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गणेश चतुर्थी 2017: शुभ मुहूर्त पर पूजा-आराधना से पूरी करें मनोकामना (Ganesh Chaturthi 2017: Muhurat-Puja-Celebration)

गणेश चतुर्थी 2017: शुभ मुहूर्त पर पूजा-आराधना से पूरी करें मनोकामना

किसी भी शुभ कार्य का शुभारंभ हम गणेश पूजन से करते हैं. गणेश जी मंगलकारी और विघ्नहर्ता हैं. ऐसा कहा जाता है कि जिस पर गणेश जी की कृपा हो जाए, उसके जीवन में आनेवाली सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं. गणेश चतुर्थी के ख़ास मौके पर गणेश जी की पूजा-आराधना से कैसे पूरी करें मनोकामना? बता रहे हैं पंडित राजेंद्र जी.

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गणेश चतुर्थी के दौरान बचें इन बातों से:
* गणेश जी को कभी भी तुलसी अर्पण न करें यानी तुलसी से गणेश जी की पूजा कभी न करें.
* इसी तरह गणेश जी को स़फेद चंदन भी नहीं चढ़ाना चाहिए.
* भाद्रपद की चतुर्थी के चंद्रमा का दर्शन भी निषेध माना गया है. ऐसा कहा जाता है कि भगवान कृष्ण ने इस दिन चंद्रमा के दर्शन किए थे और उन पर चोरी का कलंक लगा था. इसीलिए भाद्रपद की चतुर्थी के चंद्रमा का दर्शन नहीं करना चाहिए.

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नीचे दिए गए वीडियो में गणेश जी को प्रसन्न करने के विभिन्न उपाय बताए गए हैं. आप भी ये उपाय करके अपनी मनोकामना पूरी कर सकते हैं:
* धनप्राप्ति के उपाय
* दरिद्रता दूर करने के उपाय
* पढ़ाई में अव्वल रहने के उपाय
* बुरी नज़र से बचने के उपाय
* विवाह में आ रही अड़चनें दूर करने के उपाय
* नया घर ख़रीदने के उपाय
* मनचाही नौकरी पाने के उपाय
* साढ़े साती या शनि महादशा से बचने के उपाय

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साथ ही इस वीडियो में गणेश जी को विभिन्न पत्तों द्वारा प्रसन्न करने के उपाय भी बताए गए हैं. ऐसा करके आप हार्ट प्रॉब्लम्स, कार्य में आ रही बाधा, रोग आदि से मुक्ति पा सकते हैं. साथ ही आर्थिक लाभ, मान-सम्मान, व्यावसायिक लाभ, अच्छा स्वास्थ्य आदि पा सकते हैं.

 

 

धार्मिक कार्यों में शंख बजाने की परंपरा क्यों है? (Did You Know Why We Blow Shankh Before Puja?)

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जब भी हमारे घर में पूजा-पाठ, हवन, उत्सव या शादी-विवाह जैसे शुभ कार्य होते हैं, तो घर में शंख ज़रूर बजाया जाता है. क्या आप जानते हैं ऐसा क्यों किया जाता है? धार्मिक कार्यों में शंख बजाने की परंपरा क्यों है और इसका वैज्ञानिक महत्व क्या है? चलिए, हम आपको बताते हैं.

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धार्मिक मान्यता
सभी धर्मों में शंखनाद को पवित्र माना गया है इसीलिए पूजा-पाठ, उत्सव, हवन, विवाह आदि शुभ कार्यों में शंख बजाना शुभ व अनिवार्य माना जाता है. मंदिरों में भी सुबह-शाम आरती के समय शंख बजाया जाता है.

