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अपने ग़ुस्से पर कितना काबू कर पाती हैं आप? (Anger Management: 10 Easy Tips To Control Your Anger)

काम है तो प्रेशर है, प्रेशर है तो तनाव है और तनाव में ग़ुस्सा आना लाज़मी है, लेकिन ग़ुस्सा ज़हिर करने के तरी़के सभी के अलग-अलग होते हैं. क्या ग़ुस्सा आपकी पर्सनल या प्रोफेशनल लाइफ़ को भी प्रभावित कर रहा है? आप अपने ग़ुस्से पर किनता काबू कर पाती हैं? ये क्विज़ हल कीजिए और ख़ुद जान जाइए.

Tips To Control Anger

1) आपके बच्चे को स्कूल जाने के लिए पहले से ही देर हो रही है, उस पर उसने नाश्ता करते समय यूनिफॉर्म इतनी ख़राब कर दी कि उसे पहन कर स्कूल नहीं जाया जा सकता. ऐसे में आप-

ए) तुरंत यूनिफॉर्म बदलकर उसे स्कूल बस के बजाय ऑटो रिक्शा या अपनी गाड़ी में स्कूल छोड़ देंगी.
बी) बच्चे पर बहुत ग़ुस्सा होंगी और गंदी यूनिफ़ॉर्म में ही उसे स्कूल छोड़ देंगी.
सी) गुस्से में बच्चे को थप्पड़ जड़ देंगी हैं और स्कूल भी नहीं भेजेंगी.

2) आप ऑफ़िस में एक ज़रूरी प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं, तभी कंप्यूटर ख़राब हो गया और आप फाइल सेव भी नहीं कर पाईं. ऐसी स्थिति में आप क्या करेंगी?

ए) एक कप कॉफ़ी पीएंगी और रिलैक्स होकर दोबारा काम शुरू कर देंगी.
बी) रोने लग जाएंगी.
सी) गुस्से में वहां से चली जाएंगी.

3) आपने अपने एक सहकर्मी के साथ मिलकर बड़ी मेहनत से कोई प्रोजेक्ट पूरा किया, लेकिन उसका पूरा श्रेय स़िर्फ आपके सहकर्मी को ही मिला. ऐसे में आप…

ए) आपके प्रेज़ेंटेशन में कहां कभी रह गई, इस पर विचार करेंगी और अपनी कमियों को सुधारने की कोशिश करेंगी.
बी) सहकर्मी को भला-बुरा कहकर मन की भड़ास निकालेंगी.
सी) पूरे ऑफ़िस में उसकी चुगली करती फिरेंगी.

4) ऑफ़िस की एक ज़रूरी मीटिंग में आपको व़क़्त पर पहुंचना है, लेकिन ट्रैफिक के कारण आप देर से पहुंचती हैं, ऐसे में आप…

ए) देरी के लिए सॉरी कहकर आगे ऐसा न होने का भरोसा दिलाएंगी.
बी) मीटिंग में पहुंचते ही सिस्टम को कोसने लगेंगी.
सी) फोन करके मीटिंग अटेंड करने से मना कर देंगी.

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5) ग़ुस्से में आपका पक्ष जाने बिना ही आपके पति यदि आपको भला-बुरा कहने लग जाएं तो?

ए) उस व़क़्त तो चुप रहेंगी, लेकिन जब पति शांत हो जाएंगे, तब अपना पक्ष रखकर उन्हें सही स्थिति से अवगत कराएंगी.
बी) रोने लग जाएंगी.
सी) आप भी ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लग जाएंगी.

6) आपने बड़े जतन से ख़ास मेहमानों के लिए डिनर पार्टी अरेंज की है, पर उसी व़क़्त थोड़े मेहमान और आ गए. ऐसे में आप क्या करेंगी?

ए) तुरंत और खाने के बंदोबस्त में जुट जाएंगी.
बी) समझ नहीं पाएंगी कि क्या करूं?
सी) बिन बुलाए मेहमानों को मन ही मन कोसेंगी.

7) ऑफ़िस में आपको इतना काम दे दिया गया है जो डेडलाइन पर पूरा नहीं हो सकता. ऐसे में आप क्या करेंगी?

ए) ऑफ़िस टाइम के बाद रुककर काम पूरा करेंगी.
बी) सहकर्मियों से मदद के लिए कहेंगी.
सी) काम करने से मना कर देंगी.

8) यदि आपकी बेस्ट फ्रेंड आपको अपनी बर्थडे पार्टी में बुलाना भूल जाए तो?

ए) आप ख़ुद ही फोन करके उसे याद दिला देंगी.
बी) फोन करके फ्रेंड पर ख़ूब चिल्लाएंगी.
सी) उससे दोस्ती तोड़ देंगी.

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9) इन दिनों काम की अधिकता के कारण आपको लगभग रोज़ ही ऑफ़िस से घर लौटने में देर हो रही है, जो कि सासू मां को बिल्कुल पसंद नहीं. ऐसे में आप…

ए) उन्हें ऑफिस की स्थिति समझाने की कोशिश करेंगी.
बी) उनकी बातों को अनसुना कर देंगी.
सी) उनके साथ झगड़ा करने लग जाएंगी.

10) आपके पति रोज़ देर रात तक इंटरनेट पर सर्फिंग करते रहते हैं, जिससे आप ठीक से सो नहीं पातीं. ऐसे में आप…

ए) पति को समझाएंगी हैं कि इससे आप दोनों की नींद व सेहत पर बुरा असर पड़ेगा.
बी) पति से बात करना बंद कर देंगी.
सी) उनसे रोज़ इस बात पर झगड़ने लग जाएंगी.

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क्या कहता है स्कोर?
यदि आपके अधिकतर जवाब (ए) हैं तो:
आपका स्कोर बेस्ट है. आप ग़ुस्से पर काबू रखना बख़ूबी जानती हैं, जिससे आप ज़िंदगी के छोटे-छोटे तनावों को आसानी से हैंडल कर लेती हैं. आप मुश्किल से मुश्किल स्थिति में भी रास्ता तलाशना और उसे अपने फ़ायदे में बदलाना बख़ूबी जानती हैं. आपके परिवार, सहकर्मी बेशक आप के व्यवहार से संतुष्ट रहते होंगे.

यदि आपके अधिकतर जवाब (बी) हैं तो:
आप ग़ुस्से को ख़ुद पर हावी तो नहीं होने देतीं, लेकिन उसे हैंडल भी नहीं कर पाती हैं. कई बार आप समस्या से भागने का विकल्प भी चुन लेती हैं. ऐसा करना ठीक नहीं, क्योंकि ये समस्या का समाधान नहीं है. आपको अपने ग़ुस्से पर काबू पाने और समस्या को हैंडल करने के लिए थोड़ी कोशिश और करनी होगी.

यदि आपके अधिकतर जवाब (सी) हैं तो:
छोटी-छोटी बातों पर ग़ुस्सा करना, बेवजह तनावग्रस्त हो जाना आपकी आदत में शामिल हो गया है. आपको अपनी आदतों पर कंट्रोल करना होगा, वरना आगे चलकर आपका ग़ुस्सा आपकी सेहत को भी प्रभावित कर सकता है.

