positive life

डिप्रेशन के संकेत यदि वक़्त रहते समझ आ जाएं, तो इससे बहुत आसानी से बचा जा सकता है. यदि आपके घर में या आपके आसपास कोई व्यक्ति आपको डिप्रेस्ड दिखाई दे, तो खुद आगे बढ़कर उसकी मदद करें, उसके साथ वक़्त बिताएं, उसकी समस्या को समझने की कोशिश करें, उसे डिप्रेशन से बाहर निकलने में मदद करें. यदि इतना सब करने के बाद भी कोई सकारात्मक परिवर्तन न दिखाई दे, तो एक्सपर्ट की मदद लें. डिप्रेशन एक ऐसी नकारात्मक भावना है, जो व्यक्ति के जीवन से सारी खुशियां छीन लेती है. ऐसे व्यक्ति को जीवन में कुछ भी अच्छा नहीं लगता, कई बार तो उसकी जीने की इच्छा भी ख़त्म हो जाती है. ट्रांसफॉर्मेशन कोच हित्ती रंगनानी बता रही हैं डिप्रेशन को खुद से दूर करने के आसान और असरदार उपाय.

Depression

क्या हैं डिप्रेशन के कारण?
यदि किसी व्यक्ति के परिवार में अचानक किसी की मृत्यु हो जाए, किसी को बिज़नेस में बहुत बड़ा लॉस हो जाए, किसी की शादी टूट जाए… ऐसी कोई भी बात या घटना, जिसे आप चाहकर भी भूल नहीं पाते या जिसे सहन करना आपके लिए मुश्किल हो जाए, छह महीने बाद भी आप उस चीज़ को भूल न पाएं और आपका किसी चीज़ में मन न लगे, तो समझ जाइए कि ये डिप्रेशन है.

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क्या हैं डिप्रेशन के लक्षण?
डिप्रेशन की शुरुआत में चीज़ों में रुचि कम होने लगती है, फिर आप लोगों से कटने लगते हैं, सामाजिक समारोहों में जाने से कतराते हैं, घर से बाहर नहीं निकलना चाहते, आपका किसी काम में मन नहीं लगता, आप बहुत ज़्यादा सोने लगते हैं, आपका खाने का मन नहीं करता. जब ये स्थिति छह महीने बाद भी नहीं बदलती, तो मन में आत्महत्या के ख़्याल आने लगते हैं, जीने की रूचि ख़त्म होने लगती है.

डिप्रेशन को खुद से दूर करने के आसान और असरदार उपाय जानने के लिए देखें लाइफ कोच हित्ती रंगनानी का ये वीडियो:

आसान है डिप्रेशन को हराना
डिप्रेशन से बाहर निकलने के लिए सबसे ज़रूरी है किसी अपने का साथ, जिससे आप अपने मन की हर बात शेयर कर सकें, इसलिए अपने करीबी दोस्त या घर के करीबी सदस्य से अपने मन की बात शेयर करें. साथ ही अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव करें. नियमित एक्सरसाइज़, योग, ध्यान, सही आहार, पूरी नींद आदि से आप डिप्रेशन से बाहर निकल सकते हैं. यदि इतना सब करने के बाद भी कोई सकारात्मक परिवर्तन न दिखाई दे, तो एक्सपर्ट की मदद लें.

इस समय जब पूरे विश्व में डर और नकारात्मकता छाई हुई है, ऐसे में सकारात्मक जीवन जीने के 10 आसान उपाय आपके बहुत काम आ सकते हैं. इस समय आपके मन में भी आनेवाले कल को लेकर असमंजस और डर की भावना घर कर रही होगी. दिनभर घर में कैद रहना बोझ लग रहा होगा, लेकिन इस समय को यदि हम अच्छे अवसर की तरह देखें, तो हमें कुछ भी नकारात्मक नहीं लगेगा. दरअसल, परिस्थिति चाहे कितनी ही मुश्किल क्यों न हो, यदि हम उस स्थिति से बाहर निकलने की ठान लें, तो कुछ भी नामुमकिन नहीं. रात चाहे कितनी ही काली, कितनी ही गहरी क्यों न हो, रात के बाद सवेरा होता ही है. इसी तरह जीवन में चाहे कितनी ही तकलीफ क्यों न आए, दुःख के बादल छंट ही जाते हैं और ज़िंदगी खुशियों से मुस्कुराने लगती है. कोरोना के इस कहर में आइए, हम आपको सकारात्मक जीवन जीने के 10 आसान उपाय बताते हैं.

10 Easy Ways To Live A Positive Life

1) ईश्वर को धन्यवाद कहें
सुबह उठकर सबसे पहले मुस्कुराइए और ईश्वर को धन्यवाद कहिए कि उसने आपको इंसान के रूप में इतना सुंदर जीवन दिया है. जब हम ईश्वर को धन्यवाद कहते हैं, तो हमारे मन में अपने जीवन को लेकर संतुष्टि का भाव आता है और हम जीवन को सकारात्मक तरीके से देखने लगते हैं.

2) प्रार्थना करना कभी न भूलें
प्रार्थना करना सकारात्मक जीवन जीने का सबसे आसान तरीका है. प्रार्थना करना हमें नम्र बनाता है, दूसरों का भला सोचना सिखाता है इसलिए ईश्वर की हमेशा प्रार्थना करें. हमें स्कूल में भी इसीलिए पढ़ाई करने से पहले प्रार्थना करने के लिए कहा जाता है.

3) योग और मेडिटेशन को जीवन का हिस्सा बनाएं
जो लोग रोज़ योग और मेडिटेशन करते हैं, वो हमेशा सकारात्मक रहते हैं. योग और ध्यान हमें जीवन के हर उतार-चढ़ाव में आगे बढ़ना सिखाते हैं और अपने लक्ष्य से कभी भटकने नहीं देते, इसलिए योग और मेडिटेशन को जीवन का हिस्सा बनाएं और हमेशा सकारात्मक बने रहें.

4) हर हाल में ख़ुद से प्यार करें
आपकी परिस्थिति चाहे जैसी भी हो, हर हाल में ख़ुद से प्यार करें. जब आप ख़ुद से प्यार करेंगे, तो ही दूसरों को भी प्यार दे सकेंगे. जो लोग ख़ुद से प्यार करते हैं, वो हमेशा खुश रहते हैं और दूसरों को भी ख़ुशी देते हैं.

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10 Easy Ways To Live A Positive Life

5) फिट और हेल्दी रहें
हेल्थ इज़ वेल्थ- ये कहावत आपने ज़रूर सुनी होगी. हम चाहे कितने ही संपन्न क्यों न हों, यदि हम हेल्दी नहीं हैं, तो हम जीवन का लुत्फ़ नहीं उठा सकते. फिट और हेल्दी व्यक्ति हमेशा कॉन्फिडेंट नज़र आता है, इसलिए अपने शरीर का हमेशा ध्यान रखें और हमेशा फिट और हेल्दी बने रहें.

6) अच्छे कपडे पहनें और बनठन के रहें
ये बात सुनकर आपको हंसी आ सकती है, लेकिन आप ये बात आज़माकर देखिए. जब आप बनठन कर रहते हैं तो आपका कॉन्फिडेंस भी बढ़ जाता है. आप कहीं भी जाने, किसी से भी मिलने के लिए तुरंत तैयार हो जाते हैं, लेकिन आपने यदि अच्छे कपड़े नहीं पहने हैं या आप अच्छे नहीं दिख रहे हैं, तो आप लोगों से मिलने से कतराते हैं, आपका कॉन्फिडेंस कम हो जाता है.

