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कल कभी नहीं आता (Tomorrow Never Comes)

कल कभी नहीं आता ये बात सौफीसदी सच है, क्योंकि जो लोग कल के भरोसे बैठे रहते हैं वो ज़िंदगी में कभी आगे नहीं बढ़ पाते. यदि आप भी आज का काम कल पर टालते हैं, तो आज ही ये आदत बदल दीजिए.

Tomorrow Never Comes

काल करे सो आज कर, आज करे सो अब
पल में प्रलय होगी बहुरी करेगा कब.
– कबीर दास

आपने कबीरदास जी का ये दोहा तो ज़रूर सुना होगा, लेकिन क्या आप इस पर अमल करते हैं? हम में से ज़्यादातर लोग किसी भी काम या नई शरुआत को हमेशा कल पर टाल देते हैं, मसलन- मैं कल सुबह उठकर पढ़ाई कर लूंगी, मैं कल से एक्सरसाइज़ ज़रूर करूंगी, कल से मैं टाइम पर उठूंगा, कल से मैं कुछ बुरा नहीं बोलूंगा, कल से मैं अपनी बेटी के लिए टाइम ज़रूर निकालूंगी… लेकिन कल के भरोसे ख़ुद से किए ये वादे हम कभी पूरे नहीं कर पाते, क्योंकि जब कल आज में बदल जाता है तो हम फिर उस बात को आने वाले कल पर टाल देते हैं. इस तरह ये सिलसिला कभी महीनों तो कभी सालों तक चलता रहता है.

कभी भी जो काम आप कर सकते हैं उसे कल पर मत टालिए.
– बेंजामिन फ्रैंकलिन

मैं कल से ये काम करूंगी/करूंगा, वाला आपका रवैया आपके आलसी होने का सबूत है. आपने अंग्रेजी की वो कहावत तो सुनी होगी ‘फेलियर ऑलेवज़ मेक्स एक्सक्यूज़ेस’ यानी असफल लोग हमेशा बहाने बनाते हैं. कुछ ऐसा ही हाल आलसी लोगों का भी है, ये हर काम को कल के भरोसे छोड़ देते हैं, क्योंकि इनमें काम करने की इच्छाशक्ति ही नहीं होती. ‘अरे! यार क्या करूं आज तुम्हारा काम नहीं कर पाई, बहुत बिज़ी थी,’ इसके विपरीत यदि आप उस काम को पूरा करने का दृढ़ संकल्प कर लेतीं, तो किसी भी तरह अपने बिज़ी शेड्यूल से समय निकाल ही लेतीं.

कल के भरोसे मत बैठो, मनुष्य का कल कौन जानता है.
– शतपथ ब्राह्मण

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हर घड़ी हर पल जीवन में बदलाव होते रहते हैं ऐसे में कल क्या होगा किसी को नहीं पता, तो फिर आप अनजाने कल के भरोसे क्यों बैठे रहते हैं? आपने अपनी बेटी से वादा किया कि कल से आप उसके साथ ज़्यादा व़क्त बिताएंगी, लेकिन कल आपको अचानक किसी मीटिंग में जाना पड़ा और अपना वादा नहीं निभा पाई, ज़ाहिर है इससे आपकी बेटी का दिल टूट जाएगा. इसलिए कल के भरोसे कोई काम छोड़ने से बेहतर है कि आप उसकी शुरुआत आज से ही करने की कोशिश करें. यदि आप अपने लक्ष्य में क़ामयाब होना चाहते हैं, तो कल का इंतज़ार किए बिना ख़ुद से कहें, ‘मैं ये काम आज, अभी से शुरू कर रहा/रही हूं.’ यक़ीन मानिए, आपका ये दृढ़ संकल्प आपको अपने मकसद में सफलता ज़रूर दिलाएगा.

इंतज़ार करने वाले को उतना ही मिलता है जो कोशिश करने वाले छोड़ देते हैं.
– अब्दुल कलाम

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कल जा चुका है, कल अभी आया नहीं है, हमारे पास केवल आज है, चलिए शुरुआत करते हैं.
– मदर टेरेसा

प्यार की 5 भाषाएं सीखने के लिए देखें वीडियो:

ज़िंदगी रुकती नहीं (Life Doesn’t Stop And Neither Should You)

ज़िंदगी रुकती नहीं, बदस्तूर चलती रहती है. हां, ज़िंदगी में कई बार ऐसे वाकये या हादसे हो जाते हैं जो ज़िंदगी की चाल ही बदल देते हैं, या यूं कहें कि आपको बेहद मायूस या हताश कर देते हैं, तोड़कर रख देते हैं, लेकिन ऐसे हालात से हार मानकर जीना छोड़ा नहीं जा सकता. ऐसे हालात में भी आगे बढ़कर ज़िंदगी को संवारना और नए सिरे से ज़िंदगी की शुरुआत करना ही ज़िंदादिली है. काम ज़रा मुश्किल है, मगर नामुमक़िन नहीं.

Life

चलना ही जीवन है
कितनी भी बड़ी आपदा या हादसा क्यों न हो जाए ज़िंदगी नहीं ठहरती. हां, कुछ समय के लिए इसकी रफ़्तार ज़रूरी धीमी पड़ जाती है, लेकिन फिर उसे अपने पुराने ढर्रे पर आना ही पड़ता है. चाहे जापान में आई सुनामी हो या उत्तराखंड में आई प्राकृतिक आपदा. इतने बड़े विनाश के बाद भी दोबारा ज़िंदगी धीरे-धीरे ही सही पटरी पर आने लगती है. क्योंकि जो हो गया हम उसे तो बदल नहीं सकते, जो अपना चला गया हम उसे वापस तो ला नहीं सकते, लेकिन अपने आने वाले कल को संवारने की कोशिश तो कर ही सकते हैं. हमें अपने और अपने आसपास के बाकी लोगों की ख़ातिर जो हो गया उसे भुलाकर जीवन में आगे बढ़ना ही पड़ता है.

