Tag Archives: Positive Thoughts

जीवन के हर पल को उत्सव बनाएं (Celebration Of Life)

जीवन के हर पल को उत्सव बनाना इसलिए ज़रूरी है, क्योंकि हमारे जीवन में अगले पल क्या होने वाला है, ये हम नहीं जानते. न हम अपना अतीत बदल सकते हैं और न ही भविष्य के बारे में जान सकते हैं, इसलिए जो पल हमारे पास है, उसे भरपूर जीएं. जीवन के हर पल को उत्सव बनाएं, सही मायने में सेलिब्रेशन इसे ही कहते हैं. जीवन के हर पल को उत्सव कैसे बनाएं? आइए, हम आपको बताते हैं.

Celebration Of Life

1) ख़ुश रहना सीखें
आपने अपने आसपास कुछ ऐसे लोगों को देखा होगा, जो हमेशा हंसते-मुस्कुराते रहते हैं. उन्हें देखकर लगता है जैसे उनके जीवन में कोई तकलीफ़ नहीं है और उनके लिए हर दिन उत्सव है. ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि वो लोग अपने जीवन और अपनी ख़ुशियों से बहुत प्यार करते हैं और ख़ुश रहने की हर मुमक़िन कोशिश करते हैं. जीवन के हर पल को उत्सव बनाने के लिए आप भी ऐसा ही करें.

2) ख़ुशी के मौ़के तलाशें
हम में से अधिकतर लोग ये समझते हैं कि ख़ुशी के मौ़के ही जीवन में ख़ुशियां लाते हैं, जैसे त्योहार, शादी, करियर में तरक्क़ी… लेकिन रोज़मर्रा की ख़ुशी? उसके बारे में हम सोचते ही नहीं हैं. ख़ुशी का कोई मौक़ा नहीं होता, आप चाहें तो हर पल ख़ुश रह सकते हैं और इसके लिए आपको अलग से कुछ करने की ज़रूरत भी नहीं है. आपको बस अपने जीने का नज़रिया बदलना होगा और अपने जीवन में पॉज़िटिविटी बनाए रखनी होगी. अतः त्योहार या किसी ख़ास दिन पर ही नहीं, हर रोज़ ख़ुश रहने की कोशिश करें, इससे जीवन में पॉज़िटिविटी आती है और हम जीवन का भरपूर लुत्फ़ उठा पाते हैं.

यह भी पढ़ें: ख़ुशहाल ज़िंदगी जीने के 5 आसान तरीके (5 Simple Ways To Live Life For Yourself)

Celebration Of Life

3) ख़ुशी जीवन का असली उत्सव है
सुख-दुख हर किसी के जीवन में लगे रहते हैं. आज सुख है, तो कल दुख भी हो सकता है. यदि हम दुख को अपने जीवन से बड़ा समझेंगे तो कभी ख़ुश नहीं रह पाएंगे, इसलिए दुख कितना बड़ा है इसके बारे में सोचने की बजाय ये सोचें कि इससे कैसे बाहर निकला जाए. जो लोग जीवन के प्रति पॉज़िटिव अप्रोच रखते हैं, वो मुसीबतों के बारे में कम और उनसे निपटने के रास्ते के बारे में ज़्यादा सोचते हैं, इसलिए वो बड़ी से बड़ी मुसीबतों का आसानी से सामना कर पाते हैं. अतः अपने जीवन और ख़ुशी को सबसे ज़्यादा महत्व दें और हमेशा ख़ुश रहें, क्योंकि ख़ुशी ही जीवन का असली उत्सव है.

4) त्योहार आपसे हैं, आप त्योहार से नहीं
यदि हम ख़ुशी को त्योहारों से जोड़कर देखें, तो यहां भी ख़ुशी कम और प्रेशर ज़्यादा नज़र आता है. त्योहारों की तैयारियों को लेकर, ख़ासकर महिलाएं इतना तनाव महसूस करती हैं कि वो त्योहार का आनंद ही नहीं उठा पातीं. ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि वो हर काम परफेक्ट करना चाहती हैं और ऐसा हो नहीं पाता. व़क्त के साथ महिलाओं की ज़िम्मेदारियां बढ़ गई हैं, घर-ऑफिस की दोहरी ज़िम्मेदारियों के चलते वो अपनी मां या सास की तरह त्योहारों की तैयारियां नहीं कर सकतीं. अतः वर्किंग महिलाएं और उनके परिवार के सदस्य इस बात को समझें और मिल-जुलकर त्योहार की तैयारियां करें. परिवार के सभी सदस्य न स़िर्फ रोज़मर्रा के काम, बल्कि त्योहार के समय भी घर की वर्किंग महिलाओं का हाथ बंटाएं. इससे महिलाओं का तनाव कम होगा और वो त्योहार का पूरा लुत्फ़ उठा सकेंगी.

यह भी पढ़ें: अमीर और क़ामयाब बनना है तो सीखें ये आदतें (How To Become Rich And Successful)

Celebration Of Life

5) जानें त्योहार का सही अर्थ
हम सभी त्योहार के मौ़के पर घर की साफ़-सफ़ाई करते हैं, घर को और ख़ुद को भी सजाते-संवारते हैं, पूजा-पाठ करते हैं ताकि घर में सुख-शांति-समृद्धि बनी रहे, लेकिन इन सबसे कहीं ज़्यादा ज़रूरी हमारा ख़ुश रहना है. यदि हम मन से ख़ुश नहीं हैं, तो इन सब तैयारियों का कोई मतलब नहीं है. यदि हम मन से ख़ुश हैं, तो हमें दुनिया की हर चीज़ अच्छी लगती है और हर दिन त्योहार लगता है. ख़ुशी को समझना, उसे महसूस करना और उसे दूसरों में बांटना ही सही मायने में त्योहार है.

जल्दी अमीर बनने के लिए करें ये वास्तु उपाय, देखें वीडियो:

 

क्रोध (गुस्से) पर नियंत्रण के 5 आसान उपाय (How To Control Your Anger)

गुस्सा (Anger) आना सामान्य व्यवहार है, लेकिन जब किसी को बात-बात पर गुस्सा आए तो ये सामान्य बात नहीं है. गुस्सैल लोगों से सब दूर ही रहना चाहते हैं, क्योंकि ऐसे लोग गुस्से में कुछ भी बोल देते हैं, जिससे माहौल बिगड़ जाता है. गुस्सैल लोग दूसरों का कम और अपना नुकसान ज़्यादा करते हैं. यदि आपको भी बात-बात पर गुस्सा आता है, तो आपको गुस्से को काबू करने के ये 5 उपाय ज़रूर जानने चाहिए.

Anger Management

 

 

 

 

 

गुस्सैल लोगों को होते हैं ये 5 नुकसान
1) आपका गुस्सा सबसे पहले आपके स्वास्थ्य को हानि पहुंचाता है. गुस्से से तनाव बढ़ता है और तनाव से कई स्वास्थ्य समस्याएं शुरू हो जाती हैं. अत: गुस्सैल स्वभाव के लोगों को अपने स्वास्थ्य का ख़ास ध्यान रखना चाहिए.
2) गुस्से के कारण आपकी छवि ख़राब हो सकती है. लोग आप पर विश्‍वास कम करते हैं, क्योंकि उन्हें हमेशा इस बात का डर लगा रहता है कि गुस्से में कहीं आप बना बनाया काम न बिगाड़ दें.
3) गुस्से के कारण आप अपनों को खो सकते हैं. गुस्से में आपको समझ नहीं आता कि आप क्या कह रहे हैं, लेकिन ऐसा करके आप कई बार अपनों का दिल दुखाते हैं, जिससे वो आपसे दूर होते चले जाते हैं.
4) अपने गुस्सैल स्वभाव के कारण आप अपने अच्छे दोस्त भी खो सकते हैं.
5) यदि आपको बात-बात पर गुस्सा आता है और आप गुस्से में किसी को कुछ भी बोल देते हैं, तो लोग आपसे बात करने से कतराने लगते हैं. ऐसे में आप अपना सम्मान खो सकते हैं और अकेलेपन के शिकार भी हो सकते हैं.

यह भी पढ़ें: थैंक्यू कहिए, ख़ुश रहिए! (Saying Thank You Will Make You Happier)

 

गुस्से से बचने के 5 कारगर उपाय
1) आवेश में आकर कुछ भी बोलने से पहले सोचें कि क्या आपको ऐसा करने की ज़रूरत है. ऐसा करके आप कई ग़लतियों से बच सकते हैं. यदि गुस्से पर काबू नहीं कर पा रहे हैं तो मन ही मन दस से लेकर एक तक उल्टी गिनती गिनें. ऐसा करने से आपका ध्यान बंट जाएगा और आपका गुस्सा शांत हो जाएगा.
2) नियमित रूप से योग व मेडिटेशन करें, ऐसा करने से आप अपने गुस्से पर नियंत्रण कर पाएंगे. साथ ही सात्विक भोजन करें, ऐसा भोजन करने से गुस्सा कम आता है.
3) हमेशा हंसते-मुस्कुराते रहें, इससे आप अच्छा महसूस करेंगे और आपको गुस्सा कम आएगा.
4) ख़ुद को काम में व्यस्त रखें, इससे आप जल्दी थक जाएंगे और आपको गुस्सा कम आएगा.
5) अपने शौक के लिए समय निकालें. जब आप अपना मनपसंद काम करेंगे, तो आप ख़ुश रहेंगे और आपको गुस्सा कम आएगा.

यह भी पढ़ें: क्या है आपकी ख़ुशी का पासवर्ड? (Art Of Living: How To Find Happiness?)