7) दोस्तों से मिलें
आप चाहे कितने ही व्यस्त क्यों न हों, कुछ समय अपने दोस्तों के लिए ज़रूर निकालें. दोस्तों से मिलकर आपको ख़ुशी होगी और आपको ज़िंदगी और ख़ूबसूरत लगने लगती है. दोस्तों की तरह ही अपने से कम उम्र के लोगों के साथ समय बिताएं यानी अपने बच्चों के साथ समय बिताएं. बच्चों के साथ आप खुश भी रहेंगे और खुद को युवा भी महसूस करेंगे.

8) अपने शौक के लिए समय निकालें
हमारे शौक हमें कभी बूढ़ा नहीं होने देते, इसलिए अपनी बिज़ी लाइफस्टाइल में भी अपने शौक के लिए ज़रूर समय निकालें. जब आप अपना मनपसंद काम करते हैं, तो आप खुश रहते हैं और आपको ज़िंदगी से शिकायत नहीं रहती.

10 Easy Ways To Live A Positive Life

9) घूमने जाएं
नई जगहों की सैर करने और नए लोगों से मिलने से हम नई-नई चीज़ें सीखते हैं, जिससे जीवन के प्रति हमारी जिज्ञासा बनी रहती है. आपको जब भी समय मिले नई-नई जगहों की सैर ज़रूर करें. ट्रैवल करने से हम ये भी समझ पाते हैं कि हम दूसरों से कितना अच्छा जीवन जी रहे हैं.

10) हमेशा मुस्कुराएं
जो लोग हमेशा हंसते-मुस्कुराते रहते हैं, उन्हें हर कोई पसंद करता है. यदि आप भी चाहते हैं कि सब आपको प्यार करें, तो हमेशा हंसते-मुस्कुराते रहें. आप जो भी काम कर रहे हैं, उसे मन से करें. खुद से प्यार करें, अपने काम से प्यार करें, हमेशा ख़ुश रहें, तभी आप अपनी ज़िंदगी से प्यार कर सकते हैं.

सकारात्मक जीवन जीने वाले लोग हर हाल में खुश रहते हैं, इसलिए वो ज़िंदगी की हर तकलीफ से आसानी से बाहर निकल जाते हैं. रात चाहे कितनी ही काली, कितनी ही गहरी क्यों न हो, रात के बाद सवेरा होता ही है. इसी तरह जीवन में चाहे कितनी ही तकलीफ क्यों न आए, दुःख के बादल छंट ही जाते हैं और ज़िंदगी खुशियों से मुस्कुराने लगती है. यदि आप भी इसी सोच के साथ जीने लगेंगे, तो आप भी हर हाल में ख़ुश रहेंगे और ज़िंदगी से प्यार करने लगेंगे.

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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से लेकर बिग बी अमिताभ बच्चन की तरह समय के पाबंद बनकर आप भी पा सकते हैं सफलता, लेकिन क़ामयाबी पाने के लिए पहले आपको समय का सही उपयोग करने की कला सीखनी होगी. हम सबके पास दिनभर में 24 घंटे का ही समय होता है, फर्क सिर्फ इतना होता है कि क़ामयाब लोग समय का सदुपयोग करके आगे बढ़ जाते हैं और समय बर्बाद करने वाले लोग पीछे रह जाते हैं. समय के पाबंद बनकर आप कैसे पा सकते हैं सफलता, आइए हम आपको इसके आसान उपाय बताते हैं.

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1) अमिताभ बच्चन
बॉलीवुड के महानायक सेट कभी लेट नहीं होते. वो अपने और दूसरों के समय की कीमत अच्छी तरह जानते हैं, इसलिए वो कभी समय बर्बाद नहीं करते. बिग बी अपना हर काम डिसिप्लिन और समय से करते हैं इसीलिए इस उम्र में भी वो फिट और हिट हैं.

2) आमिर खान
मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान भी समय के बहुत पाबंद हैं. आमिर खान न तो कभी सेट पर लेट पहुंचते हैं और न ही कभी मीडिया को इंतज़ार करवाते हैं. आमिर खान हर फिल्म में अपना बेस्ट देते हैं, इसीलिए दर्शकों को उनकी हर फिल्म का बेसब्री से इंतज़ार रहता है.

3) अनुष्का शर्मा
बॉलीवुड ऐक्ट्रेस अनुष्का शर्मा भी समय की बहुत पाबंद हैं और समय की ये पाबंदी उन्होंने अपने परिवार से सीखी है. अनुष्का शर्मा के परिवार में अधिकतर लोग आर्मी में हैं इसलिए डिसिप्लिन और समय की पाबंदी उन्हें अपने अपने परिवार से सीखने को मिला है. अपने डिसिप्लिन और समय की पाबंदी के कारण अनुष्का शर्मा ने बहुत कम समय में बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बना ली है.

4) महात्मा गांधी
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी समय की कीमत भलीभांति जानते थे, इसलिए वो समय को बिल्कुल भी बर्बाद नहीं करते थे. महात्मा गांधी सुबह दातुन करने से पहले आईने पर गीता का श्लोक चिपका लेते थे और दातुन करते हुए उसे याद कर लिया करते थे. इस तरह बापू ने गीता के 13 अध्याय याद कर लिए थे.

5) ईश्वरचन्द्र विद्यासागर
बंगाल के प्रसिद्ध दार्शनिक, शिक्षाविद, समाज सुधारक, लेखक, अनुवादक, मुद्रक, प्रकाशक, उद्यमी और परोपकारी व्यक्ति ईश्वरचन्द्र विद्यासागर जब कॉलेज जाते थे, तो रास्ते के दुकानदार उन्हें देखकर अपनी घड़ियां ठीक करते थे, क्योंकि वे जानते थे कि विद्यासागर कभी एक मिनट भी लेट नहीं होते.

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समय के पाबंद और कामयाब बनने के 3 अचूक मंत्र

1) सबसे पहले लक्ष्य निर्धारित करें
आपका लक्ष्य बड़ा है या छोटा, इससे कहीं ज़्यादा ज़रूरी ये है कि आपने अपना लक्ष्य निर्धारित किया है या नहीं. कोई भी काम को पूरा करने के लिए मन में दृढ निश्चय तभी किया जा सकता है, जब आप अपने लिए लक्ष्य निर्धारित करते हैं. अपनी प्राथमिकताओं के अनुरूप आप बड़ा या छोटा कोई भी लक्ष्य निर्धारित कर सकते हैं.

2) अपने लक्ष्य के लिए समय निर्धारित करें
जब भी आप कोई लक्ष्य निर्धारित करते हैं, तो उसे कितने समय में पूरा करना है, इस पर भी विचार करने लगते हैं. इस प्रोसेस में आपके काम की स्पीड अपने आप बढ़ जाती है और आप अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते चले जाते हैं.

3) अपने लक्ष्य से भटके नहीं
अधिकतर लोग लक्ष्य तो निर्धारित कर लेते हैं, लेकिन उसे पूरा इसलिए नहीं कर पाते, क्योंकि वो लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही अपने लक्ष्य से भटक जाते हैं और किसी अन्य कार्य में व्यस्त हो जाते हैं. ऐसे लोग बार-बार लक्ष्य बदलते रहते हैं और कहीं भी नहीं पहुंच पाते. अतः अपनी मंज़िल तक पहुंचने तक प्रयास जारी रखें और समय बर्बाद न करें, आपको क़ामयाबी ज़रूर मिलेगी.