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जब तक है आस
बात चाहे कुदरत के विनाश की हो या ज़िंदगी में किसी अन्य तरह की असफलता की, आगे बढ़ने के लिए सबसे ज़्यादा ज़रूरी है उम्मीद. माना किसी प्रोजेक्ट पर कई हफ्तों तक दिन-रात मेहनत करने के बाद वो डेटा किसी कारणवश आपके कंप्यूटर से उड़ गया. ऐसे में निश्‍चय ही आपके पैरों तले से ज़मीन खिसक जाएगी, लेकिन उस वक़्त अपना मानसिक संतलुन खोकर ख़ुद पर या किसी और पर ग़ुस्सा करने या फिर उदास होकर बैठ जाने से समस्या हल नहीं होगी. यदि आपको ख़ुद को साबित करना है, करियर में आगे बढ़ना हैं, तो दोबारा मेहनत करनी ही पड़ेगी. माना इसमें वक़्त लगेगा, मगर आगे बढ़ने के लिए तो आपको ये करना ही होगा. यक़ीन मानिए, यदि आप सकारात्मक सोच के साथ नई शुरुआत करते हैं, तो देर से ही सही आपको सफलता ज़रूर मिलेगी.

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जो बीत गई सो बात गई
‘टूटे तारों पर कब अंबर शोक मनाता है, जो बीत गई सो बात गई’, हरिवंश राय बच्चन की कविता की इन पंक्तियों का सही अर्थ समझकर यदि आप जीवन में उतार लेंगे, तो मुश्किल से मुश्किल हालात से भी ख़ुद को उबारकर जीवन में आगे बढ़ सकेंगे. ज़िंदगी में बहुत से ऐसे लोग, चीज़ें, बातें और पल होते हैं, जिनके छिन जाने पर आपको बहुत दुख होता है या आपकी पूरी ज़िंदगी ही बदल जाती है. कई बार तो लगता है जैसे जीने का कोई मक़सद ही नहीं बचा, मगर जब तक आप ज़िंदा है आपको अतीत को भुलाकर आगे बढ़ना ही होगा, वरना आप ज़िंदा होकर भी ज़िंदगी जी नहीं पाएंगे.

क्या वाकई रिश्ते स्वर्ग में तय होते हैं? जानने के लिए देखें वीडियो: 

अपने मुंह मियां मिट्ठू (Self Praise: Are You Hurting Or Helping?)

अपने मुंह मियां मिट्ठू लोग अपने सिवाय किसी और को कुछ समझते ही नहीं हैं. अपने मुंह मियां मिट्ठू लोगों को आत्मप्रशंसा की इतनी बुरी लत होती है कि हर किसी के सामने अपनी बड़ाई करने लगते हैं. उन्हें लगता है कि ऐसा करके वे ख़ुद को श्रेष्ठ साबित कर सकते हैं, जबकि आत्मप्रशंसा ओछेपन की निशानी है.

Self Praise

 

बड़े बड़ाई न करें, बड़े बोले न बोल
रहिमन हीरा कब कहे, लाख टका मेरा मोल

रहीमदास का ये कथन बिल्कुल सटीक है. जो लोग वाकई में ज्ञानी और गुणवान होते हैं वो अपने गुणों का बखान नहीं करते, बल्कि चुपचाप अपना काम करते रहते हैं. क्योंकि उनका काम ही उनके बारे में सब कुछ कह देता है. इसकी जीती जागती मिसाल स्वामी विवेकानंद, रविंद्रनाथ टैगौर, महात्मा गांधी और सुभाषचंद्र बोस जैसे इतिहास पुरुष हैं, जिनका लोहा पूरी दुनिया मानती है, लेकिन उन्होंने ख़ुद कभी अपनी शेखी नहीं बघारी.

अपने मुंह मियां मिट्ठू लोग दरअसल अपनी कमियां छुपाते हैं
जिन लोगों में योग्यता नहीं होती वो ही ख़ुद की प्रशंसा करके अपनी कमियां छुपाने की कोशिश करते हैं. अपनी हार के लिए ख़ुद को ज़िम्मेदार मानने की बजाय उसका दोष परिस्थितियों व दूसरे लोगों पर मढ़ देते हैं, जैसे जॉब या प्रमोशन न
मिलने पर ऐसे शख़्स कहेंगे, “मुझे काम का अनुभव तो था, लेकिन लोगों को इसकी कद्र नहीं… मेरी सिफ़ारिश करने वाला कोई नहीं था या मेरी किसी बड़े आदमी से पहचान नहीं थी, इसलिए मुझे ये नौकरी/प्रमोशन नहीं मिली.’ माना किसी संदर्भ में ये बातें सही हो सकती है, लेकिन आप में यदि प्रतिभा व योग्यता है, तो निश्‍चय ही आपको सफलता मिलेगी. इसके लिए आपको अपने मुंह मियां मिट्ठू बनने की ज़रूरत नहीं.

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अपने मुंह मियां मिट्ठू लोग छोटी सोच के होते हैं
अपनी तारीफ़ करके यदि आपको ऐसा लगता है कि दूसरे आपसे प्रभावित हो जाएंगे और उनकी नज़रों में आपका क़द बढ़ जाएगा तो आप ग़लत हैं. उल्टा आप उनकी नज़रों में छोटे बन जाएंगे, क्योंकि कोई भी इंसान अपनी कथनी से नहीं, बल्कि करनी से बड़ा होता है. शांति व संजीदगी सज्जन व ज्ञानी व्यक्तियों की पहचान है. जिस तरह पूरा भरा घड़ा छलकता नहीं है वैसे ही योग्य व सक्षम व्यक्ति भी ख़ुद अपनी बड़ाई नहीं करते, बल्कि दुनिया उनके गुणों का बखान करती है. दरअसल, प्रशंसा की भूख अयोग्य व्यक्तियों में ही होती है. इस संदर्भ में महात्मा गांधी ने बिल्कुल सही कहा है, “जो लोग अपनी प्रशंसा के भूखे होते हैं, वो साबित कर देते हैं कि उनमें योग्यता नहीं है.”