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वैज्ञानिक महत्व
वैज्ञानिक मानते हैं कि शंख फूंकने से उसकी ध्वनि जहां तक जाती है, वहां तक के अनेक बीमारियों के कीटाणु ध्वनि-स्पंदन से मूर्छित हो जाते हैं या नष्ट हो जाते हैं. यदि रोज़ शंख बजाया जाए, तो वातावरण कीटाणुओं से मुक्त हो सकता है. बर्लिन विश्‍वविद्यालय ने शंखध्वनि पर अनुसंधान कर यह पाया कि इसकी तरंगें बैक्टीरिया तथा अन्य रोगाणुओं को नष्ट करने के लिए उत्तम व सस्ती औषधि हैं. इसके अलावा शंख बजाने से फेफड़े मज़बूत होते हैं, जिससे श्‍वास संबंधी रोगों से बचाव होता है.

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शंख में जल भरकर पूजा स्थान में रखा जाता है और पूजा-पाठ, अनुष्ठान होने के बाद श्रद्धालुओं पर उस जल को छिड़का जाता है. इस जल को छिड़कने के पीछे मान्यता यह है कि इसमें कीटाणुनाशक शक्ति होती है, क्योंकि शंख में जो गंधक, फास्फोरस और कैल्शियम की मात्रा होती है, उसके अंश भी जल में आ जाते हैं. इसलिए शंख के जल को छिड़कने और पीने से स्वास्थ्य सुधरता है. यही वजह है कि बंगाल में महिलाएं शंख की चूड़ियां पहनती हैं.

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शुभ फल प्राप्ति के लिए कैसे मनाएं दिवाली? (How to Celebrate Diwali for Good Fortune?)

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यदि आप भी दीयों की रौनक से अपने आंगन में सुख-समृद्धि की बरसात चाहते हैं, तो दीपावली के इस पर्व के सही अर्थ को समझकर, पूरी आस्था से विधिवत् पूजा-अर्चना करें.


कैसे करें लक्ष्मी पूजन?

* हमेशा मुख्य पूजावाले दीये में घी और बाकी दीयों में सरसों का तेल इस्तेमाल करें.

* दिवाली की पूजा हमेशा उत्तर-पूर्व (नॉर्थ-ईस्ट) दिशा में करें.

* पूजा करते समय पूजा करनेवाले का चेहरा उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए.

* पूजा के समय मूर्तियों का क्रम बाएं से दाएं इस प्रकार होना चाहिए- गणेशजी, लक्ष्मीजी, विष्णुजी, मां सरस्वती एवं काली माता. उसके बाद  लक्ष्मणजी, श्रीरामजी एवं मां सीता की मूर्तियां रखें.

* दिवाली की पूरी रात दक्षिण-पूर्व (साउथ-ईस्ट) कोने में घी से भरा हुआ दीया अलग से प्रज्ज्वलित करके रखें.

* दीयों को हमेशा चार के समूह में रखें. ये दीये लक्ष्मीजी, गणेशजी, कुबेर देवता और इंद्र देवता के प्रतीक हैं.

* लाल रंग का अधिक इस्तेमाल करें. इस रंग के दीये, मोमबत्तियां, लाइट्स, फूल व बेडशीट्स इस्तेमाल किए जा सकते हैं.

* दिवाली पूजा की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से करें. हिंदू धर्म में इन्हें विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है और कोई भी पूजा करने से पहले  गणेशजी की पूजा का विधान भी है.

* यदि आप बहीखाता (अकाउंट बुक्स) लिखते हैं, तो उनकी भी पूजा करें. इनको पश्‍चिम की ओर लक्ष्मीजी की मूर्ति के सामने रखें.

* पूजा में कमल का फूल अवश्य शामिल करें. यह लक्ष्मीजी का पसंदीदा फूल है.

* दिवाली में सुबह जल्दी उठकर अभ्यंग स्नान (शरीर पर तेल और उबटन लगाकर) करें.

* इसके बाद परिवार के बड़े-बुज़ुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद लें. ङ्गओम ह्रीं क्लीं श्रीं महालक्ष्मी: नम:फ मंत्र का जाप करें.

क्या ना करें?

* अपने मित्र-रिश्तेदारों को तोह़़फे में कटलरी, पटाखे, फुलझड़ियां या लेदर के आइटम्स ना दें, पर यदि इनमें से कुछ देना ही चाहते हैं, तो साथ में  मिठाई ज़रूर दें.