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श्रद्धा और सजगता, दोनों एक दूसरे के विरोधाभासी लगते हैं। जब तुम पूर्णतः जागरूक होते हो तो अक्सर श्रद्धा नहीं रहती और तुम व्याकुल एवं असुरक्षित महसूस करते हो। जब तुम किसी पर पूर्ण विश्वास कर के चलते हो अर्थात श्रद्धा से चलते हो, तब मन पूर्ण रूप से शांत एवं सुरक्षित महसूस करता है और विश्राम में रहता है। पर, तब तुम जागरूक नहीं रहते!

Gurudev Sri Sri Ravi Shankar

श्रद्धा तीन प्रकार की होती है

1) तामसिक श्रद्धा 
तामसिक श्रद्धा आलस्य से उत्त्पन्न होती है। जैसे, जब तुम कोई जिम्मेदारी नहीं लेना चाहते हो, या आलस्यवश कोई काम नहीं करना चाहते, तब तुम कहते हो कि, ‘कोई बात नहीं, भगवान सब ठीक कर देंगे।’ (सब हंसते हैं।)

2) राजसिक श्रद्धा
जब तुम इच्छा और तृष्णा के तीव्र वेग के कारण श्रद्धा का सहारा लेते हो, तब इच्छापूर्ति की तीव्र पिपासा ही तुम्हारी श्रद्धा को जीवित रखती है। ये राजसिक श्रद्धा है।

3) सात्विक श्रद्धा
ऐसा विश्वास, ऐसी श्रद्धा जो निष्कपट हो, भोलापन लिए हो और जो हमारी चेतना की पूर्णता से उत्पन्न हुई हो, वह सात्विक श्रद्धा है।

 

श्रद्धा से यदि इच्छा पूरी न हो तो क्या करें? जानने के लिए देखें गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर का ये वीडियो:

 

श्रद्धा एवं जागरूकता मनुष्य को ज्ञानी बनाते हैं
श्रद्धा एवं जागरूकता भले ही एक दूसरे के विरोधाभासी लगते हों, परन्तु वे एक दूसरे के पूरक है| श्रद्धा के बिना तुम्हारा आंतरिक विकास संभव नहीं है। और, बिना सजगता के तुम कुछ भी भली-भांति समझ नहीं पाओगे। श्रद्धा तुम्हे आनंद के मार्ग पर ले जाती है और सजगता तुम्हें व्याकुल रखती है।

जहां विश्वास ( श्रद्धा) नहीं है वहां भय रहता है, और जब जागरूकता कि कमी हो तो न तो तुम कुछ ठीक से समझ पाओगे और न ही उसे ठीक से व्यक्त कर पाओगे। अतः दोनों का मिश्रण अत्यंत आवश्यक है।

ज्ञान में स्थित होकर सजग रहने से तनाव विहीनता आती है, श्रद्धा आती है और आनंद आता है। शिक्षा का मुख्य उद्देश्य है श्रद्धा से उत्पन्न मूर्खता (राजसिक श्रद्धा) के तत्वों अर्थात आलस्य को मिटाना एवं जागरूकता से उत्पन्न भय और व्याकुलता को भी मिटाना। यह एक अनोखा एवं अतुल्य मिश्रण है। अगर तुम्हारे अन्दर श्रद्धा एवं जागरूकता एक साथ दोनों ही हैं तो तुम सही मायनों में एक ज्ञानी बन जाओगे।

 

श्रद्धा एवं जागरूकता को सही मायने में समझने के लिए देखें गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर का ये वीडियो:

 

गुस्सा (Anger) आना सामान्य व्यवहार है, लेकिन जब किसी को बात-बात पर गुस्सा आए तो ये सामान्य बात नहीं है. गुस्सैल लोगों से सब दूर ही रहना चाहते हैं, क्योंकि ऐसे लोग गुस्से में कुछ भी बोल देते हैं, जिससे माहौल बिगड़ जाता है. गुस्सैल लोग दूसरों का कम और अपना नुकसान ज़्यादा करते हैं. यदि आपको भी बात-बात पर गुस्सा आता है, तो आपको गुस्से को काबू करने के ये 5 उपाय ज़रूर जानने चाहिए.

Anger Management

 

 

 

 

 

गुस्सैल लोगों को होते हैं ये 5 नुकसान
1) आपका गुस्सा सबसे पहले आपके स्वास्थ्य को हानि पहुंचाता है. गुस्से से तनाव बढ़ता है और तनाव से कई स्वास्थ्य समस्याएं शुरू हो जाती हैं. अत: गुस्सैल स्वभाव के लोगों को अपने स्वास्थ्य का ख़ास ध्यान रखना चाहिए.
2) गुस्से के कारण आपकी छवि ख़राब हो सकती है. लोग आप पर विश्‍वास कम करते हैं, क्योंकि उन्हें हमेशा इस बात का डर लगा रहता है कि गुस्से में कहीं आप बना बनाया काम न बिगाड़ दें.
3) गुस्से के कारण आप अपनों को खो सकते हैं. गुस्से में आपको समझ नहीं आता कि आप क्या कह रहे हैं, लेकिन ऐसा करके आप कई बार अपनों का दिल दुखाते हैं, जिससे वो आपसे दूर होते चले जाते हैं.
4) अपने गुस्सैल स्वभाव के कारण आप अपने अच्छे दोस्त भी खो सकते हैं.
5) यदि आपको बात-बात पर गुस्सा आता है और आप गुस्से में किसी को कुछ भी बोल देते हैं, तो लोग आपसे बात करने से कतराने लगते हैं. ऐसे में आप अपना सम्मान खो सकते हैं और अकेलेपन के शिकार भी हो सकते हैं.

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गुस्से से बचने के 5 कारगर उपाय
1) आवेश में आकर कुछ भी बोलने से पहले सोचें कि क्या आपको ऐसा करने की ज़रूरत है. ऐसा करके आप कई ग़लतियों से बच सकते हैं. यदि गुस्से पर काबू नहीं कर पा रहे हैं तो मन ही मन दस से लेकर एक तक उल्टी गिनती गिनें. ऐसा करने से आपका ध्यान बंट जाएगा और आपका गुस्सा शांत हो जाएगा.
2) नियमित रूप से योग व मेडिटेशन करें, ऐसा करने से आप अपने गुस्से पर नियंत्रण कर पाएंगे. साथ ही सात्विक भोजन करें, ऐसा भोजन करने से गुस्सा कम आता है.
3) हमेशा हंसते-मुस्कुराते रहें, इससे आप अच्छा महसूस करेंगे और आपको गुस्सा कम आएगा.
4) ख़ुद को काम में व्यस्त रखें, इससे आप जल्दी थक जाएंगे और आपको गुस्सा कम आएगा.
5) अपने शौक के लिए समय निकालें. जब आप अपना मनपसंद काम करेंगे, तो आप ख़ुश रहेंगे और आपको गुस्सा कम आएगा.

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कॉलेज के दिनों में हर किसी की तरह आपने भी ज़रूर सोचा होगा कि जॉब लगते ही ये करूंगा/करूंगी, वो करूंगा/करूंगी, यहां जाऊंगा, वहां जाऊंगा, सारे सपने पूरे करूंगा/करूंगी, पर क्या आप वो सब कर पा रहे हैं? अगर लिस्ट बनाकर देखेंगे, तो पाएंगे कि उनमें से ज़्यादातर ख़्वाहिशें, ख़्वाहिशें ही रह गईं और आपकी भागदौड़ बदस्तूर जारी है. पर आज हम आपसे कहते हैं कि ज़िंदगी मेें ये पड़ाव दोबारा नहीं आएगा, इसलिए जो भी इच्छाएं हैं, उन्हें पूरा कर लें. 25वें बर्थडे का केक काटने से पहले अपने जीवन को दें एक फ्रेश स्टार्ट और अपनी ज़िंदगी में लाएं ये ख़ास बदलाव.