अपने मुंह मियां मिट्ठू लोग स़िर्फ अपनी शेखी बघारते हैं
आप अपने परिवार व समाज में सबकी मदद करते हैं, मुश्किल हालात में जी जान लगाकर आप उनकी सहायता करते हैं. इस काम के लिए जब दूसरे आपकी प्रशंसा करें तब तो ठीक है, लेकिन आप अगर ख़ुद ही अपनी शेखी बघारने लगेंगे तो आपके सारे किए कराए पर पानी फिर जाएगा. तुलसीदास जी ने भी कहा है “आत्मप्रशंसा वह आग है जिसमें कर्तव्य का जंगल जल जाता है.”

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सफलता के 10 सूत्र (10 Ways To Achieve Your Dream)

सफलता के 10 सूत्र आपकी ज़िंदगी बदल सकते हैं. सफल बनने और अपने सपनों को पूरा करने के लिए आप भी अपनाएं सफलता के 10 सूत्र.

10 Ways To Achieve Your Dream

1) निर्धारित लक्ष्य के बिना आप जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफल नहीं हो सकते. यदि आपको अपनी मंजिल का ही पता नहीं होगा तो भला रास्ता कैसे तय करेंगे? स्पष्ट लक्ष्य के अभाव में आप अंजान रास्तों पर यूं ही भटकते रहेंगे. अतः क़ामयाबी पाने के लिए सबसे पहले अपना लक्ष्य निर्धारित करिए और फिर पूरी ईमानदारी और मेहनत से उसे हासिल करने में जुट जाइए.

2) कठिनाइयों में भी अपने लक्ष्यों का पीछा करते रहें, और विपत्तियों को अवसरों में बदल दें.
– धीरूभाई अंबानी

3 ) कोई लक्ष्य मनुष्य के साहस से बड़ा नहीं, हारा वही जो लड़ा नहीं.
– अज्ञात

4) आप कभी भी लक्ष्य निर्धारित करने या नया सपना देखने के लिए बहुत बूढ़े नहीं होते.
– सी.एस. लुईस

5) अपने मिशन में क़ामयाब होने के लिए आपको अपने लक्ष्य के प्रति एकचित्त निष्ठावान होना पड़ेगा.
– अज्ञात

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6) लक्ष्यों के बारे में सबसे महत्वपूर्ण चीज़ है उनका होना.
– जेफ्री ऍफ ऐबर्ट

7 ) स्पष्ट और लिखित लक्ष्य जिनके होते हैं, वे कम समय में ही इतनी सफलता प्राप्त करते हैं जितनी कि बिना ऐसे लक्ष्यों वाले सोच भी नहीं सकते.
– ब्रायन ट्रेसी

8 ) लक्ष्य न होने के साथ समस्या ये है कि आप अपना समस्त जीवन मैदान में ऊपर नीचे दौड़ते रहने के बाद भी कोई जीत हासिल नहीं कर पाते.
– बिल कोपलेंड

9 )जब कोई व्यक्ति अपने लक्ष्य को इतनी गहराई से चाहे कि वह उसके लिए अपना सब कुछ दांव पर लगाने के लिए तैयार हो, तो उसका जीतना सुनिश्‍चित है.
– नेपोलियन हिल

10 ) मुट्ठीभर संकल्पवान लोग जिनकी अपने लक्ष्य में दृढ़ आस्था है, इतिहास की धारा को बदल सकते हैं.
– महात्मा गांधी

जानें ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी की सफलता का राज़, देखें वीडियो:

 

अपने सपनों को पूरा कैसे करें? (How To Fulfill Your Dreams)

How To Fulfill Your Dreams

सपनों को पूरा करना बहुत मुश्किल नहीं है, यदि आपका लक्ष्य सही हो, आप अपने लक्ष्य के लिए लगातार मेहनत कर रहे हों. अपने सपनों को कैसे पूरा करें, इसके बहुत ही आसान उपाय यहां पर हम आपको बता रहे हैं.

How To Fulfill Your Dreams

सपनों की उड़ान
ख़्वाबों की दुनिया बड़ी हसीन होती है, यहां हम जो चाहें बन सकते हैं, जो चाहें हासिल कर सकते हैं, लेकिन आप यदि अपने ख़्वाबों को हकीक़त में बदलना चाहते हैं, तो पूरी लगन, ताक़त और जोश के साथ उसे पूरा करने में जुट जाइए, यक़ीन मानिए सपना सच होते देर नहीं लगेगी.

जीने के लिए ज़रूरी हैं सपने
यदि ज़िंदगी में सपने नहीं होंगे तो इच्छाएं नहीं होगीं, इच्छाएं नहीं होगी तो हम प्रयास नहीं करेंगे और यदि हमने प्रयास बंद कर दिए तो ज़िंदगी जड़ हो जाएगी यानी हमारा जीवन ही ख़त्म हो जाएगा. उस स्थिति की कल्पना करिए जब आपके पास करने के लिए कुछ न रहे, आप किसी चीज़ को हासिल करने के बारे में सोचे ही नहीं… कैसी होगी ज़िंदगी? निश्‍चय ही बेरंग, नीरस और उबाऊ. जीने के लिए कुछ मकसद होना ज़रूरी है और वो मकसद तभी मिलता है जब हम सपने देखते हैं. सपना कुछ करने का, सपना कुछ बदलने का, सपना अपनों को ख़ुश रखने का या देश/समाज में कुछ बदलाव लाने का, लेकिन स़िर्फ सपने देखना ही काफ़ी नहीं है, बल्कि उसे पूरा करने में जी जान लगाना भी ज़रूरी है.

प्रेरणा देते हैं सपने
विप्रो कंपनी के मालिक अजीम प्रेमजी ने एक बार अपने भाषण में कहा था कि ‘सपने आपके सच्चे प्रेरक होते हैं, सपनों से आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती हैं. साथ ही ये लक्ष्य प्राप्त करने के लिए ऊर्जा भी देते हैं.’ मगर ये भी सच है कि ख़्याली पुलाव पकाने या हवा में महल बनाने से ज़िंदगी में कुछ हासिल नहीं होता. सपने तभी सार्थक है जब वो हकीक़त के धरातल से जुड़े रहें. माना कोई इंजीनियरिंग की पढ़ाई करते हुए यदि डॉक्टर बनने का सपना देखता है तो ऐसा सपनों का कोई मतलब नहीं है, लेकिन एक साधारण इंसान यदि टाटा और अंबानी जैसा अमीर बनने का सपना देखता है, तो इसमें कुछ ग़लत नहीं है. कभी एक मामूली सी नौकरी करने वाले धीरूभाई अंबानी जब करोड़ों की कंपनी खड़ी कर सकते हैं, तो आप क्यों नहीं?