डिप्रेशन को ऐसे करें मैनेज (Self Help: Tips For Managing Depression)

Tips For Managing Depression
डिप्रेशन को ऐसे करें मैनेज (Self Help: Tips For Managing Depression)

डिप्रेशन ऐसी नकारात्मक भावना, जहां आपकी सारी ऊर्जा लगभग ख़त्म हो जाती है, उम्मीदें, आशाएं, ख़ुशियां… सब कुछ धूमिल-सी नज़र आती हैं. ज़िंदगी बेकार लगने लगती है… ऐसा महसूस होता है जैसे इन परिस्थितियों से निकलना अब नामुमकिन है, ज़िंदा रहना मुश्किल लगने लगता है. ऐसे में बहुत ज़रूरी हो जाता है कि आप ख़ुद कुछ प्रयास करें, ताकि अपने इस डिप्रेशन को मैनेज कर सकें और पॉज़िटिव सोच अपना सकें.

बाहर जाएं, कनेक्टेड रहें: यह सच है कि डिप्रेशन के दौरान बाहर जाना और लोगों से मिलना-जुलना बेहद मुश्किल काम है, क्योंकि आपमें वो ऊर्जा नहीं रहती, लेकिन थोड़ा-सा प्रयास आपकी मदद कर सकता है. सोशल गैदरिंग्स में जाएं, दोस्तों से मिलें, रिश्तेदारों से कनेक्टेड रहें. अकेलापन आपकी तकलीफ़ और बढ़ाएगा. बेहतर होगा, नए दोस्त बनाएं और पुरानों से मिलना-जुलना शुरू करें. आपके क़रीबी हमेशा आपकी मदद करने को तत्पर रहेंगे, इसलिए अपनी तकलीफ़ उनसे शेयर करें, इससे आपका मूड बदलेगा और मन हल्का होगा.

किस तरह से कनेक्ट करें?

  • जिनके साथ आप सुरक्षित महसूस करते हों और जिन पर विश्‍वास करते हों, उनसे मिलें.
  • मिलने का अर्थ है आमने-सामने मिलना. यह सही है कि सोशल नेटवर्किंग और फोन कॉल्स से भी कनेक्ट किया जा सकता है, लेकिन फ़ायदा अधिक तभी होगा, जब फेस टु फेस मिलेंगे.
  • दूसरों की सहायता करने का मन बनाएं. दूसरों के लिए कुछ करेंगे, तो आपको कहीं न कहीं संतुष्टि महसूस होगी. मदद चाहे छोटी ही क्यों न हो, किसी के काम आने की भावना आपको पॉज़िटिव बनाएगी.
  • पेट्स रखें और उसके साथ समय बिताएं. यह काफ़ी कारगर तरीक़ा है डिप्रेशन से निपटने का. जानवरों से प्यार करते हैं, तो उनकी केयर करें, इससे आप बेहतर महसूस करेंगे.
  • एक्सरसाइज़, वर्कआउट, योग व मेडिटेशन करें. यह काफ़ी अच्छा उपाय है. इससे आप ऊर्जा व नई शक्ति महसूस करेंगे. मेडिटेशन व योग से मन शांत होगा और नकारात्मक भाव बाहर निकलेंगे.
  • एक्सपर्ट की मदद लें. हिचकिचाएं नहीं. आप सच में अच्छा महसूस करेंगे. ज़िंदगी को देखने का नज़रिया बदलेगा और डिप्रेशन से बाहर आने में मदद मिलेगी.

कनेक्शन के बेस्ट टिप्स

  • किसी क़रीबी या भरोसेमंद से अपनी तकलीफ़ व दुख का कारण शेयर करें.
  • किसी दोस्त के साथ कॉफी या टी डेट पर जाएं.
  • मूवी या डिनर प्लान करें.
  • किसी पुराने दोस्त को कॉल करें.
  • कोई हॉबी क्लास जॉइन कर लें.

अच्छा महसूस करानेवाली गतिविधियां करें: जिन बातों से, जिन गतिविधियों से आप रिलैक्स्ड और ऊर्जावान महसूस करते हों, उन पर ध्यान दें. हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं. शेड्यूल बनाएं और दिनभर में फन एक्टिविटीज़ के लिए टाइम फिक्स करें.

कैसे करें?

  • जो चीज़ें आपको पहले मज़ेदार लगती थीं, उन्हें फिर करना शुरू करें.
  • यह सच है कि आपका मन नहीं करेगा, ये तमाम चीज़ें करने का, लेकिन ख़ुद को फोर्स करें, क्योंकि एक बार आप इस तरह की फन एक्टिविटीज़ में ख़ुद को व्यस्त कर लेंगे, तो आपको विश्‍वास ही नहीं होगा कि कितना बेहतर महसूस करेंगे.
  • हो सकता है कि एक बार में आप डिप्रेशन से बहुत ज़्यादा बाहर न आ पाएं, लेकिन धीरे-धीरे आप ख़ुद को अधिक सकारात्मक व ऊर्जावान महसूस करने लगेंगे.
  • आप कोई स्पोर्ट्स एक्टिविटी या स्विमिंग, डांस व साइकिलिंग जैसे शौक अपना सकते हैं.

अपनी हेल्थ को ज़रूर सपोर्ट करें

  • डिप्रेशन सबसे पहले आपकी नींद पर असर डालता है. या तो आप बहुत कम या बहुत अधिक सोने लगते हैं. अच्छी नींद लेने की कोशिश करें. हेल्दी स्लीप टेक्नीक्स के बारे में जानें और नींद पूरी लें. इससे आपको रेस्ट मिलेगा और आप फ्रेश फील करेंगे.
  • स्ट्रेस को बढ़ने न दें, क्योंकि स्ट्रेस से डिप्रेशन और बढ़ सकता है. उन तमाम तत्वों पर ध्यान दें, जो स्ट्रेस बढ़ाते हैं, जैसे- काम का प्रेशर, आर्थिक समस्या, ख़राब रिलेशनशिप… बेहतर होगा इन सबसे निपटने के तरीक़ों पर ध्यान दें. एक्सपर्ट की सहायता भी ले सकते हैं.
  • रिलैक्सेशन तकनीकों को अपनाएं. ब्रीदिंग एक्सरसाइज़ करें, ध्यान करें, म्यूज़िक सुनें, मसल रिलैक्सेशन तकनीक सीखें.

वेलनेस टूलबॉक्स

  • अपने बारे में सकारात्मक बातें लिखें.
  • लिस्ट बना लें कि आपको अपनी कौन-सी बातें और आदतें सबसे ज़्यादा पसंद हैं.
  • कोई फनी मूवी या टीवी सीरीज़ देखें.
  • म्यूज़िक सुनें.
  • नेचर में समय बिताएं. समंदर के किनारे या किसी पार्क में सुबह-शाम जाएं.
  • हॉट बाथ लें. जल्दबाज़ी न करके आराम से गर्म पानी से नहाएं, इससे शरीर हल्का लगेगा.
  • ख़ुद को किसी न किसी काम में बिज़ी रखें. हेल्दी डायट लें. मनपसंद डिश बनाएं.

एक्टिव रहने की कोशिश करें: एक्सरसाइज़ डिप्रेशन से लड़ने का सबसे बेहतर तरीक़ा है. शोध कहते हैं कि एक्सरसाइज़ डिप्रेशन से लड़ने में उतनी ही कारगर है, जितनी दवा. इसके अलावा एक्सरसाइज़ से डिप्रेशन के दोबारा होने की संभावना भी कम हो जाती है.

यह भी पढ़ें: सुख-शांति के लिए घर को दें एस्ट्रो टच… (Astrological Remedies For Peace And Happiness To Home)

एक्सरसाइज़ से मूड को बूस्ट कैसे करें?

  • यह सच है कि डिप्रेशन के चलते एक्सरसाइज़ का मन बनाना बेहद मुश्किल है, लेकिन एक बार आप इच्छाशक्ति दिखा देंगे, तो यह बेहद फ़ायदा पहुंचाएगी.
  • रिसर्च बताते हैं कि डिप्रेशन से जूझ रहे व्यक्ति को एक्सरसाइज़ से ऊर्जा मिलती है और हताशा कम होती है.
  • रिदमवाली एक्सरसाइज़ अधिक फ़ायदेमंद होती है, जैसे- वॉकिंग, वेट ट्रेनिंग, स्विमिंग या डान्सिंग.
  • किसी क्लब के मेंबर बनकर अन्य लोगों के साथ एक्सरसाइज़ करना और बेहतर परिणाम देगा.
  • घर में अगर पेट्स हैं, तो उनके साथ ईवनिंग वॉक पर जाएं.

हेल्दी खाएं, डिप्रेशन से लड़नेवाली डायट फॉलो करें: जैसा खावे अन्न, वैसा होवे मन… ये कहावत यूं ही नहीं बनी है. हम जो खाते हैं, उसका सीधा असर हमारे शरीर व मन पर पड़ता है. फैटी, ऑयली, कैफीन या अल्कोहल जैसी चीज़ों का सेवन कम करें, क्योंकि ये आपके हार्मोंस पर असर करते हैं और मूड पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं.

कैसी हो आपकी डायट?

  • शुगर और रिफाइंड कार्ब्स का सेवन कम कर दें. फ्रेंच फ्राइज़, पास्ता, एरिएटेड ड्रिंक्स कुछ समय के लिए ही बेहतर महसूस करवाते हैं. आगे चलकर ये आपके मूड को प्रभावित कर सकते हैं.
  • दिन में 3-4 बार थोड़ा-थोड़ा खाएं. खाने में बहुत ज़्यादा अंतर रखेंगे, तो चिड़चिड़ापन बढ़ेगा.
  • विटामिन बी ज़रूर लें, क्योंकि फॉलिक एसिड और विटामिन बी 12 की कमी से डिप्रेशन बढ़ता है. हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, अंडा, बींस, सिट्रस फ्रूट्स अधिक लें.
  • ओमेगा 3 फैटी एसिडयुक्त भोजन लें. मूड को संतुलित रखने में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. फैटी फिश और ठंडे पानी की मछलियों के तेल का सेवन करें.

