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प्रेग्नेंट अक्षय कुमार ने जन्म दिया 6 बच्चों को

प्रेग्नेंट अक्षय कुमार ने एक नहीं, दो नहीं, बल्कि 6 बच्चों को जन्म दिया है. चौंक गए ना आप ये ख़बर पढ़कर! आप सोच रहे होंगे की ये अजूबा कैसा हुआ, तो आपको बता दे कि अक्षय ने अपने नए कॉमेडी शो द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज 5 के लिए एक वी़डियो शूट किया है, जिसमें वो प्रेग्नेंट नज़र आ रहे हैं.

ये प्रोमो बेहद ही फनी है. इस शो के ज़रिए अक्षय कुमार छोटे पर्दे पर दोबारा वापसी करेंगे. अक्षय इस शो के स्पेशल जज होंगे. अक्षय कई दिनों से टि्वटर पर अजीब-अजीब पोस्ट कर रहे थे, जिसमें कभी उन्हें खट्टा खाने का मन करता था, तो कभी उनके पेट में बच्चे किक मार रहा था. इस प्रोमो को देखने के बाद अब समझ आया के अक्षय के इन ट्वीट्स का मतलब क्या है.

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अक्षय ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा है, “दुनिया सोच रही है ये अजूबा कैसे हुआ ?”

देखें वीडियो.

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अभी मेरी उम्र 26 साल है, पर जब मैं 22 साल की थी, तब मुझे पेट का ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) हो गया था, जिसके लिए 9 महीनों तक इलाज भी चला. हालांकि उसके बाद डॉक्टर ने कह दिया था कि अब और इलाज की ज़रूरत नहीं है. पर अब मेरी शादी होनेवाली है. क्या यह मेरी फर्टिलिटी को प्रभावित करेगा? कृपया, मार्गदर्शन करें. 
– अन्नपूर्णा शर्मा, कोलकाता.

पेट का टीबी आपके फैलोपियन ट्यूब्स को प्रभावित कर सकता है. चूंकि अभी आपकी शादी नहीं हुई है, तो आप अपनी फर्टिलिटी के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए अभी रुक सकती हैं. कंसीव करने के लिए दोनों ही पार्टनर्स का 50-50% योगदान होता है. आप अपनी फर्टिलिटी को लेकर इतनी परेशान न हों. अगर आपकी ट्यूब्स डैमेज भी हो गई हों, तो भी आईवीएफ के ज़रिए उम्मीद बनी रहती है.

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मैं 37 वर्षीया महिला हूं. मेरे लैप्रोस्कोपी ऑपरेशन के बाद पता चला है कि मुझे एंडोमिट्रियोसिस है. डॉक्टर ने 3-4 महीने तक हर महीने इंजेक्शन लगवाने की सलाह दी है. मैं जल्द से जल्द कंसीव करना चाहती हूं. क्या इससे मेरी फर्टिलिटी प्रभावित होगी? 
– करिश्मा वाघेल, पटना.

एंडोमिट्रियोसिस वह अवस्था है, जिसमें गर्भाशय के अंदर बढ़नेवाले एंडोमिट्रियम टिश्यूज़ गर्भाशय के ऊपर बढ़ने लगते हैं, जिसके कारण हर महीने पीरियड्स के दौरान काफ़ी दर्द होता है. इसके कारण हर महीने होनेवाला ओव्यूलेशन भी प्रभावित होता है. आपकी बातों से यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि आपका एंडोमिट्रियोसिस किस स्टेज पर है. आजकल की लेटेस्ट रिप्रोडक्टिव टेकनीक्स के ज़माने में एंडोमिट्रियोसिस के गंभीर मामलों में भी आईवीएफ से मदद मिल रही है. इस बारे में आप किसी फर्टिलिटी एक्सपर्ट से बात करें.

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मैं 21 वर्षीया छात्रा हूं. मुझे हमेशा कमज़ोरी महसूस होती है. ब्लड टेस्ट में हीमोग्लोबिन कम आया है और गायनाकोलॉजिस्ट ने हैवी ब्लीडिंग को इसका कारण बताया, साथ ही पीरियड्स के 5वें दिन से 3 हफ़्तों के लिए हार्मोनल पिल्स लेने की सलाह दी है. क्या यह ज़रूरी है? कृपया, मार्गदर्शन करें.

– रेखा खोसला, नोएडा.

मैं समझ सकती हूं कि इस उम्र में हार्मोनल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स लेने की सलाह को लेकर आप परेशान हैं. दरअसल, हार्मोनल पिल्स के ज़रिए एक आर्टिफिशियल साइकल तैयार होता है, जिससे आपको ब्लीडिंग कम होती है. पीरियड्स के 5वें दिन से पिल्स लेने के कारण शुरुआत से ही आपके हार्मोंस दब जाते हैं. क्योंकि आपका हीमोग्लोबिन भी कम है, इसलिए दवाओं के साथ-साथ यह ध्यान देना भी ज़रूरी है कि आपको बेवजह हैवी ब्लीडिंग तो नहीं हो रही.

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पिछली डिलीवरी में मेरे बच्चे का वज़न स़िर्फ 2 किलो था, पर डॉक्टर ने इसका कारण नहीं बताया. अब मैं दोबारा प्रेग्नेंट हूं और मुझे डर लग रहा है कि कहीं इस बार भी मेरे बच्चे का वज़न कम न हो. पिछली बार मैं स़िर्फ 3 बार चेकअप के लिए गई थी. इस बार क्या करूं?

– आरोही हांडे, नासिक.

