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नया मकान खरीदना, आपकी जिंदगी के एक बड़े निवेश से जुड़ा फैसला है. कुछ बातों को ध्यान में रखकर आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि आपका निवेश सुरक्षित है.
प्रॉपर्टी की खरीद में आजकल बहुत ज़्यादा फ्रॉड हो रहे हैं. अपनी जिंदगीभर की मेहनत से कमाए पैसों से आप जो प्रॉपर्टी खरीदने जा रहे हैं, उसमें आपके साथ कोई धोखाधड़ी न हो, उसके लिए ज़रूरी है कि प्रॉपर्टी खरीदने से पहले उसकी वैधता की पूरी तरह से जांच की जाए.

ज़रूरी है वेरिफिकेशन

Things in mind while investing

प्रॉपर्टी खरीदने से पहले कुछ बातों को वेरीफाई कर लें, ताकि गड़बड़ी की सम्भवना ही न हो.


– बैंक किसी भी टाउनशिप को लोन तभी देते हैं जब वहां का टाइटल और सर्च क्लियर हो. यदि आप किसी टाउनशिप में प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं और वहां सभी बैंक लोन दे रहे हैं तो समझ लें कि वो प्रॉपर्टी सेफ है.

– कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले उसके लिंक डॉक्यूमेंट को ज़रूर चेक करें यानी प्रॉपर्टी अब तक कितनी-बार खरीदी और बेची गई है, ये देख लें. ये आपको पुरानी रजिस्ट्रियों से पता चलेगा. तो जिससे भी प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं, उससे पुरानी रजिस्ट्री की कॉपी ले लें.

– फिर यह देखें कि सभी रजिस्ट्री में डिटेल एक-दूसरे से लिंक हो रही है या नहीं.

– जो आपको प्रॉपर्टी बेच रहा है उसका आइडेंटिटी प्रूफ देखें. इसे डॉक्यूमेंट्स के साथ मैच करें.

– आप जो ज़मीन खरीद रहे हैं, उसका रिकॉर्ड चेक करें. खेत की ज़मीन ले रहे हैं, तो इसके डॉक्यूमेंट्स की जानकारी राज्य सरकार के राजस्व विभाग से मिल जाएगी.

– यदि आप मकान बनवाने के लिए ज़मीन खरीद रहे हैं, तो पहले पता करें कि जहां ज़मीन खरीद रहे हैं वहां रेसिडेंशियल परमीशन है या नहीं. अगर प्रॉपर्टी कमर्शियल या इंडस्ट्रियल है तो वहां आप घर नहीं बना सकेंगे.

– सबसे महत्वपूर्ण होता है यह चेक करना कि जिस कॉलोनी में आप ज़मीन खरीद रहे हैं, वो वैध है या नहीं.

– कई लोगों को लगता है कि सरकार ने रजिस्ट्री कर दी तो प्रॉपर्टी वैध ही होगी, लेकिन ऐसा है नहीं.

मकान खरीदते समय रखें इन 5 बातों का ख्याल

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सपनों का घर, ख्वाबों का आशियाना बनाना हर किसी के लिए जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में एक होता है, खासकर मिडल क्लास लोगों के लिए, क्योंकि लोग या तो अपने जीवनभर के सहेजे पैसों से घर लेते हैं या फिर बैंक लोन का सहारा लेते हैं.
ज़्यादातर लोग मकान खरीदने के लिए बिल्डर की प्रतिष्ठा पर निर्भर रहते हैं, लेकिन यह सही नहीं है. मकान खरीदने का एकमात्र मानदंड एकदम सही कागजी-कार्रवाई होना चाहिए, इसलिए कोई भी मकान खरीदते समय एलर्ट रहें और ये सुनिश्चित करने के बाद ही कि बिल्डर ने सभी ज़रूरी काग़ज़ी प्रक्रिया पूरी की है, आगे बढ़ें. इसके अलावा, विभिन्न फोरमों में जाकर बिल्डर की विश्वसनीयता की जांच करनी भी ज़रूरी है. आप उसकी पूर्व या वर्तमान प्रोजेक्ट्स की जांच कर सकते हैं. इसके अलावा इन बातों का भी ख्याल रखें-


टाइटल डीड: प्रोजेक्ट वाली ज़मीन के टाइटल डीड की जांच करना सबसे ज़रूरी है. इससे पता चल जाएगा कि बिल्डर जो संपत्ति बेच रहा है, उस पर उसका मालिकाना हक है या नहीं. उसे उस संपत्ति को बेचने या उसका मालिकाना हक ट्रांसफर करने का अधिकार है या नहीं? इस डीड से यह भी पता चल जाएगा कि संबंधित संपत्ति पर कोई मुकदमा तो नहीं चल रहा है. बेहतर होगा कि टाइटल डीड की जांच करवाने के लिए किसी वकील की मदद लें.


नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) : बहुत कम लोग यह बात जानते होंगे कि एक प्रोजेक्ट बनाने के लिए बिल्डर को अलग-अलग अथॉरिटीज मसलन, पीडब्ल्यूडी, फॉरेस्ट डिपार्टमेंट, पर्यावरण विभाग, यातायात एवं समन्वय विभाग आदि से 19 एनओसी लेनी पड़ती हैं. विभिन्न शहरों में यह संख्या अलग-अलग हो सकती है. आप अपने डिवेलपर से इन एनओसी की कॉपी अपने पर्सनल रिकॉर्ड में रखने के लिए मांग सकते हैं. इसके अलावा, आपको आरम्भ प्रमाणपत्र यानी सीसी भी देखने पर जोर देना चाहिए. यह प्रमाणपत्र बिल्डर को कानूनी तरीके से वास्तविक निर्माण कार्य शुरू करने की अनुमति देता है. आरम्भ प्रमाणपत्र के बिना किए जाने वाले निर्माण कार्य को गैरकानूनी माना जाता है.

