positive thinking

डिप्रेशन के संकेत यदि वक़्त रहते समझ आ जाएं, तो इससे बहुत आसानी से बचा जा सकता है. यदि आपके घर में या आपके आसपास कोई व्यक्ति आपको डिप्रेस्ड दिखाई दे, तो खुद आगे बढ़कर उसकी मदद करें, उसके साथ वक़्त बिताएं, उसकी समस्या को समझने की कोशिश करें, उसे डिप्रेशन से बाहर निकलने में मदद करें. यदि इतना सब करने के बाद भी कोई सकारात्मक परिवर्तन न दिखाई दे, तो एक्सपर्ट की मदद लें. डिप्रेशन एक ऐसी नकारात्मक भावना है, जो व्यक्ति के जीवन से सारी खुशियां छीन लेती है. ऐसे व्यक्ति को जीवन में कुछ भी अच्छा नहीं लगता, कई बार तो उसकी जीने की इच्छा भी ख़त्म हो जाती है. ट्रांसफॉर्मेशन कोच हित्ती रंगनानी बता रही हैं डिप्रेशन को खुद से दूर करने के आसान और असरदार उपाय.

Depression

क्या हैं डिप्रेशन के कारण?
यदि किसी व्यक्ति के परिवार में अचानक किसी की मृत्यु हो जाए, किसी को बिज़नेस में बहुत बड़ा लॉस हो जाए, किसी की शादी टूट जाए… ऐसी कोई भी बात या घटना, जिसे आप चाहकर भी भूल नहीं पाते या जिसे सहन करना आपके लिए मुश्किल हो जाए, छह महीने बाद भी आप उस चीज़ को भूल न पाएं और आपका किसी चीज़ में मन न लगे, तो समझ जाइए कि ये डिप्रेशन है.

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क्या हैं डिप्रेशन के लक्षण?
डिप्रेशन की शुरुआत में चीज़ों में रुचि कम होने लगती है, फिर आप लोगों से कटने लगते हैं, सामाजिक समारोहों में जाने से कतराते हैं, घर से बाहर नहीं निकलना चाहते, आपका किसी काम में मन नहीं लगता, आप बहुत ज़्यादा सोने लगते हैं, आपका खाने का मन नहीं करता. जब ये स्थिति छह महीने बाद भी नहीं बदलती, तो मन में आत्महत्या के ख़्याल आने लगते हैं, जीने की रूचि ख़त्म होने लगती है.

डिप्रेशन को खुद से दूर करने के आसान और असरदार उपाय जानने के लिए देखें लाइफ कोच हित्ती रंगनानी का ये वीडियो:

आसान है डिप्रेशन को हराना
डिप्रेशन से बाहर निकलने के लिए सबसे ज़रूरी है किसी अपने का साथ, जिससे आप अपने मन की हर बात शेयर कर सकें, इसलिए अपने करीबी दोस्त या घर के करीबी सदस्य से अपने मन की बात शेयर करें. साथ ही अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव करें. नियमित एक्सरसाइज़, योग, ध्यान, सही आहार, पूरी नींद आदि से आप डिप्रेशन से बाहर निकल सकते हैं. यदि इतना सब करने के बाद भी कोई सकारात्मक परिवर्तन न दिखाई दे, तो एक्सपर्ट की मदद लें.

इस समय जब पूरे विश्व में डर और नकारात्मकता छाई हुई है, ऐसे में सकारात्मक जीवन जीने के 10 आसान उपाय आपके बहुत काम आ सकते हैं. इस समय आपके मन में भी आनेवाले कल को लेकर असमंजस और डर की भावना घर कर रही होगी. दिनभर घर में कैद रहना बोझ लग रहा होगा, लेकिन इस समय को यदि हम अच्छे अवसर की तरह देखें, तो हमें कुछ भी नकारात्मक नहीं लगेगा. दरअसल, परिस्थिति चाहे कितनी ही मुश्किल क्यों न हो, यदि हम उस स्थिति से बाहर निकलने की ठान लें, तो कुछ भी नामुमकिन नहीं. रात चाहे कितनी ही काली, कितनी ही गहरी क्यों न हो, रात के बाद सवेरा होता ही है. इसी तरह जीवन में चाहे कितनी ही तकलीफ क्यों न आए, दुःख के बादल छंट ही जाते हैं और ज़िंदगी खुशियों से मुस्कुराने लगती है. कोरोना के इस कहर में आइए, हम आपको सकारात्मक जीवन जीने के 10 आसान उपाय बताते हैं.

10 Easy Ways To Live A Positive Life

1) ईश्वर को धन्यवाद कहें
सुबह उठकर सबसे पहले मुस्कुराइए और ईश्वर को धन्यवाद कहिए कि उसने आपको इंसान के रूप में इतना सुंदर जीवन दिया है. जब हम ईश्वर को धन्यवाद कहते हैं, तो हमारे मन में अपने जीवन को लेकर संतुष्टि का भाव आता है और हम जीवन को सकारात्मक तरीके से देखने लगते हैं.

2) प्रार्थना करना कभी न भूलें
प्रार्थना करना सकारात्मक जीवन जीने का सबसे आसान तरीका है. प्रार्थना करना हमें नम्र बनाता है, दूसरों का भला सोचना सिखाता है इसलिए ईश्वर की हमेशा प्रार्थना करें. हमें स्कूल में भी इसीलिए पढ़ाई करने से पहले प्रार्थना करने के लिए कहा जाता है.

3) योग और मेडिटेशन को जीवन का हिस्सा बनाएं
जो लोग रोज़ योग और मेडिटेशन करते हैं, वो हमेशा सकारात्मक रहते हैं. योग और ध्यान हमें जीवन के हर उतार-चढ़ाव में आगे बढ़ना सिखाते हैं और अपने लक्ष्य से कभी भटकने नहीं देते, इसलिए योग और मेडिटेशन को जीवन का हिस्सा बनाएं और हमेशा सकारात्मक बने रहें.