जन्म के बाद जिन बच्चों का वज़न ढाई किलो से कम होता है, उन्हें लो वेट बर्थ कहते हैं. इसका एक अहम् कारण प्री मैच्योर डिलीवरी हो सकती है. इसके अलावा प्रेग्नेंसी में मां का ग़लत खानपान, बार-बार इंफेक्शन, धूम्रपान और अल्कोहल भी इसके कारण हो सकते हैं. जैसा कि आपने बताया कि पिछली बार आप स़िर्फ 3 बार चेकअप के लिए गई थीं, इससे साफ़ पता चलता है कि पिछली प्रेग्नेंसी के दौरान आपने कितनी लापरवाही बरती. इस दौरान सही खानपान और नियमित रूप से डॉक्टर से चेकअप बहुत ज़रूरी होता है. नियमित चेकअप से डॉक्टर समय-समय पर आपके और बच्चे की सही स्थिति के बारे में जानकारी देते रहते हैं. वैसे भी गर्भावस्था के दौरान खानपान, परहेज़, ज़रूरी सावधानियों के अलावा नियमित चेकअप करवाना बेहद ज़रूरी है.

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नेचुरल तरीकों से बूस्ट करें हीमोग्लोबिन लेवल 

  • अपने भोजन में आयरन से भरपूर ओट्स, बार्ली जैसे साबूत अनाज की मात्रा बढ़ा दें.
  • हीमोग्लोबिन लेवल बढ़ाने में विटामिन सी काफ़ी मददगार साबित होता है. संतरा, मोसंबी, लीची, अमरूद और नींबू को अपने डायट में शामिल करें.
  • खजूर, मुनक्का और एप्रीकोट्स में भी भरपूर मात्रा में आयरन होता है. यह आपके हीमोग्लोबिन लेवल को बूस्ट करने में मदद करेगा.
  • स्ट्रॉबेरीज़ काफ़ी फ़ायदेमंद मानी जाती है. इसे जूस, स्मूदी या किसी रेसिपी में जैसे चाहें, वैसे अपने डायट में शामिल करें.
  • बीटरूट, आलू, ब्रोकोली, पालक का भरपूर सेवन करें.

 

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डॉ. राजश्री कुमार
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मेरे गायनाकोलॉजिस्ट ने मुझे प्रेग्नेंसी के तीसरे महीने से लेकर डिलीवरी के छह हफ़्ते बाद तक आयरन (Iron) टैबलेट्स लेने की सलाह दी है, पर क्या डिलीवरी के बाद भी इसकी ज़रूरत होती है? कृपया, उचित सलाह दें. 
– सुखदा गिल, पटना.

हमारे देश में बहुत-सी महिलाएं आयरन (Iron) की कमी से होनेवाली बीमारी एनीमिया से पीड़ित रहती हैं. दरअसल, प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में बहुत-से बदलाव होते हैं और डिलीवरी के बाद भी महिलाओं को एक्स्ट्रा कैलोरीज़ की ज़रूरत पड़ती है. ऐसे में आयरन बच्चों में वज़न कम होने की समस्या को दूर करता है और मां को एनीमिया से भी बचाता है. यही वजह है कि आपके गायनाकोलॉजिस्ट ने डिलीवरी के बाद भी आयरन टैबलेट्स लेने की सलाह दी है. डिलीवरी के बाद भी टैबलेट्स के अलावा पोषणयुक्त बैलेंस डायट लें.

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हमारी शादी को 6 साल हो गए हैं, पर पति को अज़ूस्पर्मिया (स्पर्म्स न होना) होने के कारण अभी तक हमारा कोई बच्चा नहीं है. डॉक्टर ने हमें स्पर्म डोनर के ज़रिए प्रेग्नेंसी की सलाह दी है. पर यह हमें थोड़ा अजीब लग रहा है. कृपया, गाइड करें.
– माला नेगी, दुर्ग.

हर कपल की ज़रूरतें अलग-अलग होती हैं, इसलिए आपका निर्णय आपको ख़ुद लेना होगा. अगर आप बच्चा चाहती हैं, तो स्पर्म डोनेशन आपके लिए एक अच्छा ऑप्शन है. आप अकेले नहीं हैं, कई लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं. आमतौर पर इंफर्टिलिटी क्लीनिक्स में स्पर्म बैंक होते हैं, जहां पर इंफर्टिलिटी स्पेशलिस्ट से आप मदद ले सकते हैं. फिर भी अगर आप कंफर्टेबल नहीं हैं, तो बच्चा गोद भी ले सकती हैं. अंतिम निर्णय तो आपको ही लेना होगा.

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डिलीवरी के बाद क्या खाएं, क्या नहीं?

– डिलीवरी के बाद कम से कम एक-डेढ़ महीने तक महिलाओं को गैस पैदा करनेवाली और पचने में हैवी चीज़ें, जैसे- चना, कच्चा केला, मीट, आलू, फूलगोभी, पत्तागोभी, मूंगफली और बेकरी प्रोडक्ट्स अवॉइड करने चाहिए.

– खाने में लाल मिर्च और गरम मसाले खाने से बचें. इनकी बजाय चुटकीभर कालीमिर्च पाउडर का इस्तेमाल करें.

– बहुत ज़्यादा खट्टी चीज़ें, जैसे नींबू और कच्चे आम न खाएं.

– खाने में हर पत्तेदार सब्ज़ियां, जैसे- पालक, मेथी, कमल ककड़ी और ब्रोकोली, टिंडा, परवल जैसी सब्ज़ियां लें.

– दाल में मूंग और मसूर की दालें खाएं.

– गोंद, सोंठ और मेथी के लड्डू बनाकर खाएं.

– खाने में अजवायन और काले तिल भी शामिल करें.

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