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बाधा प्रमाणपत्र: हममें से कोई भी किसी ऐसी संपत्ति में इन्वेस्ट करना नहीं चाहेगा जिस पर कोई मुकदमा चल रहा हो या कोई कानूनी या फाइनेंशियल विवाद हो? ब्रोकर और बिल्डर ज़्यादातर ऐसी सच्चाई को आपके साथ शेयर नहीं करते, लेकिन आपको एलर्ट रहना चाहिए और बाधा प्रमाणपत्र देखने पर ज़ोर देना चाहिए जिससे यह स्पष्ट हो सके कि वो संपत्ति किसी कानूनी विवाद से मुक्त है. इससे भविष्य में आप कई अन्य समस्याओं से बच जाएंगे.


लेआउट प्लान: मकान खरीदने से पहले आपको बिल्डर से लेआउट प्लान दिखाने पर ज़ोर देना चाहिए, जो संबंधित अथॉरिटी द्वारा एप्रूव्ड हो. कई मामलों में ऐसा भी देखा गया है कि बिल्डर एप्रूव्ड प्लान से हटकर काम करते हैं, जिससे बाद में कई तरह की प्रॉबलम्स खड़ी हो जाती हैं, इसलिए ले आउट प्लान ज़रूर देखें ताकि ये साफ हो जाए कि डेवलपर अप्रूव्ड परमिशनों के आधार पर बिल्डिंग का निर्माण कर रहा है.


परचेज अग्रीमेंट यानी खरीद समझौता: ये भी देख लें कि बिल्डर ने डील करते समय जो-जो वादे किए हैं, वे सब आपके परचेज अग्रीमेंट में लिखे हों. इसमें निर्माण, भुगतान, अपार्टमेंट स्पेसिफिकेशन, अंतिम समय सीमा और किसी भी पक्ष द्वारा अपने वादे से मुकरने पर जुर्माना इत्यादि सारे विवरण होने चाहिए. याद रखें कि इस परचेज अग्रीमेंट के आधार पर ही आप बिल्डर के द्वारा इन्फ्रास्ट्रक्चर में कोई गड़बड़ी करने पर उसे ज़िम्मेदार ठहरा सकते हैं.


ये डाक्यूमेंट्स भी जांच लें

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बैनामा: घर खरीदने के लिए यह पन्ना सबसे ज़रूरी होता है. असली बैनामा संपत्ति पर आपका मालिकाना हक साबित करता है. जिस इलाके में संपत्ति है, वहीं के सब-रजिस्ट्रार के ऑफिस में जाकर आपको अपनी प्रॉपर्टी रजिस्टर करानी पड़ती है.


खाता प्रमाण पत्र: दस्तावेज इस बात का सबूत होता है कि इस संपत्ति की एंट्री स्थानीय म्युनिसिपल रिकॉर्ड्स में हुई है और एप्रूव्ड प्लान के मुताबिक ही प्रॉपर्टी का निर्माण किया गया है. नई संपत्ति के रजिस्ट्रेशन के लिए यह बेहद ज़रूरी दस्तावेज है. बाद में प्रॉपर्टी का मालिकाना हक किसी और को ट्रांसफर करना चाहें, उस वक्त भी इस डॉक्यूमेंट की ज़रूरत पड़ती है. इसके अलावा होम लोन देने से पहले बैंक भी आपसे यह डॉक्यूमेंट मांगता है.


जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी: किसी संपत्ति की ब्रिकी या खरीद को प्रॉपर्टी के मालिक की ओर से किसी अधिकृत शख्स द्वारा किया जा रहा है, ये सुनिश्चित करने के लिए पावर ऑफ अटॉर्नी ज़रूरी है. होम लोन लेते समय भी आपको इसकी ज़रूरत पड़ेगी.


अलॉटमेंट लेटर: होम लोन के लिए अलॉटमेंट लेटर बेहद ज़रूरी डाक्यूमेंट्स में से एक होता है. ये डेवलपर या हाउसिंग अथॉरिटी द्वारा जारी किया जाता है. इसमें प्रॉपर्टी का विवरण और ग्राहक ने बिल्डर को कितना पैसा दिया है, इसकी जानकारी होती है. यह भी ध्यान रखें कि अलॉटमेंट लेटर सेल अग्रीमेंट से अलग होता है. अलॉटमेंट लेटर जहां अथॉरिटी के लेटर हेड पर जारी किया जाता है, वहीं सेल अग्रीमेंट स्टैंप पेपर पर तैयार किया जाता है.


सेल एग्रीमेंट: सेल एग्रीमेंट में प्रॉपर्टी की पूरी जानकारी जैसे नियम व शर्तें, पोजेशन की तारीख, पेमेंट प्लान, विवरण, कॉमन एरिया और सुविधाओं की जानकारी होती है. प्रॉपर्टी खरीदने और होम लोन के लिए इस डॉक्यूमेंट की ओरिजनल कॉपी दिखानी पड़ती है.

पजेशन लेटर: यह डॉक्यूमेंट बिल्डर द्वारा दिया जाता है. इसमें वह तारीख लिखी होती है, जब बिल्डर ग्राहक को प्रॉपर्टी सौंपेगा.


प्रॉपर्टी टैक्स की रसीदें: घर के मालिक को नियमित रूप से प्रॉपर्टी टैक्स चुकाना पड़ता है. यह भी सुनिश्चित करें कि पिछले मालिक ने प्रॉपर्टी टैक्स चुकाया है और अब कोई बकाया नहीं है. प्रॉपर्टी टैक्स की रसीदें संपत्ति की कानूनी स्थिति साबित करने में भी मदद करती हैं.