4) हर हाल में ख़ुद से प्यार करें
आपकी परिस्थिति चाहे जैसी भी हो, हर हाल में ख़ुद से प्यार करें. जब आप ख़ुद से प्यार करेंगे, तो ही दूसरों को भी प्यार दे सकेंगे. जो लोग ख़ुद से प्यार करते हैं, वो हमेशा खुश रहते हैं और दूसरों को भी ख़ुशी देते हैं.

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10 Easy Ways To Live A Positive Life

5) फिट और हेल्दी रहें
हेल्थ इज़ वेल्थ- ये कहावत आपने ज़रूर सुनी होगी. हम चाहे कितने ही संपन्न क्यों न हों, यदि हम हेल्दी नहीं हैं, तो हम जीवन का लुत्फ़ नहीं उठा सकते. फिट और हेल्दी व्यक्ति हमेशा कॉन्फिडेंट नज़र आता है, इसलिए अपने शरीर का हमेशा ध्यान रखें और हमेशा फिट और हेल्दी बने रहें.

6) अच्छे कपडे पहनें और बनठन के रहें
ये बात सुनकर आपको हंसी आ सकती है, लेकिन आप ये बात आज़माकर देखिए. जब आप बनठन कर रहते हैं तो आपका कॉन्फिडेंस भी बढ़ जाता है. आप कहीं भी जाने, किसी से भी मिलने के लिए तुरंत तैयार हो जाते हैं, लेकिन आपने यदि अच्छे कपड़े नहीं पहने हैं या आप अच्छे नहीं दिख रहे हैं, तो आप लोगों से मिलने से कतराते हैं, आपका कॉन्फिडेंस कम हो जाता है.

7) दोस्तों से मिलें
आप चाहे कितने ही व्यस्त क्यों न हों, कुछ समय अपने दोस्तों के लिए ज़रूर निकालें. दोस्तों से मिलकर आपको ख़ुशी होगी और आपको ज़िंदगी और ख़ूबसूरत लगने लगती है. दोस्तों की तरह ही अपने से कम उम्र के लोगों के साथ समय बिताएं यानी अपने बच्चों के साथ समय बिताएं. बच्चों के साथ आप खुश भी रहेंगे और खुद को युवा भी महसूस करेंगे.

8) अपने शौक के लिए समय निकालें
हमारे शौक हमें कभी बूढ़ा नहीं होने देते, इसलिए अपनी बिज़ी लाइफस्टाइल में भी अपने शौक के लिए ज़रूर समय निकालें. जब आप अपना मनपसंद काम करते हैं, तो आप खुश रहते हैं और आपको ज़िंदगी से शिकायत नहीं रहती.

10 Easy Ways To Live A Positive Life

9) घूमने जाएं
नई जगहों की सैर करने और नए लोगों से मिलने से हम नई-नई चीज़ें सीखते हैं, जिससे जीवन के प्रति हमारी जिज्ञासा बनी रहती है. आपको जब भी समय मिले नई-नई जगहों की सैर ज़रूर करें. ट्रैवल करने से हम ये भी समझ पाते हैं कि हम दूसरों से कितना अच्छा जीवन जी रहे हैं.

10) हमेशा मुस्कुराएं
जो लोग हमेशा हंसते-मुस्कुराते रहते हैं, उन्हें हर कोई पसंद करता है. यदि आप भी चाहते हैं कि सब आपको प्यार करें, तो हमेशा हंसते-मुस्कुराते रहें. आप जो भी काम कर रहे हैं, उसे मन से करें. खुद से प्यार करें, अपने काम से प्यार करें, हमेशा ख़ुश रहें, तभी आप अपनी ज़िंदगी से प्यार कर सकते हैं.

सकारात्मक जीवन जीने वाले लोग हर हाल में खुश रहते हैं, इसलिए वो ज़िंदगी की हर तकलीफ से आसानी से बाहर निकल जाते हैं. रात चाहे कितनी ही काली, कितनी ही गहरी क्यों न हो, रात के बाद सवेरा होता ही है. इसी तरह जीवन में चाहे कितनी ही तकलीफ क्यों न आए, दुःख के बादल छंट ही जाते हैं और ज़िंदगी खुशियों से मुस्कुराने लगती है. यदि आप भी इसी सोच के साथ जीने लगेंगे, तो आप भी हर हाल में ख़ुश रहेंगे और ज़िंदगी से प्यार करने लगेंगे.

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How To Respect Yourself

आत्मसम्मान यानी सेल्फ रिस्पेक्ट (Self-respect) का सीधा-सरल अर्थ है ख़ुद का सम्मान करना और ये ख़ुद से प्यार करने का ही दूसरा नाम है. कुछ लोग इसे ईगो समझ बैठते हैं, लेकिन ईगो का मतलब होता है अपना महत्व जताना. ख़ासतौर से दूसरों के सामने ख़ुद को अधिक महत्वपूर्ण व उनसे बड़ा समझना.

क्यों ज़रूरी है आत्मसम्मान?

आत्मसम्मान जहां सकारात्मक भावना है, वहीं ईगो यानी अहम् नकारात्मक भाव है. ऐसे में आत्मसम्मान बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यदि आप अपना ही सम्मान नहीं करेंगे, तो दूसरे भी आपका सम्मान नहीं करेंगे.