Things You Must Do Before Turning 25

  1. कुछ दिन अकेले रहें

ज़्यादातर लोगों की ख़्वाहिश होती है कि वो आत्मनिर्भर बनें. अपने काम ख़ुद करें और ज़िंदगी को अपने नज़रिए से देखें, मम्मी-पापा के सुरक्षित घेरे से बाहर ख़ुद को संभालकर ज़िंदगी में कुछ बनकर दिखाएं. और यह अच्छा भी है, क्योंकि अकेले रहने से आप ज़िंदगी के बारे में बहुत कुछ सीखते हैं. इसका सबसे बड़ा प्लस पॉइंट है कि आप ख़ुद के साथ अच्छा व़क्त बिताते हैं, जिससे ख़ुद को बेहतर समझ पाते हैं.

  1. ख़ुद से प्यार का इज़हार करें

कहते हैं कि आप किसी और से प्यार तभी कर पाओगे, जब आप ख़ुद से प्यार करते हो. हर कोई ख़ुद से बहुत प्यार करता है, पर इस बात का कभी इज़हार नहीं करता. तो आज कीजिए. आईने के सामने खड़े होकर ख़ुद से प्यार का इज़हार करें.जब आप अपने प्यार का इज़हार करेंगे, तो यकीनन ख़ुुद को ख़ुश रखने के लिए वो सब करेंगे, जो हम अपने पार्टनर्स के लिए करते हैं. बस, इसे अपने रूटीन में शामिल कर लीजिए और यकीन मानिए इससे आपकी ज़िंदगी हर पल ख़ुशहाल रहेगी.

  1. इनवेस्टमेंट और सेविंग्स की शुरुआत करें

अपने भविष्य को सुरक्षित करना चाहते हैं, तो यही सही समय है. सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी), म्यूचुअल फंड और नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट जैसे छोटे-छोटे इन्वेस्टमेंट और सेविंग्स प्लान की शुरुआत कर दें. ऐसा करने से कोई भी नया काम या पैशन को पूरा न कर पाने का आपको मलाल नहीं करना पड़ेगा.

  1. ख़ुद को फेल होने की परमिशन दें

हार-जीत हमारी ज़िंदगी में बहुत मायने रखती है. हर कोई हमेशा स़िर्फ जीतना ही चाहता है और हो भी क्यों न, हारना भला किसे पसंद होगा. पर कभी-कभी हालात ऐसे होते हैं कि हम चाहकर भी कुछ चीज़ें जीत नहीं पाते. तो क्या हम ज़िंदगी से हार गए, नहीं. हर हार हमें एक सबक सिखाती है, जिसे हमें याद रखना चाहिए. अगर हम एक बार में सबक सीख लें, तो दोबारा उस चीज़ में नहीं हारेंगे. ख़ुद पर हमेशा जीतने का दबाव न डालें, कभी-कभी फेल होने की भी परमिशन दें, इससे आप मेंटली रिलैक्स रहेंगे.

  1. माफ़ करना सीखें

माफ़ी की उम्मीद हमेशा हम बड़ों से ही करते हैं, तो अब आप भी तो बड़े हो गए हैं. इस आदत को अपनाइए. किसी की भी ग़लती पर रिएक्ट करने की बजाय उसे माफ़ करना सीखें. इससे न स़िर्फ आपका व्यक्तित्व निखरेगा, बल्कि आपके भीतर एक सुकून और शांति रहेगी. उम्र के इस पड़ाव पर अपने जीवन में यह बदलाव आपके जीवन की दिशा को बदल सकता है.

  1. अपना मेकओवर करें

वो हेयरकट जो आप सालों से लेना चाहती थीं, पर संकोच में कभी ले नहीं पाईं या फिर वो ड्रेस जिसे पहनने की आपकी ख़्वाहिश है, उसे अब पूरा करें. अपने लुक्स में एक्सपेरिमेंट करने का ये बेस्ट टाइम है, क्योंकि शादी के बाद कुछ भी करने से पहले आपको बहुत कुछ सोचना होगा. अपने वॉर्डरोब को अपने मनपसंद कपड़ों से सजाएं. ज़िंदगी के हर मुकाम को खुलकर जीएं.

  1. पैरेंट्स को सरप्राइज़ दें

अपनी फैमिली के साथ क्वालिटी समय बिताएं. उनके लिए जो भी करना चाहते हैं, अभी करें. उन्हें उनकी पसंदीदा चीज़ें देकर उन्हें सरप्राइज़ दें. कभी-कभार मम्मी को किचन से छुट्टी देकर बाहर से खाना मंगाएं या बाहर खाने जाएं. परिवार के साथ बिताए ये छोटे-छोटे पल आपकी बैटरी को रिचार्ज करने का काम करते हैं. तो ऐसे छोटे-छोटे पलों को आज से ही जुटाना शुरू कीजिए. आपकी ज़िंदगी ख़ुशगवार बनेगी.

  1. नई हॉबी चुनें

बचपन से संजोया वो संगीत सीखने का सपना या गिटार बजाने की वो चाहत, पेंट करने का जुनून या फिर डांस क्लास में अपने मूव्स को देखकर ख़ुश होने की चाहत… ऐसी बहुत-सी हॉबीज़ हैं, जिन्हें आप करना चाहते थे, पर कभी समय की कमी तो कभी पैसों की तंगी ने कुछ करने नहीं दिया. पर अब इन बहानों को पीछे छोड़ें और अपनी नई हॉबी को खुलकर जीएं.

  1. खाना बनाना सीखें

यह एक बहुत ज़रूरी बदलाव है, जो हर किसी को अपनी ज़िंदगी में लाना चाहिए, चाहे आप लड़का हो या लड़की. हमारे देश में लड़कियों को खाना बनाने की सीख सब देते हैं, पर आज की ज़रूरत है कि दोनों ही हर काम सीखें. खाना बनाना सीखकर न स़िर्फ आप अपनी मनपसंद डिश का लुत्फ़ उठा सकते हैं, बल्कि अपने पार्टनर की मदद भी कर सकते हैं, जिससे आपका दांपत्य जीवन भी सुखी रहेगा.

  1. अपनी फेवरेट क़िताब पढ़ें

रोज़मर्रा की भागदौड़ में वह क़िताब पढ़ने की इच्छा अधूरी रह जाती है. ऑनलाइन बुक सेलिंग वेबसाइट्स पर पढ़ने की विश लिस्ट बढ़ती जाती है, पर समय की कमी आपको अक्सर इससे दूर रखती है. लेकिन अब और विश लिस्ट मत बढ़ाइए, बल्कि उन हर महीने उनमें से कुछ क़िताबें ख़रीदिए और क़िताबों की जादुई दुनिया में खो जाइए. अपनी मनपसंद क़िताबें पढ़कर बहुत कुछ सीखने के साथ-साथ आपको जो ख़ुशी मिलेगी, वह आपकी ज़िंदगी के लिए अनमोल होगी.

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Things You Must Do Before Turning 25

  1. अकेले कहीं घूमने जाएं और नए दोस्त बनाएं

फिल्मों में हीरो-हिरोइन्स को टूर पर जाता देख अक्सर दिल में ख़्याल आता है कि काश मैं भी टूर पर जाता, पर कभी पैसे, तो कभी समय की कमी हमें रोक देती है. पर इस बार ख़ुद को मत रोकिए. सभी बहानों को दरकिनार कर अकेले ही निकल जाएं अपने फेवरेट डेस्टिनेशन पर. अकेले जाने का फ़ायदा यह होगा कि इसी बहाने आप नए दोस्त बनाएंगे. ऐसी छोटी-सी ट्रिप आपकी ज़िंदगी को रिफ्रेश कर देगी.