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ख़ुशहाल ज़िंदगी जीने के 5 आसान तरीके (5 Simple Ways To Live Life For Yourself)

यदि हम अपने आप से पूछें कि हमारे लिए ख़ुशी की क्या परिभाषा है, हमें किस बात से ख़ुशी मिलती है, क्या हम वाकई ख़ुश हैं? तो शायद हम अपने ही सवालों का जवाब नहीं दे पाएंगे. ऐसा नहीं है कि हमें जवाब पता नहीं, लेकिन हम उसे स्वीकारना नहीं चाहते, क्योंकि हम अपने लिए कम और दूसरों के लिए ज़्यादा जीते हैं. हम ख़ुद से ज़्यादा लोगों की परवाह करने में लगे रहते हैं. हमें क्या पसंद है, हम क्या चाहते हैं, इससे ज़्यादा हमें इस बात की परवाह रहती है कि लोग क्या कहेंगे? आइए, हम आपको बताते हैं ख़ुशहाल ज़िंदगी जीने के 5 आसान तरीके.

Ways To Live Life

क्या आप वाकई खुश हैं?
क्या आपने कभी ख़ुद से ये सवाल किया है कि आप अपनी ख़ुशी के नाम पर जो भी करते हैं, क्या उसमें वाकई आपकी ख़ुशी होती है? चाहे त्योहार हो या शादी-ब्याह ऐसे ख़ास मौक़ों पर अपने लिए कुछ ख़रीदते समय भी हम ये सोचते रहते हैं कि ये चीज़ लोगों को पसंद आएगी या नहीं. आप अपनी ख़ुशी के बारे में कम और दूसरों की ख़ुशी के बारे में ज़्यादा सोचते रहते हैं. कई बार दूसरों पर अपना इंप्रेशन जमाने के लिए हम अपने बजट से ज़्यादा ख़र्च तो कर देते हैं, लेकिन बाद में उसकी भरपाई करना हमें मुश्किल लगने लगता है. दूसरों के बारे में सोच-सोचकर हम अपने सुंदर-सरल जीवन को इतना जटिल बना देते हैं कि कई बार हम अपनी पहचान ही खो देते हैं. हम ये भूल जाते हैं कि हमें किस चीज़ से ख़ुशी मिलती है.

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ख़ुशहाल ज़िंदगी जीने के 5 आसान तरीके

1) सुबह उठते ही सबसे पहले मुस्कुराएं और कहें कि मैं अपना/अपनी फेवरिट हूं. फिल्म जब वी मेट में करीना कपूर का यह डायलॉग सच में इतना पावरफुल है कि ये आपको ख़ुशी और एनर्जी से भर देता है. यकीन मानिए, जो लोग ख़ुद से प्यार करते हैं, वो दूसरों को भी हमेशा ख़ुश देखना चाहते हैं इसलिए सबसे पहले ख़ुद से प्यार करें.

2) सच्ची ख़ुशी पाने के लिए वही करें जो आपको अच्छा लगता है, न कि जो लोग कर रहे हैं.

3) हमेशा बड़ों की तरह बर्ताव न करें, कभी-कभी बच्चों की तरह खिलखिलाकर हंसें, उछलकूद करें, बेपरवाह होकर नाचे-गाएं, दोस्तों के साथ घूमने जाएं, सड़क पर खड़े होकर चाट का लुत्फ़ उठाएं… ऐसी छोटी-छोटी बातों में ही ज़िंदगी की असली ख़ुशी छुपी होती है.

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4) समस्या या परेशानियां सभी के जीवन में आती हैं, लेकिन जीवन में क़ामयाब वही होते हैं, जो परेशानियों से डरते नहीं, बल्कि उनका हल निकालने के रास्ते तलाशते हैं. आप भी ऐसा ही करें, आपके सोचने से समस्या हल नहीं होगी, उसके लिए आपको समस्या से बाहर निकलने के रास्ते तलाशने होेंगे.

5) कभी भी किसी और से अपनी तुलना न करें. ईश्‍वर ने हम सबको अलग और स्पेशल बनाया है इसलिए अपनी ख़ूबियों को पहचानें और अपनी अलग पहचान बनाएं. आपको ईश्‍वर ने जो भी हुनर दिया है, उसे निखारने की हमेशा कोशिश करते रहें, ताकि आप अपनी ज़िंदगी में कभी भी बोर न हों.

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10 न्यू ईयर रेज़ोल्यूशन्स बदल देंगे आपकी ज़िंदगी (Top 10 New Year Resolutions That Will Change Your Life)

New Year Resolutions

10 न्यू ईयर रेज़ोल्यूशन्स (New Year Resolutions) बदल देंगे आपकी ज़िंदगी, यक़ीन न हो तो ख़ुद आज़माकर देख लीजिए. दरअसल  हमारे अधिकतर न्यू ईयर रेज़ोल्यूशन्स इसलिए फेल हो जाते हैं, क्योंकि वो या तो रियलिस्टिक यानी वास्तविक नहीं होते या फिर हम आधे-अधूरे मन से रेज़ोल्यूशन्स बना तो लेते हैं, लेकिन उन्हें पूरा करने का प्रयास ही नहीं करते. नए साल के जोश में हम बड़े-बड़े रेज़ोल्यूशन्स तो बना लेते हैं, लेकिन हफ़्तेभर या महीनेभर में ही हम उन्हें फॉलो करना बंद कर देते हैं. न्यू ईयर रेज़ोल्यूशन्स ऐसे होने चाहिए, जो रोज़ हमारा हौसला बढ़ाएं और हमारी ज़िंदगी को दिन-प्रतिदिन बेहतर बनाएं. इस साल आप भी ऐसे ही 10 न्यू ईयर रेज़ोल्यूशन्स बनाएं, जो आपकी ज़िंदगी बदल देंगे.

New Year Resolutions

1 टाइम मैनेजमेंट
हम समय का स़िर्फ एक बार ही इस्तेमाल कर सकते हैं, क्योंकि गुज़रा हुआ व़क्त कभी लौटकर नहीं आता यानी हम समय को रीसाइकिल नहीं कर सकते. अतः कभी ये न कहें कि ये काम अगली बार करेंगे. हो सकता है, अगली बार आप व़क्त गंवा चुके हों और गुज़रा हुआ व़क्त आपसे कहे कि अब बहुत देर हो चुकी है. ऑफिस, फैमिली, सोसाइटी, सोशल मीडिया, फ्रेंड्स… सभी को आपका टाइम चाहिए, लेकिन आपके पास सीमित समय है, इसलिए समय का सही इस्तेमाल करें. सही टाइम मैनेजमेंट करनेवाले लोग ही ज़िंदगी की रेस में आगे रहते हैं, इसलिए अपने न्यू ईयर रेज़ोल्यूशन्स में टाइम मैनेजमेंट को सबसे ऊपर रखें.

2 सीखने का शौक़
कामयाब लोगों की ये सबसे बड़ी निशानी है कि वो हमेशा कुछ न कुछ नया सीखते रहते हैं. जब भी हम कुछ नया सीखते हैं, तो हमारे दिमाग़ की सक्रियता बढ़ जाती है और हम ख़ुद में एक नई ऊर्जा महसूस करते हैं. इसलिए आप भी कुछ न कुछ सीखते रहें. म्यूज़िक, डांस, स्विमिंग, पेंटिंग या फिर अपने जॉब से संबंधित कोई स्किल… जिस चीज़ में आपकी रुचि हो, वो ज़रूर सीखें. सीखने से आप हमेशा दूसरों से एक क़दम आगे रहते हैं, जिससे आपका आत्मविश्‍वास बढ़ता है और आप कामयाबी हासिल कर पाते हैं.