पेमेंट की रसीदें: अगर आप नया मकान खरीद रहे हैं तो अपने बिल्डर से पेमेंट की ओरिजनल रसीदें ज़रूर लें.


कंप्लीशन प्रमाणपत्र: यह डॉक्यूमेंट होम लोन लेने के लिए ज़रूरी होता है. इससे यह भी साबित होता है कि बिल्डिंग का निर्माण स्वीकृत प्लान के तहत हो रहा है.


ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट: ये बिल्डर को स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी किया जाता है. ये एक तरह से इस बात का प्रमाणपत्र है कि बिल्डिंग पूरी तरह से रहने लायक है और मंजूर किए गए प्लान के मुताबिक कंस्ट्रक्शन किया गया है.

क्या आप जानते हैं कि…
– प्रॉपर्टी के मालिक के लिए रजिस्ट्री के दस्तावेजों पर अपना फोटो लगाना जरूरी है.

– दोनों पार्टी एक-दूसरे की मौजूदगी में रजिस्ट्री के दस्तावेजों पर दस्तखत करते हैं.

– प्रतिभा तिवारी

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संपत्ति में हक़ मांगनेवाली लड़कियों को नहीं मिलता आज भी सम्मान… (Property For Her… Give Her Property Not Dowry)

उसका वजूद जैसे कोई त्याग… उसके लब जैसे ख़ामोशी का पर्याय… उसकी नज़रें लाज-शर्म से झुकीं जैसे घर की लाज… उसके अधिकार…? नहीं हैं कोई… उसका कर्त्तव्य जैसे पिता-भाई द्वारा तय मर्यादाओं का पालन… लफ़्ज़ों के मायने कोई नहीं उसके लिए, जब तक अपने घर न जाए, तब तक एक बोझ, जब अपने घर जाती है, तो सबको ख़ुश रखना ही उसके जीवन का अर्थ… एक औरत के जीवन की यही सच्चाई थी कुछ समय पहले तक और आज भी बहुत कुछ बदलकर भी काफ़ी कुछ नहीं बदला है. यही वजह है कि अपने अधिकार के लिए आवाज़ उठानेवाली बेटियों को घर-परिवार व समाज में सम्मान नहीं मिलता, क्योंकि समाज में आज भी बेटियों से स़िर्फ और स़िर्फ त्याग की ही उम्मीद की जाती है.

उम्मीदें हैं बेहिसाब…

–    बेटियों से हर तरह की उम्मीदें करना जैसे सबका जन्मसिद्ध अधिकार हो.

–    वो मर्यादा में रहे, सबका कहना माने, सबकी इच्छाओं का सम्मान करे.

–    धीरे बात करे, ज़ोर से हंसे नहीं, लड़कों के साथ ज़्यादा न घूमे, नज़रें झुकाकर चले, जैसे वो कोई अपराधी है…

–    घर की पूरी इज़्ज़त व मान-मर्यादा उसकी ही ज़िम्मेदारी है.

–    एक अच्छी बेटी वो ही है, जो घर के कामकाज में पूरी तरह निपुण हो.

–    भाई-बहनों का, माता-पिता व अन्य तमाम रिश्तेदारों का ख़्याल रखे.

–    हमारे परिवारों में आज भी बेटों की अपेक्षा बेटियों से काफ़ी उम्मीदें रखी जाती हैं. ऐसे में उनका अपने हक़ के लिए कुछ बोलना कहां बर्दाश्त हो पाएगा किसी को भी?

क्यों हैं इतनी उम्मीदें?

–    सामाजिक व पारिवारिक ढांचा ऐसा ही है कि हमें लगता है कि बेटियां स़िर्फ कुर्बानी देने और त्याग करने के लिए ही होती हैं.

–    वो परिवार में झगड़ा नहीं चाहतीं, इसलिए अपना हक़ छोड़ने में ही समझदारी मानती हैं.

–    जबकि बेटों से यह उम्मीद नहीं की जाती कि वो बहनों को उनका हक़ बिना कुछ कहे दे दें.

–    सब जानते हैं कि अगर बहनों ने अपने हक़ की बात तक की, तो सारे रिश्ते ख़त्म कर दिए जाएंगे.

–    बचपन से बेटों की परवरिश इसी तरह से होती है कि उन्हें अपनी बहनों से यही उम्मीद रहती है कि वो उनके लिए अपनी हर ख़ुशी कुर्बान करेंगी.

–    ऐसे में वो संपत्ति में बहनों को बराबर का हक़ देने के बारे में सोच भी नहीं सकते.

–    क़ानून ने भले ही बेटियों को समानता का हक़ दे दिया हो, पर समाज व परिवार के लिए अब भी ये स्वीकार्य नहीं है.

–    इसका प्रमुख कारण परिवार की सोच व परवरिश के तौर-तरी़के ही हैं, जो आज भी ज़्यादा नहीं बदले हैं.

–    महिलाएं भले ही घर की दहलीज़ लांघकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं, लेकिन बावजूद इसके उनकी घरेलू ज़िम्मेदारियां जस की तस हैं.

–    उन्हें पति, पिता या भाई से घर के कामों में ख़ास मदद नहीं मिलती.

–    बाहर काम करने का नतीजा यह हुआ कि महिलाओं की ही ज़िम्मेदारी बढ़ गई और आज वो दोहरी ज़िम्मेदारियों के बीच पिस रही हैं.

–    ऐसे में समानता का दर्जा, वो भी संपत्ति के मामले में तो बहुत दूर की सोच है…

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क्यों स्वीकार्य नहीं बेटियों का हक़?