  1. ड्राइविंग लाइसेंस बनवाएं

यह एक बहुत ज़रूरी बदलाव है, जिसे अक्सर लोग नज़रअंदाज़ कर देते हैं. ड्राइविंग एक ऐसा स्किल या हुनर है, जो सभी को आना चाहिए. इससे आप अपनी ज़रूरतें तो पूरी कर ही सकते हैं, साथ ही इमर्जेंसी में दूसरों की मदद भी कर सकते हैं.

  1. टेकेन फॉर ग्रांटेडवाले लोगों को दूर करना सीखें

इस उम्र में आप इतने तो परिपक्व हो ही गए हैं कि अपना भला-बुरा चाहनेवालों को पहचानने लगे हैं. आपके पास भी कुछ ऐसे लोग होंगे, जो हमेशा आपको टेकेन फॉर ग्रांटेड ही लेते हैं. ऐसे लोगों के लिए काम निकलवाने का मोहरा मत बनिए. इससे आप तनाव में रहेंगे, तो आपकी सेहत के लिए ठीक नहीं. इसलिए टेकेन फॉर ग्रांटेडवाले लोगों से ख़ुद को दूर कर लें.

  1. कुछ स्पेशल करना शुरू करें

हर कोई चाहता है कि वो दूसरों की मदद करें, पर ज़्यादातर लोग पैसोंे की कमी के कारण ऐसा नहीं कर पाते. पर हम आपको बता दें कि मदद हमेशा पैसों से ही हो ज़रूरी नहीं. किसी बच्चे की पढ़ाई में मदद, किसी बुज़ुर्ग को अपने पुराने कपड़े देकर, किसी ज़रूरतमंद की किसी तरह मदद करके भी आप कुछ स्पेशल कर सकते हैं. किसी की मदद करने से आपको जो ख़ुशी और आत्मसंतोष मिलेगा, उसकी कोई तुलना ही नहीं.

  1. ना कहना सीखें

ना कहना जितना आसान है, उतनी ही मुश्किल भी. कहने को तो एक छोटा-सा शब्द है, पर अपने ऊपर कई ज़िम्मेदारियों का बोझ उठाए रखता है, शायद इसीलिए इसे कहने से लोग झिझकते हैं. पर यह भी सच है कि आप हर किसी को ख़ुश नहीं रख सकते और अगर कोशिश करेंगे, तो स्वयं हमेशा दुखी रहेंगे. इसलिए इस छोटे-से बदलाव को अपने जीवन में अपनाइए और ज़रूरत पड़ने पर ना कहने की आदत भी डालिए.

  1. बदलाव से घबराएं नहीं

रूटीन में बदलाव ज़रूरी है, वरना ज़िंदगी बहुत बोरिंग हो जाएगी, पर अक्सर लोग बदलाव के नाम से ही घबरा जाते हैं. पर यह ज़रूरी तो नहीं कि बदलाव हमेशा नकारात्मक ही हो. बदलाव से लोग इसलिए डरते हैं कि हालात कहीं इससे ज़्यादा बुरे न हो जाएं, पर हो सकता है कि हालात बहुत अच्छे भी हो जाएं. हर बदलाव को सकारात्मक नज़रिए से देखिए और ख़ुद को उसके प्रति प्रोत्साहित कीजिए. अगर इस ख़ूबी को अपना लेंगे, तो ज़िंदगी आपके लिए काफ़ी आसान हो जाएगी.

  1. अपने बॉडी पोश्‍चर का ध्यान रखें

आजकल ज़्यादातर लोग डेस्कजॉब करते हैं, जिससे उन्हें कई हेल्थ प्रॉब्लम्स होेने लगी हैं. भविष्य में ऐसी कोई प्रॉब्लम न हो, इसके लिए अपने बॉडी पोश्‍चर पर अभी से ध्यान देना शुरू कर दें. जब आप अपने बॉडी पोश्‍चर के प्रति सतर्क रहते हैं, तो बिना कहे आप अपनी सेहत के प्रति भी सचेत हो जाते हैं. अपने बॉडी पोश्‍चर के प्रति सतर्कता आपको हेल्दी लाइफ का तोहफ़ा देगी.

  1. ख़ुद को अच्छी तरह समझें

अपने दोस्तों की शादियां अटेंड करते-करते यह तो समझ ही गए हैं आप कि आप की भी शादी की उम्र हो गई है, वो अलग बात है कि आप अभी भी अपने करियर को बेहतर बनाने में व्यस्त हैं. पर शहनाइयां अब ज़्यादा दूर नहीं, इसलिए ख़ुद को समझना शुरू कर दें. अपने सपनें, अपनी पसंद-नापसंद, अपनी चाहतें-ख़्वाहिशें सबको डायरी में उतारना शुरू कर दीजिए. कैसा लाइफ पार्टनर चाहते हैं, उसके बारे में सोचना शुरू कर दें, क्योंकि उसे समझने से पहले ख़ुद को तो अच्छी तरह जान लो.

  1. ख़ुद को कोसना छोड़ दें

अक्सर ऑफिस देरी से पहुंचने पर, किसी को वादा करके पूरा न कर पाने पर, हालात का सही आंकलन कर काम पूरा न कर पाने पर लोग ख़ुद को कोसना शुरू कर देते हैं. ग़लती का एहसास होना बहुत अच्छी बात है, पर उसके बाद होनेवाले आत्ममंथन से ख़ुद को न मथें. हालात जैसे हैं, उन्हें वैसे ही अपनाकर आप भूल को सुधार सकते हैं, जबकि ख़ुद को कोसने से न तो बिगड़ा काम बनेगा और न ही आप ख़ुश रहेंगे. हर हाल में ख़ुद को ख़ुश रखना सीखिए, आपकी ज़िंदगी ख़ुशहाल बनी रहेगी.

  1. अपने ड्रीम जॉब के लिए पूरी मेहनत करें

सभी पैरेंट्स अपने बच्चों को कहते रहते हैं, “बेटा कुछ साल जमके मेहनत कर ले, फिर लाइफ सेट हो जाएगी.” वो इसलिए ऐसा कहते हैं, क्योंकि उन्हें पता है, इस समय आपमें जो एनर्जी और काम को लेकर उत्साह है, वो समय के साथ धीरे-धीरे कम होता चला जाएगा, इसलिए यही सही समय है. अगर आप अपनी नौकरी से ख़ुश नहीं, तो उसे छोड़िए अपने ड्रीम जॉब के लिए मेहनत करना शुरू कीजिए. याद रखिए, आपकी उम्र समझौते की नहीं, बल्कि कुछ कर गुज़रने की है. इसलिए आगे बढ़िए अपने करियर के एक्सलरेटर का बटन दबाइए और 25वें साल से कुछ बेहतर कर दिखाइए.

– अनीता सिंह

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यदि हम अपने आप से पूछें कि हमारे लिए ख़ुशी की क्या परिभाषा है, हमें किस बात से ख़ुशी मिलती है, क्या हम वाकई ख़ुश हैं? तो शायद हम अपने ही सवालों का जवाब नहीं दे पाएंगे. ऐसा नहीं है कि हमें जवाब पता नहीं, लेकिन हम उसे स्वीकारना नहीं चाहते, क्योंकि हम अपने लिए कम और दूसरों के लिए ज़्यादा जीते हैं. हम ख़ुद से ज़्यादा लोगों की परवाह करने में लगे रहते हैं. हमें क्या पसंद है, हम क्या चाहते हैं, इससे ज़्यादा हमें इस बात की परवाह रहती है कि लोग क्या कहेंगे? आइए, हम आपको बताते हैं ख़ुशहाल ज़िंदगी जीने के 5 आसान तरीके.