3 फिटनेस रेज़ोल्यूशन
हेल्दी बॉडी हेल्दी माइंड यूं ही नहीं कहा जाता. जब आप फिट और हेल्दी होते हैं, तो आप अच्छा महसूस करते हैं और इसकी ख़ुशी आपके चेहरे और व्यवहार में भी साफ़ नज़र आती है. यही वजह है कि फिट और हेल्दी लोग हमेशा अपने आसपास पॉज़ीटिविटी बनाए रखते हैं और ऐसे लोगों को हमेशा कॉम्प्लीमेंट्स मिलते हैं. जब आपको ये मालूम होता है कि आप दूसरों से फिट और हेल्दी हैं, तो आपका कॉन्फिडेंस अपने आप बढ़ जाता है और आप अपना हर काम पूरे आत्मविश्‍वास से करने लगते हैं, जिससे आपकी कामयाबी बढ़ती जाती है. आप भी फिट और हेल्दी बने रहने का रेज़ोल्यूशन बनाएं और योग, ध्यान, एक्सरसाइज़, हेल्दी डायट आदि को अपनी दिनचर्या में शामिल करें.

4 मी टाइम
आज की इस भागदौड़भरी ज़िंदगी में किसी के पास व़क्त नहीं है. हम कमा तो बहुत रहे हैं, हमारे पास भौतिक सुख-सुविधाएं भी भरपूर हैं, लेकिन अपने लिए ही व़क्त नहीं है. ऐसी सुविधाओं का क्या लाभ जो ख़ुद आपके काम न आएं, इसलिए आज से ही अपने लिए थोड़ा व़क्त ज़रूर निकालें. इस मी टाइम में वो सब करें, जिससे आपको ख़ुशी मिलती है. यक़ीन मानिए, आपका ये मी टाइम आपके लिए टॉनिक का काम करेगा और आपको एक नई ऊर्जा से भर देगा. फिर आप अपना हर काम और अच्छी तरह कर पाएंगे.

5 आत्मनिर्भरता
कॉन्फिडेंस यानी आत्मविश्‍वास की कमी उन लोगों में होती है, जो दूसरों पर आश्रित रहते हैं. इसलिए कोशिश करें कि आप अपने किसी भी काम के लिए दूसरों पर आश्रित न रहें. जो लोग अपने काम ख़ुद करते हैं, वो कहीं भी बड़ी आसानी से एडजस्ट हो जाते हैं और उन्हें कभी किसी बात का डर नहीं लगता. इसकी शुरुआत आप अपने रोज़ के काम ख़ुद करके कर सकते हैं. जब आप अपने काम ख़ुद करने लगेंगे, तो आपका आत्मविश्‍वास बढ़ेगा और आप फिर अपने हर ़फैसले ख़ुद लेना सीख जाएंगे.

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New Year Resolutions

6 क्रोध पर काबू
क्रोध से अक्सर नुक़सान ही होता है अपना भी और दूसरों का भी. इसलिए क्रोध से बचें. हम क्रोध से बच तो नहीं सकते, लेकिन अपने क्रोध पर काबू ज़रूर पा सकते हैं. कई लोग क्रोध में ऐसे ़फैसले ले लेते हैं, जिनका पछतावा उन्हें उम्रभर होता है. आप ऐसा न करें. इसलिए अपने न्यू ईयर रेज़ोल्यूशन्स में इस बात को भी ज़रूर शामिल करें कि आप क्रोध नहीं करेंगे और क्रोध में कोई ़फैसला नहीं लेंगे.

7 डिजिटल ब्रेक
टेक्नोलॉजी के साथ चलना ज़रूरी है, लेकिन ख़ुद को इतना डिजिटल बना देना भी सही नहीं कि टेक्नोलॉजी आप पर हावी हो जाए. आजकल ख़ासकर यंगस्टर्स दिनभर मोबाइल में बिज़ी रहते हैं, जिसके कारण उनकी पढ़ाई, हेल्थ यहां तक कि नींद भी प्रभावित होती है. सोशल मीडिया में तो वो हर जगह होते हैं, लेकिन अपने घर-परिवार के साथ व़क्त बिताना उन्हें बोरिंग लगता है. ऐसी स्थिति से बचने के लिए डिजिटल ब्रेक बहुत ज़रूरी है. नए साल में ये नियम बना लें कि आप डिजिटल वर्ल्ड में रहेंगे ज़रूर, लेकिन उतना ही, जितना आपके लिए
ज़रूरी है.

8 डर को डराएं
डरना एक स्वाभाविक क्रिया है. हम सभी को किसी न किसी चीज़ से डर ज़रूर लगता है, लेकिन कई बार ये डर हम पर इस क़दर हावी हो जाता है कि इससे हमारी दिनचर्या प्रभावित होने लगती है. कई लोगों का डर उन पर इस क़दर हावी हो जाता है कि वो अंधविश्‍वास की हद तक पहुंच जाता है. यदि आपके मन में भी कोई ऐसा डर है, जो आपकी ज़िंदगी को प्रभावित कर रहा है, तो उससे बाहर निकलने की कोशिश करें. यदि आप ख़ुद अपने डर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं, तो अपने परिवार या एक्सपर्ट्स की मदद लें.

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9 बुरी आदतों से बचें
कई बार हम अपनी आदतों के इस कदर अधीन हो जाते हैं कि हमारी आदतें हमारी ज़िंदगी से बड़ी हो जाती हैं, ख़ासकर नशे की आदत. यदि आप में भी है कोई ऐसी बुरी आदत, जो आपके कंट्रोल से बाहर हो रही है, तो उससे बाहर निकलने का संकल्प लें. किसी चीज़ की आदत हो जाना और उस आदत को बदलना दोनों हमारे हाथ में होता है. यदि हम ठान लें, तो कोई भी आदत हम पर हावी नहीं हो सकती. अपने न्यू ईयर रेज़ोल्यूशन्स में बुरी आदतों को बाय-बाय कहने का रेज़ोल्यूशन भी ज़रूर बनाएं.

10 देना सीखें
प्रकृति का ये नियम है कि हम जो बोते हैं, वही पाते हैं. इसलिए देना सीखें, तभी आप मनचाही चीज़ पा सकेंगे. ज्ञान, ख़ुशी, अपनापन ये सब ऐसी चीज़ें हैं, जिन्हें आप जितना बांटेंगे, ये उतनी ही बढ़ेंगी. अपेक्षा करनेवालों की तुलना में उन लोगों को हमेशा ज़्यादा मिलता है, जो देना जानते हैं, इसलिए आप भी देना सीखें. अपने आसपास हमेशा ख़ुशियां बांटें, ताकि आपको भी बदले में ख़ुशियां ही मिलें.
– कमला बडोनी

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मन की बात लिखने से दूर होता है तनाव (Writing About Your Emotions Can Help Reduce Stress)

मन (Mind) की बात लिखने (Writing) से दूर होता है तनाव (Tension) और ये बात बिल्कुल सही है. मन की बात कहने के लिए जब आसपास कोई न हो, तो काग़ज़-कलम को अपना साथी बना लीजिए. ख़ुशी, ग़म, उदासी… अपने मन के हर भाव को काग़ज़ पर उतार दीजिए. मन की बात काग़ज़ पर लिख देने से मन हल्का हो जाता है.

Reducing Stress Tips

डायरी लिखें
सपनों, आकांक्षाओं, उम्मीदों और विचारों का डेरा है मन… और जिस मन पर इतना बोझ हो, उसे कभी-कभी हल्का करना भी ज़रूरी है. मन का बोझ हल्का करने का सबसे आसान तरीक़ा है किसी से बात करना, लेकिन जब आपके पास बात करने के लिए कोई न हो या जो व्यक्ति आपके सामने है उससे आप अपने दिल के राज़ साझा नहीं कर सकते, तो सबसे बेहतर विकल्प है डायरी लिखना. डायरी के पन्नों पर अपने मन के विचार चाहे वो अच्छे हों या बुरे लिख दें. इससे न स़िर्फ आपके दिल का बोझ उतर जाएगा, बल्कि आप बाद में अपने लिखे हुए शब्दों पर विचार करके सही-ग़लत का ़फैसला भी कर सकते हैं. दूसरों के सामने कुछ कहते समय जहां आपको इस बात का ख़्याल रखना पड़ता है कि कहीं वो आपकी बातों का ग़लत मतलब न निकाल ले, वहीं मन की बात लिखते समय ऐसा कोई डर नहीं रहता, जो जी में आए आप वो सब लिख सकते हैं.

लिखी हुई भावनाओं को आप फिर से जी सकते हैं
जब भी आप जीवन में कोई बड़ी उपलब्धि हासिल करें, तो उस पल की ख़ुशी को डायरी के पन्नों पर शब्दों में बयां कर दें. कुछ समय बाद जब आप उन पन्नों को पलटकर देखेंगे, तो उस पल को फिर से जी सकेंगे, अपनी उपलब्धि पर एक बार फिर नाज़ कर सकेंगे. ज़िंदगी की कुछ ऐसी बातें या पल जिन्हें आप जीवनभर याद रखना चाहते हैं, उन्हें संजोए रखने का सबसे अच्छा तरीक़ा है उन्हें लिख लेना.

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मन की बात लिख देने से मन हल्का हो जाता है
किसी बात पर आपका पड़ोसी से झगड़ा हो जाए या ऑफिस में कलीग आपसे उलझ जाए, उस समय संकोचवश आप उससे कुछ नहीं कहते, लेकिन मन ही मन उसे भला-बुरा कहते रहते हैं. ऐसी स्थिति में अपने मन की भड़ास काग़ज़ पर उतार दें. इससे जहां आपका ग़ुस्सा शांत हो जाएगा, वहीं आप उस बात पर फिर से विचार कर पाएंगे कि आख़िर झगड़ा हुआ क्यों? पुनर्विचार से कई बार एहसास होता है कि बेकार की बातों को तूल देकर हम अपना मूड और रिश्ता दोनों ख़राब कर रहे हैं. इस तरह मंथन करने से हमारे मन से नफ़रत की भावना निकल जाती है और मन हल्का हो जाता है.

मन की बात लिखने से बनी रहती है सेहत
किसी के प्रति घृणा और ग़ुस्से के भाव को बहुत दिनों तक मन में दबाए रखने से आप तनाव, अवसाद आदि के शिकार हो सकते हैं. इन भावों को आप दूसरों के सामने व्यक्त भी नहीं कर सकते. ऐसे में इन भावों को लिख देने से तनाव दूर होता है और मन शांत हो जाता है, जिससे सेहत भी बनी रहती है.

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कल कभी नहीं आता (Tomorrow Never Comes)

कल कभी नहीं आता ये बात सौफीसदी सच है, क्योंकि जो लोग कल के भरोसे बैठे रहते हैं वो ज़िंदगी में कभी आगे नहीं बढ़ पाते. यदि आप भी आज का काम कल पर टालते हैं, तो आज ही ये आदत बदल दीजिए.

Tomorrow Never Comes

काल करे सो आज कर, आज करे सो अब
पल में प्रलय होगी बहुरी करेगा कब.
– कबीर दास

आपने कबीरदास जी का ये दोहा तो ज़रूर सुना होगा, लेकिन क्या आप इस पर अमल करते हैं? हम में से ज़्यादातर लोग किसी भी काम या नई शरुआत को हमेशा कल पर टाल देते हैं, मसलन- मैं कल सुबह उठकर पढ़ाई कर लूंगी, मैं कल से एक्सरसाइज़ ज़रूर करूंगी, कल से मैं टाइम पर उठूंगा, कल से मैं कुछ बुरा नहीं बोलूंगा, कल से मैं अपनी बेटी के लिए टाइम ज़रूर निकालूंगी… लेकिन कल के भरोसे ख़ुद से किए ये वादे हम कभी पूरे नहीं कर पाते, क्योंकि जब कल आज में बदल जाता है तो हम फिर उस बात को आने वाले कल पर टाल देते हैं. इस तरह ये सिलसिला कभी महीनों तो कभी सालों तक चलता रहता है.

कभी भी जो काम आप कर सकते हैं उसे कल पर मत टालिए.
– बेंजामिन फ्रैंकलिन

मैं कल से ये काम करूंगी/करूंगा, वाला आपका रवैया आपके आलसी होने का सबूत है. आपने अंग्रेजी की वो कहावत तो सुनी होगी ‘फेलियर ऑलेवज़ मेक्स एक्सक्यूज़ेस’ यानी असफल लोग हमेशा बहाने बनाते हैं. कुछ ऐसा ही हाल आलसी लोगों का भी है, ये हर काम को कल के भरोसे छोड़ देते हैं, क्योंकि इनमें काम करने की इच्छाशक्ति ही नहीं होती. ‘अरे! यार क्या करूं आज तुम्हारा काम नहीं कर पाई, बहुत बिज़ी थी,’ इसके विपरीत यदि आप उस काम को पूरा करने का दृढ़ संकल्प कर लेतीं, तो किसी भी तरह अपने बिज़ी शेड्यूल से समय निकाल ही लेतीं.

कल के भरोसे मत बैठो, मनुष्य का कल कौन जानता है.
– शतपथ ब्राह्मण

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हर घड़ी हर पल जीवन में बदलाव होते रहते हैं ऐसे में कल क्या होगा किसी को नहीं पता, तो फिर आप अनजाने कल के भरोसे क्यों बैठे रहते हैं? आपने अपनी बेटी से वादा किया कि कल से आप उसके साथ ज़्यादा व़क्त बिताएंगी, लेकिन कल आपको अचानक किसी मीटिंग में जाना पड़ा और अपना वादा नहीं निभा पाई, ज़ाहिर है इससे आपकी बेटी का दिल टूट जाएगा. इसलिए कल के भरोसे कोई काम छोड़ने से बेहतर है कि आप उसकी शुरुआत आज से ही करने की कोशिश करें. यदि आप अपने लक्ष्य में क़ामयाब होना चाहते हैं, तो कल का इंतज़ार किए बिना ख़ुद से कहें, ‘मैं ये काम आज, अभी से शुरू कर रहा/रही हूं.’ यक़ीन मानिए, आपका ये दृढ़ संकल्प आपको अपने मकसद में सफलता ज़रूर दिलाएगा.