ज़रूरी है सनलाइट का डेली डोज़: सनलाइट सेरोटोनिन हार्मोंस के स्तर को बढ़ाकर मूड बेहतर करने में मददगार है. जब भी मौक़ा मिले, रोज़ाना 15 मिनट की धूप ज़रूर लें.

कब और कैसे लें यह डेली डोज़?

  • आप लंच टाइम में बाहर जा सकते हैं, कुछ देर टहलें.
  • आसपास कोई गार्डन वगैरह हो, तो वहां जा सकते हैं.
  • अपने घर पर और वर्कप्लेस में जितना संभव हो, नेचुरल लाइट में रहने की कोशिश करें.
  • छुट्टी के दिन सुबह-सुबह की धूप लेने के लिए छत का इस्तेमाल कर सकते हैं या फिर रोज़ाना वॉक के लिए भी जा सकते हैं.

विंटर ब्लूज़ से कैसे निपटें?

  • सर्दियों के मौसम में सनलाइट वैसे भी कम होती है और इस मौसम में डिप्रेशन अधिक महसूस होता है, जिसे सीज़नल इफेक्टिव डिसऑर्डर कहते हैं. लेकिन यदि आप प्रयास करें, तो सालभर आपका मूड बेहतर बना रह सकता है.

नकारात्मक सोच को चुनौती दें: ज़िंदगी से ऊब महसूस होना, कमज़ोरी-थकान लगना, निराशा महसूस होना… इस तरह के नकारात्मक भाव डिप्रेशन के चलते आते हैं. आपको यह बात मन में बैठा लेनी होगी कि ये तमाम नकारात्मक विचार असल में हैं ही नहीं. आपको अपने माइंड को पॉज़िटिव सोचने के लिए प्रशिक्षित करना होगा. हालांकि यह मुश्किल है, लेकिन लगातार प्रयास से यह संभव हो सकता है.

इस तरह के विचारों से रहें दूर

बहुत कुछ या कुछ भी नहीं सोचना: ब्लैक एंड व्हाइट में चीज़ों को न देखें. ये सही है और ये ग़लत… ऐसा नहीं होता. बीच का रास्ता भी होता है.

बुरे अनुभव को मन में बैठा लेना: एक जगह अगर असफलता हाथ लगी हो, तो इसका यह मतलब नहीं कि हर बार और हर जगह ही असफलता मिलेगी. अपने बुरे अनुभवों को मन में बैठा न लें.

पॉज़िटिव बातों को भूलकर स़िर्फ निगेटिव ही याद रखना: आपके साथ बहुत कुछ अच्छा होता है, लेकिन आप उसे अधिक समय तक याद नहीं रखते, लेकिन कोई एक बात ग़लत हो, तो उसे बार-बार याद करते हैं. इस सोच से बाहर निकलें. अच्छा-बुरा सभी के साथ होता है और दोनों को ही समान रूप से लें और जब मन निराश हो, तो पॉज़िटिव बातों को याद करें.

पॉज़िटिव बातों को कम आंकना: कुछ अच्छा हो, तो उसके बारे में भी यह सोचना कि ये तो सामान्य-सी बात है, इसमें कुछ ख़ास क्या है… इस तरह के विचारों से दूर रहें और हर छोटी-छोटी बात में ख़ुशियां ढूंढ़ें.

फ़ौरन निष्कर्ष पर पहुंच जाना: प्रयास करने से पहले ही यह सोच लेना कि परिणाम ग़लत ही होगा या हमें असफलता ही मिलेगी… ग़लत व नकारात्मक पहलू है. इससे दूर रहें.

अपने बारे में इमोशनली निगेटिव सोचना: ‘मैं ज़िंदगी में कुछ नहीं कर सकता’ या ‘मेरे साथ कभी भी कुछ अच्छा नहीं हो सकता’… इस तरह की बातों से अपने बारे में निगेटिविटी न बढ़ाएं. हम जो सोचते हैं हम वही बन जाते हैं, इसलिए अपनी सोच को पॉज़िटिव बनाएं.

बहुत अधिक नियमों में ख़ुद को बांध लेना: अपने लिए बहुत स्ट्रिक्ट रूल्स बना लेना, जिससे आप ज़िंदगी जीना ही भूल जाएं, आपको नकारात्मकता की ओर ले जाएंगे. फ्लेक्सिबल बनें.

कब लें एक्सपर्ट एडवाइस?

जब तमाम सेल्फ हेल्प टेक्नीक्स के बाद भी आपको लग रहा हो कि आपका डिप्रेशन ठीक नहीं हो रहा, तब आपको एक्सपर्ट के पास जाने से हिचकिचाना नहीं चाहिए. आपको अपनी मदद ख़ुद ही करनी होगी. ये न सोचें कि एक्सपर्ट के पास जाना किसी कमज़ोरी की निशानी है. अगर शरीर में तकलीफ़ हो, तो आप डॉक्टर के पास जाते ही हैं, तो मन की तकलीफ़ के लिए क्यों नहीं जाना चाहते?

हां, एक बात का ध्यान रहे कि प्रोफेशनल हेल्प के बाद भी ये सेल्फ हेल्प टेक्नीक्स फॉलो करते रहें और यह बात भी मन में बैठा लें कि डिप्रेशन ठीक हो सकता है और आप इससे निकलकर बेहतर व हैप्पी लाइफ जी सकते हैं.

– गीता शर्मा

यह भी पढ़ें: निर्णय लेने से क्यों डरते हैं आप? क्या हैं डिसाइडोफोबिया के शिकार? (Do You Suffer From Decidophobia)

गुड मॉर्निंग से पहले ख़ुद से पूछें ये 5 सवाल (5 Inspiring And Motivational Thoughts To Start Your Day)

जैसे पृथ्वी के भीतर गुरुत्वाकर्षण की अद्भुत शक्ति होती है, ठीक उसी प्रकार हमारे भीतर भी आकर्षण की महाशक्ति मौजूद होती है. आकर्षण की इस शक्ति का प्रयोग करके हम अपने जीवन को और ख़ुशहाल व सकारात्मक बना सकते हैं और जिसकी शुरुआत हमें हर रोज़ सुबह करनी चाहिए. क्या हैं वे सकारात्मक बातें और सवाल, आइए जानते हैं.

Motivational Thoughts

करें सुबह की शुभ शुरुआत

–   सुबह आंखें खुलने पर एकदम झटके से न उठें.

–   भले ही आप अलार्म की आवाज़ के साथ उठते हैं, फिर भी दो मिनट तक बिस्तर पर यूं ही लेटे रहें.

–   उठते ही कामों की लिस्ट याद करने की बजाय सबसे पहले ईश्‍वर का नाम लेकर उन्हें धन्यवाद दें.

–   अगले एक मिनट में ख़ुद से कुछ सवाल पूछें, ताकि आपका पूरा दिन ऊर्जा और जोश से भरपूर हो.

–   कोशिश करें कि मुस्कुराएं और अपनी मुस्कुराहट को कुछ देर तक बनाए रखें.

–  अगर शरीर में कहीं तकलीफ़ है, तो भी मुस्कुराएं और ख़ुद से कहें कि आप जल्दी ही दर्दमुक्त हो जाएंगे.

पूछें ये 5 जादुई सवाल

हर सुबह हमारा नया जन्म होता है और हर दिन नई उम्मीदें, आशाएं और अवसर लेकर आता है. कभी-कभी ईश्‍वर हमें अपने चमत्कारों से आश्‍चर्यचकित कर देते हैं. जो आपने सोचा भी नहीं होता, वो भी आपको मिल जाता है. ऐसे में यह जादुई एहसास वाकई बहुत ख़ास होता है. तो आइए आपको भी बता दें कि कौन-से हैं वो पांच जादुई सवाल, जो आपको हर दिन पूछने चाहिए.

  1. मैं कैसा महसूस कर रहा/रही हूं?

–   आपके दिन की शुरुआत सेहत से होनी चाहिए, क्योंकि सेहत से बढ़कर कुछ भी नहीं.

– सबसे पहले ख़ुद से पूछें कि मैं कैसा महसूस कर रहा हूं? क्या मेरा शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य दुरुस्त है? मेरे शरीर में कहीं कोई तकलीफ़ तो नहीं? कहीं तनाव का असर मेरी मेंटल हेल्थ पर तो नहीं पड़ रहा?

–   इस बारे में सवाल करने पर आप इस तरफ़ ध्यान देंगे, क्योंकि आज भी बहुत-से लोग इमोशनल और मेंटल हेल्थ को उतनी तवज्जो नहीं देते.

–   अगर आपको कहीं भी ऐसा लग रहा है कि आप कमतर पड़ रहे हैं, तो थोड़ी और कोशिश करें और ख़ुद को ख़ुश व स्वस्थ रखें.

  1. आज का दिन कैसा होगा?

–   दूसरा सवाल ख़ुद से करें कि आज का दिन कैसा होगा. यक़ीनन हर दिन अपने साथ बहुत कुछ नया लेकर आता है.

–   आज का दिन मेरे लिए ढेरों ख़ुशियां लेकर आ रहा है. मैं ख़ुश हूं और दिनभर यह ख़ुशी, जोश और उत्साह बना रहेगा.

–   आज का दिन भी अपने साथ बहुत कुछ अच्छा लेकर आएगा. आज मैं अपने कुछ अधूरे वादे पूरे करने की कोशिश करूंगा.

  1. आज कौन-सी ख़ुशख़बरी मिलेगी?

–   दिनभर ख़ुद को उत्साहित रखने के लिए अपने दिन की शुरुआत इसी सवाल से करें. यक़ीन मानिए इस सवाल के साथ ही आपके चेहरे पर एक बड़ी-सी मुस्कान खिल जाएगी.