* दिवाली में जुआ ना खेलें.

* अल्कोहल और नॉन वेज से परहेज़ करें.

* दिवाली की रात पूजा के स्थान का ध्यान रखें यानी दीये में घी डालते रहें, ताकि दीया रातभर प्रज्ज्वलित रहे.

* दाहिनी सूंडवाले गणेशजी पूजा में ना रखें और केवल बैठे गणेशजी की ही मूर्ति रखें.

* लक्ष्मीजी की आरती तेज़ आवाज़ में ज़ोर-ज़ोर से तालियां बजाकर गाने की बजाय, मधुर आवाज़ में घंटी बजाकर गाएं. कहा जाता है कि लक्ष्मीजी  तेज़ आवाज़ और शोरगुल पसंद नहीं करतीं.

* लक्ष्मीजी की अकेली मूर्ति या फोटो की पूजा ना करें, साथ में विष्णुजी की मूर्ति या फोटो अवश्य हो.

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पूजा के लिए आवश्यक सामग्री

गणेशजी व लक्ष्मीजी की मूर्तियां व नए वस्त्र, सोने व चांदी के सिक्के, नए करेंसी नोट्स, चौकियां, कैश रजिस्टर/अकाउंट बुक्स, सिक्कों का बैग, पेन, काली स्याही, 3 थालियां, धूप, अगरबत्ती, शुद्ध घी, दही, शहद, गंगाजल, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद व शक्कर का मिश्रण), हल्दी पाउडर, रोली, इत्र, कलश, 2 मीटर स़फेद व लाल कपड़ा, गमछा, कपूर, नारियल (पानीवाला), ड्रायफ्रूट्स, कमल का फूल, अन्य फूल, दुर्वा, तांबुल पान, पुगीफल सुपारी, खील, बताशे, मिठाइयां, खांड के खिलौने, साड़ियां, आम के पत्ते, लौंग, हरी इलायची, कुमकुम, सिंदूर, केसर, मुख्यद्वार के लिए बन्दनवार, शंख, घंटी, सोने-चांदी की ज्वेलरी (यदि उपलब्ध हो), अभिषेक पात्र, अभिषेक किए गए पानी के लिए स्टेनलेस स्टील बाउल, पांच तरह के फल (आम, केला, सेब, संतरा, अंगूर, नाशपाती, पीच वगैरह), जानवी जोड़, अष्टगंध, चंदन, अक्षत (कुमकुम लगाए हुए चावल), फूल मालाएं, रुई, मिट्टी के छोटे-बड़े दीये, थालियां (पूजा का सामान रखने के लिए), तिल/सरसों का तेल और माचिस.

किस राशि वाले क्या दान करें?

दिवाली उमंग-उत्साह के साथ अपने-पराये सभी के साथ ख़ुशियां मनाने का त्योहार है. शास्त्र कहते हैं कि ग़रीब और दीन-दुखियों की मदद करने से ईश्‍वर प्रसन्न होते हैं. यदि उन्हेंं खाने-पीने की चीज़ें बांटी जाएं, तो ईश्‍वर प्रसन्न होने के साथ-साथ आशीर्वाद भी देते हैं. इसलिए यहां पर हम यह बताते हैं कि राशि के अनुसार किस वस्तु का दान किया जाए, ताकि आप पर लक्ष्मीजी की कृपा सदैव बनी रहे.

मेष- चावल व दाल
वृषभ- सरसों का तेल और थोड़े-से तिल
मिथुन- 800 ग्राम गुड़ व पीली चना-दाल
कर्क- घी और थोड़ा-सा बेसन
सिंह- शक्कर व थोड़ा-सा बेसन
कन्या- आटे के साथ चावल
तुला- 11 बेसन के लड्डू
वृश्‍चिक- अलग-अलग तरह के पांच फल
धनु- जलेबी और तिल के लड्डू
मकर- पांच तरह के अनाज
कुंभ- ड्रायफ्रूट्स, दूध और शक्कर
मीन- मिठाई और फल