फूड, फ्राइड फूड इत्यादि का अधिक मात्रा में सेवन करते हैं. इस तरह के खाद्य पदार्थों में हाइड्रोजेनटेड फैट्स की मात्रा ज़्यादा होती है, जो सेक्स हार्मोन टेस्टोस्टेरॉन के स्तर को कम करती है, जिसके कारण उनकी सेक्स ड्राइव घटती है.”

2011 में इटली में पोर्न देखने वाले 28 हज़ार लोगों पर एक सर्वे किया गया. सर्वे के मुताबिक़, लोगों पर पोर्न में दिखने वाली काल्पनिक तस्वीरों का ऐसा असर होता है कि वे बेडरूम में सेक्स संबंध के लिए तैयार ही नहीं हो पाते हैं और उनकी स्थिति असहाय जैसी हो जाती है.

डिप्रेशन

पिछले कुछ सालों में युवाओं में डिप्रेशन और एंज़ायटी के केसेज़ बढ़े हैं. डॉ. रजिन्द्र यादव कहते हैं कि आज की युवापीढ़ी नौकरी की असुरक्षा, अपना घर बनाने की जद्दोज़ेहद और कट थ्रोटकॉम्प्टीशन के बीच उलझी है. इन सबका असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है. ऐसे में वे एंटी डिप्रेसेंट जैसी दवाइयों का सेवन करने लगते हैं और इन सबका दुष्प्रभाव उनकी सेक्स लाइफ पर पड़ता है.

सेक्स रिसेशन को दूर करने के उपाय

–     सबसे पहले इंटरनेट और सोशल मीडिया की लत को दूर करना ज़रूरी है. हफ़्ते में कुल मिलाकर दो घंटा पोर्न देखना सेक्स इच्छा को प्रबल करता है. इससे ज़्यादा पोर्न देखने का नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. अतः इस बात का ख़्याल रखना ज़रूरी है.

–     खानपान पर ध्यान दें. जल्दी बॉडी बनाने के चक्कर में अपनी सेहत से खिलवाड़ न करें. सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने के लिए सेक्स बूस्टर खाद्य पदार्थ, जैसे- अंडा, मछली, तेल, ऑलिव ऑयल, एवोकैडो, डार्क चॉकलेट का सेवन करें.

–     काम का बोझ घर लेकर न आएं, क्योंकि  सेक्स का मज़ा उठाने के लिए आराम करना भी ज़रूरी है. जब हम रिलैक्स होते हैं, तो शरीर में सेक्स हार्मोंस का स्राव होता है, जो सेक्स पावर को स्वाभाविक तौर पर बढ़ाता है.

 

– शिल्पी शर्मा

यह भी पढ़ें: 20 सेक्स फैक्ट्स, जो हर कपल जानना चाहता है (20 Sex Facts Every Couple Must Know)