–   जो भी आप पाना चाहते हैं, उसकी एक लिस्ट अपनी आंखों के सामने लाएं और सोचें कि इसमें से ही एक ख़ुशख़बरी आज मुझे मिलेगी.

–   आपकी वाइब्स उस ख़ुशख़बरी को लाने के लिए सुबह से ही काम पर लग जाती हैं और जल्द ही आपको वो ख़ुशी नसीब होती है.

  1. क्या झुंझलाने से सब ठीक हो जाएगा?

–   बहुत-से लोग बीते हुए कल की समस्याओं, ईर्ष्या और नफ़रत जैसे नकारात्मक विचारों को ढोकर अगले दिन भी ले आते हैं और नए दिन की शुरुआत भी उसी नकारात्मकता से करते हैं.

–   अब बस दो मिनट के लिए शांत मन से सोचें कि झुंझलाने से क्या समस्या हल हो जाएगी? यक़ीनन जवाब ना में ही होगा. तो फिर ‘रात गई बात गई’ वाला फॉर्मूला अपनाएं और नए दिन की एक बेहतरीन नई शुरुआत करें.

  1. किस बात से मुझे सबसे ज़्यादा ख़ुशी मिलती है?

–  मोटिवेशनल स्पीकर्स की मानें, तो 100 में से 95 लोग इस पहलू की ओर ध्यान ही नहीं देते. माना कि आप अपनों से बहुत प्यार करते हैं और उनकी ख़ुशी के लिए ही सब कुछ करते हैं, पर अपनी ख़ुशी का भी ख़्याल रखें, वरना धीरे-धीरे आपके भीतर हताशा-निराशा घर करने लगेगी.

–   हर सुबह ख़ुद से अपनी ख़ुशियों के बारे में सवाल करें और उन्हें पूरा करने की ईमानदारी से कोशिश करें.

–   कुछ लोगों को लगता है कि ‘चल रहा है ना’ चलने दो, लेकिन ज़िंदगी ख़ुशी-ख़ुशी जीने के लिए है, चलाने के लिए नहीं, इसलिए अपनी ख़ुशियों को ख़ास तवज्जो दें.

–   छोटी-छोटी चीज़ें, जैसे- पानीपूरी खाना, आईस्क्रीम खाना, दोस्त को कॉल करना, किसी से दिल खोलकर बातें करना, झूला झूलना, पेड़ों को छूकर उनसे बातें करना आदि करके भी आप ख़ुश हो सकते हैं.

यह भी पढ़ें: 10 तरह के चुगलखोर: कैसे करें इनसे डील (10 Types Of Snitches You Must Know)

Motivational Thoughts

थैंक्यू कहें, ख़ुश रहें

–   रोज़ाना सोकर उठने पर सबसे पहले ईश्‍वर को धन्यवाद दें कि आप ज़िंदा हैं, क्योंकि यही एक चीज़ है, जिसे लोग सबसे ज़्यादा ग्रांटेड लेते हैं. रोज़मर्रा की ज़िंदगी में हम अक्सर ऐसे उदाहरण देखते हैं, जहां अचानक ही आपके जान-पहचान के लोग यूं ही दुनिया छोड़कर चले जाते हैं, फिर भी हम अपने जीवन को ग्रांटेड लेते हैं.

–   शुक्रिया अदा करें कि आप स्वस्थ हैं, क्योंकि जब आप अस्वस्थ होते हैं, तो जल्द से जल्द ठीक होना चाहते हैं, पर ठीक होते ही अपने शरीर को अनहेल्दी फूड और माइंड को निगेटिव बातों और स्ट्रेस से भर देते हैं और फिर बीमार पड़ जाते हैं, इसलिए ख़ुश हो जाएं कि आप स्वस्थ हैं. आपकी सकारात्मक सोच आपको सकारात्मक ऊर्जा देती हैं, जिससे आप और अच्छा महसूस करते हैं.

–   धन्यवाद दें कि आपके पास नौकरी या व्यवसाय है, जिसके कारण आप स्वाभिमान के साथ अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण कर पा रहे हैं, वरना बाहर बहुत-से लोग बेरोज़गार घूम रहे हैं, जिसके कारण वो डिप्रेशन का शिकार भी हो रहे हैं.

–   ईश्‍वर को धन्यवाद दें कि आपका परिवार है, दोस्त-रिश्तेदार हैं. आपके चाहनेवाले आपसे प्यार करते हैं, आपकी परवाह करते हैं, आपको स्पेशल फील कराने के लिए कुछ न कुछ करते रहते हैं, जबकि बहुत-से लोग अकेले हैं और अकेलापन उनकी ज़िंदगी को खोखला बना रहा है.

–   मुश्किल समय हमें बहुत कुछ सिखाता है. जब हम सबसे ज़्यादा मुसीबत में होते हैं, तब अपनी बहुत-सी पुरानी ग़लतियां याद आती हैं. बुरे हालात हमें लड़ने की ताक़त देते हैं. हमें सब्र और हिम्मत से काम लेना सिखाते हैं. ईश्‍वर को धन्यवाद दें कि उन्होंने आपको चैंलेंजेस दिए, वरना आप अपनी काबीलियत कभी पहचान ही नहीं पाते.

5 पावरफुल पैकेजेस 

हम आपकी भागदौड़ को अच्छी तरह समझते हैं, इसलिए अगर आपको लगता है कि आप रोज़ाना ये सवाल नहीं पूछ सकते, तो कोई बात नहीं आप हफ़्ते में तीन दिन सवाल के लिए रखें और तीन दिन पावरफुल पैकेजेस के लिए. सुबह सोकर उठने पर ये कहें-
1. मैं बेस्ट हूं.
2. मैं यह कर सकता हूं.
3. ईश्‍वर मेरे साथ हैं.
4. मैं विजेता हूं.
5. आज का दिन मेरा है.

– अनीता सिंह

यह भी पढ़ें: सर्वगुण संपन्न बनने में खो न दें ज़िंदगी का सुकून (How Multitasking Affects Your Happiness)

यह भी पढ़ें: क्या आप भी बहुत जल्दी डर जाते हैं? (Generalized Anxiety Disorder: Do You Worry Too Much?)

अपने ग़ुस्से पर कितना काबू कर पाती हैं आप? (Anger Management: 10 Easy Tips To Control Your Anger)

काम है तो प्रेशर है, प्रेशर है तो तनाव है और तनाव में ग़ुस्सा आना लाज़मी है, लेकिन ग़ुस्सा ज़हिर करने के तरी़के सभी के अलग-अलग होते हैं. क्या ग़ुस्सा आपकी पर्सनल या प्रोफेशनल लाइफ़ को भी प्रभावित कर रहा है? आप अपने ग़ुस्से पर किनता काबू कर पाती हैं? ये क्विज़ हल कीजिए और ख़ुद जान जाइए.

Tips To Control Anger

1) आपके बच्चे को स्कूल जाने के लिए पहले से ही देर हो रही है, उस पर उसने नाश्ता करते समय यूनिफॉर्म इतनी ख़राब कर दी कि उसे पहन कर स्कूल नहीं जाया जा सकता. ऐसे में आप-

ए) तुरंत यूनिफॉर्म बदलकर उसे स्कूल बस के बजाय ऑटो रिक्शा या अपनी गाड़ी में स्कूल छोड़ देंगी.
बी) बच्चे पर बहुत ग़ुस्सा होंगी और गंदी यूनिफ़ॉर्म में ही उसे स्कूल छोड़ देंगी.
सी) गुस्से में बच्चे को थप्पड़ जड़ देंगी हैं और स्कूल भी नहीं भेजेंगी.

2) आप ऑफ़िस में एक ज़रूरी प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं, तभी कंप्यूटर ख़राब हो गया और आप फाइल सेव भी नहीं कर पाईं. ऐसी स्थिति में आप क्या करेंगी?

ए) एक कप कॉफ़ी पीएंगी और रिलैक्स होकर दोबारा काम शुरू कर देंगी.
बी) रोने लग जाएंगी.
सी) गुस्से में वहां से चली जाएंगी.

3) आपने अपने एक सहकर्मी के साथ मिलकर बड़ी मेहनत से कोई प्रोजेक्ट पूरा किया, लेकिन उसका पूरा श्रेय स़िर्फ आपके सहकर्मी को ही मिला. ऐसे में आप…

ए) आपके प्रेज़ेंटेशन में कहां कभी रह गई, इस पर विचार करेंगी और अपनी कमियों को सुधारने की कोशिश करेंगी.
बी) सहकर्मी को भला-बुरा कहकर मन की भड़ास निकालेंगी.
सी) पूरे ऑफ़िस में उसकी चुगली करती फिरेंगी.

4) ऑफ़िस की एक ज़रूरी मीटिंग में आपको व़क़्त पर पहुंचना है, लेकिन ट्रैफिक के कारण आप देर से पहुंचती हैं, ऐसे में आप…

ए) देरी के लिए सॉरी कहकर आगे ऐसा न होने का भरोसा दिलाएंगी.
बी) मीटिंग में पहुंचते ही सिस्टम को कोसने लगेंगी.
सी) फोन करके मीटिंग अटेंड करने से मना कर देंगी.

यह भी पढ़ें: मन की बात लिखने से दूर होता है तनाव (Writing About Your Emotions Can Help Reduce Stress)

 

5) ग़ुस्से में आपका पक्ष जाने बिना ही आपके पति यदि आपको भला-बुरा कहने लग जाएं तो?

ए) उस व़क़्त तो चुप रहेंगी, लेकिन जब पति शांत हो जाएंगे, तब अपना पक्ष रखकर उन्हें सही स्थिति से अवगत कराएंगी.
बी) रोने लग जाएंगी.
सी) आप भी ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लग जाएंगी.

6) आपने बड़े जतन से ख़ास मेहमानों के लिए डिनर पार्टी अरेंज की है, पर उसी व़क़्त थोड़े मेहमान और आ गए. ऐसे में आप क्या करेंगी?