Ways To Live Life

क्या आप वाकई खुश हैं?
क्या आपने कभी ख़ुद से ये सवाल किया है कि आप अपनी ख़ुशी के नाम पर जो भी करते हैं, क्या उसमें वाकई आपकी ख़ुशी होती है? चाहे त्योहार हो या शादी-ब्याह ऐसे ख़ास मौक़ों पर अपने लिए कुछ ख़रीदते समय भी हम ये सोचते रहते हैं कि ये चीज़ लोगों को पसंद आएगी या नहीं. आप अपनी ख़ुशी के बारे में कम और दूसरों की ख़ुशी के बारे में ज़्यादा सोचते रहते हैं. कई बार दूसरों पर अपना इंप्रेशन जमाने के लिए हम अपने बजट से ज़्यादा ख़र्च तो कर देते हैं, लेकिन बाद में उसकी भरपाई करना हमें मुश्किल लगने लगता है. दूसरों के बारे में सोच-सोचकर हम अपने सुंदर-सरल जीवन को इतना जटिल बना देते हैं कि कई बार हम अपनी पहचान ही खो देते हैं. हम ये भूल जाते हैं कि हमें किस चीज़ से ख़ुशी मिलती है.

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ख़ुशहाल ज़िंदगी जीने के 5 आसान तरीके

1) सुबह उठते ही सबसे पहले मुस्कुराएं और कहें कि मैं अपना/अपनी फेवरिट हूं. फिल्म जब वी मेट में करीना कपूर का यह डायलॉग सच में इतना पावरफुल है कि ये आपको ख़ुशी और एनर्जी से भर देता है. यकीन मानिए, जो लोग ख़ुद से प्यार करते हैं, वो दूसरों को भी हमेशा ख़ुश देखना चाहते हैं इसलिए सबसे पहले ख़ुद से प्यार करें.

2) सच्ची ख़ुशी पाने के लिए वही करें जो आपको अच्छा लगता है, न कि जो लोग कर रहे हैं.

3) हमेशा बड़ों की तरह बर्ताव न करें, कभी-कभी बच्चों की तरह खिलखिलाकर हंसें, उछलकूद करें, बेपरवाह होकर नाचे-गाएं, दोस्तों के साथ घूमने जाएं, सड़क पर खड़े होकर चाट का लुत्फ़ उठाएं… ऐसी छोटी-छोटी बातों में ही ज़िंदगी की असली ख़ुशी छुपी होती है.

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4) समस्या या परेशानियां सभी के जीवन में आती हैं, लेकिन जीवन में क़ामयाब वही होते हैं, जो परेशानियों से डरते नहीं, बल्कि उनका हल निकालने के रास्ते तलाशते हैं. आप भी ऐसा ही करें, आपके सोचने से समस्या हल नहीं होगी, उसके लिए आपको समस्या से बाहर निकलने के रास्ते तलाशने होेंगे.

5) कभी भी किसी और से अपनी तुलना न करें. ईश्‍वर ने हम सबको अलग और स्पेशल बनाया है इसलिए अपनी ख़ूबियों को पहचानें और अपनी अलग पहचान बनाएं. आपको ईश्‍वर ने जो भी हुनर दिया है, उसे निखारने की हमेशा कोशिश करते रहें, ताकि आप अपनी ज़िंदगी में कभी भी बोर न हों.

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किसी को ख़ूबसूरती का घमंड होता है, किसी को शिक्षा का तो किसी को धन का. अहंकार चाहे किसी भी चीज़ को हो ये व्यक्ति की सेहत के लिए अच्छा नहीं होता. अहंकार के नशे में चूर व्यक्ति स्वयं को ही सर्वोपरी समझता है और दूसरों को छोटा, लेकिन अहं के इस मद में वो ये भूल जाता है कि अहंकार ने बड़े-ब़डे संत महात्माओं का भी सर्वनाश कर दिया. सफलता के शिखर पर पहुंच आसान नहीं है लेकिन उससे भी ज़्यादा मुश्किल हैं वहां टिके रहना. जिसके लिए अहंकार से कोसो दूर रहना ज़रूरी है, क्योंकि जिस दिन आपके अंदर अंह आ गया समझ लीजिए उसी दिन से आपके पतन की उल्टी गिनती शुरू हो गई.

Signs Of An Arrogant Person

अहंकार से होता है विनाश
अहंकार किस तरह मनुष्य का विनाश कर सकती है इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण रावण है. महाज्ञानी रावण को अपनी शक्ति और ज्ञान का इतना अंह हो गया था कि वो ख़ुद को ईश्‍वर से भी ऊपर समझने लगा था और उसके इसी अहंकार ने उसका अस्तित्व मिटा दिया. आप कितने भी ज्ञानी व परोपकारी क्यों न हो अगर आप में अहंकार का ज़रा सा भी समावेश वो गया तो आपके सारे गुण अवगुण समान हो जाएंगे. जैसे आपने आज सुबह किसी गरीब व्यक्ति को दान तो किया लेकिन आप मन ही मन सोच रहे थे कि आप बहुत श्रेष्ठ हैं इसलिए आपके पास धन हैं, तो आपको दान का फल नहीं मिलेगा. अहंकार की पट्टी आंखों पर बंध जाने पर इंसान को अच्छे-बुरे, सही-ग़लत का भी ज्ञान नहीं रहता. अहंकार में अंधे व्यक्ति को अपना ग़लत काम भी सही लगने लगता है, और उसका यही रवैया उसो लोगों की नफ़रत का पात्र बना देती है.

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प्रगति में बाधक है अंहकार
कई लोगों को ये बात बिल्कुल अच्छी नहीं लगती कि कोई उनके काम पर उगंली उठाएं. वो हर हाल में ख़ुद को सही साबित करने की कोशिश करते हैं (चाहे वो ग़लत ही क्यों न हों). अगर कोई उनसे कह दे “आपका ये काम ठीक नहीं है” तो उन पर आसमान टूट पड़ता है, उनके अहं को ठेस पहुंच जाती हैं और ग़लती सुधारने की बजाय वो सोचने लगते हैं “उसकी इतनी मजाल कि वो मेरे काम में ग़लती निकाले.” ऐसे लोग जीवन में कभी आगे नहीं बढ़ पातें, क्योंकि वो अपनी ग़लती स्वीकार करके उसे सुधारने की कोशिश ही नहीं करतें. उल्टे ग़लती बताने वाले को ही भला-बुरा कहने लगते हैं. शायद इन लोगों को ज़रूरत है कबीर का ये दोहा पढ़ने की.
निंदक नियरे राखिए, आंगन कुटी छवाय
बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय

अहंकार से बचाती है विनम्रता
अगर आप जीवन में सफल होना चाहते हैं तो अहंकार को त्याग कर विनम्रता का दामन थाम लें. विनम्रता अहंकार को दूर रखती हैं. और ये संकट से भी बचाती है. आंधी-तूफान में एक सूखा पेड़ तो तुरंत टूट जाता है लेकिन फलों से लदा पेड़ नहीं टूटता, क्यों? क्योंकि वो झुका रहता है सूखे पेड़ की तरह अकड़कर खड़ा नहीं रहता. इसी तरह आप भी विनम्र बनकर मुश्किल परिस्थितियों का सामना कर सकते हैं. आज से आप भी विनम्रता को अपने जीवन का हिस्सा बना लीजिए फिर देखिए ज़िंदगी कितनी बदल जाती है. कल तक आपसे नफ़रत करने वाले लोग भी अब आपकी तरफ़ प्यार भरी नज़रों से देखने लगेंगे.