पूरा करने के लिए देखें सपने
एक बार पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम ने कहा था ‘सपने सच होने के लिए ज़रूरी है कि पहले आप सपने तो देखें.’ उनकी बात सौ फीसदी सच है. जब तक आप घर ख़रीदने, आईपीएस, डॉक्टर, इंजीनियर, पत्रकार या कुछ और बनने का सपना ही नहीं देखेंगे, तो इस दिशा में प्रयास कैसे करेंगें? जब तक आप किसी चीज़ के बारे में सोचेंगे ही नहीं, तो उसे हासिल करने की तरक़ीब कैसे निकालेंगे? जीवन में क़ामयाबी की सीढ़ियां चढ़ने के लिए पहले सपने देखिए फिर पूरी शिद्दत, ईमानदारी और लगन से उसे पूरा करने की कोशिश में जुट जाइए. फिर देखिए ‘सपने भी कहीं सच होते हैं?’ वाली आपकी ये सोच कैसे बदल जाती है.

ग़ुस्सा कम करने और मन शांत करने के आसान उपाय (Anger Management: How To Deal With Anger)

Anger Management, How To Deal With Anger

आज के कॉम्पटीशन के युग में जितनी सुख-सुविधाएं मौजूद हैं, तनाव उससे भी कहीं ़ज़्यादा हैं. घर में सुख-सुविधाएं जुटाने का तनाव, ऑफ़िस में अच्छे परफ़ॉर्मेंस का तनाव… नतीज़ा, बात-बात में ग़ुस्सा, चिड़चिड़ापन… चाहकर भी हम नॉर्मल नहीं रह पाते. बढ़ते काम के घंटों ने जैसे दिन रात के फ़र्क़ को ही मिटा दिया है, जिसके चलते अक्सर ऑफ़िस का तनाव घर तक आ पहुंचता है और हमारी पर्सनल लाइफ़ को भी डिस्टर्ब करने लगता है. ग़ुस्से की स्थिति में हम बात-बात पर चिढ़ने लगते हैं, किसी का ग़ुस्सा किसी और पर निकालने लगते हैं. इससे न स़िर्फ हमारा मूड ख़राब रहता है, बल्कि सेहत भी बिगड़ने लगती है.

Anger Management, How To Deal With Anger
ग़ुस्से के कारण निवारण के बारे में जानते हुए भी आख़िर क्यों हम इस पर काबू नहीं कर पाते..? क्योंकि हम दूसरों से ही नहीं, अपने आप से भी ज़रूरत से ़ज़्यादा उम्मीदें करने लगते हैं. हम हर बात में बेस्ट और पऱफेक्शन ढूंढ़ने लगते हैं, जोकि हर बार मुमक़िन नहीं होता और ये भी मुमक़िन नहीं है कि किसी व्यक्ति को कभी ग़ुस्सा न आए. ख़ुशी, ग़म, प्यार-दुलार जैसी तमाम भावनाओं की तरह ही ग़ुस्सा आना भी मानव स्वभाव है. हां, जब इसकी अति होने लगती है तो इसके परिणाम भी नकारात्मक होने लगते हैं.

थोड़ा ग़ुस्सा ज़रूरी है
ग़ुस्सा हमारी ताकत बन सकता है, यदि हम उसका सही समय पर सही प्रयोग करें. कई बार हम ग़ुस्से में वो काम भी कर जाते हैं, जिसकी हमने कभी कल्पना भी नहीं की होती है. यानी ग़ुस्सा जब ताकत बन जाए, तो व्यक्ति को असाधारण प्रतिभा का धनी भी बना सकता है, लेकिन ग़ुस्सा तभी असरदार हो सकता है, जब वह किसी का अहित न करे, किसी को आहत न करे. अतः थोड़ा-बहुत ग़ुस्सा आता भी है, तो उसे अपनी ताक़त बनाइए, कमज़ोरी नहीं.

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कब आता है ग़ुस्सा?
जब हम कोई काम बड़ी लगन व मेहनत से करते हैं, लेकिन संतुष्टिजनक नतीज़ा नहीं मिलता.
जब कभी हार का सामना करना पड़ता है.
हालात, आस-पास के लोग या फिर ज़िंदगी की गाड़ी जब हमारे हिसाब से नहीं चलती. शारीरिक कमज़ोरी या लंबी बीमारी.

कैसे पाएं ग़ुस्से पर काबू?
* कारण जानने की कोशिश करें.
* यदि स्थिति आपके अनुरूप नहीं हो सकती तो ख़ुद को स्थिति के अनुरूप ढाल दें.
* जिस माहौल या लोगों के बीच आपको ग़ुस्सा आता है, उनसे दूर रहने की कोशिश करें.
* ग़ुस्से की स्थिति में अपना मन उन चीज़ों में लगाने की कोशिश करें, जिनसे आपको ख़ुशी या संतुष्टि मिलती है.
* जब ग़ुस्सा आए, तो अपने आपको किसी रचनात्मक कार्य में व्यस्त कर दें.
* उल्टी गिनती गिनें. इससे ग़ुस्से पर से आपका ध्यान हट जाएगा.
* लंबी-लंबी सांसें लें. ये एक तरह से डी-टॉक्सीन का काम कर के मन को शांत करता है.