  • जब आप ख़ुद का सम्मान करते हैं, तो आपको पता होता है कि कब और कहां ‘ना’ कहना ज़रूरी है.
  • आपको अपनी क़द्र करनी आती है, तो आप हर बात को भावनात्मक तरी़के से नहीं सोचते.
  • कोई आपका फ़ायदा उठा रहा है, यह आप जानते-समझते हैं, लेकिन फिर भी आप चुपचाप सहते हैं, तो इसका अर्थ है आप अपना सम्मान नहीं करते.
  • आत्मसम्मान इसलिए भी ज़रूरी है कि वो आपको परिपक्वता से वो निर्णय लेने की क्षमता देता है, जिसका असर आपके व आपसे जुड़े लोगों पर पड़ता है.
  • आत्मसम्मान आपके रिश्ते को बेहतर बनाता है. ख़ुश रहने के लिए भी यह बहुत ज़रूरी है.
  • जब आप ख़ुद से प्यार करते हो, तो आप तुलना करना बंद कर देते हो. आपको अपने हुनर और अपने काम करने के तरी़के पर विश्‍वास होता है.
  • जब आप अपने निर्णय, अपने संस्कारों पर भरोसा करते हो, तो आप और ज़िम्मेदार बनते हो.

क्या होता है, जब आत्मसम्मान की कमी होती है?

  • जब आप में आत्मसम्मान की कमी होती है, तो आप महज़ डोरमैट बनकर रह जाते हैं यानी लोग आपका इस्तेमाल करके छोड़ देते हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि आप बिना शिकायत के उनकी सुविधानुसार उनके लिए उपलब्ध रहोगे.
  • आप रिश्तों में ख़ुद को पूरी तरह भूल जाते हैं. आप रिश्ते में तो बंधते हो, लेकिन उसके बाद आप भूल जाते हो कि आप कौन हो और रिश्ते में आपकी अहमियत क्या है?
  • आप अटेंशन यानी दूसरों के ध्यानाकर्षण के लिए अजीब-सी चीज़ें व हरक़तें करने लगते हैं, चाहे ऑफिस हो या घर, ख़ुद को बेव़कूफ़ बनाते चले जाते हैं.
  • बुरी आदतों व लतों के शिकार होने लगते हो, क्योंकि आप अपने शरीर, अपने स्वास्थ्य व अपनी ज़रूरतों का सम्मान नहीं करते.
  • आप उन लोगों की फ़िक्र करते हो, जिन्हें आपकी परवाह तक नहीं और आप हर बार ख़ुद को समझाते हो कि आप जो कर रहे हो,  वो सही है. जबकि सामनेवाले व्यक्ति को इस बात से कोई लेना-देना तक नहीं होता कि आप उनके लिए क्या और कितना करते हो.
  • आप भावनात्मक, शारीरिक, मानसिक और मौखिक शोषण को बर्दाश्त व स्वीकार करते हो. आप एब्यूसिव पार्टनर को बर्दाश्त करते हो और जो आपको बार-बार बेइज़्ज़त करते हैं, आपका मज़ाक बनाते हैं, उन्हें आप दोस्त बनाए रखते हो.
  • आप कैज़ुअल सेक्स से परहेज़ नहीं करते और इसके पीछे कारण यह होता है कि आप सेक्स को एंजॉय करने के लिए नहीं, बल्कि ख़ुद को यह समझाने व महसूस कराने के लिए करते हो कि आपको भी कोई चाहता है.
  • आप दूसरों के हाथों की कठपुतली बन जाते हो. अपनी ज़िंदगी, अपने निर्णय भी दूसरों के मुताबिक़ लेते हो.
  • ख़ुद पर ध्यान देना छोड़ देते हो. ग्रूमिंग का ख़्याल नहीं रखते. सजना-संवरना बंद कर देते हो.

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Love Yourself

कैसे करें ख़ुद का सम्मान?

  • अपनी सोच, अपने संस्कारों पर विश्‍वास रखें और दूसरों की सुविधा के लिए उन्हें कभी न बदलें.
  • अपने शरीर का सम्मान करें. हेल्दी रहें, हेल्दी खाएं और ख़ुद के सजने-संवरने में भी दिलचस्पी लें.
  • अपनी हॉबीज़ को भी महत्व दें. अपने पैशन को लोगों से शेयर करें.
  • साफ़ कहना सीखें. कम्यूनिकेट करें. अगर आपको किसी का व्यवहार या बात असहज कर रहा है, तो उससे कहें. झिझकें नहीं, क्योंकि यदि लोगों को यह पता होता है कि आपको मैन्युपुलेट किया जा सकता है, तो वो आपका सम्मान न करके आपको यूज़ करने लगते हैं.
  • अपनी ख़ूबियों पर ध्यान दें, वहीं अपनी कमज़ोरियों को भी सहजता व ईमानदारी से स्वीकारें.
  • ख़ुद की कद्र करने के लिए बेहद ज़रूरी है कि आप अपने समय की भी कद्र करें. टाइम मैनेजमेंट सीखें और अपने समय को बेहतर कामों के लिए इस्तेमाल करें.
  • सकारात्मक लोगों के साथ रहें. उनसे कुछ अच्छा सीखने को मिले, तो ज़रूर उन्हें फॉलो करें.
  • इसी तरह बुज़ुर्गों का सम्मान करें और उनकी राय को महत्व दें. उनके अनुभव आपको बहुत कुछ सिखा सकते हैं.
  • नकारात्मक न बनें. हर बात के लिए, हर असफलता के लिए ख़ुद को ही दोषी या ज़िम्मेदार न ठहराएं. यह सोचें कि ग़लती किसी से भी हो सकती है. दोबारा कोशिश करना ही आपको हारने से बचाता है.
  • हां, अपनी ज़िम्मेदारियों से कभी पीछे न हटें.
  • अपने प्रति अपनी सोच को बदलें. उसे सकारात्मक बनाएं.
  • मेडिटेशन का सहारा लें, यह आपको रिफ्रेश और पॉज़िटिव बनाता है.
  • अपना ध्यान क्रिएटिव कार्यों में लगाएं और निगेटिव लोगों से दूर रहें.
  • आत्मविश्‍वासी बनें. निर्णय लेने से पीछे न हटें और अपने निर्णय पर भरोसा करें. यदि काम न भी बने, तो भी निराशा से बचें. यह सोचें कि कोशिश करना बेहतर होता है, बजाय कोशिश न करने के.