प्रमिला के पति की मृत्यु हो चुकी थी. उसके दो बच्चे थे. पिता के पास काफ़ी ज़मीन थी, जो उन्होंने सभी बच्चों में बांट दी थी. प्रमिला के बड़े भाई ने कहा कि वो उसकी और उसके बच्चों की देखरेख आजीवन करेगा. बस, वो अपने हिस्से की ज़मीन अपने भाई के नाम कर दे. प्रमिला ने इंकार कर दिया, उसका साफ़ कहना था, “मेरा जो हक़ है, वो मुझे मिलना चाहिए, मैं ताउम्र किसी की मोहताज बनकर नहीं रह सकती.

बस, फिर क्या था. भाई ने न स़िर्फ बातचीत बंद कर दी, बल्कि सारे नाते तोड़ लिए, लेकिन मुझे इस बात की संतुष्टि थी कि मैंने सही समय पर सही फैसला लिया. आज मेरे बच्चे अपने पैरों पर खड़े हैं. मैंने उन्हें अच्छी शिक्षा दी और आज मैं ख़ुश हूं, दुख स़िर्फ इस बात का है कि मात्र संपत्ति ही ज़रिया है क्या प्यार व अपनेपन जैसी भावनाओं को जीवित रखने का?

मेरे भाई ने उसे इतना महत्व दिया कि बहन से सारे रिश्ते तोड़ लिए. कुछ लोगों ने मेरे इस क़दम को सही कहा, तो ऐसे भी लोग हैं, जो मानते हैं कि पैसों के लिए मैंने भाई से दुश्मनी कर ली… मुझे अपना हक़ छोड़ देना चाहिए था… दरअसल, समाज की सोच अब भी वही है कि घर का मुखिया एक पुरुष ही हो सकता है, वही हमारी देखरेख करता, तो प्यार बना रहता. मैंने अपने दम पर अपने बच्चों का जीवन संवारा, तो किसी से बर्दाश्त नहीं हो रहा…!”

प्रमिला की ही तरह कविता और सुषमा का भी केस है. कविता ने बताया, “पापा की मृत्यु के बाद अब मेरी मम्मी ने हम चार भाई-बहनों में ज़मीन-जायदाद का बंटवारा कर दिया. मुझे और मेरी बहन को भी मेरे दोनों भाइयों के बराबर का हिस्सा दिया गया. मेरे दोनों भाई यूं भी आर्थिक रूप से काफ़ी सक्षम हैं. लेकिन बावजूद इसके उनकी नाराज़गी इतनी बढ़ गई कि अब परिवार की शादियों तक में हमें निमंत्रण नहीं दिया जाता. इसकी एकमात्र वजह संपत्ति में हमारा हक़ लेना ही है.

लोग आज भी बेटियों से ही उम्मीद करते हैं कि भाई को नाराज़ करने से अच्छा है कि अपना हक़ छोड़ दें, लेकिन भाई से कभी यह पूछा तक नहीं जाता कि बहनों को अगर समान दर्जा मिल जाता है, तो उन्हें इतनी तकलीफ़ क्यों होती है?

हमने स़िर्फ अपना हक़ लिया है, उनका नहीं. तो उन्हें हमसे नाराज़गी क्यों? वो हमारे हिस्से की हर चीज़ पर अपना अधिकार समझते हैं और हर बार यही उम्मीद करते हैं कि बहनों को ही त्याग करना चाहिए… कोई उनसे पूछे कि क्या वो बहनों के लिए यह त्याग करने के लिए तैयार होंगे कभी?

प्रॉपर्टी में अपना जायज़ हिस्सा लेने पर भी समाज हमें लालची, घर व रिश्ते तोड़नेवाली और भी न जाने क्या-क्या कहता है, लेकिन उस भाई से एक भी सवाल नहीं, जो अपनी बहन का हिस्सा भी ख़ुद ही लेने की चाह रखता है.

दरअसल, यह सोच कभी नहीं बदलनेवाली और कभी बदलेगी भी तो सदियां बीत जाएंगी.”

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प्रॉपर्टी फॉर हर… गिव हर प्रॉपर्टी, नॉट डाउरी!

भारतीय महिलाएं खेतों का लगभग 80% काम करती हैं, लेकिन मात्र 17% ही ज़मीन पर मालिकाना हक़ रखती हैं. अन्य क्षेत्रों में भी तस्वीर कुछ इसी तरह की है और अधिकार व पारिवारिक संपत्ति बेटों को ही मिलती है.

इसी के मद्देनज़र साउथ एशिया में महिलाओं को प्रॉपर्टी में हक़ दिलाने के लिए एक कैंपेन की शुरुआत की गई- प्रॉपर्टी फॉर हर!

इसका उद्देश्य लोगों को जागरूक करना था कि पैरेंट्स इस बात को समझें कि क्यों बेटियों के लिए संपत्ति ज़रूरी है और वो भी उतनी ही हक़दार हैं, जितने बेटे! क्योंकि

बिना किसी मज़बूत सपोर्ट सिस्टम, बिना किसी आर्थिक सुरक्षा के कैसे बेटियां आत्मनिर्भर और सुरक्षित महसूस कर

सकती हैं? यह कहना है इस कैंपेन से जुड़े लोगों का.

ट्विटर पर भी यह कैंपेन चलाया गया था, जिसमें महिला व पुरुष दोनों से ही राय मांगी गई थी. अधिकांश पुरुषों ने भी इस पर सहमति जताई कि महिलाओं को भी संपत्ति में बराबरी का हक़ दिया जाना चाहिए.