इंतज़ार करने वाले को उतना ही मिलता है जो कोशिश करने वाले छोड़ देते हैं.
– अब्दुल कलाम

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कल जा चुका है, कल अभी आया नहीं है, हमारे पास केवल आज है, चलिए शुरुआत करते हैं.
– मदर टेरेसा

प्यार की 5 भाषाएं सीखने के लिए देखें वीडियो:

ज़िंदगी रुकती नहीं (Life Doesn’t Stop And Neither Should You)

ज़िंदगी रुकती नहीं, बदस्तूर चलती रहती है. हां, ज़िंदगी में कई बार ऐसे वाकये या हादसे हो जाते हैं जो ज़िंदगी की चाल ही बदल देते हैं, या यूं कहें कि आपको बेहद मायूस या हताश कर देते हैं, तोड़कर रख देते हैं, लेकिन ऐसे हालात से हार मानकर जीना छोड़ा नहीं जा सकता. ऐसे हालात में भी आगे बढ़कर ज़िंदगी को संवारना और नए सिरे से ज़िंदगी की शुरुआत करना ही ज़िंदादिली है. काम ज़रा मुश्किल है, मगर नामुमक़िन नहीं.

Life

चलना ही जीवन है
कितनी भी बड़ी आपदा या हादसा क्यों न हो जाए ज़िंदगी नहीं ठहरती. हां, कुछ समय के लिए इसकी रफ़्तार ज़रूरी धीमी पड़ जाती है, लेकिन फिर उसे अपने पुराने ढर्रे पर आना ही पड़ता है. चाहे जापान में आई सुनामी हो या उत्तराखंड में आई प्राकृतिक आपदा. इतने बड़े विनाश के बाद भी दोबारा ज़िंदगी धीरे-धीरे ही सही पटरी पर आने लगती है. क्योंकि जो हो गया हम उसे तो बदल नहीं सकते, जो अपना चला गया हम उसे वापस तो ला नहीं सकते, लेकिन अपने आने वाले कल को संवारने की कोशिश तो कर ही सकते हैं. हमें अपने और अपने आसपास के बाकी लोगों की ख़ातिर जो हो गया उसे भुलाकर जीवन में आगे बढ़ना ही पड़ता है.

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जब तक है आस
बात चाहे कुदरत के विनाश की हो या ज़िंदगी में किसी अन्य तरह की असफलता की, आगे बढ़ने के लिए सबसे ज़्यादा ज़रूरी है उम्मीद. माना किसी प्रोजेक्ट पर कई हफ्तों तक दिन-रात मेहनत करने के बाद वो डेटा किसी कारणवश आपके कंप्यूटर से उड़ गया. ऐसे में निश्‍चय ही आपके पैरों तले से ज़मीन खिसक जाएगी, लेकिन उस वक़्त अपना मानसिक संतलुन खोकर ख़ुद पर या किसी और पर ग़ुस्सा करने या फिर उदास होकर बैठ जाने से समस्या हल नहीं होगी. यदि आपको ख़ुद को साबित करना है, करियर में आगे बढ़ना हैं, तो दोबारा मेहनत करनी ही पड़ेगी. माना इसमें वक़्त लगेगा, मगर आगे बढ़ने के लिए तो आपको ये करना ही होगा. यक़ीन मानिए, यदि आप सकारात्मक सोच के साथ नई शुरुआत करते हैं, तो देर से ही सही आपको सफलता ज़रूर मिलेगी.

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जो बीत गई सो बात गई
‘टूटे तारों पर कब अंबर शोक मनाता है, जो बीत गई सो बात गई’, हरिवंश राय बच्चन की कविता की इन पंक्तियों का सही अर्थ समझकर यदि आप जीवन में उतार लेंगे, तो मुश्किल से मुश्किल हालात से भी ख़ुद को उबारकर जीवन में आगे बढ़ सकेंगे. ज़िंदगी में बहुत से ऐसे लोग, चीज़ें, बातें और पल होते हैं, जिनके छिन जाने पर आपको बहुत दुख होता है या आपकी पूरी ज़िंदगी ही बदल जाती है. कई बार तो लगता है जैसे जीने का कोई मक़सद ही नहीं बचा, मगर जब तक आप ज़िंदा है आपको अतीत को भुलाकर आगे बढ़ना ही होगा, वरना आप ज़िंदा होकर भी ज़िंदगी जी नहीं पाएंगे.

क्या वाकई रिश्ते स्वर्ग में तय होते हैं? जानने के लिए देखें वीडियो: 

अपने मुंह मियां मिट्ठू (Self Praise: Are You Hurting Or Helping?)

अपने मुंह मियां मिट्ठू लोग अपने सिवाय किसी और को कुछ समझते ही नहीं हैं. अपने मुंह मियां मिट्ठू लोगों को आत्मप्रशंसा की इतनी बुरी लत होती है कि हर किसी के सामने अपनी बड़ाई करने लगते हैं. उन्हें लगता है कि ऐसा करके वे ख़ुद को श्रेष्ठ साबित कर सकते हैं, जबकि आत्मप्रशंसा ओछेपन की निशानी है.

Self Praise

 

बड़े बड़ाई न करें, बड़े बोले न बोल
रहिमन हीरा कब कहे, लाख टका मेरा मोल

रहीमदास का ये कथन बिल्कुल सटीक है. जो लोग वाकई में ज्ञानी और गुणवान होते हैं वो अपने गुणों का बखान नहीं करते, बल्कि चुपचाप अपना काम करते रहते हैं. क्योंकि उनका काम ही उनके बारे में सब कुछ कह देता है. इसकी जीती जागती मिसाल स्वामी विवेकानंद, रविंद्रनाथ टैगौर, महात्मा गांधी और सुभाषचंद्र बोस जैसे इतिहास पुरुष हैं, जिनका लोहा पूरी दुनिया मानती है, लेकिन उन्होंने ख़ुद कभी अपनी शेखी नहीं बघारी.

अपने मुंह मियां मिट्ठू लोग दरअसल अपनी कमियां छुपाते हैं
जिन लोगों में योग्यता नहीं होती वो ही ख़ुद की प्रशंसा करके अपनी कमियां छुपाने की कोशिश करते हैं. अपनी हार के लिए ख़ुद को ज़िम्मेदार मानने की बजाय उसका दोष परिस्थितियों व दूसरे लोगों पर मढ़ देते हैं, जैसे जॉब या प्रमोशन न
मिलने पर ऐसे शख़्स कहेंगे, “मुझे काम का अनुभव तो था, लेकिन लोगों को इसकी कद्र नहीं… मेरी सिफ़ारिश करने वाला कोई नहीं था या मेरी किसी बड़े आदमी से पहचान नहीं थी, इसलिए मुझे ये नौकरी/प्रमोशन नहीं मिली.’ माना किसी संदर्भ में ये बातें सही हो सकती है, लेकिन आप में यदि प्रतिभा व योग्यता है, तो निश्‍चय ही आपको सफलता मिलेगी. इसके लिए आपको अपने मुंह मियां मिट्ठू बनने की ज़रूरत नहीं.