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चेहरे पर न बांधें अहंकार की पट्टी (Signs Of An Arrogant Person)

Signs Of An Arrogant Person

किसी को ख़ूबसूरती का घमंड होता है, किसी को शिक्षा का तो किसी को धन का. अहंकार चाहे किसी भी चीज़ को हो ये व्यक्ति की सेहत के लिए अच्छा नहीं होता. अहंकार के नशे में चूर व्यक्ति स्वयं को ही सर्वोपरी समझता है और दूसरों को छोटा, लेकिन अहं के इस मद में वो ये भूल जाता है कि अहंकार ने बड़े-ब़डे संत महात्माओं का भी सर्वनाश कर दिया. सफलता के शिखर पर पहुंच आसान नहीं है लेकिन उससे भी ज़्यादा मुश्किल हैं वहां टिके रहना. जिसके लिए अहंकार से कोसो दूर रहना ज़रूरी है, क्योंकि जिस दिन आपके अंदर अंह आ गया समझ लीजिए उसी दिन से आपके पतन की उल्टी गिनती शुरू हो गई.

Signs Of An Arrogant Person

अहंकार से होता है विनाश
अहंकार किस तरह मनुष्य का विनाश कर सकती है इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण रावण है. महाज्ञानी रावण को अपनी शक्ति और ज्ञान का इतना अंह हो गया था कि वो ख़ुद को ईश्‍वर से भी ऊपर समझने लगा था और उसके इसी अहंकार ने उसका अस्तित्व मिटा दिया. आप कितने भी ज्ञानी व परोपकारी क्यों न हो अगर आप में अहंकार का ज़रा सा भी समावेश वो गया तो आपके सारे गुण अवगुण समान हो जाएंगे. जैसे आपने आज सुबह किसी गरीब व्यक्ति को दान तो किया लेकिन आप मन ही मन सोच रहे थे कि आप बहुत श्रेष्ठ हैं इसलिए आपके पास धन हैं, तो आपको दान का फल नहीं मिलेगा. अहंकार की पट्टी आंखों पर बंध जाने पर इंसान को अच्छे-बुरे, सही-ग़लत का भी ज्ञान नहीं रहता. अहंकार में अंधे व्यक्ति को अपना ग़लत काम भी सही लगने लगता है, और उसका यही रवैया उसो लोगों की नफ़रत का पात्र बना देती है.

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प्रगति में बाधक है अंहकार
कई लोगों को ये बात बिल्कुल अच्छी नहीं लगती कि कोई उनके काम पर उगंली उठाएं. वो हर हाल में ख़ुद को सही साबित करने की कोशिश करते हैं (चाहे वो ग़लत ही क्यों न हों). अगर कोई उनसे कह दे “आपका ये काम ठीक नहीं है” तो उन पर आसमान टूट पड़ता है, उनके अहं को ठेस पहुंच जाती हैं और ग़लती सुधारने की बजाय वो सोचने लगते हैं “उसकी इतनी मजाल कि वो मेरे काम में ग़लती निकाले.” ऐसे लोग जीवन में कभी आगे नहीं बढ़ पातें, क्योंकि वो अपनी ग़लती स्वीकार करके उसे सुधारने की कोशिश ही नहीं करतें. उल्टे ग़लती बताने वाले को ही भला-बुरा कहने लगते हैं. शायद इन लोगों को ज़रूरत है कबीर का ये दोहा पढ़ने की.
निंदक नियरे राखिए, आंगन कुटी छवाय
बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय

अहंकार से बचाती है विनम्रता
अगर आप जीवन में सफल होना चाहते हैं तो अहंकार को त्याग कर विनम्रता का दामन थाम लें. विनम्रता अहंकार को दूर रखती हैं. और ये संकट से भी बचाती है. आंधी-तूफान में एक सूखा पेड़ तो तुरंत टूट जाता है लेकिन फलों से लदा पेड़ नहीं टूटता, क्यों? क्योंकि वो झुका रहता है सूखे पेड़ की तरह अकड़कर खड़ा नहीं रहता. इसी तरह आप भी विनम्र बनकर मुश्किल परिस्थितियों का सामना कर सकते हैं. आज से आप भी विनम्रता को अपने जीवन का हिस्सा बना लीजिए फिर देखिए ज़िंदगी कितनी बदल जाती है. कल तक आपसे नफ़रत करने वाले लोग भी अब आपकी तरफ़ प्यार भरी नज़रों से देखने लगेंगे.

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क्या आप भी करते हैं दूसरों की बुराई? (How To Avoid Gossiping)

How To Avoid Gossiping

“बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो और बुरा मत कहो” गांधीजी के ये वाक्य भले ही हमने रट लिए हों, लेकिन उन्हें जीवन में उतारने की कोशिश हमने आज तक नहीं की. तो क्यों न अब इस ओर एक प्रयास किया जाए?

How To Avoid Gossiping

क्योंकि निंदा करना बुरी बात है
कुछ बातें ऐसी होती हैं, जो हमें बचपन से सिखाई जाती हैं, जैसे- झूठ बोलना पाप है, चोरी करना गलत बात है आदि. इसी तरह निंदा करना बुरी बात है यह वाक्य भी कई बार हम अपने बड़े-बूढ़ों के मुंह से सुन चुके हैं, लेकिन आश्‍चर्य इस बात का है कि आज भी हमारी सुबह और शाम पड़ोसी, रिश्तेदार व सखी-सहेली से जुड़ी निंदक बातों से शुरू और खत्म होती है. जब कि हम सब इस बात से भलीभांति अवगत हैं कि निंदा करना बुरी बात है.

निंदा करना और सुनना दोनों ही पाप है
कहते हैं, अन्याय करनेवाले और सहनेवाले दोनों ही बराबर के दोषी होते हैं. ठीक उसी तरह हिंदू वेद-पुराण के अनुसार परनिंदा करनेवाले और सुननेवाले दोनों ही पाप के समान भागीदार होते हैं. अतः अगर धार्मिक किताबों में आपकी निष्ठा है, तो अब से न ही दूसरों की निंदा करें और न ही किसी की निंदक बातों में दिलचस्पी लें.