जहां तक क़ानून की बात है, तो काफ़ी पहले ही वो बेटियों को समानता का दर्जा दे चुका है, अब स़िर्फ समाज व परिवार को समझना है कि वो अपनी बेटियों को कब समान समझना शुरू करेंगे? ख़ासतौर से घर के बेटे, क्योंकि सोशल मीडिया पर बड़ी-बड़ी बातें करनेवाले भी अपनी बारी आने पर वही पारंपरिक सोच अपनाना बेहतर समझते हैं, जो उन्हें सूट करती है और उनके ईगो को तुष्ट करती है.

– गीता शर्मा

 

 

जब भी हम बैंक में सेविंग्स अकाउंट खोलते हैं, म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट करते हैं, प्रॉपर्टी/शेयर्स ख़रीदते हैं या फिर जीवन बीमा करवाते हैं, तो हर बार हमें ‘नॉमिनी’ अपॉइंट करना होता है. ज़्यादातर लोगों को यही ग़लतफ़हमी है कि उसकी मृत्यु के बाद सारी रक़म नॉमिनी को मिल जाएगी, जबकि ऐसा है नहीं. नॉमिनी स़िर्फ आपके पैसों का केयरटेकर होता है, न कि मालिक. तो क्यों ज़रूरी है नॉमिनी बनाना और क्या हैं उसके अधिकार, आइए जानते हैं.

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कौन है नॉमिनी?

क़ानूनन नॉमिनी वह व्यक्ति है, जो आपकी मृत्यु के बाद कंपनी से मिली रक़म को आपके क़ानूनी वारिसों तक पहुंचाता है. वह क़ानूनन उस रक़म का मालिक नहीं होता, स़िर्फ एक ट्रस्ट होता है. सरल शब्दों में कहें, तो नॉमिनी एक केयरटेकर की तरह होता है, जो हमारे न रहने पर हमारी जमा-पूंजी को हमारे अपनों तक पहुंचाता है.

– अगर आपके अकाउंट के जॉइंट होल्डर्स हैं या फिर आपने वसीयत बनाई है, तो वसीयत के मुताबिक़ सारी जमा-पूंजी आपके क़ानूनी वारिस में बांट दी जाएगी. पर अगर आपने अपने क़ानूनी वारिस को ही अपना नॉमिनी बनाया है, तो उसके लिए चीज़ें आसान हो जाती हैं.

– मान लीजिए कि आपने अपनी पत्नी को सब जगह नॉमिनी बनाया है और वह आपकी क़ानूनी वारिस भी है, पर आपकी मृत्यु के बाद सब कुछ उसी को नहीं मिलेगा, जो भी आपकी जमा-पूंजी होगी, वह आपकी पत्नी और बच्चों में बराबर बंटेगी, लेकिन अगर आपने अपनी वसीयत में यह लिख दिया है कि मेरी पत्नी को फलां-फलां हिस्सा मिलेगा, तो क़ानूनन बाध्य हो जाता है, जिस पर आपके बच्चे क्लेम नहीं कर सकते.

क्या है नॉमिनी का रोल व अधिकार? 

नॉमिनी का अहम् रोल उस व्यक्ति की मृत्यु के बाद ही शुरू होता है. इंश्योरेंस कंपनी से इंश्योरेंस के पैसे निकालना बहुत ही पेचीदा होता है. कई क़ानूनी दस्तावेज़ों के बावजूद कई बार पैसा लंबे समय तक अटका रहता है, ऐसे में नॉमिनी के रहने से यह प्रक्रिया आसान हो जाती है. नॉमिनी बनाए ही इसीलिए जाते हैं, ताकि आपके न रहने पर आपके अपनों को इन क़ानूनी झंझटों का सामना न करना पड़े.

किसे और कैसे करें अपॉइंट?

आप अपने परिवार के किसी सदस्य, दोस्त या किसी भरोसेमंद व्यक्ति को नॉमिनी अपॉइंट कर सकते हैं. जब भी आप प्रॉपर्टी, इंश्योरेंस, म्यूचुअल फंड्स, स्टॉक्स, बैंक डिपॉज़िट्स आदि में इन्वेस्ट करते हैं, तो आपको एप्लीकेशन के साथ-साथ एक और फॉर्म दिया जाता है, जहां आप अपने नॉमिनी के बारे में जानकारी देते हैं. कहीं-कहीं इसके लिए 1 या 2 गवाहों की ज़रूरत भी पड़ती है.

कहां-कहां बनाते हैं नॉमिनी?

जीवन बीमा: पॉलिसी होल्डर अपने माता/पिता, पति/पत्नी या फिर बच्चों को नॉमिनी बनाते हैं, तो  वो अपने आप बेनीफीशियल नॉमिनी बन जाते हैं. इसलिए जीवन बीमा में हमेशा अपने क़ानूनी वारिस को ही नॉमिनी बनाएं. इसमें आप एक से ज़्यादा नॉमिनी अपॉइंट कर सकते हैं.

बैंक अकाउंट: बैंक डिपॉज़िट अकाउंट या फिर लॉकर अकाउंट के लिए भी अपने किसी क़रीबी को नॉमिनी बना सकते हैं. यहां पर एक छूट है कि आप अपने किसी भरोसेमंद दोस्त को भी अपना नॉमिनी बना सकते हैं, ज़रूरी नहीं कि वो आपका क़ानूनी वारिस ही हो. लेकिन आप किसी एक व्यक्ति को ही नॉमिनी बना सकते हैं. यहां मल्टीपल नॉमिनी का ऑप्शन नहीं है. अगर जॉइंट अकाउंट हो, तो दूसरे होल्डर को अमाउंट मिलेगा और उसके ना रहने पर नॉमिनी को.

फिक्स्ड डिपॉज़िट: एफडी में इन्वेस्ट करते समय भी आपको किसी को नॉमिनी बनाना पड़ता है. यहां भी केवल किसी एक व्यक्ति को ही नॉमिनी बनाया जा सकता है.