– कमलेश शर्मा

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जीवन के हर पल को उत्सव बनाना इसलिए ज़रूरी है, क्योंकि हमारे जीवन में अगले पल क्या होने वाला है, ये हम नहीं जानते. न हम अपना अतीत बदल सकते हैं और न ही भविष्य के बारे में जान सकते हैं, इसलिए जो पल हमारे पास है, उसे भरपूर जीएं. जीवन के हर पल को उत्सव बनाएं, सही मायने में सेलिब्रेशन इसे ही कहते हैं. जीवन के हर पल को उत्सव कैसे बनाएं? आइए, हम आपको बताते हैं.

Celebration Of Life

1) ख़ुश रहना सीखें
आपने अपने आसपास कुछ ऐसे लोगों को देखा होगा, जो हमेशा हंसते-मुस्कुराते रहते हैं. उन्हें देखकर लगता है जैसे उनके जीवन में कोई तकलीफ़ नहीं है और उनके लिए हर दिन उत्सव है. ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि वो लोग अपने जीवन और अपनी ख़ुशियों से बहुत प्यार करते हैं और ख़ुश रहने की हर मुमक़िन कोशिश करते हैं. जीवन के हर पल को उत्सव बनाने के लिए आप भी ऐसा ही करें.

2) ख़ुशी के मौ़के तलाशें
हम में से अधिकतर लोग ये समझते हैं कि ख़ुशी के मौ़के ही जीवन में ख़ुशियां लाते हैं, जैसे त्योहार, शादी, करियर में तरक्क़ी… लेकिन रोज़मर्रा की ख़ुशी? उसके बारे में हम सोचते ही नहीं हैं. ख़ुशी का कोई मौक़ा नहीं होता, आप चाहें तो हर पल ख़ुश रह सकते हैं और इसके लिए आपको अलग से कुछ करने की ज़रूरत भी नहीं है. आपको बस अपने जीने का नज़रिया बदलना होगा और अपने जीवन में पॉज़िटिविटी बनाए रखनी होगी. अतः त्योहार या किसी ख़ास दिन पर ही नहीं, हर रोज़ ख़ुश रहने की कोशिश करें, इससे जीवन में पॉज़िटिविटी आती है और हम जीवन का भरपूर लुत्फ़ उठा पाते हैं.

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Celebration Of Life

3) ख़ुशी जीवन का असली उत्सव है
सुख-दुख हर किसी के जीवन में लगे रहते हैं. आज सुख है, तो कल दुख भी हो सकता है. यदि हम दुख को अपने जीवन से बड़ा समझेंगे तो कभी ख़ुश नहीं रह पाएंगे, इसलिए दुख कितना बड़ा है इसके बारे में सोचने की बजाय ये सोचें कि इससे कैसे बाहर निकला जाए. जो लोग जीवन के प्रति पॉज़िटिव अप्रोच रखते हैं, वो मुसीबतों के बारे में कम और उनसे निपटने के रास्ते के बारे में ज़्यादा सोचते हैं, इसलिए वो बड़ी से बड़ी मुसीबतों का आसानी से सामना कर पाते हैं. अतः अपने जीवन और ख़ुशी को सबसे ज़्यादा महत्व दें और हमेशा ख़ुश रहें, क्योंकि ख़ुशी ही जीवन का असली उत्सव है.

4) त्योहार आपसे हैं, आप त्योहार से नहीं
यदि हम ख़ुशी को त्योहारों से जोड़कर देखें, तो यहां भी ख़ुशी कम और प्रेशर ज़्यादा नज़र आता है. त्योहारों की तैयारियों को लेकर, ख़ासकर महिलाएं इतना तनाव महसूस करती हैं कि वो त्योहार का आनंद ही नहीं उठा पातीं. ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि वो हर काम परफेक्ट करना चाहती हैं और ऐसा हो नहीं पाता. व़क्त के साथ महिलाओं की ज़िम्मेदारियां बढ़ गई हैं, घर-ऑफिस की दोहरी ज़िम्मेदारियों के चलते वो अपनी मां या सास की तरह त्योहारों की तैयारियां नहीं कर सकतीं. अतः वर्किंग महिलाएं और उनके परिवार के सदस्य इस बात को समझें और मिल-जुलकर त्योहार की तैयारियां करें. परिवार के सभी सदस्य न स़िर्फ रोज़मर्रा के काम, बल्कि त्योहार के समय भी घर की वर्किंग महिलाओं का हाथ बंटाएं. इससे महिलाओं का तनाव कम होगा और वो त्योहार का पूरा लुत्फ़ उठा सकेंगी.

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Celebration Of Life

5) जानें त्योहार का सही अर्थ
हम सभी त्योहार के मौ़के पर घर की साफ़-सफ़ाई करते हैं, घर को और ख़ुद को भी सजाते-संवारते हैं, पूजा-पाठ करते हैं ताकि घर में सुख-शांति-समृद्धि बनी रहे, लेकिन इन सबसे कहीं ज़्यादा ज़रूरी हमारा ख़ुश रहना है. यदि हम मन से ख़ुश नहीं हैं, तो इन सब तैयारियों का कोई मतलब नहीं है. यदि हम मन से ख़ुश हैं, तो हमें दुनिया की हर चीज़ अच्छी लगती है और हर दिन त्योहार लगता है. ख़ुशी को समझना, उसे महसूस करना और उसे दूसरों में बांटना ही सही मायने में त्योहार है.

जल्दी अमीर बनने के लिए करें ये वास्तु उपाय, देखें वीडियो:

 

गिन लेती है दिन बग़ैर मेरे गुज़ारे हैं कितने… भला कैसे कह दूं कि मां अनपढ़ है मेरी!