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अपने मुंह मियां मिट्ठू लोग छोटी सोच के होते हैं
अपनी तारीफ़ करके यदि आपको ऐसा लगता है कि दूसरे आपसे प्रभावित हो जाएंगे और उनकी नज़रों में आपका क़द बढ़ जाएगा तो आप ग़लत हैं. उल्टा आप उनकी नज़रों में छोटे बन जाएंगे, क्योंकि कोई भी इंसान अपनी कथनी से नहीं, बल्कि करनी से बड़ा होता है. शांति व संजीदगी सज्जन व ज्ञानी व्यक्तियों की पहचान है. जिस तरह पूरा भरा घड़ा छलकता नहीं है वैसे ही योग्य व सक्षम व्यक्ति भी ख़ुद अपनी बड़ाई नहीं करते, बल्कि दुनिया उनके गुणों का बखान करती है. दरअसल, प्रशंसा की भूख अयोग्य व्यक्तियों में ही होती है. इस संदर्भ में महात्मा गांधी ने बिल्कुल सही कहा है, “जो लोग अपनी प्रशंसा के भूखे होते हैं, वो साबित कर देते हैं कि उनमें योग्यता नहीं है.”

अपने मुंह मियां मिट्ठू लोग स़िर्फ अपनी शेखी बघारते हैं
आप अपने परिवार व समाज में सबकी मदद करते हैं, मुश्किल हालात में जी जान लगाकर आप उनकी सहायता करते हैं. इस काम के लिए जब दूसरे आपकी प्रशंसा करें तब तो ठीक है, लेकिन आप अगर ख़ुद ही अपनी शेखी बघारने लगेंगे तो आपके सारे किए कराए पर पानी फिर जाएगा. तुलसीदास जी ने भी कहा है “आत्मप्रशंसा वह आग है जिसमें कर्तव्य का जंगल जल जाता है.”

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सफलता के 10 सूत्र (10 Ways To Achieve Your Dream)

सफलता के 10 सूत्र आपकी ज़िंदगी बदल सकते हैं. सफल बनने और अपने सपनों को पूरा करने के लिए आप भी अपनाएं सफलता के 10 सूत्र.

10 Ways To Achieve Your Dream

1) निर्धारित लक्ष्य के बिना आप जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफल नहीं हो सकते. यदि आपको अपनी मंजिल का ही पता नहीं होगा तो भला रास्ता कैसे तय करेंगे? स्पष्ट लक्ष्य के अभाव में आप अंजान रास्तों पर यूं ही भटकते रहेंगे. अतः क़ामयाबी पाने के लिए सबसे पहले अपना लक्ष्य निर्धारित करिए और फिर पूरी ईमानदारी और मेहनत से उसे हासिल करने में जुट जाइए.

2) कठिनाइयों में भी अपने लक्ष्यों का पीछा करते रहें, और विपत्तियों को अवसरों में बदल दें.
– धीरूभाई अंबानी

3 ) कोई लक्ष्य मनुष्य के साहस से बड़ा नहीं, हारा वही जो लड़ा नहीं.
– अज्ञात

4) आप कभी भी लक्ष्य निर्धारित करने या नया सपना देखने के लिए बहुत बूढ़े नहीं होते.
– सी.एस. लुईस

5) अपने मिशन में क़ामयाब होने के लिए आपको अपने लक्ष्य के प्रति एकचित्त निष्ठावान होना पड़ेगा.
– अज्ञात

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6) लक्ष्यों के बारे में सबसे महत्वपूर्ण चीज़ है उनका होना.
– जेफ्री ऍफ ऐबर्ट

7 ) स्पष्ट और लिखित लक्ष्य जिनके होते हैं, वे कम समय में ही इतनी सफलता प्राप्त करते हैं जितनी कि बिना ऐसे लक्ष्यों वाले सोच भी नहीं सकते.
– ब्रायन ट्रेसी

8 ) लक्ष्य न होने के साथ समस्या ये है कि आप अपना समस्त जीवन मैदान में ऊपर नीचे दौड़ते रहने के बाद भी कोई जीत हासिल नहीं कर पाते.
– बिल कोपलेंड

9 )जब कोई व्यक्ति अपने लक्ष्य को इतनी गहराई से चाहे कि वह उसके लिए अपना सब कुछ दांव पर लगाने के लिए तैयार हो, तो उसका जीतना सुनिश्‍चित है.
– नेपोलियन हिल

10 ) मुट्ठीभर संकल्पवान लोग जिनकी अपने लक्ष्य में दृढ़ आस्था है, इतिहास की धारा को बदल सकते हैं.
– महात्मा गांधी

जानें ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी की सफलता का राज़, देखें वीडियो:

 

अपने सपनों को पूरा कैसे करें? (How To Fulfill Your Dreams)

How To Fulfill Your Dreams

सपनों को पूरा करना बहुत मुश्किल नहीं है, यदि आपका लक्ष्य सही हो, आप अपने लक्ष्य के लिए लगातार मेहनत कर रहे हों. अपने सपनों को कैसे पूरा करें, इसके बहुत ही आसान उपाय यहां पर हम आपको बता रहे हैं.

How To Fulfill Your Dreams

सपनों की उड़ान
ख़्वाबों की दुनिया बड़ी हसीन होती है, यहां हम जो चाहें बन सकते हैं, जो चाहें हासिल कर सकते हैं, लेकिन आप यदि अपने ख़्वाबों को हकीक़त में बदलना चाहते हैं, तो पूरी लगन, ताक़त और जोश के साथ उसे पूरा करने में जुट जाइए, यक़ीन मानिए सपना सच होते देर नहीं लगेगी.

जीने के लिए ज़रूरी हैं सपने
यदि ज़िंदगी में सपने नहीं होंगे तो इच्छाएं नहीं होगीं, इच्छाएं नहीं होगी तो हम प्रयास नहीं करेंगे और यदि हमने प्रयास बंद कर दिए तो ज़िंदगी जड़ हो जाएगी यानी हमारा जीवन ही ख़त्म हो जाएगा. उस स्थिति की कल्पना करिए जब आपके पास करने के लिए कुछ न रहे, आप किसी चीज़ को हासिल करने के बारे में सोचे ही नहीं… कैसी होगी ज़िंदगी? निश्‍चय ही बेरंग, नीरस और उबाऊ. जीने के लिए कुछ मकसद होना ज़रूरी है और वो मकसद तभी मिलता है जब हम सपने देखते हैं. सपना कुछ करने का, सपना कुछ बदलने का, सपना अपनों को ख़ुश रखने का या देश/समाज में कुछ बदलाव लाने का, लेकिन स़िर्फ सपने देखना ही काफ़ी नहीं है, बल्कि उसे पूरा करने में जी जान लगाना भी ज़रूरी है.

प्रेरणा देते हैं सपने
विप्रो कंपनी के मालिक अजीम प्रेमजी ने एक बार अपने भाषण में कहा था कि ‘सपने आपके सच्चे प्रेरक होते हैं, सपनों से आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती हैं. साथ ही ये लक्ष्य प्राप्त करने के लिए ऊर्जा भी देते हैं.’ मगर ये भी सच है कि ख़्याली पुलाव पकाने या हवा में महल बनाने से ज़िंदगी में कुछ हासिल नहीं होता. सपने तभी सार्थक है जब वो हकीक़त के धरातल से जुड़े रहें. माना कोई इंजीनियरिंग की पढ़ाई करते हुए यदि डॉक्टर बनने का सपना देखता है तो ऐसा सपनों का कोई मतलब नहीं है, लेकिन एक साधारण इंसान यदि टाटा और अंबानी जैसा अमीर बनने का सपना देखता है, तो इसमें कुछ ग़लत नहीं है. कभी एक मामूली सी नौकरी करने वाले धीरूभाई अंबानी जब करोड़ों की कंपनी खड़ी कर सकते हैं, तो आप क्यों नहीं?

पूरा करने के लिए देखें सपने
एक बार पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम ने कहा था ‘सपने सच होने के लिए ज़रूरी है कि पहले आप सपने तो देखें.’ उनकी बात सौ फीसदी सच है. जब तक आप घर ख़रीदने, आईपीएस, डॉक्टर, इंजीनियर, पत्रकार या कुछ और बनने का सपना ही नहीं देखेंगे, तो इस दिशा में प्रयास कैसे करेंगें? जब तक आप किसी चीज़ के बारे में सोचेंगे ही नहीं, तो उसे हासिल करने की तरक़ीब कैसे निकालेंगे? जीवन में क़ामयाबी की सीढ़ियां चढ़ने के लिए पहले सपने देखिए फिर पूरी शिद्दत, ईमानदारी और लगन से उसे पूरा करने की कोशिश में जुट जाइए. फिर देखिए ‘सपने भी कहीं सच होते हैं?’ वाली आपकी ये सोच कैसे बदल जाती है.

ग़ुस्सा कम करने और मन शांत करने के आसान उपाय (Anger Management: How To Deal With Anger)

Anger Management, How To Deal With Anger

आज के कॉम्पटीशन के युग में जितनी सुख-सुविधाएं मौजूद हैं, तनाव उससे भी कहीं ़ज़्यादा हैं. घर में सुख-सुविधाएं जुटाने का तनाव, ऑफ़िस में अच्छे परफ़ॉर्मेंस का तनाव… नतीज़ा, बात-बात में ग़ुस्सा, चिड़चिड़ापन… चाहकर भी हम नॉर्मल नहीं रह पाते. बढ़ते काम के घंटों ने जैसे दिन रात के फ़र्क़ को ही मिटा दिया है, जिसके चलते अक्सर ऑफ़िस का तनाव घर तक आ पहुंचता है और हमारी पर्सनल लाइफ़ को भी डिस्टर्ब करने लगता है. ग़ुस्से की स्थिति में हम बात-बात पर चिढ़ने लगते हैं, किसी का ग़ुस्सा किसी और पर निकालने लगते हैं. इससे न स़िर्फ हमारा मूड ख़राब रहता है, बल्कि सेहत भी बिगड़ने लगती है.

Anger Management, How To Deal With Anger
ग़ुस्से के कारण निवारण के बारे में जानते हुए भी आख़िर क्यों हम इस पर काबू नहीं कर पाते..? क्योंकि हम दूसरों से ही नहीं, अपने आप से भी ज़रूरत से ़ज़्यादा उम्मीदें करने लगते हैं. हम हर बात में बेस्ट और पऱफेक्शन ढूंढ़ने लगते हैं, जोकि हर बार मुमक़िन नहीं होता और ये भी मुमक़िन नहीं है कि किसी व्यक्ति को कभी ग़ुस्सा न आए. ख़ुशी, ग़म, प्यार-दुलार जैसी तमाम भावनाओं की तरह ही ग़ुस्सा आना भी मानव स्वभाव है. हां, जब इसकी अति होने लगती है तो इसके परिणाम भी नकारात्मक होने लगते हैं.

थोड़ा ग़ुस्सा ज़रूरी है
ग़ुस्सा हमारी ताकत बन सकता है, यदि हम उसका सही समय पर सही प्रयोग करें. कई बार हम ग़ुस्से में वो काम भी कर जाते हैं, जिसकी हमने कभी कल्पना भी नहीं की होती है. यानी ग़ुस्सा जब ताकत बन जाए, तो व्यक्ति को असाधारण प्रतिभा का धनी भी बना सकता है, लेकिन ग़ुस्सा तभी असरदार हो सकता है, जब वह किसी का अहित न करे, किसी को आहत न करे. अतः थोड़ा-बहुत ग़ुस्सा आता भी है, तो उसे अपनी ताक़त बनाइए, कमज़ोरी नहीं.

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कब आता है ग़ुस्सा?
जब हम कोई काम बड़ी लगन व मेहनत से करते हैं, लेकिन संतुष्टिजनक नतीज़ा नहीं मिलता.
जब कभी हार का सामना करना पड़ता है.
हालात, आस-पास के लोग या फिर ज़िंदगी की गाड़ी जब हमारे हिसाब से नहीं चलती. शारीरिक कमज़ोरी या लंबी बीमारी.

कैसे पाएं ग़ुस्से पर काबू?
* कारण जानने की कोशिश करें.
* यदि स्थिति आपके अनुरूप नहीं हो सकती तो ख़ुद को स्थिति के अनुरूप ढाल दें.
* जिस माहौल या लोगों के बीच आपको ग़ुस्सा आता है, उनसे दूर रहने की कोशिश करें.
* ग़ुस्से की स्थिति में अपना मन उन चीज़ों में लगाने की कोशिश करें, जिनसे आपको ख़ुशी या संतुष्टि मिलती है.
* जब ग़ुस्सा आए, तो अपने आपको किसी रचनात्मक कार्य में व्यस्त कर दें.
* उल्टी गिनती गिनें. इससे ग़ुस्से पर से आपका ध्यान हट जाएगा.
* लंबी-लंबी सांसें लें. ये एक तरह से डी-टॉक्सीन का काम कर के मन को शांत करता है.

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चेहरे पर न बांधें अहंकार की पट्टी (Signs Of An Arrogant Person)

Signs Of An Arrogant Person

किसी को ख़ूबसूरती का घमंड होता है, किसी को शिक्षा का तो किसी को धन का. अहंकार चाहे किसी भी चीज़ को हो ये व्यक्ति की सेहत के लिए अच्छा नहीं होता. अहंकार के नशे में चूर व्यक्ति स्वयं को ही सर्वोपरी समझता है और दूसरों को छोटा, लेकिन अहं के इस मद में वो ये भूल जाता है कि अहंकार ने बड़े-ब़डे संत महात्माओं का भी सर्वनाश कर दिया. सफलता के शिखर पर पहुंच आसान नहीं है लेकिन उससे भी ज़्यादा मुश्किल हैं वहां टिके रहना. जिसके लिए अहंकार से कोसो दूर रहना ज़रूरी है, क्योंकि जिस दिन आपके अंदर अंह आ गया समझ लीजिए उसी दिन से आपके पतन की उल्टी गिनती शुरू हो गई.

Signs Of An Arrogant Person

अहंकार से होता है विनाश
अहंकार किस तरह मनुष्य का विनाश कर सकती है इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण रावण है. महाज्ञानी रावण को अपनी शक्ति और ज्ञान का इतना अंह हो गया था कि वो ख़ुद को ईश्‍वर से भी ऊपर समझने लगा था और उसके इसी अहंकार ने उसका अस्तित्व मिटा दिया. आप कितने भी ज्ञानी व परोपकारी क्यों न हो अगर आप में अहंकार का ज़रा सा भी समावेश वो गया तो आपके सारे गुण अवगुण समान हो जाएंगे. जैसे आपने आज सुबह किसी गरीब व्यक्ति को दान तो किया लेकिन आप मन ही मन सोच रहे थे कि आप बहुत श्रेष्ठ हैं इसलिए आपके पास धन हैं, तो आपको दान का फल नहीं मिलेगा. अहंकार की पट्टी आंखों पर बंध जाने पर इंसान को अच्छे-बुरे, सही-ग़लत का भी ज्ञान नहीं रहता. अहंकार में अंधे व्यक्ति को अपना ग़लत काम भी सही लगने लगता है, और उसका यही रवैया उसो लोगों की नफ़रत का पात्र बना देती है.

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प्रगति में बाधक है अंहकार
कई लोगों को ये बात बिल्कुल अच्छी नहीं लगती कि कोई उनके काम पर उगंली उठाएं. वो हर हाल में ख़ुद को सही साबित करने की कोशिश करते हैं (चाहे वो ग़लत ही क्यों न हों). अगर कोई उनसे कह दे “आपका ये काम ठीक नहीं है” तो उन पर आसमान टूट पड़ता है, उनके अहं को ठेस पहुंच जाती हैं और ग़लती सुधारने की बजाय वो सोचने लगते हैं “उसकी इतनी मजाल कि वो मेरे काम में ग़लती निकाले.” ऐसे लोग जीवन में कभी आगे नहीं बढ़ पातें, क्योंकि वो अपनी ग़लती स्वीकार करके उसे सुधारने की कोशिश ही नहीं करतें. उल्टे ग़लती बताने वाले को ही भला-बुरा कहने लगते हैं. शायद इन लोगों को ज़रूरत है कबीर का ये दोहा पढ़ने की.
निंदक नियरे राखिए, आंगन कुटी छवाय
बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय

अहंकार से बचाती है विनम्रता
अगर आप जीवन में सफल होना चाहते हैं तो अहंकार को त्याग कर विनम्रता का दामन थाम लें. विनम्रता अहंकार को दूर रखती हैं. और ये संकट से भी बचाती है. आंधी-तूफान में एक सूखा पेड़ तो तुरंत टूट जाता है लेकिन फलों से लदा पेड़ नहीं टूटता, क्यों? क्योंकि वो झुका रहता है सूखे पेड़ की तरह अकड़कर खड़ा नहीं रहता. इसी तरह आप भी विनम्र बनकर मुश्किल परिस्थितियों का सामना कर सकते हैं. आज से आप भी विनम्रता को अपने जीवन का हिस्सा बना लीजिए फिर देखिए ज़िंदगी कितनी बदल जाती है. कल तक आपसे नफ़रत करने वाले लोग भी अब आपकी तरफ़ प्यार भरी नज़रों से देखने लगेंगे.

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क्या आप भी करते हैं दूसरों की बुराई? (How To Avoid Gossiping)

How To Avoid Gossiping

“बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो और बुरा मत कहो” गांधीजी के ये वाक्य भले ही हमने रट लिए हों, लेकिन उन्हें जीवन में उतारने की कोशिश हमने आज तक नहीं की. तो क्यों न अब इस ओर एक प्रयास किया जाए?

How To Avoid Gossiping

क्योंकि निंदा करना बुरी बात है
कुछ बातें ऐसी होती हैं, जो हमें बचपन से सिखाई जाती हैं, जैसे- झूठ बोलना पाप है, चोरी करना गलत बात है आदि. इसी तरह निंदा करना बुरी बात है यह वाक्य भी कई बार हम अपने बड़े-बूढ़ों के मुंह से सुन चुके हैं, लेकिन आश्‍चर्य इस बात का है कि आज भी हमारी सुबह और शाम पड़ोसी, रिश्तेदार व सखी-सहेली से जुड़ी निंदक बातों से शुरू और खत्म होती है. जब कि हम सब इस बात से भलीभांति अवगत हैं कि निंदा करना बुरी बात है.

निंदा करना और सुनना दोनों ही पाप है
कहते हैं, अन्याय करनेवाले और सहनेवाले दोनों ही बराबर के दोषी होते हैं. ठीक उसी तरह हिंदू वेद-पुराण के अनुसार परनिंदा करनेवाले और सुननेवाले दोनों ही पाप के समान भागीदार होते हैं. अतः अगर धार्मिक किताबों में आपकी निष्ठा है, तो अब से न ही दूसरों की निंदा करें और न ही किसी की निंदक बातों में दिलचस्पी लें.

परनिंदा से बेहतर है संतगुणों की प्रसंशा
काहू कि नहिं निन्दिये, चाहै जैसा होय।
फिर फिर ताको बन्दिये, साधु लच्छ है सोय॥
संत कबीर दासजी कहते हैं कि भले ही कोई व्यक्ति कितना भी बुरा हो, परंतु उसकी निंदा न करें, क्योंकि इससे स़िर्फ समय की बर्बादी होती है और कुछ नहीं, इसलिए अच्छा यह होगा कि आप अपना समय उन लोगों की प्रशंसा में व्यतीत करें, जो स्वभाव से सरल हों, जिनके भीतर साधू के लक्षण विद्यमान हों अथवा जो सतगुणों की खान हों.

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परनिंदा से केवल समय की बर्बादी होती है
यह बात सौ आने सच है कि परनिंदा से केवल समय की बर्बादी होती है और कुछ नहीं, क्योंकि आप जिस व्यक्ति की निंदा करते हैं, उसे इस बात की ख़बर तक नहीं होती कि आप उसके बारे में यूं भला-बुरा कह रहे हैं, नतीजतन वह व्यक्ति तो अपने काम में मस्त रहता है, परंतु उस वक्त उसकी निंदा करने के चक्कर में आपके काम पर अल्पविराम लग जाता है, इसलिए अब से अपना बेशक़ीमती समय दूसरों की निंदा में बर्बाद करने की बजाय अपने काम में मन लगाएं.

परनिंदा से पहले करें स्वयं का परीक्षण
जब हम दूसरों की तरफ एक उंगुली दिखाते हैं, तब हम ये भूल जाते हैं कि बाकी बची चार उंगुलियां हमारी ओर इशारा करती हैं. अर्थात जब हम फलाना व्यक्ति को एक उंगली से परिभाषित करते हैं, तो उस वक्त हमारी चार उंगलियां हमें परिभाषित कर रही होती हैं. इसका मतलब आप उस व्यक्ति से ज़्यादा अवगुणी हैं. अतः किसी और पर दोषारोपण करने से पहले अपने गुण-दोष का परिक्षण करें और ख़ुद से पूछें कि क्या आप दूसरों की निंदा करने के लायक हैं? और उत्तर मिलने के बाद ही किसी की निंदा करें या सुनें.

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