डीमैट अकाउंट: शेयर्स और सिक्योरिटीज़ के इन्वेस्टमेंट डीमैट अकाउंट के ज़रिए किए जाते हैं. इसके लिए आप मल्टीपल नॉमिनी नियुक्त कर सकते हैं. यहां नॉमिनी स़िर्फ केयरटेकर नहीं, बल्कि मालिक होता है. उसे क़ानूनी वारिस को शेयर्स ट्रांसफर नहीं करने होते.

म्यूचुअल फंड: यहां आप तीन लोगों को अपना नॉमिनी बना सकते हैं. आप चाहें तो उनके लिए शेयर्स भी बांट सकते हैं. उदाहरण के लिए आप अपनी पत्नी और दो बच्चों को नॉमिनी बना सकते हैं. पत्नी को 50% और बच्चों को 25-25% शेयर्स दे सकते हैं.

प्रॉपर्टी: प्रॉपर्टी के मामले में वसीयत और सक्सेशन लॉ काम करते हैं, नॉमिनी की कोई ख़ास भूमिका नहीं होती. पर हां, अगर आप किसी कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी में रहते हैं, तो आपको नॉमिनी नियुक्त करना ज़रूरी होता है, क्योंकि सोसाइटी में आप किसी एक फ्लैट में रहते हैं, जो एक बड़ी यूनिट है. इसलिए यहां नॉमिनी बनाना ज़रूरी हो जाता है.

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नॉमिनी से जुड़े 5 ज़रूरी सवाल-जवाब

नॉमिनी अपॉइंट करते समय आपके ज़ेहन में भी कई सवाल आएंगे, इसलिए ज़रूरी है कि पहले उन सभी सवालों को सुलझा लें.

1. क्या नाबालिग नॉमिनी बन सकता है?

जी हां, 18 साल से कम उम्रवाले को भी नॉमिनी बनाया जा सकता है, लेकिन उसके साथ आपको कोई गार्जियन भी अपॉइंट करना पड़ेगा. उदाहरण के लिए आप अपने बच्चे को अपना नॉमिनी बनाकर पत्नी को गार्जियन बना सकते हैं. और चूंकि दोनों ही आपके क़ानूनी वारिस हैं, तो आपके जाने के बाद कोई क़ानूनी समस्या भी नहीं आएगी.

2. क्या एक से ज़्यादा नॉमिनी हो सकते हैं?

आप चाहें, तो एक से ज़्यादा लोगों को अपना नॉमिनी बना सकते हैं और अगर चाहें तो उनके लिए शेयर्स भी बांट सकते हैं.

3. क्या नॉमिनी बदल सकते हैं?

आप जब चाहें, जितनी बार चाहें नॉमिनी बदल सकते हैं. इसके लिए आपको स़िर्फ एक फॉर्म भरकर देना होगा और आपका नॉमिनी बदल जाएगा. यह पूरी तरह आपका अधिकार है.

4. नॉमिनी बनाने पर भी क्या वसीयत बनानी ज़रूरी है?

बिल्कुल. नॉमिनी सिर्फ़ आपकी संपत्ति का रखवाला है, लेकिन उसका मालिक वही होता है, जिसको आपने अपनी वसीयत में अधिकार दिया है. मान लीजिए कि आपने अपनी जीवन बीमा में मां को नॉमिनी बनाया, तो आपके न रहने पर मां को बीमा की सारी रक़म मिलेगी, पर वो उन्हें आपकी पत्नी और बच्चों के साथ बांटनी होगी और अगर आपने अपनी वसीयत में वो रक़म मां के नाम लिखी है, तो उस पर स़िर्फ मां का अधिकार होगा, इसलिए नॉमिनी के साथ-साथ वसीयत बनानी भी बहुत ज़रूरी है.

5. वसीयत न होने पर नॉमिनी संपत्ति किसे देगा?

ऐसे भी कई मामले सामने आते हैं, जहां नॉमिनी तो बना दिया जाता है, पर व्यक्ति की कोई वसीयत नहीं होती, ऐसे में उस संपत्ति का बंटवारा इंडियन सक्सेशन लॉ, हिंदू लॉ और मोहम्मडन लॉ के अनुसार किया जाता है.

जानें अपने रेलवे इंश्योरेंस नॉमिनी को भी 

– हमारे देश में एक बहुत बड़ा तबका रेलवे से सफ़र करता है, पर यह बात बहुत कम लोगों को पता है कि रेलवे किसी भी तरह के हादसे के व़क्त लोगों को इंश्योरेंस देता है.

– आईआरसीटीसी की वेबसाइट से जब आप टिकट बुक करते हैं, तो अंत में इंश्योरेंस का एक कॉलम होता है, जिसे बहुत से लोग अनदेखा कर देते हैं. इंश्योरेंस पर टिक करने से आपके खाते से महज़ 95 पैसे इंश्योरेंस में जाते हैं, पर आपको 10 लाख तक का इंश्योरेंस कवर मिलता है.

– यहां भी आपको नॉमिनी सिलेक्ट करना ज़रूरी होता है.

– आईआरसीटीसी की तरफ़ से आपको नॉमिनेशन के लिए मैसेज भी आता है, जिसके लिंक पर जाकर आपको अपना नॉमिनी नियुक्त करना होता है.

– हालांकि यह सुविधा 5 साल से छोटे बच्चों और विदेशी पर्यटकों के लिए नहीं है.

– अगर हादसे में व्यक्ति की मृत्यु हो जाए, तो 10 लाख रुपए, परमानेंट या पार्शियल डिसेबिलिटी के लिए 7.5 लाख और हॉस्पिटलाइज़ेशन के लिए 2 लाख का कवर मिलता है.