ए) तुरंत और खाने के बंदोबस्त में जुट जाएंगी.
बी) समझ नहीं पाएंगी कि क्या करूं?
सी) बिन बुलाए मेहमानों को मन ही मन कोसेंगी.

7) ऑफ़िस में आपको इतना काम दे दिया गया है जो डेडलाइन पर पूरा नहीं हो सकता. ऐसे में आप क्या करेंगी?

ए) ऑफ़िस टाइम के बाद रुककर काम पूरा करेंगी.
बी) सहकर्मियों से मदद के लिए कहेंगी.
सी) काम करने से मना कर देंगी.

8) यदि आपकी बेस्ट फ्रेंड आपको अपनी बर्थडे पार्टी में बुलाना भूल जाए तो?

ए) आप ख़ुद ही फोन करके उसे याद दिला देंगी.
बी) फोन करके फ्रेंड पर ख़ूब चिल्लाएंगी.
सी) उससे दोस्ती तोड़ देंगी.

यह भी पढ़ें: अटेंशन पाने की चाहत आपको बना सकती है बीमार! (10 Signs Of Attention Seekers: How To Deal With Them)

 

9) इन दिनों काम की अधिकता के कारण आपको लगभग रोज़ ही ऑफ़िस से घर लौटने में देर हो रही है, जो कि सासू मां को बिल्कुल पसंद नहीं. ऐसे में आप…

ए) उन्हें ऑफिस की स्थिति समझाने की कोशिश करेंगी.
बी) उनकी बातों को अनसुना कर देंगी.
सी) उनके साथ झगड़ा करने लग जाएंगी.

10) आपके पति रोज़ देर रात तक इंटरनेट पर सर्फिंग करते रहते हैं, जिससे आप ठीक से सो नहीं पातीं. ऐसे में आप…

ए) पति को समझाएंगी हैं कि इससे आप दोनों की नींद व सेहत पर बुरा असर पड़ेगा.
बी) पति से बात करना बंद कर देंगी.
सी) उनसे रोज़ इस बात पर झगड़ने लग जाएंगी.

यह भी पढ़ें: ख़ुश रहना है तो सीखें ये 10 बातें (10 Easy Things Successful People Do To Stay Happy)

 

क्या कहता है स्कोर?
यदि आपके अधिकतर जवाब (ए) हैं तो:
आपका स्कोर बेस्ट है. आप ग़ुस्से पर काबू रखना बख़ूबी जानती हैं, जिससे आप ज़िंदगी के छोटे-छोटे तनावों को आसानी से हैंडल कर लेती हैं. आप मुश्किल से मुश्किल स्थिति में भी रास्ता तलाशना और उसे अपने फ़ायदे में बदलाना बख़ूबी जानती हैं. आपके परिवार, सहकर्मी बेशक आप के व्यवहार से संतुष्ट रहते होंगे.

यदि आपके अधिकतर जवाब (बी) हैं तो:
आप ग़ुस्से को ख़ुद पर हावी तो नहीं होने देतीं, लेकिन उसे हैंडल भी नहीं कर पाती हैं. कई बार आप समस्या से भागने का विकल्प भी चुन लेती हैं. ऐसा करना ठीक नहीं, क्योंकि ये समस्या का समाधान नहीं है. आपको अपने ग़ुस्से पर काबू पाने और समस्या को हैंडल करने के लिए थोड़ी कोशिश और करनी होगी.

यदि आपके अधिकतर जवाब (सी) हैं तो:
छोटी-छोटी बातों पर ग़ुस्सा करना, बेवजह तनावग्रस्त हो जाना आपकी आदत में शामिल हो गया है. आपको अपनी आदतों पर कंट्रोल करना होगा, वरना आगे चलकर आपका ग़ुस्सा आपकी सेहत को भी प्रभावित कर सकता है.

दूरियों को नज़दीकियों में बदलने के लिए अपनाएं ये गुड लक टिप्स: देखें वीडियो:

 

ख़ुशहाल ज़िंदगी जीने के 5 आसान तरीके (5 Simple Ways To Live Life For Yourself)

यदि हम अपने आप से पूछें कि हमारे लिए ख़ुशी की क्या परिभाषा है, हमें किस बात से ख़ुशी मिलती है, क्या हम वाकई ख़ुश हैं? तो शायद हम अपने ही सवालों का जवाब नहीं दे पाएंगे. ऐसा नहीं है कि हमें जवाब पता नहीं, लेकिन हम उसे स्वीकारना नहीं चाहते, क्योंकि हम अपने लिए कम और दूसरों के लिए ज़्यादा जीते हैं. हम ख़ुद से ज़्यादा लोगों की परवाह करने में लगे रहते हैं. हमें क्या पसंद है, हम क्या चाहते हैं, इससे ज़्यादा हमें इस बात की परवाह रहती है कि लोग क्या कहेंगे? आइए, हम आपको बताते हैं ख़ुशहाल ज़िंदगी जीने के 5 आसान तरीके.

Ways To Live Life

क्या आप वाकई खुश हैं?
क्या आपने कभी ख़ुद से ये सवाल किया है कि आप अपनी ख़ुशी के नाम पर जो भी करते हैं, क्या उसमें वाकई आपकी ख़ुशी होती है? चाहे त्योहार हो या शादी-ब्याह ऐसे ख़ास मौक़ों पर अपने लिए कुछ ख़रीदते समय भी हम ये सोचते रहते हैं कि ये चीज़ लोगों को पसंद आएगी या नहीं. आप अपनी ख़ुशी के बारे में कम और दूसरों की ख़ुशी के बारे में ज़्यादा सोचते रहते हैं. कई बार दूसरों पर अपना इंप्रेशन जमाने के लिए हम अपने बजट से ज़्यादा ख़र्च तो कर देते हैं, लेकिन बाद में उसकी भरपाई करना हमें मुश्किल लगने लगता है. दूसरों के बारे में सोच-सोचकर हम अपने सुंदर-सरल जीवन को इतना जटिल बना देते हैं कि कई बार हम अपनी पहचान ही खो देते हैं. हम ये भूल जाते हैं कि हमें किस चीज़ से ख़ुशी मिलती है.

यह भी पढ़ें: अमीर और क़ामयाब बनना है तो सीखें ये आदतें (How To Become Rich And Successful)

 

ख़ुशहाल ज़िंदगी जीने के 5 आसान तरीके

1) सुबह उठते ही सबसे पहले मुस्कुराएं और कहें कि मैं अपना/अपनी फेवरिट हूं. फिल्म जब वी मेट में करीना कपूर का यह डायलॉग सच में इतना पावरफुल है कि ये आपको ख़ुशी और एनर्जी से भर देता है. यकीन मानिए, जो लोग ख़ुद से प्यार करते हैं, वो दूसरों को भी हमेशा ख़ुश देखना चाहते हैं इसलिए सबसे पहले ख़ुद से प्यार करें.

2) सच्ची ख़ुशी पाने के लिए वही करें जो आपको अच्छा लगता है, न कि जो लोग कर रहे हैं.

3) हमेशा बड़ों की तरह बर्ताव न करें, कभी-कभी बच्चों की तरह खिलखिलाकर हंसें, उछलकूद करें, बेपरवाह होकर नाचे-गाएं, दोस्तों के साथ घूमने जाएं, सड़क पर खड़े होकर चाट का लुत्फ़ उठाएं… ऐसी छोटी-छोटी बातों में ही ज़िंदगी की असली ख़ुशी छुपी होती है.

यह भी पढ़ें: मन की बात लिखने से दूर होता है तनाव (Writing About Your Emotions Can Help Reduce Stress)

 

4) समस्या या परेशानियां सभी के जीवन में आती हैं, लेकिन जीवन में क़ामयाब वही होते हैं, जो परेशानियों से डरते नहीं, बल्कि उनका हल निकालने के रास्ते तलाशते हैं. आप भी ऐसा ही करें, आपके सोचने से समस्या हल नहीं होगी, उसके लिए आपको समस्या से बाहर निकलने के रास्ते तलाशने होेंगे.

5) कभी भी किसी और से अपनी तुलना न करें. ईश्‍वर ने हम सबको अलग और स्पेशल बनाया है इसलिए अपनी ख़ूबियों को पहचानें और अपनी अलग पहचान बनाएं. आपको ईश्‍वर ने जो भी हुनर दिया है, उसे निखारने की हमेशा कोशिश करते रहें, ताकि आप अपनी ज़िंदगी में कभी भी बोर न हों.

सीखें प्यार की 5 भाषाएं, देखें वीडियो:

10 न्यू ईयर रेज़ोल्यूशन्स बदल देंगे आपकी ज़िंदगी (Top 10 New Year Resolutions That Will Change Your Life)

New Year Resolutions

10 न्यू ईयर रेज़ोल्यूशन्स (New Year Resolutions) बदल देंगे आपकी ज़िंदगी, यक़ीन न हो तो ख़ुद आज़माकर देख लीजिए. दरअसल  हमारे अधिकतर न्यू ईयर रेज़ोल्यूशन्स इसलिए फेल हो जाते हैं, क्योंकि वो या तो रियलिस्टिक यानी वास्तविक नहीं होते या फिर हम आधे-अधूरे मन से रेज़ोल्यूशन्स बना तो लेते हैं, लेकिन उन्हें पूरा करने का प्रयास ही नहीं करते. नए साल के जोश में हम बड़े-बड़े रेज़ोल्यूशन्स तो बना लेते हैं, लेकिन हफ़्तेभर या महीनेभर में ही हम उन्हें फॉलो करना बंद कर देते हैं. न्यू ईयर रेज़ोल्यूशन्स ऐसे होने चाहिए, जो रोज़ हमारा हौसला बढ़ाएं और हमारी ज़िंदगी को दिन-प्रतिदिन बेहतर बनाएं. इस साल आप भी ऐसे ही 10 न्यू ईयर रेज़ोल्यूशन्स बनाएं, जो आपकी ज़िंदगी बदल देंगे.