परनिंदा से बेहतर है संतगुणों की प्रसंशा
काहू कि नहिं निन्दिये, चाहै जैसा होय।
फिर फिर ताको बन्दिये, साधु लच्छ है सोय॥
संत कबीर दासजी कहते हैं कि भले ही कोई व्यक्ति कितना भी बुरा हो, परंतु उसकी निंदा न करें, क्योंकि इससे स़िर्फ समय की बर्बादी होती है और कुछ नहीं, इसलिए अच्छा यह होगा कि आप अपना समय उन लोगों की प्रशंसा में व्यतीत करें, जो स्वभाव से सरल हों, जिनके भीतर साधू के लक्षण विद्यमान हों अथवा जो सतगुणों की खान हों.

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परनिंदा से केवल समय की बर्बादी होती है
यह बात सौ आने सच है कि परनिंदा से केवल समय की बर्बादी होती है और कुछ नहीं, क्योंकि आप जिस व्यक्ति की निंदा करते हैं, उसे इस बात की ख़बर तक नहीं होती कि आप उसके बारे में यूं भला-बुरा कह रहे हैं, नतीजतन वह व्यक्ति तो अपने काम में मस्त रहता है, परंतु उस वक्त उसकी निंदा करने के चक्कर में आपके काम पर अल्पविराम लग जाता है, इसलिए अब से अपना बेशक़ीमती समय दूसरों की निंदा में बर्बाद करने की बजाय अपने काम में मन लगाएं.

परनिंदा से पहले करें स्वयं का परीक्षण
जब हम दूसरों की तरफ एक उंगुली दिखाते हैं, तब हम ये भूल जाते हैं कि बाकी बची चार उंगुलियां हमारी ओर इशारा करती हैं. अर्थात जब हम फलाना व्यक्ति को एक उंगली से परिभाषित करते हैं, तो उस वक्त हमारी चार उंगलियां हमें परिभाषित कर रही होती हैं. इसका मतलब आप उस व्यक्ति से ज़्यादा अवगुणी हैं. अतः किसी और पर दोषारोपण करने से पहले अपने गुण-दोष का परिक्षण करें और ख़ुद से पूछें कि क्या आप दूसरों की निंदा करने के लायक हैं? और उत्तर मिलने के बाद ही किसी की निंदा करें या सुनें.

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क्या आप इमोशनली इंटेलिजेंट हैं? (How Emotionally Intelligent Are You?)

How Emotionally Intelligent Are You

आपके साथ भी ऐसा कई बार हुआ होगा जब आपने जाने-अनजाने अपने पैरेंट्स, पार्टनर या क़रीबी दोस्तों का दिल दुखाया होगा. उस समय ग़ुस्से में आपने उन्हें भला-बुरा कह तो दिया होगा, लेकिन बाद में पछताए होंगे कि आपको ऐसा नहीं करना चाहिए था. क्या आप अपने ऐसे व्यवहार या हरक़तों को बदल सकते हैं? बेशक, आप अपने दिमाग़ को अपनी भावनाओं पर कंट्रोल करना सिखा सकते हैं, ताकि आगे से आपकी ज़ुबान से ऐसा कोई वाक्य न निकले, जिसके लिए आपको बाद में पछताना पड़े. हां, इसके लिए आपको थोड़ी प्रैक्टिस ज़रूर करनी पड़ेगी.

How Emotionally Intelligent Are You

तलाशें नए रंग
रोज़ सुबह ये कल्पना करें कि आपका मन एक कोरी क़िताब है, जिस पर आपको स़िर्फ अच्छी बातें लिखनी हैं. अपनी कल्पनाओं के रंग भरने हैं. अब तक आपने या दूसरों ने जो भी बुरी बातें कहीं या सुनी, उन्हें आप अपने मन की क़िताब से मिटा देंगे और उनकी जगह ढेर सारी नई, अनोखी, दिलचस्प बातें लिखेंगे. यक़ीन मानिए, आपके ये पॉज़िटिव विचार आपके व्यवहार में भी झलकने लगेंगे. ऐसे में यदि कोई आपके सामने बुरा व्यवहार करता भी है, तो आप उसे अपने मन तक पहुंचने नहीं देंगे और हमेशा ख़ुश व एनर्जेटिक महसूस करेंगे.

कह दें मन की बात
जो लोग बीती बातों का बोझ मन में लिए फिरते हैं, उनके लिए मन को साफ़ रखना आसान नहीं होता. अतः किसी से भी कोई शिकवा-गिला हो तो उसे बातचीत द्वारा सुलझा लें, ताकि आपके मन में कोई ऐसी बात न रह जाए, जिसे आप कह न पाए हों, क्योंकि मन की कड़ुवाहट ही कई बार जाने-अनजाने ज़ुबान से आ जाती है. वैसे भी कह देने से मन हल्का हो जाता है.

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जब आए ग़ुस्सा
शॉपिंग करते समय यदि बच्चे ग़ैर ज़रूरी चीज़ के लिए ज़िद करने लगें, पति महोदय हमेशा की तरह बच्चे के स्कूल की पैंरेट्स टीचर्स मीटिंग में जाने से इनकार कर दें या फिर ऑफ़िस से थक कर आने पर सासू मां घर के कामों की लंबी लिस्ट थमा दें, तो आपको ग़ुस्सा आना लाज़मी है. ऐसी स्थिति में भी अपने ग़ुस्से पर कंट्रोल रख पाना ही इमोशनली इंटेलिजेंट होना है. आप अपनी भावनाओं पर जितना कंट्रोल रख पाएंगी, विपरीत स्थितियों से उतनी ही आसानी से निकल पाएंगी.

समाधान आसान है
ग़ुस्सा करने से पहले सोचें कि क्या इस स्थिति में आपका ग़ुस्सा करना वाजिब है? क्या आपके ग़ुस्सा करने से स्थिति सुधर जाएगी? ग़ुस्सा करने के अलावा आपके पास और क्या विकल्प है? हो सकता है, पति के साथ प्यार से बातचीत करके आप उन्हें अगली बार बच्चे की पैंरेट्स टीचर्स मीटिंग में जाने के लिए तैयार कर दें. इसी तरह सास व बच्चों को भी प्यार से अपने मन की बात समझा सकें.