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आपके साथ भी ऐसा कई बार हुआ होगा जब आपने जाने-अनजाने अपने पैरेंट्स, पार्टनर या क़रीबी दोस्तों का दिल दुखाया होगा. उस समय ग़ुस्से में आपने उन्हें भला-बुरा कह तो दिया होगा, लेकिन बाद में पछताए होंगे कि आपको ऐसा नहीं करना चाहिए था. क्या आप अपने ऐसे व्यवहार या हरक़तों को बदल सकते हैं? बेशक, आप अपने दिमाग़ को अपनी भावनाओं पर कंट्रोल करना सिखा सकते हैं, ताकि आगे से आपकी ज़ुबान से ऐसा कोई वाक्य न निकले, जिसके लिए आपको बाद में पछताना पड़े. हां, इसके लिए आपको थोड़ी प्रैक्टिस ज़रूर करनी पड़ेगी.

How Emotionally Intelligent Are You

तलाशें नए रंग
रोज़ सुबह ये कल्पना करें कि आपका मन एक कोरी क़िताब है, जिस पर आपको स़िर्फ अच्छी बातें लिखनी हैं. अपनी कल्पनाओं के रंग भरने हैं. अब तक आपने या दूसरों ने जो भी बुरी बातें कहीं या सुनी, उन्हें आप अपने मन की क़िताब से मिटा देंगे और उनकी जगह ढेर सारी नई, अनोखी, दिलचस्प बातें लिखेंगे. यक़ीन मानिए, आपके ये पॉज़िटिव विचार आपके व्यवहार में भी झलकने लगेंगे. ऐसे में यदि कोई आपके सामने बुरा व्यवहार करता भी है, तो आप उसे अपने मन तक पहुंचने नहीं देंगे और हमेशा ख़ुश व एनर्जेटिक महसूस करेंगे.

कह दें मन की बात
जो लोग बीती बातों का बोझ मन में लिए फिरते हैं, उनके लिए मन को साफ़ रखना आसान नहीं होता. अतः किसी से भी कोई शिकवा-गिला हो तो उसे बातचीत द्वारा सुलझा लें, ताकि आपके मन में कोई ऐसी बात न रह जाए, जिसे आप कह न पाए हों, क्योंकि मन की कड़ुवाहट ही कई बार जाने-अनजाने ज़ुबान से आ जाती है. वैसे भी कह देने से मन हल्का हो जाता है.

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जब आए ग़ुस्सा
शॉपिंग करते समय यदि बच्चे ग़ैर ज़रूरी चीज़ के लिए ज़िद करने लगें, पति महोदय हमेशा की तरह बच्चे के स्कूल की पैंरेट्स टीचर्स मीटिंग में जाने से इनकार कर दें या फिर ऑफ़िस से थक कर आने पर सासू मां घर के कामों की लंबी लिस्ट थमा दें, तो आपको ग़ुस्सा आना लाज़मी है. ऐसी स्थिति में भी अपने ग़ुस्से पर कंट्रोल रख पाना ही इमोशनली इंटेलिजेंट होना है. आप अपनी भावनाओं पर जितना कंट्रोल रख पाएंगी, विपरीत स्थितियों से उतनी ही आसानी से निकल पाएंगी.

समाधान आसान है
ग़ुस्सा करने से पहले सोचें कि क्या इस स्थिति में आपका ग़ुस्सा करना वाजिब है? क्या आपके ग़ुस्सा करने से स्थिति सुधर जाएगी? ग़ुस्सा करने के अलावा आपके पास और क्या विकल्प है? हो सकता है, पति के साथ प्यार से बातचीत करके आप उन्हें अगली बार बच्चे की पैंरेट्स टीचर्स मीटिंग में जाने के लिए तैयार कर दें. इसी तरह सास व बच्चों को भी प्यार से अपने मन की बात समझा सकें.

हमारी नैतिक प्रकृति जितनी उन्नत होती है, उतना ही उच्च हमारा प्रत्यक्ष अनुभव होता है और उतनी ही हमारी इच्छा शक्ति अधिक बलवती होती है.
– स्वामी विवेकानंद

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आजकल लोग समय की कमी का रोना रोकर जीवन की छोटी-छोटी ख़ुशियों से भी हाथ धोने लगे हैं, जबकि सच्चाई ये है हम जिस चीज़ को ज़रूरी समझते हैं उसके लिए समय निकाल ही लेते हैं. अतः जिंदादिली से जीने के लिए अपनी प्राथमिकताएं तय करें और उनके अनुरूप अपने समय को विभाजित करें, क्योंकि यही है जीने की सही कला. साथ ही इन छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देकर रहें ख़ुश, संतुष्ट और ऊर्जावान.

1) अक्सर लोग क़ीमती चीज़ों में ख़ुशियां ढूंढ़ते हैं और उनकी चाह में दुखी रहते हैं, जबकि सच्चाई ये है कि सर्वश्रेष्ठ चीज़ें अक्सर मु़फ़्त ही मिलती हैं. प्रेम, वात्सल्य, संतान, हवा, पानी आदि के बिना हम जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते, लेकिन इन्हें पाने के लिए हमें पैसे ख़र्च नहीं करने पड़ते, ये तमाम चीज़ें हमें मु़फ़्त मिलती हैं. अत: छोटी-छोटी चीज़ों में ख़ुशियां ढूंढ़ें, फिर बड़ी ख़ुशियां आपके पास अपने आप आ जाएंगी.

2) हम ख़ुद अपनी शक्ति को नहीं पहचानते इसलिए कोई भी नया या चैलेंजिंग काम करते समय ख़ुद को कम न आंकने लगते हैं. आप ऐसा न करें. यदि आपकी सोच सकारात्मक है और आपको ख़ुद पर विश्‍वास है, तो आपकी आंतरिक शक्ति भी खुलकर सामने आएगी और आप बड़े से बड़ा काम कर पाएंगे.

3) दूसरों को समझने या उनसे प्यार करने से पहले ख़ुद से प्यार करें. यकीन मानिए, ज़िंदगी को देखने का आपका नज़रिया ही बदल जाएगा.

4) जिन चीज़ों से आपको चिढ़ है या जो चीज़ें आपके व्यवहार को नकारात्मक बनाती हैं, उनसे उलझने की बजाय उनसे किनारा कर लें. उनके बारे में सोचना ही छोड़ दें. इससे आप बहुत हल्का महसूस करेंगे.

5) समय सदा एक-सा नहीं रहता, ये सोचकर जीवन में आए हर बदलाव को बेख़ौफ़ स्वीकारें और परिस्थिति के अनुरूप ख़ुद को ढालने की कोशिश करें. ऐसा करने से आपको कठिनाइयों से जूझने की शक्ति मिलेगी.

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6) आपके पास क्या नहीं है, उसके बारे में सोचकर कुढ़ने की बजाय आपके पास क्या है, उसे देखकर ख़ुश होएं और आगे बढ़ने की कोशिश करते रहें. ऐसा करके आप जीवन का पूरा लुत्फ़ उठा पाएंगे.

7) हमारे शौक हमारे लिए टॉनिक का काम करते हैं. इनसे हमें ख़ुशी मिलती है और हम जीवन को नए उत्साह से जीते हैं. अतः अपने शौक़ के लिए ज़रूर टाइम निकालें.