परिवार और उसमें भी मां का दर्जा सबसे ऊंचा होता है, ऐसे ही मर्मस्पर्शी सुविचार परिवार और मां से संबंधित आप पढ़ें और अपनी भावनाओं को फिर उन्हीं बचपन की यादों में महसूस करें, जहां मां के सीने से लगकर ही दुनिया की हर ख़ुशी मिल जाया करती थी.

 

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सीखें ख़ुश रहने के 10 मंत्र

आज की लाइफस्टाइल में खुश रहना भी किसी चुनौती से कम नहीं, पर इन टिप्स को आज़माकर आप भी रह सकते हैं खुश और पॉज़िटिव

1 आप हैं तो सबकुछ है, इसलिए सबसे पहले ख़ुद से प्यार करना सीखें.

2 अगर आप ख़ुश हैं, तो आप दूसरों को भी ख़ुश रखते हैं. इसलिए अपनी ख़ुशियों को प्राथमिकता दें.

3 यदि आपको किसी से कुछ कहना है, तो कह दीजिए, क्योंकि कह देने से मन हल्का हो जाता है. यदि आप मन की बात कह नहीं सकते, तो उसे काग़ज़ पर लिख दीजिए, ऐसा करने से भी आप हल्का महसूस करेंगे.

4 रिश्ते अनमोल होते हैं, इसलिए अपने रिश्तों की क़द्र करें और उन्हें पर्याप्त समय दें.

5 दोस्तों के साथ हम सबसे ज़्यादा ख़ुश रहते हैं, इसलिए दोस्तों के साथ समय गुज़ारें.

6 किसी भी मनमुटाव को मन में रखने से मन भारी हो जाता है और तनाव बढ़ जाता है, ख़ुश रहने के लिए माफ़ करना सीखें.

7 आपकी उम्र चाहे जो होे, अपने भीतर के बच्चे को कभी बड़ा न होने दें. उसे शरारतें करने दें, तभी आप ज़िंदगी की असली ख़ुशी महसूस कर सकेंगे.

8 आप चाहे कितने ही बिज़ी क्यों न हों, अपने शौक़ के लिए समय ज़रूर निकालें. इससे आपको कभी बोरियत नहीं महसूस होगी और आप ज़िंदगी से हमेशा प्यार करेंगे.

9 ख़ुशी पाने से कहीं ज़्यादा ख़ुशी देने से संतुष्टि मिलती है, इसलिए जीवन में ऐसे काम ज़रूर करें जिनसे आप दूसरों के चेहरे पर ख़ुशी बिखेर सकें.

10 स्वस्थ और फिट रहें, क्योंकि बीमार शरीर कभी ख़ुश नहीं  रह सकता.

– वंशज विनय

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सपनों को पूरा करना बहुत मुश्किल नहीं है, यदि आपका लक्ष्य सही हो, आप अपने लक्ष्य के लिए लगातार मेहनत कर रहे हों. अपने सपनों को कैसे पूरा करें, इसके बहुत ही आसान उपाय यहां पर हम आपको बता रहे हैं.

How To Fulfill Your Dreams

सपनों की उड़ान
ख़्वाबों की दुनिया बड़ी हसीन होती है, यहां हम जो चाहें बन सकते हैं, जो चाहें हासिल कर सकते हैं, लेकिन आप यदि अपने ख़्वाबों को हकीक़त में बदलना चाहते हैं, तो पूरी लगन, ताक़त और जोश के साथ उसे पूरा करने में जुट जाइए, यक़ीन मानिए सपना सच होते देर नहीं लगेगी.

जीने के लिए ज़रूरी हैं सपने
यदि ज़िंदगी में सपने नहीं होंगे तो इच्छाएं नहीं होगीं, इच्छाएं नहीं होगी तो हम प्रयास नहीं करेंगे और यदि हमने प्रयास बंद कर दिए तो ज़िंदगी जड़ हो जाएगी यानी हमारा जीवन ही ख़त्म हो जाएगा. उस स्थिति की कल्पना करिए जब आपके पास करने के लिए कुछ न रहे, आप किसी चीज़ को हासिल करने के बारे में सोचे ही नहीं… कैसी होगी ज़िंदगी? निश्‍चय ही बेरंग, नीरस और उबाऊ. जीने के लिए कुछ मकसद होना ज़रूरी है और वो मकसद तभी मिलता है जब हम सपने देखते हैं. सपना कुछ करने का, सपना कुछ बदलने का, सपना अपनों को ख़ुश रखने का या देश/समाज में कुछ बदलाव लाने का, लेकिन स़िर्फ सपने देखना ही काफ़ी नहीं है, बल्कि उसे पूरा करने में जी जान लगाना भी ज़रूरी है.

प्रेरणा देते हैं सपने
विप्रो कंपनी के मालिक अजीम प्रेमजी ने एक बार अपने भाषण में कहा था कि ‘सपने आपके सच्चे प्रेरक होते हैं, सपनों से आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती हैं. साथ ही ये लक्ष्य प्राप्त करने के लिए ऊर्जा भी देते हैं.’ मगर ये भी सच है कि ख़्याली पुलाव पकाने या हवा में महल बनाने से ज़िंदगी में कुछ हासिल नहीं होता. सपने तभी सार्थक है जब वो हकीक़त के धरातल से जुड़े रहें. माना कोई इंजीनियरिंग की पढ़ाई करते हुए यदि डॉक्टर बनने का सपना देखता है तो ऐसा सपनों का कोई मतलब नहीं है, लेकिन एक साधारण इंसान यदि टाटा और अंबानी जैसा अमीर बनने का सपना देखता है, तो इसमें कुछ ग़लत नहीं है. कभी एक मामूली सी नौकरी करने वाले धीरूभाई अंबानी जब करोड़ों की कंपनी खड़ी कर सकते हैं, तो आप क्यों नहीं?