हमारी नैतिक प्रकृति जितनी उन्नत होती है, उतना ही उच्च हमारा प्रत्यक्ष अनुभव होता है और उतनी ही हमारी इच्छा शक्ति अधिक बलवती होती है.
– स्वामी विवेकानंद

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हार कर जीतने वाले को बाजीगर कहते हैं! (How To Overcome Failure)

How To Overcome Failure

हार कर जीतने वाले को बाज़ीगर कहते हैं! शाहरुख़ ख़ान की फिल्म बाज़ीगर का ये डायलॉग यूं ही मशहूर नहीं हो गया. इस डायलॉग में जीवन का सार छुपा है. जब हम हार से हारते नहीं, लगातार जीतने की कोशिश करते रहते हैं, तो हमारी जीत निश्‍चित होती है. हम तब तक नहीं हारते, जब तक हम हार नहीं मान लेते.

How To Overcome Failure

 

सुपरस्टार भी हारते हैं
सुपरस्टार अमिताभ बच्चन, शाहरुख़ ख़ान से लेकर उद्योग जगत के बादशाह टाटा और बिड़ला तक सबने एक ही प्रयास में सफलता का स्वाद नहीं चखा, बल्कि हर बार हारने पर दुगुने जोश से आगे बढ़कर आज वो क़ामयाबी की बुलंदियों पर हैं. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन बार-बार चुनाव हारते रहे, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और आख़िरकार 52 वर्ष की उम्र में राष्ट्रपति का पद हासिल किया. कहने का अर्थ है कि आपकी हार में जीत का रास्ता छुपा होता है. ज़रूरत है तो बस उसे पहचानने की.

हार को जीत में बदलें
परिक्षा या प्यार में असफल हो जाने, नौकरी न मिलने और ऑफिस में कोई प्रॉजेक्ट हाथ से निकल जाने पर आप मायूस हो जाते हैं, लेकिन क्या मायूस होने से आपकी हार जीत में बदल सकती है? नहीं, क्योंकि कमान से निकला तीर और जुबान से निकले शब्द की ही तरह बीता व़क़्त भी लौटकर नहीं आता. आप अपने बीते कल को तो नहीं बदल सकते, लेकिन हार में छुपी जीते के अवसर को पहचानकर आप आने वाले कल को ज़रूर संवार सकते हैं.

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क्योंकि हारना ज़रूरी है
अगर आपको पता ही न हो कि कड़वाहट क्या होती है तो क्या आप कभी मिठास का असली म़जा ले सकते हैं? नहीं न, उसी तरह जब तक आप असफलता का स्वाद नहीं चख लेते, तब तक आपको सफलता के असली मायने समझ नहीं आएंगे. जिस तरह दुख के बाद मिली ख़ुशी अनमोल होती है, उसी तरह हार के बाद मिली जीत का कोई मोल नहीं होता. बार-बार प्रयास करके हासिल की गई चीज़ की अहमियत एक बार प्रयास करने पर मिली चीज़ से कहीं ़ज़्यादा होती है. हार के रूप में मिली ठोकरें हमें मज़बूत बनाती हैं, इसलिए इसे सकारात्मक रूप में लें.

हार से लें सबक
हार के आगे नतमस्तक होने की बजाय उसे एक सीख की तरह लें. एक बार यह जानने की कोशिश करें कि आख़िर आप हारे क्यों? क्या आपके प्रयासों में कहीं कोई कमी रह गई थी? अगर हां, तो अगली बार उसे दुुगुनी मेहनत से उन्हें सुधारने की कोशिश करें. और अगर नहीं, तो भी उदास न हों, बल्कि एक नए जोश से फिर आगे बढ़ने की कोशिश करें. हो सकता है, इससे बेहतर मौक़ा आपका इंतज़ार कर रहा हो. एक बात हमेशा याद रखें कि गिरते वही हैं जो आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं.

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कहीं आपको भी तनाव का संक्रमण तो नहीं हुआ है? (Health Alert: Stress Is Contagious)

Stress Is Contagious

जी हां, सुनने में अटपटा ज़रूर लग सकता है, लेकिन तनाव संक्रामक होता है. यक़ीन न हो, तो आज़माकर देख लीजिए.

Stress Is Contagious

आप बहुत ही हंसमुख और ज़िंदादिल इंसान हैं, लेकिन पिछले कुछ दिनों से आप काफ़ी चिड़चिड़े हो गए हैं. छोटी-छोटी बात पर ग़ुस्सा करने लगे हैं. क्या है इसकी वजह? कहीं आपकी संगत तो नहीं? क्या आपका कोई अपना इन दिनों बहुत तनावग्रस्त है और उसका तनाव अब आपको भी संक्रमित करने लगा है?

संगत का असर
यदि आप लगातार किसी नकारात्मक सोच वाले व्यक्ति के साथ रहते हैं, तो जाने-अनजाने आपमें भी थोड़ी-बहुत निगेटिविटी आ ही जाती है. आसपास के माहौल की तरह ही हमारे साथ रहने वाले लोग भी हमारे व्यवहार पर बहुत असर डालते हैं.

यूं होता है असर
एक जानी-मानी एमएनसी में कार्यरत, हमेशा हंसते-मुस्कुराते रहने वाले कार्तिक (परिवर्तित नाम) का व्यवहार शादी के बाद धीरे-धीरे बदलने लगा. वजह थी, पत्नी का शक़ करना और दिन-रात उसकी जासूसी करने में लगे रहना. वो कहां जाता है, किससे मिलता है, किससे बात करता है… पत्नी हर बात की ख़बर रखती थी और ज़रा-सा भी शक़ होने पर सवाल पूछ-पूछकर कार्तिक का जीना दूभर कर देती है. पत्नी के व्यवहार से आहत कार्तिक अब लगातार तनावग्रस्त रहने लगा है.

शोधकर्ताओं के अनुसार तनाव निम्न कारणों से संक्रमित हो सकता हैः
* तेज़ आवाज़ में बात करना
* चेहरे की भाव-भंगिमाएं
* शारीरिक हाव-भाव
* यहां तक कि शरीर की गंध भी तनाव का कारण हो सकती है.