– सबसे ज़रूरी बात नॉमिनी को हादसे के 4 महीने के भीतर इंश्योरेंस क्लेम करना होता है.

– अनीता सिंह

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अमिताभ बच्चन ने एक बार फिर दिल जीत लिया, जब उन्होंने ने अपनी वसीयत को लेकर एक बड़ा फ़ैसला सोशल मीडिया पर शेयर किया. बिग बी ने टि्वटर पर अपनी एक पिक्चर शेयर की है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि उनके जाने के बाद उनके पास जो भी प्रॉपर्टी है, वो उनके बेटे अभिषेक और बेटी श्वेता नंदा में बराबर बटेगी. उन्होंने ने जेंडर इक्वैलिटी की बात करते हुए लिखा है, ”वी आर इक्वल.” अमिताभ बच्चन का ये कदम वाक़ई सराहनीय है. ये उन लोगों के लिए एक सीख है, जो बेटे और बेटी में फ़र्क़ समझते हैं.

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दिन-ब-दिन ब़ढ़ती महंगाई, बच्चों की हायर स्टडीज़ और लाइफस्टाइल संबंधी बीमारियों के चलते आम आदमी के लिए प्रॉपर्टी में निवेश करना थोड़ा मुश्किल होता है. वैसे भी प्रॉपर्टी में निवेश करना बहुत जोख़िम का काम होता है, लेकिन अपने और अपने परिवार के सुरक्षित भविष्य के लिए यह जोख़िम उठाया जा सकता है. प्रॉपर्टी में निवेश करके आप भविष्य के वित्तीय लक्ष्यों को आसानी से पूरा कर सकते हैं.

योजना बनाएं:
अगर आप प्रॉपर्टी में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो सबसे पहले योजना बनाएं कि प्रॉपर्टी ख़रीदने में आपको कितनी अनुमानित राशि ख़र्च करनी है? प्रॉपर्टी कहां लेनी है? किस बैंक से लोन लेना है? आदि. इन बातों को ध्यान में रखकर योजना बनाएंगे, तो प्रॉपर्टी में निवेश करना आसान होगा. योजना के अनुसार प्रॉपर्टी ख़रीदने पर ख़र्चे बजट के अंदर होंगे और आप अतिरिक्त ख़र्चों के बोझ से भी बचेंगे.

अपना बजट तय करें:
प्रॉपर्टी ख़रीदने की योजना बनाने के बाद दूसरा चरण आता है बजट का. बजट बनाते समय प्रॉपर्टी की अनुमानित क़ीमत, स्टैंप ड्यूटी, ब्रोकर की फीस, मॉर्गेज़ इंश्योरेंस (अगर आवश्यक हो तो), मेंटेनेंस चार्जेस आदि ख़र्चों का ध्यान रखें. इसके अलावा कुछ अन्य ख़र्चे, जैसे- बैंक से कितना लोन मिल सकता है, फिक्स्ड डिपॉज़िट्स आदि से कितना मैनेज हो सकता है. यदि रेनोवेशन, इंटीरियर और होम डेकोर आदि कराना है, तो कितना ख़र्च आएगा? इन सब बातों को ध्यान में रखकर अपना बजट बनाएं.

लोकेशन (प्रॉमिसिंग एरिया) का चुनाव करें:
यह भी एक बहुत महत्वपूर्ण निर्णय है कि आपको किस एरिया में प्रॉपर्टी ख़रीदनी है? वहां पर किस-किस तरह की सुविधाएं (बच्चों के लिए पार्क, स्कूल, अस्पताल, मॉल आदि) उपलब्ध हैं? वहां पर भविष्य में विकास की कौन-कौन-सी संभावनाएं हैं? भविष्य में अगर किराए पर देना हो या प्रॉपर्टी बेचनी पड़े, तो मुना़फे की कितनी संभावना है. यदि इन सब बातों को ध्यान में रखकर प्रॉमिसिंग एरिया का चुनाव करेंगे, तो प्रॉपर्टी में निवेश करना आसान होगा.

अनुभवी व योग्य प्रॉपर्टी मैनेजर/रियलटर्स का चुनाव:
प्रॉपर्टी ख़रीदने के लिए स्थानीय एजेंट की बजाय विश्‍वसनीय, कुशल व योग्य प्रॉपर्टी मैनेजर या रियलटर्स (रियल इस्टेट एजेंट, जिनका संबंध नेशनल एसोसिएशन ऑफ रियलटर्स से होता है और प्रॉपर्टी की ख़रीद-फ़रोख़्त करते समय वे एसोसिएशन से जुड़े नियमों को फॉलो करते हैं) का चुनाव करें. ये प्रॉपर्टी मैनेजर आपको प्रॉपर्टी संबंधी सही अधिकार और ज़िम्मेदारियों के बारे में बताएंगे, ताकि डील करते समय आपके साथ किसी तरह की कोई धोखाधड़ी न हो. ये मैनेजर्स आपके बजट और रिक्वायरमेंट के अनुसार प्रॉपर्टी ख़रीदने में आपकी मदद करेेंगे.

मार्केट के उतार-चढ़ाव को जानें:
लोकेशन का चुनाव करने के बाद मार्केट के उतार-चढ़ावों का समझदारी के साथ अध्ययन करें. उस एरिया के प्रॉपर्टी मैनेजर और लोकल एजेंट से मिलकर सारी जानकारियां हासिल करें. लेकिन 1-2 व्यक्तियों से ही नहीं, बल्कि रियल इस्टेट/प्रॉपर्टी के बिज़नेस से जुड़े अन्य लोगों से मिलकर उस प्रॉपर्टी के बारे में कुछ जानकारियां हासिल करें. इंटरनेट पर भी आप उस एरिया/लोकेशन की प्रॉपर्टी की क़ीमत, औसत किराया और अन्य सुविधाओं के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. इसके अतिरिक्त नेट पर उनके फ्री कॉन्टैक्ट नंबर भी दिए रहते हैं, जिन पर डायल करके आप उनसे मार्केट और प्रॉपर्टी के बारे में पूछ सकते हैं.