पूरा करने के लिए देखें सपने
एक बार पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम ने कहा था ‘सपने सच होने के लिए ज़रूरी है कि पहले आप सपने तो देखें.’ उनकी बात सौ फीसदी सच है. जब तक आप घर ख़रीदने, आईपीएस, डॉक्टर, इंजीनियर, पत्रकार या कुछ और बनने का सपना ही नहीं देखेंगे, तो इस दिशा में प्रयास कैसे करेंगें? जब तक आप किसी चीज़ के बारे में सोचेंगे ही नहीं, तो उसे हासिल करने की तरक़ीब कैसे निकालेंगे? जीवन में क़ामयाबी की सीढ़ियां चढ़ने के लिए पहले सपने देखिए फिर पूरी शिद्दत, ईमानदारी और लगन से उसे पूरा करने की कोशिश में जुट जाइए. फिर देखिए ‘सपने भी कहीं सच होते हैं?’ वाली आपकी ये सोच कैसे बदल जाती है.

हार कर जीतने वाले को बाज़ीगर कहते हैं! शाहरुख़ ख़ान की फिल्म बाज़ीगर का ये डायलॉग यूं ही मशहूर नहीं हो गया. इस डायलॉग में जीवन का सार छुपा है. जब हम हार से हारते नहीं, लगातार जीतने की कोशिश करते रहते हैं, तो हमारी जीत निश्‍चित होती है. हम तब तक नहीं हारते, जब तक हम हार नहीं मान लेते.

How To Overcome Failure

 

सुपरस्टार भी हारते हैं
सुपरस्टार अमिताभ बच्चन, शाहरुख़ ख़ान से लेकर उद्योग जगत के बादशाह टाटा और बिड़ला तक सबने एक ही प्रयास में सफलता का स्वाद नहीं चखा, बल्कि हर बार हारने पर दुगुने जोश से आगे बढ़कर आज वो क़ामयाबी की बुलंदियों पर हैं. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन बार-बार चुनाव हारते रहे, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और आख़िरकार 52 वर्ष की उम्र में राष्ट्रपति का पद हासिल किया. कहने का अर्थ है कि आपकी हार में जीत का रास्ता छुपा होता है. ज़रूरत है तो बस उसे पहचानने की.

हार को जीत में बदलें
परिक्षा या प्यार में असफल हो जाने, नौकरी न मिलने और ऑफिस में कोई प्रॉजेक्ट हाथ से निकल जाने पर आप मायूस हो जाते हैं, लेकिन क्या मायूस होने से आपकी हार जीत में बदल सकती है? नहीं, क्योंकि कमान से निकला तीर और जुबान से निकले शब्द की ही तरह बीता व़क़्त भी लौटकर नहीं आता. आप अपने बीते कल को तो नहीं बदल सकते, लेकिन हार में छुपी जीते के अवसर को पहचानकर आप आने वाले कल को ज़रूर संवार सकते हैं.

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क्योंकि हारना ज़रूरी है
अगर आपको पता ही न हो कि कड़वाहट क्या होती है तो क्या आप कभी मिठास का असली म़जा ले सकते हैं? नहीं न, उसी तरह जब तक आप असफलता का स्वाद नहीं चख लेते, तब तक आपको सफलता के असली मायने समझ नहीं आएंगे. जिस तरह दुख के बाद मिली ख़ुशी अनमोल होती है, उसी तरह हार के बाद मिली जीत का कोई मोल नहीं होता. बार-बार प्रयास करके हासिल की गई चीज़ की अहमियत एक बार प्रयास करने पर मिली चीज़ से कहीं ़ज़्यादा होती है. हार के रूप में मिली ठोकरें हमें मज़बूत बनाती हैं, इसलिए इसे सकारात्मक रूप में लें.

हार से लें सबक
हार के आगे नतमस्तक होने की बजाय उसे एक सीख की तरह लें. एक बार यह जानने की कोशिश करें कि आख़िर आप हारे क्यों? क्या आपके प्रयासों में कहीं कोई कमी रह गई थी? अगर हां, तो अगली बार उसे दुुगुनी मेहनत से उन्हें सुधारने की कोशिश करें. और अगर नहीं, तो भी उदास न हों, बल्कि एक नए जोश से फिर आगे बढ़ने की कोशिश करें. हो सकता है, इससे बेहतर मौक़ा आपका इंतज़ार कर रहा हो. एक बात हमेशा याद रखें कि गिरते वही हैं जो आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं.

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कॉम्पटीशन दो तरह की होती है- पॉज़िटिव और निगेटिव. पॉज़िटिव कॉम्पटीशन में इंसान ख़ुद को अपने प्रतिस्पर्धी से आगे ले जाने के लिए जीतोड़ मेहनत करता है और उससे आगे निकल जाता है. इसे हेल्दी कॉम्पटीशन कहते हैं. लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो ख़ुद तो कुछ नहीं करते, लेकिन दूसरों को भी आगे नहीं बढ़ने देते. ऐसे लोग अपने से क़ामयाब लोगों की बुराई करते रहते हैं, उनके काम में रुकावट डालने की कोशिश करते रहते हैं. ऐसे लोग न ख़ुद आगे बढ़ पाते हैं और न ही दूसरों को आगे बढ़ता देख सकते हैं. ऐसे लोग अपने आसपास स़िर्फ निगेटिविटी ही फैलाते हैं. अत: सभी पैरेंट्स के लिए ये बेहद ज़रूरी है कि वे अपने बच्चों को हेल्दी कॉम्पटीशन सिखाएं, ताकि उनके बच्चे अपने दम पर आगे बढ़ें और क़ामयाबी हासिल करें.

Why Healthy Competition Is Good For Kids

बचपन से सिखाएं ये आदत
कई बच्चे जब खेल में हारने लगते हैं, तो गेम छोड़कर चले जाते हैं या फिर अपने दोस्तों से झगड़ने लगते हैं. ख़ुद चीटिंग करने के बावजूद वो दोस्तों पर इसका इल्ज़ाम लगाते हैं. ऐसे बच्चों को दूसरे बच्चे गेम में शामिल नहीं करना चाहते, जिससे उनके दोस्त भी नहीं बन पाते. उससे भी बड़ी समस्या ये है कि ऐसे बच्चे आगे चलकर कॉम्पटीशन का प्रेशर नहीं झेल पाते. अत: पैरेंट्स को चाहिए कि वे छोटी उम्र से ही अपने बच्चों को हेल्दी कॉम्पटीशन के बारे में सिखाएं. उन्हें बताएं कि गेम में जीत-हार तो लगी रहती है. आज आपका दोस्त जीता है, कल आप जीत सकते हैं, लेकिन गेम में आगे रहने के लिए आपको हमेशा मेहनत करनी होगी. तभी आप हमेशा गेम में आगे रह सकते हैं. ऐसा ही उसे पढ़ाई के बारे में भी बताएं कि अच्छे नंबर लाने के लिए उसे हमेशा ज़्यादा मेहनत करनी होगी.

ज़रूरी है हेल्दी कॉम्पटीशन
आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में हाईप्रोफाइल लाइफ़ स्टाइल की चाहत ने लोगों की प्रतिस्पर्धात्मक भावना को भी बढ़ा दिया है. हर कोई एक-दूसरे से बेहतर जीवन शैली चाहता है और इस चाहत को पूरा करने के चक्कर में लोग सामने वाले के पैर खींचकर आगे बढ़ने से भी परहेज नहीं करते. जबकि प्रतिस्पर्धा का मतलब दूसरों को पीछे खींचना नहीं, बल्कि ख़ुद आगे बढ़ना होता है. अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा सही मायने में और अपने दम पर क़ामयाबी पाए, तो उसे अभी से हेल्दी कॉम्पटीशन का महत्व और उसके गुण सिखाएं.

हर मोड़ पर है कॉम्पटीशन
आज के दौर में बिना कॉम्पटीशन के जीवन के किसी क्षेत्र मेें आगे बढ़ने की कल्पना ही नहीं की जा सकती. स्कूल-कॉलेज से लेकर ऑफिस तक इसका दायरा बहुत बड़ा है. स्कूल-कॉलेज में छात्रों के बीच एक-दूसरे से अच्छे नंबर लाने की होड़ लगी रहती है, तो ऑफिस में दूसरों को नीचा दिखाकर ख़ुद को श्रेष्ठ साबित करने वालों की तादाद ज़्यादा होती है. प्रतिस्पर्धा अगर ईमानदारी से की जाए तो इससे काम की गुणवत्ता सुधरती है, क्योंकि अपने सहकर्मी को अच्छा काम करता देखकर दूसरा व्यक्ति भी उससे आगे बढ़ने के लिए अपने काम में सुधार करेगा. लेकिन प्रतिस्पर्धा में अगर ईमानदारी न हो, तो इसका परिणाम हमेशा नकारात्मक ही होता है. अत: अपने बच्चे को सिखाएं कि अच्छे नंबर लाने या खेल में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए उसे अपने सहपाठियों से ज़्यादा मेहनत करनी होगी, तभी वो उनसे आगे बढ़ सकता है.

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आगे बढ़ने का भाव
अपने बच्चे को सिखाएं कि ज़िंदगी में किसी क़ामयाब इंसान को देखकर उसकी तरह बनने या उससे आगे बढ़ने की बात सोचने में कोई हर्ज़ नहीं है. अपने सहपाठी से आगे बढ़ने के लिए अगर आप जी तोड़ मेहनत करते हैं, तो उसमें भी कुछ ग़लत नहीं है, क्योंकि ये सब आप अपनी तरक़्क़ी के लिए कर रहे हैं. लेकिन आप अगर किसी को पीछे धकेल कर या किसी को नीचे गिराकर आगे बढ़ रहे हैं, तो ये प्रतिस्पर्धा की श्रेणी में कतई नहीं आएगा. अपने बच्चे को यह भी समझाएं कि ग़लत तरी़के से मिली क़ायमाबी की उम्र ज़्यादा लंबी नहीं होती इसलिए हमेशा ख़ुद को बेहतर बनाने का प्रयास करते रहना चाहिए और इसके हमेशा मेहनत करनी चाहिए.

नफ़रत या ईर्ष्या का भाव
कई बार आपका बच्चा भी अपने दोस्त को पढ़ाई या खेल में उससे आगे बढ़ते देख निराश हो जाता होगा, ऐसा भी हो सकता है कि आपके बच्चे में अपने दोस्त को लेकर जलन या ईर्ष्या की भावना आ जाए. ऐसा होना स्वाभाविक है, क्योंकि हर कोई आगे बढ़ना चाहता है और ख़ुद को दूसरों से बेहतर साबित करना चाहता है. यदि आपका बच्चा भी ऐसा सोचता है, तो इसमें कोई बुराई नहीं है. ऐसी स्थिति में अपने बच्चे को सिखाएं कि सफलता की राह में आगे बढ़ने के लिए वो अपने प्रतिस्पर्धी भाव को जीवित रखते हुए सच्चे दिल व पूरी लगन से अपना काम करता रहे. पढ़ाई या खेल में आगे बढ़ने के लिए जी-जान से मेहनत करे. ऐसा करके जल्दी ही वो अपने दोस्त से आगे निकल सकता है. अपने बच्चे को सिखाएं कि दिल से की गई मेहनत कभी बेकार नहीं जाती. देर से ही सही, मेहनत का फल अवश्य मिलता है.

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क्या आपके अंदर अचानक निराशा जन्म लेने लगी है? आपका आत्मविश्‍वास कम होता जा रहा है? आपको मन चाही सफलता नहीं मिल पा रही है? क्या आप अपने आपको लूज़र मानने लगे हैं? अगर ऐसा है, तो आप लो सेल्फइस्टीम के शिकार हो रहे हैं. यह एक मानसिक बीमारी है. यह धीरे-धीरे आपका आत्मविश्‍वास डिगाकर आपके अंदर इनफिरिऑरिटी कॉम्प्लेक्स पैदा कर सकती है. इसलिए समय रहते इस स्टेट ऑफ माइंड से निकलने की कोशिश करें. यक़ीन मानें, आप चाहेंगे तो इससे ज़रूर निकल जाएंगे.

Trust YourSelfइंसान की सेहत उसकी सबसे बडी दौलत है, संतोष उसका सबसे बड़ा ख़ज़ाना है और आत्मविश्‍वास उसका सबसे अच्छा दोस्त है. लिहाज़ा, इन तीनों को कभी अपने से दूर मत होने दीजिए. बस शांत मन से कोशिश जारी रखिए. इतना ही नहीं, आप अपनी अब तक की गई तमाम कोशिशों का मूल्यांकन भी करिए और यह पता लगाइए कि किन-किन वजहों से आप आशातीत सफलता हासिल करने से वंचित रह गए. एक बात शत-प्रतिशत सच है कि कहीं न कहीं आपसे चूक हुई है, इसलिए आप अपने समकालीन लोगों से पिछड़ गए. उस चूक को स्वीकार करके उसे दूर कीजिए. हर भूल को सुधारने की कोशिश कीजिए. भूल को सोर्स ऑफ इंसपिरेशन बनाइए न कि बाधा. यक़ीन मानिए, अगर आप अपना आत्मविश्‍वास नहीं खोएंगे तो सफलता आपके चरण चूमेगी.
यह सर्वविदित हो चुका है कि असफलता एक गंभीर बीमारी की तरह है. इस बीमारी से जो भी एक बार ग्रसित हुआ, वह जल्दी उबर नहीं पाता. इसीलिए पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम भी असफलता को एक बीमारी मानते थे और कहा करते थे कि आत्मविश्‍वास और कठिन परिश्रम असफलता रूपी इस बीमारी को मारने के लिए सर्वोत्तम औषधि है. उनके कहने का मतलब है कि अगर आपको अपने ऊपर भरोसा है, यानी आप आत्मविश्‍वास से भरे हैं, तो आप कठिन परिश्रम करने से बिल्कुल पीछे नहीं हटेंगे.जब आप कठिन परिश्रम करेंगे, तो ज़ाहिर है आप सफल होंगे.

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कह सकते हैं कि आत्मविश्‍वास जीवन का आधार है. अगर इसमें कमी हो रही है, तो इसका मतलब है कि आपके जीवन का आधार ही हिल गया है. किसी में कितना ही बड़ा गुण क्यों ना हो, अगर उसका आत्मविश्वास एक बार डिग गया तो वह गुमनामी की ज़िंदगी जीने को मजबूर हो जाता है. जीवन में सफलता पाने के लिए हर कोई हर संभव कोशिश करता रहता है. जो जिस क्षेत्र है उसी में प्रयासरत है, जैसे- छात्र अच्छा करियर बनाने के लिए पढ़ाई में मेहनत करता है और अच्छे नंबर से पास होकर एक अच्छी नौकरी का अपना सपना पूरा करता है. इसी तरह खिलाङी खेल में बेस्ट प्रर्दशन करके सफलता हासिल करता है. ऐसे ही हर कोई अपने-अपने क्षेत्रों में अपना बेस्ट देने का प्रयास करता है.

मनचाही सफलता बहुत कम लोगों को मिलती है या कह सकते हैं कि मन के मुताबिक़ कामयाबी उन्हीं लोगों को मिलती है, जो स्ट्रगल के समय अपना आत्मविश्‍वास नहीं खोते. मुसीबत और बाधाएं हर किसी के जीवन में आती हैं, जिससे उत्साह में कमी आ ही जाती है. इस तरह की परिस्थितियों में आत्मविश्‍वास उत्साह को बढ़ाता है और उसका परिणाम कामयाबी के रूप में मिलता है. स्वामी विवेकानंद जी कहते हैं, ”जिसमें आत्मविश्‍वास नही उसमें अन्य चीजों के प्रति कैसे विश्‍वास हो सकता है? आप कभी कमज़ोर न पड़ें. अपने आपको शक्तिशाली बनाओ. आपके भीतर अनंत शक्ति है, जो आपके हर काम को आसान कर देगी. बस, आपको अपना आत्मविश्‍वास बनाए रखना है.”
जीवन में किसी भी समस्या का हल न हो, ऐसा बिल्कुल नहीं है. जीवन की कई कमियां तो सकारात्मक विचारों से ही पूरी हो जाती हैं. दरअसल, आत्मविश्‍वास की कमी तब होती हैं, जब हम किसी बात से डरते हैं या ये मानने लगते हैं कि वह हमारे अंदर नहीं है. इन दोनों ही वजहों से उबरना आपके अपने हाथ में है. इसीलिए कई मनोचिकित्सक कहते हैं कि आत्मविश्‍वास बढ़ाने के लिए सबसे पहले ख़ुद पर यक़ीन करना सीखें. अपनी कमी को पूरा करने की कोशिश करें. अगर आप बहुत ज़्यादा सफल न हों तो भी बिल्कुल न डरे. यह प्रकृति का ही नियम है कि हर आदमी सभी कार्यों के लिए नहीं बना होता. इसलिए आपने कोशिश की, यही सबसे बड़ी जीत है.

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