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क्या आप भी इनमें से एक हैं?
* परीक्षा के दौरान कई मांएं अपने बच्चे पर पढ़ाई का इतना प्रेशर डालती हैं कि बच्चे तनावग्रस्त हो जाते हैं.
* ऑफिस में रोज़ाना अपना दुखड़ा सुनाने वाले सहकर्मी तनाव संक्रमित करते हैं.
* पज़ेसिव गर्लफ्रेंड अक्सर तनाव बढ़ा देती है.
* अपने अहम् की संतुष्टि के लिए रौब झाड़नेवाले बॉस तनाव फैलाते हैं.
* ईर्ष्यालु दोस्त, रिश्तेदार भी ताने मार-मारकर तनाव बढ़ाते हैं.

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कैसे बचें तनाव के संक्रमण से?
* संवेदनशील लोग तनाव से जल्दी संक्रमित होते हैं, इसलिए ऐसे लोगों को तनाव बढ़ाने वाले व्यक्तियों से दूर रहना चाहिए.
* हर बात को पर्सनली न लें, क्योंकि हर बात आपके लिए नहीं कही जाती.
* दुनिया में हर तरह के लोग होते हैं, हम सभी को संतुष्ट नहीं कर सकते, इसलिए सबको ख़ुश करने की कोशिश न करें.
* अपनी ख़ूबियों व कमियों का ख़ुद आकलन करें, दूसरों की बातों में न आएं.

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फैक्ट फाइल
सेंट लुइस यूनिवर्सिटी, यूएस के मनोवैज्ञानिकों के एक ग्रुप ने ये दावा किया है कि कुछ स्थितियों में तनाव संक्रामक होता है और कई बार हम अजनबियों द्वारा भी तनाव से संक्रमित हो जाते हैं.

10 छोटी बातों में छुपी हैं 10 बड़ी ख़ुशियां (10 Little Things Can Change Your Life)

Little Things Can Change Your Life

आजकल लोग समय की कमी का रोना रोकर जीवन की छोटी-छोटी ख़ुशियों से भी हाथ धोने लगे हैं, जबकि सच्चाई ये है हम जिस चीज़ को ज़रूरी समझते हैं उसके लिए समय निकाल ही लेते हैं. अतः जिंदादिली से जीने के लिए अपनी प्राथमिकताएं तय करें और उनके अनुरूप अपने समय को विभाजित करें, क्योंकि यही है जीने की सही कला. साथ ही इन छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देकर रहें ख़ुश, संतुष्ट और ऊर्जावान.

1) अक्सर लोग क़ीमती चीज़ों में ख़ुशियां ढूंढ़ते हैं और उनकी चाह में दुखी रहते हैं, जबकि सच्चाई ये है कि सर्वश्रेष्ठ चीज़ें अक्सर मु़फ़्त ही मिलती हैं. प्रेम, वात्सल्य, संतान, हवा, पानी आदि के बिना हम जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते, लेकिन इन्हें पाने के लिए हमें पैसे ख़र्च नहीं करने पड़ते, ये तमाम चीज़ें हमें मु़फ़्त मिलती हैं. अत: छोटी-छोटी चीज़ों में ख़ुशियां ढूंढ़ें, फिर बड़ी ख़ुशियां आपके पास अपने आप आ जाएंगी.

2) हम ख़ुद अपनी शक्ति को नहीं पहचानते इसलिए कोई भी नया या चैलेंजिंग काम करते समय ख़ुद को कम न आंकने लगते हैं. आप ऐसा न करें. यदि आपकी सोच सकारात्मक है और आपको ख़ुद पर विश्‍वास है, तो आपकी आंतरिक शक्ति भी खुलकर सामने आएगी और आप बड़े से बड़ा काम कर पाएंगे.

3) दूसरों को समझने या उनसे प्यार करने से पहले ख़ुद से प्यार करें. यकीन मानिए, ज़िंदगी को देखने का आपका नज़रिया ही बदल जाएगा.

4) जिन चीज़ों से आपको चिढ़ है या जो चीज़ें आपके व्यवहार को नकारात्मक बनाती हैं, उनसे उलझने की बजाय उनसे किनारा कर लें. उनके बारे में सोचना ही छोड़ दें. इससे आप बहुत हल्का महसूस करेंगे.

5) समय सदा एक-सा नहीं रहता, ये सोचकर जीवन में आए हर बदलाव को बेख़ौफ़ स्वीकारें और परिस्थिति के अनुरूप ख़ुद को ढालने की कोशिश करें. ऐसा करने से आपको कठिनाइयों से जूझने की शक्ति मिलेगी.

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6) आपके पास क्या नहीं है, उसके बारे में सोचकर कुढ़ने की बजाय आपके पास क्या है, उसे देखकर ख़ुश होएं और आगे बढ़ने की कोशिश करते रहें. ऐसा करके आप जीवन का पूरा लुत्फ़ उठा पाएंगे.

7) हमारे शौक हमारे लिए टॉनिक का काम करते हैं. इनसे हमें ख़ुशी मिलती है और हम जीवन को नए उत्साह से जीते हैं. अतः अपने शौक़ के लिए ज़रूर टाइम निकालें.

8) हम जैसा सोचते हैं, जैसी भावना रखते हैं, हमारा शरीर, हमारी त्वचा भी वैसा ही रूप लेने लगती है. अतः अच्छा सोचें और स्वस्थ व ख़ूबसूरत नज़र आएं.

9) महान व कामयाब व्यक्ति एक दिन में उपलब्धि हासिल नहीं कर लेते, इसके लिए वो लगातार मेहनत करते हैं. अत: आप भी जीवन में आगे बढ़ने के लिए रोज़ थोड़ी मेहनत करें. परिस्थिति चाहे जैसी भी हो, आप हार न मानें. आपका ख़ुद पर विश्‍वास ही आपको आगे बढ़ाएगा.

10) कुछ पाने से पहले देना सीखें. प्रकृति का ये नियम है कि हम जो देते हैं, वही पाते हैं. जब आप देना सीख जाते हैं, तो आप में संतुष्टि का भाव आ जाता है और आप विनम्र बन जाते हैं. यही विनम्रता ही आपको जीवन में आगे ले जाती है.

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