New Year Resolutions

1 टाइम मैनेजमेंट
हम समय का स़िर्फ एक बार ही इस्तेमाल कर सकते हैं, क्योंकि गुज़रा हुआ व़क्त कभी लौटकर नहीं आता यानी हम समय को रीसाइकिल नहीं कर सकते. अतः कभी ये न कहें कि ये काम अगली बार करेंगे. हो सकता है, अगली बार आप व़क्त गंवा चुके हों और गुज़रा हुआ व़क्त आपसे कहे कि अब बहुत देर हो चुकी है. ऑफिस, फैमिली, सोसाइटी, सोशल मीडिया, फ्रेंड्स… सभी को आपका टाइम चाहिए, लेकिन आपके पास सीमित समय है, इसलिए समय का सही इस्तेमाल करें. सही टाइम मैनेजमेंट करनेवाले लोग ही ज़िंदगी की रेस में आगे रहते हैं, इसलिए अपने न्यू ईयर रेज़ोल्यूशन्स में टाइम मैनेजमेंट को सबसे ऊपर रखें.

2 सीखने का शौक़
कामयाब लोगों की ये सबसे बड़ी निशानी है कि वो हमेशा कुछ न कुछ नया सीखते रहते हैं. जब भी हम कुछ नया सीखते हैं, तो हमारे दिमाग़ की सक्रियता बढ़ जाती है और हम ख़ुद में एक नई ऊर्जा महसूस करते हैं. इसलिए आप भी कुछ न कुछ सीखते रहें. म्यूज़िक, डांस, स्विमिंग, पेंटिंग या फिर अपने जॉब से संबंधित कोई स्किल… जिस चीज़ में आपकी रुचि हो, वो ज़रूर सीखें. सीखने से आप हमेशा दूसरों से एक क़दम आगे रहते हैं, जिससे आपका आत्मविश्‍वास बढ़ता है और आप कामयाबी हासिल कर पाते हैं.

3 फिटनेस रेज़ोल्यूशन
हेल्दी बॉडी हेल्दी माइंड यूं ही नहीं कहा जाता. जब आप फिट और हेल्दी होते हैं, तो आप अच्छा महसूस करते हैं और इसकी ख़ुशी आपके चेहरे और व्यवहार में भी साफ़ नज़र आती है. यही वजह है कि फिट और हेल्दी लोग हमेशा अपने आसपास पॉज़ीटिविटी बनाए रखते हैं और ऐसे लोगों को हमेशा कॉम्प्लीमेंट्स मिलते हैं. जब आपको ये मालूम होता है कि आप दूसरों से फिट और हेल्दी हैं, तो आपका कॉन्फिडेंस अपने आप बढ़ जाता है और आप अपना हर काम पूरे आत्मविश्‍वास से करने लगते हैं, जिससे आपकी कामयाबी बढ़ती जाती है. आप भी फिट और हेल्दी बने रहने का रेज़ोल्यूशन बनाएं और योग, ध्यान, एक्सरसाइज़, हेल्दी डायट आदि को अपनी दिनचर्या में शामिल करें.

4 मी टाइम
आज की इस भागदौड़भरी ज़िंदगी में किसी के पास व़क्त नहीं है. हम कमा तो बहुत रहे हैं, हमारे पास भौतिक सुख-सुविधाएं भी भरपूर हैं, लेकिन अपने लिए ही व़क्त नहीं है. ऐसी सुविधाओं का क्या लाभ जो ख़ुद आपके काम न आएं, इसलिए आज से ही अपने लिए थोड़ा व़क्त ज़रूर निकालें. इस मी टाइम में वो सब करें, जिससे आपको ख़ुशी मिलती है. यक़ीन मानिए, आपका ये मी टाइम आपके लिए टॉनिक का काम करेगा और आपको एक नई ऊर्जा से भर देगा. फिर आप अपना हर काम और अच्छी तरह कर पाएंगे.

5 आत्मनिर्भरता
कॉन्फिडेंस यानी आत्मविश्‍वास की कमी उन लोगों में होती है, जो दूसरों पर आश्रित रहते हैं. इसलिए कोशिश करें कि आप अपने किसी भी काम के लिए दूसरों पर आश्रित न रहें. जो लोग अपने काम ख़ुद करते हैं, वो कहीं भी बड़ी आसानी से एडजस्ट हो जाते हैं और उन्हें कभी किसी बात का डर नहीं लगता. इसकी शुरुआत आप अपने रोज़ के काम ख़ुद करके कर सकते हैं. जब आप अपने काम ख़ुद करने लगेंगे, तो आपका आत्मविश्‍वास बढ़ेगा और आप फिर अपने हर ़फैसले ख़ुद लेना सीख जाएंगे.

यह भी पढ़ें: दिशा वाकाणी, सरगुन मेहता, अनूप सोनी, रवि दुबे की तरह आप भी साकार करें अपने सपने (Disha Vakani, Sargun Mehta, Ravi Dubey, Anup Soni: TV Celebrities Share Their Success Mantras)

New Year Resolutions

6 क्रोध पर काबू
क्रोध से अक्सर नुक़सान ही होता है अपना भी और दूसरों का भी. इसलिए क्रोध से बचें. हम क्रोध से बच तो नहीं सकते, लेकिन अपने क्रोध पर काबू ज़रूर पा सकते हैं. कई लोग क्रोध में ऐसे ़फैसले ले लेते हैं, जिनका पछतावा उन्हें उम्रभर होता है. आप ऐसा न करें. इसलिए अपने न्यू ईयर रेज़ोल्यूशन्स में इस बात को भी ज़रूर शामिल करें कि आप क्रोध नहीं करेंगे और क्रोध में कोई ़फैसला नहीं लेंगे.

7 डिजिटल ब्रेक
टेक्नोलॉजी के साथ चलना ज़रूरी है, लेकिन ख़ुद को इतना डिजिटल बना देना भी सही नहीं कि टेक्नोलॉजी आप पर हावी हो जाए. आजकल ख़ासकर यंगस्टर्स दिनभर मोबाइल में बिज़ी रहते हैं, जिसके कारण उनकी पढ़ाई, हेल्थ यहां तक कि नींद भी प्रभावित होती है. सोशल मीडिया में तो वो हर जगह होते हैं, लेकिन अपने घर-परिवार के साथ व़क्त बिताना उन्हें बोरिंग लगता है. ऐसी स्थिति से बचने के लिए डिजिटल ब्रेक बहुत ज़रूरी है. नए साल में ये नियम बना लें कि आप डिजिटल वर्ल्ड में रहेंगे ज़रूर, लेकिन उतना ही, जितना आपके लिए
ज़रूरी है.

8 डर को डराएं
डरना एक स्वाभाविक क्रिया है. हम सभी को किसी न किसी चीज़ से डर ज़रूर लगता है, लेकिन कई बार ये डर हम पर इस क़दर हावी हो जाता है कि इससे हमारी दिनचर्या प्रभावित होने लगती है. कई लोगों का डर उन पर इस क़दर हावी हो जाता है कि वो अंधविश्‍वास की हद तक पहुंच जाता है. यदि आपके मन में भी कोई ऐसा डर है, जो आपकी ज़िंदगी को प्रभावित कर रहा है, तो उससे बाहर निकलने की कोशिश करें. यदि आप ख़ुद अपने डर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं, तो अपने परिवार या एक्सपर्ट्स की मदद लें.

न्यूमरोलॉजी से आप अपने लिए बेस्ट करियर कैसे चुन सकते हैं, जानने के लिए देखें वीडियो:

9 बुरी आदतों से बचें
कई बार हम अपनी आदतों के इस कदर अधीन हो जाते हैं कि हमारी आदतें हमारी ज़िंदगी से बड़ी हो जाती हैं, ख़ासकर नशे की आदत. यदि आप में भी है कोई ऐसी बुरी आदत, जो आपके कंट्रोल से बाहर हो रही है, तो उससे बाहर निकलने का संकल्प लें. किसी चीज़ की आदत हो जाना और उस आदत को बदलना दोनों हमारे हाथ में होता है. यदि हम ठान लें, तो कोई भी आदत हम पर हावी नहीं हो सकती. अपने न्यू ईयर रेज़ोल्यूशन्स में बुरी आदतों को बाय-बाय कहने का रेज़ोल्यूशन भी ज़रूर बनाएं.

10 देना सीखें
प्रकृति का ये नियम है कि हम जो बोते हैं, वही पाते हैं. इसलिए देना सीखें, तभी आप मनचाही चीज़ पा सकेंगे. ज्ञान, ख़ुशी, अपनापन ये सब ऐसी चीज़ें हैं, जिन्हें आप जितना बांटेंगे, ये उतनी ही बढ़ेंगी. अपेक्षा करनेवालों की तुलना में उन लोगों को हमेशा ज़्यादा मिलता है, जो देना जानते हैं, इसलिए आप भी देना सीखें. अपने आसपास हमेशा ख़ुशियां बांटें, ताकि आपको भी बदले में ख़ुशियां ही मिलें.
– कमला बडोनी

यह भी पढ़ें: ख़ुश रहना है तो सीखें ये 10 बातें (10 Easy Things Successful People Do To Stay Happy)

मन की बात लिखने से दूर होता है तनाव (Writing About Your Emotions Can Help Reduce Stress)

मन (Mind) की बात लिखने (Writing) से दूर होता है तनाव (Tension) और ये बात बिल्कुल सही है. मन की बात कहने के लिए जब आसपास कोई न हो, तो काग़ज़-कलम को अपना साथी बना लीजिए. ख़ुशी, ग़म, उदासी… अपने मन के हर भाव को काग़ज़ पर उतार दीजिए. मन की बात काग़ज़ पर लिख देने से मन हल्का हो जाता है.