अतिरिक्त ख़र्चों के बारे में जानकारी हासिल करें:
डील फाइनल करने से पहले प्रॉपर्टी से जुड़े अन्य ख़र्चों के बारे में सारी जानकारियां प्राप्त कर लें. ये अन्य ख़र्च हैं- लैंड टैक्स, प्रॉपर्टी मैनेजमेंट टैक्स, काउंसिल रेट्स, डेवलपमेंट टैक्स और इंश्योरेंस आदि. डील फाइनल होने के बाद इन ख़र्चों का भुगतान आपको ही करना पड़ेगा. इसलिए प्रॉपर्टी मैनेजर/ब्रोकर से इन अतिरिक्त ख़र्चों के बारे में सही जानकारी ले लें.

जांच-पड़ताल करें:
यदि आप पुरानी प्रॉपर्टी में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो ख़रीदने से पहले प्रॉपर्टी डीलर या मैनेजर से सारी बातें पूछ लें यानी प्रॉपर्टी संबंधी दस्तावेज़ों के बारे में अच्छी तरह जांच-पड़ताल कर लें. हो सकता है प्रॉपर्टी की ओनरशिप (स्वामित्व) लेने से पहले आपको उसे रिपेयर या रिनोवेट कराना पड़े. इसलिए पुरानी प्रॉपर्टी को ख़रीदने से पहले किसी प्रोफेशनल बिल्डिंग इंस्पेक्टर को हायर करें और उससे बिल्डिंग संबंधी पूरी जानकारी हासिल कर लें. तभी प्रॉपर्टी के पर्चेेज़ कॉन्ट्रैक्ट पर साइन करें. ऐसा करके आप प्रॉपर्टी पर होनेवाले अनावश्यक ख़र्चे से बच सकते हैं.

अच्छे बैंक या मॉर्गेज़ ब्रोकर की तलाश करें:
यदि आपको प्रॉपर्टी में निवेश करने के लिए किसी फाइनेंसर की ज़रूरत है, तो उसके लिए अपने एरिया के प्रतिष्ठित बैंक या मॉर्गेज़ ब्रोकर की तलाश करें, जो लोन दिलाने में आपकी मदद करें. रियलटर्स भी एक बेस्ट ऑप्शन हैं, जो लोन दिलवाने में आपकी मदद करते हैं. इसके अलावा आप किसी अन्य इन्वेस्टर्स या बैंकों से भी फाइनेंशियल मदद (लोन) ले सकते हैं. आजकल नेशनलाइज़्ड बैंक ही नहीं, प्राइवेट बैंक भी होम लोन की सुविधा अपने कस्टमर्स को उपलब्ध कराते हैं, वो भी आकर्षक ऑफर्स के साथ.

होमलोन संबंधी जानकारियां:
प्रॉपर्टी के लिए लोन लेने से पहले विभिन्न बैंकों से ब्याज दर, समयावधि, टैक्स बेनीफिट्स आदि के बारे में सारी जानकारियां हासिल कर लें. आजकल बैंक अपने ग्राहकों को लुभाने के लिए होमलोन पर सस्ती ब्याज दर पर ङ्गस्पेशल स्कीमम जैसे ऑफर देते हैं, जिससे उन्हें टैक्स में भी फ़ायदा मिले.
डीलर से ही नहीं, ऑक्शन साइट्स में जाकर देखें: अब वह समय बीत गया, जब प्रॉपर्टी ख़रीदने के लिए ख़रीददार को प्रॉपर्टी डीलर/एजेंट के कई चक्कर लगाने पड़ते थे. टेक्नोलॉजी के बढ़ते प्रभाव को प्रॉपर्टी के बिज़नेस में भी देखा जा सकता है. ऑनलाइन वेबसाइट्स के ज़रिए भी आप अपनी मनपसंद प्रॉपर्टी ख़रीद सकते हैं. आजकल कई ऑनलाइन रियल इस्टेट ऑक्शन साइट्स हैं, जो प्रॉपर्टी की ख़रीद-फरोख़्त करती हैं. इन साइट्स पर लॉग इन करके आप अपने मनपसंद एरिया/लोकेशन में जाकर सारी आवश्यक जानकारी हासिल कर सकते हैं.

प्रॉपर्टी में निवेश करने से पहले
– निवेश करने के लिए ऐसी प्रॉपर्टी का चुनाव करें, जिसे भविष्य में यदि बेचना पड़े, तो अच्छा रिटर्न मिलने की पूरी संभावना हो.

– यदि आप दूर-दराज़ के इलाकों में प्रॉपर्टी ख़रीद रहे हैं, तो फ्रॉड से बचने के लिए सारे काग़ज़ी दस्तावेज़ों को अच्छी तरह से जांच-परख लें.

– याद रखें, प्रॉपर्टी के बिज़नेस में क़ीमतें मार्केट के उतार-चढ़ाव के अनुसार बढ़ती और घटती हैं. इसलिए प्रोफेशनल लोगों से सलाह लिए बिना न तो प्रॉपर्टी में निवेश करें और न ही बेचें.

– प्रॉपर्टी केवल ड्रीम होम ही नहीं होता, बल्कि भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए किया गया निवेश होता है, प्रॉपर्टी ख़रीदते समय इमोशनल होने की बजाय समझदारी से काम लें.