8) हम जैसा सोचते हैं, जैसी भावना रखते हैं, हमारा शरीर, हमारी त्वचा भी वैसा ही रूप लेने लगती है. अतः अच्छा सोचें और स्वस्थ व ख़ूबसूरत नज़र आएं.

9) महान व कामयाब व्यक्ति एक दिन में उपलब्धि हासिल नहीं कर लेते, इसके लिए वो लगातार मेहनत करते हैं. अत: आप भी जीवन में आगे बढ़ने के लिए रोज़ थोड़ी मेहनत करें. परिस्थिति चाहे जैसी भी हो, आप हार न मानें. आपका ख़ुद पर विश्‍वास ही आपको आगे बढ़ाएगा.

10) कुछ पाने से पहले देना सीखें. प्रकृति का ये नियम है कि हम जो देते हैं, वही पाते हैं. जब आप देना सीख जाते हैं, तो आप में संतुष्टि का भाव आ जाता है और आप विनम्र बन जाते हैं. यही विनम्रता ही आपको जीवन में आगे ले जाती है.

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4

हमारे जीवन पर वास्तु का सकारात्मक प्रभाव पड़े, इसके लिए ज़रूरी है कि कई छोटी-छोटी बातों का हम ध्यान रखें.

 

जीवन को प्रभावशाली बनाने के लिए

* रसोई हमेशा अग्निकोण (दक्षिण-पूर्व) में ही होनी चाहिए.

* घर के पास कोई श्मशान भूमि नहीं होनी चाहिए.

* नए मकान-फैक्ट्री व उद्योग को शुरू करने के पहले भूमि-पूजन करके नींव का मुुहूर्त ज़रूर करना चाहिए. इस शुभ मुहूर्त में चांदी का सर्प बनाकर नींव
(ज़मीन) में किसी विद्वान ब्राह्मण के हाथों अवश्य डालना चाहिए.

* दरवाज़ा खुलते या बंद करते समय अटकना नहीं चाहिए. दरवाज़े का अटकना जीवन में रुकावट आने का संकेत है.

* मुख्य द्वार पर अंधेरा नहीं होना चाहिए. वह प्रकाशमय होना चाहिए, इसलिए वहां लाइट आदि की व्यवस्था ज़रूर करें.

* बेडरूम में सिरहाने की ओर तीरनुमा शार्प कॉर्नर नहीं होने चाहिए.

* कमरे को ताज़ा फूलों से सजाएं और समय-समय पर फूल बदलते रहें.

* जूते बाहर निकालकर ही घर में प्रवेश करें.

* ऑफिस में आपकी कुर्सी के पीछे दीवार ज़रूर होनी चाहिए, ये आपको निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करती है.

* उत्तर या पूर्व में लॉन, सुंदर पेड़-पौधे या फुलवारी होनी चाहिए.

* प्रवेश द्वार के सामने लोहार, धोबी एवं नाई की दुकान नहीं होनी चाहिए.

* यदि नैऋत्य (दक्षिण-पश्‍चिम) में भूसतह के नीचे पानी की टंकी है, तो उसे तुरंत वहां से हटवा दें.

* घर के सामने कचरा जमा न होने दें.

* उत्तर-पूर्व एवं उत्तर-पश्‍चिम दिशा से हवा और रोशनी आने की व्यवस्था बनाए रखें.

* शौचालय और रसोई घर का दरवाज़ा आमने-सामने नहीं होना चाहिए.

* पूर्व दिशा में तुलसी का पौधा होना चाहिए.

* घर में बहुत समय तक अंधेरा न रहने दें, रोज़ दीपक जलाएं, नियमित रूप से सफ़ाई करें, ताकि नकारात्मक ऊर्जा पनपने न पाए.

 

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स्वयं के कल्याण के लिए

* सोते समय सिर पूर्व अथवा दक्षिण में रखने के साथ-साथ छेदवाला तांबे का सिक्का तकिए के नीचे रखना चाहिए.

* कैक्टस आदि घर में लगाना वर्जित है.

* यदि घर की खिड़कियां बंद हों, विकृत या फिर टूटी-फूटी हों, तो परिवार की सम्पन्नता व ऐश्‍वर्य पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है.

* यदि रसोई की दीवार टूटी-फूटी या ख़राब हालत में है, तो घर के मालिक की पत्नी अस्वस्थ हो सकती है व उसका जीवन संघर्षयुक्त रहेगा.

* पूजा स्थल का निर्माण सदा ईशान (उत्तर-पूर्व) कोण में ही करना श्रेष्ठ होता है.

* अतिथियों का स्थान या कक्ष उत्तर या पश्‍चिम दिशा की ओर बनाना चाहिए.

* बेसमेन्ट बनाना आवश्यक हो, तो उत्तर और पूर्व में ब्रह्म स्थान को बचाते हुए बनाना चाहिए.

* घर की उत्तर दिशा में कुआं, तालाब, बगीचा, पूजा घर, तहखाना, स्वागत कक्ष, तिजोरी व लिविंग रूम बनाए जा सकते हैं.

* पश्‍चिम में पीपल, उत्तर में पाकड व दक्षिण में गूलर का वृक्ष अति उत्तम है.

* घर के मुख्य द्वार पर बेल नहीं चढ़ानी चाहिए.

* घर में लगाए गए वृक्षों की कुल संख्या सम होनी चाहिए.

* बरगद व पीपल के वृक्ष पवित्र माने जाते हैं, इसलिए इन्हें मंदिर आदि के आसपास लगाना चाहिए.

* गुलाब को छोड़कर कोई भी कांटेदार पौधा घर में नहीं लगाना चाहिए अन्यथा सुख-शांति में बाधा आ सकती है.

* जिन वृृक्षों या पौधों के पत्तों से दूध जैसा द्रव्य निकलता हो, ऐसे वृक्षों को भी नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि ये द्रव्य भी ऋणात्मक ऊर्जा के बहुत बड़े  स्रोत कहलाते हैं.

* यदि किसी फलहीन वृक्ष की छाया मकान पर पड़ती है, तो विभिन्न रोगों का सामना करना पड़ता है तथा कई तरह की परेशानियां भी पैदा हो सकती हैं.

 

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आत्मविश्‍वास बढ़ाने के लिए

* पूर्व दिशा की ओर स़फेद या लाल आसन पर बैठकर प्राणायाम करना चाहिए.

* घर की दक्षिण दिशा की तरफ़ मेन बेडरूम, स्टोर, सीढ़ियां व ऊंचे पेड़ होना शुभ होता है.

* किसी भी तरह की टूटी-फूटी या कटी-फटी वस्तु का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

* महत्वपूर्ण काम के लिए घर से बाहर जाते समय सुहागिन स्त्री या कुंवारी कन्या के दर्शन करके निकलना चाहिए.

* त्रिभुज आकृतिवाली ज़मीन का चुनाव घर के निर्माण के लिए कभी नहीं करना चाहिए.

* घर की बनावट ऐसी होनी चाहिए कि उसमें सूर्य और चांद का प्रकाश बिना किसी बाधा के पहुंचे. घर में कम से कम तीन घंटे के लिए सूर्य का प्रकाश  सीधा पड़ना चाहिए.

* सेवा कर्मियों को अमावस्या के दिन मिठाई खिलाएं.

* मुख्य प्रवेश द्वार आकर्षक व मजबूत होना चाहिए.

* घर के प्रवेश द्वार के सामने की ज़मीन भी ऊंची नहीं होनी चाहिए.

* हनुमान चालीसा, दुर्गासप्तशती या महामृत्युंजय का पाठ सुविधा व इच्छानुसार नियमित रूप से करना चाहिए.