Reducing Stress Tips

डायरी लिखें
सपनों, आकांक्षाओं, उम्मीदों और विचारों का डेरा है मन… और जिस मन पर इतना बोझ हो, उसे कभी-कभी हल्का करना भी ज़रूरी है. मन का बोझ हल्का करने का सबसे आसान तरीक़ा है किसी से बात करना, लेकिन जब आपके पास बात करने के लिए कोई न हो या जो व्यक्ति आपके सामने है उससे आप अपने दिल के राज़ साझा नहीं कर सकते, तो सबसे बेहतर विकल्प है डायरी लिखना. डायरी के पन्नों पर अपने मन के विचार चाहे वो अच्छे हों या बुरे लिख दें. इससे न स़िर्फ आपके दिल का बोझ उतर जाएगा, बल्कि आप बाद में अपने लिखे हुए शब्दों पर विचार करके सही-ग़लत का ़फैसला भी कर सकते हैं. दूसरों के सामने कुछ कहते समय जहां आपको इस बात का ख़्याल रखना पड़ता है कि कहीं वो आपकी बातों का ग़लत मतलब न निकाल ले, वहीं मन की बात लिखते समय ऐसा कोई डर नहीं रहता, जो जी में आए आप वो सब लिख सकते हैं.

लिखी हुई भावनाओं को आप फिर से जी सकते हैं
जब भी आप जीवन में कोई बड़ी उपलब्धि हासिल करें, तो उस पल की ख़ुशी को डायरी के पन्नों पर शब्दों में बयां कर दें. कुछ समय बाद जब आप उन पन्नों को पलटकर देखेंगे, तो उस पल को फिर से जी सकेंगे, अपनी उपलब्धि पर एक बार फिर नाज़ कर सकेंगे. ज़िंदगी की कुछ ऐसी बातें या पल जिन्हें आप जीवनभर याद रखना चाहते हैं, उन्हें संजोए रखने का सबसे अच्छा तरीक़ा है उन्हें लिख लेना.

यह भी पढ़ें: अमीर और क़ामयाब बनना है तो सीखें ये आदतें (How To Become Rich And Successful)

 

मन की बात लिख देने से मन हल्का हो जाता है
किसी बात पर आपका पड़ोसी से झगड़ा हो जाए या ऑफिस में कलीग आपसे उलझ जाए, उस समय संकोचवश आप उससे कुछ नहीं कहते, लेकिन मन ही मन उसे भला-बुरा कहते रहते हैं. ऐसी स्थिति में अपने मन की भड़ास काग़ज़ पर उतार दें. इससे जहां आपका ग़ुस्सा शांत हो जाएगा, वहीं आप उस बात पर फिर से विचार कर पाएंगे कि आख़िर झगड़ा हुआ क्यों? पुनर्विचार से कई बार एहसास होता है कि बेकार की बातों को तूल देकर हम अपना मूड और रिश्ता दोनों ख़राब कर रहे हैं. इस तरह मंथन करने से हमारे मन से नफ़रत की भावना निकल जाती है और मन हल्का हो जाता है.

मन की बात लिखने से बनी रहती है सेहत
किसी के प्रति घृणा और ग़ुस्से के भाव को बहुत दिनों तक मन में दबाए रखने से आप तनाव, अवसाद आदि के शिकार हो सकते हैं. इन भावों को आप दूसरों के सामने व्यक्त भी नहीं कर सकते. ऐसे में इन भावों को लिख देने से तनाव दूर होता है और मन शांत हो जाता है, जिससे सेहत भी बनी रहती है.

यह भी पढ़ें: सीखें ख़ुश रहने के 10 मंत्र (10 Tips To Stay Happy)

कल कभी नहीं आता (Tomorrow Never Comes)

कल कभी नहीं आता ये बात सौफीसदी सच है, क्योंकि जो लोग कल के भरोसे बैठे रहते हैं वो ज़िंदगी में कभी आगे नहीं बढ़ पाते. यदि आप भी आज का काम कल पर टालते हैं, तो आज ही ये आदत बदल दीजिए.

Tomorrow Never Comes

काल करे सो आज कर, आज करे सो अब
पल में प्रलय होगी बहुरी करेगा कब.
– कबीर दास

आपने कबीरदास जी का ये दोहा तो ज़रूर सुना होगा, लेकिन क्या आप इस पर अमल करते हैं? हम में से ज़्यादातर लोग किसी भी काम या नई शरुआत को हमेशा कल पर टाल देते हैं, मसलन- मैं कल सुबह उठकर पढ़ाई कर लूंगी, मैं कल से एक्सरसाइज़ ज़रूर करूंगी, कल से मैं टाइम पर उठूंगा, कल से मैं कुछ बुरा नहीं बोलूंगा, कल से मैं अपनी बेटी के लिए टाइम ज़रूर निकालूंगी… लेकिन कल के भरोसे ख़ुद से किए ये वादे हम कभी पूरे नहीं कर पाते, क्योंकि जब कल आज में बदल जाता है तो हम फिर उस बात को आने वाले कल पर टाल देते हैं. इस तरह ये सिलसिला कभी महीनों तो कभी सालों तक चलता रहता है.

कभी भी जो काम आप कर सकते हैं उसे कल पर मत टालिए.
– बेंजामिन फ्रैंकलिन

मैं कल से ये काम करूंगी/करूंगा, वाला आपका रवैया आपके आलसी होने का सबूत है. आपने अंग्रेजी की वो कहावत तो सुनी होगी ‘फेलियर ऑलेवज़ मेक्स एक्सक्यूज़ेस’ यानी असफल लोग हमेशा बहाने बनाते हैं. कुछ ऐसा ही हाल आलसी लोगों का भी है, ये हर काम को कल के भरोसे छोड़ देते हैं, क्योंकि इनमें काम करने की इच्छाशक्ति ही नहीं होती. ‘अरे! यार क्या करूं आज तुम्हारा काम नहीं कर पाई, बहुत बिज़ी थी,’ इसके विपरीत यदि आप उस काम को पूरा करने का दृढ़ संकल्प कर लेतीं, तो किसी भी तरह अपने बिज़ी शेड्यूल से समय निकाल ही लेतीं.

कल के भरोसे मत बैठो, मनुष्य का कल कौन जानता है.
– शतपथ ब्राह्मण

यह भी पढ़ें: अपने सपनों को पूरा कैसे करें? (How To Fulfill Your Dreams)

 

हर घड़ी हर पल जीवन में बदलाव होते रहते हैं ऐसे में कल क्या होगा किसी को नहीं पता, तो फिर आप अनजाने कल के भरोसे क्यों बैठे रहते हैं? आपने अपनी बेटी से वादा किया कि कल से आप उसके साथ ज़्यादा व़क्त बिताएंगी, लेकिन कल आपको अचानक किसी मीटिंग में जाना पड़ा और अपना वादा नहीं निभा पाई, ज़ाहिर है इससे आपकी बेटी का दिल टूट जाएगा. इसलिए कल के भरोसे कोई काम छोड़ने से बेहतर है कि आप उसकी शुरुआत आज से ही करने की कोशिश करें. यदि आप अपने लक्ष्य में क़ामयाब होना चाहते हैं, तो कल का इंतज़ार किए बिना ख़ुद से कहें, ‘मैं ये काम आज, अभी से शुरू कर रहा/रही हूं.’ यक़ीन मानिए, आपका ये दृढ़ संकल्प आपको अपने मकसद में सफलता ज़रूर दिलाएगा.

इंतज़ार करने वाले को उतना ही मिलता है जो कोशिश करने वाले छोड़ देते हैं.
– अब्दुल कलाम

यह भी पढ़ें: अटेंशन पाने की चाहत आपको बना सकती है बीमार! (10 Signs Of Attention Seekers: How To Deal With Them)

 

कल जा चुका है, कल अभी आया नहीं है, हमारे पास केवल आज है, चलिए शुरुआत करते हैं.
– मदर टेरेसा

प्यार की 5 भाषाएं सीखने के लिए देखें वीडियो:

ज़िंदगी रुकती नहीं (Life Doesn’t Stop And Neither Should You)

ज़िंदगी रुकती नहीं, बदस्तूर चलती रहती है. हां, ज़िंदगी में कई बार ऐसे वाकये या हादसे हो जाते हैं जो ज़िंदगी की चाल ही बदल देते हैं, या यूं कहें कि आपको बेहद मायूस या हताश कर देते हैं, तोड़कर रख देते हैं, लेकिन ऐसे हालात से हार मानकर जीना छोड़ा नहीं जा सकता. ऐसे हालात में भी आगे बढ़कर ज़िंदगी को संवारना और नए सिरे से ज़िंदगी की शुरुआत करना ही ज़िंदादिली है. काम ज़रा मुश्किल है, मगर नामुमक़िन नहीं.

Life

चलना ही जीवन है
कितनी भी बड़ी आपदा या हादसा क्यों न हो जाए ज़िंदगी नहीं ठहरती. हां, कुछ समय के लिए इसकी रफ़्तार ज़रूरी धीमी पड़ जाती है, लेकिन फिर उसे अपने पुराने ढर्रे पर आना ही पड़ता है. चाहे जापान में आई सुनामी हो या उत्तराखंड में आई प्राकृतिक आपदा. इतने बड़े विनाश के बाद भी दोबारा ज़िंदगी धीरे-धीरे ही सही पटरी पर आने लगती है. क्योंकि जो हो गया हम उसे तो बदल नहीं सकते, जो अपना चला गया हम उसे वापस तो ला नहीं सकते, लेकिन अपने आने वाले कल को संवारने की कोशिश तो कर ही सकते हैं. हमें अपने और अपने आसपास के बाकी लोगों की ख़ातिर जो हो गया उसे भुलाकर जीवन में आगे बढ़ना ही पड़ता है.

यह भी पढ़ें: अटेंशन पाने की चाहत आपको बना सकती है बीमार! (10 Signs Of Attention Seekers: How To Deal With Them)

 

जब तक है आस
बात चाहे कुदरत के विनाश की हो या ज़िंदगी में किसी अन्य तरह की असफलता की, आगे बढ़ने के लिए सबसे ज़्यादा ज़रूरी है उम्मीद. माना किसी प्रोजेक्ट पर कई हफ्तों तक दिन-रात मेहनत करने के बाद वो डेटा किसी कारणवश आपके कंप्यूटर से उड़ गया. ऐसे में निश्‍चय ही आपके पैरों तले से ज़मीन खिसक जाएगी, लेकिन उस वक़्त अपना मानसिक संतलुन खोकर ख़ुद पर या किसी और पर ग़ुस्सा करने या फिर उदास होकर बैठ जाने से समस्या हल नहीं होगी. यदि आपको ख़ुद को साबित करना है, करियर में आगे बढ़ना हैं, तो दोबारा मेहनत करनी ही पड़ेगी. माना इसमें वक़्त लगेगा, मगर आगे बढ़ने के लिए तो आपको ये करना ही होगा. यक़ीन मानिए, यदि आप सकारात्मक सोच के साथ नई शुरुआत करते हैं, तो देर से ही सही आपको सफलता ज़रूर मिलेगी.

यह भी पढ़ें: अपने सपनों को पूरा कैसे करें? (How To Fulfill Your Dreams)

 

जो बीत गई सो बात गई
‘टूटे तारों पर कब अंबर शोक मनाता है, जो बीत गई सो बात गई’, हरिवंश राय बच्चन की कविता की इन पंक्तियों का सही अर्थ समझकर यदि आप जीवन में उतार लेंगे, तो मुश्किल से मुश्किल हालात से भी ख़ुद को उबारकर जीवन में आगे बढ़ सकेंगे. ज़िंदगी में बहुत से ऐसे लोग, चीज़ें, बातें और पल होते हैं, जिनके छिन जाने पर आपको बहुत दुख होता है या आपकी पूरी ज़िंदगी ही बदल जाती है. कई बार तो लगता है जैसे जीने का कोई मक़सद ही नहीं बचा, मगर जब तक आप ज़िंदा है आपको अतीत को भुलाकर आगे बढ़ना ही होगा, वरना आप ज़िंदा होकर भी ज़िंदगी जी नहीं पाएंगे.

क्या वाकई रिश्ते स्वर्ग में तय होते हैं? जानने के लिए देखें वीडियो: 

अपने मुंह मियां मिट्ठू (Self Praise: Are You Hurting Or Helping?)

अपने मुंह मियां मिट्ठू लोग अपने सिवाय किसी और को कुछ समझते ही नहीं हैं. अपने मुंह मियां मिट्ठू लोगों को आत्मप्रशंसा की इतनी बुरी लत होती है कि हर किसी के सामने अपनी बड़ाई करने लगते हैं. उन्हें लगता है कि ऐसा करके वे ख़ुद को श्रेष्ठ साबित कर सकते हैं, जबकि आत्मप्रशंसा ओछेपन की निशानी है.

Self Praise

 

बड़े बड़ाई न करें, बड़े बोले न बोल
रहिमन हीरा कब कहे, लाख टका मेरा मोल

रहीमदास का ये कथन बिल्कुल सटीक है. जो लोग वाकई में ज्ञानी और गुणवान होते हैं वो अपने गुणों का बखान नहीं करते, बल्कि चुपचाप अपना काम करते रहते हैं. क्योंकि उनका काम ही उनके बारे में सब कुछ कह देता है. इसकी जीती जागती मिसाल स्वामी विवेकानंद, रविंद्रनाथ टैगौर, महात्मा गांधी और सुभाषचंद्र बोस जैसे इतिहास पुरुष हैं, जिनका लोहा पूरी दुनिया मानती है, लेकिन उन्होंने ख़ुद कभी अपनी शेखी नहीं बघारी.

अपने मुंह मियां मिट्ठू लोग दरअसल अपनी कमियां छुपाते हैं
जिन लोगों में योग्यता नहीं होती वो ही ख़ुद की प्रशंसा करके अपनी कमियां छुपाने की कोशिश करते हैं. अपनी हार के लिए ख़ुद को ज़िम्मेदार मानने की बजाय उसका दोष परिस्थितियों व दूसरे लोगों पर मढ़ देते हैं, जैसे जॉब या प्रमोशन न
मिलने पर ऐसे शख़्स कहेंगे, “मुझे काम का अनुभव तो था, लेकिन लोगों को इसकी कद्र नहीं… मेरी सिफ़ारिश करने वाला कोई नहीं था या मेरी किसी बड़े आदमी से पहचान नहीं थी, इसलिए मुझे ये नौकरी/प्रमोशन नहीं मिली.’ माना किसी संदर्भ में ये बातें सही हो सकती है, लेकिन आप में यदि प्रतिभा व योग्यता है, तो निश्‍चय ही आपको सफलता मिलेगी. इसके लिए आपको अपने मुंह मियां मिट्ठू बनने की ज़रूरत नहीं.

यह भी पढ़ें: सफलता के 10 सूत्र 
अपने मुंह मियां मिट्ठू लोग छोटी सोच के होते हैं
अपनी तारीफ़ करके यदि आपको ऐसा लगता है कि दूसरे आपसे प्रभावित हो जाएंगे और उनकी नज़रों में आपका क़द बढ़ जाएगा तो आप ग़लत हैं. उल्टा आप उनकी नज़रों में छोटे बन जाएंगे, क्योंकि कोई भी इंसान अपनी कथनी से नहीं, बल्कि करनी से बड़ा होता है. शांति व संजीदगी सज्जन व ज्ञानी व्यक्तियों की पहचान है. जिस तरह पूरा भरा घड़ा छलकता नहीं है वैसे ही योग्य व सक्षम व्यक्ति भी ख़ुद अपनी बड़ाई नहीं करते, बल्कि दुनिया उनके गुणों का बखान करती है. दरअसल, प्रशंसा की भूख अयोग्य व्यक्तियों में ही होती है. इस संदर्भ में महात्मा गांधी ने बिल्कुल सही कहा है, “जो लोग अपनी प्रशंसा के भूखे होते हैं, वो साबित कर देते हैं कि उनमें योग्यता नहीं है.”

अपने मुंह मियां मिट्ठू लोग स़िर्फ अपनी शेखी बघारते हैं
आप अपने परिवार व समाज में सबकी मदद करते हैं, मुश्किल हालात में जी जान लगाकर आप उनकी सहायता करते हैं. इस काम के लिए जब दूसरे आपकी प्रशंसा करें तब तो ठीक है, लेकिन आप अगर ख़ुद ही अपनी शेखी बघारने लगेंगे तो आपके सारे किए कराए पर पानी फिर जाएगा. तुलसीदास जी ने भी कहा है “आत्मप्रशंसा वह आग है जिसमें कर्तव्य का जंगल जल जाता है.”

यह भी पढ़ें: अपने सपनों को पूरा कैसे करें?

सफलता के 10 सूत्र (10 Ways To Achieve Your Dream)

सफलता के 10 सूत्र आपकी ज़िंदगी बदल सकते हैं. सफल बनने और अपने सपनों को पूरा करने के लिए आप भी अपनाएं सफलता के 10 सूत्र.

10 Ways To Achieve Your Dream

1) निर्धारित लक्ष्य के बिना आप जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफल नहीं हो सकते. यदि आपको अपनी मंजिल का ही पता नहीं होगा तो भला रास्ता कैसे तय करेंगे? स्पष्ट लक्ष्य के अभाव में आप अंजान रास्तों पर यूं ही भटकते रहेंगे. अतः क़ामयाबी पाने के लिए सबसे पहले अपना लक्ष्य निर्धारित करिए और फिर पूरी ईमानदारी और मेहनत से उसे हासिल करने में जुट जाइए.

2) कठिनाइयों में भी अपने लक्ष्यों का पीछा करते रहें, और विपत्तियों को अवसरों में बदल दें.
– धीरूभाई अंबानी

3 ) कोई लक्ष्य मनुष्य के साहस से बड़ा नहीं, हारा वही जो लड़ा नहीं.
– अज्ञात

4) आप कभी भी लक्ष्य निर्धारित करने या नया सपना देखने के लिए बहुत बूढ़े नहीं होते.
– सी.एस. लुईस

5) अपने मिशन में क़ामयाब होने के लिए आपको अपने लक्ष्य के प्रति एकचित्त निष्ठावान होना पड़ेगा.
– अज्ञात

यह भी देखें: अपने सपनों को पूरा कैसे करें?

 

6) लक्ष्यों के बारे में सबसे महत्वपूर्ण चीज़ है उनका होना.
– जेफ्री ऍफ ऐबर्ट

7 ) स्पष्ट और लिखित लक्ष्य जिनके होते हैं, वे कम समय में ही इतनी सफलता प्राप्त करते हैं जितनी कि बिना ऐसे लक्ष्यों वाले सोच भी नहीं सकते.
– ब्रायन ट्रेसी

8 ) लक्ष्य न होने के साथ समस्या ये है कि आप अपना समस्त जीवन मैदान में ऊपर नीचे दौड़ते रहने के बाद भी कोई जीत हासिल नहीं कर पाते.
– बिल कोपलेंड

9 )जब कोई व्यक्ति अपने लक्ष्य को इतनी गहराई से चाहे कि वह उसके लिए अपना सब कुछ दांव पर लगाने के लिए तैयार हो, तो उसका जीतना सुनिश्‍चित है.
– नेपोलियन हिल

10 ) मुट्ठीभर संकल्पवान लोग जिनकी अपने लक्ष्य में दृढ़ आस्था है, इतिहास की धारा को बदल सकते हैं.
– महात्मा गांधी

जानें ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी की सफलता का राज़, देखें वीडियो: